Chambalkichugli.com

कार में फंसे दो युवकों को रेस्क्यू, शराब के नशे में ड्राइविंग की आशंका

मंदसौर । मंदसौर जिले के पिपलियामंडी थाना क्षेत्र में महू-नीमच हाईवे पर गुरुवार देर रात तेज रफ्तार कार अनियंत्रित होकर डिवाइडर की रेलिंग से जा टकराई। हादसे में कार सवार दो युवक गंभीर रूप से घायल हो गए, जिन्हें इलाज के लिए जिला अस्पताल रेफर किया गया है। जानकारी के मुताबिक, हादसा करीब रात 12 बजे चौपाटी इलाके के पास हुआ। कार नीमच से मंदसौर की ओर आ रही थी, तभी चालक ने तेज रफ्तार में नियंत्रण खो दिया और वाहन सीधे डिवाइडर की रेलिंग में जा घुसा। टक्कर इतनी जोरदार थी कि कार का अगला हिस्सा पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि कार में सवार दोनों युवक सुवासरा के रहने वाले थे। हादसे के बाद वे बुरी तरह वाहन में फंस गए थे, जिन्हें स्थानीय लोगों की मदद से बाहर निकाला गया। घायलों की पहचान सुवासरा निवासी कालू सिंह और प्रताप सिंह के रूप में हुई है। सूचना मिलने पर टोल एंबुलेंस टीम मौके पर पहुंची और दोनों को प्राथमिक उपचार देकर अस्पताल भेजा। स्थानीय लोगों ने बताया कि कार पर नंबर प्लेट नहीं लगी थी और दोनों युवकों के नशे में होने की आशंका जताई गई है, हालांकि पुलिस ने अभी इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। हादसे के बाद क्रेन की मदद से क्षतिग्रस्त कार को पुलिस थाने भिजवाया गया है। फिलहाल दोनों घायलों का इलाज जिला अस्पताल में जारी है और पुलिस मामले की जांच कर रही है।

सड़क हादसे में आंगनवाड़ी कार्यकर्ता घायल, ड्राइवर मौके से फरार

मंदसौर । मंदसौर जिले के पिपलियामंडी थाना क्षेत्र में बेलारा और पलेवना गांव के बीच शुक्रवार दोपहर एक तेज रफ्तार ट्रक ने बाइक को टक्कर मार दी। इस दर्दनाक हादसे में 45 वर्षीय किसान पर्वत लाल (निवासी कामलिया) की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि आंगनवाड़ी कार्यकर्ता वंदना गोड़ गंभीर रूप से घायल हो गईं। जानकारी के मुताबिक, वंदना गोड़ ड्यूटी खत्म कर मंदसौर लौट रही थीं। रास्ते में उन्हें गांव के किसान पर्वत लाल मिले, जिन्होंने लिफ्ट देने की बात स्वीकार की और दोनों एक ही बाइक से रवाना हुए। इसी दौरान यह हादसा हो गया। बताया जा रहा है कि जैसे ही बाइक बेलारा और पलेवना के बीच पहुंची, पीछे से आ रहे तेज रफ्तार ट्रक ने जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर इतनी भीषण थी कि किसान सड़क पर गिर पड़े और ट्रक का पहिया उनके चेहरे के ऊपर से गुजर गया, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई। वंदना गोड़ गंभीर रूप से घायल हो गईं और उन्हें इलाज के लिए जिला अस्पताल भेजा गया। हादसे के बाद स्थानीय लोगों की मदद से दोनों को अस्पताल पहुंचाया गया, जहां डॉक्टरों ने किसान को मृत घोषित कर दिया। घायल महिला का इलाज जारी है। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार ट्रक चालक लापरवाही से वाहन चला रहा था और नशे की हालत में होने की आशंका भी जताई जा रही है। हादसे के बाद चालक ट्रक मौके पर छोड़कर फरार हो गया। पुलिस ने ट्रक को जब्त कर लिया है और फरार चालक की तलाश शुरू कर दी है। मामले की जांच पिपलियामंडी थाना पुलिस कर रही है।

चांद की क्लियर और डिटेल्ड फोटो लेने के आसान तरीके, कैमरा सेटिंग्स से लेकर टेलीस्कोप ट्रिक तक जानें जरूरी टिप्स

