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आधा इंच बारिश के बाद सुहाना हुआ मौसम, कई इलाकों में रिमझिम और बूंदाबांदी

मध्य प्रदेश । मध्य प्रदेश के Indore में प्री-मानसून गतिविधियों ने मौसम का मिजाज बदल दिया है। गुरुवार देर रात से शुरू हुई बारिश और ठंडी हवाओं ने भीषण गर्मी से राहत दिलाई। शुक्रवार तड़के शहर के अधिकांश हिस्सों में अच्छी बारिश दर्ज की गई, जबकि सुबह से कई इलाकों में रिमझिम और बूंदाबांदी का दौर जारी रहा। मौसम विभाग के अनुसार इंदौर में 15.6 मिमी यानी लगभग आधा इंच बारिश रिकॉर्ड की गई है। सबसे बड़ा बदलाव रात के तापमान में देखने को मिला, जो एक ही दिन में करीब 6 डिग्री सेल्सियस तक गिर गया। इससे शहरवासियों को उमस और गर्मी से काफी राहत मिली है। चार दिन बाद बदला मौसम का मिजाजपिछले चार दिनों से इंदौर का अधिकतम तापमान लगातार 38 डिग्री सेल्सियस के आसपास बना हुआ था। बुधवार को दिन का तापमान 38.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया था, जबकि गुरुवार को यह 38.4 डिग्री सेल्सियस रहा। हालांकि देर रात मौसम ने अचानक करवट ली। बादल छाने लगे और कई इलाकों में बारिश शुरू हो गई। इसके असर से न्यूनतम तापमान में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई। बुधवार रात जहां तापमान 25.8 डिग्री सेल्सियस था, वहीं गुरुवार रात यह घटकर 19 डिग्री सेल्सियस पर पहुंच गया। मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि प्री-मानसून की सक्रियता के चलते फिलहाल वातावरण में ठंडक बनी रहेगी और अगले कुछ दिनों तक बादलों की आवाजाही जारी रह सकती है। आज भी बारिश और बूंदाबांदी के आसारमौसम विभाग के अनुसार शुक्रवार को इंदौर और आसपास के क्षेत्रों में मिश्रित मौसम बना रहेगा। कुछ क्षेत्रों में हल्की बारिश, कहीं रिमझिम फुहारें और कहीं केवल बूंदाबांदी देखने को मिल सकती है। बादलों और ठंडी हवाओं के कारण दिन के तापमान में भी कमी महसूस की जा रही है। मौसम वैज्ञानिकों का मानना है कि अगले कुछ दिनों तक प्री-मानसून गतिविधियां प्रदेश के पश्चिमी और मध्य हिस्सों में सक्रिय रह सकती हैं। मध्य प्रदेश में 20 से 22 जून के बीच मानसून की संभावनाइस बीच दक्षिण-पश्चिम मानसून ने Kerala में दस्तक दे दी है, जिससे मध्य प्रदेश में मानसून आगमन की उम्मीदें बढ़ गई हैं। मौसम विभाग के अनुसार इस वर्ष मानसून सामान्य तिथि की तुलना में लगभग 5 से 7 दिन की देरी से प्रदेश में प्रवेश कर सकता है। सामान्यतः मानसून 15 जून के आसपास मध्य प्रदेश के दक्षिणी हिस्सों में पहुंच जाता है, लेकिन इस बार इसके 20 से 22 जून के बीच पहुंचने की संभावना जताई जा रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि केरल में प्रवेश के लगभग 15 दिन बाद मानसून मध्य प्रदेश में सक्रिय होता है। चूंकि इस वर्ष मानसून 4 जून को केरल पहुंचा है, इसलिए 20 जून के बाद इसके प्रदेश में प्रवेश की संभावनाएं मजबूत मानी जा रही हैं। अरब सागर और बंगाल की खाड़ी पर नजरमौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि मानसून की वास्तविक गति अरब सागर और बंगाल की खाड़ी में बनने वाले मौसमी सिस्टम पर निर्भर करेगी। यदि अनुकूल परिस्थितियां बनी रहती हैं तो मानसून तेजी से आगे बढ़ सकता है, जबकि किसी बड़े मौसमीय व्यवधान की स्थिति में इसकी तिथि में बदलाव भी संभव है। फिलहाल प्रदेश के कई हिस्सों में गरज-चमक, तेज हवाओं और हल्की बारिश का सिलसिला जारी है, जिसे मानसून पूर्व गतिविधियों का हिस्सा माना जा रहा है। पिछले वर्षों में जून रहा अपेक्षाकृत ठंडामौसम के आंकड़ों के अनुसार इंदौर में पिछले छह वर्षों के दौरान जून माह में अत्यधिक गर्मी नहीं पड़ी। वर्ष 2020 से 2025 के बीच जून में अधिकतम तापमान 39.6 से 41.6 डिग्री सेल्सियस के बीच दर्ज किया गया। पिछले वर्ष 2025 में भी जून के दौरान अधिकतम तापमान 41.6 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचा था, लेकिन समय-समय पर हुई बारिश ने गर्मी का असर कम रखा था। इस बार भी प्री-मानसून गतिविधियों के चलते मौसम में राहत बनी हुई है।

बंगाल की राजनीति में बढ़ा सस्पेंस, बागी टीएमसी गुट में मतभेद खुलकर आए सामने, ममता के नेतृत्व पर फिर बनी सहमति

