पेट्रोल-डीजल के दामों में बड़ी गिरावट के संकेत! जुलाई के बाद कच्चे तेल में आ सकती है तेज नरमी

नई दिल्ली। पिछले करीब 100 दिनों से वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों को लेकर लगातार चर्चा बनी हुई है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में बाधा के बाद अंतरराष्ट्रीय तेल आपूर्ति पर असर पड़ा है, जिससे वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें बढ़कर 100 से 120 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई हैं। इससे तेल बाजार में अस्थिरता बनी हुई है। इसी बीच ग्लोबल रेटिंग एजेंसी फिच रेटिंग्स ने कच्चे तेल की कीमतों को लेकर नया अनुमान जारी किया है, जिसमें आने वाले महीनों में कीमतों में बदलाव के संकेत दिए गए हैं। फिच का अनुमान क्या कहता है?फिच के मुताबिक वर्ष 2026 में ब्रेंट क्रूड की औसत कीमत लगभग 87 डॉलर प्रति बैरल रह सकती है। एजेंसी का अनुमान है कि मई से जुलाई के बीच कच्चा तेल 100 से 110 डॉलर प्रति बैरल के दायरे में बना रह सकता है। हालांकि जुलाई के बाद कीमतों में गिरावट की संभावना जताई गई है। अनुमान के अनुसार अगस्त से कच्चा तेल 80 डॉलर प्रति बैरल तक आ सकता है, जबकि सितंबर के बाद यह स्तर 70 डॉलर प्रति बैरल के आसपास रह सकता है। होर्मुज स्ट्रेट खुलने पर क्या होगा असर?फिच के अनुसार यदि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में स्थिति सामान्य होती है और समुद्री मार्ग दोबारा खुलता है, तो कच्चे तेल की कीमतों में तेजी से गिरावट देखने को मिल सकती है। ऐसे में अगस्त और सितंबर से वैश्विक बाजार में तेल की आपूर्ति बढ़ने और कीमतों में नरमी आने की संभावना है। आपूर्ति और मांग का संतुलन बनेगा अहम कारणरेटिंग एजेंसी ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि मौजूदा कीमतों में तेजी उत्पादन में कमी के कारण नहीं, बल्कि सप्लाई बाधित होने की वजह से आई है। तेल भंडार और उत्पादन क्षमता को स्थायी नुकसान नहीं हुआ है। साथ ही यह भी अनुमान लगाया गया है कि ओपेक और ओपेक प्लस देशों द्वारा उत्पादन बढ़ाने के फैसले के बाद बाजार में तेल की उपलब्धता और बढ़ सकती है, जिससे ओवरसप्लाई की स्थिति बन सकती है।रेटिंग एजेंसी ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि मौजूदा कीमतों में तेजी उत्पादन में कमी के कारण नहीं, बल्कि सप्लाई बाधित होने की वजह से आई है। तेल भंडार और उत्पादन क्षमता को स्थायी नुकसान नहीं हुआ है। साथ ही यह भी अनुमान लगाया गया है कि ओपेक और ओपेक प्लस देशों द्वारा उत्पादन बढ़ाने के फैसले के बाद बाजार में तेल की उपलब्धता और बढ़ सकती है, जिससे ओवरसप्लाई की स्थिति बन सकती है। होर्मुज बना सबसे बड़ा कारकस्ट्रेट ऑफ होर्मुज वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण मार्ग है, जहां से प्रतिदिन लगभग 2 करोड़ बैरल तेल का परिवहन होता है। यह वैश्विक तेल आपूर्ति का करीब पांचवां हिस्सा है। मौजूदा तनाव के कारण इस मार्ग पर बाधा बनी हुई है, जिसका सीधा असर कीमतों पर पड़ा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि स्थिति सामान्य होती है तो आने वाले महीनों में वैश्विक तेल बाजार में स्थिरता लौट सकती है और 2026 के अंत तक कीमतों में और गिरावट देखी जा सकती है।
एक फिल्म, 9 किरदार और चौंकाने वाली भविष्यवाणी! बॉलीवुड स्टार की कहानी है बेहद दिलचस्प

नई दिल्ली । हिंदी सिनेमा के इतिहास में कई ऐसे कलाकार हुए हैं जिन्होंने अपनी प्रतिभा से अभिनय की परिभाषा बदल दी। उनमें से एक नाम है Sanjeev Kumar। संजीव कुमार सिर्फ एक अभिनेता नहीं थे, बल्कि वे अभिनय की ऐसी पाठशाला थे, जिनके किरदार आज भी दर्शकों के दिलों में जीवित हैं। चाहे फिल्म ‘शोले’ में ठाकुर बलदेव सिंह का किरदार हो या फिर गंभीर और भावनात्मक भूमिकाएं, उन्होंने हर बार अपने अभिनय से दर्शकों को प्रभावित किया। बॉलीवुड में डबल और ट्रिपल रोल निभाने वाले कलाकारों की लंबी सूची रही है। कई सितारों ने एक ही फिल्म में दो या तीन किरदार निभाकर दर्शकों का मनोरंजन किया है। लेकिन संजीव कुमार ने वह कर दिखाया जो उनके दौर में किसी अन्य अभिनेता ने नहीं किया था। वर्ष 1974 में रिलीज