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पूर्व भारतीय शूटर और द्रोणाचार्य अवॉर्डी जसपाल राणा का निधन, खेल जगत में शोक की लहर

नई दिल्ली। भारतीय शूटिंग जगत को शुक्रवार को उस समय बड़ा झटका लगा, जब पूर्व अंतरराष्ट्रीय निशानेबाज और प्रतिष्ठित कोच जसपाल राणा के निधन की खबर सामने आई। 49 वर्ष की उम्र में उनके निधन से खेल जगत में शोक की लहर दौड़ गई है। जसपाल राणा न केवल भारत के सबसे सफल निशानेबाजों में शामिल थे, बल्कि उन्होंने कोच के रूप में भी भारतीय शूटिंग को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। रिपोर्ट्स के अनुसार, जसपाल राणा हाल ही में जर्मनी के म्यूनिख में आयोजित आईएसएसएफ वर्ल्ड कप से लौट रहे थे। यात्रा के दौरान उनकी तबीयत अचानक बिगड़ गई, जिसके बाद उन्हें दिल्ली के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया। हालांकि चिकित्सकों के प्रयासों के बावजूद उन्हें बचाया नहीं जा सका। उनके निधन की खबर सामने आते ही खेल जगत, खिलाड़ियों और प्रशंसकों के बीच शोक की भावना फैल गई। जसपाल राणा भारतीय शूटिंग के उन चुनिंदा खिलाड़ियों में रहे, जिन्होंने अंतरराष्ट्रीय मंच पर देश का नाम रोशन किया। उन्होंने एशियाई खेलों, कॉमनवेल्थ गेम्स और एशियाई चैंपियनशिप में कई पदक जीतकर भारतीय निशानेबाजी को नई पहचान दिलाई। अपने करियर के दौरान उन्होंने चार कॉमनवेल्थ खेलों—1994, 1998, 2002 और 2006—में भारत का प्रतिनिधित्व किया और कुल 15 पदक अपने नाम किए। इनमें 9 स्वर्ण, 4 रजत और 2 कांस्य पदक शामिल रहे। इसके अलावा एशियाई खेलों में भी उन्होंने शानदार प्रदर्शन करते हुए देश को कई महत्वपूर्ण पदक दिलाए। खिलाड़ी के रूप में सफलता हासिल करने के बाद जसपाल राणा ने कोचिंग की जिम्मेदारी संभाली और नई पीढ़ी के खिलाड़ियों को तैयार करने में जुट गए। भारतीय राष्ट्रीय राइफल संघ (एनआरएआई) ने उन्हें 25 मीटर पिस्टल स्पर्धा के लिए हाई परफॉर्मेंस कोच नियुक्त किया था। उनकी कोचिंग शैली अनुशासन, तकनीकी दक्षता और कड़े प्रशिक्षण के लिए जानी जाती थी। उनके मार्गदर्शन में कई युवा निशानेबाजों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सफलता हासिल की। भारतीय स्टार शूटर मनु भाकर की सफलता में भी जसपाल राणा की भूमिका को बेहद अहम माना जाता है। उनकी देखरेख में मनु ने अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में उल्लेखनीय प्रदर्शन किया और भारतीय शूटिंग को नई पहचान दिलाई। बतौर कोच उनके योगदान को देखते हुए भारत सरकार ने वर्ष 2020 में उन्हें प्रतिष्ठित द्रोणाचार्य पुरस्कार से सम्मानित किया था। हाल के वर्षों में भी जसपाल राणा भारतीय शूटिंग टीम के साथ सक्रिय रूप से जुड़े हुए थे। म्यूनिख में आयोजित आईएसएसएफ वर्ल्ड कप में भारतीय पिस्टल टीम ने उनके मार्गदर्शन में दो स्वर्ण और दो रजत पदक जीतकर शानदार प्रदर्शन किया था। यह उपलब्धि उनकी कोचिंग क्षमता और खेल के प्रति समर्पण को दर्शाती है। भारतीय राष्ट्रीय राइफल संघ (एनआरएआई) के अध्यक्ष कलिकेश नारायण सिंह देव ने उनके निधन पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए कहा कि जसपाल राणा केवल एक महान खिलाड़ी ही नहीं, बल्कि उत्कृष्ट मार्गदर्शक और प्रेरणास्रोत भी थे। उनका योगदान हमेशा भारतीय खेल इतिहास में याद रखा जाएगा। जसपाल राणा का निधन भारतीय शूटिंग समुदाय के लिए अपूरणीय क्षति माना जा रहा है। उन्होंने अपने समर्पण, उपलब्धियों और मार्गदर्शन से भारतीय निशानेबाजी को नई दिशा दी। आने वाली पीढ़ियां उन्हें एक महान खिलाड़ी, सफल कोच और खेल के सच्चे दूत के रूप में हमेशा याद रखेंगी।

होर्मुज संकट के बीच केंद्र का बड़ा दांव, असम और नागालैंड से बढ़ेगा तेल-गैस उत्पादन, ऊर्जा सुरक्षा को मिलेगा नया आ

