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भोपाल की वॉटर स्पोर्ट्स एकेडमी में 13 वर्षीय खिलाड़ी के साथ विवाद और आरोपों का मामला

भोपाल । भोपाल से एक गंभीर मामला सामने आया है, जहां 13 वर्षीय सेलर ध्रुवी टंडन और उनके परिवार ने वॉटर स्पोर्ट्स एकेडमी के अधिकारियों पर मानसिक प्रताड़ना, पक्षपात और खेल करियर बाधित करने जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं। परिवार का कहना है कि ध्रुवी को “लड़कों के साथ घूमने” जैसे आधारहीन आरोप लगाकर एकेडमी से बाहर कर दिया गया, जिसके बाद से वह पिछले तीन वर्षों से दोबारा प्रवेश के लिए संघर्ष कर रही हैं। परिवार का आरोप है कि ध्रुवी को प्रतियोगिताओं में कमजोर और फटे उपकरण दिए गए, जिससे उनका प्रदर्शन प्रभावित हुआ। वहीं, उनकी छोटी बहन सिद्धि टंडन, जो राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई मेडल जीत चुकी हैं, के चयन में भी अनियमितताओं और 50 हजार रुपये की रिश्वत मांगने जैसे आरोप लगाए गए हैं। परिजनों का कहना है कि बार-बार शिकायतों के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हुई और उन्हें लगातार निराशा ही हाथ लगी। आर्थिक तंगी के चलते परिवार ने अपनी संपत्ति तक गिरवी रख दी और कई बार यात्रा के दौरान मुश्किल परिस्थितियों का सामना किया। वहीं दूसरी ओर, परिवार इसे पुरानी रंजिश और बदले की भावना से जुड़ा मामला बता रहा है। आरोप है कि शिकायतें करने के बाद से ही दोनों बहनों को लगातार परेशान किया जा रहा है। यह मामला अब खेल व्यवस्था, चयन प्रक्रिया और खिलाड़ियों के संरक्षण को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।

भोपाल: बशीर बद्र की याद में जुटेगा साहित्यिक जगत, राज सदन में होगी श्रद्धांजलि सभा

भोपाल । भोपाल का साहित्यिक और सांस्कृतिक वातावरण एक बार फिर भावनात्मक माहौल में डूबने जा रहा है, क्योंकि शहर के ख्यात पद्मश्री शायर Bashir Badr को श्रद्धांजलि देने के लिए एक सामूहिक सभा का आयोजन किया जा रहा है। यह कार्यक्रम 30 मई को शाम 5 बजे दुष्यंत कुमार स्मारक पांडुलिपि संग्रहालय के राज सदन में आयोजित होगा। 28 मई को उनके निधन के बाद से ही देशभर के साहित्यिक जगत में शोक की लहर है। भोपाल, जो उनकी साहित्यिक कर्मभूमि में से एक रहा है, वहां विभिन्न साहित्यिक और सांस्कृतिक संस्थाएं मिलकर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करेंगी। इस श्रद्धांजलि सभा में दुष्यंत कुमार स्मारक पांडुलिपि संग्रहालय, मध्यप्रदेश लेखक संघ, वनमाली सृजन पीठ, मध्यप्रदेश लेखिका संघ, हिन्दी भवन, अभिनव कला परिषद, प्रभात साहित्य परिषद, कला मंदिर, अखिल भारतीय साहित्य परिषद, वरिष्ठ नागरिक मंच और अंतरराष्ट्रीय विश्व मैत्री मंच सहित कई प्रमुख संस्थाएं शामिल होंगी। शहर के वरिष्ठ साहित्यकार, कवि और शायर भी इस अवसर पर उपस्थित रहेंगे। कार्यक्रम का उद्देश्य केवल औपचारिक श्रद्धांजलि देना नहीं, बल्कि शायर Bashir Badr के रचनात्मक योगदान को याद करना और उनकी शायरी की विरासत को जीवंत रखना है। इस दौरान उनकी प्रसिद्ध गजलों और शेर-ओ-शायरी के माध्यम से उन्हें याद किया जाएगा, जिससे माहौल पूरी तरह साहित्यिक और भावुक हो उठेगा। दुष्यंत कुमार स्मारक पांडुलिपि संग्रहालय की निदेशक करुणा राजूकर ने शहर के सभी साहित्य प्रेमियों और सांस्कृतिक संस्थाओं से अपील की है कि वे इस कार्यक्रम में अधिक से अधिक संख्या में शामिल होकर शायर को अपनी श्रद्धांजलि अर्पित करें। उनका कहना है कि यह अवसर न केवल एक महान शायर को याद करने का है, बल्कि हिंदी और उर्दू साहित्य की समृद्ध परंपरा को भी सम्मान देने का है। भोपाल हमेशा से साहित्य और शायरी का एक महत्वपूर्ण केंद्र रहा है, और Bashir Badr की उपस्थिति ने इस शहर को एक विशेष पहचान दी है। ऐसे में उनकी स्मृति में आयोजित यह सभा साहित्यिक दुनिया के लिए एक भावपूर्ण क्षण साबित होगी, जहां शब्दों के जरिए उनके योगदान को सलाम किया जाएगा।

