मिर्गी के दौरे में जूता या मोजा सुंघाना इलाज नहीं, जानिए क्या है सच्चाई और सही फर्स्ट एड

नई दिल्ली । भारत में आज भी मिर्गी के दौरे को लेकर कई तरह की भ्रांतियां और घरेलू मान्यताएं प्रचलित हैं। जब किसी व्यक्ति को अचानक मिर्गी का दौरा पड़ता है तो आसपास मौजूद लोग अक्सर उसे जूता, चप्पल या मोजा सुंघाने लगते हैं। कुछ लोग मरीज के मुंह में चम्मच डालने या पानी पिलाने की भी कोशिश करते हैं। पीढ़ियों से चली आ रही इन मान्यताओं को कई लोग उपचार का हिस्सा मानते हैं, लेकिन चिकित्सा विज्ञान इन तरीकों को पूरी तरह गलत और गैर-वैज्ञानिक बताता है। मिर्गी, जिसे चिकित्सकीय भाषा में Epilepsy कहा जाता है, दिमाग से जुड़ी एक न्यूरोलॉजिकल बीमारी है। इसमें मस्तिष्क की विद्युत गतिविधियां अचानक असामान्य हो जाती हैं, जिससे मरीज को झटके आने, बेहोशी, शरीर अकड़ने या कुछ समय तक एकटक देखने जैसी समस्याएं हो सकती हैं। यह बीमारी किसी भी उम्र के व्यक्ति को प्रभावित कर सकती है। विशेषज्ञों के अनुसार मिर्गी का दौरा पड़ने पर जूता या मोजा सुंघाने की परंपरा का कोई वैज्ञानिक आधार नहीं है। अधिकांश मामलों में मिर्गी का दौरा कुछ सेकंड से लेकर एक-दो मिनट के भीतर अपने आप समाप्त हो जाता है। ऐसे में यदि किसी व्यक्ति को दौरे के दौरान जूता या मोजा सुंघाया जाए और थोड़ी देर बाद वह सामान्य हो जाए, तो लोग यह मान लेते हैं कि वह इसी कारण ठीक हुआ है। जबकि वास्तविकता यह है कि दौरा अपने प्राकृतिक समय के अनुसार समाप्त हुआ होता है। डॉक्टर बताते हैं कि मिर्गी के दौरान दिमाग की तंत्रिका कोशिकाएं यानी न्यूरॉन्स एक साथ अत्यधिक इलेक्ट्रिकल सिग्नल भेजने लगती हैं। इससे मस्तिष्क का सामान्य कार्य कुछ समय के लिए बाधित हो जाता है और व्यक्ति को दौरा पड़ सकता है। इस प्रक्रिया पर जूते, चप्पल या मोजे की गंध का कोई प्रभाव नहीं पड़ता। मिर्गी के कई कारण हो सकते हैं। सिर पर गंभीर चोट लगना, स्ट्रोक, दिमाग में संक्रमण, ऑक्सीजन की कमी, ब्रेन ट्यूमर, तेज बुखार, ब्लड शुगर का अत्यधिक कम या ज्यादा होना तथा कुछ मामलों में आनुवंशिक कारण भी इसके पीछे जिम्मेदार हो सकते हैं। मिर्गी के दौरे के दौरान मरीज में कई तरह के लक्षण दिखाई दे सकते हैं। इनमें अचानक बेहोश हो जाना, हाथ-पैरों में तेज झटके आना, शरीर अकड़ जाना, मुंह से झाग निकलना, जबड़े का जकड़ जाना, चक्कर खाकर गिरना या कुछ सेकंड तक बिना प्रतिक्रिया दिए एक दिशा में देखते रहना शामिल है। दौरे के बाद व्यक्ति भ्रमित या अत्यधिक थका हुआ महसूस कर सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि मिर्गी के दौरे के दौरान घबराने के बजाय सही प्राथमिक उपचार देना सबसे जरूरी है। मरीज को सुरक्षित स्थान पर करवट के बल लिटाना चाहिए ताकि मुंह में जमा लार या झाग बाहर निकल सके और सांस लेने में दिक्कत न हो। उसके आसपास मौजूद नुकीली या खतरनाक वस्तुओं को हटा देना चाहिए ताकि चोट का खतरा न रहे। यदि कपड़े बहुत तंग हों तो उन्हें ढीला कर देना चाहिए। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि मरीज के मुंह में कोई वस्तु नहीं डालनी चाहिए और न ही जबरन पानी पिलाने की कोशिश करनी चाहिए। यदि दौरा पांच मिनट से अधिक समय तक जारी रहे या बार-बार दौरे पड़ें, तो तुरंत चिकित्सकीय सहायता लेना आवश्यक है।
थकी हुई आंखें और गहरे काले घेरे बन रहे हैं परेशानी, एक्सपर्ट्स ने बताए कारण और आसान बचाव

