AI निगरानी, बायोमेट्रिक जांच और एयरफोर्स से पेपर डिलीवरी पर विवाद, NEET री-टेस्ट से पहले अन्नामलाई और बीजेपी आमने-सामने

नई दिल्ली । देश की सबसे महत्वपूर्ण मेडिकल प्रवेश परीक्षाओं में शामिल NEET री-टेस्ट से पहले सुरक्षा व्यवस्था को लेकर राजनीतिक और शैक्षणिक बहस तेज हो गई है। आगामी 21 जून को आयोजित होने वाली परीक्षा के लिए केंद्र सरकार और राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी ने अभूतपूर्व सुरक्षा उपाय लागू किए हैं। हालांकि इन व्यवस्थाओं को लेकर विभिन्न पक्षों से अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। एक ओर परीक्षा की निष्पक्षता और पारदर्शिता सुनिश्चित करने की बात कही जा रही है, वहीं दूसरी ओर छात्रों पर बढ़ते मानसिक दबाव को लेकर भी चिंता व्यक्त की जा रही है। हाल के वर्षों में कई प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक और नकल से जुड़े मामलों ने परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े किए थे। इसी पृष्ठभूमि में इस बार NEET री-टेस्ट के लिए बहुस्तरीय सुरक्षा व्यवस्था तैयार की गई है। परीक्षा प्रश्नपत्रों को देशभर के विभिन्न केंद्रों तक पहुंचाने के लिए विशेष सुरक्षा प्रबंध किए गए हैं। परीक्षा केंद्रों पर अभ्यर्थियों की पहचान सुनिश्चित करने के लिए बायोमेट्रिक सत्यापन और कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित फेस रिकग्निशन तकनीक का भी उपयोग किया जाएगा। इन सुरक्षा उपायों पर प्रतिक्रिया देते हुए पूर्व तमिलनाडु भाजपा अध्यक्ष के. अन्नामलाई ने सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि परीक्षा की सुरक्षा महत्वपूर्ण है, लेकिन सुरक्षा के नाम पर ऐसी व्यवस्थाएं नहीं होनी चाहिएं जो छात्रों के लिए अतिरिक्त तनाव का कारण बन जाएं। उन्होंने कहा कि लंबी जांच प्रक्रियाएं, बढ़ी हुई निगरानी और अतिरिक्त सत्यापन छात्रों की मानसिक स्थिति को प्रभावित कर सकते हैं, विशेष रूप से तब जब वे पहले से ही एक अत्यधिक प्रतिस्पर्धी परीक्षा की तैयारी कर रहे हों। अन्नामलाई ने यह भी तर्क दिया कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 का प्रमुख उद्देश्य छात्रों पर परीक्षा संबंधी दबाव कम करना था। उनके अनुसार वर्तमान व्यवस्था इस लक्ष्य के विपरीत दिखाई देती है। उन्होंने परीक्षा से पहले एडमिट कार्ड डाउनलोड करने में आई तकनीकी समस्याओं का भी उल्लेख करते हुए कहा कि ऐसे मुद्दे छात्रों की चिंता को और बढ़ा सकते हैं। वहीं भारतीय जनता पार्टी के नेताओं ने इन आलोचनाओं का जवाब देते हुए कहा है कि परीक्षा की विश्वसनीयता और पारदर्शिता सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। पार्टी नेताओं का कहना है कि बायोमेट्रिक सत्यापन, सीसीटीवी निगरानी और डिजिटल पहचान जैसी व्यवस्थाएं आज दुनिया की कई प्रमुख परीक्षाओं में सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा हैं। उनका मानना है कि इन उपायों का उद्देश्य किसी पर दबाव बनाना नहीं बल्कि योग्य और मेहनती छात्रों के हितों की रक्षा करना है। परीक्षा एजेंसियों का भी कहना है कि हाल के वर्षों में सामने आए पेपर लीक नेटवर्क और संगठित नकल गिरोहों को देखते हुए सुरक्षा मानकों को मजबूत करना आवश्यक हो गया था। इसी क्रम में डिजिटल संचार माध्यमों की निगरानी और कुछ प्लेटफॉर्म्स की पहुंच पर अस्थायी नियंत्रण जैसे कदम भी उठाए गए हैं