एमपी की राजनीति में तीखे बोल, सीएम के बयान पर बढ़ी सियासी गर्मी

मध्य प्रदेश । मध्य प्रदेश की राजनीति में इन दिनों बयानबाजी का दौर तेज है। मुख्यमंत्री Mohan Yadav और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष Jitu Patwari के बीच जुबानी जंग ने सियासी माहौल गर्म कर दिया है। सीएम ने पटवारी पर साधा निशानाजीतू पटवारी लगातार विभिन्न मंचों से मुख्यमंत्री मोहन यादव पर तंज कसते रहे हैं। वे उन्हें “पर्ची वाला मुख्यमंत्री” और “मोहनलाल अभिनंदन यादव” जैसे नामों से संबोधित करते रहे हैं। इसके जवाब में मुख्यमंत्री ने भी तीखी प्रतिक्रिया देते हुए पटवारी को “टपोरीलाल”, “ढपोरशंख” और “रद्दी अध्यक्ष” जैसे शब्दों से संबोधित किया। सभा के दौरान मुख्यमंत्री ने पटवारी की तुलना बंदर से करते हुए कहा कि भाजपा शेरों की पार्टी है। साथ ही उन्होंने कांग्रेस के सत्ता में वापसी के दावों को भी खारिज करते हुए कहा कि कांग्रेस के लिए प्रदेश में सत्ता हासिल करना आसान नहीं होगा। इस बयानबाजी के बाद राजनीतिक मर्यादा और नेताओं की भाषा को लेकर बहस शुरू हो गई है। कांग्रेस अब इस मुद्दे को राजनीतिक तौर पर उठाने की तैयारी में दिखाई दे रही है। पत्नी के लिए चूड़ियां खरीदते नजर आए शिवरादूसरी ओर केंद्रीय कृषि मंत्री Shivraj Singh Chouhan का एक अलग अंदाज चर्चा में रहा। विदिशा में स्ट्रीट वेंडर्स से संवाद के दौरान वे एक चूड़ी विक्रेता के ठेले पर रुके और अपनी पत्नी Sadhana Singh के लिए चूड़ियां खरीदीं। पहले उन्होंने 12 चूड़ियां लेने की बात कही, लेकिन विक्रेता महिला की सलाह पर 24 चूड़ियां खरीदीं। इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना हुआ है। भाजपा में सिंधिया समर्थक नेताओं पर सवालभाजपा के भीतर भी कुछ नेताओं के बीच मतभेदों की चर्चा तेज हो गई है। गुना से भाजपा विधायक Pannalal Shakya पहले ही ऊर्जा मंत्री Pradyuman Singh Tomar पर टिप्पणी कर चुके हैं। अब खबर है कि भाजपा के एक अन्य विधायक ने भी केंद्रीय मंत्री Jyotiraditya Scindia के करीबी माने जाने वाले एक मंत्री पर सोशल मीडिया के जरिए निशाना साधा है। यह घटनाक्रम इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि यह सब सत्ता और संगठन के सामने खुलकर हो रहा है। राजनीतिक संदेश क्या हैराजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि:कांग्रेस और भाजपा के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर आगामी राजनीतिक रणनीतियों का हिस्सा है।व्यक्तिगत टिप्पणियों और तीखी बयानबाजी से राजनीतिक ध्रुवीकरण बढ़ सकता है।भाजपा के भीतर नेताओं के बीच मतभेदों की खबरें संगठनात्मक समीकरणों पर भी चर्चा बढ़ा रही हैं। फिलहाल प्रदेश की राजनीति में मुद्दों के साथ-साथ नेताओं की बयानबाजी भी सुर्खियों में बनी हुई है और आने वाले दिनों में यह सियासी तापमान और बढ़ सकता है।
सूरत नवजात केस: तीसरी बार प्रेग्नेंट होने पर महिला ने नवजात को फेंका, CCTV से पहुंची पुलिस तक सच्चाई

