थाईलैंड की भावी शासक प्रिसेज बज्रकितियाभा का निधन…, 3 साल तक कोमा में रही

बैंकॉक। थाईलैंड (Thailand) की भावी शासक राजकुमारी, बज्रकितियाभा (Princess Bajrakitiyabha) का निधन हो गया है। शुक्रवार सुबह शाही परिवार ने एक बयान जारी कर इसकी पुष्टि की है। राजा महा वजिरालॉन्गकॉर्न (King Maha Vajiralongkorn) की सबसे बड़ी बेटी और देश की सबसे लोकप्रिय शाही हस्तियों में से एक, ‘प्रिंसेस भा’ पिछले साढ़े 3 साल से लाइफ सपोर्ट सिस्टम के सहारे कोमा में थीं। अब उनकी मौत से पूरे देश में शोक की लहर दौड़ गई है। पैलेस द्वारा जारी बयान के मुताबिक, 47 वर्षीय राजकुमारी बज्रकितियाभा ने बैंकॉक के एक अस्पताल में अंतिम सांस ली। इससे पहले शाही परिवार ने बीते दिनों एक बयान जारी कर बताया था कि उनकी हालत बिगड़ती जा रही है। मेडिकल टीम ने बताया था कि उनके पेट और आंतों में इन्फेक्शन फैल गया था और उनके कई अंदरूनी अंगों ने काम करना बंद कर दिया था। डॉक्टरों की तमाम कोशिशों के बावजूद स्थानीय समयानुसार गुरुवार रात उनका निधन हो गया। दिसंबर 2022 में हो गई थीं बेहोशराजकुमारी बज्रकितियाभा दिसंबर 2022 में बैंकॉक में अपने पालतू कुत्तों को वॉक कराने के दौरान अचानक बेहोश होकर गिर पड़ी थीं। डॉक्टरों के मुताबिक, दिल में माइकोप्लाज्मा इन्फेक्शन के कारण अचानक उनकी दिल की धड़कनें पूरी तरह अनियमित हो गई थीं। इससे उनके दिमाग में ऑक्सीजन की कमी हुई और वह कोमा में चली गईं। तब से उन्हें मशीनों के सहारे ही जीवित रखा गया था। सबसे योग्य उत्तराधिकारी थीं प्रिंसेज भाराजकुमारी को यहां के लोग प्यार से प्रिंसेज भा कहा करते थे। राजा वजिरालॉन्गकॉर्न की पहली पत्नी सोअमसावली से जन्मीं प्रिंसेज भा का जन्म 7 दिसंबर 1978 को हुआ था। वह अपने पिता की सात संतानों में सबसे बड़ी थीं। बचपन से ही वे काफी मेधावी थीं। आगे चलकर वे वह एक बेहद काबिल वकील थीं। उन्होंने अमेरिका की प्रतिष्ठित कॉर्नेल यूनिवर्सिटी से कानून में LLM और डॉक्टरेट की डिग्रियां हासिल की थीं। इसके बाद उन्हें राजघराने से अहम जिम्मेदारियां भी मिलीं। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र में थाई मिशन के लिए काम किया। इसके बाद वे 2012 से 2014 तक ऑस्ट्रिया में थाईलैंड की राजदूत रहीं। इसके अलावा प्रिंसेज भा ने थाईलैंड की जेलों में बंद महिला कैदियों की स्थिति सुधारने और ड्रग्स मामलों में मिलने वाली कड़ी सजाओं के खिलाफ कानून में बड़े सुधारों की वकालत भी की थी। 2021 में उनके पिता ने उन्हें अपनी पर्सनल बॉडीगार्ड विंग का चीफ ऑफ स्टाफ नियुक्त किया था और उन्हें जनरल की रैंक दी थी। थाईलैंड के सिंहासन का अगला वारिस कौन?राजकुमारी बज्रकितियाभा के निधन से थाईलैंड में उत्तराधिकार को लेकर बड़ा संकट खड़ा हो गया है। 73 वर्षीय राजा वजिरालॉन्गकॉर्न ने अभी तक आधिकारिक रूप से अपने उत्तराधिकारी का नाम घोषित नहीं किया है। प्रिंसेस भा के निधन से पहले उन्हें ही सबसे योग्य उम्मीदवार माना जा रहा था। हालांकि सालों पहले थाईलैंड के कानून में महिला उत्तराधिकारी का प्रावधान नहीं था। लेकिन 1974 में संविधान संशोधन के बाद इन नियमों में बदलाव किए गए थे। प्रिंसेज भा की मौत के बाद सबसे अहम दावेदार 21 वर्षीय प्रिंस दिपंगकोर्न हैं। वे राजा की तीसरी पत्नी से पैदा हुए इकलौते बेटे हैं और फिलहाल एकमात्र वैध पुरुष उत्तराधिकारी भी हैं। हालांकि कम उम्र में इतनी बड़ी जिम्मेदारी संभालने की उनकी क्षमताओं पर सवाल उठ रहे हैं। इससे पहले राजा के अन्य चार बेटे भी थे। हालांकि राजा ने अपनी दूसरी शादी से हुए चार बेटों को 1996 में ही राजघराने से बेदखल कर दिया था। वे अपनी मां के साथ अमेरिका में रहते हैं और उनका शाही हक खत्म हो चुका है।
PoK में सस्ते आटा-चावल के लिए सड़क पर उतरे लोग…. Pak सेना ने की फायरिंग, 16 की मौत

