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MP SAHITYA ACADEMY: साहित्य की दुनिया में चमके सुयश त्यागी, ‘छूटते किनारे’ को मिला राजा वीरसिंह देव सम्मान

BJP SANYOJAK

MP SAHITYA ACADEMY: भोपाल। भोपाल में मध्यप्रदेश साहित्य जगत के लिए बड़ी खबर सामने आई है। मध्यप्रदेश साहित्य अकादमी ने वर्ष 2024 के पुरस्कारों का ऐलान कर दिया है। इस बार कुल 56 लेखकों को सम्मानित किया जाएगा। इनमें 30 लेखक प्रादेशिक स्तर पर और 26 लेखक राष्ट्रीय स्तर पर चुने गए हैं। साथ ही चयनित लेखकों को 1 लाख रुपये और 51 हजार रुपये की सम्मान राशि भी प्रदान की जाएगी।       भाजपा सोशल मीडिया संयोजक भी शामिल घोषित पुरस्कारों में प्रदेश भाजपा के सोशल मीडिया संयोजक सुयश त्यागी का नाम भी शामिल है। उन्हें उनकी चर्चित कृति ‘छूटते किनारे’ के लिए राजा वीरसिंह देव पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा। यह सम्मान साहित्य के क्षेत्र में उनके योगदान और लेखन को मिली महत्वपूर्ण पहचान माना जा रहा है। MP Agriculture Growth: CM मोहन यादव के नेतृत्व में MP ने रचा नया रिकॉर्ड, सब्जी उत्पादन में तीसरे स्थान पर MP साहित्यकारों का हर साल सम्मान मध्यप्रदेश साहित्य अकादमी हर साल अलग-अलग विधाओं में अच्छा साहित्य लिखने वाले लेखकों को सम्मान देती है। इस साल भी प्रदेश और देश के कई प्रसिद्ध लेखकों को उनकी रचनात्मक उपलब्धियों के लिए चुना गया है। देवास में रास्ता विवाद से बवाल: 400 परिवारों का चक्काजाम, स्थायी समाधान की मांग तेज जल्द आयोजित होगा पुरस्कार समारोह अकादमी ने बताया है कि जल्द ही एक पुरस्कार समारोह आयोजित किया जाएगा, जिसमें सभी चुने गए साहित्यकारों को सम्मानित किया जाएगा।

मनुस्मृति और भारतीय संविधान : नीति-निदेशक तत्वों का तुलनात्मक दृष्टिकोण..

