वैश्विक अनिश्चितता और रुपये की कमजोरी के बीच FPI की बड़ी बिकवाली, भारतीय बाजार से रिकॉर्ड पूंजी निकासी जारी

नई दिल्ली । वर्ष 2026 में भारतीय शेयर बाजार विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों की लगातार बिकवाली के दबाव से गुजर रहा है। वैश्विक आर्थिक परिदृश्य में बढ़ती अनिश्चितता, भू-राजनीतिक तनाव, प्रमुख केंद्रीय बैंकों की नीतियों को लेकर असमंजस और रुपये में जारी कमजोरी के कारण विदेशी निवेशकों ने भारतीय इक्विटी बाजार से बड़े पैमाने पर पूंजी निकाली है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, जून के मध्य तक विदेशी निवेशक भारतीय शेयर बाजार से करीब 2.87 लाख करोड़ रुपये की निकासी कर चुके हैं, जो पिछले पूरे वर्ष के मुकाबले भी काफी अधिक है। साल की शुरुआत से ही विदेशी निवेशकों का रुख सतर्क बना हुआ है। जनवरी में उल्लेखनीय बिकवाली दर्ज की गई, जबकि फरवरी ऐसा एकमात्र महीना रहा जब विदेशी निवेशकों ने भारतीय बाजार में शुद्ध निवेश किया। इसके बाद मार्च में निकासी का आंकड़ा तेजी से बढ़ा और अप्रैल तथा मई में भी यह क्रम जारी रहा। जून के शुरुआती दिनों में भी विदेशी निवेशकों ने बाजार से बड़ी रकम निकाली, जिससे यह स्पष्ट संकेत मिला कि वैश्विक निवेशक फिलहाल जोखिम वाले निवेशों के प्रति सावधानी बरत रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जारी आर्थिक चुनौतियां निवेशकों की रणनीति को प्रभावित कर रही हैं। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव, वैश्विक विकास दर को लेकर चिंताएं और अमेरिका सहित प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं की मौद्रिक नीतियों से जुड़ी अनिश्चितता निवेशकों के विश्वास को प्रभावित कर रही है। ऐसे माहौल में कई वैश्विक फंड प्रबंधक अपेक्षाकृत सुरक्षित परिसंपत्तियों और विकसित बाजारों को प्राथमिकता दे रहे हैं। भारतीय बाजार के मूल्यांकन को लेकर भी विदेशी निवेशकों में सतर्कता देखी जा रही है। बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, अन्य उभरते बाजारों की तुलना में भारतीय शेयरों का मूल्यांकन अपेक्षाकृत ऊंचा बना हुआ है। ऐसे में कई निवेशक बेहतर जोखिम-प्रतिफल अनुपात वाले विकल्पों की तलाश कर रहे हैं। इसके अलावा रुपये में लगातार कमजोरी भी विदेशी निवेशकों के वास्तविक रिटर्न को प्रभावित कर रही है, जिससे इक्विटी बाजार में निवेश का आकर्षण कम हुआ है। हालांकि शेयर बाजार से निकासी के बीच एक अलग रुझान भी सामने आया है। विदेशी निवेशकों ने भारतीय बॉन्ड बाजार में रुचि बनाए रखी है। जून के पहले पखवाड़े में बॉन्ड प्रतिभूतियों में उल्लेखनीय निवेश दर्ज किया गया। वर्ष 2026 के दौरान भी निश्चित आय वाले निवेश साधनों में विदेशी पूंजी का प्रवाह जारी रहा है। इससे संकेत मिलता है कि निवेशक भारत की अर्थव्यवस्था से पूरी तरह दूरी नहीं बना रहे हैं, बल्कि अपेक्षाकृत स्थिर और कम जोखिम वाले निवेश विकल्पों को प्राथमिकता दे रहे हैं। विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले समय में विदेशी निवेशकों की रणनीति कई वैश्विक घटनाक्रमों पर निर्भर करेगी। अमेरिका की मौद्रिक नीति, प्रमुख केंद्रीय बैंकों के ब्याज दर संबंधी फैसले, वैश्विक मुद्रास्फीति की स्थिति और भू-राजनीतिक घटनाएं निवेश प्रवाह की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी। यदि वैश्विक स्तर पर अनिश्चितता कम होती है और भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूत वृद्धि दर बनाए रखती है, तो विदेशी निवेशकों का भरोसा फिर से मजबूत हो सकता है। फिलहाल निवेशकों और बाजार सहभागियों की नजर विदेशी निवेश प्रवाह पर बनी हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि एफपीआई की गतिविधियां भारतीय शेयर बाजार की दिशा और निवेशकों की धारणा को प्रभावित करने वाले प्रमुख कारकों में शामिल रहेंगी। मौजूदा परिस्थितियों में निवेशकों के लिए सतर्कता, विविधीकरण और दीर्घकालिक निवेश दृष्टिकोण को प्राथमिकता देना महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
इंदौर में बदला मौसम का मिजाज, प्री-मानसून ने दी दस्तक; बारिश और तेज हवाओं से तापमान 7 डिग्री गिरा