नई दिल्ली । पश्चिम बंगाल की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस से जुड़े घटनाक्रम लगातार नए मोड़ ले रहे हैं। कुछ दिन पहले पार्टी के भीतर बड़े राजनीतिक विभाजन की खबरों के बीच जिस बागी गुट ने खुद को संगठन की नई ताकत के रूप में पेश किया था, उसी समूह के भीतर अब मतभेद उभरते दिखाई दे रहे हैं। कई विधायकों द्वारा सार्वजनिक रूप से ममता बनर्जी के नेतृत्व के समर्थन ने इस पूरे घटनाक्रम को नई दिशा दे दी है।राज्य की सत्तारूढ़ राजनीति में यह बदलाव उस समय सामने आया है जब हाल ही में पार्टी से अलग हुए विधायकों के एक समूह ने अपना स्वतंत्र गुट बनाकर नेतृत्व परिवर्तन की मांग उठाई थी। इस गुट ने दावा किया था कि बड़ी संख्या में विधायक उनके साथ हैं और वे संगठन के भविष्य को नई दिशा देना चाहते हैं। इसके बाद विधानसभा स्तर पर भी उनकी सक्रियता देखने को मिली थी और विपक्षी नेतृत्व को लेकर महत्वपूर्ण राजनीतिक घटनाक्रम सामने आया था।हालांकि अब बागी गुट के भीतर से ही अलग-अलग आवाजें सामने आने लगी हैं। हावड़ा क्षेत्र के विधायक गुलशन मलिक ने स्पष्ट रूप से कहा है कि ममता बनर्जी केवल मार्गदर्शक की भूमिका में रहें और नेतृत्व किसी अन्य व्यक्ति को सौंप दिया जाए, यह विचार उन्हें स्वीकार नहीं है। उन्होंने कहा कि ममता बनर्जी ही उनके लिए सर्वोच्च नेता हैं और पार्टी का नेतृत्व भी उनके हाथों में ही रहना चाहिए।गुलशन मलिक के इस बयान को राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि इससे यह संकेत मिलता है कि बागी गुट के भीतर नेतृत्व को लेकर पूर्ण सहमति नहीं है। उन्होंने दावा किया कि कई अन्य विधायक भी इसी सोच से सहमत हैं और इस विषय पर आपसी चर्चा हो चुकी है। उनके अनुसार पार्टी कार्यकर्ताओं और समर्थकों की भावनाएं भी ममता बनर्जी के नेतृत्व के साथ जुड़ी हुई हैं।राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह घटनाक्रम बागी गुट की रणनीति को प्रभावित कर सकता है। यदि बड़ी संख्या में विधायक नेतृत्व परिवर्तन के बजाय ममता बनर्जी के नेतृत्व को जारी रखने के पक्ष में रहते हैं तो बागी खेमे की राजनीतिक ताकत और संगठनात्मक दावे कमजोर पड़ सकते हैं। इससे भविष्य में गुट की एकजुटता बनाए रखना भी चुनौतीपूर्ण हो सकता है।गौरतलब है कि हाल के दिनों में बड़ी संख्या में विधायकों द्वारा अलग समूह बनाए जाने के बाद राज्य की राजनीति में हलचल तेज हो गई थी। बागी खेमे ने विधानसभा स्तर पर अपनी ताकत दिखाने की कोशिश की थी और राजनीतिक मान्यता हासिल करने के लिए आवश्यक प्रक्रियाएं भी पूरी की थीं। इस कदम को राज्य की राजनीति में बड़े बदलाव के संकेत के रूप में देखा जा रहा था।अब जबकि उसी समूह के भीतर नेतृत्व को लेकर मतभेद सामने आने लगे हैं, राजनीतिक समीकरण फिर बदलते दिखाई दे रहे हैं। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि बागी गुट अपनी एकजुटता बनाए रख पाता है या फिर आंतरिक मतभेद उसके प्रभाव को सीमित कर देते हैं। फिलहाल इतना तय है कि पश्चिम बंगाल की राजनीति में जारी यह घटनाक्रम राज्य के राजनीतिक भविष्य पर महत्वपूर्ण प्रभाव डाल सकता है और सभी दलों की नजरें आगे होने वाले घटनाक्रमों पर टिकी हुई हैं।

पुतिन के बाद ट्रंप का भी मोदी पर विश्वास, बोले- अच्छे दोस्त हैं पीएम, जल्द होगी भारत-अमेरिका ट्रेड डील

नई दिल्ली । भारत और अमेरिका के बीच लंबे समय से चल रही व्यापार वार्ताओं को लेकर सकारात्मक संकेत सामने आए हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की खुलकर सराहना करते हुए कहा है कि दोनों देशों के बीच प्रस्तावित व्यापार समझौता जल्द ही अंतिम रूप ले सकता है। ट्रंप का यह बयान ऐसे समय आया है जब दोनों देशों के अधिकारियों के बीच कई दौर की बातचीत पूरी हो चुकी है और समझौते को लेकर उम्मीदें मजबूत हुई हैं। व्हाइट हाउस में पत्रकारों से बातचीत के दौरान ट्रंप ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपना अच्छा मित्र बताया और कहा कि उनके साथ उनके व्यक्तिगत तथा कूटनीतिक संबंध बेहद अच्छे हैं। उन्होंने कहा कि भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौते पर प्रगति हो रही है और दोनों देश जल्द ही इस दिशा में महत्वपूर्ण परिणाम हासिल कर सकते हैं। ट्रंप ने यह भी कहा कि अतीत में भारत द्वारा अमेरिकी उत्पादों पर लगाए गए ऊंचे शुल्क को लेकर अमेरिका की चिंताएं रही हैं, लेकिन वर्तमान दौर में दोनों देश व्यापारिक संबंधों को नए स्तर पर ले जाने के लिए प्रयासरत हैं। भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने के उद्देश्य से इस सप्ताह एक अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल भारत पहुंचा था। दोनों देशों के अधिकारियों के बीच कई दिनों तक विस्तृत चर्चा हुई, जिसमें बाजार पहुंच, शुल्क व्यवस्था, निवेश और विभिन्न व्यापारिक बाधाओं से जुड़े मुद्दों पर विचार-विमर्श किया गया। वार्ता के समापन के बाद दोनों पक्षों की ओर से सकारात्मक संकेत दिए गए हैं। इससे पहले केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा था कि व्यापार समझौते को लेकर लगभग 99 प्रतिशत बातचीत पूरी हो चुकी है। इसी क्रम में भारत में अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर ने भी संकेत दिया कि अब केवल कुछ सीमित मुद्दों पर सहमति बनना बाकी है। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के अधिकारी शेष बाधाओं को दूर करने के लिए लगातार संपर्क में हैं और अगले कुछ सप्ताह के भीतर समझौते को अंतिम रूप दिया जा सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह समझौता दोनों देशों के आर्थिक संबंधों को नई दिशा दे सकता है। इससे वस्तुओं और सेवाओं के व्यापार में वृद्धि होने के साथ-साथ निवेश और तकनीकी सहयोग को भी बढ़ावा मिलने की संभावना है। वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच भारत और अमेरिका के बीच मजबूत व्यापारिक साझेदारी दोनों देशों के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। उल्लेखनीय है कि ट्रंप का यह बयान रूस के राष्ट्रपति Vladimir Putin की टिप्पणी के तुरंत बाद सामने आया है। पुतिन ने भी प्रधानमंत्री Narendra Modi और भारत की प्रशंसा करते हुए कहा था कि भारत एक महान लोकतांत्रिक राष्ट्र है, जो अपने राष्ट्रीय हितों के आधार पर निर्णय लेने में सक्षम है। उन्होंने यह भी कहा था कि भारत जैसे बड़े और प्रभावशाली देश पर बाहरी दबाव बनाना आसान नहीं है तथा अंतरराष्ट्रीय संबंधों में भारत की भूमिका लगातार मजबूत होती जा रही है। लगातार आ रहे इन बयानों को वैश्विक स्तर पर भारत की बढ़ती कूटनीतिक और आर्थिक अहमियत के संकेत के रूप में देखा जा रहा है। भारत जहां एक ओर प्रमुख वैश्विक शक्तियों के साथ संतुलित संबंध बनाए हुए है, वहीं दूसरी ओर अपने आर्थिक हितों को आगे बढ़ाने के लिए सक्रिय रूप से नई साझेदारियां विकसित कर रहा है। ऐसे में भारत-अमेरिका व्यापार समझौते का संभावित निष्कर्ष दोनों देशों के संबंधों में एक महत्वपूर्ण पड़ाव साबित हो सकता है।