ताकि किसी भी प्रकार की अनियमितता को रोका जा सके। शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि परीक्षा की निष्पक्षता और छात्रों की सुविधा दोनों के बीच संतुलन बनाना सबसे बड़ी चुनौती है। जहां मजबूत सुरक्षा व्यवस्था परीक्षा प्रणाली में विश्वास बढ़ाती है, वहीं यह भी आवश्यक है कि छात्रों को अनावश्यक प्रक्रियात्मक दबाव का सामना न करना पड़े। ऐसे में NEET री-टेस्ट केवल एक परीक्षा नहीं बल्कि परीक्षा प्रबंधन और सुरक्षा मॉडल की भी महत्वपूर्ण परीक्षा बन गया है, जिसके परिणाम भविष्य की राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगी परीक्षाओं की दिशा तय कर सकते हैं।
जबलपुर एसपी ऑफिस में महिलाओं के बीच मारपीट, बाल खींचे-गाल नोचे; पुलिस ने कराया बीच-बचाव

जबलपुर जबलपुर के पुलिस अधीक्षक (एसपी) कार्यालय परिसर में मंगलवार दोपहर उस समय हंगामे की स्थिति बन गई, जब दो महिलाएं आपस में भिड़ गईं। देखते ही देखते दोनों के बीच कहासुनी मारपीट में बदल गई और कार्यालय परिसर में अफरा-तफरी मच गई। घटना के दौरान दोनों महिलाओं ने एक-दूसरे को धक्का दिया, बाल खींचे और जमीन पर पटकने तक की नौबत आ गई। मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों और अन्य लोगों ने हस्तक्षेप कर दोनों को अलग कराया। जानकारी के अनुसार, घटना मंगलवार दोपहर करीब एक बजे की है। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक दोनों महिलाओं के बीच पहले तीखी बहस हुई, जिसके बाद विवाद अचानक बढ़ गया। दोनों महिलाएं एक-दूसरे पर आरोप लगाते हुए हाथापाई करने लगीं। इस दौरान एक महिला के चेहरे पर नाखून लगने से चोट आई और उसके गाल से खून निकलने लगा। घटना को देखकर आसपास मौजूद लोग भी हैरान रह गए। हंगामे की सूचना मिलते ही पुलिसकर्मी मौके पर पहुंचे और दोनों महिलाओं को अलग कराया। इसके बाद सिविल लाइन थाना पुलिस को बुलाया गया। पुलिस दोनों महिलाओं को अपने साथ थाने ले गई, जहां उनसे पूछताछ की गई। बाद में मेडिकल परीक्षण के लिए जिला अस्पताल भी भेजा गया। एएसपी सूर्यकांत शर्मा के अनुसार, प्रारंभिक जानकारी में सामने आया है कि खुद को यूट्यूब पत्रकार बताने वाली विद्या रैकवार और पिंकी नामक महिला के बीच किसी पुराने विवाद को लेकर कहासुनी हुई थी। इसी विवाद ने मारपीट का रूप ले लिया। पुलिस दोनों पक्षों के बयान दर्ज कर मामले की जांच कर रही है। दूसरी ओर, पिंकी ने आरोप लगाया कि वह एक शिकायत लेकर एसपी कार्यालय पहुंची थी। उसके अनुसार, वहां पहले से मौजूद विद्या रैकवार ने उसके साथ अभद्र व्यवहार किया और विवाद बढ़ने पर मारपीट शुरू हो गई। पिंकी का कहना है कि उसने पहले भी संबंधित मामले की शिकायत पुलिस में की थी और उसे पूर्व में धमकियां भी मिल चुकी हैं। हालांकि इन आरोपों की पुष्टि पुलिस जांच के बाद ही हो सकेगी। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि पूछताछ के दौरान यह भी सामने आया है कि दोनों महिलाओं के बीच पहले भी विवाद हो चुका है, जिसकी शिकायत संबंधित थाने में दर्ज कराई गई थी। अब पुलिस पुराने विवाद और वर्तमान घटना के बीच संबंधों की भी जांच कर रही है। फिलहाल दोनों महिलाओं का मेडिकल परीक्षण कराया गया है और मामले से जुड़े सभी पहलुओं की जांच की जा रही है। पुलिस का कहना है कि जांच पूरी होने और तथ्यों के सामने आने के बाद नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी। एसपी कार्यालय जैसे संवेदनशील परिसर में हुई इस घटना ने सुरक्षा व्यवस्था और अनुशासन को लेकर भी कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