नई दिल्ली । गर्मियों का मौसम केवल त्वचा पर ही नहीं बल्कि आंखों के आसपास की नाजुक त्वचा पर भी गहरा प्रभाव डालता है। इस दौरान कई लोगों को आंखों के नीचे सूजन, काले घेरे और चेहरे पर लगातार थकान जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। अक्सर लोग इसे केवल कम नींद का परिणाम मानते हैं, लेकिन स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार इसके पीछे कई अन्य कारण भी जिम्मेदार हो सकते हैं। बढ़ता तापमान, शरीर में पानी की कमी, अत्यधिक स्क्रीन टाइम और धूप के सीधे संपर्क जैसी स्थितियां आंखों के आसपास की त्वचा को प्रभावित करती हैं। आंखों के नीचे मौजूद त्वचा शरीर के अन्य हिस्सों की तुलना में अधिक पतली और संवेदनशील होती है। यही वजह है कि शरीर में होने वाले छोटे बदलाव भी यहां जल्दी दिखाई देने लगते हैं। गर्मियों में अधिक पसीना निकलने से शरीर में पानी की कमी होने लगती है। जब शरीर पर्याप्त रूप से हाइड्रेट नहीं रहता, तब आंखों के आसपास की त्वचा बेजान और थकी हुई दिखाई देने लगती है। इसके साथ ही सूजन की समस्या भी बढ़ सकती है। विशेषज्ञ बताते हैं कि आंखों के आसपास होने वाली सूजन को चिकित्सकीय भाषा में पेरिऑर्बिटल पफीनेस कहा जाता है। इस स्थिति में आंखों के आसपास के ऊतकों में अतिरिक्त द्रव जमा हो जाता है। अधिक नमक का सेवन, पर्याप्त आराम न मिलना, लगातार मोबाइल या कंप्यूटर स्क्रीन का उपयोग और मौसम संबंधी प्रभाव इस समस्या को बढ़ा सकते हैं। कई बार सुबह उठने के बाद यह सूजन अधिक स्पष्ट दिखाई देती है। डार्क सर्कल की समस्या भी आज बड़ी संख्या में लोगों को प्रभावित कर रही है। इसके पीछे केवल थकान ही जिम्मेदार नहीं होती। शरीर में पानी की कमी, अनियमित नींद, तनाव, बढ़ती उम्र और धूप के कारण होने वाला पिगमेंटेशन भी इसके प्रमुख कारणों में शामिल हैं। गर्मियों में तेज अल्ट्रावायलेट किरणों के संपर्क में आने से आंखों के नीचे की त्वचा में मेलानिन का उत्पादन बढ़ सकता है, जिससे काले घेरे अधिक गहरे दिखाई देने लगते हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि कुछ सरल उपायों को अपनाकर इस समस्या को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है। आंखों पर ठंडी सिकाई करने से सूजन कम करने में मदद मिलती है। ठंडे खीरे के टुकड़े, ठंडे चम्मच या ठंडे जेल आई मास्क का उपयोग आंखों को आराम पहुंचा सकता है। इससे रक्त वाहिकाएं सिकुड़ती हैं और सूजन में राहत मिलती है। ग्रीन टी या ब्लैक टी बैग्स का उपयोग भी लाभदायक माना जाता है। इनमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट और कैफीन आंखों के आसपास की सूजन को अस्थायी रूप से कम करने में सहायक हो सकते हैं। हालांकि इनका उपयोग करने से पहले उन्हें अच्छी तरह ठंडा करना आवश्यक है। गर्मियों में पर्याप्त मात्रा में पानी पीना सबसे महत्वपूर्ण उपायों में से एक है। विशेषज्ञ दिनभर नियमित अंतराल पर पानी पीने और पानी से भरपूर फलों को आहार में शामिल करने की सलाह देते हैं। खीरा, तरबूज, संतरा और नारियल पानी शरीर को हाइड्रेट रखने में मदद करते हैं। इससे त्वचा में नमी बनी रहती है और आंखों के नीचे की थकान कम दिखाई देती है। संतुलित आहार और सीमित नमक सेवन भी आंखों की सूजन को नियंत्रित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। अत्यधिक नमक शरीर में द्रव को रोककर सूजन बढ़ा सकता है। इसके अलावा प्रतिदिन सात से आठ घंटे की गुणवत्तापूर्ण नींद लेना भी आवश्यक माना जाता है। पर्याप्त नींद त्वचा की मरम्मत और रक्त संचार को बेहतर बनाने