तेज हवाओं का असर, इंदौर में व्यवस्था बहाली के लिए युद्धस्तर पर काम

मध्य प्रदेश । इंदौर में सोमवार को अचानक मौसम ने करवट ली और तेज धूलभरी आंधी ने शहर में काफी नुकसान पहुंचाया। आंधी के चलते शहर के विभिन्न हिस्सों में करीब 150 स्थानों पर पेड़ और डगाले गिरने की घटनाएं सामने आईं, जिससे कई इलाकों में यातायात और सामान्य जनजीवन प्रभावित हुआ। जैसे ही सूचना नगर निगम को मिली, टीमों को तुरंत मौके पर भेजा गया और पेड़ों व डगालों को हटाने का काम शुरू किया गया। मंगलवार को भी शहर के कई हिस्सों में सफाई और मलबा हटाने का कार्य लगातार जारी रहा। निगम की टीमें अलर्ट मोड पर, 24 घंटे निगरानीनगर निगम ने स्थिति को देखते हुए अपनी सभी टीमों को अलर्ट मोड पर रख दिया है। अधिकारियों के अनुसार अब दिन या रात किसी भी समय सूचना मिलने पर टीम तुरंत कार्रवाई के लिए तैयार रहेगी। उद्यान विभाग के अधिकारी शांतिलाल यादव ने बताया कि आंधी के कारण बड़ी संख्या में पेड़ और डगाले गिरे, जिनमें से कई को सोमवार को ही हटाकर सड़क किनारे कर दिया गया था, जबकि बाकी को मंगलवार को भी हटाया जा रहा है। वाहनों को नुकसान, लेकिन जनहानि नहींप्रशासन के अनुसार आंधी के कारण कुछ स्थानों पर खड़े वाहनों को नुकसान पहुंचा है, हालांकि राहत की बात यह है कि किसी प्रकार की जनहानि नहीं हुई है। नगर निगम की टीमें प्रभावित क्षेत्रों में लगातार काम कर रही हैं ताकि जल्द से जल्द यातायात और सामान्य स्थिति बहाल की जा सके। तेज हवाओं के बाद सतर्कता बढ़मौसम विभाग की चेतावनियों को देखते हुए नगर निगम ने भी सतर्कता बढ़ा दी है। अधिकारियों ने बताया कि भविष्य में किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए टीमें तैयार रखी गई हैं और निगरानी व्यवस्था को और मजबूत किया गया है।
शिवपुरी में खेत में मिला युवक का शव: शरीर पर चोट के निशान, परिजनों ने जताई हत्या की आशंका

मध्य प्रदेश । शिवपुरी जिले के गौचोनी गांव में मंगलवार सुबह एक 27 वर्षीय युवक का शव खेत में मिलने से इलाके में सनसनी फैल गई। सूचना मिलते ही हिम्मतपुर चौकी पुलिस मौके पर पहुंची और घटनास्थल का निरीक्षण करते हुए शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। मृतक की पहचान पवन लोधी पुत्र रामेश्वर लोधी, निवासी गौचोनी के रूप में हुई है। पुलिस ने पंचनामा कार्रवाई पूरी कर शव को पोस्टमार्टम के बाद परिजनों को सौंप दिया। रखवाली करने गया था युवक, सुबह मिला शवपरिजनों के अनुसार, सोमवार को गांव में रामायण पाठ के उपलक्ष्य में भंडारे का आयोजन था। कार्यक्रम के बाद पवन लोधी खेत की रखवाली करने गया था। मंगलवार सुबह उसके मौत की सूचना मिली, जिसके बाद परिवार में कोहराम मच गया। परिजनों ने जताई हत्या की आशंकामृतक के रिश्तेदार उमेश लोधी ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि पवन के शरीर पर चोट के निशान पाए गए हैं। साथ ही उसका मोबाइल फोन शव से करीब 50 मीटर दूर टूटी हुई हालत में मिला, जिससे मामले को संदिग्ध माना जा रहा है। परिजनों का कहना है कि गांव में कुछ लोगों से पुरानी रंजिश चल रही थी, इसलिए उन्हें आशंका है कि यह हत्या का मामला हो सकता है। पुलिस जांच में जुटी, पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजारहिम्मतपुर चौकी प्रभारी धर्मेंद्र सिंह गुर्जर ने बताया कि मौत के कारणों का स्पष्ट खुलासा पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही हो सकेगा। फिलहाल पुलिस सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए मामले की जांच कर रही है। गांव में तनाव, जांच पर टिकी नजरघटना के बाद गांव में तनाव का माहौल है और लोग अलग-अलग तरह की चर्चाएं कर रहे हैं। पुलिस ने कहा है कि हर पहलू की गहन जांच की जा रही है और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
26 लाख की स्मैक के साथ तस्कर गिरफ्तार, बड़े नेटवर्क का खुलासा

