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एकतरफा कार्रवाई का आरोप, झाबुआ में पटवारी सस्पेंड; कर्मचारियों ने उठाया विरोध का बिगुल

मध्य प्रदेश । झाबुआ जिले के ग्राम गुंदीपाड़ा में 12 वर्षीय बच्ची शिवानी की कुएं में गिरने से हुई दर्दनाक मौत के बाद प्रशासन द्वारा हल्का पटवारी नीलेश अखाड़े को निलंबित किए जाने पर विवाद खड़ा हो गया है। इस कार्रवाई के बाद जिले के राजस्व कर्मचारियों में भारी नाराजगी देखी जा रही है। पटवारी संघ ने आरोप लगाया है कि प्रशासन ने पहले संबंधित पटवारी को कारण बताओ नोटिस तो जारी किया, लेकिन जवाब देने के लिए पर्याप्त समय दिए बिना ही सीधे निलंबन की कार्रवाई कर दी गई। संघ का कहना है कि यह निर्णय एकतरफा और नियमों के विपरीत है। संघ का दावा: पहले ही दी गई थी खतरनाक संरचनाओं की जानकारीपटवारी संघ ने अपने ज्ञापन में मध्यप्रदेश खुले नलकूप सुरक्षा अधिनियम 2024 का हवाला देते हुए कहा कि ऐसे मामलों में प्राथमिक जिम्मेदारी भूमि स्वामी और बोरवेल/कुआं खोदने वाली एजेंसी की होती है। ऐसे में सीधे पटवारी को दोषी ठहराकर निलंबित करना अनुचित है। संघ ने यह भी दावा किया कि जिले के पटवारियों द्वारा पहले ही बिना मुंडेर वाले कुओं और खुले बोरवेल की सूची संबंधित तहसील कार्यालयों को सौंप दी गई थी। इसके बावजूद कार्रवाई केवल एक कर्मचारी पर केंद्रित करना अन्यायपूर्ण है। राजस्व कर्मचारियों में बढ़ा असंतोषनिलंबन आदेश के बाद राजस्व विभाग के कर्मचारियों में असंतोष तेजी से बढ़ा है। कई पटवारियों का कहना है कि यदि प्रशासन इस तरह त्वरित और कठोर कार्रवाई करेगा, तो जमीनी स्तर पर काम करना मुश्किल हो जाएगा। कर्मचारियों का यह भी कहना है कि फील्ड में संसाधनों की कमी और सीमित अधिकारों के बावजूद पूरी जिम्मेदारी पटवारियों पर डाल दी जाती है, जो सही नहीं है। चरणबद्ध आंदोलन की चेतावनीपटवारी संघ ने प्रशासन के खिलाफ तीन चरणों में आंदोलन की घोषणा की है। पहले चरण में झाबुआ, रामा और रानापुर तहसीलों के सभी पटवारी तीन दिन के सामूहिक अवकाश पर रहेंगे। यदि इसके बाद भी निलंबन आदेश वापस नहीं लिया गया तो दूसरे चरण में जिले के सभी पटवारी तीन दिन के सामूहिक अवकाश पर जाएंगे और सरकारी सोशल मीडिया समूहों से भी बाहर हो जाएंगे। संघ ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि फिर भी मांगें नहीं मानी गईं तो आगे अनिश्चितकालीन हड़ताल की स्थिति बन सकती है। प्रशासन की प्रतिक्रिया का इंतजारफिलहाल इस पूरे मामले पर जिला प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। वहीं, यह विवाद अब प्रशासन और राजस्व कर्मचारियों के बीच टकराव का रूप लेता दिख रहा है।

अमेरिका-ईरान तनाव के बीच पाकिस्तान पर उठे सवाल, इशाक डार और मार्को रुबियो की मुलाकात को लेकर नई बहस

