Congress Social Media Campaign: कांग्रेस ने शुरू किया ‘सोशल मीडिया वॉरियर्स’ अभियान, युवाओं और क्रिएटर्स को जोड़ने की पहल

HIGHLIGHTS: कांग्रेस पार्टी का सोशल मीडिया वॉरियर्स अभियान शुरू डिजिटल नेटवर्क को मजबूत करने की तैयारी 15 जून तक किए जाएंगेआवेदन इंटरव्यू के बाद जरी होगी फाइनल लिस्ट युवाओं से जुड़ने की अपील Congress Social Media Campaign: अशोकनगर। कांग्रेस पार्टी ने अपने डिजिटल नेटवर्क को मजबूत करने और सोशल मीडिया पर संगठन की सक्रियता बढ़ाने के लिए नया अभियान शुरू किया है। रविवार शाम जिला कांग्रेस कार्यालय में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में जिला कांग्रेस अध्यक्ष राजेंद्र कुशवाहा ने ‘सोशल मीडिया वॉरियर्स’ अभियान की घोषणा की। उन्होंने बताया कि भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (आईएनसी) देशभर में अपने डिजिटल और सोशल मीडिया विंग को सशक्त बनाने के लिए यह विशेष अभियान चला रही है। इसी कड़ी में मध्य प्रदेश कांग्रेस ने भी जून 2026 से राज्य स्तर पर इस पहल को तेज गति से आगे बढ़ाने का निर्णय लिया है। रीवा को मिली तैराकी की बड़ी सुविधा, मिहिर सेन तरणताल फिर से शुरू; महिलाओं के लिए अलग समय तय जिला और विधानसभा स्तर पर बनेगी टीम अभियान के तहत जिला और विधानसभा स्तर पर सोशल मीडिया टीमों का गठन किया जाएगा। इन टीमों में ऐसे युवाओं को शामिल किया जाएगा जो कांग्रेस की विचारधारा से जुड़े हों और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर प्रभावी ढंग से काम करने की क्षमता रखते हों। राजेंद्र कुशवाहा ने कहा कि यह अभियान युवाओं, जागरूक नागरिकों और डिजिटल क्रिएटर्स को संगठन से जोड़ने का एक अहम प्रयास है, ताकि डिजिटल माध्यमों पर पार्टी की पहुंच को और मजबूत किया जा सके। इन लोगों को मिलेगी प्राथमिकता कांग्रेस ने अभियान में लेखक, ग्राफिक डिजाइनर, वीडियो एडिटर, ब्लॉगर, कार्टूनिस्ट, कवि, सामाजिक कार्यकर्ता और लोक कलाकारों को प्राथमिकता देने की बात कही है। इसके अलावा महिलाओं और स्वतंत्र पत्रकारों की भागीदारी बढ़ाने पर भी विशेष जोर दिया जा रहा है। राज्यसभा चुनाव में बीजेपी के फैसले से बदले सियासी समीकरण, 93 वर्षीय एचडी देवेगौड़ा के संसदीय भविष्य पर गहराए सवाल 15 जून तक कर सकेंगे आवेदन अभियान से जुड़ने के इच्छुक प्रतिभागी 15 जून तक ऑनलाइन गूगल फॉर्म के माध्यम से आवेदन कर सकते हैं। आवेदन प्रक्रिया पूरी होने के बाद 20 से 23 जून के बीच जिला कार्यालयों में इंटरव्यू आयोजित किए जायेंगे। 30 जून को जारी होगी अंतिम सूची इंटरव्यू के बाद चयनित सोशल मीडिया वॉरियर्स की अंतिम सूची 30 जून को जारी की जाएगी। इसके बाद जिला और विधानसभा स्तर पर टीमों का गठन कर उन्हें डिजिटल अभियान से जोड़ा जाएगा। राहुल गांधी, ममता बनर्जी और अखिलेश यादव समेत 23 दलों के नेता एक मंच पर, इंडिया ब्लॉक की बैठक में कई मुद्दों पर चर्चा युवाओं से जुड़ने की अपील जिला कांग्रेस अध्यक्ष राजेंद्र कुशवाहा ने जिले के युवाओं से अधिक से अधिक संख्या में इस अभियान से जुड़ने की अपील की। उन्होंने कहा कि डिजिटल युग में सोशल मीडिया जनसंपर्क का प्रभावी माध्यम बन चुका है और युवाओं की भागीदारी से संगठन को नई ऊर्जा मिलेगी।
उज्जैन में मलेरिया निरोधक माह की शुरुआत, जागरूकता रैली और रथ को सीएमएचओ ने दिखाई हरी झंडी