नरसिंहपुर में 12 एकड़ सरकारी जमीन अतिक्रमण मुक्त, प्रशासन का बड़ा एक्शन; जेसीबी से ढहाया कच्चा मकान

नरसिंहपुर नरसिंहपुर जिले की गाडरवारा तहसील के ग्राम टेकापार में सोमवार को प्रशासन ने अतिक्रमण के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए करीब 12 एकड़ शासकीय भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराया। राजस्व विभाग, पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों की संयुक्त टीम द्वारा चलाए गए इस अभियान के दौरान लंबे समय से सरकारी जमीन पर किए गए अवैध कब्जों को हटाया गया। कार्रवाई के दौरान जेसीबी मशीन और ट्रैक्टरों की सहायता से अतिक्रमण को हटाते हुए एक कच्चे मकान को भी ध्वस्त किया गया। प्रशासन की इस कार्रवाई को क्षेत्र में अतिक्रमण के खिलाफ अब तक की महत्वपूर्ण कार्रवाई माना जा रहा है। सुबह शुरू हुआ अभियान देर शाम तक जारी रहा। कार्रवाई के दौरान पूरे इलाके में सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए थे, ताकि किसी प्रकार की अप्रिय स्थिति उत्पन्न न हो। बड़ी संख्या में ग्रामीण भी मौके पर मौजूद रहे और प्रशासनिक कार्रवाई को देखते रहे। जानकारी के अनुसार, टेकापार गांव स्थित शासकीय भूमि पर लंबे समय से अवैध कब्जा किया गया था। राजस्व विभाग को इसकी शिकायतें लगातार मिल रही थीं। जांच के बाद प्रशासन ने नियमानुसार कार्रवाई का निर्णय लिया और संयुक्त अभियान चलाकर कब्जे हटाने की प्रक्रिया शुरू की। अभियान का नेतृत्व नायब तहसीलदार ने किया, जबकि राजस्व विभाग के पटवारी, पुलिस बल और अन्य अधिकारी भी मौके पर तैनात रहे। अतिक्रमण हटाने के लिए 4 से 5 ट्रैक्टरों के साथ एक जेसीबी मशीन का उपयोग किया गया। अधिकारियों ने जमीन की पैमाइश कर सीमांकन के आधार पर कब्जे हटाए। इस दौरान सरकारी भूमि पर बना एक कच्चा मकान भी प्रशासन ने हटवा दिया। अधिकारियों का कहना है कि यह कार्रवाई पूरी तरह नियमों के तहत की गई है और शासकीय भूमि को सुरक्षित रखने के लिए भविष्य में भी ऐसे अभियान जारी रहेंगे। कार्रवाई के दौरान प्रशासन ने यह सुनिश्चित किया कि कानून-व्यवस्था बनी रहे। पुलिस बल की मौजूदगी के कारण पूरा अभियान शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हुआ। किसी भी तरह के विरोध या विवाद की स्थिति सामने नहीं आई। प्रशासनिक अधिकारियों ने मौके पर मौजूद लोगों को शासकीय भूमि पर कब्जा न करने और नियमों का पालन करने की समझाइश भी दी। राजस्व विभाग के अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि जिलेभर में सरकारी जमीनों पर अवैध कब्जों की पहचान की जा रही है। जहां भी अतिक्रमण पाया जाएगा, वहां नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। अधिकारियों का कहना है कि सरकारी संपत्तियों और भूमि की सुरक्षा प्रशासन की प्राथमिकता है और अतिक्रमण के खिलाफ अभियान लगातार जारी रहेगा। टेकापार में हुई इस कार्रवाई के बाद जिले के अन्य क्षेत्रों में भी अतिक्रमणकारियों के बीच हड़कंप की स्थिति देखी जा रही है। प्रशासन के सख्त रुख से यह संदेश गया है कि सरकारी जमीनों पर अवैध कब्जों को किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
उन्हेल में युवक की खून से सनी लाश मिलने से सनसनी, घर के अंदर संदिग्ध हालत में मिला शव; हत्या की आशंका