मध्यप्रदेश । इंदौर में लंबे समय से बनी हुई उमस और गर्मी के बीच रविवार को प्री-मानसून गतिविधियों ने राहत पहुंचाई। अलसुबह शहर के कई हिस्सों में बारिश हुई, तेज हवाएं चलीं और बिजली कड़कने के साथ कुछ क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति भी प्रभावित रही। मौसम विभाग के अनुसार पिछले 24 घंटों में शहर में 29.1 मिमी यानी एक इंच से अधिक बारिश दर्ज की गई। बारिश के बाद कुछ समय के लिए मौसम सुहावना रहा, हालांकि दिन चढ़ने के साथ उमस फिर महसूस होने लगी। बारिश और तेज हवाओं का असर तापमान पर भी साफ दिखाई दिया। शनिवार रात न्यूनतम तापमान में करीब 7 डिग्री सेल्सियस की गिरावट दर्ज की गई और यह 19.5 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया। यह सामान्य तापमान से लगभग 5 डिग्री कम रहा। पिछले चार दिनों से रात का तापमान 26 डिग्री सेल्सियस से अधिक बना हुआ था, लेकिन मौसम में आए अचानक बदलाव ने लोगों को गर्मी से बड़ी राहत दी। शनिवार को दिनभर शहर में उमस का असर बना रहा और लगातार चौथे दिन अधिकतम तापमान 38 डिग्री सेल्सियस से ऊपर दर्ज किया गया। हालांकि रात में मौसम का मिजाज बदलने के बाद वातावरण में ठंडक महसूस की गई। रविवार सुबह हुई बारिश के बाद आसमान साफ हो गया और धूप निकल आई, लेकिन हवा में नमी बढ़ने के कारण उमस बनी रही। मौसम विभाग के अनुसार प्रदेश में सक्रिय टर्फ लाइन और प्री-मानसून सिस्टम के कारण अगले चार दिनों तक मौसम में उतार-चढ़ाव जारी रहेगा। इंदौर सहित उज्जैन, रतलाम, झाबुआ, अलीराजपुर, धार, बड़वानी, खरगोन, देवास, हरदा, खंडवा और बुरहानपुर जिलों में आंधी और बारिश की संभावना बनी हुई है। इसके साथ ही कुछ इलाकों में तेज गर्मी और उमस का असर भी देखने को मिल सकता है। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि इस समय पूरे मध्य प्रदेश में प्री-मानसून गतिविधियां सक्रिय हैं। कहीं तेज हवाएं चल रही हैं तो कहीं गरज-चमक के साथ बारिश हो रही है। कुछ क्षेत्रों में ओलावृष्टि की भी घटनाएं सामने आई हैं। मानसून की रफ्तार फिलहाल सामान्य से थोड़ी धीमी है और यह लगभग तीन से चार दिन देरी से आगे बढ़ रहा है। ऐसे में प्रदेश में मानसून के 18 जून तक प्रवेश करने की संभावना जताई जा रही है। बारिश के आंकड़ों पर नजर डालें तो इंदौर में जून माह के दौरान अब तक 55.2 मिमी यानी दो इंच से अधिक वर्षा दर्ज की जा चुकी है। महीने का आधा समय अभी बाकी है, ऐसे में बारिश का आंकड़ा और बढ़ने की संभावना है। सामान्य तौर पर जून महीने में शहर में मानसून पूर्व अच्छी बारिश देखने को मिलती है और इस बार भी यही स्थिति बनती दिखाई दे रही है। इंदौर के मौसम इतिहास की बात करें तो वर्ष 1980 में जून महीने में 17 इंच से अधिक वर्षा दर्ज की गई थी, जो अब तक का रिकॉर्ड है। वहीं 23 जून 2003 को 24 घंटे में पांच इंच बारिश हुई थी। तापमान के रिकॉर्ड में 3 जून 1991 को अधिकतम तापमान 45.8 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया था, जबकि 12 जून 1958 को न्यूनतम तापमान 18.9 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया था। फिलहाल मौसम विभाग ने लोगों को बदलते मौसम को देखते हुए सावधानी बरतने और गरज-चमक के दौरान सुरक्षित स्थानों पर रहने की सलाह दी है।
खून फैक्ट्री में नहीं बनता, इंसान ही बचाता है इंसान की जिंदगी: थैलेसीमिया पीड़ित वैभव बने रक्तदान जागरूकता की मिसाल

मध्यप्रदेश । विश्व रक्तदाता दिवस के अवसर पर इंदौर के 29 वर्षीय वैभव सोनी की कहानी मानवता, संघर्ष और सेवा का ऐसा उदाहरण पेश करती है, जो हर किसी को प्रेरित कर सकती है। महज दो वर्ष की उम्र में उन्हें पता चला कि वे Thalassemia से पीड़ित हैं। डॉक्टरों ने परिवार को बताया कि उनकी जिंदगी नियमित रूप से खून चढ़ाने पर निर्भर रहेगी। तब से लेकर आज तक वैभव का जीवन रक्तदाताओं की संवेदनशीलता और समाज के सहयोग से आगे बढ़ रहा है। वर्तमान में वैभव को हर आठ से दस दिन में ब्लड ट्रांसफ्यूजन की जरूरत पड़ती है। बचपन में यह अंतराल लगभग एक महीने का था, लेकिन उम्र बढ़ने के साथ खून की आवश्यकता भी बढ़ती गई। अब तक उन्हें 400 से अधिक यूनिट रक्त चढ़ाया जा चुका है। लगातार रक्त चढ़ने के कारण शरीर में आयरन की मात्रा बढ़ जाती है, जिससे हृदय, लिवर और अन्य अंगों पर दुष्प्रभाव पड़ सकता है। इसे नियंत्रित करने के लिए उन्हें नियमित दवाइयों और इंजेक्शनों का सहारा लेना पड़ता है। उनके उपचार पर हर महीने लगभग 20 से 25 हजार रुपए खर्च होते हैं। हालांकि इन कठिन परिस्थितियों के बावजूद वैभव ने कभी हार नहीं मानी। उन्होंने बायोटेक्नोलॉजी में एमएससी की पढ़ाई पूरी की और अपनी बीमारी को समाजसेवा का माध्यम बना लिया। बचपन में अपने माता-पिता को रक्त की व्यवस्था के लिए संघर्ष करते देखकर उनके मन में यह संकल्प पैदा हुआ कि वे अन्य मरीजों को इस परेशानी से बचाने के लिए काम करेंगे। यही सोच उन्हें रक्तदान जागरूकता अभियान से जोड़कर ले गई। पिछले कई वर्षों से वे विभिन्न सामाजिक संस्थाओं के साथ मिलकर रक्तदान शिविरों का आयोजन कर रहे हैं और लोगों को नियमित रक्तदान के लिए प्रेरित