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न्यूक्लियर सेक्टर को कर राहत का तोहफा: सरकार ने पूर्व प्रभाव से कस्टम ड्यूटी माफी दी, ऊर्जा परियोजनाओं की लागत घटने की उम्मीद

नई दिल्ली । केंद्र सरकार ने देश में परमाणु ऊर्जा क्षेत्र को प्रोत्साहन देने और स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन को मजबूत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए परमाणु बिजली उत्पादन में इस्तेमाल होने वाले कुछ विशेष आयातित सामानों पर कस्टम ड्यूटी से छूट प्रदान कर दी है। सरकार द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार यह राहत 1 अप्रैल 2019 से 31 जनवरी 2026 तक की अवधि के लिए प्रभावी मानी जाएगी, जिससे इस दौरान किए गए पात्र आयातों पर सीमा शुल्क देनदारी समाप्त हो जाएगी। सरकारी निर्णय के तहत गैर-विकिरणित फ्यूल एलिमेंट्स तथा परमाणु रिएक्टरों में उपयोग किए जाने वाले विशेष कार्ट्रिज जैसे महत्वपूर्ण उपकरणों और सामग्रियों के आयात पर कस्टम ड्यूटी नहीं लगेगी। ये सामग्री परमाणु ऊर्जा संयंत्रों के संचालन और बिजली उत्पादन प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। ऐसे में यह कदम परमाणु ऊर्जा क्षेत्र की परिचालन लागत को कम करने में सहायक माना जा रहा है। सरकार का कहना है कि इन उत्पादों के आयात पर शुल्क नहीं लेने की व्यवस्था लंबे समय से व्यवहारिक रूप से लागू थी, लेकिन अब इसे औपचारिक वैधानिक मान्यता प्रदान की गई है। इससे संबंधित संस्थानों और कंपनियों को पूर्व अवधि के आयातों के संबंध में किसी प्रकार की कर अनिश्चितता या अतिरिक्त वित्तीय दायित्व का सामना नहीं करना पड़ेगा। इस फैसले का सबसे अधिक लाभ न्यूक्लियर पावर कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड को मिलने की संभावना है, जो देश के विभिन्न परमाणु बिजली संयंत्रों के लिए आवश्यक ईंधन असेंबली और तकनीकी सामग्री का आयात करती है। इसके अतिरिक्त, परमाणु ऊर्जा क्षेत्र से जुड़ी अन्य एजेंसियों और सहयोगी संस्थानों को भी इस राहत का लाभ प्राप्त होगा। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे परियोजनाओं की लागत में कमी आएगी और भविष्य में निवेश का वातावरण अधिक अनुकूल बनेगा। भारत वर्तमान समय में ऊर्जा सुरक्षा और स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन दोनों लक्ष्यों को समान प्राथमिकता दे रहा है। बढ़ती ऊर्जा मांग, जीवाश्म ईंधनों पर निर्भरता कम करने की आवश्यकता तथा कार्बन उत्सर्जन में कमी के वैश्विक लक्ष्यों को देखते हुए परमाणु ऊर्जा को एक महत्वपूर्ण विकल्प माना जा रहा है। यही कारण है कि सरकार लगातार इस क्षेत्र में निवेश, तकनीकी उन्नयन और नीतिगत समर्थन बढ़ाने पर जोर दे रही है। विशेषज्ञों के अनुसार परमाणु ऊर्जा स्थिर और बड़े पैमाने पर बिजली उत्पादन का ऐसा स्रोत है जो मौसम संबंधी परिस्थितियों पर निर्भर नहीं रहता। सौर और पवन ऊर्जा के साथ संतुलन बनाते हुए यह देश के ऊर्जा मिश्रण को अधिक मजबूत और विश्वसनीय बना सकता है। ऐसे में आयातित महत्वपूर्ण सामग्रियों पर कर छूट का यह निर्णय राष्ट्रीय ऊर्जा रणनीति के व्यापक लक्ष्यों के अनुरूप माना जा रहा है। उल्लेखनीय है कि हाल ही में सरकार ने अधिक एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल पर भी उत्पाद शुल्क को शून्य करने का निर्णय लिया था। 22 प्रतिशत से 30 प्रतिशत तक एथेनॉल मिश्रण वाले मोटर स्पिरिट को इस राहत के दायरे में लाया गया है। इससे स्पष्ट संकेत मिलता है कि सरकार ऊर्जा क्षेत्र में वैकल्पिक और स्वच्छ स्रोतों को बढ़ावा देने के लिए कर संबंधी नीतियों का सक्रिय उपयोग कर रही है। परमाणु ऊर्जा क्षेत्र को मिली यह नई राहत भी उसी व्यापक रणनीति का हिस्सा मानी जा रही है, जिसका उद्देश्य देश को अधिक टिकाऊ, सुरक्षित और आत्मनिर्भर ऊर्जा व्यवस्था की ओर अग्रसर करना है।

भोपाल-ग्वालियर के बीच बनेगा नया ग्रीनफील्ड कॉरिडोर: 80 किमी तक घटेगी दूरी, साढ़े 5 घंटे में पूरा होगा सफर

