इंदौर में गुंडागर्दी: पैसे मांगने पर इनकार किया तो चाकू से हमला, मंडी में मचा हड़कंप

नई दिल्ली। इंदौर की चोइथराम मंडी में बुधवार देर रात उस समय सनसनी फैल गई जब तीन से अधिक बदमाशों ने मंडी में काम करने वाले चार कर्मचारियों पर चाकू से हमला कर दिया। अचानक हुए इस हमले से पूरे क्षेत्र में अफरा-तफरी मच गई और लोग अपनी जान बचाकर इधर-उधर भागते नजर आए। घटना में चार लोग घायल हुए हैं, जिनमें दो की हालत गंभीर बताई जा रही है। सभी घायलों को तत्काल अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उनका इलाज जारी है। पुलिस के अनुसार घायल कर्मचारियों की पहचान अरुण (राजा रानी नगर निवासी), सुनील, रंजीत और सूरज के रूप में हुई है। ये सभी चोइथराम मंडी की एक दुकान पर काम करते हैं और रोज की तरह काम खत्म कर घर लौट रहे थे। इसी दौरान मंडी गेट के पास बने सार्वजनिक शौचालय के नजदीक अंधेरे में बैठे बदमाशों ने उन्हें रोक लिया। बताया जा रहा है कि बदमाशों ने कर्मचारियों से शराब पीने के लिए पैसे मांगे। जब सुनील ने पैसे देने से इनकार किया तो विवाद बढ़ गया और देखते ही देखते बदमाशों ने चाकू निकालकर हमला कर दिया। सुनील को बचाने आए अन्य तीन साथियों पर भी आरोपियों ने ताबड़तोड़ वार किए, जिससे चारों घायल हो गए। घटना के बाद मंडी परिसर में भगदड़ जैसी स्थिति बन गई और स्थानीय लोगों ने तुरंत पुलिस को सूचना दी। राजेंद्र नगर थाना पुलिस मौके पर पहुंची और घायलों को अस्पताल भिजवाया। पुलिस ने प्रारंभिक जांच के आधार पर बताया है कि हमलावर अहिरखेड़ी इलाके के रहने वाले हो सकते हैं और इनका मंडी क्षेत्र में पहले से आपराधिक रिकॉर्ड भी रहा है। सीसीटीवी फुटेज में कुछ संदिग्ध युवक दिखाई दिए हैं, जिनके आधार पर पुलिस ने उनकी पहचान करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। पुलिस टीम लगातार दबिश देकर आरोपियों की तलाश कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि जल्द ही आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया जाएगा। इधर, मंडी क्षेत्र में एक अन्य विवाद भी सामने आया, जहां चोइथराम मंडी चौराहे पर अवैध गुमटी हटाने को लेकर देर रात झगड़ा हो गया। इस दौरान पथराव और मारपीट की घटनाएं भी हुईं। हालांकि पुलिस ने किसी बड़े संगठित संघर्ष या फायरिंग की बात से इनकार किया है। शराब दुकान संचालक और स्थानीय लोगों के बीच अवैध गुमटी हटाने को लेकर लंबे समय से तनाव की स्थिति बनी हुई है, जो समय-समय पर विवाद का रूप ले लेती है। पुलिस फिलहाल दोनों घटनाओं की अलग-अलग जांच कर रही है और स्थिति पर नजर बनाए हुए है।
घर के बाहर खड़े होने से शुरू हुआ झगड़ा, पूर्व सांसद के स्टाफ तक पहुंचा मामला, क्रॉस FIR दर्ज

इंदौर। आईपीएल 2026 में राजस्थान रॉयल्स के युवा स्टार वैभव सूर्यवंशी का बल्ला ऐसा गरजा है कि बड़े-बड़े दिग्गज भी पीछे छूट गए हैं। महज 15 साल की उम्र में वैभव ने ऑरेंज कैप की रेस को पूरी तरह अपने कब्जे में ले लिया है। सनराइजर्स हैदराबाद के खिलाफ एलिमिनेटर मुकाबले में उन्होंने 97 रनों की विस्फोटक पारी खेलकर न सिर्फ अपनी टीम को जीत दिलाई बल्कि ऑरेंज कैप की दौड़ में भी खुद को सबसे आगे पहुंचा दिया। वैभव सूर्यवंशी अब आईपीएल 2026 में सबसे ज्यादा रन बनाने वाले बल्लेबाज बन चुके हैं। उन्होंने 15 मैचों में 45.33 की शानदार औसत और 242.86 के तूफानी स्ट्राइक रेट से 680 रन बनाए हैं। इस सीजन उनके बल्ले से 55 चौके और 65 गगनचुंबी छक्के निकले हैं। यही नहीं वह आईपीएल इतिहास के पहले ऐसे बल्लेबाज भी बन गए हैं जिन्होंने एक सीजन में 200 से ज्यादा स्ट्राइक रेट के साथ 600 रन का आंकड़ा पार किया है। सनराइजर्स हैदराबाद के खिलाफ उनकी 97 रनों की पारी ने पूरे क्रिकेट जगत को हैरान कर दिया। इस पारी में उन्होंने सिर्फ चौकों से नहीं बल्कि लंबे-लंबे छक्कों से गेंदबाजों की जमकर