कर रहे हैं। वे ‘मानवता की पहचान’ संस्था के साथ सक्रिय रूप से जुड़े हुए हैं। हाल ही में इंदौर के प्रसिद्ध Khajrana Ganesh Temple परिसर में आयोजित दो दिवसीय महारक्तदान शिविर में उनकी टीम ने 821 यूनिट रक्त संग्रहित कर उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की। संस्था द्वारा अब तक हजारों यूनिट रक्त संग्रह किया जा चुका है। वर्ष 2022 में एक ही स्थान पर 12 घंटे के भीतर 951 यूनिट रक्त एकत्र कर विश्व रिकॉर्ड भी बनाया गया था। इस उपलब्धि को ‘वर्ल्ड बुक ऑफ रिकॉर्ड’ में दर्ज किया गया। इसके अलावा संस्था को ‘इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड’ में भी स्थान मिल चुका है। वैभव इन अभियानों का महत्वपूर्ण हिस्सा रहे हैं। समाजसेवा और थैलेसीमिया मरीजों की मदद के लिए उन्हें ‘रियल लाइफ हीरो’ सहित कई सम्मान भी प्राप्त हो चुके हैं। वैभव कहते हैं कि विज्ञान ने भले ही बड़ी प्रगति कर ली हो, लेकिन आज भी खून किसी फैक्ट्री में नहीं बनता। एक इंसान ही दूसरे इंसान की जिंदगी बचा सकता है। वे बताते हैं कि एक यूनिट रक्त से तीन लोगों की जान बचाई जा सकती है, क्योंकि ब्लड बैंक में इसे विभिन्न घटकों में विभाजित कर जरूरतमंद मरीजों को दिया जाता है। वे युवाओं से नियमित स्वैच्छिक रक्तदान करने की अपील करते हैं। साथ ही थैलेसीमिया जैसी बीमारी को रोकने के लिए विवाह से पहले जांच कराने पर भी जोर देते हैं। उनका मानना है कि जागरूकता और समय पर जांच के माध्यम से इस बीमारी को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है। विश्व रक्तदाता दिवस पर वैभव की कहानी यह संदेश देती है कि परिस्थितियां चाहे कितनी भी कठिन क्यों न हों, यदि संकल्प मजबूत हो तो व्यक्ति न केवल अपनी जिंदगी संवार सकता है, बल्कि हजारों लोगों के जीवन में भी उम्मीद की रोशनी जगा सकता है।
इस सप्ताह शेयर बाजार के लिए अहम होंगे WPI आंकड़े और फेड का फैसला, विदेशी निवेशकों की चाल पर भी रहेगी नजर

नई दिल्ली । भारतीय शेयर बाजार के लिए नया कारोबारी सप्ताह कई महत्वपूर्ण घरेलू और वैश्विक घटनाक्रमों के बीच शुरू होने जा रहा है। निवेशकों की नजर इस बार केवल कंपनियों के प्रदर्शन या आर्थिक संकेतकों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि महंगाई के आंकड़ों, अमेरिकी केंद्रीय बैंक के ब्याज दर संबंधी फैसले, कच्चे तेल की कीमतों और विदेशी निवेशकों की गतिविधियों पर भी विशेष ध्यान रहेगा। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में इन कारकों का संयुक्त प्रभाव निवेशकों की रणनीति और बाजार की दिशा तय कर सकता है। घरेलू स्तर पर सबसे महत्वपूर्ण घटनाओं में मई महीने के थोक मूल्य सूचकांक आधारित महंगाई के आंकड़े शामिल हैं। ये आंकड़े यह संकेत देंगे कि उत्पादन और आपूर्ति श्रृंखला से जुड़ी लागतों में किस प्रकार का बदलाव देखने को मिल रहा है। महंगाई की स्थिति का असर उद्योगों की लागत, कंपनियों की लाभप्रदता और आर्थिक गतिविधियों पर पड़ता है, इसलिए निवेशक इन आंकड़ों का बारीकी से विश्लेषण करेंगे। वैश्विक स्तर पर अमेरिकी फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति बैठक इस सप्ताह का सबसे बड़ा घटनाक्रम मानी जा रही है। निवेशकों की नजर केवल ब्याज दरों पर नहीं होगी, बल्कि फेडरल रिजर्व की भविष्य की नीति, महंगाई को लेकर उसके दृष्टिकोण और आर्थिक वृद्धि के अनुमान पर भी रहेगी। यदि केंद्रीय बैंक आगामी महीनों में ब्याज दरों में बदलाव के संकेत देता है तो इसका प्रभाव वैश्विक पूंजी प्रवाह और उभरते बाजारों की निवेश धारणा पर पड़ सकता है। इस बीच अमेरिका और ईरान के बीच संभावित समझौते को लेकर भी अंतरराष्ट्रीय बाजारों में उत्सुकता बनी हुई है। यदि दोनों देशों के बीच तनाव कम होता है और क्षेत्र में स्थिरता बढ़ती है तो इसका सीधा असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर दिखाई दे सकता है। विशेष रूप से कच्चे तेल की कीमतों में नरमी भारत जैसे बड़े आयातक देश के लिए सकारात्मक मानी जाती है, क्योंकि इससे आयात बिल और महंगाई के दबाव में कमी आ सकती है। विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों की गतिविधियां भी बाजार की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी। हाल के महीनों में विदेशी निवेशकों द्वारा भारतीय शेयर बाजार से लगातार निकासी देखी गई है। बड़ी मात्रा में पूंजी निकासी का असर बाजार की तरलता और निवेशकों के भरोसे पर पड़ता है। ऐसे में निवेशक यह देखना चाहेंगे कि वैश्विक परिस्थितियों और फेडरल रिजर्व के निर्णय के बाद विदेशी निवेशकों का रुख बदलता है या नहीं। मॉनसून की प्रगति भी घरेलू अर्थव्यवस्था के लिए एक महत्वपूर्ण कारक बनी हुई है। सामान्य और संतुलित वर्षा कृषि उत्पादन को समर्थन देती है, जिससे ग्रामीण मांग मजबूत होती है और अर्थव्यवस्था को गति मिलती है। इसी कारण कृषि, उपभोक्ता और ग्रामीण क्षेत्रों से जुड़ी कंपनियों के शेयरों पर भी निवेशकों की नजर बनी रहेगी। पिछले सप्ताह घरेलू शेयर बाजार ने मजबूत प्रदर्शन किया था और प्रमुख सूचकांकों में उल्लेखनीय बढ़त दर्ज की गई थी। बाजार को समर्थन देने वाले प्रमुख कारणों में वैश्विक स्तर पर तनाव कम होने की उम्मीद और कच्चे तेल की कीमतों में नरमी शामिल रही। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि आगामी सप्ताह में उतार-चढ़ाव बढ़ सकता है क्योंकि निवेशक विभिन्न आर्थिक संकेतकों और वैश्विक घटनाओं के आधार पर अपने निवेश निर्णयों का पुनर्मूल्यांकन करेंगे। कुल मिलाकर, यह सप्ताह भारतीय शेयर बाजार के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। घरेलू आर्थिक आंकड़े, वैश्विक मौद्रिक नीति, तेल बाजार की दिशा और विदेशी निवेशकों की गतिविधियां मिलकर बाजार की आगामी चाल को निर्धारित कर सकती हैं। ऐसे में निवेशकों के लिए हर प्रमुख घटनाक्रम पर सतर्क नजर बनाए रखना आवश्यक होगा।
MPL 2026 में फीके पड़े IPL सितारे, 15 लाख के आशुतोष 95 रन पर सिमटे; माधव तिवारी और अक्षत रघुवंशी बने नई सनसनी

मध्यप्रदेश । मध्यप्रदेश प्रीमियर लीग (MPL) 2026 में जहां IPL में चमक बिखेर चुके खिलाड़ियों पर क्रिकेट प्रेमियों की निगाहें टिकी हुई थीं, वहीं लीग के शुरुआती चरण में कई बड़े नाम अपेक्षित प्रदर्शन करने में नाकाम रहे हैं। दूसरी ओर कुछ युवा खिलाड़ियों ने अपने शानदार खेल से सभी का ध्यान अपनी ओर खींचा है और खुद को भविष्य के सितारों के रूप में स्थापित करने की दिशा में मजबूत कदम बढ़ाए हैं। सबसे ज्यादा चर्चा मालवा स्टैलियन्स के कप्तान आशुतोष शर्मा की हो रही है। MPL 2026 की नीलामी में उन्हें सबसे ऊंची बोली लगाकर 15 लाख रुपए में खरीदा गया था। लीग के सबसे महंगे खिलाड़ी होने के कारण उनसे बड़े और मैच जिताऊ प्रदर्शन की उम्मीद थी, लेकिन अब तक छह पारियों में वह केवल 95 रन ही बना सके हैं। उनका खराब फॉर्म टीम और प्रशंसकों दोनों के लिए चिंता का विषय बना हुआ है। वहीं IPL में लगातार दूसरी बार Royal Challengers Bengaluru को खिताब दिलाने वाले रजत पाटीदार भी शुरुआती मैचों में संघर्ष करते नजर आए। हालांकि मालवा स्टैलियन्स के खिलाफ उन्होंने 30 गेंदों में नाबाद 65 रन की शानदार पारी खेलकर वापसी के संकेत जरूर दिए, लेकिन कुल मिलाकर तीन मैचों में उनके 105 रन उम्मीदों के अनुरूप नहीं माने जा रहे हैं। इंदौर पिंक पैंथर्स के कप्तान वेंकटेश अय्यर भी अब तक अपने पुराने रंग में दिखाई नहीं दिए हैं। तीन मुकाबलों में उन्होंने 88 रन बनाए हैं और सिर्फ एक विकेट हासिल किया है। हालांकि मालवा स्टैलियन्स के खिलाफ 22 गेंदों में 54 रन की विस्फोटक पारी खेलकर उन्होंने अपनी क्षमता का परिचय दिया, लेकिन निरंतरता की कमी साफ नजर आई। गेंदबाजी में भी कुछ बड़े नाम अपेक्षाओं पर खरे नहीं उतर पाए। कुलदीप सेन, जो IPL में अपनी तेज गेंदबाजी के लिए जाने जाते हैं, MPL में अब तक प्रभाव छोड़ने में असफल रहे हैं। एक मुकाबले में उन्होंने चार ओवर में 47 रन खर्च किए और कोई विकेट हासिल नहीं कर सके। युवा खिलाड़ियों ने मचाया धमाल जहां IPL सितारे संघर्ष कर रहे हैं, वहीं उज्जैन फाल्कन्स के ऑलराउंडर माधव तिवारी लीग के सबसे प्रभावशाली खिलाड़ियों में शामिल हो गए हैं। उन्होंने पांच मैचों में 286 रन बनाए हैं और उनका स्ट्राइक रेट 182.19 का रहा है। इसके अलावा गेंदबाजी में भी सात विकेट लेकर उन्होंने अपनी ऑलराउंड क्षमता का शानदार प्रदर्शन किया है। रीवा जगुआर्स के युवा बल्लेबाज अक्षत रघुवंशी ने भी अपनी विस्फोटक बल्लेबाजी से सभी को प्रभावित किया है। दो मैचों में उन्होंने 127 रन बनाए हैं और उनका स्ट्राइक रेट 276.09 का रहा है। 32 गेंदों में खेली गई 85 रन की पारी लीग की सबसे चर्चित पारियों में शामिल हो चुकी है। गेंदबाजों में चमके आवेश खान चंबल घड़ियाल के तेज गेंदबाज आवेश खान ने अपने IPL अनुभव का शानदार उपयोग करते हुए तीन मैचों में छह विकेट झटके हैं। उनकी 6.83 की इकॉनमी दर्शाती है कि उन्होंने बल्लेबाजों को खुलकर खेलने का अवसर नहीं दिया। उधर, भोपाल लेपर्ड्स के आधिकारिक कप्तान अरशद खान अभी तक मैदान पर नहीं उतरे हैं। उनकी गैरमौजूदगी में अनिकेत वर्मा ने टीम की कमान संभाली और चार मैचों में 137 रन बनाकर जिम्मेदारी बखूबी निभाई है। इसके अलावा शिवांग कुमार, कुमार कार्तिकेय, शिवम शुक्ला और मंगेश यादव जैसे खिलाड़ियों ने भी अपने प्रदर्शन से प्रभावित किया है। विशेष रूप से शिवम शुक्ला का एक पारी में पांच विकेट लेने का कारनामा MPL 2026 के अब तक के सबसे यादगार प्रदर्शनों में गिना जा रहा है। लीग के शुरुआती चरण ने यह साफ कर दिया है कि MPL केवल बड़े नामों की प्रतियोगिता नहीं है, बल्कि यह युवा प्रतिभाओं को खुद को साबित करने का बेहतरीन मंच भी बनता जा रहा है।