मध्य प्रदेश । शिवपुरी जिले में नशे के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत फिजिकल थाना पुलिस ने बड़ी सफलता हासिल की है। पुलिस ने ग्वालियर जिले के एक कथित स्मैक तस्कर को गिरफ्तार किया है, जिसके कब्जे से भारी मात्रा में नशीला पदार्थ, नकदी और वाहन बरामद किए गए हैं। गिरफ्तार आरोपी की पहचान रामनिवास उर्फ करुआ रावत (35) निवासी ग्राम पाटई, थाना आरोन, जिला ग्वालियर के रूप में हुई है। पुलिस ने उसके पास से 106 ग्राम स्मैक, 52 हजार रुपये नकद, एक मोबाइल फोन और तस्करी में इस्तेमाल की जा रही मोटरसाइकिल जब्त की है। जब्त सामग्री की कुल कीमत करीब 28 लाख रुपये से अधिक बताई गई है। मुखबिर की सूचना पर हुई कार्रवाईफिजिकल थाना प्रभारी कृपाल सिंह राठौड़ ने बताया कि पुलिस को सूचना मिली थी कि करवला पुलिया के पास एक व्यक्ति स्मैक बेचने की फिराक में मौजूद है। सूचना मिलते ही पुलिस टीम मौके पर पहुंची, जहां संदिग्ध व्यक्ति पुलिस को देखकर भागने लगा। घेराबंदी कर उसे पकड़ लिया गया। पूछताछ में बड़ा खुलासा: फैला था नेटवर्कपूछताछ में आरोपी ने स्वीकार किया कि वह अपने साथी राजेंद्र रावत के साथ मिलकर स्मैक तस्करी का नेटवर्क संचालित करता था। पुलिस के अनुसार, राजेंद्र बड़े सप्लायरों से नशीला पदार्थ लाकर दोनों मिलकर उसे ग्वालियर और आसपास के क्षेत्रों में सप्लाई करते थे। जांच में यह भी सामने आया है कि यह नेटवर्क केवल ग्वालियर तक सीमित नहीं था, बल्कि शिवपुरी, करेरा, सुभाषपुरा और बैराड़ जैसे क्षेत्रों तक फैला हुआ था। युवाओं को बनाया जा रहा था निशानापुलिस जांच में यह भी पता चला है कि आरोपियों ने कई गांवों में युवाओं को निशाना बनाकर स्मैक की सप्लाई शुरू कर दी थी, जिससे क्षेत्र में नशे का नेटवर्क तेजी से फैल रहा था। पहले से दर्ज हैं मामले, एनडीपीएस एक्ट में केसफिजिकल थाना पुलिस ने आरोपी के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट की धारा 8/21 के तहत मामला दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस अब उसके नेटवर्क और मुख्य सप्लायरों की तलाश में जुटी है। जानकारी के अनुसार, आरोपी रामनिवास के खिलाफ पहले भी बैराड़ थाना में एनडीपीएस एक्ट का मामला दर्ज है, जो न्यायालय में विचाराधीन है। पुलिस का सख्त संदेशथाना प्रभारी कृपाल सिंह राठौड़ ने कहा कि नशे के कारोबार के खिलाफ अभियान लगातार जारी रहेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस तरह की अवैध गतिविधियों में शामिल किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा।
विदिशा में अड़ीबाजी पर पुलिस का बड़ा एक्शन, बदमाश का निकाला जुलूस

मध्य प्रदेश । विदिशा जिले में कोतवाली पुलिस ने अड़ीबाजी और अवैध वसूली के आरोपी राहुल अहिरवार (36) का सार्वजनिक जुलूस निकालकर कड़ा संदेश दिया है। आरोपी पर कृषि उपज मंडी के व्यापारियों से मारपीट, धमकी और पैसों की जबरन मांग करने के गंभीर आरोप थे। पुलिस ने आरोपी को मंडी क्षेत्र, बरईपुरा चौराहा और आसपास के इलाकों में घुमाया, जहां उसने लोगों के सामने अपने अपराधों के लिए माफी मांगते हुए तौबा करने की बात कही। मंडी में व्यापारियों से मारपीट और धमकी का मामलाकोतवाली थाना प्रभारी आनंद राज ने बताया कि आरोपी राहुल अहिरवार कुछ समय पहले कृषि उपज मंडी क्षेत्र में शराब के नशे में व्यापारियों से पैसे मांग रहा था। विरोध करने पर उसने व्यापारियों के साथ मारपीट की और उन्हें धमकाया भी था। इस मामले में उसके खिलाफ विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया था, जिसके बाद से वह फरार चल रहा था। पुलिस की सख्त कार्रवाई, फरार आरोपी गिरफ्तारपुलिस अधीक्षक रोहित काशवानी के निर्देश पर जिले में फरार और आदतन अपराधियों के खिलाफ विशेष अभियान चलाया जा रहा है। इसी अभियान के तहत कोतवाली पुलिस ने मुखबिर तंत्र और तकनीकी साक्ष्यों की मदद से आरोपी को बरईपुरा क्षेत्र से गिरफ्तार किया। गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने आरोपी को उन स्थानों पर ले जाकर कार्रवाई दिखाई, जहां उसने पहले लोगों को डराने-धमकाने और अवैध वसूली की घटनाओं को अंजाम दिया था। सार्वजनिक संदेश: अपराधियों में डर, जनता में भरोसापुलिस द्वारा निकाले गए इस जुलूस का उद्देश्य आमजन में सुरक्षा का विश्वास बढ़ाना और अपराधियों में कानून का भय पैदा करना बताया गया। थाना प्रभारी आनंद राज ने कहा कि गुंडागर्दी, अड़ीबाजी और अवैध वसूली करने वालों के खिलाफ अभियान लगातार जारी रहेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि ऐसे असामाजिक तत्वों के खिलाफ न केवल कानूनी कार्रवाई की जाएगी, बल्कि सार्वजनिक रूप से भी सख्त संदेश दिया जाएगा, ताकि शहर में कानून व्यवस्था मजबूत बनी रहे।
