डैनी व्याट के तूफानी शतक से इंग्लैंड की धमाकेदार शुरुआत, श्रीलंका को 87 रन से रौंदा

नई दिल्ली । आईसीसी महिला टी20 विश्व कप 2026 में मेजबान England Women’s Cricket Team ने अपने अभियान की शुरुआत शानदार जीत के साथ की है। बर्मिंघम के Edgbaston Cricket Ground में खेले गए मुकाबले में इंग्लैंड ने श्रीलंका को 87 रन के बड़े अंतर से हराकर टूर्नामेंट में अपने इरादे साफ कर दिए। इस जीत की सबसे बड़ी नायिका रहीं स्टार बल्लेबाज Danni Wyatt-Hodge, जिन्होंने नाबाद शतकीय पारी खेलकर मैच को एकतरफा बना दिया। पहले बल्लेबाजी करते हुए इंग्लैंड ने निर्धारित 20 ओवर में एक विकेट के नुकसान पर 219 रन बनाए। यह स्कोर महिला टी20 विश्व कप के इतिहास का सबसे बड़ा स्कोर भी बन गया। इंग्लैंड की बल्लेबाजों ने शुरुआत से ही आक्रामक रुख अपनाया और श्रीलंकाई गेंदबाजों को दबाव में बनाए रखा। इंग्लैंड को मजबूत शुरुआत दिलाने में Amy Jones और डैनी व्याट की जोड़ी ने अहम भूमिका निभाई। दोनों बल्लेबाजों ने पहले विकेट के लिए 135 रन की शानदार साझेदारी की। एमी जोन्स ने 38 गेंदों पर 53 रन की उपयोगी पारी खेली, जिसमें चार चौके और एक छक्का शामिल रहा। हालांकि मैच की सबसे बड़ी आकर्षण डैनी व्याट की विस्फोटक बल्लेबाजी रही। उन्होंने श्रीलंका के गेंदबाजी आक्रमण की जमकर खबर लेते हुए 62 गेंदों में नाबाद 105 रन बनाए। अपनी पारी में उन्होंने 13 चौके और एक छक्का लगाया। यह पारी न केवल उनके करियर की यादगार पारियों में शामिल हो गई, बल्कि इंग्लैंड को विशाल स्कोर तक पहुंचाने में भी निर्णायक साबित हुई। मध्यक्रम में कप्तान Nat Sciver-Brunt ने भी ताबड़तोड़ बल्लेबाजी का प्रदर्शन किया। उन्होंने केवल 22 गेंदों में नाबाद 46 रन बनाकर श्रीलंकाई गेंदबाजों की मुश्किलें और बढ़ा दीं। अंतिम ओवरों में उनके आक्रामक खेल ने इंग्लैंड को 200 रन के पार पहुंचाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। 220 रन के विशाल लक्ष्य का पीछा करने उतरी Sri Lanka Women’s Cricket Team की शुरुआत बेहद खराब रही। कप्तान Chamari Athapaththu केवल 4 रन बनाकर पवेलियन लौट गईं। इसके बाद नियमित अंतराल पर विकेट गिरते रहे और टीम कभी भी लक्ष्य के करीब पहुंचती नजर नहीं आई। श्रीलंका की ओर से Nilakshi de Silva ने सबसे अधिक 39 रन बनाए, जबकि Harshitha Samarawickrama ने 29 रन का योगदान दिया। हालांकि अन्य बल्लेबाज बड़ी साझेदारी करने में नाकाम रहीं। गेंदबाजी में इंग्लैंड की ओर से Freya Kemp ने शानदार प्रदर्शन करते हुए चार विकेट झटके। वहीं Sophie Ecclestone और Charlie Dean ने दो-दो विकेट हासिल किए। इस शानदार गेंदबाजी प्रदर्शन के दम पर श्रीलंका की पूरी टीम 132 रन पर सिमट गई। इस जीत के साथ इंग्लैंड ने टूर्नामेंट में मजबूत शुरुआत की है और खिताब की दावेदारी को भी मजबूती से पेश किया है। वहीं श्रीलंका को अगले मुकाबलों में वापसी के लिए अपनी बल्लेबाजी और गेंदबाजी दोनों विभागों में सुधार करना होगा।
Android 17 QPR1 Beta 4 रिलीज, कैमरा से कनेक्टिविटी तक कई बड़ी समस्याएं हुईं दूर; Pixel यूजर्स को मिलेगा ज्यादा स्मूद अनुभव

नई दिल्ली । गूगल ने अपने एंड्रॉयड बीटा प्रोग्राम से जुड़े पिक्सल स्मार्टफोन उपयोगकर्ताओं के लिए Android 17 QPR1 Beta 4 अपडेट जारी कर दिया है। यह अपडेट किसी बड़े नए फीचर की बजाय सिस्टम की स्थिरता बढ़ाने, पुराने तकनीकी दोषों को दूर करने और समग्र उपयोगकर्ता अनुभव को बेहतर बनाने पर केंद्रित है। कंपनी का मानना है कि आगामी फीचर ड्रॉप और सार्वजनिक रिलीज से पहले यह संस्करण प्लेटफॉर्म को अधिक भरोसेमंद और परिपक्व बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। एंड्रॉयड इकोसिस्टम में क्वार्टरली प्लेटफॉर्म रिलीज यानी QPR अपडेट्स की विशेष भूमिका होती है। इनके माध्यम से गूगल नए सुधारों और संभावित फीचर्स का परीक्षण करता है, ताकि अंतिम संस्करण आम उपभोक्ताओं तक अधिक स्थिर रूप में पहुंच सके। Android 17 QPR1 Beta 4 भी इसी प्रक्रिया का हिस्सा है और इसे विशेष रूप से उन कमियों को दूर करने के लिए तैयार किया गया है जिनकी शिकायतें बीटा परीक्षण के दौरान सामने आई थीं। नए अपडेट का सबसे बड़ा फोकस सिस्टम परफॉर्मेंस और विश्वसनीयता पर रहा है। कई उपयोगकर्ताओं