मध्य प्रदेश। मध्य प्रदेश में सड़क संपर्क को और अधिक तेज, सुरक्षित और आधुनिक बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण परियोजना आकार लेने जा रही है। राज्य सरकार और मध्यप्रदेश सड़क विकास निगम (एमपीआरडीसी) भोपाल और ग्वालियर के बीच नया 4-लेन ग्रीनफील्ड कॉरिडोर विकसित करने की तैयारी कर रहे हैं। इस महत्वाकांक्षी परियोजना के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार करने हेतु इसी महीने टेंडर जारी किए जाने की योजना है। प्रस्तावित ग्रीनफील्ड कॉरिडोर बनने के बाद भोपाल और ग्वालियर के बीच की दूरी में लगभग 70 से 80 किलोमीटर तक की कमी आएगी। वर्तमान में दोनों शहरों के बीच सड़क मार्ग से दूरी लगभग 425 किलोमीटर है, जो नए मार्ग के निर्माण के बाद घटकर करीब 340 से 350 किलोमीटर रह जाएगी। दूरी कम होने का सीधा लाभ यात्रा समय पर भी पड़ेगा। अभी जहां भोपाल से ग्वालियर पहुंचने में 7 से 8 घंटे तक का समय लगता है, वहीं नए कॉरिडोर के चालू होने के बाद यह सफर लगभग साढ़े पांच घंटे में पूरा किया जा सकेगा। जानकारी के अनुसार, इस परियोजना को बीओटी (बिल्ड-ऑपरेट-ट्रांसफर) मॉडल पर विकसित किया जाएगा। एमपीआरडीसी की योजना अगले तीन वर्षों के भीतर इस परियोजना को पूरा करने की है। सड़क विशेषज्ञों का मानना है कि यह कॉरिडोर प्रदेश के उत्तर और मध्य हिस्सों के बीच यातायात को अधिक सुगम बनाएगा तथा औद्योगिक, व्यापारिक और पर्यटन गतिविधियों को भी गति देगा। सूत्रों के मुताबिक महाराष्ट्र में विकसित आधुनिक सड़क परियोजनाओं के अध्ययन के बाद मध्य प्रदेश में ग्रीनफील्ड सड़क नेटवर्क को तेजी से विस्तार देने पर सहमति बनी है। इसी रणनीति के तहत भोपाल-ग्वालियर कॉरिडोर को प्राथमिकता दी गई है। इससे पहले भोपाल-इंदौर, भोपाल-मंदसौर, सागर-सतना, सागर-जबलपुर और जबलपुर-आशापुर जैसे ग्रीनफील्ड कॉरिडोर प्रोजेक्ट भी विभिन्न चरणों में आगे बढ़ रहे हैं। एमपीआरडीसी के प्रबंध संचालक भरत यादव के अनुसार, प्रदेश में ऐसे मार्गों को प्राथमिकता दी जा रही है जहां यातायात का दबाव अधिक है और यात्रा समय कम करने की आवश्यकता महसूस की जा रही है। ग्रीनफील्ड कॉरिडोर न केवल तेज आवागमन सुनिश्चित करेंगे बल्कि ईंधन की बचत, परिवहन लागत में कमी और आर्थिक गतिविधियों के विस्तार में भी मददगार साबित होंगे। प्रदेश में प्रस्तावित अन्य प्रमुख ग्रीनफील्ड परियोजनाओं में भोपाल-मंदसौर कॉरिडोर शामिल है, जिसकी लंबाई 256 किलोमीटर और अनुमानित लागत 11,550 करोड़ रुपए है। इसी तरह सागर-सतना कॉरिडोर लगभग 218 किलोमीटर लंबा होगा और इसके निर्माण से यात्रा समय लगभग आधा रह जाएगा। वहीं जबलपुर-आशापुर कॉरिडोर भी प्रदेश की महत्वपूर्ण सड़क परियोजनाओं में शामिल है। बीओटी मॉडल के तहत विकसित होने वाली इन परियोजनाओं में कुल लागत का एक हिस्सा केंद्र और राज्य सरकार वहन करती हैं, जबकि शेष निवेश निर्माण एजेंसी द्वारा किया जाता है। इसके बदले एजेंसी को निर्धारित अवधि तक टोल वसूली का अधिकार दिया जाता है। एमपीआरडीसी भविष्य में भी अधिक यातायात वाले मार्गों पर इसी मॉडल के तहत सड़क परियोजनाएं विकसित करने की योजना बना रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि भोपाल-ग्वालियर ग्रीनफील्ड कॉरिडोर प्रदेश के सड़क नेटवर्क में एक महत्वपूर्ण कड़ी साबित होगा और इससे क्षेत्रीय विकास को नई गति मिलेगी।

मध्य पूर्व में शांति समझौते की उम्मीद से चमकी बुलियन मार्केट, सोना 1.50 लाख के पार तो चांदी ने भी दिखाई जोरदार तेजी

