मैन्युफैक्चरिंग और सर्विस सेक्टर बने अर्थव्यवस्था के इंजन, भारत ने दर्ज की 7.7 प्रतिशत विकास दर

नई दिल्ली । वैश्विक आर्थिक चुनौतियों और भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था ने वित्त वर्ष 2025-26 में मजबूत प्रदर्शन करते हुए 7.7 प्रतिशत की रियल जीडीपी वृद्धि दर दर्ज की है। यह पिछले वित्त वर्ष की 7.1 प्रतिशत वृद्धि दर की तुलना में उल्लेखनीय सुधार माना जा रहा है। ताजा आंकड़े यह संकेत देते हैं कि घरेलू मांग, औद्योगिक गतिविधियों और सेवा क्षेत्र की मजबूती ने आर्थिक विकास को नई गति प्रदान की है। वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान देश की नॉमिनल जीडीपी वृद्धि दर 8.9 प्रतिशत रही। इसके साथ ही रियल और नॉमिनल ग्रॉस वैल्यू एडेड में क्रमशः 7.9 प्रतिशत और 9.1 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। विशेषज्ञों का मानना है कि यह प्रदर्शन वैश्विक स्तर पर जारी आर्थिक दबावों के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती को दर्शाता है। विकास दर में सबसे बड़ा योगदान द्वितीयक और तृतीयक क्षेत्रों का रहा। औद्योगिक गतिविधियों से जुड़े द्वितीयक क्षेत्र ने 8.8 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की, जबकि सेवा क्षेत्र की विकास दर 9.3 प्रतिशत रही। मैन्युफैक्चरिंग, व्यापार, परिवहन, संचार, होटल, स्टोरेज, वित्तीय सेवाओं और रियल एस्टेट से जुड़े क्षेत्रों में उल्लेखनीय विस्तार देखने को मिला। विशेष रूप से सेवा क्षेत्र ने आर्थिक वृद्धि को गति देने में अहम भूमिका निभाई। वित्तीय सेवाओं, पेशेवर सेवाओं, व्यापार और लॉजिस्टिक्स गतिविधियों में बढ़ोतरी ने अर्थव्यवस्था को अतिरिक्त मजबूती प्रदान की। वहीं मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में उत्पादन और निवेश गतिविधियों के विस्तार का सकारात्मक असर भी समग्र विकास दर पर दिखाई दिया। हालांकि प्राथमिक क्षेत्र की वृद्धि दर अपेक्षाकृत कम रही। कृषि, पशुपालन और मत्स्य पालन जैसे क्षेत्रों को शामिल करने वाले प्राथमिक क्षेत्र ने वित्त वर्ष के दौरान 3.2 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की। इसके बावजूद समग्र आर्थिक प्रदर्शन पर इसका सीमित प्रभाव देखने को मिला क्योंकि औद्योगिक और सेवा क्षेत्रों ने विकास की गति बनाए रखी। जनवरी से मार्च 2026 की चौथी तिमाही के आंकड़े भी अर्थव्यवस्था की मजबूती को दर्शाते हैं। इस अवधि में देश की रियल जीडीपी वृद्धि दर 7.8 प्रतिशत रही, जबकि नॉमिनल जीडीपी में 9.1 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। इसी दौरान रियल जीवीए में 7.9 प्रतिशत और नॉमिनल जीवीए में 9.9 प्रतिशत का विस्तार हुआ। चौथी तिमाही में भी सेवा और औद्योगिक क्षेत्र विकास के प्रमुख आधार बने रहे। द्वितीयक क्षेत्र की वृद्धि दर 7.9 प्रतिशत और तृतीयक क्षेत्र की वृद्धि दर 9.9 प्रतिशत दर्ज की गई। इससे स्पष्ट है कि आर्थिक गतिविधियों में निरंतर विस्तार बना हुआ है और विकास की रफ्तार स्थिर बनी हुई है। इस बार आर्थिक आंकड़े नए आधार वर्ष 2022-23 के अनुसार जारी किए गए हैं। इससे अर्थव्यवस्था की वर्तमान संरचना और उपभोग पैटर्न को अधिक सटीक रूप से दर्शाने में मदद मिलेगी। नए आधार वर्ष के तहत जारी आंकड़े देश की आर्थिक स्थिति का अधिक यथार्थवादी आकलन प्रस्तुत करते हैं। वैश्विक स्तर पर जारी अस्थिरता, व्यापारिक चुनौतियों और भू-राजनीतिक तनावों के बीच भारत की मजबूत विकास दर यह संकेत देती है कि घरेलू अर्थव्यवस्था में लचीलापन बना हुआ है। आने वाले समय में निवेश, उत्पादन और सेवा गतिविधियों में निरंतर वृद्धि देश को दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
अंडमान सागर में ऊर्जा क्षेत्र को बड़ी सफलता, ऑयल इंडिया के तीसरे खोजी कुएं में मिली प्राकृतिक गैस