हुई Naya Din Nai Raat में उन्होंने पूरे नौ अलग-अलग किरदार निभाए और अभिनय की नई मिसाल कायम कर दी। इस फिल्म में उनके साथ Jaya Bhaduri मुख्य भूमिका में थीं। फिल्म की कहानी एक युवती सुषमा के इर्द-गिर्द घूमती है, जो शादी से बचने के लिए घर छोड़ देती है। इसके बाद उसकी जिंदगी में अलग-अलग तरह के लोगों का सामना होता है। इन सभी किरदारों को संजीव कुमार ने निभाया था। खास बात यह थी कि उनके नौ किरदार जीवन के नौ रसों का प्रतीक माने गए थे। फिल्म में संजीव कुमार कभी डॉक्टर के रूप में नजर आए, तो कभी डाकू, साधु, पंडित और अन्य विविध व्यक्तित्वों के रूप में दिखाई दिए। हर किरदार का हावभाव, बोलने का अंदाज, शारीरिक भाषा और व्यक्तित्व अलग था। यही वजह थी कि दर्शकों को ऐसा महसूस ही नहीं हुआ कि पर्दे पर एक ही अभिनेता कई भूमिकाएं निभा रहा है। उनके अभिनय की यही ताकत उन्हें अपने समय के सबसे सम्मानित कलाकारों में शामिल करती है। फिल्म का निर्देशन ए. भीमसिंह ने किया था। यह दक्षिण भारतीय अभिनेता Sivaji Ganesan की तमिल फिल्म Navarathri का हिंदी रीमेक थी। हालांकि हिंदी संस्करण में संजीव कुमार ने अपनी अदाकारी से किरदारों को नई पहचान दी और फिल्म को यादगार बना दिया। संजीव कुमार का जीवन भी उतना ही चर्चित रहा जितना उनका करियर। उनके बारे में अक्सर यह कहा जाता है कि उन्होंने अपनी कम उम्र में मृत्यु की आशंका जताई थी। हालांकि इस तरह की बातें वर्षों से चर्चा का विषय रही हैं, लेकिन उनकी असली पहचान उनकी अद्भुत अभिनय क्षमता और सिनेमा को दिए गए अमूल्य योगदान से है। आज भी जब हिंदी सिनेमा के महानतम अभिनेताओं की बात होती है, तो संजीव कुमार का नाम सम्मान के साथ लिया जाता है। एक ही फिल्म में नौ किरदार निभाने का उनका रिकॉर्ड भारतीय सिनेमा के इतिहास में हमेशा याद रखा जाएगा।
राम चरण की तारीफ में बोले जगपति बाबू, कहा- वह किसी सुपरमैन से कम नहीं

नई दिल्ली । साउथ सिनेमा के सुपरस्टार Ram Charan की फिल्म Peddi इन दिनों बॉक्स ऑफिस के साथ-साथ विवादों के कारण भी चर्चा में बनी हुई है। फिल्म की रिलीज के बाद जहां एक ओर इसके कुछ दृश्यों और प्रस्तुति को लेकर बहस छिड़ी हुई है, वहीं दूसरी ओर फिल्म की टीम इसे बड़ी सफलता बता रही है। इसी बीच फिल्म में अप्पलसूरी का अहम किरदार निभाने वाले Jagapathi Babu ने ऐसा बयान दिया है, जिसने फिल्म को लेकर नई चर्चा शुरू कर दी है। हैदराबाद में आयोजित फिल्म के सक्सेस इवेंट के दौरान जगपति बाबू ने कहा कि *पेद्दी* की सफलता केवल कमाई के आंकड़ों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक ऐसी फिल्म है जिसे रिलीज के बाद भी अपनी जगह बनाने के लिए संघर्ष करना पड़ा। उनके मुताबिक, फिल्म ने दर्शकों के बीच अपनी पहचान बनाई और आलोचनाओं का सामना करते हुए आगे बढ़ी। जगपति बाबू ने कहा कि किसी भी फिल्म का भविष्य अंततः दर्शकों के हाथ में होता है। एक आम दर्शक जो टिकट खरीदकर सिनेमाघर पहुंचता है, वही तय करता है कि फिल्म सफल होगी या नहीं। उन्होंने माना कि इस तरह की कहानी पर फिल्म बनाना और उसमें राम चरण जैसे बड़े सितारे को शामिल करना आसान नहीं था। लेकिन पूरी टीम ने इस चुनौती को स्वीकार किया और फिल्म को दर्शकों तक पहुंचाया। अपने संबोधन में अभिनेता ने राम चरण की जमकर तारीफ की। उन्होंने कहा कि फिल्म में राम चरण सिर्फ एक अभिनेता की तरह नहीं दिखे, बल्कि उन्होंने अपने किरदार को जिस तरह निभाया, उससे वह किसी सुपरहीरो जैसे नजर आए। जगपति बाबू के अनुसार, राम चरण ने फिल्म की पूरी जिम्मेदारी अपने कंधों पर उठाई और हर चुनौती का सामना किया। सबसे ज्यादा चर्चा उनके उस बयान की हो रही है, जिसमें उन्होंने फिल्म के आलोचकों और नकारात्मक रिव्यू देने वालों को भी धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा कि जिन्होंने फिल्म के खिलाफ खराब समीक्षाएं लिखीं, उन्होंने भी अनजाने में फिल्म की मदद की। उनके अनुसार, नकारात्मक चर्चाओं ने भी दर्शकों की जिज्ञासा बढ़ाई और लोगों को सिनेमाघरों तक पहुंचने के लिए प्रेरित किया। फिल्म की कमाई की बात करें तो शुरुआती दिनों में *पेद्दी* ने दुनिया भर में शानदार कारोबार किया है। रिपोर्ट्स के अनुसार, फिल्म ने पहले चार दिनों में 250 करोड़ रुपये से अधिक का वर्ल्डवाइड ग्रॉस कलेक्शन हासिल किया। हालांकि तेलुगू बाजार में फिल्म को बेहतर प्रतिक्रिया मिली है, जबकि हिंदी बेल्ट में इसका प्रदर्शन अपेक्षाकृत धीमा बताया जा रहा है। फिलहाल फिल्म को लेकर चर्चाओं का दौर जारी है। बॉक्स ऑफिस पर इसके आगे के प्रदर्शन पर सभी की नजरें टिकी हैं। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि *पेद्दी* अपने लाइफटाइम कलेक्शन में कितना बड़ा मुकाम हासिल कर पाती है और क्या यह वर्ष की सबसे बड़ी हिट फिल्मों में शामिल हो सकेगी।
