World Day Against Child Labour 2026: विश्व बाल श्रम निषेध दिवस पर CM मोहन यादव का आह्वान, बोले- बच्चों के हाथों में किताबें शोभा देती हैं

World Day Against Child Labour 2026: भोपाल। विश्व बाल श्रम निषेध दिवस के अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रदेशवासियों से बाल श्रम मुक्त समाज बनाने का संकल्प लेने का आह्वान किया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि बच्चों के माथे पर बोझ अच्छा नहीं लगता, उनके हाथों में कलम और किताब ही शोभा देती है। उन्होंने कहा कि खुशहाल बचपन और शिक्षा हर बच्चे का अधिकार है और राज्य सरकार बच्चों के हितों एवं उनकी शिक्षा के लिए निरंतर कार्य कर रही है। पूर्व मंत्री हरेंद्रजीत सिंह बब्बू को फिर मिली जान से मारने की धमकी, बोले- पुलिस नहीं कर रही प्रभावी कार्रवाई बाल श्रम के खिलाफ जागरूकता की जरूरत मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अपने संदेश में कहा कि बाल श्रम केवल कानून का उल्लंघन नहीं, बल्कि बच्चों के बचपन और उनके भविष्य से जुड़ा गंभीर सामाजिक मुद्दा है। उन्होंने समाज के सभी वर्गों से अपील की कि बच्चों को शिक्षा से जोड़ने और बाल श्रम को जड़ से खत्म करने के लिए मिलकर प्रयास करें। इंदौर में युवक को बीच सड़क रोका, मारपीट के बाद कार में बैठाने की कोशिश; तीन आरोपियों पर केस दर्ज भारत में अब भी बड़ी चुनौती श्रम एवं रोजगार मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार भारत में 5 से 14 साल के करीब 1.01 करोड़ बच्चे काम करते थे। हालांकि पिछले कुछ सालों में बाल श्रम के मामलों में कमी आई है, लेकिन यह समस्या अब भी चिंता का विषय बनी हुई है। वहीं, अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO) की 2026 रिपोर्ट के अनुसार दुनिया भर में अब भी 13.8 करोड़ बच्चे बाल श्रम में लगे हुए हैं, जिनमें से लगभग 5.4 करोड़ बच्चे खतरनाक परिस्थितियों में काम कर रहे हैं। अमेरिका-ईरान समझौते पर बना संशय, होर्मुज में ड्रोन कार्रवाई और बंदर अब्बास धमाकों से फिर बढ़ा तनाव बच्चों का बचपन बचाने का संकल्प मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि हर बच्चे को शिक्षा, सुरक्षा और सम्मानपूर्ण जीवन का अधिकार है। विश्व बाल श्रम निषेध दिवस हमें यह संकल्प लेने का अवसर देता है कि कोई भी बच्चा मजदूरी के लिए मजबूर न हो और उसे अपने सपनों को पूरा करने का पूरा अवसर मिले। बच्चों के माथे पर बोझ अच्छा नहीं लगता है। खुशहाल बचपन और शिक्षा उनका अधिकार है। ‘विश्व बालश्रम निषेध दिवस’ पर संकल्प लें कि बच्चों के हाथों में कलम-किताब ही देंगे और बाल श्रम से मुक्त समाज बनाएंगे। हमारी सरकार बच्चों के हितों और शिक्षा के लिए निरंतर कार्य कर रही है। pic.twitter.com/yL1jb88I7E — Dr Mohan Yadav (@DrMohanYadav51) June 12, 2026
आयुध निर्माणी खमरिया ने जबलपुर पुलिस को दिए 2 बोलेरो और 8 एक्टिवा, CSR फंड से बढ़ेगा पेट्रोलिंग बेड़ा

मध्य प्रदेश। जबलपुर में कानून-व्यवस्था और पुलिस पेट्रोलिंग को मजबूत करने के लिए आयुध निर्माणी खमरिया ने बड़ा सहयोग दिया है। संस्थान ने कॉरपोरेट सोशल रिस्पांसिबिलिटी (CSR) फंड के तहत पुलिस विभाग को दो बोलेरो और आठ एक्टिवा वाहन प्रदान किए हैं। ये वाहन जिले के अलग-अलग थानों में तैनात किए जाएंगे, जिससे पेट्रोलिंग और त्वरित कार्रवाई की क्षमता बढ़ाई जा सकेगी। आयुध निर्माणी खमरिया के मुख्य महाप्रबंधक शैलेश वगेरवाल ने जबलपुर पुलिस अधीक्षक सम्पत उपाध्याय को इन वाहनों की चाबी औपचारिक रूप से सौंपी। इस मौके पर पुलिस और फैक्ट्री के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे। मुख्य महाप्रबंधक शैलेश वगेरवाल ने कहा कि आयुध निर्माणी खमरिया केवल रक्षा उत्पादन तक सीमित नहीं है, बल्कि समाजहित से जुड़े कार्यों में भी सक्रिय भूमिका निभाती है। उन्होंने बताया कि सीएसआर फंड 2025-26 के तहत म्यूनिशंस इंडिया लिमिटेड, पुणे की इकाई द्वारा यह सहयोग दिया गया