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गर्मी में त्वचा रोगों का खतरा बढ़ा, घमौरियों से लेकर संक्रमण तक-लापरवाही पड़ सकती है भारी

नई दिल्ली। देश के कई हिस्सों में भीषण गर्मी और उमस का असर लगातार बढ़ रहा है, जिसका सीधा प्रभाव लोगों के स्वास्थ्य पर दिखने लगा है। तेज धूप, पसीना और नमी के कारण त्वचा संबंधी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि इस मौसम में छोटी दिखने वाली त्वचा समस्याएं भी समय रहते ध्यान न देने पर गंभीर रूप ले सकती हैं। नेशनल हेल्थ मिशन (National Health Mission) के अनुसार, गर्मी और अधिक पसीने के कारण त्वचा के रोमछिद्र बंद हो जाते हैं, जिससे जलन, सूजन और दाने जैसी समस्याएं उत्पन्न होती हैं। इस स्थिति को आमतौर पर घमौरियां या प्रिकली हीट कहा जाता है। घमौरियों के प्रमुख लक्षणत्वचा पर छोटे लाल दाने या फुंसियांतेज खुजली और चुभन जैसा एहसासगर्दन, छाती, कमर और कांख जैसे हिस्सों में अधिक परेशानीकभी-कभी हल्का बुखार या जलनयह समस्या बच्चों, अधिक पसीना आने वाले लोगों और मोटापे से ग्रस्त व्यक्तियों में ज्यादा देखने को मिलती है। बचाव के आसान उपायविशेषज्ञों के अनुसार, सही सावधानी बरतकर इन समस्याओं से काफी हद तक बचा जा सकता है:ठंडी और हवादार जगह पर रहेंत्वचा को साफ और सूखा रखेंनहाने के बाद शरीर को अच्छी तरह पोंछेंबिना सुगंध वाले हल्के टैल्कम पाउडर का उपयोग करेंढीले और सूती कपड़े पहनेंतेज धूप से बचें और बाहर निकलते समय छाता या स्कार्फ का उपयोग करें सावधानी सबसे जरूरडॉक्टरों का कहना है कि इस मौसम में पानी पर्याप्त मात्रा में पीना बेहद जरूरी है और तैलीय या भारी भोजन से बचना चाहिए। बच्चों की त्वचा पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता होती है। यदि दाने बढ़ जाएं, बुखार हो या संक्रमण के लक्षण दिखें, तो तुरंत चिकित्सक से संपर्क करना चाहिए। समय पर देखभाल से इन समस्याओं को गंभीर होने से रोका जा सकता है।

भारत की युवा एथलेटिक्स शक्ति का जलवा, अंडर-20 चैंपियनशिप में 19 पदकों के साथ शानदार प्रदर्शन