धुनाई की। वैभव ने 12 छक्के और 5 चौके लगाकर दिखा दिया कि वह सिर्फ भविष्य के स्टार नहीं बल्कि मौजूदा समय के सबसे खतरनाक टी20 बल्लेबाजों में शामिल हो चुके हैं। हालांकि ऑरेंज कैप की लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है। वैभव सूर्यवंशी को सबसे बड़ा खतरा गुजरात टाइटंस के ओपनर साई सुदर्शन से है। सुदर्शन इस समय 652 रनों के साथ दूसरे नंबर पर मौजूद हैं और दोनों बल्लेबाजों के बीच सिर्फ 28 रनों का अंतर है। खास बात यह है कि अब राजस्थान रॉयल्स और गुजरात टाइटंस के बीच क्वालीफायर-2 मुकाबला खेला जाना है। ऐसे में इस मैच में तय हो सकता है कि ऑरेंज कैप आखिर किस खिलाड़ी के सिर सजने वाली है। साई सुदर्शन के अलावा गुजरात टाइटंस के कप्तान शुभमन गिल भी इस रेस में बने हुए हैं। गिल के नाम इस सीजन 618 रन हैं और अगर वह क्वालीफायर-2 में बड़ी पारी खेलते हैं तो ऑरेंज कैप की तस्वीर पूरी तरह बदल सकती है। अगर गुजरात फाइनल में पहुंचती है तो गिल और सुदर्शन दोनों को एक अतिरिक्त मैच खेलने का मौका मिलेगा, जिससे उनकी दावेदारी और मजबूत हो जाएगी। दूसरी तरफ विराट कोहली अब इस रेस में काफी पीछे दिखाई दे रहे हैं। रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु के स्टार बल्लेबाज ने इस सीजन 15 मैचों में 600 रन बनाए हैं और वह ऑरेंज कैप की सूची में छठे स्थान पर हैं। आरसीबी पहले ही क्वालीफायर-1 जीतकर फाइनल में पहुंच चुकी है, ऐसे में विराट के पास अपने रन बढ़ाने का सिर्फ एक ही मौका बचा है। यही वजह है कि अब ऑरेंज कैप की असली जंग वैभव सूर्यवंशी, साई सुदर्शन और शुभमन गिल के बीच सिमटती नजर आ रही है। मगर जिस फॉर्म में वैभव बल्लेबाजी कर रहे हैं उसे देखकर यही लग रहा है कि ऑरेंज कैप उनसे छीनना अब किसी भी बल्लेबाज के लिए आसान नहीं होगा।
ऑटो की किश्तें नहीं भर पाया तो ड्राइवर ने लगाई फांसी, इंदौर में दो सुसाइड केस से हड़कंप

नई दिल्ली। इंदौर शहर में बुधवार रात दो अलग-अलग स्थानों पर आत्महत्या के दर्दनाक मामले सामने आए, जिससे इलाके में सनसनी फैल गई। दोनों ही घटनाओं में शुरुआती कारण आर्थिक तंगी और मानसिक तनाव बताए जा रहे हैं। पुलिस ने दोनों मामलों में मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी है। पहली घटना विजयनगर थाना क्षेत्र की है, जहां अंबिका नगर निवासी 28 वर्षीय विशाल वर्मा ने अपने घर में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। परिजन तुरंत उसे अस्पताल लेकर पहुंचे, लेकिन डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। परिवार के अनुसार विशाल ऑटो रिक्शा चलाता था और उसने फाइनेंस से वाहन लिया था। पिछले तीन वर्षों से वह नियमित रूप से किश्तें चुका रहा था, लेकिन पिछले दो महीनों से आर्थिक परेशानी के कारण वह भुगतान नहीं कर पा रहा था। इसी वजह से वह लगातार मानसिक तनाव में था। परिजनों ने बताया कि फाइनेंस कंपनी की ओर से लगातार किश्त जमा करने के लिए कॉल आ रहे थे, जिससे उसकी चिंता और बढ़ गई थी। परिवार ने यह भी बताया कि विशाल घर का इकलौता कमाने वाला सदस्य था। उसके पीछे माता-पिता, पत्नी और एक छोटी बेटी है, जिससे परिवार पर गहरा संकट खड़ा हो गया है। पुलिस ने शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेजकर जांच शुरू कर दी है। दूसरी घटना छोटी ग्वालटोली क्षेत्र की है, जहां बजरंग होटल के कमरे में 25 वर्षीय पवन ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। पवन मूल रूप से ग्वालियर का रहने वाला था और अपने दोस्त विपिन के साथ काम के सिलसिले में इंदौर आया था। जानकारी के अनुसार दोनों युवक बड़वानी में एक शराब दुकान पर काम करते थे। आरोप है कि दुकान के मैनेजर द्वारा एक महीने का भुगतान नहीं किया गया और दोनों के साथ मारपीट कर उन्हें वहां से भगा दिया गया था। इसके बाद से ही पवन मानसिक रूप से परेशान था। घटना