अमेजन प्राइम डे सेल से पहले लॉन्च हो सकती है वनप्लस 'N6' सीरीज, रेडमी और रियलमी के दबदबे को मिलेगी सीधी चुनौती

नई दिल्ली। भारतीय स्मार्टफोन बाजार के प्रीमियम और मिड-रेंज सेगमेंट में अपनी मजबूत पकड़ बनाने के बाद दिग्गज टेक ब्रांड वनप्लस अब देश के किफायती मोबाइल बाजार में एक बड़ा धमाका करने की तैयारी कर रहा है। कंपनी भारत में अपनी नई एंट्री-लेवल स्मार्टफोन श्रृंखला ‘वनप्लस एन सीरीज’ को पेश करने जा रही है। इस आगामी सीरीज के तहत बेहद किफायती हैंडसेट लॉन्च किए जाएंगे, जिनकी शुरुआती कीमत बीस हजार रुपये से भी कम होने की पूरी संभावना है। वनप्लस ने इस नई तैयारी को अमलीजामा पहनाते हुए अपने आधिकारिक वेब पोर्टल पर एक नया टीजर भी लाइव कर दिया है, जिसने टेक जगत और बजट स्मार्टफोन उपभोक्ताओं के बीच उत्सुकता काफी बढ़ा दी है। इस नई रणनीतिक तैयारी के तहत वनप्लस का मुख्य फोकस उन उपभोक्ताओं को आकर्षित करना है जो कम बजट में एक भरोसेमंद और बेहतर ब्रांड वैल्यू वाला स्मार्टफोन खरीदना चाहते हैं। बाजार विश्लेषकों का मानना है कि इस नई सीरीज के आने से भारतीय मोबाइल बाजार के सब-20 हजार रुपये वाले सेगमेंट में प्रतिस्पर्धा काफी रोचक हो जाएगी। वनप्लस की इस किफायती सीरीज का सीधा मुकाबला पहले से इस सेगमेंट में स्थापित चीनी और वैश्विक ब्रांड्स जैसे रेडमी, रियलमी, पोको और वीवो के एंट्री-लेवल तथा मिड-रेंज हैंडसेट्स से होगा। कंपनी इन फोन्स की बिक्री के लिए प्रमुख ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म अमेजन इंडिया को अपना मुख्य पार्टनर बना सकती है। कंपनी द्वारा जारी किए गए आधिकारिक टीजर में फिलहाल आगामी हैंडसेट्स की लॉन्चिंग को लेकर ‘कमिंग सून’ का टैगलाइन इस्तेमाल किया गया है। वनप्लस ने अभी तक किसी निश्चित लॉन्चिंग तारीख या समय सीमा का आधिकारिक तौर पर खुलासा नहीं किया है, लेकिन तकनीकी गलियारों में इसे लेकर चर्चाएं तेज हैं। वैश्विक तकनीकी रिपोर्ट्स और लीक हुई जानकारियों के अनुसार, इस सीरीज के तहत बाजार में उतरने वाले पहले स्मार्टफोन का नाम ‘वनप्लस एन6’ हो सकता है। हालांकि, गोपनीयता बनाए रखते हुए कंपनी ने अभी तक इस फोन के कैमरा सेटअप, प्रोसेसर क्षमता, बैटरी बैकअप और अन्य प्रमुख स्पेसिफिकेशन्स से जुड़ी बारीक जानकारियां साझा नहीं की हैं। इस नई घोषणा के बाद तकनीकी जानकारों के बीच यह सवाल भी उठने लगा है कि कंपनी की मौजूदा किफायती श्रृंखला ‘नोर्ड सीरीज’ का भविष्य क्या होगा। उल्लेखनीय है कि कंपनी ने हाल ही में बाजार में नोर्ड 6, नोर्ड सीई6 और नोर्ड सीई6 लाइट जैसे स्मार्टफोन उतारे थे, जो ग्राहकों के बीच काफी लोकप्रिय रहे हैं। माना जा रहा है कि नई ‘N’ सीरीज को नोर्ड सीरीज से भी नीचे के प्राइस ब्रैकेट में स्थापित किया जाएगा ताकि कंपनी हर वर्ग के ग्राहकों तक अपनी पहुंच बना सके। यह रणनीति वनप्लस को भारत के ग्रामीण और अर्ध-शहरी बाजारों में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने में काफी मदद कर सकती है। व्यावसायिक रणनीतियों और बाजार के रुझानों से संकेत मिलते हैं कि वनप्लस अपनी इस नई किफायती सीरीज के हैंडसेट्स को आगामी अमेजन प्राइम डे सेल की शुरुआत से ठीक पहले भारतीय बाजार में पेश कर सकती है। इस रणनीतिक टाइमिंग का मुख्य उद्देश्य सेल के दौरान मिलने वाले भारी ट्रैफिक और उपभोक्ता मांग का पूरा लाभ उठाना है ताकि शुरुआती दौर में ही बड़ी संख्या में हैंडसेट्स की बिक्री की जा सके। हालांकि, इस व्यापारिक योजना और उत्पादन आपूर्ति को लेकर कंपनी की ओर से आने वाले दिनों में और अधिक विस्तृत तथा पुख्ता आधिकारिक घोषणाएं होने की उम्मीद जताई जा रही है।
एक दिन में 47 फिल्में साइन करने वाला बॉलीवुड स्टार, पहली ही फिल्म ने बनाया सुपरस्टार, फिर फीका पड़ गया करियर

