सीएम मोहन यादव का पूर्व पीएम पर तंज, बोले- अर्थशास्त्री भी नहीं समझ पाए जीरो बैलेंस खाते की ताकत; महू में बनेगा साइबर रिसर्च सेंटर

मध्यप्रदेश । भोपाल में आयोजित साइबर सिक्योरिटी और स्टेट डाटा सिक्योरिटी पर राज्य स्तरीय कंसल्टेटिव वर्कशॉप के दौरान मुख्यमंत्री Mohan Yadav ने साइबर सुरक्षा को वर्तमान समय की सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक बताते हुए कई महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं। इस दौरान उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री Manmohan Singh का नाम लिए बिना उन पर परोक्ष टिप्पणी भी की। मुख्यमंत्री ने कहा कि देश में पहले ऐसे प्रधानमंत्री रहे हैं जिन्हें अर्थशास्त्र का बड़ा जानकार माना जाता था, लेकिन जीरो बैलेंस खाते की उपयोगिता और उसके व्यापक सामाजिक प्रभाव को वे भी नहीं समझ पाए थे। उन्होंने दावा किया कि प्रधानमंत्री Narendra Modi ने जनधन योजना के माध्यम से करोड़ों लोगों के बैंक खाते खुलवाकर वित्तीय समावेशन को नई दिशा दी। साथ ही डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के जरिए सरकारी योजनाओं का लाभ सीधे पात्र लोगों तक पहुंचाने का रास्ता तैयार किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि आज डाटा सुरक्षा का महत्व लगातार बढ़ रहा है। पहले सीमाओं की सुरक्षा सबसे बड़ी चिंता मानी जाती थी, लेकिन डिजिटल युग में नागरिकों का डाटा और ऑनलाइन लेनदेन भी उतने ही संवेदनशील हो गए हैं। उन्होंने कहा कि साइबर अपराधियों द्वारा लोगों की जीवनभर की कमाई कुछ ही मिनटों में ठगी जा रही है, जो बेहद गंभीर विषय है। कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने महू में अत्याधुनिक स्टेट डाटा साइबर सिक्योरिटी रिसर्च सेंटर स्थापित करने की घोषणा की। यह केंद्र राज्य सरकार और Military College of Telecommunication Engineering के सहयोग से विकसित किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि भविष्य की चुनौतियों से निपटने के लिए साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में शोध और विशेषज्ञता विकसित करना समय की आवश्यकता है। उन्होंने अधिकारियों को चेतावनी देते हुए कहा कि साइबर सुरक्षा केवल चर्चा का विषय नहीं बल्कि जवाबदेही का मामला है। यदि किसी स्तर पर लापरवाही सामने आती है तो संबंधित विभागों को इसकी जिम्मेदारी उठानी होगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि नागरिकों के डाटा की सुरक्षा राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। कार्यशाला में एडीजी इंटेलिजेंस साई मनोहर ने साइबर अपराधों से जुड़े आंकड़े प्रस्तुत करते हुए बताया कि पिछले 14 वर्षों में साइबर अपराधों में 77 गुना वृद्धि दर्ज की गई है। वर्तमान में मध्यप्रदेश में हर वर्ष हजारों साइबर शिकायतें सामने आ रही हैं। उन्होंने कहा कि साइबर हेल्पलाइन की क्षमता बढ़ाए जाने के बाद अब तक जनता के 137 करोड़ रुपए साइबर ठगी से बचाए जा चुके हैं। उन्होंने बताया कि डिजिटल अरेस्ट, फर्जी कॉल, बैंकिंग फ्रॉड और ऑनलाइन निवेश के नाम पर ठगी के मामलों में तेजी से बढ़ोतरी हुई है। साइबर अपराधी खुद को सीबीआई, ईडी, पुलिस या सेना का अधिकारी बताकर लोगों को जाल में फंसा रहे हैं। ऐसे मामलों से निपटने के लिए विशेष अभियान भी चलाए जा रहे हैं। साइंस एंड टेक्नोलॉजी विभाग के प्रमुख सचिव एम. सेल्वेंद्रन ने कहा कि मध्यप्रदेश ई-गवर्नेंस के क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल है। हालांकि डिजिटल सेवाओं के विस्तार के साथ साइबर सुरक्षा की चुनौतियां भी तेजी से बढ़ रही हैं। उन्होंने कहा कि यदि किसी सरकारी सेवा या डाटा सिस्टम पर साइबर हमला होता है तो उसका सीधा असर आम जनता और शासन की विश्वसनीयता पर पड़ता है। कार्यशाला में देशभर के साइबर विशेषज्ञों, रक्षा संस्थानों के अधिकारियों और तकनीकी विशेषज्ञों ने भाग लिया। उनके सुझावों के आधार पर राज्य में साइबर सुरक्षा को और मजबूत बनाने की रणनीति तैयार की जाएगी।
कैंसर मरीजों पर बढ़ा दवा संकट, जीवनरक्षक कीमोथेरेपी इंजेक्शन की कमी; इलाज महंगा होने की आशंका