लेखक: डॉ. राकेश कुमार आर्य भारतीय संविधान में अनुच्छेद 36 से 51 तक राज्य के नीति-निदेशक तत्वों का उल्लेख किया गया है। ये ऐसे संवैधानिक निर्देश हैं जो राज्य को लोककल्याण की दिशा में मार्गदर्शन प्रदान करते हैं, यद्यपि इन्हें न्यायालय द्वारा प्रवर्तित नहीं कराया जा सकता। संविधान सभा के सलाहकार सर बी.एन. राव ने इन तत्वों को नैतिक मार्गदर्शक सिद्धांतों के रूप में रखने का सुझाव दिया था, जिसे संविधान सभा ने स्वीकार किया। नीति-निदेशक तत्वों का मूल उद्देश्य यह है कि राज्य एक कल्याणकारी व्यवस्था की ओर अग्रसर हो। अनुच्छेद 37 स्पष्ट करता है कि ये तत्व न्यायालय द्वारा लागू नहीं कराए जा सकते, फिर भी शासन की नीतियों के निर्माण में इनका विशेष महत्व है। अनुच्छेद 38 से 51 तक विभिन्न सामाजिक, आर्थिक और प्रशासनिक उद्देश्यों को रेखांकित किया गया है। इनमें सामाजिक न्याय, समानता, आजीविका के अवसर, श्रमिक कल्याण, समान वेतन, शिक्षा, स्वास्थ्य, ग्राम पंचायतों का सशक्तिकरण, पर्यावरण संरक्षण, समान नागरिक संहिता तथा अंतरराष्ट्रीय शांति जैसे व्यापक विषय शामिल हैं। अनुच्छेद 39 विशेष रूप से राज्य को यह निर्देश देता है कि वह संपत्ति और संसाधनों के समान वितरण की दिशा में कार्य करे तथा पुरुषों और महिलाओं को समान कार्य के लिए समान वेतन सुनिश्चित करे। इसी प्रकार अनुच्छेद 39क में निःशुल्क विधिक सहायता और समान न्याय की व्यवस्था की बात कही गई है। अनुच्छेद 41 से 43 तक रोजगार, शिक्षा, सामाजिक सुरक्षा और श्रमिकों के जीवन स्तर में सुधार जैसे विषयों पर बल दिया गया है। वहीं अनुच्छेद 44 समान नागरिक संहिता की अवधारणा प्रस्तुत करता है, जिसका उद्देश्य देश में समान कानून व्यवस्था स्थापित करना है। अनुच्छेद 45 और 46 शिक्षा, विशेषकर बाल शिक्षा तथा कमजोर वर्गों के शैक्षिक और आर्थिक उत्थान पर केंद्रित हैं। इसके बाद अनुच्छेद 47 सार्वजनिक स्वास्थ्य और पोषण स्तर सुधारने का दायित्व राज्य पर डालता है। अनुच्छेद 48 कृषि और पशुपालन तथा 48क पर्यावरण संरक्षण पर बल देता है। अनुच्छेद 49 राष्ट्रीय महत्व के स्मारकों के संरक्षण, अनुच्छेद 50 न्यायपालिका और कार्यपालिका के पृथक्करण तथा अनुच्छेद 51 अंतरराष्ट्रीय शांति और सहयोग को बढ़ावा देने का निर्देश देता है। इस संदर्भ में लेखक द्वारा मनुस्मृति की परंपरा का उल्लेख करते हुए यह विचार प्रस्तुत किया गया है कि प्राचीन भारतीय राजनीतिक चिंतन में भी राज्य के कर्तव्यों को लोककल्याण, अनुशासन और न्याय व्यवस्था से जोड़ा गया था। मनु के अनुसार राजा का प्रमुख कर्तव्य प्रजा की रक्षा, न्याय व्यवस्था का पालन और अपराध नियंत्रण माना गया है। लेख में यह भी बताया गया है कि महर्षि मनु के विचारों के अनुसार शासक को संसाधनों का उपयोग लोकहित में करना चाहिए तथा प्राप्त संपदा को शिक्षा, धर्म, अनाथों और समाज कल्याण में लगाना चाहिए। साथ ही शासक के लिए यह भी आवश्यक माना गया है कि वह राज्य की सुरक्षा और प्रशासनिक व्यवस्था को सुदृढ़ बनाए रखे। राजा के विभिन्न रूपों—जैसे इंद्र, सूर्य, वायु, यम, वरुण, चंद्र आदि—के माध्यम से शासन के विविध गुणों का प्रतीकात्मक वर्णन किया गया है, जिसमें न्याय, अनुशासन, लोकप्रियता, निगरानी और दंड व्यवस्था जैसे तत्वों को जोड़ा गया है। समग्र रूप से यह लेख यह स्थापित करने का प्रयास करता है कि भारतीय संविधान के नीति-निदेशक तत्व आधुनिक लोकतांत्रिक राज्य की लोककल्याणकारी अवधारणा को स्पष्ट करते हैं, जबकि प्राचीन भारतीय राजनीतिक चिंतन में भी राज्य के कर्तव्यों को नैतिक और सामाजिक उत्तरदायित्वों से जोड़ने की परंपरा रही है। इस प्रकार दोनों दृष्टिकोणों में भिन्न ऐतिहासिक संदर्भों के बावजूद लोककल्याण, न्याय और सुव्यवस्था की भावना को एक समान रूप से महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त है।

क्षेत्रीय सुरक्षा संकट गहराया, मिसाइल हमलों की आशंका के बीच कुवैत ने एयरस्पेस बंद कर उठाया एहतियाती कदम

नई दिल्ली । मिडिल ईस्ट में लगातार बढ़ते सैन्य तनाव के बीच कुवैत ने एक महत्वपूर्ण और एहतियाती कदम उठाते हुए अपने हवाई क्षेत्र को अस्थायी रूप से बंद करने की घोषणा की है। यह निर्णय ऐसे समय लिया गया है जब क्षेत्र में सुरक्षा हालात लगातार संवेदनशील बने हुए हैं और नागरिक विमानन गतिविधियों पर संभावित खतरों की आशंका बढ़ गई है। कुवैत के इस कदम को क्षेत्रीय सुरक्षा रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है, जिसका उद्देश्य यात्रियों, विमान सेवाओं और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। कुवैत के नागरिक उड्डयन प्रशासन की ओर से जारी निर्देशों के बाद देश के हवाई क्षेत्र में नागरिक विमानों की आवाजाही रोक दी गई। इसके साथ ही कई अंतरराष्ट्रीय और क्षेत्रीय उड़ानों का मार्ग बदलकर उन्हें वैकल्पिक हवाई अड्डों की ओर भेजा गया। कुछ समय तक कई विमान कुवैत की सीमा के बाहर मंडराते रहे, जिसके बाद उन्हें नए मार्गों पर भेजा गया। इस फैसले से क्षेत्रीय विमानन नेटवर्क पर भी असर पड़ने की संभावना जताई जा रही है। सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार हाल के दिनों में क्षेत्र में बढ़ी सैन्य गतिविधियों और मिसाइल हमलों की आशंकाओं को देखते हुए अतिरिक्त सतर्कता बरती जा रही है। इसी क्रम में कुवैत की वायु रक्षा प्रणालियों को भी सक्रिय रखा गया है। रक्षा तंत्र लगातार हवाई गतिविधियों पर नजर बनाए हुए है ताकि किसी भी संभावित खतरे का समय रहते जवाब दिया जा सके। कुवैत सरकार का मानना है कि मौजूदा परिस्थितियों में नागरिक विमानन संचालन को सामान्य रूप से जारी रखना जोखिमपूर्ण हो सकता है। इसलिए सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए एयरस्पेस बंद करने का निर्णय लिया गया। अधिकारियों का कहना है कि यह कदम पूरी तरह एहतियाती है और स्थिति की निरंतर समीक्षा की जा रही है। हालात सामान्य होने के बाद हवाई क्षेत्र को दोबारा खोले जाने पर निर्णय लिया जाएगा। विशेषज्ञों का मानना है कि मिडिल ईस्ट में बढ़ता तनाव केवल सैन्य मोर्चे तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका प्रभाव व्यापार, परिवहन और अंतरराष्ट्रीय संपर्कों पर भी पड़ सकता है। खाड़ी क्षेत्र दुनिया के सबसे व्यस्त विमानन गलियारों में शामिल है और यहां किसी भी प्रकार की सुरक्षा चुनौती का असर कई देशों की उड़ान सेवाओं पर पड़ता है। ऐसे में कुवैत का फैसला क्षेत्रीय विमानन सुरक्षा के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हाल के दिनों में क्षेत्र में हुई घटनाओं ने सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है। कुवैत ने यह भी संकेत दिया है कि नागरिक विमानन यातायात को किसी प्रकार के संभावित खतरे से बचाने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के साथ-साथ हवाई निगरानी तंत्र को भी सक्रिय रखा गया है ताकि किसी भी आपात स्थिति से प्रभावी ढंग से निपटा जा सके। कुवैत द्वारा एयरस्पेस बंद करने का यह निर्णय इस बात का संकेत है कि मिडिल ईस्ट में जारी तनाव का प्रभाव अब सीधे नागरिक ढांचे और अंतरराष्ट्रीय परिवहन व्यवस्थाओं पर दिखाई देने लगा है। आने वाले दिनों में क्षेत्रीय हालात किस दिशा में बढ़ते हैं, इस पर न केवल सुरक्षा एजेंसियों बल्कि वैश्विक विमानन क्षेत्र की भी नजर बनी रहेगी।