नई दिल्ली । गुजरात के सूरत शहर में एक नवजात शिशु के शव मिलने की घटना ने गंभीर चिंता और आक्रोश का माहौल पैदा कर दिया है। यह मामला तब सामने आया जब स्थानीय क्षेत्र में कचरे के ढेर से एक नवजात का शव बरामद हुआ। घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू की गई। शुरुआती जांच में मामला संदिग्ध पाया गया, जिसके बाद आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज को खंगाला गया और संदिग्ध गतिविधियों की पहचान की कोशिश की गई। जांच के दौरान पुलिस को एक महिला की गतिविधि संदिग्ध लगी, जो काले रंग की प्लास्टिक थैली लेकर इलाके में जाती दिखाई दी थी। इसी सुराग के आधार पर पुलिस ने अपनी जांच को आगे बढ़ाया और तकनीकी विश्लेषण तथा स्थानीय पूछताछ के जरिए महिला की पहचान की। कई दिनों की जांच के बाद पुलिस ने महिला को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू की। पूछताछ में जो तथ्य सामने आए, उन्होंने सभी को चौंका दिया। महिला पहले से दो बच्चों की मां है और उसके दोनों बच्चे वयस्क हो चुके हैं। उसने स्वीकार किया कि वह तीसरी बार गर्भवती हो गई थी और इस स्थिति को लेकर वह मानसिक तनाव में थी। उसे डर था कि समाज में उसकी बदनामी होगी और लोग इस बात को स्वीकार नहीं करेंगे। इसी डर और सामाजिक दबाव के कारण उसने नवजात को जन्म देने के बाद उसे काले प्लास्टिक बैग में डालकर कचरे में फेंक दिया। इस घटना के बाद पूरे इलाके में दुख और गुस्से का माहौल है। स्थानीय लोगों का कहना है कि इस तरह की घटनाएं समाज में बढ़ते मानसिक दबाव और जागरूकता की कमी को भी दर्शाती हैं। कई सामाजिक विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में महिलाओं को उचित परामर्श और सहायता मिलनी चाहिए, ताकि वे किसी भी प्रकार के चरम कदम उठाने से बच सकें। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले की सभी पहलुओं से जांच की जा रही है और नवजात की मृत्यु के वास्तविक कारणों का पता पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा। इसके साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि घटना के समय परिस्थितियां क्या थीं और इसमें अन्य कोई पहलू तो शामिल नहीं है। यह घटना केवल एक आपराधिक मामला नहीं बल्कि सामाजिक दबाव और मानसिक तनाव की गंभीर स्थिति को भी उजागर करती है। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे मामलों को रोकने के लिए समाज में जागरूकता, संवेदनशीलता और सहायता तंत्र को मजबूत करना जरूरी है। इस मामले ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या समाज में ऐसे हालातों से जूझ रहे लोगों के लिए पर्याप्त समर्थन मौजूद है या नहीं। जांच आगे बढ़ने के साथ इस घटना से जुड़े अन्य तथ्य भी सामने आ सकते हैं।
एमपी में बारिश-आंधी का असर, तापमान में बड़ी गिरावट और हादसे

मध्य प्रदेश । नौतपा के बीच मध्य प्रदेश के मौसम ने अचानक करवट ले ली है। पिछले 24 घंटों के दौरान प्रदेश के कई जिलों में आंधी, बारिश और कुछ स्थानों पर ओलावृष्टि दर्ज की गई, जिससे दिन और रात के तापमान में भारी गिरावट आई है। सबसे अधिक असर Sheopur में देखने को मिला, जहां एक ही रात में न्यूनतम तापमान 9.6 डिग्री सेल्सियस गिरकर 15.4 डिग्री पर पहुंच गया। यह तापमान प्रदेश के प्रसिद्ध हिल स्टेशन Pachmarhi से भी कम रहा। कई जिलों में बारिश और तेज हवाएंमौसम विभाग के अनुसार, Satna में करीब