नई दिल्ली। 22वीं एशियन अंडर-20 एथलेटिक्स चैंपियनशिप 2026 में भारतीय युवा खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए कुल 19 पदक (10 स्वर्ण, 5 रजत और 4 कांस्य) जीतकर देश का नाम रोशन किया। इस प्रदर्शन की देशभर में सराहना हो रही है और इसे भारत की उभरती खेल प्रतिभा का मजबूत संकेत माना जा रहा है। भारत के प्रदर्शन पर केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah ने भी खिलाड़ियों को बधाई दी और इसे देश की “अदम्य खेल क्षमता का प्रतीक” बताया। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि यह उपलब्धि आने वाले समय में हजारों युवा एथलीटों को प्रेरित करेगी। प्रधानमंत्री Narendra Modi ने भी भारतीय दल की सराहना करते हुए कहा कि यह प्रदर्शन खिलाड़ियों के दृढ़ संकल्प और उत्कृष्टता का प्रमाण है। आखिरी दिन भारत का दमदार प्रदर्शनप्रतियोगिता के अंतिम दिन भारत ने तीन स्वर्ण पदक जीतकर अपने अभियान का शानदार समापन किया।मुस्कान ने 5000 मीटर दौड़ में 16:53.08 के समय के साथ स्वर्ण पदक जीतामोगली वेंकटराम रेड्डी ने 800 मीटर दौड़ में 1:48.27 का समय निकालकर गोल्ड हासिल कियानीरू पाठक की भूमिका से 4×400 मीटर रिले टीम ने भी स्वर्ण पदक अपने नाम कियारिले इवेंट में रिकॉर्ड प्रदर्शन भारतीय महिला 4×400 मीटर रिले टीम ने 3:38.07 सेकंड का समय निकालकर नया मीट रिकॉर्ड बनाया। वहीं पुरुषों की 4×400 मीटर रिले टीम ने भी पुराने रिकॉर्ड को पीछे छोड़ते हुए मजबूत प्रदर्शन किया, हालांकि उन्हें कांस्य पदक से संतोष करना पड़ा। महिला 4×100 मीटर रिले टीम ने भी शानदार प्रदर्शन करते हुए रजत पदक जीता। भारत की बढ़ती एथलेटिक्स ताकतविशेषज्ञों के अनुसार, यह प्रदर्शन भारत में युवा एथलेटिक्स की बढ़ती गहराई और बेहतर प्रशिक्षण प्रणाली का संकेत है। खासकर ट्रैक और फील्ड इवेंट्स में भारत की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता पहले की तुलना में काफी मजबूत हुई है।

मई में ऑटो सेक्टर की रफ्तार तेज, हुंडई और महिंद्रा ने दर्ज की मजबूत बिक्री वृद्धि

नई दिल्ली। देश के ऑटोमोबाइल सेक्टर में मई महीने के दौरान मजबूत मांग का असर साफ दिखाई दिया। प्रमुख वाहन निर्माता कंपनियों में Hyundai Motor India Limited और Mahindra & Mahindra ने घरेलू बाजार में बेहतर प्रदर्शन करते हुए बिक्री में अच्छी बढ़त दर्ज की है। हुंडई की बिक्री में 4.1% की वृद्धिहुंडई मोटर इंडिया लिमिटेड ने मई में कुल 61,137 वाहन बेचे। इसमें 47,837 यूनिट घरेलू बिक्री रही, जो पिछले साल की समान अवधि की तुलना में 9.1 प्रतिशत अधिक है। वहीं कंपनी ने 13,300 वाहनों का निर्यात भी किया। कुल मिलाकर कंपनी की बिक्री में 4.1 प्रतिशत की सालाना वृद्धि दर्ज की गई। महिंद्रा एंड महिंद्रा की 20% की छलांगमहिंद्रा एंड महिंद्रा ने मई में निर्यात सहित कुल 99,636 वाहनों की बिक्री दर्ज की, जो साल-दर-साल आधार पर लगभग 20 प्रतिशत की बढ़ोतरी है। कंपनी के यूटिलिटी व्हीकल (SUV) सेगमेंट ने इस वृद्धि में सबसे अहम भूमिका निभाई। घरेलू बाजार में 58,021 यूटिलिटी वाहन बिके, जो 11 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्शाते हैं। कमर्शियल व्हीकल सेगमेंट में भी कंपनी ने अच्छा प्रदर्शन किया और 24,079 यूनिट की बिक्री दर्ज की, जिसमें 19 प्रतिशत की वृद्धि देखी गई। निर्यात में भी कंपनी ने 37 प्रतिशत की बढ़त हासिल की। मांग मजबूत, लेकिन सप्लाई चुनौतियां कायममहिंद्रा एंड महिंद्रा के ऑटोमोटिव डिवीजन के सीईओ ने बताया कि पूरे पोर्टफोलियो में मांग मजबूत बनी हुई है, हालांकि कुछ सप्लायरों के यहां श्रमिकों की कमी के कारण सप्लाई चेन से जुड़ी चुनौतियां अभी भी बनी हुई हैं। शेयर बाजार में हल्की गिरावटबिक्री के सकारात्मक आंकड़ों के बावजूद बाजार में शुरुआती कारोबार के दौरान दोनों कंपनियों के शेयरों में गिरावट देखी गई। हुंडई का शेयर करीब 1.48 प्रतिशत गिरकर 1,900 रुपये के स्तर पर पहुंच गया, जबकि महिंद्रा एंड महिंद्रा का शेयर लगभग 1.9 प्रतिशत गिरकर 2,982 रुपये तक आ गया। SUV सेगमेंट बना ग्रोथ इंजनविश्लेषकों के अनुसार, घरेलू बाजार में SUV और यूटिलिटी वाहनों की लगातार मजबूत मांग ऑटो सेक्टर की ग्रोथ को समर्थन दे रही है। आने वाले महीनों में त्योहारों की मांग और नए मॉडल लॉन्च इस रफ्तार को और बढ़ा सकते हैं।