को बाहरी डिस्प्ले का उपयोग करते समय माउस पॉइंटर गायब होने की समस्या का सामना करना पड़ रहा था, विशेष रूप से तब जब वे वर्क प्रोफाइल या अतिरिक्त सुरक्षा वाले एप्लिकेशन का उपयोग करते थे। इस तकनीकी समस्या को अब ठीक कर दिया गया है, जिससे प्रोफेशनल और एंटरप्राइज उपयोगकर्ताओं को अधिक सहज अनुभव मिलने की उम्मीद है। गूगल ने प्राइवेट स्पेस से जुड़ी एक महत्वपूर्ण समस्या का भी समाधान किया है। कुछ परिस्थितियों में क्रेडेंशियल प्रोवाइडर सेटिंग्स खोलते समय सेटिंग्स एप्लिकेशन अचानक बंद हो जाता था। यह समस्या सुरक्षा और अकाउंट प्रबंधन से जुड़े उपयोगकर्ताओं के लिए परेशानी का कारण बन रही थी। नए अपडेट में इस बग को पूरी तरह दूर करने का दावा किया गया है। कैमरा प्रदर्शन में भी उल्लेखनीय सुधार किए गए हैं। कई पिक्सल उपयोगकर्ताओं ने 5x जूम पर वीडियो रिकॉर्डिंग के दौरान फ्रेम जंप और रिकॉर्डिंग में झटके महसूस होने की शिकायत की थी। यह समस्या वीडियो क्वालिटी को प्रभावित कर रही थी। Android 17 QPR1 Beta 4 में इस कमी को ठीक कर कैमरा अनुभव को अधिक स्थिर और पेशेवर बनाने का प्रयास किया गया है। इसके साथ ही बैक टैप जेस्चर से जुड़ी दिक्कतों का भी समाधान किया गया है, जिससे डिवाइस के शॉर्टकट फीचर्स पहले की तुलना में बेहतर ढंग से काम करेंगे। कनेक्टिविटी के क्षेत्र में भी कई महत्वपूर्ण सुधार शामिल किए गए हैं। वायरलेस एडीबी और लोकल नेटवर्क आधारित एप्लिकेशनों में आने वाली कनेक्शन संबंधी समस्याओं को दूर किया गया है। इससे डेवलपर्स और तकनीकी उपयोगकर्ताओं को अधिक विश्वसनीय नेटवर्क अनुभव मिलने की संभावना है। साथ ही कुछ उपकरणों में रीस्टार्ट के बाद होम स्क्रीन विजेट्स गायब हो जाने की शिकायतें भी सामने आई थीं, जिन्हें इस अपडेट के माध्यम से ठीक कर दिया गया है। यह अपडेट हाल के अधिकांश पिक्सल स्मार्टफोन्स के लिए उपलब्ध कराया गया है। हालांकि पिक्सल 6 सीरीज को फिलहाल इस रिलीज में शामिल नहीं किया गया है। कंपनी ने संकेत दिया है कि भविष्य के किसी बीटा संस्करण में इस सीरीज के लिए भी सपोर्ट उपलब्ध कराया जा सकता है। अलग-अलग पिक्सल मॉडल्स के लिए अलग बिल्ड नंबर जारी किए गए हैं, ताकि डिवाइस के अनुसार अनुकूलित सुधार प्रदान किए जा सकें। तकनीकी विशेषज्ञों का मानना है कि Android 17 QPR1 Beta 4 भले ही फीचर आधारित बड़ा अपडेट न हो, लेकिन यह प्लेटफॉर्म की गुणवत्ता और स्थिरता को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। आने वाले महीनों में एंड्रॉयड 17 के व्यापक रोलआउट से पहले यह अपडेट उपयोगकर्ताओं को अधिक भरोसेमंद, सुरक्षित और सहज अनुभव प्रदान करने में मदद करेगा।
तेरहवीं की तैयारियों के बीच परिवार पर टूटा दूसरा दुख, तालाब में मिला 25 वर्षीय युवक का शव

मध्य प्रदेश । मध्य प्रदेश के Rewa जिले में शनिवार को एक दर्दनाक घटना सामने आई, जहां एक 25 वर्षीय युवक का शव तालाब में मिलने से पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई। मृतक की पहचान सागर अग्निहोत्री के रूप में हुई है, जो गुढ़ थाना क्षेत्र के दुआरी गांव का निवासी था और शुक्रवार से अपने घर से लापता बताया जा रहा था। घटना मनिकवार चौकी क्षेत्र के अमिलिहा गांव की है। स्थानीय लोगों ने शनिवार दोपहर तालाब में एक शव उतराता हुआ देखा, जिसके बाद तत्काल पुलिस को सूचना दी गई। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और ग्रामीणों की मदद से शव को तालाब से बाहर निकलवाया। बाद में परिजनों को बुलाकर शव की पहचान कराई गई, जहां मृतक की पहचान सागर अग्निहोत्री के रूप में हुई। सागर की मौत की खबर मिलते ही परिवार में कोहराम मच गया। परिजनों के अनुसार परिवार पहले से ही एक अन्य सदस्य के निधन के कारण शोक में था। शनिवार को घर में तेरहवीं का कार्यक्रम आयोजित होना था और उसकी तैयारियां चल रही थीं। इसी बीच सागर के शव मिलने की सूचना ने पूरे परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया। एक ही परिवार में कम समय के भीतर दूसरी दुखद घटना होने से गांव में भी शोक का माहौल बन गया है। पुलिस के अनुसार सागर शुक्रवार से घर से लापता था। परिजन उसकी तलाश में जुटे हुए थे और रिश्तेदारों तथा परिचितों से भी संपर्क किया जा रहा था। इसी दौरान शनिवार दोपहर