बिजली के तार हटाने को लेकर पड़ोसियों में विवाद: महिला से मारपीट का आरोप, सीसीटीवी वीडियो आया सामने

मध्यप्रदेश । शिवपुरी शहर की मदकपुरा कॉलोनी में शनिवार दोपहर पड़ोसियों के बीच चल रहा विवाद उस समय हिंसक रूप ले बैठा, जब बिजली के तार हटाने को लेकर शुरू हुई कहासुनी मारपीट तक पहुंच गई। घटना में एक महिला के घायल होने की जानकारी सामने आई है। महिला ने पड़ोसी परिवार पर बाल पकड़कर घसीटने और सड़क पर गिराकर मारपीट करने का आरोप लगाया है। वहीं, घटना का सीसीटीवी फुटेज भी सामने आया है, जिसके आधार पर पुलिस मामले की जांच कर रही है। पुलिस के अनुसार, मदकपुरा कॉलोनी निवासी शिवानी कुशवाह और उनके पड़ोसी मिथलेश लोधी के परिवार के बीच पहले से कुछ विवाद चल रहा था। शनिवार को बिजली के तार हटाने के मुद्दे पर दोनों पक्ष आमने-सामने आ गए। शुरुआती बहस देखते ही देखते तीखी नोकझोंक में बदल गई और फिर दोनों पक्षों के बीच मारपीट की स्थिति बन गई। शिवानी कुशवाह ने शिकायत में आरोप लगाया है कि विवाद के दौरान मिथलेश लोधी, उनके पति अमर लोधी और बेटे हजरत लोधी ने उनके साथ मारपीट की। शिकायत के अनुसार, उन्हें बाल पकड़कर सड़क पर गिराया गया और घसीटते हुए पीटा गया। इस घटना में घायल होने के बाद उन्हें उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया। घटना के बाद सामने आए सीसीटीवी फुटेज में भी दोनों पक्षों के बीच विवाद और धक्का-मुक्की जैसी स्थिति दिखाई देने का दावा किया जा रहा है। हालांकि वीडियो की सत्यता और घटनाक्रम की पूरी पुष्टि पुलिस जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी। घटना के समय आसपास के लोग भी मौजूद थे, लेकिन विवाद बढ़ने से माहौल तनावपूर्ण हो गया। देहात थाना पुलिस ने बताया कि दोनों पक्षों की ओर से शिकायतें प्राप्त हुई हैं। शिवानी कुशवाह की रिपोर्ट पर मिथलेश लोधी, अमर लोधी और हजरत लोधी के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। वहीं दूसरी ओर, मिथलेश लोधी की शिकायत के आधार पर शिवानी कुशवाह और उनके पति के खिलाफ भी क्रॉस केस दर्ज किया गया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले की निष्पक्ष जांच की जा रही है। सीसीटीवी फुटेज, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान और अन्य साक्ष्यों के आधार पर पूरे घटनाक्रम की पड़ताल की जाएगी। जांच के बाद जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। स्थानीय लोगों का कहना है कि दोनों परिवारों के बीच पहले भी कई बार विवाद हो चुका है। इस ताजा घटना के बाद कॉलोनी में चर्चा का माहौल बना हुआ है। पुलिस ने दोनों पक्षों को कानून व्यवस्था बनाए रखने और किसी भी प्रकार की अप्रिय स्थिति से बचने की हिदायत दी है। फिलहाल मामला जांच के अधीन है और पुलिस सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए कार्रवाई कर रही है।
पूरनखेड़ी के पास बड़ा सड़क हादसा टला: कैंटर की टक्कर से ट्रैक्टर तीन हिस्सों में टूटा, चालक फरार

मध्यप्रदेश । शिवपुरी जिले में रविवार को राष्ट्रीय राजमार्ग-46 पर एक बड़ा सड़क हादसा टल गया। लुकवासा चौकी क्षेत्र के अंतर्गत पूरनखेड़ी के पास बांस से भरे एक ट्रैक्टर और मिर्च से लदी आयशर कैंटर के बीच हुई जोरदार टक्कर में ट्रैक्टर पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। टक्कर इतनी भीषण थी कि ट्रैक्टर तीन हिस्सों में बंट गया और उस पर लदा बांस सड़क पर दूर-दूर तक फैल गया। राहत की बात यह रही कि घटना में किसी प्रकार की जनहानि या गंभीर चोट की सूचना नहीं है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, ट्रैक्टर अशोकनगर से बांस लेकर बीरखेड़ी की ओर जा रहा था। इसी दौरान शिवपुरी की दिशा से आ रही मिर्च लदी आयशर कैंटर ने ट्रैक्टर को पीछे से जोरदार टक्कर मार दी। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, टक्कर का प्रभाव इतना अधिक था कि ट्रैक्टर का अगला और पिछला हिस्सा अलग हो गया तथा वाहन पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। हादसे के बाद सड़क पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया। ट्रैक्टर में लदा बांस राजमार्ग पर बिखर गया, जिससे कुछ समय के लिए यातायात बाधित हो गया। कई वाहन सड़क के दोनों ओर रुक गए और जाम जैसी स्थिति निर्मित हो गई। सूचना मिलने पर स्थानीय लोग और पुलिस मौके पर पहुंचे तथा सड़क पर फैले बांस को हटाने का काम शुरू किया। काफी मशक्कत के बाद यातायात को सामान्य किया जा सका। पुलिस के अनुसार, दुर्घटना के तुरंत बाद आयशर कैंटर का चालक वाहन छोड़कर मौके से फरार हो गया। पुलिस ने वाहन को अपने कब्जे में लेकर चालक की तलाश शुरू कर दी है। मामले की जांच की जा रही है और दुर्घटना के वास्तविक कारणों का पता लगाया जा रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि पूरनखेड़ी क्षेत्र में इन दिनों नव निर्मित पुल के निर्माण कार्य के चलते यातायात एकांकी मार्ग यानी सिंगल लेन से संचालित किया जा रहा है। सड़क का यह हिस्सा अपेक्षाकृत संकरा है, जिसके कारण भारी वाहनों की आवाजाही के दौरान दुर्घटना की आशंका लगातार बनी रहती है। क्षेत्रवासियों का आरोप है कि निर्माण कार्य के कारण पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था और यातायात प्रबंधन नहीं होने से वाहन चालकों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। रहवासियों और वाहन चालकों ने राष्ट्रीय राजमार्ग प्रबंधन से मांग की है कि निर्माणाधीन हिस्से में जल्द से जल्द आवश्यक सुधार किए जाएं और यातायात के लिए पर्याप्त चौड़ाई उपलब्ध कराई जाए। उनका कहना है कि मानसून की शुरुआत होने वाली है और यदि समय रहते व्यवस्थाओं में सुधार नहीं हुआ तो भविष्य में गंभीर दुर्घटनाएं हो सकती हैं। फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच में जुटी हुई है और फरार कैंटर चालक की तलाश की जा रही है। वहीं, इस हादसे ने एक बार फिर निर्माणाधीन सड़क मार्गों पर सुरक्षा इंतजामों की आवश्यकता को उजागर कर दिया है।
61 दिन बाद खुलेगा समुद्र का खजाना, तमिलनाडु में फिर रफ्तार पकड़ेगा ₹7000 करोड़ का मत्स्य कारोबार और निर्यात

नई दिल्ली । समुद्री मछलियों के प्रजनन काल को ध्यान में रखते हुए लागू की गई 61 दिनों की वार्षिक बंदी समाप्त होने के साथ ही तमिलनाडु में मत्स्य उद्योग एक बार फिर पूरी क्षमता के साथ शुरू होने जा रहा है। इस निर्णय से राज्य के लाखों मछुआरों, समुद्री उत्पाद कारोबारियों और निर्यात क्षेत्र को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। साथ ही राज्य सरकार के राजस्व संग्रह में भी उल्लेखनीय वृद्धि का अनुमान लगाया जा रहा है। हर वर्ष अप्रैल से जून के बीच समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र की सुरक्षा और मछलियों के प्रजनन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से यांत्रिक नौकाओं द्वारा मछली पकड़ने पर अस्थायी प्रतिबंध लगाया जाता है। इस अवधि के दौरान समुद्री गतिविधियां सीमित रहती हैं, जिससे मछुआरा समुदाय की आय प्रभावित होती है। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि यह प्रतिबंध दीर्घकालिक मत्स्य संसाधनों के संरक्षण के लिए आवश्यक है। बंदी अवधि समाप्त होने के बाद तमिलनाडु के तटीय इलाकों में फिर से गतिविधियां तेज हो गई हैं। मछुआरे अपनी नौकाओं की मरम्मत, इंजन परीक्षण, जालों की तैयारी और अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं में जुटे हुए हैं। कई स्थानों पर समुद्र में वापसी को लेकर उत्साह का माहौल देखा जा रहा है। लंबे इंतजार के बाद अब हजारों नौकाएं दोबारा समुद्र में उतरने की तैयारी कर रही हैं। तमिलनाडु देश के प्रमुख मत्स्य उत्पादन राज्यों में शामिल है। राज्य की लंबी समुद्री तटरेखा और विकसित मत्स्य अवसंरचना इसे इस क्षेत्र में विशेष पहचान प्रदान करती है। समुद्री उत्पादों का उत्पादन, प्रसंस्करण और निर्यात राज्य की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान देता है। बड़ी संख्या में परिवार प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से इस उद्योग पर निर्भर हैं। विशेषज्ञों के अनुसार समुद्री मछली पकड़ने की गतिविधियां शुरू होते ही घरेलू बाजारों में आपूर्ति बढ़ेगी और निर्यात क्षेत्र को भी नई गति मिलेगी। समुद्री खाद्य उत्पादों की अंतरराष्ट्रीय मांग लगातार बनी हुई है, विशेष रूप से एशिया, यूरोप और उत्तरी अमेरिका के बाजारों में। ऐसे में उत्पादन और निर्यात में वृद्धि से विदेशी मुद्रा अर्जन के साथ-साथ स्थानीय व्यापार को भी मजबूती मिलने की संभावना है। मत्स्य उद्योग से जुड़े व्यापारियों, कोल्ड स्टोरेज संचालकों, परिवहन