भोपाल में टैक्सी ड्राइवरों का अनोखा प्रदर्शन: कटोरा लेकर मांगी भीख, बोले- ओला-उबर की नीतियों ने बदहाल किया

मध्य प्रदेश। राजधानी भोपाल में शुक्रवार को ऐप आधारित टैक्सी सेवाओं से जुड़े ड्राइवरों का एक अनोखा और भावनात्मक प्रदर्शन देखने को मिला। भोपाल टैक्सी चालक संघ के बैनर तले बड़ी संख्या में ड्राइवर बोर्ड ऑफिस चौराहे पर एकत्र हुए और अपनी आर्थिक परेशानियों को उजागर करने के लिए फटे कपड़े पहनकर तथा हाथों में कटोरा लेकर प्रतीकात्मक भीख मांगते नजर आए। प्रदर्शन का उद्देश्य सरकार, प्रशासन और टैक्सी सेवा संचालित करने वाली कंपनियों का ध्यान अपनी समस्याओं की ओर आकर्षित करना था। प्रदर्शन के दौरान ड्राइवरों ने ओला, उबर और रेपिडो जैसी ऐप आधारित टैक्सी कंपनियों के खिलाफ नारेबाजी की। उनका आरोप था कि कंपनियों की मौजूदा नीतियों और कम किराया दरों ने उन्हें आर्थिक संकट में धकेल दिया है। कई ड्राइवरों ने कहा कि लगातार बढ़ती महंगाई, ईंधन की कीमतों और वाहन रखरखाव के खर्चों के बीच उन्हें मिलने वाला किराया बेहद कम है, जिससे परिवार का खर्च चलाना मुश्किल हो गया है। प्रदर्शन में शामिल एक चालक ने भावुक होकर कहा कि उनकी आर्थिक स्थिति इतनी खराब हो चुकी है कि वे अपने लिए नए कपड़े तक नहीं खरीद पा रहे हैं। उनका कहना था कि किराए की दरें इतनी कम हैं कि वाहन चलाने के बाद भी पर्याप्त आय नहीं हो पाती। ऐसे में परिवार का भरण-पोषण और वाहन की किस्तों का भुगतान एक साथ करना कठिन हो गया है। भोपाल टैक्सी चालक संघ के कार्यवाहक अध्यक्ष श्रवण कुमार शर्मा ने दावा किया कि वर्तमान समय में ड्राइवरों को औसतन करीब नौ रुपये प्रति किलोमीटर की दर से किराया मिल रहा है, जबकि डीजल, पेट्रोल और सीएनजी की बढ़ती कीमतों के कारण वाहन संचालन का खर्च लगभग ग्यारह रुपये प्रति किलोमीटर तक पहुंच गया है। उनके अनुसार, इस अंतर के कारण ड्राइवरों को प्रतिदिन आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। संघ के महामंत्री राजेश कुमार नागले ने आरोप लगाया कि परिवहन विभाग और आरटीओ द्वारा निर्धारित किराया दरों का पालन कंपनियां नहीं कर रही हैं। उनका कहना है कि जब इन कंपनियों ने भोपाल में अपनी सेवाएं शुरू की थीं, तब निर्धारित नियमों और दिशानिर्देशों का पालन किया जाता था, लेकिन समय के साथ कंपनियों ने अपने स्तर पर किराया संरचना में बदलाव करना शुरू कर दिया। इसके चलते ड्राइवरों की आमदनी पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि वे लंबे समय से अपनी मांगों को लेकर सरकार और संबंधित अधिकारियों के समक्ष आवाज उठा रहे हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकला है। उनका आरोप है कि हर बार केवल आश्वासन देकर मामला टाल दिया जाता है, जबकि जमीनी स्तर पर समस्याएं जस की तस बनी हुई हैं। टैक्सी चालक संघ ने स्पष्ट किया कि उनकी प्रमुख मांग सरकार द्वारा निर्धारित किराया दरों को सख्ती से लागू कराना है। संघ का कहना है कि यदि कंपनियां निर्धारित मानकों के अनुरूप भुगतान करें तो ड्राइवरों की आर्थिक स्थिति में सुधार हो सकता है। साथ ही उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जल्द ही उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा। प्रदर्शन के अंत में संघ के प्रतिनिधियों ने कहा कि बढ़ती लागत और घटती आय के बीच टैक्सी चालकों के सामने आजीविका का गंभीर संकट खड़ा हो गया है। उनका मानना है कि यदि समय रहते समाधान नहीं निकाला गया तो भोपाल में टैक्सी और ऑटो सेवाओं पर भी इसका असर पड़ सकता है।
TMC में बगावत के बीच ममता के साथ खड़े हुए शत्रुघ्न सिन्हा और कीर्ति आजाद, बागियों पर साधा निशाना

नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) इस समय गंभीर अंदरूनी संकट से गुजर रही है। विधानसभा चुनाव में हार के बाद पार्टी के भीतर असंतोष और गुटबाजी की खबरें लगातार सामने आ रही हैं। कई नेताओं और जनप्रतिनिधियों के बागी रुख अपनाने की चर्चाओं के बीच पार्टी प्रमुख ममता बनर्जी को उस समय बड़ी राहत मिली जब वरिष्ठ सांसद शत्रुघ्न सिन्हा और कीर्ति आजाद खुलकर उनके समर्थन में सामने आए। आसनसोल से सांसद और लंबे समय से राष्ट्रीय राजनीति में सक्रिय रहे Shatrughan Sinha ने पार्टी छोड़ने या किसी बागी गुट में शामिल होने की अटकलों को सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि वह ममता बनर्जी के साथ थे, हैं और आगे भी रहेंगे। उनके अनुसार राजनीति में कठिन समय ही रिश्तों और निष्ठा की असली परीक्षा होती है। शत्रुघ्न सिन्हा ने कहा कि जब उनके राजनीतिक जीवन में चुनौतीपूर्ण दौर आया था, तब Mamata Banerjee ने उन पर भरोसा जताया था। उन्होंने दावा किया कि ऐसे समय में उनका कर्तव्य बनता है कि वे भी ममता बनर्जी का साथ दें। उन्होंने यह भी कहा कि