नई दिल्ली । देश की प्रमुख सार्वजनिक क्षेत्र की ऊर्जा कंपनी ऑयल इंडिया लिमिटेड को अंडमान के अपतटीय क्षेत्र में प्राकृतिक गैस की खोज के रूप में एक महत्वपूर्ण सफलता मिली है। कंपनी ने घोषणा की है कि अंडमान सागर में ड्रिल किए गए अपने तीसरे खोजी कुएं में प्राकृतिक गैस और हाइड्रोकार्बन की मौजूदगी की पुष्टि हुई है। इस उपलब्धि को भारत की ऊर्जा सुरक्षा और घरेलू संसाधनों की खोज के प्रयासों के लिए एक सकारात्मक संकेत माना जा रहा है। कंपनी के अनुसार, यह खोज विजयपुरम-3 नामक खोजी कुएं में हुई है, जिसे ओपन एकरेज लाइसेंसिंग पॉलिसी के तहत अंडमान के अपतटीय ब्लॉक में विकसित किया गया है। यह कुआं अंडमान द्वीप समूह के पूर्वी तट से लगभग 15 किलोमीटर दूर समुद्र में स्थित है। समुद्री क्षेत्र में लगभग 355 मीटर की जल गहराई पर स्थित इस स्थान पर उन्नत तकनीक की सहायता से ड्रिलिंग कार्य किया गया। ऑयल इंडिया ने बताया कि ड्रिलिंग अभियान के दौरान इयोसीन भू-स्तर में 1,900 मीटर से अधिक गहराई तक पहुंचकर परीक्षण किए गए। प्रारंभिक उत्पादन परीक्षणों के दौरान प्राकृतिक गैस की मौजूदगी के स्पष्ट संकेत प्राप्त हुए। परफोरेशन प्रक्रिया के बाद लगातार गैस का प्रवाह और उसका जलना इस बात का प्रमाण माना गया कि क्षेत्र में व्यावसायिक महत्व की गैस मौजूद हो सकती है। कंपनी की ओर से जारी जानकारी के अनुसार परीक्षण के दौरान कुएं के भीतर दबाव में तेजी से वृद्धि दर्ज की गई, जिसके बाद गैस का प्रवाह शुरू हुआ। यह संकेत ऊर्जा विशेषज्ञों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि इससे क्षेत्र में हाइड्रोकार्बन प्रणाली की सक्रियता की पुष्टि होती है। फिलहाल प्राप्त गैस के नमूनों का वैज्ञानिक परीक्षण किया जा रहा है ताकि उसकी रासायनिक संरचना और ऊष्मीय क्षमता का सटीक आकलन किया जा सके। इसके साथ ही विशेषज्ञ आइसोटोप अध्ययन भी कर रहे हैं। इस अध्ययन का उद्देश्य गैस और अन्य हाइड्रोकार्बन के स्रोत, उत्पत्ति तथा भूगर्भीय विकास को समझना है। इन परीक्षणों के परिणाम भविष्य में क्षेत्र की ऊर्जा संभावनाओं का अधिक सटीक मूल्यांकन करने में मदद करेंगे। यह उपलब्धि इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि अंडमान अपतटीय ब्लॉक में यह हाइड्रोकार्बन की दूसरी पुष्टि है। इससे पहले सितंबर 2025 में विजयपुरम-2 नामक खोजी कुएं में भी प्राकृतिक गैस मिलने की पुष्टि हुई थी। अब तक इस ब्लॉक में कुल तीन खोजी कुएं ड्रिल किए जा चुके हैं, जिनमें से दो में हाइड्रोकार्बन की मौजूदगी के स्पष्ट संकेत मिले हैं। इससे पूरे क्षेत्र की ऊर्जा क्षमता को लेकर उम्मीदें बढ़ गई हैं। ऊर्जा क्षेत्र के जानकारों का मानना है कि लगातार मिल रही सफलताएं अंडमान क्षेत्र को भविष्य के महत्वपूर्ण गैस उत्पादन केंद्र के रूप में स्थापित कर सकती हैं। यदि आगे के परीक्षण और अन्वेषण भी सकारात्मक रहते हैं तो इससे देश की ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करने में मदद मिल सकती है और आयातित ईंधन पर निर्भरता कम करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण योगदान मिल सकता है। ऑयल इंडिया ने इस खोज को भविष्य की अन्वेषण और उत्पादन गतिविधियों के लिए एक महत्वपूर्ण संकेतक बताया है। कंपनी का मानना है कि अंडमान क्षेत्र में हाइड्रोकार्बन संसाधनों की मौजूदगी के बढ़ते प्रमाण आने वाले वर्षों में नई ऊर्जा परियोजनाओं और निवेश के अवसरों को भी बढ़ावा देंगे। यह खोज भारत की ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम के रूप में देखी जा रही है।
सिंधु जल संधि पर भारत का सख्त संदेश, आतंकवाद बंद होने तक पाकिस्तान को नहीं मिलेगी कोई राहत