रावलकोट । पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) (Pakistan-occupied Kashmir (PoK) में सस्ता आटा-चावल, किफायती बिजली और बुनियादी अधिकारों की मांग को लेकर सड़कों पर उतरे आम लोगों को एक बार फिर पाकिस्तानी सेना (Pakistan Army) का कहर झेलना पड़ा। रावलकोट के ईदगाह मैदान में गुरुवार को उस समय भयानक मंजर नजर आया जब सैनिकों ने बिना चेतावनी गोलियां बरसानी शुरू कर दीं, जिसमें कम से कम 16 निहत्थे प्रदर्शनकारी मारे गए और 37 अन्य घायल हो गए। रावलकोट में आर्थिक तंगी से जूझ रहे करीब 60 से 70 हजार लोग प्रदर्शन कर रहे हैं। इसमें पुरुष, महिलाएं और युवा सभी शामिल हैं। ईदगाह मैदान में शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे लोगों पर पाकिस्तानी सेना और रेंजर्स की गोलियों की बरसात से अचानक हर तरफ भगदड़ मच गई। थोड़ी ही देर में पूरे इलाके में मंजर एकदम दिल दहला देने वाला था। खून से सनी सड़कों और खेतों में अपनों को ढूंढ़ते दुखी परिवार हक की आवाज उठाने की मानवीय कीमत चुकाने की निशानी बन गए हैं। पीओके में शुक्रवार से जारी विरोध प्रदर्शनों के दौरान इस तरह की दमनकारी कार्रवाई में अब तक 53 लोगों की जान जा चुकी है। पाकिस्तानी सेना यहां जितनी दमनकारी कार्रवाई कर रही है, सड़कों पर उतरे लोगों का हौसला उससे कहीं ज्यादा बुलंद है। इस खूनी कहर के बावजूद सैकड़ों की संख्या में प्रदर्शनकारी अब भी अपनी मांगों से पीछे हटने को तैयार नहीं हैं। आर-पार के मूड में जनतागोलीबारी के बाद भीड़ को संबोधित करते हुए आंदोलन के नेता सरदार अमन खान ने कहा कि संघर्ष अब एक निर्णायक दौर में पहुंच गया है और संकल्प लिया कि जान-माल के नुकसान के बावजूद यह आंदोलन जारी रहेगा। सड़कों पर मौजूद लोग कोई हथियार नहीं लिए हैं। वे बस सस्ते भोजन, सस्ती बिजली और सम्मानजनक जीवन की मांग कर रहे हैं। फिर भी, उन्हें जवाब में गोलियां मिली हैं।
MP: रीवा में वाहन से 5 क्विंटल अवैध विस्फोटक बरामद…. चालक गिरफ्तार

रीवा। मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के रीवा जिले (Rewa district) में अवैध विस्फोटक (Illegal explosives) बरामद किया गया है। घटना रायपुर कर्चुलियान थाना क्षेत्र की है। पुलिस ने अवैध विस्फोटकों के परिवहन पर एक बड़ी कार्रवाई करते हुए, गश्त के दौरान भारी मात्रा में अवैध विस्फोटक सामग्री ले जा रही एक गाड़ी को पकड़ा है। यह विस्फोटक करीब 5 क्विंटल है, जिसमे जिलेटिंन सहित अन्य विस्फोटक सामग्री शामिल है। यह विस्फोटक मानिकवार क्षेत्र से बेला की ओर ले जाया जा रहा था। यह क्रेशर या माइनिंग में उपयोग किया जाता है। पुलिस ने इस मामले में एक आरोपी को भी गिरफ्तार किया है, जिससे पूछताछ की जा रही है। इस पूरे मामले की जानकारी देते हुए डीएसपी उदित मिश्रा ने बताया- पुलिस टीम रूटीन गश्त पर थी। तभी मुखबिर से एक संदिग्ध वाहन के बारे में सूचना मिली, जब पुलिस ने घेराबंदी कर गाड़ी को रोका और उसकी तलाशी ली, तो उसमें अवैध विस्फोटक भरा हुआ पाया गया। पुलिस द्वारा वाहन चालक से जब इस विस्फोटक के संबंध में वैध दस्तावेज और लाइसेंस मांगे गए, तो वह कोई भी कागजात पेश नहीं कर सका। शुरुआती पूछताछ में यह बात सामने आई है कि इन विस्फोटकों का इस्तेमाल क्रशर्स और माइनिंग में ब्लास्टिंग के लिए किया जाना था। पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए चालक को हिरासत में ले लिया है। और विस्फोटक अधिनियम के तहत एफआईआर दर्ज कर ली गई है। विस्फोटकों की तीव्रता और खतरे का आकलन करने के लिए, बम डिस्पोजल स्क्वाड की टीम को भी मौके पर बुलाया गया है। पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि इस गाड़ी का असली मालिक कौन है। यह विस्फोटक मऊगंज के पास से कहां ले जाया जा रहा था, और क्या इससे पहले भी इस तरह की अवैध सप्लाई की गई है। सुरक्षा के लिहाज से प्रशासन को भी सूचित कर दिया गया है ताकि इन विस्फोटकों का सुरक्षित तरीके से डिस्पोजल किया जा सके।
राज्यसभा चुनावः 27 सीटों में से 24 का फैसला निर्विरोध… 19 पर NDA और 5 पर कांग्रेस की जीत

