प्रणति नायक की एशियाई और राष्ट्रमंडल खेल 2026 की तैयारी को मिला मजबूत सरकारी समर्थन

नई दिल्ली । Pranati Nayak की आगामी राष्ट्रमंडल खेल और एशियाई खेल 2026 की तैयारियों को केंद्र सरकार और खेल संस्थानों से लगातार मजबूत समर्थन मिल रहा है। युवा मामले एवं खेल मंत्रालय, Sports Authority of India (SAI) और Target Olympic Podium Scheme (TOPS) मिलकर उनके प्रशिक्षण और अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धाओं के लिए जरूरी संसाधन उपलब्ध करा रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर की तैयारी पर फोकटोक्यो 2020 ओलंपियन प्रणति नायक इस समय भुवनेश्वर स्थित हाई परफॉर्मेंस सेंटर में चल रहे सीनियर और जूनियर महिला आर्टिस्टिक जिमनास्टिक्स राष्ट्रीय कोचिंग शिविर का हिस्सा हैं। यह शिविर 22 मई से 20 जून 2026 तक आयोजित किया जा रहा है, जिसका उद्देश्य चीन में होने वाली 13वीं सीनियर एशियाई चैंपियनशिप के लिए टीम को तैयार करना है। इस कैंप में कुल 21 सदस्य शामिल हैं, जिनमें खिलाड़ी, कोच और सपोर्ट स्टाफ हैं। सरकार ने इस प्रशिक्षण शिविर के लिए करीब 23.52 लाख रुपये की वित्तीय सहायता मंजूर की है। चीन में होने वाली चैंपियनशिप के लिए आर्थिक सहायताआगामी 25 से 28 जून 2026 तक चीन के जुनी में आयोजित होने वाली एशियाई चैंपियनशिप में भारतीय जिमनास्टिक्स टीम की भागीदारी के लिए भी सरकार ने 36.59 लाख रुपये की सहायता स्वीकृत की है। इस दल में सीनियर और जूनियर महिला जिमनास्ट शामिल होंगे, जिनमें प्रणति नायक भी प्रमुख खिलाड़ी के रूप में मौजूद हैं। TOPS के तहत व्यक्तिगत सहयोगTarget Olympic Podium Scheme (TOPS) के तहत प्रणति नायक को व्यक्तिगत स्तर पर भी महत्वपूर्ण सहायता दी गई है। 19 से 25 मई 2026 तक उज्बेकिस्तान के ताशकंद में आयोजित एफआईजी आर्टिस्टिक जिमनास्टिक्स वर्ल्ड चैलेंज कप में भाग लेने के लिए उन्हें, उनके कोच और फिजियोथेरेपिस्ट के साथ 5.89 लाख रुपये की आर्थिक मदद दी गई थी। इसी प्रतियोगिता में प्रणति ने शानदार प्रदर्शन करते हुए रजत पदक भी जीता। विदेशी प्रशिक्षण और भविष्य की योजनाभारत के जिमनास्टिक्स कार्यक्रम को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मजबूत बनाने के लिए TOPS ने यूके में प्रस्तावित एक उच्च स्तरीय प्रशिक्षण शिविर के लिए भी 75.65 लाख रुपये की मंजूरी दी है। यह शिविर नवंबर से दिसंबर 2025 के बीच आयोजित किया जाएगा। इसके अलावा 2026 की शुरुआत में होने वाली दो अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के लिए भी खिलाड़ियों को सहायता दी जाएगी। हालांकि, चोट के कारण प्रणति कुछ पिछली प्रतियोगिताओं में भाग नहीं ले सकीं, लेकिन वे अब पूरी तरह से वापसी की तैयारी में जुटी हैं। सरकारी योजनाओं और संस्थागत सहयोग के चलते प्रणति नायक की तैयारी को मजबूत आधार मिल रहा है। आने वाले राष्ट्रमंडल खेल और एशियाई खेल 2026 में उनसे भारत को जिमनास्टिक्स में बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद है।
धोखाधड़ी मामलों में गिरावट के बावजूद बैंकिंग सिस्टम को भारी झटका, तीन साल में रकम चार गुना तक बढ़ी