मध्य प्रदेश । मध्य प्रदेश के उज्जैन में मलेरिया और अन्य मच्छरजनित बीमारियों के खिलाफ जागरूकता अभियान की शुरुआत हो गई है। राष्ट्रीय वेक्टर जनित रोग नियंत्रण कार्यक्रम के तहत सोमवार को मलेरिया निरोधक माह का शुभारंभ किया गया। इस अवसर पर मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) उज्जैन ने जागरूकता रैली को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। यह रैली सीएमएचओ कार्यालय और चरक अस्पताल परिसर से शुरू होकर चामुंडा माता चौराहे तक निकाली गई, जिसमें स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारी और नर्सिंग स्टाफ शामिल रहे। रैली के साथ ही एक विशेष जागरूकता रथ भी रवाना किया गया, जो जिले के विभिन्न विकासखंडों और ग्रामीण क्षेत्रों में जाकर लोगों को मलेरिया, डेंगू और चिकनगुनिया जैसी बीमारियों से बचाव के उपाय बताएगा। इस दौरान जनप्रतिनिधियों और स्थानीय प्रभावशाली व्यक्तियों की मदद से पंपलेट वितरण भी किया जाएगा। स्वास्थ्य अधिकारियों ने लोगों से अपील की कि अपने घरों और आसपास पानी जमा न होने दें, क्योंकि यही मच्छरों के प्रजनन का प्रमुख कारण बनता है। साथ ही मच्छरदानी के उपयोग, साफ-सफाई और बुखार होने पर तुरंत जांच कराने की सलाह दी गई है। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, उज्जैन शहर में पिछले पांच महीनों में मलेरिया का कोई भी नया मरीज सामने नहीं आया है, जो राहत की बात है। हालांकि विभाग ने सतर्कता बनाए रखने पर जोर दिया है। डॉ. प्रशांत तिवारी ने जानकारी दी कि जागरूकता रथ पूरे जिले की सभी तहसीलों में पहुंचेगा और लोगों को लगातार जागरूक करेगा। इसके साथ ही फीवर सर्विलेंस अभियान भी चलाया जा रहा है, जिसके तहत बुखार के मरीजों की जांच कर तुरंत इलाज सुनिश्चित किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि यह विशेष अभियान पूरे महीने चलेगा, जबकि मलेरिया और अन्य वेक्टर जनित रोगों को लेकर जागरूकता गतिविधियां पूरे वर्ष जारी रहेंगी।
रीवा को मिली तैराकी की बड़ी सुविधा, मिहिर सेन तरणताल फिर से शुरू; महिलाओं के लिए अलग समय तय

मध्य प्रदेश । रीवा शहर के लोगों के लिए राहत और खुशी की खबर है। वर्षों से बंद पड़े पुराने मिहिर सेन तरणताल को अब फिर से शुरू कर दिया गया है। नगर निगम ने 8 जून से इसे आम नागरिकों के लिए खोल दिया है, जिससे शहरवासियों को तैराकी की सुविधा दोबारा मिल सकेगी। यह तरणताल करीब तीन दशक पुराना है, जिसका हाल ही में व्यापक जीर्णोद्धार किया गया है। इसके बाद अब इसे आधुनिक सुविधाओं और सुरक्षा मानकों के साथ फिर से शुरू किया गया है। मिहिर सेन तरणताल के संचालन के लिए नगर निगम ने दो तरह की व्यवस्था लागू की है। नियमित तैराकी करने वालों के लिए 2500 रुपये प्रतिमाह सदस्यता शुल्क तय किया गया है, जबकि कभी-कभार आने वाले लोग 100 रुपये प्रति घंटे के हिसाब से इसका उपयोग कर सकते हैं। तैराकी के लिए दिनभर को तीन सत्रों में बांटा गया है। सुबह 6 बजे से 10 बजे तक सभी नागरिकों के लिए पूल खुला रहेगा। इसके बाद शाम 5 बजे से 6 बजे तक का समय विशेष रूप से महिलाओं के लिए आरक्षित किया गया है, ताकि वे सुरक्षित और सुविधाजनक माहौल में तैराकी कर सकें। शाम 6 बजे से 8 बजे तक फिर से सभी लोगों को प्रवेश की अनुमति दी गई है। नगर निगम ने सुरक्षा व्यवस्था को प्राथमिकता देते हुए हर सत्र में प्रशिक्षित लाइफगार्ड और कोच की तैनाती की है। साथ ही एक समय में अधिकतम 30 लोगों को ही पूल में प्रवेश दिया जाएगा, ताकि भीड़ और दुर्घटनाओं से बचा जा सके। बच्चों के लिए भी विशेष नियम बनाए गए हैं। 5 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को प्रवेश नहीं दिया जाएगा, जबकि 5 से 14 वर्ष तक के बच्चों को अभिभावक के साथ ही पूल में आने की अनुमति होगी। तरणताल में प्रवेश के लिए पंजीयन अनिवार्य किया गया है, जिसमें आधार कार्ड, वोटर आईडी या जन्म प्रमाण पत्र जैसे दस्तावेज जरूरी होंगे। 18 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए अभिभावक की लिखित अनुमति भी जरूरी होगी। सुरक्षा कारणों से फिलहाल डाइविंग पूल को बंद रखा गया है और केवल मुख्य स्विमिंग पूल ही चालू किया गया है। नगर निगम ने यह भी स्पष्ट किया है कि किसी भी प्रकार की संक्रामक बीमारी से पीड़ित व्यक्ति को पूल में प्रवेश नहीं मिलेगा। नगर निगम के अनुसार तरणताल के संचालन के लिए निजी एजेंसी के चयन की प्रक्रिया अभी जारी है, लेकिन जनता की मांग को देखते हुए फिलहाल इसका संचालन नगर निगम स्वयं कर रहा है।