उनके नाम को लेकर जो अटकलें लगाई जा रही हैं, वे निराधार हैं और उनका किसी कथित बागी समूह से कोई संबंध नहीं है। अपने विशेष अंदाज में शत्रुघ्न सिन्हा ने कहा कि वह स्वयं अपने लिए “तीन लाइन का व्हिप” जारी कर रहे हैं कि उनका राजनीतिक और नैतिक समर्थन ममता बनर्जी तथा टीएमसी के साथ बना रहेगा। उन्होंने यह भी कहा कि विभिन्न राजनीतिक दलों में उनके मित्र हो सकते हैं, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि वे पार्टी छोड़ने जा रहे हैं। इसी क्रम में बर्धमान-दुर्गापुर से सांसद Kirti Azad भी पार्टी नेतृत्व के समर्थन में मजबूती से सामने आए। उन्होंने बागी नेताओं पर निशाना साधते हुए दावा किया कि कुछ लोग राजनीतिक दबाव और अन्य कारणों से पार्टी छोड़ रहे हैं। कीर्ति आजाद ने आरोप लगाया कि विपक्षी दल टीएमसी को कमजोर करने की कोशिश कर रहे हैं और कुछ नेताओं को प्रभावित किया जा रहा है। उन्होंने बागी नेताओं के उस दावे को भी चुनौती दी, जिसमें बड़ी संख्या में सांसदों के समर्थन की बात कही गई थी। कीर्ति आजाद के अनुसार, पार्टी के भीतर मतभेद हो सकते हैं, लेकिन इससे संगठन की मूल ताकत कमजोर नहीं होती। उन्होंने विश्वास जताया कि ममता बनर्जी अपनी राजनीतिक क्षमता और अनुभव के बल पर मौजूदा संकट से पार्टी को बाहर निकाल लेंगी। इस दौरान पार्टी के वरिष्ठ नेता कल्याण बनर्जी और अभिषेक बनर्जी के बीच सामने आए मतभेदों पर भी प्रतिक्रिया दी गई। कीर्ति आजाद ने कहा कि कल्याण बनर्जी लंबे समय से पार्टी के महत्वपूर्ण नेता रहे हैं और उन्होंने हमेशा संगठन के लिए काम किया है। उनके अनुसार, नेतृत्व स्तर पर उत्पन्न मतभेदों का समाधान बातचीत और संगठनात्मक प्रक्रिया के जरिए निकाला जा सकता है। गौरतलब है कि हाल के दिनों में टीएमसी के कई नेताओं और सांसदों को लेकर अलग-अलग दावे सामने आए हैं। कुछ रिपोर्टों में बागी खेमे द्वारा समर्थन जुटाने की बात कही गई है, जबकि पार्टी नेतृत्व इन दावों को गंभीरता से नहीं ले रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि पार्टी इस चुनौती से कैसे निपटती है। फिलहाल इतना स्पष्ट है कि पार्टी के संकट के दौर में शत्रुघ्न सिन्हा और कीर्ति आजाद जैसे वरिष्ठ नेताओं का सार्वजनिक समर्थन ममता बनर्जी के लिए राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। उनके बयानों ने यह संकेत दिया है कि टीएमसी के भीतर चल रही उठापटक के बावजूद नेतृत्व के साथ खड़े रहने वाले नेताओं की संख्या भी कम नहीं है।
अभिषेक बनर्जी पर बढ़ा दबाव: कल्याण बनर्जी के बेटे ने छोड़ा केस, बोले- सम्मान नहीं मिलेगा तो साथ नहीं देंगे

नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल की सियासत में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के भीतर चल रही खींचतान अब सार्वजनिक रूप से सामने आने लगी है। पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव और सांसद अभिषेक बनर्जी को लेकर वरिष्ठ नेता कल्याण बनर्जी के परिवार की नाराजगी ने राजनीतिक गलियारों में नई चर्चा छेड़ दी है। अधिवक्ता शीर्षाण्य बनर्जी, जो वरिष्ठ टीएमसी नेता कल्याण बनर्जी के पुत्र हैं, ने दावा किया है कि पेशेवर सम्मान और वकालत की परंपराओं की अनदेखी किए जाने के कारण उन्होंने अभिषेक बनर्जी से जुड़े कानूनी मामलों से खुद को अलग करने का निर्णय लिया है। शीर्षाण्य बनर्जी ने मीडिया से बातचीत में कहा कि वे 2 जून से एक मामले पर काम कर रहे थे और उनका प्रयास था कि अभिषेक बनर्जी को कानूनी राहत मिल सके। उनका दावा है कि बाद में उन्हें जानकारी दी गई कि मामले की पैरवी के लिए किसी अन्य वकील को जिम्मेदारी दी जा रही है, जो उनके पिता कल्याण बनर्जी से जूनियर हैं। शीर्षाण्य के अनुसार, वकालत के पेशे में वरिष्ठता और पेशेवर शिष्टाचार का विशेष महत्व होता है और इसी सिद्धांत के आधार पर उन्होंने मामले से अलग होने का फैसला किया। उन्होंने कहा कि वकीलों का भी आत्मसम्मान होता है और पेशेवर सम्मान हर व्यक्ति का अधिकार है। उनका दावा है कि यदि किसी पेशेवर को उचित सम्मान नहीं दिया जाता है तो उसके लिए ऐसे मामलों में काम जारी रखना मुश्किल हो जाता है। शीर्षाण्य ने यह भी कहा कि उन्होंने जो निर्णय लिया है, वह पूरी तरह पेशेवर आधार पर लिया गया है और इसका उद्देश्य अपने पेशे की गरिमा बनाए रखना है। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका यह फैसला पार्टी प्रमुख और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री Mamata Banerjee के प्रति उनके रुख को प्रभावित नहीं करता। शीर्षाण्य ने कहा कि वे ममता बनर्जी के नेतृत्व और पार्टी के लिए पहले की तरह काम करते रहेंगे। उनका कहना था कि टीएमसी केवल किसी एक नेता का नाम नहीं है, बल्कि बूथ स्तर पर काम करने वाले हजारों कार्यकर्ताओं और नेताओं का सामूहिक संगठन है। इस बीच, वरिष्ठ टीएमसी नेता Kalyan Banerjee ने भी अभिषेक बनर्जी के खिलाफ नाराजगी जाहिर की है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, उन्होंने पार्टी नेतृत्व के सामने अपनी आपत्तियां रखते हुए अभिषेक बनर्जी पर अहंकारी व्यवहार का आरोप लगाया है। साथ ही उन्होंने यह भी कहा है कि वे अभिषेक से जुड़े कानूनी मामलों में आगे काम नहीं करेंगे। हालांकि, इन बयानों पर पार्टी की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि विधानसभा चुनाव के बाद टीएमसी के भीतर विभिन्न स्तरों पर असंतोष की खबरें लगातार सामने आ रही हैं। कई नेता संगठनात्मक फैसलों और नेतृत्व शैली को लेकर अपनी राय सार्वजनिक रूप से व्यक्त कर रहे हैं। ऐसे में कल्याण बनर्जी और शीर्षाण्य बनर्जी की टिप्पणियां पार्टी के अंदर चल रही बहस को और तेज कर सकती हैं। फिलहाल यह पूरा विवाद राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बना हुआ है। एक ओर अभिषेक बनर्जी पार्टी संगठन में अपनी भूमिका को मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर वरिष्ठ नेताओं की नाराजगी पार्टी के लिए नई चुनौती के रूप में देखी जा रही है। आने वाले दिनों में पार्टी नेतृत्व इस मुद्दे को किस तरह संभालता है, इस पर सभी की नजरें टिकी रहेंगी।
हाईकोर्ट की सख्ती के बावजूद सड़कों पर घुमाए गए TMC नेता जहांगीर खान, बंगाल पुलिस की कार्रवाई पर उठा विवाद

नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल में कानून व्यवस्था और राजनीतिक घटनाक्रम के बीच तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के नेता जहांगीर खान से जुड़ा मामला एक बार फिर चर्चा का केंद्र बन गया है। हाल ही में गिरफ्तार किए गए जहांगीर खान को पुलिस द्वारा दक्षिण 24 परगना जिले के फालता क्षेत्र में सार्वजनिक रूप से पैदल ले जाने के वीडियो और तस्वीरें सामने आने के बाद राजनीतिक और कानूनी बहस तेज हो गई है। यह घटना ऐसे समय में सामने आई है जब कुछ दिन पहले ही कलकत्ता हाईकोर्ट ने पुलिस हिरासत में आरोपियों को सार्वजनिक रूप से घुमाने की प्रथा पर कड़ी टिप्पणी की थी। जानकारी के अनुसार, जहांगीर खान को सोमवार को भारत-नेपाल सीमा के निकट उत्तर बंगाल के पानीटंकी क्षेत्र से गिरफ्तार किया गया था। उनके खिलाफ जबरन वसूली सहित कई गंभीर आरोपों में सात एफआईआर दर्ज होने की बात कही जा रही है। गिरफ्तारी के बाद अदालत ने उन्हें पांच दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया था। गुरुवार को सामने आए वीडियो में पुलिसकर्मी उन्हें फालता और आसपास के इलाकों में पैदल ले जाते दिखाई दे रहे हैं, जिसके बाद इस कार्रवाई को लेकर सवाल उठने लगे हैं। जहांगीर खान पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक चर्चित नाम रहे हैं। उन्हें टीएमसी के राष्ट्रीय महासचिव और सांसद Abhishek Banerjee का करीबी माना जाता है। विधानसभा उपचुनाव के दौरान भी उनका नाम लगातार चर्चा में रहा था। बताया जाता है कि मतदान से पहले वह क्षेत्र से गायब हो गए थे और उसके बाद से उनके खिलाफ विभिन्न मामलों की जांच जारी थी। इस मामले ने इसलिए भी ध्यान आकर्षित किया है क्योंकि हाल ही में कलकत्ता हाईकोर्ट की अवकाशकालीन पीठ ने आरोपियों को सार्वजनिक रूप से घुमाने के मामलों पर पश्चिम बंगाल पुलिस से रिपोर्ट मांगी थी। अदालत ने स्पष्ट टिप्पणी करते हुए कहा था कि पुलिस को किसी व्यक्ति को गिरफ्तार करने का अधिकार अवश्य है, लेकिन उसे सार्वजनिक रूप से अपमानित या बदनाम करने का अधिकार नहीं है। न्यायालय ने यह भी संकेत दिया था कि ऐसी कार्रवाइयों को संवैधानिक अधिकारों के संदर्भ में परखा जाना चाहिए। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) में पुलिस को कुछ विशेष परिस्थितियों में ही कड़े नियंत्रण या हथकड़ी के इस्तेमाल की अनुमति दी गई है। कानून का उद्देश्य सुरक्षा और जांच सुनिश्चित करना है, न कि किसी आरोपी को सार्वजनिक रूप से शर्मिंदा करना। यही कारण है कि आरोपी को सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित करने की घटनाएं अक्सर न्यायिक समीक्षा और मानवाधिकार संबंधी बहस का विषय बन जाती हैं। देश के अन्य राज्यों में भी इस तरह के मामलों पर अदालतें सख्त रुख अपना चुकी हैं। मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय और राजस्थान उच्च न्यायालय ने भी पूर्व में ऐसी घटनाओं पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा था कि किसी भी आरोपी के सम्मान और गरिमा के अधिकार की रक्षा की जानी चाहिए, चाहे उसके खिलाफ आरोप कितने भी गंभीर क्यों न हों। फिलहाल जहांगीर खान का मामला पश्चिम बंगाल की राजनीति और पुलिस प्रशासन दोनों के लिए चर्चा का विषय बना हुआ है। एक ओर उनके खिलाफ दर्ज मामलों की जांच जारी है, वहीं दूसरी ओर पुलिस की कार्रवाई को लेकर कानूनी और संवैधानिक प्रश्न भी उठ रहे हैं। आने वाले दिनों में अदालत और प्रशासन की प्रतिक्रिया इस मामले की दिशा तय कर सकती है।
