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शपथ के दो दिन बाद ही कांग्रेस सरकार में खींचतान, विभाग आवंटन को लेकर वरिष्ठ मंत्रियों की नाराजगी खुलकर सामने आई

नई दिल्ली । कर्नाटक में मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के नेतृत्व में गठित नई कांग्रेस सरकार को गठन के शुरुआती दिनों में ही आंतरिक असंतोष का सामना करना पड़ रहा है। मंत्रिमंडल में विभागों के आवंटन को लेकर उठे विवाद अब और गहराते दिखाई दे रहे हैं। वरिष्ठ नेता रामलिंगा रेड्डी की नाराजगी के बाद अब खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री केएच मुनियप्पा ने भी अपने विभाग में बदलाव की मांग उठाकर सरकार और पार्टी नेतृत्व की चिंता बढ़ा दी है। सरकार के गठन के बाद विभागों के वितरण को लेकर कांग्रेस के भीतर असंतोष की चर्चाएं लगातार तेज हो रही हैं। केएच मुनियप्पा ने सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया है कि उन्होंने अपने मौजूदा मंत्रालय को बदलने का अनुरोध पार्टी नेतृत्व के समक्ष रखा है। उनका कहना है कि उनकी राजनीतिक पृष्ठभूमि और प्रशासनिक अनुभव को देखते हुए उन्हें ऐसे विभाग दिए जाने चाहिए जहां वे अधिक प्रभावी ढंग से जनसेवा कर सकें। मुनियप्पा ने संकेत दिया है कि वह इस विषय पर कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व से भी चर्चा करेंगे। उनका मानना है कि वरिष्ठ नेताओं को उनकी अनुभव क्षमता और राजनीतिक योगदान के अनुरूप जिम्मेदारियां मिलनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि वह पिछले कई वर्षों से खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग से जुड़े रहे हैं और अब नई जिम्मेदारी संभालकर जनता के लिए अधिक व्यापक स्तर पर काम करना चाहते हैं। वरिष्ठ मंत्री ने समाज कल्याण, कृषि और सिंचाई जैसे विभागों में रुचि जताई है। उनका कहना है कि इन क्षेत्रों में कार्य करने का उन्हें पर्याप्त अनुभव है और इन विभागों के माध्यम से वह ग्रामीण क्षेत्रों तथा सामाजिक विकास से जुड़े मुद्दों पर अधिक प्रभावी योगदान दे सकते हैं। उनके इस बयान ने सरकार के भीतर विभागों के बंटवारे को लेकर चल रही चर्चाओं को और हवा दे दी है। इससे पहले रामलिंगा रेड्डी भी विभाग आवंटन को लेकर नाराजगी जता चुके हैं। उन्होंने दावा किया था कि उन्हें बेंगलुरु विकास विभाग दिए जाने का आश्वासन मिला था, लेकिन अंतिम समय में उन्हें बड़ी और मध्यम सिंचाई परियोजनाओं की जिम्मेदारी सौंप दी गई। इस फैसले के बाद उन्होंने अपनी असहमति खुलकर व्यक्त की थी, जिससे सरकार के भीतर असंतोष पहली बार सार्वजनिक रूप से सामने आया। मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने हालांकि स्थिति को सामान्य बताते हुए कहा है कि सभी मुद्दों का समाधान बातचीत के माध्यम से निकाला जाएगा। उन्होंने रामलिंगा रेड्डी को अपना करीबी सहयोगी और सम्मानित वरिष्ठ नेता बताते हुए भरोसा जताया कि उनकी चिंताओं का समाधान किया जाएगा। मुख्यमंत्री का कहना है कि सरकार और संगठन दोनों स्तरों पर संवाद जारी है और किसी भी प्रकार के मतभेद को सुलझाने की कोशिश की जाएगी। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि नई सरकार के शुरुआती चरण में इस तरह की नाराजगी प्रशासनिक स्थिरता और राजनीतिक संदेश दोनों के लिहाज से महत्वपूर्ण है। कांग्रेस नेतृत्व के सामने चुनौती यह है कि वह वरिष्ठ नेताओं की अपेक्षाओं और सरकार की कार्यक्षमता के बीच संतुलन बनाए रखे। यदि असंतोष को समय रहते नियंत्रित नहीं किया गया तो यह आगे चलकर संगठनात्मक एकता को प्रभावित कर सकता है। फिलहाल कांग्रेस नेतृत्व स्थिति पर नजर बनाए हुए है और माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में नाराज नेताओं से बातचीत कर समाधान निकालने का प्रयास किया जाएगा। विभागों को लेकर शुरू हुआ यह विवाद अब मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के नेतृत्व और राजनीतिक प्रबंधन क्षमता की पहली बड़ी परीक्षा बनता जा रहा है।

उज्जैन के शिवोहम तिवारी का नेशनल टीम में चयन, स्टेट स्विमिंग में 6 पदकों के साथ मचाया धमाल