Wipro में 6% से ज्यादा गिरावट, रिकॉर्ड डेट गुजरते ही बढ़ी बिकवाली; अब निवेशकों की नजर अगले बड़े कदम पर

नई दिल्ली । भारतीय शेयर बाजार में सोमवार को आईटी सेक्टर के शेयरों पर दबाव देखने को मिला, जिसमें विप्रो के शेयर सबसे अधिक चर्चा में रहे। कंपनी का शेयर शुरुआती कारोबार के दौरान छह प्रतिशत से अधिक टूट गया और अपने 52 सप्ताह के निचले स्तर के करीब पहुंच गया। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि इस गिरावट के पीछे केवल सेक्टर से जुड़ी चुनौतियां ही नहीं, बल्कि हाल ही में समाप्त हुई बायबैक रिकॉर्ड डेट भी एक महत्वपूर्ण कारण है। विप्रो ने कुछ समय पहले 15,000 करोड़ रुपये के बड़े बायबैक कार्यक्रम की घोषणा की थी। कंपनी ने 250 रुपये प्रति शेयर के भाव पर शेयर वापस खरीदने की योजना बनाई है, जो मौजूदा बाजार मूल्य से काफी अधिक है। इसी कारण रिकॉर्ड डेट से पहले निवेशकों में उत्साह देखा गया था। हालांकि रिकॉर्ड डेट गुजरने के बाद कई निवेशकों ने मुनाफावसूली का रास्ता चुना, जिससे शेयर पर बिकवाली का दबाव बढ़ गया। विश्लेषकों के अनुसार बायबैक से जुड़े शेयरों में अक्सर ऐसा रुझान देखने को मिलता है। रिकॉर्ड डेट तक पात्रता सुनिश्चित करने के लिए निवेशक शेयर खरीदते हैं, जबकि रिकॉर्ड डेट निकलने के बाद कुछ निवेशक अपने निवेश से बाहर निकलने लगते हैं। विप्रो के शेयर में भी इसी प्रकार की तकनीकी कमजोरी देखने को मिली है। हालांकि कंपनी के शेयर पर दबाव का कारण केवल बायबैक नहीं है। वैश्विक आईटी उद्योग इस समय कई चुनौतियों का सामना कर रहा है। अमेरिकी बाजारों में हालिया गिरावट और टेक्नोलॉजी कंपनियों के शेयरों में बिकवाली ने भारतीय आईटी कंपनियों पर भी असर डाला है। चूंकि भारतीय आईटी कंपनियों का बड़ा कारोबार अमेरिका से आता है, इसलिए वहां के आर्थिक संकेतकों और निवेश माहौल का सीधा प्रभाव इन कंपनियों के प्रदर्शन पर पड़ता है। बाजार में चिंता का एक बड़ा कारण अमेरिकी ब्याज दरों को लेकर बनी अनिश्चितता भी है। मजबूत आर्थिक आंकड़ों के बाद निवेशकों को आशंका है कि अमेरिकी केंद्रीय बैंक सख्त मौद्रिक नीति बनाए रख सकता है। इसका असर वैश्विक निवेश प्रवाह और तकनीकी कंपनियों के मूल्यांकन पर पड़ रहा है। इसी बीच आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का बढ़ता प्रभाव भी आईटी उद्योग के लिए नई चुनौती और अवसर दोनों बनकर उभरा है। दुनिया भर की कंपनियां अब पारंपरिक आईटी सेवाओं के साथ-साथ एआई आधारित समाधानों पर तेजी से निवेश कर रही हैं। ऐसे में निवेशकों की अपेक्षा है कि बड़ी आईटी कंपनियां बदलते तकनीकी परिदृश्य के अनुरूप अपने कारोबार मॉडल को तेजी से विकसित करें। उद्योग विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले वर्षों में केवल पारंपरिक आउटसोर्सिंग सेवाओं पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं होगा। कंपनियों को नई तकनीकों, ऑटोमेशन और एआई आधारित सेवाओं के जरिए राजस्व वृद्धि के नए स्रोत तैयार करने होंगे। इसी वजह से निवेशक उन कंपनियों पर अधिक भरोसा जता रहे हैं जो तकनीकी बदलावों को तेजी से अपनाने में सक्षम दिखाई दे रही हैं। विप्रो के लिए फिलहाल स्थिति मिश्रित बनी हुई है। एक ओर बायबैक का आकर्षण निवेशकों की रुचि बनाए हुए है, वहीं दूसरी ओर आईटी सेक्टर की सुस्त वृद्धि और वैश्विक अनिश्चितताएं शेयर पर दबाव बना रही हैं। बाजार की नजर अब कंपनी की आगामी रणनीति, बायबैक प्रक्रिया के अगले चरण और एआई आधारित विकास योजनाओं पर टिकी हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि निकट अवधि में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है, लेकिन निवेशकों के लिए कंपनी की दीर्घकालिक रणनीति और तकनीकी बदलावों के प्रति उसकी तैयारी सबसे महत्वपूर्ण कारक साबित होगी। इसी आधार पर भविष्य में शेयर की दिशा तय होने की संभावना है।