अमिलिहा गांव के तालाब में शव मिलने की सूचना सामने आई। सूचना मिलने पर पुलिस ने तत्काल मौके पर पहुंचकर जांच शुरू की। मौके पर पंचनामा कार्रवाई पूरी करने के बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि अभी मौत के कारणों को लेकर कोई निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी। मामले की जांच सभी पहलुओं को ध्यान में रखकर की जा रही है। Shail Yadav ने बताया कि युवक के लापता होने और शव मिलने की परिस्थितियों की जांच की जा रही है। पुलिस ने मर्ग कायम कर लिया है तथा पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है। रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि युवक की मौत किन परिस्थितियों में हुई। पुलिस का कहना है कि प्रारंभिक जांच में किसी भी संभावना को नजरअंदाज नहीं किया जा रहा है। परिजनों और स्थानीय लोगों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं तथा युवक के अंतिम समय की गतिविधियों की जानकारी भी जुटाई जा रही है। जांच पूरी होने और चिकित्सकीय रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद ही मामले में आगे की वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल सागर अग्निहोत्री की असमय मौत से दुआरी और आसपास के गांवों में शोक का माहौल है। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है और हर कोई इस घटना के पीछे की सच्चाई सामने आने का इंतजार कर रहा है।
AI ‘जेलब्रेक’ के खतरे पर सख्त हुआ अमेरिका, Anthropic के एडवांस मॉडल्स बंद, वैश्विक तकनीकी उद्योग में नई बहस शुरू

नई दिल्ली । आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के तेजी से विकसित होते क्षेत्र में एक नया मोड़ तब सामने आया जब अमेरिकी AI कंपनी Anthropic ने अपने सबसे उन्नत AI मॉडल्स की पहुंच अचानक सीमित करने का फैसला लिया। कंपनी का यह कदम अमेरिकी सरकार के उस निर्देश के बाद सामने आया है, जिसमें राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी आशंकाओं का हवाला देते हुए विदेशी नागरिकों के लिए कुछ अत्याधुनिक AI सिस्टम्स के उपयोग पर रोक लगाने को कहा गया। इस फैसले ने वैश्विक तकनीकी उद्योग, नीति निर्माताओं और AI विशेषज्ञों के बीच नई चर्चा शुरू कर दी है। कंपनी ने बताया कि उसे अमेरिकी अधिकारियों की ओर से निर्यात नियंत्रण संबंधी निर्देश प्राप्त हुए हैं, जिनके तहत उसके दो प्रमुख AI मॉडल्स की उपलब्धता विदेशी उपयोगकर्ताओं के लिए सीमित करनी पड़ी। हालांकि सरकार की ओर से सार्वजनिक रूप से सुरक्षा चिंताओं का विस्तृत विवरण साझा नहीं किया गया है, लेकिन माना जा रहा है कि इन मॉडल्स की क्षमताओं के दुरुपयोग की संभावना को लेकर चिंता व्यक्त की गई थी। इस पूरे मामले का केंद्र तथाकथित “जेलब्रेक” तकनीक को माना जा रहा है। तकनीकी भाषा में जेलब्रेक का अर्थ उन तरीकों से है जिनके माध्यम से किसी AI मॉडल के सुरक्षा प्रतिबंधों और नियंत्रण प्रणालियों को दरकिनार करने का प्रयास किया जाता है। अमेरिकी अधिकारियों को आशंका है कि अत्यधिक सक्षम AI मॉडल्स का उपयोग साइबर सुरक्षा कमजोरियों की पहचान या अन्य संवेदनशील गतिविधियों के लिए किया जा सकता है। इसी संभावना के आधार पर सरकार ने एहतियाती रुख अपनाया है। Anthropic ने अपने आधिकारिक रुख में कहा है कि उसे उपलब्ध कराए गए संकेत सीमित और संभावित जोखिमों पर आधारित हैं। कंपनी का मानना है कि किसी एक संभावित सुरक्षा कमजोरी के आधार पर व्यापक रूप से उपयोग किए जा रहे कमर्शियल AI मॉडल्स की पहुंच रोकना संतुलित नियामकीय दृष्टिकोण नहीं माना जा सकता। कंपनी ने यह भी स्पष्ट किया कि वह जिम्मेदार AI विकास और सुरक्षा मानकों के पक्ष में है, लेकिन नियमन तथ्यों और पारदर्शी प्रक्रियाओं पर आधारित होना चाहिए। यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब अमेरिका में AI तकनीकों को लेकर निगरानी और नियंत्रण की मांग लगातार बढ़ रही है। पिछले कुछ वर्षों में अमेरिकी प्रशासन का ध्यान मुख्य रूप से उन सेमीकंडक्टर चिप्स, हार्डवेयर और तकनीकी संसाधनों पर केंद्रित रहा है जो AI सिस्टम्स को संचालित करते हैं। हालांकि अब पहली बार AI मॉडल्स तक पहुंच को लेकर भी सख्त दृष्टिकोण देखने को मिल रहा है, जिससे यह संकेत मिलता है कि भविष्य