कंपनियों और प्रोसेसिंग इकाइयों को भी इस पुनः शुरुआत से लाभ मिलने की उम्मीद है। पिछले दो महीनों के दौरान गतिविधियां सीमित रहने से कई व्यवसायों की आय प्रभावित हुई थी। अब कारोबार सामान्य होने के साथ रोजगार और आय के अवसरों में भी वृद्धि देखी जा सकती है। आर्थिक जानकारों का मानना है कि समुद्री उत्पादों का व्यापार दोबारा गति पकड़ने पर राज्य को हजारों करोड़ रुपये के आर्थिक लाभ मिल सकते हैं। यह ऐसे समय में महत्वपूर्ण माना जा रहा है जब सरकार विकास योजनाओं, बुनियादी ढांचे और सामाजिक कल्याण कार्यक्रमों के लिए अतिरिक्त वित्तीय संसाधनों की तलाश में है। मत्स्य क्षेत्र की यह वापसी केवल एक उद्योग के पुनः संचालन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह तटीय अर्थव्यवस्था, रोजगार, निर्यात और ग्रामीण आजीविका से जुड़े व्यापक आर्थिक तंत्र को भी नई ऊर्जा प्रदान करेगी। आने वाले महीनों में इस क्षेत्र के प्रदर्शन पर राज्य की आर्थिक गतिविधियों की दिशा काफी हद तक निर्भर रहने की संभावना है।
खजराना में अवैध अहाते को लेकर बवाल: वीडियो बना रहीं महिलाओं से मारपीट और मोबाइल छीनने का आरोप

मध्यप्रदेश । इंदौर के खजराना थाना क्षेत्र में शनिवार रात उस समय तनाव की स्थिति बन गई, जब बंगाली चौराहे के पास स्थित एक शराब दुकान के समीप संचालित कथित अवैध अहाते का वीडियो बनाने पहुंचीं कुछ महिलाओं और दुकान से जुड़े लोगों के बीच विवाद हो गया। महिलाओं ने आरोप लगाया कि वीडियो बनाने के दौरान उनके साथ धक्का-मुक्की की गई और एक महिला का मोबाइल फोन भी छीन लिया गया। घटना की सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और दोनों पक्षों को समझाइश देकर मामला शांत कराया। जानकारी के अनुसार, बंगाली चौराहे के समीप स्थित किशकिंधा अपार्टमेंट में करीब 24 परिवार निवास करते हैं। रहवासियों का आरोप है कि शराब दुकान के पास अवैध रूप से अहाता संचालित किया जा रहा है, जिसके कारण क्षेत्र में आए दिन शराब पीने वालों का जमावड़ा लगा रहता है। इससे स्थानीय लोगों, विशेषकर महिलाओं और बच्चों को आने-जाने में परेशानी का सामना करना पड़ता है। शनिवार रात अपार्टमेंट में रहने वाली कुछ महिलाएं कथित अवैध अहाते की स्थिति का वीडियो बनाने पहुंचीं। महिलाओं का कहना है कि वे क्षेत्र में हो रही समस्याओं को रिकॉर्ड कर प्रशासन तक पहुंचाना चाहती थीं। इसी दौरान वहां मौजूद कुछ लोगों ने इसका विरोध किया और विवाद की स्थिति बन गई। रहवासियों का आरोप है कि वीडियो रिकॉर्डिंग के दौरान दुकान के कर्मचारियों ने कविता रोकड़े नामक महिला का मोबाइल छीन लिया और उनके साथ धक्का-मुक्की की। महिलाओं ने यह भी दावा किया कि क्षेत्र में पहले भी शराबियों के जमावड़े के कारण असामाजिक गतिविधियों और महिलाओं से अभद्र व्यवहार जैसी घटनाएं सामने आ चुकी हैं, जिसकी शिकायत प्रशासन को कई बार की जा चुकी है। दूसरी ओर, मामले की सूचना मिलते ही खजराना थाना पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने दोनों पक्षों की बात सुनी और तत्काल किसी बड़े विवाद को बढ़ने से रोकते हुए स्थिति को नियंत्रित किया। फिलहाल पुलिस द्वारा मामले की जांच की जा रही है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, शिकायत मिलने पर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। रहवासियों का कहना है कि वे इस संबंध में कई बार जिला प्रशासन और कलेक्टर कार्यालय में शिकायत दर्ज करा चुके हैं। उनका आरोप है कि शराब दुकान के आसपास कथित अवैध अहाते और अतिक्रमण के कारण सड़क संकरी हो गई है, जिससे यातायात और आवागमन प्रभावित होता है। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से शराब दुकान को अन्य स्थान पर स्थानांतरित करने तथा कथित अवैध निर्माणों पर कार्रवाई की मांग भी की है। मामले ने एक बार फिर शहर में शराब दुकानों के आसपास सुरक्षा, अतिक्रमण और स्थानीय नागरिकों की परेशानियों को लेकर बहस छेड़ दी है। अब क्षेत्र के लोग प्रशासनिक कार्रवाई और स्थायी समाधान की उम्मीद लगाए हुए हैं।
दराज में बंद पुराने स्मार्टफोन को मिलेगी नई पहचान, हजारों मोबाइल मिलकर बन सकते हैं भविष्य के मिनी डेटा सेंटर

