वेतन न मिलने से भड़के स्वास्थ्य कर्मचारी, कलेक्ट्रेट पर किया प्रदर्शन

राजगढ़ । राजगढ़ में तीन महीने से वेतन नहीं मिलने से नाराज स्वास्थ्य कर्मचारियों का गुस्सा शुक्रवार को सड़कों पर दिखाई दिया। जिलेभर के स्वास्थ्य कर्मियों ने कलेक्टर कार्यालय पहुंचकर प्रशासन के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया और नारेबाजी करते हुए जल्द भुगतान की मांग उठाई। कर्मचारियों ने साफ चेतावनी दी कि यदि सोमवार तक लंबित वेतन जारी नहीं किया गया तो मंगलवार से जिलेभर में अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी जाएगी, जिससे स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं। सुबह 10 बजे से ही जिले के अलग-अलग स्वास्थ्य संस्थानों से कर्मचारी कलेक्ट्रेट पहुंचने लगे थे। प्रदर्शन में नियमित, संविदा और आउटसोर्स कर्मचारियों के साथ आशा कार्यकर्ता, आशा सुपरवाइजर और उषा कार्यकर्ताओं ने भी बड़ी संख्या में हिस्सा लिया। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि वे लगातार अस्पतालों और गांवों में स्वास्थ्य सेवाएं दे रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद उन्हें समय पर वेतन नहीं मिल रहा, जिससे परिवारों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। कर्मचारियों ने बताया कि तीन महीने से वेतन नहीं मिलने के कारण बच्चों की स्कूल फीस जमा नहीं हो पा रही है। बैंक की किस्तें रुक गई हैं और घर का खर्च चलाने के लिए उधार लेना पड़ रहा है। प्रदर्शन कर रहे कर्मचारियों का आरोप था कि विभागीय प्रक्रियाओं और फाइलों में उलझे भुगतान का खामियाजा उन्हें और उनके परिवारों को भुगतना पड़ रहा है। सुरेश पटेल ने कहा कि स्वास्थ्य कर्मचारी हर परिस्थिति में अपनी जिम्मेदारियां निभा रहे हैं, लेकिन प्रशासन उनकी समस्याओं को गंभीरता से नहीं ले रहा। उन्होंने कहा कि यदि जल्द समाधान नहीं निकाला गया तो जिलेभर की स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित होंगी, जिसकी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी। प्रदर्शन के बाद कर्मचारियों ने डॉ. गिरीश कुमार मिश्रा को ज्ञापन सौंपा। कलेक्टर ने कर्मचारियों की समस्याओं को गंभीरता से सुनते हुए सोमवार तक समाधान निकालने का आश्वासन दिया है। प्रदर्शन में भारतीय मजदूर संघ के पदाधिकारी, स्वास्थ्य कर्मचारी संघ के कार्यकारी अध्यक्ष चेतन साहू, सीएमएचओ कार्यालय के अधिकारी-कर्मचारी, आरबीएसके डॉक्टर, सीएचओ, बीसीएम, बीपीएम, आउटसोर्स कर्मचारी, आशा और उषा कार्यकर्ता बड़ी संख्या में मौजूद रहे। स्वास्थ्य कर्मचारियों की चेतावनी के बाद अब जिले में स्वास्थ्य सेवाओं पर असर पड़ने की आशंका बढ़ गई है। यदि समय पर वेतन भुगतान नहीं हुआ तो आने वाले दिनों में अस्पतालों और ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं पर बड़ा संकट खड़ा हो सकता है।
राजगढ़ में खरीदी केंद्रों पर बढ़ेगी निगरानी, ई-केवाईसी में तेजी लाने के आदेश