नई दिल्ली । वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर मंडरा रहे अनिश्चितता के बादलों और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज क्षेत्र में बढ़ते तनाव के बीच भारत ने घरेलू ऊर्जा उत्पादन को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया है। पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने असम और नागालैंड सरकारों के साथ हाइड्रोकार्बन की खोज और उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए त्रिपक्षीय समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं। इस पहल को देश की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने और आयातित ईंधन पर निर्भरता कम करने की दिशा में एक रणनीतिक प्रयास माना जा रहा है। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात के माध्यम से पूरा करता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों, विशेषकर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में किसी भी प्रकार का व्यवधान देश की ऊर्जा आपूर्ति और कीमतों पर असर डाल सकता है। इसी पृष्ठभूमि में केंद्र सरकार घरेलू तेल और गैस उत्पादन क्षमता बढ़ाने पर विशेष ध्यान दे रही है। पूर्वोत्तर भारत को इस रणनीति का प्रमुख केंद्र बनाया जा रहा है, जहां प्राकृतिक संसाधनों की पर्याप्त संभावनाएं मौजूद हैं। पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि पूर्वोत्तर क्षेत्र में खोज और उत्पादन गतिविधियों के विस्तार की अपार संभावनाएं हैं। उन्होंने बताया कि देश के कुल कच्चे तेल भंडार का लगभग 22 प्रतिशत और प्राकृतिक गैस भंडार का करीब 15 प्रतिशत हिस्सा अकेले असम में मौजूद है। ऐसे में इस क्षेत्र का विकास भारत की दीर्घकालिक ऊर्जा रणनीति के लिए बेहद महत्वपूर्ण साबित हो सकता है। नागालैंड को लेकर भी सरकार काफी आशावादी नजर आ रही है। विशेष रूप से असम-अराकान बेसिन की नागा-शुपेन बेल्ट में हाइड्रोकार्बन संसाधनों की बड़ी संभावनाएं बताई जा रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इस क्षेत्र में कई ऐसे भंडार मौजूद हैं जिनका अभी तक पूर्ण दोहन नहीं हो पाया है। नई नीतिगत पहल और निवेश के माध्यम से इन संसाधनों का उपयोग बढ़ाया जा सकता है। सरकार के अनुसार, नए समझौते से तेल उत्पादन क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि संभव है। वर्तमान में कुछ क्षेत्रों में प्रतिदिन लगभग 1000 से 1500 बैरल उत्पादन हो रहा है, जिसे आने वाले वर्षों में कई गुना तक बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है। यदि यह योजना अपेक्षित परिणाम देती है तो देश के घरेलू उत्पादन में महत्वपूर्ण योगदान मिल सकता है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी इस समझौते को पूर्वोत्तर के विकास से जोड़ते हुए कहा कि इससे तेल एवं गैस क्षेत्र में नए अवसर पैदा होंगे। उन्होंने विश्वास जताया कि यह पहल क्षेत्रीय आर्थिक विकास, औद्योगिक गतिविधियों और रोजगार सृजन को नई गति प्रदान करेगी। पूर्वोत्तर राज्यों को राष्ट्रीय विकास की मुख्यधारा से और अधिक मजबूती से जोड़ने में भी यह कदम उपयोगी साबित हो सकता है। पेट्रोलियम मंत्रालय का मानना है कि यह समझौता केवल संसाधनों की खोज तक सीमित नहीं है, बल्कि निवेशकों के लिए भरोसेमंद माहौल तैयार करने में भी मदद करेगा। स्पष्ट नीतिगत ढांचा, बेहतर समन्वय और नियामकीय सहयोग के कारण निजी एवं सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियां दीर्घकालिक निवेश के लिए अधिक उत्साहित हो सकती हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, यदि पूर्वोत्तर क्षेत्र में तेल और गैस उत्पादन बढ़ाने की योजनाएं सफल रहती हैं तो इससे ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी, स्थानीय अर्थव्यवस्था को लाभ मिलेगा और देश की आयात निर्भरता कम करने के लक्ष्य को भी बल मिलेगा। मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों में यह पहल भारत की ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में देखी जा रही है।

शाई होप की कप्तानी पारी से वेस्टइंडीज की शानदार जीत, पहले टी20 में श्रीलंका को 7 विकेट से हराया