स्क्रीन पर कॉपियां जांचने का सिरदर्द: सीबीएसई के नए सिस्टम से शिक्षक बेहाल

ज्ञान चंद पाटनीसेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन (सीबीएसई) के नए ऑन स्क्रीन मार्किंग (ओएसएम) सिस्टम ने विद्यार्थियों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। इससे बोर्ड की साख भी प्रभावित हुई है। 12वीं कक्षा के हजारों विद्यार्थियों ने अपनी आंसर शीट की स्कैन कॉपी मांगी है क्योंकि वे परिणाम से संतुष्ट नहीं हैं। ओएसएम सिस्टम की वजह से परिणाम में गड़बड़ी के आरोप गंभीर बात है। बारहवीं के बाद विद्यार्थी प्रोफेशनल और उच्च शिक्षा की राह खोजने के लिए निकलते हैं। ऐसे समय में विद्यार्थी अपने परिणाम को लेकर आशंकित हैं, तो सवाल तो उठेंगे ही। सीबीएसई के नए ऑन स्क्रीन मार्किंग(ओएसएम) सिस्टम पर स्टूडेंट्स, अभिभावक और विपक्षी दल सवाल उठा रहे हैं। इस सिस्टम को उत्तरपुस्तिकाओं की जांच को सटीक और तेज बनाने के लिए लाया गया था, लेकिन सामने आ रही गड़बड़ियां दूसरी ही कहानी कह रही हैं। विद्यार्थी अपने आपको ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं। पहले परीक्षा के बाद उत्तरपुस्तिकाओं के बंडल बनाकर अध्यापकों को दिए जाते थे। वे उन्हें जांचते थे, नंबर जोड़ते थे और साइन करते थे। इस बार सीबीएसई ने नया तरीका अपनाया। पहले सभी कॉपियां स्कैन की गईं। यानी उनकी डिजिटल फोटो खींची गईं। फिर यह फोटो ऑनलाइन सिस्टम पर अपलोड की गई। शिक्षकों ने कंप्यूटर या लैपटॉप की स्क्रीन पर कॉपी की फोटो देखकर नंबर दिए। सीबीएसई ने ओएसएम सिस्टम को लेकर कहा कि इससे जांच की प्रक्रिया ज्यादा तेज और सटीक हो सकेगी। साथ ही मैनुअल गलतियां कम से कम रहेंगी लेकिन अब इस दावे पर सवाल उठ रहे हैं। 12वीं कक्षा के बहुत से विद्यार्थी धुंधली उत्तरपुस्तिका और उत्तरपुस्तिका बदलने तक की शिकायत कर रहे हैं। मुद्दा इतना तूल पकड़ चुका है कि सीबीएसई के 12वीं बोर्ड परीक्षा में बैठे हर चार में से करीब एक छात्र ने अपनी जांची हुई आंसर शीट की स्कैन कॉपी मांगी है। एक छात्र वेदांत श्रीवास्तव ने सोशल मीडिया पर दावा किया था कि बोर्ड ने उन्हें एक विषय की गलत आंसर शीट भेजी है। मामला तब और बढ़ गया जब उन्हें पाकिस्तानी बताकर ट्रोल किया गया। सोशल मीडिया पर हुए हल्ले के बाद सीबीएसई ने वेदांत के केस में हुई तकनीकी समस्या को तो हल कर दिया लेकिन नए असेसमेंट सिस्टम यानी ओएसएम से जुड़ी शिकायतें कम नहीं हुईं। कई विद्यार्थियों का कहना है कि स्कैन कॉपी में दिख रही उत्तरपुस्तिका उनकी है ही नहीं, जैसे वेदांत के मामले में हुआ था। कुछ विद्यार्थियों के मुताबिक, उनकी सप्लीमेंट्री शीट गायब है। कई जवाबों को जांचा ही नहीं गया। स्टेप मार्किंग के सिस्टम को नजरअंदाज किया गया। अगर छात्र ने सवाल का पूरा जवाब न लिखा हो, लेकिन कुछ स्टेप सही किए तो भी उसे नंबर मिलते थे, लेकिन कई विद्यार्थियों का आरोप है कि उनकी कॉपी जांचते समय इस प्रावधान का पालन नहीं हुआ। ओएसएम प्रणाली से कॉपी जांचने वाले परीक्षकों की ट्रेनिंग पर सवाल उठ रहे हैं। पहले अध्यापक ऑफलाइन में भी गड़बड़ियां करते थे। कभी टोटलिंग में नंबर छूट जाते थे, तो कभी सही जवाब को गलत मार्क कर दिया जाता था। इन सबसे बचने के लिए ऑन स्क्रीन मार्किंग (ओएसएम) सिस्टम लाया गया। एग्जाम ऑफलाइन लिया जा रहा है और जांच ऑनलाइन हो रही है। इस प्रक्रिया के लिए परीक्षकों को लंबी ट्रेनिंग मिलनी चाहिए थी, लेकिन सतही प्रशिक्षण के बाद सिस्टम लागू हो गया। बेहतर तो यह था कि जब तक शिक्षक इस तकनीक में पूरी तरह प्रशिक्षित नहीं होते, तब तक इसे अपनाया नहीं जाता, लेकिन पता नहीं किस दबाव में इसे लागू कर दिया गया। इससे सीबीएसई की साख पर सवाल लगा ही, विद्यार्थी अपने भविष्य को लेकर आशंकित भी हो रहे हैं। बोर्ड को यह सुनिश्चित करना होगा कि प्रत्येक छात्र को न्याय मिले, उनका भरोसा बना रहे और उनका भविष्य प्रभावित न हो। तभी शिक्षा व्यवस्था विश्वसनीय बनी रहेगी। 