में मदद करती है। धूप से बचाव भी बेहद जरूरी है। बाहर निकलते समय UV सुरक्षा वाले सनग्लासेस और उपयुक्त सनस्क्रीन का उपयोग आंखों के आसपास की त्वचा को नुकसान से बचा सकता है। इससे पिगमेंटेशन और समय से पहले त्वचा की उम्र बढ़ने जैसी समस्याओं का खतरा भी कम होता है। विशेषज्ञों के अनुसार यदि आंखों की सूजन लंबे समय तक बनी रहे, दर्द, लालिमा, खुजली या अचानक एक आंख में अधिक सूजन दिखाई दे तो इसे सामान्य समस्या मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। ऐसे लक्षण किसी एलर्जी, संक्रमण, थायराइड संबंधी परेशानी या अन्य स्वास्थ्य समस्या का संकेत हो सकते हैं, जिनके लिए चिकित्सकीय सलाह आवश्यक होती है।
रविवार का राशिफल: सूर्यदेव की कृपा से चमकेंगे ये भाग्यशाली राशियाँ, जानिए किसके लिए रहेगा दिन बेहद शुभ

नई दिल्ली । वैदिक ज्योतिष शास्त्र में रविवार का दिन विशेष रूप से सूर्यदेव को समर्पित माना गया है। सूर्य को आत्मा, सम्मान, शक्ति और सफलता का कारक ग्रह कहा गया है। ऐसे में रविवार के दिन ग्रह-नक्षत्रों की चाल कई राशियों के जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और शुभ परिणाम लेकर आती है। ज्योतिष विशेषज्ञों के अनुसार इस दिन कुछ राशियों पर सूर्यदेव की विशेष कृपा बनी रहती है, जिससे उनके कार्यों में सफलता, मान-सम्मान और आर्थिक लाभ के योग बनते हैं। रविवार का दिन मेष राशि के जातकों के लिए उत्साह और नई ऊर्जा लेकर आता है। इस राशि के लोगों को कार्यक्षेत्र में सफलता मिलने के योग बनते हैं और किसी पुराने रुके हुए काम में गति आ सकती है। वहीं वृषभ राशि के जातकों के लिए यह दिन आर्थिक दृष्टि से लाभकारी साबित हो सकता है। परिवार में सुख-शांति बनी रहती है और कोई शुभ समाचार मिलने की संभावना रहती है। मिथुन राशि के लिए रविवार का दिन सकारात्मक सोच और नए अवसर लेकर आता है। इस राशि के लोग अपने निर्णयों से लाभ प्राप्त कर सकते हैं और व्यापार में भी सुधार देखने को मिलता है। कर्क राशि के जातकों के लिए भी यह दिन भाग्य का साथ लेकर आता है। नौकरी और करियर में प्रगति के संकेत मिलते हैं और रुके हुए कार्य पूरे होने की संभावना रहती है। सिंह राशि के लिए रविवार विशेष रूप से शुभ माना जाता है क्योंकि यह राशि सूर्य की ही राशि होती है। इस दिन सिंह राशि के जातकों को मान-सम्मान, प्रतिष्ठा और सफलता प्राप्त होती है। किसी बड़े अवसर या जिम्मेदारी मिलने के योग भी बनते हैं। कन्या राशि के लोगों के लिए दिन सामान्य से अच्छा रह सकता है, हालांकि उन्हें कार्यों में सावधानी रखने की आवश्यकता होती है। तुला राशि के जातकों के लिए यह दिन सरकारी कार्यों और कानूनी मामलों में सफलता दिला सकता है। वृश्चिक राशि के लिए यह दिन आत्मविश्वास बढ़ाने वाला रहेगा। धनु राशि के जातकों के लिए नए अवसर खुल सकते हैं और आय के स्रोत बढ़ने की संभावना बनती है। मकर राशि के लिए दिन थोड़ा संयम रखने वाला हो सकता है, लेकिन मेहनत का फल जरूर मिलेगा। कुंभ राशि के जातकों के लिए यह दिन परिश्रम और सफलता का संकेत देता है, जबकि मीन राशि के लोगों के लिए रविवार मानसिक शांति और पारिवारिक सुख लेकर आता है। ज्योतिषाचार्यों का मानना है कि रविवार के दिन सूर्यदेव को अर्घ्य देने और तांबे के पात्र में जल चढ़ाने से विशेष लाभ प्राप्त होता है। साथ ही इस दिन “ॐ सूर्याय नमः” मंत्र का जाप करने से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और सफलता के मार्ग खुलते हैं। कुल मिलाकर रविवार का दिन कई राशियों के लिए शुभ संकेत लेकर आता है, विशेषकर उन लोगों के लिए जो मेहनत और आत्मविश्वास के साथ अपने कार्यों में आगे बढ़ते हैं।