से पहले पवन ने अपने चचेरे भाई को फोन कर आत्महत्या करने की बात भी कही थी। सूचना मिलने पर उसका दोस्त विपिन होटल पहुंचा, लेकिन कमरा अंदर से बंद था। होटल कर्मचारियों की मदद से दरवाजा खोला गया तो पवन फंदे पर लटका मिला। उसे तुरंत एमवाय अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। पुलिस ने दोनों मामलों में मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी है और आत्महत्या के पीछे की परिस्थितियों की विस्तृत जांच की जा रही है। शुरुआती तौर पर आर्थिक दबाव, नौकरी की अस्थिरता और मानसिक तनाव को मुख्य कारण माना जा रहा है।
धार्मिक मंच से सामाजिक संदेश, बारिश का पानी जमीन में उतारने पर जोर

नई दिल्ली। देश के सबसे स्वच्छ शहर इंदौर से बकरीद के मौके पर सांप्रदायिक सौहार्द और गंगा-जमुनी तहजीब की अनोखी तस्वीर सामने आई। सदर बाजार स्थित ईदगाह में नमाज से पहले शहर काजी डॉ. इशरत अली ने समाज को एकता, भाईचारे और जिम्मेदारी का संदेश दिया। उन्होंने खुले मंच से गाय को राष्ट्रीय धरोहर घोषित करने की मांग उठाई, जिसका वहां मौजूद हजारों नमाजियों ने हाथ उठाकर समर्थन किया। इसके बाद शांतिपूर्ण माहौल में ईद की नमाज अदा की गई। शहर काजी ने अपने संबोधन में कहा कि गाय को देश की दूसरी कौम के लोग बेहद सम्मान की नजर से देखते हैं। मुसलमानों पर अक्सर गोवंश को लेकर आरोप लगाए जाते हैं। ऐसे में अब समय आ गया है कि सरकार गाय को राष्ट्रीय धरोहर घोषित करे, ताकि उसके संरक्षण को और मजबूती मिल सके तथा उसके वध पर पूरी तरह रोक लगाई जा सके। उन्होंने कहा कि समाज में आपसी सम्मान और धार्मिक भावनाओं की कद्र करना ही असली इंसानियत है। काजी की इस अपील पर ईदगाह में मौजूद नमाजियों ने हाथ उठाकर समर्थन जताया। इस दौरान माहौल भाईचारे और सौहार्द के संदेश से भरा नजर आया। शहर काजी ने पर्यावरण और जल संरक्षण को लेकर भी लोगों से अपील की। उन्होंने कहा कि बारिश के पानी को जमीन में उतारने के लिए हर व्यक्ति को आगे आना होगा। सिर्फ सरकार या प्रशासन के भरोसे रहने से समस्या हल नहीं होगी। उन्होंने लोगों से अपने घरों और मोहल्लों में जल संरक्षण के उपाय अपनाने की अपील की। अपने संबोधन में उन्होंने नशे के बढ़ते कारोबार पर भी चिंता जताई। काजी इशरत अली ने साफ शब्दों में कहा कि समाज के कुछ लोग खुद नशे के कारोबार में शामिल हैं और यह बेहद शर्मनाक है। उन्होंने कहा कि नशा समाज को खोखला कर रहा है और इससे युवाओं का भविष्य बर्बाद हो रहा है। उन्होंने महिलाओं के भी इस अवैध धंधे में शामिल होने पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि इंदौर में नशे के खिलाफ आवाज सबसे पहले उन्होंने उठाई थी और लगातार इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाते रहे हैं। उन्होंने प्रदेश सरकार और मंत्री कैलाश विजयवर्गीय द्वारा नशे के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान की भी सराहना की। इंदौर की ईद एक और वजह से खास रही। यहां पिछले करीब 50 वर्षों से हिंदू-मुस्लिम एकता की मिसाल कायम करने वाली परंपरा निभाई जा रही है। ईद के दिन शहर काजी को उनके घर से ईदगाह तक लाने और वापस छोड़ने की जिम्मेदारी एक हिंदू परिवार निभाता है। इस बार भी सत्यनारायण सलवाडिया और उनके परिवार ने इस परंपरा को निभाया। उन्होंने शहर काजी का फूलमालाओं से स्वागत किया और उन्हें ससम्मान सजाई गई बग्घी में ईदगाह तक पहुंचाया। वहीं प्रशासन और पुलिस ने भी त्योहार को शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने के लिए व्यापक इंतजाम किए। शहर के प्रमुख चौराहों और संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा बल तैनात रहा। इधर खंडवा में भी बकरीद के मौके पर शहर काजी सैयद निसार अली ने गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने की मांग उठाई। उन्होंने कहा कि मुस्लिम समाज वर्षों से हिंदू समाज की भावनाओं का सम्मान करते हुए गोवंश की कुर्बानी से बचता रहा है। साथ ही गोवंश के नाम पर होने वाली मॉब लिंचिंग और अवैध कारोबार पर सख्त कार्रवाई की मांग भी की गई। बकरीद के मौके पर इंदौर और खंडवा से आया यह संदेश सामाजिक सौहार्द, धार्मिक सम्मान और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में सकारात्मक पहल के रूप में देखा जा रहा है।