नई दिल्ली । सिंधु जल संधि को लेकर भारत और पाकिस्तान के बीच एक बार फिर कूटनीतिक तनाव बढ़ता दिखाई दे रहा है। भारत ने पाकिस्तान के हालिया आरोपों और बयानों का कड़ा जवाब देते हुए स्पष्ट कर दिया है कि जब तक सीमा पार से आतंकवाद पूरी तरह समाप्त नहीं होता, तब तक सिंधु जल संधि स्थगित ही रहेगी। भारत ने दोहराया है कि राष्ट्रीय सुरक्षा और आतंकवाद से जुड़े मुद्दों पर उसका रुख पूरी तरह स्पष्ट और अडिग है। विदेश मंत्रालय की साप्ताहिक ब्रीफिंग के दौरान भारत ने पाकिस्तान के उस दावे को खारिज कर दिया, जिसमें कहा गया था कि भारत चिनाब नदी के जल प्रवाह से जुड़े ऐसे कदम उठा रहा है जो सिंधु जल संधि के प्रावधानों के खिलाफ हैं। भारत ने इन आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि पाकिस्तान तथ्यों से परे जाकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भ्रम पैदा करने की कोशिश कर रहा है। हाल के दिनों में पाकिस्तान ने आरोप लगाया था कि भारत चिनाब नदी के जल को दूसरी दिशा में मोड़ने की संभावित योजनाओं पर काम कर रहा है, जिससे सिंधु जल संधि प्रभावित हो सकती है। पाकिस्तान ने इसे अंतरराष्ट्रीय नियमों और द्विपक्षीय समझौतों के उल्लंघन के रूप में प्रस्तुत किया। हालांकि भारत ने इन दावों को स्वीकार करने से इनकार करते हुए कहा कि संधि के भविष्य को लेकर उसका निर्णय सुरक्षा परिस्थितियों और आतंकवाद से जुड़े व्यवहार पर निर्भर करेगा। भारत का कहना है कि सीमा पार से लगातार आतंकवादी गतिविधियों को समर्थन मिलने के कारण दोनों देशों के बीच विश्वास का माहौल कमजोर हुआ है। ऐसे में सामान्य द्विपक्षीय व्यवस्थाओं को पहले की तरह जारी रखना संभव नहीं है। सरकार का मानना है कि जब तक आतंकवाद के खिलाफ ठोस और विश्वसनीय कार्रवाई नहीं दिखाई देती, तब तक किसी भी संवेदनशील समझौते पर आगे बढ़ना कठिन होगा। सिंधु जल संधि भारत और पाकिस्तान के बीच जल संसाधनों के उपयोग को नियंत्रित करने वाला एक महत्वपूर्ण समझौता है। यह समझौता दशकों से दोनों देशों के बीच जल बंटवारे की व्यवस्था का आधार रहा है। हालांकि हाल के वर्षों में सुरक्षा संबंधी तनाव और सीमा पार आतंकवाद के मुद्दे ने इस समझौते को भी राजनीतिक और कूटनीतिक बहस का विषय बना दिया है। भारत ने यह भी संकेत दिया है कि राष्ट्रीय हितों और सुरक्षा से जुड़े मामलों में वह किसी प्रकार का समझौता नहीं करेगा। सरकार का मानना है कि आतंकवाद और सहयोग एक साथ नहीं चल सकते। इसी वजह से संधि को लेकर उठाए गए कदमों को सुरक्षा परिस्थितियों से जोड़कर देखा जा रहा है। इस बीच भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित व्यापार समझौते को लेकर भी सकारात्मक संकेत सामने आए हैं। दोनों देशों के बीच हालिया वार्ताओं में आर्थिक सहयोग को मजबूत बनाने और व्यापारिक संबंधों को नई दिशा देने पर चर्चा हुई है। अधिकारियों का कहना है कि वार्ता रचनात्मक रही है और आने वाले समय में इस दिशा में और प्रगति देखने को मिल सकती है। फिलहाल सिंधु जल संधि को लेकर भारत का संदेश स्पष्ट है। सरकार ने संकेत दिया है कि जब तक आतंकवाद के मुद्दे पर ठोस बदलाव नहीं दिखता, तब तक इस समझौते की बहाली की संभावना सीमित रहेगी। ऐसे में आने वाले समय में भारत-पाकिस्तान संबंधों और क्षेत्रीय कूटनीति पर इस मुद्दे का प्रभाव बना रह सकता है।
गुजरात दौरे पर पीएम मोदी, हथियार निर्माण केंद्र का किया निरीक्षण; रक्षा और इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं को देंगे नई गति

नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को गुजरात दौरे के दौरान सूरत के हजीरा स्थित अत्याधुनिक रक्षा निर्माण केंद्र का दौरा कर देश की रक्षा आत्मनिर्भरता और औद्योगिक विकास को नया संदेश दिया। अपने कार्यक्रम की शुरुआत में प्रधानमंत्री ने लार्सन एंड टुब्रो के आर्म्ड सिस्टम्स कॉम्प्लेक्स का निरीक्षण किया, जहां भारतीय सेना के लिए विकसित किए जा रहे आधुनिक सैन्य उपकरणों, बख्तरबंद वाहनों, टैंकों और ड्रोन तकनीक का अवलोकन किया। इस दौरान उन्होंने स्वदेशी रक्षा उत्पादन से जुड़ी विभिन्न परियोजनाओं की जानकारी भी प्राप्त की। हजीरा स्थित यह रक्षा निर्माण परिसर देश के प्रमुख सैन्य उत्पादन केंद्रों में शामिल माना जाता है। यहां आधुनिक बख्तरबंद वाहन, तोप प्रणाली और कई अन्य रक्षा प्लेटफॉर्म का निर्माण, एकीकरण और परीक्षण किया जाता है। प्रधानमंत्री ने परिसर में तैयार किए जा रहे स्वदेशी रक्षा उपकरणों का बारीकी से निरीक्षण किया और देश में विकसित हो रही तकनीकी