रविवार पूजा विधि: सूर्य देव को प्रसन्न करने के लिए ऐसे करें पूजा, मिलेगा सुख-समृद्धि और मान-सम्मान

नई दिल्ली । सनातन धर्म में रविवार का दिन भगवान सूर्य को समर्पित माना गया है। सूर्य देव को जगत की आत्मा, ऊर्जा का स्रोत और ग्रहों का राजा कहा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार रविवार के दिन विधिपूर्वक सूर्य देव की पूजा करने से जीवन में सुख, समृद्धि, सफलता और सम्मान की प्राप्ति होती है। साथ ही स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से भी राहत मिलने की मान्यता है। रविवार के दिन पूजा की शुरुआत प्रातःकाल सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करने से करनी चाहिए। स्नान के बाद साफ और संभव हो तो लाल या केसरिया रंग के वस्त्र धारण करें। इसके बाद घर के पूजा स्थल की सफाई कर सूर्य देव का स्मरण करें। सूर्योदय के समय तांबे के लोटे में स्वच्छ जल भरें और उसमें लाल फूल, अक्षत, रोली तथा थोड़ा गुड़ डाल लें। फिर पूर्व दिशा की ओर मुख करके सूर्य देव को अर्घ्य अर्पित करें। अर्घ्य देते समय जल की धारा के बीच से सूर्य के दर्शन करना शुभ माना जाता है। अर्घ्य के दौरान निम्न मंत्र का जाप करना लाभकारी माना जाता है— “ॐ घृणि: सूर्याय नमः” या “ॐ सूर्याय नमः” मंत्र का 11, 21 या 108 बार जाप करने से विशेष पुण्य फल प्राप्त होने की मान्यता है। अर्घ्य देने के बाद सूर्य देव के समक्ष दीपक जलाएं और लाल चंदन, लाल पुष्प तथा गुड़ का भोग अर्पित करें। इसके बाद आदित्य हृदय स्तोत्र, सूर्य चालीसा या सूर्य कवच का पाठ किया जा सकता है। धार्मिक मान्यता है कि इससे सूर्य ग्रह मजबूत होता है और व्यक्ति को करियर, शिक्षा तथा सामाजिक जीवन में सफलता प्राप्त होती है। रविवार के दिन जरूरतमंद लोगों को गेहूं, गुड़, तांबे के पात्र, लाल वस्त्र या लाल फल दान करना भी शुभ माना गया है। यह उपाय सूर्य दोष को कम करने और सकारात्मक परिणाम प्राप्त करने में सहायक माना जाता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार जिन लोगों की कुंडली में सूर्य कमजोर होता है या जिन्हें आत्मविश्वास की कमी, सरकारी कार्यों में बाधा, मान-सम्मान में कमी या स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा हो, उनके लिए रविवार का व्रत और सूर्य पूजा विशेष लाभकारी मानी जाती है। पूजा के दौरान मन में सकारात्मक भाव रखें और सूर्य देव से परिवार के सुख, स्वास्थ्य और उन्नति की कामना करें। श्रद्धा और नियमपूर्वक की गई सूर्य उपासना व्यक्ति के जीवन में नई ऊर्जा और उत्साह का संचार करती है।
रविवार के वास्तु टिप्स: सूर्य देव की कृपा पाने के लिए करें ये आसान उपाय, घर में आएगी सुख-समृद्धि

नई दिल्ली । वास्तु शास्त्र और ज्योतिष में रविवार का विशेष महत्व माना गया है। यह दिन सूर्य देव को समर्पित होता है, जिन्हें ऊर्जा, आत्मविश्वास, नेतृत्व क्षमता, सम्मान और सफलता का कारक माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार रविवार के दिन कुछ विशेष वास्तु उपाय करने से घर-परिवार में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और व्यक्ति के जीवन में उन्नति के नए रास्ते खुल सकते हैं। वास्तु विशेषज्ञों के अनुसार रविवार की सुबह सूर्योदय से पहले उठकर घर की साफ-सफाई करना शुभ माना जाता है। विशेष