नई दिल्ली।  कप्तान शाई होप की शानदार अर्धशतकीय पारी और गेंदबाजों के दमदार प्रदर्शन की बदौलत वेस्टइंडीज ने पहले टी20 अंतरराष्ट्रीय मुकाबले में श्रीलंका को 7 विकेट से हराकर तीन मैचों की सीरीज का विजयी आगाज किया। किंग्स्टन के ऐतिहासिक सबीना पार्क मैदान पर खेले गए मुकाबले में मेजबान टीम ने 148 रनों का लक्ष्य 19.2 ओवर में केवल तीन विकेट खोकर हासिल कर लिया। लक्ष्य का पीछा करने उतरी वेस्टइंडीज की शुरुआत बेहद आक्रामक रही। कप्तान शाई होप और ब्रैंडन किंग ने पहले विकेट के लिए तेजतर्रार साझेदारी करते हुए टीम को मजबूत आधार प्रदान किया। दोनों बल्लेबाजों ने महज 6.2 ओवर में 67 रन जोड़कर श्रीलंकाई गेंदबाजों पर दबाव बना दिया। ब्रैंडन किंग ने 22 गेंदों में 37 रन की विस्फोटक पारी खेली, जिसमें दो चौके और तीन छक्के शामिल रहे। किंग के आउट होने के बाद शिमरोन हेटमायर ने भी तेज शुरुआत की और 9 गेंदों में 17 रन बनाए। हालांकि वह अपनी पारी को बड़ी पारी में नहीं बदल सके और वानिंदु हसरंगा का शिकार बन गए। इसके बावजूद वेस्टइंडीज की रन गति पर कोई असर नहीं पड़ा। कप्तान शाई होप ने जिम्मेदारी संभालते हुए एक छोर पर डटे रहे और शानदार बल्लेबाजी का प्रदर्शन किया। उन्होंने 54 गेंदों में नाबाद 65 रन बनाए, जिसमें पांच चौके और दो छक्के शामिल थे। होप ने संयम और आक्रामकता का बेहतरीन संतुलन दिखाते हुए टीम को जीत की मंजिल तक पहुंचाया। रोस्टन चेज ने 16 रन का योगदान दिया, जबकि रोवमैन पॉवेल 10 रन बनाकर नाबाद लौटे। श्रीलंका की ओर से गेंदबाजी में वानिंदु हसरंगा सबसे सफल गेंदबाज रहे। उन्होंने दो महत्वपूर्ण विकेट हासिल किए, लेकिन अन्य गेंदबाज वेस्टइंडीज के बल्लेबाजों पर प्रभावी दबाव बनाने में सफल नहीं हो सके। इससे पहले टॉस जीतकर बल्लेबाजी करने उतरी श्रीलंका की टीम निर्धारित 20 ओवर में 9 विकेट खोकर 147 रन ही बना सकी। टीम को पथुम निसांका और कुसल मेंडिस ने अच्छी शुरुआत दिलाई। दोनों ने पहले विकेट के लिए 41 रन जोड़े। निसांका 18 रन बनाकर आउट हुए, जबकि कुसल मेंडिस ने 23 गेंदों में 36 रन की उपयोगी पारी खेली। मध्यक्रम में लगातार विकेट गिरने से श्रीलंका की पारी लड़खड़ा गई। लसिथ क्रुस्पुल्ले बिना खाता खोले पवेलियन लौट गए, जबकि पवन रत्नायके केवल चार रन ही बना सके। ऐसे कठिन समय में कामिंदु मेंडिस ने शानदार संघर्ष दिखाया और 39 गेंदों में 51 रन की महत्वपूर्ण पारी खेली। उन्होंने अपनी पारी में चार चौके और दो छक्के लगाए। दासुन शनाका ने भी 22 रन का योगदान देकर टीम को सम्मानजनक स्कोर तक पहुंचाने में मदद की। वेस्टइंडीज की गेंदबाजी में जेसन होल्डर और शेमार जोसेफ ने अहम भूमिका निभाई। होल्डर ने चार ओवर में केवल 18 रन देकर तीन विकेट झटके, जबकि जोसेफ ने भी तीन विकेट हासिल कर श्रीलंका के बल्लेबाजी क्रम को झकझोर दिया। रोस्टन चेज ने भी एक विकेट अपने नाम किया। इस जीत के साथ वेस्टइंडीज ने तीन मैचों की टी20 श्रृंखला में 1-0 की बढ़त बना ली है। अब टीम की नजर अगले मुकाबले में जीत दर्ज कर सीरीज पर पकड़ मजबूत करने पर होगी, जबकि श्रीलंका वापसी के इरादे से मैदान में उतरेगा।

राज्यसभा चुनाव विवाद पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा संदेश, मीनाक्षी नटराजन की याचिका खारिज, संवैधानिक सीमाओं का दिया हवाला

मध्य प्रदेश : से राज्यसभा चुनाव के लिए कांग्रेस की उम्मीदवार रहीं मीनाक्षी नटराजन को उस समय बड़ा कानूनी झटका लगा जब सुप्रीम कोर्ट ने उनके नामांकन पत्र को निरस्त किए जाने के खिलाफ दायर याचिका को खारिज कर दिया। शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया कि चुनावी प्रक्रिया के दौरान न्यायालय सीधे हस्तक्षेप नहीं कर सकता और संविधान में इसके लिए स्पष्ट सीमाएं निर्धारित की गई हैं। न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार मिश्रा और न्यायमूर्ति ए.एस. चंदुरकर की खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान संविधान के अनुच्छेद 329 का उल्लेख करते हुए कहा कि चुनाव संबंधी प्रक्रियाओं में न्यायिक हस्तक्षेप पर प्रतिबंध है। अदालत ने माना कि इस चरण में रिट याचिका पर विचार करना संवैधानिक व्यवस्था के अनुरूप नहीं होगा। इसी आधार पर याचिका को सुनवाई योग्य न मानते हुए खारिज कर दिया गया। सुनवाई के दौरान अदालत ने यह भी संकेत दिया कि यदि किसी उम्मीदवार का नामांकन निर्वाचन अधिकारी द्वारा निरस्त किया जाता है तो उसके लिए उपलब्ध वैधानिक उपाय चुनाव आयोग के समक्ष अपनी शिकायत रखना होता है। न्यायालय ने यह भी जानना चाहा कि क्या ऐसे मामलों में पहले किसी अदालत ने चुनावी प्रक्रिया के बीच हस्तक्षेप किया है, हालांकि याचिकाकर्ता पक्ष कोई ऐसा उदाहरण प्रस्तुत नहीं कर सका। मीनाक्षी नटराजन की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक सिंघवी ने दलील दी कि उनके मुवक्किल का नामांकन अनुचित आधार पर खारिज किया गया। उनका कहना था कि जिस आपराधिक मामले का उल्लेख न करने का आरोप लगाया गया है, वह ऐसा मामला नहीं था जिसके प्रकटीकरण की कानूनी बाध्यता बनती हो। उन्होंने तर्क दिया कि संबंधित मामले में केवल समन जारी हुए थे और उसे नामांकन निरस्त करने का आधार नहीं बनाया जाना चाहिए था। विवाद की शुरुआत उस समय हुई जब राज्यसभा चुनाव के लिए दाखिल किए गए नामांकन पत्रों की जांच के दौरान यह आरोप लगाया गया कि मीनाक्षी नटराजन ने अपने शपथपत्र में एक लंबित न्यायालयीन शिकायत का उल्लेख नहीं किया। निर्वाचन अधिकारी द्वारा उपलब्ध दस्तावेजों की समीक्षा के बाद यह निष्कर्ष निकाला गया कि प्रस्तुत शपथपत्र अधूरा है, जिसके चलते उनका नामांकन निरस्त कर दिया गया। चुनावी प्रक्रिया के दौरान इस मुद्दे ने राजनीतिक रंग भी ले लिया। आपत्ति दर्ज कराने वाले पक्ष का दावा था कि उम्मीदवार ने अपने खिलाफ दर्ज एक मामले की जानकारी छिपाई है, जबकि कांग्रेस ने इसे तकनीकी आधार पर लिया गया निर्णय बताते हुए निर्वाचन प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल उठाए। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद मीनाक्षी नटराजन ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि वह इसे केवल व्यक्तिगत हार के रूप में नहीं देखतीं, बल्कि यह लोकतांत्रिक संस्थाओं और संवैधानिक मूल्यों से जुड़ा मुद्दा है। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग ने उनकी शिकायतों पर अपेक्षित तत्परता से कार्रवाई नहीं की और पूरे मामले में निष्पक्षता को लेकर गंभीर प्रश्न खड़े हुए हैं। कांग्रेस नेता ने यह भी कहा कि शुरू से ही उन्हें चुनावी प्रक्रिया के संचालन को लेकर संदेह था और अदालत के फैसले के बावजूद उनकी चिंताएं समाप्त नहीं हुई हैं। उन्होंने दावा किया कि उनका संघर्ष किसी राज्य सरकार के खिलाफ नहीं, बल्कि चुनावी संस्थाओं की जवाबदेही और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए था। इस फैसले के साथ फिलहाल राज्यसभा चुनाव से जुड़े इस विवाद का न्यायिक अध्याय समाप्त हो गया है। हालांकि राजनीतिक स्तर पर यह मुद्दा आगे भी चर्चा का विषय बना रह सकता है, क्योंकि विपक्ष चुनावी प्रक्रियाओं की निष्पक्षता और पारदर्शिता को लेकर लगातार सवाल उठाता रहा है।

