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जबलपुर के इंद्रा मार्केट में 2 सांडों की भिड़ंत से मचा हड़कंप, आधे घंटे ठप रहा ट्रैफिक

मध्य प्रदेश । मध्य प्रदेश के जबलपुर में रविवार शाम उस समय हड़कंप मच गया जब इंद्रा मार्केट क्षेत्र में दो आवारा सांड आपस में भिड़ गए। यह घटना सिविल लाइन और एसपी ऑफिस के बीच सड़क पर हुई, जहां दोनों सांडों के बीच सींग से सींग भिड़ाकर करीब आधे घंटे तक जोरदार संघर्ष चलता रहा। इस दौरान सड़क पर यातायात पूरी तरह से ठप हो गया और वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। लोग अपनी जान जोखिम में डालकर किसी तरह वहां से निकलते नजर आए। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, सांडों की लड़ाई इतनी उग्र थी कि आसपास खड़े वाहन और राहगीर भी असहज हो गए। इसी दौरान एक स्कूटी सवार हल्की टक्कर की चपेट में आ गया और उसकी गाड़ी सड़क पर गिर गई, हालांकि वह बाल-बाल बच गया। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए स्थानीय लोगों ने पानी डालकर और लाठी की मदद से दोनों सांडों को अलग करने की कोशिश की, लेकिन काफी देर तक वे नहीं माने। करीब आधे घंटे बाद थककर दोनों सांड अलग-अलग दिशा में चले गए, तब जाकर यातायात सामान्य हो सका। इस घटना ने एक बार फिर शहर में आवारा मवेशियों की समस्या को उजागर कर दिया है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि नगर निगम जबलपुर की लापरवाही के कारण ऐसे हालात बार-बार बन रहे हैं। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि क्षेत्र में आवारा मवेशियों की समस्या लंबे समय से बनी हुई है, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो रही। गोहलपुर, रसल चौक, इंद्रा मार्केट और गोकलपुर रोड जैसे इलाकों में रात के समय स्थिति और भी गंभीर हो जाती है, जिससे दुर्घटनाओं का खतरा लगातार बना रहता है। लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि शहर में आवारा पशुओं को नियंत्रित करने के लिए सख्त और स्थायी व्यवस्था की जाए, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं से आम जनता को परेशानी न झेलनी पड़े।

क्षेत्रीय तनाव के बीच भारतीय दूतावास का बड़ा निर्देश, ईरान में रह रहे नागरिकों से तत्काल सुरक्षित वापसी का आग्रह

नई दिल्ली । पश्चिम एशिया में लगातार बिगड़ते सुरक्षा हालात और क्षेत्रीय तनाव के बीच भारत सरकार ने ईरान में रह रहे भारतीय नागरिकों के लिए एक नई एडवाइजरी जारी की है। भारतीय दूतावास ने नागरिकों से सतर्क रहने का आग्रह करते हुए स्पष्ट रूप से कहा है कि जो भारतीय अभी ईरान में मौजूद हैं, वे उपलब्ध परिवहन साधनों का उपयोग कर जल्द से जल्द वहां से निकलने की व्यवस्था करें। साथ ही भारत से ईरान की यात्रा करने की योजना बना रहे लोगों को फिलहाल अपनी यात्रा स्थगित करने की सलाह भी दी गई है। यह एडवाइजरी ऐसे समय में जारी की गई है जब पश्चिम एशिया के कई हिस्सों में सुरक्षा स्थिति को लेकर चिंताएं लगातार बढ़ रही हैं। क्षेत्र में जारी घटनाक्रमों ने कई देशों को अपने नागरिकों के लिए यात्रा संबंधी चेतावनियां जारी करने के लिए मजबूर किया है। भारत ने भी अपने नागरिकों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए एहतियाती कदम उठाया है। भारतीय दूतावास ने अपने आधिकारिक संदेश में कहा है कि हालिया परिस्थितियों को देखते हुए पहले जारी की गई सलाह को दोहराया जा रहा है। दूतावास ने भारतीय नागरिकों से अपील की है कि वे अनावश्यक यात्रा से बचें और स्थिति सामान्य होने तक ईरान जाने की योजना न बनाएं। इसके अलावा वहां पहले से मौजूद लोगों को स्थानीय परिस्थितियों पर लगातार नजर रखने और आधिकारिक निर्देशों का पालन करने के लिए कहा गया है। विदेश मंत्रालय और भारतीय मिशन क्षेत्र की स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं। अधिकारियों का कहना है कि नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं। दूतावास भारतीय समुदाय के साथ संपर्क में है और जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त सहायता उपलब्ध कराने की तैयारी भी रखी जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी अंतरराष्ट्रीय संकट की स्थिति में समय रहते जारी की गई यात्रा सलाह नागरिकों की सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। ऐसे मामलों में सरकारें संभावित जोखिमों का आकलन कर अपने नागरिकों को सतर्क रहने की सलाह देती हैं ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति से बचा जा सके। ईरान में भारतीय समुदाय का एक हिस्सा व्यापार, शिक्षा, चिकित्सा और अन्य पेशेवर गतिविधियों से जुड़ा हुआ है। ऐसे में एडवाइजरी का उद्देश्य वहां रह रहे लोगों को सुरक्षा संबंधी जोखिमों के प्रति जागरूक करना और आवश्यक सावधानियां अपनाने के लिए प्रेरित करना है। अधिकारियों ने नागरिकों को सलाह दी है कि वे अपने यात्रा दस्तावेज तैयार रखें और स्थानीय प्रशासन तथा भारतीय दूतावास द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करें। पश्चिम एशिया में जारी तनाव का असर केवल सुरक्षा मामलों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका प्रभाव वैश्विक अर्थव्यवस्था, ऊर्जा बाजार और अंतरराष्ट्रीय परिवहन सेवाओं पर भी पड़ रहा है। यही कारण है कि कई देश अपने नागरिकों को सतर्क रहने और प्रभावित क्षेत्रों की यात्रा से बचने की सलाह दे रहे हैं। भारत सरकार की यह नई एडवाइजरी दर्शाती है कि क्षेत्रीय परिस्थितियों को गंभीरता से लिया जा रहा है और नागरिकों की सुरक्षा को सर्वोच्च महत्व दिया जा रहा है। आने वाले दिनों में हालात किस दिशा में जाते हैं, इस पर नजर बनी रहेगी, लेकिन फिलहाल भारतीय नागरिकों को सतर्कता बरतने और आधिकारिक सलाह का पालन करने की आवश्यकता बताई गई है।