थाली में पानी गिरने से शुरू हुआ विवाद, मारपीट में महिला घायल: टांके लगे, 5 दिन बाद भी FIR दर्ज नहीं, एसपी ऑफिस के चक्कर लगा रही पीड़िता

मध्‍य प्रदेश । शिवपुरी जिले के सीहोर थाना क्षेत्र के ग्राम गनियार में एक मामूली-सी बात ने बड़ा विवाद खड़ा कर दिया, जो अब पुलिस कार्रवाई को लेकर सवालों के घेरे में है। गांव निवासी सीमा कुशवाह ने दो पड़ोसी भाइयों पर गंभीर मारपीट का आरोप लगाया है। पीड़िता का कहना है कि घटना के बाद से वह लगातार न्याय की मांग कर रही हैं, लेकिन पांच दिन बीत जाने के बावजूद अब तक आरोपियों के खिलाफ FIR दर्ज नहीं की गई है। घटना 7 जून की सुबह की बताई जा रही है, जब सीमा कुशवाह अपने घर में खाना खा रही थीं। इसी दौरान पड़ोसी दौलत सिंह कुशवाह ने कथित रूप से अपने घर की पाइपलाइन चालू कर दी, जिससे पानी बहकर उनकी थाली में गिर गया। इस बात को लेकर सीमा ने विरोध जताया, जिसके बाद दोनों पक्षों के बीच कहासुनी शुरू हो गई। देखते ही देखते मामला इतना बढ़ गया कि विवाद ने हिंसक रूप ले लिया। पीड़िता का आरोप है कि विवाद के दौरान दौलत सिंह ने उनके साथ मारपीट की, जिससे उनके चेहरे और नाक के पास गंभीर चोटें आईं। चोट इतनी गंभीर थी कि उन्हें अस्पताल ले जाना पड़ा, जहां डॉक्टरों ने टांके लगाए। इसी दौरान दूसरे आरोपी सतेन्द्र कुशवाह भी मौके पर पहुंच गया और दोनों भाइयों ने मिलकर उनके साथ मारपीट की। जब पीड़िता के पति बीच-बचाव करने आए, तो उनके साथ भी मारपीट की गई, जिससे स्थिति और बिगड़ गई। घटना के बाद पीड़िता ने सीहोर थाने में शिकायत दर्ज कराने की कोशिश की, लेकिन उनका आरोप है कि पुलिस ने मामला दर्ज नहीं किया। इसके बाद उन्होंने जनसुनवाई में पुलिस अधीक्षक से शिकायत की। सीमा कुशवाह के अनुसार, एसपी ने कार्रवाई का आश्वासन दिया था और उन्हें थाने भेजा गया, लेकिन वहां भी FIR दर्ज नहीं की गई। इसके बाद उन्हें वापस एसपी कार्यालय भेज दिया गया, जिससे वे लगातार चक्कर काटने को मजबूर हैं। पीड़िता का कहना है कि वह पिछले पांच दिनों से न्याय की मांग कर रही हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। उन्होंने एक बार फिर एसपी कार्यालय पहुंचकर आरोपियों के खिलाफ FIR दर्ज करने, जांच कराने और अपने परिवार की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है। यह मामला न केवल एक घरेलू विवाद से शुरू होकर गंभीर मारपीट तक पहुंच गया, बल्कि पुलिस कार्रवाई की धीमी गति को लेकर भी सवाल खड़े कर रहा है। पीड़िता लगातार प्रशासनिक दफ्तरों के चक्कर लगा रही हैं, जबकि मामला अभी तक दर्ज नहीं हो सका है। अब देखना यह होगा कि पुलिस इस मामले में कब तक कार्रवाई करती है और पीड़िता को न्याय मिल पाता है या नहीं।