MP का ‘बंगला पान’ बना इंटरनेशनल पसंद, बढ़ी मांग, अब सरकार किसानों को देगी ₹1 करोड़ की मदद

भोपाल। मध्य प्रदेश का प्रसिद्ध ‘बंगला पान’ अब देश ही नहीं, विदेशों में भी अपनी खास पहचान बना रहा है। अपनी सुगंध, कोमल बनावट और बेहतरीन स्वाद के कारण छतरपुर का बंगला पान अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। इसकी बढ़ती मांग को देखते हुए राज्य सरकार ने पान उत्पादक किसानों के लिए 1.03 करोड़ रुपये की विशेष सहायता योजना लागू की है। विदेशों तक पहुंचा एमपी का पानछतरपुर जिले में उगाया जाने वाला बंगला पान अपनी पतली बनावट, हल्की मिठास और लंबे समय तक ताजगी बनाए रखने की क्षमता के लिए जाना जाता है। यही वजह है कि इसकी मांग भारत के साथ-साथ पाकिस्तान, बांग्लादेश और श्रीलंका जैसे देशों में भी लगातार बढ़ रही है। किसानों के लिए सरकार की खास योजनापान उत्पादन को बढ़ावा देने और किसानों की आय में वृद्धि के उद्देश्य से राज्य सरकार ने 10 प्रमुख जिलों को शामिल करते हुए विशेष कार्ययोजना तैयार की है। इसके लिए 1 करोड़ 3 लाख रुपये का वित्तीय प्रावधान किया गया है। योजना के तहत किसानों को आधुनिक खेती तकनीकों की जानकारी, उन्नत किस्म की पौध सामग्री, विशेष प्रशिक्षण, और ‘बरोज’ निर्माण के लिए आर्थिक व तकनीकी सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। इन जिलों में होती है प्रमुख खेतीमध्य प्रदेश के छतरपुर, रीवा, मंदसौर, नरसिंहपुर और टीकमगढ़ जिले पान उत्पादन के प्रमुख केंद्र हैं। यहां वर्षों से पान की खेती किसानों की आय का महत्वपूर्ण स्रोत बनी हुई है। रीवा का पान भी खूब लोकप्रियरीवा जिले के महसांव क्षेत्र के दो गांवों में उत्पादित पान की भी अलग पहचान है। यहां तैयार होने वाला पान उत्तर प्रदेश के प्रमुख शहरों वाराणसी, प्रयागराज और लखनऊ तक भेजा जाता है। इन बाजारों में मध्य प्रदेश के पान की विशेष मांग बनी रहती है। क्या है ‘बरोज’ मॉडल?पान की खेती के लिए विशेष प्रकार का संरक्षित ढांचा तैयार किया जाता है, जिसे ‘बरोज’ कहा जाता है। इसमें तापमान और नमी को नियंत्रित रखा जाता है, जिससे पान की नाजुक बेलों का बेहतर विकास हो सके। मध्य प्रदेश में यह परंपरागत खेती मुख्य रूप से चौरसिया समाज द्वारा की जाती है, जो पीढ़ियों से इस व्यवसाय से जुड़ा हुआ है। बरोज प्रणाली की वजह से उच्च गुणवत्ता वाला पान तैयार होता है और यही मॉडल अब देशभर में चर्चा का विषय बन रहा है। चुनौतियों के बावजूद बनी हुई है मांगपारंपरिक पान व्यवसाय को पान मसाला और गुटखा जैसे उत्पादों से चुनौती मिल रही है। बदलती जीवनशैली और युवाओं की पसंद के कारण पान की खपत पर असर पड़ा है, जिससे किसानों की आय भी प्रभावित हुई है। इसके बावजूद भारतीय संस्कृति और परंपराओं में पान का महत्व आज भी बरकरार है। पूजा-पाठ, विवाह समारोह, मांगलिक आयोजनों और अतिथि सत्कार में पान का विशेष स्थान होने के कारण इसकी बाजार मांग स्थिर बनी हुई है। किसानों के लिए नई उम्मीदसरकार की नई योजना और बढ़ती निर्यात मांग के चलते पान उत्पादक किसानों को बेहतर आय की उम्मीद है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आधुनिक तकनीकों और बरोज मॉडल को व्यापक स्तर पर अपनाया जाए, तो मध्य प्रदेश का बंगला पान वैश्विक बाजार में और मजबूत पहचान बना सकता है।

