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इंदौर में बेकाबू नगर निगम टैंकर का कहर: कई वाहनों को मारी टक्कर, 4 घायल; गुस्साई भीड़ ने की तोड़फोड़

मध्‍य प्रदेश । इंदौर के पटेल ब्रिज पर गुरुवार दोपहर उस समय अफरा-तफरी मच गई जब नगर निगम का एक पानी का टैंकर अचानक अनियंत्रित होकर सड़क पर दौड़ने लगा। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार टैंकर को अपनी ओर तेजी से आता देख सड़क पर मौजूद लोगों में भगदड़ जैसी स्थिति बन गई और कई लोग जान बचाने के लिए इधर-उधर भागते नजर आए। हादसे में चार लोगों के घायल होने की सूचना है, जबकि कई वाहन क्षतिग्रस्त हो गए। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार टैंकर के ब्रेक फेल होने की आशंका जताई जा रही है। बताया जा रहा है कि टैंकर अचानक नियंत्रण से बाहर हो गया और आगे बढ़ते हुए सड़क पर चल रहे कई वाहनों को टक्कर मारता चला गया। टक्कर की आवाज और घटनास्थल पर मची अफरा-तफरी के कारण आसपास मौजूद लोग भी घबरा गए। कुछ ही पलों में इलाके में भारी भीड़ जमा हो गई। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि स्थिति को गंभीर होते देख चालक ने टैंकर को फुटपाथ की ओर मोड़ने का प्रयास किया। इसके बाद टैंकर फुटपाथ पर चढ़ गया और वहां लगी रेलिंग को नुकसान पहुंचाते हुए रुक गया। स्थानीय लोगों का मानना है कि यदि चालक टैंकर को फुटपाथ की ओर नहीं मोड़ता तो हादसा और भी बड़ा हो सकता था तथा अधिक संख्या में वाहन और लोग इसकी चपेट में आ सकते थे। घटना में तीन से चार कारों और दो मोटरसाइकिलों को नुकसान पहुंचा है। कई वाहनों के अगले हिस्से और बॉडी को गंभीर क्षति पहुंची है। टैंकर में सवार एक व्यक्ति के भी घायल होने की जानकारी सामने आई है। हालांकि राहत की बात यह रही कि अब तक किसी गंभीर जनहानि की सूचना नहीं मिली है। घायलों को प्राथमिक उपचार के लिए अस्पताल भेजा गया, जहां उनकी स्थिति पर नजर रखी जा रही है। हादसे के बाद स्थानीय लोगों में काफी नाराजगी देखने को मिली। प्रत्यक्षदर्शियों और आसपास मौजूद लोगों का आरोप है कि वाहन की तकनीकी स्थिति की समय पर जांच नहीं की गई, जिसके कारण यह दुर्घटना हुई। आक्रोशित लोगों ने टैंकर में तोड़फोड़ भी की। कुछ समय के लिए क्षेत्र में यातायात प्रभावित रहा और लंबा जाम लग गया। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस और संबंधित विभाग के अधिकारी मौके पर पहुंचे। पुलिस ने स्थिति को नियंत्रित किया और यातायात को सामान्य बनाने के प्रयास शुरू किए। अधिकारियों का कहना है कि दुर्घटना के वास्तविक कारणों की जांच की जा रही है। चालक के बारे में भी जानकारी जुटाई जा रही है, क्योंकि घटना के बाद उसके मौके से चले जाने की बात सामने आई है। पुलिस के अनुसार मामले की जांच के बाद आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। वहीं नगर निगम की ओर से भी वाहन की तकनीकी स्थिति और हादसे के कारणों की समीक्षा किए जाने की संभावना है।

FCAS प्रोग्राम के टूटने के बाद फ्रांस का बड़ा दांव, 2040 तक अकेले विकसित करेगा छठी पीढ़ी का लड़ाकू विमान