बेलफास्ट हिंसा से भारत के आयरलैंड दौरे पर संकट, वैभव सूर्यवंशी के डेब्यू पर भी मंडराया खतरा

नई दिल्ली। भारत और आयरलैंड के बीच इस महीने होने वाली टी20 सीरीज पर अनिश्चितता के बादल छा गए हैं। उत्तरी आयरलैंड की राजधानी बेलफास्ट और आसपास के इलाकों में हाल ही में भड़की हिंसा ने सुरक्षा संबंधी चिंताओं को बढ़ा दिया है, जिसके चलते क्रिकेट आयरलैंड और भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं। फिलहाल सीरीज को लेकर कोई अंतिम फैसला नहीं लिया गया है, लेकिन मौजूदा हालात ने खिलाड़ियों, अधिकारियों और प्रशंसकों की चिंता बढ़ा दी है। भारतीय टीम को अफगानिस्तान के खिलाफ घरेलू श्रृंखला समाप्त करने के बाद आयरलैंड दौरे पर जाना है, जहां उसे दो मैचों की टी20 सीरीज खेलनी है। इसके बाद टीम इंग्लैंड दौरे के लिए रवाना होगी। ऐसे में आयरलैंड दौरा भारतीय टीम के कार्यक्रम का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है। हालांकि बेलफास्ट में उत्पन्न सुरक्षा संकट ने इस पूरे कार्यक्रम को प्रभावित करने की आशंका पैदा कर दी है। उत्तरी आयरलैंड में हालात उस समय बिगड़ गए जब एक चाकूबाजी की घटना के बाद सामाजिक और नस्ली तनाव बढ़ गया। विभिन्न मीडिया रिपोर्टों के अनुसार घटना के बाद कई क्षेत्रों में हिंसक प्रदर्शन शुरू हो गए। प्रदर्शनकारियों द्वारा वाहनों में आग लगाने, दुकानों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को नुकसान पहुंचाने तथा सार्वजनिक संपत्तियों को निशाना बनाने की खबरें सामने आईं। इसके बाद सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हो गईं और कई गतिविधियों पर असर पड़ा। इसी क्रम में लिस्बर्न में आयोजित होने वाला इंटर-प्रोविंशियल टी20 फेस्टिवल भी रद्द कर दिया गया। क्रिकेट आयरलैंड ने एक आधिकारिक बयान जारी कर कहा कि वह प्रभावित क्षेत्रों की स्थिति पर लगातार नजर रखे हुए है। बोर्ड ने स्पष्ट किया कि खिलाड़ियों, कोचों, मैच अधिकारियों और दर्शकों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। साथ ही यह भी कहा गया कि आयरिश सीनियर कप और नेशनल कप के मैचों को लेकर अगले कुछ दिनों में स्थिति की समीक्षा के बाद फैसला लिया जाएगा। क्रिकेट आयरलैंड का कहना है कि वह स्थानीय प्रशासन और संबंधित एजेंसियों के साथ लगातार संपर्क में है और जैसे-जैसे नई जानकारी सामने आएगी, उसके अनुसार निर्णय लिया जाएगा। इस बयान से साफ है कि बोर्ड फिलहाल कोई जोखिम लेने के मूड में नहीं है। दूसरी ओर, बीसीसीआई भी हालात पर करीबी नजर रखे हुए है। रिपोर्टों के अनुसार भारतीय बोर्ड ने सुरक्षा से जुड़े हर पहलू की समीक्षा शुरू कर दी है। बीसीसीआई के सूत्रों का कहना है कि मैचों के आयोजन स्थल को लेकर अंतिम फैसला क्रिकेट आयरलैंड को करना है। यदि आयरलैंड बोर्ड किसी बदलाव का प्रस्ताव रखता है तो भारतीय बोर्ड उस पर विचार करेगा। इस अनिश्चितता का असर भारतीय क्रिकेट के उभरते सितारे वैभव सूर्यवंशी पर भी पड़ सकता है। माना जा रहा है कि आयरलैंड दौरे पर उन्हें अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में पदार्पण का मौका मिल सकता था। यदि सीरीज स्थगित होती है, रद्द होती है या कार्यक्रम में बड़ा बदलाव किया जाता है, तो उनके डेब्यू का इंतजार और लंबा हो सकता है। हालांकि अभी तक किसी भी बोर्ड ने सीरीज को रद्द करने या स्थानांतरित करने की आधिकारिक घोषणा नहीं की है। दोनों क्रिकेट बोर्ड स्थिति का मूल्यांकन कर रहे हैं और सुरक्षा एजेंसियों की सलाह का इंतजार कर रहे हैं। ऐसे में क्रिकेट प्रेमियों की नजरें अब आने वाले दिनों पर टिकी हैं, जब इस महत्वपूर्ण टी20 श्रृंखला के भविष्य को लेकर अंतिम फैसला सामने आ सकता है। फिलहाल इतना तय है कि खिलाड़ियों की सुरक्षा सर्वोपरि रहेगी और उसी के आधार पर आगे की रणनीति तय की जाएगी।
रणवीर सिंह कंट्रोवर्सी पर आईएफटीडीए अध्यक्ष अशोक पंडित मुखर: कहा- फिल्म उद्योग भरोसे पर टिका, स्टारडम में प्रतिबद्धता भी जरूरी