नई दिल्ली । देश के बैंकिंग क्षेत्र में सामने आए ताज़ा आंकड़े एक विरोधाभासी तस्वीर पेश कर रहे हैं, जहां एक तरफ धोखाधड़ी के मामलों की संख्या में तेज गिरावट दर्ज की गई है, वहीं दूसरी ओर इन मामलों से जुड़े वित्तीय नुकसान में अभूतपूर्व वृद्धि देखी गई है। एक हालिया वार्षिक वित्तीय आकलन के अनुसार वित्त वर्ष 2025-26 में बैंकों में दर्ज धोखाधड़ी मामलों की संख्या घटकर लगभग 10,114 रह गई, जबकि एक वर्ष पहले यह संख्या 23,722 के करीब थी। इसके बावजूद इन मामलों में शामिल कुल रकम बढ़कर लगभग 48,021 करोड़ रुपये तक पहुंच गई, जो पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 46 प्रतिशत अधिक है। यह स्थिति इस ओर संकेत करती है कि छोटे स्तर की धोखाधड़ी कम हुई है, लेकिन बड़े और जटिल वित्तीय घोटालों का प्रभाव लगातार बढ़ता जा रहा है। वित्तीय आंकड़ों के अनुसार पिछले तीन वर्षों के दौरान यह रुझान और अधिक स्पष्ट हो गया है, जिसमें मामलों की संख्या लगातार कम होती गई लेकिन वित्तीय नुकसान कई गुना बढ़ता गया। विशेष रूप से बैंकिंग प्रणाली में कर्ज और एडवांस से जुड़े धोखाधड़ी मामलों ने सबसे बड़ा योगदान दिया है, जो कुल धोखाधड़ी राशि का लगभग 85 प्रतिशत हिस्सा बनाते हैं। यह दर्शाता है कि बैंकिंग संस्थानों के लिए सबसे बड़ी चुनौती अब डिजिटल या छोटे स्तर की धोखाधड़ी नहीं बल्कि बड़े कॉरपोरेट और लोन आधारित घोटाले बन चुके हैं। सरकारी बैंकों पर इन धोखाधड़ी मामलों का सबसे अधिक प्रभाव देखा गया है, जहां नुकसान की राशि में तेज वृद्धि दर्ज की गई है। सरकारी बैंकों में दर्ज धोखाधड़ी से होने वाला वित्तीय नुकसान 35,000 करोड़ रुपये से अधिक पहुंच गया, जो पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 51 प्रतिशत अधिक है। इसके साथ ही कुल धोखाधड़ी राशि में इन बैंकों की हिस्सेदारी भी बढ़कर तीन-चौथाई के करीब पहुंच गई है, जिससे स्पष्ट होता है कि सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक इस चुनौती का सबसे बड़ा बोझ उठा रहे हैं। दूसरी ओर निजी बैंकों में भी धोखाधड़ी की रकम में बढ़ोतरी दर्ज की गई है, हालांकि वहां इसका दायरा अपेक्षाकृत सीमित रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार यह अंतर बैंकिंग मॉडल, जोखिम मूल्यांकन और ऋण वितरण प्रक्रियाओं में अंतर के कारण देखा जा रहा है। वहीं डिजिटल भुगतान, कार्ड और इंटरनेट बैंकिंग से जुड़े मामलों में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई है, जिससे यह संकेत मिलता है कि तकनीकी सुरक्षा उपायों ने छोटे साइबर फ्रॉड पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित किया है। हालांकि डिजिटल क्षेत्र में सुधार के बावजूद बड़े वित्तीय घोटाले बैंकिंग व्यवस्था के लिए गंभीर चिंता का विषय बने हुए हैं। कर्ज आधारित धोखाधड़ी मामलों में लगातार वृद्धि इस बात की ओर इशारा करती है कि ऋण मंजूरी और निगरानी प्रणाली को और अधिक मजबूत बनाने की आवश्यकता है। इसके साथ ही वित्तीय संस्थानों को जोखिम आकलन और अनुपालन तंत्र को अधिक सख्त करने की दिशा में कदम उठाने होंगे ताकि भविष्य में इस तरह के बड़े नुकसान को रोका जा सके। कुल मिलाकर यह स्थिति स्पष्ट करती है कि बैंकिंग प्रणाली में धोखाधड़ी का स्वरूप बदल रहा है। जहां छोटे और डिजिटल फ्रॉड पर नियंत्रण बढ़ा है, वहीं बड़े वित्तीय घोटाले अब सिस्टम के लिए सबसे बड़ी चुनौती बनकर उभर रहे हैं, जिनका सीधा असर अर्थव्यवस्था की स्थिरता पर पड़ सकता है।
विनेश फोगाट को कोर्ट से राहत, एशियन गेम्स ट्रायल में वापसी का रास्ता साफ

नई दिल्ली । Vinesh Phogat को देश की सर्वोच्च अदालत से बड़ी राहत मिली है। सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें एशियन गेम्स 2026 के चयन ट्रायल में हिस्सा लेने की अनुमति दे दी है। यह ट्रायल 30 और 31 मई को आयोजित किए जाएंगे। अदालत के इस फैसले से उनका अंतरराष्ट्रीय मंच पर वापसी का रास्ता एक बार फिर खुल गया है। डब्ल्यूएफआई के फैसले पर सुप्रीम कोर्ट की रोपूरा मामला तब शुरू हुआ जब Wrestling Federation of India (WFI) ने विनेश फोगाट को चयन ट्रायल में भाग लेने से