पहले दोस्तों से मारपीट, फिर युवक पर हमला; चार आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज

मध्य प्रदेश । मध्य प्रदेश के Indore में गुरुवार देर रात एक कैफे पर हुए खूनी हमले में 22 वर्षीय युवक की मौत हो गई। द्वारकापुरी थाना क्षेत्र के विदुर नगर स्थित 60 फीट रोड पर चार युवकों ने पहले मृतक के दोस्तों के साथ मारपीट की और उन्हें वहां से भगा दिया। इसके बाद युवक पर चाकू और डंडों से ताबड़तोड़ हमला कर दिया गया। गंभीर रूप से घायल युवक को अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। पुलिस ने इस मामले में चार आरोपियों को हिरासत में लेकर हत्या का मामला दर्ज किया है। शुरुआती जांच में प्रेम प्रसंग को हत्या की मुख्य वजह माना जा रहा है। देर रात कैफे पर हुआ हमलामृतक की पहचान क्रिश श्रीवास्तव के रूप में हुई है, जो विदुर नगर का निवासी था। गुरुवार रात करीब 12 बजे वह अपने दोस्तों चेतन और आदर्श के साथ एक कैफे पर बैठा हुआ था। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार इसी दौरान आरोपी बाइक से वहां पहुंचे और आते ही विवाद शुरू कर दिया। देखते ही देखते विवाद मारपीट में बदल गया। आरोपियों ने हथियार निकाल लिए, जिससे घबराकर क्रिश के दोनों दोस्त वहां से भाग गए। दोस्तों के जाने के बाद बदमाशों ने क्रिश को घेर लिया और उस पर चाकू तथा डंडों से हमला कर दिया। हमले में वह गंभीर रूप से घायल हो गया। अस्पताल में तोड़ा दमघटना की सूचना मिलते ही द्वारकापुरी पुलिस मौके पर पहुंची। परिजन और स्थानीय लोग क्रिश को तुरंत अस्पताल लेकर गए, लेकिन इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। हत्याकांड की सूचना मिलते ही दिशेष अग्रवाल, शिवेंदु जोशी और मनीष मिश्रा मौके पर पहुंचे और जांच शुरू की। चार आरोपी हिरासत मेंपुलिस ने मामले में अंकित पाल, अनिकेत पाल, गौरव काला और शिवा उर्फ शिवम पाल को आरोपी बनाया है। चारों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार जांच के दौरान अन्य लोगों की संलिप्तता सामने आने पर आरोपियों की संख्या बढ़ भी सकती है। प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक आरोपी गौरव पर पहले से चार और अंकित पर दो आपराधिक मामले दर्ज हैं। प्रेम प्रसंग बना हत्या की वजह?जांच में सामने आया है कि मृतक और आरोपियों के बीच पहले से विवाद चल रहा था। पुलिस को आशंका है कि प्रेम प्रसंग से जुड़ा विवाद इस हत्याकांड की मुख्य वजह हो सकता है। सूत्रों के अनुसार दोनों पक्षों के बीच पहले भी कई बार कहासुनी और तनाव की स्थिति बन चुकी थी। पुलिस अब पुराने विवादों और मोबाइल कॉल रिकॉर्ड की भी जांच कर रही है, ताकि हत्या के पीछे की वास्तविक वजह सामने आ सके। परिवार का इकलौता बेटा था क्रिशक्रिश अपने माता-पिता का इकलौता बेटा था। वह पहले चोइथराम मंडी में बिलिंग का काम करता था, लेकिन पिछले करीब तीन महीनों से बेरोजगार था। परिवार में उसकी मां रोशनी, बड़ी बहन और पिता महेंद्र हैं। पिता मंडी में सब्जी बेचकर परिवार का पालन-पोषण करते हैं। बेटे की असमय मौत से पूरा परिवार सदमे में है। घर में मातम पसरा हुआ है और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। पुलिस जुटी साक्ष्य जुटाने मेंपुलिस घटनास्थल के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाल रही है। साथ ही प्रत्यक्षदर्शियों और मृतक के दोस्तों से भी पूछताछ की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि आरोपियों से पूछताछ के बाद घटना से जुड़े अन्य पहलुओं का भी खुलासा हो सकता है। फिलहाल हत्या, मारपीट और अन्य संबंधित धाराओं में मामला दर्ज कर जांच आगे बढ़ाई जा रही है।

भारत-रूस रिश्तों पर पुतिन का बड़ा बयान, कहा- कोई बाहरी ताकत नहीं डाल सकती असर; 100 अरब डॉलर व्यापार का रखा लक्ष्य