क्षमताओं की समीक्षा की। इस दौरे को रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर भारत अभियान की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में देखा जा रहा है। रक्षा निर्माण केंद्र के निरीक्षण के बाद प्रधानमंत्री ने सूरत में 200 बिस्तरों वाले नए ईएसआईसी अस्पताल का उद्घाटन भी किया। इस अस्पताल के शुरू होने से क्षेत्र के श्रमिकों और उनके परिवारों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध होने की उम्मीद है। केंद्र और राज्य सरकार की विभिन्न स्वास्थ्य योजनाओं को मजबूती देने के उद्देश्य से इस परियोजना को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। गुजरात दौरे के दौरान प्रधानमंत्री ने सूरत और आसपास के क्षेत्रों के लिए लगभग 18,800 करोड़ रुपये की विकास परियोजनाओं की शुरुआत भी की। इनमें सड़क, परिवहन, रेलवे और शहरी बुनियादी ढांचे से जुड़ी कई महत्वपूर्ण परियोजनाएं शामिल हैं। इन योजनाओं का उद्देश्य क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को मजबूत करना और औद्योगिक विकास को नई गति प्रदान करना है। प्रधानमंत्री ने वडोदरा-मुंबई एक्सप्रेसवे के पैकेज छह और सात का उद्घाटन भी किया। इसके अलावा कई बड़े और छोटे पुलों, रेलवे ओवरब्रिज, फ्लाईओवर और अंडरपास परियोजनाओं को जनता को समर्पित किया गया। राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण की कई नई परियोजनाओं का शिलान्यास भी कार्यक्रम का हिस्सा रहा। इन परियोजनाओं से गुजरात के विभिन्न हिस्सों में यातायात व्यवस्था बेहतर होने और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। दौरे के दौरान प्रधानमंत्री ने दमन से लक्षद्वीप को जोड़ने वाली बंदरगाह और पर्यटन विकास परियोजनाओं का भी वर्चुअल माध्यम से उद्घाटन किया। इन योजनाओं को समुद्री संपर्क और पर्यटन क्षेत्र के विस्तार के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सरकार का मानना है कि इससे तटीय क्षेत्रों के विकास और स्थानीय रोजगार सृजन को भी बल मिलेगा। विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में पर्यावरण संरक्षण को विशेष प्राथमिकता दी गई। आयोजन स्थल पर पारंपरिक प्रचार सामग्री और बड़े बैनरों का उपयोग सीमित रखा गया। कार्यक्रम में शामिल होने वाले कार्यकर्ताओं और समर्थकों को साइकिल तथा इलेक्ट्रिक वाहनों के उपयोग के लिए प्रोत्साहित किया गया। आम नागरिकों की सुविधा के लिए नगर निगम की ओर से बड़ी संख्या में इलेक्ट्रिक बसों का संचालन भी किया गया। प्रधानमंत्री का यह दौरा रक्षा उत्पादन, आधारभूत संरचना विकास, स्वास्थ्य सेवाओं और पर्यावरण संरक्षण जैसे कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों पर केंद्रित रहा। राजनीतिक और औद्योगिक दृष्टि से इसे गुजरात के लिए एक महत्वपूर्ण कार्यक्रम माना जा रहा है, जिससे राज्य में विकास परियोजनाओं और निवेश गतिविधियों को और गति मिलने की संभावना है।
Beauty Tips: ग्लोइंग स्किन पाने के लिए अपनाएं ये आसान और असरदार घरेलू उपाय

नई दिल्ली । आज के समय में हर कोई साफ, चमकदार और हेल्दी त्वचा चाहता है। लेकिन प्रदूषण, तनाव, गलत खानपान और अनियमित दिनचर्या का असर सबसे पहले चेहरे पर दिखाई देता है। ऐसे में महंगे ब्यूटी प्रोडक्ट्स की बजाय कुछ आसान और नियमित आदतें अपनाकर त्वचा को प्राकृतिक रूप से ग्लोइंग बनाया जा सकता है। 1. पर्याप्त पानी पीना है सबसे जरूरी कदमत्वचा की चमक बनाए रखने के लिए शरीर का हाइड्रेट रहना बेहद जरूरी है। दिनभर पर्याप्त पानी पीने से शरीर से विषैले तत्व बाहर निकलते हैं, जिससे त्वचा साफ और चमकदार बनती है। पानी की कमी से त्वचा रूखी, बेजान और थकी हुई दिखने लगती है, इसलिए नियमित रूप से पानी पीने की आदत जरूरी है। 2. दिन में दो बार चेहरा साफ करेंधूल, प्रदूषण और गंदगी चेहरे पर जमकर पिंपल्स और डलनेस का कारण बनती है। इसलिए सुबह और रात को हल्के फेसवॉश से चेहरा साफ करना चाहिए। इससे त्वचा फ्रेश रहती है और रोमछिद्र (pores) साफ बने रहते हैं। बहुत ज्यादा केमिकल प्रोडक्ट्स से बचना भी जरूरी है। 