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पन्ना में NHM स्वास्थ्यकर्मियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल: नियमितीकरण की मांग पर स्वास्थ्य सेवाएं ठप, मरीज परेशान

मध्य प्रदेश । पन्ना जिले में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के अंतर्गत कार्यरत संविदा स्वास्थ्य कर्मचारियों ने अपनी मांगों को लेकर 2 जून से अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी है। इस हड़ताल के चलते जिलेभर में स्वास्थ्य सेवाएं पूरी तरह प्रभावित हो गई हैं और अस्पतालों का ऑनलाइन व ऑफलाइन कामकाज ठप पड़ गया है। ऑनलाइन-ऑफलाइन कामकाज पूरी तरह बंदसंविदा स्वास्थ्य कर्मचारी संघ के अनुसार, हड़ताल के पहले ही दिन से कर्मचारियों ने सार्थक ऐप पर उपस्थिति दर्ज करना और दैनिक रिपोर्टिंग का कार्य बंद कर दिया है। साथ ही स्वास्थ्य योजनाओं से जुड़े सभी ऑनलाइन डेटा एंट्री कार्य भी पूरी तरह रोक दिए गए हैं। इसके कारण ग्रामीण और शहरी स्वास्थ्य केंद्रों में व्यवस्था चरमरा गई है और मरीजों को इलाज के लिए परेशान होना पड़ रहा है। मरीजों की परेशानी बढ़ी, CHO और स्टाफ ने रोका कामहड़ताल में शामिल CHO, संविदा डॉक्टरों और अन्य स्वास्थ्य कर्मियों के काम बंद करने से अस्पतालों में आने वाले मरीजों को जांच और उपचार में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। कई स्वास्थ्य केंद्रों में सेवाएं बाधित होने से लोगों को दूर-दराज के अस्पतालों का रुख करना पड़ रहा है। नियमितीकरण की मांग पर अड़ा संघसंघ के जिला अध्यक्ष नरेंद्र तिवारी ने बताया कि कर्मचारियों से लंबे समय से नियमितीकरण का वादा किया जा रहा है, लेकिन अब तक इस पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। उनका कहना है कि जब तक नियमितीकरण की मांग पूरी नहीं होती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। चरणबद्ध आंदोलन से अनिश्चितकालीन हड़ताल तककर्मचारियों ने 25 मई को काली पट्टी बांधकर विरोध शुरू किया था और ज्ञापन भी सौंपा था। लेकिन सरकार की ओर से कोई समाधान न मिलने पर अब आंदोलन को अनिश्चितकालीन हड़ताल में बदल दिया गया है। भोपाल घेराव की चेतावनीसंघ ने चेतावनी दी है कि यदि मांगें पूरी नहीं की गईं तो 8 जून को प्रदेशभर के हजारों कर्मचारी भोपाल पहुंचकर मुख्यमंत्री निवास का घेराव करेंगे।

ग्वालियर में भाभी की गोली लगने से मौत का मामला उलझा: देवर बोला ‘मजाक में चला ट्रिगर’, मायके पक्ष ने लगाया हत्या का आरोप