पिको डी ओरिजाबा पर लहराएगा तिरंगा, ज्योति ने शुरू की ऐतिहासिक तैयारी

नई दिल्ली। भारतीय पर्वतारोहण जगत के लिए एक और गौरवपूर्ण क्षण सामने आने वाला है। मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल की प्रसिद्ध पर्वतारोही ज्योति रात्रे अब अपने अगले अंतरराष्ट्रीय मिशन पर निकलने जा रही हैं। उनका लक्ष्य मैक्सिको का प्रसिद्ध पिको डी ओरिजाबा शिखर है, जिसे उत्तरी अमेरिका का सबसे ऊंचा ज्वालामुखी माना जाता है। इस शिखर की ऊंचाई 5636 मीटर यानी करीब 18,491 फीट है। दुनिया के सबसे चुनौतीपूर्ण पर्वत अभियानों में शामिल इस मिशन को लेकर पर्वतारोहण जगत में खास उत्साह है। बर्फ से ढके विशाल स्ट्रेटोवोल्केनो पिको डी ओरिजाबा पर चढ़ाई आसान नहीं मानी जाती। यहां जमा देने वाली ठंड, तेज हवाएं, ऑक्सीजन की कमी और खड़ी बर्फीली ढलानें पर्वतारोहियों की कठिन परीक्षा लेती हैं। ऐसे में ज्योति रात्रे का यह अभियान केवल शारीरिक क्षमता ही नहीं, बल्कि मानसिक दृढ़ता और साहस की भी बड़ी कसौटी माना जा रहा है। इस अभियान की सबसे खास बात यह है कि अब तक किसी भारतीय महिला पर्वतारोही ने इस शिखर पर तिरंगा नहीं फहराया है। अगर ज्योति रात्रे अपने मिशन में सफल होती हैं, तो वह यह उपलब्धि हासिल करने वाली पहली भारतीय महिला बन सकती हैं। यह उपलब्धि भारतीय महिला पर्वतारोहण इतिहास में नया अध्याय जोड़ने वाली मानी जा रही है। ज्योति रात्रे इस मिशन को सिर्फ व्यक्तिगत उपलब्धि के रूप में नहीं देखतीं। उनका मानना है कि यह अभियान देशभर की महिलाओं, खासकर ग्रामीण क्षेत्रों की बेटियों और महिलाओं के लिए प्रेरणा का संदेश लेकर जाएगा। वे चाहती हैं कि महिलाएं अपनी क्षमताओं को पहचानें और हर चुनौती का सामना आत्मविश्वास के साथ करें। प्रस्थान से पहले ज्योति रात्रे ने कहा कि पर्वतारोहण हमें सिखाता है कि मजबूत इरादों के सामने कोई भी शिखर असंभव नहीं होता। उन्होंने कहा कि महिलाएं यह समझें कि सीमाएं वही होती हैं, जिन्हें वे खुद तय करती हैं। अगर आत्मविश्वास और मेहनत हो, तो दुनिया की कोई भी ऊंचाई हासिल की जा सकती है। 55 वर्षीय ज्योति रात्रे इससे पहले भी कई अंतरराष्ट्रीय पर्वत अभियानों में सफलता हासिल कर चुकी हैं। उन्होंने दुनिया की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट सहित कई प्रमुख शिखरों पर तिरंगा फहराकर देश का नाम रोशन किया है। उनकी उपलब्धियां न केवल मध्यप्रदेश बल्कि पूरे देश के लिए गर्व का विषय रही हैं। अब उनका नया लक्ष्य पिको डी ओरिजाबा है, जिसे फतह करना किसी भी पर्वतारोही के लिए बड़ी उपलब्धि माना जाता है। पर्वतारोहण विशेषज्ञों के अनुसार यह अभियान तकनीकी रूप से बेहद कठिन है और यहां मौसम कुछ ही मिनटों में बदल जाता है। ऐसे में इस मिशन के लिए महीनों की तैयारी, फिटनेस और विशेष प्रशिक्षण की जरूरत होती है। ज्योति रात्रे का यह अभियान महिला सशक्तिकरण, साहस और आत्मनिर्भरता का मजबूत संदेश भी देता है। खेल और रोमांच की दुनिया में उनका यह कदम आने वाली पीढ़ी की लड़कियों के लिए नई प्रेरणा बन सकता है। अब पूरे देश की नजरें इस अभियान पर टिकी हैं और सभी को उम्मीद है कि भोपाल की यह बेटी मैक्सिको की ऊंचाइयों पर तिरंगा लहराकर एक नया इतिहास रचेगी।
गोद ली बेटी ने उठाया आत्मघाती कदम, सुसाइड नोट ने बढ़ाई रहस्य की परतें