रीवा में शराब के लिए पैसे न देने पर बर्बर हमला, जेसीबी संचालक का पैर टूटा, लूटपाट भी

मध्य प्रदेश । मध्य प्रदेश के रीवा जिले में कानून व्यवस्था को चुनौती देने वाली एक गंभीर घटना सामने आई है। मनगवां थाना क्षेत्र के अंतर्गत मनिकवार नंबर-2 इलाके में शराब के लिए पैसे न देने पर कुछ बदमाशों ने दिनदहाड़े हमला, तोड़फोड़ और लूटपाट की वारदात को अंजाम दिया। जानकारी के अनुसार, रविवार रात कुछ युवक इलाके में पहुंचे और वहां मौजूद लोगों से शराब पीने के लिए पैसे मांगने लगे। जब लोगों ने पैसे देने से इनकार किया, तो विवाद अचानक हिंसक हो गया और आरोपियों ने लाठी-डंडों व अन्य हथियारों से हमला कर दिया। इस दौरान बदमाशों ने न सिर्फ लोगों को बेरहमी से पीटा, बल्कि वहां खड़ी जेसीबी मशीन और बोलेरो वाहन को भी निशाना बनाया। दोनों वाहनों के शीशे तोड़ दिए गए और मौके पर जमकर उत्पात मचाया गया। हमले में पवन पटेल, पुनीत पटेल और अंकित पटेल गंभीर रूप से घायल हुए हैं। इनमें से जेसीबी संचालक की हालत ज्यादा गंभीर बताई जा रही है, जिसका पैर टूट गया है। घायलों को स्थानीय लोगों की मदद से तुरंत अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उनका इलाज जारी है। पीड़ित पक्ष ने आरोप लगाया है कि हमलावर करीब 70 से 80 हजार रुपये नकद और दो मोबाइल फोन भी लूटकर फरार हो गए। उनका कहना है कि यह हमला पहले पैसों की मांग से शुरू हुआ और बाद में लूटपाट व मारपीट में बदल गया। घटना की सूचना मिलते ही मनगवां थाना पुलिस मौके पर पहुंची और स्थिति का जायजा लिया। पुलिस ने घायलों के बयान दर्ज कर मामला दर्ज कर लिया है और आरोपियों की तलाश शुरू कर दी है। स्थानीय लोगों में इस घटना को लेकर आक्रोश है। उनका कहना है कि इलाके में असामाजिक तत्वों की गतिविधियां बढ़ती जा रही हैं, जिससे आम लोगों में भय का माहौल है। लोगों ने पुलिस प्रशासन से सख्त कार्रवाई और सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की मांग की है।
देश की सबसे लंबी वाटर टनल 98% पूरी, विंध्य में नर्मदा जल पहुंचाने का सपना अंतिम चरण में

मध्य प्रदेश । मध्य प्रदेश के लिए एक ऐतिहासिक जल परियोजना अपने अंतिम चरण में पहुंच चुकी है। विंध्य क्षेत्र तक नर्मदा जल पहुंचाने की 17 साल पुरानी महत्वाकांक्षी योजना अब लगभग पूरी होने वाली है। कटनी जिले के स्लीमनाबाद में बन रही 11.95 किलोमीटर लंबी देश की सबसे बड़ी वाटर टनल अब 98 प्रतिशत तक तैयार हो चुकी है, और केवल 108 मीटर की खुदाई बाकी रह गई है। इस परियोजना के पूरा होने के बाद बरगी बांध से पानी पहली बार सीधे रीवा, सतना, मैहर और पन्ना जिलों तक पहुंचेगा, जिससे करीब 1.85 लाख हेक्टेयर कृषि भूमि सिंचित होने की उम्मीद है। इसके साथ ही कटनी जिले को पीने के पानी की बड़ी राहत भी मिलेगी। यह महत्वाकांक्षी परियोजना पिछले 17 वर्षों से कई तकनीकी और प्राकृतिक चुनौतियों से जूझती रही है। कभी खुदाई के दौरान चट्टानी परतें और बड़े बोल्डर सामने आए, तो कभी मशीनों ने काम करना बंद कर दिया। कई बार मीथेन गैस के रिसाव और भूजल के तेज प्रवाह ने काम को रोक दिया। परियोजना के दौरान करोड़ों रुपये के टनल कटर भी बदलने पड़े, और करीब 100 करोड़ रुपये की अमेरिकी मशीन भी इस कठिन भूगर्भीय स्थिति में सफल नहीं हो सकी। कुल मिलाकर यह परियोजना भारत की सबसे जटिल जल सुरंग परियोजनाओं में गिनी जा रही है। फिलहाल अंतिम चरण में एक जर्मन टनल बोरिंग मशीन (TBM) लगातार 100 मीटर से ज्यादा हिस्से की खुदाई कर रही है। यह मशीन सुरंग को अंतिम आकार देने का काम