MP Agriculture Growth: CM मोहन यादव के नेतृत्व में MP ने रचा नया रिकॉर्ड, सब्जी उत्पादन में तीसरे स्थान पर MP

CM MOHAN YADAV NEWS

MP Agriculture Growth: भोपाल। मध्य प्रदेश के किसानों की मेहनत अब नई मिसाल बन रही है। खेती में बदलते तौर-तरीकों, आधुनिक तकनीकों के इस्तेमाल और सरकार की योजनाओं का बहतर असर अब साफ दिखाई देने लगा है। यही वजह है कि पिछले चार वर्षों में प्रदेश के सब्जी उत्पादन में 21.58 लाख मीट्रिक टन की रिकॉर्ड वृद्धि हुई है। इस उपलब्धि के साथ मध्य प्रदेश देश में सब्जी उत्पादन में तीसरे स्थान पर पहुंच गया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में वर्ष 2026 को ‘किसान कल्याण वर्ष’ के रूप में मनाया जा रहा है। सरकार का फोकस किसानों की आय बढ़ाने और खेती को अधिक लाभकारी बनाने पर है। MP राज्यसभा चुनाव: BJP ने तीनों सीटें निर्विरोध जीतीं, निर्वाचन प्रमाण पत्र सौंपे गए किसानों की मेहनत लाई रंग उद्यानिकी एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2022-23 में प्रदेश में 236.41 लाख मीट्रिक टन सब्जियों का उत्पादन हुआ था। यह बढ़कर वर्ष 2024-25 में 257.99 लाख मीट्रिक टन तक पहुंच गया। विशेषज्ञों का मानना है कि बेहतर सिंचाई सुविधाएं, गुणवत्तापूर्ण बीज, आधुनिक खेती के तरीके और किसानों की बढ़ती जागरूकता ने इस उपलब्धि में अहम भूमिका निभाई है। सरकार का बड़ा गैस सुधार अभियान, PNG वाले उपभोक्ताओं को छोड़ना पड़ सकता है LPG कनेक्शन खेती को बना रहे हैं ज्यादा लाभकारी मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का मानना है कि आज के दौर में किसानों की आय बढ़ाने के लिए केवल पारंपरिक खेती पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं है। इसलिए सरकार उद्यानिकी, पशुपालन, मत्स्य पालन और खाद्य प्रसंस्करण जैसे क्षेत्रों को भी बढ़ावा दे रही है। सब्जी उत्पादन किसानों के लिए बेहतर कमाई का जरिया बनकर उभरा है, क्योंकि कम जमीन में भी अच्छी आय प्राप्त की जा सकती है। MP Jan Kalyan Shivir 2026: MP में 12 से 18 जून तक लगेंगे जनकल्याण शिविर, CM मोहन यादव ने दिए निर्देश प्याज की खेती में बढ़ा किसानों का भरोसा प्रदेश में प्याज, आलू, टमाटर, बैंगन, भिंडी, मटर, फूलगोभी और पत्ता गोभी जैसी कई सब्जियों की खेती बड़े पैमाने पर की जा रही है। इनमें प्याज किसानों की पहली पसंद बनकर उभरा है। वर्ष 2022-23 में प्रदेश में प्याज का रकबा 2.17 लाख हेक्टेयर था, जो बढ़कर 2024-25 में करीब 2.30 लाख हेक्टेयर हो गया। MPL 2026: इंदौर में क्रिकेट का तिहरा धमाका, मालवा-निमाड़ सहित तीन बड़े मुकाबले आज 54 हजार हेक्टेयर में होगा विस्तार सरकार ने किसान कल्याण वर्ष के दौरान सब्जी उत्पादन को और बढ़ावा देने के लिए 54 हजार हेक्टेयर अतिरिक्त क्षेत्र में सब्जी फसलों का विस्तार करने का लक्ष्य रखा है। इसमें प्याज, आलू, टमाटर, मटर और अन्य उच्च मूल्य वाली सब्जियों को प्राथमिकता दी जाएगी।

महाकाल की सवारी के हाथी श्यामू पर विवाद गहराया, ब्लड टेस्ट रोका गया: मालिक ने जांच टीम का किया विरोध, डॉक्टरों ने जताई गंभीर चिंता