रोक दिया था। फेडरेशन का कहना था कि उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई और डोपिंग से जुड़े नियमों के उल्लंघन के मामले लंबित हैं, इसलिए वे ट्रायल में हिस्सा नहीं ले सकतीं। WFI ने इससे पहले दिल्ली हाई कोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें विनेश को ट्रायल में भाग लेने की अनुमति दी गई थी। हाई कोर्ट ने अपने आदेश में WFI को नोटिस प्रक्रिया में देरी और पारदर्शिता की कमी पर फटकार भी लगाई थी। हाई कोर्ट के निर्देश और पारदर्शिता पर जोहाई कोर्ट ने आदेश दिया था कि चयन ट्रायल की पूरी प्रक्रिया की वीडियो रिकॉर्डिंग अनिवार्य होगी। इसके साथ ही भारतीय खेल प्राधिकरण (SAI) और भारतीय ओलंपिक संघ (IOA) के स्वतंत्र पर्यवेक्षकों की मौजूदगी भी सुनिश्चित की जाएगी ताकि चयन प्रक्रिया पूरी तरह निष्पक्ष रहे। कोर्ट ने यह भी कहा था कि खेल में खिलाड़ियों के अधिकार और उनके करियर को ध्यान में रखना जरूरी है, और चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता से समझौता नहीं किया जा सकता। WFI का पक्ष और लगाए गए आरोWFI ने विनेश फोगाट को कारण बताओ नोटिस जारी करते हुए कई सवालों के जवाब मांगे थे। फेडरेशन ने उन पर अनुशासनहीनता और डोपिंग रोधी नियमों के उल्लंघन के आरोप लगाए थे। इसके बाद उन्हें 26 जून 2026 तक किसी भी घरेलू प्रतियोगिता में हिस्सा लेने से रोक दिया गया था। फेडरेशन का तर्क था कि संन्यास से वापसी करने वाले खिलाड़ियों को नियमों के अनुसार निर्धारित अवधि का पालन करना जरूरी होता है। इसी आधार पर उन्हें ट्रायल से बाहर रखा गया था। कोर्ट में पहुंचा मामला, फिर मिली राहतWFI के फैसले के खिलाफ विनेश फोगाट ने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। हाई कोर्ट ने मामले में हस्तक्षेप करते हुए उन्हें ट्रायल में भाग लेने की अनुमति दी। इसके बाद यह मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, जहां अंतिम सुनवाई में अदालत ने उनकी भागीदारी को मंजूरी दे दी। खेल करियर के लिए अहम मोडसुप्रीम कोर्ट का यह फैसला विनेश फोगाट के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर माना जा रहा है। अब सबकी नजरें 30-31 मई को होने वाले ट्रायल पर टिकी हैं, जहां उनका प्रदर्शन यह तय करेगा कि वे एशियन गेम्स 2026 में भारत का प्रतिनिधित्व कर पाएंगी या नहीं।
भारतीय–पाकिस्तानी प्रवासियों पर ब्रिटिश सांसद के बयान से मचा विवाद, आंकड़ों ने दावों की खोली पोल

नई दिल्ली । अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ब्रिटेन में प्रवासन और रोजगार को लेकर चल रही बहस एक बार फिर तेज हो गई है, जब एक ब्रिटिश सांसद द्वारा भारतीय और पाकिस्तानी मूल के प्रवासियों पर गंभीर आरोप लगाए गए। सांसद ने दावा किया कि बड़ी संख्या में प्रवासी स्थानीय नागरिकों की नौकरियां छीन रहे हैं, जिससे बेरोजगारी बढ़ रही है और देश के श्रम बाजार पर दबाव बन रहा है। उनके इस बयान के बाद राजनीतिक माहौल गर्म हो गया और विभिन्न वर्गों से तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आने लगीं। सांसद ने यह भी कहा कि यदि उनके विचारों को विवादित या कठोर माना जाता है तो वे इसके लिए तैयार हैं, जिससे विवाद और गहरा गया। हालांकि इस पूरे मुद्दे पर सामने आए आधिकारिक और उपलब्ध आंकड़े सांसद के दावों से बिल्कुल अलग तस्वीर पेश करते हैं। जनसंख्या और रोजगार से जुड़े आंकड़ों के अनुसार जिस निर्वाचन क्षेत्र का उल्लेख किया गया, वहां भारतीय और पाकिस्तानी मूल के निवासियों की संख्या कुल आबादी का बहुत छोटा हिस्सा है, जो एक प्रतिशत से भी कम बैठता है। ऐसे में यह दावा कि प्रवासी