गिल्बर्टो मोरा ने रचा इतिहास, फीफा वर्ल्ड कप में मेक्सिको के सबसे युवा खिलाड़ी बने

नई दिल्ली। फीफा वर्ल्ड कप 2026 के उद्घाटन मुकाबलों के बीच मेक्सिको को एक नया फुटबॉल सितारा मिल गया है। महज 17 साल की उम्र में गिल्बर्टो मोरा ने मैदान पर कदम रखते ही इतिहास रच दिया। वह फीफा वर्ल्ड कप में मेक्सिको का प्रतिनिधित्व करने वाले सबसे कम उम्र के खिलाड़ी बन गए हैं। इस उपलब्धि ने उन्हें न केवल देश के फुटबॉल इतिहास में विशेष स्थान दिलाया है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल जगत का भी ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया है। मेक्सिको सिटी स्टेडियम में खेले गए मुकाबले के दौरान 65वें मिनट में जब कोच ने मोरा को मैदान पर उतारने का फैसला किया, तब दर्शकों ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया। स्टेडियम तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। दर्शकों के बीच मौजूद मशहूर बॉक्सिंग स्टार कैनेलो अल्वारेज भी इस ऐतिहासिक पल के साक्षी बने और उन्होंने युवा खिलाड़ी का उत्साहवर्धन किया। 17 साल और 240 दिन की उम्र में वर्ल्ड कप में उतरकर मोरा ने एक बड़ा रिकॉर्ड अपने नाम किया। वह फीफा विश्व कप के इतिहास में खेलने वाले छठे सबसे कम उम्र के फुटबॉलर बन गए हैं। उनसे पहले इस सूची में ब्राजील के महान फुटबॉलर पेले, कैमरून के सैमुअल इटो, उत्तरी आयरलैंड के नॉर्मन व्हाइटसाइड, नाइजीरिया के फेमी ओपाबुनमी और कैमरून के सॉलोमन ओलेम्बे जैसे दिग्गज खिलाड़ियों के नाम दर्ज हैं। दक्षिणी मेक्सिको के टक्सटला गुटिरेज में जन्मे गिल्बर्टो मोरा का सफर बेहद प्रेरणादायक रहा है। तिजुआना में पले-बढ़े इस खिलाड़ी ने 16 वर्ष की उम्र पूरी होने से ठीक पहले पेशेवर फुटबॉल में पदार्पण किया था। कम उम्र में ही उन्होंने अपने कौशल, खेल समझ और आत्मविश्वास से कोचों और विशेषज्ञों को प्रभावित कर दिया था। मोरा ने 2025 में आयोजित फीफा अंडर-20 विश्व कप में भी शानदार प्रदर्शन किया था। उस प्रतियोगिता में मेक्सिको की टीम क्वार्टर फाइनल तक पहुंची थी और मोरा ने अपनी उम्र से कहीं अधिक परिपक्व खेल का परिचय दिया था। उनकी तकनीकी क्षमता और खेल को नियंत्रित करने की कला ने उन्हें युवा प्रतिभाओं की सूची में सबसे आगे ला खड़ा किया। मेक्सिको की सीनियर राष्ट्रीय टीम में उनका पदार्पण 2025 के कॉनकाकाफ गोल्ड कप के दौरान हुआ। मुख्य कोच जेवियर एगुइरे ने उन पर भरोसा जताया और युवा खिलाड़ी ने उस विश्वास को सही साबित किया। सऊदी अरब के खिलाफ क्वार्टर फाइनल मुकाबले में उन्होंने पहली बार सीनियर टीम की जर्सी पहनी और सबसे कम उम्र में राष्ट्रीय टीम का प्रतिनिधित्व करने का रिकॉर्ड भी अपने नाम किया। इसके बाद सेमीफाइनल में उन्होंने राउल जिमेनेज के गोल में अहम भूमिका निभाकर अपनी उपयोगिता साबित की। गिल्बर्टो मोरा को उनकी बेहतरीन खेल समझ, दबाव में संयम बनाए रखने की क्षमता और रचनात्मक पासिंग के लिए जाना जाता है। मैदान पर उनकी मौजूदगी विपक्षी टीम के लिए चुनौती बनती है। विशेषज्ञों का मानना है कि वह आने वाले वर्षों में मेक्सिको फुटबॉल की सबसे बड़ी उम्मीदों में से एक साबित हो सकते हैं। फीफा वर्ल्ड कप 2026 में बना यह रिकॉर्ड उनके उज्ज्वल भविष्य की ओर एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