में AI निर्यात नियंत्रण और अधिक व्यापक हो सकते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह घटनाक्रम केवल एक कंपनी या दो मॉडल्स तक सीमित नहीं है, बल्कि यह AI शासन व्यवस्था के बदलते स्वरूप का संकेत है। दुनिया भर की सरकारें यह तय करने की कोशिश कर रही हैं कि अत्यधिक सक्षम AI प्रणालियों के विकास और उपयोग को किस प्रकार नियंत्रित किया जाए ताकि नवाचार और सुरक्षा के बीच संतुलन बना रहे। दूसरी ओर तकनीकी कंपनियां यह सुनिश्चित करना चाहती हैं कि अत्यधिक प्रतिबंध अनुसंधान और व्यावसायिक विकास की गति को प्रभावित न करें। फिलहाल Anthropic और अमेरिकी प्रशासन के बीच इस मुद्दे पर मतभेद स्पष्ट दिखाई दे रहे हैं। आने वाले समय में यह मामला AI उद्योग के लिए एक महत्वपूर्ण उदाहरण बन सकता है, क्योंकि इससे यह तय होगा कि राष्ट्रीय सुरक्षा, तकनीकी स्वतंत्रता और वैश्विक डिजिटल प्रतिस्पर्धा के बीच संतुलन किस प्रकार स्थापित किया जाएगा। AI नियमन को लेकर चल रही यह बहस आने वाले वर्षों में वैश्विक तकनीकी नीति को प्रभावित कर सकती है।
महंगे होते स्मार्टफोन से बाजार में सुस्ती, मई में बिक्री 35 प्रतिशत तक घटी; लगातार बढ़ती कीमतों ने घटाई ग्राहकों की खरीदारी

नई दिल्ली । देश के स्मार्टफोन बाजार में मांग में नरमी के संकेत लगातार मजबूत होते दिखाई दे रहे हैं। मोबाइल फोन की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी का असर अब बिक्री के आंकड़ों पर स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगा है। मई महीने में मोबाइल फोन की बिक्री में सालाना आधार पर 30 से 35 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई है, जिसे उद्योग जगत हाल के वर्षों की सबसे बड़ी गिरावटों में से एक मान रहा है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि उत्पादन लागत बढ़ने और उसके बोझ को उपभोक्ताओं पर स्थानांतरित किए जाने के कारण खरीदारी की रफ्तार प्रभावित हुई है। मोबाइल उद्योग से जुड़े कारोबारियों के अनुसार पिछले कई महीनों से स्मार्टफोन कंपनियां अपने उत्पादों की कीमतों में लगातार वृद्धि कर रही हैं। विशेष रूप से मेमरी चिप और अन्य इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स की लागत बढ़ने के बाद कंपनियों ने नवंबर 2025 से कीमतों में नियमित संशोधन शुरू किया था। इसका सीधा असर उपभोक्ताओं की खरीद क्षमता और खरीदारी के निर्णयों पर पड़ा है। बाजार में फिलहाल ऑफलाइन बिक्री की हिस्सेदारी लगभग 60 प्रतिशत बनी हुई है, जबकि शेष बिक्री ऑनलाइन माध्यमों से होती है। हालांकि मौजूदा परिस्थितियों में दोनों ही चैनलों पर मांग कमजोर हुई है। खुदरा विक्रेताओं का कहना है कि ग्राहक अब नए स्मार्टफोन खरीदने के फैसले को टाल रहे हैं या कम कीमत वाले विकल्पों की ओर रुख कर रहे हैं। इससे प्रीमियम और मिड-रेंज दोनों श्रेणियों की बिक्री प्रभावित हुई है। उद्योग के आंकड़े बताते हैं कि मई महीने के दौरान स्मार्टफोन शिपमेंट में भी उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई। यह गिरावट केवल बिक्री तक सीमित नहीं रही, बल्कि कंपनियों की सप्लाई चेन और वितरण रणनीतियों पर भी असर डाल रही है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि जून महीने में भी इसी प्रकार का दबाव बना रह सकता है, क्योंकि कई कंपनियों ने इस अवधि में भी कीमतों में वृद्धि जारी रखी है। वर्ष 2026 की पहली तिमाही में स्मार्टफोन शिपमेंट में गिरावट अपेक्षाकृत सीमित रही थी, लेकिन दूसरी तिमाही में बाजार की स्थिति तेजी से बदली है। अब उद्योग को उम्मीद है कि दूसरी तिमाही के दौरान शिपमेंट में 15 प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज हो सकती है। यह संकेत देता है कि मूल्य वृद्धि का असर अब व्यापक स्तर पर महसूस किया जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि जनवरी से मई के बीच स्मार्टफोन की औसत कीमत में लगभग 20 प्रतिशत तक की वृद्धि हुई है। यदि पिछले वर्ष की बढ़ोतरी को भी शामिल किया जाए तो कुछ मॉडलों में कुल मूल्य वृद्धि 40 से 45 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है। ऐसे में उपभोक्ताओं के लिए नया स्मार्टफोन खरीदना पहले की तुलना में कहीं अधिक महंगा हो गया है। दूसरी ओर