मध्य प्रदेश । रीवा में आयोजित 54वीं स्टेट ओपन स्विमिंग चैंपियनशिप में उज्जैन के युवा तैराकों ने बेहतरीन प्रदर्शन कर जिले का नाम रोशन किया। 30 मई से 2 जून तक चली इस प्रतियोगिता में उज्जैन के कुल 6 तैराकों ने 19 पदक जीतकर शानदार उपलब्धि हासिल की, जिसमें 2 स्वर्ण, 5 रजत और 12 कांस्य पदक शामिल हैं। इसके साथ ही उज्जैन की अन्य युवा प्रतिभाओं ने भी शानदार प्रदर्शन किया। जुनीना हुसैन ने 400 मीटर इंडिविजुअल मेडले, 800 मीटर और 1500 मीटर फ्री स्टाइल जैसी कठिन स्पर्धाओं में 5 पदक जीतकर अपनी क्षमता साबित की। आध्या राय ने बैकस्ट्रोक स्पर्धा में पदक हासिल किया, जबकि समर्थ गेहलोत ने कांस्य पदक जीतकर टीम की सफलता में योगदान दिया। कुल मिलाकर उज्जैन के तैराकों ने प्रतियोगिता में शानदार तालमेल और मेहनत का परिचय देते हुए 19 पदकों के साथ जिले का मान बढ़ाया। शिवोहम तिवारी के राष्ट्रीय स्तर पर चयन को स्थानीय खेल जगत के लिए बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। परिवार के अनुसार, शिवोहम पूरे वर्ष नियमित अभ्यास और अनुशासन के साथ तैयारी करते हैं। उनके पिता ओमप्रकाश तिवारी ने बताया कि लगातार प्रशिक्षण और समर्पण ने ही यह सफलता दिलाई है। शिवोहम ने अपनी सफलता पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि कई रेसों के कारण थकान जरूर थी, लेकिन उन्होंने अपने लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित रखते हुए हर स्पर्धा में सर्वश्रेष्ठ देने की कोशिश की। वर्तमान में वे 11वीं कक्षा के छात्र हैं और पढ़ाई के साथ खेल को संतुलित कर आगे राष्ट्रीय स्तर पर बेहतर प्रदर्शन की तैयारी कर रहे हैं। यह उपलब्धि उज्जैन के खेल जगत के लिए प्रेरणादायक मानी जा रही है और इससे युवा खिलाड़ियों में नया उत्साह देखने को मिल रहा है।

कैलाश खेर ने महाकाल की भस्म आरती में लिया आशीर्वाद, बोले- “बाबा की कृपा से जन्मों के पाप धुल जाते हैं”

मध्य प्रदेश । उज्जैन स्थित विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर एक बार फिर श्रद्धा और भक्ति के अद्भुत संगम का गवाह बना, जब प्रसिद्ध गायक कैलाश खेर शुक्रवार तड़के भगवान महाकाल के दर्शन करने पहुंचे। वे विशेष रूप से भस्म आरती में शामिल हुए और पूरी श्रद्धा के साथ भगवान ज्योतिर्लिंग के दर्शन किए। कैलाश खेर सुबह करीब 3 बजे मंदिर पहुंचे और नंदी हॉल में बैठकर भस्म आरती का दिव्य दृश्य देखा। आरती के दौरान वे पूरी तरह भक्ति में लीन नजर आए। लगभग दो घंटे तक उन्होंने आरती का अनुभव लिया और इसके बाद नंदी जी का पूजन-अभिषेक किया। उन्होंने नंदी के कान में अपनी मनोकामना भी व्यक्त की, जैसा कि परंपरा के अनुसार श्रद्धालु करते हैं। इसके बाद उन्होंने चांदी द्वार के माध्यम से पुजारी के जरिए भगवान महाकाल को जल अर्पित किया और आशीर्वाद प्राप्त किया। दर्शन के पश्चात मंदिर प्रबंधन समिति की ओर से उनका सम्मान किया गया। इस आध्यात्मिक अनुभव के बाद कैलाश खेर ने कहा कि महाकाल के दरबार में पहुंचना स्वयं में एक दिव्य अनुभूति है। उनके अनुसार, जो भी श्रद्धालु यहां आता है, वह आध्यात्मिक रूप से शुद्ध होता है और जन्मों के पापों से मुक्ति का अनुभव करता है। उन्होंने भस्म आरती को अत्यंत पवित्र और दुर्लभ दर्शन बताया और कहा कि यह केवल भगवान महाकाल की विशेष कृपा से ही संभव हो पाता है। उन्होंने मंदिर प्रशासन की व्यवस्थाओं की भी प्रशंसा की और कहा कि लाखों श्रद्धालुओं की भीड़ के बावजूद दर्शन और सुरक्षा व्यवस्था बेहद सुव्यवस्थित तरीके से संचालित की जा रही है। महाकाल मंदिर में हुई यह उपस्थिति एक बार फिर इस बात का प्रमाण है कि यह स्थान केवल धार्मिक आस्था का केंद्र ही नहीं, बल्कि देश-विदेश के श्रद्धालुओं और कलाकारों के लिए भी आध्यात्मिक आकर्षण का प्रमुख केंद्र है।

महाकाल मंदिर को मिला राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस पुरस्कार, AI आधारित सुरक्षा सिस्टम की हुई सराहना