नई दिल्ली । यूरोप की महत्वाकांक्षी रक्षा परियोजनाओं में शामिल फ्यूचर कॉम्बैट एयर सिस्टम (FCAS) कार्यक्रम के बंद होने के बाद वैश्विक रक्षा क्षेत्र में नए समीकरण उभरते दिखाई दे रहे हैं। फ्रांस ने अब स्पष्ट संकेत दिया है कि वह छठी पीढ़ी के लड़ाकू विमान के विकास का काम अपने दम पर आगे बढ़ाएगा। इस निर्णय को केवल एक रक्षा परियोजना का पुनर्गठन नहीं बल्कि यूरोपीय सैन्य उद्योग में बदलते शक्ति संतुलन के रूप में भी देखा जा रहा है। कई वर्षों से फ्रांस, जर्मनी और स्पेन संयुक्त रूप से FCAS कार्यक्रम पर काम कर रहे थे। इस परियोजना का उद्देश्य वर्ष 2040 के आसपास ऐसी उन्नत लड़ाकू विमान प्रणाली विकसित करना था जो कृत्रिम बुद्धिमत्ता, नेटवर्क आधारित युद्ध क्षमता, मानव रहित सहयोगी प्लेटफॉर्म और अत्याधुनिक स्टेल्थ तकनीकों से लैस हो। हालांकि परियोजना में जिम्मेदारियों, तकनीकी नियंत्रण और औद्योगिक हिस्सेदारी को लेकर लगातार मतभेद सामने आते रहे। फ्रांसीसी नेतृत्व ने अब संकेत दिया है कि पिछले वर्षों में किए गए अरबों यूरो के निवेश और अनुसंधान कार्य को आधार बनाकर देश अपने स्वतंत्र कार्यक्रम को आगे बढ़ाएगा। फ्रांस का मानना है कि अब तक विकसित की गई तकनीकी क्षमताएं उसे अगली पीढ़ी के लड़ाकू विमान निर्माण की दिशा में आत्मनिर्भर रूप से आगे बढ़ने में सक्षम बनाती हैं। फ्रांस की प्रमुख एयरोस्पेस कंपनी डसॉल्ट पहले से ही राफेल जैसे सफल लड़ाकू विमान का निर्माण कर चुकी है, जिससे इस परियोजना को तकनीकी आधार मिलने की उम्मीद है। दूसरी ओर जर्मनी ने भी अपने सहयोगी औद्योगिक समूहों के साथ अलग रास्ता अपनाने का संकेत दिया है। कई प्रमुख रक्षा और एयरोस्पेस कंपनियों ने मिलकर एक नया औद्योगिक गठबंधन तैयार किया है, जिसका उद्देश्य भविष्य के लड़ाकू विमान कार्यक्रम को स्वतंत्र रूप से आगे बढ़ाना है। इससे स्पष्ट है कि यूरोप अब एक साझा मंच के बजाय समानांतर सैन्य विमानन परियोजनाओं की ओर बढ़ सकता है। इस पूरे घटनाक्रम का असर भारत के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। भारत और फ्रांस के बीच पिछले एक दशक में रक्षा सहयोग लगातार मजबूत हुआ है। राफेल लड़ाकू विमानों की खरीद और नौसैनिक सहयोग ने दोनों देशों के रणनीतिक संबंधों को नई ऊंचाई दी है। ऐसे में फ्रांस यदि अपने नए लड़ाकू विमान कार्यक्रम के लिए अंतरराष्ट्रीय साझेदारों की तलाश करता है तो भारत एक स्वाभाविक विकल्प के रूप में सामने आ सकता है। हालांकि संभावित साझेदारी का रास्ता आसान नहीं होगा। भारत लंबे समय से रक्षा क्षेत्र में तकनीकी आत्मनिर्भरता पर जोर दे रहा है। किसी भी संयुक्त कार्यक्रम में भारत की प्राथमिकता केवल खरीददार की भूमिका निभाने के बजाय सह-विकास और सह-उत्पादन की होगी। उन्नत इंजन तकनीक, मिशन सिस्टम, सोर्स कोड और महत्वपूर्ण बौद्धिक संपदा तक पहुंच जैसे मुद्दे किसी भी संभावित समझौते के केंद्र में रहेंगे। इसके साथ ही भारत पहले से ही अपने स्वदेशी एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (AMCA) कार्यक्रम पर तेजी से काम कर रहा है। ऐसे में नीति निर्माताओं को यह तय करना होगा कि भविष्य की जरूरतों के लिए स्वदेशी परियोजना को प्राथमिकता दी जाए या किसी अंतरराष्ट्रीय साझेदारी के माध्यम से छठी पीढ़ी की तकनीकों तक तेजी से पहुंच बनाई जाए। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में फ्रांस की नई रणनीति और भारत की रक्षा आवश्यकताओं के बीच कई साझा अवसर उभर सकते हैं। हालांकि किसी भी संभावित सहयोग का अंतिम स्वरूप तकनीकी हस्तांतरण, लागत, औद्योगिक भागीदारी और दीर्घकालिक रणनीतिक हितों पर निर्भर करेगा। फिलहाल FCAS कार्यक्रम का अंत एक अध्याय का समापन जरूर है, लेकिन इससे भविष्य की नई रक्षा साझेदारियों के लिए कई संभावनाएं भी खुलती दिखाई दे रही हैं।

2029 चैंपियंस लीग फाइनल की मेजबानी की दौड़ में बार्सिलोना, यूईएफए को सौंपी आधिकारिक बोली