नई दिल्ली । मध्य पूर्व में लंबे समय से जारी भू-राजनीतिक तनाव के बीच शांति समझौते की संभावनाओं ने वैश्विक वित्तीय बाजारों में नई ऊर्जा का संचार किया है। इसी सकारात्मक माहौल का असर भारतीय कमोडिटी बाजार में भी दिखाई दिया, जहां सप्ताह के अंतिम कारोबारी दिन सोने और चांदी की कीमतों में उल्लेखनीय बढ़त दर्ज की गई। निवेशकों के बीच बढ़े विश्वास और वैश्विक जोखिम धारणा में सुधार के कारण दोनों कीमती धातुओं में खरीदारी का रुझान मजबूत रहा। शुक्रवार सुबह मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज पर अगस्त डिलीवरी वाले सोने के वायदा भाव में तेजी देखने को मिली। कारोबार की शुरुआत से ही सोना मजबूत स्तर पर खुला और दिन के शुरुआती सत्र में 1.50 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के महत्वपूर्ण स्तर को पार कर गया। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि यह स्तर निवेशकों की मनोवैज्ञानिक धारणा के लिहाज से काफी अहम माना जाता है और इसके ऊपर टिके रहना बाजार की मजबूती का संकेत देता है। चांदी के बाजार में भी इसी तरह का रुख देखने को मिला। जुलाई डिलीवरी वाली चांदी ने मजबूत शुरुआत की और कारोबार के दौरान 2.40 लाख रुपये प्रति किलोग्राम के स्तर से ऊपर पहुंच गई। औद्योगिक मांग, निवेशकों की दिलचस्पी और वैश्विक बाजारों में सुधरते संकेतों ने चांदी को भी मजबूती प्रदान की। बाजार विश्लेषकों के अनुसार चांदी में फिलहाल रिकवरी का क्रम जारी है, हालांकि इसमें उतार-चढ़ाव की संभावना बनी हुई है। कीमती धातुओं में यह तेजी उस समय सामने आई है जब अमेरिका और ईरान के बीच संभावित समझौते को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सकारात्मक संकेत मिल रहे हैं। हालिया बयानों के बाद दोनों देशों के बीच तनाव कम होने की उम्मीद बढ़ी है। इससे वैश्विक निवेशकों के बीच जोखिम लेने की क्षमता में सुधार हुआ है, जिसका प्रभाव शेयर बाजारों के साथ-साथ कमोडिटी बाजारों पर भी दिखाई दिया। बुलियन बाजार के आंकड़ों के अनुसार शुद्धता के आधार पर सोने और चांदी की कीमतों में भी मजबूती बनी हुई है। घरेलू बाजार में कीमती धातुओं की मांग और अंतरराष्ट्रीय संकेतों के संयुक्त प्रभाव से निवेशकों की रुचि लगातार बनी हुई है। बाजार में यह धारणा मजबूत हुई है कि यदि वैश्विक परिस्थितियां स्थिर रहती हैं तो आने वाले समय में कीमतों को और समर्थन मिल सकता है। तकनीकी विश्लेषण के अनुसार सोने के लिए 1.52 लाख रुपये का स्तर महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यदि कीमतें इस स्तर के ऊपर स्थिर रहने में सफल होती हैं तो आगे और तेजी देखने को मिल सकती है। दूसरी ओर, 1.50 लाख रुपये से नीचे फिसलने की स्थिति में मुनाफावसूली और बिकवाली का दबाव बढ़ सकता है। इसी तरह चांदी के लिए 2.48 लाख से 2.51 लाख रुपये का दायरा प्रमुख प्रतिरोध क्षेत्र माना जा रहा है। इस स्तर को पार करने पर तेजी और मजबूत हो सकती है। विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले दिनों में वैश्विक राजनीतिक घटनाक्रम, निवेशकों की जोखिम धारणा, मुद्रा बाजार की चाल और सुरक्षित निवेश की मांग सोने तथा चांदी की कीमतों को प्रभावित करती रहेगी। फिलहाल दोनों धातुओं का निकट अवधि का रुख सकारात्मक दिखाई दे रहा है, हालांकि निवेशकों को अंतरराष्ट्रीय घटनाओं पर लगातार नजर बनाए रखने की आवश्यकता होगी।

रिटायर्ड IAS नियाज खान के बयान पर छिड़ा विवाद: जनसंख्या नियंत्रण पर की कड़ी टिप्पणी, राजनीतिक व्यवस्था पर भी उठाए सवाल

मध्य प्रदेश। मध्यप्रदेश कैडर के सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी और चर्चित लेखक नियाज खान एक बार फिर अपने बयानों को लेकर सुर्खियों में आ गए हैं। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर किए गए उनके हालिया पोस्टों ने जनसंख्या नियंत्रण, भ्रष्टाचार और देश की राजनीतिक व्यवस्था को लेकर नई बहस को जन्म दे दिया है। खान ने अपनी पोस्ट में बढ़ती आबादी पर चिंता जताते हुए सरकार से कड़े कदम उठाने की मांग की है, जबकि अन्य पोस्टों में उन्होंने भ्रष्टाचार और राजनीतिक विचारधाराओं के बदलते स्वरूप पर भी टिप्पणी की है। शुक्रवार को किए गए एक पोस्ट में नियाज खान ने देश की बढ़ती जनसंख्या को गंभीर चुनौती बताते हुए कहा कि इस विषय पर सख्त नीति बनाने की आवश्यकता है। उन्होंने दावा किया कि देश की आबादी तेजी से बढ़ रही है और इससे भविष्य में संसाधनों तथा विकास पर दबाव बढ़ सकता है। इसी संदर्भ में उन्होंने जनसंख्या नियंत्रण को लेकर कठोर उपायों की आवश्यकता बताई। अपने पोस्ट में उन्होंने विशेष रूप से मुस्लिम समुदाय का उल्लेख करते हुए दावा किया कि इस समुदाय में अधिक बच्चे पैदा होते हैं और सरकार को इस दिशा में सख्ती से कदम उठाने चाहिए। नियाज खान के इस बयान को लेकर सोशल मीडिया पर मिश्रित प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। कुछ लोगों ने इसे जनसंख्या नियंत्रण पर बहस का विषय बताया, जबकि अन्य लोगों ने उनके बयान की आलोचना करते हुए इसे एक विशेष समुदाय को निशाना बनाने वाला बताया। हालांकि इस मुद्दे पर किसी सरकारी एजेंसी या संबंधित पक्ष की ओर से तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। इसी दिन किए गए एक अन्य पोस्ट में नियाज खान ने देश में भ्रष्टाचार की स्थिति पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने दावा किया कि भ्रष्टाचार देश को भीतर से कमजोर कर रहा है, लेकिन इसके बावजूद आम लोग इस मुद्दे पर गंभीरता नहीं दिखा रहे हैं। अपने पोस्ट में उन्होंने कहा कि मतदाता भ्रष्ट छवि वाले नेताओं को भी चुनावों में जीत दिलाते हैं और समाज में नैतिक मूल्यों का ह्रास दिखाई देता है। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि ऐसी परिस्थितियों में भारत को विश्व शक्ति बनाने के दावे कितने व्यवहारिक हैं। इससे पहले गुरुवार को किए गए एक पोस्ट में नियाज खान ने देश की राजनीति में वैचारिक संकट का मुद्दा उठाया था। उन्होंने आरोप लगाया कि सत्ता प्राप्त करने के लिए कई नेता अपनी विचारधारा बदल लेते हैं। उनके अनुसार राजनीतिक दलों और नेताओं की वैचारिक प्रतिबद्धता कमजोर होती जा रही है और परिस्थितियों के अनुसार विचारधाराएं बदलने का चलन बढ़ा है। खान ने यह भी कहा कि आम जनता अक्सर इन बदलावों को केवल दर्शक बनकर देखती रहती है। गौरतलब है कि नियाज खान प्रशासनिक सेवा से सेवानिवृत्त होने के बाद भी सामाजिक, राजनीतिक और धार्मिक विषयों पर अपनी स्पष्ट राय रखने के लिए जाने जाते हैं। वे समय-समय पर सोशल मीडिया के माध्यम से विभिन्न मुद्दों पर टिप्पणी करते रहे हैं, जिसके कारण उनके बयान अक्सर चर्चा और विवाद का विषय बन जाते हैं। फिलहाल उनके हालिया पोस्टों को लेकर सोशल मीडिया और राजनीतिक हलकों में बहस जारी है। समर्थक जहां उनके बयानों को बेबाक राय के रूप में देख रहे हैं, वहीं आलोचक उनके कुछ दावों और टिप्पणियों पर सवाल उठा रहे हैं। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर और प्रतिक्रियाएं सामने आने की संभावना है।