मध्य प्रदेश । ग्वालियर के तृप्ति नगर में 32 वर्षीय ज्योति उर्फ जाह्नवी कुशवाह की गोली लगने से हुई मौत का मामला अब गंभीर रूप से उलझता जा रहा है। एक ओर जहां मृतका के देवर योगेश ने इसे गलती से हुआ हादसा बताया है, वहीं दूसरी ओर मायके पक्ष ने इसे सुनियोजित हत्या करार दिया है। पुलिस ने देवर को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि मृतका का पति अभी फरार है और उसकी तलाश जारी है। देवर का दावा: ‘मजाक में चला ट्रिगर, गोली चल गई’पुलिस पूछताछ में देवर योगेश ने बताया कि वह रात में पिस्टल के साथ हवाई फायरिंग कर रहा था, इसी दौरान एक कारतूस चेंबर में फंस गया था। उसने बताया कि सुबह जब वह नीचे आया तो उसने मजाक में पिस्टल पहले भाई और फिर बहन पर तानकर ट्रिगर दबाया, लेकिन गोली नहीं चली। इसके बाद जब उसने भाभी ज्योति के सिर पर पिस्टल सटाकर ट्रिगर दबाया, तो चेंबर में फंसा कारतूस चल गया और गोली सीधे उनके सिर में लग गई, जिससे उनकी मौत हो गई। शव छिपाने का आरोप, फ्रीजर में रखने से बढ़ा शकघटना के बाद परिजनों पर पुलिस को सूचना देने के बजाय शव को डीप फ्रीजर में रखने का आरोप भी लगा है। मायके पक्ष का कहना है कि यदि यह वास्तव में दुर्घटना थी, तो तुरंत अस्पताल क्यों नहीं ले जाया गया। मायके पक्ष का आरोप: ‘हत्या और साक्ष्य मिटाने की कोशिश’मृतका के भाई भावेश ने थाटीपुर थाने में शिकायत दर्ज कराते हुए आरोप लगाया कि घटना को हादसा बताकर छिपाने की कोशिश की गई। उनका कहना है कि शव को अस्पताल ले जाने के बजाय छिपाया गया और अंतिम संस्कार की तैयारी भी की जा रही थी। परिजनों ने यह भी आरोप लगाया कि मृतका को शादी के बाद से पति द्वारा प्रताड़ित किया जाता था और मामले में पूरे परिवार की भूमिका की जांच होनी चाहिए। पुलिस जांच में जुटी, पति फरारथाटीपुर थाना पुलिस ने आरोपी देवर योगेश को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है। पुलिस का कहना है कि हथियार की बरामदगी और घटना की वास्तविक परिस्थितियों की जांच की जा रही है। वहीं, मृतका का पति मनोज कुशवाह अभी फरार है और उसकी गिरफ्तारी के लिए पुलिस लगातार दबिश दे रही है। जांच पर टिकी नजरफिलहाल पुलिस इस मामले को हादसा और हत्या दोनों एंगल से जांच रही है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट और हथियार की फॉरेंसिक जांच के बाद ही पूरे घटनाक्रम की स्पष्ट तस्वीर सामने आने की उम्मीद है।

नरसिंहपुर में राजस्व न्यायालयों पर सवाल, वकीलों ने उठाई आवाज

मध्य प्रदेश । नरसिंहपुर जिले में मंगलवार को अधिवक्ताओं ने राजस्व न्यायालयों की कार्यप्रणाली में सुधार की मांग को लेकर एक ज्ञापन सौंपा। यह ज्ञापन राजस्व मंत्री करण सिंह वर्मा, प्रभारी मंत्री गोविंद सिंह राजपूत और श्रम मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल के नाम प्रभारी अपर कलेक्टर गजेंद्र नागेश को दिया गया। अधिवक्ताओं ने आरोप लगाया कि राजस्व न्यायालयों में न केवल मामलों के निपटारे में देरी हो रही है, बल्कि कई बार उनके साथ सम्मानजनक व्यवहार भी नहीं किया जाता, जिससे न्यायिक प्रक्रिया पर सवाल खड़े होते हैं। लंबित मामलों और ऑनलाइन प्रक्रिया पर उठे सवालज्ञापन में अधिवक्ताओं ने कहा कि राजस्व न्यायालयों में मामलों का समय पर पंजीयन और निपटारा नहीं हो रहा है। उनका आरोप है कि कई मामलों को केवल पोर्टल पर लंबित न दिखाने के उद्देश्य से ऑनलाइन डिस्पोज कर दिया जाता है, जबकि वास्तविक सुनवाई ऑफलाइन जारी रहती है। इसके साथ ही, बिना उचित प्रक्रिया के मामलों को खारिज करने और अपंजीकृत प्रकरणों के संचालन को लेकर भी गंभीर आपत्तियां दर्ज की गई हैं। नियमित अधिकारी और समयबद्ध न्यायालय कार्य की मांगअधिवक्ताओं ने मांग की कि नरसिंहपुर जिले में नियमित अपर कलेक्टर की तत्काल नियुक्ति की जाए। वर्तमान में जिला पंचायत सीईओ को अपर कलेक्टर का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है, जिससे न्यायालयीन कार्य प्रभावित हो रहे हैं। उन्होंने यह भी मांग की कि अपर कलेक्टर न्यायालय में सुनवाई के लिए निश्चित दिन और समय तय किया जाए ताकि वकीलों और पक्षकारों को अनावश्यक परेशानी न हो। कर्मचारियों पर कार्रवाई और पारदर्शिता की मांगज्ञापन में यह भी मांग की गई कि न्यायालय में लंबे समय से पदस्थ कर्मचारियों को हटाया जाए, ऑनलाइन और ऑफलाइन मामलों की जांच कराई जाए तथा दोषी पाए जाने पर सख्त कार्रवाई की जाए। अधिवक्ताओं ने जोर देकर कहा कि लंबित प्रकरणों का शीघ्र पंजीयन और समयबद्ध निराकरण सुनिश्चित किया जाना चाहिए ताकि आम नागरिकों को न्याय में देरी न हो। प्रशासन से समाधान की उम्मीदअधिवक्ताओं ने प्रशासन से इस पूरे मामले में गंभीरता से संज्ञान लेने और जल्द सुधारात्मक कदम उठाने की मांग की है। अब सभी की नजर प्रशासन की आगामी कार्रवाई पर टिकी हुई है।