नई दिल्ली । भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौते को लेकर चल रही अहम बातचीत के बीच रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने भारत और रूस के संबंधों पर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने भारत को एक महान राष्ट्र, दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र और रूस का भरोसेमंद सहयोगी बताते हुए कहा कि दोनों देशों के रिश्ते इतने मजबूत हैं कि किसी भी बाहरी दबाव से प्रभावित नहीं हो सकते। पुतिन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व की भी खुलकर सराहना की और भारत की आर्थिक प्रगति को उनकी सरकार की नीतियों का परिणाम बताया। सेंट पीटर्सबर्ग में आयोजित एक अंतरराष्ट्रीय संवाद कार्यक्रम के दौरान दुनिया की प्रमुख समाचार एजेंसियों के प्रमुखों से बातचीत करते हुए पुतिन ने कहा कि भारत आज विश्व की अग्रणी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है और उसकी विकास दर दुनिया में सबसे तेज़ी से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्थाओं में गिनी जाती है। उन्होंने कहा कि भारत की यह उपलब्धि उसके नेतृत्व, स्थिर नीतियों और राष्ट्रीय हितों को प्राथमिकता देने की सोच का परिणाम है। रूसी राष्ट्रपति ने अमेरिका सहित कुछ देशों द्वारा भारत पर रूस के साथ संबंधों को लेकर बनाए जाने वाले दबाव का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भारत जैसे बड़े और स्वतंत्र देश पर किसी प्रकार का राजनीतिक या आर्थिक दबाव बनाना आसान नहीं है। उनके अनुसार डेढ़ अरब से अधिक आबादी वाले देश के अपने राष्ट्रीय हित हैं और वह उन्हीं के आधार पर अपने अंतरराष्ट्रीय संबंधों और आर्थिक साझेदारियों का निर्धारण करता है। पुतिन ने संकेत दिया कि किसी भी देश द्वारा भारत की विदेश नीति को प्रभावित करने का प्रयास अंततः उसके अपने हितों के लिए नुकसानदेह साबित हो सकता है। भारत-रूस आर्थिक सहयोग का उल्लेख करते हुए पुतिन ने दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंधों को और मजबूत बनाने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि वर्तमान में दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार लगभग 60 अरब अमेरिकी डॉलर के आसपास है, लेकिन आने वाले वर्षों में इसे 100 अरब डॉलर तक पहुंचाने की पूरी संभावना मौजूद है। उनके अनुसार ऊर्जा, रक्षा, प्रौद्योगिकी, बुनियादी ढांचा और निवेश जैसे क्षेत्रों में सहयोग के व्यापक अवसर उपलब्ध हैं, जिनका लाभ दोनों देशों को मिलेगा। पुतिन का यह बयान ऐसे समय में आया है जब रूसी तेल की खरीद को लेकर अमेरिका एक बार फिर सख्त रुख अपनाने की तैयारी कर रहा है। अमेरिका ने संकेत दिए हैं कि रूस से तेल खरीदने वाले देशों को दी गई कुछ प्रतिबंध छूटों की समीक्षा की जा सकती है। भारत उन प्रमुख देशों में शामिल है जिन्होंने वैश्विक ऊर्जा बाजार में अस्थिरता के दौरान रियायती दरों पर रूसी तेल खरीदकर अपनी ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा किया है। ऐसे में पुतिन का बयान भारत-रूस ऊर्जा सहयोग के संदर्भ में भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। रूस और भारत के बीच बढ़ती रणनीतिक साझेदारी को लेकर पुतिन ने भरोसा जताया कि दोनों देश भविष्य में भी विभिन्न वैश्विक और क्षेत्रीय मुद्दों पर मिलकर काम करते रहेंगे। उन्होंने कहा कि दोनों देशों ने दीर्घकालिक सहयोग की ऐसी रूपरेखा तैयार की है जो पारस्परिक लाभ और साझा विकास पर आधारित है। विशेष महत्व की बात यह है कि पुतिन का यह बयान उनके प्रस्तावित भारत दौरे से पहले आया है। सितंबर में नई दिल्ली में आयोजित होने वाले BRICS शिखर सम्मेलन में उनके शामिल होने की संभावना है। भारत इस वर्ष BRICS की अध्यक्षता कर रहा है और सम्मेलन को लेकर तैयारियां तेज़ हैं। ऐसे में पुतिन के हालिया बयान को भारत-रूस संबंधों की मजबूती और दोनों देशों के बीच बढ़ते रणनीतिक विश्वास के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।

