इंदौर मौसम अपडेट: प्री-मानसून कमजोर, दो–तीन दिन बारिश से राहत नहीं – उमस बढ़ाएगी परेशानी

मध्य प्रदेश । इंदौर में मौसम का मिजाज लगातार बदल रहा है, लेकिन राहत की बारिश फिलहाल दूर नजर आ रही है। पिछले 24 घंटों में जहां दिन के तापमान में करीब 2 डिग्री की गिरावट दर्ज की गई है, वहीं रात का तापमान 1 डिग्री बढ़ गया है। बुधवार को शहर में अधिकतम तापमान 38.9 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया, जो पिछले दिन की तुलना में मामूली वृद्धि के साथ दर्ज हुआ। वहीं न्यूनतम तापमान 26.1 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया, जिससे रात में भी गर्मी का असर बना रहा। प्री-मानसून कमजोर, बारिश का इंतजार लंबाइस बार इंदौर में प्री-मानसून गतिविधियां बेहद कमजोर बनी हुई हैं। अब तक शहर में केवल करीब 1 इंच बारिश ही दर्ज की गई है, जो सामान्य से काफी कम मानी जा रही है। मौसम विभाग के अनुसार, अगले दो से तीन दिनों तक इंदौर और आसपास के क्षेत्रों में बारिश की कोई संभावना नहीं है। आसमान साफ रहेगा, लेकिन उमस लोगों को परेशान करती रहेगी। प्रदेश में बारिश, लेकिन इंदौर में सूखा जैसा मौसममध्य प्रदेश के कई हिस्सों में ट्रफ और साइक्लोनिक सर्कुलेशन के कारण तेज आंधी और बारिश का दौर जारी है। ग्वालियर, जबलपुर, बुंदेलखंड और चंबल क्षेत्र में मौसम सक्रिय है, लेकिन इंदौर और आसपास का इलाका इस सिस्टम से लगभग बाहर बना हुआ है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, इसी वजह से इंदौर में बादलों की सक्रियता नहीं बन पा रही है और बारिश की गतिविधियां कमजोर बनी हुई हैं। आने वाले दिनों में भी राहत नहीमौसम विभाग का अनुमान है कि 13 जून के आसपास ग्वालियर-चंबल और बुंदेलखंड में तेज आंधी का ऑरेंज अलर्ट रहेगा, लेकिन इंदौर में फिलहाल बारिश की कोई मजबूत संभावना नहीं दिख रही है। उमस और गर्मी से बढ़ी परेशानीबारिश न होने और हवा में नमी बढ़ने के कारण शहर में उमस का असर तेज हो गया है। दिन में गर्म हवाएं और रात में चिपचिपी गर्मी लोगों की परेशानी बढ़ा रही है। लोग अब मानसून की औपचारिक एंट्री का इंतजार कर रहे हैं, जिससे तापमान में गिरावट और मौसम में राहत मिल सके।
पीएम मोदी से ‘गुप्त मुलाकात’ के दावे पर सियासी घमासान, संजय राउत के बयान से मचा बवाल, अभिजीत दीपके ने किया खंडन

नई दिल्ली । महाराष्ट्र की राजनीति में एक नया विवाद उस समय खड़ा हो गया जब शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद संजय राउत ने कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके को लेकर एक सनसनीखेज दावा किया। राउत ने कहा कि उन्हें कुछ ऐसी जानकारियां और तस्वीरें प्राप्त हुई हैं, जिनमें अमेरिका में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अभिजीत दीपके के बीच कथित मुलाकात होने की बात कही जा रही है। उनके इस बयान के बाद राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई। संजय राउत ने अपने बयान में कहा कि कुछ लोगों ने उन्हें ऐसी तस्वीरें भेजी हैं, जिनके बारे में दावा किया जा रहा है कि वे अमेरिका में हुई एक बैठक से जुड़ी हैं। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वह स्वयं कोई सीधा आरोप नहीं लगा रहे हैं और केवल उनके पास पहुंची सूचनाओं का उल्लेख कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस विषय में वह और जानकारी जुटाने का प्रयास कर रहे हैं तथा तथ्यों की पुष्टि के बाद ही किसी निष्कर्ष पर पहुंचा जा सकता है। राउत का यह बयान ऐसे समय आया है जब कॉकरोच जनता पार्टी और उसके नेतृत्व को लेकर महाराष्ट्र के कुछ हिस्सों में चर्चा बढ़ी हुई है। हाल के दिनों में इस संगठन की गतिविधियों और अभियानों ने सोशल मीडिया सहित राजनीतिक मंचों पर भी ध्यान आकर्षित किया है। ऐसे में कथित मुलाकात को लेकर दिया गया बयान तुरंत राजनीतिक बहस का विषय बन गया। विवाद बढ़ने के बाद अभिजीत दीपके ने भी इस पूरे मामले पर अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने संजय राउत के दावे को आश्चर्यजनक बताते हुए कहा कि उन्हें ऐसी