रूप से घर के पूर्व दिशा वाले हिस्से को स्वच्छ रखना चाहिए, क्योंकि पूर्व दिशा सूर्य की दिशा मानी जाती है। इस दिशा में गंदगी या अव्यवस्था होने से सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह प्रभावित हो सकता है। रविवार को सुबह सूर्य देव को तांबे के लोटे से जल अर्पित करना अत्यंत शुभ माना जाता है। जल में लाल फूल, रोली या अक्षत मिलाकर अर्घ्य देने से आत्मविश्वास और मान-सम्मान में वृद्धि होने की मान्यता है। साथ ही सूर्य मंत्रों का जाप करने से मानसिक शक्ति और ऊर्जा बढ़ती है। वास्तु शास्त्र के अनुसार रविवार के दिन घर की पूर्व दिशा में लाल, नारंगी या सुनहरे रंग की सजावटी वस्तुएं रखना शुभ माना जाता है। इससे सूर्य तत्व मजबूत होता है और घर में सकारात्मक वातावरण बना रहता है। यदि संभव हो तो इस दिन घर में प्राकृतिक प्रकाश का अधिकतम प्रवेश सुनिश्चित करें। रविवार को गुड़, गेहूं, तांबा या लाल वस्तुओं का दान करना भी शुभ माना गया है। मान्यता है कि इससे सूर्य दोष कम होता है और व्यक्ति को करियर तथा सामाजिक जीवन में लाभ प्राप्त होता है। जरूरतमंद लोगों की सहायता करना भी इस दिन विशेष फलदायी माना गया है। वास्तु के अनुसार रविवार के दिन घर में टूटे-फूटे इलेक्ट्रॉनिक सामान, बेकार वस्तुएं और कबाड़ हटाने का प्रयास करना चाहिए। ऐसी चीजें नकारात्मक ऊर्जा को आकर्षित करती हैं और उन्नति में बाधा बन सकती हैं। घर को व्यवस्थित रखने से सकारात्मक ऊर्जा का संचार बढ़ता है। इसके अलावा रविवार को परिवार के साथ समय बिताना, बड़ों का सम्मान करना और सकारात्मक विचारों को अपनाना भी शुभ माना गया है। वास्तु शास्त्र केवल भौतिक व्यवस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि मानसिक और आध्यात्मिक संतुलन को भी महत्वपूर्ण मानता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार रविवार को सूर्य देव की कृपा प्राप्त करने के लिए आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ, सूर्य नमस्कार और नियमित ध्यान भी लाभकारी हो सकता है। इन उपायों से व्यक्ति के जीवन में आत्मविश्वास, सफलता और सकारात्मकता बढ़ने की मान्यता है।
गोवा और मनाली ट्रिप प्लान: बीच से लेकर बर्फीली वादियों तक का यादगार सफर, जानिए पूरा यात्रा गाइड

नई दिल्ली । अगर आप छुट्टियों में समुद्र की लहरों के बीच सुकून और पहाड़ों की ठंडी वादियों में रोमांच दोनों का आनंद लेना चाहते हैं, तो गोवा और मनाली का कॉम्बिनेशन आपके लिए परफेक्ट ट्रैवल प्लान साबित हो सकता है। भारत के ये दोनों लोकप्रिय टूरिस्ट डेस्टिनेशन हर साल लाखों पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करते हैं। एक ओर जहां गोवा अपनी बीच लाइफ, नाइटलाइफ और वाटर स्पोर्ट्स के लिए मशहूर है, वहीं दूसरी ओर मनाली बर्फ से ढकी चोटियों, एडवेंचर एक्टिविटीज और शांत वातावरण के लिए जाना जाता है। गोवा की यात्रा आमतौर पर 3 से 4 दिनों की होती है, जिसमें पहले दिन नॉर्थ गोवा के बीच जैसे बागा और कैलंगुट बीच का आनंद लिया जा सकता है। यहां पर्यटक बीच शैक में बैठकर समुद्र का नजारा लेते हैं और शाम को नाइटलाइफ का अनुभव करते हैं। दूसरे दिन साउथ गोवा के शांत और खूबसूरत बीच जैसे कोलवा और पालोलेम की सैर की जाती है। इसके साथ ही पुराना गोवा स्थित बेसिलिका ऑफ बॉम जीसस और डोना पाउला व्यू पॉइंट भी पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र रहते हैं। तीसरे दिन गोवा में एडवेंचर का मजा लिया जाता है, जिसमें