मध्यप्रदेश । देश में कैंसर मरीजों के लिए चिंता बढ़ाने वाली स्थिति सामने आई है। कैंसर उपचार में व्यापक रूप से उपयोग होने वाली महत्वपूर्ण कीमोथेरेपी दवाओं सिस्प्लैटिन (Cisplatin) और कार्बोप्लैटिन (Carboplatin) की कमी ने अस्पतालों और मरीजों दोनों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि यह स्थिति लंबे समय तक बनी रही तो कैंसर के इलाज की लागत बढ़ सकती है और हजारों मरीजों का उपचार प्रभावित हो सकता है। नई दिल्ली स्थित सर गंगाराम अस्पताल के मेडिकल ऑन्कोलॉजी विभाग के चेयरपर्सन डॉ. श्याम अग्रवाल के अनुसार पिछले दो से तीन सप्ताह से देशभर में इन दोनों दवाओं की उपलब्धता गंभीर रूप से प्रभावित हुई है। ये दवाएं कैंसर उपचार की फर्स्ट लाइन थेरेपी का अहम हिस्सा हैं और फेफड़ों, मुंह, गर्भाशय ग्रीवा (सर्वाइकल), ओवरी, गर्भाशय और अंडकोष सहित कई प्रकार के कैंसर के इलाज में इस्तेमाल की जाती हैं। भोपाल के जवाहरलाल नेहरू कैंसर अस्पताल की मेडिकल सुपरिटेंडेंट डॉ. हरमीत कौर के मुताबिक दवाओं की कमी का सीधा असर मरीजों के इलाज पर पड़ रहा है। कई मामलों में मरीजों को निर्धारित समय पर कीमोथेरेपी नहीं मिल पा रही है, जबकि कुछ मरीजों को दवा उपलब्ध न होने के कारण उपचार टालना पड़ रहा है। इससे इलाज की निरंतरता और सफलता दोनों प्रभावित हो सकती हैं। वरिष्ठ ऑन्कोलॉजिस्ट डॉ. टी.पी. साहू का कहना है कि कैंसर उपचार के क्षेत्र में यह बेहद चुनौतीपूर्ण दौर है। सिस्प्लैटिन जैसी दवा पिछले कई दशकों से कैंसर उपचार की सबसे भरोसेमंद और किफायती दवाओं में शामिल रही है। इसकी मदद से हजारों रुपए में उपचार संभव हो जाता है, जबकि कई आधुनिक विकल्पों पर लाखों रुपए तक खर्च करना पड़ सकता है। ऐसे में इसकी कमी मध्यम और निम्न आय वर्ग के मरीजों के लिए गंभीर चिंता का विषय बन गई है। विशेषज्ञों के अनुसार सिस्प्लैटिन और कार्बोप्लैटिन केवल दवाएं नहीं, बल्कि कई कैंसर उपचार योजनाओं की रीढ़ मानी जाती हैं। गांधी मेडिकल कॉलेज के पूर्व प्रोफेसर डॉ. ओ.पी. सिंह बताते हैं कि देश में लगभग 70 प्रतिशत कीमोथेरेपी उपचार योजनाओं में सिस्प्लैटिन का उपयोग किया जाता है। इसका अर्थ है कि हर दस में से लगभग सात मरीज किसी न किसी रूप में इस दवा पर निर्भर रहते हैं। मुंबई के कामा एवं एल्ब्लेस अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. तुषार पाल्वे के अनुसार प्लैटिनम आधारित कीमोथेरेपी दवाओं की कमी के कारण डॉक्टरों को उपचार की रणनीतियों में बदलाव करना पड़ रहा है। हालांकि अन्य कुछ कीमोथेरेपी दवाएं उपलब्ध हैं, लेकिन सभी मामलों में उनका उपयोग सिस्प्लैटिन या कार्बोप्लैटिन का विकल्प नहीं बन सकता। दवा उद्योग से जुड़े सूत्रों के अनुसार उत्पादन लागत में बढ़ोतरी, कच्चे माल की उपलब्धता पर असर और वैश्विक सप्लाई चेन में आई बाधाओं के कारण कंपनियों को उत्पादन में कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है। यही वजह है कि केंद्र सरकार ने इन दवाओं की कीमतों में बढ़ोतरी के प्रस्ताव पर सैद्धांतिक सहमति दी है। रिपोर्टों के मुताबिक सिस्प्लैटिन और कार्बोप्लैटिन की कीमतों में 10 से 50 प्रतिशत तक वृद्धि हो सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जल्द ही सप्लाई सामान्य नहीं हुई तो आने वाले समय में कैंसर मरीजों को इलाज के लिए अधिक खर्च करना पड़ सकता है। साथ ही अस्पतालों पर भी उपचार की निरंतरता बनाए रखने का दबाव बढ़ेगा। फिलहाल डॉक्टरों और अस्पतालों की कोशिश है कि उपलब्ध संसाधनों के माध्यम से मरीजों का उपचार जारी रखा जाए और किसी भी मरीज की चिकित्सा प्रभावित न हो।
मुगल-ए-आजम के सेट से सामने आया इतिहास का अनसुना पन्ना: मधुबाला के हुस्न के दीवाने थे पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री जुल्फिकार अली भुट्टो

नई दिल्ली। भारतीय सिनेमा के सुनहरे दौर में अपनी बेमिसाल खूबसूरती और जीवंत अभिनय से करोड़ों दिलों पर राज करने वाली अभिनेत्री मधुबाला का जादू सिर्फ देश की सीमाओं तक ही सीमित नहीं था। हाल ही में सामने आए ऐतिहासिक और सिनेमाई संस्मरणों के अनुसार, पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री जुल्फिकार अली भुट्टो भी इस कदर हुस्न की मल्लिका के दीवाने थे कि वे अक्सर उनसे मिलने के लिए भारत आया करते थे। यह उस दौर की बात है जब मधुबाला अपनी सर्वकालिक महान फिल्म ‘मुगल-ए-आजम’ की शूटिंग में व्यस्त थीं। उस समय जुल्फिकार अली भुट्टो पाकिस्तान की राजनीति में कोई बहुत बड़ा नाम नहीं थे, बल्कि एक बेहद पढ़े-लिखे, हैंडसम और उभरते हुए युवा राजनेता के तौर पर मुंबई के दौरों पर आते-जाते रहते थे। मध्य प्रदेश। इस ऐतिहासिक और दिलचस्प किस्से की पृष्ठभूमि साल 1950 के दशक के अंतिम वर्षों से जुड़ती है। यह वह दौर था जब एक तरफ मधुबाला और महानायक दिलीप कुमार के बीच के रिश्तों में गंभीर तल्खी आ चुकी थी और उनका सालों पुराना संबंध टूटने की कगार पर था। ठीक उसी समय जुल्फिकार अली भुट्टो की जिंदगी में मधुबाला की एंट्री