शोरूम में लगी आग, पड़ोसियों ने सीढ़ियां जोड़कर बचाई कई लोगों की जान

मध्य प्रदेश । मध्य प्रदेश के Indore में शुक्रवार सुबह एक इलेक्ट्रिक वाहन (EV) शोरूम में लगी भीषण आग ने बड़ा हादसा होते-होते टाल दिया। लसूड़िया क्षेत्र के खालसा चौक के पास स्थित एक बहुमंजिला इमारत के ग्राउंड फ्लोर पर बने शोरूम में आग लगने से ऊपरी मंजिलों में रहने वाले करीब 20 लोग फंस गए। स्थानीय लोगों, पुलिस और फायर ब्रिगेड की तत्परता से सभी को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। हालांकि इस हादसे में कोई जनहानि नहीं हुई, लेकिन शोरूम में खड़े सभी इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहन जलकर खाक हो गए। प्रारंभिक जांच में शॉर्ट सर्किट को आग लगने का संभावित कारण माना जा रहा है। सुबह-सुबह मची अफरा-तफरीघटना शुक्रवार सुबह करीब 7 बजे की है। ग्राउंड फ्लोर पर स्थित इलेक्ट्रिक वाहन शोरूम से अचानक धुआं और लपटें उठने लगीं। कुछ ही मिनटों में आग ने विकराल रूप ले लिया और धुआं पूरी इमारत में फैलने लगा। ऊपरी मंजिलों पर बने फ्लैट्स में रहने वाले परिवार उस समय सो रहे थे। धुएं के कारण सांस लेने में परेशानी होने पर लोगों की नींद खुली। जब उन्होंने नीचे देखा तो शोरूम आग की लपटों से घिरा हुआ था। सबसे बड़ी समस्या यह थी कि इमारत की सीढ़ियां शोरूम के ठीक बगल में थीं और आग तथा धुएं की वजह से वहां से नीचे उतरना असंभव हो गया था। ऐसे में लोग अपने-अपने फ्लैट और बालकनियों में फंस गए। पड़ोसियों ने दिखाई सूझबूझ, छतों के बीच बनाया रास्ताइमारत से उठती चीख-पुकार सुनकर आसपास के लोग तुरंत मौके पर पहुंचे। पड़ोस की बहुमंजिला इमारत में रहने वालों ने राहत कार्य शुरू कर दिया। लोगों ने पहले फंसे हुए परिवारों को छत पर पहुंचने के लिए कहा। इसके बाद दोनों इमारतों की छतों के बीच सीढ़ियां लगाकर अस्थायी रास्ता तैयार किया गया। खिड़कियों और लोहे के एंगल से रस्सियां बांधकर दूसरी इमारत तक पहुंचाई गईं। कुछ लोग सीढ़ियों के सहारे दूसरी बिल्डिंग की छत तक पहुंचे, जबकि कई लोगों को रस्सियों के सहारे सुरक्षित नीचे उतारा गया। इस दौरान पुलिस और फायर ब्रिगेड की टीम भी मौके पर पहुंच गई और बचाव अभियान में शामिल हो गई। एक घंटे में पाया आग पर काबूफायर ब्रिगेड अधिकारी शोभाराम मालवीय ने बताया कि सूचना मिलते ही दमकल दल मौके पर पहुंच गया था। आग पर काबू पाने के लिए दो पानी के टैंकर लगाए गए। करीब एक घंटे की मशक्कत के बाद आग को पूरी तरह नियंत्रित कर लिया गया। राहत की बात यह रही कि आग फ्लैट्स तक नहीं पहुंच सकी, जिससे लोगों का घरेलू सामान सुरक्षित बच गया। हालांकि शोरूम में रखे सभी इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहन आग की चपेट में आकर नष्ट हो गए। पत्थर मारकर जगाए गए लोगइमारत में रहने वाले भानु सिंह और निशा सिंह ने बताया कि वे गहरी नींद में थे। अचानक बाहर शोर-शराबा सुनाई दिया। जब लोगों ने खिड़कियों पर पत्थर फेंककर उन्हें जगाया, तब उन्हें आग की जानकारी मिली। भानु सिंह के अनुसार, बिल्डिंग में कुल नौ फ्लैट हैं, जिनमें कुछ परिवार ही रह रहे थे। अधिकांश लोग किसी तरह बाहर निकल आए, लेकिन उनके परिवार सहित कुछ लोगों को विशेष रेस्क्यू ऑपरेशन के जरिए निकाला गया। वहीं बेंगलुरु निवासी चेतन, जो इंदौर में किराए के फ्लैट में रहते हैं, ने बताया कि वे भी लोगों के शोर सुनकर जागे और तब उन्हें स्थिति की गंभीरता का पता चला। चौकीदार की सतर्कता बनी मददगारपड़ोस की इमारत के चौकीदार प्रवीण ने बताया कि एक परिवार, जो हाल ही में दुबई से आया था, सुबह बारिश का नजारा देखने के लिए जागा हुआ था। सबसे पहले उसी परिवार ने धुआं देखा और अन्य लोगों को इसकी सूचना दी। समय रहते चेतावनी मिलने से लोगों को छत तक पहुंचने और बचाव अभियान शुरू करने का मौका मिल गया, जिससे बड़ा हादसा टल गया। EV सुरक्षा पर फिर उठे सवालयह घटना ऐसे समय हुई है जब इंदौर पहले भी इलेक्ट्रिक वाहनों से जुड़ी आग की घटनाओं का सामना कर चुका है। कुछ समय पहले चार्जिंग के दौरान एक इलेक्ट्रिक कार में लगी आग ने कई लोगों की जान ले ली थी। ताजा घटना के बाद एक बार फिर इलेक्ट्रिक वाहन शोरूम और बैटरी सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े होने लगे हैं। फिलहाल पुलिस और फायर विभाग आग लगने के वास्तविक कारणों की जांच कर रहे हैं।

रेपो रेट पर RBI के फैसले के बाद बाजार में बिकवाली, सेंसेक्स 200 अंक टूटा, बैंकिंग शेयर दबाव में

नई दिल्ली । घरेलू शेयर बाजार में शुक्रवार को उतार-चढ़ाव भरा कारोबार देखने को मिला। कारोबार की शुरुआत सकारात्मक माहौल में हुई और प्रमुख सूचकांकों ने बढ़त के साथ शुरुआत की, लेकिन भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति संबंधी घोषणा के बाद बाजार का रुख बदल गया। रेपो रेट को यथावत रखने के फैसले और आर्थिक वृद्धि दर के अनुमान में कमी के संकेतों ने निवेशकों की धारणा को प्रभावित किया, जिसके चलते बाजार में बिकवाली का दबाव बढ़ गया। कारोबार के शुरुआती चरण में निवेशकों का रुझान सकारात्मक था और सेंसेक्स के अधिकांश शेयर बढ़त के साथ कारोबार कर रहे थे। सूचना प्रौद्योगिकी, वित्तीय सेवाओं और ऑटोमोबाइल क्षेत्र के कुछ प्रमुख शेयरों में अच्छी खरीदारी देखने को मिली। हालांकि, जैसे ही RBI की नीति से जुड़े प्रमुख संकेत सामने आए, बाजार ने अपनी शुरुआती बढ़त खो दी और प्रमुख सूचकांक लाल निशान में पहुंच गए। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि निवेशकों की प्रतिक्रिया केवल रेपो रेट को स्थिर रखने तक सीमित नहीं रही, बल्कि केंद्रीय बैंक द्वारा आर्थिक वृद्धि के अनुमान को कम करने और महंगाई के अनुमान को बढ़ाने का असर भी बाजार पर दिखाई दिया। इससे निवेशकों के बीच आगामी आर्थिक गतिविधियों और कॉर्पोरेट आय को लेकर सतर्कता बढ़ी, जिसका सीधा असर शेयरों की खरीदारी पर पड़ा। बीएसई सेंसेक्स कारोबार के दौरान 200 अंकों से अधिक फिसल गया और बाद में भी गिरावट के साथ कारोबार करता रहा। वहीं नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी भी दबाव में दिखाई दिया। बैंकिंग क्षेत्र के शेयरों में सबसे अधिक असर देखने को मिला, क्योंकि शुरुआती तेजी के बाद इनमें मुनाफावसूली बढ़ गई। निवेशकों को उम्मीद थी कि केंद्रीय बैंक की ओर से नीतिगत दरों में किसी प्रकार की राहत मिल सकती है, लेकिन ऐसा नहीं होने से बैंकिंग शेयरों की रफ्तार थम गई। दूसरी ओर, तकनीकी और आईटी क्षेत्र के कुछ शेयरों ने अपेक्षाकृत बेहतर प्रदर्शन किया। टेक महिंद्रा, इन्फोसिस और टीसीएस जैसे शेयरों में निवेशकों की रुचि बनी रही। इसके अलावा कुछ निजी वित्तीय और ऑटोमोबाइल कंपनियों के शेयरों ने भी शुरुआती सत्र में मजबूती दिखाई। हालांकि व्यापक बाजार में दबाव बढ़ने के कारण इन शेयरों की तेजी भी सीमित रही। गिरावट वाले शेयरों में धातु, ऊर्जा और कुछ बैंकिंग कंपनियों के शेयर प्रमुख रहे। टाटा स्टील, पावरग्रिड, एचडीएफसी बैंक, रिलायंस इंडस्ट्रीज और एनटीपीसी जैसे प्रमुख शेयरों में कमजोरी दर्ज की गई। इन शेयरों में बिकवाली का असर सूचकांकों पर भी स्पष्ट रूप से दिखाई दिया। इस बीच विदेशी मुद्रा बाजार में भारतीय रुपया अपेक्षाकृत स्थिर रहा। डॉलर के मुकाबले रुपये में बहुत अधिक उतार-चढ़ाव नहीं देखा गया और यह लगभग पिछले कारोबारी सत्र के स्तर के आसपास कारोबार करता रहा। इससे संकेत मिला कि मुद्रा बाजार ने केंद्रीय बैंक की घोषणा पर सीमित प्रतिक्रिया दी। विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले कारोबारी सत्रों में निवेशकों की नजर महंगाई, आर्थिक वृद्धि और वैश्विक बाजारों से मिलने वाले संकेतों पर बनी रहेगी। यदि आर्थिक आंकड़े उम्मीद से बेहतर रहते हैं तो बाजार में फिर से खरीदारी लौट सकती है। फिलहाल RBI के ताजा संकेतों ने निवेशकों को सतर्क कर दिया है, जिसके कारण बाजार में अल्पकालिक दबाव देखने को मिल रहा है।