नई दिल्ली। राजधानी भोपाल के पॉश इलाके चार इमली से बेहद संवेदनशील मामला सामने आया है। यहां आईपीएस अधिकारी संजीव कंचन और जज रेणुका कंचन की 17 वर्षीय बेटी ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। इस घटना के बाद प्रशासनिक और न्यायिक हलकों में शोक का माहौल है। पुलिस फिलहाल मामले की हर एंगल से जांच कर रही है, लेकिन अब तक आत्महत्या की स्पष्ट वजह सामने नहीं आ सकी है। जानकारी के मुताबिक छात्रा 11वीं कक्षा में पढ़ती थी और रातीबड़ थाना क्षेत्र के एक प्रतिष्ठित स्कूल की छात्रा थी। शुरुआती जांच में सामने आया है कि वह हाल के दिनों में पढ़ाई को लेकर तनाव में थी। पुलिस को परिवार की ओर से यह जानकारी भी दी गई कि छात्रा के पास मोबाइल फोन मिला था, जबकि माता-पिता ने उसे मोबाइल नहीं दिलाया था। छात्रा की मां रेणुका कंचन ने पुलिस को बताया कि मोबाइल मिलने के बाद बेटी से पूछताछ की गई थी और उसे समझाइश दी गई थी। माना जा रहा है कि इसी बात से वह मानसिक रूप से परेशान हो गई। घटना के समय माता-पिता दोनों अपने-अपने दफ्तर में थे। रेणुका कंचन भोपाल गैस राहत न्यायालय में पदस्थ हैं, जबकि संजीव कंचन वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी हैं। हबीबगंज थाना प्रभारी संजीव चौकसे के अनुसार छात्रा ने दसवीं कक्षा पास करने के बाद हाल ही में 11वीं में प्रवेश लिया था। घटना की सूचना मिलने के बाद पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू की। छात्रा के कमरे से एक सुसाइड नोट भी बरामद हुआ है। सुसाइड नोट में छात्रा ने लिखा, “मम्मी-पापा, मैं आपसे बहुत प्यार करती हूं, लेकिन मैं आपकी अच्छी बेटी नहीं बन सकी। आई एम सॉरी।” हालांकि उसने आत्महत्या के पीछे की वजह का कोई जिक्र नहीं किया। पुलिस ने नोट और मोबाइल फोन जब्त कर लिया है। पुलिस कमिश्नर संजय सिंह ने पुष्टि की है कि छात्रा को दंपती ने महज तीन महीने की उम्र में विधिवत गोद लिया था। परिवार ने उसे बेहद प्यार और अच्छे माहौल में पाला था। ऐसे में यह घटना सभी को झकझोर देने वाली मानी जा रही है। जांच एजेंसियां अब छात्रा के दोस्तों, सहपाठियों और करीबी लोगों से बातचीत कर रही हैं ताकि उसके व्यवहार में आए बदलाव या किसी मानसिक तनाव के बारे में जानकारी मिल सके। साइबर सेल की मदद से उसके सोशल मीडिया अकाउंट्स, चैट्स और हालिया ऑनलाइन गतिविधियों की भी जांच की जा रही है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि फिलहाल किसी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट और फॉरेंसिक जांच के बाद ही स्थिति अधिक स्पष्ट हो पाएगी। परिवार भी गहरे सदमे में है, इसलिए विस्तृत बयान अभी दर्ज नहीं किए जा सके हैं। यह घटना एक बार फिर किशोर मानसिक स्वास्थ्य, पढ़ाई के दबाव और डिजिटल दुनिया के प्रभाव जैसे गंभीर मुद्दों को सामने लेकर आई है।
ताज-उल-मसाजिद में उमड़ी नमाजियों की भीड़, शांति बनाए रखने की अपील

नई दिल्ली। राजधानी भोपाल में ईद-उल-अजहा यानी बकरीद का त्योहार शुक्रवार को अकीदत, भाईचारे और शांतिपूर्ण माहौल में मनाया गया। सुबह से ही शहर की मस्जिदों और ईदगाहों में नमाजियों की भीड़ उमड़ पड़ी। लोगों ने नमाज अदा कर देश में अमन-चैन, भाईचारे और खुशहाली की दुआ मांगी। नमाज के बाद लोगों ने एक-दूसरे को गले लगाकर ईद की मुबारकबाद दी और प्रेम व सौहार्द का संदेश दिया। शहर की सबसे बड़ी मस्जिद ताज-उल-मसाजिद में सुबह 7 बजे ईद-उल-अजहा की विशेष नमाज अदा की गई। यहां बड़ी संख्या में अकीदतमंद पहुंचे। नमाज के दौरान इमाम ने मुल्क में अमन, इंसाफ और आपसी एकता कायम रहने की दुआ कराई। साथ ही समाज में फैल रही बुराइयों को खत्म करने और लोगों के बीच प्रेम बनाए रखने की अपील की गई। इमाम ने कहा कि किसी भी देश की तरक्की और खुशहाली तभी संभव है जब समाज में भाईचारा, एकता और न्याय का माहौल कायम रहे। दुआ में प्रदेश की उन्नति, बेरोजगारों को रोजगार, बीमारों को शिफा और परेशान लोगों को राहत मिलने की भी