हुई। भुट्टो अक्सर मुंबई प्रवास के दौरान ‘मुगल-ए-आजम’ के भव्य सेट पर पहुंच जाते थे, जहां वे घंटों बैठकर मधुबाला को अभिनय करते हुए निहारते थे। धीरे-धीरे दोनों के बीच मुलाकातों का सिलसिला बढ़ा और यह दोस्ती गहरी होती चली गई। ऐतिहासिक विवरणों के अनुसार, दोनों अक्सर फिल्म के सेट पर ही एक साथ दोपहर का भोजन करते थे और भुट्टो हमेशा मधुबाला के करीब रहने का बहाना ढूंढते थे। इस रिश्ते का सबसे जटिल पहलू यह था कि जब जुल्फिकार अली भुट्टो मधुबाला के करीब आ रहे थे, तब वे पहले से ही शादीशुदा थे और उनकी शादी शिरीन नामक महिला से हो चुकी थी। इसके बावजूद मधुबाला की जादुई शख्सियत के आकर्षण में बंधकर भुट्टो ने अपनी शादीशुदा जिंदगी की परवाह नहीं की। मीडिया रिपोर्ट्स और उस दौर के राजनैतिक-सिनेमाई गलियारों के दावों के अनुसार, भुट्टो ने एक दिन अपने दिल की बात खुलकर मधुबाला के सामने रख दी थी और उनके समक्ष बकायदा विवाह का प्रस्ताव भी पेश किया था। वे हर हाल में मधुबाला को अपनी जीवनसंगिनी बनाना चाहते थे और इसके लिए कोई भी कीमत चुकाने को तैयार थे। मधुबाला उस दौर में जुल्फिकार भुट्टो की बुद्धिमत्ता और उनके व्यक्तित्व का सम्मान जरूर करती थीं और उनके साथ पर्याप्त समय भी बिताती थीं, लेकिन वे एक बेहद व्यावहारिक महिला भी थीं। उन्हें इस बात का पूरा संज्ञान था कि भुट्टो न सिर्फ शादीशुदा हैं बल्कि एक दूसरे देश की सक्रिय राजनीति का हिस्सा भी हैं। ऐसे किसी संवेदनशील मोड़ पर शादी जैसा बड़ा और गंभीर फैसला लेना उनके करियर और व्यक्तिगत जीवन के लिए सही नहीं था। यही कारण रहा कि मधुबाला ने भुट्टो के प्रेम प्रस्ताव को बेहद शालीनता से ठुकरा दिया और अपने रिश्ते को एक सीमित दायरे से आगे नहीं बढ़ने दिया। आखिरकार उन्होंने भुट्टो से अपनी दूरियां बना लीं और इस तरह राजनीति और कला का यह अध्याय हमेशा के लिए अधूरा रह गया। इस अधूरी प्रेम कहानी के अंत के बाद दोनों की राहें पूरी तरह जुदा हो गईं। जुल्फिकार अली भुट्टो से अलग होने के तुरंत बाद साल 1960 में मधुबाला ने मशहूर गायक और अभिनेता किशोर कुमार से शादी कर ली। इसके कुछ समय बाद ही वे गंभीर बीमारियों की चपेट में आ गईं और महज 36 वर्ष की अल्पायु में साल 1969 में उन्होंने इस दुनिया को अलविदा कह दिया। दूसरी ओर, जुल्फिकार अली भुट्टो पाकिस्तान की राजनीति के शीर्ष पर पहुंचे और देश के विदेश मंत्री, राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री बने। हालांकि, नियति को कुछ और ही मंजूर था और साल 1979 में तख्तापलट के बाद महज 51 वर्ष की आयु में भुट्टो को पाकिस्तान में फांसी दे दी गई।
BHIND MURDER CASE: प्रेमिका के लिए की पत्नी की हत्या, पहचान छिपाने के लिए चेहरे को फावड़े से रोंदा

BHIND MURDER CASE: भिंड। 3 जून की सुबह पिपरौली गांव के पास बंबा में एक महिला का शव मिला था। चेहरा इतनी बुरी तरह क्षतिग्रस्त था कि उसकी पहचान तक नहीं हो पा रही थी। पुलिस के सामने यह एक ब्लाइंड मर्डर केस था, लेकिन घटनास्थल पर मिला एक फटा हुआ रेलवे टिकट इस हत्याकांड की सबसे अहम कड़ी साबित हुआ। करीब 10 दिन तक चली जांच, सैकड़ों सीसीटीवी फुटेज और लगातार पूछताछ के बाद पुलिस ने इस सनसनीखेज हत्याकांड का खुलासा कर दिया। जांच में सामने आया कि महिला की हत्या किसी दुश्मनी में नहीं, बल्कि प्रेम संबंधों के उलझे हुए जाल में हुई थी। पुलिस के अनुसार अजनौल निवासी नारायण बघेल का प्रतापगढ़ की रहने वाली इंद्रावती से प्रेम संबंध था। दोनों ने मंदिर में शादी भी की थी। लेकिन उसकी पुरानी प्रेमिका संगीता बघेल इस रिश्ते का विरोध कर रही थी और लगातार दबाव बना रही थी। इसी दबाव से छुटकारा पाने के लिए आरोपी ने हत्या की साजिश रची। काला हिरण’ फिल्म पर गहराया कानूनी संकट: अभिनेता गोविंद नामदेव के बयानों से भड़के निर्माता अमित जानी, मानहानि के तहत कोर्ट में घसीटने की दी चेतावनी योजना के तहत उसे मथुरा से ग्वालियर और फिर भिंड लाया गया। सोनी रेलवे स्टेशन से आगे सुनसान रास्ते में उसका गला घोंटकर हत्या कर दी गई। वारदात के बाद आरोपियों ने यह सुनिश्चित करने की कोशिश की कि शव की पहचान न हो सके। इसके लिए चेहरे पर फावड़े से कई वार किए गए। फिर शव को पिपरौली के पास बंबा किनारे फेंककर आरोपी फरार हो गए। भिंडी-मटन की ‘रिश्वत’ देकर गवाया गया था मन्ना डे का यह अमर गीत, आज भी सुनते ही झूम उठते हैं संगीत प्रेमी रेलवे टिकट से हुआ खुलासा मामले की जांच के दौरान पुलिस को घटनास्थल से एक फटा हुआ रेलवे टिकट मिला। टिकट के टुकड़ों को जोड़ने पर मथुरा से ग्वालियर की यात्रा का पता चला। इसके बाद पुलिस ने मथुरा से लेकर ग्वालियर और भिंड तक करीब 500 सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली। आखिरकार एक साड़ी, रेलवे स्टेशन की तस्वीरों और यात्रा के सुरागों ने पुलिस को आरोपियों तक पहुंचा दिया। MORENA TRAIN ACCIDENT: मुरैना ट्रैन हादसे में 4 की मौत, ट्रैन में आग लगने की अफवाह के डर से बहार कूदे! मेहगांव एसडीओपी संजय कोच्छा के मुताबिक मामले में तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है। पूछताछ में मुख्य आरोपी ने हत्या की पूरी साजिश कबूल कर ली है। पुलिस आगे की कार्रवाई कर रही है।