नई दिल्ली । हिंदी सिनेमा के इतिहास में कई ऐसे कलाकार हुए हैं जिन्होंने अपनी पहली ही फिल्म से दर्शकों के दिलों में खास जगह बना ली। हालांकि, हर किसी की सफलता लंबे समय तक कायम नहीं रह पाती। अभिनेता Rahul Roy की कहानी भी कुछ ऐसी ही है। एक समय था जब फिल्म निर्माता उनके साथ काम करने के लिए कतार में खड़े रहते थे और उनके पास फिल्मों की इतनी भरमार थी कि उन्होंने एक ही दिन में 47 फिल्में साइन कर ली थीं। हाल ही में राहुल रॉय टीवी शो लाफ्टर शेफ्स में नजर आए, जहां उनके फिल्मी करियर से जुड़ा एक दिलचस्प किस्सा सामने आया। शो के दौरान अभिनेता Karan Kundrra ने राहुल से पूछा कि क्या उन्होंने एक दिन में 150 फिल्में साइन की थीं। इस पर राहुल ने मुस्कुराते हुए जवाब दिया कि यह आंकड़ा गलत है। उन्होंने बताया कि उन्होंने 150 नहीं, बल्कि 47 फिल्में एक ही दिन में साइन की थीं। यह सुनकर शो में मौजूद सभी लोग हैरान रह गए। राहुल रॉय को सबसे ज्यादा पहचान फिल्म Aashiqui से मिली थी। यह उनकी पहली फिल्म थी और रिलीज होते ही देशभर में जबरदस्त हिट साबित हुई। फिल्म में उनके साथ अभिनेत्री Anu Aggarwal नजर आई थीं। रोमांटिक कहानी और यादगार संगीत के कारण ‘आशिकी’ ने दर्शकों के दिलों में खास जगह बना ली। फिल्म की लोकप्रियता इतनी अधिक थी कि राहुल रॉय को लंबे समय तक ‘आशिकी बॉय’ के नाम से जाना जाता रहा। एक इंटरव्यू में राहुल रॉय ने बताया था कि ‘आशिकी’ सिनेमाघरों में करीब छह महीने तक हाउसफुल चली थी। फिल्म की सफलता ने उन्हें रातोंरात स्टार बना दिया और उनके पास फिल्मों के प्रस्तावों की बाढ़ आ गई। निर्माता और निर्देशक उन्हें अपनी फिल्मों में लेने के लिए उत्सुक रहते थे। इसी दौरान उन्होंने 47 फिल्मों पर हस्ताक्षर कर दिए। हालांकि, इतनी बड़ी संख्या में फिल्में साइन करना उनके लिए मुश्किल साबित हुआ। राहुल ने बाद में स्वीकार किया था कि उनके पास सभी फिल्मों के लिए समय नहीं था। मजबूरी में उन्हें कई प्रोजेक्ट छोड़ने पड़े और लगभग 21 निर्माताओं को उनकी एडवांस राशि भी लौटानी पड़ी। यह उनके करियर का एक ऐसा दौर था जब लोकप्रियता अपने चरम पर थी, लेकिन सही प्रबंधन न होने के कारण वह उसका पूरा लाभ नहीं उठा सके। फिल्मों के अलावा राहुल रॉय रियलिटी शो की दुनिया में भी अपनी पहचान बना चुके हैं। वे वर्ष 2007 में प्रसारित हुए Bigg Boss के पहले सीजन के विजेता रहे थे। बिग बॉस की ट्रॉफी जीतने के बाद भी उनके करियर को वैसी रफ्तार नहीं मिल सकी जैसी ‘आशिकी’ के दौर में देखने को मिली थी। राहुल रॉय ने अपने करियर में 28 से अधिक फिल्मों में काम किया, लेकिन उनकी बाद की अधिकांश फिल्में बॉक्स ऑफिस पर अपेक्षित सफलता हासिल नहीं कर सकीं। धीरे-धीरे उनका स्टारडम कम होता गया और वे फिल्मी दुनिया से दूर होते चले गए। हाल के वर्षों में राहुल रॉय सोशल मीडिया पर भी चर्चा में रहे हैं। कुछ समय पहले एक कंटेंट क्रिएटर के साथ रील वीडियो बनाने को लेकर उन्हें ट्रोलिंग का सामना करना पड़ा था। आलोचनाओं का जवाब देते हुए राहुल ने कहा था कि वह ईमानदारी से काम कर रहे हैं और मेहनत करके अपनी जिम्मेदारियां निभा रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा था कि यदि लोग उनकी इतनी चिंता करते हैं तो उन्हें बेहतर काम दिलाने में मदद करें। राहुल रॉय की कहानी बॉलीवुड में सफलता और संघर्ष दोनों का अनोखा उदाहरण है। एक दौर में जहां वे इंडस्ट्री के सबसे चर्चित सितारों में शामिल थे, वहीं आज उनकी यात्रा नई पीढ़ी के कलाकारों को सफलता के साथ संतुलन बनाए रखने का संदेश देती है।
भिंडी-मटन की ‘रिश्वत’ देकर गवाया गया था मन्ना डे का यह अमर गीत, आज भी सुनते ही झूम उठते हैं संगीत प्रेमी

नई दिल्ली । भारतीय सिनेमा के महान पार्श्वगायकों में शुमार Manna Dey ने अपने लंबे और शानदार करियर में सैकड़ों यादगार गीत गाए। शास्त्रीय संगीत की मजबूत पकड़ और मधुर आवाज के कारण उन्हें हिंदी फिल्म इंडस्ट्री के सबसे सम्मानित गायकों में गिना जाता है। उनके जीवन से जुड़े कई किस्से आज भी संगीत प्रेमियों के बीच चर्चा का विषय बने रहते हैं। ऐसा ही एक दिलचस्प किस्सा फिल्म देख कबीरा रोया के मशहूर गीत “कौन आया मेरे मन के द्वारे” से जुड़ा हुआ है। साल 1957 में रिलीज हुई Dekh Kabira Roya का निर्देशन अमेय चक्रवर्ती ने किया था, जबकि फिल्म का संगीत दिग्गज संगीतकार Madan Mohan ने तैयार किया था। फिल्म का गीत “कौन आया मेरे मन के द्वारे” उस दौर के सबसे लोकप्रिय गीतों में गिना जाता है। यह गीत अभिनेता Anup Kumar पर फिल्माया गया था और आज भी रेडियो, संगीत कार्यक्रमों और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर खूब सुना जाता है। कहा जाता है कि इस गीत की धुन तैयार करते समय मदन मोहन के मन में केवल एक ही नाम था और वह था मन्ना डे। दरअसल, यह गीत शास्त्रीय संगीत के रंग में रंगा हुआ था। संगीत