प्रार्थना की गई। इसके अलावा मदरसों, मस्जिदों और दीन की खिदमत में जुटे लोगों की सुरक्षा और सलामती की दुआ भी मांगी गई। नमाज में बुजुर्गों के साथ बड़ी संख्या में युवा और छोटे बच्चे भी शामिल हुए। नमाज के बाद मस्जिद परिसर में लोगों ने एक-दूसरे को गले लगाकर बकरीद की शुभकामनाएं दीं। पूरे शहर में त्योहार को लेकर उत्साह और सौहार्द का माहौल दिखाई दिया। इधर बकरीद को लेकर मध्यप्रदेश वक्फ बोर्ड ने कुर्बानी से संबंधित दिशा-निर्देश भी जारी किए हैं। बोर्ड ने अपील की है कि कुर्बानी केवल निर्धारित और चिन्हित स्थानों पर ही की जाए। साथ ही कुर्बानी स्थल को चारों तरफ से दीवार या टीन शेड से ढंकने और साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखने के निर्देश दिए गए हैं। वक्फ बोर्ड ने लोगों से यह भी कहा है कि कुर्बानी के फोटो या वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर वायरल न करें। बोर्ड के मुताबिक इससे सामाजिक सौहार्द प्रभावित हो सकता है। इसके अलावा कुर्बानी के बाद अवशेषों का सुरक्षित और वैज्ञानिक तरीके से निपटान करने तथा नगर निगम और स्थानीय प्रशासन के साथ समन्वय बनाए रखने की अपील भी की गई है। निर्देशों में यह भी स्पष्ट किया गया है कि प्रतिबंधित पशुओं की कुर्बानी न की जाए और शासन के सभी नियमों का पालन किया जाए। वहीं ईद की नमाज केवल मस्जिदों और ईदगाह परिसरों में ही अदा करने की सलाह दी गई है। सार्वजनिक सड़कों और खुले रास्तों पर नमाज पढ़ने से बचने की अपील भी प्रशासन की ओर से की गई। बकरीद के मौके पर पुलिस और प्रशासन भी अलर्ट मोड पर नजर आया। शहर के संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत रखी गई ताकि त्योहार शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हो सके। कुल मिलाकर राजधानी भोपाल में बकरीद का त्योहार भाईचारे, अनुशासन और सामाजिक सौहार्द के संदेश के साथ मनाया गया।
अस्पताल प्रबंधन पर उठे सवाल, मॉर्च्युरी के बाहर पोस्टमॉर्टम से हड़कंप

नई दिल्ली। राजधानी भोपाल के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल हमीदिया में मानव संवेदनाओं को झकझोर देने वाला मामला सामने आया है। यहां मॉर्च्युरी के बाहर खुले रास्ते पर एक शव का पोस्टमॉर्टम किए जाने का वीडियो वायरल होने के बाद अस्पताल प्रशासन सवालों के घेरे में आ गया है। वीडियो में साफ दिखाई दे रहा है कि स्ट्रेचर पर रखे शव की खुले में चीर-फाड़ की जा रही है, जबकि आसपास से मरीजों के परिजन और आम लोग लगातार गुजर रहे हैं। मामला बजरिया थाना क्षेत्र से जुड़े एक अज्ञात व्यक्ति के शव का बताया जा रहा है। पुलिस शव को पोस्टमॉर्टम के लिए हमीदिया अस्पताल लेकर पहुंची थी। लेकिन शव को मॉर्च्युरी के अंदर ले जाने के बजाय बाहर जाने वाले रास्ते पर ही स्ट्रेचर पर रख दिया गया। इसके बाद डॉक्टरों ने वहीं खुले में पोस्टमॉर्टम शुरू कर दिया। वीडियो में देखा जा सकता है कि डॉक्टर छेनी और हथौड़ी की मदद से शव की खोपड़ी खोल रहे हैं। इस दौरान आसपास खड़े लोग पूरी प्रक्रिया देखते रहे। जैसे ही बदबू फैलनी शुरू हुई, वहां मौजूद लोग दूर हटने लगे। कुछ देर बाद अन्य अस्पतालकर्मी और एक पुलिसकर्मी भी मौके पर नजर आए। सबसे गंभीर बात यह रही कि पोस्टमॉर्टम ऐसी जगह किया गया जहां से अस्पताल के भीतर लगातार लोगों की आवाजाही बनी हुई थी। न तो वहां कोई पर्दा लगाया गया था और न ही किसी तरह की गोपनीयता या सुरक्षा व्यवस्था दिखाई दी। इससे अस्पताल की कार्यप्रणाली और संवेदनशीलता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। मामला सामने आने के बाद अस्पताल प्रशासन और फॉरेंसिक विभाग ने सफाई दी। गांधी मेडिकल कॉलेज के फॉरेंसिक विभाग के एचओडी डॉ. आशीष जैन ने कहा कि कुछ विशेष मामलों में शवों की सफाई या कीड़े हटाने की प्रक्रिया मॉर्च्युरी के बाहर बने शेड वाले हिस्से में की जाती