बड़े पैमाने पर स्थानीय लोगों की नौकरियां छीन रहे हैं, आंकड़ों के आधार पर मजबूत नहीं माना जा रहा है। रोजगार से जुड़े व्यापक आंकड़े यह संकेत देते हैं कि ब्रिटेन के श्रम बाजार में बड़ी संख्या में गैर-स्थानीय नागरिक विभिन्न क्षेत्रों में कार्यरत हैं, लेकिन इसका कारण स्थानीय स्तर पर कई उद्योगों में कर्मचारियों की कमी बताया जाता है। विशेष रूप से स्वास्थ्य सेवा और देखभाल जैसे क्षेत्रों में लंबे समय से कर्मचारियों की कमी बनी हुई है, जिसे पूरा करने के लिए विदेशी श्रमिकों की भूमिका महत्वपूर्ण रही है। कई रिपोर्ट्स के अनुसार इन क्षेत्रों में प्रवासी कर्मचारियों की भागीदारी आवश्यकताओं के अनुसार बढ़ी है, न कि स्थानीय रोजगार को प्रभावित करने के उद्देश्य से। इसके साथ ही सामाजिक लाभों को लेकर भी गलत धारणाओं का मुद्दा सामने आया है। सरकारी आंकड़े बताते हैं कि विदेशी नागरिकों की तुलना में स्थानीय नागरिकों की हिस्सेदारी कई मामलों में अधिक या समान बनी रहती है। वीजा नियमों के तहत आने वाले अधिकांश प्रवासी सार्वजनिक धन से मिलने वाले लाभों के लिए पात्र भी नहीं होते, जिससे यह दावा और कमजोर हो जाता है कि वे प्रणाली पर अतिरिक्त बोझ डाल रहे हैं। इस पूरे विवाद ने ब्रिटेन में प्रवासन नीति और रोजगार संतुलन को लेकर एक नई बहस को जन्म दिया है, जहां एक तरफ राजनीतिक बयानबाजी है तो दूसरी तरफ आंकड़ों पर आधारित वास्तविकता। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के मुद्दों पर भावनात्मक बयानों की बजाय तथ्यों और डेटा के आधार पर चर्चा होना जरूरी है, ताकि समाज में भ्रम और तनाव की स्थिति न बने और वास्तविक आर्थिक जरूरतों को सही तरीके से समझा जा सके।
IPL 2026 क्वालीफायर-2: राजस्थान के ये 5 खिलाड़ी बदल सकते हैं मैच का रुख

नई दिल्ली । आईपीएल 2026 के दूसरे क्वालीफायर में Rajasthan Royals और Gujarat Titans के बीच होने वाला मुकाबला बेहद रोमांचक होने की उम्मीद है। एलिमिनेटर में धमाकेदार जीत दर्ज कर आत्मविश्वास से भरी राजस्थान रॉयल्स की टीम इस बार भी अपने कई मैच विनर खिलाड़ियों के दम पर गुजरात के लिए बड़ी चुनौती पेश कर सकती है। इस मुकाबले में सबसे ज्यादा चर्चा युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी की हो रही है, जिन्होंने पिछले मैच में सिर्फ 29 गेंदों में 97 रनों की विस्फोटक पारी खेलकर सनराइजर्स हैदराबाद के खिलाफ मैच का रुख पूरी तरह बदल दिया था। उनकी आक्रामक बल्लेबाजी किसी भी गेंदबाजी आक्रमण को तहस-नहस करने की क्षमता रखती है। अगर वैभव शुरुआती ओवरों में टिक गए, तो गुजरात के लिए स्थिति मुश्किल हो सकती है। उनके साथ यशस्वी जायसवाल भी टीम के लिए बड़ी उम्मीद हैं। इस सीजन उन्होंने लगातार तेज तर्रार बल्लेबाजी करते हुए 426 रन बनाए हैं। यशस्वी न केवल पारी को संभाल सकते हैं, बल्कि जरूरत पड़ने पर तेजी से रन बनाकर विपक्षी टीम पर दबाव भी बना सकते हैं। गेंदबाजी विभाग में जोफ्रा आर्चर राजस्थान के सबसे बड़े हथियार साबित हो सकते हैं। उन्होंने इस सीजन 24 विकेट लेकर लगातार विपक्षी बल्लेबाजों को परेशान किया है। पावरप्ले से लेकर डेथ ओवर तक उनकी गेंदबाजी मैच का रुख बदलने में सक्षम है। पिछले मुकाबले में भी उन्होंने तीन अहम विकेट लेकर टीम की जीत सुनिश्चित की थी। मध्यक्रम में ध्रुव जुरेल भी राजस्थान के लिए बेहद महत्वपूर्ण खिलाड़ी बनकर उभरे हैं। नंबर तीन पर खेलते हुए उन्होंने लगातार प्रभावशाली पारियां खेली हैं। एलिमिनेटर में उनकी 21 गेंदों में 50 रनों की पारी ने टीम को मजबूत स्थिति में पहुंचाया था। वहीं कप्तान रियान पराग का प्रदर्शन भले ही इस सीजन कुछ उतार-चढ़ाव भरा रहा हो, लेकिन वह किसी भी समय मैच का रुख बदलने की क्षमता रखते हैं। अगर वह क्रीज पर जम गए, तो गुजरात के गेंदबाजों के लिए उन्हें रोकना आसान नहीं होगा। कुल मिलाकर, राजस्थान रॉयल्स के ये पांच खिलाड़ी गुजरात टाइटंस के लिए बड़े खतरे के रूप में सामने आ सकते हैं और यह मुकाबला पूरी तरह से इन मैच विनर्स के प्रदर्शन पर निर्भर करेगा।