विदिशा। राजगढ़ जिले में गेहूं उपार्जन के दौरान किसानों को भुगतान में हो रही देरी और तकनीकी समस्याओं को लेकर प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। शुक्रवार को आयोजित जिला उपार्जन समिति की बैठक में कलेक्टर डॉ. गिरीश कुमार मिश्रा ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि किसानों के भुगतान में किसी भी तरह की लापरवाही या अनावश्यक देरी स्वीकार नहीं की जाएगी। बैठक के दौरान कलेक्टर ने उन मामलों की समीक्षा की, जिनमें तकनीकी कारणों से भुगतान अटक गया है। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया कि ऐसे किसानों की तुरंत ई-केवाईसी कराई जाए और आवश्यकता पड़ने पर बैंक खाते में सुधार या खाता परिवर्तन की प्रक्रिया भी प्राथमिकता के आधार पर पूरी की जाए, ताकि किसानों को जल्द से जल्द भुगतान मिल सके। कलेक्टर मिश्रा ने कहा कि गेहूं उपार्जन केवल सरकारी प्रक्रिया नहीं, बल्कि किसानों की मेहनत और आजीविका से जुड़ा संवेदनशील विषय है। उन्होंने अधिकारियों को चेतावनी देते हुए कहा कि किसानों को परेशान करने वाली किसी भी लापरवाही को गंभीरता से लिया जाएगा। साथ ही सभी खरीदी केंद्रों की लगातार निगरानी करने और लंबित मामलों का तत्काल निराकरण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। बैठक में खरीदी केंद्रों पर रखे गेहूं के परिवहन और भंडारण व्यवस्था की भी विस्तृत समीक्षा की गई। कई केंद्रों पर अब तक गेहूं का उठाव पूरा नहीं होने पर कलेक्टर ने नाराजगी जताई। उन्होंने परिवहन एजेंसियों और संबंधित विभागों के बीच बेहतर समन्वय बनाकर परिवहन कार्य में तेजी लाने के निर्देश दिए, ताकि खरीदी केंद्रों पर भंडारण का दबाव कम हो सके और व्यवस्था सुचारु बनी रहे। बैठक के दौरान जिला उपार्जन समिति के सदस्यों और विभिन्न विभागों के अधिकारियों ने उपार्जन कार्यों की प्रगति, किसानों को किए गए भुगतान और परिवहन व्यवस्था की वर्तमान स्थिति पर चर्चा की। प्रशासन का कहना है कि किसानों की समस्याओं का जल्द समाधान कर उपार्जन प्रक्रिया को पारदर्शी और व्यवस्थित बनाया जाएगा।
भाजपा कार्यकर्ताओं को कांग्रेस की शरण में जाने को मजबूर किया जा रहा : पाले राम का पीएम मोदी को पत्र

नई दिल्ली । हरियाणा की राजनीतिक सरगर्मियों के बीच भारतीय जनता पार्टी के भीतर झज्जर जिले से जुड़े विवाद ने नया मोड़ ले लिया है। भाजपा नेता पाले राम ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर संगठन के भीतर गंभीर असंतोष और गुटबाजी के आरोप लगाए हैं। उन्होंने दावा किया है कि जिले में पार्टी कार्यकर्ताओं और स्थानीय नेताओं को ऐसी परिस्थितियों में धकेला जा रहा है, जहां उन्हें मजबूरी में अन्य राजनीतिक दलों के नेताओं के संपर्क में जाना पड़ रहा है। इस बयान के बाद स्थानीय राजनीति में हलचल और तेज हो गई है। पाले राम ने अपने पत्र में आरोप लगाया है कि झज्जर जिले में कुछ स्थानीय नेताओं और प्रशासनिक स्तर पर मौजूद प्रभावशाली तत्वों की वजह से भाजपा संगठन कमजोर हुआ है। उनका कहना है कि वर्षों से पार्टी के लिए काम करने वाले कई कार्यकर्ताओं को किनारे कर दिया गया, जिससे संगठन की जमीनी पकड़ प्रभावित हुई है। उन्होंने यह भी दावा किया कि इस स्थिति के कारण कई कार्यकर्ता राजनीतिक रूप से असहज होकर अन्य राजनीतिक विकल्पों की ओर देखने लगे हैं। पत्र में बहादुरगढ़ नगर परिषद से जुड़े मामलों का भी उल्लेख किया गया है। आरोप लगाया गया है कि नगर परिषद की चेयरपर्सन सरोज राठी को पद से हटाने के लिए एक सुनियोजित प्रयास किया जा रहा है, जिसमें कुछ स्थानीय नेता और प्रशासनिक तंत्र की भूमिका बताई गई है। पाले राम के अनुसार, यदि ऐसा होता है तो नगर परिषद के कामकाज पर सीधे तौर पर अफसरशाही का नियंत्रण बढ़ सकता है, जिससे विकास कार्यों और टेंडर प्रक्रिया पर असर पड़ने की आशंका