जबलपुर में भीषण सड़क हादसा: हाईवा ने स्कूटी सवार को कुचला, आग लगी, मौके पर दर्दनाक मौत

मध्य प्रदेश । मध्य प्रदेश के जबलपुर में रविवार देर रात एक दर्दनाक सड़क हादसे ने हर किसी को झकझोर दिया। माढ़ोताल थाना क्षेत्र के खजरी खिरिया बाईपास पर तेज रफ्तार हाईवा ने स्कूटी सवार युवक को कुचल दिया, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई। जानकारी के अनुसार, रात करीब 2 बजे स्कूटी सवार युवक बायपास से जबलपुर की ओर जा रहा था। इसी दौरान पीछे से आ रहे तेज रफ्तार हाईवा ने उसे जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर इतनी भीषण थी कि स्कूटी वाहन हाईवा के नीचे फंस गई और करीब 50 मीटर तक घिसटती चली गई। घर्षण और टकराव के कारण स्कूटी और हाईवा के निचले हिस्से में आग लग गई। आग ने कुछ ही देर में विकराल रूप ले लिया, जिसे बुझाने के लिए फायर ब्रिगेड को मौके पर बुलाना पड़ा। दमकलकर्मियों ने कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया। हादसा इतना भयावह था कि सड़क पर मानव शरीर के अवशेष बिखर गए, जिससे मौके पर मौजूद लोगों में दहशत फैल गई। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, मंजर बेहद दर्दनाक और भयावह था। घटना के बाद आसपास मौजूद ट्रक चालकों ने तुरंत पुलिस को सूचना दी और नीचे फंसे वाहन को निकालने का प्रयास किया। सूचना मिलते ही माढ़ोताल थाना पुलिस और हनुमानताल थाना पुलिस की टीम मौके पर पहुंची और हालात का जायजा लिया। थाना प्रभारी अपूर्वा चौरसिया ने बताया कि हाईवा को जब्त कर लिया गया है, जबकि चालक मौके से फरार हो गया। उसकी तलाश के लिए पुलिस टीम लगाई गई है। मामले की जांच जारी है। इस हादसे ने एक बार फिर तेज रफ्तार और भारी वाहनों की लापरवाही पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों ने क्षेत्र में बायपास पर ट्रैफिक नियंत्रण और सुरक्षा उपायों को मजबूत करने की मांग की है।

इंदौर में कल से शुरू होगा BRICS देशों का सम्मेलन, 20 देशों के प्रतिनिधि होंगे शामिल