3. सनस्क्रीन का नियमित उपयोग करेंसूरज की हानिकारक UV किरणें त्वचा को नुकसान पहुंचा सकती हैं। इससे टैनिंग, पिगमेंटेशन और समय से पहले झुर्रियों की समस्या हो सकती है। इसलिए घर से बाहर निकलने से पहले अच्छी गुणवत्ता वाली सनस्क्रीन लगाना जरूरी है, चाहे मौसम कोई भी हो। 4. हेल्दी डाइट अपनाएंत्वचा की असली चमक अंदर से आती है। ताजे फल, हरी सब्जियां और विटामिन युक्त भोजन त्वचा को जरूरी पोषण देते हैं। इनमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट्स त्वचा को डैमेज से बचाते हैं और नेचुरल ग्लो बढ़ाते हैं। 5. पर्याप्त नींद लेंअच्छी और पूरी नींद त्वचा की सेहत के लिए बेहद जरूरी है। रोज 7–8 घंटे की नींद लेने से त्वचा खुद को रिपेयर करती है। नींद की कमी से डार्क सर्कल्स, थकान और चेहरे की चमक कम हो सकती है। 6. छोटी आदतें बदल सकती हैं आपकी स्किनग्लोइंग स्किन पाने के लिए महंगे ट्रीटमेंट्स की जरूरत नहीं होती। नियमित स्किन केयर, सही खानपान, पर्याप्त पानी और अच्छी नींद जैसी आदतें अपनाकर आप अपनी त्वचा को लंबे समय तक हेल्दी और सुंदर बना सकते हैं। अगर आप रोजमर्रा की जिंदगी में इन आसान ब्यूटी टिप्स को अपनाते हैं, तो आपकी त्वचा प्राकृतिक रूप से ग्लोइंग, साफ और स्वस्थ बनी रह सकती है।
हार्ड हिंदुत्व से चुनावी मैदान में उतरने की तैयारी में योगी, सॉफ्ट हिंदुत्व के सहारे जवाबी मोर्चा संभाल रहे अखिलेश

नई दिल्ली । उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 में अभी समय शेष है, लेकिन राज्य की राजनीति में चुनावी माहौल धीरे-धीरे आकार लेने लगा है। प्रदेश के प्रमुख राजनीतिक दल अपने-अपने वोट बैंक को मजबूत करने और नई रणनीतियों के जरिए जनसमर्थन जुटाने में सक्रिय दिखाई दे रहे हैं। इसी क्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव की राजनीतिक शैली और चुनावी संदेशों को लेकर नई चर्चा शुरू हो गई है। हाल के दिनों में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के भाषणों और सार्वजनिक कार्यक्रमों में हिंदुत्व, सांस्कृतिक विरासत और धार्मिक आस्था से जुड़े विषयों को प्रमुखता मिलती दिखाई दी है। गौ संरक्षण, राम मंदिर, राष्ट्रीय सुरक्षा और सांस्कृतिक पहचान जैसे मुद्दे उनके राजनीतिक विमर्श के केंद्र में रहे हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा आगामी चुनाव में विकास और सुशासन के साथ-साथ अपने पारंपरिक वैचारिक आधार को भी मजबूती से सामने रख सकती है। योगी आदित्यनाथ ने विभिन्न जनसभाओं में राम मंदिर निर्माण, राष्ट्रीय सुरक्षा और सांस्कृतिक गौरव से जुड़े मुद्दों का उल्लेख करते हुए भाजपा सरकार की उपलब्धियों को जनता के सामने रखा है। उनके हालिया बयानों को पार्टी के कोर समर्थक वर्ग को एकजुट रखने और चुनावी संदेश को स्पष्ट करने की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है। भाजपा नेतृत्व यह भी मानता है कि वैचारिक मुद्दों और विकास कार्यों का संयुक्त प्रस्तुतीकरण चुनावी दृष्टि से लाभकारी साबित हो सकता है। दूसरी ओर समाजवादी पार्टी भी बदले हुए राजनीतिक माहौल के अनुरूप अपनी रणनीति में बदलाव करती नजर आ रही है। अखिलेश यादव ने पिछले कुछ समय में धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजनों में भागीदारी बढ़ाई है। मंदिरों के दर्शन, धार्मिक स्थलों के विकास संबंधी घोषणाएं और सांस्कृतिक प्रतीकों को लेकर सकारात्मक रुख को राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इसे भाजपा के हिंदुत्व एजेंडे के मुकाबले सॉफ्ट हिंदुत्व की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है। साथ ही समाजवादी पार्टी अपने पारंपरिक सामाजिक गठबंधन को मजबूत बनाए रखने के प्रयास में भी जुटी हुई है। पार्टी नेतृत्व की कोशिश है कि धार्मिक मुद्दों पर संतुलित रुख अपनाते हुए व्यापक सामाजिक समूहों को साथ रखा जाए। यही कारण है कि हाल के महीनों में पार्टी के कई नेताओं