जेट स्की, पैरासेलिंग, बनाना राइड जैसी वाटर स्पोर्ट्स एक्टिविटीज शामिल होती हैं। इसके अलावा मंडोवी नदी पर क्रूज का आनंद और अगर चाहें तो कैसिनो का अनुभव भी यात्रा को खास बना देता है। चौथे दिन शॉपिंग और आराम के साथ गोवा की यात्रा का समापन किया जा सकता है। गोवा के बाद अगर बात करें मनाली की तो यह यात्रा लगभग 4 से 5 दिनों की होती है। मनाली पहुंचकर पर्यटक सबसे पहले मॉल रोड पर घूमने और स्थानीय व्यंजनों का स्वाद लेने का आनंद लेते हैं। इसके बाद दूसरे दिन सोलंग वैली में पैराग्लाइडिंग, रोपवे और स्नो एक्टिविटीज का अनुभव रोमांच से भर देता है। सर्दियों में यहां बर्फ का अलग ही आकर्षण देखने को मिलता है। तीसरे दिन पर्यटक रोहतांग पास या अटल टनल की यात्रा करते हैं, जहां बर्फ से ढकी वादियां हर किसी को मंत्रमुग्ध कर देती हैं। चौथे दिन हिडिम्बा मंदिर, वैन विहार और कैफे हॉपिंग का आनंद लिया जाता है। इसके बाद पांचवें दिन कुल्लू में रिवर राफ्टिंग और लोकल शॉल फैक्ट्री की विजिट के साथ यात्रा का समापन होता है। इस पूरे ट्रिप का सबसे बड़ा आकर्षण यह है कि इसमें बीच की मस्ती और पहाड़ों की शांति दोनों का संतुलन मिलता है। गोवा और मनाली का यह कॉम्बिनेशन न सिर्फ एडवेंचर प्रेमियों के लिए बल्कि फैमिली और कपल्स के लिए भी एक यादगार अनुभव साबित होता है। अगर सही मौसम और प्लानिंग के साथ इस ट्रिप को किया जाए तो यह जीवन भर की यादों में शामिल होने वाला सफर बन सकता है।
रविवार को करें सूर्य भगवान की विधि-विधान से पूजा, जीवन में आएगी सुख-समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा

नई दिल्ली । हिंदू धर्म में सूर्य देव को जगत का प्रत्यक्ष देवता माना गया है। मान्यता है कि सूर्य भगवान की नियमित पूजा करने से जीवन में सुख, समृद्धि, स्वास्थ्य और सफलता का आगमन होता है। विशेष रूप से रविवार का दिन सूर्य देव की आराधना के लिए समर्पित माना जाता है। इस दिन श्रद्धापूर्वक पूजा करने और सूर्य को अर्घ्य अर्पित करने से ग्रह दोषों में कमी आती है तथा व्यक्ति के आत्मविश्वास और सम्मान में वृद्धि होती है। सूर्य भगवान की पूजा के लिए प्रातःकाल ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें। इसके बाद तांबे के लोटे में स्वच्छ जल भरें। जल में लाल फूल, अक्षत, रोली और थोड़ा सा गुड़ डाल सकते हैं। पूर्व दिशा की ओर मुख करके उगते हुए सूर्य को जल अर्पित करें। अर्घ्य देते समय जल की धारा के बीच से सूर्य देव के दर्शन करना शुभ माना जाता है। अर्घ्य अर्पित करते समय “ॐ घृणि सूर्याय नमः” मंत्र का जाप करें। इसके बाद सूर्य देव का ध्यान करें और अपने परिवार की सुख-समृद्धि, उत्तम स्वास्थ्य तथा सफलता की कामना करें। पूजा के दौरान लाल पुष्प, लाल चंदन और गुड़ अर्पित करना भी शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सूर्य देव की पूजा के बाद Aditya Hridaya Stotra, Surya Chalisa अथवा गायत्री मंत्र का पाठ करने से विशेष फल प्राप्त होता है। सूर्य देव को प्रसन्न करने के लिए रविवार के दिन जरूरतमंद लोगों को गेहूं, गुड़, लाल वस्त्र या तांबे का दान भी किया जा सकता है। ज्योतिष शास्त्र में सूर्य को आत्मा, पिता, नेतृत्व क्षमता, सरकारी क्षेत्र में सफलता और सम्मान का कारक ग्रह माना गया है। जिन लोगों की कुंडली में सूर्य कमजोर होता है, उन्हें नियमित रूप से सूर्य उपासना करने की सलाह दी जाती है। इससे आत्मबल बढ़ता है और जीवन की बाधाएं दूर होने लगती हैं। मान्यता है कि नियमित रूप से सूर्य भगवान की पूजा करने से मानसिक तनाव कम होता है, सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और व्यक्ति के भीतर नई ऊर्जा का विकास होता है। यही कारण है कि सनातन परंपरा में सूर्य उपासना को विशेष महत्व दिया गया है।