किसी मुलाकात की कोई जानकारी नहीं है। उन्होंने कहा कि वह एक साधारण छात्र हैं और प्रधानमंत्री के सुरक्षा एवं प्रोटोकॉल स्तर को देखते हुए ऐसी मुलाकात की कल्पना भी करना कठिन है। उन्होंने यह भी संभावना जताई कि यदि कोई तस्वीर सामने आई है तो वह कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी एआई तकनीक से तैयार की गई हो सकती है। दीपके ने कहा कि उनका संगठन स्वतंत्र रूप से काम कर रहा है और उसका किसी राजनीतिक दल से कोई संबंध नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी गतिविधियां किसी दल विशेष के समर्थन या विरोध पर आधारित नहीं हैं। उनका कहना था कि यदि कोई राजनीतिक दल उनके विचारों का समर्थन करना चाहता है तो यह उसका निर्णय हो सकता है, लेकिन संगठन किसी राजनीतिक पार्टी के साथ औपचारिक रूप से नहीं जुड़ेगा। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि वर्तमान समय में सोशल मीडिया और डिजिटल माध्यमों के बढ़ते प्रभाव के कारण अपुष्ट दावे और तस्वीरें तेजी से चर्चा का विषय बन जाती हैं। ऐसे मामलों में तथ्यों की पुष्टि होने तक किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं माना जाता। यही कारण है कि इस विवाद में भी दोनों पक्षों के बयानों के बाद अब ध्यान इस बात पर केंद्रित है कि कथित तस्वीरों और दावों की सत्यता क्या है। फिलहाल इस मामले में कोई आधिकारिक प्रमाण सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आया है। हालांकि संजय राउत के बयान और अभिजीत दीपके के खंडन के बाद यह मुद्दा राजनीतिक चर्चा का हिस्सा बन गया है। आने वाले दिनों में यदि इस संबंध में कोई अतिरिक्त जानकारी सामने आती है तो विवाद की दिशा और प्रभाव दोनों स्पष्ट हो सकेंगे।
इंदौर: पॉश इलाके के बंगले में AC ब्लास्ट से भीषण आग, बड़ा हादसा टला

मध्य प्रदेश । इंदौर के कनाड़िया थाना क्षेत्र स्थित शिव शक्ति नगर के एक पॉश बंगले में मंगलवार दोपहर अचानक भीषण आग लग गई। बताया जा रहा है कि घर में लगे एयर कंडीशनर (AC) में शॉर्ट सर्किट के बाद जोरदार धमाका हुआ, जिसके चलते पूरी इमारत आग की चपेट में आ गई। आग की लपटें और घना काला धुआं दूर-दूर तक दिखाई देने लगा, जिससे इलाके में दहशत फैल गई। घटना रिवाज गार्डन के पीछे स्थित बंगला नंबर 5 की है, जो रितेश राजेंद्र दुबे का बताया जा रहा है। शुरुआती जानकारी के मुताबिक, तेज गर्मी के बीच AC में तकनीकी खराबी के कारण शॉर्ट सर्किट हुआ और फिर अचानक ब्लास्ट हो गया। इसके बाद आग तेजी से पूरे घर में फैल गई। आग लगते ही घर के अंदर मौजूद लोग और स्टाफ घबरा गए और चीख-पुकार मच गई। कई लोग अंदर फंस गए, लेकिन समय रहते स्थानीय लोगों ने पुलिस और फायर ब्रिगेड को सूचना दे दी। सूचना मिलते ही कनाड़िया थाना पुलिस और दमकल विभाग की कई गाड़ियां मौके पर पहुंचीं। दमकलकर्मियों ने रेस्क्यू ऑपरेशन चलाकर घर में फंसे लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला, जिससे एक बड़ा हादसा टल गया। आग बुझाने के लिए दमकलकर्मियों ने करीब 8 हजार लीटर पानी की बौछार की और लगभग दो घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद आग पर पूरी तरह काबू पाया गया। हालांकि, इस घटना में बंगले के अंदर काफी सामान जलकर खाक हो गया। फिलहाल पुलिस और फायर विभाग आग लगने के सही कारणों की जांच कर रहे हैं। शुरुआती तौर पर AC में शॉर्ट सर्किट को ही हादसे की मुख्य वजह माना जा रहा है।
सरकार का बड़ा गैस सुधार अभियान, PNG वाले उपभोक्ताओं को छोड़ना पड़ सकता है LPG कनेक्शन