नई दिल्ली । पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच पाकिस्तान एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय चर्चा के केंद्र में आ गया है। हाल के दिनों में ऐसी रिपोर्टें सामने आईं जिनमें दावा किया गया कि पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार ने अमेरिका के साथ उच्चस्तरीय वार्ता के दौरान ईरान के परमाणु कार्यक्रम से जुड़ी संवेदनशील जानकारियों पर चर्चा की थी। इन रिपोर्टों ने क्षेत्रीय कूटनीति और पाकिस्तान की भूमिका को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए। हालांकि पाकिस्तान सरकार ने इन आरोपों को पूरी तरह निराधार बताते हुए स्पष्ट खंडन किया है। यह विवाद उस समय सामने आया जब इशाक डार ने हाल ही में वाशिंगटन का दौरा किया और अमेरिकी विदेश मंत्री Marco Rubio के साथ मुलाकात की। इस बैठक में द्विपक्षीय संबंधों, क्षेत्रीय सुरक्षा और पश्चिम एशिया की मौजूदा स्थिति समेत कई अहम मुद्दों पर चर्चा हुई थी। इसके बाद कुछ मीडिया रिपोर्टों और विश्लेषणों में दावा किया गया कि बातचीत के दौरान ईरान के परमाणु कार्यक्रम और क्षेत्रीय सुरक्षा से जुड़े विषयों पर विशेष चर्चा हुई थी। विवाद को और बल तब मिला जब अमेरिका की खुफिया एजेंसी के एक पूर्व विश्लेषक द्वारा यह दावा किया गया कि बैठक में ईरान की रणनीतिक तैयारियों और उसकी संभावित प्रतिक्रिया को लेकर बातचीत हुई थी। इन दावों के बाद अमेरिकी राजनीतिक हलकों में भी इस विषय को लेकर सवाल उठे। अमेरिकी संसद में भी इस मुद्दे का उल्लेख किया गया, जहां कुछ सांसदों ने अमेरिकी प्रशासन से इस संबंध में जानकारी मांगी। हालांकि अमेरिकी पक्ष से भी इन दावों की स्पष्ट पुष्टि नहीं की गई। अमेरिकी विदेश मंत्री से जब इस विषय पर सवाल पूछा गया तो उन्होंने कहा कि उन्हें ऐसी किसी रिपोर्ट या संदेश की जानकारी नहीं है। उनके इस बयान के बाद भी चर्चाओं का दौर जारी रहा, क्योंकि पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच किसी भी प्रकार की संवेदनशील जानकारी के आदान-प्रदान को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इन आरोपों के बीच पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने आधिकारिक प्रतिक्रिया जारी करते हुए कहा कि विदेश मंत्री इशाक डार ने अमेरिका के साथ किसी भी प्रकार की गोपनीय या संवेदनशील परमाणु जानकारी साझा नहीं की है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने स्पष्ट किया कि बैठक का उद्देश्य क्षेत्रीय स्थिरता, द्विपक्षीय सहयोग और तनाव कम करने के प्रयासों पर विचार-विमर्श करना था। उन्होंने कहा कि मीडिया में प्रसारित दावों का वास्तविक तथ्यों से कोई संबंध नहीं है। इस घटनाक्रम का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि पाकिस्तान हाल के वर्षों में स्वयं को क्षेत्रीय संवाद और मध्यस्थता की भूमिका में प्रस्तुत करने का प्रयास करता रहा है। विशेष रूप से अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के दौरान पाकिस्तान ने कई बार बातचीत और कूटनीतिक समाधान की आवश्यकता पर जोर दिया है। इसी संदर्भ में पाकिस्तान और ईरान के बीच भी लगातार राजनयिक संपर्क बने हुए हैं। विश्लेषकों का मानना है कि वर्तमान समय में पश्चिम एशिया की स्थिति बेहद संवेदनशील बनी हुई है। ऐसे में किसी भी देश के नेताओं की उच्चस्तरीय बैठकों और उनके बयानों को लेकर विभिन्न प्रकार की अटकलें लगना स्वाभाविक है। हालांकि जब तक किसी दावे की आधिकारिक पुष्टि न हो, तब तक उसे तथ्य के रूप में स्वीकार करना उचित नहीं माना जाता। फिलहाल पाकिस्तान सरकार ने अपना पक्ष स्पष्ट कर दिया है और इन आरोपों को खारिज कर दिया है। इसके बावजूद अमेरिका, ईरान और क्षेत्रीय देशों के बीच चल रहे कूटनीतिक प्रयासों पर दुनिया की नजर बनी हुई है। आने वाले दिनों में पश्चिम एशिया की परिस्थितियां और उससे जुड़े राजनयिक घटनाक्रम अंतरराष्ट्रीय राजनीति की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

पश्चिम बंगाल में टीएमसी की अंदरूनी लड़ाई तेज, रिजू दत्ता बोले- अब भी नहीं चेतीं ममता तो संगठन का अस्तित्व खतरे में