नई दिल्ली। मध्य प्रदेश का इंदौर शहर एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय आयोजन का केंद्र बनने जा रहा है। कल यानी 9 जून से यहां ब्रिक्स (BRICS) देशों के कृषि मंत्रियों का अहम सम्मेलन शुरू होगा, जिसमें भारत सहित लगभग 20 देशों के प्रतिनिधि हिस्सा लेंगे। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि भारत इस वर्ष ब्रिक्स की अध्यक्षता कर रहा है और इसी क्रम में यह महत्वपूर्ण बैठक इंदौर में आयोजित की जा रही है। उन्होंने कहा कि ब्रिक्स की शुरुआत 2006 में हुई थी और आज यह समूह 11 सदस्य देशों व 10 साझेदार देशों के साथ वैश्विक स्तर पर बेहद प्रभावशाली बन चुका है। शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि दुनिया की लगभग 42 प्रतिशत कृषि भूमि, 68 प्रतिशत कृषि जोतें और करीब 42 प्रतिशत खाद्य उत्पादन ब्रिक्स देशों से जुड़ा है, जिससे यह मंच वैश्विक खाद्य सुरक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाता है। भारत इससे पहले 2012, 2016 और 2021 में भी ब्रिक्स की अध्यक्षता कर चुका है। 2016 में भारत ने ब्रिक्स कृषि अनुसंधान मंच जैसी बड़ी पहल शुरू की थी, जिसका उद्देश्य कृषि क्षेत्र में सहयोग और नवाचार को बढ़ावा देना था। इस बार इंदौर सम्मेलन को विशेष रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि पहली बार ब्रिक्स कृषि मंत्रियों की बैठक मंत्री स्तर पर आयोजित की जा रही है। इसमें सदस्य और साझेदार देशों सहित करीब 20 देशों के प्रतिनिधि शामिल होंगे। सम्मेलन में मुख्य रूप से चार प्रमुख विषयों पर फोकस किया जाएगा-खाद्य सुरक्षा एवं पोषण, कृषि व्यापार और सहयोग, जलवायु अनुकूलन एवं सतत कृषि, तथा कृषि और खाद्य प्रणालियों में नवाचार व साझेदारी। मंत्री ने कहा कि सरकार की नीति का केंद्र हमेशा छोटे और सीमांत किसान रहे हैं। उनके अनुसार, किसानों की आय बढ़ाना, कृषि ऋण तक आसान पहुंच सुनिश्चित करना और कृषि अनुसंधान का लाभ सीधे किसानों तक पहुंचाना प्राथमिक लक्ष्य है। कार्यक्रम के दौरान 9 से 11 जून तक कृषि कार्य समूह की बैठकें होंगी, जबकि 12 से 13 जून को कृषि मंत्रियों की मुख्य बैठक आयोजित की जाएगी। इसी दौरान “लघु किसानों, महिलाओं एवं युवाओं के माध्यम से भविष्य की खाद्य सुरक्षा” विषय पर विशेष चर्चा भी होगी। पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए इस सम्मेलन में “ब्रिक्स वाटिका” का निर्माण और सामूहिक वृक्षारोपण भी किया जाएगा। साथ ही विदेशी प्रतिनिधियों को इंदौर के प्रसिद्ध स्थलों जैसे राजवाड़ा, छप्पन दुकान और मांडू का भ्रमण भी कराया जाएगा, ताकि वे भारत की सांस्कृतिक विरासत से परिचित हो सकें। सरकार का मानना है कि इंदौर में होने वाला यह सम्मेलन वैश्विक कृषि सहयोग को नई दिशा देगा और छोटे किसानों के हितों को अंतरराष्ट्रीय मंच पर मजबूती से स्थापित करेगा।

कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और वैश्विक बिकवाली से शेयर बाजार दबाव में, खुलते ही सेंसेक्स-निफ्टी लुढ़के