पश्चिम एशिया संघर्ष का पर्यावरणीय संकट: लाखों टन कार्बन उत्सर्जन से खतरे में जल, हवा और मिट्टी

नई दिल्ली। पश्चिम एशिया और दुनिया के विभिन्न संघर्ष क्षेत्रों में जारी युद्ध अब केवल मानव जीवन तक सीमित नहीं रहे, बल्कि उन्होंने पर्यावरण के लिए भी एक गंभीर और दीर्घकालिक संकट खड़ा कर दिया है। तेल डिपो पर हमलों से उठती आग, रिफाइनरियों में विस्फोट, भारी बमबारी और रासायनिक पदार्थों के इस्तेमाल के आरोपों ने मिट्टी, जल स्रोतों और वायु गुणवत्ता को बुरी तरह प्रभावित किया है। रिपोर्टों के अनुसार, इन संघर्षों के शुरुआती 14 दिनों में ही करीब 50 लाख टन कार्बन उत्सर्जन दर्ज किया गया, जो एक छोटे देश जैसे आइसलैंड के पूरे साल के उत्सर्जन से भी अधिक है। यह आंकड़ा इस बात को दर्शाता है कि युद्ध अब केवल राजनीतिक या सैन्य समस्या नहीं, बल्कि एक गंभीर जलवायु संकट भी बन चुका है। तेल भंडारण स्थलों और रिफाइनरियों पर हमलों के बाद कई क्षेत्रों में भीषण आग लग गई, जिससे वातावरण में भारी मात्रा में कालिख और हाइड्रोकार्बन जैसे प्रदूषक फैल गए। विशेषज्ञों का कहना है कि इन घटनाओं से केवल स्थानीय स्तर पर वायु गुणवत्ता खराब नहीं होती, बल्कि सल्फर और नाइट्रोजन यौगिकों के कारण अम्लीय वर्षा जैसी परिस्थितियां भी पैदा होती हैं, जो कृषि भूमि और जल स्रोतों को लंबे समय तक नुकसान पहुंचाती हैं। ब्रिटेन स्थित संस्था कॉन्फ्लिक्ट एंड एनवायरनमेंट ऑब्जर्वेटरी के अनुसार, संघर्ष क्षेत्रों में पर्यावरणीय क्षति से जुड़ी 120 से अधिक घटनाएं दर्ज की गई हैं, जिनमें जंगलों की तबाही, कृषि भूमि का नुकसान और जल संसाधनों का प्रदूषण शामिल है। दक्षिणी लेबनान में व्हाइट फॉस्फोरस जैसे रासायनिक हथियारों के इस्तेमाल की रिपोर्टों ने स्थिति को और भी चिंताजनक बना दिया है। पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि युद्धों का असर केवल तत्काल नहीं होता, बल्कि यह दशकों तक बना रह सकता है। प्रदूषित मिट्टी, दूषित भूजल और नष्ट हो चुकी जैव विविधता को सामान्य स्थिति में लौटने में कई साल लग जाते हैं। यह प्रभाव न केवल प्रकृति पर, बल्कि मानव स्वास्थ्य और खाद्य सुरक्षा पर भी गंभीर खतरा पैदा करता है। शोधकर्ताओं के अनुसार, युद्धों का कार्बन फुटप्रिंट केवल बमबारी तक सीमित नहीं होता। इसमें सैन्य विमानों की उड़ानें, नौसैनिक तैनाती, हथियार निर्माण, लॉजिस्टिक्स और पुनर्निर्माण कार्य भी शामिल होते हैं, जो कुल मिलाकर पर्यावरण पर भारी बोझ डालते हैं। कुल मिलाकर, यह स्पष्ट होता जा रहा है कि आधुनिक युद्ध अब सिर्फ सीमाओं और सत्ता के लिए नहीं लड़े जा रहे, बल्कि वे पृथ्वी की पारिस्थितिकी व्यवस्था को भी गहराई से प्रभावित कर रहे हैं। यदि समय रहते इस दिशा में गंभीर कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले वर्षों में इसका असर वैश्विक जलवायु संकट के रूप में और भयावह रूप ले सकता है।