नई दिल्ली । पश्चिम बंगाल की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस के भीतर जारी असंतोष अब खुलकर सामने आने लगा है। पार्टी से निष्कासित नेताओं द्वारा लगातार किए जा रहे दावों और बयानों ने राज्य की सियासत को नई दिशा दे दी है। इसी कड़ी में निष्कासित नेता रिजू दत्ता ने पार्टी नेतृत्व पर तीखा हमला बोलते हुए दावा किया है कि तृणमूल कांग्रेस के भीतर बड़ा राजनीतिक बदलाव आकार ले रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि पार्टी नेतृत्व ने समय रहते हालात को नहीं समझा तो संगठन केवल नाममात्र का ढांचा बनकर रह जाएगा। रिजू दत्ता का यह बयान ऐसे समय आया है जब पार्टी के एक अन्य निष्कासित नेता ऋतब्रत बनर्जी ने दावा किया है कि उन्हें तृणमूल कांग्रेस के 80 में से 58 विधायकों का समर्थन प्राप्त है। बागी खेमे का कहना है कि इन विधायकों ने उन्हें अपना नेता चुना है और इस संबंध में विधानसभा अध्यक्ष को भी समर्थन पत्र सौंपा जा चुका है। हालांकि इन दावों की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है, लेकिन इससे राज्य की राजनीति में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। रिजू दत्ता ने कहा कि बागी गुट की ओर से उठाया गया कदम पूरी तरह संवैधानिक और कानूनी प्रक्रियाओं के तहत किया गया है। उनके अनुसार, समय के साथ ऋतब्रत बनर्जी को समर्थन देने वाले विधायकों की संख्या बढ़ रही है। उन्होंने यह भी दावा किया कि अधिकांश विधायक अब भी ममता बनर्जी का सम्मान करते हैं और उन्हें पार्टी का प्रमुख चेहरा मानते हैं, लेकिन संगठन में दूसरे नेतृत्व को लेकर असंतोष मौजूद है। बागी नेताओं ने विशेष रूप से अभिषेक बनर्जी के नेतृत्व शैली पर सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि पार्टी के भीतर निर्णय लेने की प्रक्रिया सीमित होती जा रही है और कई वरिष्ठ नेताओं तथा विधायकों को पर्याप्त महत्व नहीं मिल रहा। इसी असंतोष ने वर्तमान राजनीतिक परिस्थितियों को जन्म दिया है। तृणमूल कांग्रेस के लिए यह संकट ऐसे समय सामने आया है जब हालिया विधानसभा चुनावों में पार्टी को अपेक्षित सफलता नहीं मिली। कभी राज्य विधानसभा में भारी बहुमत रखने वाली पार्टी की संख्या अब काफी कम हो चुकी है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि चुनावी झटकों के बाद संगठन के भीतर उभर रहे मतभेद नेतृत्व के लिए अतिरिक्त चुनौती बन सकते हैं। इस बीच, पार्टी नेतृत्व की ओर से स्थिति को नियंत्रित करने के प्रयास भी जारी हैं। हालांकि बागी नेताओं के लगातार बयान यह संकेत दे रहे हैं कि असंतोष केवल व्यक्तिगत स्तर तक सीमित नहीं है, बल्कि संगठनात्मक ढांचे और नेतृत्व शैली को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि आने वाले दिनों में विधानसभा अध्यक्ष की भूमिका और कानूनी प्रक्रियाएं इस पूरे विवाद की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण साबित हो सकती हैं। फिलहाल पश्चिम बंगाल की राजनीति में नजरें इस बात पर टिकी हैं कि तृणमूल कांग्रेस नेतृत्व इस चुनौती का सामना किस तरह करता है। एक ओर बागी गुट अपने समर्थन का दावा कर रहा है, वहीं दूसरी ओर पार्टी नेतृत्व संगठनात्मक एकता बनाए रखने की कोशिश में जुटा हुआ है। आने वाले दिनों में यह संघर्ष राज्य की राजनीति के सबसे महत्वपूर्ण घटनाक्रमों में से एक बन सकता है।

आईपीएल फाइनल वीडियो विवाद पर नुसरत भरूचा की सफाई, बोलीं- अफवाहों पर नहीं, तथ्यों पर करें भरोसा