यूपीआई बना वैश्विक मिसाल, दक्षिण अफ्रीका ने भारत के डिजिटल भुगतान मॉडल को बताया भविष्य की अर्थव्यवस्था का आधार

नई दिल्ली । भारत की यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (यूपीआई) प्रणाली एक बार फिर वैश्विक स्तर पर चर्चा का विषय बनी हुई है। दक्षिण अफ्रीका में डिजिटल भुगतान व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में चल रही तैयारियों के बीच भारतीय यूपीआई मॉडल को एक प्रभावी और सफल उदाहरण के रूप में देखा जा रहा है। दक्षिण अफ्रीकी रिजर्व बैंक के गवर्नर लेसेत्जा कन्यागो ने भी सार्वजनिक रूप से भारत की इस प्रणाली की सराहना करते हुए इसे आधुनिक डिजिटल अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण मॉडल बताया है। दक्षिण अफ्रीका वर्तमान समय में नकदी आधारित लेनदेन को कम करने और डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने की रणनीति पर काम कर रहा है। इस दिशा में वहां की सरकार और वित्तीय संस्थान एक ऐसे राष्ट्रीय भुगतान नेटवर्क के विकास की योजना बना रहे हैं जो लोगों को तेज, सुरक्षित और कम लागत वाली डिजिटल सेवाएं उपलब्ध करा सके। इसी संदर्भ में भारत के यूपीआई मॉडल को विशेष महत्व दिया जा रहा है, जिसने कुछ ही वर्षों में करोड़ों लोगों को डिजिटल भुगतान व्यवस्था से जोड़ दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यूपीआई की सबसे बड़ी ताकत इसकी सरलता और पहुंच है। मोबाइल नंबर, क्यूआर कोड और बैंक खातों के एकीकरण के माध्यम से यह प्रणाली भुगतान प्रक्रिया को बेहद आसान बना देती है। इसके लिए महंगे उपकरणों या जटिल तकनीकी ढांचे की आवश्यकता नहीं होती, जिससे छोटे व्यापारियों और आम नागरिकों के लिए भी इसका उपयोग सुविधाजनक हो जाता है। दक्षिण अफ्रीका की सरकार भी ऐसी प्रणाली विकसित करने की कोशिश कर रही है, जो नागरिकों को बिना अतिरिक्त शुल्क के रियल-टाइम भुगतान की सुविधा प्रदान कर सके। इसका उद्देश्य नकदी पर निर्भरता को कम करना, वित्तीय समावेशन को बढ़ाना और आर्थिक गतिविधियों को अधिक पारदर्शी बनाना है। सरकार का मानना है कि डिजिटल भुगतान व्यवस्था के विस्तार से आर्थिक लेनदेन की गति बढ़ेगी और प्रशासनिक प्रक्रियाएं भी अधिक प्रभावी होंगी। हालांकि, इस दिशा में दक्षिण अफ्रीका के सामने कई चुनौतियां भी मौजूद हैं। देश की बड़ी आबादी अब भी औपचारिक बैंकिंग सेवाओं से पूरी तरह नहीं जुड़ी है। ग्रामीण क्षेत्रों में इंटरनेट कनेक्टिविटी सीमित है और मोबाइल डेटा की लागत भी अपेक्षाकृत अधिक मानी जाती है। इसके अलावा, बिजली आपूर्ति से जुड़ी समस्याएं डिजिटल बुनियादी ढांचे की स्थिरता को प्रभावित कर सकती हैं। इन कारणों से कैशलेस अर्थव्यवस्था की ओर बढ़ना आसान नहीं माना जा रहा है। इसके बावजूद डिजिटल भुगतान क्षेत्र में तेजी से विस्तार की संभावनाएं दिखाई दे रही हैं। वित्तीय तकनीक, डिजिटल वॉलेट और प्रीपेड भुगतान साधनों का उपयोग लगातार बढ़ रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आवश्यक बुनियादी ढांचे को मजबूत किया गया तो दक्षिण अफ्रीका आने वाले वर्षों में डिजिटल भुगतान के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति कर सकता है। भारत का यूपीआई पहले ही कई देशों में अपनी उपस्थिति दर्ज करा चुका है और इसे दुनिया के सबसे सफल रियल-टाइम भुगतान प्लेटफॉर्म में गिना जाता है। इसकी सफलता ने विकासशील देशों को यह दिखाया है कि सीमित लागत में भी व्यापक डिजिटल भुगतान नेटवर्क तैयार किया जा सकता है। दक्षिण अफ्रीका द्वारा इस मॉडल में दिखाई जा रही रुचि भारत की डिजिटल क्षमता और वित्तीय नवाचार की वैश्विक स्वीकार्यता का एक महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है।
खाद्य उत्पादों पर गुमराह करने वाले दावों के खिलाफ सख्ती, एफएसएसएआई ने कई नामी ब्रांड्स को भेजे नोटिस