नई दिल्ली। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे (Mallikarjun Kharge) और पार्टी के वरिष्ठ नेता पवन खेड़ा (Pawan Khera) के अलावा भाजपा नेता सतीश पूनिया (Satish Poonia) और तरुण चुघ (Tarun Chugh) सहित 24 उम्मीदवार गुरुवार को राज्यसभा के लिए निर्विरोध निर्वाचित घोषित किए गए। राज्यसभा की 27 सीटों में से 24 सीटों का फैसला निर्विरोध हो गया। इनमें 19 सीटों पर राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के उम्मीदवार निर्विरोध निर्वाचित घोषित किए गए, जबकि शेष पांच सीटें कांग्रेस के खाते में गईं। इन सीटों पर होगा चुनावझारखंड की दो सीटों पर, जहां कड़ा मुकाबला होने की संभावना है, तथा मिजोरम की एक सीट पर चुनाव 18 जून को कराया जाएगा। दस राज्यों की 24 राज्यसभा सीटों के चुनाव तथा महाराष्ट्र, ओडिशा और तमिलनाडु की एक-एक सीट पर उपचुनाव के लिए नामांकन पत्रों की जांच गुरुवार को की गई। निर्विरोध निर्वाचित घोषित किए गए सभी उम्मीदवारों को संबंधित निर्वाचन अधिकारियों ने जीत का प्रमाण-पत्र सौंप दिया। रोमांचक होगा मुकाबलाझारखंड से राज्यसभा की दो सीटों के लिए चुनाव कराया जाएगा, जहां तीन उम्मीदवार मैदान में हैं। इनमें झामुमो के बैद्यनाथ राम, कांग्रेस के प्रणव झा और निर्दलीय उम्मीदवार परिमल नाथवानी शामिल हैं। नाथवानी रिलायंस इंडस्ट्रीज़ के निदेशक हैं और उन्हें भाजपा का समर्थन प्राप्त है। झारखंड विधानसभा में INDIA गठबंधन के 56 विधायक हैं और जीत के लिए प्रत्येक उम्मीदवार को 28 प्रथम वरीयता मतों की आवश्यकता होगी। वहीं, भाजपा के पास 21 विधायक हैं। इसके अलावा नीतीश कुमार की पार्टी जद(यू), लोजपा (रामविलास) और ऑल झारखंड स्टूडेंट यूनियन का एक-एक विधायक है। मिजोरम से एकमात्र राज्यसभा सीट के चुनाव के लिए, सत्तारूढ़ ज़ोरम पीपल्स मूवमेंट (JPM) के प्रवक्ता के लालतलुआंगकिमा और मुख्य विपक्षी पार्टी मिजो नेशनल फ्रंट (MNF) से ज़ोथानसांगी हमार चुनावी मैदान में हैं। MP में हुआ बड़ा खेलामध्यप्रदेश में राज्यसभा के द्विवार्षिक चुनाव में भाजपा के तीनों उम्मीदवारों तरुण चुघ, रजनीश अग्रवाल और महेश केवट को निर्वाचन अधिकारी ने निर्विरोध निर्वाचित घोषित कर दिया। कांग्रेस अध्यक्ष खरगे समेत चार उम्मीदवारों को कर्नाटक से राज्यसभा के लिए निर्विरोध निर्वाचित घोषित किया गया। इनमें एक भाजपा उम्मीदवार है। खरगे के अलावा, अन्य नवनिर्वाचित सदस्यों में कांग्रेस सचिव मंसूर अली खान, खेड़ा और भाजपा के एम नागराज शामिल हैं। राज्य से मौजूदा चार राज्यसभा सदस्यों इरन्ना कडाडी और नारायण कोरागाप्पा (दोनों भाजपा से), कांग्रेस के मल्लिकार्जुन खरगे और जनता दल (सेक्युलर) के नेता एचडी देवेगौड़ा का कार्यकाल 25 जून को खत्म हो रहा है और इन रिक्त पदों को भरने के लिए चुनाव की घोषणा की गई थी। अन्य राज्यों का हालराज्यसभा चुनाव के इस दौर के साथ ही, संसद में देवेगौड़ा की पांच दशकों से ज्यादा लंबी पारी खत्म हो जाएगी। गुजरात से चार सीट के लिए सत्तारूढ़ भाजपा के सभी चारों उम्मीदवारों को निर्वाचित घोषित कर दिया गया। इनमें राजूभाई शुक्ला, मानसिंह परमार, मुकेशभाई राठवा और जितेंद्र कंजारिया शामिल हैं। आंध्र प्रदेश से NDA के चारों उम्मीदवार राज्यसभा के लिए निर्विरोध चुन लिए गए। निर्वाचित उम्मीदवारों में तीन तेलुगु देशम पार्टी (TDP) और एक जनसेना से है। निर्वाचन अधिकारी आर वनिता रानी ने बश्याम रामकृष्ण, लिंगमनेनी रमेश, सी विजय और सना सतीश बाबू के उच्च सदन के लिए निर्विरोध निर्वाचन की घोषणा की। रामकृष्ण, विजय और बाबू तेदेपा से हैं, जबकि रमेश जनसेना से हैं। विजय, आंध्र प्रदेश विधानसभा के अध्यक्ष सी अय्यन्नापतरुदू के पुत्र हैं। राजस्थान से भाजपा के दो और कांग्रेस के एक उम्मीदवार निर्विरोध निर्वाचित घोषित किए गए। निर्वाचन अधिकारी ने भाजपा के सतीश पूनिया और अलका गुर्जर तथा कांग्रेस के नीरज डांगी को संसद के उच्च सदन के लिए निर्विरोध निर्वाचित घोषित किया। नेशनल पीपुल्स पार्टी (NPP) के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष जेम्स के संगमा मेघालय से राज्यसभा की एकमात्र सीट के लिए निर्विरोध निर्वाचित हुए। मुख्यमंत्री कॉनराड संगमा के भाई जेम्स के संगमा को उच्च सदन के द्विवार्षिक चुनाव के लिए निर्विरोध निर्वाचित घोषित किया गया, क्योंकि मुकाबले में कोई अन्य उम्मीदवार नहीं था। वानवेइरॉय खरलुखी का कार्यकाल पूरा होने के बाद राज्यसभा की सीट खाली हो गई थी। मणिपुर में, भाजपा की प्रदेश अध्यक्ष अधिकारीमायुम शारदा देवी को राज्य से एकमात्र राज्यसभा सीट के लिए निर्विरोध निर्वाचित घोषित किया गया। भाजपा के वरिष्ठ नेता ताई तागाक अरुणाचल प्रदेश से एकमात्र राज्यसभा सीट के लिए निर्विरोध निर्वाचित हुए। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के राजेंद्र जैन उपचुनाव में महाराष्ट्र से राज्यसभा के लिए निर्विरोध निर्वाचित हुए हैं। ओडिशा में, भाजपा उम्मीदवार देवाशीष सामंतराय को राज्यसभा के लिए निर्विरोध निर्वाचित घोषित किया गया। बीजू जनता दल (BJD) छोड़ने और संसद के उच्च सदन के सदस्य के रूप में इस्तीफा देने के बाद 26 मई को भाजपा में शामिल हुए सामंतराय इस उपचुनाव में एकमात्र उम्मीदवार थे। तमिलनाडु से कांग्रेस उम्मीदवार प्रवीण चक्रवर्ती को निर्विरोध निर्वाचित घोषित किया गया। अन्नाद्रमुक नेता सी षणमुगम ने अपना छह वर्षीय कार्यकाल 2028 में समाप्त होने से पहले ही सात मई को राज्यसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था। वह वर्ष 2022 में राज्यसभा के लिए निर्वाचित हुए थे। सत्तारूढ़ तमिलगा वेत्री कषगम (TVK) के समर्थन से चक्रवर्ती ने नामांकन पत्र दाखिल किया था। नौ जून को अधिकारियों ने उनके नामांकन को वैध घोषित कर दिया, जबकि 12 निर्दलीय उम्मीदवारों के नामांकन पत्र खारिज कर दिए गए।
दिल्ली-NCR में तेज आंधी और झमाझम बारिश से कूल-कूल हुआ मौसम…. आज कई राज्यों में अलर्ट

नई दिल्ली। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली (Delhi) और एनसीआर (NCR) में गुरुवार रात तेज आंधी, गरज-चमक और बारिश (Strong Winds, Thunderstorms Rain) के साथ मौसम ने अचानक करवट ले ली. दिनभर की भीषण गर्मी (Scorching heat) और उमस के बाद आई बारिश ने लोगों को राहत दी, लेकिन तेज हवाओं और बिजली गिरने की आशंका को देखते हुए भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने रेड अलर्ट जारी कर दिया। दिल्ली के कई इलाकों में देर रात तेज हवाएं चलीं, आसमान में घने बादल छा गए और बारिश दर्ज की गई. मौसम विभाग के अनुसार अगले कुछ घंटों तक गरज-चमक के साथ बारिश जारी रह सकती है. इस दौरान 70 से 80 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलने और उनके झोंके 90 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंचने की संभावना है. IMD ने लोगों को खराब मौसम के दौरान सुरक्षित स्थानों पर रहने, कमजोर ढांचों और पेड़ों से दूर रहने तथा खुले इलाकों में जाने से बचने की सलाह दी है. विभाग के मुताबिक रेड अलर्ट का मतलब है कि मौसम की स्थिति जान-माल के लिए खतरा पैदा कर सकती है और तत्काल सावधानी बरतना जरूरी है। मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि मध्य पाकिस्तान और उससे सटे क्षेत्रों में बने चक्रवाती परिसंचरण के कारण उत्तर-पश्चिम भारत के ऊपर वायुमंडलीय अस्थिरता बढ़ी है. इसी वजह से दिल्ली-एनसीआर समेत पूरे उत्तर भारत में मौसम तेजी से बदल रहा है. दिल्ली समेत इन राज्यों में आज भी बारिशशुक्रवार को भी उत्तर भारत के कई राज्यों में मौसम सक्रिय रहेगा. दिल्ली, हरियाणा, पंजाब, पश्चिमी उत्तर प्रदेश और उत्तर राजस्थान में गरज-चमक, तेज हवाओं और धूल भरी आंधी की संभावना है. वहीं उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल, ओडिशा, छत्तीसगढ़ और पश्चिमी हिमालयी क्षेत्रों में हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है। दक्षिण और पूर्वोत्तर भारत में भी बारिश का दौर जारी रहने की संभावना है. केरल, तटीय कर्नाटक, अंडमान-निकोबार द्वीपसमूह, सिक्किम और पश्चिमी असम में मध्यम से भारी बारिश का अनुमान है। हालांकि बारिश के बावजूद राजस्थान और विदर्भ के कुछ हिस्सों में लू का असर जारी रह सकता है. गुरुवार को दिल्ली का अधिकतम तापमान 38.7 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जबकि उमस के कारण महसूस किया जाने वाला तापमान 44 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया था. मौसम विभाग का कहना है कि अगले कुछ दिनों में बादल और बारिश के कारण तापमान में गिरावट आएगी और लोगों को गर्मी से राहत मिलेगी।
MP: इंदौर में गंभीर नदी को पुनर्जीवित करने की तैयारी, 10 हजार ट्रेंच के साथ होगा महा-वृक्षारोपण