नई दिल्ली । बॉलीवुड अभिनेत्री Nushrratt Bharuccha ने आईपीएल फाइनल से जुड़ी एक वायरल वीडियो को लेकर सोशल मीडिया पर चल रही अटकलों और दावों पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। हाल के दिनों में एक वीडियो को लेकर विभिन्न तरह की चर्चाएं शुरू हो गई थीं, जिसमें सुनाई देने वाली कुछ आवाजों को लेकर सोशल मीडिया पर कई तरह के अनुमान लगाए जा रहे थे। अब अभिनेत्री ने स्वयं सामने आकर पूरे मामले की वास्तविकता स्पष्ट करने की कोशिश की है। नुसरत भरूचा ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट के माध्यम से कई तस्वीरें और स्क्रीनशॉट साझा करते हुए कहा कि एक साधारण घटना को जरूरत से ज्यादा बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया गया। उन्होंने बताया कि वीडियो में सुनाई देने वाली आवाजों को लेकर कई तरह की भ्रामक कहानियां बनाई गईं, जबकि वास्तविकता इससे बिल्कुल अलग थी। अभिनेत्री ने यह भी कहा कि उनके नाम से कुछ ऐसे बयान भी प्रसारित किए गए, जिनका उनसे कोई संबंध नहीं था। अपने स्पष्टीकरण में अभिनेत्री ने बताया कि जिस दिन संबंधित वीडियो रिकॉर्ड की गई थी, उस समय वह अपने दोस्तों के घर पर आईपीएल फाइनल मुकाबला देख रही थीं। उसी दौरान घर में मौजूद एक पालतू पपी रोने जैसी आवाजें निकाल रहा था। वीडियो रिकॉर्डिंग के दौरान वही आवाजें भी कैद हो गईं। उनके अनुसार, यह पूरी घटना बेहद सामान्य थी, लेकिन बाद में सोशल मीडिया पर इसे अलग-अलग संदर्भों में प्रस्तुत किया जाने लगा। नुसरत ने यह भी बताया कि उनके एक मित्र ने उसी समय दूसरे एंगल से एक और वीडियो रिकॉर्ड किया था, जिसमें वही आवाजें स्पष्ट रूप से सुनी जा सकती हैं। अभिनेत्री का कहना है कि यह अतिरिक्त वीडियो इस बात का प्रमाण है कि रिकॉर्डिंग में सुनाई देने वाली आवाजें वास्तव में पालतू पपी की थीं और उनका किसी अन्य दावे या अटकल से कोई संबंध नहीं था। विवाद बढ़ने के बाद अभिनेत्री ने एक और वीडियो साझा किया, जिसमें वह घर के भीतर दिखाई दे रही हैं और साथ ही पालतू पपी भी नजर आ रहा है। उन्होंने बताया कि यह वीडियो उसी रात बाद में रिकॉर्ड किया गया था। नुसरत के अनुसार, उन्हें पहले ही कुछ लोगों ने सलाह दी थी कि वह अपनी मूल वीडियो हटा दें क्योंकि उसके गलत अर्थ निकाले जा सकते हैं। इसी आशंका के चलते उन्होंने वीडियो को हटा भी दिया था, लेकिन बाद में वही स्थिति उत्पन्न हो गई जिसका डर था। अभिनेत्री ने कहा कि सोशल मीडिया के दौर में किसी भी सामग्री को संदर्भ से अलग करके प्रस्तुत करना आसान हो गया है, जिससे गलतफहमियां तेजी से फैलती हैं। उन्होंने लोगों से अपील की कि किसी भी वायरल सामग्री पर प्रतिक्रिया देने से पहले तथ्यों की जांच अवश्य करें और बिना पुष्टि के किसी निष्कर्ष पर न पहुंचें। नुसरत भरूचा ने यह भी कहा कि मोबाइल फोन और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का उपयोग जिम्मेदारी के साथ किया जाना चाहिए। उन्होंने लोगों से आग्रह किया कि किसी भी व्यक्ति के बारे में अधूरी जानकारी के आधार पर अफवाहें फैलाने या उसे परेशान करने से बचें। अभिनेत्री का मानना है कि डिजिटल माध्यमों पर जागरूकता और जिम्मेदारी आज पहले से कहीं अधिक आवश्यक हो गई है। इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर सोशल मीडिया पर फैलने वाली अपुष्ट जानकारियों और अफवाहों के प्रभाव को लेकर चर्चा शुरू कर दी है। नुसरत भरूचा की सफाई के बाद अब यह मामला तथ्यों और जिम्मेदार ऑनलाइन व्यवहार के महत्व की ओर भी ध्यान आकर्षित कर रहा है।

रेलवे का बड़ा फैसला, सांची स्टेशन पर बनी रहेगी 4 ट्रेनों की रोक; आसान होगी यात्रा