जगत में माना जाता था कि शास्त्रीय रागों पर आधारित गीतों को भावपूर्ण ढंग से प्रस्तुत करने में मन्ना डे का कोई मुकाबला नहीं था। यही वजह थी कि मदन मोहन किसी अन्य गायक के बजाय मन्ना डे की आवाज में ही इस गीत को रिकॉर्ड करना चाहते थे। हालांकि, मन्ना डे को मनाने के लिए मदन मोहन ने एक अनोखा तरीका अपनाया। चर्चित किस्सों के अनुसार, उन्होंने मन्ना डे से पूछा कि वे क्या कर रहे हैं। जब मन्ना डे ने बताया कि उनके पास फिलहाल कोई विशेष काम नहीं है, तब मदन मोहन ने उन्हें अपने घर आने का निमंत्रण दिया और कहा कि वे उन्हें उनकी पसंद का भिंडी-मटन खिलाएंगे। मदन मोहन अपने बेहतरीन खानपान और मेहमाननवाजी के लिए भी जाने जाते थे। ऐसे में स्वादिष्ट भोजन का न्योता सुनकर मन्ना डे उनके घर पहुंच गए। वहां उनका शानदार स्वागत हुआ और उन्हें भिंडी-मटन परोसा गया। भोजन के बाद मदन मोहन ने बड़ी सहजता से उन्हें गीत की धुन सुनाई और कहा कि वे चाहते हैं कि यह गीत मन्ना डे ही गाएं। बताया जाता है कि धुन सुनते ही मन्ना डे प्रभावित हो गए और उन्होंने तुरंत गीत गाने के लिए हामी भर दी। इसके बाद रिकॉर्ड हुआ “कौन आया मेरे मन के द्वारे” हिंदी फिल्म संगीत का एक कालजयी गीत बन गया। इसकी मधुरता, शास्त्रीयता और मन्ना डे की अद्भुत गायकी ने इसे अमर बना दिया। दशकों बाद भी यह गीत संगीत प्रेमियों की पसंदीदा सूची में शामिल है। मन्ना डे की प्रतिभा का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उन्हें अपने करियर में अनेक प्रतिष्ठित सम्मान मिले। उन्हें वर्ष 1971 में पद्म श्री, 2005 में दादा साहब फाल्के पुरस्कार और 2012 में पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया। इसके अलावा उन्हें तीन बार राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार भी प्राप्त हुआ। उनकी आवाज और संगीत साधना आज भी नई पीढ़ी के गायकों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी हुई है।
निर्जला एकादशी पर शनि और शुक्र रचेंगे दुर्लभ इतिहास: ज्योतिषीय गणना में 120 डिग्री पर नवपंचम राजयोग का महासंयोग

नई दिल्ली। सनातन परंपरा में सबसे कठिन और महत्वपूर्ण मानी जाने वाली निर्जला एकादशी इस बार न केवल धार्मिक दृष्टि से बल्कि ज्योतिषीय समीकरणों के लिहाज से भी अत्यंत विशेष होने जा रही है। आगामी पच्चीस जून को मनाए जाने वाले इस पावन पर्व पर आकाशमंडल में एक बेहद दुर्लभ और शक्तिशाली नवपंचम राजयोग का निर्माण होने जा रहा है। ज्योतिष शास्त्र के विशेषज्ञों के अनुसार यह शुभ संयोग तब बनता है जब दो मित्र ग्रह एक-दूसरे से विशेष त्रिकोणीय दूरी पर स्थापित होते हैं। इस बार न्याय के देवता शनि और सुख-वैभव के प्रदाता शुक्र एक-दूसरे से ठीक एक सौ बीस डिग्री के कोण पर विराजमान होकर इस अद्भुत योग को पूर्ण करेंगे, जिसका सीधा सकारात्मक प्रभाव मानव जीवन के आर्थिक और व्यावसायिक क्षेत्रों पर देखने को मिलेगा। मध्य प्रदेश। ज्योतिष विज्ञान में शनि और शुक्र को नैसर्गिक रूप से परम मित्र माना गया है, इसलिए इन दोनों के बीच बनने वाला पांचवें और नौवें भाव का यह त्रिकोणीय संबंध बेहद फलदायी माना जाता है। इस बार निर्जला एकादशी के दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की संयुक्त आराधना के साथ इस राजयोग का मिलना एक महान आध्यात्मिक संयोग है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस विशेष दिन पर व्रत रखने, जप करने और जरूरतमंदों को शीतल जल व अन्न का दान करने से ग्रहों के नकारात्मक प्रभाव पूरी तरह शांत होते हैं। ज्योतिषीय गणनाओं से स्पष्ट संकेत मिल रहे हैं कि इस राजयोग के प्रभाव से देश के आर्थिक परिदृश्य और विशेषकर चार भाग्यशाली राशियों के जीवन में अप्रत्याशित और सकारात्मक बदलाव आने तय हैं। इस महासंयोग से मुख्य रूप से लाभान्वित होने वाली राशियों में वृषभ राशि के जातकों का नाम सबसे ऊपर आ रहा है। वृषभ राशि के लोगों के लिए यह समय करियर और आजीविका के क्षेत्र में एक बड़ी लंबी छलांग लगाने का साबित हो सकता है। कार्यस्थल पर लंबे समय से लंबित पड़ी योजनाएं अचानक गति पकड़ेंगी और व्यावसायिक क्षेत्र में काम करने वाले लोगों को कोई बहुत बड़ी व्यापारिक डील हासिल हो सकती है। इसके अलावा पैतृक संपत्ति के मामलों में भी इन्हें बड़ी सफलता मिलने के योग बन रहे हैं, जिससे समाज