एक इंच, Betul में पौन इंच और श्योपुर में आधा इंच से अधिक बारिश दर्ज की गई। इसके अलावा Bhopal, Indore, Ujjain, Guna, Datia, Sehore, Dewas, Mandsaur, Dhar, Khandwa और Harda समेत कई जिलों में बारिश और तेज हवाओं का असर देखा गया। बड़े शहरों का न्यूनतम तापमानभोपाल : 22 डिग्री सेल्सियसइंदौर : 22.1 डिग्री सेल्सियसउज्जैन : 21 डिग्री सेल्सियसग्वालियर : 25.4 डिग्री सेल्सियसजबलपुर : 26.4 डिग्री सेल्सियसतापमान में आई गिरावट से लोगों को भीषण गर्मी और लू से काफी राहत मिली है। नीमच में दर्दनाक हादसाNeemuch जिले के Singoli क्षेत्र में सोमवार रात एक जर्जर मकान की छत ढह गई। हादसे में सोसर बाई धनोतिया और उनके बेटे नीलेश धनोतिया की मौत हो गई। बताया गया है कि नीलेश स्थानीय स्तर पर अखबार वितरण का कार्य करते थे। देवास में आंधी से नुकसानDewas जिले में धूलभरी तेज आंधी के कारण कई स्थानों पर पेड़ उखड़ गए और टीन शेड उड़ गए। रूपाखेड़ी के मरेठी गांव में दो मकानों के टीन शेड उड़ने से एक ही परिवार के 6 से 7 लोग घायल हो गए। अगले कुछ घंटों के लिए अलर्टमौसम विभाग ने प्रदेश के 13 जिलों में आंधी और बिजली गिरने की चेतावनी जारी की है। Rewa, Mauganj, Sidhi, Maihar, Singrauli, Shahdol, Anuppur, Mandla, Dindori, Jabalpur, Umaria और Katni में 40 किमी प्रति घंटे या उससे अधिक रफ्तार से आंधी चल सकती है। मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, अगले कुछ दिनों तक प्रदेश में प्री-मानसून गतिविधियां जारी रहने की संभावना है, जिससे तापमान सामान्य से नीचे बना रह सकता है।
राहुल गांधी के सामने बड़ी चुनौती, कर्नाटक और केरल कांग्रेस अध्यक्ष पद पर मंथन तेज

नई दिल्ली । कांग्रेस शासित राज्यों कर्नाटक और केरल में संगठनात्मक नेतृत्व को लेकर पार्टी के भीतर एक बार फिर से हलचल तेज हो गई है। प्रदेश अध्यक्ष पद को लेकर चल रही चर्चा अब केवल औपचारिकता नहीं रही, बल्कि यह सत्ता संतुलन और क्षेत्रीय समीकरणों का अहम राजनीतिक प्रश्न बन चुकी है। पार्टी के भीतर अलग-अलग गुट अपने-अपने नेताओं के लिए समर्थन जुटाने में सक्रिय हैं, जिससे संगठनात्मक फैसले और भी जटिल होते जा रहे हैं। कर्नाटक में कांग्रेस की सरकार बनने के बाद से ही मुख्यमंत्री और संगठन के बीच संतुलन बनाए रखने की चुनौती लगातार बनी हुई है। अब प्रदेश अध्यक्ष के चयन को लेकर भी यह सवाल उठ रहा है कि क्या पार्टी एक मजबूत संगठनात्मक चेहरे को आगे लाएगी या फिर सत्ता और संगठन के बीच सामंजस्य बनाए रखने वाला कोई समझौता फार्मूला अपनाया जाएगा। जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं में भी इस बात को लेकर उत्सुकता है कि अगला प्रदेश अध्यक्ष किस दिशा में संगठन को आगे ले जाएगा और आने वाले चुनावों के लिए किस तरह की रणनीति तैयार की जाएगी। दूसरी ओर केरल में कांग्रेस की स्थिति और भी चुनौतीपूर्ण मानी जा रही है, जहां पार्टी लंबे समय से सत्ता से बाहर है। यहां संगठन को मजबूत करने की जिम्मेदारी प्रदेश नेतृत्व पर सबसे अधिक है। प्रदेश अध्यक्ष के चयन को लेकर यहां भी कई नामों की चर्चा चल रही है और हर गुट अपने प्रभाव को मजबूत करने की कोशिश में है। केरल में कांग्रेस