भी कर रही है। अत्यधिक तापमान और नमी के कारण यहां काम करने वाले तकनीशियन केवल सीमित समय तक ही कार्य कर पा रहे हैं, और उनकी लगातार मेडिकल मॉनिटरिंग की जा रही है। सुरंग के भीतर काम की स्थिति बेहद चुनौतीपूर्ण है। अंदर करीब तीन फीट पानी के बीच लोको ट्रेन केवल 3–4 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चल पाती है। हर दिन हजारों लीटर भूजल को निकालने के लिए पांच डीवाटरिंग स्टेशन लगातार काम कर रहे हैं। टनल का व्यास 10.14 मीटर है, जो किसी तीन मंजिला इमारत की ऊंचाई के बराबर है। सुरक्षा के लिए M-50 ग्रेड सीमेंट से बने भारी कंक्रीट रिंग्स का उपयोग किया गया है, जिनका वजन लगभग 1420 किलो है। जल संसाधन विभाग के अधिकारियों के अनुसार यह परियोजना 30 जून 2026 तक पूरी होने की संभावना है। इसके बाद विंध्य क्षेत्र में कृषि उत्पादन और जल उपलब्धता में बड़ा बदलाव आने की उम्मीद जताई जा रही है।
राज्यसभा चुनाव में बीजेपी के फैसले से बदले सियासी समीकरण, 93 वर्षीय एचडी देवेगौड़ा के संसदीय भविष्य पर गहराए सवाल

नई दिल्ली । कर्नाटक से होने वाले राज्यसभा चुनावों ने देश की राजनीति में एक महत्वपूर्ण चर्चा को जन्म दे दिया है। भारतीय जनता पार्टी द्वारा राज्यसभा के लिए अपने उम्मीदवार की घोषणा के बाद पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवेगौड़ा के संसदीय भविष्य को लेकर अटकलें तेज हो गई हैं। 93 वर्षीय देवेगौड़ा वर्तमान में संसद के सबसे वरिष्ठ सदस्य हैं और उनका कार्यकाल इसी महीने समाप्त होने जा रहा है। भाजपा ने कर्नाटक से राज्यसभा चुनाव के लिए प्रो. डॉ. एम. नागराजा को अपना उम्मीदवार बनाया है। इस निर्णय के बाद यह लगभग स्पष्ट माना जा रहा है कि जनता दल (सेकुलर) के संरक्षक और पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवेगौड़ा को इस बार पुनः राज्यसभा भेजे जाने की संभावना बेहद सीमित रह गई है। राजनीतिक गलियारों में लंबे समय से यह चर्चा चल रही थी कि राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के भीतर सहयोगी दल होने के नाते जेडीएस को एक सीट मिल सकती है, लेकिन भाजपा के ताजा कदम ने इन संभावनाओं को काफी हद तक समाप्त कर दिया है। कर्नाटक की मौजूदा राजनीतिक स्थिति भी इस समीकरण को प्रभावित कर रही है। राज्य विधानसभा में कांग्रेस के पास स्पष्ट बहुमत है, जिसके कारण राज्यसभा की चार सीटों में से तीन सीटों पर उसकी जीत लगभग सुनिश्चित मानी जा रही है। विपक्षी दलों के लिए केवल एक सीट पर सफलता की संभावना दिखाई दे रही है। ऐसे में भाजपा ने अपने संगठनात्मक और राजनीतिक हितों को ध्यान में रखते हुए अपना उम्मीदवार मैदान में उतारने का फैसला किया है। एचडी देवेगौड़ा भारतीय राजनीति के उन चुनिंदा नेताओं में शामिल हैं जिन्होंने कई दशकों तक सक्रिय भूमिका निभाई है। वह देश के प्रधानमंत्री भी रह चुके हैं और कर्नाटक की राजनीति में उनका प्रभाव लंबे समय तक बना रहा। संसद और लोकतांत्रिक संस्थाओं के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को लेकर अक्सर राजनीतिक दलों के बीच सम्मानजनक सहमति दिखाई देती रही है। हालांकि बदलते राजनीतिक समीकरण और संख्या बल की वास्तविकताएं इस बार उनके पक्ष में नहीं दिखाई दे रही हैं। राज्यसभा चुनावों के साथ-साथ विभिन्न राज्यों में विधान परिषद और अन्य राजनीतिक नियुक्तियों को लेकर भी दलों के बीच रणनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। कांग्रेस ने कर्नाटक से अपने वरिष्ठ नेताओं को उम्मीदवार बनाया है, जिससे यह संकेत मिलता है कि पार्टी राज्यसभा में अपनी ताकत और बढ़ाने के लिए पूरी तैयारी के साथ मैदान में उतरी है। विधानसभा में मौजूद संख्यात्मक बढ़त उसके लिए सबसे बड़ा राजनीतिक आधार बन रही है। उधर मध्य प्रदेश में भी राज्यसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मियां