IPL 2026 Qualifier-2: शुभमन गिल की ऐतिहासिक सेंचुरी, राजस्थान बाहर-GT पहुंची फाइनल में

नई दिल्ली। आईपीएल 2026 के क्वालिफायर-2 में मुल्लांपुर के महाराजा यादवेंद्र सिंह इंटरनेशनल क्रिकेट स्टेडियम में खेले गए मुकाबले में गुजरात टाइटन्स ने दमदार प्रदर्शन करते हुए राजस्थान रॉयल्स को 7 विकेट से करारी शिकस्त दी और फाइनल में प्रवेश कर लिया। इस मुकाबले के हीरो रहे कप्तान Shubman Gill, जिन्होंने ऐतिहासिक शतक जड़कर टीम को जीत की राह पर पहुंचाया। राजस्थान रॉयल्स ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करने का फैसला किया और युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी ने विस्फोटक अंदाज में 96 रनों की शानदार पारी खेली। उनके अलावा डोनोवन फरेरा और रविंद्र जडेजा ने भी उपयोगी योगदान दिया, जिसकी बदौलत राजस्थान ने 20 ओवर में 214/6 का बड़ा स्कोर खड़ा किया। हालांकि इतना बड़ा लक्ष्य भी गुजरात टाइटन्स की आक्रामक बल्लेबाजी के सामने छोटा साबित हुआ। लक्ष्य का पीछा करने उतरी गुजरात की शुरुआत बेहद धमाकेदार रही। Shubman Gill और साई सुदर्शन की ओपनिंग जोड़ी ने पहले विकेट के लिए 167 रन जोड़कर मैच का रुख पूरी तरह बदल दिया। गिल ने कप्तानी पारी खेलते हुए सिर्फ 53 गेंदों में 104 रनों की विस्फोटक पारी खेली। उनकी पारी में 15 चौके और 3 शानदार छक्के शामिल रहे। दूसरी ओर साई सुदर्शन ने भी 32 गेंदों में 58 रन बनाकर बेहतरीन सहयोग दिया। दोनों बल्लेबाजों ने राजस्थान के गेंदबाजों को किसी भी चरण में वापसी का मौका नहीं दिया। गुजरात टाइटन्स ने यह लक्ष्य सिर्फ 18.4 ओवर में हासिल कर लिया और एक बार फिर साबित किया कि यह टीम बड़े मैचों में कितनी खतरनाक साबित हो सकती है। इस जीत के साथ गुजरात तीसरी बार आईपीएल फाइनल में पहुंची है। इस मुकाबले के साथ Shubman Gill ने कई ऐतिहासिक रिकॉर्ड अपने नाम किए। वह आईपीएल प्लेऑफ में शतक लगाने वाले पहले कप्तान बन गए हैं। इसके अलावा उन्होंने एक ही सीजन में शानदार रन बनाते हुए कई उपलब्धियां भी हासिल कीं, जिससे उनका नाम रिकॉर्ड बुक में और मजबूत हो गया। वहीं साई सुदर्शन भी लगातार शानदार फॉर्म में नजर आए और आईपीएल इतिहास में उन चुनिंदा बल्लेबाजों की सूची में शामिल हो गए जिन्होंने लगातार दो सीजन में 700+ रन बनाए। गुजरात की इस जीत ने साफ कर दिया कि टीम का शीर्ष क्रम इस समय बेहद मजबूत स्थिति में है। गिल और सुदर्शन की साझेदारी ने न सिर्फ मैच जीता बल्कि पूरे सीजन में उनकी जोड़ी को सबसे खतरनाक ओपनिंग कॉम्बिनेशन के रूप में स्थापित कर दिया है। अब 31 मई को होने वाले फाइनल में गुजरात टाइटन्स का सामना रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु से होगा, जहां एक बार फिर बड़े मुकाबले और बड़े सितारों की टक्कर देखने को मिलेगी।

30वीं वेडिंग एनिवर्सरी पर बॉबी देओल का खुलासा: ‘कैफे में देखा, फिर पीछा किया…’