12वीं के बाद अच्छी यूनिवर्सिटी में एडमिशन चाह रहे विद्यार्थी तनाव में हैं। अंकों में मामूली गड़बड़ी भी उनके भविष्य पर असर डाल सकती है। यह बात भी उठ रही है कि जब मैनुअल जांच पर ही भरोसा करना है तो ऑन स्क्रीन मार्किंग (ओएसएम) सिस्टम लागू ही क्यों हुआ? तकनीकी गड़बड़ी सीधे-सीधे छात्रों के भविष्य को प्रभावित कर रही है। स्कैन कॉपी मिलने के बाद री-इवैल्यूएशन होगा, तब कहीं जाकर सही स्थिति पता लगेगी। इसमें समय लगेगा। इस बीच कई कॉलेजों में काउंसलिंग शुरू होने जा रही है। सीबीएसई के ऑन स्क्रीन मार्किंग (ओएसएम) सिस्टम को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। ऐसे में अचानक कई स्कूलों के प्रिंसिपल वीडियो जारी कर रहे हैं। इनमें वे दावा करते हुए दिखाई दे रहे हैं कि सीबीएसई की नई मार्किंग स्कीम ओएसएम अच्छी है, सुरक्षित है और छात्रों के लिए फायदेमंद है। असल में सीबीएसई को समझ नहीं आ रहा है कि वह अपने नए सिस्टम को कैसे बचाए। मां-बाप परेशान हैं, विद्यार्थियों के रिजल्ट पर सवाल उठ रहे हैं, स्कैन कॉपी में धुंधलापन, गलत आंसर शीट और नंबर न मिलने की शिकायतें सामने आ रही हैं। इस बीच प्रिंसिपल को पीआर वीडियो बनाने पर मजबूर किया जा रहा है। यह संकेत है कि सीबीएसई का संकट बहुत बड़ा है और वह अपने सिस्टम की सच्चाई को छिपाने के लिए अन्य तरीके अपना रहा है। 17 लाख 68 हजार विद्यार्थियों में से 4 लाख 4 हजार छात्रों ने स्कैन कॉपी के लिए आवेदन किया है। यह कुल विद्यार्थियों का 23 फीसदी है। इतनी बड़ी संख्या में छात्रों की शिकायतें हैं, लेकिन सीबीएसई प्रिंसिपल के वीडियो के जरिए यह बताने की कोशिश कर रहा है कि सब ठीक है। यह गलत संकेत है। सीबीएसई को छात्रों की शिकायतों को गंभीरता से लेना चाहिए, न कि प्रचार के जरिए उन्हें छिपाना चाहिए। प्रिंसिपल के वीडियो क्यों आ रहे हैं? शायद स्कूल प्रबंधन पर सीबीएसई का दबाव है। शायद प्रिंसिपलों को आदेश दिया गया है कि वे ओएसएम के समर्थन में वीडियो बनाएं। यह डराने-धमकाने की प्रक्रिया हो सकती है। अगर ऐसा है, तो यह चिंता की बात है। सीबीएसई को समस्याओं को सुलझाना चाहिए। इन्हें छिपाने के लिए नए—नए हथकंडे नहीं अपनाने चाहिए। तकनीक का उपयोग समस्या के समाधान के लिए होना चाहिए, न कि समस्या बढ़ाने के लिए। विद्यार्थियों के भविष्य को जोखिम में डालकर कोई भी नया
विदिशा में अवैध कॉलोनियों का दर्द, सुविधाओं के लिए कलेक्ट्रेट पहुंचे लोग

मध्य प्रदेश । विदिशा जिले में अवैध कॉलोनियों का मुद्दा एक बार फिर सामने आया है। जतरपुरा क्षेत्र स्थित गोकुलधाम फेस-1 और सूरज नगर कॉलोनी के रहवासी मंगलवार को अपनी समस्याओं को लेकर कलेक्ट्रेट पहुंचे। यहां उन्होंने जनसुनवाई में शिकायत दर्ज कराते हुए कॉलोनाइजर पर गंभीर आरोप लगाए। रहवासियों का कहना है कि प्लॉट बेचते समय उन्हें सड़क, बिजली, पानी, नाली और अन्य बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया गया था, लेकिन वर्षों बीत जाने के बाद भी कॉलोनी में कोई व्यवस्था नहीं की गई है। बुनियादी सुविधाओं के अभाव में जीवन मुश्किलकॉलोनी में रहने वाले लोगों का कहना है कि वे आज भी मूलभूत सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहे हैं। गोकुलधाम कॉलोनी के रहवासी पहले भी कई बार जनसुनवाई में पहुंचकर शिकायत दर्ज करा चुके हैं और कॉलोनाइजर के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर चुके हैं। पूर्व में प्रशासन द्वारा मामले की जांच भी कराई गई थी और तहसीलदार ने रहवासियों के बयान दर्ज किए थे। जांच में कॉलोनी में सुविधाओं की गंभीर कमी की पुष्टि भी हुई थी, जिसके बाद कॉलोनाइजर के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था। “वादे किए गए, लेकिन सुविधाएं नहीं मिलीं”स्थानीय निवासी पूजा वर्मा ने बताया कि प्लॉट खरीदते समय सभी सुविधाएं देने का वादा किया गया था, लेकिन आज तक सड़क, पानी और बिजली जैसी बुनियादी जरूरतें पूरी नहीं की गई हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि शिकायत करने पर कुछ लोगों द्वारा दबाव बनाने और धमकाने जैसी घटनाएं भी सामने