तिलक वर्मा की कप्तानी और वैभव का विस्फोटक अंदाज, मुकाबला होगा रोमांचक

नई दिल्ली । भारतीय क्रिकेट में इन दिनों जिस युवा खिलाड़ी की सबसे ज्यादा चर्चा हो रही है, वह नाम है वैभव सूर्यवंशी। महज 15 साल की उम्र में आईपीएल 2026 में अपने विस्फोटक प्रदर्शन से क्रिकेट जगत को चौंकाने वाले वैभव अब एक नई परीक्षा के लिए तैयार हैं। श्रीलंका में आयोजित त्रिकोणीय सीरीज में इंडिया-ए की ओर से खेलते हुए उन्हें यह साबित करना होगा कि वे सिर्फ टी20 क्रिकेट के स्टार नहीं, बल्कि लंबे प्रारूप में भी टीम के भरोसेमंद बल्लेबाज बन सकते हैं। दांबुला के रणगिरि दांबुला इंटरनेशनल स्टेडियम में इंडिया-ए का पहला मुकाबला श्रीलंका-ए से होना है। इस मैच पर क्रिकेट प्रेमियों की खास नजर होगी क्योंकि पहली बार वैभव सूर्यवंशी 50 ओवर के प्रारूप में इतनी बड़ी जिम्मेदारी के साथ मैदान पर उतरेंगे। आईपीएल में उनके बल्ले ने जिस तरह गेंदबाजों की धज्जियां उड़ाई थीं, उसी प्रदर्शन की उम्मीद अब इंडिया-ए के समर्थक भी कर रहे हैं। वैभव के लिए यह सीरीज सिर्फ रन बनाने का मंच नहीं, बल्कि अपने क्रिकेटिंग व्यक्तित्व को साबित करने का अवसर भी है। टी20 क्रिकेट में आक्रामक बल्लेबाजी करना और सीमित गेंदों में तेजी से रन जुटाना अलग बात है, लेकिन वनडे प्रारूप में धैर्य, तकनीक और परिस्थितियों के अनुरूप खुद को ढालना कहीं ज्यादा महत्वपूर्ण होता है। श्रीलंका की पिचें आमतौर पर स्पिन गेंदबाजों की मददगार मानी जाती हैं, जहां बल्लेबाजों को हर रन के लिए संघर्ष करना पड़ता है। ऐसे में वैभव की तकनीकी क्षमता और मानसिक मजबूती की असली परीक्षा होगी। चयनकर्ताओं की नजर भी इस युवा बल्लेबाज पर टिकी हुई है। आयरलैंड और इंग्लैंड दौरे के साथ एशियाई खेलों के लिए भारतीय टी20 टीम में जगह बना चुके वैभव यदि इस सीरीज में भी सफल रहते हैं, तो उनके लिए भारतीय क्रिकेट के दरवाजे और तेजी से खुल सकते हैं। शानदार प्रदर्शन उन्हें भविष्य के तीनों प्रारूपों के खिलाड़ी के रूप में स्थापित कर सकता है। हालांकि टीम की जिम्मेदारी सिर्फ वैभव पर नहीं होगी। कप्तान तिलक वर्मा के सामने भी अपनी नेतृत्व क्षमता और बल्लेबाजी कौशल साबित करने की चुनौती होगी। अनुभवी ऋतुराज गायकवाड़, प्रभसिमरन सिंह, आयुष बदोनी और अनुकूल रॉय जैसे खिलाड़ी टीम को मजबूती प्रदान करेंगे। वहीं गेंदबाजी विभाग में अंशुल कम्बोज, यश ठाकुर और अरशद खान विपक्षी बल्लेबाजों के लिए खतरा साबित हो सकते हैं। क्रिकेट विशेषज्ञों का मानना है कि यह त्रिकोणीय सीरीज भारतीय क्रिकेट के कई उभरते सितारों के लिए बड़ा मंच साबित हो सकती है। लेकिन सबसे ज्यादा चर्चा वैभव सूर्यवंशी को लेकर है। यदि उनका बल्ला श्रीलंका की धरती पर भी आईपीएल जैसा कहर बरपाता है, तो भारतीय क्रिकेट को एक और बड़ा सितारा मिल सकता है। अब सभी की निगाहें दांबुला के मैदान पर टिकी हैं, जहां युवा प्रतिभा अपने करियर का नया अध्याय लिखने उतरने वाली है।
जब रिकॉर्डिंग स्टूडियो में लेट गए थे किशोर कुमार, और बन गया सदाबहार सुपरहिट गाना