के सामने सबसे बड़ी चुनौती मतदाता आधार को पुनः संगठित करने और वामपंथी दलों से मुकाबला करने की रणनीति तैयार करना है। सूत्रों के अनुसार पार्टी नेतृत्व इस पूरे मामले को संतुलित तरीके से सुलझाने की कोशिश कर रहा है, ताकि किसी भी राज्य में असंतोष की स्थिति न बने। राहुल गांधी की भूमिका इस पूरे संगठनात्मक पुनर्गठन में महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि वे लगातार राज्यों में संगठन को मजबूत करने पर जोर देते रहे हैं। कर्नाटक और केरल दोनों ही राज्यों में कांग्रेस के लिए आने वाला समय राजनीतिक दृष्टि से बेहद अहम माना जा रहा है, इसलिए नेतृत्व चयन में हर कदम सावधानी से उठाया जा रहा है। पार्टी के अंदर यह भी चर्चा है कि संगठन में युवा नेतृत्व को आगे लाने की जरूरत है, ताकि जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं में नई ऊर्जा का संचार हो सके। हालांकि वरिष्ठ नेताओं की राय है कि अनुभव और स्थिरता भी उतनी ही जरूरी है, खासकर उन राज्यों में जहां राजनीतिक प्रतिस्पर्धा बेहद कड़ी है। यही वजह है कि प्रदेश अध्यक्ष के चयन को लेकर अंतिम निर्णय लेना आसान नहीं हो पा रहा है। आने वाले दिनों में कांग्रेस नेतृत्व को यह तय करना होगा कि वह संगठनात्मक मजबूती को प्राथमिकता देगा या फिर सत्ता संतुलन के समीकरणों को ध्यान में रखकर फैसला करेगा। यह निर्णय न केवल कर्नाटक और केरल की राजनीति को प्रभावित करेगा, बल्कि आने वाले राष्ट्रीय चुनावों में भी पार्टी की रणनीति पर इसका असर देखा जा सकता है।
सिद्ध चक्र महामंडल विधान में उमड़ा आस्था का सैलाब, श्रद्धालुओं ने किया पूजन

मध्य प्रदेश । धार्मिक अनुष्ठान के दौरान आयोजित धर्मसभा को संबोधित करते हुए Muni Sambhav Sagar Maharaj ने कहा कि संसार में प्राणी के दुखों का मूल कारण उसका चंचल और भटकता हुआ मन है। जब मन सांसारिक मोह-माया में उलझ जाता है, तब व्यक्ति अनेक प्रकार की परेशानियों और मानसिक अशांति से घिर जाता है। उन्होंने कहा कि जीवन में वास्तविक सुख, शांति और आत्मिक आनंद प्राप्त करने के लिए मन को स्थिर और संयमित बनाना आवश्यक है। मुनि श्री ने कहा कि मन की स्थिरता ही आत्मा को परमात्मा और भगवत्ता से जोड़ने का मार्ग प्रशस्त करती है। जब व्यक्ति अपने मन पर नियंत्रण स्थापित कर लेता है, तब वह जीवन की कठिन परिस्थितियों में भी संतुलित और शांत रह सकता है। विधान के प्रवक्ता Anshul Jain ने बताया कि इस धार्मिक अनुष्ठान के पुण्यार्जक परिवारों में श्रीमती पांचूबाई, सुहागमल जैन तथा ऋषभ-मंजू जैन परिवार शामिल रहे। उनके द्वारा विधान मंडल पर प्रमुख धार्मिक क्रियाएं संपन्न कराई गईं। कार्यक्रम में विभिन्न धार्मिक पात्रों की भूमिकाओं का भी निर्वहन किया गया। सो धर्म इंद्र, प्रियंका, महेंद्र, कुबेर, आशा और विजेंद्र प्रमुख पात्रों के रूप में उपस्थित रहे। वहीं ध्वजारोहण का दायित्व विनोद और विपिन (एमपीटी) ने निभाया। शांति धारा का पुण्य लाभ मनोज-प्रीति बांगा ने प्राप्त किया। इसके अलावा महाज्ञानायक की भूमिका प्रतिभा-सचिन ने निभाई, जबकि यज्ञनायक के रूप में पूर्ति-शशांक ने अर्घ्य समर्पित कर धार्मिक अनुष्ठान को पूर्णता प्रदान की। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने उपस्थित होकर धर्म लाभ अर्जित किया।