है। उन्होंने कहा कि इस पहल का उद्देश्य पुलिस विभाग की कार्यक्षमता बढ़ाना और अपराध नियंत्रण को अधिक प्रभावी बनाना है। खासतौर पर महिलाओं की सुरक्षा और शहर में गश्त व्यवस्था को मजबूत करने में यह वाहन अहम भूमिका निभाएंगे। उन्होंने यह भी कहा कि संस्थान समाज और जनसुरक्षा से जुड़े कार्यों में निरंतर सहयोग देता रहेगा। पुलिस अधीक्षक सम्पत उपाध्याय ने इस सहयोग के लिए आयुध निर्माणी खमरिया का आभार जताया। उन्होंने कहा कि इन वाहनों का उपयोग मुख्य रूप से पेट्रोलिंग, महिला सुरक्षा और आपातकालीन सेवाओं में किया जाएगा। इससे पुलिस की त्वरित प्रतिक्रिया क्षमता में सुधार होगा। पुलिस प्रशासन के अनुसार, इन वाहनों को अलग-अलग थाना क्षेत्रों में जरूरत के अनुसार तैनात किया जाएगा, जिससे शहर और ग्रामीण क्षेत्रों में गश्त व्यवस्था और मजबूत हो सके। इस अवसर पर आयुध निर्माणी खमरिया के जनरल मैनेजर अशोक कुमार मीना, सीनियर मैनेजर अविनाश शंकर सहित कई अधिकारी मौजूद रहे। वहीं पुलिस विभाग की ओर से अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक ग्रामीण सूर्यकांत शर्मा, सीएसपी रांझी सतीश साहू, सीएसपी कैंट उदयभान बागरी, डीएसपी मुख्यालय बीएस गोठरिया, डीएसपी यातायात संतोष शुक्ला सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।
31 संगीन मामलों के आरोपी छोटू चौबे की गिरफ्तारी पर थाने में हंगामा, परिजनों ने उठाए पुलिस कार्रवाई पर सवाल

मध्य प्रदेश। जबलपुर के मदनमहल थाना परिसर में गुरुवार रात उस समय तनावपूर्ण स्थिति बन गई, जब कुख्यात बदमाश सुयश चौबे उर्फ छोटू चौबे की गिरफ्तारी के विरोध में उसके परिजन और समर्थक बड़ी संख्या में थाने पहुंच गए। प्रदर्शनकारियों ने पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि गिरफ्तारी के बाद परिवार को यह नहीं बताया गया कि आरोपी को कहां रखा गया है। स्थिति को देखते हुए अतिरिक्त पुलिस बल को मौके पर बुलाना पड़ा, जिसके बाद हालात नियंत्रित किए गए। परिजनों का कहना है कि पुलिस ने सुयश चौबे को बुधवार शाम हिरासत में लिया था, लेकिन उसके बाद परिवार को उसकी स्थिति और लोकेशन की कोई जानकारी नहीं दी गई। थाने पहुंचे आयुष शिवहरे ने दावा किया कि परिवार और वकील होने के नाते उन्हें आरोपी के बारे में जानकारी पाने का अधिकार है। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस की ओर से इस संबंध में पारदर्शिता नहीं बरती गई। छोटू चौबे की मां और पूर्व पार्षद रीता शेखर चौबे ने भी पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाए। उनका कहना है कि यदि उनके बेटे को गिरफ्तार किया गया है तो कानूनी प्रक्रिया के तहत उसे न्यायालय में पेश किया जाना चाहिए और परिवार को इसकी जानकारी दी जानी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस ने परिवार को किसी प्रकार की आधिकारिक सूचना नहीं दी। वहीं पुलिस का पक्ष इससे अलग है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार सुयश चौबे उर्फ छोटू चौबे जिले का एक हिस्ट्रीशीटर और कुख्यात अपराधी है, जिसके खिलाफ हत्या, हत्या के प्रयास, लूट, रंगदारी, बलवा, आर्म्स एक्ट, घर में घुसकर मारपीट और तोड़फोड़ जैसे कुल 31 गंभीर आपराधिक मामले दर्ज हैं। पुलिस का दावा है कि आरोपी लंबे समय से विभिन्न मामलों में फरार चल रहा था और उसकी गिरफ्तारी के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे थे। पुलिस के अनुसार बुधवार रात उसे गिरफ्तार किया गया। तलाशी के दौरान उसके कब्जे से एक पिस्टल, छह जिंदा कारतूस और दो मोबाइल फोन बरामद किए गए। अधिकारियों का कहना है कि आरोपी पर पहले से इनाम भी घोषित था और उसके खिलाफ कई गंभीर मामलों की जांच चल रही है। पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक सुयश चौबे ‘2222 गैंग’ नाम से एक गिरोह संचालित करता है। अधिकारियों का दावा है कि वह अपनी गाड़ियों और मोबाइल नंबरों में भी 2222 अंक का उपयोग करता रहा है। वर्ष 2021 में उसके खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (एनएसए) के तहत भी कार्रवाई की जा चुकी है। छोटू चौबे का नाम चर्चित गैंगस्टर अनिराज नायडू उर्फ अन्ना हत्याकांड में भी सामने आ चुका है। पुलिस जांच के अनुसार वह इस मामले में भी आरोपी रहा है। हालांकि संबंधित प्रकरण न्यायिक प्रक्रिया के अधीन है और अंतिम निर्णय न्यायालय द्वारा किया जाना है। सीएसपी रितेश कुमार शिव ने बताया कि पुलिस को सूचना मिली थी कि फरार आरोपी मदनमहल क्षेत्र के स्नेह नगर स्थित एक किराए के मकान में छिपा हुआ है। इसके बाद घमापुर थाना पुलिस और क्राइम ब्रांच की संयुक्त टीम ने दबिश देकर उसे गिरफ्तार किया। पूछताछ और तलाशी के दौरान कमरे से हथियार और कारतूस बरामद किए गए। फिलहाल पुलिस आरोपी से जुड़े नेटवर्क, उसके सहयोगियों और अन्य आपराधिक गतिविधियों की जांच कर रही है। वहीं थाने में हुए हंगामे के बाद पुलिस पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए है और सुरक्षा व्यवस्था भी बढ़ा दी गई है।
पूर्व मंत्री हरेंद्रजीत सिंह बब्बू को फिर मिली जान से मारने की धमकी, बोले- पुलिस नहीं कर रही प्रभावी कार्रवाई

मध्य प्रदेश। जबलपुर के वरिष्ठ भाजपा नेता, पूर्व विधायक और पूर्व राज्य मंत्री हरेंद्रजीत सिंह बब्बू ने पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए दावा किया है कि उन्हें पिछले तीन माह के भीतर दो बार जान से मारने की धमकियां मिल चुकी हैं। उनका आरोप है कि शिकायतों के बावजूद पुलिस अब तक कोई प्रभावी और संतोषजनक कार्रवाई नहीं कर सकी है। पूर्व मंत्री ने कहा कि यदि स्थिति इसी तरह बनी रही तो उन्हें न्याय और सुरक्षा के लिए मुख्यमंत्री हेल्पलाइन का सहारा लेना पड़ सकता है। 68 वर्षीय हरेंद्रजीत सिंह बब्बू जबलपुर पश्चिम विधानसभा क्षेत्र से तीन बार विधायक रह चुके हैं और प्रदेश सरकार में मंत्री पद की जिम्मेदारी भी संभाल चुके हैं। उन्होंने बताया कि पहली बार 11 मार्च 2026 को उनके मोबाइल फोन पर एक अज्ञात नंबर से लगातार कॉल आए थे। उनका दावा है कि फोन उठाने पर सामने वाले व्यक्ति ने उन्हें जान से मारने की धमकी दी थी। इसके बाद उन्होंने गोरखपुर थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराई थी। पूर्व मंत्री का आरोप है कि शिकायत के बाद पुलिस ने एक संदिग्ध व्यक्ति को हिरासत में लिया था, लेकिन बाद में उसे बिना उनकी जानकारी के छोड़ दिया गया। उन्होंने यह भी कहा कि उन्होंने अपनी सुरक्षा को लेकर पहले ही वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को पत्र लिखकर चिंता व्यक्त की थी। उनके अनुसार, सुरक्षा संबंधी पत्र देने के कुछ दिन बाद ही उन्हें पहली धमकी मिली थी। हरेंद्रजीत सिंह बब्बू ने बताया कि 10 जून की शाम को उन्हें एक बार फिर धमकी भरा फोन आया। उनके मुताबिक, वह उस समय कार से कटंगा चौक की ओर जा रहे थे। इसी दौरान एक मोबाइल नंबर से कॉल आया। उनका दावा है कि कॉल रिसीव करते ही सामने वाले व्यक्ति ने अभद्र भाषा का प्रयोग करते हुए उन्हें जान से मारने की धमकी दी। उन्होंने तत्काल फोन काट दिया और सीधे गोरखपुर थाने पहुंचकर पूरे मामले की जानकारी पुलिस को दी। पूर्व मंत्री के अनुसार, थाना प्रभारी ने भी संबंधित नंबर पर संपर्क किया। उनका दावा है कि कॉल करने वाले व्यक्ति ने पुलिस अधिकारी से भी अभद्र व्यवहार किया और धमकी देने की बात स्वीकार की। हालांकि पुलिस का कहना है कि कॉल करने वाला व्यक्ति मानसिक रूप से अस्वस्थ या विक्षिप्त हो सकता है। वहीं हरेंद्रजीत सिंह बब्बू इस दावे से सहमत नहीं हैं और उनका आरोप है कि यह पूरा मामला एक सुनियोजित राजनीतिक षड़यंत्र का हिस्सा हो सकता है। उन्होंने कहा कि उनका परिवार पहले भी हिंसा और हमलों का सामना कर चुका है। उन्होंने 1984 के दंगों का उल्लेख करते हुए कहा कि उस दौरान उनके पिता और चाचा की हत्या कर दी गई थी। इसके अलावा वर्ष 2013 में उन पर बम से हमला भी हुआ था, जिसमें वे गंभीर रूप से घायल हो गए थे। ऐसे में लगातार मिल रही धमकियों ने उनके परिवार