आई हैं, जिससे रहवासी डर के माहौल में रहने को मजबूर हैं। अवैध कॉलोनियों का बढ़ता जाल, प्रशासन पर सवालविदिशा शहर और आसपास के क्षेत्रों में अवैध कॉलोनियों का तेजी से विस्तार हो रहा है। आकर्षक दावों और विकास के वादों के नाम पर लोगों को प्लॉट बेच दिए जाते हैं, लेकिन बाद में उन्हें बुनियादी सुविधाओं के लिए परेशान होना पड़ता है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि राजनीतिक संरक्षण और प्रशासनिक ढिलाई के कारण कॉलोनाइजर बेखौफ होकर ऐसे काम कर रहे हैं। समय पर कार्रवाई न होने से आम लोग अपनी जीवनभर की जमा पूंजी लगाकर भी परेशान हो रहे हैं। प्रशासनिक व्यवस्था पर उठे सवालइस पूरे मामले ने प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब अवैध कॉलोनियों का विस्तार हो रहा था, तब संबंधित विभागों ने समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं की। अब रहवासियों की मांग है कि कॉलोनाइजर के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो और कॉलोनियों में जल्द से जल्द सड़क, पानी और बिजली जैसी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं।
कटनी में मेडिकल कॉलेज निर्माण शुरू, विरोध के बीच भूमिपूजन टला

मध्य प्रदेश । कटनी जिले में पीपीपी (पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप) मॉडल पर प्रस्तावित मेडिकल कॉलेज का निर्माण कार्य सोमवार से शुरू कर दिया गया है। कछगवां क्षेत्र के पास चिह्नित लगभग 25 एकड़ भूमि पर यह परियोजना अब बिना किसी औपचारिक भूमिपूजन या वीआईपी कार्यक्रम के आगे बढ़ाई जा रही है। यह परियोजना मध्य प्रदेश सरकार और स्वामी विवेकानंद फाउंडेशन के बीच हुए समझौता ज्ञापन (एमओयू) के तहत विकसित की जा रही है। हालांकि, शुरुआत से ही इस योजना को लेकर स्थानीय स्तर पर विरोध और आपत्तियां सामने आती रही हैं। लगातार विरोध के चलते टला भूमिपूजनस्थानीय नागरिकों और सामाजिक संगठनों का कहना है कि स्वास्थ्य और शिक्षा जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों को निजी हाथों में नहीं दिया जाना चाहिए। इसी मुद्दे को लेकर जिले में लंबे समय से असंतोष बना हुआ है। विरोध के कारण इस परियोजना का भूमिपूजन दो बार टालना पड़ा। पहले मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का कार्यक्रम प्रस्तावित था, लेकिन विरोध की आशंका के चलते उसे स्थगित कर दिया गया। इसके बाद केंद्रीय मंत्री जे.पी. नड्डा का कार्यक्रम भी रद्द कर दिया गया। स्थिति को देखते हुए अब प्रशासन ने बिना किसी वीआईपी आयोजन के सीधे निर्माण कार्य शुरू कराने का निर्णय लिया है। सरकार का तर्क: स्वास्थ्य ढांचे को मिलेगा मजबूत आधारसरकारी पक्ष का मानना है कि यह मेडिकल कॉलेज क्षेत्र में चिकित्सा शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत करेगा। इससे स्थानीय युवाओं को मेडिकल शिक्षा के बेहतर अवसर अपने ही जिले में मिल सकेंगे। पीपीपी मॉडल को लेकर सरकार का दावा है कि इससे परियोजना तेजी से पूरी होगी और संसाधनों का बेहतर उपयोग संभव होगा। जनता की चिंता: निजीकरण पर उठे सवालहालांकि दूसरी ओर स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों में इस मॉडल को लेकर गहरी नाराजगी है। उनका आरोप है कि स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी बुनियादी सेवाओं को निजी प्रबंधन के हवाले करने से आम जनता पर आर्थिक बोझ बढ़ सकता है। लोगों का कहना है कि इलाज और मेडिकल शिक्षा महंगी हो सकती है, जिससे गरीब और मध्यम वर्ग के लिए पहुंच कठिन हो जाएगी। “शासकीय मेडिकल कॉलेज नहीं तो वोट नहीं” का नारास्थानीय समाजसेवी विंधेश्वरी पटेल ने कड़े शब्दों में विरोध जताते हुए कहा कि वे लंबे समय से पूर्णतः शासकीय मेडिकल कॉलेज की मांग कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि पीपीपी मॉडल का वे विरोध नहीं कर रहे, लेकिन शासकीय नियंत्रण जरूरी है। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि आने वाले समय में बड़ा जन आंदोलन चलाया जाएगा और इसका नारा होगा- “कटनी को शासकीय मेडिकल कॉलेज नहीं तो भाजपा को वोट नहीं।” आगे की राह पर नजरफिलहाल परियोजना का निर्माण कार्य प्रारंभ हो चुका है, जिसमें पहले चरण में बाउंड्री वॉल का निर्माण और भूमि की सुरक्षा शामिल है। प्रशासन का कहना है कि यह एक दीर्घकालिक विकास परियोजना है, जबकि विरोधी इसे निजीकरण की दिशा में उठाया गया कदम बता रहे हैं। अब देखना यह होगा कि यह विवाद आगे राजनीतिक रूप लेता है या सरकार और जनता के बीच कोई बीच का रास्ता निकल पाता है।