मध्य प्रदेश । पश्चिम मध्य रेलवे ने यात्रियों की सुविधा और बढ़ती मांग को देखते हुए यह निर्णय लिया है कि सांची और विदिशा स्टेशनों पर चार प्रमुख एक्सप्रेस ट्रेनों का ठहराव अब अगले आदेश तक जारी रहेगा। पहले यह ठहराव प्रायोगिक तौर पर शुरू किया गया था, लेकिन सकारात्मक प्रतिक्रिया मिलने के बाद इसे आगे बढ़ा दिया गया है। कौन-कौन सी ट्रेनें रुकेंगीइन प्रमुख ट्रेनों का ठहराव जारी रहेगा:कर्नाटक संपर्क क्रांति एक्सप्रेस (12629 / 12630)  -विदिशा में ठहरावश्री माता वैष्णो देवी कटरा–चेन्नई एक्सप्रेस (16031 / 16032) -सांची में ठहराव धार्मिक और लंबी दूरी की यात्रा में सुविधाइस निर्णय से सांची और विदिशा के यात्रियों को देश के कई हिस्सों तक पहुंचना आसान हो जाएगा। खासकर वैष्णो देवी, चेन्नई, कर्नाटक और दिल्ली जैसे बड़े रूटों पर यात्रा करने वालों को सीधा लाभ मिलेगा।  रेलवे अधिकारियों का बयानरेलवे के वरिष्ठ अधिकारी सौरभ कटारिया ने बताया कि यात्रियों की सकारात्मक प्रतिक्रिया और जनप्रतिनिधियों की मांग के आधार पर यह ठहराव जारी रखने का निर्णय लिया गया है। उन्होंने कहा कि इससे क्षेत्र में धार्मिक, शैक्षणिक और व्यावसायिक यात्रा को बढ़ावा मिलेगा।  स्थानीय लोगों को फायदाइस फैसले से आसपास के क्षेत्रों के यात्रियों को अब बड़े स्टेशनों तक जाने की जरूरत कम पड़ेगी और समय व खर्च दोनों की बचत होगी।

सात असफल IVF प्रयासों के बाद मिली खुशियों की सौगात, संभावना सेठ और अविनाश द्विवेदी बने जुड़वां बच्चों के माता-पिता

नई दिल्ली । टीवी और मनोरंजन जगत की चर्चित अभिनेत्री संभावना सेठ के जीवन में आखिरकार वह खुशी आ गई है जिसका उन्हें और उनके परिवार को वर्षों से इंतजार था। करीब दस वर्षों तक मातृत्व की राह में लगातार चुनौतियों और असफलताओं का सामना करने के बाद संभावना सेठ और उनके पति अविनाश द्विवेदी जुड़वां बच्चों के माता-पिता बन गए हैं। सरोगेसी के माध्यम से मिले इस सुखद उपहार ने न केवल उनके परिवार को नई खुशियां दी हैं, बल्कि उनके लाखों प्रशंसकों को भी भावुक कर दिया है। इस खुशखबरी की जानकारी कपल ने सोशल मीडिया के माध्यम से साझा की। अस्पताल से साझा की गई तस्वीरों में दोनों के चेहरे पर लंबे संघर्ष के बाद मिली सफलता और संतोष साफ दिखाई दे रहा था। तस्वीरों में संभावना की आंखों में खुशी के आंसू नजर आए, जबकि अविनाश उनके साथ खड़े होकर इस विशेष पल को महसूस करते दिखाई दिए। सोशल मीडिया पर साझा किए गए संदेश में कपल ने इस खुशी की तुलना समय से पहले आई दीपावली से करते हुए बताया कि उनके घर लक्ष्मी और गणेश के रूप में दो नई खुशियों का आगमन हुआ है। संभावना सेठ का मातृत्व का सफर आसान नहीं रहा। अभिनेत्री ने पहले भी कई अवसरों पर खुलकर बताया था कि मां बनने की उनकी इच्छा ने उन्हें वर्षों तक मानसिक, शारीरिक और भावनात्मक संघर्षों से गुजरने पर मजबूर किया। उन्होंने लगातार चिकित्सा उपचार कराए और सात बार आईवीएफ प्रक्रिया का सहारा लिया, लेकिन हर बार उन्हें निराशा का सामना करना पड़ा। कई बार गर्भधारण के बाद गर्भपात जैसी पीड़ादायक परिस्थितियों ने भी उनके जीवन को प्रभावित किया। इन असफलताओं के बावजूद उन्होंने उम्मीद नहीं छोड़ी और अपने लक्ष्य की ओर लगातार प्रयास करती रहीं। लगातार असफल चिकित्सा प्रयासों के बाद संभावना और अविनाश ने सरोगेसी का विकल्प चुना। यह निर्णय उनके जीवन का महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुआ। लंबे इंतजार और धैर्य के बाद आखिरकार उनके घर जुड़वां बच्चों का जन्म हुआ, जिसने उनके वर्षों पुराने सपने को साकार कर दिया। इस उपलब्धि को कपल ने भगवान की कृपा और अपने संघर्ष की जीत बताया है। उनकी इस खुशी में मनोरंजन जगत की कई हस्तियां भी शामिल हुईं। गौहर खान ने परिवार और नवजात बच्चों के लिए शुभकामनाएं देते हुए उनके सुखद भविष्य की कामना की। वहीं उर्फी जावेद, देबिना बनर्जी, किश्वर मर्चेंट और रोहित पुरोहित सहित कई कलाकारों ने उन्हें बधाई संदेश भेजे। सोशल मीडिया पर प्रशंसकों ने भी इस नए अध्याय के लिए कपल को शुभकामनाएं दीं। संभावना सेठ की यह कहानी केवल एक सेलिब्रिटी के माता-पिता बनने की खबर नहीं है, बल्कि उन हजारों दंपतियों के लिए प्रेरणा भी है जो लंबे समय तक संतान सुख के लिए संघर्ष करते हैं। उनका सफर यह संदेश देता है कि कठिन परिस्थितियों, असफलताओं और निराशाओं के बावजूद धैर्य, विश्वास और सही निर्णय जीवन में नई उम्मीदों के द्वार खोल सकते हैं। जुड़वां बच्चों के आगमन के साथ संभावना और अविनाश के जीवन में खुशियों का नया अध्याय शुरू हो गया है, जिसका इंतजार उन्होंने पूरे दस वर्षों तक किया था।