नरसिंहपुर में किसानों का अर्धनग्न प्रदर्शन: मूंग की शत-प्रतिशत खरीदी और 12 घंटे बिजली की मांग, SDM को सौंपा ज्ञापन

मध्य प्रदेश । नरसिंहपुर जिले में मंगलवार को राष्ट्रवादी किसान आर्मी के बैनर तले किसानों ने अपनी मांगों को लेकर अनोखा विरोध प्रदर्शन किया। किसानों ने अर्धनग्न होकर प्रदर्शन किया और सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए अपनी समस्याओं के त्वरित समाधान की मांग की। प्रदर्शन के बाद संगठन के पदाधिकारियों ने जिला कलेक्टर के नाम का ज्ञापन एसडीएम मणीन्द्र कुमार सिंह को सौंपा। मूंग की शत-प्रतिशत खरीदी की मांगकिसानों ने मांग की कि जिले में उत्पादित मूंग फसल की शत-प्रतिशत सरकारी खरीदी सुनिश्चित की जाए। उनका कहना है कि वर्तमान खरीद व्यवस्था में किसानों को नुकसान उठाना पड़ रहा है और उन्हें अपनी उपज बेचने में कठिनाई हो रही है। ई-टोकन व्यवस्था पर सवालज्ञापन में ई-टोकन व्यवस्था को जटिल बताते हुए इसे समाप्त करने या सरल बनाने की मांग की गई है। किसानों का कहना है कि इस प्रणाली के कारण उन्हें खाद और अन्य कृषि संसाधन प्राप्त करने में लगातार परेशानी हो रही है। 12 घंटे बिजली आपूर्ति की मांगकिसानों ने सिंचाई संकट को देखते हुए ग्रामीण क्षेत्रों में प्रतिदिन कम से कम 12 घंटे निर्बाध बिजली आपूर्ति की मांग उठाई है। उनका कहना है कि पर्याप्त बिजली न मिलने के कारण खेती प्रभावित हो रही है और उत्पादन पर असर पड़ रहा है। इसके साथ ही खाद-बीज वितरण प्रणाली को सुधारने, लंबी कतारों को खत्म करने, गिरदावरी की त्रुटियों को ठीक करने और फसल पंजीयन प्रक्रिया शुरू करने की भी मांग की गई है। बकाया भुगतान और सुधार की मांगकिसानों ने गेहूं, चना और मसूर की फसलों के बकाया भुगतान तुरंत जारी करने की मांग भी रखी। उनका आरोप है कि भुगतान में देरी से किसानों को आर्थिक संकट का सामना करना पड़ रहा है। उग्र आंदोलन की चेतावनीराष्ट्रवादी किसान आर्मी ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों का जल्द समाधान नहीं किया गया तो आंदोलन को और अधिक उग्र किया जाएगा।

डिजिटल पेमेंट्स का विस्तार: कंबोडिया के 45 लाख व्यापारिक साझेदारों पर चलेगा भारतीय UPI