मध्‍य प्रदेश । उज्जैन में भगवान महाकाल की भव्य सवारी में वर्षों से शामिल रहे हाथी श्यामू को लेकर एक बार फिर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। गुरुवार को पन्ना टाइगर रिजर्व, इंदौर और उज्जैन की संयुक्त पशु चिकित्सकीय टीम हाथी के स्वास्थ्य परीक्षण और ब्लड सैंपल लेने के लिए पहुंची थी, लेकिन हाथी के मालिक और परिजनों के विरोध के चलते जांच पूरी नहीं हो सकी। इस दौरान काफी देर तक मौके पर तनावपूर्ण स्थिति बनी रही, जिसके बाद टीम को बिना ब्लड सैंपल लिए ही वापस लौटना पड़ा और केवल मल एवं मूत्र के नमूने एकत्र किए गए। जानकारी के अनुसार, यह टीम इंदौर चिड़ियाघर प्रभारी उत्तम यादव, उज्जैन के पशु चिकित्सक डॉ. मुकेश जैन और पन्ना टाइगर रिजर्व के विशेषज्ञ डॉ. संजय गुप्ता के नेतृत्व में साईनाथ कॉलोनी स्थित हाथी श्यामू के स्थान पर पहुंची थी। टीम का उद्देश्य हाथी की वर्तमान स्वास्थ्य स्थिति का वैज्ञानिक परीक्षण करना था, लेकिन जैसे ही ब्लड सैंपल लेने की प्रक्रिया शुरू की गई, हाथी के मालिक सरमन गिरी और उनके परिवार ने इसका विरोध कर दिया। विरोध इतना बढ़ गया कि लंबे समय तक बहस और असहमति की स्थिति बनी रही, जिसके चलते टीम को बिना रक्त नमूना लिए लौटना पड़ा। पशु चिकित्सकों के अनुसार हाथी श्यामू की हालत सामान्य नहीं है। डॉक्टरों ने बताया कि हाथी के पैरों में गंभीर समस्या देखी गई है और उसके पैर धीरे-धीरे मुड़ने लगे हैं, जिससे उसकी चलने की क्षमता प्रभावित हो रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस स्थिति में हाथी कभी भी गिर सकता है, जो उसके लिए जानलेवा साबित हो सकता है। डॉक्टरों ने स्पष्ट किया कि सही स्थिति जानने के लिए ब्लड टेस्ट बेहद जरूरी है, लेकिन मालिक के विरोध के कारण यह संभव नहीं हो सका। वहीं दूसरी ओर हाथी के मालिक सरमन गिरी ने सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। उनका कहना है कि श्यामू पूरी तरह स्वस्थ है और वर्षों से महाकाल की सवारी में नियमित रूप से शामिल होता आ रहा है। उन्होंने कहा कि यदि हाथी वास्तव में बीमार होता तो वह 2016 से लगातार सवारी का हिस्सा नहीं बन पाता। सरमन गिरी ने यह भी आरोप लगाया कि कुछ लोग हाथी को यहां से हटाकर वनतारा या किसी अन्य संस्थान में भेजना चाहते हैं, इसलिए उसे जानबूझकर बीमार बताया जा रहा है। मालिक ने यह भी दावा किया कि हाथी के सभी वैध दस्तावेज उनके पास मौजूद हैं और वह 2006 से उसके स्वामी हैं। उन्होंने जांच टीम पर अनावश्यक दबाव बनाने का आरोप लगाया और ब्लड सैंपल लेने का विरोध किया। इसी बीच मौके पर माहौल तनावपूर्ण बना रहा और जांच प्रक्रिया अधूरी रह गई। गौरतलब है कि हाथी श्यामू के स्वास्थ्य को लेकर सितंबर 2025 से विवाद लगातार जारी है। इससे पहले भी वन विभाग और विशेषज्ञों की टीम कई बार उसकी जांच और स्थानांतरण के प्रयास कर चुकी है, लेकिन हर बार मालिक के विरोध के कारण प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी। फिलहाल, अब सभी की नजर मल और मूत्र के सैंपल की रिपोर्ट पर टिकी हुई है, जिसके आधार पर ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि हाथी श्यामू वास्तव में किसी गंभीर बीमारी से पीड़ित है या नहीं। यह मामला अब धार्मिक आस्था और पशु स्वास्थ्य सुरक्षा के बीच बहस का बड़ा विषय बन गया है।

महंगाई दर में लगातार तीसरे महीने उछाल, ट्रंप के ‘मुझे महंगाई पसंद है’ बयान से गरमाई अमेरिकी राजनीति