नई दिल्ली। यूरोपीय फुटबॉल के सबसे प्रतिष्ठित क्लब टूर्नामेंट यूईएफए चैंपियंस लीग के 2029 फाइनल की मेजबानी को लेकर प्रतिस्पर्धा तेज हो गई है। स्पेन के दिग्गज फुटबॉल क्लब एफसी बार्सिलोना ने आधिकारिक तौर पर यूईएफए को अपनी बोली और विस्तृत जानकारी वाली फाइल सौंप दी है। इसके साथ ही क्लब ने 2029 चैंपियंस लीग फाइनल की मेजबानी हासिल करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बढ़ाया है। एफसी बार्सिलोना ने यह प्रस्ताव बार्सिलोना सिटी काउंसिल, कैटेलोनिया सरकार और रॉयल स्पैनिश फुटबॉल फेडरेशन (आरएफईएफ) के सहयोग से तैयार किया है। ये सभी संस्थाएं इस परियोजना में मेजबान और सह-आयोजक की भूमिका निभा रही हैं। क्लब का कहना है कि प्रस्ताव में यूईएफए द्वारा निर्धारित सभी तकनीकी, संस्थागत और अनुबंध संबंधी आवश्यकताओं को पूरा किया गया है। क्लब की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि जमा की गई फाइल में आयोजन से जुड़ी सभी आवश्यक गारंटी शामिल हैं। इसमें स्पॉटिफाई कैंप नोउ स्टेडियम और बार्सिलोना शहर की आयोजन क्षमता, सुरक्षा व्यवस्था, परिवहन सुविधाएं, आवास व्यवस्था और बड़े अंतरराष्ट्रीय आयोजनों की मेजबानी के अनुभव को विस्तार से प्रस्तुत किया गया है। बार्सिलोना ने अपने प्रस्ताव में विशेष रूप से स्पॉटिफाई कैंप नोउ को केंद्र में रखा है। क्लब का मानना है कि वर्तमान में चल रहे पुनर्निर्माण और आधुनिकीकरण कार्यों के बाद यह स्टेडियम दुनिया के सबसे आधुनिक, तकनीकी रूप से उन्नत और प्रतिष्ठित खेल परिसरों में शामिल हो जाएगा। क्षमता के लिहाज से भी कैंप नोउ यूरोप के सबसे बड़े स्टेडियमों में गिना जाता है और लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल के महत्वपूर्ण मुकाबलों की मेजबानी करता रहा है। क्लब ने अपने बयान में कहा है कि कैंप नोउ का इतिहास, उसकी विरासत और आधुनिक सुविधाओं का संयोजन उसे यूईएफए चैंपियंस लीग फाइनल जैसे बड़े आयोजन के लिए आदर्श स्थल बनाता है। बार्सिलोना शहर को भी खेल आयोजनों की सफल मेजबानी के लिए दुनिया भर में पहचान प्राप्त है। ओलंपिक खेलों से लेकर कई अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं तक, शहर ने बार-बार अपनी आयोजन क्षमता साबित की है। अब बोली प्रक्रिया का अगला चरण यूईएफए के हाथों में है। यूरोपीय फुटबॉल की सर्वोच्च संस्था विभिन्न शहरों और स्टेडियमों से प्राप्त प्रस्तावों का मूल्यांकन करेगी। मूल्यांकन के दौरान बुनियादी ढांचे, सुरक्षा, दर्शक क्षमता, परिवहन नेटवर्क और आयोजन अनुभव जैसे कई मानकों को ध्यान में रखा जाएगा। रिपोर्ट्स के अनुसार, 2029 यूईएफए चैंपियंस लीग फाइनल के मेजबान स्थल की घोषणा इस वर्ष की अंतिम तिमाही में की जा सकती है। यदि बार्सिलोना की बोली सफल रहती है, तो यह क्लब और शहर दोनों के लिए एक बड़ी उपलब्धि होगी तथा लाखों फुटबॉल प्रशंसकों को यूरोप के सबसे बड़े क्लब फुटबॉल मुकाबले का रोमांच ऐतिहासिक कैंप नोउ में देखने का अवसर मिलेगा।

श्रीलंका दौरे के लिए भारतीय महिला अंडर-19 टीम का ऐलान, भाविका अहिरे को सौंपी गई कप्तानी

नई दिल्ली।भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) ने श्रीलंका के खिलाफ प्रस्तावित अंडर-19 महिला टी20 और वनडे सीरीज के लिए भारतीय टीमों की घोषणा कर दी है। आगामी सीरीज के लिए युवा विकेटकीपर-बल्लेबाज भाविका अहिरे को दोनों प्रारूपों में टीम की कप्तानी सौंपी गई है। वहीं, महाक नरवासे को उपकप्तान की जिम्मेदारी दी गई है। यह सीरीज भारतीय महिला क्रिकेट के उभरते सितारों के लिए अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने का महत्वपूर्ण मंच साबित हो सकती है। पिछले कुछ वर्षों में भारतीय महिला क्रिकेट की जूनियर संरचना ने कई प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को तैयार किया है, जिन्होंने आगे चलकर राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई है। ऐसे में श्रीलंका के खिलाफ यह दौरा खिलाड़ियों के विकास और चयनकर्ताओं के मूल्यांकन की दृष्टि से काफी अहम माना जा रहा है। चयनकर्ताओं ने टी20 और वनडे दोनों टीमों में कई खिलाड़ियों पर भरोसा कायम रखा है। ईरा जाधव, ईश्वरी अवसरे, पूर्वा सिवाच, कुमारी पालक, काश्वी कंडीकुप्पा, गौरी गोयल, जान्हवी वीरकर और अनादि तागड़े जैसे खिलाड़ियों को दोनों प्रारूपों में मौका मिला है। इससे टीम में संतुलन और निरंतरता बनाए रखने का प्रयास दिखाई देता है। बीसीसीआई का मानना है कि इस तरह की अंतरराष्ट्रीय सीरीज युवा खिलाड़ियों को बड़े मंच पर खेलने का अनुभव देती हैं। साथ ही उन्हें दबाव में प्रदर्शन करने और प्रतिस्पर्धी क्रिकेट की चुनौतियों को समझने का अवसर भी मिलता है। आगामी अंडर-19 महिला विश्व कप और भविष्य की सीनियर भारतीय टीम को ध्यान में रखते हुए यह सीरीज चयनकर्ताओं के लिए भी महत्वपूर्ण होगी। टी20 टीम में कप्तान भाविका अहिरे के अलावा ईरा जाधव, तनिष्का शर्मा, ईश्वरी अवसरे, अवनी चावड़ा, महतो निधि, पूर्वा सिवाच, कुमारी पालक, महाक नरवासे, काश्वी कंडीकुप्पा, मनियार मैत्री, गौरी गोयल, जान्हवी वीरकर, अनादि तागड़े और के दीक्षा को शामिल किया गया है। वहीं वनडे टीम में भाविका अहिरे, ईरा जाधव, दीया यादव, ईश्वरी अवसरे, वी प्रतीक्षा, महतो निधि, पूर्वा सिवाच, कुमारी पालक, महाक नरवासे, काश्वी कंडीकुप्पा, विधि परमार, गौरी गोयल, जान्हवी वीरकर, अनादि तागड़े और के दीक्षा को जगह मिली है। टी20 सीरीज के सभी मुकाबले चेन्नई में खेले जाएंगे। पहला टी20 22 जून, दूसरा 24 जून और तीसरा मुकाबला 27 जून को आयोजित होगा। इसके बाद दोनों टीमों के बीच तीन मैचों की वनडे सीरीज पुडुचेरी में खेली जाएगी। वनडे सीरीज का पहला मुकाबला 30 जून, दूसरा 3 जुलाई और तीसरा 6 जुलाई को होगा। क्रिकेट विशेषज्ञों का मानना है कि यह सीरीज भारतीय महिला क्रिकेट के भविष्य को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। युवा खिलाड़ियों के पास अपनी प्रतिभा साबित करने और राष्ट्रीय चयनकर्ताओं का ध्यान आकर्षित करने का सुनहरा अवसर होगा।