नई दिल्ली । हिंदी सिनेमा जगत के प्रमुख संगठन इंडियन फिल्म एंड टेलीविजन डायरेक्टर्स एसोसिएशन (IFTDA) के अध्यक्ष और फेडरेशन ऑफ वेस्टर्न इंडिया सिने एम्प्लॉईज (FWICE) के मुख्य सलाहकार अशोक पंडित ने फिल्म ‘डॉन 3’ को लेकर चल रहे मौजूदा विवाद पर एक बड़ा और महत्वपूर्ण बयान जारी किया है। अभिनेता रणवीर सिंह के फिल्म ‘डॉन 3’ को अचानक छोड़ने के बाद मनोरंजन उद्योग में शुरू हुई तीखी बहस के बीच अशोक पंडित ने साफ किया है कि किसी भी कलाकार की व्यावसायिक सफलता और उसके कानूनी अनुबंधों को अलग-अलग चश्मे से देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि फेडरेशन का मकसद केवल फिल्म उद्योग के पेशेवर ताने-बाने की रक्षा करना है। हाल ही में वेस्टर्न इंडिया सिने एम्प्लॉईज फेडरेशन द्वारा रणवीर सिंह के खिलाफ जारी किए गए असहयोग निर्देश (नॉन-कोऑपरेशन डायरेक्टिव) को वापस लिए जाने के बाद इस पूरे मामले ने एक नया मोड़ ले लिया था। इस संवेदनशील मुद्दे पर विस्तार से चर्चा करते हुए अशोक पंडित ने एक मीडिया बातचीत में बताया कि प्रोडक्शन हाउस एक्सेल एंटरटेनमेंट ने रणवीर सिंह को उस दौर में अपनी आगामी फिल्म के लिए साइन किया था, जब उनका हालिया स्टारडम वापस नहीं आया था। उन्होंने याद दिलाया कि जब अभिनेता की लगातार चार फिल्में बॉक्स ऑफिस पर असफल साबित हुई थीं, तब मेकर्स ने उन पर भरोसा जताते हुए ‘डॉन 3’ के लिए बहुत पहले ही अनुबंधित कर लिया था। अशोक पंडित के अनुसार, सिनेमाई दुनिया में जब किसी भी कलाकार का करियर ऊंचाइयों को छूने लगता है, तब भी उसे उद्योग के पुराने रिश्तों और मुश्किल समय में साथ खड़े रहने वाले निर्माताओं को नहीं भूलना चाहिए। उन्होंने कहा कि यह बेहद सुखद बात है कि अभिनेता की हालिया फिल्म सफल रही है और वे वर्तमान में एक बेहद मजबूत स्थिति में काम कर रहे हैं, लेकिन नैतिकता का तकाजा यही कहता है कि विपरीत परिस्थितियों में हाथ थामने वाले लोगों के प्रति प्रतिबद्धता बनी रहनी चाहिए। फिल्म उद्योग पूरी तरह से आपसी विश्वास, लिखित वादों और समय पर किए गए कमिटमेंट के बलबूते ही संचालित होता है। बॉलीवुड में स्टारडम के बदलते स्वरूप पर बेहद बेबाकी से टिप्पणी करते हुए फिल्म समीक्षक और संगठन प्रमुख ने कहा कि इस फिल्म नगरी ने समय-समय पर कई ऐतिहासिक और विशाल स्टारडम देखे हैं। उन्होंने महान अभिनेता राजेश खन्ना, शाहरुख खान और सलमान खान के दौर के अभूतपूर्व स्टारडम का उदाहरण देते हुए कहा कि दर्शकों का असीम प्यार निश्चित रूप से अनमोल और सर्वोपरि होता है, परंतु व्यावसायिक प्रोफेशनलिज्म ही इस पूरी इंडस्ट्री की असली और मजबूत बुनियाद है। जनता फिल्मों के लिए तालियां बजाती है और सफलता का जश्न मनाती है, लेकिन फिल्म निर्माण के पर्दे के पीछे आपसी भरोसा सबसे ज्यादा मायने रखता है। इसके साथ ही अशोक पंडित ने फिल्म निर्देशक आदित्य धर और उनकी हालिया रिलीज फिल्म ‘धुरंधर’ की जमकर तारीफ की। उनका मानना है कि इस फिल्म की बड़ी कामयाबी ने हिंदी फिल्म उद्योग को एक बहुत ही जरूरी और नया जीवनदान दिया है। उन्होंने ‘धुरंधर’ को बिजनेस के लिहाज से एक बेहतरीन ऑक्सीजन बताते हुए कहा कि यह एक ऐसी शानदार फिल्म है जिसने दर्शकों को दोबारा भारी तादाद में सिनेमाघरों तक खींचने का काम किया है। हालांकि, फिल्म की इस शानदार कामयाबी का जश्न मनाने के साथ ही उन्होंने पुरजोर तरीके से यह स्पष्ट किया कि ‘धुरंधर’ की सफलता को ‘डॉन 3’ के विवाद के साथ मिलाकर बिल्कुल नहीं देखा जाना चाहिए। अपनी बात को विराम देते हुए आईएफटीडीए के अध्यक्ष ने कहा कि दो अलग-अलग मामलों को आपस में मिलाने से केवल भ्रम और जटिलताएं पैदा होती हैं। फेडरेशन का एकमात्र और व्यापक उद्देश्य फिल्म उद्योग के पूरे इकोसिस्टम को सुरक्षित रखना और छोटे-बड़े सभी हितधारकों के अधिकारों की रक्षा करना है। उन्होंने एक बार फिर इस बात को दोहराया कि संस्था का किसी भी अभिनेता या निर्माता से कोई व्यक्तिगत झगड़ा या शिकायत नहीं है, बल्कि उनकी एकमात्र चिंता यह सुनिश्चित करना है कि देश की सबसे बड़ी फिल्म इंडस्ट्री के भीतर काम करने का एक पारदर्शी, पेशेवर और भरोसेमंद माहौल हमेशा कायम रहे।
TMC में बगावत और गहराई: काकोली घोष ने ऋतब्रत बनर्जी से बनाई दूरी, NDA समर्थन के दावे से बढ़ी सियासी हलचल

नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के भीतर चल रही अंदरूनी कलह अब नए मोड़ पर पहुंचती दिखाई दे रही है। पार्टी के भीतर उभरे बागी नेताओं के बीच भी रणनीतिक मतभेद सामने आने लगे हैं। लोकसभा में बागी सांसदों के कथित गुट का नेतृत्व करने का दावा कर रहीं टीएमसी सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि उनका बंगाल विधानसभा में बागी गुट का नेतृत्व कर रहे ऋतब्रत बनर्जी से कोई संबंध नहीं है। काकोली घोष दस्तीदार का यह बयान ऐसे समय आया है जब टीएमसी के भीतर असंतोष और संभावित टूट की चर्चाएं लगातार तेज हो रही हैं। हाल ही में राज्यसभा के कुछ सदस्यों के इस्तीफों और पार्टी के भीतर बढ़ते मतभेदों ने राजनीतिक हलकों में नई अटकलों को जन्म दिया है। इसी बीच काकोली ने दावा किया कि लोकसभा में उनके साथ कई सांसद खड़े हैं और वे बंगाल के हितों के लिए एक अलग राजनीतिक दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। मीडिया से बातचीत में काकोली ने कहा कि जब उन्होंने पार्टी नेतृत्व के खिलाफ आवाज उठाई