नई दिल्ली । अमेरिका की अर्थव्यवस्था एक बार फिर बढ़ती महंगाई की चुनौती से जूझ रही है। गैस और ऊर्जा कीमतों में लगातार वृद्धि के चलते देश की खुदरा महंगाई दर मई महीने में तीन वर्षों के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई है। यह स्थिति ऐसे समय में सामने आई है जब अमेरिकी प्रशासन आर्थिक स्थिरता और उपभोक्ताओं को राहत देने के दावों पर जोर दे रहा है। महंगाई के नए आंकड़ों ने न केवल आर्थिक विशेषज्ञों बल्कि राजनीतिक विश्लेषकों का भी ध्यान अपनी ओर खींचा है। ताजा आर्थिक आंकड़ों के अनुसार मई में खुदरा महंगाई सालाना आधार पर 4.2 प्रतिशत दर्ज की गई, जो पिछले महीने के मुकाबले अधिक है। यह लगातार तीसरा महीना है जब महंगाई दर में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। मासिक स्तर पर भी कीमतों में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई, जिससे उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त आर्थिक दबाव बढ़ा है। विशेष रूप से ईंधन और ऊर्जा क्षेत्र की कीमतों में बढ़ोतरी को इस उछाल का प्रमुख कारण माना जा रहा है। अर्थशास्त्रियों का मानना है कि महंगाई का यह स्तर अमेरिकी केंद्रीय बैंक के निर्धारित लक्ष्य से काफी ऊपर है। फेडरल रिजर्व लंबे समय से महंगाई को नियंत्रित करने और आर्थिक संतुलन बनाए रखने की कोशिश कर रहा है, लेकिन ताजा आंकड़ों ने नीति निर्माताओं की चुनौतियों को और बढ़ा दिया है। यदि कीमतों में इसी तरह वृद्धि जारी रहती है तो ब्याज दरों और मौद्रिक नीतियों को लेकर नए निर्णयों की आवश्यकता पड़ सकती है। महंगाई के बढ़ते दबाव के बीच राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की एक टिप्पणी ने राजनीतिक माहौल को और गर्म कर दिया है। महंगाई से जुड़े सवालों के जवाब में उन्होंने आश्चर्यजनक रूप से सकारात्मक रुख अपनाते हुए कहा कि उन्होंने महंगाई को लेकर चिंता करना छोड़ दिया है और अब उन्हें यह पसंद है। उनके इस बयान ने राजनीतिक गलियारों में नई बहस छेड़ दी है। विश्लेषकों का कहना है कि आर्थिक मुद्दे अमेरिकी मतदाताओं के लिए हमेशा महत्वपूर्ण रहे हैं और महंगाई सीधे आम लोगों के दैनिक जीवन को प्रभावित करती है। ऐसे में राष्ट्रपति की यह टिप्पणी विपक्षी दलों को सरकार पर हमला करने का अवसर दे सकती है। राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि बढ़ती जीवन-यापन लागत पहले से ही अमेरिकी परिवारों की चिंता का विषय बनी हुई है। ट्रंप के बयान के बाद विपक्षी नेताओं और समर्थकों ने इसे लेकर तीखी प्रतिक्रियाएं दी हैं। उनका आरोप है कि सरकार आम लोगों की आर्थिक परेशानियों को गंभीरता से नहीं ले रही है। दूसरी ओर प्रशासन समर्थकों का कहना है कि अमेरिकी अर्थव्यवस्था अभी भी मजबूत स्थिति में है और दीर्घकालिक विकास के संकेत सकारात्मक बने हुए हैं। आने वाले महीनों में महंगाई का मुद्दा अमेरिकी राजनीति के केंद्र में रह सकता है। मध्यावधि चुनावों की तैयारियों के बीच आर्थिक प्रदर्शन, रोजगार, ऊर्जा कीमतें और उपभोक्ता खर्च जैसे विषय मतदाताओं के फैसलों को प्रभावित कर सकते हैं। राजनीतिक दल भी इन मुद्दों को चुनावी रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा बना रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि महंगाई पर प्रभावी नियंत्रण नहीं हो पाया तो यह केवल आर्थिक चुनौती नहीं बल्कि राजनीतिक चुनौती भी बन सकती है। फिलहाल बाजार, निवेशक और आम नागरिक सभी आगामी आर्थिक नीतियों और सरकारी कदमों पर नजर बनाए हुए हैं। अमेरिका की आर्थिक दिशा और राजनीतिक बहस दोनों पर महंगाई का प्रभाव आने वाले समय में और स्पष्ट रूप से दिखाई दे सकता है।

उज्जैन में ‘पति-पत्नी और वो’ का हाई-वोल्टेज ड्रामा: रेस्टोरेंट में महिला मित्र के साथ दिखते ही जमकर मारपीट, वीडियो वायरल