Datiya collector instructions: CM हेल्पलाइन पर 50 से ज्यादा केस पेंडिंग न रहें-कलेक्टर, लापरवाही करने पर अधिकारी भरेंगे जुर्माना

HIGHLIGHTS: 50 दिन से ज्यादा लंबित केसों पर सख्ती लापरवाह अधिकारियों पर लगेगा जुर्माना सीएम हेल्पलाइन शिकायतों के त्वरित निराकरण के निर्देश पीएम आवास और श्रम योजनाओं की समीक्षा जल संरक्षण और गौवंश प्रबंधन पर फोकस Datiya collector instructions: मध्यप्रदेश। जिले में बाद रही शिकायतों के चलते दतिया कलेक्टर स्वप्निल वानखड़े ने लंबित शिकायतों और समय-सीमा से बाहर चल रहे मामलों को लेकर अधिकारियों को कड़ी चेतावनी दी है। सोमवार को न्यू कलेक्ट्रेट में आयोजित समीक्षा बैठक में उन्होंने कहा कि जनसेवा से जुड़े मामलों में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। कलेक्टर ने निर्देश दिए कि सीएम हेल्पलाइन पर 50 दिन से ज्यादा लंबित मामलों का तत्काल निराकरण किया जाए। साथ ही एल-1 स्तर पर जवाब दर्ज नहीं करने वाले अधिकारियों के खिलाफ जुर्माना लगाने के निर्देश भी दिए। Gwalior couple suicide: होटल में लोगों की अश्लील वीडियो बनाने पर हुए थे गिरफ्तार, बाहर आने के बाद प्रेमी जोड़े ने की आत्महत्या कलेक्टर ने जताई नाराजगी बैठक में लोक सेवा गारंटी और आरसीएमएस प्रकरणों की समीक्षा के दौरान भी कई विभागों की धीमी कार्यप्रणाली पर कलेक्टर ने नाराजगी जताई। साथ ही शिक्षा विभाग को स्कूलों में नामांकन प्रक्रिया को तेज करने के निर्देश दिए गए। इसके अलावा कृषि, पशुपालन और रोजगार योजनाओं की प्रगति सुधारने पर जोर दिया गया। CM मोहन यादव का बड़ा ऐलान, बोले- MP में जल्द लागू किया जाएगा UCC, जनता से मांगे सुझाव पानी व्यवस्था को ठीक करने के दिए निर्देश कलेक्टर ने जल शक्ति अभियान, नल-जल योजनाओं, खुले बोरवेलों की सुरक्षा और मोटर खराबी से जुड़ी शिकायतों को जल्द ठीक करने के निर्देश भी दिए। वहीं शहर में निराश्रित गौवंश की समस्या और प्रधानमंत्री आवास योजना 2.0 की धीमी प्रगति पर भी चिंता जताई गई। बैठक में जर्जर भवनों की मरम्मत, बंटवारा-सीमांकन मामलों के शीघ्र निपटारे और दिव्यांगजन के लिए सभी सरकारी कार्यालयों में सुगम सुविधाएं विकसित करने पर भी विशेष जोर दिया गया।
डीजल और महंगाई ने बढ़ाई मुश्किलें, बस मालिकों की सरकार से दो टूक

मध्य प्रदेश । मध्य प्रदेश में बस किराया बढ़ाने की मांग को लेकर बस संचालकों और सरकार के बीच टकराव की स्थिति बनती दिखाई दे रही है। बढ़ती महंगाई, डीजल की कीमतों और रखरखाव खर्च में लगातार इजाफे से परेशान बस मालिकों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगें नहीं मानी गईं तो प्रदेश में बसों के पहिए थम सकते हैं। आज होगी महत्वपूर्ण बैठकबस संचालकों के प्रतिनिधि आज परिवहन मंत्री Rao Uday Pratap Singh से भोपाल में मुलाकात करेंगे। इस बैठक में किराया वृद्धि को लेकर चर्चा होगी। बस मालिकों का कहना है कि यदि सरकार ने सकारात्मक निर्णय नहीं लिया तो हड़ताल का ऐलान किया जा सकता है। तीन साल से नहीं बढ़ा किरायाबस ऑपरेटरों के अनुसार, प्रदेश में आखिरी बार अप्रैल 2021 में बस किराए में संशोधन किया गया था। तब से डीजल, टायर, स्पेयर पार्ट्स और अन्य परिचालन लागत में लगातार वृद्धि हुई है, लेकिन किराया लगभग स्थिर बना हुआ है। संचालकों का दावा है कि पिछले कुछ वर्षों में:डीजल की कीमतों में कई बार वृद्धि हुई है।