14 जून 2026 का राशिफल: कर्क, धनु और मीन राशि वालों पर रहेगी किस्मत मेहरबान, जानें सभी 12 राशियों का भविष्यफल

नई दिल्ली । वैदिक ज्योतिष के अनुसार 14 जून 2026, रविवार का दिन ग्रह-नक्षत्रों की विशेष स्थिति के कारण कई राशियों के लिए सकारात्मक परिणाम लेकर आ सकता है। रविवार का दिन भगवान सूर्य को समर्पित माना जाता है और इस दिन सूर्य उपासना से आत्मविश्वास, प्रतिष्ठा और ऊर्जा में वृद्धि होती है। ज्योतिषीय गणनाओं के मुताबिक कुछ राशियों को आर्थिक और करियर क्षेत्र में सफलता मिल सकती है, जबकि कुछ को अपने व्यवहार और निर्णयों में सावधानी बरतनी होगी। मेष राशिमेष राशि के जातकों के लिए दिन रचनात्मक कार्यों में सफलता दिलाने वाला रहेगा। शिक्षा, साहित्य, कला और लेखन से जुड़े लोगों को विशेष उपलब्धि मिल सकती है। स्वास्थ्य सामान्य रहेगा, लेकिन भावनात्मक निर्णय लेने से बचना चाहिए। व्यापार की स्थिति अनुकूल रहेगी। वृषभ राशिवृषभ राशि वालों के लिए आर्थिक दृष्टि से दिन लाभकारी साबित हो सकता है। परिवार में कोई शुभ समाचार मिलने की संभावना है। व्यापार में उन्नति होगी और रिश्तों में मधुरता बनी रहेगी। निवेश से जुड़े मामलों में भी सकारात्मक परिणाम मिल सकते हैं। मिथुन राशिमिथुन राशि के जातकों का मन उत्साह और सकारात्मकता से भरा रहेगा। कार्यक्षेत्र में नए अवसर मिल सकते हैं। हालांकि प्रेम संबंधों में थोड़ी दूरी या गलतफहमी महसूस हो सकती है। व्यापार सामान्य से बेहतर रहेगा। कर्क राशिकर्क राशि वालों के लिए भाग्य का पूरा साथ मिलने के संकेत हैं। नौकरी और कारोबार में रुके हुए कार्य पूरे हो सकते हैं। आर्थिक स्थिति मजबूत होगी और पारिवारिक सहयोग मिलेगा। स्वास्थ्य में भी सुधार देखने को मिलेगा। सिंह राशिसिंह राशि के जातकों को आज विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है। किसी भी प्रकार का जोखिम लेने से बचें। विवादों और अनावश्यक बहस से दूर रहना बेहतर रहेगा। व्यापार सामान्य रहेगा लेकिन सोच-समझकर निर्णय लें। कन्या राशिकन्या राशि वालों के लिए संपत्ति और वाहन से जुड़े मामलों में सफलता के योग बन रहे हैं। परिवार में थोड़ी नोकझोंक हो सकती है, लेकिन कुल मिलाकर दिन सकारात्मक रहेगा। व्यापार और आर्थिक स्थिति मजबूत बनी रहेगी। तुला राशितुला राशि के लोगों को सरकारी कार्यों और कानूनी मामलों में सफलता मिल सकती है। व्यापार में लाभ के संकेत हैं और कार्यक्षेत्र में सम्मान बढ़ेगा। स्वास्थ्य और पारिवारिक जीवन भी संतुलित रहेगा। वृश्चिक राशिवृश्चिक राशि वालों को वरिष्ठों और अनुभवी लोगों का सहयोग मिलेगा। ज्ञान और अनुभव में वृद्धि होगी। स्वास्थ्य को लेकर थोड़ी सावधानी जरूरी है। प्रेम संबंधों और पारिवारिक मामलों में सकारात्मकता बनी रहेगी। धनु राशिधनु राशि के जातकों के लिए आर्थिक लाभ के नए रास्ते खुल सकते हैं। रुका हुआ धन वापस मिलने की संभावना है। करियर और व्यापार दोनों क्षेत्रों में सफलता के योग बन रहे हैं। पारिवारिक माहौल भी सुखद रहेगा। मकर राशिमकर राशि वालों का मन कुछ चिंतित रह सकता है। खर्चों में बढ़ोतरी हो सकती है और मानसिक दबाव महसूस हो सकता है। हालांकि व्यापार और पारिवारिक जीवन में स्थिति