उज्जैन उज्जैन जिले के उन्हेल थाना क्षेत्र में उस समय सनसनी फैल गई, जब एक युवक का शव उसके ही घर के अंदर खून से लथपथ हालत में मिला। घटना की जानकारी मिलते ही इलाके में लोगों की भीड़ जुट गई और पुलिस महकमे में भी हड़कंप मच गया। प्रथम दृष्टया मामला हत्या का प्रतीत होने पर पुलिस ने गंभीरता से जांच शुरू कर दी है। घटनास्थल पर फोरेंसिक विशेषज्ञों और डॉग स्क्वाड की मदद से साक्ष्य जुटाए गए हैं। जानकारी के अनुसार, बुधवार सुबह उन्हेल थाना पुलिस को सूचना मिली कि क्षेत्र के एक मकान में एक व्यक्ति मृत अवस्था में पड़ा हुआ है। सूचना मिलते ही थाना प्रभारी अपनी टीम के साथ मौके पर पहुंचे और घर के अंदर जाकर स्थिति का जायजा लिया। पुलिस ने देखा कि युवक का शव खून से सना हुआ था, जिससे मामला संदिग्ध नजर आया। इसके बाद वरिष्ठ अधिकारियों को सूचना देकर एक्सपर्ट टीम और डॉग स्क्वाड को बुलाया गया। पुलिस जांच में मृतक की पहचान विक्रम पिता अशोक, उम्र लगभग 35 वर्ष, निवासी नाग चबूतरा मंदिर के पीछे, उन्हेल के रूप में हुई है। बताया जा रहा है कि विक्रम मजदूरी कर अपने परिवार का पालन-पोषण करता था। उसके परिवार में पत्नी और एक बच्चा है। युवक की अचानक हुई मौत से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है, वहीं आसपास के लोग भी घटना से स्तब्ध हैं। घटनास्थल का बारीकी से निरीक्षण करने के बाद पुलिस ने कई महत्वपूर्ण साक्ष्य एकत्र किए हैं। अधिकारियों का कहना है कि फिलहाल मामले की हर पहलू से जांच की जा रही है। पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि युवक की मौत किन परिस्थितियों में हुई और इसके पीछे कोई आपराधिक साजिश तो नहीं है। आसपास के लोगों और परिजनों से भी पूछताछ की जा रही है ताकि घटना से जुड़े महत्वपूर्ण सुराग मिल सकें। सीएसपी विक्रम सिंह अहिरवार ने बताया कि प्रारंभिक जांच में मामला संदिग्ध प्रतीत हो रहा है, इसलिए पुलिस सभी संभावनाओं को ध्यान में रखकर जांच कर रही है। उन्होंने कहा कि घटनास्थल से कुछ महत्वपूर्ण साक्ष्य एकत्र किए गए हैं, जिनकी जांच की जा रही है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद मौत के वास्तविक कारणों का खुलासा हो सकेगा। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और मामले की विवेचना जारी है। अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने और सभी तथ्यों के सामने आने के बाद ही घटना के कारणों तथा संभावित आरोपियों के बारे में स्पष्ट जानकारी दी जा सकेगी। फिलहाल पूरे क्षेत्र में इस घटना को लेकर चर्चा का माहौल है और लोग पुलिस जांच के नतीजों का इंतजार कर रहे हैं।
जुबली गर्ल आशा पारेख के त्याग की अनकही दास्तान: शादीशुदा फिल्ममेकर से बेइंतहा मोहब्बत के बाद भी ताउम्र क्यों कुंवारी रहीं दिग्गज अभिनेत्री

नई दिल्ली । हिंदी सिनेमा के सुनहरे दौर में साठ और सत्तर के दशक में सिल्वर स्क्रीन राज करने वाली सदाबहार अभिनेत्री आशा पारेख की पेशेवर जिंदगी जितनी चकाचौंध और सफलताओं से भरी रही, उनकी निजी जिंदगी में उतनी ही खामोशी और त्याग की एक अनूठी कहानी छिपी रही। अपनी बेमिसाल खूबसूरती और बेहतरीन अभिनय के दम पर करोड़ों प्रशंसकों को अपना दीवाना बनाने वाली इस महान अदाकारा ने अपनी असल जिंदगी में प्यार की एक ऐसी गरिमापूर्ण मिसाल पेश की, जिसकी चर्चा आज भी बॉलीवुड के गलियारों में बेहद