मध्‍य प्रदेश । उज्जैन शहर में बुधवार शाम एक पारिवारिक विवाद ने अचानक सड़क पर बवाल का रूप ले लिया, जब पति, पत्नी और ‘वो’ के बीच हुआ हाई-वोल्टेज ड्रामा लोगों की भीड़ के सामने हिंसक झड़प में बदल गया। घटना कोयला फाटक क्षेत्र की बताई जा रही है, जहां स्वास्थ्य विभाग में कार्यरत मधुर तिवारी अपनी महिला सहकर्मी के साथ एक रेस्टोरेंट में पहुंचे थे। जानकारी के अनुसार, इसी दौरान उनकी पत्नी वंदना, साली अतिप्रिया, ससुर और अन्य परिजन मौके पर पहुंच गए। आरोप है कि महिला मित्र के साथ पति को देखकर परिवार भड़क गया और देखते ही देखते विवाद मारपीट में बदल गया। इस दौरान सड़क पर मौजूद लोगों की भीड़ जमा हो गई और कई लोगों ने घटना का वीडियो बना लिया, जो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वायरल वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि पत्नी, साली और अन्य परिजन पति मधुर तिवारी और उनकी महिला सहकर्मी पर हमला करते नजर आ रहे हैं। दोनों खुद को बचाने की कोशिश करते हैं, लेकिन भीड़ के बीच मामला और बढ़ जाता है। पत्नी पक्ष का आरोप है कि पति का उनकी महिला सहकर्मी के साथ अवैध संबंध है और दोनों लंबे समय से संपर्क में थे। साली अतिप्रिया ने दावा किया कि दोनों को रंगे हाथों पकड़ा गया, जिसके बाद यह विवाद हुआ। वहीं पत्नी वंदना ने आरोप लगाया कि पति और महिला सहकर्मी लिव-इन रिलेशनशिप में रह रहे हैं। दूसरी ओर, पति मधुर तिवारी ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि उनका परिवार पहले से ही विवादों में है और मामला कोर्ट में विचाराधीन है। उन्होंने आरोप लगाया कि पत्नी, साली और ससुर के हस्तक्षेप के कारण उनका वैवाहिक जीवन टूट चुका है। मधुर ने यह भी दावा किया कि घटना के दौरान उनकी महिला सहकर्मी के साथ मारपीट की गई और उनका पीछा किया गया। मधुर ने आगे आरोप लगाया कि उनके घर से सोना गायब है, जिसमें ससुर का हाथ होने की बात कही गई है। उन्होंने यह भी कहा कि मारपीट के दौरान उनकी महिला सहकर्मी की गाड़ी की चाबी भी निकाल ली गई और वाहन को नुकसान पहुंचाया गया। फिलहाल यह मामला सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना हुआ है और पुलिस के सामने भी पहुंचने की संभावना जताई जा रही है। घटना से जुड़ा वीडियो वायरल होने के बाद स्थानीय स्तर पर भी तरह-तरह की चर्चाएं तेज हो गई हैं।

देवास में परिवहन विभाग की बड़ी कार्रवाई: बिना फिटनेस और पीयूसी के 5 वाहन जब्त

मध्‍य प्रदेश । देवास जिले में सड़क सुरक्षा और प्रदूषण नियंत्रण को लेकर परिवहन विभाग ने एक बार फिर सख्त रुख अपनाते हुए विशेष जांच अभियान चलाया। बुधवार को औद्योगिक क्षेत्र देवास में की गई इस कार्रवाई के दौरान बिना फिटनेस प्रमाण पत्र और पीयूसी के संचालित 5 वाहनों को मौके पर ही जब्त कर लिया गया। जिला प्रशासन के निर्देश पर यह अभियान कलेक्टर ऋतुराज सिंह के मार्गदर्शन में तथा जिला परिवहन अधिकारी निशा चौहान के नेतृत्व में चलाया गया। विभागीय टीम ने औद्योगिक क्षेत्र में सड़क पर दौड़ रहे वाहनों की सघन जांच की, जिसमें फिटनेस, प्रदूषण नियंत्रण प्रमाण पत्र (पीयूसी), बीमा और अन्य आवश्यक दस्तावेजों की बारीकी से पड़ताल की गई। जांच के दौरान कुल 20 वाहनों को रोका गया और उनके दस्तावेजों की जांच की गई। इनमें से 5 वाहन जिनमें ट्रक और मिनी ट्रक शामिल हैं ऐसे पाए गए जिनके पास न तो वैध फिटनेस प्रमाण पत्र था और न ही पीयूसी प्रमाण पत्र। यह स्पष्ट रूप से परिवहन नियमों का उल्लंघन था। नियमों के उल्लंघन पर विभागीय टीम ने तत्काल कार्रवाई करते हुए सभी पांच वाहनों को जब्त कर लिया। जिला परिवहन अधिकारी निशा चौहान ने बताया कि यह कार्रवाई सड़क सुरक्षा सुनिश्चित करने और औद्योगिक क्षेत्र में बढ़ते प्रदूषण पर नियंत्रण लगाने के उद्देश्य से की गई है। उन्होंने कहा कि विभाग का अभियान आगे भी लगातार जारी रहेगा और नियमों का पालन न करने वालों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने वाहन मालिकों को चेतावनी देते हुए कहा कि सभी आवश्यक दस्तावेज जैसे फिटनेस प्रमाण पत्र, पीयूसी, बीमा और परमिट समय पर अपडेट रखना अनिवार्य है। यदि भविष्य में कोई वाहन बिना वैध दस्तावेजों के संचालित पाया गया तो उसके खिलाफ जुर्माना और वाहन जब्ती जैसी कार्रवाई की जाएगी। परिवहन विभाग की इस कार्रवाई से औद्योगिक क्षेत्र में वाहन चालकों और संचालकों के बीच हड़कंप की स्थिति देखी गई।

आईएएस अवि प्रसाद की तीसरी शादी चर्चा में, प्रशासनिक सेवा की अधिकारी अंकिता धाकरे संग बंधे विवाह बंधन में, पहली दो पत्नियां भी हैं वरिष्ठ अफसर