पैगंबर के वंशज की हुकूमत, फिर भी ईरान से टकराव क्यों? जॉर्डन की रणनीतिक भूमिका बनी विवाद की वजह

नई दिल्ली । मध्य पूर्व में तेजी से बदलते भू-राजनीतिक समीकरणों के बीच जॉर्डन एक बार फिर क्षेत्रीय संघर्ष के केंद्र में आ गया है। ईरान और अमेरिका के बीच बढ़े सैन्य तनाव के बाद जॉर्डन स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाए जाने के दावों ने पूरे क्षेत्र की सुरक्षा चिंताओं को बढ़ा दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि जॉर्डन की रणनीतिक स्थिति और पश्चिमी देशों के साथ उसके मजबूत संबंध उसे लंबे समय से ईरान समर्थित आलोचनाओं और हमलों का संभावित लक्ष्य बनाते रहे हैं। हालिया घटनाक्रम में ईरानी सैन्य प्रतिष्ठान ने जॉर्डन में स्थित एक महत्वपूर्ण अमेरिकी एयर बेस पर मिसाइल हमले का दावा किया है। हालांकि हमले से हुए नुकसान की स्वतंत्र पुष्टि सामने नहीं आई है, लेकिन इस दावे ने क्षेत्र में तनाव को और बढ़ा दिया है। जॉर्डन लंबे समय से अमेरिका का करीबी सुरक्षा साझेदार रहा है और उसके कई सैन्य अड्डों का उपयोग क्षेत्रीय अभियानों में किया जाता रहा है। विशेष रूप से अल-अजराक एयर बेस को क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य गतिविधियों का अहम केंद्र माना जाता है। यह सैन्य अड्डा जॉर्डन की राजधानी अम्मान से पूर्व दिशा में स्थित है और विभिन्न सुरक्षा अभियानों में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है। ईरान का आरोप रहा है कि क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य मौजूदगी उसके राष्ट्रीय हितों और सुरक्षा के लिए चुनौती पैदा करती है। इसी कारण ऐसे सैन्य ठिकाने अक्सर ईरानी बयानबाजी और रणनीतिक विरोध का हिस्सा बनते रहे हैं। जॉर्डन और ईरान के बीच तनाव केवल सैन्य सहयोग तक सीमित नहीं है। जॉर्डन ने वर्षों से अमेरिका और इजरायल के साथ संतुलित लेकिन घनिष्ठ संबंध बनाए रखे हैं। दूसरी ओर ईरान स्वयं को क्षेत्र में अमेरिका और इजरायल की नीतियों का प्रमुख विरोधी मानता है। ऐसे में जॉर्डन को अक्सर उस राजनीतिक और सुरक्षा ढांचे का हिस्सा माना जाता है जिसका ईरान विरोध करता है। विश्लेषकों के अनुसार इजरायल की सुरक्षा से जुड़े मामलों में जॉर्डन की भूमिका भी दोनों देशों के बीच अविश्वास को बढ़ाती रही है। क्षेत्रीय संघर्षों के दौरान कई बार ऐसी स्थितियां बनी हैं जब जॉर्डन के हवाई क्षेत्र और सुरक्षा तंत्र का उपयोग संभावित खतरों को रोकने के लिए किया गया। इससे ईरान समर्थक समूहों के बीच जॉर्डन की छवि पश्चिम समर्थक देश के रूप में और मजबूत हुई है। जॉर्डन के शासक किंग अब्दुल्ला द्वितीय को पैगंबर मोहम्मद का वंशज माना जाता है और उनका परिवार लंबे समय से इस ऐतिहासिक विरासत से जुड़ा रहा है। इसके बावजूद क्षेत्रीय राजनीति में धार्मिक पहचान से अधिक महत्व रणनीतिक और कूटनीतिक संबंधों का रहा है। यही कारण है कि धार्मिक विरासत के बावजूद जॉर्डन और ईरान के बीच राजनीतिक मतभेद लगातार बने हुए हैं। हाल के दिनों में अमेरिका और ईरान के बीच बढ़े सैन्य टकराव ने पूरे खाड़ी क्षेत्र में अस्थिरता की आशंका बढ़ा दी है। कई देशों ने सुरक्षा व्यवस्था मजबूत की है और हवाई यातायात पर भी सतर्कता बढ़ाई गई है। जॉर्डन, कुवैत और बहरीन जैसे अमेरिकी सहयोगी देशों पर बढ़ता दबाव इस बात का संकेत है कि क्षेत्रीय संघर्ष अब केवल दो देशों तक सीमित नहीं रह गया है। मध्य पूर्व की मौजूदा परिस्थितियों में जॉर्डन की भूमिका आने वाले समय में और महत्वपूर्ण हो सकती है। क्षेत्रीय संतुलन बनाए रखने, सुरक्षा सहयोग जारी रखने और बढ़ते तनाव को नियंत्रित करने की चुनौती उसके सामने पहले से अधिक गंभीर रूप में मौजूद है।