नई दिल्ली । भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण ने खाद्य उत्पादों की पैकेजिंग और ब्रांडिंग में भ्रामक दावों के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए कई कंपनियों के विरुद्ध कार्रवाई शुरू की है। नियामक संस्था का कहना है कि कुछ कंपनियां अपने उत्पादों के नाम, ट्रेडमार्क और प्रचार संबंधी दावों के माध्यम से उपभोक्ताओं के बीच ऐसी धारणा बना रही हैं, जो वास्तविक उत्पाद विशेषताओं से मेल नहीं खाती। खाद्य सुरक्षा नियामक ने कई फूड बिजनेस ऑपरेटर्स को नोटिस जारी कर उनसे स्पष्टीकरण मांगा है। इन नोटिसों में आरोप लगाया गया है कि संबंधित कंपनियां खाद्य सुरक्षा और मानक कानून के तहत निर्धारित लेबलिंग और डिस्प्ले नियमों का पालन नहीं कर रही हैं। नियामक का मानना है कि ऐसे नाम और दावे ग्राहकों को उत्पाद की गुणवत्ता, स्वास्थ्य लाभ या विशेष प्रकृति के बारे में भ्रमित कर सकते हैं। कार्रवाई के दायरे में आए कई ब्रांड अपने उत्पादों के नाम में “हेल्दी”, “ऑर्गेनिक”, “वीगन” और अन्य स्वास्थ्य संबंधी शब्दों का उपयोग कर रहे हैं। एफएसएसएआई का कहना है कि ऐसे शब्दों का इस्तेमाल तभी किया जाना चाहिए जब संबंधित उत्पाद निर्धारित मानकों, प्रमाणपत्रों और नियामकीय शर्तों को पूरा करते हों। अन्यथा यह उपभोक्ताओं को गुमराह करने की श्रेणी में आ सकता है। नियामक ने विशेष रूप से उन उत्पादों पर चिंता जताई है जिनके नाम से यह संदेश जाता है कि वे स्वास्थ्य के लिए अधिक लाभकारी हैं, जबकि उनकी संरचना या सामग्री इस दावे का पूरी तरह समर्थन नहीं करती। अधिकारियों का मानना है कि खाद्य उत्पादों की खरीद के समय उपभोक्ता ब्रांड नाम और पैकेजिंग पर काफी भरोसा करते हैं। ऐसे में किसी भी प्रकार का भ्रामक दावा उपभोक्ता अधिकारों और पारदर्शिता के सिद्धांतों के विपरीत है। एफएसएसएआई ने कुछ कंपनियों द्वारा उपयोग किए जा रहे “विटामिन”, “हेल्दी मिक्स” और “वीगन” जैसे शब्दों पर भी आपत्ति दर्ज की है। नियामक के अनुसार, यदि किसी शब्द की स्पष्ट कानूनी परिभाषा या मान्यता नहीं है, तो उसका उपयोग उपभोक्ताओं के बीच गलत धारणा पैदा कर सकता है। इसी प्रकार वीगन उत्पादों के लिए आवश्यक स्वीकृतियों और अनुमोदनों का अभाव भी गंभीर नियामकीय चिंता का विषय माना गया है। इसके अलावा “ऑर्गेनिक” शब्द के उपयोग को लेकर भी कई कंपनियों को नोटिस भेजे गए हैं। एफएसएसएआई का कहना है कि यदि किसी उत्पाद को ऑर्गेनिक बताया जाता है तो उसके लिए निर्धारित प्रमाणन और अनुमोदन होना अनिवार्य है। बिना आवश्यक प्रमाणपत्रों के ऐसे दावों का इस्तेमाल ग्राहकों को भ्रमित कर सकता है और बाजार में निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा को भी प्रभावित कर सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि खाद्य उद्योग के तेजी से विस्तार के बीच लेबलिंग की पारदर्शिता बेहद महत्वपूर्ण हो गई है। उपभोक्ता अब स्वास्थ्य और पोषण संबंधी दावों के आधार पर उत्पादों का चयन करते हैं। ऐसे में नियामकीय निगरानी उपभोक्ता हितों की रक्षा के लिए आवश्यक मानी जा रही है। एफएसएसएआई ने सभी खाद्य कारोबार संचालकों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि वे लेबलिंग, पैकेजिंग और प्रचार संबंधी सभी नियमों का कड़ाई से पालन करें। नियामक का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि बाजार में उपलब्ध खाद्य उत्पादों के बारे में ग्राहकों को सही, स्पष्ट और तथ्यात्मक जानकारी मिले तथा किसी भी प्रकार की भ्रामक मार्केटिंग पर प्रभावी रोक लगाई जा सके।
इंदौर में 22 जोनों में लगेंगे जनकल्याण कैंप, तीन दिन तक एक ही छत के नीचे मिलेंगी सरकारी योजनाओं की सुविधाएं

मध्यप्रदेश । इंदौरवासियों के लिए राहत और सुविधा भरी खबर है। अब सरकारी योजनाओं का लाभ लेने, आवेदन जमा करने या विभिन्न विभागों से जुड़ी समस्याओं के समाधान के लिए अलग-अलग कार्यालयों के चक्कर लगाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। मध्य प्रदेश शासन के निर्देशों के तहत नगर पालिक निगम इंदौर शहर के सभी 22 जोन कार्यालयों में तीन दिवसीय जनकल्याण कैंप आयोजित करने जा रहा है। ये कैंप 16 जून से 18 जून तक लगाए जाएंगे, जहां नागरिकों को एक ही स्थान पर अनेक सरकारी सेवाओं और योजनाओं का लाभ उपलब्ध कराया जाएगा। नगर निगम द्वारा आयोजित इन शिविरों का मुख्य उद्देश्य ऐसे पात्र नागरिकों की पहचान करना है, जो विभिन्न सरकारी योजनाओं के लिए पात्र होने के बावजूद अब तक लाभ से वंचित हैं। कैंप के माध्यम से केंद्र और राज्य सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं को अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने का प्रयास किया जाएगा। इसके साथ ही आम नागरिकों की शिकायतों और समस्याओं का त्वरित एवं प्रभावी निराकरण भी किया जाएगा। महापौर पुष्यमित्र भार्गव और नगर निगम आयुक्त क्षितिज सिंघल के अनुसार विभिन्न विभागों के मैदानी अमले की सहायता से पात्र हितग्राहियों की पहचान की जाएगी। इसके बाद उनका पंजीयन, आवेदन स्वीकृति और योजनाओं