नई दिल्ली । 31 मई को आसमान में नजर आने वाला इस वर्ष का दूसरा पूर्ण चंद्रमा यानी ब्लू मून खगोल प्रेमियों और फोटोग्राफरों के लिए एक खास अवसर लेकर आ रहा है। इस दुर्लभ और खूबसूरत नजारे को सिर्फ देखना ही नहीं, बल्कि कैमरे में कैद करना भी कई लोगों के लिए रोमांचक अनुभव बन सकता है। इसी संदर्भ में अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी NASA की मून फोटोग्राफी गाइड शुरुआती और पेशेवर दोनों तरह के फोटोग्राफरों के लिए बेहद उपयोगी साबित हो सकती है, जो चांद की स्पष्ट और प्रभावशाली तस्वीरें लेने के लिए जरूरी तकनीकी जानकारी प्रदान करती है। रात के आकाश में शांत और चमकते चांद की तस्वीर लेना जितना आकर्षक लगता है, उतना ही तकनीकी रूप से चुनौतीपूर्ण भी होता है। सही कैमरा सेटिंग्स, धैर्य और थोड़ी प्रैक्टिस के साथ इस चुनौती को आसान बनाया जा सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार इसके लिए जरूरी नहीं कि महंगे उपकरण ही हों, बल्कि साधारण डिजिटल कैमरा या आधुनिक स्मार्टफोन से भी अच्छी तस्वीरें ली जा सकती हैं, बशर्ते सही तकनीक का उपयोग किया जाए। फोटोग्राफी शुरू करने से पहले यह तय करना जरूरी है कि तस्वीर का उद्देश्य क्या है। कुछ लोग चांद को पेड़ों या इमारतों के बीच सिल्हूट के रूप में कैद करना चाहते हैं, तो कुछ क्षितिज के पास दिखने वाले सुनहरे या नारंगी रंग के चांद की तस्वीर लेना पसंद करते हैं। इसके अलावा कुछ फोटोग्राफर चांद के बदलते चरणों को एक श्रृंखला के रूप में रिकॉर्ड करना चाहते हैं। डीएसएलआर या मिररलेस कैमरा इस तरह की फोटोग्राफी के लिए बेहतर माना जाता है, खासकर जब तस्वीरें RAW फॉर्मेट में ली जाएं, जिससे बाद में एडिटिंग आसान हो जाती है। चांद की फोटोग्राफी में कैमरे को मैन्युअल मोड पर सेट करना बेहद महत्वपूर्ण होता है। इसमें अपर्चर, शटर स्पीड और आईएसओ जैसी तीन प्रमुख सेटिंग्स को सही तरीके से संतुलित करना जरूरी है। अपर्चर यह तय करता है कि कैमरे में कितनी रोशनी प्रवेश करेगी, शटर स्पीड यह नियंत्रित करती है कि सेंसर कितनी देर तक रोशनी को कैप्चर करेगा, जबकि आईएसओ कैमरे की संवेदनशीलता को निर्धारित करता है। नासा की गाइड में ‘लूनी 11’ नियम सुझाया गया है, जिसमें अपर्चर को f/11 पर सेट करने और आईएसओ तथा शटर स्पीड को समान रखने की सलाह दी जाती है। उदाहरण के तौर पर यदि आईएसओ 100 है तो शटर स्पीड 1/100 सेकंड रखी जा सकती है। चूंकि चांद काफी चमकदार होता है, इसलिए कम आईएसओ से शुरुआत करना बेहतर परिणाम देता है। चांद की बेहतरीन तस्वीर पाने के लिए लगातार कई शॉट्स लेना भी महत्वपूर्ण माना जाता है, जिसे फोटोग्राफी में ‘लकी इमेजिंग’ कहा जाता है। इस प्रक्रिया में सैकड़ों तस्वीरें ली जाती हैं, जिनमें से कुछ ही सही फोकस, स्थिरता और प्रकाश संतुलन के साथ सबसे बेहतर निकलती हैं। बाद में इन्हें एडिटिंग सॉफ्टवेयर की मदद से और बेहतर बनाया जा सकता है। यदि फोटोग्राफर के पास टेलीस्कोप उपलब्ध है, तो वह चांद की सतह के क्रेटर, पहाड़ और गड्ढों की अत्यंत विस्तृत तस्वीरें ले सकता है। इसके लिए कैमरा या स्मार्टफोन को टेलीस्कोप के आईपीस के साथ जोड़कर उपयोग किया जाता है, हालांकि इसमें थोड़ी प्रैक्टिस की जरूरत होती है। स्थिरता बनाए रखने के लिए ट्राइपॉड का उपयोग, साफ मौसम का चयन और वाइड या टेलीफोटो लेंस का सही उपयोग भी बेहतर परिणाम देने में मदद करता है। इस तरह सही तकनीक और धैर्य के साथ ब्लू मून की रात को यादगार फोटोग्राफिक अनुभव में बदला जा सकता है।