नई दिल्ली । तकनीक की दुनिया में तेजी से बदलते दौर के बीच अब पुराने स्मार्टफोन को लेकर एक नई सोच सामने आई है। आमतौर पर नया मोबाइल खरीदने के बाद पुराने फोन को लोग दराज में रख देते हैं या फिर उसे कबाड़ समझकर अलग कर देते हैं। लेकिन भविष्य में यही पुराने स्मार्टफोन आधुनिक कंप्यूटिंग सिस्टम का महत्वपूर्ण हिस्सा बन सकते हैं। नई तकनीकी पहल के तहत पुराने मोबाइल उपकरणों को दोबारा उपयोग में लाकर उन्हें छोटे डेटा सेंटर और क्लाउड कंप्यूटिंग नेटवर्क में बदला जा सकता है। इस अवधारणा का मुख्य उद्देश्य इलेक्ट्रॉनिक कचरे को कम करना और मौजूदा तकनीकी संसाधनों का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित करना है। दुनिया भर में हर वर्ष करोड़ों स्मार्टफोन उपयोग से बाहर हो जाते हैं। इनमें से अधिकांश उपकरण तकनीकी रूप से पूरी तरह बेकार नहीं होते, लेकिन नए मॉडलों के आने के बाद उनका उपयोग घट जाता है। ऐसे में इन उपकरणों की कंप्यूटिंग क्षमता को नए रूप में इस्तेमाल करने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रयास किए जा रहे हैं। नई प्रणाली के तहत पुराने स्मार्टफोन के उन हिस्सों को हटाया जाता है जिनकी आवश्यकता नहीं रहती। इसमें स्क्रीन, कैमरा, बैटरी और बाहरी आवरण जैसे घटक शामिल हैं। इसके बाद केवल मदरबोर्ड को सुरक्षित रखा जाता है, जिसमें प्रोसेसर, रैम और स्टोरेज जैसी महत्वपूर्ण तकनीकी इकाइयां मौजूद होती हैं। यही हिस्से आगे चलकर कंप्यूटिंग नेटवर्क की आधारशिला बनते हैं। इन मदरबोर्ड्स को एक साथ जोड़कर विशेष सॉफ्टवेयर आधारित प्लेटफॉर्म पर संचालित किया जाता है। इसके लिए ऐसे सिस्टम का उपयोग किया जाता है जो एक साथ कई डिवाइसों को नियंत्रित और प्रबंधित कर सके। इस तरह अलग-अलग पुराने स्मार्टफोन मिलकर एक बड़े कंप्यूटिंग क्लस्टर का निर्माण करते हैं, जो जटिल डिजिटल कार्यों को संभालने में सक्षम हो सकता है। तकनीकी विशेषज्ञों का मानना है कि यदि 25 से 50 पुराने स्मार्टफोन को एक साथ जोड़ा जाए तो वे कुछ विशेष कार्यों में एक उन्नत सर्वर के बराबर प्रदर्शन कर सकते हैं। यही नहीं, यदि ऐसे हजारों उपकरणों को एक नेटवर्क में जोड़ा जाए तो वे क्लाउड सेवाओं, अनुसंधान परियोजनाओं, शैक्षणिक प्रयोगों और डेटा प्रोसेसिंग जैसे क्षेत्रों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। भविष्य में हजारों स्मार्टफोन को जोड़कर बड़े स्तर के कंप्यूटिंग क्लस्टर विकसित करने की संभावनाओं पर भी काम किया जा रहा है। शिक्षा और अनुसंधान क्षेत्र के लिए यह तकनीक विशेष रूप से उपयोगी मानी जा रही है। उच्च शिक्षण संस्थानों में छात्रों को बड़े कंप्यूटिंग नेटवर्क पर काम करने के लिए महंगे सर्वर और अत्याधुनिक संसाधनों की आवश्यकता होती है। यदि पुराने स्मार्टफोन आधारित क्लस्टर सफल होते हैं तो कम लागत में विद्यार्थियों और शोधकर्ताओं को उन्नत तकनीकी प्रयोगों का अवसर मिल सकेगा। इससे तकनीकी शिक्षा को अधिक सुलभ और व्यावहारिक बनाने में मदद मिलेगी। पर्यावरण संरक्षण के दृष्टिकोण से भी यह पहल महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इलेक्ट्रॉनिक कचरा वर्तमान समय की बड़ी वैश्विक चुनौतियों में शामिल है। पुराने उपकरणों का पुनः उपयोग नए हार्डवेयर निर्माण की आवश्यकता को कम कर सकता है, जिससे प्राकृतिक संसाधनों पर दबाव घटेगा और कार्बन उत्सर्जन में भी कमी आ सकती है। यही कारण है कि इस तकनीक को टिकाऊ और पर्यावरण अनुकूल डिजिटल भविष्य की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में पुराना स्मार्टफोन केवल एक निष्क्रिय उपकरण नहीं रहेगा, बल्कि वह डेटा प्रोसेसिंग, क्लाउड सेवाओं और डिजिटल अनुसंधान जैसे क्षेत्रों में उपयोगी संसाधन के रूप में नई भूमिका निभा सकता है। यह पहल तकनीक और पर्यावरण के बीच बेहतर संतुलन स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण बदलाव साबित हो सकती है।
FIFA 2026 सीजन से पहले Samsung का नया AI TV अभियान, स्मार्ट फीचर्स के साथ मुफ्त साउंडबार, कैशबैक और लंबी EMI सुविधा का ऐलान