मध्य प्रदेश । उज्जैन स्थित विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर अब केवल आस्था का प्रमुख केंद्र ही नहीं रहा, बल्कि यह देश के सबसे आधुनिक और हाईटेक धार्मिक स्थलों में भी शामिल हो गया है। केंद्र सरकार ने मंदिर की अत्याधुनिक एआई आधारित सुरक्षा प्रणाली को राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस पुरस्कार 2026 के लिए चयनित किया है। इस सम्मान के पीछे मंदिर परिसर में लागू की गई ‘त्रिनेत्र’ नामक स्मार्ट निगरानी व्यवस्था प्रमुख कारण बनी है। मंदिर परिसर और महाकाल रुद्रसागर इंटीग्रेटेड डेवलपमेंट एरिया (MRIDA) में 500 से अधिक एआई-सक्षम कैमरे लगाए गए हैं, जो 24 घंटे लगातार निगरानी करते हैं। यह प्रणाली भीड़ प्रबंधन, सुरक्षा नियंत्रण और आपातकालीन स्थितियों में त्वरित कार्रवाई के लिए विकसित की गई है। फेसियल रिकॉग्निशन, ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन (ANPR) और रियल टाइम वीडियो एनालिटिक्स जैसी आधुनिक तकनीकों ने इसे देश की सबसे उन्नत सुरक्षा प्रणालियों में शामिल कर दिया है। लाखों श्रद्धालुओं की दैनिक आवाजाही के बीच यह तकनीक हर गतिविधि पर नजर रखती है। किसी भी संदिग्ध गतिविधि की पहचान होते ही सिस्टम तुरंत अलर्ट जारी करता है, जिससे प्रशासन को त्वरित कार्रवाई का अवसर मिलता है। इस कारण इसे “महाकाल की तीसरी आंख” भी कहा जाने लगा है। राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस पुरस्कार के लिए चयन से पहले केंद्र सरकार की एक विशेषज्ञ टीम ने उज्जैन पहुंचकर पूरे सिस्टम का गहन निरीक्षण किया था। इसके बाद उज्जैन कलेक्टर रोशन कुमार सिंह ने 13 सदस्यीय जूरी के सामने इस परियोजना का विस्तृत प्रस्तुतीकरण दिया। तकनीकी मूल्यांकन और प्रस्तुति के आधार पर ‘त्रिनेत्र’ परियोजना को देश की सर्वश्रेष्ठ डिजिटल और स्मार्ट गवर्नेंस परियोजनाओं में शामिल किया गया। यह पुरस्कार 29वें राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस सम्मेलन में प्रदान किया जाएगा। इस उपलब्धि के साथ उज्जैन ने डिजिटल प्रशासन और स्मार्ट धार्मिक प्रबंधन के क्षेत्र में एक नई मिसाल कायम की है। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इस उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि राज्य लगातार ई-गवर्नेंस, नवाचार और तकनीक आधारित जनसेवा के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों को छू रहा है। उन्होंने इसे प्रदेश के लिए गौरवपूर्ण क्षण बताया। आज महाकाल मंदिर न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि तकनीक और सुरक्षा के क्षेत्र में भारत के अग्रणी मॉडल के रूप में उभर रहा है। एआई आधारित यह प्रणाली आने वाले समय में अन्य धार्मिक और सार्वजनिक स्थलों के लिए भी एक प्रेरणादायक उदाहरण साबित हो सकती है।

भारत-बांग्लादेश सीमा पर बढ़ा तनाव, घुसपैठ रोकने की कार्रवाई के बीच आमने-सामने आए दोनों देश