राजस्थान से ATS ने पकड़ा तीसरा आरोपी, भोपाल कनेक्शन की जांच तेज; युवाओं को जोड़ने और नेटवर्क फैलाने की साजिश का आरोप

मध्यप्रदेश । मध्यप्रदेश एंटी टेररिस्ट स्क्वॉड (ATS) ने कथित आतंकी साजिश से जुड़े मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए तीसरे आरोपी शाकिर मेव को राजस्थान के अलवर जिले के टप्पुकरा थाना क्षेत्र से गिरफ्तार किया है। एटीएस के अनुसार आरोपी संगठन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा था और कथित नेटवर्क के संचालन में उसकी सक्रिय भागीदारी सामने आई है। अदालत में पेशी के बाद उसे 20 जून तक रिमांड पर भेज दिया गया है। इस मामले में पहले भोपाल के काजी कैंप क्षेत्र से मोहम्मद फराज उर्फ खालिद सैफुल्लाह और उसके सहयोगी नईम अब्दुल्ला को गिरफ्तार किया जा चुका है। जांच एजेंसियों का दावा है कि दोनों से पूछताछ के दौरान कई महत्वपूर्ण जानकारियां सामने आई हैं। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है और मामले की जांच जारी है। जांच एजेंसियों के अनुसार फराज पर आरोप है कि वह सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के जरिए युवाओं तक पहुंच बनाने का प्रयास कर रहा था। प्रारंभिक जांच में यह बात सामने आई है कि टेलीग्राम और व्हाट्सएप जैसे माध्यमों का इस्तेमाल कर युवाओं को विभिन्न ग्रुपों से जोड़ने की कोशिश की जा रही थी। एटीएस का कहना है कि आरोपी कई वर्षों से डिजिटल प्लेटफॉर्म पर सक्रिय था और उसके ऑनलाइन नेटवर्क की विस्तृत जांच की जा रही है। सूत्रों के अनुसार जांच में यह भी सामने आया है कि फराज को कथित तौर पर नई पहचान देकर सोशल मीडिया नेटवर्क बढ़ाने और युवाओं तक पहुंच बनाने का काम सौंपा गया था। एटीएस अब इस बात की पड़ताल कर रही है कि उसके संपर्क किन लोगों से थे और कथित नेटवर्क का विस्तार किन-किन क्षेत्रों तक था। फराज की निशानदेही पर उसके सहयोगी नईम अब्दुल्ला को उत्तर प्रदेश के देवबंद से गिरफ्तार किया गया था। जांच एजेंसियों का मानना है कि यह गिरफ्तारी पूरे नेटवर्क को समझने में महत्वपूर्ण साबित हो सकती है। दोनों आरोपियों से अलग-अलग तथा आमने-सामने बैठाकर पूछताछ की जा रही है ताकि कथित साजिश की परतें खोली जा सकें। गौरतलब है कि एटीएस ने गुरुवार तड़के भोपाल के काजी कैंप इलाके में फराज के घर पर दबिश देकर उसे हिरासत में लिया था। कार्रवाई को पूरी तरह गोपनीय रखा गया था। जांच एजेंसियों के अनुसार फराज स्थानीय स्तर पर एक निजी क्लीनिक में काम करता था और उसने देवबंद में धार्मिक शिक्षा भी प्राप्त की थी। वहीं उसकी मुलाकात नईम अब्दुल्ला से हुई थी। जांच का एक महत्वपूर्ण पहलू डिजिटल साक्ष्य हैं। फराज का मोबाइल फोन जब्त कर फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा गया है। उसके सोशल मीडिया अकाउंट्स, चैट रिकॉर्ड, कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) और अन्य डिजिटल गतिविधियों का विश्लेषण किया जा रहा है। एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि आरोपियों के संपर्क देश और विदेश में किन लोगों से थे। इसके अलावा कथित विदेशी फंडिंग की भी जांच की जा रही है। एटीएस बैंकिंग रिकॉर्ड, लेन-देन और अन्य वित्तीय दस्तावेजों की जांच कर रही है ताकि किसी संदिग्ध आर्थिक सहायता के स्रोत का पता लगाया जा सके। अधिकारियों का कहना है कि जांच अभी प्रारंभिक चरण में है और सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं। मामले में एटीएस, केंद्रीय एजेंसियों और अन्य जांच इकाइयों के सहयोग से पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने का प्रयास कर रही है। अधिकारियों के अनुसार जांच पूरी होने के बाद ही पूरे मामले की वास्तविक तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।
एजबेस्टन में टूटा दुबई का ऐतिहासिक रिकॉर्ड: भारत-पाकिस्तान महामुकाबले को देखने उमड़ा दर्शकों का सैलाब, महिला क्रिकेट में रचा गया नया इतिहास