नई दिल्ली । देश में ऊर्जा संसाधनों के बेहतर उपयोग और गैस वितरण प्रणाली को अधिक प्रभावी बनाने के लिए सरकार पाइप्ड नेचुरल गैस यानी PNG के उपयोग को बढ़ावा देने पर जोर दे रही है। इसी दिशा में उन उपभोक्ताओं पर विशेष ध्यान केंद्रित किया जा रहा है, जिनके पास एक साथ PNG और LPG दोनों कनेक्शन मौजूद हैं। ऐसे उपभोक्ताओं को भविष्य में अपने LPG कनेक्शन की स्थिति स्पष्ट करने और आवश्यकता पड़ने पर उसे सरेंडर करने के लिए कहा जा सकता है। सरकार का मानना है कि जिन क्षेत्रों में पाइप्ड गैस की सुविधा उपलब्ध है, वहां घरेलू उपभोक्ताओं को धीरे-धीरे उसी प्रणाली का उपयोग करना चाहिए। इससे गैस वितरण नेटवर्क अधिक व्यवस्थित होगा और उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित किया जा सकेगा। पिछले कुछ वर्षों में देश के कई शहरों और कस्बों में PNG नेटवर्क का तेजी से विस्तार हुआ है, जिससे बड़ी संख्या में घरों तक सीधे गैस पहुंचने लगी है। ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि एक ही घर में दो अलग-अलग घरेलू गैस कनेक्शन बनाए रखना वितरण प्रणाली पर अतिरिक्त दबाव पैदा करता है। यही कारण है कि अब ऐसी व्यवस्था तैयार की जा रही है जिसमें उपभोक्ताओं को उपलब्ध सुविधाओं के अनुसार एक विकल्प चुनना पड़ सकता है। इससे गैस आपूर्ति प्रणाली अधिक पारदर्शी और संतुलित बन सकेगी। PNG को बढ़ावा देने के पीछे आर्थिक और रणनीतिक दोनों कारण बताए जा रहे हैं। पाइप्ड गैस व्यवस्था में उपभोक्ताओं को सिलेंडर बुकिंग, डिलीवरी और स्टोरेज जैसी परेशानियों का सामना नहीं करना पड़ता। इसके अलावा गैस की आपूर्ति लगातार बनी रहती है, जिससे घरेलू उपयोग में सुविधा बढ़ जाती है। शहरी क्षेत्रों में बड़ी संख्या में लोग पहले ही इस व्यवस्था को अपना चुके हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक ऊर्जा बाजार में लगातार बदलते हालात को देखते हुए ऊर्जा संसाधनों का विवेकपूर्ण उपयोग आवश्यक हो गया है। देश की बढ़ती ऊर्जा जरूरतों के बीच सरकार ऐसे विकल्पों को प्राथमिकता दे रही है जो लंबे समय तक टिकाऊ और व्यवस्थित साबित हो सकें। PNG नेटवर्क का विस्तार भी इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। नई व्यवस्था के तहत गैस वितरण कंपनियों को ऐसे उपभोक्ताओं की पहचान करने का निर्देश दिया जा सकता है, जिनके रिकॉर्ड में PNG और LPG दोनों कनेक्शन दर्ज हैं। इसके बाद संबंधित उपभोक्ताओं को आवश्यक प्रक्रिया पूरी करने के लिए सूचना भेजी जा सकती है। इस कदम का उद्देश्य किसी प्रकार की असुविधा पैदा करना नहीं बल्कि उपलब्ध संसाधनों का अधिक प्रभावी उपयोग सुनिश्चित करना है। हालांकि जिन इलाकों में अभी PNG की सुविधा उपलब्ध नहीं है, वहां LPG सिलेंडर व्यवस्था पहले की तरह जारी रहेगी। ग्रामीण और दूरदराज क्षेत्रों में रसोई गैस की आपूर्ति में किसी प्रकार का बदलाव प्रस्तावित नहीं है। सरकार का फोकस फिलहाल उन क्षेत्रों पर है जहां पाइप्ड गैस नेटवर्क पूरी तरह सक्रिय हो चुका है। ऊर्जा क्षेत्र में हो रहे इन बदलावों को भविष्य की जरूरतों के अनुरूप एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में PNG नेटवर्क के विस्तार के साथ गैस वितरण व्यवस्था और अधिक आधुनिक, प्रभावी तथा उपभोक्ता-केंद्रित बन सकती है। इससे न केवल ऊर्जा प्रबंधन बेहतर होगा बल्कि देश की दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा को भी मजबूती मिलेगी।
सुकेश चंद्रशेखर केस में जैकलीन की राहत की उम्मीदों को झटका, सुप्रीम कोर्ट की पीठ बदलेगी

नई दिल्ली । मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े चर्चित मामले में बॉलीवुड अभिनेत्री जैकलीन फर्नांडिस को सुप्रीम कोर्ट में एक महत्वपूर्ण कानूनी झटका लगा है। उनकी याचिका पर सुनवाई कर रही पीठ के एक न्यायाधीश ने स्वयं को मामले से अलग कर लिया, जिसके बाद अब इस मामले की सुनवाई किसी अन्य पीठ के समक्ष होगी। इससे अभिनेत्री की कानूनी चुनौती पर फैसला फिलहाल आगे के लिए टल गया है। जैकलीन फर्नांडिस ने उस आदेश को चुनौती देते हुए सर्वोच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था, जिसमें उनके खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय की कार्रवाई को बरकरार रखा गया था। अभिनेत्री का पक्ष है कि उनके खिलाफ की जा रही कार्रवाई पर पुनर्विचार किया जाना चाहिए। हालांकि सुनवाई के शुरुआती चरण में ही प्रक्रिया में नया मोड़ आ गया। सुनवाई के दौरान संबंधित न्यायाधीश ने स्पष्ट किया कि एक जुड़े हुए मामले में उनका पारिवारिक संबंध पेशेवर रूप से सामने आया था। इसी कारण उन्होंने निष्पक्षता और न्यायिक मर्यादा