टीएमसी की अंदरूनी कलह पर सियासी संग्राम, कीर्ति आजाद और निशिकांत दुबे के बीच सोशल मीडिया पर तीखी नोकझोंक के बाद दिखी पारिवारिक गर्माहट

नई दिल्ली । पश्चिम बंगाल की राजनीति में जारी हलचल और तृणमूल कांग्रेस के भीतर सामने आ रहे असंतोष के बीच एक दिलचस्प राजनीतिक घटनाक्रम देखने को मिला, जब तृणमूल कांग्रेस सांसद कीर्ति आजाद और भारतीय जनता पार्टी के सांसद निशिकांत दुबे सोशल मीडिया मंच पर आमने-सामने आ गए। हालांकि आरोप-प्रत्यारोप से शुरू हुई यह बहस अंततः राजनीतिक मतभेदों से आगे बढ़कर पुराने व्यक्तिगत और पारिवारिक संबंधों की चर्चा तक पहुंच गई। पूरा विवाद उस समय शुरू हुआ जब तृणमूल कांग्रेस में कथित असंतोष और दल छोड़ने की चर्चाओं को लेकर कीर्ति आजाद ने भाजपा पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्षी दलों में सेंध लगाने की कोशिशें की जा रही हैं और इसे एक सुनियोजित राजनीतिक अभियान का हिस्सा बताया। इस दौरान उन्होंने कुछ भाजपा नेताओं के नामों का उल्लेख करते हुए पार्टी के खिलाफ तीखे सवाल उठाए। कीर्ति आजाद के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने सोशल मीडिया पर जवाब दिया। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में हर व्यक्ति को अपनी बात रखने का अधिकार है और यदि किसी को प्रेस वार्ता करनी है तो उसके लिए उनके आवास का उपयोग भी किया जा सकता है। इसके साथ ही उन्होंने अपने और कीर्ति आजाद के पुराने राजनीतिक तथा पारिवारिक संबंधों का भी जिक्र किया। निशिकांत दुबे ने याद दिलाया कि दोनों नेता लंबे समय तक एक ही राजनीतिक दल में साथ सांसद रह चुके हैं। उन्होंने यह भी कहा कि कीर्ति आजाद के पिता उनके लिए एक अभिभावक समान थे और उनके परिवार के साथ पुराने संबंध रहे हैं। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि कीर्ति आजाद का पैतृक गांव उनके संसदीय क्षेत्र में आता है और वहां के लोगों से उनका वर्षों पुराना जुड़ाव है। इस जवाब के बाद राजनीतिक बहस का स्वर कुछ नरम पड़ता दिखाई दिया। कीर्ति आजाद ने भी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके और निशिकांत दुबे के बीच कोई व्यक्तिगत संघर्ष नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि राजनीतिक मतभेद लोकतंत्र का हिस्सा हैं, लेकिन उन्हें व्यक्तिगत रिश्तों पर हावी नहीं होना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि विचारों में असहमति हो सकती है, लेकिन मनभेद की स्थिति नहीं बननी चाहिए। कीर्ति आजाद ने अपने आरोपों को दोहराते हुए कहा कि वे केवल राजनीतिक घटनाक्रमों और दल-बदल से जुड़ी गतिविधियों पर सवाल उठा रहे थे। उनके अनुसार, जिन घटनाओं का वे उल्लेख कर रहे हैं, वे सार्वजनिक रूप से दिखाई दे रही हैं और उन्हें अलग से प्रमाणित करने की आवश्यकता नहीं है। हालांकि इसके साथ उन्होंने व्यक्तिगत रिश्तों का सम्मान बनाए रखने की बात भी कही। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह घटनाक्रम भारतीय राजनीति की उस परंपरा को भी दर्शाता है, जहां तीखे राजनीतिक मतभेदों के बावजूद कई नेताओं के बीच व्यक्तिगत संबंध और आपसी सम्मान कायम रहता है। सोशल मीडिया के दौर में जहां राजनीतिक बहसें अक्सर कटुता का रूप ले लेती हैं, वहीं इस मामले में अंततः संवाद का स्वर अपेक्षाकृत संयमित दिखाई दिया। तृणमूल कांग्रेस के भीतर जारी राजनीतिक गतिविधियों और कथित असंतोष को लेकर चर्चाएं अभी भी जारी हैं। ऐसे में कीर्ति आजाद और निशिकांत दुबे के बीच हुई यह बहस केवल दो नेताओं के बीच की प्रतिक्रिया नहीं, बल्कि मौजूदा राजनीतिक माहौल की झलक भी मानी जा रही है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर राजनीतिक बयानबाजी और तेज हो सकती है, लेकिन फिलहाल दोनों नेताओं ने यह संकेत दिया है कि राजनीतिक मतभेदों के बावजूद व्यक्तिगत सम्मान और संवाद की परंपरा कायम रहनी चाहिए।