है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि शहर में चल रहे कई विकास कार्यों से जुड़े टेंडरों को बिना स्पष्ट कारण के रोका गया है, जिससे परियोजनाओं की प्रगति बाधित हो रही है। उनके अनुसार, इस पूरे मामले के पीछे राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर एक तरह की खींचतान चल रही है, जिसका सीधा असर आम जनता से जुड़े कामों पर पड़ सकता है। पाले राम ने पत्र में यह भी कहा कि कुछ मामलों में पार्टी के भीतर समर्थन की कमी के कारण स्थिति ऐसी बन गई कि संबंधित चेयरपर्सन और उनके परिवार को राजनीतिक संरक्षण के लिए अन्य दलों के नेताओं के संपर्क में जाना पड़ा। उन्होंने इसे पार्टी संगठन के लिए चिंता का विषय बताया और सवाल उठाया कि ऐसे हालात बनने के बावजूद संगठन की निगरानी व्यवस्था सक्रिय क्यों नहीं है। उन्होंने संगठन की आंतरिक खुफिया और निगरानी इकाइयों की भूमिका पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि इस पूरे घटनाक्रम पर समय रहते ध्यान नहीं दिया गया, जिससे स्थिति और अधिक जटिल हो गई है। इस पूरे घटनाक्रम ने झज्जर जिले की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। स्थानीय स्तर पर इसे पार्टी के भीतर नेतृत्व और संगठनात्मक नियंत्रण की चुनौती के रूप में देखा जा रहा है। वहीं, राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ऐसे आरोप किसी भी संगठन के लिए आंतरिक सुधार और पुनर्गठन की आवश्यकता को दर्शाते हैं।
विदिशा में हादसे से मातम, परिजनों की आंखों के सामने बुझ गई जिंदगी

विदिशा। विदिशा जिले के नटेरन थाना क्षेत्र में एक दर्दनाक हादसे में 13 वर्षीय किशोर की पानी की टंकी में डूबने से मौत हो गई। घटना के बाद परिवार में मातम छा गया। बताया जा रहा है कि किशोर घर के बाथरूम में नहाने गया था, लेकिन काफी देर तक बाहर नहीं आने पर परिजनों ने तलाश शुरू की, जहां वह पानी की टंकी में डूबा मिला। जानकारी के अनुसार मृतक की पहचान महेंद्र रघुवंशी के रूप में हुई है। गुरुवार दोपहर महेंद्र घर के बाथरूम में नहाने के लिए गया था। उस समय परिवार के अन्य सदस्य भी घर में मौजूद थे। काफी देर बीत जाने के बाद जब वह बाहर नहीं आया, तो परिजनों को चिंता हुई। परिवार के सदस्य और उसकी बहन उसे देखने के लिए बाथरूम पहुंचे। वहां उन्होंने देखा कि महेंद्र पानी की बड़ी टंकी में डूबा हुआ है। यह दृश्य देखकर घर में चीख-पुकार मच गई। परिजनों ने तुरंत उसे बाहर निकाला और इलाज के लिए नटेरन अस्पताल पहुंचाया। वहां से प्राथमिक उपचार के बाद उसे गंभीर हालत में विदिशा मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया, लेकिन डॉक्टरों ने जांच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया। मृतक के परिजन मुकुट रघुवंशी ने बताया कि दोपहर के समय घर के सभी सदस्य मौजूद थे और किसी को अंदाजा नहीं था कि इतना बड़ा हादसा हो जाएगा। उन्होंने बताया कि महेंद्र किसी तरह पानी की टंकी में फंस गया और बाहर नहीं निकल सका। घटना के बाद पूरे इलाके में शोक का माहौल है। शुक्रवार को पुलिस ने शव का पोस्टमार्टम कराकर परिजनों को सौंप दिया। पुलिस ने इस मामले में मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि हादसे के कारणों की जांच की जा रही है। इस दुखद घटना ने एक बार फिर घरों में बने खुले पानी के टैंक और सुरक्षा व्यवस्थाओं को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि ऐसे हादसों से बचने के लिए पानी की टंकियों को सुरक्षित ढंग से ढंककर रखना बेहद जरूरी है।