बढ़ी हुई हैं। भाजपा और कांग्रेस दोनों ने अपने-अपने उम्मीदवारों की घोषणा कर दी है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कुछ सीटों पर क्रॉस वोटिंग और दलगत रणनीतियां चुनावी परिणामों को रोचक बना सकती हैं। हालांकि कुल संख्या बल को देखते हुए प्रमुख दलों की स्थिति काफी हद तक स्पष्ट मानी जा रही है। कर्नाटक के राज्यसभा चुनाव का महत्व इसलिए भी बढ़ गया है क्योंकि यह केवल सीटों की लड़ाई नहीं बल्कि गठबंधन राजनीति और भविष्य की रणनीतियों का भी संकेत माना जा रहा है। एचडी देवेगौड़ा का संसदीय कार्यकाल समाप्त होने की संभावना के साथ भारतीय राजनीति का एक लंबा अध्याय नए मोड़ पर पहुंचता दिखाई दे रहा है। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि अनुभवी नेता राष्ट्रीय राजनीति में किस भूमिका में सक्रिय बने रहते हैं, लेकिन फिलहाल राज्यसभा में उनके अगले कार्यकाल की राह बेहद कठिन नजर आ रही है।
राहुल गांधी, ममता बनर्जी और अखिलेश यादव समेत 23 दलों के नेता एक मंच पर, इंडिया ब्लॉक की बैठक में कई मुद्दों पर चर्चा

नई दिल्ली । राष्ट्रीय राजनीति में विपक्षी एकजुटता को मजबूत करने के उद्देश्य से इंडिया ब्लॉक की महत्वपूर्ण बैठक सोमवार को राजधानी दिल्ली में शुरू हुई। कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में आयोजित इस बैठक में देश के विभिन्न हिस्सों से आए 23 राजनीतिक दलों के नेताओं ने भाग लिया। आगामी राजनीतिक चुनौतियों, संसद और राष्ट्रीय मुद्दों पर साझा रणनीति तैयार करने के उद्देश्य से बुलाई गई यह बैठक विपक्षी गठबंधन के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है। बैठक में कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं के साथ कई प्रमुख विपक्षी दलों के शीर्ष नेता मौजूद रहे। कांग्रेस नेता राहुल गांधी और सोनिया गांधी ने बैठक में भाग लिया, जबकि तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी, समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव और राष्ट्रीय जनता दल के नेता तेजस्वी यादव भी चर्चा का हिस्सा बने। इसके अलावा कई अन्य सहयोगी दलों के प्रतिनिधि भी बैठक में शामिल हुए। विपक्षी नेताओं की इस बैठक का मुख्य उद्देश्य विभिन्न राष्ट्रीय और राजनीतिक मुद्दों पर साझा दृष्टिकोण विकसित करना बताया जा रहा है। गठबंधन के घटक दल केंद्र सरकार की नीतियों, संसद के भीतर और बाहर विपक्ष की भूमिका तथा आगामी राजनीतिक कार्यक्रमों को लेकर विचार-विमर्श कर रहे हैं। माना जा रहा है कि बैठक में विपक्षी दलों के बीच बेहतर समन्वय और संयुक्त अभियान को लेकर भी चर्चा हो सकती है। बैठक में राज्यसभा सदस्य कपिल सिब्बल और तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता डेरेक ओ’ब्रायन भी मौजूद रहे। वहीं शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के प्रमुख उद्धव ठाकरे ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से बैठक में हिस्सा लिया। नेताओं की मौजूदगी को विपक्षी गठबंधन की सक्रियता और राजनीतिक एकजुटता के संकेत के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि बैठक में कुछ प्रमुख दलों की अनुपस्थिति भी चर्चा का विषय बनी रही। तमिलनाडु की सत्तारूढ़ पार्टी डीएमके के प्रमुख एमके स्टालिन इस बैठक में शामिल नहीं हुए। इसी तरह आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल भी बैठक से दूर रहे। दोनों दलों की ओर से पहले ही अपनी अनुपस्थिति के कारण स्पष्ट किए जा चुके थे। इसके अलावा अभिनेता और राजनेता थलपति विजय की पार्टी भी इस बैठक का हिस्सा नहीं बनी। राजनीतिक गलियारों में इस बात की चर्चा रही कि पार्टी को बैठक के लिए आमंत्रित नहीं किया गया था। हालांकि बैठक का केंद्रबिंदु उन दलों के बीच समन्वय को मजबूत