नई दिल्ली। अंतरराष्ट्रीय महिला क्रिकेट के इतिहास में रविवार का दिन एक नया मील का पत्थर साबित हुआ, जब आईसीसी विमेंस टी20 वर्ल्ड कप 2026 के ग्रुप चरण में भारत और पाकिस्तान की पारंपरिक प्रतिद्वंद्विता को देखने के लिए स्टेडियम में फैंस का अभूतपूर्व सैलाब उमड़ पड़ा। इंग्लैंड के बर्मिंघम स्थित ऐतिहासिक एजबेस्टन मैदान पर खेले गए इस महामुकाबले ने दर्शकों की उपस्थिति के मामले में दो साल पुराना एक बड़ा वैश्विक रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिया। इस मैच को लाइव देखने के लिए कुल 18,814 दर्शक स्टेडियम पहुंचे थे, जो महिला टी20 विश्व कप के इतिहास में किसी भी ग्रुप या लीग स्टेज के मैच के लिए अब तक की सबसे बड़ी दर्शक संख्या दर्ज की गई है। इस ऐतिहासिक उपस्थिति ने सिद्ध कर दिया है कि महिला क्रिकेट में भी भारत और पाकिस्तान के बीच होने वाले मुकाबलों की लोकप्रियता का ग्राफ वैश्विक स्तर पर बेहद तेजी से बढ़ रहा है। क्रिकेट जगत में दर्शकों की इस संख्या को एक क्रांतिकारी बदलाव के रूप में देखा जा रहा है। इससे पहले विमेंस टी20 वर्ल्ड कप के इतिहास में किसी लीग मैच में सबसे ज्यादा दर्शक जुटने का रिकॉर्ड संयुक्त अरब अमीरात के नाम दर्ज था। छह अक्टूबर 2024 को दुबई इंटरनेशनल क्रिकेट स्टेडियम में खेले गए भारत-पाकिस्तान मुकाबले के दौरान 15,935 दर्शकों की उपस्थिति दर्ज की गई थी, जिसे तब तक का सबसे बड़ा रिकॉर्ड माना जा रहा था। बर्मिंघम के मैदान पर ब्रिटिश धरती पर क्रिकेट प्रेमियों ने इस पुराने रिकॉर्ड को पूरी तरह से चकनाचूर कर दिया। यह आंकड़ा स्पष्ट करता है कि न सिर्फ उपमहाद्वीप बल्कि यूरोपीय देशों में भी दक्षिण एशियाई क्रिकेट के इस बड़े टकराव को लेकर खेल प्रेमियों में जबरदस्त दीवानगी और लालायित रहने का भाव मौजूद है। मैदान के भीतर के प्रदर्शन की बात करें तो दर्शकों के इस भारी जनसमर्थन के बीच भारतीय महिला क्रिकेट टीम ने अपने खेल का स्तर बेहद ऊंचा रखा और पाकिस्तान को हर मोर्चे पर पस्त कर दिया। पहले बल्लेबाजी करते हुए भारतीय टीम ने स्कोर बोर्ड पर 170 रनों का चुनौतीपूर्ण और विशाल स्कोर खड़ा किया था। इसके जवाब में 171 रनों के लक्ष्य का पीछा करने उतरी पाकिस्तानी टीम भारतीय गेंदबाजों के सटीक और धारदार आक्रमण के सामने बेबस नजर आई और महज 106 रनों के मामूली स्कोर पर पूरी तरह सिमट गई। भारत ने यह मुकाबला 64 रनों के एक बहुत बड़े अंतर से अपने नाम कर टूर्नामेंट के पॉइंट्स टेबल में अपनी स्थिति को सुदृढ़ कर लिया है। महिला टी20 विश्व कप के इतिहास में दोनों टीमों के बीच खेले गए कुल 9 मुकाबलों में यह भारत की 7वीं शानदार जीत है। इस ऐतिहासिक मुकाबले की सबसे बड़ी स्टार और मैच की वास्तविक हीरो ऑलराउंडर दीप्ति शर्मा रहीं। उन्होंने मैदान पर चौतरफा प्रदर्शन करते हुए न सिर्फ बल्ले से महत्वपूर्ण योगदान दिया बल्कि फील्डिंग के दौरान एक शानदार रन आउट भी किया। इसके बाद अपनी घातक स्पिन गेंदबाजी के दम पर उन्होंने पांच पाकिस्तानी बल्लेबाजों को पवेलियन की राह दिखाई। इस शानदार स्पेल की बदौलत दीप्ति शर्मा ने अंतरराष्ट्रीय टी20 क्रिकेट के इतिहास में सबसे ज्यादा विकेट चटकाने वाली दुनिया की अग्रणी गेंदबाज बनने का गौरव भी हासिल कर लिया है। उनके इस ऐतिहासिक कीर्तिमान और टीम की प्रचंड जीत ने एजबेस्टन में मौजूद हजारों भारतीय समर्थकों के उत्साह को कई गुना बढ़ा दिया। भारतीय महिला टीम इस एकतरफा और रिकॉर्डतोड़ जीत से मिले आत्मविश्वास के साथ अब अपने अगले अभियान की तैयारियों में जुट गई है। टूर्नामेंट के ग्रुप चरण में भारत का अगला मुकाबला आगामी 17 जून को नीदरलैंड्स के खिलाफ होना तय है। खेल विशेषज्ञों का मानना है कि इस मैच में बनी नई ऐतिहासिक दर्शक संख्या और दीप्ति शर्मा जैसे सीनियर खिलाड़ियों का यह विश्वस्तरीय प्रदर्शन पूरी टीम को पहली बार टी20 विश्व कप का खिताब जीतने के अपने मुख्य लक्ष्य की ओर तेजी से आगे बढ़ने में एक बड़ी मनोवैज्ञानिक ऊर्जा प्रदान करेगा।
क्या सचमुच धरती पर आते हैं एलियन? जानिए क्यों अब तक नहीं हो पाया दूसरे ग्रहों के जीवों से संपर्क