को प्राथमिकता देते हुए स्वयं को मामले की सुनवाई से अलग करने का निर्णय लिया। अदालत ने निर्देश दिया कि इस याचिका को ऐसी पीठ के समक्ष सूचीबद्ध किया जाए, जिसमें वर्तमान पीठ का कोई सदस्य शामिल न हो। यह मामला 200 करोड़ रुपये के कथित धन शोधन प्रकरण से जुड़ा है, जिसमें कथित ठगी और अवैध वित्तीय लेनदेन की जांच लंबे समय से जारी है। हाल ही में एक निचली अदालत ने अभिनेत्री, कथित मास्टरमाइंड सुकेश चंद्रशेखर और अन्य आरोपियों के खिलाफ आरोप तय करने का आदेश दिया था। इसी आदेश और उससे जुड़ी कानूनी कार्यवाही को चुनौती देते हुए जैकलीन ने उच्च न्यायिक हस्तक्षेप की मांग की है। जांच एजेंसियों का आरोप है कि अभिनेत्री का संपर्क मुख्य आरोपी के साथ बना हुआ था और उन्हें विभिन्न माध्यमों से महंगे उपहार तथा आर्थिक लाभ प्राप्त हुए थे। जांच के दौरान उन्हें कई बार पूछताछ के लिए बुलाया गया था। बाद में पूरक आरोपपत्र में उनका नाम भी शामिल किया गया, जिसके बाद यह मामला और अधिक चर्चा में आ गया। अभियोजन पक्ष का दावा है कि मुख्य आरोपी ने एक संगठित नेटवर्क के जरिए प्रभावशाली व्यक्तियों और सरकारी अधिकारियों के नाम का इस्तेमाल कर लोगों को कथित रूप से ठगा। जांच एजेंसियों के अनुसार, इस नेटवर्क के माध्यम से बड़ी रकम की धोखाधड़ी को अंजाम दिया गया और उसके बाद धन के स्रोत तथा उपयोग को छिपाने की कोशिश की गई। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि किसी न्यायाधीश का स्वयं को मामले से अलग करना न्यायिक प्रक्रिया का सामान्य और पारदर्शी हिस्सा है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना होता है कि सुनवाई पूरी तरह निष्पक्ष वातावरण में हो और भविष्य में किसी प्रकार के हितों के टकराव की आशंका न रहे। अब इस मामले की अगली सुनवाई नई पीठ के समक्ष होगी। कानूनी हलकों में इस पर नजर बनी हुई है क्योंकि आने वाले दिनों में यह तय होगा कि अभिनेत्री की याचिका पर अदालत क्या रुख अपनाती है और जांच एजेंसियों की कार्रवाई को लेकर आगे की प्रक्रिया किस दिशा में बढ़ती है।
रिटायरमेंट से 5 महीने पहले लोकायुक्त का बड़ा एक्शन: महिला एवं बाल विकास विभाग के संयुक्त संचालक के ठिकानों पर छापा, करोड़ों की संपत्ति की जांच

मध्य प्रदेश । इंदौर में लोकायुक्त पुलिस ने आय से अधिक संपत्ति की शिकायत के आधार पर महिला एवं बाल विकास विभाग के संयुक्त संचालक लक्ष्मी नारायण कंडवाल के विभिन्न ठिकानों पर बुधवार को छापामार कार्रवाई की। प्रारंभिक जांच में बड़ी मात्रा में चल और अचल संपत्तियों की जानकारी सामने आने का दावा किया गया है। हालांकि संपत्ति का अंतिम मूल्यांकन जांच और दस्तावेजों के सत्यापन के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा। लोकायुक्त सूत्रों के अनुसार कंडवाल के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति की शिकायत प्राप्त हुई थी। शिकायत के सत्यापन और प्रारंभिक जांच के बाद विशेष न्यायालय से आवश्यक अनुमति प्राप्त कर कार्रवाई की योजना बनाई गई। अधिकारियों के मुताबिक मंगलवार रात से ही टीमों को अलर्ट कर दिया गया था और बुधवार सुबह विभिन्न स्थानों पर एक साथ तलाशी अभियान चलाया गया। जांच एजेंसियों के अनुसार कार्रवाई के दौरान इंदौर स्थित आवासीय और व्यवसायिक परिसरों सहित अन्य संपत्तियों की जांच की गई। अधिकारियों ने दस्तावेजों, बैंक खातों, निवेश और संपत्ति संबंधी अभिलेखों का परीक्षण शुरू किया है। लोकायुक्त का कहना है कि उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर संपत्तियों और आय के स्रोतों का मिलान किया जा रहा है। पूछताछ के दौरान संबंधित अधिकारी की ओर से वेतन के अतिरिक्त कुछ अन्य आय स्रोतों की जानकारी भी जांच दल को दी गई। इनमें परिवार द्वारा संचालित व्यवसाय, किराये से होने वाली आय तथा पत्नी की आय संबंधी विवरण शामिल बताए गए हैं। जांच एजेंसियां इन दावों और उपलब्ध दस्तावेजों का परीक्षण कर रही हैं ताकि वास्तविक आय और अर्जित संपत्तियों के बीच संबंध स्थापित किया जा सके। कार्रवाई के दौरान एक बैंक लॉकर की भी जांच की गई, जहां