TET अनिवार्यता के खिलाफ शिक्षकों का बड़ा आंदोलन: 18 जून को प्रदेशभर में सौंपेंगे ज्ञापन, 20 लाख शिक्षकों पर असर का दावा

मध्य प्रदेश। मध्यप्रदेश में टीईटी (टीचर एलिजिबिलिटी टेस्ट) अनिवार्यता को लेकर शिक्षकों की चिंता लगातार बढ़ती जा रही है। सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले के बाद प्रदेश के शिक्षक संगठनों ने इस मुद्दे को लेकर आंदोलन का रास्ता अपनाने का निर्णय लिया है। मध्यप्रदेश शिक्षक संघ ने घोषणा की है कि 18 जून को प्रदेश के सभी जिलों में कलेक्टरों के माध्यम से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के नाम ज्ञापन सौंपे जाएंगे। संघ का कहना है कि वर्ष 2010 से पहले नियुक्त शिक्षकों पर टीईटी की अनिवार्यता लागू करना न केवल अव्यावहारिक है, बल्कि यह प्राकृतिक न्याय और कानूनी निश्चितता के सिद्धांतों के भी विपरीत है। संगठन के पदाधिकारियों का तर्क है कि जिन शिक्षकों की नियुक्ति उस समय की नियमावली और चयन प्रक्रिया के तहत हुई थी, उन्हें बाद में बने मानकों के आधार पर प्रभावित करना उचित नहीं माना जा सकता। मध्यप्रदेश शिक्षक संघ के प्रदेशाध्यक्ष डॉ. क्षत्रवीर सिंह राठौर और प्रदेश महामंत्री राकेश गुप्ता के अनुसार, 29 मई 2026 को आए सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद प्रदेश सहित देशभर के लाखों शिक्षकों में असमंजस और चिंता का माहौल है। फैसले में कक्षा 1 से 8 तक पढ़ाने वाले शिक्षकों के लिए टीईटी उत्तीर्ण होना आवश्यक माना गया है। इसके बाद से शिक्षक संगठनों में भविष्य को लेकर आशंकाएं बढ़ गई हैं। संघ का कहना है कि 23 अगस्त 2010 को राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (एनसीटीई) ने टीईटी को शिक्षक नियुक्ति के लिए न्यूनतम योग्यता घोषित किया था। इससे पहले विभिन्न राज्यों में नियुक्त हुए शिक्षकों ने उस समय लागू पात्रता और चयन प्रक्रिया के आधार पर नौकरी प्राप्त की थी। ऐसे शिक्षक पिछले डेढ़ से दो दशकों से शिक्षा व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा बने हुए हैं और विद्यार्थियों के शैक्षणिक विकास के साथ सामाजिक जागरूकता तथा राष्ट्र निर्माण में भी योगदान दे रहे हैं। शिक्षक संघ का मानना है कि यदि नए नियमों को पूर्व प्रभाव से लागू किया गया तो इससे हजारों नहीं, बल्कि लाखों शिक्षकों की सेवा सुरक्षा और भविष्य पर प्रश्नचिह्न खड़ा हो सकता है। इसी कारण संगठन केंद्र सरकार से हस्तक्षेप की मांग कर रहा है। संघ ने केंद्र सरकार से मांग की है कि वर्ष 2010 से पहले नियुक्त शिक्षकों की सेवाओं को वैध मानते हुए संसद के आगामी मानसून सत्र में आवश्यक विधायी संशोधन किया जाए। साथ ही एनसीटीई की 23 अगस्त 2010 की अधिसूचना में भी आवश्यक बदलाव किए जाएं, ताकि पूर्व में नियुक्त शिक्षकों को राहत मिल सके। संगठन का कहना है कि न्यायालय के फैसले का सम्मान करते हुए भी नीति निर्माण और कानून संशोधन का अधिकार विधायिका के पास है और व्यापक जनहित को देखते हुए सरकार को सकारात्मक कदम उठाने चाहिए। मध्यप्रदेश शिक्षक संघ के अनुसार, इस मुद्दे से केवल प्रदेश ही नहीं बल्कि पूरे देश के शिक्षक प्रभावित हो सकते हैं। संगठन का दावा है कि मध्यप्रदेश के लगभग डेढ़ लाख और देशभर के 20 लाख से अधिक शिक्षक इस निर्णय के प्रभाव क्षेत्र में आ सकते हैं। ऐसे में 18 जून को होने वाला ज्ञापन अभियान शिक्षकों की मांगों को सरकार तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण प्रयास माना जा रहा है। अब सभी की नजर केंद्र सरकार और संबंधित संस्थाओं की प्रतिक्रिया पर टिकी है, क्योंकि इस मुद्दे का सीधा संबंध लाखों शिक्षकों के रोजगार, सेवा सुरक्षा और शिक्षा व्यवस्था से जुड़ा हुआ है।

ब्रांड एंबेसडर से निवेशक तक का सफर, रोहित शर्मा ने FITTR में हिस्सेदारी लेकर हेल्थ और वेलनेस सेक्टर पर जताया भरोसा