की चिंता बढ़ा दी है। पूर्व मंत्री ने यह भी कहा कि अब तक न तो प्रशासन की ओर से कोई विशेष सुरक्षा व्यवस्था की गई है और न ही संगठन स्तर पर किसी बड़े नेता ने उनसे संपर्क किया है। हालांकि घटना की जानकारी मिलने के बाद उनके कुछ समर्थक और करीबी नेता उनसे मिलने पहुंचे और चिंता व्यक्त की। उधर भाजपा नेता समीर दीक्षित ने भी घटना की निंदा करते हुए कहा कि यदि एक पूर्व मंत्री और वरिष्ठ जनप्रतिनिधि खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं तो यह गंभीर चिंता का विषय है। उन्होंने पुलिस प्रशासन से मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषी व्यक्ति या व्यक्तियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की मांग की है। फिलहाल पुलिस मामले की जांच में जुटी हुई है।
जबलपुर में देर रात घर पर बमबाजी से दहशत, होटल विवाद के बाद बदला लेने पहुंचे युवक; CCTV में कैद हुई वारदात

मध्य प्रदेश। मध्य प्रदेश के जबलपुर शहर में गुरुवार देर रात हुई बमबाजी की एक घटना ने स्थानीय लोगों में दहशत का माहौल पैदा कर दिया। रांझी थाना क्षेत्र के रिछाई स्थित अंजलि कॉलोनी में कुछ युवकों ने एक घर को निशाना बनाकर कथित रूप से बम फेंके। हालांकि घटना में कोई जनहानि नहीं हुई, लेकिन तेज धमाकों से पूरा इलाका दहल उठा। पुलिस के अनुसार मामले की जांच जारी है और आरोपियों की तलाश की जा रही है। प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक, घटना की पृष्ठभूमि एक होटल में हुए विवाद से जुड़ी बताई जा रही है। शिकायत के अनुसार, गुरुवार शाम सिविल लाइन क्षेत्र स्थित एक होटल में कुछ युवक ठहरे हुए थे। आरोप है कि वे नशे की हालत में हंगामा कर रहे थे और अभद्र व्यवहार कर रहे थे। होटल कर्मचारी मट्टू समद ने जब उन्हें शांत रहने के लिए कहा, तो उसके साथ मारपीट की गई। शिकायत में यह भी कहा गया है कि होटल कर्मचारियों ने किसी तरह स्थिति को नियंत्रित करते हुए संबंधित युवकों को होटल से बाहर निकाला। होटल प्रबंधन के अनुसार, विवाद के दौरान कर्मचारी को कथित रूप से धमकियां भी दी गईं। इसके बाद मामले की शिकायत सिविल लाइन थाने में दर्ज कराई गई। पुलिस इस विवाद के पहलुओं की भी जांच कर रही है। बताया जा रहा है कि रात करीब साढ़े 11 बजे कर्मचारी मट्टू समद अपने घर पहुंचा था। कुछ समय बाद सफेद रंग की एक स्कूटी पर सवार चार युवक अंजलि कॉलोनी पहुंचे। आरोप है कि उन्होंने घर के बाहर एक के बाद एक कई बम फेंके। हालांकि बम कर्मचारी के घर पर नहीं लगे और पास में रहने वाले अधिवक्ता संतोष भारती के मकान परिसर में जाकर गिरे। धमाकों की आवाज सुनकर आसपास के लोग घबराकर घरों से बाहर निकल आए। क्षेत्र में कुछ समय के लिए अफरा-तफरी का माहौल बन गया और सड़क पर धुआं फैल गया। स्थानीय लोगों ने तुरंत पुलिस को सूचना दी, जिसके बाद वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंचे। पुलिस ने घटनास्थल का निरीक्षण किया और आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों के फुटेज खंगाले। जांच के दौरान कुछ संदिग्ध युवक कैमरों में दिखाई दिए। पुलिस का कहना है कि फुटेज और अन्य साक्ष्यों के आधार पर संदिग्धों की पहचान करने की प्रक्रिया चल रही है। रांझी थाना पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों के अनुसार, घटना में शामिल बताए जा रहे युवकों की तलाश के लिए टीमों का गठन किया गया है। पुलिस का कहना है कि सभी पहलुओं की जांच की जा रही है और साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इस घटना के बाद स्थानीय लोगों में सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है। क्षेत्रवासियों का कहना है कि रिहायशी इलाकों में इस तरह की घटनाएं कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करती हैं। वहीं पुलिस ने लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तत्काल प्रशासन को देने की अपील की है।
शिवपुरी में ज्वेलर्स की दुकान पर अनोखी चोरी, सोने की बाली ले गए शातिर, जगह पर रख गए पीतल की बाली