और कार्यक्षेत्र में इनकी प्रतिष्ठा और प्रशासनिक धाक में भारी वृद्धि दर्ज की जाएगी। ग्रहों का यह विशेष परिवर्तन मिथुन राशि के जातकों के लिए भी वरदान से कम नहीं सिद्ध होने वाला है। इस राशि के लोगों के लिए आय के एक से अधिक नए स्रोत विकसित होंगे, जिससे आर्थिक स्थिति को बहुत अधिक मजबूती मिलेगी। व्यापार और आजीविका के सिलसिले में की जाने वाली सुदूर यात्राएं इस अवधि में अत्यधिक आर्थिक लाभ प्रदान करेंगी। पारिवारिक जीवन के दृष्टिकोण से भी यह समय अनुकूल रहेगा, जहां पुराने समय से चले आ रहे आपसी मतभेद और तनाव पूरी तरह समाप्त होंगे और जीवनसाथी के साथ संबंधों में प्रगाढ़ता आएगी। इसके साथ ही कन्या राशि के जातकों को इस राजयोग के प्रभाव से आकस्मिक और अप्रत्याशित धन लाभ होने की प्रबल संभावनाएं दिखाई दे रही हैं। शेयर बाजार, लॉटरी या अतीत में किए गए किसी पुराने निवेश से इस समय भारी मुनाफा हाथ लग सकता है। नौकरीपेशा वर्ग से जुड़े लोगों को उच्च अधिकारियों के पूर्ण सहयोग के साथ बड़ी प्रशासनिक जिम्मेदारी या पदोन्नति मिलने के स्पष्ट संकेत हैं। विशेष रूप से जो लोग रचनात्मक कार्यों, लेखन, कला, मीडिया या डिजिटल मीडिया के क्षेत्र से जुड़े हैं, उनकी कल्पनाशीलता और कार्यक्षमता इस दौरान अपने सर्वोच्च स्तर पर होगी। इस राजयोग की चौथी सबसे महत्वपूर्ण लाभार्थी राशि कुंभ है, जिसके स्वयं स्वामी ग्रह शनि देव हैं। शनि की विशेष कृपा के चलते कुंभ राशि के जातकों के आत्मविश्वास और निर्णय लेने की क्षमता में जबरदस्त बढ़ोतरी देखने को मिलेगी। यदि इस राशि के जातक लंबे समय से किसी नए व्यापार, स्टार्टअप या स्वतंत्र कार्य की शुरुआत करने की योजना बना रहे थे, तो उनके लिए यह समय सबसे अधिक अनुकूल और सफलता की गारंटी देने वाला सिद्ध होगा। इसके प्रभाव से पिछले कई महीनों से चला आ रहा मानसिक तनाव और स्वास्थ्य संबंधी विकार भी पूरी तरह समाप्त हो जाएंगे।
दीप्ति शर्मा के 'पंजे' और मंधाना के अर्धशतक से उड़ी पाकिस्तानी टीम, भारतीय महिला टीम की ऐतिहासिक और एकतरफा जीत

नई दिल्ली। आईसीसी विमेंस टी20 वर्ल्ड कप 2026 में भारतीय महिला क्रिकेट टीम ने अपने अभियान की शुरुआत धमाकेदार अंदाज में की है। बर्मिंघम के एजबेस्टन मैदान पर खेले गए इस हाई-वोल्टेज मुकाबले में कप्तान हरमनप्रीत कौर की अगुवाई में भारतीय टीम ने चिर-प्रतिद्वंद्वी पाकिस्तान को 64 रनों के बड़े अंतर से पराजित किया। इस एकतरफा जीत के साथ ही भारत ने टूर्नामेंट में अपनी मजबूत दावेदारी पेश कर दी है। मैच में टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करने उतरी भारतीय टीम ने निर्धारित 20 ओवरों में पाकिस्तान के सामने 171 रनों का चुनौतीपूर्ण लक्ष्य रखा था, जिसके जवाब में पाकिस्तानी टीम महज 106 रनों पर ढेर हो गई। भारतीय टीम की इस शानदार और ऐतिहासिक जीत में सलामी बल्लेबाज स्मृति मंधाना और स्टार ऑलराउंडर दीप्ति शर्मा ने मुख्य भूमिका निभाई। स्मृति मंधाना ने पाकिस्तानी गेंदबाजों की जमकर खबर लेते हुए 44 गेंदों पर 68 रनों की बेहद प्रभावशाली पारी खेली, जिसमें नौ आकर्षक चौके और दो गगनचुंबी छक्के शामिल रहे। मध्यक्रम में कप्तान हरमनप्रीत कौर ने सूझबूझ का परिचय देते हुए 36 रन बनाए, जबकि अंतिम ओवरों में विकेटकीपर बल्लेबाज ऋचा घोष ने महज 17 गेंदों पर ताबड़तोड़ 34 रन कूटकर भारतीय टीम के स्कोर को एक सम्मानजनक और मजबूत स्थिति तक पहुंचाया। पाकिस्तान की ओर से कप्तान फातिमा सना और सादिया इकबाल ने जरूर कुछ सफलताएं हासिल कीं, लेकिन वे भारतीय बल्लेबाजों पर अंकुश लगाने में नाकाम रहीं। लक्ष्य का पीछा करने उतरी पाकिस्तान टीम की शुरुआत बेहद खराब रही और भारतीय गेंदबाजों के सटीक आक्रमण के सामने उनकी बल्लेबाजी ताश के पत्तों की तरह बिखर गई। पाकिस्तान की तरफ से केवल सलामी बल्लेबाज मुनीबा अली ही भारतीय गेंदबाजों का डटकर सामना कर सकीं, जिन्होंने 35 गेंदों में 41 रनों का योगदान दिया। उनके अलावा आलिया रियाज ने 18 रन, गुल फिरोजा और आयशा जफर ने 12-12 रन बनाए। टीम की बाकी सात बल्लेबाज दहाई का आंकड़ा भी छूने में पूरी तरह नाकाम रहीं और पूरी टीम 17 ओवरों में ही पवेलियन लौट गई। भारत की इस ऐतिहासिक गेंदबाजी प्रदर्शन की कमान दीप्ति शर्मा के हाथों में रही, जिन्होंने अपनी फिरकी के जाल में पाकिस्तानी बल्लेबाजों को ऐसा उलझाया