पुलिस बल में बढ़ोतरी की तैयारी, नए प्रधान आरक्षकों को मिली अहम भूमिका

विदिशा । विदिशा जिले में पुलिस बल को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। शनिवार को जिले के विभिन्न थानों और इकाइयों में पदस्थ 15 आरक्षकों को पदोन्नत कर प्रधान आरक्षक बनाया गया। अधिकारियों ने सभी पदोन्नत कर्मचारियों को नई जिम्मेदारियां सौंपते हुए बेहतर पुलिसिंग और कानून व्यवस्था बनाए रखने की अपेक्षा जताई। पुलिस विभाग के अधिकारियों के अनुसार शासन की नई व्यवस्था के तहत प्रधान आरक्षकों की संख्या बढ़ाई जा रही है, ताकि थानों में विवेचना कार्य और प्रशासनिक जिम्मेदारियों को अधिक प्रभावी बनाया जा सके। विभाग का मानना है कि अनुभवी पुलिसकर्मियों को पदोन्नति मिलने से कामकाज की गुणवत्ता में सुधार आएगा और थानों की कार्यक्षमता बढ़ेगी। प्रशांत चौबे ने जानकारी देते हुए बताया कि पिछले वर्ष प्रशिक्षण के लिए भेजे गए 89 आरक्षकों का प्रशिक्षण पूरा हो चुका है। ये सभी जवान जल्द ही जिले में अपनी सेवाएं देना शुरू करेंगे। अधिकारियों के मुताबिक इन प्रशिक्षित जवानों की तैनाती से पुलिस बल की कमी काफी हद तक दूर हो सकेगी। इसके अलावा पुलिस भर्ती 2025 के तहत चयनित 293 नए आरक्षकों को भी जल्द प्रशिक्षण के लिए भेजा जाएगा। वर्तमान में उनके दस्तावेज सत्यापन और मेडिकल परीक्षण की प्रक्रिया अंतिम चरण में चल रही है। प्रक्रिया पूरी होते ही उन्हें प्रशिक्षण केंद्रों के लिए रवाना किया जाएगा। प्रशिक्षण पूरा होने के बाद इन नवआरक्षकों को जिले के विभिन्न थानों और इकाइयों में फील्ड पोस्टिंग दी जाएगी। पुलिस विभाग के अनुसार जिले में अभी भी पुलिसकर्मियों की भारी कमी बनी हुई है। जिले के 25 थानों और अन्य इकाइयों में फिलहाल करीब 1000 पुलिसकर्मी कार्यरत हैं, जबकि लगभग 500 पद अब भी खाली हैं। इसका असर कई थानों की कार्यप्रणाली पर भी दिखाई दे रहा है। अधिकारियों ने बताया कि शहर के सबसे बड़े कोतवाली थाना में पहले 115 जवान तैनात थे, लेकिन वर्तमान में यह संख्या घटकर केवल 62 रह गई है। वहीं सिविल लाइन थाना क्षेत्र का दायरा लगातार बढ़ रहा है, लेकिन उसके अनुरूप पुलिस बल में वृद्धि नहीं हो पाई है। ऐसे में नई भर्ती और प्रशिक्षित जवानों की तैनाती से पुलिस व्यवस्था को मजबूती मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। पुलिस विभाग का मानना है कि 15 नए प्रधान आरक्षकों की पदोन्नति, 89 प्रशिक्षित जवानों की वापसी और 293 नए आरक्षकों की भर्ती से जिले की कानून व्यवस्था को बड़ा सहारा मिलेगा। आने वाले समय में इससे अपराध नियंत्रण और आम जनता को बेहतर पुलिस सेवाएं उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।
जमीन कब्जे से परेशान किसान ने खाया जहर, सुसाइड नोट में पांच लोगों पर लगाए आरोप

कटनी। कटनी जिले के बड़वारा क्षेत्र में जमीन विवाद और कथित दबंगों की प्रताड़ना से परेशान एक किसान द्वारा जहर खाकर आत्महत्या का प्रयास किए जाने का मामला सामने आया है। घटना के बाद इलाके में हड़कंप मच गया। गंभीर हालत में किसान को जिला अस्पताल ले जाया गया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद उन्हें एक निजी अस्पताल रेफर किया गया है। फिलहाल उनकी स्थिति नाजुक बताई जा रही है। पीड़ित किसान की पहचान चंद्रभान महोबिया के रूप में हुई है। उन्होंने