नई दिल्ली। बॉलीवुड अभिनेता Bobby Deol इन दिनों अपनी आने वाली फिल्म ‘बंदर’ को लेकर चर्चा में हैं, लेकिन इस बार वह अपने प्रोफेशनल नहीं बल्कि निजी जीवन को लेकर सुर्खियों में हैं। अपनी शादी की 30वीं सालगिरह के मौके पर बॉबी देओल ने पत्नी तान्या के साथ अपनी लव स्टोरी का ऐसा खुलासा किया, जिसे सुनकर हर कोई मुस्कुरा उठा। बॉबी देओल ने एक खास बातचीत में बताया कि उनकी और तान्या की पहली मुलाकात एक कैफे-रेस्टोरेंट में हुई थी। वह अपने परिचित आकाश के साथ वहां मौजूद थे, तभी तान्या भी कुछ लड़कियों के साथ उसी जगह आई थीं। उसी पल पहली बार बॉबी की नजर तान्या पर पड़ी और वहीं से कहानी की शुरुआत हुई। बॉबी बताते हैं कि पहली मुलाकात के बाद उन्होंने आकाश से तान्या के बारे में पूछा और सिर्फ इतना कहा कि उनकी तरफ से हेलो कह दिया जाए। यह मुलाकात उस समय भले ही साधारण लगी हो, लेकिन बॉबी के दिल में तान्या की छवि बस चुकी थी। कुछ समय बाद दोनों की फिर से मुलाकात हुई और वहीं बॉबी को एहसास हुआ कि यही वह इंसान हैं, जिनके साथ वह अपनी जिंदगी बिताना चाहते हैं। इसके बाद उन्होंने तान्या को मनाने के लिए कई प्रयास किए। बॉबी ने मजाकिया अंदाज में स्वीकार किया कि वह कई बार उनका पीछा भी करते थे और यहां तक कि बिना बुलाए पार्टियों में भी पहुंच जाते थे। शुरुआत में तान्या उनकी इन हरकतों से थोड़ा दूरी बनाकर रखती थीं, लेकिन धीरे-धीरे बातचीत का सिलसिला शुरू हुआ। एक समय ऐसा आया जब बॉबी को उनका फोन नंबर मिला। उन्होंने कुछ दिन इंतजार किया और फिर कॉल किया। यह पहली कॉल ही चार घंटे लंबी बातचीत में बदल गई, जिसने दोनों के रिश्ते की दिशा तय कर दी। बॉबी ने आगे बताया कि उन्होंने तुरंत अपने परिवार को भी इस रिश्ते के बारे में बता दिया था। उन्होंने अपनी मां, चाची और भाई सनी देओल तक को तान्या से मिलवाया। परिवार ने भी इस रिश्ते को स्वीकार कर लिया। अभिनेता ने यह भी बताया कि उनकी शादी पहले बैसाखी पर तय थी, लेकिन सर्जरी के कारण तारीख बदल गई और अंततः 30 मई 1996 को उनकी शादी हुई। आज 30 साल बाद भी बॉबी और तान्या का रिश्ता मजबूत बना हुआ है। कई उतार-चढ़ाव के बावजूद तान्या हमेशा बॉबी के साथ खड़ी रहीं। यह कहानी सिर्फ एक प्रेम कहानी नहीं, बल्कि भरोसे, साथ और समय की परीक्षा में खरा उतरने वाला रिश्ता है।

‘रामायण ने बदल दी मेरी जिंदगी’: रणबीर कपूर ने बताया पिता बनने के बाद कैसे बदली सोच