नई दिल्ली । भारत और बांग्लादेश के बीच साझा अंतरराष्ट्रीय सीमा एक बार फिर सुरक्षा और कूटनीतिक गतिविधियों के केंद्र में आ गई है। हाल के दिनों में सीमा क्षेत्रों में बढ़ी सतर्कता और अवैध आवाजाही को रोकने के लिए उठाए गए कदमों के बीच दोनों देशों के सुरक्षा तंत्र सक्रिय नजर आ रहे हैं। सीमा पर बढ़ी निगरानी के साथ-साथ कई संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत किया गया है।सीमा सुरक्षा बल द्वारा पूर्वी क्षेत्र में लगातार निगरानी और गश्त बढ़ाए जाने के बाद कई संदिग्ध गतिविधियों पर रोक लगाई गई है। अधिकारियों के अनुसार सीमा पार से अवैध प्रवेश, तस्करी और अन्य गैरकानूनी गतिविधियों को रोकने के लिए विशेष अभियान चलाए जा रहे हैं। इसके तहत संवेदनशील क्षेत्रों में अतिरिक्त जवानों की तैनाती की गई है और तकनीकी संसाधनों का उपयोग भी बढ़ाया गया है।इसी बीच सीमा से जुड़े कुछ घटनाक्रमों को लेकर भारत और बांग्लादेश के सुरक्षा बलों के बीच फ्लैग मीटिंग आयोजित की गई। बैठक में दोनों पक्षों ने अपने-अपने दृष्टिकोण रखे और सीमा प्रबंधन से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की। बांग्लादेश की ओर से कुछ आपत्तियां और चिंताएं व्यक्त की गईं, जबकि भारतीय पक्ष ने सीमा सुरक्षा और कानूनी प्रक्रियाओं के पालन को लेकर अपना पक्ष स्पष्ट किया।सीमाई क्षेत्रों में बढ़ती गतिविधियों को देखते हुए सुरक्षा एजेंसियों ने पूरे पूर्वी सेक्टर में सतर्कता बढ़ा दी है। अधिकारियों का कहना है कि किसी भी प्रकार की अवैध घुसपैठ या सीमा उल्लंघन को रोकना सर्वोच्च प्राथमिकता है। इसके लिए सीमावर्ती क्षेत्रों में नियमित गश्त के साथ-साथ आधुनिक तकनीक का उपयोग किया जा रहा है।नदी मार्गों, जंगलों और अन्य संवेदनशील क्षेत्रों में विशेष निगरानी अभियान चलाए जा रहे हैं। ड्रोन कैमरों, नाइट विजन उपकरणों और अन्य आधुनिक निगरानी प्रणालियों की मदद से चौबीसों घंटे गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है। सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि तकनीकी निगरानी से सीमा पार होने वाली संदिग्ध गतिविधियों को समय रहते पहचानने और रोकने में मदद मिल रही है।विशेषज्ञों का कहना है कि भारत-बांग्लादेश सीमा दुनिया की सबसे व्यस्त और संवेदनशील सीमाओं में से एक है, जहां सुरक्षा, मानवीय और आर्थिक पहलू एक साथ जुड़े रहते हैं। ऐसे में किसी भी प्रकार की स्थिति को संभालने के लिए दोनों देशों के बीच संवाद और समन्वय महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। सीमा प्रबंधन से जुड़े मुद्दों का समाधान आमतौर पर द्विपक्षीय बातचीत और स्थापित तंत्र के माध्यम से किया जाता रहा है।वर्तमान घटनाक्रम के बीच सुरक्षा एजेंसियां स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं। अधिकारियों का कहना है कि सीमा की सुरक्षा सुनिश्चित करने के साथ-साथ सभी अंतरराष्ट्रीय नियमों और द्विपक्षीय व्यवस्थाओं का पालन किया जा रहा है। आने वाले दिनों में दोनों देशों के बीच संपर्क और संवाद की प्रक्रिया जारी रहने की संभावना है, ताकि सीमा से जुड़े किसी भी मुद्दे का समाधान शांतिपूर्ण और संस्थागत माध्यमों से किया जा सके।

अहमदाबाद से रवाना होगा शव, फ्लाइट का इंतजार करते समय हुआ था हमला

मध्य प्रदेश । मध्य प्रदेश के Ujjain से जुड़े एक दर्दनाक अंतरराष्ट्रीय हादसे में ईरान में हुए हमले के दौरान मारे गए भारतीय नागरिक मंजूर अहमद का पार्थिव शरीर शुक्रवार को भारत पहुंच गया। शव पहले अहमदाबाद एयरपोर्ट लाया गया, जहां से अब उसे सड़क मार्ग से उज्जैन लाया जा रहा है। दोपहर तक शव के उज्जैन पहुंचने की संभावना है, जिसके बाद अंतिम संस्कार किया जाएगा। यह घटना उस समय हुई जब मंजूर अहमद कुवैत अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर अपनी फ्लाइट का इंतजार कर रहे थे। इसी दौरान ड्रोन और मिसाइल हमले में उनकी मौत हो गई। एयरपोर्ट पर अचानक हुआ हमलाजानकारी के अनुसार यह हमला कुवैत अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के टर्मिनल-1 पर हुआ, जहां भारी धमाकों और मिसाइल हमले के चलते अफरा-तफरी मच गई। इस हमले में कई यात्री घायल भी हुए। मंजूर अहमद उसी समय फ्लाइट पकड़ने के लिए एयरपोर्ट पर मौजूद थे और हमले की चपेट में आ गए। उन्हें मौके पर ही मृत घोषित कर दिया गया। शादी में आने वाले थे भारतमृतक के परिजनों के अनुसार मंजूर अहमद 8 जून को रतलाम में होने वाली अपने भांजे की शादी में शामिल होने के लिए भारत लौट रहे थे। वे लंबे समय से विदेश में काम कर रहे थे और परिवार से मिलने का इंतजार कर रहे थे। उनके बेटे मोहम्मद अनस ने बताया कि पिता की आखिरी बातचीत मंगलवार शाम हुई थी, जिसमें उन्होंने बताया था कि वे कुवैत से मुंबई पहुंचेंगे और वहां से ट्रेन के जरिए मध्य प्रदेश आएंगे। 30 साल से विदेश में कर रहे थे काममंजूर अहमद पिछले करीब 30 वर्षों से विदेश में रहकर टेलरिंग का काम कर रहे थे। वे अपने परिवार के एकमात्र कमाने वाले सदस्य थे। परिवार में उनकी पत्नी, दो बेटियां और एक बेटा है, जो अभी पढ़ाई कर रहे हैं। परिवार की आर्थिक जिम्मेदारी पूरी तरह उनके कंधों पर थी। वे समय-समय पर घर आते रहते थे, लेकिन अधिकतर समय विदेश में ही काम करते थे। अहमदाबाद से उज्जैन लाया जा रहा शवमृतक का पार्थिव शरीर शुक्रवार को अहमदाबाद एयरपोर्ट पहुंचा, जहां से औपचारिकताओं के बाद उसे सड़क मार्ग से उज्जैन भेजा गया। स्थानीय प्रशासन और परिजन अंतिम संस्कार की तैयारियों में जुटे हुए हैं। परिवार और रिश्तेदारों के घर पर शोक का माहौल है। जैसे ही मौत की खबर आई, आसपास के लोग और परिचित बड़ी संख्या में घर पहुंचने लगे। भारत ने हमले की निंदा कीइस घटना पर भारत सरकार ने गहरा शोक व्यक्त करते हुए हमले की निंदा की है। विदेश मंत्रालय ने कहा है कि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच आम नागरिकों को निशाना बनाना पूरी तरह गलत है। भारत ने सभी पक्षों से संयम बरतने और नागरिक सुरक्षा सुनिश्चित करने की अपील की है। पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ाइस हमले को लेकर ईरान और अन्य देशों के बीच तनाव और बढ़ गया है। ईरान ने इसे अपनी सुरक्षा से जुड़ा मामला बताते हुए जवाबी कार्रवाई की चेतावनी भी दी है।