खुदरा विक्रेता भी दबाव महसूस कर रहे हैं। कई कंपनियां कीमतें बढ़ाने के साथ-साथ रिटेल मार्जिन में भी कटौती कर रही हैं। इससे कारोबारियों की लाभप्रदता प्रभावित हो रही है। उद्योग जगत का मानना है कि यदि कीमतों में बढ़ोतरी का सिलसिला जारी रहा तो आने वाले महीनों में मांग और कमजोर हो सकती है। बाजार विश्लेषकों के अनुसार आगामी त्योहारी सीजन स्मार्टफोन उद्योग के लिए महत्वपूर्ण साबित होगा। यदि कंपनियां आकर्षक ऑफर, वित्तीय योजनाएं और प्रतिस्पर्धी मूल्य रणनीति अपनाती हैं तो मांग में कुछ सुधार संभव है। फिलहाल बढ़ती लागत और कमजोर उपभोक्ता मांग के बीच स्मार्टफोन उद्योग चुनौतीपूर्ण दौर से गुजर रहा है।
महंगी होंगी टाटा की पेट्रोल, डीजल और इलेक्ट्रिक गाड़ियां, बढ़ती लागत के बीच कंपनी ने किया बड़ा ऐलान

नई दिल्ली । देश के ऑटोमोबाइल बाजार में एक बार फिर कीमतों में बढ़ोतरी का दौर देखने को मिलने वाला है। प्रमुख वाहन निर्माता टाटा मोटर्स ने अपने यात्री वाहनों की कीमतों में वृद्धि करने का निर्णय लिया है, जो आगामी 1 जुलाई से प्रभावी होगी। कंपनी के इस फैसले का असर उसके पेट्रोल, डीजल और इलेक्ट्रिक वाहनों की पूरी रेंज पर पड़ने की संभावना है। बढ़ती उत्पादन लागत और कच्चे माल की कीमतों में लगातार हो रही वृद्धि को इस कदम का प्रमुख कारण माना जा रहा है। कंपनी द्वारा घोषित नई मूल्य वृद्धि के तहत विभिन्न मॉडलों और वैरिएंट्स की कीमतों में अधिकतम 1.5 प्रतिशत तक का इजाफा किया जाएगा। मौजूदा कीमतों को देखते हुए यह बढ़ोतरी लगभग 10 हजार रुपये से लेकर 30 हजार रुपये तक हो सकती है। हालांकि अंतिम प्रभाव वाहन के मॉडल, वैरिएंट और कीमत के आधार पर अलग-अलग होगा। ऑटोमोबाइल उद्योग पिछले कुछ समय से लागत संबंधी चुनौतियों का सामना कर रहा है। स्टील, एल्युमिनियम, प्लास्टिक, इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स और अन्य कच्चे माल की कीमतों में उतार-चढ़ाव के कारण वाहन निर्माताओं पर अतिरिक्त वित्तीय दबाव बना हुआ है। इसके साथ ही ऊर्जा लागत, लॉजिस्टिक्स खर्च और विनिर्माण प्रक्रियाओं पर बढ़ते खर्च ने भी कंपनियों की लागत संरचना को प्रभावित किया है। विशेषज्ञों का मानना है कि पहले वाहन निर्माता आमतौर पर वर्ष की शुरुआत में एकमुश्त कीमतों में संशोधन करते थे, लेकिन अब कंपनियां चरणबद्ध तरीके से कीमतें बढ़ाने की रणनीति अपना रही हैं। इससे ग्राहकों पर अचानक बड़ा बोझ नहीं पड़ता और कंपनियों को भी लागत वृद्धि की भरपाई करने में सुविधा मिलती है। इसी रणनीति के तहत कई वाहन निर्माता इस वर्ष अलग-अलग समय पर कीमतों में संशोधन कर चुके हैं। टाटा मोटर्स ने इससे पहले भी वर्ष के शुरुआती महीनों में अपने कुछ वाहनों की कीमतों में वृद्धि की थी। अब तीन महीने के भीतर दूसरी बार मूल्य संशोधन का फैसला यह संकेत देता है कि उद्योग पर लागत संबंधी दबाव अभी भी बना हुआ है। कंपनी का मानना है कि बढ़ते खर्चों के बीच व्यवसाय की स्थिरता बनाए रखने के लिए मूल्य वृद्धि आवश्यक हो गई है। सिर्फ टाटा मोटर्स ही नहीं, बल्कि देश की अन्य प्रमुख वाहन कंपनियां भी इसी राह पर आगे बढ़ रही हैं। विभिन्न निर्माता उत्पादन लागत और बाजार परिस्थितियों के अनुरूप अपने वाहनों की कीमतों में समय-समय पर बदलाव कर रहे हैं। इससे स्पष्ट है कि ऑटो उद्योग वर्तमान समय में लागत प्रबंधन और प्रतिस्पर्धा के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रहा है। विशेष रूप से इलेक्ट्रिक वाहन क्षेत्र में भी लागत दबाव महसूस किया जा रहा है। बैटरी, सेमीकंडक्टर और अन्य तकनीकी उपकरणों की कीमतों में बदलाव का असर वाहन निर्माताओं की लागत पर पड़ रहा है। ऐसे में कंपनियां मूल्य निर्धारण की रणनीति को लगातार अपडेट कर रही हैं ताकि लाभप्रदता और बाजार हिस्सेदारी दोनों को बनाए रखा जा सके। उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि आगामी महीनों में यदि कच्चे माल और ऊर्जा लागत में स्थिरता नहीं आती है तो वाहन कंपनियां आगे भी सीमित स्तर पर कीमतों में संशोधन कर सकती हैं। ऐसे में वाहन खरीदने की योजना बना रहे ग्राहकों के लिए वर्तमान कीमतों पर खरीदारी का अवसर महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
फीफा का नया मॉडल: खेल, दर्शक और बढ़ता व्यावसायीकरण..