नई दिल्ली। अभिनेता रणबीर कपूर इन दिनों अपनी बहुचर्चित फिल्म ‘रामायण’ को लेकर चर्चा में हैं। नितेश तिवारी के निर्देशन में बन रही इस फिल्म में वे भगवान राम की भूमिका निभा रहे हैं। इसी बीच रणबीर ने इस प्रोजेक्ट को लेकर अपने जीवन पर पड़े गहरे प्रभाव का खुलासा किया है। रणबीर का कहना है कि ‘रामायण’ उनके करियर से ज्यादा उनके जीवन को बदलने वाला अनुभव साबित हुई है। उन्होंने बताया कि इस फिल्म पर काम करने के दौरान उनकी सोच, आदतें और जीवन को देखने का नजरिया पूरी तरह बदल गया। पिता बनने के साथ मिला बड़ा बदलावरणबीर कपूर ने कहा कि जिस समय वे इस फिल्म पर काम कर रहे थे, उसी दौरान वे पिता बने। बेटी राहा के जन्म ने उनके जीवन में भावनात्मक बदलाव लाया और इस अनुभव ने उन्हें और अधिक जिम्मेदार बना दिया। उन्होंने कहा कि उन्हें यह महसूस हुआ कि ‘रामायण’ और पिता बनने की प्रक्रिया एक साथ उनके जीवन में आए, जिससे वे खुद को एक बेहतर इंसान के रूप में ढाल सके। भगवान राम की भूमिका का असररणबीर ने बताया कि शुरुआत में उन्हें इस प्रतिष्ठित किरदार को निभाने को लेकर संदेह था, लेकिन जैसे-जैसे वे इस प्रोजेक्ट से जुड़े, उनकी सोच बदलती गई। उन्होंने कहा कि भगवान राम के चरित्र को समझने की प्रक्रिया ने उन्हें त्याग, धर्म और जीवन के मूल्यों को गहराई से समझने में मदद की। उनके मुताबिक इस अनुभव ने उनकी बुरी आदतों, सोच और जीवन के प्रति दृष्टिकोण में सकारात्मक बदलाव लाया है। ‘सही समय पर मिला यह अनुभव’रणबीर ने इसे अपने जीवन का एक “प्यारा संयोग” बताया और कहा कि वे खुद को सही समय पर सही जगह पर मानते हैं। उनके अनुसार, ऐसी ऐतिहासिक और सांस्कृतिक रूप से महत्वपूर्ण फिल्म का हिस्सा बनना उनके लिए एक आशीर्वाद जैसा है। ‘रामायण’ फिल्म पर नजरनितेश तिवारी द्वारा निर्देशित यह फिल्म दो भागों में बनाई जा रही है। रणबीर कपूर भगवान राम, साई पल्लवी सीता, यश रावण, रवि दुबे लक्ष्मण और सनी देओल हनुमान के रूप में नजर आएंगे। पहला भाग इस साल दिवाली पर रिलीज होने की संभावना है, जबकि दूसरा भाग 2027 में आएगा।

रणवीर-माधवन नहीं, इस एक्टर से शुरू हुई थी फिल्म की कास्टिंग कहानी

नई दिल्ली। फिल्म ‘धुरंधर’ और उसके सीक्वल की सफलता के बीच एक दिलचस्प कास्टिंग कहानी सामने आई है, जिसने फिल्म इंडस्ट्री और दर्शकों दोनों को हैरान कर दिया है। एक्टर राकेश बेदी ने खुलासा किया है कि इस फिल्म के लिए उन्हें रणवीर सिंह, आर माधवन या अन्य बड़े कलाकारों से भी पहले फाइनल कर लिया गया था। राकेश बेदी के मुताबिक डायरेक्टर आदित्य धर ने उन्हें करीब 3-4 साल पहले ही इस प्रोजेक्ट से जोड़ लिया था, जब फिल्म की स्क्रिप्ट तक पूरी तरह तैयार नहीं हुई थी। उस समय सिर्फ फिल्म का आइडिया मौजूद था और उसी आधार पर कास्टिंग शुरू की गई थी। स्क्रि प्ट से पहले बनी कास्टिंग की नींवराकेश बेदी ने बताया कि आदित्य धर ने ‘उरी’ की सफलता के बाद ही ‘धुरंधर’ के आइडिया पर काम शुरू कर दिया था। उसी दौरान उन्होंने उनके पिछले कामों को देखते हुए उन्हें जमील जमाली के किरदार के लिए चुना। यह निर्णय पूरी तरह भरोसे और उनके अभिनय अनुभव पर आधारित था। उन्होंने कहा कि उनके लिए यह बेहद खास अनुभव है कि किसी निर्देशक ने बिना पूरी स्क्रिप्ट के भी उन पर इतना भरोसा दिखाया। किरदार और वायरल डायलॉग्स ने बढ़ाई लोकप्रियताफिल्म में राकेश बेदी ने पाकिस्तानी नेता जमील जमाली का किरदार निभाया, जिसे दर्शकों ने खूब पसंद किया। ‘धुरंधर 2’ में उनके डायलॉग्स और सीन सोशल मीडिया पर वायरल हो गए, खासकर “मेरा बच्चा है तू” वाला डायलॉग मीम्स का हिस्सा बन गया। बॉक्स ऑफिस पर धमाकेदार प्रदर्शन‘धुरंधर’ फ्रेंचाइज़ी ने बॉक्स ऑफिस पर रिकॉर्ड तोड़ कमाई की है। पहले पार्ट ने लगभग 1300 करोड़ रुपये और दूसरे पार्ट ने 1800 करोड़ रुपये से ज्यादा का ग्लोबल कलेक्शन किया। दोनों पार्ट मिलाकर फिल्म 3000 करोड़ रुपये से अधिक की कमाई कर चुकी है। आगे की फिल्मेंराकेश बेदी अब डेविड धवन की आगामी फिल्म ‘है जवानी तो इश्क होना है’ में नजर आने वाले हैं, जिसमें वरुण धवन, मृणाल ठाकुर और पूजा हेगड़े जैसे कलाकार भी शामिल हैं। फिल्म 4 जून को रिलीज होने वाली है।