इंदौर। मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के इंदौर संभाग (Indore Division) के महू क्षेत्र (Mhow region) में गंभीर नदी (Gambhir River) को नया जीवन देने और जल संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए प्रशासन ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। नदी के जलागम क्षेत्र को सुरक्षित करने और भू-जल स्तर को बढ़ाने के उद्देश्य से भमती और रिछा पहाड़ियों के सीमांकन का कार्य आधिकारिक रूप से शुरू कर दिया गया है। इस अभियान को गति देने के लिए प्रशासनिक अधिकारियों की एक संयुक्त टीम ने प्रभावित क्षेत्रों का जमीनी निरीक्षण किया। पहाड़ियों का सीमांकन और विस्तृत कार्ययोजना पर मंथननिरीक्षण दल में शामिल अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) महू राकेश परमार, जनपद पंचायत डॉ. अंबेडकर नगर महू के मुख्य कार्यपालन अधिकारी गिरीराज दुबे और तहसीलदार महू विवेक सोनी ने भमती एवं रिछा पहाड़ी क्षेत्र का बारीकी से जायजा लिया। इस दौरान अधिकारियों ने गंभीर नदी के जलागम क्षेत्र में मिट्टी और जल संरक्षण के लिए बनाई गई प्रस्तावित कार्ययोजना पर विस्तार से चर्चा की। योजना के तहत इस पहाड़ी क्षेत्र में लगभग 10 हजार सतत कंटूर ट्रेंच (सीसीटी) का निर्माण किया जाना तय हुआ है। जल संवर्धन और वृक्षारोपण से बदलेगी तस्वीरप्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार सतत कंटूर ट्रेंच के निर्माण के साथ-साथ इस पूरे क्षेत्र में बड़े पैमाने पर पौधारोपण अभियान भी चलाया जाएगा। इस दोहरी रणनीति से वर्षा के जल को बहने से रोका जा सकेगा और वह अधिकतम मात्रा में जमीन के भीतर समाहित होगा। इस प्रक्रिया से न केवल क्षेत्र के भू-जल स्तर में सुधार होगा, बल्कि मिट्टी के कटाव पर भी प्रभावी रोक लगेगी। यह पूरा प्रयास गंभीर नदी के प्राकृतिक जल प्रवाह को दीर्घकालिक मजबूती प्रदान करेगा। मुख्यमंत्री के संकल्प को धरातल पर उतारने का प्रयासयह पूरा अभियान मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव (Chief Minister Dr. Mohan Yadav) के जल संरक्षण संबंधी संकल्पों के अनुरूप संचालित किया जा रहा है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि भमती और रिछा पहाड़ियां गंभीर नदी के लिए मुख्य जल स्रोत (जलागम क्षेत्र) का कार्य करती हैं, इसलिए यहां किए जा रहे संरक्षण कार्य नदी के पुनर्जीवन में सबसे निर्णायक और महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। जनभागीदारी से अभियान को सफल बनाने की अपीलजनपद पंचायत डॉ. अंबेडकर नगर महू ने इस महत्वाकांक्षी अभियान को पूरी तरह सफल बनाने के लिए सामुदायिक सहयोग की आवश्यकता पर बल दिया है। प्रशासन की ओर से स्थानीय जनप्रतिनिधियों, ग्राम पंचायतों, सामाजिक संगठनों और आम नागरिकों से इस कार्य में सक्रिय रूप से जुड़ने की अपील की गई है। सरकार का मुख्य लक्ष्य आम जनता के सहयोग से गंभीर नदी को एक बार फिर से अविरल, निर्मल और जीवनदायिनी बनाना है।
फिल्मी करियर छोड़ने के फैसले पर यश चोपड़ा ने लगाई थी फटकार, भाग्यश्री बोलीं- आज भी नहीं है कोई पछतावा

नई दिल्ली। हिंदी सिनेमा की चर्चित अभिनेत्री भाग्यश्री ने अपनी पहली ही फिल्म ‘मैंने प्यार किया’ से देशभर के दर्शकों के दिलों में खास जगह बना ली थी। सलमान खान के साथ उनकी जोड़ी को जबरदस्त लोकप्रियता मिली और फिल्म बॉक्स ऑफिस पर ऐतिहासिक सफलता साबित हुई। ऐसे समय में जब उनका करियर तेजी से ऊंचाइयों की ओर बढ़ रहा था, भाग्यश्री ने अचानक फिल्मी दुनिया से दूरी बनाने का फैसला कर लिया। यह निर्णय उस दौर में उनके प्रशंसकों के लिए किसी बड़े झटके से कम नहीं था। हाल ही में दिए एक इंटरव्यू में भाग्यश्री ने अपने करियर के उस अहम मोड़ को याद करते हुए बताया कि उस समय उनकी जिंदगी में प्यार और परिवार सबसे बड़ी प्राथमिकता बन चुके थे। उन्होंने कहा कि वह बहुत कम उम्र में प्रेम में थीं और शादी कर अपना परिवार बसाना चाहती थीं। अभिनेत्री के अनुसार जब ‘मैंने प्यार किया’ रिलीज हुई, तब वह शादीशुदा थीं और मां बनने वाली थीं। उस दौर में फिल्मों के निर्माण और रिलीज के बीच लंबा अंतर होता था, इसलिए दर्शकों को यह बात