नई दिल्ली । क्या ब्रह्मांड में पृथ्वी के अलावा भी कहीं जीवन मौजूद है? यह सवाल विज्ञान की दुनिया के सबसे बड़े रहस्यों में से एक बना हुआ है। एलियन यानी पृथ्वी के बाहर रहने वाले संभावित जीवों को लेकर वर्षों से दावे और कहानियां सामने आती रही हैं, लेकिन अब तक ऐसा कोई ठोस वैज्ञानिक प्रमाण नहीं मिला है जो उनके अस्तित्व या पृथ्वी पर आने की पुष्टि कर सके। हाल के वर्षों में अमेरिका सहित कई देशों ने अनआइडेंटिफाइड एरियल फिनोमेना (UAP) से जुड़े दस्तावेज सार्वजनिक किए हैं। इसके बावजूद वैज्ञानिक समुदाय का मानना है कि अभी तक किसी भी घटना को एलियन गतिविधि से जोड़ने वाला पुख्ता सबूत सामने नहीं आया है। दूसरी ओर, सर्वेक्षणों में बड़ी संख्या में लोग यह मानते हैं कि ब्रह्मांड में कहीं न कहीं जीवन अवश्य मौजूद होगा। हमारी कल्पना से कहीं अधिक विशाल है ब्रह्मांडविशेषज्ञों के अनुसार ब्रह्मांड इतना विशाल है कि उसकी पूरी सीमा का अनुमान लगाना भी मुश्किल है। पृथ्वी के सबसे नजदीकी तारों में से एक Proxima Centauri लगभग 40 ट्रिलियन किलोमीटर दूर स्थित है। इतनी दूरी तय करने में प्रकाश को भी करीब 4.3 वर्ष लग जाते हैं। आज तक मानव द्वारा विकसित अंतरिक्ष यान प्रकाश की गति के बेहद छोटे हिस्से तक ही पहुंच पाए हैं। मौजूदा तकनीक के अनुसार किसी अंतरिक्ष यान को प्रॉक्सिमा सेंटॉरी तक पहुंचने में हजारों वर्ष लग सकते हैं। ऐसे में दूसरे ग्रहों तक यात्रा करना या वहां से किसी सभ्यता का पृथ्वी तक पहुंचना बेहद कठिन माना जाता है। अंतरिक्ष यात्रा की सबसे बड़ी चुनौती है ऊर्जावैज्ञानिकों का कहना है कि अंतरतारकीय यात्रा के लिए अकल्पनीय मात्रा में ऊर्जा की आवश्यकता होगी। यदि कोई यान प्रकाश की गति के करीब पहुंचना चाहता है, तो उसे ऊर्जा का ऐसा स्रोत चाहिए होगा जो वर्तमान विज्ञान की पहुंच से बहुत आगे है। इसके अलावा अंतरिक्ष पूरी तरह खाली नहीं है। वहां गैसों और सूक्ष्म कणों की मौजूदगी होती है। अत्यधिक गति से यात्रा करने पर इन कणों से टकराव भी विनाशकारी साबित हो सकता है। यही कारण है कि लंबी दूरी की अंतरिक्ष यात्राओं को लेकर अभी भी कई तकनीकी चुनौतियां बनी हुई हैं। क्या एलियन पृथ्वी पर आना चाहेंगे?कुछ वैज्ञानिक यह भी सवाल उठाते हैं कि यदि कोई सभ्यता इतनी उन्नत है कि वह तारों के बीच यात्रा कर सकती है, तो उसे पृथ्वी पर आने की आवश्यकता क्यों होगी? संभव है कि ऐसी सभ्यता अपनी जरूरत की लगभग हर चीज अपने ग्रह या तकनीक की मदद से हासिल कर सकती हो। इसी वजह से कई वैज्ञानिक मानते हैं कि एलियन सभ्यताओं के होने की संभावना और उनके पृथ्वी तक पहुंचने की संभावना दो अलग-अलग बातें हैं। पृथ्वी का वातावरण हर जीव के लिए उपयुक्त नहींपृथ्वी का जैवमंडल यहां मौजूद जीवन के लिए अनुकूल है, लेकिन जरूरी नहीं कि किसी दूसरे ग्रह के जीव भी इसी वातावरण में जीवित रह सकें। पृथ्वी पर जीवन के विकास में ऑक्सीजन की महत्वपूर्ण भूमिका रही है, लेकिन संभव है कि किसी अन्य ग्रह पर जीवन पूरी तरह अलग रासायनिक परिस्थितियों में विकसित हुआ हो। ऐसी स्थिति में यदि कोई बाहरी जीव पृथ्वी पर आए भी, तो उसे विशेष सुरक्षा उपकरणों या अलग वातावरण की आवश्यकता पड़ सकती है। अरबों ग्रहों में जीवन की तलाश जारीवैज्ञानिकों ने अब तक हजारों एक्सोप्लैनेट यानी सौरमंडल के बाहर मौजूद ग्रहों की खोज की है। केवल हमारी आकाशगंगा में ही अरबों तारे और उनसे जुड़े असंख्य ग्रह मौजूद होने का अनुमान है। ऐसे में यह मानना कठिन है कि पूरे ब्रह्मांड में पृथ्वी ही जीवन का एकमात्र केंद्र हो। फिर भी आज तक किसी एलियन सभ्यता या पृथ्वी पर उनके आगमन का प्रमाण नहीं मिला है। विज्ञान लगातार नए ग्रहों और संभावित जीवन की तलाश में जुटा है, लेकिन फिलहाल एलियन का अस्तित्व एक रोमांचक संभावना है, सिद्ध तथ्य नहीं।
गरुड़ पुराण में बताई गईं ये 5 आदतें बना सकती हैं कंगाल! धनवान व्यक्ति भी हो सकता है आर्थिक संकट का शिकार

नई दिल्ली । सनातन परंपरा के महत्वपूर्ण ग्रंथों में शामिल Garuda Purana केवल मृत्यु और परलोक से जुड़े विषयों का ही वर्णन नहीं करता, बल्कि जीवन को बेहतर बनाने वाले अनेक आचार-विचार भी सिखाता है। इसके आचार कांड में व्यक्ति के दैनिक व्यवहार, स्वच्छता, अनुशासन और सामाजिक आचरण को लेकर कई महत्वपूर्ण बातें कही गई हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार कुछ ऐसी आदतें हैं जो घर की समृद्धि को प्रभावित कर सकती हैं और आर्थिक परेशानियों का कारण बन सकती हैं। हालांकि इन बातों को धार्मिक और सांस्कृतिक मान्यताओं के रूप में देखा जाता है, लेकिन इनमें से कई आदतें व्यवहारिक जीवन में भी अनुशासन और सकारात्मकता बनाए रखने की सीख देती हैं। सुबह देर तक सोनागरुड़ पुराण के अनुसार सूर्योदय के बाद भी लंबे समय तक सोते रहना शुभ नहीं माना गया है। धार्मिक मान्यता है कि सुबह का समय सकारात्मक ऊर्जा और नए कार्यों की शुरुआत का समय होता है। देर तक सोने से आलस्य बढ़ता है और व्यक्ति के कार्यों की गति प्रभावित हो सकती है। इसी कारण शास्त्रों में ब्रह्म मुहूर्त में