टायर और ऑटो पार्ट्स महंगे हुए हैं।नई यूरो-6 बसों की कीमतें बढ़ी हैं।रखरखाव और बीमा खर्च में भी इजाफा हुआ है।क्या है बस मालिकों की मांग? Madhya Pradesh Bus Owner Association के पदाधिकारियों का कहना है कि न्यूनतम किराया 2.50 रुपये प्रति किलोमीटर तय किया जाए और अन्य श्रेणियों के किराए में भी उसी अनुपात में बढ़ोतरी की जाए। उनका तर्क है कि मौजूदा किराए पर बस संचालन आर्थिक रूप से व्यवहारिक नहीं रह गया है और लगातार घाटा उठाना पड़ रहा है। हड़ताल की चेतावनीएसोसिएशन के महामंत्री Jaykumar Jain ने कहा है कि यदि सात दिनों के भीतर किराया नहीं बढ़ाया गया तो बस संचालक किसी भी समय हड़ताल पर जा सकते हैं। उनका कहना है कि यह केवल आंदोलन नहीं बल्कि बढ़ते घाटे की वजह से उत्पन्न मजबूरी है। यात्रियों पर पड़ सकता है असरयदि बस मालिक हड़ताल पर जाते हैं तो इसका सीधा असर लाखों यात्रियों पर पड़ेगा, खासकर उन लोगों पर जो रोजाना बसों से आवागमन करते हैं। ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में सार्वजनिक परिवहन की उपलब्धता प्रभावित हो सकती है। फिलहाल सभी की निगाहें आज होने वाली बैठक पर टिकी हैं। इसी बैठक के बाद यह तय होगा कि किराया बढ़ाने पर सहमति बनती है या प्रदेश बस परिवहन व्यवस्था हड़ताल की ओर बढ़ती है।
CBI जांच के बीच कोर्ट पहुंचाए गए पति और सास, रिमांड पर होगा फैसला

भोपाल । भोपाल में चर्चित ट्विशा शर्मा मौत मामले में जांच का दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है। मंगलवार को मृतका के पति Samarth Singh और सास Giribala Singh को सीबीआई ने रिमांड अवधि समाप्त होने पर अदालत में पेश किया। दोनों को प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में पेश किया गया, जहां आगे की कार्रवाई पर फैसला होना है। आरोपों से किया इनकासीबीआई पूछताछ के दौरान समर्थ और गिरिबाला सिंह ने अपने ऊपर लगे मारपीट तथा सबूतों से छेड़छाड़ के आरोपों को खारिज किया है। दोनों का कहना है कि ट्विशा के साथ उनके संबंध सामान्य थे और उन्होंने किसी प्रकार का उत्पीड़न नहीं किया। जांच एजेंसी उनके बयानों का उपलब्ध साक्ष्यों से मिलान कर रही है। घटनाक्रम का रीक्रिएशनसोमवार को सीबीआई टीम ने पूरे घटनाक्रम का रीक्रिएशन कराया। जांच अधिकारी यह समझने की कोशिश कर रहे हैं कि जिस परिस्थिति में ट्विशा की मौत हुई, वह आत्महत्या थी या फिर किसी अन्य वजह से हुई घटना। जब्त किए गए सबूतों की फोरेंसिक जांच भी जारी है। लिगेचर बेल्ट को लेकर बढ़े सवालमामले में सबसे बड़ा सवाल उस लिगेचर बेल्ट को लेकर खड़ा हुआ है, जिसके सहारे ट्विशा फंदे पर लटकी मिली थीं। जांच में सामने आया है कि घटनास्थल से बरामद बेल्ट को नियमानुसार सुरक्षित रखने के बजाय तत्कालीन जांच अधिकारी सब इंस्पेक्टर दिनेश शर्मा ने करीब दो दिन तक अपनी कार में रखा था। बाद में इसे फोरेंसिक जांच के लिए भेजा गया। इतना ही नहीं, पोस्टमार्टम