मध्य प्रदेश । मध्य प्रदेश के शिवपुरी शहर में सराफा बाजार स्थित एक ज्वेलर्स की दुकान पर बेहद शातिराना अंदाज में चोरी किए जाने का मामला सामने आया है। आरोप है कि ग्राहक बनकर आए दो युवकों ने दुकानदार को बातचीत में उलझाकर सोने की बाली चुरा ली और उसकी जगह पीतल की बाली रख दी। हैरानी की बात यह रही कि इस चोरी की भनक दुकानदार को करीब 11 दिन तक नहीं लगी। बाद में जब बालियों की जांच की गई और सीसीटीवी फुटेज खंगाले गए, तब पूरी घटना का खुलासा हुआ। जानकारी के अनुसार, सराफा बाजार स्थित कनक ज्वेलर्स के संचालक विष्णु सोनी ने कोतवाली थाना पुलिस को शिकायत दर्ज कराई है। शिकायत में उन्होंने बताया कि 1 जून को दो युवक उनकी दुकान पर पहुंचे थे। दोनों ने ग्राहक होने का परिचय देते हुए सोने की बालियां देखने की इच्छा जताई। सामान्य प्रक्रिया के तहत दुकानदार ने उनके सामने बालियों की ट्रे रख दी और विभिन्न डिजाइनों की जानकारी देने लगे। दुकानदार के अनुसार, इसी दौरान दोनों युवकों ने अपनी योजना को अंजाम दिया। आरोप है कि एक युवक लगातार दुकानदार को बातचीत में उलझाए रहा, जबकि दूसरा युवक मौका मिलते ही ट्रे में रखी सोने की बाली निकालने में सफल हो गया। आरोपियों ने चोरी को छिपाने के लिए पहले से साथ लाई गई पीतल की बाली ट्रे में उसी स्थान पर रख दी, जिससे किसी को तत्काल संदेह न हो। इसके बाद दोनों युवक बिना किसी शक के दुकान से निकल गए। घटना का खुलासा तब हुआ जब गुरुवार को एक अन्य ग्राहक को बालियां दिखाने के लिए वही ट्रे निकाली गई। ट्रे में रखी एक बाली दुकानदार को संदिग्ध लगी। जांच करने पर पता चला कि वह सोने की नहीं बल्कि पीतल की है। इसके बाद दुकान संचालक ने पिछले दिनों के सीसीटीवी फुटेज की जांच शुरू की। फुटेज देखने पर कथित चोरी की पूरी घटना सामने आ गई। सीसीटीवी में दिखाई दे रहा है कि एक युवक दुकानदार का ध्यान दूसरी ओर लगाए रखता है, जबकि दूसरा युवक ट्रे से सोने की बाली निकालकर उसकी जगह पीतल की बाली रख देता है। फुटेज मिलने के बाद दुकानदार ने पुलिस को इसकी जानकारी दी और कार्रवाई की मांग की। पुलिस के अनुसार, शिकायत प्राप्त होने के बाद मामले की जांच शुरू कर दी गई है। सीसीटीवी फुटेज के आधार पर संदिग्ध युवकों की पहचान करने का प्रयास किया जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि फुटेज में दिखाई दे रहे व्यक्तियों के बारे में जानकारी जुटाई जा रही है और जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। यह घटना सराफा कारोबारियों के लिए भी चेतावनी मानी जा रही है। व्यापारियों का कहना है कि ग्राहकों के रूप में आने वाले शातिर अपराधी नई-नई तरकीबों से चोरी की घटनाओं को अंजाम दे रहे हैं, ऐसे में दुकानदारों को अतिरिक्त सतर्कता बरतने की आवश्यकता है।
गुजरात के होटल में प्रेमिका की हत्या का आरोप, शिवपुरी ला रही पुलिस टीम के सामने हुई सनसनीखेज वारदात

मध्य प्रदेश। मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले से जुड़े एक मामले में गुजरात के गांधी नगर जिले में ऐसी घटना सामने आई है, जिसने पुलिस और आम लोगों को हैरान कर दिया है। पुलिस के अनुसार, शिवपुरी से फरार हुए एक प्रेमी जोड़े को गुजरात से बरामद कर वापस लाया जा रहा था। इसी दौरान होटल में ठहरने के समय युवती की मौत हो गई, जबकि युवक गंभीर रूप से घायल हो गया। पुलिस का कहना है कि प्रारंभिक जानकारी के अनुसार युवक पर युवती की हत्या करने और बाद में खुद को घायल करने का आरोप है। मामले की विस्तृत जांच जारी है। जानकारी के मुताबिक, शिवपुरी जिले के देहात थाना क्षेत्र के पिपरसमा गांव निवासी 21 वर्षीय रजनी धाकड़ और 25 वर्षीय संतोष जाटव 7 जून को घर से चले गए थे। परिजनों द्वारा गुमशुदगी की शिकायत दर्ज कराने के बाद पुलिस ने तकनीकी साक्ष्यों और लोकेशन के आधार पर उनकी तलाश शुरू की। पुलिस टीम युवती के भाई को साथ लेकर गुजरात पहुंची और 11 जून को दोनों को राजकोट जिले के