से सोने के आभूषण और अन्य कीमती वस्तुएं मिलने की जानकारी सामने आई है। इसके अलावा विभिन्न बैंक खातों से संबंधित दस्तावेजों को भी जांच के दायरे में लिया गया है। अधिकारियों का कहना है कि बैंकिंग रिकॉर्ड और वित्तीय लेनदेन की विस्तृत पड़ताल की जा रही है। लोकायुक्त जांच में इंदौर स्थित व्यवसायिक भवन, आवासीय संपत्तियों, प्लॉट और ग्रामीण क्षेत्रों में भूमि होने संबंधी जानकारी भी सामने आई है। संबंधित दस्तावेजों की वैधता, खरीद के समय की परिस्थितियों तथा भुगतान के स्रोतों की जांच की जा रही है। जांच एजेंसियां संपत्ति के बाजार मूल्य और घोषित आय के बीच अंतर का भी विश्लेषण कर रही हैं। लोकायुक्त अधिकारियों के अनुसार संबंधित अधिकारी लगभग तीन दशक की सेवा अवधि में प्रदेश के विभिन्न जिलों में पदस्थ रहे हैं। जांच के दौरान उनके सेवाकाल, आय विवरण, संपत्ति घोषणाओं और वित्तीय अभिलेखों का भी परीक्षण किया जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि सभी दस्तावेजों के सत्यापन और मूल्यांकन के बाद विस्तृत प्रतिवेदन तैयार किया जाएगा। लोकायुक्त ने स्पष्ट किया है कि मामला अभी जांचाधीन है। जांच पूरी होने और सभी तथ्यों के सत्यापन के बाद ही यह तय किया जाएगा कि आय और संपत्ति के बीच कितना अंतर है तथा आगे की कानूनी कार्रवाई किस आधार पर की जाएगी। फिलहाल दस्तावेजी जांच और संपत्तियों के मूल्यांकन की प्रक्रिया जारी है।
मानसून से पहले निगम का ‘ऑपरेशन डेंजर’ तेज: इंदौर में 100 से अधिक जर्जर इमारतें रडार पर, हादसे रोकने के लिए कार्रवाई शुरू

मध्य प्रदेश । मानसून के आगमन से पहले इंदौर नगर निगम ने शहरवासियों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए जर्जर और खतरनाक भवनों के खिलाफ व्यापक अभियान शुरू कर दिया है। बारिश के मौसम में पुराने और कमजोर ढांचों के गिरने से होने वाली दुर्घटनाओं को रोकने के लिए निगम प्रशासन पूरी तरह सतर्क नजर आ रहा है। इसी उद्देश्य से नगर निगम ने ‘ऑपरेशन डेंजर’ के तहत शहरभर में चिन्हित खतरनाक इमारतों पर कार्रवाई तेज कर दी है। नगर निगम अधिकारियों के अनुसार शहर के विभिन्न क्षेत्रों में सर्वेक्षण कर ऐसे भवनों की पहचान की गई है, जो अत्यधिक जर्जर स्थिति में हैं और बारिश के दौरान किसी भी समय हादसे का कारण बन सकते हैं। प्रारंभिक सर्वे में 100 से अधिक भवनों को जोखिमपूर्ण श्रेणी में रखा गया है। इन भवनों को नगर निगम की विशेष निगरानी सूची में शामिल किया गया है और संबंधित संपत्ति मालिकों को कानूनी नोटिस भी जारी किए जा चुके हैं। नगर निगम के अपर आयुक्त प्रखर सिंह के मुताबिक, अभियान का मुख्य उद्देश्य मानसून के दौरान नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। उन्होंने बताया कि जिन इमारतों की स्थिति अत्यंत खतरनाक पाई गई है, उनके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जा रही है। कई स्थानों पर निगम की टीमें मौके पर पहुंचकर जर्जर संरचनाओं को हटाने और ध्वस्त करने का कार्य कर रही हैं ताकि किसी अप्रिय घटना की संभावना को पहले ही समाप्त किया जा सके। अभियान के तहत शहर के अलग-अलग जोन और वार्डों में निगम की टीमें सक्रिय हैं। तकनीकी विशेषज्ञों की सहायता से भवनों की स्थिति का मूल्यांकन किया जा रहा है और आवश्यकता पड़ने पर तत्काल कार्रवाई की जा रही है। प्रशासन का लक्ष्य है कि मानसून पूरी तरह सक्रिय होने से पहले सभी गंभीर रूप से खतरनाक भवनों पर आवश्यक कार्रवाई पूरी कर ली जाए। नगर निगम ने नागरिकों से भी सहयोग की अपील की है। अधिकारियों का कहना है कि यदि किसी क्षेत्र में कोई भवन अत्यधिक जर्जर दिखाई देता है या उसकी स्थिति लोगों की सुरक्षा के लिए खतरा बन सकती है, तो उसकी सूचना तत्काल प्रशासन को दी जानी चाहिए। इसके अलावा जिन मकान मालिकों के भवन कमजोर या क्षतिग्रस्त स्थिति में हैं, उन्हें भी समय रहते आवश्यक मरम्मत या अन्य सुरक्षा उपाय करने की सलाह दी गई है। प्रशासन का मानना है कि नागरिकों की सतर्कता और प्रशासन की सक्रियता मिलकर संभावित दुर्घटनाओं को काफी हद तक रोक सकती है। इसी कारण निगम लगातार