है। उनका दावा था कि सामान्य पोस्टमॉर्टम मॉर्च्युरी के अंदर ही किए जाते हैं। हालांकि वायरल वीडियो प्रशासन के इन दावों से बिल्कुल अलग तस्वीर दिखा रहा है। वीडियो में स्पष्ट दिखाई दे रहा है कि सिर्फ सफाई नहीं बल्कि शव का पूरा पोस्टमॉर्टम किया जा रहा था। डॉक्टर स्ट्रेचर पर ही चीर-फाड़ कर रहे थे और शव की खोपड़ी तक खोली जा रही थी। अस्पताल प्रशासन का दावा था कि यह प्रक्रिया शेड वाले हिस्से में होती है, लेकिन वीडियो में शव मॉर्च्युरी के मुख्य रास्ते पर खुले में रखा दिखाई दे रहा है। इस दौरान वहां से लगातार लोग गुजरते रहे। ऐसे में प्रशासन की सफाई पर सवाल उठना लाजिमी माना जा रहा है। इस घटना ने सरकारी अस्पतालों में व्यवस्थाओं और संवेदनशीलता को लेकर एक बार फिर बहस छेड़ दी है। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो को लेकर लोग नाराजगी जता रहे हैं और जिम्मेदारों पर कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। कई लोगों का कहना है कि मृतक के सम्मान और आम लोगों की भावनाओं का ध्यान रखना अस्पताल प्रशासन की जिम्मेदारी होती है, लेकिन इस मामले में गंभीर लापरवाही सामने आई है। अब देखना होगा कि इस मामले में स्वास्थ्य विभाग और अस्पताल प्रशासन क्या कार्रवाई करता है और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।
बंगाल में TMC में अंदरूनी संकट गहराया, दो और पार्षदों ने छोड़े पद, नेतृत्व पर उठाए सवाल

कोलकाता। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में हार के बाद तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर असंतोष लगातार बढ़ता जा रहा है। अब पार्टी के मजबूत माने जाने वाले शहरी निकायों और नगर निगमों में भी बगावत के सुर सुनाई देने लगे हैं। ताजा घटनाक्रम में कोलकाता नगर निगम के दो वरिष्ठ पार्षदों ने अपने महत्वपूर्ण पदों से इस्तीफा दे दिया है। बुधवार को टीएमसी नेता सुशांत घोष ने बरो-12 चेयरमैन पद से इस्तीफा दे दिया, जबकि अरूप चक्रवर्ती ने नगर निगम की अकाउंट्स कमेटी के चेयरमैन पद छोड़ने का ऐलान किया। हालांकि दोनों नेताओं ने फिलहाल पार्षद पद नहीं छोड़ा है। नेतृत्व के खिलाफ खुलकर नाराजगीइस्तीफे के साथ दोनों नेताओं ने पार्टी नेतृत्व की कार्यशैली पर भी सवाल उठाए। अरूप चक्रवर्ती ने कहा कि चुनावी हार को स्वीकार करना जरूरी है, क्योंकि हार मानने से इनकार करने पर पिछली जीतों का महत्व भी खत्म हो जाता है। राजनीतिक गलियारों में उनके बयान को पार्टी नेतृत्व पर सीधा हमला माना जा रहा है। दोनों नेताओं का आरोप है कि चुनाव परिणाम आने के बाद पार्टी के वरिष्ठ नेता और मंत्री आम कार्यकर्ताओं और पार्षदों से दूरी बना चुके हैं। चक्रवर्ती ने कहा कि लंबे समय तक कुछ प्रभावशाली नेताओं ने मुख्यमंत्री तक पहुंच को भी सीमित कर दिया था और अब हार के बाद वही नेता सार्वजनिक जीवन से गायब हैं। भाजपा सरकार की तारीफ से बढ़ीं अटकलेसुशांत घोष ने अपने घर के बाहर हुए जानलेवा हमले का जिक्र करते हुए पुलिस जांच पर सवाल उठाए और मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी से मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की। भवानीपुर से शुरू हुआ असंतोषटीएमसी के भीतर विरोध का यह सिलसिला हाल ही में तब शुरू हुआ था, जब पार्षद देबोलीना बिस्वास ने केएमसी के बरो-9 अध्यक्ष पद से इस्तीफा दिया था। भवानीपुर विधानसभा सीट पर पार्टी के खराब प्रदर्शन के बाद यह नाराजगी सामने आई थी। भवानीपुर को लंबे समय तक टीएमसी का मजबूत गढ़ माना जाता रहा है। पार्टी के भीतर बढ़ रहा संकटराज्य की सत्ता से बाहर होने के बाद टीएमसी में लगातार अंदरूनी खींचतान बढ़ती जा रही है। हाल ही में वरिष्ठ सांसद काकोली घोष दस्तिदार ने भी पार्टी के सभी पदों से इस्तीफा दे दिया था। कई विधायक, सांसद और पार्षद पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की