कि उन्होंने अकेले ही 5 विकेट चटकाकर विपक्षी टीम की कमर तोड़ दी। दीप्ति के इस घातक स्पेल के अलावा श्री चरणी ने बेहतरीन लाइन-लेंथ से गेंदबाजी करते हुए 3 विकेट अपने नाम किए, जबकि सलामी बल्लेबाज शेफाली वर्मा ने भी पार्ट-टाइम स्पिनर के तौर पर 1 विकेट हासिल किया। इस मैच की खास बात यह रही कि पाकिस्तानी टीम के कुल 9 विकेट भारतीय स्पिन गेंदबाजों के खाते में गए, जबकि एक बल्लेबाज मुनीबा अली रन आउट होकर पवेलियन लौटीं। इस शानदार जीत के बाद भारतीय महिला टीम का मनोबल सातवें आसमान पर है और टीम अब अपने अगले मुकाबले में 17 जून को नीदरलैंड्स का सामना करने के लिए मैदान पर उतरेगी। भारतीय टीम आज तक विमेंस टी20 वर्ल्ड कप का खिताब अपने नाम नहीं कर सकी है, जहां उनका सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन साल 2020 में उपविजेता के रूप में रहा था। इस बार हरमनप्रीत कौर की कप्तानी में भारतीय टीम का एकमात्र लक्ष्य पहली बार विश्व विजेता बनकर इतिहास रचना है, जिसकी शुरुआत उन्होंने चिर-प्रतिद्वंद्वी पर एकतरफा जीत दर्ज करके कर दी है।
जाह्नवी कपूर के किरदार विवाद पर बढ़ी बहस: डायरेक्टर की माफी से असहमत दिखे गीतकार, बोले- ऐसे चला तो कमर्शियल सिनेमा मुश्किल होगा

नई दिल्ली । तेलुगु सिनेमा की चर्चित फिल्म Peddi इन दिनों बॉक्स ऑफिस के साथ-साथ विवादों की वजह से भी सुर्खियों में बनी हुई है। फिल्म में Janhvi Kapoor द्वारा निभाए गए अच्चियम्मा के किरदार को लेकर सोशल मीडिया पर बहस छिड़ी हुई है। कुछ दर्शकों और सोशल मीडिया यूजर्स ने आरोप लगाया था कि फिल्म में अभिनेत्री के किरदार को जरूरत से ज्यादा ग्लैमरस या ओवर-सेक्सुअलाइज्ड तरीके से प्रस्तुत किया गया है। विवाद बढ़ने के बाद फिल्म के निर्देशक Buchi Babu Sana ने सार्वजनिक रूप से माफी भी मांगी थी। हालांकि अब फिल्म के गीतकार Anantha Sriram ने निर्देशक की माफी पर असहमति जताते हुए रचनात्मक स्वतंत्रता का समर्थन किया है। एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने कहा कि किसी भी किरदार का व्यवहार और प्रस्तुति निर्देशक की कल्पना का हिस्सा होती है और उसे उसी दृष्टिकोण से देखा जाना चाहिए। अनंत श्रीराम ने कहा कि किसी फिल्मी पात्र को जिस तरह लिखा और प्रस्तुत किया जाता है, वह पूरी तरह रचनात्मक प्रक्रिया का हिस्सा होता है। उनके अनुसार, यदि हर रचनात्मक निर्णय पर सोशल मीडिया के दबाव में सवाल उठाए जाएंगे और फिल्मकारों को लगातार सफाई देनी पड़ेगी, तो इससे सिनेमा की स्वतंत्र अभिव्यक्ति प्रभावित हो सकती है। गीतकार ने यह भी कहा कि आज सोशल मीडिया पर अपनी राय रखने वाले लोग कई बार किसी विषय को अलग नजरिए से देखते हैं और उसी आधार पर आलोचना करते हैं। उन्होंने तर्क दिया कि यदि फिल्म निर्माताओं और निर्देशकों को अपनी कल्पना के अनुसार पात्र गढ़ने की स्वतंत्रता नहीं मिलेगी तो रचनात्मकता सीमित हो जाएगी। अपने बयान में उन्होंने यह भी कहा कि फिल्मों के कुछ संवाद या दृश्य अलग-अलग संदर्भों में अलग तरीके से देखे जाते हैं। उनके अनुसार, कभी-कभी एक ही बात को आधुनिक या परिष्कृत भाषा में कहा जाए तो उसे स्वीकार कर लिया जाता है, जबकि वही बात किसी ग्रामीण या पारंपरिक पात्र के माध्यम से दिखाई जाए तो उसे आलोचना का सामना करना पड़ता है। अनंत श्रीराम का मानना है कि निर्देशक द्वारा माफी मांगना उनकी व्यक्तिगत संवेदनशीलता और दर्शकों की भावनाओं के प्रति सम्मान का प्रतीक हो सकता है, लेकिन लगातार इस तरह की परिस्थितियां बनने से व्यावसायिक फिल्मों के निर्माण पर असर पड़ सकता है। वहीं, इससे पहले निर्देशक बुची बाबू सना ने सोशल मीडिया पर जारी बयान में कहा था कि उनकी टीम का उद्देश्य किसी की भावनाओं को ठेस पहुंचाना नहीं था। उन्होंने लिखा था कि दर्शकों की प्रतिक्रियाओं का सम्मान किया जाता है और यदि किसी को फिल्म के किसी हिस्से से ठेस पहुंची है तो वह इसके लिए खेद व्यक्त करते हैं। फिल्म की बात करें तो इसमें Ram Charan, Janhvi Kapoor, Shiva Rajkumar, Divyenndu और Boman Irani प्रमुख भूमिकाओं में नजर आ रहे हैं। फिल्म को दर्शकों का अच्छा प्रतिसाद मिल रहा है और यह बॉक्स ऑफिस पर मजबूत प्रदर्शन कर रही है।
MORENA TRAIN ACCIDENT: मुरैना ट्रैन हादसे में 4 की मौत, ट्रैन में आग लगने की अफवाह के डर से बहार कूदे!