एमपी में मौसम ने बदली करवट, आज 9 जिलों में ओले-बारिश का अलर्ट, कई शहरों में बदला रहेगा मौसम

भोपाल। मध्य प्रदेश में नौतपा के दौरान पड़ रही भीषण गर्मी के बीच मौसम ने अचानक करवट ले ली है। प्रदेश के कई हिस्सों में आंधी, बारिश और ओलावृष्टि का दौर शुरू हो गया है। शुक्रवार को ग्वालियर, मुरैना सहित कई जिलों में बारिश दर्ज की गई, जबकि शनिवार को भी ऐसे ही मौसम के बने रहने की संभावना है। मौसम विभाग ने शनिवार के लिए ग्वालियर समेत 9 जिलों में ओलावृष्टि और बारिश का ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। इनमें ग्वालियर, भिंड, दतिया, निवाड़ी, टीकमगढ़, छतरपुर, पन्ना, नीमच और मंदसौर शामिल हैं। नौतपा की तपिश पर बारिश का असरप्रदेश में 25 मई से नौतपा शुरू हुआ था और पहले ही दिन से भीषण गर्मी का दौर देखने को मिला। खजुराहो और नौगांव लगातार सबसे गर्म क्षेत्रों में शामिल रहे, जहां तापमान 47 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच गया था। हालांकि अब मौसम में बदलाव के संकेत मिल रहे हैं। मौसम विभाग के अनुसार 30 मई के बाद अधिकांश जिलों में बारिश की गतिविधियां बढ़ेंगी, जिससे गर्मी का असर कम होगा। ग्वालियर-दतिया में 10 डिग्री तक गिरा तापमाननौतपा के पांचवें दिन शुक्रवार को प्रदेश के कई शहरों में तापमान में बड़ी गिरावट दर्ज की गई। ग्वालियर और दतिया में पारा करीब 10 डिग्री सेल्सियस तक नीचे आ गया। ग्वालियर में 10.2 डिग्री की गिरावट के बाद तापमान 34.5 डिग्री दर्ज हुआ। दतिया में 10.1 डिग्री की कमी के साथ तापमान 35.6 डिग्री रहा। खजुराहो में 7.3 डिग्री और नौगांव में 7.5 डिग्री की गिरावट दर्ज की गई। रीवा में 5.8 डिग्री तथा सतना में 5.6 डिग्री की कमी आई। बड़े शहरों में ऐसा रहा तापमानप्रदेश के प्रमुख शहरों की बात करें तो शुक्रवार को भोपाल में तापमान 40.6 डिग्री, इंदौर में 39.4 डिग्री, उज्जैन में 41.6 डिग्री और जबलपुर में 40.1 डिग्री दर्ज किया गया। वहीं नरसिंहपुर में 43.6 डिग्री, रायसेन में 43 डिग्री, शाजापुर और नर्मदापुरम में 42.5 डिग्री तथा राजगढ़ में 42.4 डिग्री तापमान रिकॉर्ड किया गया। अगले चार दिन ऐसा ही रहेगा मौसममौसम विभाग के अनुसार 31 मई से 2 जून तक प्रदेश में कई स्थानों पर तेज आंधी, बारिश और ओलावृष्टि की संभावना बनी रहेगी। अधिकांश जिलों में बारिश की चेतावनी जारी की गई है। इस दौरान हीटवेव का असर काफी कम हो जाएगा। आज का मौसम अलर्टमौसम विभाग के अनुसार ग्वालियर, भिंड, दतिया, निवाड़ी, टीकमगढ़, छतरपुर, पन्ना, नीमच और मंदसौर में ओलावृष्टि के साथ बारिश होने की संभावना है। इन जिलों के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। आंधी-बारिश का अनुमानभोपाल, इंदौर, उज्जैन, मुरैना, श्योपुर, शिवपुरी, गुना, अशोकनगर, सीहोर, देवास, आगर-मालवा, धार, रतलाम, झाबुआ, अलीराजपुर, रायसेन, नर्मदापुरम, पांढुर्णा, सिवनी, बालाघाट, मंडला, डिंडौरी, अनूपपुर, उमरिया, शहडोल, कटनी, मैहर, सतना, रीवा, मऊगंज, सीधी और सिंगरौली समेत कई जिलों में मौसम का मिजाज बदला हुआ रहेगा। मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि प्रदेश में अगले कुछ दिनों तक आंधी, बारिश और ओलावृष्टि की गतिविधियां जारी रहने से लोगों को भीषण गर्मी से राहत मिलेगी।