प्रभसिमरन और तिलक का बल्ला गरजा, अफगानिस्तान ए के खिलाफ भारत ए ने खड़ा किया 349 रन का विशाल स्कोर

नई दिल्ली। ट्राई सीरीज के दूसरे मुकाबले में भारत ए के बल्लेबाजों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए अफगानिस्तान ए के खिलाफ विशाल स्कोर खड़ा कर दिया। बारिश से प्रभावित इस मुकाबले में भारतीय टीम ने निर्धारित 49 ओवरों में 9 विकेट के नुकसान पर 349 रन बनाए। टीम की ओर से प्रभसिमरन सिंह, ऋतुराज गायकवाड़ और कप्तान तिलक वर्मा ने प्रभावशाली अर्धशतकीय पारियां खेलीं। टॉस गंवाने के बाद पहले बल्लेबाजी करने उतरी भारत ए की शुरुआत बेहद आक्रामक रही। युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी और प्रभसिमरन सिंह ने पहले विकेट के लिए तेज गति से रन जुटाते हुए महज 7.1 ओवर में 74 रन जोड़ दिए। वैभव ने शुरुआत से ही अफगान गेंदबाजों पर दबाव बनाया और केवल 22 गेंदों में 44 रन की विस्फोटक पारी खेली। अपनी पारी में उन्होंने 9 आकर्षक चौके लगाए। हालांकि, वह अर्धशतक से पहले ही आउट हो गए और बड़ी पारी खेलने का मौका गंवा बैठे। वैभव के आउट होने के बाद प्रियांश आर्या भी ज्यादा देर टिक नहीं सके और सिर्फ 8 रन बनाकर पवेलियन लौट गए। इसके बाद ऋतुराज गायकवाड़ और प्रभसिमरन सिंह ने पारी को संभालते हुए तीसरे विकेट के लिए महत्वपूर्ण साझेदारी निभाई। दोनों बल्लेबाजों ने 74 गेंदों में 79 रन जोड़कर टीम को मजबूत स्थिति में पहुंचाया। ऋतुराज ने संयम और आक्रामकता का बेहतरीन संतुलन दिखाते हुए 80 गेंदों पर 66 रन बनाए। दूसरी ओर प्रभसिमरन सिंह ने शानदार बल्लेबाजी का प्रदर्शन किया और अफगान गेंदबाजों की जमकर खबर ली। उन्होंने 69 गेंदों में 84 रन की तेजतर्रार पारी खेली, जिसमें 14 चौके शामिल रहे। हालांकि, वह अपने शतक से 16 रन दूर रह गए। उनकी पारी भारत ए की बड़ी स्कोरिंग की नींव साबित हुई। मध्यक्रम में आयुष बदोनी बिना खाता खोले आउट हो गए, लेकिन कप्तान तिलक वर्मा ने जिम्मेदारी संभालते हुए टीम को मजबूत स्थिति में पहुंचाया। तिलक ने 73 गेंदों में 66 रन बनाए और अपनी पारी में पांच चौके जड़े। उन्होंने पारी को स्थिरता प्रदान करने के साथ-साथ अंतिम ओवरों में रन गति भी बनाए रखी। अंतिम ओवरों में सूर्यांश शेडगे ने तेज बल्लेबाजी करते हुए 27 गेंदों में 40 रन बनाए। उनकी पारी में दो चौके और दो छक्के शामिल रहे। अनुकूल रॉय ने भी उपयोगी योगदान देते हुए 8 गेंदों में नाबाद 16 रन बनाए, जिसमें दो चौके और एक छक्का शामिल था। विपराज निगम ने तीन गेंदों पर आठ रन जोड़कर टीम के स्कोर को 349 तक पहुंचाने में मदद की। अफगानिस्तान ए की ओर से गेंदबाजी में अब्दुल्ला अहमदजई सबसे सफल रहे। उन्होंने 9 ओवर में 68 रन देकर पांच विकेट हासिल किए। फरमानुल्लाह साफी ने तीन विकेट झटके, जबकि कप्तान इमरान मीर को एक सफलता मिली। भारत ए के बल्लेबाजों के दमदार प्रदर्शन ने टीम को मुकाबले में मजबूत स्थिति में पहुंचा दिया है। अब सभी की नजरें अफगानिस्तान ए की बल्लेबाजी पर होंगी कि वह इस विशाल लक्ष्य का पीछा किस तरह करती है।