जातिसूचक टिप्पणी के आरोप से गरमाया मामला, प्रशासन पर दबाव

मध्य प्रदेश । कटनी जिले के कोतवाली थाने में दर्ज एक FIR को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। आरोप है कि FIR में ड्यूटी पर तैनात एक पुलिसकर्मी ने शिकायत दर्ज करते समय जातिसूचक शब्दों का प्रयोग किया। इस मामले के सामने आने के बाद सामाजिक संगठन भीम आर्मी आजाद समाज पार्टी ने कड़ा विरोध दर्ज कराया है। मंगलवार को संगठन के पदाधिकारियों ने कटनी पुलिस अधीक्षक (SP) कार्यालय पहुंचकर ज्ञापन सौंपा और दोषी पुलिसकर्मी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की। साथ ही उन्होंने FIR से आपत्तिजनक शब्दों को हटाने की भी अपील की है। 30 मई की घटना से शुरू हुआ मामलामिली जानकारी के अनुसार, यह पूरा मामला 30 मई का है। कोतवाली थाना क्षेत्र के खरहनी फाटक निवासी अशोक अहिरवार (42) ने शिकायत दर्ज कराई थी कि उनके पड़ोसियों मुरेरी चौधरी, उनकी पत्नी, अजुदन चौधरी और संजय चौधरी ने उनके साथ गाली-गलौज और मारपीट की। पीड़ित जब रिपोर्ट दर्ज कराने थाने पहुंचे, तो ड्यूटी पर मौजूद प्रधान आरक्षक नितिन जायसवाल ने उनकी शिकायत के आधार पर FIR दर्ज की। आरोप है कि इसी FIR के विवरण में मोहल्ले के नाम का उल्लेख करते समय अनुचित रूप से जातिसूचक शब्द शामिल कर दिए गए। सामाजिक संगठन का विरोध, कार्रवाई की मांगघटना सामने आने के बाद भीम आर्मी आजाद एकता मिशन ने इसे अनुसूचित जाति समाज का अपमान बताया है। संगठन के जिला उपाध्यक्ष संदीप चौधरी ने कहा कि पुलिस का कार्य निष्पक्ष रूप से पीड़ित की सहायता करना और समानता बनाए रखना है, लेकिन इस तरह के शब्दों का उपयोग गंभीर आपत्ति का विषय है। उन्होंने मांग की कि संबंधित प्रधान आरक्षक पर तत्काल कार्रवाई की जाए और FIR रिकॉर्ड को संशोधित कर आपत्तिजनक शब्द हटाए जाएं। पुलिस अधीक्षक का बयान, जांच के आदेशइस मामले पर पुलिस अधीक्षक अभिनय विश्वकर्मा ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि संभवतः FIR में वही विवरण दर्ज किया गया होगा जो शिकायतकर्ता द्वारा बताया गया था। उन्होंने यह भी कहा कि मामले की जांच की जाएगी और तथ्यों के आधार पर उचित कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। जांच पर टिकी निगाहेंफिलहाल यह मामला जांच के दायरे में है। एक ओर सामाजिक संगठन कार्रवाई की मांग कर रहे हैं, वहीं पुलिस प्रशासन ने निष्पक्ष जांच का आश्वासन दिया है। आने वाले दिनों में जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी।
डिजिटल क्रांति और सोशल मीडिया: क्या नए रूप में उभरेगा लोकतंत्र का चौथा स्तंभ?

सौरभ वार्ष्णेयआज की पत्रकारिता: संघर्ष, जिम्मेदारी और विश्वास की परीक्षा बन कर रह गई है। लोकतंत्र के चार प्रमुख स्तंभों में पत्रकारिता को केवल कहने भर को विशेष स्थान प्राप्त है। पत्रकारिता केवल समाचारों का संकलन और प्रसारण भर नहीं है, बल्कि यह समाज को जागरूक करने, सत्ता से प्रश्न पूछने और जनभावनाओं को अभिव्यक्ति देने का सशक्त माध्यम भी है। किंतु वर्तमान समय में पत्रकारिता अनेक चुनौतियों, दबावों और संघर्षों के दौर से गुजर रही है। ऐसे समय में पत्रकारिता की भूमिका, जिम्मेदारी और विश्वसनीयता पर गंभीर चिंतन आवश्यक हो गया है। अभी ३० मई पत्रकारिता दिवस बीता है लेकिन सत्ता की तरफ से सिर्फ रस्म अदायगी? क्या वाकई पत्रकारिता लोकतंत्र का चौथा स्तंभ संविधान के तहत बन पायेगा या हम पत्रकार बिरादरी सिर्फ गाहे गवाये ढोल पीटते रह जायेंगे? पत्रकारिता सिर्फ और सिर्फ कहने भर का चौथा स्तंभ रह जायेगा। यह एक ज्वलंत विषय है। आज सूचना क्रांति का युग है। इंटरनेट, सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म ने समाचारों के प्रसार को अत्यंत तेज बना दिया है। जहां पहले एक समाचार को पाठकों