ट्रैफिक बदलाव पर बवाल, विरोध के बाद प्रशासन ने लिया बड़ा फैसला

मंदसौर । मंदसौर के सबसे व्यस्त माने जाने वाले सरदार वल्लभभाई पटेल चौराहा यानी बीपीएल चौराहे पर ट्रैफिक व्यवस्था को लेकर चल रहा विवाद आखिरकार प्रशासन के यू-टर्न के साथ फिलहाल थम गया। लगातार विरोध और जनदबाव के बाद प्रशासन ने शुक्रवार को चौराहे पर लगाए गए बैरिकेड्स हटा दिए, जिसके बाद यहां फिर से पुरानी यातायात व्यवस्था बहाल कर दी गई। बैरिकेड्स हटने की खबर मिलते ही स्थानीय लोगों और कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने मौके पर पहुंचकर पटाखे फोड़कर खुशी जताई। लोगों का कहना है कि नई व्यवस्था से रोजमर्रा की आवाजाही प्रभावित हो रही थी और शहर में अनावश्यक ट्रैफिक दबाव बढ़ रहा था। प्रशासन ने कुछ महीनों पहले बढ़ते ट्रैफिक को नियंत्रित करने के उद्देश्य से सरदार वल्लभभाई पटेल चौराहे के सर्कल को छोटा कर वन-वे व्यवस्था लागू की थी। इसके तहत चौराहे पर बैरिकेड्स लगाए गए थे। नई व्यवस्था के कारण अफीम गोदाम रोड, नई आबादी और संजीत नाका की ओर जाने वाले वाहन चालकों को सीधे मार्ग की बजाय सिटी क्राउन होटल या महाराणा प्रताप चौराहा होकर निकलना पड़ रहा था। इससे लोगों को अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ रही थी और दूसरे मार्गों पर भी जाम की स्थिति बनने लगी थी। स्थानीय नागरिकों का आरोप था कि बिना पर्याप्त योजना और जनसुनवाई के लागू की गई इस व्यवस्था ने लोगों की परेशानी बढ़ा दी। इसी के विरोध में कुछ दिन पहले जिला पंचायत सदस्य दीपक सिंह गुर्जर के नेतृत्व में कांग्रेस कार्यकर्ताओं और स्थानीय लोगों ने चौराहे पर धरना-प्रदर्शन किया था। प्रदर्शन के दौरान प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी भी हुई थी। प्रदर्शन के दौरान पुलिस अधीक्षक विनोद कुमार मीना ने प्रदर्शनकारियों से चर्चा कर एक महीने के भीतर व्यवस्था की समीक्षा करने और बैरिकेड्स हटाने का आश्वासन दिया था। हालांकि लगातार बढ़ते विरोध और राजनीतिक दबाव के चलते प्रशासन ने तय समय से पहले ही बैरिकेड्स हटाने का फैसला कर लिया। दीपक सिंह गुर्जर ने आरोप लगाया कि सर्कल छोटा करने और बैरिकेड्स लगाने से चौराहे पर दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ गया था और लोगों को अनावश्यक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा था। उन्होंने बैरिकेड्स हटाने का श्रेय आम जनता के संघर्ष को दिया। बताया जा रहा है कि पिछले कुछ दिनों में भाजपा से जुड़े नेताओं और कार्यकर्ताओं ने भी प्रशासनिक अधिकारियों से बैरिकेड्स हटाने की मांग की थी। अब पुरानी व्यवस्था बहाल होने के बाद लोगों ने राहत महसूस की है और चौराहे पर यातायात पहले की तुलना में अधिक सुगम दिखाई दे रहा है।

स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार की कवायद, एंबुलेंस व्यवस्था के नोडल बदले