म्यूजिक लवर्स के लिए बेस्ट डील? Realme Buds Air 8 Pro पर एक नजर

नई दिल्ली। भारत का ट्रू वायरलेस स्टीरियो (TWS) ईयरबड्स बाजार लगातार तेजी से विकसित हो रहा है, जहां अब यूजर्स केवल बेहतर साउंड क्वालिटी ही नहीं बल्कि प्रीमियम फीचर्स की भी उम्मीद करते हैं। इसी प्रतिस्पर्धी सेगमेंट में टेक ब्रांड Realme ने अपना नया प्रोडक्ट ‘Realme Buds Air8 Pro’ पेश किया है, जिसे खास तौर पर हाई-एंड फीचर्स के साथ बजट सेगमेंट में लाने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। 6,699 रुपये की कीमत वाले इस नए TWS को कंपनी ने “हाई-रेज ऑडियो बीस्ट” के तौर पर पेश किया है। यह डिवाइस म्यूजिक लवर्स, गेमर्स और लगातार यात्रा करने वाले यूजर्स को ध्यान में रखकर डिजाइन किया गया है। कंपनी के अनुसार, बड्स एयर8 प्रो की सबसे बड़ी खासियत इसका 6-माइक सिस्टम और डेडिकेटेड VPU (Voice Processing Unit) है, जो कॉलिंग अनुभव को काफी बेहतर बनाता है। इसमें बोन कंडक्शन तकनीक का इस्तेमाल किया गया है, जिससे यूजर की आवाज ज्यादा साफ तरीके से कैप्चर होती है और आसपास के शोर को कम किया जाता है। यह ईयरबड्स करीब 90 डेसिबल तक का नॉइज रिडक्शन करने में सक्षम हैं, जिससे भीड़भाड़ वाले स्थानों पर भी कॉलिंग अनुभव स्पष्ट बना रहता है। इसके अलावा इसमें AI-बेस्ड नॉइज रिडक्शन और एडैप्टिव ऑडियो ऑप्टिमाइजेशन जैसे फीचर्स भी शामिल हैं। साउंड क्वालिटी की बात करें तो इसमें 11mm बेस ड्राइवर और 6mm माइक्रो-प्लानर ट्वीटर के साथ ड्यूल ड्राइवर सिस्टम दिया गया है, जो हाई-रेज ऑडियो सपोर्ट के साथ बेहतर बेस और क्लैरिटी प्रदान करता है। यह डिवाइस LHDC 5.0 ऑडियो को सपोर्ट करता है और 20Hz से 40kHz तक की फ्रीक्वेंसी रेंज देता है। नॉइज कैंसिलेशन के मामले में इसमें 55dB तक का एडैप्टिव एक्टिव नॉइज कैंसिलेशन (ANC) दिया गया है, जो वातावरण के अनुसार अपने आप एडजस्ट हो जाता है। साथ ही ट्रांसपेरेंसी मोड भी मौजूद है, जिससे यूजर बिना ईयरबड निकाले आसपास की आवाजें सुन सकता है। बैटरी लाइफ भी इसकी बड़ी ताकत मानी जा रही है। केस के साथ यह कुल 50 घंटे तक का प्लेबैक टाइम देता है, जबकि सिर्फ 10 मिनट की चार्जिंग में करीब 11 घंटे तक का बैकअप मिल सकता है। इसके साथ IP55 रेटिंग, टच कंट्रोल और वेयर डिटेक्शन जैसे फीचर्स भी शामिल हैं। गेमिंग यूजर्स के लिए इसमें 45 मिलीसेकंड अल्ट्रा-लो लेटेंसी मोड दिया गया है, जो ऑडियो और वीडियो को सिंक में रखता है। साथ ही ब्लूटूथ 6.1 कनेक्टिविटी इसे और ज्यादा स्टेबल बनाती है। कंपनी का दावा है कि यह डिवाइस प्रीमियम सेगमेंट जैसी सुविधाएं किफायती कीमत में उपलब्ध कराता है। यह 3 जून 2026 से बिक्री के लिए उपलब्ध होगा और इसे ऑनलाइन तथा ऑफलाइन दोनों प्लेटफॉर्म्स से खरीदा जा सकेगा।