फीफा वर्ल्ड कप 2026 का आगाज: मेक्सिको और साउथ अफ्रीका के बीच उद्घाटन मुकाबला, जानें कब और कहां देखें लाइव

नई दिल्ली। दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित फुटबॉल टूर्नामेंट फीफा विश्व कप 2026 का बहुप्रतीक्षित आगाज 11 जून से होने जा रहा है। उद्घाटन मुकाबले में मेजबान मेक्सिको का सामना ग्रुप ए में साउथ अफ्रीका से होगा। यह मुकाबला मेक्सिको सिटी के ऐतिहासिक स्टेडियम एस्टाडियो एज्टेका में खेला जाएगा, जहां दुनिया भर के करोड़ों फुटबॉल प्रशंसकों की निगाहें टिकी रहेंगी। फीफा विश्व कप 2026 कई मायनों में ऐतिहासिक होने जा रहा है। पहली बार टूर्नामेंट में 48 टीमें हिस्सा ले रही हैं और पूरे आयोजन के दौरान कुल 104 मुकाबले खेले जाएंगे। टीमों की संख्या बढ़ने से प्रतियोगिता पहले से अधिक रोमांचक और प्रतिस्पर्धी बनने की उम्मीद है। फुटबॉल विशेषज्ञों का मानना है कि नए प्रारूप से दुनिया के विभिन्न हिस्सों की उभरती टीमें भी अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर प्राप्त करेंगी। उद्घाटन मैच को लेकर एक दिलचस्प संयोग भी सामने आया है। वर्ष 2010 के फीफा विश्व कप के पहले मुकाबले में मेजबान साउथ अफ्रीका मैदान पर उतरा था, जबकि इस बार वही टीम मेजबान मेक्सिको के खिलाफ विश्व कप के उद्घाटन मैच में खेलेगी। इस कारण फुटबॉल प्रशंसकों के बीच इस मुकाबले को लेकर विशेष उत्साह देखा जा रहा है। साउथ अफ्रीका ने अफ्रीकी क्षेत्र की क्वालिफाइंग प्रतियोगिता में शानदार प्रदर्शन करते हुए विश्व कप में अपनी जगह सुनिश्चित की थी। वहीं मेक्सिको घरेलू परिस्थितियों का लाभ उठाते हुए विजयी शुरुआत करने के इरादे से मैदान पर उतरेगा। मेक्सिको की टीम में अनुभवी खिलाड़ियों के साथ कई युवा प्रतिभाएं भी शामिल हैं, जबकि साउथ अफ्रीका अपनी तेज और आक्रामक शैली के लिए जाना जाता है। भारतीय दर्शकों के लिए भी इस मुकाबले को देखने की पूरी व्यवस्था की गई है। विश्व कप के मैचों का लाइव प्रसारण भारत में विभिन्न खेल चैनलों पर उपलब्ध रहेगा, जबकि डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से भी दर्शक मुकाबलों का आनंद ले सकेंगे। फुटबॉल प्रेमी अपने मोबाइल, लैपटॉप और स्मार्ट टीवी पर लाइव स्ट्रीमिंग के जरिए मैच देख सकेंगे। मुकाबले की बात करें तो मेक्सिको के पास अनुभवी गोलकीपर गुइलेर्मो ओचोआ, राउल जिमेनेज और सैंटियागो गिमेनेज जैसे खिलाड़ी मौजूद हैं, जो मैच का रुख बदलने की क्षमता रखते हैं। दूसरी ओर साउथ अफ्रीका की उम्मीदें कप्तान रॉनवेन विलियम्स, लाइल फोस्टर और तेबोहो मोकोएना जैसे खिलाड़ियों पर टिकी होंगी। विश्व कप का पहला मैच केवल दो टीमों के बीच मुकाबला नहीं, बल्कि दुनिया के सबसे बड़े फुटबॉल महोत्सव की शुरुआत का प्रतीक भी होगा। ऐसे में दोनों टीमें जीत के साथ अभियान शुरू करने के लिए अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने का प्रयास करेंगी। फुटबॉल प्रेमियों को एक रोमांचक और प्रतिस्पर्धी मुकाबले की उम्मीद है।

MP Jan Kalyan Shivir 2026: MP में 12 से 18 जून तक लगेंगे जनकल्याण शिविर, CM मोहन यादव ने दिए निर्देश