फीफा वर्ल्ड कप 2026 में मेक्सिको की शानदार शुरुआत, साउथ अफ्रीका को 2-0 से रौंदा

नई दिल्ली। फीफा वर्ल्ड कप 2026 की शुरुआत मेक्सिको के लिए बेहद यादगार रही। घरेलू सरजमीं पर खेले गए टूर्नामेंट के उद्घाटन मुकाबले में मेक्सिको ने शानदार प्रदर्शन करते हुए साउथ अफ्रीका को 2-0 से शिकस्त दी। एज्टेका स्टेडियम में हजारों दर्शकों की मौजूदगी में मेक्सिकन टीम ने शुरुआत से ही मुकाबले पर अपना दबदबा कायम रखा और पूरे मैच में विपक्षी टीम को खुलकर खेलने का मौका नहीं दिया। मुकाबले की शुरुआत से ही मेक्सिको ने आक्रामक खेल का प्रदर्शन किया। गेंद पर नियंत्रण रखने के साथ-साथ टीम ने लगातार साउथ अफ्रीका के डिफेंस पर दबाव बनाया। इसी दबाव का परिणाम पहले हाफ में देखने को मिला, जब जूलियन क्विनोनेस ने शानदार गोल कर अपनी टीम को बढ़त दिलाई। यह फीफा वर्ल्ड कप 2026 का पहला गोल भी था, जिससे क्विनोनेस ने इतिहास में अपना नाम दर्ज करा लिया। उनके गोल के साथ ही स्टेडियम में मौजूद प्रशंसकों के बीच जबरदस्त उत्साह देखने को मिला। क्विनोनेस पूरे मुकाबले में बेहतरीन फॉर्म में नजर आए। उनकी गति, मूवमेंट और आक्रामकता ने साउथ अफ्रीका के रक्षापंक्ति को लगातार परेशान किया। पहले हाफ में उनके पास एक और गोल करने का अवसर भी आया, लेकिन साउथ अफ्रीकी डिफेंडरों ने किसी तरह खतरे को टाल दिया। पहले 45 मिनट के खेल के बाद मेक्सिको 1-0 की बढ़त के साथ हाफ टाइम तक पहुंचा। दूसरे हाफ की शुरुआत साउथ अफ्रीका के लिए निराशाजनक रही। मेक्सिको के ब्रायन गुटिरेज को गोल की ओर बढ़ने से रोकने के प्रयास में याया सिथोल ने फाउल किया, जिसके बाद रेफरी ने उन्हें सीधे रेड कार्ड दिखा दिया। इस फैसले के बाद साउथ अफ्रीका को शेष मुकाबला 10 खिलाड़ियों के साथ खेलना पड़ा। संख्या बल में बढ़त मिलने के बाद मेक्सिको ने अपना हमला और तेज कर दिया। इसका फायदा टीम को जल्द ही मिला जब अनुभवी स्ट्राइकर राउल जिमेनेज ने शानदार फिनिश के साथ गेंद को जाल में पहुंचाकर स्कोर 2-0 कर दिया। जिमेनेज के इस गोल ने मेक्सिको की जीत लगभग सुनिश्चित कर दी और घरेलू दर्शकों का उत्साह चरम पर पहुंच गया। साउथ अफ्रीका की परेशानियां यहीं समाप्त नहीं हुईं। टीम के खिलाड़ी थेम्बा जवाने को हिंसक व्यवहार के कारण रेड कार्ड दिखाया गया, जिसके बाद टीम केवल नौ खिलाड़ियों के साथ मैदान पर रह गई। दो खिलाड़ियों की कमी के कारण साउथ अफ्रीका के लिए मुकाबले में वापसी करना लगभग असंभव हो गया। हालांकि मैच के अंतिम चरण में मेक्सिको को भी एक झटका लगा, जब डिफेंडर सीजर मोंटेस को लापरवाह चुनौती के लिए रेड कार्ड दिखाया गया। इसके बावजूद मैच के परिणाम पर कोई असर नहीं पड़ा और मेक्सिको ने 2-0 की प्रभावशाली जीत के साथ टूर्नामेंट में अपने अभियान का शानदार आगाज किया। जूलियन क्विनोनेस और राउल जिमेनेज इस जीत के सबसे बड़े नायक साबित हुए, जिनके दमदार प्रदर्शन ने मेक्सिको को शुरुआती बढ़त दिलाने के साथ जीत की राह भी आसान बनाई।

IIT इंदौर का 14वां दीक्षांत समारोह 27 जून को: इसरो के पूर्व प्रमुख डॉ. के. सिवन करेंगे अध्यक्षता, प्रो. अभय करांदिकर होंगे मुख्य अतिथि