टीएमसी पर हमले को लेकर सियासत गरम, भाजपा-विपक्ष में तकरार

नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल की राजनीति में टीएमसी नेताओं पर हुए कथित हमलों को लेकर सियासी माहौल गरमा गया है। इस घटना के बाद सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस (TMC) और विपक्षी दलों के बीच तीखी बयानबाजी शुरू हो गई है। टीएमसी की ओर से दावा किया जा रहा है कि उसके नेताओं पर हमले लोकतांत्रिक व्यवस्था पर हमला हैं, जबकि विपक्षी दलों का कहना है कि यह घटनाएं जनता में बढ़ते आक्रोश का परिणाम हैं। इसी बीच विभिन्न दलों के नेताओं ने अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देकर राजनीतिक बहस को और तेज कर दिया है। कांग्रेस प्रवक्ता सुरेंद्र राजपूत ने पश्चिम बंगाल की कानून-व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि राज्य में हालात चिंताजनक हैं और वहां तक कि सांसद भी सुरक्षित नहीं हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य में भय का माहौल बनाया गया है और आम जनता भी असुरक्षित महसूस कर रही है। वहीं जेडीयू नेता हरि नारायण सिंह ने पश्चिम बंगाल की राजनीतिक स्थिति पर टिप्पणी करते हुए कहा कि राज्य में लंबे समय से तनावपूर्ण माहौल रहा है। उन्होंने कहा कि हालिया घटनाएं अचानक नहीं हैं, बल्कि यह जनता की नाराजगी का परिणाम हैं। साथ ही उन्होंने यह भी दावा किया कि पार्टी के भीतर भी असंतोष और टूट की स्थिति बन रही है। दूसरी ओर भाजपा नेताओं ने इन घटनाओं को जनता की प्रतिक्रिया बताते हुए विपक्ष के आरोपों को खारिज किया है। भाजपा नेता टी.आर. श्रीनिवास ने विपक्ष पर पलटवार करते हुए कहा कि जब पहले हिंसा की घटनाएं हुईं, तब वही नेता चुप थे, और अब स्थिति बदलने पर सवाल उठा रहे हैं। उन्होंने इसे राजनीतिक अवसरवाद करार दिया। इसी मुद्दे पर जेडीयू के राष्ट्रीय प्रवक्ता राजीव रंजन ने भी टिप्पणी करते हुए कहा कि राजनीतिक दलों को आत्ममंथन करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि टीएमसी के भीतर असंतोष और इस्तीफों की खबरें यह संकेत देती हैं कि पार्टी आंतरिक चुनौतियों से जूझ रही है। पूरा विवाद अब केवल राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसे राज्य में कानून-व्यवस्था और लोकतांत्रिक माहौल से जोड़कर देखा जा रहा है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर और राजनीतिक टकराव बढ़ने की संभावना जताई जा रही है।

ईरान पर जरूरत पड़ी तो फिर होगी सैन्य कार्रवाई: इजरायली राजदूत का बड़ा बयान, वेस्ट एशिया तनाव फिर बढ़ा