नरसिंहपुर । नरसिंहपुर जिले में 108 एंबुलेंस सेवाओं को लेकर लगातार सामने आ रही शिकायतों और अव्यवस्थाओं के बाद स्वास्थ्य विभाग ने बड़ा प्रशासनिक कदम उठाया है। गुरुवार देर शाम विभाग ने 108 एंबुलेंस सेवा के नोडल प्रभारी को बदलते हुए नई जिम्मेदारी सौंप दी। विभागीय आदेश के अनुसार अब तक यह जिम्मेदारी संभाल रहे प्रभारी परिवार कल्याण रंजीत चौधरी को निर्देश दिए गए हैं कि वे तीन दिन के भीतर वाहन शाखा और 108 सेवा का पूरा प्रभार नए प्रभारी प्रशांत सोनी को सौंप दें। बताया जा रहा है कि जिले में लंबे समय से 108 एंबुलेंस सेवाओं के मनमाने संचालन और लापरवाही को लेकर शिकायतें मिल रही थीं। मरीजों और उनके परिजनों का आरोप था कि समय पर एंबुलेंस नहीं पहुंचती, कई बार फोन रिस्पॉन्स नहीं मिलता और सेवाओं का संचालन बेहद अव्यवस्थित हो चुका था। इससे लोगों का भरोसा भी लगातार कम हो रहा था। कुछ दिन पहले सेवा संचालक कंपनी ने भी जिला प्रबंधक को हटाया था। इसके बाद अब नोडल स्तर पर भी बदलाव किए गए हैं। स्वास्थ्य विभाग का मानना है कि निगरानी और समन्वय मजबूत होने से एंबुलेंस सेवाओं में सुधार आएगा। 16 मई को सामने आई एक घटना ने पूरे मामले को गंभीर बना दिया था। हसन खान को एंबुलेंस कर्मियों के कथित असंवेदनशील रवैये के कारण अपनी बीमार मां को पीठ पर उठाकर ले जाना पड़ा था। इस घटना का वीडियो और शिकायतें उच्च स्तर तक पहुंचीं, जिसके बाद विभाग पर कार्रवाई का दबाव बढ़ गया। हालांकि विभागीय आदेश में नोडल प्रभारी बदलने का कारण “प्रशासकीय कार्य सुविधा” बताया गया है, लेकिन अधिकारियों का मानना है कि एंबुलेंस सेवाओं की निगरानी में गंभीर लापरवाही के कारण यह निर्णय लिया गया। लगातार बिगड़ती व्यवस्था और बढ़ती शिकायतों ने विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए थे। इस मामले में डॉ. मनीष मिश्रा ने कहा कि नोडल 108 के प्रभार में बदलाव उच्च स्तर से मिले निर्देशों के अनुसार किया गया है। उन्होंने कहा कि विभाग अब एंबुलेंस सेवाओं को बेहतर बनाने और मरीजों को समय पर सुविधा उपलब्ध कराने के लिए लगातार निगरानी करेगा।

टेस्ला ने भारत में लॉन्च किया मॉडल Y प्रीमियम RWD, कीमत 50.89 लाख से शुरू, जुलाई से डिलीवरी