जागरूकता बढ़ाने के प्रयास भी कर रहा है ताकि लोग जोखिमपूर्ण भवनों के प्रति गंभीरता दिखाएं। जर्जर भवनों पर कार्रवाई के साथ-साथ नगर निगम ने मानसून से जुड़ी अन्य चुनौतियों से निपटने की तैयारियां भी तेज कर दी हैं। जलभराव वाले क्षेत्रों की निगरानी, नालों की सफाई, आपातकालीन प्रतिक्रिया व्यवस्था और कंट्रोल रूम की सक्रियता बढ़ाई गई है। निगम का दावा है कि बारिश के मौसम में किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए टीमें चौबीसों घंटे तैयार रहेंगी। नगर निगम का कहना है कि सुरक्षित और व्यवस्थित शहर उपलब्ध कराना उसकी प्राथमिक जिम्मेदारी है। इसी दिशा में मानसून पूर्व यह विशेष अभियान चलाया जा रहा है ताकि बारिश के दौरान नागरिकों की जान-माल की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके और संभावित हादसों को समय रहते रोका जा सके।
खजराना गणेश मंदिर का होगा भव्य कायाकल्प: दो मंजिला दर्शन कॉरिडोर से लेकर नए सुविधा केंद्र तक, 30 करोड़ के मास्टर प्लान पर काम शुरू

मध्य प्रदेश । देशभर के श्रद्धालुओं की आस्था के प्रमुख केंद्र खजराना गणेश मंदिर का स्वरूप अब और अधिक भव्य तथा सुविधाजनक बनने जा रहा है। मंदिर प्रबंधन समिति द्वारा तैयार किए गए व्यापक मास्टर प्लान के तहत पहले चरण के विकास कार्यों की शुरुआत होने वाली है। इस योजना का उद्देश्य मंदिर में आने वाले लाखों श्रद्धालुओं को बेहतर दर्शन व्यवस्था और आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराना है। मंदिर प्रबंधन के अनुसार पहले चरण में गर्भगृह के प्रवेश द्वार की चौड़ाई बढ़ाई जाएगी। इसके लिए द्वार पर लगी लगभग 150 किलोग्राम चांदी को पहले ही सुरक्षित रूप से हटाकर ट्रेजरी में जमा करा दिया गया है। इसके बाद संरचना की तकनीकी जांच कराई गई, जिसकी रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद निर्माण कार्य की प्रक्रिया को अंतिम रूप दिया गया है। रिपोर्ट के आधार पर सुरक्षा मानकों का पालन करते हुए चरणबद्ध तरीके से कार्य किया जाएगा। मंदिर के पुजारी पंडित अशोक भट्ट के अनुसार मास्टर प्लान मंदिर प्रबंधन समिति द्वारा जिला प्रशासन और नगर निगम के मार्गदर्शन में तैयार किया गया है। पूरे प्रोजेक्ट पर लगभग 25 से 30 करोड़ रुपए खर्च होने का अनुमान है, जबकि पहले चरण के कार्यों पर 8 से 10 करोड़ रुपए व्यय किए जाएंगे। निर्माण कार्य के दौरान श्रद्धालुओं की सुविधा को प्राथमिकता दी जाएगी और दर्शन व्यवस्था प्रभावित न हो, इसके लिए अधिकांश कार्य रात के समय किए जाएंगे। मास्टर प्लान का एक महत्वपूर्ण हिस्सा मंदिर के सामने स्थित सभा मंडप में बदलाव है। वर्तमान व्यवस्था में आगे खड़े श्रद्धालुओं के कारण पीछे मौजूद लोगों को भगवान के दर्शन करने में कठिनाई होती है। इसे ध्यान में रखते हुए सभा मंडप को लगभग दो से ढाई फीट नीचे किया जाएगा। इससे लंबी कतार में खड़े श्रद्धालुओं को भी सीधे और सहज रूप से भगवान गणेश के दर्शन हो सकेंगे। साथ ही विशेष अवसरों पर आने वाले अतिथियों और नवविवाहित दंपतियों के लिए भी दर्शन व्यवस्था अधिक सुगम बनेगी। योजना के तहत मंदिर परिसर में दो मंजिला दर्शन कॉरिडोर का निर्माण भी किया जाएगा। इस कॉरिडोर में व्यवस्थित रेलिंग और कतार प्रबंधन की आधुनिक व्यवस्था होगी, जिससे एक साथ बड़ी संख्या में श्रद्धालु आसानी से दर्शन कर सकेंगे। इसके अतिरिक्त स्टेप दर्शन व्यवस्था भी विकसित की जाएगी ताकि किसी भी स्थान पर भीड़ का दबाव न बने और श्रद्धालुओं को बेहतर अनुभव प्राप्त हो। मंदिर परिसर के समग्र विकास के लिए कई अन्य सुविधाएं भी प्रस्तावित हैं। इनमें पार्किंग क्षेत्र का विस्तार, पार्किंग तक पहुंचने के लिए रोटरी निर्माण, नई गाड़ियों की पूजा के लिए अलग व्यवस्था, प्रसाद दुकानों के ऊपर शेड, बच्चों के लिए खेल क्षेत्र, श्रद्धालुओं के लिए सुविधा केंद्र तथा हरित क्षेत्र विकसित करने के लिए वृक्षारोपण शामिल हैं। मंदिर परिसर में स्थित 33 छोटे मंदिरों में से कुछ मंदिरों को भी व्यवस्थित तरीके से पुनर्स्थापित किया जाएगा। प्रबंधन का कहना है कि कुछ मंदिरों में झुकाव