नई दिल्ली । भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान रोहित शर्मा ने फिटनेस और हेल्थ टेक्नोलॉजी क्षेत्र में अपनी भागीदारी को नया विस्तार देते हुए FITTR में निवेशक और इक्विटी पार्टनर के रूप में प्रवेश किया है। इस कदम को भारत में तेजी से बढ़ रहे हेल्थ और वेलनेस सेक्टर के लिए एक महत्वपूर्ण विकास माना जा रहा है। इससे पहले रोहित शर्मा कंपनी के पहले ब्रांड एंबेसडर के रूप में जुड़े हुए थे, लेकिन अब उन्होंने कंपनी की विकास यात्रा में प्रत्यक्ष भागीदारी का फैसला किया है। कंपनी और रोहित शर्मा के बीच यह साझेदारी केवल व्यावसायिक निवेश तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका केंद्र लोगों को बेहतर स्वास्थ्य, नियमित व्यायाम और संतुलित जीवनशैली के प्रति प्रेरित करना भी है। पिछले कुछ वर्षों में जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों में तेजी से वृद्धि देखने को मिली है। ऐसे समय में फिटनेस और निवारक स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक लोगों तक पहुंचाने का प्रयास इस साझेदारी की प्रमुख विशेषता माना जा रहा है। जानकारी के अनुसार, निवेश का निर्णय लेने से पहले रोहित शर्मा ने कई महीनों तक कंपनी के संस्थापक और नेतृत्व टीम के साथ विस्तृत चर्चा की। इस दौरान उन्होंने कंपनी के बिजनेस मॉडल, कार्यप्रणाली, दीर्घकालिक रणनीति और विस्तार योजनाओं को करीब से समझा। कंपनी के संचालन और भविष्य की संभावनाओं का मूल्यांकन करने के बाद ही उन्होंने निवेशक बनने का फैसला किया। कंपनी के संस्थापक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी जितेंद्र चौकसे का मानना है कि आधुनिक जीवनशैली के कारण स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियां लगातार बढ़ रही हैं। उनका कहना है कि लोगों को फिर से व्यायाम, संतुलित आहार और अनुशासित दिनचर्या जैसी मूलभूत आदतों को अपनाने की आवश्यकता है। उन्होंने यह भी कहा कि अच्छी सेहत का कोई त्वरित विकल्प नहीं होता और दीर्घकालिक परिणाम केवल नियमित प्रयासों से ही प्राप्त किए जा सकते हैं। रोहित शर्मा ने भी इस साझेदारी को अपने व्यक्तिगत विश्वास और पेशेवर अनुभव से जुड़ा निर्णय बताया। उनका कहना है कि किसी भी संस्था में निवेश करने से पहले उसकी सोच, उद्देश्य और विकास क्षमता को समझना आवश्यक होता है। FITTR के साथ समय बिताने के दौरान उन्हें यह महसूस हुआ कि कंपनी केवल व्यवसायिक विस्तार पर नहीं, बल्कि लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने के लक्ष्य पर भी काम कर रही है। उन्होंने कहा कि कंपनी की मजबूत बुनियाद, स्पष्ट दृष्टिकोण और स्वास्थ्य क्षेत्र में दीर्घकालिक प्रभाव पैदा करने की क्षमता ने उन्हें प्रभावित किया। इसी कारण उन्होंने ब्रांड एंबेसडर की भूमिका से आगे बढ़कर निवेशक और इक्विटी पार्टनर बनने का निर्णय लिया। विशेषज्ञों का मानना है कि किसी लोकप्रिय खिलाड़ी की सक्रिय भागीदारी से फिटनेस और हेल्थ प्लेटफॉर्म को व्यापक पहचान मिलती है। इससे आम लोगों के बीच स्वास्थ्य जागरूकता बढ़ाने के प्रयासों को भी मजबूती मिल सकती है। रोहित शर्मा जैसे प्रतिष्ठित खिलाड़ी का जुड़ाव कंपनी के लिए विश्वसनीयता और पहुंच दोनों के स्तर पर लाभकारी साबित हो सकता है। कंपनी का लक्ष्य आने वाले समय में अपने निवारक स्वास्थ्य तंत्र का विस्तार करना और अधिक लोगों को स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित करना है। रोहित शर्मा की नई भूमिका को इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, जो फिटनेस और स्वास्थ्य जागरूकता को जन-जन तक पहुंचाने में सहायक साबित हो सकती है।

एक जुलाई से महंगी होंगी टाटा की कारें, बढ़ती लागत के दबाव में कंपनी ने किया कीमत बढ़ाने का ऐलान