मध्य प्रदेश। देश के प्रमुख तकनीकी शिक्षण संस्थानों में शामिल भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) इंदौर अपने 14वें दीक्षांत समारोह के आयोजन की तैयारियों में जुट गया है। संस्थान का यह बहुप्रतीक्षित समारोह 27 जून 2026 (शनिवार) को आयोजित किया जाएगा, जिसमें विभिन्न शैक्षणिक कार्यक्रमों के विद्यार्थियों को डिग्रियां और प्रतिष्ठित सम्मान प्रदान किए जाएंगे। आईआईटी इंदौर प्रशासन के अनुसार इस वर्ष के दीक्षांत समारोह के मुख्य अतिथि नीति आयोग के सदस्य तथा भारत सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) के पूर्व सचिव प्रो. अभय करांदिकर होंगे। वहीं समारोह की अध्यक्षता भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के पूर्व चेयरमैन और आईआईटी इंदौर बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के वर्तमान चेयरपर्सन डॉ. के. सिवन करेंगे। दोपहर 2:30 बजे शुरू होने वाले इस कार्यक्रम की शुरुआत संस्थान के निदेशक के स्वागत संबोधन और वार्षिक प्रतिवेदन प्रस्तुति के साथ होगी। इसके बाद बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के चेयरपर्सन डॉ. के. सिवन विद्यार्थियों, शिक्षकों और अतिथियों को संबोधित करेंगे। कार्यक्रम के मुख्य आकर्षण के रूप में प्रो. अभय करांदिकर का दीक्षांत भाषण होगा, जिसमें वे विद्यार्थियों को भविष्य की चुनौतियों और अवसरों के संबंध में मार्गदर्शन देंगे। समारोह के दौरान स्नातक, स्नातकोत्तर और शोध कार्यक्रमों के विद्यार्थियों को उनकी शैक्षणिक उपलब्धियों के आधार पर डिग्रियां प्रदान की जाएंगी। इसके साथ ही उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले छात्र-छात्राओं को स्वर्ण पदक और अन्य प्रतिष्ठित सम्मान भी दिए जाएंगे। संस्थान की परंपरा के अनुसार डिग्री प्राप्त करने वाले विद्यार्थी सामूहिक रूप से शपथ ग्रहण करेंगे और समाज तथा राष्ट्र के प्रति अपने दायित्वों के निर्वहन का संकल्प लेंगे। आईआईटी इंदौर ने समारोह में शामिल होने वाले अभिभावकों, शोधकर्ताओं और अन्य अतिथियों की सुविधा के लिए विशेष व्यवस्था की है। संस्थान ने इंदौर एयरपोर्ट और रेलवे स्टेशन से सीधे कैंपस तक पहुंचने के लिए डिजिटल क्यूआर कोड आधारित नेविगेशन सुविधा उपलब्ध कराई है। इससे बाहरी राज्यों और अन्य देशों से आने वाले मेहमानों को संस्थान तक पहुंचने में आसानी होगी। जो लोग किसी कारणवश समारोह में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित नहीं हो सकेंगे, उनके लिए भी संस्थान ने विशेष व्यवस्था की है। दीक्षांत समारोह का सीधा प्रसारण आईआईटी इंदौर की आधिकारिक वेबसाइट पर किया जाएगा। दर्शक दोपहर 2:30 बजे से लाइव स्ट्रीमिंग के माध्यम से पूरे कार्यक्रम को देख सकेंगे। आईआईटी इंदौर का यह दीक्षांत समारोह केवल डिग्री वितरण का कार्यक्रम नहीं बल्कि विद्यार्थियों की वर्षों की मेहनत, शोध और उपलब्धियों का उत्सव भी माना जाता है। हर वर्ष की तरह इस बार भी संस्थान को उम्मीद है कि यहां से निकलने वाले युवा देश और दुनिया में विज्ञान, प्रौद्योगिकी, नवाचार और अनुसंधान के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों को छुएंगे।

‘ऐसा लगा जैसे फिर से 26/11 देख रहे हों’: कंगना रनौत की ‘भारत भाग्य विधाता’ को दर्शकों ने बताया दिल छू लेने वाली फिल्म

नई दिल्ली । 26 नवंबर 2008 की भयावह रात को केंद्र में रखकर बनाई गई फिल्म ‘भारत भाग्य विधाता’ ने रिलीज के साथ ही दर्शकों के बीच गहरी चर्चा छेड़ दी है। कंगना रनौत की मुख्य भूमिका वाली यह फिल्म केवल एक आतंकी हमले की कहानी नहीं कहती, बल्कि उन अनदेखे और अक्सर उपेक्षित नायकों को सामने लाती है, जिन्होंने संकट की घड़ी में असाधारण साहस का परिचय दिया था। फिल्म देखने के बाद बड़ी संख्या में दर्शकों ने इसकी कहानी, भावनात्मक प्रभाव और कलाकारों के अभिनय की सराहना की है। फिल्म का केंद्र बिंदु कामा अस्पताल की एक नर्स है, जो 26/11 हमलों के दौरान अचानक ऐसी परिस्थिति में पहुंच जाती है, जहां हर निर्णय जीवन और मृत्यु के बीच का अंतर बन जाता है। कंगना रनौत ने इस किरदार को संवेदनशीलता और गंभीरता के साथ निभाया है। दर्शकों का मानना है कि उनका अभिनय कहानी की भावनात्मक गहराई को और अधिक प्रभावशाली बनाता है। सिनेमाघरों से बाहर निकलने वाले कई दर्शकों ने कहा कि फिल्म देखते समय उन्हें ऐसा महसूस हुआ जैसे वे उस दौर की घटनाओं को दोबारा जी रहे हों। अस्पताल के भीतर फैला तनाव, मरीजों की सुरक्षा की चिंता और लगातार मंडराता खतरा दर्शकों को कहानी से जोड़े रखता है। फिल्म की सबसे बड़ी विशेषता यह बताई जा रही है कि इसमें आतंकवादी हमलों को नर्सों और स्वास्थ्यकर्मियों के नजरिए से प्रस्तुत किया गया है, जो हिंदी सिनेमा में अपेक्षाकृत कम देखने को मिलता है। दर्शकों के एक वर्ग ने फिल्म के उस संदेश की भी सराहना की, जिसमें समाज में सामान्य कर्मचारियों की भूमिका और महत्व को रेखांकित किया गया है। फिल्म यह दिखाने का प्रयास करती है कि संकट के समय केवल नेतृत्वकारी पदों पर बैठे लोग ही नहीं, बल्कि अस्पतालों, आपात सेवाओं और स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े साधारण कर्मचारी भी समाज की सुरक्षा और स्थिरता में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं। कई दर्शकों ने विशेष रूप से नर्सिंग पेशे के प्रति सम्मान व्यक्त किया। उनका कहना था कि फिल्म उन परिस्थितियों को सामने लाती है, जिनका सामना स्वास्थ्यकर्मी अक्सर चुपचाप करते हैं। मरीजों की देखभाल, आपातकालीन स्थितियों में त्वरित निर्णय और अपने कर्तव्य के प्रति समर्पण को फिल्म में प्रभावशाली ढंग से दिखाया गया है। यही कारण है कि फिल्म केवल मनोरंजन तक सीमित नहीं रहती, बल्कि दर्शकों को सोचने पर भी मजबूर करती है। हालांकि कुछ दर्शकों ने यह भी माना कि 26/11 हमलों से जुड़े कुछ दृश्यों को और अधिक वास्तविकता के साथ प्रस्तुत किया जा सकता था। वहीं कुछ लोगों ने फिल्म के अंतिम हिस्से को अपेक्षाकृत कमजोर बताया। इसके बावजूद अधिकांश प्रतिक्रियाएं सकारात्मक रही हैं और दर्शकों ने फिल्म की गंभीर विषयवस्तु तथा प्रस्तुति की प्रशंसा की है। फिल्म का पहला भाग अस्पताल की सामान्य दिनचर्या, नर्सों के संघर्ष और उनके व्यक्तिगत जीवन की झलक प्रस्तुत करता है। इसके बाद कहानी धीरे-धीरे उस भयावह रात की ओर बढ़ती है, जब मुंबई आतंकी हमलों से दहल उठता है। दूसरे भाग में घटनाओं की तीव्रता बढ़ती है और नर्सों के साहस, जिम्मेदारी तथा मानवता की भावना को केंद्र में रखा जाता है। ‘भारत भाग्य विधाता’ उन वास्तविक नायकों को श्रद्धांजलि देने का प्रयास करती है, जिन्होंने कठिनतम परिस्थितियों में भी अपने कर्तव्य को सर्वोपरि रखा। यही कारण है कि फिल्म दर्शकों को केवल एक ऐतिहासिक घटना की याद नहीं दिलाती, बल्कि साहस, सेवा और मानवता के महत्व को भी मजबूती से सामने लाती है।