नई दिल्ली । वैश्विक इलेक्ट्रिक वाहन निर्माता Tesla, Inc. ने भारतीय बाजार में अपनी मौजूदगी को मजबूत करने की दिशा में एक और बड़ा कदम उठाते हुए नया Model Y Premium Rear-Wheel Drive (RWD) वेरिएंट लॉन्च किया है। कंपनी ने इसे भारत में एक प्रीमियम इलेक्ट्रिक SUV विकल्प के रूप में पेश किया है, जिसकी शुरुआती एक्स-शोरूम कीमत 50.89 लाख रुपये तय की गई है। इस मॉडल की डिलीवरी जुलाई 2026 से शुरू होने की घोषणा की गई है, जिससे भारतीय ग्राहकों के लिए इलेक्ट्रिक मोबिलिटी के विकल्प और बढ़ जाएंगे। कंपनी के अनुसार यह नया मॉडल पहले से अधिक उन्नत फीचर्स और डिजाइन के साथ आता है। इसमें ऑल-ब्लैक इंटीरियर दिया गया है, साथ ही आगे की सीटों के लिए 16 इंच का बड़ा टचस्क्रीन डिस्प्ले शामिल है, जो बेहतर रिस्पॉन्सिव इंटरफेस प्रदान करता है। इसके अलावा ग्राहकों को वैकल्पिक जेन ग्रे इंटीरियर थीम का विकल्प भी मिलेगा, जिससे कार का केबिन और अधिक प्रीमियम अनुभव देता है। स्टोरेज क्षमता के लिहाज से यह वाहन काफी व्यावहारिक बताया जा रहा है, जिसमें लगभग 2,138 लीटर तक की जगह उपलब्ध कराई गई है। पावर-फोल्डिंग सीटों के साथ यह SUV पांच यात्रियों के लिए पर्याप्त स्पेस प्रदान करती है, जिससे इसे फैमिली उपयोग के लिए भी उपयुक्त माना जा रहा है। परफॉर्मेंस की बात करें तो यह नया Model Y RWD मात्र 5.9 सेकंड में 0 से 100 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार पकड़ने में सक्षम है। कंपनी के अनुसार यह वाहन WLTP मानकों के तहत लगभग 500 किलोमीटर तक की रेंज प्रदान करता है, जो इसे लंबी दूरी की यात्रा के लिए भी उपयुक्त बनाता है। सुरक्षा के मामले में इस मॉडल को कई अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों से उच्चतम रेटिंग प्राप्त हुई है, जिनमें NHTSA, IIHS, Euro NCAP, ANCAP और C-IASI जैसे संस्थान शामिल हैं। इससे यह स्पष्ट होता है कि वाहन सुरक्षा मानकों पर वैश्विक स्तर पर खरा उतरता है और इसे एक सुरक्षित इलेक्ट्रिक SUV के रूप में देखा जा रहा है। हाल ही में कंपनी ने भारत में छह सीटों वाले Model Y L वेरिएंट को भी 61.99 लाख रुपये की शुरुआती कीमत पर लॉन्च किया था। इसके साथ ही भारत में कंपनी की उत्पाद श्रृंखला धीरे-धीरे विस्तार ले रही है, जिससे इलेक्ट्रिक वाहनों के बाजार में प्रतिस्पर्धा और बढ़ने की संभावना है। कंपनी की वरिष्ठ निदेशक ने इस लॉन्च को लेकर कहा कि टेस्ला का उद्देश्य तकनीक को अधिक सुलभ बनाना और इलेक्ट्रिक वाहनों के उपयोग को बढ़ावा देना है। इसी दिशा में कंपनी चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर और ग्राहक सुविधा पर भी ध्यान दे रही है, ताकि उपयोगकर्ताओं को एक सहज अनुभव मिल सके। इसके साथ ही कंपनी ने फाइनेंस विकल्प भी उपलब्ध कराए हैं, जिसमें मासिक ईएमआई लगभग 39,990 रुपये से शुरू होती है और डाउन पेमेंट करीब 6 लाख रुपये रखा गया है। इससे प्रीमियम इलेक्ट्रिक SUV सेगमेंट में ग्राहकों के लिए खरीदारी और अधिक आसान हो सकती है। भारत में कंपनी ने हाल ही में बेंगलुरु के व्हाइटफील्ड इलाके में अपना पहला एक्सपीरियंस सेंटर भी शुरू किया है, जो देश में इलेक्ट्रिक वाहन विस्तार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