ज्यादा पता नहीं चल पाई थी। भाग्यश्री ने कहा कि 20 वर्ष की उम्र में उन्हें एक कठिन फैसला लेना पड़ा था। उनके सामने एक ओर उभरता हुआ फिल्मी करियर था और दूसरी ओर उनका व्यक्तिगत जीवन। उन्होंने परिवार और रिश्तों को प्राथमिकता देने का निर्णय लिया और उसी राह पर आगे बढ़ीं। हालांकि बाद में उन्होंने कुछ फिल्मों में काम किया, लेकिन वे फिल्में मुख्य रूप से उनके पति हिमालय दासानी के साथ थीं। अभिनेत्री ने स्वीकार किया कि अपने पति के साथ फिल्मों में काम करने का फैसला पूरी तरह व्यावहारिक सोच के आधार पर लिया गया था। उन्हें लगा था कि साथ काम करना आसान और सहज रहेगा, लेकिन दर्शकों ने इस जोड़ी को उस तरह स्वीकार नहीं किया जैसा उन्होंने उम्मीद की थी। भाग्यश्री के अनुसार युवावस्था में लिए गए कई फैसलों की तरह यह भी एक ऐसा निर्णय था, जिसे बाद में अलग नजरिए से देखा जा सकता है। हालांकि उन्होंने इसे गलती कहने के बजाय एक अनुभव माना और कहा कि उस समय उन्होंने और उनके पति ने साथ काम करते हुए अच्छे पल बिताए। इंटरव्यू के दौरान भाग्यश्री ने एक दिलचस्प खुलासा भी किया। उन्होंने बताया कि उनके फिल्मी करियर से दूरी बनाने के फैसले से कई बड़े फिल्म निर्माता निराश हो गए थे। अभिनेत्री के अनुसार प्रसिद्ध निर्देशक यश चोपड़ा ने उन्हें इस फैसले के लिए डांटा था। वहीं दिग्गज फिल्मकार मनमोहन देसाई भी उनके साथ काम करना चाहते थे और उन्होंने उनसे फिल्म के लिए हामी भरने का आग्रह किया था। हालांकि इतने बड़े अवसर हाथ से निकल जाने के बावजूद भाग्यश्री को अपने फैसले पर कोई पछतावा नहीं है। उन्होंने कहा कि उन्होंने जीवन में जो भी निर्णय लिए, उन्हें पूरी समझ और ईमानदारी के साथ लिया। उनका मानना है कि परिवार को प्राथमिकता देना उस समय उनके लिए सबसे सही विकल्प था। हां, एक इच्छा जरूर रह गई कि यदि उन्हें यश चोपड़ा और मनमोहन देसाई जैसे महान फिल्मकारों के साथ काम करने का अवसर मिलता तो वह अनुभव बेहद खास होता। भाग्यश्री ने कहा कि जीवन में कुछ अवसर छूट जाते हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि व्यक्ति पीछे मुड़कर केवल अफसोस करता रहे। उनके अनुसार जीवन आगे बढ़ने का नाम है और हर निर्णय अपने साथ कुछ नई सीख लेकर आता है। यही वजह है कि आज भी वह अपने करियर और निजी जीवन से जुड़े फैसलों को लेकर संतुष्ट हैं और उन्हें अपने चुनावों पर गर्व है।
उद्योग-व्यावसायिक यूजर्स अब पंपों से नहीं खरीद सकेंगे पेट्रोल-डीजल…. सरकार ने 90 दिन के लिए लगी रोक

नई दिल्ली। सरकार (Government) ने एक बड़ा फैसला लिया है। अब औद्योगिक और व्यावसायिक (Industrial and Commercial Users) संस्थान पेट्रोल पंपों (Petrol pumps) से पेट्रोल-डीजल (Petrol and Diesel ) नहीं खरीद सकेंगे। उन्हें अपनी जरूरत का तेल थोक बिक्री केंद्रों से ही लेना होगा। यह पाबंदी 90 दिनों तक लागू रहेगी। सरकार ने यह कदम तेल की बढ़ती मांग को देखते हुए उठाया है। दरअसल, पेट्रोल पंप और थोक बाजार की कीमतों में बड़ा अंतर आ गया है। दिल्ली में पेट्रोल पंप पर डीजल 95.20 रुपये प्रति लीटर मिल रहा है। वहीं थोक ग्राहकों के लिए इसकी कीमत 134.50 रुपये है। इस भारी अंतर की वजह से बड़े ग्राहक पेट्रोल पंपों से तेल खरीदने लगे थे। इससे देश के कुछ हिस्सों में डीजल की मांग असामान्य रूप से बढ़ गई थी। सरकारी तेल कंपनियों ने आम लोगों को महंगाई से बचाने के लिए पेट्रोल पंपों पर दाम स्थिर रखे हैं। पश्चिम एशिया के संकट के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल महंगा हुआ है। टेलीकॉम टावर और बिजली बनाने वाली कंपनियों जैसे थोक ग्राहकों को बाजार की पूरी कीमत चुकानी पड़ती है। इसी वजह से वे सस्ता तेल लेने के लिए पेट्रोल पंपों का रुख कर रहे थे। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने 11 जून को नया आदेश जारी किया। इस आदेश का नाम ‘मोटर स्पिरिट और हाई स्पीड डीजल (रिटेल आउटलेट के माध्यम से आपूर्ति का अस्थायी विनियमन) आदेश, 2026’ है। सरकार ने कहा कि दुनिया के कुछ हिस्सों में जारी तनाव से तेल की सप्लाई और जहाजों के आने-जाने पर बुरा असर पड़ा है। इससे पेट्रोलियम उत्पादों की उपलब्धता प्रभावित हुई है। नए नियमों के मुताबिक, पेट्रोल पंपों पर डीजल की बिक्री केवल वाहनों की टंकी या मान्यता प्राप्त कंटेनरों में ही होगी। एक ग्राहक या वाहन एक दिन में अधिकतम 200 लीटर डीजल ही खरीद पाएगा। इस तेल को दोबारा बेचना पूरी तरह मना है। सरकार का मानना है कि बड़े ग्राहकों की भीड़ से आम जनता के लिए तेल की कमी हो सकती है। इससे जरूरी सेवाएं भी प्रभावित हो सकती हैं। तेल कंपनियों और राज्य सरकारों को इन नियमों को सख्ती से लागू करने को कहा गया है। जमाखोरी, कालाबाजारी और तेल की हेराफेरी करने वालों पर कड़ी कार्रवाई होगी। यह कार्रवाई ‘आवश्यक वस्तु अधिनियम’ के तहत की जाएगी। सरकार जरूरत पड़ने पर किसी खास ग्राहक या क्षेत्र को इन नियमों से छूट दे सकती है। यह पाबंदी 90 दिनों के बाद फिर से बढ़ाई जा सकती है। इसका मुख्य उद्देश्य देश भर में तेल की सही और बराबर सप्लाई सुनिश्चित करना है।
कर्नाटक की राजनीति में बड़ा बदलाव….PM मोदी एक माह में दूसरी बार मिले CM विजय

नई दिल्ली। तमिलनाडु (Tamil Nadu) की राजनीति और केंद्र-राज्य संबंधों में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। राज्य के नए मुख्यमंत्री सी जोसेफ विजय (New Chief Minister C. Joseph Vijay) गुरुवार को नई दिल्ली के राष्ट्रपति भवन सांस्कृतिक केंद्र में आयोजित नीति आयोग की 11वीं गवर्निंग काउंसिल की बैठक में शामिल हुए। सीएम विजय का यह कदम पूर्ववर्ती द्रमुक (DMK) सरकार के रुख से बिल्कुल अलग है जो अक्सर केंद्र सरकार के साथ टकराव की नीति अपनाती रही थी। नीति आयोग की इस अहम बैठक के बाद मुख्यमंत्री विजय ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) से अलग से मुलाकात भी की। एक महीने से भी कम समय में प्रधानमंत्री के साथ मुख्यमंत्री की यह दूसरी मुलाकात है। पिछले महीने पदभार संभालने के तुरंत बाद विजय ने 27 मई को दिल्ली जाकर पीएम मोदी से मुलाकात की थी। उस दौरान उन्होंने राज्य की कल्याणकारी और बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के लिए वित्तीय सहायता, प्रमुख विकास पहलों को मंजूरी और संवेदनशील मेकेदातू जल विवाद में केंद्र के हस्तक्षेप की मांग की थी। इसके अलावा उन्होंने केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से मिलकर तमिलनाडु के लिए अधिक बजटीय सहायता का भी अनुरोध किया था। नीति आयोग की बैठक में गूंजा NEET का मुद्दाबैठक में शामिल होने के साथ ही मुख्यमंत्री विजय ने राज्य के हितों से जुड़े मुद्दों पर अपनी बात मजबूती से रखी। उन्होंने चिकित्सा और दंत चिकित्सा पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा NEET का तमिलनाडु की ओर से विरोध दोहराया। विजय ने तर्क दिया कि इस परीक्षा ने ग्रामीण पृष्ठभूमि और सामाजिक-आर्थिक रूप से पिछड़े वर्ग के छात्रों के भविष्य पर बेहद प्रतिकूल प्रभाव डाला है। उन्होंने केंद्र सरकार से आग्रह किया कि तमिलनाडु को एमबीबीएस (MBBS), बीडीएस (BDS) और आयुष (AYUSH) पाठ्यक्रमों में राज्य कोटे की सभी सीटों को केवल कक्षा 12वीं के अंकों के आधार पर भरने की अनुमति दी जाए। तमिलनाडु विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान विजय ने भले ही भाजपा को अपनी पार्टी का वैचारिक दुश्मन बताया था, लेकिन सत्ता संभालने के बाद उनके आचरण में केंद्र के प्रति एक व्यावहारिक और परिपक्व दृष्टिकोण दिखाई दे रहा है। BJP पर हमला करने से परहेजजहां कई विपक्षी नेताओं ने नीट-यूजी परीक्षा विवाद को लेकर सीधे तौर पर भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार को निशाना बनाया, वहीं विजय ने केंद्र पर सीधा हमला करने के बजाय खुद को परीक्षा प्रणाली की कमियों तक ही सीमित रखा। उन्होंने इसे राष्ट्रीय स्तर की परीक्षा प्रणाली में खामियों और संरचनात्मक कमियों का पुख्ता सबूत बताया। इतना ही नहीं, मुख्यमंत्री के रूप में तमिलनाडु विधानसभा में अपने पहले भाषण में भी विजय ने भाजपा या केंद्र सरकार की आलोचना करने से परहेज किया था। स्टालिन के रुख से बिल्कुल जुदाविजय का यह रुख उनके पूर्ववर्ती एमके स्टालिन से बिल्कुल उलट है। स्टालिन ने यह आरोप लगाते हुए लगातार तीन नीति आयोग की बैठकों का बहिष्कार किया था कि केंद्र सरकार द्वारा तमिलनाडु के साथ सौतेला व्यवहार किया जा रहा है।