नई दिल्ली । भारत की डिजिटल भुगतान प्रणाली यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया की अंतरराष्ट्रीय इकाई एनपीसीआई इंटरनेशनल पेमेंट्स लिमिटेड (NIPL) ने कंबोडिया की राष्ट्रीय क्यूआर कोड भुगतान प्रणाली KHQR के साथ साझेदारी कर वहां UPI भुगतान सेवा शुरू कर दी है। इस पहल के साथ भारतीय यात्री अब कंबोडिया में अपने परिचित डिजिटल भुगतान माध्यम का उपयोग करते हुए आसानी से लेनदेन कर सकेंगे। यह कदम भारत के तेजी से विस्तार कर रहे डिजिटल भुगतान नेटवर्क को वैश्विक स्तर पर और मजबूत बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस सेवा की औपचारिक शुरुआत कंबोडिया की राजधानी नोम पेन्ह में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान की गई। इस अवसर पर दोनों देशों के वित्तीय और बैंकिंग क्षेत्र के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। नई व्यवस्था के तहत भारत के UPI उपयोगकर्ता अपने मोबाइल भुगतान एप्लिकेशन के माध्यम से कंबोडिया में KHQR से जुड़े व्यापारिक प्रतिष्ठानों पर सीधे भुगतान कर सकेंगे। इससे भारतीय पर्यटकों, व्यापारिक यात्रियों और अन्य आगंतुकों को विदेशी मुद्रा विनिमय या नकद भुगतान की जटिलताओं से काफी राहत मिलेगी। इस परियोजना के पहले चरण में भारतीय ग्राहकों को कंबोडिया के 45 लाख से अधिक व्यापारिक प्रतिष्ठानों पर भुगतान की सुविधा मिलेगी। इनमें होटल, रेस्तरां, पर्यटन स्थल, शॉपिंग सेंटर और रिटेल स्टोर जैसे अनेक व्यवसाय शामिल हैं। इससे यात्रियों को न केवल तेज और सुरक्षित भुगतान का अनुभव मिलेगा, बल्कि स्थानीय व्यापारियों को भी भारत के विशाल डिजिटल भुगतान उपभोक्ता आधार तक पहुंचने का अवसर प्राप्त होगा। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे पर्यटन और व्यापारिक गतिविधियों को भी सकारात्मक बढ़ावा मिलेगा। परियोजना का दूसरा चरण और भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इसके तहत भविष्य में कंबोडिया के नागरिक अपने घरेलू बैंकिंग या डिजिटल भुगतान एप्लिकेशन का उपयोग करते हुए भारत में मौजूद लाखों UPI क्यूआर कोड आधारित व्यापारिक प्रतिष्ठानों पर भुगतान कर सकेंगे। इस प्रकार दोनों देशों के बीच एक द्विपक्षीय और पूरी तरह इंटरऑपरेबल डिजिटल भुगतान नेटवर्क विकसित होगा, जो सीमा-पार लेनदेन को पहले से अधिक सहज और प्रभावी बनाएगा। यह मॉडल भविष्य में अन्य देशों के साथ भी डिजिटल भुगतान सहयोग का आधार बन सकता है। डिजिटल भुगतान क्षेत्र के विशेषज्ञों का कहना है कि यह पहल रियल-टाइम भुगतान प्रणाली को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जोड़ने की दिशा में एक बड़ा कदम है। इससे भुगतान प्रक्रिया अधिक सुरक्षित, पारदर्शी और सुविधाजनक बनेगी। साथ ही स्थानीय व्यापारियों को नकदी प्रबंधन की आवश्यकता कम होगी, परिचालन लागत में कमी आएगी और डिजिटल अर्थव्यवस्था को गति मिलेगी। यह व्यवस्था छोटे और मध्यम व्यवसायों के लिए भी नए अवसर पैदा कर सकती है, जो अंतरराष्ट्रीय ग्राहकों तक पहुंच बनाना चाहते हैं। भारत ने पिछले कुछ वर्षों में UPI को एक वैश्विक डिजिटल भुगतान ब्रांड के रूप में स्थापित करने की दिशा में लगातार काम किया है। विभिन्न देशों के साथ साझेदारी और सीमा-पार भुगतान नेटवर्क के विस्तार से भारतीय फिनटेक इकोसिस्टम को भी नई पहचान मिल रही है। कंबोडिया में UPI की शुरुआत इसी रणनीति का हिस्सा है, जो भारत को वैश्विक डिजिटल भुगतान नवाचार के अग्रणी देशों में शामिल करने की दिशा में एक और मजबूत कदम साबित हो सकती है।