भाजपा से अलग हुए के. अन्नामलाई, गठबंधन राजनीति से नाराजगी बनी वजह; नई राजनीतिक पारी की अटकलें तेज

नई दिल्ली । कर्नाटक में नई सरकार के गठन के कुछ ही समय बाद कांग्रेस के भीतर असंतोष और राजनीतिक खींचतान की खबरों ने राज्य की राजनीति को गर्मा दिया है। मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के नेतृत्व वाली नवगठित सरकार को उस समय बड़ा झटका लगा जब वरिष्ठ कांग्रेस नेता और आठ बार विधायक रह चुके रामलिंगा रेड्डी ने मंत्री पद से इस्तीफा देने का फैसला कर लिया। विभागों के आवंटन को लेकर उपजे विवाद ने सरकार के शुरुआती दिनों में ही राजनीतिक चुनौतियों को सामने ला दिया है। मंत्रिमंडल गठन के बाद विभागों के बंटवारे की घोषणा होते ही पार्टी के भीतर असंतोष की चर्चा शुरू हो गई थी। बताया गया कि रामलिंगा रेड्डी अपने पसंदीदा और लंबे समय से जुड़े माने जाने वाले बेंगलुरु विकास विभाग की जिम्मेदारी चाहते थे। हालांकि अंतिम सूची में यह विभाग किसी अन्य मंत्री को सौंप दिया गया, जबकि रेड्डी को प्रमुख और मध्यम सिंचाई विभाग की जिम्मेदारी दी गई। इसी फैसले से नाराज होकर उन्होंने अपना विरोध दर्ज कराया। राजनीतिक हलकों में माना जा रहा है कि बेंगलुरु विकास विभाग राज्य की राजनीति में अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि इससे राजधानी से जुड़े कई विकास कार्यों और योजनाओं का सीधा संबंध रहता है। ऐसे में इस विभाग को लेकर पैदा हुआ विवाद केवल एक मंत्रालय का मुद्दा नहीं बल्कि राजनीतिक प्रभाव और क्षेत्रीय नेतृत्व से भी जुड़ा माना जा रहा है। रामलिंगा रेड्डी ने अपनी नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि उन्हें उम्मीद थी कि पार्टी नेतृत्व उनके अनुभव और वरिष्ठता को ध्यान में रखेगा। उनके इस्तीफे के बाद कांग्रेस के भीतर चर्चा तेज हो गई है कि सरकार गठन के शुरुआती चरण में ही इस तरह का असंतोष भविष्य में और चुनौतियां पैदा कर सकता है। रेड्डी को राज्य की राजनीति में प्रभावशाली नेता माना जाता है और बेंगलुरु क्षेत्र में उनकी मजबूत पकड़ रही है। मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के लिए यह स्थिति एक महत्वपूर्ण राजनीतिक परीक्षा के रूप में देखी जा रही है। सरकार के गठन के बाद उनकी प्राथमिकता प्रशासनिक स्थिरता और संगठनात्मक एकजुटता बनाए रखना है। ऐसे समय में वरिष्ठ नेता का असंतोष विपक्ष को भी सरकार पर सवाल उठाने का अवसर दे सकता है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि इस विवाद का जल्द समाधान नहीं निकाला गया तो इसका असर सरकार की छवि पर पड़ सकता है। कांग्रेस नेतृत्व भी पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए है। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं द्वारा नाराज नेताओं से बातचीत कर स्थिति को सामान्य बनाने की कोशिशें किए जाने की संभावना जताई जा रही है। संगठन की कोशिश होगी कि सरकार के शुरुआती दिनों में किसी भी प्रकार का बड़ा राजनीतिक संदेश बाहर न जाए और आंतरिक मतभेदों को संवाद के माध्यम से सुलझाया जाए। कर्नाटक की राजनीति में मंत्रिमंडल विस्तार और विभागों के आवंटन को लेकर असंतोष कोई नई बात नहीं है, लेकिन नई सरकार के गठन के तुरंत बाद सामने आया यह विवाद विशेष महत्व रखता है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि कांग्रेस नेतृत्व और मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार इस चुनौती से किस प्रकार निपटते हैं और क्या रामलिंगा रेड्डी को मनाकर सरकार के भीतर संतुलन बहाल किया जा सकेगा।