नई दिल्ली । सप्ताह के पहले कारोबारी दिन भारतीय शेयर बाजार में कमजोर शुरुआत देखने को मिली। वैश्विक स्तर पर बढ़ती अनिश्चितताओं, वेस्ट एशिया में गहराते तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल के बीच निवेशकों की धारणा प्रभावित हुई, जिसका असर घरेलू बाजारों पर भी साफ दिखाई दिया। सोमवार सुबह कारोबार शुरू होते ही प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स और निफ्टी दबाव में आ गए और शुरुआती सत्र में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई। बाजार विशेषज्ञों के अनुसार अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों ने निवेशकों की जोखिम लेने की क्षमता को प्रभावित किया है। वेस्ट एशिया में जारी तनाव ने ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं, जिसके चलते वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में तेजी देखी जा रही है। भारत जैसे आयात-निर्भर देशों के लिए तेल कीमतों में वृद्धि आर्थिक दृष्टि से महत्वपूर्ण मानी जाती है, क्योंकि इसका असर महंगाई, व्यापार घाटे और कॉर्पोरेट लागत पर पड़ सकता है। कारोबार की शुरुआत में बीएसई सेंसेक्स में तेज गिरावट दर्ज की गई और यह सैकड़ों अंकों की कमजोरी के साथ नीचे फिसल गया। इसी तरह एनएसई निफ्टी भी शुरुआती सत्र में दबाव में दिखाई दिया। बाजार में व्यापक बिकवाली के चलते निवेशकों ने सतर्क रुख अपनाया और कई प्रमुख कंपनियों के शेयर लाल निशान में कारोबार करते नजर आए। सेंसेक्स की प्रमुख कंपनियों में ऑटोमोबाइल, आईटी, एविएशन और वित्तीय क्षेत्र से जुड़ी कई बड़ी कंपनियों के शेयरों पर दबाव देखने को मिला। निवेशकों की बिकवाली के कारण इन क्षेत्रों में कमजोरी दर्ज की गई। दूसरी ओर कुछ चुनिंदा बैंकिंग और फार्मा शेयरों ने बाजार को सीमित समर्थन देने का प्रयास किया, लेकिन व्यापक गिरावट के सामने यह समर्थन पर्याप्त नहीं रहा। भारतीय बाजार पर वैश्विक संकेतों का प्रभाव भी स्पष्ट रूप से दिखाई दिया। एशिया के प्रमुख शेयर बाजारों में भी कमजोरी का माहौल बना रहा। जापान, दक्षिण कोरिया, चीन और हांगकांग के बाजार गिरावट के साथ कारोबार करते नजर आए। इससे यह संकेत मिला कि निवेशक फिलहाल जोखिम वाली परिसंपत्तियों से दूरी बनाकर सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर रुख कर रहे हैं। अमेरिकी बाजारों में पिछले कारोबारी सत्र के दौरान आई कमजोरी का असर भी भारतीय बाजार पर पड़ा। वैश्विक निवेशक भू-राजनीतिक घटनाक्रम और ऊर्जा कीमतों में बढ़ोतरी को लेकर चिंतित दिखाई दे रहे हैं। यही कारण है कि दुनिया भर के बाजारों में अस्थिरता का माहौल बना हुआ है। विदेशी संस्थागत निवेशकों की गतिविधियां भी बाजार की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। हाल के कारोबारी सत्रों में विदेशी निवेशकों की ओर से लगातार बिकवाली देखी गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच विदेशी पूंजी का सुरक्षित बाजारों की ओर जाना उभरते बाजारों पर दबाव बढ़ा सकता है। आर्थिक जानकारों का कहना है कि आने वाले दिनों में बाजार की चाल काफी हद तक वेस्ट एशिया की स्थिति, कच्चे तेल की कीमतों और विदेशी निवेशकों के रुख पर निर्भर करेगी। यदि वैश्विक तनाव में कमी आती है तो बाजार में स्थिरता लौट सकती है, लेकिन फिलहाल निवेशकों को सतर्कता बरतने और दीर्घकालिक दृष्टिकोण बनाए रखने की सलाह दी जा रही है। भारतीय शेयर बाजार ने पिछले कुछ समय में मजबूत प्रदर्शन किया है, लेकिन वर्तमान वैश्विक परिस्थितियां निवेशकों के लिए नई चुनौतियां लेकर आई हैं। ऐसे में बाजार प्रतिभागियों की नजर अब अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम और आर्थिक संकेतकों पर टिकी हुई है, जो आगे की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

सहेली के साथ रहने की जिद पर युवती से मारपीट, इंदौर में घर में घुसकर हमले का आरोप

इंदौर । इंदौर के द्वारकापुरी क्षेत्र में दो युवतियों की दोस्ती और साथ रहने की इच्छा ने गंभीर विवाद का रूप ले लिया है। एक युवती ने आरोप लगाया है कि उसकी सहेली के परिजनों ने उसके घर में घुसकर मारपीट की और उसे गंभीर रूप से घायल किया। पुलिस के अनुसार, पीड़िता स्वाति की शिकायत पर नितेश, उमेश, कृष्णा और नेहा के खिलाफ घर में घुसकर मारपीट सहित अन्य धाराओं में मामला दर्ज किया गया है। घटना रविवार देर रात की बताई जा रही है। पीड़िता का कहना है कि उसकी एक युवती से पिछले लगभग पांच वर्षों से गहरी दोस्ती है और दोनों साथ रहने की इच्छा रखती हैं। इसी संबंध को लेकर दोनों के परिवारों के बीच तनाव बढ़ता जा रहा था। मामले में नया मोड़ उस समय आया जब आरोप है कि सहेली के परिजन रविवार और सोमवार की दरमियानी रात करीब 12:30 बजे पीड़िता के घर पहुंचे और वहां जमकर विवाद किया। शिकायत के मुताबिक उमेश नामक आरोपी ने युवती का सिर दीवार से टकराया, जबकि अन्य लोगों ने हाथ-मुक्कों से मारपीट की। इसके बाद कथित तौर पर उसे घर से बाहर सड़क पर भी खींचकर पीटा गया। पीड़िता ने यह भी दावा किया है कि यह पूरी घटना आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों में रिकॉर्ड हुई है, जिससे जांच में मदद मिल सकती है। जानकारी के मुताबिक, यह विवाद नया नहीं है। दोनों युवतियां कुछ समय पहले वैष्णो देवी, मथुरा, जम्मू-कश्मीर और हरिद्वार की यात्रा पर साथ गई थीं, जिसके बाद सहेली के परिवार को उनके संबंध पर आपत्ति होने लगी थी। पीड़िता का आरोप है कि पहले भी उसने और उसकी सहेली ने पुलिस कमिश्नर से मिलकर साथ रहने और सुरक्षा की मांग की थी। शिकायत महिला थाने को भेजी गई थी, लेकिन कथित रूप से उन्हें अलग रहने की सलाह दी गई थी। बाद में सहेली को उसके परिजन अपने साथ ले गए थे, लेकिन वह फिर से स्वाति के पास लौट आई। घटना के बाद दोनों युवतियों ने खुद को असुरक्षित बताते हुए इंदौर पुलिस के डीसीपी जोन-4 कार्यालय में भी सुरक्षा की गुहार लगाई है। उनका कहना है कि उन्हें अपने-अपने परिवारों से जान का खतरा है। फिलहाल पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है और सीसीटीवी फुटेज व अन्य साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जा रही है।