तक पहुंचने में घंटों या दिनों का समय लगता था, वहीं अब कुछ ही सेकंड में खबरें दुनिया भर में पहुंच जाती हैं। लेकिन इस तेजी के साथ एक बड़ी चुनौती भी सामने आई है—सत्य और असत्य के बीच अंतर करने की चुनौती। फर्जी खबरें, आधी-अधूरी जानकारी और भ्रामक प्रचार पत्रकारिता की विश्वसनीयता को प्रभावित कर रहे हैं। पत्रकारिता का मूल उद्देश्य निष्पक्षता, सत्यता और जनहित की रक्षा करना है। लेकिन आज कई बार व्यावसायिक प्रतिस्पर्धा, टीआरपी की दौड़ और राजनीतिक प्रभाव के कारण पत्रकारिता अपने मूल सिद्धांतों से भटकती दिखाई देती है। समाचारों की प्रस्तुति में सनसनीखेजता बढ़ रही है, जबकि तथ्यों की गहराई और निष्पक्ष विश्लेषण को अपेक्षित महत्व नहीं मिल पा रहा है। यह स्थिति लोकतंत्र और समाज दोनों के लिए चिंता का विषय है। दूसरी ओर, जमीनी स्तर पर कार्य करने वाले पत्रकारों का संघर्ष भी कम नहीं है। अनेक पत्रकार सीमित संसाधनों में काम करते हुए जनसमस्याओं को उजागर करने का प्रयास करते हैं। कई बार उन्हें सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक दबावों का सामना करना पड़ता है। दूर-दराज के क्षेत्रों में कार्यरत संवाददाता जनता और प्रशासन के बीच सेतु का कार्य करते हैं, लेकिन उनके योगदान को हमेशा उचित सम्मान और सुरक्षा नहीं मिल पाती। डिजिटल युग ने पत्रकारिता को नए अवसर भी प्रदान किए हैं। स्वतंत्र पत्रकारिता, वैकल्पिक मीडिया और ऑनलाइन समाचार मंचों ने आम लोगों की आवाज को व्यापक मंच दिया है। अब कोई भी महत्वपूर्ण मुद्दा सोशल मीडिया के माध्यम से राष्ट्रीय बहस का विषय बन सकता है। हालांकि, इस स्वतंत्रता के साथ जिम्मेदारी भी जुड़ी हुई है। बिना सत्यापन के सूचना साझा करना समाज में भ्रम और अविश्वास पैदा कर सकता है। आज पत्रकारिता के सामने सबसे बड़ी परीक्षा जनता के विश्वास को बनाए रखने की है। पाठक और दर्शक केवल खबर नहीं, बल्कि विश्वसनीय खबर चाहते हैं। पत्रकारों और मीडिया संस्थानों को यह समझना होगा कि उनका सबसे बड़ा पूंजीगत निवेश जनता का विश्वास है। यदि यह विश्वास कमजोर होता है, तो पत्रकारिता का प्रभाव और महत्व दोनों प्रभावित होंगे। आवश्यकता इस बात की है कि पत्रकारिता अपने मूल मूल्यों—सत्य, निष्पक्षता, पारदर्शिता और जनहित—को पुन: केंद्र में स्थापित करे। पत्रकारों को तथ्यपरक रिपोर्टिंग, नैतिक मानकों और सामाजिक जिम्मेदारी को सर्वोच्च प्राथमिकता देनी चाहिए। साथ ही सरकारों और समाज को भी स्वतंत्र एवं निर्भीक पत्रकारिता के लिए अनुकूल वातावरण उपलब्ध कराना चाहिए। पत्रकारिता केवल एक पेशा नहीं, बल्कि लोकतंत्र की आत्मा को जीवंत रखने का माध्यम है। चुनौतियां चाहे कितनी भी बड़ी हों, यदि पत्रकारिता सत्य और जनहित के मार्ग पर अडिग रहती है, तो वह समाज का विश्वास जीतने में सफल होगी। आज की पत्रकारिता वास्तव में संघर्ष, जिम्मेदारी और विश्वास की परीक्षा के दौर से गुजर रही है, और यही परीक्षा उसके भविष्य की दिशा भी तय करेगी। भारतीय पत्रकारिता की गौरवशाली यात्राभारतीय पत्रकारिता का इतिहास केवल समाचारों का इतिहास नहीं है, बल्कि यह जनचेतना, सामाजिक परिवर्तन, लोकतांत्रिक मूल्यों और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के संघर्ष की भी कहानी है। वर्ष 1826 में प्रकाशित उदन्त मार्तण्ड से लेकर आज के डिजिटल युग तक पत्रकारिता ने लंबा सफर तय किया है। यह यात्रा अनेक चुनौतियों, संघर्षों, उपलब्धियों और जिम्मेदारियों से भरी रही है। 30 मई 1826 को पंडित जुगल किशोर शुक्ल द्वारा कोलकाता से प्रकाशित उदन्त मार्तण्ड हिंदी का पहला समाचार पत्र था। सीमित संसाधनों, आर्थिक कठिनाइयों और सरकारी उपेक्षा के बावजूद इस पत्र ने हिंदी पत्रकारिता की नींव रखी। यहीं से हिंदी भाषा में समाचारों और विचारों के प्रसार का एक नया युग प्रारंभ हुआ। स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान पत्रकारिता ने देशभक्ति और जनजागरण का महत्वपूर्ण दायित्व निभाया। अनेक समाचार पत्रों और पत्रकारों ने अंग्रेजी शासन के विरुद्ध आवाज उठाई। समाचार पत्र केवल सूचना का माध्यम नहीं रहे, बल्कि स्वतंत्रता संग्राम के सशक्त हथियार बन गए। उस दौर की पत्रकारिता