राजधानी में सुरक्षा अलर्ट, धमकी भरे ईमेल के बाद मेयर दफ्तर, धार्मिक स्थलों और रेलवे नेटवर्क की निगरानी बढ़ी

नई दिल्ली । कर्नाटक में मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के नेतृत्व वाली नई कांग्रेस सरकार के भीतर विभागों के बंटवारे को लेकर असंतोष अब खुलकर सामने आने लगा है। वरिष्ठ कांग्रेस नेता और मंत्री केएच मुनियप्पा द्वारा खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग का कार्यभार संभालने से इनकार किए जाने के बाद राज्य की राजनीति में नई चर्चा शुरू हो गई है। इससे पहले वरिष्ठ नेता रामलिंगा रेड्डी भी विभाग आवंटन को लेकर नाराजगी जाहिर कर चुके हैं। लगातार दूसरे वरिष्ठ मंत्री के विरोध ने सरकार और कांग्रेस नेतृत्व के सामने नई चुनौती खड़ी कर दी है। बेंगलुरु ग्रामीण जिले के देवनहल्ली में मीडिया से बातचीत के दौरान केएच मुनियप्पा ने स्पष्ट किया कि वह मौजूदा परिस्थितियों में उन्हें सौंपे गए विभाग का प्रभार ग्रहण नहीं करेंगे। उनका कहना है कि विभागों का आवंटन करते समय वरिष्ठ नेताओं के अनुभव, राजनीतिक योगदान और संगठन में उनकी भूमिका का पर्याप्त सम्मान नहीं किया गया। उन्होंने संकेत दिया कि जब तक पार्टी नेतृत्व इस मामले की समीक्षा कर कोई संतोषजनक निर्णय नहीं लेता, तब तक वह मंत्रालय का कार्यभार नहीं संभालेंगे। पूर्व केंद्रीय मंत्री रह चुके मुनियप्पा ने कहा कि लंबे राजनीतिक और प्रशासनिक अनुभव वाले नेताओं को जिम्मेदारियां सौंपते समय वरिष्ठता को महत्व दिया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि पार्टी नेतृत्व की जिम्मेदारी केवल सरकार चलाने तक सीमित नहीं है, बल्कि संगठन के भीतर संतुलन और विश्वास बनाए रखना भी उतना ही आवश्यक है। उनके अनुसार ऐसे फैसले होने चाहिए जो संगठनात्मक एकता को मजबूत करें और कार्यकर्ताओं में सकारात्मक संदेश पहुंचाएं। मुनियप्पा ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे से सीधे हस्तक्षेप की मांग भी की है। उन्होंने कहा कि पार्टी अध्यक्ष को एक अभिभावक की भूमिका निभाते हुए सभी वरिष्ठ नेताओं की भावनाओं को समझना चाहिए और ऐसा समाधान निकालना चाहिए जिससे किसी भी स्तर पर असंतोष की स्थिति न बने। उन्होंने बताया कि अपनी नाराजगी से वह राहुल गांधी, रणदीप सिंह सुरजेवाला, केसी वेणुगोपाल, सिद्धारमैया और मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार सहित शीर्ष नेतृत्व को अवगत करा चुके हैं। हालांकि मुनियप्पा ने किसी व्यक्ति विशेष को जिम्मेदार नहीं ठहराया, लेकिन उनके बयान ने कांग्रेस सरकार के भीतर चल रही असहजता को उजागर कर दिया है। राजनीतिक सूत्रों के अनुसार कुछ वरिष्ठ नेता इस बात से असंतुष्ट हैं कि कई प्रभावशाली विभाग अपेक्षाकृत युवा नेताओं या राजनीतिक रूप से प्रभावशाली परिवारों से जुड़े नेताओं को दिए गए हैं, जबकि लंबे समय से संगठन में योगदान देने वाले कुछ वरिष्ठ नेताओं को उनकी अपेक्षाओं के अनुरूप जिम्मेदारियां नहीं मिलीं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह विवाद केवल विभागों के बंटवारे तक सीमित नहीं है, बल्कि सरकार और संगठन के भीतर शक्ति संतुलन से भी जुड़ा हुआ है। नई सरकार के गठन के बाद यदि वरिष्ठ नेताओं की नाराजगी लगातार बढ़ती है तो इसका असर प्रशासनिक कार्यप्रणाली और राजनीतिक संदेश दोनों पर पड़ सकता है। ऐसे समय में कांग्रेस नेतृत्व के लिए सभी पक्षों को साथ लेकर चलना महत्वपूर्ण माना जा रहा है। मुनियप्पा की नाराजगी को इसलिए भी गंभीर माना जा रहा है क्योंकि वह कर्नाटक कांग्रेस के सबसे अनुभवी नेताओं में शामिल हैं। सात बार सांसद और पूर्व केंद्रीय मंत्री रह चुके मुनियप्पा का राज्य की राजनीति में महत्वपूर्ण प्रभाव माना जाता है। रामलिंगा रेड्डी के बाद उनका विरोध यह संकेत देता है कि विभागों के बंटवारे को लेकर असंतोष व्यापक रूप ले सकता है। अब कांग्रेस हाईकमान और मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के सामने सबसे बड़ी चुनौती सरकार के भीतर एकजुटता बनाए रखने और नाराज नेताओं को संतुष्ट करने की होगी।