विदिशा में सड़कों की दुर्दशा पर तंज, कांग्रेस ने गड्ढों का पूजन कर साधा निशाना

मध्य प्रदेश । विदिशा जिले में सड़क की खराब हालत और बढ़ते गड्ढों को लेकर कांग्रेस ने सांकेतिक विरोध किया। कार्यकर्ताओं ने शहर के अलग-अलग इलाकों में सड़क के गड्ढों की पूजा-अर्चना कर सरकार के खिलाफ नाराजगी जताई। इस दौरान कार्यकर्ताओं ने कहा कि बरसात में गड्ढों में पानी भरने से दुर्घटनाओं का खतरा और बढ़ जाता है।  भाजपा सरकार और जनप्रतिनिधियों पर निशानाकांग्रेस जिलाध्यक्ष मोहित रघुवंशी ने आरोप लगाया कि जिले में भाजपा सांसद, विधायक और नगर पालिका अध्यक्ष होने के बावजूद सड़कें बदहाल हैं। उनका कहना है कि जनता ने विकास के लिए जनप्रतिनिधियों को चुना था, लेकिन जमीनी स्तर पर हालात में कोई सुधार नहीं हुआ है।  पूरे जिले में सड़कें खराब होने का दावाकांग्रेस नेताओं के अनुसार केवल शहर ही नहीं, बल्कि पूरे जिले में सड़कों की स्थिति खराब है। कई जगह लंबे समय से मरम्मत और निर्माण कार्य अधूरे पड़े हैं। नेताओं ने आरोप लगाया कि प्रशासनिक लापरवाही और राजनीतिक खींचतान के कारण विकास कार्य प्रभावित हो रहे हैं। “सद्बुद्धि” की प्रार्थना और विरोध का संदेशकांग्रेस कार्यकर्ताओं ने कहा कि गड्ढों की पूजा कर उन्होंने जिम्मेदारों को “सद्बुद्धि” देने और जल्द सड़क सुधार की प्रार्थना की है। यह प्रदर्शन पूरी तरह सांकेतिक था, जिसका उद्देश्य जनता की समस्याओं की ओर ध्यान आकर्षित करना था।  आगे आंदोलन की चेतावनीकांग्रेस ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द सड़कों की मरम्मत शुरू नहीं हुई तो पार्टी कलेक्ट्रेट का घेराव करेगी। साथ ही आने वाले दौरों में वरिष्ठ नेताओं से भी इस मुद्दे पर जवाब मांगा जाएगा।