IPL 2026 क्वालीफायर-2: बारिश हुई तो गुजरात टाइटंस का फाइनल टिकट पक्का

नई दिल्ली । आईपीएल 2026 का दूसरा क्वालीफायर मुकाबला Rajasthan Royals और Gujarat Titans के बीच न्यू चंडीगढ़ के महाराजा यादवेंद्र सिंह अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम में खेला जाना है। यह मुकाबला फाइनल में पहुंचने के लिहाज से बेहद अहम है, लेकिन इस हाई-वोल्टेज मैच पर बारिश का साया भी मंडरा रहा है। नियमों के अनुसार इस क्वालीफायर-2 के लिए कोई रिजर्व डे नहीं रखा गया है। ऐसे में अगर शुक्रवार को बारिश के कारण मैच पूरा नहीं हो पाता या खेल संभव ही नहीं हो पाता, तो परिणाम अंक तालिका के आधार पर तय किया जाएगा। इस स्थिति में गुजरात टाइटंस को फायदा मिलेगा, क्योंकि वह लीग स्टेज खत्म होने के बाद अंक तालिका में दूसरे स्थान पर रही थी, जबकि राजस्थान रॉयल्स चौथे स्थान पर थी। इसका मतलब साफ है कि यदि मौसम ने खेल बिगाड़ दिया, तो बिना खेले ही गुजरात टाइटंस को फाइनल का टिकट मिल सकता है, जबकि राजस्थान रॉयल्स का सपना अधूरा रह जाएगा। दोनों टीमों का हालिया प्रदर्शन भी इस मुकाबले को और दिलचस्प बनाता है। राजस्थान रॉयल्स ने एलिमिनेटर में सनराइजर्स हैदराबाद को 47 रनों से हराकर शानदार जीत दर्ज की थी। उस मुकाबले में टीम ने 20 ओवर में 243 रनों का विशाल स्कोर खड़ा किया था। युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी ने मात्र 29 गेंदों में 97 रनों की विस्फोटक पारी खेली थी, जबकि ध्रुव जुरेल ने भी 21 गेंदों में 50 रन बनाकर टीम को मजबूत स्थिति में पहुंचाया था। वहीं दूसरी ओर गुजरात टाइटंस को पहले क्वालीफायर में रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु के खिलाफ 92 रनों की करारी हार झेलनी पड़ी थी। आरसीबी ने 254 रनों का विशाल स्कोर खड़ा किया था, जिसके जवाब में गुजरात की टीम 162 रन पर सिमट गई थी। मौसम की संभावित भूमिका को देखते हुए यह मुकाबला केवल खिलाड़ियों की फॉर्म और रणनीति पर ही नहीं, बल्कि प्रकृति के रुख पर भी निर्भर करता नजर आ रहा है। यदि बारिश बाधा नहीं बनती है, तो यह मुकाबला एक रोमांचक और कड़ा संघर्ष देखने को दे सकता है, जहां दोनों टीमें फाइनल में जगह बनाने के लिए पूरी ताकत झोंक देंगी।
विदेश नीति में बड़ा बदलाव: नेपाल ने राजदूत चयन के लिए अपनाया पारदर्शी प्रतियोगी मॉडल, वैश्विक मिशनों पर नजर

नई दिल्ली । नेपाल ने अपनी विदेश नीति और प्रशासनिक ढांचे में बड़ा और ऐतिहासिक बदलाव करते हुए पहली बार राजदूतों की नियुक्ति के लिए खुली प्रतियोगी प्रक्रिया शुरू की है। इस नई व्यवस्था के तहत अब विभिन्न देशों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों में नेपाल के राजदूत और स्थायी प्रतिनिधि बनने के लिए योग्य नागरिकों से आवेदन आमंत्रित किए गए हैं। सरकार का यह कदम लंबे समय से चली आ रही उस परंपरा को बदलने की दिशा में माना जा रहा है, जिसमें राजनीतिक भागीदारी और दलगत समीकरणों के आधार पर राजदूतों की नियुक्ति की जाती रही है। अब इस प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और योग्यता आधारित बनाने पर जोर दिया जा रहा है, ताकि विदेशों में नेपाल का प्रतिनिधित्व अधिक सक्षम और पेशेवर ढंग से हो सके। नई प्रक्रिया के तहत जारी किए गए कार्यक्षेत्र और शर्तों में स्पष्ट किया गया है कि उम्मीदवार की आयु कम से कम 35 वर्ष होनी चाहिए और उसके पास न्यूनतम स्नातक डिग्री अनिवार्य है। अंतरराष्ट्रीय संबंध, राजनीति विज्ञान, कानून, अर्थशास्त्र या सार्वजनिक प्रशासन जैसे विषयों में उच्च शिक्षा प्राप्त उम्मीदवारों को प्राथमिकता दी जाएगी। इसके साथ ही कूटनीति, अंतरराष्ट्रीय व्यापार और बहुपक्षीय वार्ताओं का अनुभव रखने वाले आवेदकों को अतिरिक्त लाभ मिलने की संभावना है। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि उम्मीदवारों का नेपाल की विदेश नीति, अंतरराष्ट्रीय संबंधों और कूटनीतिक प्रक्रियाओं की गहरी समझ होना आवश्यक है। इस चयन प्रक्रिया में केवल शैक्षणिक योग्यता ही नहीं बल्कि पेशेवर अनुभव और नैतिक मानकों को भी महत्वपूर्ण आधार बनाया गया है। आवेदक के पास किसी विदेशी देश में स्थायी निवास या इमिग्रेशन लाभ नहीं होना चाहिए और न ही उसके खिलाफ किसी प्रकार का भ्रष्टाचार या अनैतिक आचरण का रिकॉर्ड होना चाहिए। इसके अलावा, उम्मीदवार का उस देश में कोई हितों का टकराव नहीं होना चाहिए, जहां उसे नियुक्त किया जाना है। सरकार ने यह भी शर्त रखी है कि आवेदक किसी ऐसे संगठन से जुड़ा न हो जिसे विदेशी सहायता या अंतरराष्ट्रीय फंडिंग प्राप्त होती हो, जिससे निष्पक्षता प्रभावित हो सकती है। नई नीति में राजदूतों की भूमिका को केवल औपचारिक प्रतिनिधित्व तक सीमित न रखकर उसे आर्थिक और विकासात्मक कूटनीति से भी जोड़ा गया है। राजदूतों से उम्मीद की जा रही है कि वे अपने-अपने देशों में नेपाल के व्यापार, निवेश और पर्यटन को बढ़ावा देंगे। इसके साथ ही प्रवासी नेपाली नागरिकों के हितों की रक्षा, सांस्कृतिक संबंधों को मजबूत करने और वैश्विक मंचों पर नेपाल की छवि को बेहतर बनाने में भी उनकी महत्वपूर्ण भूमिका होगी। इस प्रक्रिया में अंग्रेजी भाषा पर मजबूत पकड़ और अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक समझ को अनिवार्य योग्यता के रूप में रखा गया है। वियना कन्वेंशन जैसे अंतरराष्ट्रीय समझौतों की जानकारी भी आवश्यक मानी गई है। चयनित राजदूतों का कार्यकाल चार वर्ष निर्धारित किया गया है, हालांकि सरकार आवश्यकता पड़ने पर उन्हें समय से पहले भी वापस बुला सकती है। आवेदन की अंतिम तिथि 5 जून तय की गई है, जिसके बाद चयन प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी।
कौन बनेगा मैच विनर? राजस्थान-गुजरात मुकाबले में तय होगा फाइनल का टिकट

नई दिल्ली । आईपीएल 2026 के दूसरे क्वालीफायर में शुक्रवार को Rajasthan Royals और Gujarat Titans के बीच रोमांचक मुकाबला खेला जाएगा। एक ओर राजस्थान रॉयल्स ने एलिमिनेटर में सनराइजर्स हैदराबाद को हराकर आत्मविश्वास हासिल किया है, वहीं गुजरात टाइटंस को पहले क्वालीफायर में रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु के खिलाफ हार का सामना करना पड़ा था। ऐसे में यह मुकाबला दोनों टीमों के लिए फाइनल का टिकट पाने का अंतिम मौका होगा। इस हाई-वोल्टेज मैच में दोनों टीमों के कई खिलाड़ी अपनी फॉर्म और प्रदर्शन से मैच का रुख बदल सकते हैं। राजस्थान रॉयल्स की ओर से सबसे बड़ी उम्मीद युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी से रहेगी, जिन्होंने पिछले मुकाबले में मात्र 29 गेंदों पर 97 रनों की विस्फोटक पारी खेलकर टीम को जीत दिलाई थी। उनका आक्रामक अंदाज गुजरात के गेंदबाजों के लिए बड़ी चुनौती साबित हो सकता है। इसके अलावा तेज गेंदबाज जोफ्रा आर्चर भी राजस्थान के लिए अहम भूमिका निभा सकते हैं। आर्चर ने पूरे सीजन में 24 विकेट चटकाए हैं और पावरप्ले व डेथ ओवर्स