इंडी गठबंधन की अहम बैठक से दूर रही सीएम विजय की TVK, तमिलनाडु और राष्ट्रीय राजनीति के बीच संतुलन साधने की रणनीति पर चर्चा तेज

नई दिल्ली । राष्ट्रीय राजनीति में विपक्षी एकजुटता को मजबूत करने के उद्देश्य से आयोजित इंडिया ब्लॉक की बैठक के बीच तमिलनाडु की सत्तारूढ़ पार्टी तमिलगा वेत्त्री कझगम की अनुपस्थिति ने राजनीतिक हलकों में नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है। मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय के नेतृत्व वाली पार्टी के बैठक में शामिल न होने को लेकर विभिन्न तरह के राजनीतिक संकेत और संभावित रणनीतियों पर चर्चा तेज हो गई है। तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के बाद कांग्रेस और कुछ अन्य विपक्षी दलों के समर्थन से सरकार बनाने वाली टीवीके फिलहाल राज्य की सत्ता में है। इसके बावजूद पार्टी ने दिल्ली में आयोजित विपक्षी गठबंधन की बैठक से दूरी बनाए रखी। इस फैसले को केवल एक औपचारिक अनुपस्थिति के रूप में नहीं देखा जा रहा, बल्कि इसके पीछे व्यापक राजनीतिक रणनीति होने की संभावना जताई जा रही है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि टीवीके की अनुपस्थिति का एक प्रमुख कारण उसका राष्ट्रीय संसद में प्रतिनिधित्व न होना हो सकता है। वर्तमान में पार्टी के पास लोकसभा या राज्यसभा में कोई सदस्य नहीं है। ऐसे में केंद्र सरकार के खिलाफ संसदीय रणनीति और संसद से जुड़े मुद्दों पर केंद्रित बैठक में उसकी भूमिका सीमित मानी जा सकती है। यही कारण है कि पार्टी ने फिलहाल दूरी बनाए रखना अधिक उपयुक्त समझा हो। एक अन्य महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि टीवीके अभी तक औपचारिक रूप से इंडिया ब्लॉक का हिस्सा नहीं बनी है। तमिलनाडु में सरकार गठन के लिए कांग्रेस और अन्य दलों का समर्थन मिलने के बावजूद राष्ट्रीय स्तर पर गठबंधन की संरचना और सदस्यता अलग विषय मानी जाती है। ऐसे में राज्य स्तर के राजनीतिक सहयोग और राष्ट्रीय गठबंधन की सदस्यता को एक समान नहीं माना जा रहा है। तमिलनाडु की राजनीति में डीएमके और टीवीके के बीच प्रतिस्पर्धा भी इस पूरे घटनाक्रम का महत्वपूर्ण पहलू मानी जा रही है। डीएमके लंबे समय से इंडिया ब्लॉक की प्रमुख सहयोगी पार्टियों में शामिल रही है। विधानसभा चुनाव के बाद राज्य की सत्ता से बाहर होने के बावजूद डीएमके प्रदेश में एक प्रभावशाली विपक्षी दल बनी हुई है। ऐसे में टीवीके का इंडिया ब्लॉक की गतिविधियों में सक्रिय रूप से शामिल होना राज्य की राजनीति में विरोधाभासी संदेश दे सकता है। विश्लेषकों का यह भी मानना है कि मुख्यमंत्री विजय अपनी पार्टी की स्वतंत्र राजनीतिक पहचान को मजबूत बनाए रखना चाहते हैं। विधानसभा चुनावों में टीवीके ने खुद को पारंपरिक राजनीतिक दलों के विकल्प के रूप में प्रस्तुत किया था। यदि पार्टी जल्दबाजी में किसी राष्ट्रीय गठबंधन का औपचारिक हिस्सा बनती है, तो उसकी स्वतंत्र राजनीतिक छवि प्रभावित हो सकती है। इसलिए फिलहाल वह मुद्दों के आधार पर समर्थन और सहयोग की नीति अपनाना चाहती है। भविष्य की राजनीति को ध्यान में रखते हुए भी टीवीके का यह रुख महत्वपूर्ण माना जा रहा है। राष्ट्रीय गठबंधनों में औपचारिक रूप से शामिल होने से राजनीतिक विकल्प सीमित हो सकते हैं। जबकि वर्तमान परिस्थितियों में पार्टी अपने लिए अधिक लचीलापन बनाए रखना चाहती है। इससे उसे राज्य और राष्ट्रीय दोनों स्तरों पर परिस्थितियों के अनुसार निर्णय लेने की स्वतंत्रता मिलती है। तमिलनाडु में बदलते राजनीतिक समीकरणों के बीच मुख्यमंत्री विजय की पार्टी का यह कदम आने वाले समय की रणनीति का संकेत माना जा रहा है। फिलहाल टीवीके सत्ता संचालन, संगठन विस्तार और अपनी स्वतंत्र राजनीतिक पहचान को मजबूत करने पर ध्यान देती दिखाई दे रही है। ऐसे में इंडिया ब्लॉक की बैठक से दूरी को केवल एक अनुपस्थिति नहीं, बल्कि एक सोची-समझी राजनीतिक रणनीति के रूप में देखा जा रहा है।