सम्मान के साथ की जाती है। उन्होंने एक शादीशुदा मर्द से सच्ची मोहब्बत तो की, लेकिन समाज में ‘घर तोड़ने वाली’ कहलाने का कलंक झेलने की बजाय ताउम्र कुंवारी रहने का रास्ता चुना। इस निश्छल और मूक प्रेम कहानी की शुरुआत वर्ष उन्नीस सौ उनसठ में हुई थी, जब मशहूर फिल्म निर्माता और निर्देशक नासिर हुसैन ने युवा आशा पारेख की प्रतिभा को पहचानते हुए उन्हें अपनी फिल्म ‘दिल देके देखो’ में मुख्य अभिनेत्री के तौर पर एक बड़ा ब्रेक दिया था। यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर ब्लॉकबस्टर साबित हुई और इसके बाद इस जोड़ी ने एक के बाद एक कई शानदार और जुबली फिल्में सिनेमा जगत को दीं। सेट पर एक साथ लगातार काम करने के दौरान आशा पारेख कब अपने निर्देशक को दिल दे बैठीं, उन्हें खुद भी इसका अहसास नहीं हुआ और दूसरी तरफ नासिर हुसैन के दिल में भी उनके लिए वही सम्मानजनक भावनाएं थीं। नासिर हुसैन के लिए अपने दिल में बेइंतहा मोहब्बत और कशिश होने के बावजूद आशा पारेख ने कभी भी अपने हक के लिए उनके सामने कोई जिद या शर्त नहीं रखी। इसके पीछे की सबसे बड़ी वजह यह थी कि नासिर हुसैन पहले से ही शादीशुदा थे और बाल-बच्चों के साथ एक खुशहाल जीवन बिता रहे थे। अभिनेत्री के भीतर के नैतिक मूल्यों ने उन्हें कभी इस बात की इजाजत नहीं दी कि उनके व्यक्तिगत सुख या प्यार की खातिर किसी दूसरी औरत का सुहाग और एक हंसता-खेलता परिवार हमेशा के लिए बिखर जाए। उन्होंने अपने दिल की आवाज को दबाकर दूसरे के आशियाने की हिफाजत करना ज्यादा जरूरी समझा। दशकों तक इस खामोश दर्द और मोहब्बत को अपने सीने में दफन रखने के बाद, आशा पारेख ने वर्ष दो हजार सत्रह में प्रकाशित हुई अपनी आत्मकथा ‘द हिट गर्ल’ में इस राज से पर्दा उठाया था। उन्होंने बेहद भावुक शब्दों में स्वीकार किया था कि नासिर हुसैन ही उनकी जिंदगी के एकमात्र ऐसे पुरुष थे जिनसे उन्होंने बेहद शिद्दत से प्यार किया था। लेकिन किसी का घर उजाड़कर अपनी खुशियों का महल खड़ा करना उनके संस्कारों के खिलाफ था, यही वजह थी कि उन्होंने नासिर हुसैन पर शादी का दबाव बनाने की बजाय खुद अकेले जिंदगी काटने का एक बेहद कठिन और साहसिक निर्णय लिया। अपनी पूरी जिंदगी तन्हाई और अकेलेपन में गुजारने के बाद भी इस उम्र में पद्मश्री और दादा साहब फाल्के पुरस्कार से सम्मानित अभिनेत्री के मन में अपने अतीत के फैसलों को लेकर कोई मलाल, कड़वाहट या शिकायत नहीं है। उनका हमेशा से यह दृढ़ विश्वास रहा है कि किसी दूसरे को दुख देकर हासिल की गई खुशी कभी भी स्थायी और सच्ची नहीं हो सकती। आज बयासी वर्ष से अधिक की उम्र पार कर चुकीं आशा पारेख अपने इस फैसले पर अडिग रहते हुए पूरे आत्मसम्मान, सुकून और गरिमा के साथ अपनी एकाकी जिंदगी का आनंद ले रही हैं, जो आज के दौर के रिश्तों के लिए एक बहुत बड़ी नजीर है।
राम मंदिर ट्रस्ट को भंग करने की मांग तेज, पुजारी महासंघ ने PM को लिखा पत्र; CBI जांच की उठाई मांग