नई दिल्ली । स्मार्ट टीवी बाजार में प्रतिस्पर्धा लगातार बढ़ रही है और कंपनियां उपभोक्ताओं को बेहतर अनुभव देने के लिए नई तकनीकों को तेजी से शामिल कर रही हैं। इसी क्रम में सैमसंग ने अपने Vision AI TV लाइनअप में नया AI Soccer Mode पेश किया है। कंपनी का दावा है कि यह फीचर फुटबॉल प्रेमियों को बड़े स्क्रीन पर पहले से अधिक स्पष्ट, जीवंत और वास्तविक मैच देखने का अनुभव प्रदान करेगा। FIFA 2026 सीजन को ध्यान में रखते हुए पेश किए गए इस फीचर के साथ कंपनी ने कई विशेष ऑफर्स की भी घोषणा की है। फुटबॉल दुनिया के सबसे लोकप्रिय खेलों में शामिल है और बड़े टूर्नामेंट के दौरान दर्शकों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि देखी जाती है। इसी बढ़ती मांग को ध्यान में रखते हुए सैमसंग ने अपने प्रीमियम स्मार्ट टीवी पोर्टफोलियो में ऐसे फीचर्स जोड़े हैं जो लाइव स्पोर्ट्स कंटेंट को बेहतर तरीके से प्रदर्शित कर सकें। कंपनी के अनुसार AI Soccer Mode मैच के दौरान रियल-टाइम सीन एनालिसिस करता है और स्क्रीन पर दिखाई देने वाली गतिविधियों के आधार पर पिक्चर सेटिंग्स को स्वतः समायोजित करता है। इस तकनीक का मुख्य उद्देश्य गेंद की गति और खिलाड़ियों की मूवमेंट को अधिक स्पष्ट बनाना है। तेज गति वाले फुटबॉल मैचों में कई बार गेंद को ट्रैक करना मुश्किल हो जाता है, विशेषकर बड़े मैदान के दृश्य में। नया AI आधारित सिस्टम ऐसे दृश्यों को पहचानकर पिक्चर क्वालिटी को अनुकूलित करता है, जिससे दर्शकों को अधिक स्पष्ट दृश्य अनुभव मिल सके। इसके साथ रंगों की गुणवत्ता और कॉन्ट्रास्ट को भी बेहतर बनाया जाता है ताकि मैदान और खिलाड़ियों की पहचान अधिक स्पष्ट दिखाई दे। ऑडियो अनुभव को बेहतर बनाने के लिए भी विशेष तकनीक शामिल की गई है। AI आधारित साउंड सिस्टम मैच की परिस्थितियों के अनुसार ऑडियो आउटपुट को संतुलित करता है। इससे कमेंट्री, दर्शकों की आवाज, स्टेडियम का माहौल और मैच के महत्वपूर्ण क्षण अधिक प्रभावी तरीके से सुनाई देते हैं। कंपनी का मानना है कि बेहतर ऑडियो और विजुअल अनुभव दर्शकों को स्टेडियम जैसा माहौल महसूस कराने में मदद करेगा। Vision AI TV सीरीज में पहले से मौजूद AI Upscaling Pro, Color Booster Pro और AI Sound Controller Pro जैसे फीचर्स भी इस अनुभव को और बेहतर बनाते हैं। AI Upscaling Pro कम गुणवत्ता वाले कंटेंट को अधिक बेहतर रेजोल्यूशन में प्रदर्शित करने में मदद करता है। वहीं Color Booster Pro स्क्रीन पर रंगों को अधिक जीवंत बनाता है। AI Sound Controller Pro ऑडियो स्तर को लगातार मॉनिटर कर संतुलित ध्वनि प्रदान करता है। स्मार्ट टीवी अनुभव को और व्यापक बनाने के लिए कंपनी ने अपने प्लेटफॉर्म में कई AI आधारित सेवाओं को भी शामिल किया है। इससे उपयोगकर्ताओं को कंटेंट सर्च, स्मार्ट कंट्रोल और व्यक्तिगत सुझावों जैसी सुविधाएं प्राप्त होती हैं। कंपनी का लक्ष्य टीवी को केवल मनोरंजन उपकरण के बजाय एक स्मार्ट डिजिटल हब के रूप में विकसित करना है। नए फीचर के साथ कंपनी ने ग्राहकों के लिए विशेष प्रमोशनल ऑफर्स की भी घोषणा की है। चयनित मॉडल खरीदने पर मुफ्त साउंडबार, कैशबैक लाभ, आकर्षक फाइनेंसिंग विकल्प और लंबी अवधि की ईएमआई सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। कुछ मॉडलों पर लंबे समय तक सॉफ्टवेयर अपडेट का वादा भी किया गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि AI आधारित फीचर्स और उपभोक्ता केंद्रित ऑफर्स के माध्यम से प्रीमियम स्मार्ट टीवी बाजार में प्रतिस्पर्धा और तेज हो सकती है। ऐसे में बड़े स्क्रीन और उन्नत तकनीक की तलाश करने वाले ग्राहकों के लिए यह नया विकल्प आकर्षक साबित हो सकता है।
ड्राइविंग लाइसेंस से लेकर RC तक सब कुछ मोबाइल में, DigiLocker के बढ़ते इस्तेमाल ने बदली दस्तावेज संभालने की तस्वीर

नई दिल्ली । डिजिटल इंडिया अभियान के विस्तार के साथ सरकारी सेवाओं को नागरिकों तक आसान और सुरक्षित तरीके से पहुंचाने की दिशा में कई महत्वपूर्ण पहलें की गई हैं। इन्हीं प्रयासों में से एक DigiLocker है, जिसने दस्तावेजों को संभालने और प्रस्तुत करने की पारंपरिक व्यवस्था को काफी हद तक बदल दिया है। आज यह प्लेटफॉर्म करोड़ों भारतीयों के लिए एक भरोसेमंद डिजिटल दस्तावेज भंडार के रूप में उभर चुका है, जहां ड्राइविंग लाइसेंस, वाहन पंजीकरण प्रमाणपत्र, आधार कार्ड, पैन कार्ड, शैक्षणिक प्रमाणपत्र और अन्य आवश्यक दस्तावेज सुरक्षित रखे जा सकते हैं। तेजी से डिजिटल होती जीवनशैली के बीच लोगों को अक्सर जरूरी दस्तावेज साथ रखने में कठिनाई का सामना करना पड़ता है। कई बार यात्रा के दौरान या वाहन जांच के समय दस्तावेज भूल जाने से परेशानी और जुर्माने की स्थिति पैदा हो जाती है। DigiLocker इस समस्या का व्यावहारिक