सांपर क्षेत्र से बरामद कर लिया। इसके बाद पुलिस टीम दोनों को लेकर शिवपुरी लौट रही थी। लंबी यात्रा के चलते टीम ने गांधी नगर से आगे उदयपुर हाईवे पर स्थित एक होटल में रात के समय विश्राम करने का निर्णय लिया। पुलिस के अनुसार, होटल के कमरे में पुलिसकर्मी, दोनों युवक-युवती और युवती का भाई समेत कुल छह लोग मौजूद थे। पुलिस सूत्रों के अनुसार, देर रात करीब दो से ढाई बजे के बीच कमरे में अचानक हलचल और चीख-पुकार की आवाज सुनाई दी। मौजूद लोगों के जागने पर युवती गंभीर रूप से घायल अवस्था में मिली, जबकि युवक भी घायल था। पुलिसकर्मियों ने तत्काल हस्तक्षेप किया और दोनों को अस्पताल पहुंचाया। अस्पताल में चिकित्सकों ने युवती को मृत घोषित कर दिया, जबकि युवक को गंभीर हालत में आईसीयू में भर्ती कराया गया है। घटना के बाद कई सवाल खड़े हो गए हैं। पुलिस का कहना है कि युवक की तलाशी ली गई थी और उसके पास कोई धारदार वस्तु नहीं मिली थी। हालांकि, महिला पुलिसकर्मी मौजूद नहीं होने के कारण युवती की तलाशी नहीं ली गई थी। ऐसे में घटना में प्रयुक्त धारदार हथियार कहां से आया, यह जांच का महत्वपूर्ण विषय बना हुआ है। चूंकि घटना गुजरात के गांधी नगर जिले के अंतर्गत हुई है, इसलिए स्थानीय चिलोड़ा थाना पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। शिवपुरी पुलिस के अधिकारियों ने भी घटना की पुष्टि की है और बताया है कि अब पूरे मामले की जांच गुजरात पुलिस के अधिकार क्षेत्र में की जा रही है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले से जुड़े सभी पहलुओं की जांच की जा रही है। होटल स्टाफ, प्रत्यक्षदर्शियों और पुलिस टीम के सदस्यों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं। साथ ही होटल के सीसीटीवी फुटेज और अन्य साक्ष्यों की भी जांच की जा रही है, ताकि घटना की वास्तविक परिस्थितियों का पता लगाया जा सके। फिलहाल युवक अस्पताल में उपचाराधीन है और मामले की जांच जारी है। पुलिस का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही घटना के सभी तथ्यों और परिस्थितियों पर स्पष्ट जानकारी सामने आ सकेगी।
इंदौर में युवक को बीच सड़क रोका, मारपीट के बाद कार में बैठाने की कोशिश; तीन आरोपियों पर केस दर्ज

मध्य प्रदेश। इंदौर के राजेंद्र नगर थाना क्षेत्र में एक युवक के साथ कथित तौर पर रास्ता रोककर मारपीट करने और उसे जबरन कार में बैठाने की कोशिश का मामला सामने आया है। पुलिस ने पीड़ित की शिकायत के आधार पर तीन आरोपियों के खिलाफ विभिन्न धाराओं में प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। घटना के बाद क्षेत्र में चर्चा का माहौल है और पुलिस आरोपियों की तलाश में जुटी हुई है। पुलिस के अनुसार, फरियादी रोहित शर्मा (28) निवासी सदर बाजार मैन रोड, इंदौर ने राजेंद्र नगर थाने में शिकायत दर्ज कराई है। शिकायत में रोहित ने बताया कि 11 जून 2026 को दोपहर करीब 2 बजे वह केशरबाग सर्विस रोड स्थित टिंकुस कैफे के सामने से गुजर रहा था। इसी दौरान कुछ लोगों ने उसका रास्ता रोक लिया और उसके साथ विवाद शुरू कर दिया। शिकायत के मुताबिक, आरोपियों में शामिल एक युवक स्कूटर पर सवार था। उसने रोहित के स्कूटर के सामने अपना वाहन लगाकर उसे रोक लिया। इसके बाद एक कार में सवार कपिल जायसवाल, अमन बैस और एक अन्य युवक वहां पहुंचे। रोहित का आरोप है कि आरोपियों ने पुरानी रंजिश को लेकर उसके साथ गाली-गलौज शुरू कर दी। पीड़ित के अनुसार, विवाद बढ़ने पर तीनों आरोपियों ने मिलकर उसके साथ हाथ-मुक्कों से मारपीट की। रोहित ने आरोप लगाया है कि मारपीट के दौरान उसे जबरदस्ती कार में बैठाकर अपने साथ ले जाने का प्रयास भी किया गया। हालांकि, उसने शोर मचाकर आसपास मौजूद लोगों से मदद मांगी, जिसके बाद स्थानीय लोग मौके पर पहुंचने लगे। लोगों को आता देख आरोपी वहां से भाग निकले। घटना के बाद रोहित ने थाने पहुंचकर पूरी जानकारी पुलिस को दी। शिकायत के आधार पर पुलिस ने नामजद आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस का कहना है कि मामले की जांच की जा रही है और आरोपियों की तलाश के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। राजेंद्र नगर थाना पुलिस के मुताबिक, शिकायत में लगाए गए आरोपों की जांच के साथ-साथ घटनास्थल के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों के फुटेज भी खंगाले जा रहे हैं, ताकि घटना की पूरी परिस्थितियों को स्पष्ट किया जा सके। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि दोनों पक्षों के बीच किस प्रकार की पुरानी रंजिश थी और विवाद की वास्तविक वजह क्या थी। फिलहाल मामले में जांच जारी है। पुलिस का कहना है कि जांच के दौरान सामने आने वाले तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। वहीं, पीड़ित द्वारा लगाए गए आरोपों की भी पुलिस विभिन्न स्तरों पर पुष्टि करने में जुटी हुई है।
राजा रघुवंशी हत्याकांड में फिर उठी CBI जांच की मांग, भाई बोले- परिवार को अब भी इंसाफ का इंतजार

मध्य प्रदेश। इंदौर के चर्चित राजा रघुवंशी हत्याकांड में एक बार फिर केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) से जांच कराने की मांग उठी है। मृतक राजा रघुवंशी के भाई विपिन रघुवंशी ने राज्य सरकार से अपील करते हुए कहा है कि मामले की निष्पक्ष, व्यापक और गहन जांच के लिए इसे सीबीआई को सौंपा जाना चाहिए। उनका कहना है कि परिवार को अब भी न्याय का इंतजार है और इस मामले की सच्चाई पूरी तरह सामने आना जरूरी है। विपिन रघुवंशी का दावा है कि यह मामला राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में रहा है और इसमें दूसरे राज्य का भी पहलू जुड़ा हुआ है। ऐसे में केंद्रीय एजेंसी द्वारा जांच कराए जाने से मामले के सभी पहलुओं की निष्पक्ष पड़ताल हो सकेगी। उन्होंने यह भी कहा कि यदि अन्य चर्चित मामलों में सीबीआई जांच कराई जा सकती है, तो राजा रघुवंशी हत्याकांड में भी ऐसी जांच होनी चाहिए। गौरतलब है कि इंदौर के ट्रांसपोर्ट कारोबारी राजा रघुवंशी अपनी पत्नी सोनम रघुवंशी के साथ हनीमून के लिए शिलांग गए थे। पुलिस के अनुसार, वहां उनकी संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हुई थी। जांच के दौरान पुलिस ने आरोप लगाया था कि सोनम रघुवंशी ने अन्य लोगों के साथ मिलकर हत्या की साजिश रची और घटना को अंजाम दिया। मामले में सोनम सहित अन्य आरोपियों को गिरफ्तार किया गया था। वर्तमान में सोनम रघुवंशी जमानत पर बाहर हैं। इसी संदर्भ में विपिन रघुवंशी ने आशंका जताई है कि जमानत पर बाहर होने के कारण मामले से जुड़े साक्ष्यों और गवाहों पर प्रभाव पड़ने की संभावना हो सकती है। उन्होंने कहा कि परिवार चाहता है कि मामले की पूरी सच्चाई सामने आए और दोषियों को कड़ी सजा मिले। हालांकि, यह परिवार की ओर से व्यक्त की गई आशंका और मांग है, जिसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। विपिन ने कहा कि उनके परिवार को अभी तक यह महसूस नहीं होता कि राजा को पूर्ण न्याय मिला है। उनका मानना है कि सीबीआई जांच से मामले की हर कड़ी की नए सिरे से जांच संभव होगी और किसी भी संभावित पहलू को नजरअंदाज नहीं किया जाएगा। उन्होंने राज्य सरकार से आग्रह किया कि परिवार की भावनाओं को ध्यान में रखते हुए इस मांग पर गंभीरता से विचार किया जाए। राजा रघुवंशी हत्याकांड सामने आने के बाद देशभर में चर्चा का विषय बना था। मामले में पुलिस जांच, गिरफ्तारियां और बाद की कानूनी प्रक्रियाएं लगातार सुर्खियों में रही हैं। अब मृतक के परिजनों द्वारा एक बार फिर सीबीआई जांच की मांग किए जाने से यह मामला दोबारा चर्चा में आ गया है। फिलहाल मामले में कानूनी प्रक्रिया जारी है और संबंधित अदालत में सुनवाई की कार्रवाई आगे बढ़ रही है। वहीं, परिजन लगातार यह मांग कर रहे हैं कि मामले की जांच किसी केंद्रीय एजेंसी से कराई जाए ताकि उन्हें न्याय मिलने का भरोसा मजबूत हो सके।
दुनिया की सबसे बड़ी राम प्रतिमा परियोजना रुकी, तसलीमा नसरीन ने पूछा- अल्पसंख्यकों के अधिकारों का क्या होगा?