मध्य प्रदेश कैडर के वरिष्ठ आईएएस अधिकारी अवि प्रसाद एक बार फिर अपनी निजी जिंदगी को लेकर चर्चा में हैं। प्रशासनिक सेवा में अपनी कार्यशैली और विभिन्न जिम्मेदारियों के लिए पहचाने जाने वाले अवि प्रसाद ने हाल ही में प्रशासनिक सेवा की अधिकारी अंकिता धाकरे के साथ विवाह किया है। यह उनकी तीसरी शादी है, जिसके बाद उनका नाम एक बार फिर सार्वजनिक चर्चा का विषय बन गया है। अवि प्रसाद वर्तमान में मध्य प्रदेश रोजगार गारंटी परिषद में मुख्य कार्यपालन अधिकारी के रूप में कार्यरत हैं। प्रशासनिक सेवा में उनके अनुभव और विभिन्न जिलों में निभाई गई जिम्मेदारियों ने उन्हें राज्य के प्रमुख अधिकारियों में शामिल किया है। उत्तर प्रदेश से संबंध रखने वाले अवि प्रसाद ने सिविल सेवा में आने से पहले भी महत्वपूर्ण पेशेवर जिम्मेदारियां संभाली थीं और बाद में संघ लोक सेवा आयोग की परीक्षा के माध्यम से प्रशासनिक सेवा में प्रवेश किया। उनकी निजी जिंदगी का सफर भी उतना ही चर्चित रहा है जितना उनका प्रशासनिक करियर। उनकी पहली शादी 2014 बैच की आईएएस अधिकारी रिजु बाफना से हुई थी। हालांकि यह वैवाहिक संबंध अधिक समय तक नहीं चल सका और दोनों ने बाद में अलग होने का निर्णय लिया। प्रशासनिक सेवा में कार्यरत दोनों अधिकारियों ने अपने-अपने पेशेवर जीवन को आगे बढ़ाया और अलग-अलग जिम्मेदारियां संभालीं। पहले वैवाहिक संबंध के समाप्त होने के बाद अवि प्रसाद ने दूसरी शादी आईएएस अधिकारी मिशा सिंह से की। यह विवाह भी प्रशासनिक सेवा के दो अधिकारियों के बीच हुआ था और कुछ वर्षों तक दोनों साथ रहे। बताया जाता है कि इस दौरान मिशा सिंह ने अपना कैडर परिवर्तन कर मध्य प्रदेश में सेवाएं देना शुरू किया था। हालांकि समय के साथ यह संबंध भी आगे नहीं बढ़ सका और दोनों के रास्ते अलग हो गए। हाल ही में अवि प्रसाद ने तीसरी बार विवाह किया है। इस बार उनकी जीवनसंगिनी प्रशासनिक सेवा की अधिकारी अंकिता धाकरे बनी हैं। अंकिता धाकरे राज्य मंत्रालय में डिप्टी सेक्रेटरी के पद पर कार्यरत हैं और प्रशासनिक कार्यों में सक्रिय भूमिका निभा रही हैं। दोनों का विवाह फरवरी 2026 में आयोजित एक निजी समारोह में संपन्न हुआ। विवाह की जानकारी सामने आने के बाद प्रशासनिक और सामाजिक हलकों में इस संबंध को लेकर व्यापक चर्चा शुरू हो गई। अवि प्रसाद की पेशेवर यात्रा भी काफी उल्लेखनीय मानी जाती है। सिविल सेवा में आने से पहले उन्होंने बैंकिंग क्षेत्र में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं। इसके बाद उन्होंने संघ लोक सेवा आयोग की परीक्षा उत्तीर्ण कर पहले पुलिस सेवा में स्थान प्राप्त किया। बाद में बेहतर रैंक हासिल करने के बाद उन्होंने भारतीय प्रशासनिक सेवा में प्रवेश किया और विभिन्न प्रशासनिक पदों पर कार्य करते हुए अपनी पहचान बनाई। प्रशासनिक सेवा में कार्यरत अधिकारियों की निजी जिंदगी सामान्यतः सार्वजनिक चर्चा से दूर रहती है, लेकिन जब किसी अधिकारी का व्यक्तिगत जीवन असाधारण परिस्थितियों के कारण सुर्खियों में आता है तो लोगों की दिलचस्पी स्वाभाविक रूप से बढ़ जाती है। अवि प्रसाद के मामले में भी ऐसा ही देखने को मिला है, जहां उनके प्रशासनिक करियर के साथ-साथ उनके वैवाहिक जीवन को लेकर भी लोगों के बीच चर्चा बनी हुई है। फिलहाल अवि प्रसाद और अंकिता धाकरे अपने-अपने प्रशासनिक दायित्वों का निर्वहन कर रहे हैं। वहीं उनकी यह नई वैवाहिक शुरुआत प्रशासनिक सेवा से जुड़े लोगों और आम नागरिकों के बीच चर्चा का प्रमुख विषय बनी हुई है।