खाद के लिए किसानों की लंबी कतार, रातभर ट्रैक्टर-ट्रॉली लेकर डटे

मध्य प्रदेश । अशोकनगर जिले में खाद की उपलब्धता को लेकर किसानों का आंदोलन मंगलवार को दूसरे दिन भी जारी रहा। बड़ी संख्या में किसान डबल लॉक गोदाम के सामने से लेकर त्रिदेव मंदिर तक सड़क किनारे ट्रैक्टर-ट्रॉलियों के साथ डटे रहे। स्थिति यह रही कि सोमवार रात तेज आंधी और बारिश के बावजूद किसान वहीं रुके रहे और पूरी रात सड़क किनारे ही गुजार दी। किसानों ने अपने साथ खाने-पीने की व्यवस्था कर रखी थी और वहीं भोजन भी तैयार किया। टोकन व्यवस्था के आधार पर हो रहा वितरणजिले में खाद का वितरण ऑनलाइन टोकन प्रणाली के माध्यम से किया जा रहा है। प्रशासन की ओर से फिलहाल उन्हीं किसानों को खाद उपलब्ध कराई जा रही है, जिनके टोकन पहले से बुक थे। मंगलवार सुबह से टोकन धारकों को खाद वितरण शुरू किया गया, जबकि कई किसान नए टोकन बुक कराने की मांग पर भी अड़े हुए हैं। पहले चक्काजाम, फिर गोदाम पर डेराखाद संकट को लेकर सोमवार को भारतीय किसान संघ के नेतृत्व में किसानों ने राजमाता चौराहे पर चक्काजाम किया था। इसके बाद प्रशासन ने आश्वासन देते हुए किसानों को विदिशा रोड स्थित खाद गोदाम भेजा। इसके बाद से ही किसान लगातार ट्रैक्टर-ट्रॉलियों के साथ गोदाम परिसर में मौजूद हैं। कुछ किसानों को मिली खाद, कई इंतजार मेंसोमवार को कुछ किसानों को खाद का वितरण किया गया, जबकि कई के दस्तावेज लेकर टोकन प्रक्रिया शुरू की गई। प्रशासन ने आश्वासन दिया है कि जिन किसानों के टोकन लंबित हैं, उनके लिए अगले एक-दो दिनों में व्यवस्था की जाएगी।किसानों की मांग: तुरंत खाद उपलब्ध कराई जाएकिसानों का कहना है कि खरीफ सीजन की बुवाई का समय नजदीक है, ऐसे में खाद की कमी से खेती प्रभावित हो रही है। किसान लगातार मांग कर रहे हैं कि सभी को जल्द से जल्द खाद उपलब्ध कराई जाए।

MP CABINATE MEETING: MP सरकार का बड़ा तोहफा! 46.80 लाख लोगों को मुफ्त देगी जमीन की रजिस्ट्री, छात्रों को मिलेगी फ्री सिली-सिलाई ड्रेस