भोपाल में अनोखा विरोध प्रदर्शन, पेट्रोल-सीएनजी महंगाई पर ऑटो यूनियन का हल्ला बोल

नई दिल्ली। भोपाल में महंगाई और ईंधन कीमतों में लगातार बढ़ोतरी का असर अब सड़क पर साफ दिखाई देने लगा है। सोमवार सुबह रायसेन रोड स्थित छावनी पठार क्षेत्र में ऑटो चालकों ने अपनी मांगों को लेकर अनोखे और प्रतीकात्मक तरीके से प्रदर्शन किया। प्रदर्शन में शामिल ऑटो चालकों ने बढ़ी हुई सीएनजी और पेट्रोल-डीजल की कीमतों के विरोध में फटे हुए अंडरवियर दिखाकर सरकार का ध्यान आकर्षित करने की कोशिश की। चालकों का कहना था कि महंगाई इतनी बढ़ चुकी है कि उनकी आर्थिक स्थिति बेहद खराब हो गई है और अब तो दैनिक जरूरतें पूरी करना भी मुश्किल हो गया है। इस प्रदर्शन का आयोजन रायसेन रोड स्थित शनि मंदिर के पास किया गया, जहां ऑटो संगठन के अध्यक्ष संजू अहिरवार के नेतृत्व में बड़ी संख्या में चालक एकत्र हुए। प्रदर्शन पूरी तरह शांतिपूर्ण रहा, लेकिन संदेश बेहद स्पष्ट था “किराया बढ़ाओ, वरना गुजारा मुश्किल है।” संजू अहिरवार ने बताया कि मौजूदा समय में एक सीएनजी ऑटो को रोजाना लगभग 500 रुपये की गैस भरवानी पड़ती है, जबकि औसतन 1200 रुपये की कमाई होती है। इसमें से ईंधन, किश्त और रखरखाव का खर्च निकालने के बाद चालकों के पास बहुत कम बचत बचती है। उन्होंने कहा कि मौजूदा हालात में ऑटो चलाना घाटे का सौदा बन गया है। चालकों का आरोप है कि लंबे समय से ऑटो किराए में कोई संशोधन नहीं किया गया है, जबकि ईंधन की कीमतें लगातार बढ़ती जा रही हैं। इसी असंतुलन के कारण हजारों ऑटो चालकों की आय प्रभावित हो रही है। प्रदर्शन में मौजूद चालकों पुषेंद्र अहिरवार, विशाल और राजेश ने भी अपनी पीड़ा साझा की। उन्होंने कहा कि बढ़ती महंगाई का सबसे ज्यादा असर मेहनतकश वर्ग पर पड़ रहा है। रोजाना की कमाई का बड़ा हिस्सा ईंधन और खर्चों में चला जाता है, जिससे घर चलाना भी मुश्किल हो गया है। इसी दौरान चालकों ने फटे कपड़ों को दिखाकर अपनी आर्थिक स्थिति का प्रतीकात्मक प्रदर्शन किया और कहा कि “किश्त भरते-भरते कपड़े तक फट गए हैं।” ऑटो संगठन ने सरकार से मांग की है कि वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए ऑटो किराए का पुनर्निर्धारण किया जाए, ताकि चालक अपनी किश्त समय पर चुका सकें और परिवार का भरण-पोषण ठीक से कर सकें। इस बीच देशभर में ईंधन कीमतों को लेकर भी चिंता बढ़ रही है। हाल ही में क्रिसिल की एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार के प्रभाव से पेट्रोल-डीजल की कीमतों में और बढ़ोतरी संभव है, जिससे आम जनता और परिवहन व्यवसाय पर अतिरिक्त बोझ पड़ सकता है। भोपाल में हुआ यह अनोखा प्रदर्शन एक बार फिर इस बात को उजागर करता है कि महंगाई का दबाव अब सीधे सड़क पर काम करने वाले वर्ग तक पहुंच चुका है।