नई दिल्ली। वेस्ट एशिया में तनाव और कूटनीतिक हलचल के बीच इजरायल ने एक बार फिर कड़ा रुख अपनाया है। नई दिल्ली स्थित इजरायली दूतावास के राजदूत रियूवेन अजार ने साफ कहा है कि यदि परिस्थितियां बिगड़ती हैं तो इजरायल ईरान के खिलाफ दोबारा सैन्य कार्रवाई करने से पीछे नहीं हटेगा। यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिका और ईरान के बीच संभावित समझौते को लेकर चर्चाएं तेज हैं और पश्चिम एशिया में तनाव को कम करने की कोशिशें जारी हैं। हालांकि, इजरायल ने संकेत दिया है कि वह सुरक्षा से जुड़े किसी भी खतरे को लेकर समझौता नहीं करेगा। इजरायली राजदूत ने कहा कि ईरानी सत्ता पिछले दो दशकों से क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए चुनौती बनी हुई है। उनका आरोप है कि ईरान अंतरराष्ट्रीय नियमों और परमाणु अप्रसार संधि (NPT) तथा अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के दिशा-निर्देशों का पालन ठीक से नहीं कर रहा है। उन्होंने कहा कि IAEA की रिपोर्टों में भी ईरान की अनुपालन स्थिति पर सवाल उठाए गए हैं। राजदूत के अनुसार, यदि कोई देश कानूनी अधिकारों का दावा करता है, तो उसे अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था का पालन भी करना होगा। उन्होंने यह भी कहा कि इजरायल क्षेत्र में सुरक्षा बनाए रखने के लिए पूरी तरह सतर्क है और जरूरत पड़ने पर निर्णायक कदम उठाएगा। इसी बीच लेबनान को लेकर भी इजरायल ने अपना रुख स्पष्ट किया है। प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के आदेश पर बेरूत के दक्षिणी उपनगरों में हिज्बुल्लाह के ठिकानों पर हमले किए गए। इजरायल का कहना है कि यह कार्रवाई उसके उत्तरी क्षेत्रों में रहने वाले नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए जरूरी थी। राजदूत अजार ने दावा किया कि संघर्षविराम के बावजूद इजरायल पर 1000 से अधिक रॉकेट और ड्रोन हमले हुए हैं, जिनमें कई नागरिकों की जान भी गई है। उन्होंने कहा कि जब तक हिज्बुल्लाह स्थायी संघर्षविराम और हमले रोकने की गारंटी नहीं देता, तब तक जवाबी कार्रवाई जारी रहेगी। इजरायल ने यह भी संकेत दिया कि वह केवल सैन्य ही नहीं बल्कि क्षेत्रीय आर्थिक स्थिरता के लिए भी योगदान देने को तैयार है, बशर्ते सुरक्षा स्थिति नियंत्रण में रहे। राजदूत ने कहा कि पश्चिम एशिया में स्थिरता तभी संभव है जब सभी पक्ष जिम्मेदारी के साथ व्यवहार करें और आतंकवादी गतिविधियों पर रोक लगे। इस बयान के बाद एक बार फिर पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने की आशंका जताई जा रही है, खासकर ऐसे समय में जब कूटनीतिक प्रयासों से शांति की उम्मीदें भी बनी हुई हैं।