गिट्टी हटाने को लेकर परिवार में बवाल, महिला पर फावड़े से हमले का आरोप

राजगढ़ । राजगढ़ जिले के कांगनीखेड़ा गांव में पारिवारिक विवाद ने हिंसक रूप ले लिया। गिट्टी हटाने को लेकर शुरू हुआ मामूली विवाद इतना बढ़ गया कि एक महिला ने अपने देवर, देवरानी और सास पर मारपीट, अभद्रता और जेवर छीनने जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं। घटना के बाद पीड़िता अपने पति के साथ थाने पहुंची और शिकायत दर्ज कराई, जिसके आधार पर पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पीड़िता सुनीता बाई बैरागी ने आरोप लगाया कि घटना दोपहर करीब एक बजे की है। वह अपने घर के सामने खड़ी थी, तभी उसका देवर राजू बैरागी वहां गिट्टी लेने पहुंचा और उसे हटने के लिए कहा। सुनीता के मुताबिक उसने कहा कि वह पहले से ही किनारे खड़ी है, लेकिन इसी बात को लेकर विवाद शुरू हो गया। महिला का आरोप है कि थोड़ी ही देर में देवरानी सुमित्रा बाई और उसकी सास भी मौके पर आ गईं और तीनों ने मिलकर गाली-गलौज शुरू कर दी। विरोध करने पर विवाद और बढ़ गया। पीड़िता के अनुसार देवर राजू ने पीछे से फावड़े से हमला किया, जबकि सुमित्रा ने उसका गला पकड़ लिया। बीच-बचाव करने आए उसके बेटे के साथ भी मारपीट की गई। सुनीता बाई ने आरोप लगाया कि हमले के दौरान आरोपियों ने उसके दो मंगलसूत्र और नाक की बाली छीन ली। महिला का कहना है कि मारपीट के दौरान उसके कपड़े भी फाड़ दिए गए। उसने आरोप लगाया कि देवर राजू ने उसके ब्लाउज के बटन तोड़ दिए, जिससे उसकी बेइज्जती हुई। पीड़िता ने कहा कि जिस देवर को उसने हमेशा बेटे की तरह माना, उसी ने उसके साथ ऐसा व्यवहार किया। घटना के बाद परिवार में तनाव का माहौल बना हुआ है। पुलिस ने शिकायत के आधार पर आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 296(बी), 115(2), 351(3) और 3(5) के तहत प्रकरण दर्ज कर लिया है। पुलिस का कहना है कि मामले की विस्तृत जांच की जा रही है और जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

ग्लोबल संकेतों के बीच बाजार धड़ाम, निफ्टी 1.5% गिरा और 23,500 के अहम स्तर से नीचे फिसला

नई दिल्ली ।  सप्ताह के अंतिम कारोबारी सत्र में भारतीय शेयर बाजार में भारी बिकवाली देखने को मिली, जिससे निवेशकों की संपत्ति को बड़ा नुकसान हुआ। वैश्विक बाजारों से मिले-जुले संकेतों और पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव के बीच घरेलू बाजार दबाव में आ गया। कारोबार की शुरुआत भले ही सकारात्मक रही हो, लेकिन दिन के आगे बढ़ने के साथ बाजार में कमजोरी बढ़ती गई और अंतिम घंटे में तेज बिकवाली ने स्थिति को और बिगाड़ दिया। कारोबार के अंत में 30 शेयरों वाला बीएसई सेंसेक्स 1,092.06 अंक यानी 1.44 प्रतिशत की गिरावट के साथ 74,775.74 पर बंद हुआ। वहीं एनएसई का निफ्टी 50 भी 359.40 अंक यानी 1.50 प्रतिशत टूटकर 23,547.75 के स्तर पर बंद हुआ। दिनभर के कारोबार में सेंसेक्स ने 76,220.02 का ऊपरी स्तर और 74,589.11 का निचला स्तर छुआ, जबकि निफ्टी 24,002.80 के हाई से फिसलकर 23,484.75 के निचले स्तर तक पहुंच गया। बाजार में यह गिरावट व्यापक स्तर पर देखने को मिली, जहां मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स भी दबाव में रहे। निफ्टी मिडकैप इंडेक्स में 1.33 प्रतिशत और निफ्टी स्मॉलकैप इंडेक्स में 0.85 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। सेक्टरवार देखें तो तेल एवं गैस, मेटल और फाइनेंशियल सर्विसेज जैसे प्रमुख सेक्टरों में दो प्रतिशत से अधिक की गिरावट ने बाजार पर अतिरिक्त दबाव बनाया। वहीं ऑटो, फार्मा, हेल्थकेयर और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स सेक्टर भी कमजोर रहे, जबकि आईटी सेक्टर में हल्की बढ़त देखने को मिली। निफ्टी 50 के प्रमुख शेयरों में टेक महिंद्रा, एचसीएल टेक, विप्रो, नेस्ले इंडिया और एलएंडटी जैसे स्टॉक्स में मामूली तेजी रही, लेकिन दूसरी ओर पावरग्रिड, इंडिगो, ओएनजीसी, मैक्स हेल्थ, आयशर मोटर्स और टाटा कंज्यूमर जैसे शेयरों में भारी गिरावट दर्ज की गई। कुल मिलाकर बाजार में बिकवाली का दबाव इतना अधिक रहा कि एक ही सत्र में निवेशकों को लगभग 6 लाख करोड़ रुपये की संपत्ति का नुकसान झेलना पड़ा। विशेषज्ञों के अनुसार बाजार में यह गिरावट मुख्य रूप से वैश्विक अनिश्चितताओं और कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव के कारण देखने को मिली। हालांकि कच्चे तेल की कीमतों में हालिया नरमी से कुछ राहत के संकेत मिले हैं, लेकिन मध्य पूर्व में तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़े घटनाक्रम अभी भी बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा रहे हैं। ब्रेंट क्रूड की कीमतों में गिरावट से आयात बिल और महंगाई पर कुछ सकारात्मक असर की उम्मीद जरूर जताई जा रही है, लेकिन निवेशकों का भरोसा अभी पूरी तरह स्थिर नहीं हुआ है। मुद्रा बाजार में रुपये ने डॉलर के मुकाबले हल्की मजबूती दिखाई है, जिससे कुछ हद तक घरेलू बाजार को सहारा मिला है। लेकिन तकनीकी विश्लेषकों का मानना है कि निफ्टी के 23,500 के नीचे फिसलने से निकट भविष्य में बाजार पर दबाव बना रह सकता है और इसमें आगे और गिरावट की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। कुल मिलाकर, सप्ताह का अंत भारतीय शेयर बाजार के लिए कमजोर रहा और आने वाले सत्रों में वैश्विक संकेत, कच्चे तेल की चाल और भू-राजनीतिक घटनाक्रम बाजार की दिशा तय करेंगे।