शिप्रा एक्सप्रेस में मिली 1.5 करोड़ की हेरोइन, उज्जैन स्टेशन पर आरोपी दबोचा गया

मध्य प्रदेश । मध्य प्रदेश के Ujjain रेलवे स्टेशन पर सेंट्रल ब्यूरो ऑफ नारकोटिक्स (CBN) ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए शिप्रा एक्सप्रेस से 1.067 किलोग्राम हेरोइन बरामद की है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में इस मादक पदार्थ की कीमत करीब सवा करोड़ रुपये बताई जा रही है। कार्रवाई के दौरान राजस्थान के प्रतापगढ़ निवासी एक आरोपी को गिरफ्तार किया गया, जो कथित तौर पर यह खेप पश्चिम बंगाल ले जा रहा था। इस कार्रवाई का वीडियो भी सामने आया है, जिसमें नारकोटिक्स और रेलवे सुरक्षा बल (RPF) के अधिकारी ट्रेन के जनरल कोच में तलाशी अभियान चलाते और संदिग्ध आरोपी को पकड़ते दिखाई दे रहे हैं। प्रारंभिक जांच में यह मामला अंतरराज्यीय ड्रग तस्करी नेटवर्क से जुड़ा माना जा रहा है, जिसके तार कई राज्यों तक फैले हो सकते हैं। खुफिया सूचना के बाद स्टेशन पर बिछाया गया जालजानकारी के अनुसार, Central Bureau of Narcotics को विश्वसनीय सूचना मिली थी कि शिप्रा एक्सप्रेस (ट्रेन संख्या 22911) के माध्यम से बड़ी मात्रा में हेरोइन की तस्करी की जा रही है। सूचना मिलते ही एजेंसी ने रेलवे सुरक्षा बल के साथ संयुक्त रणनीति तैयार की। गुरुवार और शुक्रवार की दरमियानी रात करीब एक बजे ट्रेन के उज्जैन स्टेशन पहुंचने से पहले ही अधिकारियों ने प्लेटफॉर्म पर निगरानी बढ़ा दी। ट्रेन रुकते ही जनरल कोच में सघन तलाशी अभियान शुरू किया गया। इसी दौरान अधिकारियों की नजर एक संदिग्ध युवक पर पड़ी, जिसकी गतिविधियां सामान्य यात्रियों से अलग दिखाई दे रही थीं। बैग की तलाशी में खुला बड़ा राजसंदेह के आधार पर युवक को रोककर उसके हैंडबैग की जांच की गई। तलाशी के दौरान बैग में छिपाकर रखे गए दो पैकेट बरामद हुए। जब पैकेटों की जांच की गई तो उनमें कुल 1.067 किलोग्राम हेरोइन मिली। अधिकारियों ने मौके पर ही मादक पदार्थ को जब्त कर लिया और आरोपी को हिरासत में ले लिया। बरामद हेरोइन की मात्रा और उसकी कीमत को देखते हुए इसे हाल के समय की महत्वपूर्ण नारकोटिक्स कार्रवाई माना जा रहा है। राजस्थान से हावड़ा तक फैला था सप्लाई रूटजांच एजेंसियों के अनुसार गिरफ्तार आरोपी की पहचान रमेश चंद्र के रूप में हुई है, जो राजस्थान के प्रतापगढ़ जिले का रहने वाला है।प्रारंभिक पूछताछ में सामने आया है कि हेरोइन की खेप राजस्थान के प्रतापगढ़ क्षेत्र से पश्चिम बंगाल के हावड़ा भेजी जा रही थी। इस पूरे नेटवर्क में उज्जैन एक महत्वपूर्ण ट्रांजिट पॉइंट के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा था। एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि खेप किसे सौंपी जानी थी और इसके पीछे कौन-कौन लोग शामिल हैं। वीडियो में दिखी पूरी कार्रवाईकार्रवाई का जो वीडियो सामने आया है, उसमें अधिकारी ट्रेन रुकते ही जनरल कोच में प्रवेश कर यात्रियों और सामान की जांच करते नजर आ रहे हैं। कुछ देर बाद संदिग्ध युवक को प्लेटफॉर्म पर लाकर उसके बैग की तलाशी ली जाती है। बैग से हेरोइन बरामद होने के बाद अधिकारियों द्वारा उसे हिरासत में लेते हुए भी देखा जा सकता है। यह वीडियो एजेंसियों की सतर्कता और योजनाबद्ध कार्रवाई को भी दर्शाता है, जिसके चलते बड़ी मात्रा में मादक पदार्थ को गंतव्य तक पहुंचने से पहले ही पकड़ लिया गया। नेटवर्क के अन्य सदस्यों की तलाशसीबीएन ने आरोपी के खिलाफ NDPS Act के तहत मामला दर्ज कर लिया है। अब जांच का फोकस पूरे ड्रग तस्करी नेटवर्क की पहचान करने और इसके अन्य सदस्यों तक पहुंचने पर है। अधिकारियों का मानना है कि इस मामले में पूछताछ से अंतरराज्यीय मादक पदार्थ तस्करी गिरोह से जुड़े महत्वपूर्ण सुराग मिल सकते हैं। एजेंसी सप्लाई चेन, फंडिंग नेटवर्क और तस्करी के रूट की भी गहन जांच कर रही है।