CM MOHAN YADAV DECISION

HIGHLIGHTS:  48.32 लाख लोगों को मुफ्त रजिस्ट्री देगी सरकार पहली से 8वीं तक के बच्चों को मिलेगी तैयार स्कूल ड्रेस स्कूल यूनिफॉर्म के लिए जारी होंगे टेंडर डेयरी क्षेत्र को बढ़ावा को मिलेगा बढ़ावा कैबिनेट बैठक में कई अहम फैसलों को मंजूरी   MP CABINATE MEETING: भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में हुई मध्य प्रदेश मंत्रिमंडल की बैठक में कई महत्वपूर्ण फैसले लिए गए। सबसे बड़ा फैसला स्वामित्व योजना के तहत 48.32 लाख ग्रामीण परिवारों को मुफ्त रजिस्ट्री उपलब्ध कराने का रहा। इसके साथ ही पहली से आठवीं कक्षा तक के विद्यार्थियों को तैयार स्कूल ड्रेस देने का भी निर्णय लिया गया। 48 लाख से ज्यादा लोगों को मिलेगा फायदा MSME मंत्री चैतन्य कश्यप ने बताया कि स्वामित्व योजना के तहत जारी किए गए प्रमाण पत्रों को अब पंजीकृत दस्तावेज के रूप में उपलब्ध कराया जाएगा। इससे ग्रामीण परिवारों को बैंक से ऋण लेने और संपत्ति सम्बंधित कामों में आसानी होगी। साथ ही रजिस्ट्री का पूरा खर्च सरकार वहन करेगी और लोगों पर कोई आर्थिक बोझ नहीं डाला जायेगा। शिवपुरी में खेत में मिला युवक का शव: शरीर पर चोट के निशान, परिजनों ने जताई हत्या की आशंका छात्रों को मिलेगी सिली-सिलाई ड्रेस अब तक छात्रों को स्कूल ड्रेस के लिए डीबीटी के माध्यम से राशि दी जाती थी। लेकिन कई क्षेत्रों में कपड़ा और सिलाई की सुविधा नहीं मिलने से परेशानी होती थी। इसे देखते हुए सरकार ने तैयार यूनिफॉर्म उपलब्ध कराने का फैसला किया है। बताया जा रहा है कि इसके लिए टेंडर जारी किए जाएंगे और प्रदेश के वस्त्र उद्योगों को प्राथमिकता दी जाएगी। कैबिनेट बैठक में हुए अहम फैसले डेयरी क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए गोरस एप शुरू किया जाएगा। मेडिकल कॉलेजों और संबद्ध अस्पतालों की योजनाओं को अगले 5 साल तक जारी रखने का फैसला लिया गया। एमबीबीएस सीटों में वृद्धि और नए मेडिकल कॉलेजों की स्थापना से जुड़े प्रस्तावों को आगे बढ़ाने की मंजूरी दी गई। बरगी बांध क्रूज हादसे में हुई जनहानि की घटना की न्यायिक जांच को कैबिनेट ने अनुमोदन दिया। विदिशा में अवैध कॉलोनियों का दर्द, सुविधाओं के लिए कलेक्ट्रेट पहुंचे लोग पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की निजी स्थापना में सहायक ग्रेड-2 दिनेश वर्मा की संविदा नियुक्ति एक वर्ष बढ़ाई गई। लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के 18 कर्मचारियों को नियुक्ति तिथि से संशोधित वेतनमान देने का निर्णय लिया गया। राज्य आनंद संस्थान में सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी आशीष कुमार की संविदा नियुक्ति को मंजूरी दी गई। पंचायत राज ग्राम स्वराज अधिनियम और उपकर अधिनियम में संशोधन संबंधी अध्यादेशों को स्वीकृति दी गई। कटनी में मेडिकल कॉलेज निर्माण शुरू, विरोध के बीच भूमिपूजन टला हिंदी फीचर फिल्म ‘तन्वी द ग्रेट’ को मध्य प्रदेश में टैक्स फ्री करने के आदेश का अनुमोदन किया गया। इंदौर के पिपल्याहाना में बन रहे जिला न्यायालय भवन की लागत 430 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 626 करोड़ रुपये करने की मंजूरी दी गई। जल गंगा संवर्धन अभियान के तहत 2 लाख से अधिक जल संरचनाओं पर किए गए कार्यों की समीक्षा की गई। प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना के तहत सौर ऊर्जा विस्तार को लेकर भी चर्चा हुई। प्रदेश को मिलेगी बेहतर सुविधा कैबिनेट बैठक में हुए इन फैसलों का उद्देश्य प्रदेश के ग्रामीण विकास, शिक्षा व्यवस्था, स्वास्थ्य विभाग, प्रशासनिक सुधार और आधारभूत सुविधाओं को मजबूत करना है। ताकि प्रदेशवासियों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध करवाई जा सके।

अमेरिका-ईरान तनाव का असर: एक महीने में पेट्रोल-डीजल 7.5 रुपए तक महंगा, एलपीजी भी उछला