फीफा द्वारा आयोजित 23वें फुटबॉल विश्व कप की शुरुआत हो गई है। इस बार 39 दिन चलने वाले इस टूर्नामेंट की सबसे गौर करने वाली बात यही है कि यह अपने सर्जक जूल्स रिमेट द्वारा प्रतिपादित मूल मूल्यों से कितना भटक गया है। पहला विश्व कप 1930 में उरुग्वे में खेला गया था। उस समय फीफा अध्यक्ष ने विश्व कप को श्रमिक वर्ग के खिलाड़ियों के लिए एक पेशेवर मंच बनाकर इसे सार्वभौमिक एकजुटता और शांति को बढ़ावा देने के साधन के रूप में देखा था। हालांकि 18 कैरट सोने की ट्रॉफी के लिए प्रतिस्पर्धा कर रहे 1,248 फुटबॉलर अभी भी साधारण पृष्ठभूमि से आते हैं, लेकिन यह कहना उचित होगा कि खेल संस्था के नियंत्रण से बाहर के कारणों से वैश्विक शांति हासिल करना असंभव हो गया है। इससे भी अधिक चिंताजनक बात यह है कि फीफा द्वारा इस टूर्नामेंट से अधिकतम राजस्व प्राप्त करने के लिए आक्रामक रूप से किए जा रहे प्रयासों से सार्वभौमिक मूल्यों का क्षरण हो रहा है, जो अब उसका सबसे बड़ा आय का स्रोत बन गया है। वर्ष 2010 से यही चलन रहा है। उस साल फीफा ने मेजबान देश के साथ प्रसारण अधिकार, प्रायोजन, टिकट और व्यापारिक वस्तुओं से होने वाली आय साझा करना बंद कर दिया था। इस कदम से खेल संस्था उन देशों से मेजबानी के प्रस्ताव स्वीकार करने लगी जो स्टेडियम और संबंधित बुनियादी ढांचे के निर्माण का भारी खर्च उठा सकते थे, न कि उन देशों से जिनकी फुटबॉल में मजबूत साख थी। व्लादीमिर पुतिन द्वारा क्राइमिया पर आक्रमण के चार साल बाद 2018 के टूर्नामेंट का आयोजन रूस को दिया जाना फीफा की अनैतिकता का पहला संकेत था। वर्ष 2022 में कतर का चयन व्यापक रूप से वोट खरीदने और धांधली का परिणाम था। वह एक ऐसा देश है जिसकी फुटबॉल में कोई साख नहीं है और लोकतांत्रिक साख तो उससे भी कम है। हालांकि नवीनतम त्रिपक्षीय आयोजन तीन लोकतांत्रिक देशों-अमेरिका, कनाडा और मेक्सिको-में आयोजित किया जा रहा है लेकिन यह रिमेट की उम्मीदों से बिल्कुल परे है। सबसे पहले, जिस देश में सबसे अधिक मैच (कुल 104 में से 78) आयोजित होंगे, वह ईरान के खिलाफ युद्ध छेड़े हुए है, ग्रीनहाउस गैसों का दूसरा सबसे बड़ा उत्सर्जक है, और एक हानिकारक आप्रवासन-विरोधी नीति का पालन करता है। अमेरिका के राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप को एक विशेष शांति पुरस्कार से सम्मानित करने के बाद, फीफा ने मेजबान देश के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए अमेरिका में होने वाले विश्व कप मैचों के लिए ईरानी प्रशंसकों के टिकट आवंटन रद्द कर दिए हैं। ईरानी टीम को अपने प्रतिनिधिमंडल के कई सदस्यों, जिनमें फुटबॉल महासंघ के प्रमुख भी शामिल थे, को वीजा नहीं मिलने के बाद अमेरिका से मेक्सिको में अपना ठिकाना बदलना पड़ा। एक सोमाली रेफरी को 11 घंटे की पूछताछ के बाद मियामी से वापस भेज दिया गया। कई गैर-श्वेत देशों के प्रशंसकों को दुनिया के सबसे शक्तिशाली देश से इसी तरह के व्यवहार की उम्मीद है। अन्य लोग आईसीई एजेंटों द्वारा मनमानी गिरफ्तारी के डर से दूर रह रहे हैं। टिकटों की कीमतें भी कम चौंकाने वाली नहीं हैं। ग्रुप स्टेज के टिकट न केवल चार साल पहले कतर में टिकटों की कीमतों से दोगुने महंगे हैं, बल्कि फीफा वेबसाइट पर गतिशील दाम वाले टिकट और द्वितीयक मूल्य निर्धारण सुविधाओं की शुरुआत ने टिकटों की कीमतों को आसमान छूने लायक बना दिया है, जिससे आम प्रशंसक के लिए टिकट खरीदना लगभग नामुमकिन हो गया है। फाइनल के टिकट की कीमत 7,500 डॉलर से अधिक है, जो 2022 के फाइनल की कीमत से चार गुना से भी अधिक है। तुलनात्मक रूप से देखा जाए तो बहुचर्चित इंगलिश प्रीमियर लीग (19 मैच) के एक सीजन टिकट की कीमत 900 डॉलर है और लोकप्रिय यूएफा चैंपियंस लीग के द्वितीयक बिक्री पर एक टिकट की कीमत 348 डॉलर है। अंततः, फीफा दशकों से खेल को नई ऊंचाइयों पर ले जाने वाले वास्तविक मेहनतकश प्रशंसकों को नाराज करके खुद ही अपना नुकसान करने का जोखिम उठा रहा है।
भारत और केन्या ने मजबूत आर्थिक सहयोग का खाका तैयार किया, व्यापार, कृषि और ऊर्जा क्षेत्र पर विशेष फोकस

नई दिल्ली । भारत और केन्या के बीच आर्थिक, व्यापारिक और विकास सहयोग को नई दिशा देने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल देखने को मिली है। दोनों देशों के प्रतिनिधियों के बीच हालिया बैठकों में कृषि, स्वास्थ्य, शिक्षा, खेल, ऊर्जा और निवेश जैसे प्रमुख क्षेत्रों में साझेदारी को और मजबूत बनाने पर व्यापक चर्चा की गई। इस दौरान भविष्य में सहयोग के नए अवसरों की पहचान करने और निवेश को बढ़ावा देने पर विशेष जोर दिया गया। भारत और केन्या के बीच लंबे समय से मजबूत राजनयिक और आर्थिक संबंध रहे हैं। हाल के संवादों में दोनों देशों ने इस संबंध को और व्यापक बनाने की आवश्यकता पर बल दिया। विशेष रूप से कृषि और