को विवादित धार्मिक या जातीय टिप्पणियों से बचने की सलाह दी गई है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि उत्तर प्रदेश का चुनाव केवल वैचारिक मुद्दों तक सीमित नहीं रहेगा। रोजगार, कानून व्यवस्था, बुनियादी ढांचा, किसानों की समस्याएं और युवाओं की आकांक्षाएं भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी। हालांकि हिंदुत्व और सांस्कृतिक पहचान जैसे विषय चुनावी विमर्श का प्रमुख हिस्सा बने रह सकते हैं। भाजपा जहां मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में अपने मजबूत संगठन और सरकार की उपलब्धियों के सहारे चुनावी मैदान में उतरने की तैयारी कर रही है, वहीं समाजवादी पार्टी सामाजिक समीकरणों, क्षेत्रीय मुद्दों और संतुलित राजनीतिक संदेश के जरिए मुकाबला करने की रणनीति पर काम कर रही है। आने वाले महीनों में दोनों दलों की राजनीतिक गतिविधियां और अधिक तेज होने की संभावना है। फिलहाल यह स्पष्ट है कि उत्तर प्रदेश की चुनावी लड़ाई केवल विकास बनाम विकास की नहीं, बल्कि राजनीतिक संदेश, वैचारिक पहचान और सामाजिक संतुलन की भी होगी। ऐसे में 2027 का चुनाव राज्य की राजनीति के लिए एक महत्वपूर्ण परीक्षा साबित हो सकता है।
युद्ध खत्म करने की नई पहल, जेलेंस्की ने पुतिन को लिखा खुला पत्र, सीधी बातचीत का दिया प्रस्ताव

नई दिल्ली । रूस और यूक्रेन के बीच जारी लंबे युद्ध को समाप्त करने की कोशिशों के बीच एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक पहल सामने आई है। यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को खुला पत्र लिखकर आमने-सामने मुलाकात और सीधी वार्ता का प्रस्ताव दिया है। इस पहल को युद्ध समाप्ति की दिशा में एक नए प्रयास के रूप में देखा जा रहा है, जिस पर पूरी दुनिया की नजर टिकी हुई है। अपने विस्तृत पत्र में जेलेंस्की ने कहा कि युद्ध का समाधान केवल सैन्य कार्रवाई या मध्यस्थों के जरिए नहीं निकल सकता। उनका मानना है कि दोनों देशों के शीर्ष नेताओं के बीच सीधा संवाद ही स्थायी शांति का मार्ग प्रशस्त कर सकता है। उन्होंने संकेत दिया कि मौजूदा हालात में नेतृत्व स्तर पर बातचीत की आवश्यकता पहले से कहीं अधिक बढ़ गई है। यूक्रेनी राष्ट्रपति ने सुझाव दिया कि दोनों नेताओं की संभावित मुलाकात किसी तटस्थ देश में आयोजित की जा सकती है। उनका तर्क है कि निष्पक्ष वातावरण में होने वाली बातचीत से विश्वास बहाली की प्रक्रिया को मजबूती मिल सकती है और लंबे समय से चले आ रहे गतिरोध को तोड़ने का अवसर मिल सकता है। पत्र में जेलेंस्की ने यह भी उल्लेख किया कि वैश्विक राजनीतिक परिस्थितियां तेजी से बदल रही हैं और विभिन्न अंतरराष्ट्रीय संकटों के कारण यूक्रेन युद्ध वैश्विक प्राथमिकताओं की सूची में पीछे जा सकता है। ऐसे में उन्होंने दोनों पक्षों से समय रहते शांति की दिशा में ठोस पहल करने की अपील की है। उनका कहना है कि संघर्ष जितना लंबा चलेगा, मानवीय और आर्थिक नुकसान उतना ही बढ़ता जाएगा। जेलेंस्की ने अपने पत्र में रूस पर दबाव बनाए रखने की रणनीति का भी संकेत दिया। उन्होंने हाल के घटनाक्रमों का जिक्र करते हुए कहा कि युद्ध का कोई भी पक्ष इस भ्रम में नहीं रह सकता कि केवल सैन्य ताकत के आधार पर स्थायी समाधान हासिल किया जा सकता है। उनके अनुसार संवाद और समझौता ही अंततः संघर्ष का रास्ता रोक सकते हैं। दूसरी ओर रूस ने इस पहल पर सतर्क प्रतिक्रिया दी है। मॉस्को ने संकेत दिया है कि बातचीत के लिए दरवाजे पूरी तरह बंद नहीं हैं, लेकिन किसी भी समझौते के लिए दोनों पक्षों को अपने-अपने रुख में लचीलापन दिखाना होगा। रूस अब भी उन प्रमुख शर्तों पर कायम है जिन्हें वह अपनी सुरक्षा और रणनीतिक हितों से जुड़ा मानता है। युद्ध को लेकर दोनों देशों के बीच सबसे बड़ा विवाद क्षेत्रीय नियंत्रण और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर बना हुआ है। रूस जिन क्षेत्रों को अपने प्रभाव क्षेत्र का हिस्सा मानता है, उन्हें लेकर यूक्रेन कोई समझौता करने को तैयार नहीं