समाधान प्रदान करता है। मोबाइल फोन में उपलब्ध इस डिजिटल सुविधा के माध्यम से नागरिक अपने प्रमाणित दस्तावेज किसी भी समय और किसी भी स्थान पर प्रस्तुत कर सकते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि DigiLocker केवल दस्तावेजों को स्टोर करने का माध्यम नहीं है, बल्कि यह सरकारी विभागों और नागरिकों के बीच डिजिटल विश्वास का एक मजबूत तंत्र भी है। प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध दस्तावेज सीधे अधिकृत संस्थानों द्वारा जारी किए जाते हैं, जिससे उनकी प्रमाणिकता को लेकर किसी प्रकार की शंका नहीं रहती। यही कारण है कि कई सरकारी प्रक्रियाओं में इन दस्तावेजों को मूल दस्तावेजों के समान वैध माना जाता है। वाहन चालकों के लिए यह सुविधा विशेष रूप से उपयोगी साबित हो रही है। सड़क पर पुलिस जांच के दौरान ड्राइविंग लाइसेंस, वाहन पंजीकरण प्रमाणपत्र और अन्य आवश्यक रिकॉर्ड डिजिटल रूप में दिखाए जा सकते हैं। इससे कागजी दस्तावेजों के खोने, खराब होने या साथ न होने की समस्या काफी हद तक समाप्त हो जाती है। इसके अलावा विद्यार्थियों के लिए भी यह प्लेटफॉर्म महत्वपूर्ण है, क्योंकि वे अपनी शैक्षणिक मार्कशीट और प्रमाणपत्र सुरक्षित रूप से डिजिटल रूप में संग्रहीत कर सकते हैं। डिजिटल दस्तावेजों की बढ़ती स्वीकार्यता ने प्रशासनिक प्रक्रियाओं को भी अधिक पारदर्शी और सरल बनाया है। नागरिकों को बार-बार फोटोकॉपी जमा करने या मूल दस्तावेज लेकर चलने की आवश्यकता कम हो रही है। इससे समय की बचत के साथ-साथ कागज के उपयोग में भी कमी आई है, जो पर्यावरण संरक्षण के दृष्टिकोण से भी सकारात्मक कदम माना जाता है। हालांकि डिजिटल सुविधाओं का लाभ उठाने के लिए साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूक रहना भी आवश्यक है। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि उपयोगकर्ता अपने मोबाइल उपकरणों को सुरक्षित रखें, नियमित रूप से ऐप अपडेट करें और किसी भी अनधिकृत व्यक्ति के साथ अपनी लॉगिन जानकारी साझा न करें। इससे डिजिटल दस्तावेजों की सुरक्षा और गोपनीयता सुनिश्चित की जा सकती है। वर्तमान समय में DigiLocker केवल एक मोबाइल एप्लिकेशन नहीं बल्कि डिजिटल प्रशासन की नई पहचान बन चुका है। सरकार की डिजिटल सेवाओं को आम नागरिकों तक पहुंचाने में इसकी भूमिका लगातार बढ़ रही है। दस्तावेजों को सुरक्षित, सुलभ और प्रमाणित रूप में उपलब्ध कराने वाली यह व्यवस्था आने वाले वर्षों में डिजिटल शासन व्यवस्था का और भी महत्वपूर्ण हिस्सा बन सकती है।
नया स्मार्टफोन खरीदने की योजना पर असर, Vivo और iQOO के कई डिवाइस हुए महंगे; मेमोरी चिप संकट को माना जा रहा कारण

नई दिल्ली । भारतीय स्मार्टफोन बाजार में ग्राहकों को एक और झटका लगा है। प्रमुख स्मार्टफोन ब्रांड Vivo और iQOO ने अपने कई लोकप्रिय मॉडलों की कीमतों में बढ़ोतरी कर दी है। नई कीमतें विभिन्न ऑनलाइन और ऑफलाइन बिक्री प्लेटफॉर्म पर लागू हो चुकी हैं, जिससे नया स्मार्टफोन खरीदने की योजना बना रहे उपभोक्ताओं को अब पहले की तुलना में अधिक खर्च करना पड़ सकता है। सबसे अधिक प्रभाव Vivo T5 Pro सीरीज पर देखने को मिला है। इस सीरीज के विभिन्न वेरिएंट्स की कीमतों में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। कुछ मॉडल्स पर तीन हजार रुपये तक की बढ़ोतरी हुई है, जिससे यह प्रीमियम मिड-रेंज सेगमेंट के ग्राहकों के लिए महत्वपूर्ण बदलाव माना जा रहा है। बाजार विश्लेषकों का कहना है कि यह बढ़ोतरी उन उपभोक्ताओं को प्रभावित कर सकती है जो बजट और फीचर्स के बीच संतुलन बनाकर खरीदारी का निर्णय लेते हैं। वहीं iQOO ने भी अपने फ्लैगशिप और प्रीमियम श्रेणी के स्मार्टफोन्स की कीमतों में संशोधन किया है। कंपनी के प्रमुख मॉडल iQOO 15 के विभिन्न वेरिएंट अब पहले से अधिक कीमत पर उपलब्ध हैं। इसके अतिरिक्त iQOO 15R और iQOO Neo 10 जैसे डिवाइस भी महंगे हो गए हैं। इन मॉडलों की लोकप्रियता को देखते हुए कीमतों में यह बदलाव बाजार में व्यापक चर्चा का विषय बन गया है। विशेषज्ञों के अनुसार इस मूल्य वृद्धि के पीछे वैश्विक स्तर पर मेमोरी और स्टोरेज चिप्स की आपूर्ति से जुड़ी चुनौतियां प्रमुख कारण हैं। पिछले कुछ महीनों से सेमीकंडक्टर उद्योग में लागत बढ़ने और सप्लाई चेन पर दबाव के कारण इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के