साई पल्लवी और रुक्मिणी वसंत के बाद अब रश्मिका मंदाना के नाम की चर्चा तेज, आधिकारिक घोषणा का इंतजार

नई दिल्ली । भारतीय संगीत जगत की सर्वकालिक महान विभूतियों में शुमार और भारत रत्न से सम्मानित कर्नाटक संगीत की दिग्गज गायिका एमएस सुब्बुलक्ष्मी की गौरवशाली जीवन यात्रा जल्द ही बड़े पर्दे पर अवतरित होने जा रही है। इस ऐतिहासिक और संगीत से ओतप्रोत बायोपिक फिल्म को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर सिनेमाई गलियारों और सोशल मीडिया पर व्यापक चर्चाएं शुरू हो गई हैं। इस महत्वाकांक्षी परियोजना में मुख्य किरदार अर्थात एमएस सुब्बुलक्ष्मी की प्रतिष्ठित भूमिका को पर्दे पर जीवंत करने के लिए दक्षिण भारतीय और हिंदी सिनेमा की शीर्ष अभिनेत्री रश्मिका मंदाना के नाम पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है। इस बहुप्रतीक्षित बायोपिक फिल्म के तकनीकी और रचनात्मक पहलुओं की जिम्मेदारी फिल्म इंडस्ट्री के जाने-माने निर्देशक गौतम तिन्ननुरी संभाल रहे हैं। गौतम तिन्ननुरी को समीक्षकों द्वारा प्रशंसित और व्यावसायिक रूप से बेहद सफल रही फिल्म ‘जर्सी’ के निर्देशन के लिए विशेष पहचान हासिल है। प्राप्त विवरण के अनुसार, निर्देशक पिछले एक लंबे समय से महान गायिका एमएस सुब्बुलक्ष्मी के जीवन, उनके संगीत के सफर और उनके ऐतिहासिक योगदान पर गहन शोध (रिसर्च) कर रहे हैं, ताकि कहानी को पूरी प्रामाणिकता के साथ दर्शकों के समक्ष प्रस्तुत किया जा सके। फिल्म की मुख्य अभिनेत्री के चयन को लेकर वर्तमान में फिल्म उद्योग के भीतर गहरा सस्पेंस बना हुआ है, जिसके कारण विभिन्न कयास लगाए जा रहे हैं। तेलुगु सिनेमाई मीडिया रिपोर्ट्स के दावों के अनुसार, रश्मिका मंदाना को इस ऐतिहासिक भूमिका के लिए लगभग तय माना जा रहा है और हाल ही में उनके आवास पर इस किरदार से जुड़े पहनावे और स्वरूप को लेकर एक गुप्त लुक टेस्ट भी सफलतापूर्वक आयोजित किया गया है। रश्मिका के इस प्रोजेक्ट से जुड़ने की खबर ने उनके प्रशंसकों के बीच भारी उत्साह पैदा कर दिया है। हालांकि, इस महत्वपूर्ण भूमिका के लिए रश्मिका मंदाना के अलावा इंडस्ट्री की कुछ अन्य प्रतिभाशाली अभिनेत्रियों के नाम भी पूर्व में सामने आते रहे हैं। कुछ समय पहले तक यह चर्चा बेहद गर्म थी कि अपनी संजीदा अदाकारी के लिए मशहूर साई पल्लवी इस बायोपिक का हिस्सा होंगी और उन्होंने इस किरदार की तैयारी के लिए बकायदा कर्नाटक संगीत की बुनियादी बारीकियां सीखना भी शुरू कर दिया था। इसके बाद बीच में उभरती हुई अभिनेत्री रुक्मिणी वसंत को भी इस रोल के लिए साइन किए जाने की खबरें आईं। चूंकि फिल्म के निर्माताओं ने अभी तक कास्टिंग को लेकर कोई औपचारिक प्रेस विज्ञप्ति जारी नहीं की है, इसलिए अंतिम नाम को लेकर आधिकारिक पुष्टि होना अभी बाकी है। दूसरी ओर, रश्मिका मंदाना वर्तमान में अपनी एक अन्य बड़ी और आधुनिक प्रेम कहानी पर आधारित फिल्म ‘कॉकटेल 2’ के प्रचार-प्रसार में व्यस्त हैं। हाल ही में डिजिटल प्लेटफॉर्म पर रिलीज हुए ‘कॉकटेल 2’ के आधिकारिक ट्रेलर को दर्शकों और नेटिजन्स की ओर से बेहद सकारात्मक प्रतिक्रियाएं मिली हैं, जिसके लिए रश्मिका ने अपने प्रशंसकों के प्रति आभार भी व्यक्त किया है। होमी अदजानिया के निर्देशन में बनी यह फिल्म आगामी 19 जून 2026 को देश भर के सिनेमाघरों में प्रदर्शित होने के लिए पूरी तरह तैयार है, जिसमें रश्मिका के साथ शाहिद कपूर और कृति सेनन मुख्य भूमिकाओं में दिखाई देंगे। इस व्यावसायिक फिल्म के तुरंत बाद एमएस सुब्बुलक्ष्मी जैसी ऐतिहासिक शख्सियत की बायोपिक रश्मिका के करियर के लिए एक बड़ा टर्निंग पॉइंट साबित हो सकती है।