नई दिल्ली । अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और अमेरिका-ईरान संघर्ष का असर अब भारतीय उपभोक्ताओं की जेब पर भी साफ दिखाई देने लगा है। पिछले एक महीने के दौरान देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जबकि कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर भी महंगा हो गया है। ऊर्जा बाजार में बनी अनिश्चितता और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल के कारण ईंधन लागत लगातार बढ़ रही है, जिसका सीधा असर परिवहन, व्यापार और दैनिक जीवन पर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। राजधानी दिल्ली में बीते एक महीने के दौरान पेट्रोल की कीमत में कुल 7.35 रुपए प्रति लीटर की वृद्धि हुई है। इसके बाद पेट्रोल का दाम 94.77 रुपए प्रति लीटर से बढ़कर 102.12 रुपए प्रति लीटर पहुंच गया है। इस अवधि में सरकार ने चार अलग-अलग चरणों में ईंधन कीमतों में संशोधन किया। 15 मई को पेट्रोल के दाम में 3 रुपए प्रति लीटर की वृद्धि की गई, जबकि 19 और 23 मई को 0.87-0.87 रुपए प्रति लीटर की बढ़ोतरी हुई। इसके बाद 25 मई को फिर 2.61 रुपए प्रति लीटर का इजाफा किया गया। लगातार हुई इन बढ़ोतरी ने उपभोक्ताओं के मासिक बजट पर अतिरिक्त दबाव बढ़ा दिया है। डीजल की कीमतों में भी लगभग इसी तरह की वृद्धि दर्ज की गई है। दिल्ली में डीजल का दाम 87.67 रुपए प्रति लीटर से बढ़कर 95.20 रुपए प्रति लीटर हो गया है। कुल मिलाकर डीजल 7.53 रुपए प्रति लीटर महंगा हुआ है। 15 मई को इसमें 3 रुपए प्रति लीटर की बढ़ोतरी हुई थी, जबकि 19 और 23 मई को 0.91-0.91 रुपए प्रति लीटर की वृद्धि दर्ज की गई। इसके बाद 25 मई को डीजल के दाम में 2.71 रुपए प्रति लीटर का इजाफा किया गया। डीजल कीमतों में बढ़ोतरी का असर माल ढुलाई, कृषि गतिविधियों और सार्वजनिक परिवहन पर भी पड़ सकता है, जिससे कई वस्तुओं की लागत बढ़ने की संभावना है। ईंधन के साथ-साथ कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर भी महंगा हुआ है। दिल्ली में 19 किलोग्राम वाले कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमत बढ़कर 3,113.50 रुपए तक पहुंच गई है। एक जून को सिलेंडर के दाम में 42 रुपए की नई बढ़ोतरी की गई। खास बात यह है कि जनवरी से अब तक कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में 1,400 रुपए से अधिक की वृद्धि दर्ज की जा चुकी है। वर्ष की शुरुआत में इसकी कीमत 1,691.50 रुपए थी, जो अब दोगुने के करीब पहुंच चुकी है। इसका असर होटल, रेस्तरां, कैटरिंग और छोटे व्यवसायों की लागत पर पड़ सकता है। हालांकि घरेलू बाजार में ईंधन कीमतों में बढ़ोतरी के बावजूद भारत अभी भी कई देशों की तुलना में अपेक्षाकृत कम कीमत पर पेट्रोल और डीजल उपलब्ध करा रहा है। विकसित अर्थव्यवस्थाओं में पेट्रोल की खुदरा कीमतें 150 रुपए प्रति लीटर से ऊपर बताई जा रही हैं, जबकि कई देशों में यह 180 रुपए प्रति लीटर से भी अधिक है। यूरोपीय संघ के देशों में पेट्रोल और डीजल दोनों की औसत कीमत भारत की तुलना में काफी ज्यादा है। वहीं पड़ोसी देशों पाकिस्तान, नेपाल, श्रीलंका, म्यांमार और फिलीपींस में भी पेट्रोल की कीमतें भारतीय स्तर से ऊपर बनी हुई हैं। वैश्विक ऊर्जा बाजार में जारी अस्थिरता का असर भारत के ईंधन बाजार पर लगातार दिखाई दे रहा है। यदि अंतरराष्ट्रीय तनाव लंबे समय तक बना रहता है, तो आने वाले महीनों में परिवहन लागत और महंगाई पर अतिरिक्त दबाव देखने को मिल सकता है।

अशोकनगर में स्वास्थ्य सेवाएं चरमराईं, संविदा कर्मचारियों की हड़ताल का असर

मध्य प्रदेश । अशोकनगर जिला अस्पताल में मंगलवार सुबह से राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के संविदा स्वास्थ्य कर्मचारियों ने अनिश्चितकालीन धरना प्रदर्शन शुरू कर दिया है। कर्मचारी अपनी आठ सूत्रीय मांगों को लेकर आंदोलनरत हैं, जिसके चलते अस्पताल की स्वास्थ्य सेवाएं गंभीर रूप से प्रभावित हो गई हैं। धरने के दौरान संविदा स्वास्थ्य कर्मचारी संघ के बैनर तले कर्मचारियों ने सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। आक्रोशित कर्मचारियों ने अप्रेजल आदेशों की प्रतियां जलाकर अपना विरोध जताया। कई महत्वपूर्ण सेवाएं बाधितहड़ताल के कारण जिला अस्पताल की कई अहम सेवाएं ठप हो गई हैं। इनमें टीकाकरण, एसएनसीयू, जननी सुरक्षा योजना के भुगतान, ओपीडी सेवाएं, सीएम हेल्पलाइन से जुड़े कार्य, जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र जारी करना और टीबी मरीजों को दवा वितरण जैसी सेवाएं शामिल हैं।इसके अलावा ब्लड बैंक का अधिकांश कार्य भी प्रभावित हुआ है, जिससे मरीजों और उनके परिजनों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कर्मचारियों की प्रमुख मांगेंसंविदा स्वास्थ्य कर्मचारियों का कहना है कि वे लंबे समय से नियमितीकरण, स्वास्थ्य बीमा, वेतन वृद्धि और समान कार्य के लिए समान वेतन जैसी आठ सूत्रीय मांगों को लेकर संघर्ष कर रहे हैं, लेकिन अब तक सरकार की ओर से कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया है।कर्मचारियों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों का समाधान नहीं किया गया तो आंदोलन और अधिक उग्र किया जाएगा। आंदोलन की चेतावनी, भोपाल घेराव की तैयारीसंघ ने यह भी घोषणा की है कि उनका यह आंदोलन 8 जून को भोपाल में मुख्यमंत्री निवास घेराव के बाद समाप्त होगा। तब तक अनिश्चितकालीन हड़ताल जारी रहेगी। मरीजों पर बढ़ा असरहड़ताल के चलते सबसे ज्यादा असर मरीजों पर पड़ा है, जिन्हें इलाज और जरूरी सेवाओं के लिए परेशान होना पड़ रहा है। जिला अस्पताल में सामान्य कामकाज बाधित होने से स्वास्थ्य व्यवस्था पर दबाव बढ़ गया है।