आग से बचाव पर बड़ा एक्शन, इमारतों में आपातकालीन निकासी व्यवस्था की होगी जांच

विदिशा । विदिशा में जिला प्रशासन ने नागरिक सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए सभी बड़े प्रतिष्ठानों की जांच के आदेश दिए हैं। कलेक्टर अंशुल गुप्ता ने स्पष्ट कहा है कि किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। यह कदम दिल्ली की हालिया आगजनी घटना के बाद एहतियात के तौर पर उठाया गया है, ताकि ऐसे हादसों की पुनरावृत्ति रोकी जा सके। फायर सेफ्टी से लेकर निकासी व्यवस्था तक जांचजांच टीम होटल, लॉज, अस्पताल और बहुमंजिला इमारतों में कई महत्वपूर्ण बिंदुओं की समीक्षा करेगी, जैसे:फायर सेफ्टी उपकरणों की उपलब्धता और कार्यशीलताआपातकालीन निकास (Emergency Exit) की व्यवस्थाफायर एनओसी (No Objection Certificate) की वैधताविद्युत सुरक्षा मानकभवन निर्माण नियमों का पालन  नियमों की अनदेखी पर होगी सख्त कार्रवाप्रशासन ने साफ किया है कि यदि किसी भी प्रतिष्ठान में सुरक्षा मानकों की अनदेखी या अवैध निर्माण पाया गया, तो संबंधित संचालकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। इसमें जुर्माना, लाइसेंस रद्द करने जैसी कार्रवाई भी शामिल हो सकती है। संयुक्त टीम करेगी निरीक्षणइस अभियान के लिए प्रशासन ने नगर पालिका, फायर ब्रिगेड, लोक निर्माण विभाग और अन्य विभागों की संयुक्त टीम बनाई है। यह टीम जिलेभर में चरणबद्ध तरीके से सभी प्रमुख प्रतिष्ठानों का निरीक्षण करेगी और रिपोर्ट तैयार करेगी।  पहले से रोकथाम पर जोरअधिकारियों का मानना है कि हादसे के बाद कार्रवाई करने से बेहतर है कि पहले ही सुरक्षा मानकों की जांच कर कमियों को दूर किया जाए। इसी सोच के तहत यह अभियान शुरू किया गया है।

हड़ताल के बीच धार्मिक रास्ता अपनाया, सतना में संविदा स्वास्थ्य कर्मचारियों का सुंदरकांड पाठ

मध्य प्रदेश । सतना जिले में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के संविदा स्वास्थ्य कर्मचारियों का आंदोलन लगातार तीसरे दिन भी जारी रहा। इस दौरान कर्मचारियों ने विरोध को आध्यात्मिक रूप देते हुए भगवान श्रीराम और बजरंगबली की आराधना के साथ सुंदरकांड पाठ का आयोजन किया। इसके बाद सद्बुद्धि यज्ञ किया गया, जिसमें कर्मचारियों ने सरकार और प्रशासन को “सद्बुद्धि” देने और लंबित मांगों के शीघ्र समाधान की प्रार्थना की। सामूहिक प्रार्थना और बड़ी भागीदारीइस कार्यक्रम में जिले भर से बड़ी संख्या में संविदा कर्मचारी शामिल हुए। वातावरण में भक्ति और मांगों को लेकर गंभीरता—दोनों का मिश्रण देखने को मिला। कर्मचारियों ने कहा कि उनका आंदोलन किसी व्यक्ति या संस्था के खिलाफ नहीं है, बल्कि यह उनके अधिकार, सम्मानजनक भविष्य और सेवा सुरक्षा की मांग को लेकर है। कर्मचारियों की प्रमुख मांगेंआंदोलनरत कर्मचारियों ने सरकार के सामने कई महत्वपूर्ण मांगें रखी हैं:नियमितीकरण का लाभ देनाएनपीएस और स्वास्थ्य बीमा लागू करनाहर साल 10% वेतन वृद्धिमहंगाई भत्ता (DA) देनाCHO के वेतन में PBI समायोजनवेतन विसंगतियों का पुनः परीक्षणसमान कार्य के लिए समान वेतनसेवा सुरक्षा और सामाजिक सुरक्षा  सरकार से समाधान की उम्मीदकर्मचारियों का कहना है कि वे वर्षों से अपनी मांगों को लेकर संघर्ष कर रहे हैं। उन्हें उम्मीद है कि सरकार सकारात्मक निर्णय लेकर स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े हजारों परिवारों को राहत देगी। आंदोलन का शांतिपूर्ण स्वरूपपूरे कार्यक्रम में कर्मचारियों ने शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखी। सुंदरकांड और यज्ञ के माध्यम से उन्होंने समाधान की दिशा में सकारात्मक माहौल बनाने की कोशिश की।

जब गोविंदा को देखकर आश्वस्त नहीं थे पहलाज निहलानी, लेकिन डांस टैलेंट ने दिलाया बॉलीवुड में पहला बड़ा मौका