की स्थिति देखी गई है, इसलिए उनकी संरचनात्मक सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए यह कदम उठाया जाएगा। इसके अलावा वैदशाला और यज्ञशाला जैसी धार्मिक एवं सांस्कृतिक सुविधाओं का भी विकास किया जाएगा। मंदिर प्रबंधन का मानना है कि खजराना गणेश मंदिर एक प्राचीन और ऐतिहासिक धार्मिक स्थल है, जिसकी लोकप्रियता लगातार बढ़ रही है। श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या और बदलती जरूरतों को देखते हुए यह मास्टर प्लान भविष्य की आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। इसके पूरा होने के बाद मंदिर परिसर न केवल अधिक सुव्यवस्थित होगा, बल्कि श्रद्धालुओं को भी पहले से बेहतर और सुविधाजनक दर्शन अनुभव प्राप्त होगा।
छावनी सड़क चौड़ीकरण विवाद में नया मोड़: विरोधी पोस्टरों के बाद अब आभार संदेशों से सजे इलाके के रास्ते

मध्य प्रदेश । इंदौर के छावनी क्षेत्र में सड़क चौड़ीकरण को लेकर पिछले कई सप्ताह से जारी विवाद के बीच अब एक नया घटनाक्रम सामने आया है। कुछ दिन पहले तक जहां क्षेत्र में प्रशासनिक कार्रवाई के विरोध में लगाए गए पोस्टर चर्चा का केंद्र बने हुए थे, वहीं अब उन्हीं इलाकों में मुख्यमंत्री, मंत्री और स्थानीय जनप्रतिनिधियों का आभार व्यक्त करने वाले पोस्टर लगाए गए हैं। इस बदलाव ने क्षेत्रीय राजनीति और स्थानीय जनभावनाओं को लेकर नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है। नगर निगम द्वारा मास्टर प्लान के तहत छावनी और जिंसी क्षेत्र की सड़कों को 60 फीट चौड़ा करने की कार्रवाई शुरू की गई थी। इस दौरान कई मकानों और दुकानों के हिस्सों को हटाया गया। कार्रवाई के बाद प्रभावित रहवासियों और व्यापारियों ने नाराजगी जताते हुए आरोप लगाए थे कि उन्हें पर्याप्त समय नहीं दिया गया तथा कुछ स्थानों पर निर्धारित सीमा से अधिक हिस्से तोड़े गए। इन आरोपों के चलते क्षेत्र में विरोध का माहौल बन गया था। कार्रवाई के बाद कई मकानों और दुकानों के बाहर विरोध स्वरूप पोस्टर लगाए गए थे। इन पोस्टरों में प्रशासनिक कार्रवाई पर असंतोष व्यक्त करते हुए संदेश लिखे गए थे। कुछ पोस्टरों में भविष्य में इसी तरह की कार्रवाई अन्य क्षेत्रों में होने की आशंका जताते हुए चेतावनी जैसे संदेश भी दिए गए थे। इन पोस्टरों की तस्वीरें सोशल मीडिया पर भी काफी चर्चा में रही थीं। अब उसी क्षेत्र में नए पोस्टर लगाए गए हैं, जिनमें मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय, विधायक गोलू शुक्ला और भाजपा नगर अध्यक्ष सुमित मिश्रा के प्रति आभार व्यक्त किया गया है। पोस्टरों में मधुमिलन चौराहे से छावनी तक सड़क को 60 फीट चौड़ा किए जाने को व्यापारियों और रहवासियों के हित में बताया गया है। जानकारी के अनुसार ये पोस्टर भाजपा कार्यकर्ता पलक जैन की ओर से लगाए गए हैं। सड़क चौड़ीकरण की कार्रवाई के दौरान एक हादसा भी चर्चा में रहा था। 22 मई को निगम की कार्रवाई के बीच बिजली का एक पोल गिर गया था, जिससे एक डॉक्टर गंभीर रूप से घायल हो गए थे। स्थानीय लोगों के अनुसार घायल डॉक्टर की सर्जरी भी करनी पड़ी थी। इस घटना के बाद प्रशासनिक व्यवस्था और सुरक्षा उपायों को लेकर भी सवाल उठे थे। इसके अलावा कुछ रहवासियों ने आरोप लगाया था कि कार्रवाई से पहले मकानों पर लगाए गए निशानों में बदलाव किया गया, जिसके कारण कुछ भवनों को अपेक्षा से अधिक नुकसान पहुंचा। वहीं निगम कर्मचारियों पर बदसलूकी और दबाव बनाने जैसे आरोप भी लगाए गए थे। हालांकि इन आरोपों पर संबंधित अधिकारियों की ओर से अलग-अलग स्तर पर स्पष्टीकरण दिए जाने की बात सामने आई थी। सड़क चौड़ीकरण के विरोध में जनहित पार्टी ने क्षेत्र में ‘न्याय रैली’ भी निकाली थी। पार्टी ने आरोप लगाया था कि प्रभावित लोगों को पर्याप्त समय और उचित राहत नहीं दी गई। दूसरी ओर कांग्रेस नेताओं ने भी प्रभावित परिवारों से मुलाकात कर प्रशासनिक कार्रवाई पर सवाल उठाए थे तथा राहत और मुआवजे की मांग की थी। फिलहाल छावनी क्षेत्र में सड़क चौड़ीकरण को लेकर समर्थन और विरोध दोनों तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। नए पोस्टरों के सामने आने के बाद यह मुद्दा एक बार फिर सार्वजनिक चर्चा का विषय बन गया है और स्थानीय स्तर पर इसकी राजनीतिक एवं सामाजिक गूंज लगातार बनी हुई है।