करना रहा जो पहले से इंडिया ब्लॉक का हिस्सा हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि वर्तमान राजनीतिक परिस्थितियों में विपक्षी दलों के लिए साझा रणनीति और बेहतर तालमेल बेहद महत्वपूर्ण है। विभिन्न राज्यों में अलग-अलग राजनीतिक समीकरण होने के बावजूद राष्ट्रीय स्तर पर एकजुटता बनाए रखना इंडिया ब्लॉक के लिए बड़ी चुनौती और अवसर दोनों माना जा रहा है। बैठक के दौरान नेताओं के बीच संगठनात्मक मजबूती, जनसरोकारों से जुड़े मुद्दों और लोकतांत्रिक संस्थाओं से संबंधित विषयों पर भी चर्चा होने की संभावना है। विपक्षी दलों का प्रयास है कि राष्ट्रीय स्तर पर एक प्रभावी और समन्वित राजनीतिक संदेश तैयार किया जाए, जिससे गठबंधन की एकजुटता और मजबूत दिखाई दे। इंडिया ब्लॉक की यह बैठक ऐसे समय में हो रही है जब देश की राजनीति में विभिन्न मुद्दों को लेकर बहस तेज है। ऐसे में इस बैठक से निकलने वाले निर्णय और संदेश आने वाले समय में विपक्ष की राजनीतिक दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
ईरान-इजरायल तनाव पर पूर्व सुरक्षा अधिकारी का बड़ा दावा, कहा- युद्ध बढ़ा तो दुनिया दो धड़ों में बंट सकती है

नई दिल्ली । पश्चिम एशिया में ईरान और इजरायल के बीच बढ़ते सैन्य तनाव ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चिंताओं को एक बार फिर बढ़ा दिया है। दोनों देशों के बीच हाल के हमलों और जवाबी कार्रवाइयों के बाद क्षेत्र की सुरक्षा स्थिति को लेकर गंभीर चर्चाएं शुरू हो गई हैं। इसी बीच पूर्व सुरक्षा अधिकारी और पूर्व एनएसजी कमांडो लकी बिष्ट के कुछ बयानों ने भू-राजनीतिक हलकों में नई बहस छेड़ दी है। लकी बिष्ट ने दावा किया है कि वर्तमान संघर्ष भविष्य में और अधिक व्यापक रूप ले सकता है। उनके अनुसार यदि क्षेत्रीय तनाव लगातार बढ़ता रहा तो इसमें अन्य वैश्विक शक्तियों की प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष भागीदारी भी देखने को मिल सकती है। उन्होंने यह आशंका भी व्यक्त की कि दुनिया की प्रमुख शक्तियां अलग-अलग पक्षों में खड़ी हो सकती हैं, जिससे अंतरराष्ट्रीय तनाव और बढ़ सकता है। हालांकि अंतरराष्ट्रीय मामलों के विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार के दावे फिलहाल विश्लेषण और व्यक्तिगत आकलन की श्रेणी में आते हैं। किसी संभावित युद्ध, सैन्य गठबंधन की भागीदारी या भविष्य की सैन्य कार्रवाई को लेकर अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए ऐसे दावों को स्थापित तथ्य के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। पश्चिम एशिया में हालिया घटनाक्रमों ने निश्चित रूप से वैश्विक चिंता बढ़ाई है। ईरान और इजरायल के बीच मिसाइल हमलों और जवाबी कार्रवाई के बाद कई देशों ने अपने नागरिकों के लिए यात्रा संबंधी एडवाइजरी जारी की हैं। ऊर्जा आपूर्ति, समुद्री व्यापार मार्गों और क्षेत्रीय स्थिरता पर भी इन घटनाओं का प्रभाव पड़ने की आशंका जताई जा रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि वर्तमान स्थिति का सबसे बड़ा असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव, शेयर बाजारों में अस्थिरता और निवेशकों की बढ़ती चिंता पहले से दिखाई देने लगी है। यदि संघर्ष लंबा खिंचता है तो इसका असर दुनिया के कई देशों की आर्थिक गतिविधियों पर पड़ सकता है। चीन और ताइवान को लेकर भी समय-समय पर विभिन्न अंतरराष्ट्रीय विश्लेषकों द्वारा संभावित तनाव की आशंकाएं व्यक्त की जाती रही हैं। हालांकि मौजूदा समय में किसी बड़े सैन्य संघर्ष की आधिकारिक घोषणा या पुष्टि नहीं हुई है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय लगातार संवाद और कूटनीतिक प्रयासों के माध्यम से क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखने की कोशिश कर रहा है। इस बीच कई वैश्विक