भारत-ओमान ट्रेड डील से किसानों और व्यापारियों को बड़ा फायदा, गोयल का बयान

नई दिल्ली। भारत और ओमान के बीच बहुप्रतीक्षित व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौता (CEPA) सोमवार से लागू हो गया है, जिससे दोनों देशों के बीच व्यापारिक रिश्तों में एक नया अध्याय शुरू हो गया है। इस समझौते को भारत की वैश्विक व्यापार रणनीति के लिए एक बड़ा कदम माना जा रहा है, जिसका सीधा लाभ किसानों, छोटे व्यापारियों, कारीगरों और लघु एवं मध्यम उद्योगों (MSME) को मिलने की उम्मीद है। वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने इस समझौते को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आर्थिक विज़न की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया है। उन्होंने कहा कि यह समझौता भारत के निर्यात को नए बाजार उपलब्ध कराएगा, विदेशी निवेश को आकर्षित करेगा और देश में रोजगार सृजन को गति देगा। CEPA लागू होने के बाद ओमान में भारत के लगभग 99.38 प्रतिशत निर्यात को 98 प्रतिशत टैरिफ लाइनों पर तुरंत शून्य शुल्क (Zero Duty) का लाभ मिल जाएगा। इससे भारतीय उत्पाद ओमान के बाजार में पहले की तुलना में अधिक प्रतिस्पर्धी हो जाएंगे। पहले जहां केवल 15.3 प्रतिशत निर्यात पर ही शुल्क-मुक्त पहुंच थी, अब यह दायरा बेहद व्यापक हो गया है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, इस समझौते से ओमान को भारत का निर्यात 4.06 अरब डॉलर से बढ़कर आने वाले वर्षों में 6 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है, जबकि मध्य अवधि में यह 10 अरब डॉलर तक जाने की संभावना जताई जा रही है। इसके चलते कपड़ा, चमड़ा, जूते, रत्न-आभूषण, कृषि उत्पाद, इंजीनियरिंग, ऑटो कंपोनेंट्स और फार्मा जैसे क्षेत्रों में बड़ा विस्तार देखने को मिल सकता है। विशेष रूप से श्रम-प्रधान क्षेत्रों जैसे टेक्सटाइल और हैंडीक्राफ्ट सेक्टर को बड़ा लाभ मिलने की उम्मीद है। तिरुपुर, सूरत, लुधियाना, पानीपत, कोयंबटूर, जयपुर और अहमदाबाद जैसे औद्योगिक केंद्रों में उत्पादन और रोजगार दोनों बढ़ सकते हैं। इस समझौते के तहत भारत ने भी 77.79 प्रतिशत टैरिफ लाइनों पर उदारीकरण की पेशकश की है, जो ओमान से आने वाले 94.81 प्रतिशत आयात को कवर करता है। हालांकि, भारत ने अपने संवेदनशील क्षेत्रों—जैसे डेयरी, चाय, कॉफी, रबर और तंबाकू—को किसी भी रियायत से बाहर रखा है ताकि घरेलू उद्योगों और किसानों के हित सुरक्षित रह सकें। इसके अलावा सोना-चांदी, आभूषण और कुछ श्रम-प्रधान उत्पादों पर भी सीमित या कोटा आधारित व्यवस्था लागू की गई है। सरकार का मानना है कि यह संतुलित समझौता भारत के हितों की रक्षा करते हुए वैश्विक व्यापार को मजबूती देगा। विशेषज्ञों के अनुसार, इस समझौते से भारत की सेवाक्षेत्र अर्थव्यवस्था को भी फायदा मिलेगा, क्योंकि ओमान का आयात बाजार बड़ा और विविध है, जो भारतीय कंपनियों के लिए नए अवसर खोल सकता है।