नई दिल्ली । देश के ऑटोमोबाइल बाजार में वाहन कीमतों में बढ़ोतरी का सिलसिला जारी है। इसी क्रम में प्रमुख वाहन निर्माता कंपनी ने अपने यात्री वाहनों की कीमतों में वृद्धि करने की घोषणा की है। यह नई कीमतें आगामी एक जुलाई से लागू होंगी और कंपनी के विभिन्न मॉडल तथा वैरिएंट के अनुसार इनका प्रभाव अलग-अलग देखने को मिलेगा। इस फैसले का असर पेट्रोल, डीजल, सीएनजी और इलेक्ट्रिक वाहनों सहित कंपनी के पूरे यात्री वाहन पोर्टफोलियो पर पड़ेगा। कंपनी का कहना है कि पिछले कुछ समय से उत्पादन से जुड़ी लागत में लगातार वृद्धि दर्ज की जा रही है। कच्चे माल, कंपोनेंट्स, लॉजिस्टिक्स और अन्य परिचालन खर्चों में बढ़ोतरी का असर वाहन निर्माण उद्योग पर साफ दिखाई दे रहा है। ऐसे में बढ़ी हुई लागत का कुछ हिस्सा ग्राहकों तक पहुंचाना आवश्यक हो गया है ताकि कारोबारी संतुलन बनाए रखा जा सके। हालांकि कंपनी ने यह भी स्पष्ट किया है कि लागत वृद्धि का एक बड़ा हिस्सा वह स्वयं वहन कर रही है। कीमतों में किया गया संशोधन केवल उस अतिरिक्त बोझ को आंशिक रूप से संतुलित करने के उद्देश्य से किया गया है, जो हाल के महीनों में उत्पादन और आपूर्ति श्रृंखला पर पड़ा है। कंपनी का दावा है कि कीमतों में बदलाव के बावजूद उसके वाहन ग्राहकों के लिए प्रतिस्पर्धी और मूल्य आधारित विकल्प बने रहेंगे। ऑटोमोबाइल उद्योग के जानकारों का मानना है कि पिछले कुछ वर्षों में वाहन निर्माण क्षेत्र कई प्रकार की चुनौतियों से गुजर रहा है। वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में बदलाव, तकनीकी उन्नयन, नई सुरक्षा आवश्यकताएं, उत्सर्जन मानकों का अनुपालन और इलेक्ट्रिक मोबिलिटी में निवेश जैसे कारकों ने कंपनियों की लागत संरचना को प्रभावित किया है। ऐसे माहौल में मूल्य संशोधन कई कंपनियों के लिए व्यावसायिक आवश्यकता बन गया है। विशेषज्ञों के अनुसार इलेक्ट्रिक वाहनों के क्षेत्र में बढ़ते निवेश का भी कंपनियों की वित्तीय योजनाओं पर प्रभाव पड़ रहा है। नई बैटरी तकनीक, चार्जिंग इन्फ्रास्ट्रक्चर और अनुसंधान एवं विकास गतिविधियों पर बड़े पैमाने पर निवेश किया जा रहा है। इससे कंपनियां भविष्य की जरूरतों के अनुरूप खुद को तैयार कर रही हैं, लेकिन इसके साथ लागत दबाव भी बढ़ रहा है। ऑटो उद्योग में यह बदलाव केवल एक कंपनी तक सीमित नहीं है। हाल के महीनों में कई प्रमुख वाहन निर्माताओं ने भी अपने उत्पादों की कीमतों में संशोधन किया है। अधिकांश कंपनियों ने बढ़ती इनपुट लागत, महंगे कच्चे माल और बढ़ते परिचालन खर्चों को इसका प्रमुख कारण बताया है। इससे स्पष्ट है कि पूरा उद्योग फिलहाल लागत प्रबंधन और लाभप्रदता के बीच संतुलन बनाने की चुनौती का सामना कर रहा है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि कीमतों में सीमित वृद्धि के बावजूद यात्री वाहनों की मांग पर बड़ा असर पड़ने की संभावना कम है। त्योहारी सीजन, बढ़ती आय और व्यक्तिगत परिवहन की बढ़ती आवश्यकता आने वाले महीनों में वाहन बिक्री को समर्थन दे सकती है। वहीं इलेक्ट्रिक वाहनों के प्रति बढ़ती रुचि भी बाजार को नई दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। आने वाले समय में ऑटोमोबाइल कंपनियां तकनीकी नवाचार, ईंधन दक्षता और ग्राहक सुविधाओं पर अधिक ध्यान केंद्रित करती नजर आ सकती हैं। ऐसे में कीमतों में होने वाले बदलाव केवल लागत का परिणाम नहीं होंगे, बल्कि भविष्य की तकनीकों और बेहतर उत्पादों में निवेश की रणनीति का भी हिस्सा बनेंगे।

8000mAh बैटरी, 144Hz डिस्प्ले और AI फीचर्स से लैस रियलमी P4R 5G, मिड-रेंज सेगमेंट में बना चर्चा का केंद्र