दिखता। वहीं यूक्रेन का कहना है कि क्षेत्रीय रियायतें भविष्य में उसकी सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बन सकती हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी इस संभावित मुलाकात को सकारात्मक संकेत के रूप में देखा जा रहा है। कई देशों और वैश्विक नेताओं का मानना है कि यदि दोनों राष्ट्रपति आमने-सामने बैठकर बातचीत करते हैं तो इससे शांति प्रक्रिया को नई गति मिल सकती है। हालांकि पिछले वर्षों में कई दौर की वार्ताएं बिना किसी ठोस परिणाम के समाप्त हुई हैं, इसलिए इस पहल की सफलता को लेकर अभी भी संशय बना हुआ है। फिलहाल दुनिया की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या यह कूटनीतिक प्रयास वास्तव में दोनों नेताओं को एक ही मेज पर ला पाएगा। यदि ऐसा होता है तो यह रूस-यूक्रेन युद्ध के इतिहास में एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हो सकता है और लंबे समय से जारी संघर्ष के समाधान की दिशा में नई उम्मीद जगा सकता है।
फीफा वर्ल्ड कप में लंबा इंतजार: 64 साल से लेकर 44 साल बाद लौटीं ये 5 टीमें

नई दिल्ली । 11 जून से शुरू होने जा रहे फीफा वर्ल्ड कप 2026 से पहले फुटबॉल इतिहास की कुछ ऐसी टीमों पर नजर डालना दिलचस्प है, जिन्हें इस सबसे बड़े टूर्नामेंट में वापसी करने के लिए दशकों तक इंतजार करना पड़ा। सबसे लंबा इंतजार वेल्स को करना पड़ा, जिसने 1958 के बाद 2022 में वर्ल्ड कप में वापसी की। यानी टीम को 64 साल बाद इस मंच पर खेलने का मौका मिला। हालांकि, वापसी के बाद भी टीम ग्रुप स्टेज से आगे नहीं बढ़ सकी। मिस्र की टीम ने भी लंबा इंतजार झेला। 1934 के बाद उसे 1990 में विश्व कप में जगह मिली, यानी 56 साल का अंतराल। लेकिन टीम का प्रदर्शन प्रभावशाली नहीं रहा और वह ग्रुप स्टेज में ही बाहर हो गई। इसी तरह नॉर्वे ने 1938 के बाद 1994 में वर्ल्ड कप में वापसी की, जिसके लिए उसे भी 56 साल इंतजार करना पड़ा। हालांकि नॉर्वे भी ग्रुप स्टेज में ही बाहर हो गया। तुर्की की कहानी अलग रही। 1954 के बाद 2002 में वापसी करने वाली टीम ने इतिहास रच दिया। 48 साल बाद लौटकर तुर्की ने सेमीफाइनल तक का सफर तय किया और तीसरे स्थान पर रहते हुए टूर्नामेंट का शानदार अंत किया। बोलीविया ने भी 44 साल के लंबे अंतराल के बाद 1994 में वर्ल्ड कप में वापसी की, हालांकि वह ग्रुप स्टेज से आगे नहीं बढ़ सका। इन टीमों की कहानियां दिखाती हैं कि अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल में वापसी आसान नहीं होती, लेकिन जब होती है तो वह इतिहास भी रच सकती है।
NEET पेपर लीक मामले में मनीषा वाघमारे की जमानत पर फैसला सुरक्षित, CBI ने लगाए गंभीर आरोप

नई दिल्ली । देशभर में चर्चा का विषय बने NEET पेपर लीक मामले में आरोपी मनीषा वाघमारे की जमानत याचिका पर अदालत ने फैसला सुरक्षित रख लिया है। अब इस बहुचर्चित मामले में जमानत को लेकर अदालत का निर्णय निर्धारित तिथि पर सुनाया जाएगा। सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष और जांच एजेंसी दोनों ने अपने-अपने तर्क विस्तार से अदालत के समक्ष रखे। सुनवाई के दौरान मनीषा वाघमारे की ओर से पेश अधिवक्ता ने अदालत को बताया कि उनकी मुवक्किल एक प्रमाणित एजुकेशन काउंसलर हैं और लंबे समय से शैक्षणिक परामर्श का कार्य कर रही हैं। बचाव पक्ष का कहना था कि उनके बैंक खाते में जो रकम जांच एजेंसी संदिग्ध बता रही है, वह पारिवारिक संपत्ति से संबंधित लेनदेन का हिस्सा है। साथ ही यह भी दलील दी गई कि जांच के दौरान उनके आवास पर कई बार तलाशी ली गई, लेकिन कोई आपत्तिजनक नकदी या ऐसा साक्ष्य नहीं मिला जिससे उन्हें लंबे समय तक हिरासत में रखने की आवश्यकता साबित हो सके। बचाव पक्ष ने अदालत के समक्ष मनीषा की स्वास्थ्य स्थिति का भी मुद्दा उठाया। बताया गया कि वह गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रही हैं और उन्हें लगातार चिकित्सकीय देखभाल की आवश्यकता है। वकील ने कहा कि जेल में रहने के दौरान भी उन्हें