जेलर 2 में दिखेगा ऋतिक रोशन का धमाकेदार कैमियो, चेन्नई में रजनीकांत के साथ हाई-ऑक्टेन एक्शन सीक्वेंस करेंगे शूट

नई दिल्ली । भारतीय सिनेमा के इतिहास में एक नया अध्याय जुड़ने जा रहा है, क्योंकि देश के सबसे बड़े फिल्म स्टार्स में शुमार रजनीकांत और ऋतिक रोशन लगभग चालीस वर्षों के लंबे अंतराल के बाद एक बार फिर एक साथ बड़े पर्दे पर दस्तक देने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। निर्देशक नेल्सन दिलीप कुमार के निर्देशन में बन रही बहुप्रतीक्षित और ब्लॉकबस्टर फ्रेंचाइजी फिल्म ‘जेलर 2’ में ऋतिक रोशन की एंट्री हो चुकी है। फिल्म उद्योग के गलियारों से आ रही खबरों के मुताबिक, इस फिल्म में ऋतिक एक बेहद प्रभावशाली और महत्वपूर्ण कैमियो भूमिका में दिखाई देंगे, जो फिल्म की कहानी को एक नया मोड़ देने का काम करेगा। इस ऐतिहासिक रीयूनियन की सबसे दिलचस्प बात यह है कि आज से ठीक चालीस साल पहले वर्ष 1986 में रिलीज हुई फिल्म ‘भगवान दादा’ में इन दोनों कलाकारों ने पहली बार एक साथ स्क्रीन साझा की थी। हालांकि, उस समय ऋतिक रोशन महज एक बाल कलाकार थे और उन्होंने अपने पिता राकेश रोशन के निर्माण और नाना जे. ओमप्रकाश के निर्देशन में बनी इस फिल्म में रजनीकांत के बेटे की भूमिका निभाई थी। अब चार दशक बीत जाने के बाद, जब ऋतिक खुद भारतीय सिनेमा के सबसे बड़े और स्थापित सुपरस्टार्स में से एक बन चुके हैं, रजनीकांत के साथ उनका यह दोबारा स्क्रीन साझा करना प्रशंसकों के लिए किसी बड़े उत्सव से कम नहीं है। वैरायटी इंडिया की एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार, मेकर्स और ऋतिक रोशन के बीच पिछले कई हफ्तों से इस विशेष भूमिका को लेकर गहन बातचीत चल रही थी। पटकथा और किरदार की महत्ता को समझने के बाद आखिरकार अभिनेता ने इस प्रोजेक्ट के लिए आधिकारिक तौर पर अपनी सहमति दे दी है। निर्धारित शेड्यूल के अनुसार, ऋतिक रोशन आगामी 22 और 23 जून को चेन्नई में फिल्म की स्टारकास्ट के साथ शामिल होंगे और अपने विशिष्ट दृश्यों की शूटिंग पूरी करेंगे। इस दो दिवसीय शूटिंग शेड्यूल को लेकर चेन्नई में तैयारियां भी शुरू कर दी गई हैं। फिल्म के मुख्य विजुअल्स की शूटिंग शुरू होने से पहले मेकर्स ऋतिक रोशन के साथ कई तरह के लुक टेस्ट आयोजित करने की योजना बना रहे हैं। बताया जा रहा है कि निर्देशक नेल्सन इस फिल्म में ऋतिक रोशन को एक बिल्कुल नए और अनोखे अवतार में पेश करना चाहते हैं, जिसे दर्शकों ने इससे पहले कभी बड़े पर्दे पर नहीं देखा होगा। इस विशेष कैमियो को बहुत बड़े पैमाने पर फिल्माया जाएगा, जिसमें दर्शकों को एक हाई-ऑक्टेन एक्शन सीक्वेंस देखने को मिलेगा, जो पूरी तरह से आधुनिक तकनीक और अंतरराष्ट्रीय स्तर के स्टंट्स से लैस होगा। पटकथा से जुड़े सूत्रों का दावा है कि कहानी के एक बेहद नाजुक और महत्वपूर्ण मोड़ पर ऋतिक रोशन के किरदार की एंट्री होगी। जब फिल्म के मुख्य नायक यानी रजनीकांत का चरित्र एक बेहद कठिन और प्रतिकूल परिस्थिति में फंसा होगा, तब ऋतिक का किरदार संकटमोचक बनकर उभरेगा और कहानी की दिशा बदल देगा। यह दृश्य फिल्म का सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट माना जा रहा है। अभिनेता ऋतिक रोशन के करियर ग्राफ की बात करें तो अगस्त 2025 में प्रदर्शित हुई फिल्म ‘वॉर 2’ के बाद ‘जेलर 2’ उनके करियर का अगला सबसे बड़ा और नया प्रोजेक्ट होने जा रहा है, जिसे लेकर सिनेमाई हलकों में भारी उत्साह है। कुछ समय पहले प्रदर्शित हुई एक डाक्यूमेंट्री सीरीज के दौरान ऋतिक ने रजनीकांत के साथ बचपन में काम करने के अपने अनुभवों को साझा किया था। उन्होंने बताया था कि मात्र दस साल की उम्र में जब वे ‘भगवान दादा’ की शूटिंग कर रहे थे, तो अभिनय के दौरान होने वाली गलतियों का दोष रजनीकांत सहर्ष अपने ऊपर ले लेते थे ताकि एक बच्चे के रूप में उनके मन में कोई हीनभावना या झिझक पैदा न हो। अब जब दोनों कलाकार परिपक्वता के इस दौर में दोबारा एक साथ आ रहे हैं, तो बॉक्स ऑफिस पर एक नया रिकॉर्ड बनने की पूरी उम्मीद जताई जा रही है।