आत्मघाती कदम उठाने से पहले एक सुसाइड नोट भी छोड़ा, जिसमें पांच लोगों को अपनी हालत के लिए जिम्मेदार ठहराया है। पुलिस ने सुसाइड नोट जब्त कर मामले की जांच शुरू कर दी है। सुसाइड नोट में किसान ने भानपुरा निवासी भूरा, जगमोहन, कल्लू, जग्गू और अर्जुन के नाम लिखते हुए आरोप लगाया कि ये लोग लंबे समय से उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित कर रहे थे। नोट में उन्होंने लिखा कि वह अपनी इच्छा से आत्महत्या कर रहे हैं और उनके परिवार को किसी प्रकार से परेशान न किया जाए। किसान के बेटे चंद्रकांत महोबिया ने आरोप लगाया कि जिन लोगों के नाम सुसाइड नोट में लिखे गए हैं, वे दबंग प्रवृत्ति के हैं और उनकी पैतृक जमीन पर जबरन कब्जा करने का प्रयास कर रहे थे। परिवार का कहना है कि इस मामले को लेकर पिछले छह महीनों से लगातार प्रशासन और पुलिस के चक्कर लगाए जा रहे थे, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। परिजनों के मुताबिक बड़वारा तहसील, थाना और एसपी कार्यालय में कई बार लिखित शिकायतें दी गई थीं, लेकिन हर बार केवल आश्वासन मिला। आरोप है कि पुलिस और राजस्व विभाग की टालमटोल नीति के कारण आरोपी बेखौफ बने रहे और किसान पर लगातार दबाव बनाते रहे। इसी मानसिक तनाव और प्रशासनिक उदासीनता से परेशान होकर किसान ने यह कदम उठाया। घटना के बाद इलाके में लोगों में आक्रोश है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि समय रहते शिकायतों पर कार्रवाई की जाती तो शायद किसान को इतना बड़ा कदम उठाने के लिए मजबूर नहीं होना पड़ता। मामले को लेकर संतोष कुमार डेहरिया ने बताया कि शिकायत मिलने पर संबंधित थाने को पहले ही जांच के निर्देश दिए जा चुके थे। उन्होंने कहा कि सुसाइड नोट में लगाए गए आरोपों की गंभीरता से जांच की जा रही है और यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच में जुटी हुई है और किसान का इलाज जारी है। वहीं इस घटना ने एक बार फिर जमीन विवादों और प्रशासनिक कार्रवाई में देरी को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ सकता है असर, संविदा कर्मचारी हड़ताल पर जाएंगे

कटनी । कटनी जिले में संविदा स्वास्थ्य कर्मचारियों ने अपनी लंबित मांगों को लेकर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। शुक्रवार को कर्मचारियों ने कलेक्टर आशीष तिवारी के नाम ज्ञापन सौंपते हुए चेतावनी दी कि यदि जल्द उनकी मांगों का निराकरण नहीं किया गया, तो प्रदेशभर के 32 हजार संविदा स्वास्थ्य कर्मचारी 2 जून से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले जाएंगे। यह ज्ञापन मध्य प्रदेश राज्य कर्मचारी संघ के जिला सचिव हरप्रीत लक्की सिंह के नेतृत्व में अधीक्षक भू-अभिलेख अधिकारी को सौंपा गया। इस दौरान बड़ी संख्या में संविदा स्वास्थ्य कर्मचारी मौजूद रहे और अपनी मांगों को लेकर नाराजगी जताई। कर्मचारियों का कहना है कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन यानी NHM के तहत कार्यरत संविदा कर्मचारी वर्षों से प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। कोरोना काल से लेकर ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं तक उन्होंने लगातार जिम्मेदारी निभाई, जिसके चलते मध्य प्रदेश को कई राष्ट्रीय स्तर के सम्मान भी मिले। बावजूद इसके सरकार लगातार उनकी मांगों की अनदेखी कर रही है। संघ पदाधिकारियों ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री