CM MOHAN YADAV

MP Jan Kalyan Shivir 2026: भोपाल। मध्य प्रदेश सरकार आमजन तक योजनाओं का लाभ पहुंचाने के लिए 12 से 18 जून 2026 तक राज्यव्यापी जनकल्याण शिविर आयोजित करने जा रही है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सभी जिलों में विशेष शिविर लगाने के निर्देश दिए हैं, ताकि पात्र हितग्राहियों को शासन की विभिन्न योजनाओं का लाभ एक ही स्थान पर मिल सके। सीमा सुरक्षा और घुसपैठ पर सख्ती के बीच बयानबाजी तेज, बांग्लादेशी नागरिकों को लेकर छिड़ी नई बहस समस्याओं का होगा मौके पर समाधान इन शिविरों का आयोजन प्रदेश के सभी विकासखंडों और नगरीय निकाय मुख्यालयों पर किया जाएगा। इन तीन दिवसीय शिविरों में नागरिकों की समस्याओं का मौके पर ही समाधान किया जाएगा। साथ ही उन लोगों की पहचान भी की जाएगी, जो पात्र होने के बावजूद अब तक सरकारी योजनाओं के लाभ से वंचित हैं। फोल्डेबल फोन के बाद अब फोल्डेबल माउस की एंट्री, Logitech Mobi Fold ने पोर्टेबल टेक्नोलॉजी को दिया नया आयाम स्वच्छ भारत मिशन सहित कई योजनाएं होंगी शामिल शिविरों में सामाजिक सुरक्षा, आयुष्मान भारत, राशन, पेंशन, किसान कल्याण, स्वरोजगार और अन्य जनहितकारी योजनाओं से संबंधित सेवाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि प्राप्त आवेदनों और शिकायतों का त्वरित निराकरण सुनिश्चित किया जाए। राज्य सरकार का मानना है कि इन शिविरों से आम लोगों को सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाने से राहत मिलेगी और योजनाओं का लाभ सीधे जरूरतमंदों तक पहुंच सकेगा। मध्य प्रदेश में प्री-मानसून का असर तेज: 34 जिलों में आंधी-बारिश का अलर्ट, 6 जिलों में ओलावृष्टि की चेतावनी हर शिविर की निगरानी करेंगे वरिष्ठ अधिकारी सामान्य प्रशासन विभाग ने सभी जिलों और नगरीय निकायों को निर्देश दिए हैं कि शिविरों में कलेक्टर, अपर कलेक्टर, जिला पंचायत सीईओ समेत वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहें और शिकायतों व लंबित मामलों का यथासंभव मौके पर ही निराकरण सुनिश्चित करें।

बेन स्टोक्स फिर विवादों में: नए आरोपों के बीच इंग्लैंड के स्टार ऑलराउंडर के भविष्य पर उठे सवाल

नई दिल्ली। इंग्लैंड क्रिकेट टीम के कप्तान और विश्व क्रिकेट के सबसे प्रभावशाली ऑलराउंडरों में गिने जाने वाले बेन स्टोक्स एक बार फिर विवादों के कारण सुर्खियों में हैं। मैदान पर अपने जुझारू प्रदर्शन और बड़े मुकाबलों में मैच जिताने की क्षमता के लिए मशहूर स्टोक्स का करियर कई बार विवादों की वजह से भी चर्चा में रहा है। अब एक नए कथित विवाद ने उनके भविष्य को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, लॉर्ड्स में न्यूजीलैंड के खिलाफ पहले टेस्ट मैच में इंग्लैंड की जीत के बाद टीम के कुछ खिलाड़ी जश्न मनाने के लिए पब और नाइट क्लब पहुंचे थे। इसी दौरान कथित रूप से बेन स्टोक्स और तेज गेंदबाज गस एटकिंसन का कुछ अन्य खिलाड़ियों के साथ विवाद हो गया। कुछ रिपोर्ट्स में मारपीट जैसी घटना का भी दावा किया गया है। हालांकि, इस मामले को लेकर संबंधित अधिकारियों की ओर से विस्तृत आधिकारिक जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है और मामले की स्थिति को लेकर अलग-अलग दावे सामने आ रहे हैं। रिपोर्ट्स में यह भी कहा गया है कि आगामी टेस्ट मैच के लिए स्टोक्स और एटकिंसन को टीम से बाहर रखा गया है तथा कप्तानी की जिम्मेदारी जो रूट को सौंपी गई है। हालांकि, इस संबंध में आधिकारिक पुष्टि और जांच के नतीजों का इंतजार किया जा रहा है। क्रिकेट विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आरोपों की पुष्टि होती है तो इंग्लैंड क्रिकेट बोर्ड को अनुशासनात्मक कार्रवाई पर विचार करना पड़ सकता है। बेन स्टोक्स का नाम इससे पहले भी कई विवादों से जुड़ चुका है। वर्ष 2017 में एक नाइट क्लब के बाहर हुई कथित मारपीट की घटना ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर काफी सुर्खियां बटोरी थीं। उस मामले में कानूनी प्रक्रिया भी चली थी और स्टोक्स को लंबे समय तक सार्वजनिक आलोचना का सामना करना पड़ा था। इसके अलावा 2013 में भी अनुशासन संबंधी कारणों से उन्हें इंग्लैंड लायंस टीम के दौरे से वापस भेजा गया था। हालिया घटनाक्रम के बाद इंग्लैंड क्रिकेट में खिलाड़ियों के अनुशासन और सार्वजनिक आचरण को लेकर बहस एक बार फिर तेज हो गई है। क्रिकेट विश्लेषकों का मानना है कि आधुनिक दौर में खिलाड़ियों की मैदान के बाहर की गतिविधियां भी उतनी ही महत्वपूर्ण हो गई हैं जितना उनका खेल प्रदर्शन। ऐसे में किसी भी वरिष्ठ खिलाड़ी पर लगे आरोप टीम की छवि और माहौल दोनों को प्रभावित कर सकते हैं। दिलचस्प बात यह है कि इंग्लैंड क्रिकेट के कई दिग्गज ऑलराउंडर अपने करियर के दौरान विवादों का सामना कर चुके हैं। एंड्रयू फ्लिंटॉफ और इयान बॉथम जैसे महान खिलाड़ियों के नाम भी अतीत में अनुशासन संबंधी मामलों के कारण चर्चा में रहे हैं। हालांकि, उन्होंने बाद में अपने प्रदर्शन से क्रिकेट जगत में विशेष पहचान बनाई। फिलहाल सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि बेन स्टोक्स से जुड़े ताजा मामले में जांच क्या निष्कर्ष निकालती है और इंग्लैंड क्रिकेट बोर्ड आगे क्या कदम उठाता है। क्रिकेट प्रशंसकों को उम्मीद होगी कि स्थिति जल्द स्पष्ट होगी और खेल का ध्यान फिर मैदान पर लौटेगा।