के दौरान भी बेल्ट को अस्पताल में जमा नहीं कराया गया था। इस लापरवाही को जांच में गंभीर माना जा रहा है और सीबीआई जल्द ही संबंधित पुलिस अधिकारी से पूछताछ कर सकती है। हत्या की आशंका हुई मजबूतट्विशा के परिजनों ने शुरू से ही मौत को संदिग्ध बताते हुए हत्या की आशंका जताई थी। उनका कहना था कि यदि मामला आत्महत्या का था, तो फंदे में इस्तेमाल हुई बेल्ट को सुरक्षित क्यों नहीं रखा गया। बेल्ट के रखरखाव में कथित लापरवाही सामने आने के बाद मामले में संदेह और गहरा गया है। आर्थिक और पेशेवर पहलुओं की भी जांचसीबीआई जांच में यह तथ्य भी सामने आया है कि ट्विशा जिस कंपनी में कार्यरत थीं, वहां से उन्हें पिछले छह से सात महीनों से नियमित वेतन नहीं मिला था। एजेंसी अब यह भी जांच कर रही है कि क्या आर्थिक दबाव, नौकरी से जुड़ी परेशानियां या व्यक्तिगत विवाद उनकी मानसिक स्थिति को प्रभावित कर रहे थे। फिलहाल अदालत में पेशी के बाद यह स्पष्ट होगा कि सीबीआई दोनों आरोपियों की रिमांड बढ़ाने की मांग करती है या उन्हें न्यायिक हिरासत में भेजा जाता है। मामले की जांच अभी जारी है और एजेंसी कई पहलुओं पर साक्ष्य जुटा रही है।
‘बाबुल की दुआएं लेती जा’ की भावुक कहानी: Neel Kamal का अमर विदाई गीत और Rajendra Kumar का यादगार किस्सा

नई दिल्ली । हिंदी फिल्म संगीत के इतिहास में कुछ गीत ऐसे हैं जो सिर्फ धुन या बोल तक सीमित नहीं रहते, बल्कि समय के साथ भावनाओं की विरासत बन जाते हैं। वर्ष 1968 में रिलीज हुई फिल्म ‘नील कमल’ का विदाई गीत ‘बाबुल की दुआएं लेती जा’ भी उन्हीं चुनिंदा गीतों में शामिल किया जाता है, जिसने भारतीय समाज में पिता-बेटी के रिश्ते की संवेदनशीलता को एक अलग पहचान दी। इस गीत को संगीतकार रवि के संगीत, गीतकार साहिर लुधियानवी के शब्दों और मोहम्मद रफी की भावपूर्ण आवाज ने कालजयी बना दिया। कहा जाता है कि इस गीत की लोकप्रियता केवल फिल्म रिलीज़ के बाद नहीं बढ़ी, बल्कि उससे पहले ही इसकी भावनात्मक शक्ति लोगों तक पहुंचने लगी थी। एक चर्चित किस्से के अनुसार, गीतकार राजेंद्र कृष्ण की बेटी की शादी के अवसर पर फिल्म इंडस्ट्री की कई हस्तियां मौजूद थीं। इसी समारोह में संगीतकार रवि से अनुरोध किया गया कि वे कोई विशेष प्रस्तुति दें। रवि ने इस गीत को विदाई के समय प्रस्तुत करने का निर्णय लिया, ताकि उसकी भावनात्मक गहराई पूरी तरह महसूस की जा सके। जैसे ही विदाई की रस्म शुरू हुई, माहौल बेहद भावुक हो गया। परिवार के सदस्य पहले से ही भावनाओं में डूबे हुए थे और उसी क्षण ‘बाबुल की दुआएं लेती जा’ की धुन ने पूरे वातावरण को और भारी कर दिया। गीत के बोल जैसे-जैसे आगे बढ़े, वहां मौजूद हर व्यक्ति की आंखें नम हो गईं। कहा जाता है कि यह केवल एक संगीत प्रस्तुति नहीं थी, बल्कि एक ऐसा अनुभव था जिसने वहां मौजूद लोगों के दिलों को गहराई से छू लिया। इस घटना से जुड़ा सबसे चर्चित पहलू अभिनेता राजेंद्र कुमार का बताया जाता है। कहा जाता है कि गीत समाप्त होने के बाद वे इतने भावुक हो गए कि सीधे संगीतकार रवि के पास पहुंचे और पूछ बैठे कि यह गीत किस फिल्म का हिस्सा है, क्योंकि उस समय तक ‘नील कमल’ रिलीज नहीं हुई थी। यह घटना इस बात का उदाहरण मानी जाती है