नई दिल्ली । हिंदी फिल्म संगीत के इतिहास में कई ऐसे किस्से दर्ज हैं, जो कलाकारों की प्रतिभा और उनके जुनून को नई पहचान देते हैं। ऐसा ही एक दिलचस्प किस्सा महान गायक किशोर कुमार और फिल्म ‘शराबी’ के मशहूर गीत ‘इंतहा हो गई इंतजार की’ से जुड़ा हुआ है। यह गीत आज भी संगीत प्रेमियों की पसंदीदा सूची में शामिल है, लेकिन इसके पीछे की कहानी बहुत कम लोग जानते हैं। साल 1984 में निर्देशक प्रकाश मेहरा अपनी महत्वाकांक्षी फिल्म ‘शराबी’ का निर्माण कर रहे थे। फिल्म में अमिताभ बच्चन मुख्य भूमिका में थे और उनके किरदार की भावनाओं को दर्शाने के लिए गीतकार अंजान ने एक बेहतरीन गीत लिखा था। संगीतकार बप्पी लहरी ने इस गीत को मधुर धुन से सजाया। अब जरूरत थी ऐसी आवाज की, जो इस गीत की आत्मा को जीवंत कर सके, और इसके लिए चुना गया नाम था किशोर कुमार। जब किशोर कुमार के सामने यह गीत रिकॉर्डिंग के लिए रखा गया, तो उन्होंने शुरुआत में इसे गाने से इनकार कर दिया। रिकॉर्डिंग स्टूडियो में मौजूद लोग हैरान रह गए। कुछ देर बाद उन्होंने गीत की स्थिति और उसके भाव को गहराई से समझा। उन्हें बताया गया कि पर्दे पर अमिताभ बच्चन एक ऐसे व्यक्ति की भूमिका निभा रहे हैं, जो शराब के नशे में है और अपनी भावनाओं को व्यक्त कर रहा है। यहीं से किशोर कुमार की रचनात्मकता सामने आई। उन्होंने कहा कि यदि इस गीत में एक शराबी का वास्तविक एहसास पैदा करना है, तो वह इसे सामान्य तरीके से खड़े होकर नहीं गाएंगे। उनकी शर्त थी कि रिकॉर्डिंग के दौरान उन्हें लेटने दिया जाए ताकि वे उस मानसिक और शारीरिक स्थिति को महसूस कर सकें, जिसमें फिल्म का पात्र दिखाई देगा। स्टूडियो में मौजूद सभी लोग उनकी यह बात सुनकर चौंक गए। हालांकि, किशोर कुमार अपनी बात पर अड़े रहे। आखिरकार उनकी इच्छा पूरी करने के लिए रिकॉर्डिंग रूम में एक बड़ी टेबल मंगवाई गई। किशोर कुमार उस पर लेट गए, माइक को उसी हिसाब से सेट किया गया और फिर रिकॉर्डिंग शुरू हुई। इसके बाद जो हुआ, वह इतिहास बन गया। आशा भोसले के साथ किशोर कुमार ने ‘इंतहा हो गई इंतजार की’ को अपनी आवाज दी और गीत में ऐसा जादू भर दिया कि वह रिलीज होते ही लोगों की जुबान पर चढ़ गया। कहा जाता है कि रिकॉर्डिंग के दौरान आशा भोसले भी किशोर कुमार के इस अनोखे अंदाज को देखकर हैरान रह गई थीं। यह गीत न केवल फिल्म ‘शराबी’ की पहचान बना, बल्कि हिंदी सिनेमा के सबसे लोकप्रिय युगल गीतों में भी शामिल हो गया। दशकों बाद भी जब यह गाना बजता है, तो श्रोता उसी उत्साह और भावनाओं के साथ इसे सुनते हैं। किशोर कुमार की यही विशेषता थी कि वह केवल गीत नहीं गाते थे, बल्कि उसे जीते थे। शायद यही कारण है कि उनकी आवाज और उनके गाए गीत आज भी करोड़ों दिलों में जीवित हैं।
MP MLA Horse Trading: MP में फिर ऑपरेशन लोटस की चर्चा! कांग्रेस विधायकों की होगी शिफ्टिंग, BJP पर खरीद-फरोख्त के आरोप

MP MLA Horse Trading: भोपाल। राज्यसभा चुनाव से पहले मध्य प्रदेश की राजनीति एक बार फिर गरमा गई है। कांग्रेस ने अपने विधायकों को राज्य से बाहर भेजने का फैसला किया है। पार्टी को आशंका है कि भारतीय जनता पार्टी उसके विधायकों को तोड़ने की कोशिश कर सकती है। इसी के चलते कांग्रेस अपने विधायकों की शिफ्ट करने जा रही है। सूत्रों के मुताबिक कांग्रेस विधायक मंगलवार दोपहर करीब 12 बजे चार्टर्ड विमान से दूसरे राज्य के लिए रवाना होंगे। पार्टी का यह कदम राज्यसभा चुनाव को देखते हुए बनाई गई रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। MP में कॉन्ट्रैक्ट कर्मियों की बल्ले-बल्ले….. मोहन यादव सरकार ने बढ़ाया वेतन 10 दिनों तक रहेंगे राज्य से बाहर देर रात नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार के निवास पर हुई बैठक में विधायकों को सुरक्षित स्थान पर भेजने का निर्णय लिया गया। बताया जा रहा है कि कांग्रेस विधायक अगले 10 दिनों तक राज्य से बाहर रहेंगे और मतदान के समय ही वापस लाए जाएंगे। पार्टी का उद्देश्य अपने विधायकों को किसी भी तरह के राजनीतिक दबाव या संपर्क से दूर रखना है। बैंक खाते में बड़ी रकम डालते ही आ सकता है IT नोटिस…. जानिए क्या है नियम भाजपा पर खरीद-फरोख्त के आरोप कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री कांतिलाल भूरिया ने भाजपा पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने दावा किया कि भाजपा कांग्रेस विधायकों से संपर्क कर रही है और उन्हें पार्टी छोड़ने के लिए 5 से 8 करोड़ रुपये तक के ऑफर दिए जा रहे हैं। कांतिलाल भूरिया ने कहा- भाजपा खरीद-फरोख्त कर रही है। हमारे विधायकों को 5 से 8 करोड़ रुपये तक का ऑफर दिया जा रहा है। भाजपा के लोग लगातार फोन कर रहे हैं और लालच देने की कोशिश कर रहे हैं। भूरिया