नई दिल्ली । भारतीय स्मार्टफोन बाजार में उपभोक्ताओं की प्राथमिकताओं में तेजी से बदलाव देखने को मिल रहा है। पहले जहां कैमरा क्वालिटी, प्रोसेसर और डिजाइन को स्मार्टफोन खरीदने का सबसे बड़ा आधार माना जाता था, वहीं अब लंबी बैटरी लाइफ उपभोक्ताओं के लिए सबसे महत्वपूर्ण जरूरत बनकर उभरी है। डिजिटल जीवनशैली के विस्तार और मोबाइल उपयोग के बढ़ते समय ने स्मार्टफोन कंपनियों को अपने उत्पादों की रणनीति बदलने के लिए प्रेरित किया है। इसी बदलते रुझान को ध्यान में रखते हुए रियलमी ने अपना नया P4R 5G स्मार्टफोन बाजार में उतारा है। यह डिवाइस विशेष रूप से उन ग्राहकों को लक्ष्य बनाकर पेश किया गया है जो बजट श्रेणी में अधिक समय तक चलने वाली बैटरी और संतुलित प्रदर्शन वाला स्मार्टफोन तलाश रहे हैं। 20 हजार रुपये से कम कीमत वाले इस स्मार्टफोन की सबसे बड़ी विशेषता इसकी 8000mAh क्षमता वाली बैटरी है, जो इस श्रेणी के अधिकांश स्मार्टफोनों से कहीं अधिक बड़ी मानी जा रही है। स्मार्टफोन उद्योग में आमतौर पर 5000mAh से 6000mAh बैटरी वाले उपकरण देखने को मिलते हैं, लेकिन रियलमी ने इस सीमा को आगे बढ़ाते हुए बड़ी बैटरी क्षमता पर जोर दिया है। कंपनी का दावा है कि सामान्य उपयोग की स्थिति में यह डिवाइस एक बार चार्ज करने के बाद कई दिनों तक काम करने में सक्षम है। लगातार वीडियो स्ट्रीमिंग, सोशल मीडिया उपयोग, ऑनलाइन मीटिंग और गेमिंग जैसी गतिविधियों के दौरान भी बैटरी प्रदर्शन को मजबूत बनाए रखने का प्रयास किया गया है। बड़ी बैटरी के बावजूद फोन को अपेक्षाकृत पतला और हल्का रखने पर भी ध्यान दिया गया है। इससे उपयोगकर्ताओं को भारी बैटरी वाले स्मार्टफोन से जुड़ी असुविधा का सामना नहीं करना पड़ेगा। इसके साथ 45 वॉट फास्ट चार्जिंग तकनीक दी गई है, जो कम समय में बैटरी को चार्ज करने में मदद करती है। यह सुविधा उन उपयोगकर्ताओं के लिए महत्वपूर्ण है जो लंबे समय तक चार्जिंग का इंतजार नहीं करना चाहते। रियलमी ने बैटरी सुरक्षा और उसकी दीर्घकालिक क्षमता को भी प्रमुखता दी है। कंपनी के अनुसार, बैटरी को विभिन्न सुरक्षा मानकों और परीक्षण प्रक्रियाओं से गुजारा गया है। इसके अलावा एआई आधारित बैटरी प्रबंधन प्रणाली ऊर्जा खपत को नियंत्रित करने और बैटरी की उम्र बढ़ाने में सहायता करती है। इससे लंबे समय तक फोन के प्रदर्शन को बनाए रखने में मदद मिल सकती है। डिवाइस केवल बैटरी तक सीमित नहीं है, बल्कि अन्य तकनीकी विशेषताओं के मामले में भी प्रतिस्पर्धी नजर आता है। इसमें मीडियाटेक डाइमेंसिटी 6300 प्रोसेसर दिया गया है, जो दैनिक कार्यों के साथ-साथ मल्टीटास्किंग और गेमिंग के लिए उपयुक्त माना जाता है। बड़ी रैम क्षमता और पर्याप्त स्टोरेज विकल्प उपयोगकर्ताओं को बेहतर अनुभव प्रदान करने का प्रयास करते हैं। फोन में 144Hz रिफ्रेश रेट वाली बड़ी डिस्प्ले दी गई है, जिससे स्क्रीन स्क्रॉलिंग और गेमिंग अधिक स्मूथ हो जाती है। इसके अलावा 50 मेगापिक्सल कैमरा, एआई आधारित इमेजिंग फीचर्स और आधुनिक सॉफ्टवेयर सुविधाएं भी शामिल की गई हैं। धूल और पानी से सुरक्षा के लिए आईपी65 रेटिंग तथा मजबूत निर्माण गुणवत्ता इसे रोजमर्रा के उपयोग के लिए अधिक भरोसेमंद बनाती है। भारतीय स्मार्टफोन बाजार में बढ़ती प्रतिस्पर्धा के बीच बैटरी प्रदर्शन अब निर्णायक कारक बनता जा रहा है। ऐसे माहौल में रियलमी P4R 5G अपनी बड़ी बैटरी, तेज चार्जिंग, आधुनिक फीचर्स और संतुलित हार्डवेयर के साथ उन उपभोक्ताओं के लिए आकर्षक विकल्प के रूप में सामने आया है, जो सीमित बजट में लंबे बैटरी बैकअप और बेहतर उपयोग अनुभव की तलाश कर रहे हैं।

कांग्रेस में फिर दिखी अंदरूनी कलह! मंच पर दिग्विजय-हरीश चौधरी की कथित तकरार, राज्यसभा विवाद पर गरमाई सियासत

मध्य प्रदेश। मध्य प्रदेश की राजनीति इन दिनों राज्यसभा चुनाव को लेकर काफी गरमाई हुई है। कांग्रेस प्रत्याशी मीनाक्षी नटराजन का नामांकन निरस्त होने के बाद जहां पार्टी लगातार विरोध दर्ज करा रही है, वहीं इस पूरे घटनाक्रम के बीच कांग्रेस के भीतर की कथित खींचतान भी चर्चा में आ गई है। एक प्रेस कॉन्फ्रेंस का वीडियो सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में तेजी से चर्चा का विषय बना हुआ है, जिसमें पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह और प्रदेश कांग्रेस प्रभारी हरीश चौधरी के बीच कथित असहजता नजर आती है। वीडियो में दिखाई देता है कि प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान दिग्विजय सिंह, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी की ओर संकेत करते हुए कांग्रेस नेता जेपी धनोपिया को अपनी बात रखने के लिए कहते हैं। इसी दौरान हरीश चौधरी उन्हें रोकते हुए कुछ कहते नजर आते हैं। इसके बाद दिग्विजय सिंह हाथ जोड़कर उनका अभिवादन करते हैं, धन्यवाद कहते हैं और फिर शांत होकर बैठ जाते हैं। हालांकि वीडियो में दोनों नेताओं के बीच हुई बातचीत स्पष्ट रूप से सुनाई नहीं देती, लेकिन उनके हाव-भाव को लेकर राजनीतिक विश्लेषण शुरू हो गया है। इसके बाद जीतू पटवारी कई बार दिग्विजय सिंह से अपनी बात रखने का आग्रह करते दिखाई देते हैं, लेकिन दिग्विजय सिंह ‘हो गया’ कहकर मना कर देते हैं। इस पूरे घटनाक्रम को लेकर राजनीतिक पर्यवेक्षक अलग-अलग राय व्यक्त कर रहे हैं। कुछ इसे कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं के बीच मतभेद का संकेत मान रहे हैं, जबकि कुछ इसे पार्टी की आंतरिक राजनीति और गुटबाजी से जोड़कर देख रहे हैं। हालांकि कांग्रेस की ओर से इस मामले में कोई आधिकारिक टिप्पणी सामने नहीं आई है। इधर राज्यसभा चुनाव में भाजपा के तीन उम्मीदवारों के निर्विरोध निर्वाचित होने के बावजूद पार्टी कार्यालय में जश्न का माहौल नहीं दिखाई दिया। प्रमाण पत्र प्राप्त करने के बाद नवनिर्वाचित सांसद सीधे पार्टी नेतृत्व से मिलने पहुंचे, लेकिन प्रदेश कार्यालय में सामान्य चुनावी जीत की तरह न तो ढोल-नगाड़े बजे और न ही सार्वजनिक उत्सव देखने को मिला। राजनीतिक हलकों में इसे लेकर भी चर्चाओं का दौर जारी है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि राज्यसभा की तीसरी सीट को लेकर चल रहा कानूनी विवाद इसका एक कारण हो सकता है। कांग्रेस प्रत्याशी मीनाक्षी नटराजन का नामांकन निरस्त होने के मामले में न्यायिक प्रक्रिया जारी है और मामला उच्चतम न्यायालय तक पहुंच चुका है। ऐसे में भाजपा की ओर से संयमित रवैया अपनाए जाने की चर्चा हो रही है, हालांकि पार्टी ने इस विषय पर कोई आधिकारिक कारण नहीं बताया है। इस बीच पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने नामांकन निरस्त होने के मामले पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस के साथ अन्याय हुआ है और पूरी प्रक्रिया निष्पक्ष नहीं रही। दिग्विजय सिंह ने दावा किया कि इस मामले में कई संस्थाओं की भूमिका सवालों के घेरे में है। उन्होंने यह भी कहा कि उनकी याचिका पर समय रहते सुनवाई नहीं होने से कांग्रेस को नुकसान उठाना पड़ा। उनके इन आरोपों पर भाजपा ने कड़ा विरोध जताते हुए इसे न्यायपालिका की गरिमा पर सवाल खड़ा करने वाला बयान बताया है। भाजपा नेताओं ने कहा है कि न्यायालय के संबंध में की गई ऐसी टिप्पणियां अनुचित हैं और मामले पर उचित संज्ञान लिया जाना चाहिए। राज्यसभा चुनाव का यह विवाद अब केवल चुनावी प्रक्रिया तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि इसके राजनीतिक और संगठनात्मक प्रभाव भी सामने आने लगे हैं। आने वाले दिनों में न्यायालय की सुनवाई और राजनीतिक दलों की अगली रणनीति पर सबकी नजरें टिकी रहेंगी।