कि कभी-कभी कला अपनी आधिकारिक प्रस्तुति से पहले ही लोगों के दिलों तक पहुंच जाती है और अमर हो जाती है। गीत से जुड़ी एक और भावनात्मक कथा मोहम्मद रफी से संबंधित बताई जाती है। कहा जाता है कि रिकॉर्डिंग के दौरान वे अपने निजी जीवन के अनुभवों से भावुक हो गए थे, जिससे उनकी आवाज में एक विशेष कंपन और दर्द झलक आया। संगीतकार रवि ने उस प्राकृतिक भाव को गीत में बनाए रखने का निर्णय लिया, क्योंकि उन्हें लगा कि यही वास्तविकता गीत को और अधिक प्रभावशाली बनाती है। यही कारण है कि यह गीत आज भी विदाई समारोहों में विशेष स्थान रखता है। समय के साथ यह गीत केवल एक फिल्मी प्रस्तुति नहीं रहा, बल्कि भारतीय पारिवारिक भावनाओं का प्रतीक बन गया। विवाह समारोहों में विदाई के क्षणों में इसकी मौजूदगी आज भी उतनी ही प्रभावशाली महसूस की जाती है जितनी दशकों पहले थी। यह गीत आने वाली पीढ़ियों के लिए भी हिंदी सिनेमा की उस विरासत का हिस्सा बना रहेगा, जिसमें संगीत केवल मनोरंजन नहीं बल्कि भावनाओं की गहराई को व्यक्त करने का माध्यम बनता है। इसकी लोकप्रियता यह साबित करती है कि सच्ची कला समय की सीमाओं से परे जाकर हमेशा जीवित रहती है। आज भी जब यह गीत गूंजता है, तो हर श्रोता के मन में विदाई का वही पुराना भाव और अपनापन लौट आता है, जो इसे अमर बनाता है।
IPL 2026 के सबसे भरोसेमंद बल्लेबाज कौन? टॉप-5 लिस्ट चौंकाएगी

नई दिल्ली । आईपीएल 2026 का रोमांचक सीजन समाप्त हो चुका है और एक बार फिर Royal Challengers Bengaluru ने खिताब अपने नाम कर लिया। सीजन खत्म होने के बाद बल्लेबाजों के प्रदर्शन को लेकर कई दिलचस्प आंकड़े सामने आए हैं। बल्लेबाजी औसत के मामले में सबसे बड़ा सरप्राइज यह रहा कि Virat Kohli टॉप-5 में पांचवें स्थान पर रहे, जबकि सूची में शीर्ष स्थान पर Ravindra Jadeja का कब्जा रहा। IPL 2026 में सर्वाधिक बल्लेबाजी औसत वाले टॉप-5 बल्लेबाज1. Ravindra Jadeja (राजस्थान रॉयल्समैच: 14पारियां: 11रन: 266औसत: 66.50जडेजा ने सीमित अवसरों में शानदार बल्लेबाजी करते हुए सीजन का सर्वश्रेष्ठ औसत दर्ज किया। 2. Quinton de Kock (मुंबई इंडियंस)मैच: 3रन: 132औसत: 66.00डिकॉक ने केवल तीन मैच खेले, लेकिन प्रभावशाली प्रदर्शन करते हुए दूसरे स्थान पर रहे। 3. Rinku Singh (कोलकाता नाइट राइडर्स)मैच: 14पारियां: 11रन: 295औसत: 59.00रिंकू सिंह ने फिनिशर की भूमिका निभाते हुए लगातार उपयोगी पारियां खेलीं। 4. Anshul Kamboj (चेन्नई सुपर किंग्स)मैच: 14पारियां: 4रन: 58औसत: 58.00मुख्य रूप से गेंदबाजी ऑलराउंडर होने के बावजूद अंशुल कंबोज ने बल्लेबाजी में भी प्रभाव छोड़ा। 5. Virat Kohli (रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु)मैच: 16पारियां: 16रन: 675औसत: 56.25कोहली इस सूची में पांचवें स्थान पर रहे, लेकिन रन बनाने के मामले में उन्होंने शानदार प्रदर्शन किया और ऑरेंज कैप की दौड़ में भी शीर्ष बल्लेबाजों में शामिल रहे। दिलचस्प बात यह है कि औसत के आधार पर कोहली पांचवें स्थान पर हैं, लेकिन उन्होंने टॉप-5 में शामिल अधिकांश खिलाड़ियों की तुलना में कहीं अधिक रन बनाए। इससे साफ है कि पूरे सीजन में निरंतरता के मामले में उनका प्रदर्शन बेहद मजबूत रहा।