थी, तब वे अकेली थीं, लेकिन अब कई सांसद उनके साथ आ चुके हैं। उन्होंने यह भी कहा कि ऋतब्रत बनर्जी विधानसभा की राजनीति में सक्रिय हैं, जबकि उनका संघर्ष संसद के स्तर पर है। इस कारण दोनों की राजनीतिक रणनीति और प्राथमिकताएं अलग हैं। टीएमसी के भीतर जारी इस घटनाक्रम में एक बड़ा विरोधाभास भी सामने आया है। जहां ऋतब्रत बनर्जी खुद को राज्य में भाजपा के विकल्प के रूप में प्रस्तुत करने की कोशिश कर रहे हैं, वहीं काकोली घोष का दावा है कि उनका गुट केंद्र की एनडीए सरकार को समर्थन देने के पक्ष में है। यही कारण है कि दोनों नेताओं के बीच दूरी और अधिक स्पष्ट दिखाई देने लगी है। काकोली घोष ने लोकसभा सांसद कल्याण बनर्जी को लेकर भी कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि उन्होंने लोकसभा अध्यक्ष को पत्र लिखकर कल्याण बनर्जी के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है। उनके अनुसार संसद के भीतर महिलाओं के प्रति कथित व्यवहार को लेकर उन्होंने आपत्ति जताई है। काकोली ने स्पष्ट कहा कि वे किसी भी परिस्थिति में कल्याण बनर्जी के साथ राजनीतिक रूप से नहीं जुड़ सकतीं। दूसरी ओर, ऋतब्रत बनर्जी ने काकोली के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उन्हें इस बारे में ज्यादा जानकारी नहीं है और वे इस तरह के विवादों में पड़ने से बचना चाहते हैं। इससे साफ संकेत मिलता है कि दोनों गुट फिलहाल अपने-अपने राजनीतिक रास्तों पर आगे बढ़ना चाहते हैं। सबसे बड़ा विवाद काकोली घोष के उस दावे को लेकर है जिसमें उन्होंने कहा कि टीएमसी के 28 लोकसभा सांसदों में से 20 सांसदों ने अलग गुट को मान्यता दिलाने और एनडीए सरकार को समर्थन देने के लिए पत्र पर हस्ताक्षर किए हैं। हालांकि, स्पीकर कार्यालय से जुड़े सूत्रों के अनुसार अभी तक ऐसा कोई आधिकारिक पत्र प्राप्त नहीं हुआ है। इतना ही नहीं, जिन सांसदों के नाम कथित रूप से बागी गुट में शामिल बताए जा रहे हैं, उनमें से कुछ ने सार्वजनिक रूप से इन दावों का खंडन भी किया है। आसनसोल से सांसद शत्रुघ्न सिन्हा ने कहा कि वे पूरी तरह टीएमसी और ममता बनर्जी के साथ हैं। वहीं जयनगर से सांसद प्रतिमा मंडल ने भी ऐसी खबरों को अफवाह बताते हुए चुनौती दी कि यदि कोई पत्र मौजूद है तो उसे सार्वजनिक किया जाए। इस बीच दिल्ली में केंद्रीय मंत्री के आवास पर कथित रूप से हुई एक बैठक की चर्चाओं ने राजनीतिक तापमान और बढ़ा दिया है। हालांकि बैठक में शामिल नेताओं और वहां हुई चर्चाओं को लेकर अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। फिर भी काकोली घोष का दावा है कि उनके साथ सांसदों की संख्या लगातार बढ़ रही है और कई अन्य नेता भी संपर्क में हैं। पश्चिम बंगाल की राजनीति में टीएमसी के भीतर बढ़ती यह हलचल आने वाले दिनों में राज्य और राष्ट्रीय राजनीति दोनों पर असर डाल सकती है। फिलहाल सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि पार्टी नेतृत्व इस चुनौती का सामना किस तरह करता है और बागी गुट अपने दावों को किस हद तक साबित कर पाता है।
श्रीलंका दौरे के लिए घोषित हुई जूनियर टीम इंडिया, विकेटकीपर-बल्लेबाज अन्वय द्रविड़ को मिली जगह

नई दिल्ली । भारतीय क्रिकेट के इतिहास में ‘द वॉल’ के नाम से मशहूर पूर्व महान कप्तान राहुल द्रविड़ के परिवार से एक और प्रतिभावान खिलाड़ी ने राष्ट्रीय स्तर पर अपनी दस्तक दे दी है। भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) की जूनियर चयन समिति ने अगले महीने से शुरू होने वाले श्रीलंका दौरे के लिए भारत की पुरुष अंडर-19 टीम का आधिकारिक तौर पर एलान कर दिया है। इस घोषित टीम में राहुल द्रविड़ के छोटे बेटे अन्वय द्रविड़ को पहली बार भारतीय अंडर-19 वनडे टीम में शामिल किया गया है। 17 वर्षीय युवा विकेटकीपर-बल्लेबाज को घरेलू क्रिकेट के आयु वर्ग में लगातार बेहतरीन खेल दिखाने का यह सबसे बड़ा पुरस्कार मिला है। शरत श्रीधरन की अगुवाई वाली जूनियर राष्ट्रीय चयन समिति ने श्रीलंका के खिलाफ होने वाली तीन वनडे मैचों की सीरीज और दो मल्टी-डे मुकाबलों के लिए दो अलग-अलग टीमों का चयन किया है। आगामी दौरा 4 जुलाई 2026 से श्रीलंका के हंबनटोटा मैदान पर शुरू होने जा रहा है। मध्य प्रदेश क्रिकेट संघ से जुड़े होनहार खिलाड़ी यशवर्धन सिंह चौहान को चयनकर्ताओं ने इस महत्वपूर्ण दौरे के लिए वनडे टीम की कप्तानी सौंपकर उन पर बड़ा भरोसा जताया है, जबकि लक्ष्य रायचंदानी को टीम का उपकप्तान नियुक्त किया गया है। राष्ट्रीय चयनकर्ताओं की नजरें इस दौरे के माध्यम से युवा खिलाड़ियों की क्षमता को परखने पर टिकी हैं। अन्वय द्रविड़ को मुख्य रूप से 15 सदस्यीय वनडे टीम में बतौर विकेटकीपर-बल्लेबाज शामिल किया गया है, जहां उनके साथ रजत बघेल दूसरे विकेटकीपर के विकल्प के रूप में मौजूद रहेंगे। अन्वय