का मूल उद्देश्य राष्ट्रहित और जनहित था। स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद पत्रकारिता ने लोकतंत्र के चौथे स्तंभ के रूप में अपनी भूमिका को और मजबूत किया। सत्ता की जवाबदेही सुनिश्चित करना, जनता की समस्याओं को उठाना और सामाजिक मुद्दों को सामने लाना इसकी प्रमुख जिम्मेदारियां बनीं। प्रिंट मीडिया के साथ-साथ रेडियो और टेलीविजन ने भी पत्रकारिता के दायरे को व्यापक बनाया। इक्कीसवीं सदी में इंटरनेट और सोशल मीडिया के आगमन ने पत्रकारिता का स्वरूप पूरी तरह बदल दिया। आज समाचार कुछ ही सेकंड में दुनिया के किसी भी कोने तक पहुंच जाता है। डिजिटल प्लेटफॉर्म ने सूचना के प्रसार को तेज और व्यापक बनाया है, लेकिन इसके साथ फेक न्यूज, भ्रामक सूचनाएं, टीआरपी की प्रतिस्पर्धा और विश्वसनीयता का संकट जैसी नई चुनौतियां भी सामने आई हैं। आज पत्रकारिता एक ऐसे मोड़ पर खड़ी है जहां तकनीकी विकास और नैतिक मूल्यों के बीच संतुलन बनाए रखना सबसे बड़ी आवश्यकता है। पत्रकारिता का उद्देश्य केवल खबर देना नहीं, बल्कि सत्य, निष्पक्षता और जनहित की रक्षा करना भी है। यदि पत्रकारिता अपनी मूल भावना से भटकती है, तो समाज और लोकतंत्र दोनों कमजोर पड़ सकते हैं। विश्व प्रेस स्वतंत्रता और पत्रकारिता दिवस जैसे अवसर हमें याद दिलाते हैं कि पत्रकारिता का वास्तविक उद्देश्य सत्ता या किसी विशेष विचारधारा का समर्थन करना नहीं, बल्कि जनता की आवाज बनना
भू-अधिकार की लड़ाई में सड़क पर उतरे ग्रामीण, प्रशासन से जवाब तलब

मध्य प्रदेश । कटनी जिले में मंगलवार को आदिवासी समुदाय के सैकड़ों लोगों ने कलेक्ट्रेट कार्यालय के मुख्य द्वार पर धरना प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारी वन विभाग द्वारा उनकी जमीनों के कथित अधिग्रहण की कार्रवाई से नाराज थे। इस दौरान उन्होंने जिला प्रशासन और वन विभाग के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और अपनी जमीनों पर अधिकार बहाल करने की मांग उठाई। प्रदर्शन का केंद्र रीठी तहसील के अंतर्गत आने वाला ग्राम ललितपुर रहा, जहां के कई आदिवासी परिवार वर्षों से खेती कर अपनी आजीविका चला रहे हैं। धरने में शामिल ग्रामीणों ने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि उनके भू-अधिकार पट्टे वापस नहीं किए गए तो आंदोलन और तेज किया जाएगा। 1989 से काबिज जमीन पर अब विवाद, वन विभाग पर आरोपप्रदर्शन में शामिल ग्रामीणों ने बताया कि शासन द्वारा उन्हें वर्ष 1989 में विधिवत भू-अधिकार पट्टे दिए गए थे। इन पट्टों के आधार पर वे लगातार लगभग तीन दशकों से अधिक समय से जमीन पर काबिज हैं और खेती कर अपने परिवारों का भरण-पोषण कर रहे हैं।आदिवासी परिवारों का आरोप है कि अब वन विभाग उनकी इसी जमीन को अपना बताकर जबरन कब्जा करने की कोशिश कर रहा है, जिससे उनके सामने आजीविका का गंभीर संकट खड़ा हो गया है। पीड़ितों का दर्द: “रोजी-रोटी छीनी जा रही है”प्रदर्शन में शामिल पीड़ित बृजलाल ने अपनी व्यथा व्यक्त करते हुए कहा कि वे वर्षों से इस जमीन पर मेहनत कर रहे हैं। उन्होंने कहा, “हमने इस जमीन पर खून-पसीना बहाया है। शासन ने ही हमें पट्टा दिया था, अब वन विभाग इसे अपनी जमीन बता रहा है। यह हमारे साथ अन्याय है और हमारी रोजी-रोटी छीनी जा रही है।” कलेक्टर के नाम सौंपा ज्ञापन, उच्च स्तरीय जांच की मांगधरना प्रदर्शन के दौरान आदिवासी प्रतिनिधियों ने कलेक्टर के नाम एक ज्ञापन भी सौंपा, जिसे डिप्टी कलेक्टर को दिया गया। ज्ञापन में वन विभाग की कार्रवाई को पूरी तरह से अन्यायपूर्ण बताते हुए पूरे मामले की उच्च स्तरीय और निष्पक्ष जांच की मांग की गई है। साथ ही प्रदर्शनकारियों ने अपने भू-अधिकार पट्टों को यथावत रखने और वन विभाग के हस्तक्षेप पर तत्काल रोक लगाने की मांग की। ग्रामीणों ने प्रशासन से अपील की कि उन्हें उनकी जमीन पर शांतिपूर्वक खेती करने का अधिकार फिर से सुनिश्चित किया जाए। प्रशासन पर निगाहें, आंदोलन की चेतावनीप्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द कार्रवाई नहीं की गई, तो वे आंदोलन को और व्यापक रूप देंगे। फिलहाल इस पूरे मामले को लेकर प्रशासन की प्रतिक्रिया का इंतजार किया जा रहा है।