के लाभ वितरण की प्रक्रिया प्राथमिकता के आधार पर पूरी की जाएगी। कैंप में विभागीय स्टॉल भी लगाए जाएंगे, जहां नागरिकों को विभिन्न सरकारी योजनाओं की विस्तृत जानकारी दी जाएगी और आवश्यक सेवाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। नगर निगम प्रशासन का कहना है कि इन शिविरों के जरिए लोगों को योजनाओं से जोड़ने के साथ-साथ प्रशासन और जनता के बीच सीधा संवाद भी स्थापित होगा। इससे पात्र हितग्राहियों को समय पर लाभ मिल सकेगा और योजनाओं के क्रियान्वयन में पारदर्शिता बढ़ेगी। इस प्रकार आयोजित होंगे कैंपअपर आयुक्त नरेंद्र नाथ पांडे के अनुसार जनकल्याण कैंप चरणबद्ध तरीके से आयोजित किए जाएंगे0-16 जून : जोन क्रमांक 1 से 8 तक के जोन कार्यालयों में17 जून : जोन क्रमांक 9 से 15 तक के जोन कार्यालयों में18 जून : जोन क्रमांक 16 से 22 तक के जोन कार्यालयों में कैंप के दौरान विभिन्न विभागों द्वारा संचालित योजनाओं और सेवाओं से संबंधित जानकारी उपलब्ध कराई जाएगी। साथ ही आवेदन, पंजीयन, दस्तावेज सत्यापन, पात्रता जांच और सेवा वितरण जैसी प्रक्रियाएं भी मौके पर ही पूरी की जाएंगी। इससे नागरिकों का समय और श्रम दोनों बचेंगे तथा उन्हें सरकारी योजनाओं का लाभ तेजी से मिल सकेगा। नगर निगम आयुक्त ने संबंधित अधिकारियों को कैंपों के सफल संचालन और अधिकतम नागरिकों तक पहुंच सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश भी जारी किए हैं। प्रशासन को उम्मीद है कि इस पहल से बड़ी संख्या में जरूरतमंद नागरिक लाभान्वित होंगे और सरकारी योजनाओं का दायरा और अधिक व्यापक होगा।
अमेरिका-ईरान शांति समझौते पर बढ़ी वैश्विक नजरें, ट्रंप ने आज हस्ताक्षर का जताया भरोसा, तेहरान ने कहा- अंतिम सहमति में लग सकते हैं कुछ और दिन

नई दिल्ली । अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से जारी तनाव को समाप्त करने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है और दोनों देशों के बीच प्रस्तावित शांति समझौता अब अंतिम चरण में पहुंचता दिखाई दे रहा है। हालांकि समझौते को लेकर दोनों पक्षों के सार्वजनिक बयानों में समयसीमा को लेकर अंतर देखने को मिला है। अमेरिका ने जहां रविवार को समझौते पर हस्ताक्षर होने की संभावना जताई है, वहीं ईरान ने संकेत दिया है कि दस्तावेज को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया में अभी कुछ और समय लग सकता है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि समझौते पर हस्ताक्षर होते ही क्षेत्रीय समुद्री व्यापार के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य को सभी जहाजों के लिए पूरी तरह खोल दिया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि वर्तमान वार्ता का स्वरूप पूर्व की सरकारों के दौरान हुई बातचीत से अलग है और दोनों देशों के बीच इस बार अधिक व्यावहारिक तथा संतुलित समझ विकसित हुई है। दूसरी ओर, ईरान ने समझौते की दिशा में हुई प्रगति को स्वीकार किया है, लेकिन तत्काल हस्ताक्षर की संभावना को लेकर सतर्क रुख अपनाया है। ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने कहा कि बातचीत सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ रही है, लेकिन समझौता रविवार को ही अंतिम रूप ले लेगा, यह कहना जल्दबाजी होगी। उनके अनुसार आने वाले दिनों में समझौता ज्ञापन को अंतिम रूप दिए जाने की पूरी संभावना है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने भी समझौते के स्वरूप और प्रक्रिया को लेकर महत्वपूर्ण जानकारी साझा की है। उन्होंने बताया कि प्रस्तावित दस्तावेज लगभग डेढ़ से दो पृष्ठों का है, जिसमें 14 प्रमुख बिंदुओं को शामिल किया गया है। इस दस्तावेज पर पिछले दो महीनों से अधिक समय से दोनों देशों के बीच गहन वार्ताएं चल रही हैं। उन्होंने यह भी कहा कि समझौते के प्रत्येक प्रावधान की समीक्षा ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद और सैन्य नेतृत्व द्वारा की गई है। प्रस्तावित समझौते के पहले चरण में क्षेत्रीय संघर्षों को समाप्त करने पर विशेष जोर दिया गया है। इसके तहत लेबनान सहित विभिन्न मोर्चों पर चल रहे संघर्षों के औपचारिक अंत की रूपरेखा तय की गई है। साथ ही दोनों पक्षों द्वारा भविष्य में किसी नए सैन्य टकराव की शुरुआत नहीं करने की प्रतिबद्धता भी शामिल है। इसके अतिरिक्त ईरानी बंदरगाहों पर लागू अमेरिकी नौसैनिक प्रतिबंधों को हटाने तथा ईरान की फ्रीज की गई संपत्तियों को जारी करने के लिए एक ढांचा तैयार करने का प्रस्ताव रखा गया है। समझौते में होर्मुज जलडमरूमध्य के संचालन को लेकर भी विशेष व्यवस्था प्रस्तावित की गई है। इसके तहत 60 