ने कहा- कांग्रेस के विधायक पार्टी के प्रति प्रतिबद्ध हैं और किसी भी तरह से बिकने वाले नहीं हैं। भूरिया ने कहा- बीजेपी के लोग हमारे विधायकों को पैसे का लालच दे रहे हैं, लेकिन हमारे कट्टर कांग्रेसी विधायक बिकने वाले नहीं हैं। यह लोकतंत्र को कमजोर करने की कोशिश है। अगर जनप्रतिनिधियों की खरीद-फरोख्त होगी तो लोकतंत्र कैसे बचेगा? राज्यसभा चुनाव के लिए BJP ने उतारा उम्मीदवार इधर भारतीय जनता पार्टी ने भी राज्यसभा चुनाव के लिए अपने उम्मीदवारों के नामों का ऐलान कर दिया है। पार्टी ने मध्य प्रदेश से महेश केवट को उम्मीदवार बनाया है। भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव अरुण सिंह ने इसकी आधिकारिक घोषणा की है। केन्द्र सरकार ने Ujjwala Yojna में किया बड़ा बदलाव…. अब साल में मिलेंगे सिर्फ 4 सिलेंडर 18 जून को होगा मतदान गौरतलब है कि 18 जून को मध्य प्रदेश समेत देश के 10 राज्यों की 24 राज्यसभा सीटों के लिए मतदान होना है। चुनाव को लेकर भाजपा और कांग्रेस दोनों अपनी-अपनी रणनीति बनाने में जुटी हैं। ऐसे में कांग्रेस विधायकों की शिफ्टिंग और खरीद-फरोख्त के आरोपों ने प्रदेश की राजनीति का तापमान बढ़ा दिया है। हालांकि भाजपा की ओर से कांग्रेस के आरोपों पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
किन लोगों को होता है टीबी का सबसे ज्यादा खतरा? समय रहते जांच कराना क्यों है जरूरी, जानिए

नई दिल्ली । तपेदिक यानी टीबी (ट्यूबरकुलोसिस) आज भी भारत सहित दुनिया के कई देशों के लिए एक बड़ी स्वास्थ्य चुनौती बनी हुई है। यह एक संक्रामक बीमारी है, जो मुख्य रूप से फेफड़ों को प्रभावित करती है, लेकिन समय पर इलाज न मिलने पर शरीर के अन्य अंगों को भी नुकसान पहुंचा सकती है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि टीबी का इलाज पूरी तरह संभव है, लेकिन इसके लिए बीमारी की शुरुआती पहचान और समय पर उपचार बेहद जरूरी है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के अनुसार, कुछ विशेष वर्गों के लोगों में टीबी संक्रमण का खतरा सामान्य लोगों की तुलना में काफी अधिक होता है। ऐसे लोगों को अपनी सेहत को लेकर अतिरिक्त सतर्कता बरतने और समय-समय पर स्वास्थ्य जांच कराने की सलाह दी जाती है। सबसे अधिक जोखिम उन लोगों को होता है जो किसी टीबी मरीज के संपर्क में रहते हैं। यदि परिवार, घर या आसपास किसी व्यक्ति को सक्रिय टीबी है, तो संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे मामलों में नियमित स्क्रीनिंग और चिकित्सकीय सलाह बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है। कुपोषण से पीड़ित लोग भी टीबी की चपेट में जल्दी आ सकते हैं। शरीर में आवश्यक पोषक तत्वों की कमी और कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता संक्रमण के खिलाफ लड़ने की ताकत को कम कर देती है। यही कारण है कि कमजोर इम्युनिटी वाले लोगों में टीबी का खतरा अधिक पाया जाता है। जो लोग पिछले पांच वर्षों में टीबी से ठीक हो चुके हैं, उन्हें भी विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। विशेषज्ञों के अनुसार कुछ मामलों में संक्रमण दोबारा सक्रिय हो सकता है। इसलिए ऐसे लोगों को नियमित जांच और डॉक्टर की सलाह का पालन करना चाहिए। एचआईवी से संक्रमित व्यक्तियों में भी टीबी का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। एचआईवी शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को कमजोर कर देता है, जिससे टीबी का संक्रमण तेजी से फैल सकता है और गंभीर रूप ले सकता है। मधुमेह यानी डायबिटीज के मरीज भी इस बीमारी के प्रति अधिक संवेदनशील माने जाते हैं। यदि ब्लड शुगर लंबे समय तक नियंत्रित नहीं रहता, तो शरीर की प्रतिरोधक क्षमता प्रभावित होती है और संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। इसी तरह 60 वर्ष से अधिक आयु के लोगों में भी उम्र बढ़ने के साथ इम्युनिटी कमजोर होने लगती है, जिससे टीबी का जोखिम बढ़ जाता है। लंबे समय से धूम्रपान या शराब का सेवन करने वाले लोगों को भी विशेष सतर्क रहने की जरूरत है। धूम्रपान फेफड़ों को नुकसान पहुंचाता है, जबकि अत्यधिक शराब शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को