निर्माण खर्च में इजाफा हुआ है। स्मार्टफोन निर्माता कंपनियां इसी बढ़ी हुई लागत को संतुलित करने के लिए उत्पादों की कीमतों में संशोधन कर रही हैं। तकनीकी बाजार से जुड़े जानकारों का मानना है कि रैम और स्टोरेज मॉड्यूल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी का असर केवल Vivo और iQOO तक सीमित नहीं रह सकता। यदि वैश्विक आपूर्ति स्थिति में जल्द सुधार नहीं होता है तो आने वाले महीनों में अन्य ब्रांड भी अपने स्मार्टफोन्स की कीमतों में बदलाव कर सकते हैं। इससे भारतीय बाजार में स्मार्टफोन खरीदना पहले की तुलना में महंगा हो सकता है। हालांकि मूल्य वृद्धि की राशि बहुत अधिक नहीं दिखाई देती, लेकिन प्रतिस्पर्धी बाजार में एक से तीन हजार रुपये का अंतर भी ग्राहकों के खरीदारी निर्णय को प्रभावित कर सकता है। विशेष रूप से मिड-रेंज और प्रीमियम सेगमेंट में उपभोक्ता अक्सर विभिन्न ब्रांडों और मॉडलों के बीच कीमत और फीचर्स की तुलना कर निर्णय लेते हैं। ऐसे में कीमतों में बढ़ोतरी बिक्री रणनीतियों और उपभोक्ता प्राथमिकताओं पर भी असर डाल सकती है। उद्योग विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि आगामी त्योहारी सीजन और नए लॉन्च के दौरान कंपनियां विशेष ऑफर्स, एक्सचेंज बोनस और बैंक छूट के माध्यम से ग्राहकों को आकर्षित करने की कोशिश कर सकती हैं। इससे बढ़ी हुई कीमतों का कुछ हद तक प्रभाव कम किया जा सकता है। फिलहाल स्मार्टफोन खरीदने की योजना बना रहे उपभोक्ताओं के लिए यह समय बाजार की कीमतों पर नजर रखने का है। यदि वैश्विक चिप आपूर्ति में सुधार नहीं हुआ तो आने वाले समय में अन्य मॉडलों की कीमतों में भी बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है।
राऊ में युवती के साथ रह रहे युवक को लेकर हंगामा, हिंदू संगठनों की शिकायत पर पुलिस ने शुरू की जांच

मध्यप्रदेश । इंदौर के राऊ थाना क्षेत्र में शनिवार रात उस समय हलचल मच गई जब एक युवक और युवती के साथ रहने की सूचना पर कुछ हिंदू संगठनों के कार्यकर्ता मौके पर पहुंच गए। इसके बाद दोनों को राऊ थाने लाया गया, जहां पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी। फिलहाल पुलिस का कहना है कि सभी तथ्यों की जांच की जा रही है और जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। जानकारी के अनुसार मामला कमला नगर क्षेत्र का है। हिंदू संगठनों के कार्यकर्ताओं को सूचना मिली थी कि एक युवक, जिसकी पहचान सूफियान उर्फ सैफी अली निवासी सदर बाजार के रूप में बताई जा रही है, एक युवती के साथ किराए के मकान में रह रहा है। सूचना मिलने के बाद कुछ संगठन पदाधिकारी और कार्यकर्ता मौके पर पहुंचे तथा दोनों को अपने साथ राऊ थाने ले गए। बताया गया है कि संबंधित मकान इकबाल खान का है, जहां युवक और युवती रह रहे थे। संगठन के कार्यकर्ताओं ने पुलिस से मामले की जांच करने और आवश्यक कार्रवाई की मांग की। स्थिति को देखते हुए पुलिस ने युवक को पूछताछ के लिए थाने में बैठा लिया। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार युवक पहले बाणगंगा क्षेत्र में सैलून संचालित करता था। वहीं उसकी युवती से पहचान हुई थी। बाद में वह राऊ क्षेत्र के श्रमिक इलाके में सैलून का काम करने लगा और किराए के मकान में रहने लगा। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि मकान मालिक द्वारा किरायेदारों की जानकारी पुलिस को नहीं दी गई थी। हालांकि इन आरोपों की अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। कुछ संगठन कार्यकर्ताओं ने यह भी दावा किया कि युवक के साथ एक अन्य व्यक्ति भी जुड़ा हुआ था, लेकिन उसकी पहचान और भूमिका को लेकर फिलहाल कोई स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है। पुलिस इस पहलू की भी जांच कर रही है। राऊ थाना प्रभारी राजपाल सिंह राठौर के अनुसार मामले में प्राप्त शिकायत और उपलब्ध तथ्यों के आधार पर जांच की जा रही है। उन्होंने कहा कि पुलिस सभी पक्षों से जानकारी जुटा रही है और जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके अनुसार वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि फिलहाल जांच पूरी होने से पहले किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा। युवती और युवक दोनों के बयान लिए जा रहे हैं तथा उनके रहने की परिस्थितियों और दस्तावेजों की भी जांच की जा रही है। मामले को लेकर क्षेत्र में चर्चा का माहौल है, वहीं पुलिस ने लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने और जांच पूरी होने तक संयम बनाए रखने की अपील की है।