मध्य प्रदेश की राज्यसभा जंग तेज, कांग्रेस-बीजेपी आमने-सामने; मीनाक्षी नटराजन बोलीं- एकजुट हैं हम

नई दिल्ली। भोपाल में राज्यसभा चुनाव का राजनीतिक तापमान लगातार बढ़ता जा रहा है। एक ओर कांग्रेस की उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन ने अपने नामांकन के बाद पार्टी में एकजुटता का संदेश दिया, वहीं दूसरी ओर बीजेपी ने भी अपने चुनावी समीकरणों को मजबूत करने की कवायद तेज कर दी है। कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन ने कहा कि यह चुनाव विचारधाराओं की लड़ाई है और पार्टी पूरी मजबूती के साथ मैदान में उतरी है। नामांकन के दौरान प्रदेश प्रभारी हरीश चौधरी, प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी, नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार और कई विधायक मौजूद रहे। इस दौरान विधायकों ने एकजुटता दिखाते हुए पार्टी नेतृत्व के साथ फोटो सेशन भी कराया हालांकि इसी बीच कांग्रेस को एक झटका भी लगा जब हुजूर सीट से पूर्व प्रत्याशी नरेश ज्ञानचंदानी ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया। वे मीनाक्षी नटराजन को राज्यसभा उम्मीदवार बनाए जाने से नाराज बताए जा रहे हैं। इस घटनाक्रम ने कांग्रेस खेमे में हलचल बढ़ा दी है। वहीं बीजेपी खेमे में भी हलचल कम नहीं है। मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि पार्टी के पास अतिरिक्त वोट हैं और विकास चाहने वाले लोग बीजेपी उम्मीदवारों के साथ खड़े होंगे। उन्होंने दावा किया कि चुनाव परिणाम पार्टी के पक्ष में रहेगा। बीजेपी उम्मीदवार महेश केवट ने भी अपनी जिम्मेदारी को लेकर भरोसा जताया और कहा कि राष्ट्रीय नेतृत्व ने जो जिम्मेदारी दी है, उसे वे पूरी निष्ठा से निभाएंगे। इसी बीच उनके परिवार की ओर से धार्मिक माहौल भी देखने को मिला। महेश केवट के भाई और बेटे ने ओरछा में विशेष पूजा-अर्चना कर उनके राजनीतिक भविष्य की सफलता की कामना की। भोपाल में बीजेपी दफ्तर में भी लगातार विधायकों की आवाजाही जारी है। उपमुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा और कई वरिष्ठ नेता बैठक के लिए पहुंचे। वहीं मुख्यमंत्री मोहन यादव ने सभी विधायकों को भोपाल में ही रहने के निर्देश दिए हैं, जिससे वोटिंग प्रक्रिया में पूरी एकजुटता बनी रहे। राज्यसभा चुनाव को लेकर दोनों दलों ने अपनी रणनीति अंतिम चरण में पहुंचा दी है। कांग्रेस जहां एकजुटता का दावा कर रही है, वहीं बीजेपी अपने संख्याबल और संगठनात्मक ताकत पर भरोसा जता रही है। आने वाले दिनों में यह चुनाव राज्य की राजनीति की दिशा तय कर सकता है।