कृषि-प्रसंस्करण क्षेत्र को सहयोग का प्रमुख आधार माना गया, जहां भारतीय तकनीक, विशेषज्ञता और निवेश के माध्यम से स्थानीय उत्पादन क्षमता को बढ़ाने की संभावनाओं पर विचार किया गया। स्वास्थ्य क्षेत्र भी चर्चा का एक महत्वपूर्ण हिस्सा रहा। दोनों पक्षों ने गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बढ़ाने, चिकित्सा अवसंरचना के विकास और स्वास्थ्य तकनीकों के आदान-प्रदान की संभावनाओं पर विचार किया। भारतीय स्वास्थ्य क्षेत्र की विशेषज्ञता और दवा उद्योग की वैश्विक पहचान को देखते हुए इस क्षेत्र में सहयोग की संभावनाएं काफी व्यापक मानी जा रही हैं। शिक्षा और कौशल विकास के क्षेत्र में भी दोनों देशों ने साझेदारी को आगे बढ़ाने की इच्छा व्यक्त की। आधुनिक शिक्षा, तकनीकी प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण कार्यक्रमों के माध्यम से युवाओं को बेहतर अवसर उपलब्ध कराने पर जोर दिया गया। दोनों देशों का मानना है कि मानव संसाधन विकास भविष्य की आर्थिक प्रगति का महत्वपूर्ण आधार बन सकता है। खेल क्षेत्र में भी सहयोग की संभावनाओं पर चर्चा हुई। खेल प्रशिक्षण, खेल अवसंरचना और प्रतिभा विकास कार्यक्रमों के माध्यम से दोनों देशों के बीच अनुभवों और संसाधनों के आदान-प्रदान की संभावनाएं तलाशने पर सहमति बनी। इससे युवाओं के लिए नए अवसर तैयार हो सकते हैं और खेल संबंधों को भी मजबूती मिल सकती है। इस बीच, दोनों देशों के बीच व्यापार और निवेश संबंधों को और अधिक सुदृढ़ बनाने के प्रयास भी जारी हैं। व्यापारिक बैठकों के दौरान बाजार पहुंच को बेहतर बनाने, व्यापारिक बाधाओं को कम करने और द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ाने के उपायों पर विस्तार से चर्चा की गई। दोनों पक्षों ने इस बात पर सहमति जताई कि आर्थिक संबंधों को अधिक संतुलित, विविधतापूर्ण और भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप विकसित किया जाना चाहिए। ऊर्जा क्षेत्र, विशेष रूप से नवीकरणीय ऊर्जा, सहयोग के प्रमुख क्षेत्रों में शामिल रहा। स्वच्छ ऊर्जा परियोजनाओं, तकनीकी सहयोग और निवेश के माध्यम से सतत विकास को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया। इसके अलावा डिजिटल अवसंरचना, फिनटेक, लॉजिस्टिक्स, विनिर्माण और बुनियादी ढांचा विकास जैसे क्षेत्रों को भी भविष्य की साझेदारी के महत्वपूर्ण स्तंभों के रूप में देखा जा रहा है। दोनों देशों ने व्यापार को सुगम बनाने और संस्थागत सहयोग को मजबूत करने की दिशा में भी सकारात्मक कदम उठाए हैं। सीमा शुल्क और व्यापारिक सूचनाओं के आदान-प्रदान से जुड़े समझौतों को द्विपक्षीय व्यापार की पारदर्शिता और दक्षता बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत और केन्या के बीच बढ़ता सहयोग न केवल दोनों देशों की अर्थव्यवस्थाओं को लाभ पहुंचाएगा, बल्कि अफ्रीका और एशिया के बीच आर्थिक संपर्क को भी नई मजबूती देगा। आने वाले वर्षों में निवेश, व्यापार और विकास साझेदारी के क्षेत्र में दोनों देशों के संबंध और अधिक गहरे होने की संभावना है।
रीवा में तेज रफ्तार कार का कहर, गाय को कुचलने के बाद बाइक सवार छात्रों को मारी टक्कर; मकान में घुसी कार

मध्य प्रदेश । मध्य प्रदेश के Rewa जिले में शनिवार तड़के एक भीषण सड़क हादसे ने इलाके में सनसनी फैला दी। रीवा-सीधी मार्ग पर महसांव रेडियो स्टेशन के पास तेज रफ्तार कार अनियंत्रित होकर पहले एक गाय को कुचलते हुए आगे बढ़ी, फिर सामने से आ रही बाइक को टक्कर मार दी। इसके बाद भी कार नहीं रुकी और सड़क किनारे स्थित एक मकान की दीवार तोड़ते हुए अंदर जा घुसी। हादसे में गाय की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि बाइक सवार दो छात्र गंभीर रूप से घायल हो गए हैं। जानकारी के अनुसार घटना शनिवार सुबह करीब तीन बजे की है। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि कार अत्यधिक गति से चल रही थी और चालक अचानक वाहन पर नियंत्रण खो बैठा। सड़क किनारे खड़ी गाय को टक्कर मारने के बाद कार सीधे सामने से आ रही बाइक से जा भिड़ी। टक्कर इतनी तेज थी कि बाइक बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई और उस पर सवार दोनों युवक सड़क पर दूर जा गिरे। स्थानीय लोगों के अनुसार घायल दोनों छात्र सीधी की ओर जा रहे थे। दुर्घटना के तुरंत बाद आसपास के लोगों ने पुलिस और आपातकालीन सेवाओं को सूचना दी। मौके पर पहुंची पुलिस ने घायलों को तत्काल अस्पताल पहुंचाया। दोनों छात्रों को उपचार के लिए Sanjay Gandhi Memorial Hospital में भर्ती कराया गया है, जहां उनका इलाज जारी है। चिकित्सकों के अनुसार दोनों की हालत गंभीर बनी हुई है। हादसे का सबसे भयावह पहलू यह रहा कि बाइक को टक्कर मारने के बाद भी कार नहीं रुकी। अनियंत्रित वाहन सड़क किनारे बने दिनेश केवट के मकान में जा घुसा। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि मकान की एक दीवार पूरी तरह ढह गई। दीवार गिरने से घर में खड़ा ई-रिक्शा भी क्षतिग्रस्त हो गया। घटना के समय मकान के भीतर परिवार के सदस्य सो रहे थे। अचानक हुए जोरदार धमाके से सभी की नींद खुल गई। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि कार कुछ और अंदर तक घुस जाती तो बड़ा हादसा हो सकता था। सौभाग्य से परिवार के किसी सदस्य को शारीरिक चोट नहीं आई और सभी सुरक्षित बच गए। तड़के हुए हादसे के बाद इलाके में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। जोरदार आवाज सुनकर आसपास के ग्रामीण मौके पर पहुंच गए और राहत कार्य में मदद की। लोगों ने घायलों को अस्पताल पहुंचाने और सड़क पर यातायात सामान्य कराने में भी सहयोग किया। सूचना मिलने पर Gudh Police Station और डायल-112 की टीम मौके पर पहुंची। पुलिस ने दुर्घटनाग्रस्त कार को जब्त कर लिया है। प्रारंभिक जांच के आधार पर चालक के खिलाफ लापरवाहीपूर्वक वाहन चलाने का मामला दर्ज किया गया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि दुर्घटना के कारणों की विस्तृत जांच की जा रही है। वाहन की गति, चालक की स्थिति और अन्य परिस्थितियों की पड़ताल के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल घायल छात्रों के उपचार और मामले की जांच पर प्रशासन की नजर बनी हुई है।
देवास में अतिक्रमण हटाने पहुंची फॉरेस्ट टीम पर हमला, पथराव में 6 कर्मचारी घायल; ड्रोन और वाहनों में भी तोड़फोड़

मध्य प्रदेश । मध्य प्रदेश के Dewas जिले में वन भूमि से अतिक्रमण हटाने पहुंची वन विभाग की टीम पर कथित रूप से ग्रामीणों द्वारा हमला किए जाने का मामला सामने आया है। घटना जिनवाणी वन परिक्षेत्र के कमलापुर बीट क्षेत्र की बताई जा रही है, जहां वन विभाग की कार्रवाई के दौरान जमकर पथराव हुआ। इस घटना में छह वनकर्मी घायल हो गए, जबकि विभागीय वाहनों और ड्रोन को भी नुकसान पहुंचने की जानकारी मिली है। घटना का एक ड्रोन वीडियो भी सामने आया है, जिसमें वनकर्मी और पुलिसकर्मी खेतों की ओर भागते दिखाई दे रहे हैं। वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार शनिवार सुबह करीब साढ़े 11 बजे अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के लिए विभिन्न वन परिक्षेत्रों का स्टाफ और स्थानीय पुलिस बल मौके पर पहुंचा था। कार्रवाई का उद्देश्य कथित रूप से सरकारी वन भूमि पर किए गए अतिक्रमण को हटाना था। इसी दौरान क्षेत्र के कुछ ग्रामीणों ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया, जो बाद में पथराव में बदल गया। घटना में घायल होने वालों में वनरक्षक मोहन पंचोनिया, ज्योति जाट, कमल राणा, देवकरण मालवीय, सूरज तथा परिक्षेत्र सहायक K K Parmar शामिल हैं। घायलों को पहले कमलापुर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और बाद में चापड़ा के अस्पताल में भर्ती कराया गया। अधिकारियों के अनुसार दो कर्मचारियों की स्थिति गंभीर बताई जा रही है, जिन्हें आगे उपचार के लिए जिला अस्पताल रेफर किया गया है। घायल वनकर्मी ज्योति जाट ने बताया कि कार्रवाई के दौरान अचानक चारों ओर से पत्थरबाजी शुरू हो गई। उनके अनुसार कर्मचारियों को संभलने का अवसर तक नहीं मिला और लगातार पत्थर बरसाए जाते रहे। उन्होंने आरोप लगाया कि कई कर्मचारियों के सिर में गंभीर चोटें आईं और उन्हें किसी तरह मौके से सुरक्षित बाहर निकलना पड़ा। वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि पथराव करीब आधे घंटे तक चलता रहा। विभागीय टीम के अनुसार ग्रामीणों की संख्या काफी अधिक थी और उन्होंने कार्रवाई का विरोध करते हुए वाहनों तथा उपकरणों को भी निशाना बनाया। विभाग का दावा है कि ड्रोन को भी क्षति पहुंचाई गई है। Vikas Mahore ने बताया कि भीलआमला क्षेत्र में वन भूमि पर खेती किए जाने की शिकायतें थीं। इन्हीं शिकायतों के आधार पर अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की जा रही थी। अधिकारियों के अनुसार संबंधित भूमि वन विभाग के अधिकार क्षेत्र में आती है और उस पर अवैध कब्जे की जांच लंबे समय से चल रही थी। वन विभाग के मुताबिक कार्रवाई का नेतृत्व Ankit Jamod कर रहे थे। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि स्थिति बिगड़ने के बाद टीम को अपनी सुरक्षा सुनिश्चित करनी पड़ी। वहीं स्थानीय प्रशासन और पुलिस ने पूरे मामले की जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों ने कहा है कि घटना में शामिल लोगों की पहचान की जा रही है और उपलब्ध वीडियो फुटेज तथा अन्य साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। दूसरी ओर ग्रामीणों की ओर से भी मामले में अपना पक्ष रखे जाने की संभावना है। फिलहाल पुलिस और वन विभाग संयुक्त रूप से पूरे घटनाक्रम की जांच कर रहे हैं।