HIGHLIGHTS: मोबाइल ब्लास्ट और आग लगने की अफवाह से मचा हड़कंप ट्रेन से उतरने पर दूसरी ट्रेन की चपेट में आए यात्री हादसे में महिला समेत 4 लोगों की दर्दनाक मौत 500 मीटर तक बिखरे शवों के हिस्से, पोटली में समेटे गए रेलवे ने जांच के लिए 6 सदस्यीय कमेटी गठित की MORENA TRAIN ACCIDENT: मुरैना। खजुराहो-उदयपुर इंटरसिटी एक्सप्रेस में फैली एक अफवाह ने चार लोगों जिंदगियां छीन ली। बता दें कि ट्रेन में मोबाइल फटने और आग लगने की बात सुनकर घबराए यात्री चलती ट्रेन से नीचे उतर गए। इसी दौरान दूसरी ट्रैक पर आ रही ट्रेन की चपेट में आने से चारों यात्रियों की मौत हो गई। GWALIOR WOMEN ASSAULTED: गर्भवती महिला से मारपीट के बाद हुआ गर्भपात, ग्वालियर में पति ने कट्टा अड़ाकर धमकाया पोटलियों में समेटना पड़ा शरीर हादसा इतना भयावह था कि मृतकों के शरीर के हिस्से करीब 500 मीटर तक बिखर गए। पोस्टमॉर्टम के लिए शवों के अंगों को पोटलियों में समेटना पड़ा। हादसे के बाद परिजनों का कहना है कि उनके अपनों की जान किसी दुर्घटना ने नहीं, बल्कि एक अफवाह ने ले ली। जानकारी के मुताबिक, रविवार शाम करीब 4:15 बजे खजुराहो-उदयपुर इंटरसिटी एक्सप्रेस हेतमपुर और धौलपुर स्टेशन के बीच चेन पुलिंग के कारण रुक गई थी। ट्रेन में किसी यात्री ने मोबाइल फटने और आग लगने की अफवाह फैला दी। इससे घबराकर कई यात्री ट्रेन से नीचे उतर गए। तभी दूसरी लाइन पर आ रही ट्रेन की चपेट में चार लोग आ गए। हादसे में राजस्थान के बीकानेर निवासी बिरमा देवी (60), आगरा की शकुंतला सिंह (60), आफरीन (35) और उनके चार वर्षीय बेटे असद की मौत हो गई। पेट्रोल-डीजल और LPG होंगे सस्ते…. ! ट्रंप का दावा- US-ईरान के बीच हुई डील, होर्मुज खोलने पर बनी सहमति टीम घटनास्थल का निरीक्षण करेगी झांसी मंडल के जनसंपर्क अधिकारी मनोज कुमार सिंह ने बताया कि पूरे मामले की जांच के लिए 6 सदस्यीय उच्चस्तरीय कमेटी गठित की गई है। टीम घटनास्थल का निरीक्षण करेगी और अधिकारियों व प्रत्यक्षदर्शियों के बयान दर्ज करेगी। जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। साथ ही मृतकों के परिजनों को आर्थिक सहायता भी दी जाएगी।
राम मंदिर के चढ़ावे में गबन का मामला लंबे समय दबाए रखने पर उठे सवाल…..SIT ने शुरू की जांच

लखनऊ । श्रीराम मंदिर (Shri Ram Temple) के चंदा गबन करने के मामले में अब तक एफआईआर (FIR) दर्ज न कराना सबसे बड़ा सवाल बना हुआ है। आखिर ऐसी क्या मजबूरी है जो ट्रस्ट ने केस दर्ज नहीं कराया है। गबन के साक्ष्य मिल चुके हैं, बड़ी रकम भी बरामद हुई और संदिग्ध भी पकड़े गए, उसके भी रिपोर्ट न करना गंभीर सवाल खड़े करता है। सीधेतौर पर अब ट्रस्ट के बड़े जिम्मेदारों की मंशा पर सवाल उठ रहे हैं। प्रकरण सामने आने के बाद ट्रस्ट ने मामला दबाए रखा था। जब मीडिया में उजागर हुआ तो ट्रस्ट के पदाधिकारियों ने चुप्पी साध ली। जो पदाधिकारी आएदिन तमाम बयान देते रहते थे वह अब सामने आने को तैयार नहीं हैं। इस बीच ट्रस्ट ने खुद ही संदिग्ध पकड़े। उनकी निशानदेही पर रकम बरामद की। मतलब इससे साबित हो चुका है कि चंदा राशि चोरी की गई। ऐसे में ट्रस्ट को मामले में केस दर्ज करवाना चाहिए लेकिन ऐसा नहीं किया गया है। एफआईआर अब तक क्यों नहीं दर्ज कराई जा रही है? इसकी वजह नहीं पता चल रही है। हालांकि ऐसे में कयास है कि किसी न किसी को बचाने के लिए पर्दा डाला जा रहा है। अब एसआईटी आगे, सब पीछेमामले में भले ही एसआईटी (SIT) गठित कर दी गई हो लेकिन मामला आपराधिक है। इसलिए केस दर्ज होना चाहिए थे। उसके साथ एसआईटी की भी जांच जारी रहती। चूंकि अब एसआईटी गठित हो चुकी है तो पूरा मामला पीछे छूट जाएगा, खासकर एफआईआर न दर्ज करवाने वाला। अब हर सवाल पर यही होगा कि एसआईटी जांच कर रही है, उसके बाद ही कुछ कार्रवाई की जाएगी। ये किसी ट्रस्ट का काम नहींजिस तरह से अब तक संदिग्ध पकड़े गए और फिर नकदी बरामद की गई, ये कार्य करना किसी ट्रस्ट या निजी संस्था आदि का नहीं है। विशेषज्ञों का कहना है कि चोरी हुई है तो पहले एफआईआर करवानी चाहिए। फिर पुलिस या अन्य जांच एजेंसी आगे की कार्रवाई करते हुए आरोपियों से पूछताछ, बरामदगी आदि