मारुति सुजुकी की रिकॉर्ड बिक्री, मई में 2.43 लाख के करीब पहुंचा आंकड़ा

नई दिल्ली। भारत की सबसे बड़ी कार निर्माता कंपनी मारुति सुजुकी इंडिया ने मई में ऐतिहासिक प्रदर्शन करते हुए कुल 2,42,688 वाहनों की बिक्री दर्ज की है। यह कंपनी के इतिहास में अब तक की सबसे अधिक मासिक बिक्री है, जिसने अप्रैल में बने पिछले रिकॉर्ड को भी पीछे छोड़ दिया। कंपनी के अनुसार, मई 2025 की तुलना में इस साल मई में कुल बिक्री में लगभग 34.8 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। पिछले वर्ष इसी अवधि में यह आंकड़ा 1,80,077 यूनिट्स था। घरेलू बाजार में कंपनी ने 1,93,535 वाहनों की बिक्री की, जो पिछले वर्ष के 1,38,690 यूनिट्स की तुलना में लगभग 39 प्रतिशत अधिक है। वहीं, निर्यात भी बढ़कर 41,914 यूनिट्स तक पहुंच गया। इसके अलावा अन्य ऑटोमोबाइल कंपनियों को 7,239 वाहनों की आपूर्ति की गई। मारुति के पैसेंजर व्हीकल सेगमेंट, जिसमें हैचबैक, सेडान, वैन और SUV शामिल हैं, ने इस वृद्धि में सबसे अहम भूमिका निभाई। इस श्रेणी में कुल 1,90,337 वाहन बेचे गए, जबकि पिछले वर्ष यह आंकड़ा 1,35,962 था। SUV और यूटिलिटी वाहनों की मांग में भी तेज उछाल देखा गया। ब्रेजा, फ्रॉन्क्स, जिम्नी, ग्रैंड विटारा, अर्टिगा, XL6 और इनविक्टो जैसे मॉडलों की बिक्री 44.4 प्रतिशत बढ़कर 79,267 यूनिट्स तक पहुंच गई। छोटे कार सेगमेंट में भी मजबूत वृद्धि दर्ज हुई, जहां ऑल्टो और एस-प्रेसो की बिक्री दोगुने से अधिक होकर 16,275 यूनिट्स हो गई। कंपनी का निर्यात भी बढ़कर 41,914 यूनिट्स पर पहुंच गया, जो पिछले साल मई में 31,219 यूनिट्स था। कमर्शियल व्हीकल सेगमेंट में भी मामूली बढ़त दर्ज की गई। मारुति सुजुकी ने इससे पहले अप्रैल में भी रिकॉर्ड बिक्री दर्ज की थी और लगातार मजबूत मांग के चलते कंपनी का प्रदर्शन बढ़ता जा रहा है। कंपनी भविष्य में लॉजिस्टिक्स को और अधिक कुशल बनाने के लिए रेल परिवहन का उपयोग बढ़ाने की योजना पर भी काम कर रही है। इसके तहत 2030-31 तक वाहनों की ढुलाई में रेल हिस्सेदारी 35 प्रतिशत तक करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके अलावा कंपनी ने संकेत दिए हैं कि कच्चे माल और उत्पादन लागत बढ़ने के कारण जून 2026 से कई मॉडलों की कीमतों में अधिकतम 30,000 रुपये तक की बढ़ोतरी की जा सकती है।