महाकाल दर्शन व्यवस्था पर सवाल, अवैध वसूली के खिलाफ प्रशासन की बड़ी कार्रवाई

मध्य प्रदेश । उज्जैन स्थित Shri Mahakaleshwar Temple में भस्म आरती की अनुमति दिलाने के नाम पर श्रद्धालुओं से अवैध वसूली का मामला सामने आया है। मंदिर प्रशासन के औचक निरीक्षण के दौरान यह खुलासा हुआ कि कुछ लोगों ने श्रद्धालुओं से प्रति व्यक्ति 2500 रुपए लेकर आरती में प्रवेश की व्यवस्था कराने का दावा किया था। मामले की गंभीरता को देखते हुए मंदिर प्रशासन ने तत्काल पुलिस को शिकायत सौंपी, जिसके आधार पर तीन लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है। घटना के सामने आने के बाद मंदिर प्रशासन ने भविष्य में ऐसी अनियमितताओं को रोकने के लिए प्रवेश व्यवस्था में भी बदलाव करने का निर्णय लिया है। औचक निरीक्षण में सामने आई गड़बड़ीशुक्रवार तड़के मंदिर प्रशासक एवं अपर कलेक्टर प्रथम कौशिक भस्म आरती की व्यवस्थाओं का निरीक्षण करने पहुंचे थे। निरीक्षण के दौरान उन्होंने विभिन्न प्रवेश द्वारों से आने वाले श्रद्धालुओं से बातचीत की और उनकी अनुमति प्रक्रिया के बारे में जानकारी ली। नीलकंठ द्वार, मानसरोवर मार्ग और अन्य प्रवेश बिंदुओं पर अनुमति जांच के दौरान कुछ श्रद्धालुओं ने चौंकाने वाली जानकारी दी। तीन श्रद्धालुओं ने बताया कि उनसे भस्म आरती में शामिल होने की अनुमति दिलाने के नाम पर 2500-2500 रुपए लिए गए थे। श्रद्धालुओं की शिकायत से खुला मामलाप्रशासक द्वारा पूछताछ किए जाने पर श्रद्धालुओं ने स्पष्ट रूप से बताया कि उन्होंने निर्धारित प्रक्रिया के अलावा अतिरिक्त राशि का भुगतान किया था। शिकायत मिलने के बाद प्रशासन ने संबंधित दस्तावेजों और अनुमति प्रक्रिया की जांच शुरू की। प्रारंभिक जांच में सामने आया कि भस्म आरती की प्रोटोकॉल अनुमति किसी कथित ‘हिन्दू संगठन’ के नाम से कराई गई थी। हालांकि अभी तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि श्रद्धालुओं से वसूली गई राशि किस व्यक्ति या समूह तक पहुंची। तीन लोगों के खिलाफ दर्ज हुई FIRमंदिर प्रशासन ने मामले को गंभीर मानते हुए Mahakal Police Station में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत के आधार पर पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर ली है और मामले की जांच शुरू कर दी है। पुलिस अब यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि श्रद्धालुओं से पैसे लेने में कौन-कौन लोग शामिल थे और क्या यह कोई संगठित नेटवर्क था या कुछ व्यक्तियों द्वारा की जा रही अवैध गतिविधि। प्रवेश व्यवस्था में होगा बड़ा बदलावघटना के बाद मंदिर प्रशासन ने सुरक्षा और पारदर्शिता बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। अब भस्म आरती में शामिल होने वाले श्रद्धालुओं के लिए नीलकंठ द्वार को मुख्य और एकमात्र प्रवेश द्वार बनाने के निर्देश दिए गए हैं। प्रशासन का मानना है कि एकल प्रवेश व्यवस्था से अनुमति प्रक्रिया की निगरानी आसान होगी और किसी भी प्रकार की दलाली या अवैध वसूली पर अंकुश लगाया जा सकेगा। भस्म आरती को लेकर रहती है भारी मांगमहाकाल मंदिर की भस्म आरती देश-विदेश के श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र है। प्रतिदिन तड़के होने वाली इस आरती में शामिल होने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु आवेदन करते हैं। सीमित संख्या में अनुमति मिलने के कारण कई बार दलालों और बिचौलियों के सक्रिय होने की शिकायतें भी सामने आती रही हैं। ताजा मामले ने एक बार फिर आरती अनुमति प्रक्रिया की पारदर्शिता और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रशासन का कहना है कि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी और श्रद्धालुओं से अपील की गई है कि वे केवल अधिकृत माध्यमों से ही अनुमति प्राप्त करें।