नितिन नवीन की मौजूदगी से बढ़ी अटकलें, क्या राज्यसभा जाएंगे रजनीश अग्रवाल?

मध्य प्रदेश । मध्य प्रदेश से राज्यसभा की दो सीटों के लिए भारतीय जनता पार्टी ने जिस नाम ने सबसे ज्यादा राजनीतिक हलचल पैदा की है, वह है रजनीश अग्रवाल। संगठन में वर्षों तक पर्दे के पीछे काम करने वाले रजनीश अग्रवाल को पार्टी ने राज्यसभा उम्मीदवार बनाकर यह संदेश देने की कोशिश की है कि भाजपा अब भी संगठन के समर्पित कार्यकर्ताओं को शीर्ष स्तर तक पहुंचाने का दावा करती है। पार्टी में उन्हें मजाकिया लेकिन सम्मानजनक अंदाज में ‘बूथ का भूत’ कहा जाता है। इसकी वजह है बूथ प्रबंधन में उनकी विशेषज्ञता और चुनावी मशीनरी को मजबूत बनाने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका। राज्यसभा की इस दावेदारी के साथ उन्होंने कई बड़े और चर्चित नेताओं को पीछे छोड़ दिया है। बूथ मैनेजमेंट के मास्टरमाइंडसाल 2021 से मध्य प्रदेश भाजपा में बूथ प्रबंधन की जिम्मेदारी संभाल रहे रजनीश अग्रवाल ने प्रदेश के करीब 65 हजार बूथों के डिजिटाइजेशन का काम कराया। उनके नेतृत्व में बूथों को A, B, C और D श्रेणियों में वर्गीकृत किया गया, जिससे चुनावी रणनीति को अधिक प्रभावी बनाया जा सका। विधानसभा और लोकसभा चुनावों के दौरान 30 मतदाताओं पर एक अर्द्धपन्ना प्रभारी नियुक्त करने जैसी रणनीतियां भी उनकी टीम ने तैयार कीं। भाजपा के बढ़ते वोट शेयर और बूथ स्तर पर संगठन की मजबूती में उनकी भूमिका को पार्टी नेतृत्व ने गंभीरता से लिया। सवर्ण प्रतिनिधित्व के फॉर्मूले ने खोला रास्तामध्य प्रदेश से राज्यसभा में भाजपा के आठ सांसद हैं, लेकिन इनमें सामान्य वर्ग का कोई प्रतिनिधि नहीं था। पार्टी नेतृत्व ने इस बार सामाजिक संतुलन साधने के लिए सवर्ण वर्ग से किसी नेता को राज्यसभा भेजने का निर्णय लिया। इसी रणनीति के तहत कई दिग्गज नेताओं के नामों पर चर्चा हुई। इनमें नरोत्तम मिश्रा, कैलाश विजयवर्गीय, अरविंद भदौरिया, अखंड प्रताप सिंह और मुन्नालाल गोयल जैसे नाम शामिल थे। हालांकि पार्टी ने यह तर्क स्वीकार किया कि हाल के वर्षों में चुनाव लड़ चुके नेताओं के बजाय ऐसे कार्यकर्ता को अवसर दिया जाए, जिसने संगठन में लंबे समय तक काम किया हो और जिसे अब तक कोई बड़ा राजनीतिक पद न मिला हो। यही कारण रहा कि अंततः रजनीश अग्रवाल के नाम पर सहमति बन गई। ABVP से शुरू हुआ सफरसागर जिले के मंडीबामोरा कस्बे से आने वाले रजनीश अग्रवाल का राजनीतिक सफर छात्र राजनीति से शुरू हुआ। पत्रकारिता के छात्र रहे अग्रवाल लंबे समय तक अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद में सक्रिय रहे और बाद में भाजपा संगठन में आए। पैरों से दिव्यांग होने के बावजूद उन्होंने संगठनात्मक काम में ऐसी पहचान बनाई कि वे पार्टी की चुनावी रणनीति के प्रमुख चेहरों में शामिल हो गए। भाजपा नेताओं के अनुसार, वे प्रचार से अधिक संगठन पर ध्यान देने वाले कार्यकर्ता माने जाते हैं। वीडी शर्मा और शिवराज का मिला समर्थनरजनीश अग्रवाल को प्रदेश भाजपा में बूथ प्रबंधन की जिम्मेदारी उस समय मिली थी जब वीडी शर्मा प्रदेश अध्यक्ष थे। वे शर्मा की टीम में प्रदेश मंत्री भी बने। सूत्रों के अनुसार, जैसे ही राज्यसभा के लिए सवर्ण उम्मीदवार के चयन की प्रक्रिया शुरू हुई, वीडी शर्मा ने रजनीश अग्रवाल का नाम प्रमुखता से आगे बढ़ाया। वहीं शिवराज सिंह चौहान ने भी उन्हें उपयुक्त उम्मीदवार मानते हुए समर्थन दिया। ‘मैं टिकट मांगने भी नहीं गया’राज्यसभा उम्मीदवार घोषित होने के बाद रजनीश अग्रवाल ने कहा कि यह केवल भाजपा में संभव है कि एक सामान्य कार्यकर्ता को राज्यसभा जैसे उच्च सदन तक पहुंचने का अवसर मिले। उन्होंने बताया कि वे संकोचवश मुख्यमंत्री मोहन यादव से टिकट की मांग करने तक नहीं गए। उनका कहना है कि पार्टी नेतृत्व ने उन पर भरोसा जताया, जिसके लिए वे आभारी हैं। शादी में शामिल होने पहुंचे थे नितिन नबीनरजनीश अग्रवाल और नितिन नबीन का संबंध भारतीय जनता युवा मोर्चा के दिनों से है। अग्रवाल ने बताया कि जब वे युवा मोर्चा में प्रदेश महामंत्री थे, तब नितिन नबीन प्रदेश प्रभारी थे। उन्होंने याद करते हुए बताया कि 15 दिसंबर 2011 को अपनी शादी का निमंत्रण देते समय उन्होंने मजाक में कहा था कि घोड़ी पर उन्हें नितिन नबीन ही चढ़ाएंगे। नितिन नबीन ने वादा निभाया और शादी समारोह में शामिल होने पहुंचे थे। तरुण चुग को भी मिला मौकाभाजपा ने दूसरी सीट पर तरुण चुग को उम्मीदवार बनाया है। पार्टी सूत्रों के मुताबिक पंजाब की राजनीति और संगठनात्मक संतुलन को ध्यान में रखते हुए यह फैसला लिया गया है। वहीं कांग्रेस ने मध्य प्रदेश से राज्यसभा चुनाव के लिए मीनाक्षी नटराजन को मैदान में उतारा है, जिन्हें राहुल गांधी का करीबी माना जाता है।