भारत-ओमान व्यापार समझौते से निर्यात में बड़ा उछाल, 50% बढ़ोतरी की उम्मीद

नई दिल्ली। भारत और ओमान के बीच बहुप्रतीक्षित व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौता (CEPA) सोमवार से लागू हो गया है, जिसके बाद दोनों देशों के बीच व्यापारिक रिश्तों में तेज़ी आने की उम्मीद है। इस समझौते का मुख्य उद्देश्य भारत के निर्यात को बढ़ावा देना और द्विपक्षीय व्यापार को नए स्तर पर ले जाना है। सरकारी अनुमान के अनुसार, इस समझौते के लागू होने के बाद भारत का ओमान को वस्तु निर्यात अगले तीन वर्षों में लगभग 50 प्रतिशत तक बढ़ सकता है। वर्तमान में भारत का ओमान को निर्यात करीब 4.06 अरब डॉलर का है, जिसे बढ़ाकर 6 अरब डॉलर तक पहुंचाने और मध्य अवधि में 10 अरब डॉलर का लक्ष्य रखा गया है। समझौते के तहत ओमान ने भारत को अपनी 98.08 प्रतिशत टैरिफ लाइनों पर शून्य शुल्क (Zero Duty) की सुविधा दी है। इसका लाभ भारत के लगभग 99.38 प्रतिशत निर्यात को मिलेगा। इससे जेम्स एंड ज्वेलरी, टेक्सटाइल, चमड़ा, जूता उद्योग, खेल सामग्री, प्लास्टिक, फर्नीचर, इंजीनियरिंग उत्पाद, फार्मा, मेडिकल डिवाइस और ऑटोमोबाइल जैसे क्षेत्रों को बड़ा फायदा मिलने की उम्मीद है। वहीं भारत ने भी ओमान के लिए 77.79 प्रतिशत टैरिफ लाइनों पर शुल्क में रियायत दी है, जो मूल्य के हिसाब से ओमान के भारत को होने वाले आयात का लगभग 94.81 प्रतिशत हिस्सा कवर करता है। हालांकि, भारत ने अपने संवेदनशील क्षेत्रों जैसे कृषि उत्पाद, डेयरी, चाय, कॉफी, रबर, तंबाकू, सोना-चांदी और कुछ श्रम-प्रधान उत्पादों को इस समझौते से बाहर रखा है। विशेषज्ञों के अनुसार, इस समझौते से भारत के सेवा क्षेत्र (Service Sector) को भी बड़ा लाभ मिल सकता है, क्योंकि ओमान का सेवा आयात लगभग 12.52 अरब डॉलर का है, जिससे भारतीय कंपनियों के लिए नए अवसर खुलेंगे। भारत और ओमान ने इस समझौते पर पिछले वर्ष दिसंबर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मस्कट यात्रा के दौरान हस्ताक्षर किए थे। इसके अलावा भारत हाल के वर्षों में ब्रिटेन, न्यूजीलैंड और यूरोपीय संघ के साथ भी व्यापार समझौतों को आगे बढ़ा चुका है।

जबलपुर के जस्टिस रूसिया को नई भूमिका, न्यायपालिका में अहम नियुक्ति

जबलपुर। मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय में बड़ा प्रशासनिक बदलाव हुआ है। न्यायाधीश विवेक रूसिया को हाईकोर्ट का कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश नियुक्त किया गया है। केंद्रीय विधि एवं न्याय मंत्रालय की ओर से इस संबंध में आधिकारिक आदेश जारी किए गए हैं। यह नियुक्ति उस समय हुई जब मौजूदा मुख्य न्यायाधीश संजीव सचदेवा का प्रमोशन सुप्रीम कोर्ट में न्यायाधीश के रूप में हो गया। उनके स्थान पर अब जस्टिस विवेक रूसिया ने कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश की जिम्मेदारी संभाली है। जस्टिस विवेक रूसिया का जन्म 2 अगस्त 1969 को जबलपुर में हुआ था। उन्होंने बीएससी और एलएलबी की पढ़ाई पूरी करने के बाद वर्ष 1992 में मध्यप्रदेश राज्य बार काउंसिल में अधिवक्ता के रूप में पंजीयन कराया था। उनके पिता स्वर्गीय प्रभाकर रूसिया भी जबलपुर हाईकोर्ट में वरिष्ठ अधिवक्ता रहे हैं, जिससे उनका कानूनी क्षेत्र से जुड़ाव शुरू से ही रहा। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत वरिष्ठ अधिवक्ताओं के साथ सहयोगी के रूप में की और बाद में 1998 में स्वतंत्र प्रैक्टिस शुरू की। इसके बाद वे कोल इंडिया, विभिन्न पावर कंपनियों और सरकारी संस्थानों के पैनल वकील बने। जस्टिस रूसिया ने भारत सरकार के स्थायी वकील के रूप में भी सेवाएं दीं और हाईकोर्ट एडवोकेट्स बार एसोसिएशन, जबलपुर में संयुक्त सचिव के पद पर भी रहे। 7 अप्रैल 2016 को उन्हें मध्यप्रदेश हाईकोर्ट का न्यायाधीश नियुक्त किया गया था और 17 मार्च 2018 को वे स्थायी न्यायाधीश बने। अब उनकी नियुक्ति कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश के रूप में हुई है, जिससे न्यायपालिका में प्रशासनिक जिम्मेदारियों का नया अध्याय शुरू हुआ है।