के बड़े भाई समित द्रविड़ भी कर्नाटक की अंडर-19 टीम की तरफ से घरेलू क्रिकेट खेल चुके हैं, लेकिन राष्ट्रीय स्तर पर जूनियर टीम इंडिया की नीली जर्सी पहनने का मौका पाने वाले अन्वय अपने परिवार के पहले युवा सदस्य बन गए हैं। खेल विशेषज्ञों का मानना है कि तकनीकी रूप से सक्षम इस युवा खिलाड़ी में अपने पिता की तरह लंबी और धैर्यपूर्ण पारियां खेलने की अद्भुत क्षमता मौजूद है। घरेलू स्तर पर अन्वय द्रविड़ के हालिया आंकड़ों पर नजर डालें तो वे लगातार चयनकर्ताओं के रडार पर बने हुए थे। हाल ही में आयोजित हुई वीनू मांकड़ ट्रॉफी में उन्होंने कर्नाटक अंडर-19 टीम की कप्तानी की जिम्मेदारी संभालते हुए टीम को क्वार्टर फाइनल तक पहुंचाने में मुख्य भूमिका अदा की थी। इस प्रतिष्ठित टूर्नामेंट की छह पारियों में शानदार बल्लेबाजी करते हुए उन्होंने 220 रन बनाए थे। टूर्नामेंट के दौरान हिमाचल प्रदेश के खिलाफ एक बेहद दबाव वाले मैच की दूसरी पारी में उन्होंने नाबाद 82 रनों की मैच जिताऊ पारी खेली थी, जिसने राष्ट्रीय चयनकर्ताओं का ध्यान अपनी ओर मजबूती से आकर्षित किया था। इससे पूर्व वे अंडर-16 विजय मर्चेंट ट्रॉफी में भी शानदार शतक जमा चुके हैं। भारतीय क्रिकेट बोर्ड के राष्ट्रीय चयनकर्ता इस आगामी श्रीलंका दौरे को वर्ष 2028 में आयोजित होने वाले अंडर-19 विश्व कप की तैयारियों के शुरुआती रोडमैप के रूप में देख रहे हैं। चूंकि अन्वय द्रविड़ की उम्र वर्तमान में केवल 17 वर्ष है, इसलिए वे दो साल बाद होने वाले अगले आईसीसी अंडर-19 विश्व कप में खेलने के लिए पूरी तरह पात्र रहेंगे। ऐसे में श्रीलंका की चुनौतीपूर्ण पिचों और उपमहाद्वीपीय परिस्थितियों में मिलने वाला यह अंतर्राष्ट्रीय अनुभव उनके क्रिकेट कौशल को और अधिक निखारने में बेहद गेम-चेंजर साबित हो सकता है। भारतीय जूनियर टीम जून के अंतिम सप्ताह में पड़ोसी देश श्रीलंका के लिए उड़ान भरेगी। प्रतियोगिता के तय कार्यक्रम के अनुसार, भारत और श्रीलंका के बीच पहला वनडे मैच 4 जुलाई को हंबनटोटा में खेला जाएगा, जिसके बाद दूसरा और तीसरा वनडे क्रमशः 6 और 9 जुलाई को इसी मैदान पर आयोजित होगा। सीमित ओवरों की यह सीरीज समाप्त होने के बाद दोनों देशों के बीच गॉल और कोलंबो के ऐतिहासिक मैदानों पर चार दिवसीय मल्टी-डे मैच खेले जाएंगे। भारतीय क्रिकेट के फैंस के साथ-साथ तमाम विश्लेषकों की निगाहें अब यशवर्धन सिंह चौहान की कप्तानी और विकेट के पीछे तथा आगे अन्वय द्रविड़ के प्रदर्शन पर टिकी रहने वाली हैं।
जब मोहम्मद रफी ने बिना फीस गाईं सिर्फ 4 लाइनें, अमिताभ बच्चन की मौत वाले सीन ने रुला दिया था पूरा देश

नई दिल्ली। हिंदी फिल्म संगीत के इतिहास में कुछ ऐसे गीत और कुछ ऐसे क्षण हैं, जो समय बीतने के बावजूद लोगों के दिलों में हमेशा जिंदा रहते हैं। महान पार्श्वगायक मोहम्मद रफी की आवाज भी ऐसी ही एक विरासत है, जिसने पीढ़ियों को भावनाओं से जोड़ने का काम किया है। रफी साहब ने अपने करियर में हजारों गीत गाए, लेकिन एक फिल्म में उन्होंने केवल चार लाइनें गाकर ऐसा जादू पैदा किया कि वह दृश्य और वह गीत आज भी लोगों की आंखें नम कर देता है। यह किस्सा जुड़ा है साल 1978 में रिलीज हुई सुपरहिट फिल्म ‘मुकद्दर का सिकंदर’ से। निर्देशक प्रकाश मेहरा की इस फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर सफलता के नए रिकॉर्ड बनाए थे। फिल्म में अमिताभ बच्चन, विनोद खन्ना, रेखा और राखी जैसे सितारों ने अभिनय किया था। कहानी, संवाद, संगीत और अभिनय के साथ-साथ इसका भावनात्मक क्लाइमेक्स भी दर्शकों के दिलों में हमेशा के लिए बस गया। फिल्म का संगीत मशहूर संगीतकार जोड़ी कल्याणजी-आनंदजी ने तैयार किया था, जबकि गीतकार अंजान ने इसके गीत लिखे थे। फिल्म के अधिकांश लोकप्रिय गीत किशोर कुमार की आवाज में रिकॉर्ड किए गए थे। ‘ओ साथी रे’, ‘रोते हुए आते हैं सब’ और टाइटल ट्रैक जैसे गीत उस दौर के सुपरहिट गानों में शामिल रहे। हालांकि फिल्म के अंतिम और सबसे भावनात्मक दृश्य के लिए संगीतकारों को कुछ अलग चाहिए था। कहा जाता है कि जब फिल्म के क्लाइमेक्स में सिकंदर की मौत का दृश्य फिल्माया गया, तब संगीतकार आनंदजी को लगा कि इस दृश्य में जिस दर्द, विरह और भावनात्मक गहराई की जरूरत है, उसे मोहम्मद रफी की आवाज से बेहतर कोई नहीं दे सकता। इसके लिए केवल चार लाइनों की आवश्यकता थी, लेकिन वे चार लाइनें पूरे दृश्य का भाव बदलने वाली थीं। संगीतकारों के सामने एक चुनौती भी थी। फिल्म के लगभग सभी गीत किशोर कुमार गा चुके थे और ऐसे में सिर्फ चार लाइनों के लिए मोहम्मद रफी से अनुरोध करना उन्हें थोड़ा असहज लग रहा था। आखिरकार आनंदजी ने रफी साहब से संपर्क किया और अपनी बात रखी। बताया जाता है कि रफी ने पहले पूछा कि जब पूरी फिल्म के गाने किशोर कुमार गा रहे हैं तो यह हिस्सा