कमजोर कर देती है। इससे टीबी संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है। भीड़भाड़ वाले इलाकों, झुग्गी बस्तियों, जेलों, अनाथालयों और वृद्धाश्रमों में रहने वाले लोगों में भी टीबी तेजी से फैल सकती है। खराब स्वच्छता, सीमित संसाधन और नजदीकी संपर्क संक्रमण के प्रसार को आसान बना देते हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि यदि किसी व्यक्ति को लगातार खांसी, बुखार, वजन कम होना, रात में ज्यादा पसीना आना, भूख कम लगना या लगातार थकान महसूस हो रही है, तो उसे तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। नियमित स्वास्थ्य जांच, पौष्टिक आहार, स्वच्छता, धूम्रपान और शराब से दूरी तथा समय पर उपचार ही टीबी से बचाव के सबसे प्रभावी उपाय हैं। टीबी एक गंभीर बीमारी जरूर है, लेकिन जागरूकता, समय पर जांच और सही इलाज से इसे पूरी तरह हराया जा सकता है। इसलिए जोखिम वाले वर्गों को अपनी सेहत के प्रति लापरवाही नहीं बरतनी चाहिए और नियमित जांच को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाना चाहिए।
MP में कॉन्ट्रैक्ट कर्मियों की बल्ले-बल्ले….. मोहन यादव सरकार ने बढ़ाया वेतन

भोपाल। मध्य प्रदेश सरकार (Madhya Pradesh Government) ने कॉन्ट्रैक्ट (Contract.) पर काम करने वाले लगभग 1.25 लाख कर्मचारियों अधिकारियों को सौगात दी है। मोहन यादव सरकार (Mohan Yadav Govt) ने इन कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारियों अधिकारियों के सालाना वेतन में 4.46 फीसदी की बढ़ोतरी को मंजूरी दी है। कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारियों अधिकारियों (Contract Employees and Officers) की सेलरी में यह बढ़ोतरी 1 अप्रैल 2026 से लागू होगी। फैसला राज्य की 2023 की कॉन्ट्रैक्ट एम्प्लॉयमेंट पॉलिसी के तहत कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स के आधार पर लिया गया है। 1.25 लाख कर्मचारियों को फायदामध्य प्रदेश के वित्त विभाग के अनुसार, मोहन यादव सरकार ने सोमवार को कॉन्ट्रैक्ट पर काम करने वाले कर्मचारियों और अधिकारियों के वेतन में 4.46 फीसदी की सालाना बढ़ोतरी को मंजूरी दी। यह बढ़ोतरी इसी साल 1 अप्रैल से लागू कर दी जाएगी। इससे लगभग 1.25 लाख कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारियों अधिकारियों को फायदा होगा। यह बढ़ोतरी राज्य की कॉन्ट्रैक्ट एम्प्लॉयमेंट पॉलिसी के तहत की गई है। इस नीति को 22 जुलाई 2023 को अमल में लाया गया था। कितनी होगी बढ़ोतरी?बता दें कि कॉन्ट्रैक्ट एम्प्लॉयमेंट पॉलिसी में कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स के आधार पर सालाना वेतनमान में बदलाव का प्रावधान किया गया है। मध्य प्रदेश सरकार के इस फैसले पर एमपी कॉन्ट्रैक्टुअल ऑफिसर्स एंड एम्प्लॉइज एसोसिएशन के अध्यक्ष रमेश राठौर ने सराहनीय बताया। उन्होंने कहा कि इस बदलाव से कर्मचारियों के वेतन में पे स्केल के आधार पर लगभग 1,000 रुपये से 2,500 रुपये प्रति माह की बढ़ोतरी हो जाएगी। एक जैसे कॉन्ट्रैक्ट पदों के लिए समान वेतनमध्य प्रदेश के वित्त विभाग की ओर से जारी आदेश के अनुसार, इस बार कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारियों की सेलरी में पिछली बार से अधिक बढ़ोतरी की गई है। इस साल 1 अप्रैल से सालाना बढ़ोतरी की दर 4.46 प्रतिशत तय की गई है जबकि पिछले साल यह 2.94 फीसदी थी। बता दें कि 2023 की पॉलिसी से पहले अलग-अलग विभागों में एक जैसे कॉन्ट्रैक्ट पदों के लिए अलग-अलग वेतन मिलता था। इस पॉलिसी से अलग-अलग विभागों में एक जैसे कॉन्ट्रैक्ट पदों के लिए समान वेतन तय है। कर्मचारी संघ ने की है यह मांगबता दें कि नई नीति के तहत कॉन्ट्रैक्ट पर काम करने वाले कर्मचारियों का वेतन चपरासी पद के लिए 21,800 रुपये से लेकर असिस्टेंट इंजीनियर और असिस्टेंट मैनेजर के लिए 70,000 रुपये प्रति माह तक रखा गया है। कर्मचारी संघ की मांग है कि जिन विभागों में 2023 की पॉलिसी लागू नहीं हुई है वे भी कॉन्ट्रैक्ट पर काम करने वाले कर्मचारियों को बढ़ी हुई सेलरी जारी करें।
इंडिया गठबंधन में कांग्रेस रहेगी तो हम नहीं…. इंडिया गठबंधन में सहयोगियों दलों ने खोला मोर्चा