दिनों की एक संक्रमणकालीन अवधि निर्धारित की जा सकती है, जिसके दौरान समुद्री यातायात और सुरक्षा संबंधी व्यवस्थाओं को स्थिर किया जाएगा। यह कदम वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय व्यापार के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। दूसरे चरण में अगले 60 दिनों तक व्यापक वार्ताओं का दौर जारी रखने की योजना बनाई गई है। इन चर्चाओं का मुख्य उद्देश्य परमाणु कार्यक्रम, यूरेनियम संवर्धन और अन्य रणनीतिक मुद्दों पर स्थायी समाधान तलाशना होगा। साथ ही दोनों देशों के बीच लंबे समय से लंबित राजनीतिक और सुरक्षा संबंधी प्रश्नों पर भी चर्चा की जाएगी। विश्लेषकों का मानना है कि यदि यह समझौता सफलतापूर्वक लागू होता है तो इससे न केवल पश्चिम एशिया में तनाव कम होगा, बल्कि वैश्विक ऊर्जा बाजार, समुद्री व्यापार और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति पर भी इसका व्यापक प्रभाव देखने को मिल सकता है। फिलहाल दुनिया की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि दोनों पक्ष अंतिम सहमति तक कब पहुंचते हैं और औपचारिक हस्ताक्षर की प्रक्रिया कब पूरी होती है।
सिंधु जल संधि पर भारत की सख्ती का असर, पाकिस्तान के एक तिहाई हिस्से में गहराया जल संकट, सिंध-बलूचिस्तान की अर्थव्यवस्था पर बढ़ा खतरा

नई दिल्ली । भारत द्वारा सिंधु जल संधि पर रोक लगाए जाने के बाद पाकिस्तान के कई हिस्सों में जल संकट गहराता दिखाई दे रहा है। विशेष रूप से सिंध और बलूचिस्तान प्रांतों में पानी की उपलब्धता लगातार घटने से कृषि गतिविधियों, स्थानीय अर्थव्यवस्था और जल प्रबंधन व्यवस्था पर दबाव बढ़ गया है। हालात ऐसे बन रहे हैं कि देश की बड़ी आबादी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से इस संकट के प्रभाव को महसूस कर रही है। पिछले एक वर्ष के दौरान पानी की आपूर्ति में आई कमी ने पाकिस्तान के उन क्षेत्रों की चिंताएं बढ़ा दी हैं जो लंबे समय से सिंधु नदी प्रणाली पर निर्भर रहे हैं। सिंध प्रांत, जिसे पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था के महत्वपूर्ण केंद्रों में गिना जाता है, इस संकट से सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्रों में शामिल है। कराची सहित कई प्रमुख इलाकों में जल उपलब्धता को लेकर चिंता लगातार बढ़ रही है और विशेषज्ञ भविष्य में स्थिति और गंभीर होने की आशंका जता रहे हैं। जल संकट का सबसे बड़ा असर खेती-किसानी पर दिखाई दे रहा है। सिंध और बलूचिस्तान के विशाल कृषि क्षेत्र सिंचाई के लिए नहरों और बैराजों से मिलने वाले पानी पर निर्भर हैं। पानी की कमी के कारण फसलों की उत्पादकता प्रभावित होने का खतरा बढ़ गया है। किसानों के सामने सिंचाई व्यवस्था बनाए रखना चुनौती बनती जा रही है, जिससे कृषि आधारित आय और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। सिंधु नदी पर स्थित सुक्कुर बैराज के आसपास की स्थिति विशेष रूप से चिंता का विषय बनी हुई है। यह बैराज लाखों एकड़ कृषि भूमि तक पानी पहुंचाने वाली प्रमुख नहर प्रणाली का आधार माना जाता है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार कई प्रमुख नहरों में जल प्रवाह सामान्य स्तर से काफी नीचे पहुंच गया है। इससे खेतों तक पानी पहुंचाने की क्षमता प्रभावित हुई है और कई इलाकों में सिंचाई कार्यक्रमों को पुनर्गठित करना पड़ रहा है। जल संकट के बीच पाकिस्तान के भीतर प्रांतों के बीच पानी के बंटवारे को लेकर विवाद भी तेज हो गया है। सिंध प्रशासन ने आरोप लगाया है कि पंजाब अपने निर्धारित हिस्से से अधिक पानी का उपयोग कर रहा है। इस मुद्दे ने पहले से मौजूद राजनीतिक और प्रशासनिक तनाव को और बढ़ा दिया है। जल वितरण को लेकर उठ रहे सवालों ने संघीय स्तर पर संसाधनों के प्रबंधन की चुनौती को भी सामने ला दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पानी की उपलब्धता में जल्द सुधार नहीं हुआ तो कृषि उत्पादन, खाद्य सुरक्षा और स्थानीय रोजगार पर व्यापक असर पड़ सकता है। सिंध और बलूचिस्तान जैसे क्षेत्रों में बड़ी आबादी की आजीविका सीधे कृषि और उससे जुड़े व्यवसायों पर आधारित है। ऐसे में जल संकट केवल प्राकृतिक संसाधन का मुद्दा नहीं रह गया है, बल्कि आर्थिक और सामाजिक स्थिरता से जुड़ा विषय बन चुका है। इस बीच भारत की ओर से यह संकेत मिले हैं कि आतंकवाद और सीमा सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर उसके रुख में कोई बदलाव नहीं है। ऐसे में पाकिस्तान के लिए जल प्रबंधन, संसाधनों के बेहतर उपयोग और आंतरिक वितरण व्यवस्था को प्रभावी बनाना आने वाले समय की सबसे बड़ी चुनौतियों में शामिल माना जा रहा है।