दतिया की राजनीति में हलचल, BJP-कांग्रेस दोनों के लिए मुश्किल बन सकता है उपचुनाव

मध्य प्रदेश । दतिया विधानसभा सीट रिक्त होने के बाद संभावित उपचुनाव को लेकर सियासी सरगर्मियां तेज हो गई हैं। एक ओर पूर्व गृहमंत्री Narottam Mishra अपनी खोई राजनीतिक जमीन वापस पाने के लिए सामाजिक समीकरण साध रहे हैं, तो दूसरी ओर कांग्रेस में टिकट को लेकर अंदरूनी खींचतान खुलकर सामने आने लगी है। दिलचस्प बात यह है कि स्थानीय स्तर पर जनता का एक बड़ा वर्ग भाजपा और कांग्रेस दोनों से नाराज नजर आ रहा है। उपचुनाव का इंतजार, 14 जुलाई पर टिकी निगाहेंदतिया में इन दिनों चौराहों, बाजारों और राजनीतिक गलियारों में सबसे ज्यादा चर्चा संभावित विधानसभा उपचुनाव की है। हालांकि अभी चुनाव कार्यक्रम घोषित नहीं हुआ है, लेकिन माना जा रहा है कि चुनाव आयोग की नजर 14 जुलाई को होने वाली सुनवाई पर है। इसके बाद ही चुनावी प्रक्रिया को लेकर तस्वीर साफ हो सकती है। इसी संभावना को देखते हुए सभी प्रमुख राजनीतिक दलों ने अपनी-अपनी तैयारियां शुरू कर दी हैं। भाजपा, कांग्रेस और अन्य दलों के नेता लगातार जनसंपर्क और संगठनात्मक गतिविधियों में जुटे हुए हैं। 2023 की हार का बोझ अब भी नरोत्तम मिश्रा के साथदतिया की राजनीति में सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या नरोत्तम मिश्रा अपनी पिछली हार की भरपाई कर पाएंगे? 2023 के विधानसभा चुनाव में उन्हें अप्रत्याशित हार का सामना करना पड़ा था। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि बसई क्षेत्र में अपेक्षित समर्थन नहीं मिलना उनकी हार की बड़ी वजह बना। भाजपा को उम्मीद थी कि 2018 की तरह अंतिम चरणों में वोटों का बड़ा अंतर उनके पक्ष में जाएगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। स्थानीय लोगों के मुताबिक हार के पीछे केवल विपक्ष की ताकत नहीं, बल्कि संगठन के भीतर की निष्क्रियता, कार्यकर्ताओं का अति आत्मविश्वास और जनता की नाराजगी भी जिम्मेदार रही। कई लोगों का कहना है कि विकास कार्य होने के बावजूद कुछ स्थानीय समस्याओं का समाधान समय पर नहीं होने से असंतोष बढ़ा। अब मिश्रा लगातार सामाजिक सम्मेलन, समाज प्रमुखों से मुलाकात और कार्यकर्ताओं के संपर्क अभियान के जरिए अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं। राजेंद्र भारती के कार्यकाल पर जनता की मिली-जुली राय वर्तमान राजनीतिक परिदृश्य में Rajendra Bharti का कार्यकाल भी चर्चा का विषय बना हुआ है। स्थानीय लोगों का एक वर्ग मानता है कि वे जनता की अपेक्षाओं पर पूरी तरह खरे नहीं उतर पाए। कई लोगों का आरोप है कि वे आम जनता से दूर रहे और क्षेत्रीय विकास को अपेक्षित गति नहीं मिल सकी। हालांकि कांग्रेस नेताओं का दावा है कि प्रशासनिक असहयोग और सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने कई विकास कार्य कराए। पार्टी नेताओं का कहना है कि विपक्ष में रहते हुए भी उन्होंने जनता की समस्याओं को मजबूती से उठाया। कांग्रेस में टिकट को लेकर बढ़ी खींचतानउपचुनाव से पहले कांग्रेस की सबसे बड़ी चुनौती आंतरिक एकजुटता बनी हुई है। सूत्रों के अनुसार राजेंद्र भारती अपने बेटे अनुज भारती के लिए टिकट की पैरवी कर रहे हैं। वहीं, पिछले चुनाव में दावेदारी छोड़ चुके अवधेश नायक भी खुद को मजबूत उम्मीदवार मान रहे हैं। इसके अलावा पूर्व विधायक घनश्याम सिंह के समर्थक भी सक्रिय हैं। हाल ही में Rahul Gandhi से हुई मुलाकातों और संभावित दावेदारों की सक्रियता ने कांग्रेस के भीतर प्रतिस्पर्धा को और तेज कर दिया है। हालांकि पार्टी नेतृत्व सार्वजनिक रूप से गुटबाजी से इनकार कर रहा है और दावा कर रहा है कि उम्मीदवार का चयन सर्वे और जीत की संभावना के आधार पर होगा। आजाद समाज पार्टी भी बना रही मजबूत जमीनदतिया के संभावित चुनावी मुकाबले को त्रिकोणीय बनाने की कोशिश में आजाद समाज पार्टी भी सक्रिय है। दामोदर यादव लगातार किसान सम्मेलनों और जनसंपर्क अभियानों के माध्यम से अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत कर रहे हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि यादव मतदाताओं का बड़ा हिस्सा उनके साथ जाता है तो इसका सीधा असर कांग्रेस के पारंपरिक वोट बैंक पर पड़ सकता है। यही वजह है कि भाजपा और कांग्रेस दोनों उनके प्रभाव को गंभीरता से देख रही हैं। जातीय समीकरण बन सकते हैं चुनाव का निर्णायक फैक्टरराजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि दतिया उपचुनाव केवल विकास या स्थानीय मुद्दों पर नहीं लड़ा जाएगा, बल्कि जातीय और सामाजिक समीकरण भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। यादव, कुशवाहा और ब्राह्मण मतदाताओं की संख्या यहां निर्णायक मानी जाती है। अलग-अलग दल इन वर्गों को साधने के लिए विशेष रणनीति बना रहे हैं। भाजपा जहां सामाजिक सम्मेलनों के जरिए विभिन्न समुदायों तक पहुंच रही है, वहीं कांग्रेस संगठन को मजबूत करने और बूथ स्तर तक सक्रियता बढ़ाने में जुटी है। जनता का संदेश साफ: केवल वादे नहीं, काम चाहिएदतिया के राजनीतिक माहौल की सबसे दिलचस्प बात यह है कि स्थानीय स्तर पर दोनों प्रमुख दलों के प्रति असंतोष दिखाई देता है। कई नागरिकों का कहना है कि वे अब केवल राजनीतिक दावों से प्रभावित नहीं होंगे, बल्कि उम्मीदवार की पहुंच, जवाबदेही और क्षेत्रीय विकास के आधार पर निर्णय लेंगे। यही कारण है कि संभावित उपचुनाव में मुकाबला केवल भाजपा और कांग्रेस के बीच नहीं, बल्कि जनता के विश्वास को हासिल करने की चुनौती भी होगा।