की मौजूदगी में पूर्व में उनकी मांगों पर सहमति बनी थी, लेकिन एक वर्ष से ज्यादा समय बीत जाने के बाद भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। इससे कर्मचारियों में भारी असंतोष है और अब वे आंदोलन के लिए मजबूर हो गए हैं। ज्ञापन में कर्मचारियों ने कई प्रमुख मांगें रखी हैं। इनमें सबसे अहम मांग मुख्यमंत्री की घोषणा के अनुसार सभी संविदा कर्मचारियों का नियमितीकरण है। इसके अलावा सामान्य प्रशासन विभाग की 2023 की नीति के तहत कर्मचारियों को एनपीएस और स्वास्थ्य बीमा का लाभ देने की मांग भी की गई है। कर्मचारियों ने अन्य राज्यों की तर्ज पर हर वर्ष 10 प्रतिशत वेतन वृद्धि, नियमित कर्मचारियों के समान महंगाई भत्ता यानी डीए देने, सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों यानी CHO के वेतन में पीबीआई का समायोजन करने और पहले की तरह इंडिकेटर व्यवस्था लागू करने की मांग भी उठाई है। संविदा स्वास्थ्य कर्मचारियों ने स्पष्ट कहा कि यदि उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, तो 2 जून से प्रदेशभर में सभी ऑनलाइन और ऑफलाइन कार्यों का बहिष्कार करते हुए अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी जाएगी। कर्मचारियों का कहना है कि वे जनता को परेशान नहीं करना चाहते, लेकिन सरकार के उदासीन रवैये के कारण उन्हें आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ रहा है। कर्मचारियों ने चेतावनी दी कि यदि हड़ताल शुरू होती है तो स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं, जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन और सरकार की होगी। फिलहाल ज्ञापन के बाद अब सभी की नजर सरकार और प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हुई है।
सतना में खाद बिक्री में गड़बड़ी का आरोप, किसान से ज्यादा वसूले पैसे

सतना । सतना जिले के रामपुर बाघेलान क्षेत्र में यूरिया खाद की कालाबाजारी का मामला सामने आने के बाद हड़कंप मच गया है। रिमार गांव स्थित मां वैष्णों एसोसिएट खाद केंद्र पर किसानों से निर्धारित सरकारी दर से अधिक कीमत वसूलने के आरोप लगे हैं। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद प्रशासनिक हलकों में भी हलचल बढ़ गई है। जानकारी के अनुसार किसान शिवाकांत शुक्ला ने खाद वितरण में गड़बड़ी का आरोप लगाते हुए वीडियो साझा किया है। शिवाकांत का कहना है कि उन्होंने अपने नाम से 20 बोरी और सुनीता शुक्ला के नाम से 4 बोरी यूरिया खाद के लिए स्लॉट बुक कराया था। जब वह खाद लेने दुकान पहुंचे तो पहले उनसे ओटीपी लिया गया और बाद में प्रति बोरी 310 रुपए की मांग की गई। किसान का आरोप है कि यूरिया खाद की सरकारी निर्धारित कीमत 266 रुपए प्रति बोरी है, लेकिन दुकान संचालक अधिक राशि वसूल रहा था। जब उन्होंने अतिरिक्त पैसे देने से इनकार किया, तो विवाद बढ़ गया। शिवाकांत शुक्ला ने आरोप लगाया कि उन्होंने जब इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो बनाना शुरू किया तो दुकान संचालक नाराज हो गया और कथित तौर पर मारपीट की कोशिश करते हुए दबाव बनाने लगा। घटना के बाद किसान ने अनुविभागीय अधिकारी यानी एसडीएम को लिखित शिकायत सौंपकर मामले में कार्रवाई की मांग की है। शिकायत में खाद केंद्र संचालक पर ओवररेटिंग और किसानों को परेशान करने के आरोप लगाए गए हैं। इस मामले के सामने आने के बाद क्षेत्र के अन्य