बैठकों से दूरी बनाए हुए हैं और संगठन की कार्यप्रणाली पर खुलकर सवाल उठा रहे हैं। सूत्रों के अनुसार, सत्ता परिवर्तन के बाद अब तक 60 से ज्यादा टीएमसी पार्षद विभिन्न नगरपालिकाओं और नगर निगमों में अपने पद छोड़ चुके हैं या संगठनात्मक गतिविधियों से अलग हो गए हैं। कई पार्षदों ने कार्यालय आना भी बंद कर दिया है, जिससे नगर निकायों के कामकाज पर असर पड़ने की आशंका बढ़ गई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पिछले एक दशक तक नगरपालिकाएं और नगर निगम टीएमसी की सबसे मजबूत राजनीतिक ताकत रहे, लेकिन अब वहीं पार्टी के लिए सबसे बड़ी चुनौती बनते दिखाई दे रहे हैं।
राजस्थान का श्रीगंगानगर दुनिया का सबसे गर्म शहर बना, तापमान 48.2 डिग्री सेल्सियस

श्रीगंगानगर। राजस्थान का श्रीगंगानगर बुधवार को भीषण गर्मी के चलते दुनिया का सबसे गर्म स्थान बन गया। यहां अधिकतम तापमान 48.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जिसने उत्तर भारत में पड़ रही लू और गर्मी की स्थिति को और गंभीर बना दिया है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, मई के अंतिम दिनों में पड़ रही तेज गर्मी, शुष्क रेगिस्तानी हवाएं और साफ आसमान इस असामान्य तापमान वृद्धि के मुख्य कारण हैं। इस रिकॉर्ड तापमान ने उत्तर प्रदेश के बांदा में पहले दर्ज किए गए उच्च तापमान के स्तर को भी छू लिया है। इस समय उत्तर-पश्चिम भारत के कई हिस्से भीषण गर्मी और लू की चपेट में हैं। कई शहरों में 45 से 46 डिग्री के पार तापमानबुधवार को बीकानेर और रोहतक में 46.6 डिग्री सेल्सियस तापमान रिकॉर्ड किया गया। जैसलमेर और चूरू में 46.4 डिग्री, झांसी में 46 डिग्री, हिसार में 45 डिग्री और नई दिल्ली में 44.6 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज हुआ। मौसम विभाग के अनुसार अगले एक दिन तक इसी तरह की भीषण गर्मी बनी रह सकती है। हालांकि, गुरुवार शाम से उत्तर और मध्य भारत के कई हिस्सों में आंधी, धूल भरी हवाएं और गरज के साथ बारिश की संभावना जताई गई है, जिससे तापमान में गिरावट आ सकती है। क्यों बना श्रीगंगानगर सबसे गर्ममौसम विशेषज्ञों के अनुसार श्रीगंगानगर का तापमान बढ़ने के पीछे कई भौगोलिक और मौसमी कारण हैं। यह क्षेत्र राजस्थान के उत्तरी हिस्से में भारत-पाकिस्तान सीमा के पास स्थित है और थार रेगिस्तान के बेहद करीब है। मई के अंत में यहां की जमीन तेजी से गर्म हो जाती है, जिससे तापमान अचानक बढ़ जाता है। इसके अलावा उत्तर-पश्चिम दिशा से आने वाली शुष्क और गर्म हवाएं भी तापमान को और बढ़ा देती हैं। नमी की कमी और साफ आसमान ने बढ़ाई गर्मीविशेषज्ञों का कहना है कि इस समय वातावरण में नमी की कमी है, जिससे बादल नहीं बन पा रहे हैं और सूरज की किरणें सीधे जमीन पर पड़ रही हैं। सूखी मिट्टी भी गर्मी को और बढ़ा रही है, क्योंकि जमीन में नमी न होने पर सूर्य की ऊर्जा सीधे हवा और सतह को गर्म करती है। इस समय उत्तर भारत में किसी सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ या बारिश लाने वाली प्रणाली की अनुपस्थिति के कारण भी तापमान लगातार बढ़ रहा है। राजस्थान, हरियाणा, पंजाब और दिल्ली में कई दिनों से साफ मौसम बना हुआ है, जिससे गर्मी और अधिक जमा हो गई है। आने वाले दिनों में राहत की उम्मीदमौसम विभाग ने राहत की संभावना जताई है। अनुमान है कि गुरुवार शाम से तेज हवाएं, धूल भरी आंधी और बारिश शुरू हो सकती है, जिससे सप्ताहांत तक तापमान 40 डिग्री से नीचे आने की संभावना है। हालांकि, मौसम में बदलाव के दौरान तेज आंधी, बिजली गिरने और नुकसान पहुंचाने वाली हवाओं का खतरा भी बना रह सकता है। ऐसे में लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। फिलहाल श्रीगंगानगर देश और दुनिया के सबसे गर्म क्षेत्रों में शामिल बना हुआ है और भीषण गर्मी ने जनजीवन को प्रभावित कर दिया है।