रजिस्ट्री की मांग लेकर पहुंचे लोग, तनाव में बिगड़ी महिला की तबीयत

मध्य प्रदेश । देवास कलेक्टर कार्यालय में मंगलवार को उस समय अफरा-तफरी मच गई जब मकानों के मालिकाना हक की मांग को लेकर पहुंचे रहवासियों के बीच एक महिला अचानक बेसुध होकर गिर पड़ी। एलआईजी श्रमिक कॉलोनी के लोग अपनी आवासीय समस्या के समाधान की मांग लेकर कलेक्टर से मिलने आए थे। महिला की पहचान विद्या शर्मा के रूप में हुई है। मौके पर मौजूद अन्य महिलाओं ने तुरंत उन्हें संभाला, चेहरे पर पानी के छींटे मारे और हवा देकर होश में लाने का प्रयास किया। कुछ ही देर में महिला को होश आ गया। “टेंशन में खाना नहीं खाया” – भावुक हुई महिलाहोश में आने के बाद विद्या शर्मा भावुक हो गईं और रोते हुए कहा कि मकान के विवाद के तनाव में उन्होंने सुबह से कुछ नहीं खाया था। उन्होंने कहा, “अगर मेरी मौत हो जाए तो मेरा शव कंपनी में ले जाना।” उनकी यह बात सुनकर वहां मौजूद अन्य लोग भी भावुक हो गए और माहौल तनावपूर्ण हो गया। रजिस्ट्री की मांग को लेकर लंबे समय से विवाददरअसल, एलआईजी श्रमिक कॉलोनी के रहवासी गजरा गियर्स लिमिटेड की हायर परचेज स्कीम के तहत दिए गए मकानों की रजिस्ट्री की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि सेवा अवधि पूरी करने वाले कर्मचारियों को मकान दिए गए थे और तय शर्तों के अनुसार 15 वर्षों तक वेतन से राशि काटकर भुगतान किया गया था। रहवासियों का आरोप है कि कई कर्मचारियों ने 15 वर्ष से अधिक सेवा दी, इसके बावजूद अब तक उनके नाम पर मकानों की रजिस्ट्री नहीं की गई है। साथ ही, मकानों से जुड़े जरूरी दस्तावेज भी उन्हें उपलब्ध नहीं कराए जा रहे हैं। कंपनी पर वादाखिलाफी का आरोपरहवासियों का कहना है कि पहले मकानों के बदले राशि काटी गई, लेकिन वह हाउसिंग बोर्ड में जमा नहीं कराई गई। अब कंपनी का कहना है कि ये मकान केवल सेवा अवधि तक रहने के लिए दिए गए थे और उन्हें खाली करना होगा। इस स्थिति ने रहवासियों में गहरा आक्रोश पैदा कर दिया है। कलेक्टर ने दिया आश्वासनमामले को लेकर कलेक्टर ऋतुराज सिंह ने रहवासियों से मुलाकात कर उन्हें हरसंभव मदद और जल्द समाधान का आश्वासन दिया। प्रशासन ने मामले की जांच और समाधान की प्रक्रिया शुरू करने की बात कही है। दस्तावेजों और रजिस्ट्री की मांग पर अड़ा मामलारहवासियों ने ज्ञापन सौंपकर मांग की है कि उन्हें मकानों के वैध दस्तावेज उपलब्ध कराए जाएं और उनके नाम पर रजिस्ट्री तत्काल की जाए, ताकि वर्षों से चली आ रही अनिश्चितता खत्म हो सके।