किसानों में भी नाराजगी बढ़ गई है। किसानों का कहना है कि खेती के सीजन में खाद की मांग बढ़ने के साथ ही कई दुकानों पर ओवररेटिंग और कालाबाजारी की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं। इसके बावजूद जिम्मेदार विभागीय अधिकारी प्रभावी कार्रवाई नहीं कर रहे, जिससे किसानों को मजबूरी में महंगे दामों पर खाद खरीदना पड़ रहा है। किसानों ने प्रशासन से मांग की है कि खाद की बिक्री पर सख्त निगरानी रखी जाए और सरकारी दर से ज्यादा कीमत वसूलने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए। वहीं वीडियो वायरल होने के बाद प्रशासनिक अधिकारियों ने मामले की जांच के संकेत दिए हैं। फिलहाल पूरे मामले को लेकर क्षेत्र में चर्चा का माहौल बना हुआ है और किसान प्रशासन की कार्रवाई का इंतजार कर रहे हैं। यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो संबंधित खाद केंद्र संचालक पर कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
लाइन में खड़ी महिला एजेंट बनी शिकार, पोस्ट ऑफिस में चोरों ने लगाया लाखों पर हाथ

सतना । सतना के मुख्य डाकघर में शुक्रवार दोपहर दिनदहाड़े चोरी की बड़ी वारदात सामने आई। भीड़भाड़ के बीच अज्ञात चोरों ने एक महिला डाक अभिकर्ता के बैग को ब्लेड से काटकर उसमें रखे 77 हजार रुपए पार कर दिए। घटना के बाद डाकघर परिसर में हड़कंप मच गया और सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। पीड़ित महिला कंचन अग्रवाल ने इस संबंध में सिटी कोतवाली पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है। कंचन अग्रवाल डालीबाबा पंजाबी मोहल्ला की रहने वाली हैं और डाक अभिकर्ता के रूप में कार्य करती हैं। जानकारी के अनुसार शुक्रवार दोपहर करीब 1 बजे कंचन अग्रवाल Bank of India से 86 हजार रुपए निकालकर जयस्तंभ चौक स्थित मुख्य डाकघर पहुंचीं थीं। उनके बैग में पूरी रकम रखी हुई थी। डाकघर में वह 7 हजार रुपए जमा करने के लिए लाइन में खड़ी थीं। इसी दौरान भीड़ का फायदा उठाकर किसी अज्ञात व्यक्ति ने उनके बैग में ब्लेड से चीरा लगा दिया और उसमें से 77 हजार रुपए निकाल लिए। कुछ देर बाद जब कंचन अग्रवाल ने अपना बैग देखा तो उसमें रखी नकदी गायब थी। बैग कटा हुआ देखकर उनके होश उड़ गए। घटना की जानकारी मिलते ही डाकघर कर्मचारियों और अधिकारियों में अफरा-तफरी मच गई। तुरंत परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरों की जांच शुरू की गई। प्रारंभिक जांच में दो महिलाओं की गतिविधियां संदिग्ध नजर आई हैं। पुलिस को आशंका है कि चोरी की वारदात में इन महिलाओं का हाथ हो सकता है। हालांकि अब तक उनकी पहचान आधिकारिक रूप से नहीं हो सकी है। पुलिस सीसीटीवी फुटेज के आधार पर संदिग्धों की तलाश में जुटी हुई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि मुख्य डाकघर परिसर में इस तरह की घटनाएं पहले भी सामने आ चुकी हैं। बावजूद इसके सुरक्षा व्यवस्था मजबूत नहीं की गई। भीड़भाड़ वाले स्थानों पर सक्रिय गिरोह महिलाओं और बुजुर्गों को निशाना बना रहे हैं। घटना के बाद लोगों ने डाकघर परिसर में सुरक्षा बढ़ाने और संदिग्ध गतिविधियों पर निगरानी रखने की मांग की है। फिलहाल पुलिस मामले की जांच कर रही है और सीसीटीवी फुटेज के जरिए आरोपियों तक पहुंचने का प्रयास किया जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि जल्द ही संदिग्ध महिलाओं की पहचान कर कार्रवाई की जाएगी।