चाबहार पर पाकिस्तान की नजर, ग्वादर के साथ ‘सिस्टर पोर्ट’ योजना ने बढ़ाई भारत की चिंता, रणनीतिक समीकरण बदलने की आशंका

नई दिल्ली । ईरान के चाबहार बंदरगाह को पाकिस्तान के ग्वादर पोर्ट के साथ जोड़कर ‘सिस्टर पोर्ट’ के रूप में विकसित करने की चर्चा ने क्षेत्रीय भू-राजनीतिक समीकरणों को लेकर नई बहस छेड़ दी है। इस प्रस्ताव को ऐसे समय में सामने रखा गया है जब चाबहार परियोजना में भारत की भूमिका और भविष्य को लेकर कई तरह की चर्चाएं जारी हैं। रणनीतिक मामलों के जानकारों का मानना है कि यदि इस दिशा में कोई ठोस प्रगति होती है तो इसका प्रभाव केवल व्यापार तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि क्षेत्रीय शक्ति संतुलन और समुद्री सुरक्षा पर भी पड़ सकता है। पाकिस्तान के कुछ विश्लेषकों द्वारा प्रस्तुत इस विचार में चाबहार और ग्वादर के बीच आर्थिक एवं लॉजिस्टिक सहयोग बढ़ाने की बात कही गई है। प्रस्ताव के अनुसार दोनों बंदरगाहों के बीच परिवहन, कस्टम प्रक्रियाओं और व्यापारिक गतिविधियों को एकीकृत कर बड़े पैमाने पर क्षेत्रीय व्यापार को बढ़ावा दिया जा सकता है। ग्वादर पहले से ही चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है, जबकि चाबहार को भारत ने अफगानिस्तान और मध्य एशिया तक पहुंच के वैकल्पिक मार्ग के रूप में विकसित करने में निवेश किया है। चाबहार बंदरगाह भारत की दीर्घकालिक रणनीतिक परियोजनाओं में शामिल रहा है। यह बंदरगाह पाकिस्तान को बाईपास करते हुए अफगानिस्तान और मध्य एशियाई देशों तक व्यापारिक पहुंच प्रदान करता है। यही कारण है कि इसे केवल आर्थिक परियोजना नहीं बल्कि भारत की व्यापक क्षेत्रीय रणनीति का महत्वपूर्ण आधार माना जाता रहा है। हालांकि हाल के वर्षों में बदलती अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों और ईरान से जुड़े प्रतिबंधों ने इस परियोजना के सामने नई चुनौतियां खड़ी कर दी हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि अमेरिकी प्रतिबंधों और पश्चिम एशिया में बढ़े तनाव के कारण चाबहार परियोजना की गति प्रभावित हुई है। इसी बीच यह भी चर्चा रही कि भारत अपनी कुछ हिस्सेदारी और संचालन व्यवस्था को लेकर वैकल्पिक विकल्पों पर विचार कर रहा है ताकि परियोजना पर प्रतिकूल प्रभाव न पड़े। हालांकि भारत ने चाबहार को लेकर अपनी दीर्घकालिक प्रतिबद्धता को कई बार दोहराया है। रणनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि भविष्य में चाबहार और ग्वादर के बीच किसी प्रकार का औपचारिक सहयोग विकसित होता है तो इससे क्षेत्र में चीन, पाकिस्तान और ईरान के बीच सहयोग का नया आयाम उभर सकता है। ऐसे परिदृश्य में भारत की समुद्री रणनीति और पश्चिमी समुद्री क्षेत्र में उसकी उपस्थिति को नई चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। विशेष रूप से अरब सागर और हिंद महासागर क्षेत्र में प्रभाव बनाए रखने के लिए भारत को अपनी नीतियों की समीक्षा करनी पड़ सकती है। जानकारों के अनुसार मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों में बंदरगाह केवल व्यापारिक केंद्र नहीं रह गए हैं, बल्कि वे सामरिक और कूटनीतिक महत्व के प्रमुख केंद्र बन चुके हैं। ऊर्जा आपूर्ति, अंतरराष्ट्रीय व्यापार मार्गों और क्षेत्रीय संपर्क परियोजनाओं में उनकी भूमिका लगातार बढ़ रही है। इसी कारण चाबहार और ग्वादर से जुड़ी हर गतिविधि पर क्षेत्रीय और वैश्विक शक्तियों की नजर बनी हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत के लिए आने वाले वर्षों में चाबहार परियोजना का महत्व कम नहीं होगा। मध्य एशिया, रूस और पश्चिम एशिया के साथ संपर्क बढ़ाने की रणनीति में यह बंदरगाह अभी भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। ऐसे में बदलते भू-राजनीतिक परिदृश्य के बीच भारत के लिए अपनी आर्थिक, कूटनीतिक और सामरिक प्राथमिकताओं के अनुरूप संतुलित और सक्रिय नीति अपनाना आवश्यक होगा।