अयोध्या अयोध्या स्थित श्रीराम जन्मभूमि मंदिर को लेकर एक नया विवाद सामने आया है। राम मंदिर में चढ़ावे और दान राशि के प्रबंधन को लेकर कथित अनियमितताओं की चर्चाओं के बीच अखिल भारतीय पुजारी महासंघ ने राम मंदिर ट्रस्ट के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। संगठन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र भेजकर ट्रस्ट को भंग करने, पूरे मामले की सीबीआई जांच कराने और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। महासंघ का कहना है कि राम मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि करोड़ों भारतीयों की आस्था, विश्वास और लंबे संघर्ष का प्रतीक है। ऐसे में मंदिर के संचालन और दान राशि के उपयोग को लेकर यदि किसी प्रकार के सवाल उठ रहे हैं, तो उनकी निष्पक्ष जांच होना आवश्यक है। संगठन का मानना है कि इससे श्रद्धालुओं का विश्वास और अधिक मजबूत होगा तथा मंदिर प्रबंधन में पारदर्शिता सुनिश्चित की जा सकेगी। अखिल भारतीय पुजारी महासंघ के अध्यक्ष महेश शर्मा ने कहा कि देशभर के श्रद्धालुओं ने राम मंदिर निर्माण और उसके विकास के लिए अपनी श्रद्धा के अनुसार धन, सोना-चांदी और अन्य मूल्यवान सामग्री दान की है। यह योगदान केवल आर्थिक नहीं बल्कि भावनात्मक और धार्मिक आस्था से भी जुड़ा हुआ है। इसलिए यदि चढ़ावे या दान राशि के प्रबंधन में किसी प्रकार की अनियमितता सामने आती है, तो उसकी निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच कराई जानी चाहिए। महासंघ ने प्रधानमंत्री को भेजे गए पत्र में मांग की है कि पूरे मामले की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) से कराई जाए। संगठन का कहना है कि यदि जांच में कोई व्यक्ति दोषी पाया जाता है तो उसके खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए, ताकि भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो। संगठन के राष्ट्रीय सचिव रूपेश मेहता ने ट्रस्ट के पुनर्गठन का सुझाव भी दिया है। उनका कहना है कि यदि वर्तमान ट्रस्ट के कामकाज को लेकर सवाल उठ रहे हैं, तो सरकार को इसकी समीक्षा करनी चाहिए। उन्होंने प्रस्ताव रखा कि राम मंदिर आंदोलन में योगदान देने वाले परिवारों और मंदिर निर्माण के संघर्ष से जुड़े लोगों के योग्य प्रतिनिधियों को ट्रस्ट में शामिल किया जाए। उनका मानना है कि ऐसे लोग मंदिर की परंपराओं, संघर्ष और धार्मिक महत्व को बेहतर ढंग से समझते हैं और अधिक जिम्मेदारी के साथ इसकी सेवा कर सकते हैं। महासंघ ने यह भी कहा कि राम मंदिर करोड़ों हिंदुओं की आस्था का केंद्र है। इसलिए मंदिर के संचालन और वित्तीय प्रबंधन को लेकर किसी भी प्रकार का संशय लंबे समय तक नहीं रहना चाहिए। पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए सरकार को आवश्यक कदम उठाने चाहिए। गौरतलब है कि हाल ही में राम मंदिर में चढ़ावे की राशि और दानपात्रों के प्रबंधन को लेकर कुछ रिपोर्टें सामने आई हैं, जिनमें कथित वित्तीय अनियमितताओं की आशंका जताई गई है। हालांकि इन मामलों की जांच और आधिकारिक निष्कर्ष अभी सामने आना बाकी हैं। इसी बीच पुजारी महासंघ की ओर से उठाई गई मांगों ने इस मुद्दे को नई राजनीतिक और धार्मिक चर्चा का विषय बना दिया है। अब सभी की निगाहें केंद्र सरकार और संबंधित जांच एजेंसियों की संभावित कार्रवाई पर टिकी हैं। आने वाले समय में इस मामले में क्या निर्णय लिया जाता है, यह श्रद्धालुओं और धार्मिक संगठनों के लिए महत्वपूर्ण रहेगा।
नवजात के लिंग को लेकर अस्पताल में विवाद, परिजनों ने लगाया बच्चा बदलने का आरोप; पुलिस जांच में जुटी