में उनकी गेंदबाजी मुकाबले का रुख बदल सकती है। एलिमिनेटर में भी उन्होंने तीन महत्वपूर्ण विकेट लिए थे। राजस्थान के लिए ध्रुव जुरेल भी एक महत्वपूर्ण खिलाड़ी होंगे, जिन्होंने मध्यक्रम में लगातार प्रभावशाली प्रदर्शन किया है। उन्होंने पिछले मैच में मात्र 21 गेंदों में 50 रन बनाकर टीम को मजबूत स्थिति में पहुंचाया था। वहीं दूसरी ओर गुजरात टाइटंस की बल्लेबाजी का पूरा दारोमदार साई सुदर्शन और कप्तान शुभमन गिल पर रहेगा। साई सुदर्शन इस सीजन में 652 रन बना चुके हैं और उनकी निरंतरता टीम की सबसे बड़ी ताकत रही है। वहीं शुभमन गिल ने भी 618 रन बनाकर शानदार फॉर्म दिखाई है। दोनों की सलामी जोड़ी गुजरात के लिए कई मैच जीतने में अहम साबित हुई है। यदि यह दोनों बल्लेबाज लंबी साझेदारी करने में सफल रहते हैं, तो राजस्थान रॉयल्स के गेंदबाजों पर भारी दबाव बन सकता है। गुजरात की टीम इस मुकाबले में अपनी बल्लेबाजी ताकत के दम पर जीत हासिल करने की कोशिश करेगी। कुल मिलाकर यह मुकाबला युवा जोश और अनुभव के बीच एक रोमांचक टक्कर साबित होने वाला है, जहां छोटे-छोटे पल भी मैच का नतीजा तय कर सकते हैं।
भारतीय महिला टीम का शानदार आगाज, इंग्लैंड पर 38 रन की जीत

नई दिल्ली । चेम्सफोर्ड में खेले गए पहले टी20 अंतरराष्ट्रीय मुकाबले में Indian Women’s Cricket Team ने शानदार प्रदर्शन करते हुए मेजबान England Women’s Cricket Team को 38 रनों से हराकर तीन मैचों की सीरीज में 1-0 की बढ़त हासिल कर ली। भारत की जीत में बल्लेबाजी और गेंदबाजी दोनों का बेहतरीन संतुलन देखने को मिला। टॉस और शुरुआती झटकों के बाद भारत की पारी लड़खड़ा गई थी, जब कप्तानी कर रहीं स्मृति मंधाना पहली ही गेंद पर आउट हो गईं और शेफाली वर्मा भी सस्ते में पवेलियन लौट गईं। ऐसे मुश्किल समय में जेमिमा रोड्रिग्स और यास्तिका भाटिया ने पारी को संभालते हुए भारतीय पारी को मजबूती दी। दोनों बल्लेबाजों ने तीसरे विकेट के लिए 126 रनों की शानदार साझेदारी निभाई, जिसने मैच का रुख पूरी तरह भारत की ओर मोड़ दिया। यास्तिका भाटिया ने आक्रामक अंदाज में बल्लेबाजी करते हुए 40 गेंदों में 54 रन बनाए, जिसमें 9 चौके और 1 छक्का शामिल रहा। वहीं जेमिमा रोड्रिग्स ने बेहतरीन संयम और तकनीक का प्रदर्शन करते हुए 40 गेंदों में 69 रनों की लाजवाब पारी खेली। इस साझेदारी ने भारतीय टीम को 189 रनों के मजबूत स्कोर तक पहुंचाया। लक्ष्य का पीछा करने उतरी इंग्लैंड की टीम की शुरुआत भी खराब रही। भारतीय गेंदबाजों ने शुरू से ही दबाव बनाए रखा। ऐलिस कैप्सी केवल 6 रन बनाकर आउट हुईं, जबकि सोफिया डंकले भी 16 रन बनाकर पवेलियन लौट गईं। हालांकि इसके बाद हीथर नाइट और एमी जोन्स ने 64 रनों की साझेदारी कर पारी को संभालने की कोशिश की, लेकिन भारतीय गेंदबाजों ने लगातार विकेट निकालकर इंग्लैंड को वापसी का मौका नहीं दिया। एमी जोन्स ने शानदार बल्लेबाजी करते हुए 48 गेंदों में 67 रन बनाए, लेकिन उन्हें दूसरे छोर से पर्याप्त सहयोग नहीं मिला। अंततः इंग्लैंड की पूरी टीम 20 ओवर में 8 विकेट खोकर केवल 150 रन ही बना सकी। भारत की ओर से गेंदबाजी में नंदिनी शर्मा ने अपने डेब्यू मैच में शानदार प्रदर्शन करते हुए 3 विकेट झटके। उनके अलावा क्रांति गौड़ ने 2 विकेट हासिल किए, जबकि दीप्ति शर्मा और श्री चरणी को 1-1 सफलता मिली। इस जीत के साथ भारतीय टीम ने न केवल सीरीज में बढ़त बनाई, बल्कि अपने ऑलराउंड प्रदर्शन से यह भी साबित किया कि वह विदेशी सरजमीं पर भी मजबूत दावेदारी रखती है।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से युद्ध की तस्वीर बदलेगी, पर जीवन-मृत्यु के फैसले मशीनों को नहीं सौंपे जा सकते: जेडी वेंस