की कार्रवाई करती। एसआईटी जुटाएगी ब्योरा, संदिग्धों से पूछताछ भी करेगीराम मंदिर के चढ़ावे में गबन के मामले के तूल पकड़ने के बाद केंद्र भी सक्रिय हो गया है। रविवार को पीएमओ की तरफ से एक बड़े अफसर के मंदिर पहुंचने की चर्चा है। अफसर अपने स्तर से जांच पड़ताल के बाद जानकारी जुटाकर पीएमओ को देंगे। हालांकि इसकी पुष्टि नहीं हो सकी है। वहीं, मामले की जांच के लिए गठित तीन सदस्यीय एसआईटी (विशेष जांच दल) सोमवार को अयोध्या पहुंचेगी। टीम ट्रस्ट के पदाधिकारियों से जानकारी लेने के साथ मंदिर के कर्मचारियों और चिह्नित संदिग्धों से पूछताछ करेगी। ट्रस्ट की ओर से की गई अब तक की जांच का पूरा ब्योरा भी जुटाएगी। इस बीच एक सप्ताह पहले उजागर हुए इस मामले में गबन के साक्ष्य मिलने के बाद भी अब तक एफआईआर दर्ज नहीं कराई गई है। मंदिर की दान राशि में हेरफेर का मामला बीते सप्ताह उजागर हुआ था। ट्रस्ट के पदाधिकारी तब से खुद ही गोपनीय जांच में जुटे हैं। ट्रस्ट के ऑफिस के पास किसी भी बाहरी शख्स के जाने पर रोक है। इन सबके बीच शनिवार को श्रीराम मंदिर ट्रस्ट के अनुरोध के बाद मुख्यमंत्री के निर्देश पर शासन ने तीन सदस्यीय एसआईटी का गठन किया था। इसमें लखनऊ के मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत, आईजी रेंज लखनऊ किरन एस और विशेष सचिव वित्त नील रतन शामिल हैं। चर्चा थी कि एसआईटी रविवार से जांच शुरू करेगी, लेकिन ऐसा नहीं हो सका। सूत्रों के मुताबिक, एसआईटी सोमवार को अयोध्या पहुंचकर जांच शुरू करेगी। टीम केवल धन के लेन-देन और तकनीकी पहलुओं की जांच ही नहीं, बल्कि यह भी पता लगाएगी कि किसी स्तर पर संरक्षण, लापरवाही या मिलीभगत तो नहीं हुई। किसी ट्रस्टी या पदाधिकारी की संलिप्तता या प्रशासनिक चूक के प्रमाण मिलने पर उनके अधिकार सीमित किए जा सकते हैं। चंपत राय बीमार, अनिल मिश्रा चिकित्सकीय जांच के लिए केरल गए राम मंदिर चढ़ावा प्रकरण की जांच के लिए गठित एसआईटी के अयोध्या पहुंचने की तैयारी के बीच श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय अस्वस्थ बताए जा रहे हैं। ट्रस्ट के वरिष्ठ सदस्य अनिल मिश्रा चिकित्सकीय परामर्श के लिए केरल गए हैं। सूत्रों के अनुसार चंपत राय को जुकाम के साथ शुगर बढ़ने की शिकायत है, जिसके चलते वह स्वास्थ्य लाभ ले रहे हैं। अनिल मिश्रा आंखों की जांच और चिकित्सकीय परामर्श के लिए केरल गए हैं।
MP के 5 दिन के दौरे पर आ रही हैं राष्ट्रपति मुर्मू, ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग के दर्शन और कूनो का करेंगी भ्रमण

भोपाल। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू (President Droupadi Murmu) आगामी 18 से 22 जून तक मध्य प्रदेश के पांच दिवसीय दौरे (Madhya Pradesh, five-day visit) पर आ रही हैं। वे यहां ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग के दर्शन और कूनों नेशनल पार्क के भ्रमण करने के साथ बैतूल और जबलपुर में भी विभिन्न कार्यक्रमों में शामिल होंगी। इसे लेकर प्रदेश के प्रशासनिक और सुरक्षा अमले ने अपनी तैयारियां युद्ध स्तर पर शुरू कर दी हैं। श्योपुर जिले में तय दो दिवसीय भ्रमण कार्यक्रम के अनुसार, 21 जून दोपहर 3 बजे राष्ट्रपति वायुसेना के विशेष विमान से पहले ग्वालियर पहुंचेंगी. वहां से वे सेना के हेलीकॉप्टर द्वारा सीधे कूनो नेशनल पार्क आएंगी. 21 जून की पूरी रात कूनो नेशनल पार्क में ही बिताएंगी. उनके विश्राम के लिए कूनो में विशेष और पुख्ता इंतजाम किए गए हैं. वहीं, 22 जून सुबह 10 बजे कूनो नेशनल पार्क में सुबह के कार्यक्रमों में हिस्सा लेने के बाद राष्ट्रपति अगले गंतव्य के लिए प्रस्थान कर जाएंगी। मुख्य सचिव अनुराग जैन ने परखी सुरक्षाराष्ट्रपति के इस हाई-प्रोफाइल दौरे को लेकर प्रशासनिक तैयारियां तेज हैं. बुधवार को मध्य प्रदेश के मुख्य सचिव अनुराग जैन ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग (VC) के माध्यम से सुरक्षा व्यवस्था और निर्धारित प्रोटोकॉल की बारीकी से समीक्षा की. मुख्य सचिव ने साफ निर्देश दिए हैं कि सुरक्षा, आवागमन, संचार, स्वास्थ्य सेवाओं और वीवीआईपी प्रोटोकॉल से जुड़े सभी