नई दिल्ली/ मुंबई । हिंदी सिनेमा के जाने-माने फिल्म निर्माता और केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष पहलाज निहलानी के निधन के बाद फिल्म जगत उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दे रहा है। अपने लंबे करियर के दौरान उन्होंने कई सफल फिल्मों का निर्माण किया और अनेक कलाकारों को अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर दिया। उनके जीवन से जुड़े कई यादगार प्रसंग इन दिनों चर्चा में हैं, जिनमें अभिनेता Govinda के करियर की शुरुआत से जुड़ा एक दिलचस्प किस्सा भी शामिल है। पहलाज निहलानी उन निर्माताओं में गिने जाते थे, जो नए कलाकारों की क्षमता को पहचानने में विश्वास रखते थे। फिल्म निर्माण के क्षेत्र में उन्होंने 1980 के दशक में कदम रखा और धीरे-धीरे अपनी अलग पहचान बनाई। उनकी फिल्मों में मनोरंजन, पारिवारिक भावनाएं और व्यावसायिक सफलता का संतुलित मेल देखने को मिलता था। इसी दौर में उन्होंने एक ऐसे युवा कलाकार को मौका दिया, जो आगे चलकर हिंदी सिनेमा का बड़ा सितारा बना। यह कहानी उस समय की है जब गोविंदा अपने करियर की शुरुआत करने की कोशिश कर रहे थे। पहलाज निहलानी ने एक इंटरव्यू में बताया था कि जब गोविंदा पहली बार उनसे मिलने पहुंचे तो उनका व्यक्तित्व और लुक उन्हें बहुत प्रभावशाली नहीं लगा। निर्माता के मन में यह संदेह था कि क्या यह युवा अभिनेता बड़े पर्दे पर दर्शकों को प्रभावित कर पाएगा। पहली मुलाकात के बाद वह पूरी तरह आश्वस्त नहीं थे और किसी निर्णय पर पहुंचना उनके लिए आसान नहीं था। हालांकि अगले ही दिन परिस्थितियां पूरी तरह बदल गईं। गोविंदा अपने डांस का एक वीडियो लेकर निहलानी के पास पहुंचे। जैसे ही निर्माता ने वह वीडियो देखा, उनकी राय बदल गई। गोविंदा की ऊर्जा, आत्मविश्वास, अभिव्यक्ति और शानदार नृत्य कौशल ने उन्हें प्रभावित कर दिया। निहलानी को महसूस हुआ कि इस युवा कलाकार में वह क्षमता मौजूद है जो उसे भीड़ से अलग बनाती है। इसके बाद उन्होंने गोविंदा को अपनी फिल्म में मुख्य भूमिका देने का फैसला कर लिया। यह फैसला आगे चलकर हिंदी फिल्म उद्योग के सबसे सफल निर्णयों में शामिल माना गया। वर्ष 1986 में रिलीज हुई Ilzaam से गोविंदा ने बतौर हीरो बॉलीवुड में कदम रखा। फिल्म को अच्छी प्रतिक्रिया मिली और अभिनेता को दर्शकों के बीच पहचान मिलने लगी। इसके बाद गोविंदा और पहलाज निहलानी की जोड़ी ने कई सफल फिल्मों में साथ काम किया। उनकी साझेदारी ने हिंदी सिनेमा को कई यादगार फिल्में दीं। Shola Aur Shabnam और Aankhen जैसी फिल्मों ने बॉक्स ऑफिस पर शानदार प्रदर्शन किया। इन फिल्मों की सफलता ने गोविंदा को उस दौर के सबसे लोकप्रिय अभिनेताओं में शामिल कर दिया। उनकी कॉमिक टाइमिंग, डांस और मनोरंजक अभिनय शैली दर्शकों की पहली पसंद बन गई। पहलाज निहलानी का योगदान केवल सफल फिल्में बनाने तक सीमित नहीं था। उन्होंने कई कलाकारों को अवसर देकर उनके करियर को नई दिशा दी। निर्माता के रूप में उनकी पहचान ऐसे फिल्मकार की रही, जो दर्शकों की पसंद को अच्छी तरह समझते थे। बाद में उन्होंने फिल्म प्रमाणन बोर्ड के अध्यक्ष के रूप में भी जिम्मेदारी निभाई और फिल्म उद्योग से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर सक्रिय भूमिका निभाई। उनके निधन के साथ हिंदी सिनेमा ने एक ऐसे निर्माता को खो दिया है, जिसने न केवल कई सफल फिल्मों का निर्माण किया बल्कि नए कलाकारों की प्रतिभा को पहचानकर उन्हें आगे बढ़ाने में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया। गोविंदा से जुड़ा यह किस्सा उनके दूरदर्शी दृष्टिकोण और प्रतिभा पहचानने की क्षमता का एक यादगार उदाहरण माना जाता है।