नई दिल्ली । अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने भविष्य के युद्ध में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की भूमिका को लेकर महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा है कि तकनीक सैन्य रणनीतियों को पूरी तरह बदल सकती है, लेकिन अंतिम नैतिक निर्णयों की जिम्मेदारी हमेशा इंसानों के पास ही रहनी चाहिए। कोलोराडो स्प्रिंग्स स्थित अमेरिकी वायुसेना अकादमी में स्नातक कैडेटों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि दुनिया तेजी से उस दौर में प्रवेश कर रही है, जहां साइबर ऑपरेशन, स्वायत्त सिस्टम और एआई आधारित तकनीकें युद्ध के स्वरूप को नए स्तर पर ले जा रही हैं। ऐसे समय में सैन्य नेतृत्व के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह सुनिश्चित करना होगा कि तकनीक नियंत्रण से बाहर न जाए और मानवीय मूल्यों को पीछे न छोड़ दे। वेंस ने अपने संबोधन में स्पष्ट किया कि एआई के बढ़ते उपयोग को लेकर उनकी सबसे बड़ी चिंता यह है कि कहीं यह जीवन और मृत्यु जैसे संवेदनशील निर्णयों को मशीनों के हवाले न कर दे। उन्होंने कहा कि युद्ध केवल रणनीति या तकनीक का खेल नहीं है, बल्कि यह गहरे नैतिक निर्णयों से जुड़ा क्षेत्र है, जहां इंसानी संवेदना और विवेक की भूमिका सबसे अहम होती है। उन्होंने हाल ही में धार्मिक और नैतिक चर्चाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि आधुनिक तकनीक के युग में भी यह सवाल उतना ही प्रासंगिक है कि महत्वपूर्ण निर्णयों का अधिकार मशीनों को दिया जाना चाहिए या इंसानों को। उन्होंने भविष्य के सैन्य अधिकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि आने वाले वर्षों में सेना में एआई और स्वायत्त प्रणालियों का उपयोग और बढ़ेगा, जिससे निर्णय लेने की प्रक्रिया तेज और जटिल दोनों होगी। ऐसे में अधिकारियों को यह समझना होगा कि तकनीक का उद्देश्य मानव क्षमता को बढ़ाना होना चाहिए, न कि उसे प्रतिस्थापित करना। उन्होंने कहा कि अगर भविष्य के युद्ध को मानव सभ्यता के नैतिक मूल्यों के अनुरूप बनाए रखना है, तो अंतिम निर्णय लेने का अधिकार मशीनों को नहीं दिया जा सकता। जेडी वेंस ने यह भी कहा कि वर्तमान वैश्विक परिदृश्य में भू-राजनीतिक तनाव बढ़ रहा है और विभिन्न देश एक-दूसरे की सैन्य क्षमताओं पर लगातार नजर रख रहे हैं। ऐसे माहौल में अमेरिका के सैन्य अधिकारियों की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो जाती है। उन्होंने कहा कि आधुनिक युद्ध केवल हथियारों का संघर्ष नहीं रह गया है, बल्कि यह डेटा, तकनीक और रणनीतिक समझ का भी बड़ा क्षेत्र बन चुका है, जहां एआई तेजी से प्रभाव बढ़ा रहा है। अपने संबोधन में उन्होंने अमेरिकी सेना के आधुनिकीकरण और नई तकनीकी परियोजनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि सरकार लगातार रक्षा क्षमताओं को मजबूत करने की दिशा में काम कर रही है। इसके साथ ही सैनिकों के जीवन स्तर में सुधार और आधुनिक युद्ध आवश्यकताओं के अनुरूप ढांचे को विकसित करने पर भी जोर दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि आने वाला समय उन अधिकारियों का होगा जो तकनीक और नैतिकता दोनों के बीच संतुलन बनाकर निर्णय लेने में सक्षम होंगे। अंत में उन्होंने कैडेटों को सलाह दी कि वे तकनीक को अपने विकास और क्षमता विस्तार का साधन बनाएं, लेकिन कभी भी उसके पूरी तरह अधीन न हो जाएं। उनके अनुसार, युद्ध का संचालन हमेशा इंसानी बुद्धि, विवेक और नैतिक जिम्मेदारी के आधार पर होना चाहिए, क्योंकि मशीनें केवल निर्देशों का पालन कर सकती हैं, निर्णय नहीं ले सकतीं।