इंतजाम समय सीमा के भीतर अचूक तरीके से पूरे किए जाएं। माना जा रहा है कि बोत्सवाना से भारत लाए गए शेष चीतों को राष्ट्रपति के हाथों ही कूनो के खुले जंगल में आजाद किया जा सकता है. दरअसल, जब बोत्सवाना सरकार ने भारत के लिए इन खास चीतों का चयन किया था, तब प्रतीकात्मक रूप से इन्हें खुद राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को ही सौंपा गया था. यही वजह है कि कूनो प्रबंधन और वन्यजीव विशेषज्ञ इस पल को लेकर बेहद उत्साहित हैं। इंदौर, ओंकारेश्वर और जबलपुर भी जाएंगी राष्ट्रपतिअपने पांच दिवसीय प्रवास के दौरान राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू मध्य प्रदेश के कई प्रमुख धार्मिक और ऐतिहासिक स्थलों का भी रुख करेंगी. वे श्योपुर और ग्वालियर के अलावा इंदौर, बैतूल में स्थित प्रसिद्ध श्री ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर और जबलपुर का भी भ्रमण करेंगी, जिसे लेकर इन सभी जिलों में भी सुरक्षा व्यवस्था चाक-चौबंद कर दी गई है।
MP के इस अनोखी किस्म के आम का आकार पपीता जैसा… वजन 5 kg…. दाम सुनकर रह जाएंगे दंग

अलीराजपुर। मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के अलीराजपुर जिले (Alirajpur district) का ‘नूरजहां’ आम (‘Noorjahan’ mango) अपने असाधारण बड़े आकार और दुर्लभता के कारण अलग पहचान रखता है। यह साइज में पपीते से भी बड़ा हो सकता है। ‘नूरजहां’ आम की अनोखी किस्म (Unique variety) को 50 साल पहले ‘जहांगीर’ और ‘राजापुरी’ आमों की ग्राफ्टिंग से तैयार किया गया था। नूरजहां आम के बाग के मालिक शिवराज सिंह जाधव बताते हैं कि 50 साल पहले उनके पिता ने दो तरह के आमों- ‘जहांगीर’ और गुजरात के ‘राजापुरी’, की कलम (ग्राफ्टिंग) करके यह किस्म विकसित की थी और इसका नाम अभिनेत्री ‘नूरजहा’ के नाम पर रखा था। इस आम की लोकप्रियता इतनी है कि सीजन में दूर-दूर से पर्यटक और आम के शौकीन इसे देखने काठीवाड़ा आते हैं। अलीराजपुर में ही पाया जाता है यह आमबाग के मालिक शिवराज सिंह जाधव ने दावा किया कि यह अनोखा आम सिर्फ अलीराजपुर जिले के कट्टीवाड़ा गांव में उनके बाग में ही पाया जाता है। 5 किलोग्राम तक हो सकता है वजनएक ‘नूरजहां’ आम का वजन तीन से 5 किलोग्राम तक हो सकता है और इसकी कीमत 15 सौ से तीन हजार रुपये प्रति फल तक पहुंच जाती है। 3000 रुपये प्रति पीस होती है कीमतविशिष्ट स्वाद और दुर्लभता के कारण इसके एक फल की कीमत 1500 से 3000 रुपये तक होती है। आम के शौकीनों को अक्सर इसके लिए पहले से बुकिंग करवानी पड़ती है। यही नहीं महीनों इंतजार करना पड़ता है। चूंकि इसका उत्पादन केवल 3 पेड़ों तक ही सीमित है इसलिए कई लोग अक्सर निराश रह जाते हैं। कैसे तैयार हुई थी यह खास किस्म?शिवराज सिंह जाधव के बाग में ही पाए जाने वाले इस आम के नाम के पीछे की कहानी भी दिलचस्प है। जाधव ने बताया कि 50 साल पहले उनके पिता ने जहांगीर और गुजरात के राजापुरी आम की किस्मों की ग्राफ्टिंग (कलम) करके यह किस्म विकसित की थी। इसका नाम अभिनेत्री नूरजहां के नाम पर रखा था। पूरे देश में नूरजहां किस्म के केवल 3 पेड़ हैं। ये तीनों शिवराज सिंह के बाग में ही हैं। जाधव ने इसे और बढ़ाने की कई कोशिशें की हैं लेकिन पेड़ों की संख्या बढ़ नहीं पाई है। कई राष्ट्रीय पुरस्कार जीतेशिवराज सिंह जाधव ने बताया कि यह स्वाद में भी बेजोड़ है। इस आम ने कई राष्ट्रीय पुरस्कार जीते हैं। उन्होंने कहा कि भारत के पूर्व राष्ट्रपतियों सहित कई जानी-मानी हस्तियों ने नूरजहां का स्वाद चखा है। देशभर में सिर्फ तीन पेड़शिवराज सिंह जाधव ने दावा किया कि देशभर में ‘नूरजहा’ किस्म के सिर्फ तीन पेड़ हैं और ये तीनों केवल उनके बाग में ही हैं। हालांकि, बागवानी विभाग और खुद शिवराज जाधव ने इसे और बढ़ाने की कई कोशिशें की हैं, लेकिन पेड़ों की संख्या अभी तक बढ़ नहीं पाई है। इस आम की लोकप्रियता इतनी है कि जैसे ही आम का मौसम आता है, दूर-दूर से पर्यटक और आम के शौकीन इसे देखने के लिए कट्टीवाड़ा आते हैं। इतना ही नहीं आम के शौकीनों को अक्सर इसके एक फल को पाने के लिए पहले से बुकिंग करानी पड़ती है और महीनों इंतजार करना पड़ता है।