जागने की सलाह दी गई है। गंदे कपड़े पहनना और स्वच्छता की अनदेखीधार्मिक ग्रंथों में स्वच्छता को विशेष महत्व दिया गया है। मान्यता है कि जहां साफ-सफाई होती है, वहां सुख और समृद्धि का वास होता है। गंदे कपड़े पहनना, नियमित स्नान न करना या घर में अव्यवस्था बनाए रखना नकारात्मकता को बढ़ावा देता है। यही कारण है कि घर और शरीर दोनों को स्वच्छ रखने पर जोर दिया गया है। रसोई में जूठे बर्तन छोड़नारसोई को घर का सबसे पवित्र स्थान माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार रात में सिंक या रसोई में जूठे बर्तन छोड़ना शुभ नहीं माना जाता। कहा जाता है कि इससे घर में नकारात्मक वातावरण बन सकता है। इसलिए सोने से पहले रसोई को साफ-सुथरा रखने की परंपरा प्राचीन समय से चली आ रही है। दूसरों की निंदा और बेवजह क्रोधगरुड़ पुराण में दूसरों की बुराई करने, ईर्ष्या रखने और हर समय क्रोधित रहने की प्रवृत्ति को भी नुकसानदायक बताया गया है। ऐसी आदतें व्यक्ति के रिश्तों को प्रभावित करती हैं और घर का वातावरण अशांत बना सकती हैं। धार्मिक मान्यता है कि जहां कलह और तनाव अधिक होता है, वहां सुख-शांति लंबे समय तक नहीं टिकती। नाखून चबाने जैसी अशुभ आदतेंग्रंथ में दांतों से नाखून चबाने जैसी आदतों को भी अनुचित माना गया है। इसे अनुशासनहीनता और अस्वच्छ व्यवहार का प्रतीक माना जाता है। आधुनिक दृष्टिकोण से भी यह आदत स्वास्थ्य के लिए ठीक नहीं मानी जाती। इसलिए इसे छोड़ने की सलाह दी जाती है। जीवन में अनुशासन का महत्वगरुड़ पुराण की इन शिक्षाओं का मूल संदेश यही है कि व्यक्ति अपने जीवन में स्वच्छता, अनुशासन, सकारात्मक सोच और अच्छे व्यवहार को अपनाए। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार ऐसा करने से घर में सुख, शांति और समृद्धि बनी रहती है। वहीं व्यवहारिक दृष्टि से भी ये आदतें व्यक्ति के जीवन को व्यवस्थित और सफल बनाने में मदद कर सकती हैं।
काला हिरण' फिल्म पर गहराया कानूनी संकट: अभिनेता गोविंद नामदेव के बयानों से भड़के निर्माता अमित जानी, मानहानि के तहत कोर्ट में घसीटने की दी चेतावनी

नई दिल्ली। फिल्म उद्योग में वास्तविक और चर्चित आपराधिक मामलों पर बनने वाली फिल्मों को लेकर अक्सर विवाद खड़े होते रहे हैं, लेकिन वर्तमान में फिल्म ‘काला हिरण’ को लेकर शुरू हुआ आंतरिक घमासान अब कानूनी चौखट तक पहुंच गया है। अभिनेता सलमान खान से जुड़े चर्चित ब्लैकबक कानूनी मामले से प्रेरित इस आगामी फिल्म के मुख्य कलाकार गोविंद नामदेव और फिल्म के निर्माता अमित जानी के बीच सीधा वैचारिक और कानूनी टकराव पैदा हो गया है। अभिनेता गोविंद नामदेव ने हाल ही में सार्वजनिक मंच पर यह बयान देकर सनसनी फैला दी थी कि उन्हें फिल्म की वास्तविक पटकथा और संदर्भ के बारे में पूरी तरह अंधेरे में रखा गया था। अभिनेता के अनुसार, यदि उन्हें पहले से इस बात का भान होता कि यह पूरी फिल्म सलमान खान की छवि के विपरीत और उनके खिलाफ केंद्रित है, तो वह कभी भी इस परियोजना का हिस्सा नहीं बनते। इस गंभीर और एकतरफा आरोप के सार्वजनिक होते ही फिल्म के निर्माता अमित जानी ने बेहद आक्रामक रुख अपनाते हुए अभिनेता के दावों को पूरी तरह से खारिज कर दिया है। निर्माता ने एक वीडियो संदेश के माध्यम से अपना कड़ा विरोध दर्ज कराते हुए कहा कि किसी भी अनुभवी और वरिष्ठ अभिनेता के साथ बिना लिखित पटकथा के तीन-चार दिनों तक लगातार अदालत के दृश्यों की शूटिंग करना व्यावहारिक रूप से असंभव है। प्रोडक्शन हाउस का स्पष्ट तर्क है कि फिल्म का शीर्षक ही ‘काला हिरण’ है, जो सीधे तौर पर वर्ष 1998 से लेकर 2018 तक जोधपुर की निचली और उच्च अदालतों में चले ऐतिहासिक मुकदमे की याद दिलाता है। ऐसे में यह कहना कि कलाकार को विषय की गहराई और संदर्भ की जानकारी नहीं थी, पूरी तरह से असत्य और हास्यास्पद है। निर्माता ने तकनीकी और दस्तावेजी साक्ष्यों का हवाला देते हुए बताया कि गोविंद नामदेव फिल्म में मुख्य सरकारी वकील की भूमिका निभा रहे हैं, जो अयान खान नामक चरित्र के खिलाफ अदालती पैरवी कर रहा है। शूटिंग के दौरान अभिनेता ने स्वयं कई जटिल कानूनी और प्रासंगिक संवाद बोले हैं, जिसमें जीप पर लगे खून के धब्बे और टायरों में फंसे हिरण के बालों जैसे संवेदनशील विवरणों का जिरह के दौरान उल्लेख शामिल है। प्रोडक्शन हाउस के अनुसार, सेट पर बिना किसी दबाव या गनपॉइंट के पूरी स्वेच्छा से किए गए काम को अब साक्षात्कार के माध्यम से धोखे का नाम दिया जा रहा है, जो कि केवल एक बड़े सुपरस्टार को खुश करने और उद्योग में अपने संबंधों को बचाने की एक कमजोर कोशिश मात्र है। इस