उज्जैन उज्जैन में एक नवजात शिशु के लिंग को लेकर उत्पन्न विवाद ने स्वास्थ्य व्यवस्था और अस्पताल प्रबंधन पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। मामला तब सामने आया जब एक परिवार ने आरोप लगाया कि डिलीवरी के बाद उन्हें पुत्र जन्म की सूचना दी गई थी, लेकिन बाद में इलाज के दौरान उन्हें बताया गया कि नवजात बच्ची है। इस विरोधाभास के बाद परिजनों ने बच्चा बदलने की आशंका जताते हुए अस्पताल प्रबंधन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। मामला पुलिस तक पहुंच गया है और जांच शुरू कर दी गई है। जानकारी के अनुसार लिम्बोदा निवासी सुनील कहार की पत्नी पायल की डिलीवरी बुधवार शाम तिवारी नर्सिंग होम में हुई थी। परिजनों का कहना है कि प्रसव के तुरंत बाद अस्पताल के डॉक्टरों और स्टाफ ने उन्हें लड़का होने की जानकारी दी थी। परिवार में खुशी का माहौल बन गया और परिजनों ने अस्पताल कर्मचारियों को बधाई स्वरूप नकद राशि भी दी। सभी लोग पुत्र जन्म की सूचना से उत्साहित थे और उसी आधार पर रिश्तेदारों एवं परिचितों को भी जानकारी दे दी गई। बताया जा रहा है कि जन्म के कुछ समय बाद नवजात की तबीयत बिगड़ गई। चिकित्सकों ने उसे बेहतर उपचार के लिए दूसरे अस्पताल रेफर कर दिया। रात करीब आठ बजे नवजात को उपचार के लिए लोटस अस्पताल भेजा गया, जहां उसका इलाज शुरू हुआ। लेकिन अगले दिन सुबह जब परिजन अस्पताल पहुंचे और बच्चे के स्वास्थ्य के बारे में जानकारी ली, तो उन्हें बताया गया कि अस्पताल में एक बच्ची भर्ती है। यह सुनकर परिजन हैरान रह गए और उन्होंने तुरंत आपत्ति दर्ज कराई। परिजनों का आरोप है कि यदि डिलीवरी के समय उन्हें लड़का होने की जानकारी दी गई थी, तो बाद में बच्ची होने की बात कैसे सामने आई। इसी आधार पर उन्होंने बच्चा बदलने की आशंका जताई और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की। हालांकि अस्पताल प्रबंधन ने इन आरोपों को पूरी तरह खारिज कर दिया है। लोटस अस्पताल के मैनेजर अनिरुद्ध का कहना है कि तिवारी नर्सिंग होम से जिस नवजात को रेफर किया गया था, वह जन्म से ही बच्ची थी। अस्पताल में भर्ती, उपचार और मेडिकल रिकॉर्ड की सभी प्रविष्टियां इसी तथ्य की पुष्टि करती हैं। उनका कहना है कि किसी प्रकार की अदला-बदली या अनियमितता नहीं हुई है। वहीं तिवारी नर्सिंग होम प्रबंधन ने भी अपने स्तर पर आरोपों को निराधार बताया है। अस्पताल प्रशासन का कहना है कि डिलीवरी के दौरान मौजूद डॉक्टरों और स्टाफ से पूछताछ की गई है और सभी ने बच्ची के जन्म की पुष्टि की है। अस्पताल के अनुसार मेडिकल रिकॉर्ड, रेफरल दस्तावेज और उपलब्ध वीडियो फुटेज में भी यही तथ्य दर्ज है। मामले के तूल पकड़ने के बाद माधवनगर थाना पुलिस ने जांच शुरू कर दी है। पुलिस अस्पतालों के सीसीटीवी फुटेज, मेडिकल रिकॉर्ड, रेफरल दस्तावेज और संबंधित कर्मचारियों के बयान एकत्र कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। फिलहाल यह मामला पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है। एक ओर परिजन बच्चा बदलने की आशंका जता रहे हैं, वहीं अस्पताल प्रबंधन अपने रिकॉर्ड के आधार पर आरोपों को गलत बता रहा है। अब सभी की निगाहें पुलिस जांच पर टिकी हैं, जिससे इस विवाद की सच्चाई सामने आने की उम्मीद है।
सिनेमाई इतिहास का वो विवादित वाकया: जब फिल्म 'प्रेम धर्म' के इंटीमेट सीन के दौरान बेकाबू हुए विनोद खन्ना, गुस्से में डिंपल कपाड़िया ने उठाया था बड़ा कदम