नई दिल्ली । बांग्लादेश के गाइबांधा जिले में निर्माणाधीन भगवान राम की विशाल प्रतिमा पर रोक लगाए जाने के बाद देश में धार्मिक स्वतंत्रता और अल्पसंख्यक अधिकारों को लेकर नई बहस शुरू हो गई है। पलाशबाड़ी उपजिला स्थित श्रीश्री राधागोविंद और काली मंदिर परिसर में चल रही इस परियोजना को प्रशासनिक स्तर पर रोक दिए जाने से स्थानीय स्तर पर तनाव का माहौल बना हुआ है और विभिन्न सामाजिक तथा धार्मिक समूहों की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। मंदिर परिसर में प्रस्तावित प्रतिमा को लेकर पिछले कुछ समय से विवाद जारी था। स्थानीय स्तर पर कुछ संगठनों द्वारा इसका विरोध किया जा रहा था, जबकि मंदिर प्रबंधन और समर्थक इसे धार्मिक आस्था तथा सांस्कृतिक पहचान से जुड़ा विषय बता रहे थे। इसी बीच अधिकारियों द्वारा निर्माण गतिविधियों को रोकने के निर्देश दिए गए, जिसके बाद यह मामला राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया। इस घटनाक्रम पर बांग्लादेश की निर्वासित लेखिका और मानवाधिकार कार्यकर्ता तसलीमा नसरीन ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने धार्मिक स्वतंत्रता के सिद्धांत का हवाला देते हुए सवाल उठाया कि यदि देश में विभिन्न धार्मिक समुदायों को अपने पूजा स्थलों के निर्माण और विस्तार का अधिकार प्राप्त है, तो अल्पसंख्यक समुदायों की धार्मिक गतिविधियों पर आपत्ति क्यों जताई जा रही है। उन्होंने कहा कि किसी भी लोकतांत्रिक और कानून आधारित व्यवस्था में सभी नागरिकों को समान धार्मिक अधिकार मिलना चाहिए। तसलीमा नसरीन ने यह भी चिंता जताई कि किसी धार्मिक परियोजना के विरोध में धमकियों, उकसावे या सामाजिक दबाव का माहौल बनना लोकतांत्रिक मूल्यों के अनुकूल नहीं माना जा सकता। उनके अनुसार, किसी भी विवाद का समाधान संवैधानिक और कानूनी प्रक्रियाओं के माध्यम से होना चाहिए, न कि सामाजिक तनाव या टकराव के जरिए। उन्होंने यह भी कहा कि अल्पसंख्यक समुदायों की सुरक्षा और उनके धार्मिक अधिकारों की रक्षा किसी भी आधुनिक राष्ट्र की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी होती है। मामले ने इसलिए भी अधिक ध्यान आकर्षित किया है क्योंकि संबंधित क्षेत्र में अतीत में मंदिरों और धार्मिक स्थलों से जुड़े विवाद सामने आते रहे हैं। ऐसे में निर्माण कार्य पर रोक लगने के बाद स्थानीय हिंदू समुदाय के बीच चिंता और असुरक्षा की भावना बढ़ने की बात भी कही जा रही है। समुदाय के प्रतिनिधियों का मानना है कि धार्मिक आस्था से जुड़ी परियोजनाओं को निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से देखा जाना चाहिए। इस मुद्दे पर कुछ अन्य सार्वजनिक हस्तियों और सामाजिक विश्लेषकों ने भी अपनी राय रखी है। उनका कहना है कि धार्मिक विविधता किसी भी समाज की ताकत होती है और विभिन्न समुदायों के पूजा स्थलों के प्रति समान सम्मान बनाए रखना सामाजिक सौहार्द के लिए आवश्यक है। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि बहुसांस्कृतिक समाजों में सहिष्णुता और परस्पर सम्मान ही स्थायी शांति का आधार बनते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह विवाद केवल एक प्रतिमा या निर्माण परियोजना तक सीमित नहीं है, बल्कि यह धार्मिक स्वतंत्रता, अल्पसंख्यक अधिकारों और सामाजिक समावेशन जैसे व्यापक मुद्दों से भी जुड़ा हुआ है। आने वाले दिनों में प्रशासनिक निर्णय, स्थानीय संवाद और कानूनी प्रक्रियाएं इस मामले की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। फिलहाल निर्माण कार्य पर रोक के कारण स्थिति पर सभी पक्षों की नजर बनी हुई है। इस घटनाक्रम ने बांग्लादेश में धार्मिक अधिकारों और सामाजिक संतुलन से जुड़े प्रश्नों को एक बार फिर सार्वजनिक विमर्श के केंद्र में ला खड़ा किया है।