पूरे प्रकरण में सबसे बड़ा मोड़ तब आया जब निर्माता अमित जानी ने दोनों पक्षों के बीच हस्ताक्षरित कानूनी अनुबंध का खुलासा किया। निर्माता के दावों के अनुसार, गोविंद नामदेव ने न केवल इस वर्तमान फिल्म के लिए बल्कि भविष्य में बनने वाले इसके दूसरे भाग के लिए भी बकायदा कानूनी एग्रीमेंट साइन किया था। अब सार्वजनिक रूप से इस तरह के विरोधाभासी बयान देना न केवल उस कानूनी अनुबंध की शर्तों का खुला उल्लंघन है, बल्कि इससे प्रोडक्शन हाउस की बाजार साख और फिल्म की व्यावसायिक छवि को भी भारी वित्तीय और नैतिक नुकसान पहुंचा है। इस विवाद के बाद प्रोडक्शन हाउस ने अब रक्षात्मक रुख छोड़कर पूरी तरह से आक्रामक कानूनी कार्रवाई करने का मन बना लिया है। फिल्म निर्माता ने स्पष्ट किया है कि वे इस अनुबंध उल्लंघन और मानहानि के मामले को लेकर बहुत जल्द कानूनी नोटिस जारी करने जा रहे हैं। इस मामले की आधिकारिक सुनवाई और जांच के लिए अभिनेता को नोएडा की जिला अदालत में आकर अपना जवाब दाखिल करना होगा। सिनेमा जगत के विश्लेषकों का मानना है कि इस आंतरिक कलह और आने वाले कानूनी नोटिस के बाद फिल्म के समय पर प्रदर्शन और इसके भविष्य को लेकर अनिश्चितता के बादल और अधिक गहरे हो गए हैं।
रिलीज से पहले ही ‘वेलकम टू द जंगल’ का बड़ा धमाका, IMDb की मोस्ट अवेटेड फिल्मों की लिस्ट में पहुंची नंबर 1 पर

नई दिल्ली । बॉलीवुड अभिनेता Akshay Kumar की बहुप्रतीक्षित फिल्म Welcome to the Jungle रिलीज से पहले ही लगातार सुर्खियां बटोर रही है। हाल ही में फिल्म का ट्रेलर जारी किया गया था, जिसे दर्शकों और फिल्म समीक्षकों से शानदार प्रतिक्रिया मिली। अब फिल्म ने एक और बड़ी उपलब्धि अपने नाम कर ली है। IMDb की मोस्ट अवेटेड इंडियन फिल्मों की सूची में ‘वेलकम टू द जंगल’ पहले स्थान पर पहुंच गई है। फिल्म के ट्रेलर को रिलीज के महज दो दिनों के भीतर 28 मिलियन से अधिक व्यूज मिल चुके हैं। यूट्यूब पर ट्रेलर लगातार ट्रेंड कर रहा है और सोशल मीडिया पर भी इसे लेकर चर्चा तेज है। कॉमेडी, एक्शन और मनोरंजन से भरपूर इस फिल्म को लेकर दर्शकों में खासा उत्साह देखने को मिल रहा है। फिल्म का निर्देशन Ahmed Khan ने किया है। खास बात यह है कि इस फिल्म के जरिए अक्षय कुमार एक बार फिर लोकप्रिय ‘वेलकम’ फ्रेंचाइजी में वापसी कर रहे हैं। इससे पहले भी इस फ्रेंचाइजी की फिल्मों को दर्शकों का भरपूर प्यार मिला था और अब इसके नए अध्याय से भी बड़ी उम्मीदें लगाई जा रही हैं। ट्रेलर के अनुसार फिल्म की कहानी हास्य और भ्रम की घटनाओं पर आधारित है। इसमें अक्षय कुमार एक संघर्षरत अभिनेता की भूमिका में दिखाई देते हैं, जो अपने करियर को दोबारा पटरी पर लाने की कोशिश कर रहा है। इस दौरान वह एक सफल अभिनेत्री, जिसका किरदार Jacqueline Fernandez निभा रही हैं, के साथ एक फिल्म की शूटिंग के लिए गांव पहुंचता है। हालांकि गांव के लोग पूरी टीम को असली सेना का दल समझ लेते हैं और उनसे एक खतरनाक अपराधी से बचाने की गुहार लगाते हैं। इसके बाद शुरू होता है भ्रम, कॉमेडी और रोमांच से भरपूर घटनाओं का सिलसिला। फिल्म में कई बड़े कलाकार नजर आने वाले हैं, जिनमें Jackie Shroff भी शामिल हैं। मल्टीस्टारर कास्ट और बड़े पैमाने पर तैयार की गई इस फिल्म को लेकर ट्रेड एक्सपर्ट्स भी सकारात्मक संकेत दे रहे हैं। अक्षय कुमार की हालिया फिल्मों की बात करें तो वह हाल ही में एक हॉरर-कॉमेडी फिल्म में नजर आए थे, जिसे Priyadarshan ने निर्देशित किया था। फिल्म ने वैश्विक स्तर पर अच्छी कमाई की और दर्शकों का मनोरंजन किया। अब सभी की निगाहें 26 जून को रिलीज होने जा रही ‘वेलकम टू द जंगल’ पर टिकी हैं। इस फिल्म के बाद अक्षय कुमार कई बड़े प्रोजेक्ट्स में दिखाई देने वाले हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार वह आगामी फिल्म ‘हैवान’ में नजर आएंगे, जिसमें उनके साथ Saif Ali Khan भी दिखाई देंगे। इसके अलावा वह Golmaal 5 का भी हिस्सा होंगे, जिसका निर्देशन Rohit Shetty कर रहे हैं। मीडिया रिपोर्ट्स में यह भी दावा किया जा रहा है कि ‘गोलमाल 5’ में अक्षय कुमार एक अलग और संभवतः नकारात्मक भूमिका में नजर आ सकते हैं। हालांकि निर्माताओं की ओर से इस बारे में आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं की गई है। फिलहाल ‘वेलकम टू द जंगल’ की बढ़ती लोकप्रियता और IMDb रैंकिंग यह संकेत दे रही है कि फिल्म रिलीज से पहले ही दर्शकों के बीच मजबूत पकड़ बना चुकी है। अब देखना दिलचस्प होगा कि 26 जून को सिनेमाघरों में उतरने के बाद यह बॉक्स ऑफिस पर कितना बड़ा कमाल दिखा पाती है।