संतुलित रहेगी। धैर्य बनाए रखना लाभदायक होगा। कुंभ राशिकुंभ राशि के जातकों की मेहनत रंग लाएगी। कार्यक्षेत्र में अच्छे परिणाम प्राप्त होंगे। परिवार और मित्रों का सहयोग मिलेगा। व्यापार में प्रगति होगी और आत्मविश्वास बढ़ेगा। मीन राशिमीन राशि वालों के लिए दिन बेहद शुभ रहने वाला है। जीवनसाथी के साथ अच्छा समय बीतेगा और मन प्रसन्न रहेगा। नौकरी, व्यापार, स्वास्थ्य और प्रेम संबंधों में सकारात्मक परिणाम देखने को मिल सकते हैं। दिनभर ऊर्जा और उत्साह बना रहेगा। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार रविवार को सूर्यदेव की आराधना, दान-पुण्य और सकारात्मक सोच सभी राशियों के लिए लाभकारी साबित हो सकती है। ग्रहों की शुभ स्थिति का लाभ उठाने के लिए संयम और विवेक बनाए रखना आवश्यक है।
बेसन से निखरेगी त्वचा की प्राकृतिक चमक, जानिए स्किन केयर में इसके बेहतरीन फायदे

नई दिल्ली । भारतीय घरों में सदियों से बेसन का इस्तेमाल केवल खाने-पीने की चीजों में ही नहीं, बल्कि सौंदर्य निखारने के लिए भी किया जाता रहा है। आज जब लोग प्राकृतिक और केमिकल-फ्री स्किन केयर की ओर बढ़ रहे हैं, तब बेसन एक बार फिर लोकप्रिय हो रहा है। त्वचा की सफाई से लेकर टैन हटाने और अतिरिक्त तेल को नियंत्रित करने तक, बेसन कई तरह से त्वचा को लाभ पहुंचा सकता है। बेसन में मौजूद प्राकृतिक गुण त्वचा की गहराई से सफाई करने में मदद करते हैं। यह त्वचा पर जमा धूल, गंदगी और अतिरिक्त तेल को हटाने में सहायक माना जाता है। तैलीय त्वचा वाले लोगों के लिए बेसन विशेष रूप से उपयोगी हो सकता है क्योंकि यह त्वचा को साफ रखने के साथ-साथ अतिरिक्त ऑयल को नियंत्रित करने में मदद करता है। त्वचा की रंगत निखारने के लिए भी बेसन का उपयोग लंबे समय से किया जाता रहा है। बेसन में दही, दूध, गुलाब जल या हल्दी मिलाकर फेस पैक तैयार किया जा सकता है। यह मिश्रण त्वचा को ताजगी देने और चेहरे की प्राकृतिक चमक बढ़ाने में मदद कर सकता है। हालांकि किसी भी घरेलू नुस्खे का असर व्यक्ति की त्वचा के प्रकार और संवेदनशीलता के अनुसार अलग-अलग हो सकता है। गर्मियों में धूप के कारण होने वाली टैनिंग को कम करने के लिए भी बेसन का इस्तेमाल किया जाता है। बेसन और दही का मिश्रण त्वचा को ठंडक देने के साथ-साथ टैनिंग कम करने में सहायक माना जाता है। नियमित उपयोग से त्वचा अधिक साफ और फ्रेश दिखाई दे सकती है। डेड स्किन सेल्स हटाने के लिए बेसन एक प्राकृतिक एक्सफोलिएटर की तरह काम कर सकता है। बेसन में थोड़ा सा दूध या गुलाब जल मिलाकर हल्के हाथों से चेहरे पर मसाज करने से त्वचा की मृत कोशिकाओं को हटाने में मदद मिल सकती है। इससे त्वचा मुलायम और चमकदार दिख सकती है। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि हर व्यक्ति की त्वचा अलग होती है। इसलिए किसी भी घरेलू उपाय को अपनाने से पहले पैच टेस्ट करना जरूरी है। यदि त्वचा पर जलन, खुजली या एलर्जी जैसी समस्या महसूस हो तो उसका उपयोग तुरंत बंद कर देना चाहिए। जिन लोगों की त्वचा अत्यधिक संवेदनशील है, उन्हें त्वचा विशेषज्ञ की सलाह लेना बेहतर रहता है। प्राकृतिक स्किन केयर के क्षेत्र में बेसन आज भी एक भरोसेमंद विकल्प माना जाता है। सही तरीके से और सीमित मात्रा में उपयोग करने पर यह त्वचा की सफाई, निखार और देखभाल में मददगार साबित हो सकता है। संतुलित आहार, पर्याप्त पानी और नियमित स्किन केयर रूटीन के साथ बेसन का उपयोग स्वस्थ और दमकती त्वचा पाने में सहायक हो सकता है।