शेयर बाजार की तेजी से निवेशकों की बल्ले-बल्ले, टॉप-10 कंपनियों की वैल्यू ₹1.90 लाख करोड़ बढ़ी, ICICI बैंक बना सबसे बड़ा लाभार्थी

नई दिल्ली । भारतीय शेयर बाजार में पिछले सप्ताह दर्ज की गई मजबूत तेजी का सीधा फायदा देश की प्रमुख सूचीबद्ध कंपनियों को मिला। बाजार में निवेशकों की बढ़ती भागीदारी, वैश्विक माहौल में सुधार और वित्तीय क्षेत्र में मजबूत खरीदारी के चलते देश की शीर्ष 10 कंपनियों में से 8 के संयुक्त बाजार पूंजीकरण में लगभग 1.90 लाख करोड़ रुपये की बढ़ोतरी दर्ज की गई। इस दौरान निजी और सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकिंग शेयरों ने बाजार की तेजी का नेतृत्व किया, जबकि कुछ चुनिंदा कंपनियों के मूल्यांकन में गिरावट भी देखने को मिली। सप्ताह के दौरान बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स 1,284.61 अंकों की बढ़त के साथ बंद हुआ। वहीं नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी भी मजबूती दिखाते हुए 256.2 अंक ऊपर चढ़ा। बाजार में आई इस तेजी ने निवेशकों की संपत्ति में उल्लेखनीय वृद्धि की और बड़ी कंपनियों के मूल्यांकन को नई ऊंचाई तक पहुंचाने में मदद की। सबसे अधिक लाभ ICICI बैंक को हुआ, जिसका बाजार पूंजीकरण 56,223 करोड़ रुपये बढ़कर 9.61 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो गया। बैंकिंग क्षेत्र में मजबूत निवेश और वित्तीय शेयरों में बढ़ती मांग के कारण कंपनी का मूल्यांकन तेजी से बढ़ा। इसके अलावा HDFC बैंक ने भी उल्लेखनीय प्रदर्शन करते हुए अपने मार्केट कैप में 38,571 करोड़ रुपये से अधिक की वृद्धि दर्ज की। बैंक का कुल मूल्यांकन बढ़कर लगभग 11.89 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गया। सार्वजनिक क्षेत्र के सबसे बड़े बैंक SBI ने भी शानदार प्रदर्शन किया। कंपनी के बाजार पूंजीकरण में 36,137 करोड़ रुपये की बढ़ोतरी हुई और इसका कुल मूल्यांकन 9.38 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो गया। वित्तीय क्षेत्र में निवेशकों के बढ़ते विश्वास का लाभ इन प्रमुख बैंकिंग संस्थानों को सबसे अधिक मिला। वित्तीय सेवाओं की प्रमुख कंपनी बजाज फाइनेंस के बाजार पूंजीकरण में भी 18,366 करोड़ रुपये से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई। दूरसंचार क्षेत्र की दिग्गज कंपनी भारती एयरटेल ने भी मजबूत प्रदर्शन करते हुए अपने मूल्यांकन में 14,380 करोड़ रुपये का इजाफा किया। वहीं इंजीनियरिंग और इंफ्रास्ट्रक्चर क्षेत्र की प्रमुख कंपनी लार्सन एंड टुब्रो तथा उपभोक्ता उत्पाद क्षेत्र की अग्रणी कंपनी हिंदुस्तान यूनिलीवर के मार्केट कैप में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई। देश की सबसे मूल्यवान कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज के बाजार पूंजीकरण में भी वृद्धि हुई। हालांकि अन्य कंपनियों की तुलना में यह बढ़त सीमित रही, फिर भी कंपनी 17.49 लाख करोड़ रुपये से अधिक के मूल्यांकन के साथ देश की सबसे मूल्यवान सूचीबद्ध कंपनी बनी रही। दूसरी ओर, सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र की प्रमुख कंपनी टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज को इस सप्ताह नुकसान का सामना करना पड़ा। कंपनी का बाजार पूंजीकरण 13,296 करोड़ रुपये से अधिक घट गया। इसी तरह भारतीय जीवन बीमा निगम के मूल्यांकन में भी मामूली गिरावट दर्ज की गई। इन दोनों कंपनियों को छोड़कर बाकी सभी शीर्ष कंपनियों ने सकारात्मक प्रदर्शन किया। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक आर्थिक माहौल में सुधार, विदेशी निवेशकों की बढ़ती रुचि और वित्तीय स्थिरता से जुड़े कदमों ने भारतीय बाजारों को मजबूती प्रदान की है। साथ ही अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भू-राजनीतिक तनाव कम होने की उम्मीदों ने भी निवेशकों के विश्वास को मजबूत किया है। यदि यह सकारात्मक माहौल आगे भी बना रहता है तो आने वाले सप्ताहों में भारतीय शेयर बाजार और प्रमुख कंपनियों के मूल्यांकन में नई बढ़त देखने को मिल सकती है।