भोपाल में महिला की संदिग्ध मौत से सनसनी: पिता ने पति पर लगाया हत्या का आरोप, पुलिस जांच में जुटी

मध्य प्रदेश। राजधानी भोपाल के कोलार थाना क्षेत्र स्थित बंजारा बस्ती में एक महिला की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत ने इलाके में सनसनी फैला दी है। मृतका के परिजनों ने महिला के पति पर हत्या का आरोप लगाया है, जबकि पुलिस का कहना है कि मामले की सभी पहलुओं से जांच की जा रही है और पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के वास्तविक कारणों का पता चल सकेगा। मृतका की पहचान 30 वर्षीय बबीता अहिरवार के रूप में हुई है। घटना गुरुवार रात की बताई जा रही है। परिजनों के अनुसार रात करीब आठ बजे बबीता का सात वर्षीय बेटा समर्थ अपने नाना के घर पहुंचा और उसने परिवार को बताया कि उसकी मां के साथ कुछ अनहोनी हो गई है। बच्चे की सूचना मिलने के बाद परिवार के सदस्य तत्काल बबीता के घर पहुंचे, जहां वह जमीन पर पड़ी हुई मिली। मृतका के पिता हरनाम सिंह का आरोप है कि उनकी बेटी की हत्या की गई है। उनका कहना है कि जब वे मौके पर पहुंचे तो बबीता की चूड़ियां टूटी हुई थीं और उसके शरीर पर चोट के निशान दिखाई दे रहे थे। परिजनों का दावा है कि गले पर भी ऐसे निशान थे जो किसी प्रकार के दबाव या संघर्ष की ओर संकेत करते हैं। इसी आधार पर उन्होंने बबीता के पति सुनील अहिरवार पर गला दबाकर हत्या करने का आरोप लगाया है। परिजनों के मुताबिक सुनील अहिरवार वेल्डिंग का काम करता है और उसे शराब पीने की आदत है। परिवार का आरोप है कि वह अक्सर नशे की हालत में घर लौटता था, जिससे पति-पत्नी के बीच विवाद होता रहता था। घटना वाली रात भी दोनों के बीच किसी बात को लेकर कहासुनी होने की बात सामने आई है। हालांकि पुलिस अभी इन दावों की स्वतंत्र रूप से जांच कर रही है और किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंची है। जानकारी के अनुसार बबीता और सुनील की शादी करीब नौ वर्ष पहले हुई थी। उनके दो बच्चे हैं, जिनमें सात वर्षीय बेटा और चार वर्षीय बेटी शामिल हैं। बबीता गृहिणी थी और परिवार की देखभाल करती थी। उसकी अचानक हुई मौत के बाद बच्चों और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। मामले की सूचना मिलने के बाद पुलिस मौके पर पहुंची और घटनास्थल का निरीक्षण किया। शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया, जिसके बाद उसे परिजनों को सौंप दिया गया। पुलिस ने घटनास्थल से आवश्यक साक्ष्य एकत्र किए हैं और आसपास के लोगों से भी पूछताछ की जा रही है। कोलार थाना प्रभारी ने बताया कि महिला की मौत संदिग्ध परिस्थितियों में हुई है। फिलहाल मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी गई है। पुलिस का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट और फोरेंसिक जांच के निष्कर्ष इस मामले में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। रिपोर्ट मिलने के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई तय की जाएगी। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि घटना के समय घर के भीतर वास्तव में क्या हुआ था। चूंकि उस समय बच्चे भी घर में मौजूद थे, इसलिए उनके बयान भी जांच के लिए अहम माने जा रहे हैं। पुलिस का कहना है कि परिजनों द्वारा लगाए गए आरोपों सहित सभी संभावित पहलुओं की निष्पक्ष जांच की जाएगी और तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल पूरे मामले की सच्चाई पोस्टमार्टम रिपोर्ट और पुलिस जांच पूरी होने के बाद ही सामने आ सकेगी।