भारतीय जिम कल्चर ने यूक्रेनी इंफ्लूएंसर को किया हैरान, बोलीं- यहां लोग सच में मदद करना चाहते हैं

नई दिल्ली । भारत की सामाजिक संस्कृति और यहां के लोगों के व्यवहार को लेकर विदेशी नागरिकों के अनुभव अक्सर चर्चा का विषय बनते रहते हैं। इसी क्रम में अब एक यूक्रेनी कंटेंट क्रिएटर का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें उन्होंने भारतीय और यूरोपीय जिम संस्कृति के बीच अंतर को लेकर अपने अनुभव साझा किए हैं। भारत में रह रही सैंड्रा नाम की इस कंटेंट क्रिएटर ने भारतीय जिम के माहौल को यूरोप की तुलना में अधिक दोस्ताना, सहयोगी और जीवंत बताया है। वीडियो में सैंड्रा ने कहा कि भारत के जिम में प्रवेश करते ही उन्हें ऐसा महसूस हुआ जैसे लोग वास्तव में नए सदस्यों का स्वागत करने के लिए उत्साहित रहते हैं। उनके अनुसार भारतीय जिम में लोगों का व्यवहार काफी खुला और मददगार होता है, जबकि यूरोप में अधिकांश लोग अपने वर्कआउट तक सीमित रहते हैं और दूसरों से बहुत कम संवाद करते हैं। उन्होंने कहा कि भारत में जिम केवल फिटनेस सेंटर नहीं बल्कि सामाजिक संपर्क और सकारात्मक ऊर्जा का स्थान भी प्रतीत होता है। सैंड्रा सबसे अधिक भारतीय जिम में मौजूद स्टाफ व्यवस्था को देखकर प्रभावित हुईं। उन्होंने बताया कि यहां सफाई, मेंटेनेंस और सहायता के लिए अलग-अलग लोग मौजूद रहते हैं, जो लगातार इस बात का ध्यान रखते हैं कि जिम में आने वाले लोगों को किसी प्रकार की परेशानी न हो। उनके अनुसार यूरोप में इस तरह की सक्रिय सहायता व्यवस्था कम देखने को मिलती है। उन्होंने भारतीय ट्रेनर्स के व्यवहार को भी काफी अलग और बेहतर अनुभव बताया। सैंड्रा के मुताबिक भारत में ट्रेनर खुद आगे बढ़कर एक्सरसाइज की तकनीक सुधारने और सही तरीके समझाने की कोशिश करते हैं। अगर कोई सदस्य किसी मशीन या एक्सरसाइज को गलत तरीके से कर रहा हो तो ट्रेनर तुरंत मदद के लिए पहुंच जाते हैं। उन्होंने कहा कि यूरोप में इस तरह की व्यक्तिगत सहायता अक्सर अतिरिक्त शुल्क या पर्सनल ट्रेनिंग पैकेज के तहत मिलती है, जबकि भारत में कई जगह यह सामान्य व्यवहार का हिस्सा दिखाई देता है। हालांकि उन्होंने यह भी माना कि यूरोपीय जिम कुछ मामलों में अधिक संतुलित नजर आते हैं। विशेष रूप से महिलाओं और पुरुषों की भागीदारी को लेकर उन्होंने कहा कि यूरोप में दोनों की संख्या लगभग बराबर होती है, जबकि भारत के कई जिम में पुरुषों की संख्या अधिक दिखाई देती है। उन्होंने स्वीकार किया कि शुरुआत में एक विदेशी महिला होने के कारण उन्हें थोड़ा असहज महसूस हुआ, लेकिन समय के साथ उन्होंने भारतीय माहौल को सहज और सकारात्मक पाया। सैंड्रा का यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से लोकप्रिय हो रहा है और बड़ी संख्या में लोग इस पर अपनी प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं। कई भारतीय यूजर्स ने उनके अनुभव से सहमति जताते हुए कहा कि भारतीय संस्कृति में लोगों की मदद करना और मिलनसार व्यवहार करना सामान्य बात है। वहीं कुछ लोगों ने यह भी कहा कि हर देश और हर जिम का अनुभव अलग हो सकता है। फिटनेस संस्कृति के तेजी से विस्तार के बीच यह वीडियो इस बात को भी उजागर करता है कि भारतीय जिम अब केवल शारीरिक फिटनेस तक सीमित नहीं रहे, बल्कि सामाजिक जुड़ाव और सामूहिक ऊर्जा का भी हिस्सा बनते जा रहे हैं।