डीजल में आइसोब्यूटेनॉल मिश्रण जल्द हो सकता है अनिवार्य, ऊर्जा सुरक्षा और हरित ईंधन की दिशा में बड़ा कदम

नई दिल्ली । देश की ऊर्जा नीति और परिवहन क्षेत्र में एक बड़ा बदलाव जल्द देखने को मिल सकता है। सरकार इस साल के भीतर डीजल में आइसोब्यूटेनॉल ब्लेंडिंग यानी मिश्रण को अनिवार्य बनाने की दिशा में आगे बढ़ रही है। सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार इस पहल का उद्देश्य ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करना और परिवहन क्षेत्र को धीरे-धीरे कार्बन उत्सर्जन से मुक्त करना है। एक उद्योग सम्मेलन में बोलते हुए सड़क परिवहन एवं राजमार्ग सचिव वी. उमाशंकर ने संकेत दिया कि डीजल ब्लेंडिंग को लेकर गंभीरता से काम चल रहा है और इसके नतीजे उत्साहजनक पाए गए हैं। उन्होंने बताया कि भारत पेट्रोलियम जैसे संस्थान इस तकनीक पर रणनीतिक शोध कर रहे हैं और शुरुआती परीक्षणों में सकारात्मक परिणाम मिले हैं। संभावना जताई जा रही है कि वर्ष के अंत तक इस नीति को अनिवार्य रूप से लागू किया जा सकता है। भारत में डीजल की खपत पेट्रोल की तुलना में लगभग दोगुनी है, ऐसे में इस बदलाव को ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि डीजल में जैव-ईंधन आधारित मिश्रण को बढ़ावा दिया जाता है तो इससे न केवल आयात पर निर्भरता कम होगी बल्कि पर्यावरणीय प्रदूषण में भी कमी आएगी। सरकार केवल ईंधन मिश्रण तक सीमित नहीं है, बल्कि परिवहन व्यवस्था को पूरी तरह आधुनिक और कम उत्सर्जन वाली बनाने की दिशा में भी काम कर रही है। इसी क्रम में इलेक्ट्रिक भारी वाहनों के लिए बैटरी स्वैपिंग और चार्जिंग नेटवर्क विकसित करने की योजना पर तेजी से काम चल रहा है। मंत्रालय जल्द ही ट्रक-ट्रेलर से जुड़ा एक नया ड्राफ्ट नोटिफिकेशन जारी कर सकता है, जिससे लॉजिस्टिक्स सेक्टर को अधिक कुशल बनाया जा सकेगा। अधिकारियों के अनुसार लंबे समय तक ट्रकों को चार्जिंग के लिए रोकना व्यावहारिक नहीं है, इसलिए बैटरी स्वैपिंग और वैकल्पिक मॉडल पर जोर दिया जा रहा है। इसके साथ ही ट्रैक्टर-ट्रेलर इंटरचेंज मॉडल पर भी विचार किया जा रहा है, जिसमें ट्रक का अगला हिस्सा बदला जा सकेगा जबकि कंटेनर और ट्रेलर अलग रहेंगे। हाइड्रोजन आधारित परिवहन व्यवस्था पर भी सरकार पायलट प्रोजेक्ट के जरिए प्रयोग कर रही है। दिल्ली में शुरू की गई हाइड्रोजन बसें इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही हैं। इन बसों की क्षमता एक बार ईंधन भरने पर लगभग 450 किलोमीटर तक चलने की बताई गई है। अधिकारियों का कहना है कि भविष्य में प्रमुख राष्ट्रीय कॉरिडोर पर सीमित संख्या में हाइड्रोजन रिफ्यूलिंग स्टेशन स्थापित कर बड़े स्तर पर संचालन संभव हो सकता है। इसके अलावा मंत्रालय मल्टी-लेन फ्री फ्लो टोलिंग सिस्टम को भी तेजी से आगे बढ़ा रहा है, जिससे टोल प्लाजा पर रुकने की आवश्यकता समाप्त हो जाएगी। यह प्रणाली अगले वर्ष तक देशभर के बड़े टोल प्लाजा पर लागू किए जाने की योजना में है। साथ ही दिल्ली-एनसीआर के लिए एडवांस ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम को भी मंजूरी मिल चुकी है, जिससे यातायात को अधिक सुचारू और तेज बनाया जा सकेगा। इन सभी पहलों से स्पष्ट है कि सरकार परिवहन और ऊर्जा क्षेत्र में एक व्यापक बदलाव की दिशा में आगे बढ़ रही है, जिसका असर आने वाले वर्षों में देश की अर्थव्यवस्था, प्रदूषण नियंत्रण और लॉजिस्टिक्स दक्षता पर दिखाई देगा।