नई दिल्ली। हाल ही में तमिलनाडु (Tamil Nadu), केरल (Kerala) और पश्चिम बंगाल (West Bengal) के विधानसभा चुनावों (Assembly Elections) के बाद ‘इंडिया’ (INDIA) गठबंधन में दरारें गहरी होती जा रही हैं। सोमवार को नई दिल्ली में हुई विपक्षी दलों की अहम बैठक में वीसीके (VCK) और वामपंथी दलों ने कांग्रेस की चुनावी रणनीति को लेकर जोरदार हमला बोला है। तमिलनाडु की सत्ता से बाहर हुई डीएमके की नाराजगी इस कदर बढ़ गई है कि उसने गठबंधन में कांग्रेस के मौजूद रहने पर ही बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। डीएमके की दो टूक- ‘कांग्रेस रहेगी तो हम नहीं’डीएमके के सूत्रों ने स्पष्ट किया है कि उनकी पार्टी अब इंडिया गठबंधन का हिस्सा तभी बनेगी, जब कांग्रेस इस गुट का हिस्सा नहीं होगी। डीएमके के एक वरिष्ठ नेता ने अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए कहा, “हम चुनाव प्रणाली ‘SIR’ के मुद्दे पर भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) को भेजे जाने वाले पत्र पर भी हस्ताक्षर नहीं करेंगे।” नई दिल्ली में हुई इस बैठक में कांग्रेस द्वारा डीएमके से नाता तोड़ने का मुद्दा पूरी तरह छाया रहा और सहयोगियों ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया दी। राहुल गांधी पर वामदलों का सीधा हमलाकेरल में कांग्रेस और वामदलों के बीच की तल्खी बैठक के दौरान खुलकर सामने आ गई। सीपीएम नेता जॉन ब्रिटास, सीपीआई के संतोष कुमार और डी. राजा ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी के उस बयान पर कड़ी आपत्ति जताई, जिसमें उन्होंने केरल चुनाव के दौरान लेफ्ट को ‘बीजेपी की बी-टीम’ बताया था। वामपंथी नेताओं ने डीएमके के गठबंधन से अलग होने के लिए कांग्रेस को ही जिम्मेदार ठहराया और कई आरोप लगाए। जैसे- कांग्रेस ने तमिलनाडु चुनाव खत्म होने के ठीक बाद अचानक टीवीके (TVK) के पाले में जाकर द्रविड़ पार्टी (डीएमके) को उकसाने का काम किया है। कांग्रेस के इसी रवैये के कारण डीएमके ने गठबंधन छोड़ने जैसा बड़ा कदम उठाया। कांग्रेस की रणनीति से बिखर रहा है विपक्ष: वीसीकेबैठक के दौरान वीसीके (VCK) के प्रमुख तोल थिरुमावलवन ने कांग्रेस को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि पार्टी के हालिया फैसलों ने कई सहयोगी दलों के भीतर गहरा असंतोष पैदा कर दिया है। उन्होंने गठबंधन के भविष्य पर चिंता जताते हुए कुछ अहम बिंदु रखे: जैसे- केरल, पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में कांग्रेस की जो रणनीति रही है, उसने गठबंधन के उन प्रमुख स्तंभों को कमजोर किया है जो अब तक मजबूती से खड़े थे। कांग्रेस के इस रवैये से मुख्य रूप से डीएमके, टीएमसी (TMC) और सीपीएम (CPM) जैसी अहम पार्टियों को नुकसान पहुंचा है। वीसीके प्रमुख ने स्पष्ट किया कि विपक्षी एकजुटता के बड़े लक्ष्य को देखते हुए कांग्रेस की यह रणनीति न तो वांछनीय है और न ही किसी भी तरह से फायदेमंद। सूत्रों ने बताया कि बैठक में शामिल माकपा के राज्यसभा सदस्य ने राहुल गांधी और कांग्रेस के आरोपों का विषय उठाया। भाकपा महासचिव डी राजा ने भी इसको लेकर नाराजगी जताई कि राष्ट्रीय स्तर पर एक व्यापक गठबंधन का हिस्सा होने के बावजूद कांग्रेस द्वारा केरल में वाम नेताओं पर गंभीर आरोप लगाए गए। सूत्रों के अनुसार, राहुल गांधी ने कहा कि प्रदेश कांग्रेस कमेटी की नीति के तहत पार्टी की ओर से चुनाव में एक विषय उठाया गया था। विपक्ष के कुछ अन्य नेताओं ने भी कहा कि अब इन बातों को भूलकर आगे बढ़ना है और मिलकर भाजपा का मुकाबला करना है। सूत्रों ने बताया कि तृणमूल कांग्रेस की नेता ममता बनर्जी ने कहा कि गठबंधन के घटक दलों को एक दूसरे की आलोचना से बचना चाहिए। क्या रहा बैठक का नतीजा?विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया’ की बैठक में शामिल कई नेताओं ने पुराने गिले-शिकवे भूलकर, बड़ा दिल दिखाते हुए और एकजुट होकर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) तथा मोदी सरकार को चुनौती देने का सुझाव दिया। सूत्रों ने बताया कि तृणमूल कांग्रेस की प्रमुख ममता बनर्जी ने इस बात की जोरदार पैरवी की कि गठबंधन में शामिल दलों को एक दूसरे की आलोचना करने से बचना चाहिए। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में हार के बाद इस गठबंधन को लेकर उनके रुख में बड़ा बदलाव आया है। बैठक में ममता और कांग्रेस संसदीय दल की प्रमुख सोनिया गांधी के बीच गर्मजोशी भरी मुलाकात भी हुई। सूत्रों ने बताया कि बैठक औपचारिक रूप से शुरू होने से पहले ममता ने सोनिया गांधी से करीब 10 मिनट लंबी बातचीत की। कांग्रेस ने दोनों नेताओं की एक-दूसरे को गले लगाते हुए तस्वीर भी अपने सोशल मीडिया मंच पर साझा की।