स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों का सामना करना पड़ा है। इस आधार पर अदालत से मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए जमानत देने का अनुरोध किया गया। हालांकि अदालत ने स्पष्ट किया कि स्वास्थ्य संबंधी मुद्दों और जमानत याचिका को अलग-अलग दृष्टिकोण से देखा जाना चाहिए। अदालत ने संकेत दिया कि जेल प्रशासन के पास आवश्यक चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध हैं और यदि किसी अतिरिक्त उपचार की जरूरत हो तो उसके लिए अलग से आवेदन किया जा सकता है। दूसरी ओर केंद्रीय जांच एजेंसी ने जमानत याचिका का कड़ा विरोध किया। एजेंसी ने दावा किया कि मनीषा वाघमारे की भूमिका केवल शैक्षणिक परामर्श तक सीमित नहीं थी, बल्कि वह कथित रूप से प्रश्नपत्र से जुड़े सवालों को आगे पहुंचाने की प्रक्रिया में शामिल थीं। जांच एजेंसी के अनुसार उनके खिलाफ ऐसे छात्रों के बयान मौजूद हैं जिन्होंने कथित तौर पर प्रश्न प्राप्त करने के बदले धनराशि देने की बात स्वीकार की है। सुनवाई के दौरान जांच एजेंसी ने यह भी कहा कि मामले की जांच में जुटी टीम के पास कई ऐसे तथ्य और बयान हैं जो आरोपी की भूमिका की ओर संकेत करते हैं। एजेंसी का दावा है कि प्रश्नों को एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति तक पहुंचाने की श्रृंखला में मनीषा की महत्वपूर्ण भूमिका सामने आई है। इसी आधार पर जमानत का विरोध किया गया। अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कहा कि वह उपलब्ध साक्ष्यों, गवाहों के बयानों और जांच एजेंसी द्वारा प्रस्तुत दस्तावेजों का विस्तृत अध्ययन करेगी। विशेष रूप से उन छात्रों के बयानों की भी समीक्षा की जाएगी जिनका उल्लेख जांच एजेंसी ने किया है। NEET पेपर लीक मामला देश की सबसे महत्वपूर्ण प्रवेश परीक्षाओं में से एक की विश्वसनीयता से जुड़ा होने के कारण लगातार सुर्खियों में बना हुआ है। ऐसे में अदालत का आगामी फैसला न केवल इस मामले के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है, बल्कि इससे जांच की आगे की दिशा भी प्रभावित हो सकती है।
ऋषभ पंत को लेकर आया समर्थन, कहा- टेस्ट में उनका प्रदर्शन शानदार रहा

मध्य प्रदेश । भारतीय क्रिकेट टीम के विकेटकीपर-बल्लेबाज ऋषभ पंत को लेकर पूर्व चयनकर्ता देवांग गांधी ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने पंत को भारत का अब तक का सबसे बेहतरीन विकेटकीपर-बल्लेबाज बताते हुए उनकी टेस्ट क्रिकेट में भूमिका की जमकर सराहना की। देवांग गांधी ने कहा कि भले ही पंत इस समय खराब फॉर्म से गुजर रहे हों, लेकिन उनकी क्षमता और मैच जिताने वाली पारियों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि चयनकर्ता भी उनकी काबिलियत को समझते हैं और इसी वजह से उन्हें लगातार मौके दिए जा रहे हैं। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि पंत का इंग्लैंड दौरा काफी प्रभावशाली रहा था, हालांकि चोट के कारण वह पूरी सीरीज नहीं खेल पाए थे। इसके बावजूद टेस्ट क्रिकेट में उनका योगदान भारतीय टीम के लिए बेहद महत्वपूर्ण रहा है। देवांग गांधी के अनुसार, पंत ने विदेशी पिचों पर भी शानदार प्रदर्शन किया है। चाहे दक्षिण अफ्रीका हो, इंग्लैंड या ऑस्ट्रेलिया—उन्होंने कई अहम मौकों पर मैच जिताने वाली पारियां खेली हैं, जिससे उनकी उपयोगिता और भी बढ़ जाती है। पूर्व चयनकर्ता ने यह भी कहा कि पंत की विकेटकीपिंग पर अक्सर बात नहीं होती, जबकि उन्होंने इसमें काफी सुधार किया है और घरेलू व विदेशी दोनों परिस्थितियों में बेहतरीन प्रदर्शन किया है। उन्होंने पंत को “आधुनिक दौर का सबसे प्रभावशाली विकेटकीपर-बल्लेबाज” करार दिया। उन्होंने खास तौर पर गाबा टेस्ट में खेली गई पंत की ऐतिहासिक पारी का जिक्र करते हुए कहा कि वह हमेशा क्रिकेट प्रेमियों के लिए यादगार रहेगी। पंत अब अफगानिस्तान के खिलाफ होने वाले टेस्ट में अपने करियर का 50वां टेस्ट मैच खेलने उतर सकते हैं, जो उनके करियर का एक महत्वपूर्ण पड़ाव माना जा रहा है।