वैश्विक वीजा कार्यक्रमों में भारतीयों की मजबूत मौजूदगी, उच्च कौशल और बेहतर वेतन ने बढ़ाई पहचान

नई दिल्ली । वैश्विक रोजगार बाजार में भारतीय पेशेवरों की मजबूत उपस्थिति लगातार बढ़ रही है। दुनिया के प्रमुख वीजा कार्यक्रमों और अंतरराष्ट्रीय भर्ती रुझानों से जुड़े हालिया आंकड़े संकेत देते हैं कि भारत अब कुशल प्रतिभाओं का सबसे बड़ा स्रोत बनकर उभरा है। सूचना प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डिजिटल सेवाओं जैसे क्षेत्रों में भारतीय पेशेवरों की बढ़ती मांग ने देश की वैश्विक पहचान को और मजबूत किया है। रिपोर्ट के अनुसार भारत कई प्रमुख अंतरराष्ट्रीय वीजा कार्यक्रमों में शीर्ष स्थानों पर बना हुआ है। अमेरिका के उच्च कौशल वाले पेशेवरों के लिए बनाए गए वीजा कार्यक्रम में भारतीयों की हिस्सेदारी सबसे अधिक है। वहीं ब्रिटेन और यूरोप के प्रमुख कौशल आधारित वीजा कार्यक्रमों में भी भारतीय पेशेवर बड़ी संख्या में शामिल हैं। इससे स्पष्ट होता है कि वैश्विक कंपनियां तकनीकी और पेशेवर दक्षता के मामले में भारतीय प्रतिभाओं पर लगातार भरोसा जता रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक अर्थव्यवस्था में तेजी से हो रहे डिजिटल परिवर्तन ने भारतीय पेशेवरों की मांग को नई ऊंचाई दी है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, क्लाउड कंप्यूटिंग, साइबर सुरक्षा, डेटा एनालिटिक्स और सॉफ्टवेयर विकास जैसे क्षेत्रों में प्रशिक्षित कार्यबल की कमी कई विकसित देशों के सामने बड़ी चुनौती बनी हुई है। ऐसे में भारत इस आवश्यकता को पूरा करने वाले प्रमुख देशों में शामिल हो गया है। रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि अंतरराष्ट्रीय कंपनियां अब केवल कम लागत के आधार पर भर्ती नहीं कर रही हैं। इसके बजाय वे विशेष कौशल और विशेषज्ञता रखने वाले कर्मचारियों को आकर्षित करने के लिए अधिक वेतन देने को तैयार हैं। कई देशों में वीजा धारक पेशेवरों की औसत आय स्थानीय कर्मचारियों के बराबर या उससे अधिक दर्ज की गई है। इससे यह संकेत मिलता है कि वैश्विक बाजार में प्रतिभा की प्रतिस्पर्धा लगातार बढ़ रही है। खाड़ी देशों में भी भारतीय पेशेवरों की मजबूत मौजूदगी देखने को मिल रही है। विशेष रूप से संयुक्त अरब अमीरात भारतीयों के लिए सबसे बड़े रोजगार और व्यवसायिक केंद्रों में शामिल है। यहां विभिन्न क्षेत्रों में भारतीय समुदाय की महत्वपूर्ण भूमिका है और उच्च कौशल वाले पेशेवरों की मांग लगातार बनी हुई है। रिपोर्ट में ऑस्ट्रेलिया, ब्रिटेन और अमेरिका जैसे देशों में भारतीय प्रतिभाओं की भर्ती में तेज वृद्धि का भी उल्लेख किया गया है। विशेषज्ञों का कहना है कि तकनीकी बदलाव, डिजिटल अर्थव्यवस्था का विस्तार और वैश्विक कंपनियों की नई जरूरतों ने भारतीय पेशेवरों के लिए अवसरों के नए द्वार खोले हैं। इससे भारत की मानव संसाधन क्षमता को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और अधिक पहचान मिल रही है। जर्मनी समेत कई यूरोपीय देशों ने भी कुशल विदेशी पेशेवरों को आकर्षित करने के लिए नई नीतियां लागू की हैं। इन योजनाओं का लाभ उठाने वालों में भारतीय नागरिकों की संख्या उल्लेखनीय बताई जा रही है। इससे यह स्पष्ट होता है कि भारतीय प्रतिभाएं केवल पारंपरिक गंतव्यों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि नए और उभरते वैश्विक बाजारों में भी अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज करा रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में एक नया रुझान भी देखने को मिल सकता है, जिसमें विदेशों में अनुभव हासिल करने वाले भारतीय पेशेवर देश में उपलब्ध हो रहे बेहतर अवसरों के कारण वापस लौट सकते हैं। यदि ऐसा होता है तो वैश्विक अनुभव और उन्नत कौशल भारत की अर्थव्यवस्था, नवाचार क्षमता और तकनीकी विकास को नई गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।