नई रेलवे लाइन पर ड्यूटी के दौरान ट्रक की टक्कर से मचा हड़कंप

राजगढ़ । राजगढ़ में नई रेलवे लाइन पर गश्त कर रहे रेलवे सुरक्षा बल (RPF) के दो जवान गुरुवार देर रात सड़क हादसे का शिकार हो गए। जालपा माता मंदिर की पहाड़ी के पास एक तेज रफ्तार अज्ञात ट्रक ने उनकी बाइक को पीछे से जोरदार टक्कर मार दी। हादसे में दोनों जवान गंभीर रूप से घायल हो गए, जिन्हें प्राथमिक उपचार के बाद राजस्थान के झालावाड़ रेफर किया गया है। वहां उनका इलाज जारी है। घायल जवानों की पहचान पवन उपाध्याय और ओमवीर सिंह जाट के रूप में हुई है। बताया जा रहा है कि पवन उपाध्याय झालावाड़ रेलवे स्टेशन पर जबकि ओमवीर सिंह जाट रामगंजमंडी रेलवे स्टेशन पर पदस्थ हैं। राजगढ़ क्षेत्र में नई रेलवे लाइन शुरू होने के बाद दोनों जवानों की ड्यूटी रेलवे ट्रैक की पेट्रोलिंग और सुरक्षा निगरानी के लिए लगाई गई थी। जानकारी के अनुसार दोनों जवान बाइक से रेलवे ट्रैक क्षेत्र की निगरानी करते हुए जालपा माता मंदिर मार्ग से गुजर रहे थे। इसी दौरान पीछे से आए तेज रफ्तार अज्ञात ट्रक ने उनकी बाइक को टक्कर मार दी। टक्कर इतनी जोरदार थी कि दोनों जवान सड़क पर दूर जा गिरे और गंभीर रूप से घायल हो गए। हादसे के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई। स्थानीय लोगों ने तुरंत घायलों को संभाला और उन्हें राजगढ़ जिला अस्पताल पहुंचाया। डॉक्टरों ने प्राथमिक उपचार के बाद दोनों की गंभीर हालत को देखते हुए उन्हें बेहतर इलाज के लिए झालावाड़ रेफर कर दिया। घटना की सूचना मिलते ही रेलवे सुरक्षा बल के अधिकारी अस्पताल पहुंचे और घायल जवानों का हालचाल जाना। पुलिस ने अज्ञात ट्रक चालक के खिलाफ मामला दर्ज कर उसकी तलाश शुरू कर दी है। आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली जा रही है, ताकि आरोपी वाहन और चालक की पहचान की जा सके। इस हादसे के बाद नई रेलवे लाइन क्षेत्र में सुरक्षा ड्यूटी के दौरान जवानों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय लोगों ने तेज रफ्तार वाहनों पर कार्रवाई और मार्ग पर सुरक्षा इंतजाम बढ़ाने की मांग की है।