चांदी बाजार में बड़ी नरमी, MCX से लेकर सर्राफा बाजार तक कीमतों में तेज गिरावट; निवेशकों की बढ़ी चिंता

नई दिल्ली । देश के सर्राफा और कमोडिटी बाजार में शुक्रवार को चांदी की कीमतों में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई। घरेलू बाजारों से लेकर मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) तक चांदी के दाम दबाव में दिखाई दिए, जिससे निवेशकों और खरीदारों के बीच बाजार की दिशा को लेकर नई चर्चा शुरू हो गई है। हाल के दिनों में लगातार ऊंचे स्तर पर कारोबार कर रही चांदी में आई यह गिरावट बाजार के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है। 5 जून 2026 के कारोबारी सत्र में देश के कई प्रमुख बाजारों में चांदी की कीमतों में नरमी देखने को मिली। दिल्ली, उत्तर प्रदेश और बिहार सहित विभिन्न राज्यों के सर्राफा बाजारों में चांदी के भाव पिछले सत्रों की तुलना में नीचे आए। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि यह गिरावट केवल स्थानीय मांग और आपूर्ति का परिणाम नहीं है, बल्कि इसके पीछे वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों का भी बड़ा प्रभाव है। कमोडिटी बाजार में भी चांदी के वायदा कारोबार पर दबाव साफ दिखाई दिया। MCX पर शुरुआती कारोबार के दौरान चांदी के भाव में उल्लेखनीय कमजोरी दर्ज की गई। रिपोर्टों के अनुसार कुछ कॉन्ट्रैक्ट्स में कीमतों में प्रति किलोग्राम कई हजार रुपये तक की गिरावट देखने को मिली। हालांकि विभिन्न एक्सपायरी और कॉन्ट्रैक्ट अवधि के अनुसार दरों में अंतर बना रहा, फिर भी पूरे बाजार में कमजोरी का रुख स्पष्ट दिखाई दिया। स्थानीय स्पॉट मार्केट में भी चांदी की कीमतें नरम रहीं। व्यापारियों के अनुसार हाल के उच्च स्तरों के बाद निवेशकों द्वारा मुनाफावसूली और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में कमजोरी का असर घरेलू कीमतों पर पड़ा है। इसके कारण खरीदारों को कुछ राहत जरूर मिली है, लेकिन निवेशकों के लिए बाजार की दिशा को लेकर सतर्कता बढ़ गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर डॉलर की मजबूती ने कीमती धातुओं पर दबाव बनाया है। जब डॉलर मजबूत होता है तो सोना और चांदी जैसी धातुएं अपेक्षाकृत महंगी हो जाती हैं, जिससे वैश्विक मांग प्रभावित हो सकती है। इसके अलावा ब्याज दरों को लेकर बनी अनिश्चितता भी निवेशकों को सुरक्षित रणनीति अपनाने के लिए प्रेरित कर रही है। भू-राजनीतिक परिस्थितियां भी बाजार की चाल को प्रभावित कर रही हैं। पश्चिम एशिया में जारी तनाव और वैश्विक आर्थिक गतिविधियों से जुड़ी चिंताओं ने निवेशकों के रुख को प्रभावित किया है। हालांकि ऐसे समय में आमतौर पर सुरक्षित निवेश विकल्पों की मांग बढ़ती है, लेकिन मौजूदा परिस्थितियों में निवेशकों का व्यवहार अपेक्षाकृत सतर्क बना हुआ है। कमोडिटी विश्लेषकों का मानना है कि निकट भविष्य में चांदी की कीमतों में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। वैश्विक आर्थिक आंकड़े, अमेरिकी डॉलर की चाल और केंद्रीय बैंकों की नीतियां बाजार की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी। ऐसे में निवेशकों को जल्दबाजी में निर्णय लेने से बचना चाहिए और बाजार के संकेतों पर लगातार नजर बनाए रखनी चाहिए। चांदी की कीमतों में आई यह गिरावट उन उपभोक्ताओं के लिए राहत भरी खबर मानी जा रही है जो निवेश या आभूषण खरीदारी की योजना बना रहे हैं। वहीं निवेशकों के लिए यह समय बाजार की गतिविधियों का सावधानीपूर्वक विश्लेषण करने और दीर्घकालिक रणनीति के साथ आगे बढ़ने का संकेत दे रहा है।