ट्विशा केस से फिर गरमाई कानूनी दुनिया: पूर्व जज की गिरफ्तारी और पुराने फैसले पर चर्चा तेज

भोपाल । भोपाल में एक्ट्रेस और मॉडल ट्विशा शर्मा की संदिग्ध मौत के मामले ने अब एक नया कानूनी मोड़ ले लिया है। सीबीआई द्वारा की गई कार्रवाई के बाद पूर्व जिला एवं सत्र न्यायाधीश गिरिबाला सिंह और उनके बेटे समर्थ सिंह को गिरफ्तार कर स्पेशल कोर्ट में पेश किया गया, जहां से दोनों को पांच दिन की पुलिस रिमांड पर भेज दिया गया है। इस कार्रवाई के बाद न्यायिक जगत में हलचल तेज हो गई है। गिरफ्तारी के बाद सबसे ज्यादा चर्चा उनके उस फैसले को लेकर हो रही है, जो उन्होंने फरवरी 2023 में भोपाल के चर्चित फैज कुरैशी हत्याकांड में सुनाया था। उस मामले में अदालत ने आरोपी शफीक कुरैशी को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया था। कोर्ट का फैसला क्यों बना चर्चा का केंद्रफैसले में अदालत ने स्पष्ट कहा था कि अभियोजन पक्ष आरोपी के खिलाफ हत्या का आरोप संदेह से परे साबित नहीं कर सका। सुनवाई के दौरान पेश किए गए प्रत्यक्षदर्शी गवाह अपने बयानों से पलट गए थे। किसी भी गवाह ने अदालत में यह स्वीकार नहीं किया कि उसने आरोपी को वारदात करते देखा। इसके अलावा, पुलिस द्वारा प्रस्तुत जब्ती और जांच संबंधी साक्ष्यों पर भी सवाल उठे। अदालत ने माना कि केवल परिस्थितिजन्य साक्ष्य और पुलिस बयानों के आधार पर किसी को दोषी नहीं ठहराया जा सकता। एफएसएल रिपोर्ट भी आरोपी की संलिप्तता को स्पष्ट रूप से साबित नहीं कर सकी थी। जांच एजेंसियों की कार्रवाई और नई बहसवर्तमान में ट्विशा शर्मा केस में सीबीआई की जांच जारी है। इसी क्रम में पूर्व जज और उनके परिवार पर कार्रवाई ने न्यायिक व्यवस्था और पुराने मामलों की जांच प्रक्रिया पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए कोर्ट ने रिमांड मंजूर की है और आगे की जांच जारी है। इस पूरे घटनाक्रम ने न केवल कानूनी हलकों में बल्कि राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर भी बहस छेड़ दी है। एक ओर जहां जांच एजेंसियां मामले को गंभीर बता रही हैं, वहीं दूसरी ओर पुराने फैसलों की निष्पक्षता और न्यायिक प्रक्रिया पर भी चर्चा तेज हो गई है। ट्विशा केस ने बढ़ाई संवेदनशीलताट्विशा शर्मा की मौत 12 मई की रात भोपाल के कटारा हिल्स क्षेत्र में संदिग्ध परिस्थितियों में हुई थी। मामले में ससुराल पक्ष इसे आत्महत्या बता रहा है, जबकि मायके पक्ष ने हत्या का आरोप लगाया है। जांच अभी विभिन्न कोणों से जारी है। इसी बीच पूर्व जज की गिरफ्तारी और पुराने फैसले की दोबारा चर्चा ने मामले को और अधिक संवेदनशील और जटिल बना दिया है।