केन्द्र सरकार ने Ujjwala Yojna में किया बड़ा बदलाव…. अब साल में मिलेंगे सिर्फ 4 सिलेंडर

नई दिल्ली। देश में हाल ही में घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमतों (Domestic LPG Cylinder Prices) में तेल वितरण कंपनियों ने 29 रुपये की बढ़ोतरी कर महंगाई का बम फोड़ा था. ये तीन महीने में 14.2 किलोग्राम वाले LPG Cylinder की कीमत में दूसरी बढ़ोतरी थी. सिलेंडर महंगा होने के बाद अब सरकार (Government) ने उज्ज्वला योजना (Ujjwala Yojna) के लाभार्थियों को बड़ा झटका दिया है. इस सरकारी स्कीम के तहत मिलने वाले रियायती सिलेंडरों की संख्या में बड़ी कटौती की गई है। इसके साथ ही पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के अनुसार, PMUY के लाभार्थियों को पहले चार रिफिल पर प्रति सिलेंडर 300 रुपये का डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) मिलेगा. उज्ज्वला योजना वाले एक आम परिवार में औसतन साल भर में लगभग चार रिफिल की खपत होती है, पहले PMUY लाभार्थियों को साल में 9 रिफिल पर DBT मिलता था। 9 नहीं, अब सिर्फ 4 सिलेंडरप्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना (PMUY) के तहत अब तक लाभार्थियों के लिए रियायती एलपीजी सिलेंडरों की संख्या 9 थी, जिसे कम करते हुए सरकार ने सिर्फ 4 कर दिया है. केंद्र सरकार के इस बड़े फैसले को लेकर अधिकारियों ने बताया कि ये कदम वित्तीय सहायता को वास्तविक औसत घरेलू खपत के स्तर के अनुरूप बनाता है। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव प्रवीण मल खानूजा ने इस संबंध में कहा कि संशोधित पात्रता उज्ज्वला परिवारों की औसत सालाना गैस खपत को ध्यान में रखकर तय की गई है. 2016 में शुरुआत, अब तक ऐसे घटी संख्यामोदी सरकार ने प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना की शुरुआत मई 2016 में की थी और इसका उद्देश्य वंचित परिवारों को स्वच्छ खाना पकाने का ईंधन उपलब्ध कराना था. योजना की शुरुआत में इसके लाभार्थियों को सालाना 12 रियायती 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू एलपीजी सिलेंडर दिए जाते थे. लेकिन फिर सरकार ने इस वार्षिक कोटे को कम करते 9 कर दिया था और अब इसे घटाकर सिर्फ चार करने का फैसला लिया गया है. उज्ज्वला योजना के तहत मिलने वाले सिलेंडर पर सरकार सब्सिडी (LPG Cylinder Subsidy) भी देती है. इन्हें किफायती बनाए रखने के लिए सरकार ने मई 2022 में 14.2 किलोग्राम के घरेलू एलपीजी सिलेंडर पर 200 रुपये की सब्सिडी शुरू की, जिसे अगले साल यानी अक्टूबर 2023 में बढ़ाकर 300 रुपये प्रति सिलेंडर कर दिया गया था. सरकार की ओर से दी जाने वाली ये एलपीजी सब्सिडी हर रिफिल खरीद के बाद लाभार्थियों के बैंक खातों में सीधे जमा की जाती है। उज्ज्वला योजना के तहत सिलेंडर का दामबता दें कि 7 जून को घरेलू सिलेंडर की कीमतों में 29 रुपये की बढ़ोतरी की गई थी, जिसके बाद दिल्ली में 14.2 किलोग्राम एलपीजी सिलेंडर की कीमत बढ़कर 942 रुपये हो गई. इससे पहले 7 मार्च को तेल वितरण कंपनियों ने 60 रुपये की बढ़ोतरी की थी. इस हिसाब से 300 रुपये की सब्सिडी के साथ उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों को अपने पहले चार सिलेंडरों के लिए प्रति रिफिल 642 रुपये का भुगतान करना होगा. पेट्रोलियम मंत्रालय के आंकड़ों को देखें, तो सरकार ने 2022 से अब तक एलपीजी सब्सिडी के रूप में 52,000 करोड़ रुपये दिए हैं. हाल ही में घरेलू खुदरा कीमतों में बढ़ोतरी के बावजूद, सरकारी तेल विपणन कंपनियां बेचे गए प्रत्येक 14.2 किलोग्राम के सिलेंडर पर लगभग 700 रुपये का घाटा उठा रही हैं।