इंदौर जंक्शन के मेगा री-डेवलपमेंट की शुरुआत: जल्द लक्ष्मीबाई नगर स्टेशन से चलेंगी ट्रेनें, यात्रियों को मिलेगी नई सुविधा

मध्य प्रदेश। इंदौर के लाखों रेल यात्रियों के लिए आने वाला समय कई महत्वपूर्ण बदलाव लेकर आने वाला है। शहर के प्रमुख रेलवे स्टेशन इंदौर जंक्शन के व्यापक पुनर्विकास और आधुनिक स्वरूप में निर्माण की प्रक्रिया तेज हो गई है। रेलवे की महत्वाकांक्षी योजना के तहत इंदौर जंक्शन को विश्वस्तरीय सुविधाओं से लैस किया जाएगा। इसी परियोजना को सुचारु रूप से पूरा करने के लिए ट्रेनों का संचालन चरणबद्ध तरीके से लक्ष्मीबाई नगर रेलवे स्टेशन से शुरू करने की तैयारी की जा रही है। पश्चिम रेलवे रतलाम मंडल के जनसंपर्क अधिकारी मुकेश कुमार के अनुसार लक्ष्मीबाई नगर रेलवे स्टेशन की नई इमारत का निर्माण लगभग पूरा हो चुका है। स्टेशन परिसर में यात्रियों की सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए टिकट काउंटर, प्रतीक्षालय, पेयजल, यात्री सूचना प्रणाली और अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं को अंतिम रूप दिया जा रहा है। रेलवे का उद्देश्य है कि संचालन शुरू होने से पहले यात्रियों को सभी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध करा दी जाएं। रेलवे अधिकारियों के मुताबिक फिलहाल इंदौर यार्ड क्षेत्र में महत्वपूर्ण तकनीकी कार्य जारी है। इसके तहत नॉन-इंटरलॉकिंग प्रक्रिया और विभिन्न तकनीकी उन्नयन किए जा रहे हैं। इस कार्य को पूरा करने के लिए रेलवे ने मेजर ब्लॉक भी लिया है। इसी कारण कुछ ट्रेनों को अस्थायी रूप से निरस्त या उनके संचालन में बदलाव किया गया था। तकनीकी कार्यों के अंतर्गत ट्रैक सर्किट, सिग्नलिंग सिस्टम और कंप्यूटर आधारित ऑपरेशन कंट्रोल सिस्टम को नए स्टेशन परिसर के अनुरूप व्यवस्थित किया जा रहा है। रेलवे का कहना है कि यह प्रक्रिया सुरक्षा और परिचालन क्षमता को बेहतर बनाने के लिए बेहद जरूरी है। सभी कार्य निर्धारित मानकों और सुरक्षा प्रोटोकॉल के अनुसार किए जा रहे हैं। रेलवे के जोनल और मंडल स्तर के वरिष्ठ अधिकारी पूरे प्रोजेक्ट की नियमित निगरानी कर रहे हैं। अधिकारियों का मानना है कि यह बदलाव भविष्य में इंदौर को एक आधुनिक और अत्याधुनिक रेलवे स्टेशन उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगा। परियोजना पूरी होने के बाद यात्रियों को बेहतर यातायात व्यवस्था, आधुनिक सुविधाएं और अधिक सुव्यवस्थित स्टेशन परिसर मिलेगा। रेलवे के अनुसार जैसे ही तकनीकी और प्रशासनिक प्रक्रियाएं पूरी होंगी, ट्रेनों का संचालन लक्ष्मीबाई नगर रेलवे स्टेशन से शुरू कर दिया जाएगा। इसके बाद इंदौर जंक्शन पर नई स्टेशन बिल्डिंग और अन्य संरचनात्मक विकास कार्यों को तेजी से आगे बढ़ाया जाएगा। रेलवे प्रशासन ने यात्रियों से अपील की है कि यात्रा से पहले अपनी ट्रेन के प्रस्थान और आगमन स्टेशन की जानकारी अवश्य जांच लें। संचालन में होने वाले बदलावों की जानकारी रेलवे की आधिकारिक वेबसाइट, मोबाइल एप और सूचना केंद्रों के माध्यम से प्राप्त की जा सकती है। इससे यात्रियों को किसी भी प्रकार की असुविधा से बचने में मदद मिलेगी। मेगा री-डेवलपमेंट परियोजना के पूरा होने के बाद इंदौर जंक्शन को आधुनिक सुविधाओं से युक्त एक नए स्वरूप में विकसित किए जाने की उम्मीद है, जो शहर की बढ़ती जरूरतों और यात्री संख्या को बेहतर तरीके से पूरा कर सकेगा।