नेता संयम बरतने और बातचीत के रास्ते को प्राथमिकता देने की अपील कर रहे हैं। विभिन्न देशों की सरकारें स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं और संभावित जोखिमों का आकलन कर रही हैं। अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने भी तनाव कम करने और संघर्ष को व्यापक रूप लेने से रोकने पर जोर दिया है। भू-राजनीतिक मामलों के जानकारों का मानना है कि वर्तमान समय में सबसे महत्वपूर्ण आवश्यकता तथ्यों और आधिकारिक सूचनाओं पर आधारित विश्लेषण की है। युद्ध और वैश्विक संघर्षों को लेकर सामने आने वाले दावों और अनुमानों के बीच सत्यापित जानकारी को प्राथमिकता देना जरूरी है, ताकि अनावश्यक भ्रम और आशंकाओं से बचा जा सके। पश्चिम एशिया की स्थिति फिलहाल अंतरराष्ट्रीय राजनीति का सबसे महत्वपूर्ण विषय बनी हुई है। आने वाले दिनों में क्षेत्रीय घटनाक्रम, कूटनीतिक प्रयास और वैश्विक शक्तियों की प्रतिक्रियाएं यह तय करेंगी कि हालात किस दिशा में आगे बढ़ते हैं। फिलहाल दुनिया की नजरें इसी क्षेत्र पर टिकी हुई हैं।
जबलपुर में बड़ा खुलासा: नाम बदलकर ठगी, रेप और ब्लैकमेलिंग करने वाला शातिर आरोपी बेंगलुरु से गिरफ्तार

मध्य प्रदेश । मध्य प्रदेश के जबलपुर में पुलिस ने एक बेहद शातिर और धोखाधड़ी के तरीके से अपराध करने वाले आरोपी को गिरफ्तार किया है, जो देश के कई राज्यों में युवतियों को अपना शिकार बना चुका था। आरोपी को बेंगलुरु से पकड़ा गया और अब उसे ट्रांजिट रिमांड पर जबलपुर लाकर पूछताछ की जा रही है। पुलिस के अनुसार, आरोपी कभी “आदित्य”, कभी “दिव्यांशु” तो कभी “पंकज” बनकर सोशल मीडिया और मैट्रिमोनियल साइट्स के जरिए युवतियों से संपर्क करता था। वह खुद को बिजनेसमैन बताकर शादी का झांसा देता, भरोसा जीतता और फिर निजी मुलाकात के बहाने होटल में बुलाकर शारीरिक संबंध बनाता था। इसके बाद वह युवतियों के निजी फोटो और वीडियो बनाकर उन्हें ब्लैकमेल करता और पैसों की मांग करता था। जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपी के पहचान दस्तावेजों—आधार कार्ड, पैन कार्ड और ड्राइविंग लाइसेंस—में अलग-अलग नाम दर्ज थे, जिससे उसकी असली पहचान को लेकर भ्रम बना हुआ था। पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपी बिहार का रहने वाला है, हालांकि वह खुद को अलग-अलग नामों से पेश करता था और फिलहाल उसका असली नाम ओमप्रकाश बताया जा रहा है। पुलिस को शक है कि उसने मध्य प्रदेश सहित कई राज्यों में इसी तरह की वारदातों को अंजाम दिया है। मामले की शुरुआत तब हुई जब 20 मार्च 2026 को महिला थाना जबलपुर में एक युवती ने शिकायत दर्ज कराई। पीड़िता के अनुसार, उसकी पहचान शादी डॉट कॉम पर एक युवक से हुई थी, जिसने खुद को “आदित्य सिंह” और बिजनेसमैन बताया था। शिकायत में कहा गया कि आरोपी ने 14 मार्च को जबलपुर आकर एक होटल में मिलने के बहाने उसे बुलाया और शादी का झांसा देकर दुष्कर्म किया। इसके बाद उसने निजी फोटो और वीडियो के जरिए ब्लैकमेल करना शुरू कर दिया। पीड़िता का आरोप है कि आरोपी लगातार अलग-अलग नामों से संपर्क करता रहा और धमकी देकर पैसे मांगता रहा। बाद में जब पीड़िता ने परिवार को जानकारी दी, तो मामला पुलिस तक पहुंचा। जांच के दौरान तकनीकी साक्ष्यों और लोकेशन ट्रैकिंग के आधार पर पुलिस आरोपी तक पहुंची। बाद में पता चला कि वह बेंगलुरु में रह रहा है, जहां से उसे गिरफ्तार किया गया। पुलिस के अनुसार, यह भी सामने आया है कि आरोपी पहले भी 2022 के एक मामले में इसी तरह की वारदात कर चुका है, जिसमें वह फर्जी पहचान का इस्तेमाल करता था। इस पूरे मामले ने साइबर अपराध और ऑनलाइन रिश्तों के जरिए होने वाली ठगी को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पुलिस अब आरोपी से पूछताछ कर उसके नेटवर्क और अन्य पीड़ितों की जानकारी जुटा रही है।