भी उनसे ही क्यों नहीं गवाया जाता। तब आनंदजी ने उन्हें समझाया कि इस दृश्य के लिए जिस दर्द और आत्मीयता की जरूरत है, वह उनकी आवाज में ही संभव है। रफी साहब ने इस अनुरोध को सहर्ष स्वीकार कर लिया। उन्होंने जिन चार पंक्तियों को अपनी आवाज दी, वे थीं- “जिंदगी तो बेवफा है, एक दिन ठुकराएगी, मौत महबूबा है अपने साथ लेकर जाएगी…”। इन पंक्तियों ने फिल्म के क्लाइमेक्स को एक अलग ही ऊंचाई पर पहुंचा दिया। दर्शकों ने न सिर्फ अमिताभ बच्चन के अभिनय को सराहा, बल्कि रफी की दर्दभरी आवाज ने भी उस दृश्य को अमर बना दिया। फिल्मी गलियारों में प्रचलित किस्सों के अनुसार, मोहम्मद रफी ने इन चार पंक्तियों के लिए कोई पारिश्रमिक नहीं लिया था। व्यस्त कार्यक्रम के बावजूद उन्होंने यह रिकॉर्डिंग की और अपनी संवेदनशील गायकी से दृश्य में ऐसी जान डाल दी कि यह हिंदी सिनेमा के सबसे भावुक क्षणों में शामिल हो गया। आज, दशकों बाद भी जब ‘मुकद्दर का सिकंदर’ का यह दृश्य या यह गीत सुनाई देता है, तो दर्शकों की भावनाएं उसी तरह उमड़ पड़ती हैं। यह केवल एक गीत नहीं, बल्कि मोहम्मद रफी की कला, संवेदनशीलता और संगीत के प्रति उनके समर्पण का जीवंत उदाहरण माना जाता है।
UP: फिरोजाबाद में स्वर्ण शताब्दी एक्सप्रेस पर पथराव… RSS चीफ मोहन भागवत भी ट्रेन में थे

नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के फिरोजाबाद जिले (Firozabad district) में गुरुवार की देर शाम लखनऊ-नई दिल्ली स्वर्ण शताब्दी एक्सप्रेस (Lucknow-New Delhi Swarna Shatabdi Express) पर कुछ अज्ञात असामाजिक तत्वों ने ताबड़तोड़ पथराव कर दिया। यह घटना उस समय बेहद संवेदनशील और हाई-प्रोफाइल हो गई जब सुरक्षा एजेंसियों को पता चला कि इसी ट्रेन के प्रभावित कोच में आरएसएस प्रमुख (सरसंघचालक) मोहन भागवत (Mohan Bhagwat) भी सफर कर रहे थे। राहत की बात यह है कि इस घटना में मोहन भागवत पूरी तरह सुरक्षित हैं और ट्रेन में सवार किसी अन्य यात्री को भी कोई चोट नहीं आई है। सरकारी रेलवे पुलिस (GRP) और उत्तर प्रदेश पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, यह घटना गुरुवार शाम करीब 7.15 से 7.20 बजे के बीच हुई। ट्रेन जब कानपुर से दिल्ली की ओर जा रही थी, तब फिरोजाबाद रेल खंड के मक्खनपुर स्टेशन को पार करने के बाद रसूलपुर और दक्षिण थाना क्षेत्र की सीमा पर पेमेश्वर गेट के पास अचानक ट्रेन पर पत्थर फेंके गए। एक भारी पत्थर सीधे एग्जीक्यूटिव क्लास के E-1 कोच की खिड़की से टकराया। पत्थर लगने से सीट संख्या 50 के पास का बाहरी शीशा पूरी तरह चटक गया। नॉर्थ सेंट्रल रेलवे के अधिकारियों के मुताबिक, मोहन भागवत इसी कोच की सीट नंबर 39 और 40 पर सवार थे। वे बोगी के दूसरी तरफ बैठे होने के कारण मलबे और सीधे प्रहार से पूरी तरह सुरक्षित रहे। टूंडला जंक्शन पर हाई-अलर्ट, 7 मिनट रुकी ट्रेनहमले के तुरंत बाद सुरक्षा प्रोटोकॉल को देखते हुए ट्रेन को बीच रास्ते में कहीं भी नहीं रोका गया और सीधे अगले बड़े स्टेशन टूंडला जंक्शन के लिए रवाना किया गया। शाम 7.34 बजे जैसे ही शताब्दी एक्सप्रेस टूंडला जंक्शन के प्लेटफॉर्म पर पहुंची, वहां पहले से मौजूद रेलवे सुरक्षा बल (RPF), GRP और स्थानीय पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों ने ट्रेन को चारों तरफ से सुरक्षा घेरे में ले लिया। कड़े सुरक्षा प्रोटोकॉल के कारण संघ प्रमुख को ट्रेन से नीचे नहीं उतारा गया, बल्कि अधिकारियों ने बोगी के भीतर जाकर ही उनका हालचाल जाना। सभी प्रक्रियाओं को पूरा करने के बाद ट्रेन को शाम 7.41 बजे दिल्ली के लिए रवाना कर दिया गया, जो रात 10.13 बजे सुरक्षित नई दिल्ली पहुंची। सीसीटीवी से 3 किशोर चिह्नित, एक संदिग्ध हिरासत मेंघटना की गंभीरता को देखते हुए आगरा जोन के ADG एस.के. भगत, आगरा रेंज के DIG शैलेंद्र पांडे और फिरोजाबाद के SSP आदित्य लांग्हे भारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। SSP आदित्य लांग्हे ने बताया कि इस मामले में RPF की तहरीर पर अज्ञात लोगों के खिलाफ रसूलपुर थाने में मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। रेलवे ट्रैक के आसपास के करीब 150 सीसीटीवी फुटेज खंगालने के बाद रात करीब 12 बजे तीन किशोरों को चिह्नित किया गया है। फिलहाल पुलिस ने एक संदिग्ध व्यक्ति को हिरासत में लिया है और उससे पूछताछ जारी है। पथराव के लिए बदनाम है यह इलाकापुलिस अधिकारियों ने स्वीकार किया कि फिरोजाबाद का यह विशेष रेल खंड पहले भी ट्रेनों पर पथराव की घटनाओं के लिए बदनाम रहा है। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि SOG, सर्विलांस और चार थानों की संयुक्त टीमें आरोपियों की धरपकड़ के लिए लगातार छापेमारी कर रही हैं और इस तरह की हरकतों पर प्रभावी रोक लगाने के लिए कड़े कदम उठाए जा रहे हैं।