नई दिल्ली । हिंदी सिनेमा के इतिहास में कई ऐसे किस्से दर्ज हैं जो फिल्मों की सफलता से इतर सेट पर घटित विवादित वाकयों के लिए हमेशा चर्चा में रहे। अस्सी के दशक में भी एक ऐसा ही वाकया सामने आया था, जिसने तत्कालीन फिल्म जगत में भारी सनसनी मचा दी थी। यह पूरा मामला हिंदी सिनेमा के शुरुआती दौर के सुपरस्टार विनोद खन्ना और दिग्गज अभिनेत्री डिंपल कपाड़िया से जुड़ा हुआ है। वर्ष उन्नीस सौ अस्सी में आई फिल्म ‘प्रेम धर्म’ की शूटिंग के दौरान एक बेहद संवेदनशील और अंतरंग दृश्य को फिल्माते समय ऐसा घटनाक्रम हुआ कि सेट पर मौजूद हर व्यक्ति हैरान रह गया। इस बहुचर्चित फिल्म का निर्देशन मशहूर फिल्मकार महेश भट्ट कर रहे थे, जो अपनी फिल्मों में दृश्यों को बेहद यथार्थवादी और भावुक बनाने के लिए जाने जाते हैं। फिल्म के एक खास सीक्वेंस के लिए विनोद खन्ना और डिंपल कपाड़िया के बीच एक बेहद इंटीमेट और इमोशनल सीन शूट किया जाना तय हुआ था। इस दृश्य को अधिक वास्तविक रूप देने और कलाकारों की झिझक दूर करने के उद्देश्य से निर्देशक महेश भट्ट ने सेट की सभी लाइटों को काफी धीमा करवा दिया था और मुख्य कैमरा टीम को छोड़कर बाकी पूरी यूनिट को भी उस स्थान से थोड़ा दूर रहने के निर्देश दिए गए थे। जैसे ही कैमरे ने रोल करना शुरू किया, विनोद खन्ना ने स्क्रिप्ट की मांग के अनुसार अपनी सह-कलाकार डिंपल कपाड़िया को चूमना शुरू कर दिया। दृश्य के पूरा होते ही निर्देशक महेश भट्ट ने लाउडस्पीकर पर ‘कट’ की घोषणा की, लेकिन विनोद खन्ना दृश्य की भावुकता और तीव्रता में इस कदर खो चुके थे कि उन्होंने निर्देशक की आवाज नहीं सुनी। ‘कट’ बोले जाने के बाद भी वे लगातार डिंपल कपाड़िया को किस करते रहे, जिससे सेट पर असहज स्थिति पैदा हो गई। डिंपल कपाड़िया को शुरुआत में समझ ही नहीं आया कि उनके सह-कलाकार आखिर क्या कर रहे हैं। माहौल को अचानक गंभीर और अजीब होते देख निर्देशक महेश भट्ट ने अपनी जगह से उठकर बेहद जोर-जोर से ‘कट’ बोलना शुरू किया, जिसके बाद कहीं जाकर विनोद खन्ना होश में आए और पीछे हटे। इस अप्रत्याशित और अचानक हुई घटना से युवा अभिनेत्री डिंपल कपाड़िया पूरी तरह स्तब्ध और गहरे सदमे में आ गईं। उन्हें विनोद खन्ना के इस अनपेक्षित व्यवहार पर भारी गुस्सा भी आया और वे तुरंत सेट से भागकर सीधे अपने मेकअप रूम की तरफ चली गईं। अपने स्वाभिमान और गरिमा को ठेस पहुंचने से आहत अभिनेत्री ने मेकअप रूम के भीतर पहुंचकर खुद को अंदर से पूरी तरह बंद कर लिया और बाहर आने से साफ मना कर दिया। सेट पर पैदा हुए इस गंभीर तनाव को देखते हुए निर्देशक महेश भट्ट ने तुरंत स्थिति को संभाला और वे स्वयं डिंपल कपाड़िया के कमरे के बाहर पहुंचे। उन्होंने अभिनेत्री से इस पूरी घटना के लिए औपचारिक रूप से माफी मांगी और उन्हें आश्वस्त किया कि यह केवल एक भूल थी। दूसरी तरफ, सुपरस्टार विनोद खन्ना भी अपनी इस अनियंत्रित हरकत के बाद बेहद शर्मिंदा महसूस कर रहे थे। बॉलीवुड के गलियारों में आज भी इस किस्से को संवेदनशीलता के साथ याद किया जाता है, जो यह दर्शाता है कि चकाचौंध भरी फिल्मों के निर्माण के दौरान कई बार कलाकारों के लिए स्थितियां कितनी असहज और चुनौतीपूर्ण हो जाती हैं। हालांकि, बाद में मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए इसे सुलझा लिया गया था, लेकिन सेंसर बोर्ड की कैंची और सेट पर मचे इस बवाल के कारण यह फिल्म और इससे जुड़ा यह विवाद हमेशा-कहमेशा के लिए फिल्मी इतिहास के पन्नों में दर्ज हो गया।
महामंडलेश्वर सुमनानंद गिरि को फिर मिली जान से मारने की धमकी, पत्र में लिखा- ‘अब तेरी बारी’

उज्जैन उज्जैन में स्थित गंगाघाट श्री मौन तीर्थ पीठ के पीठाधीश्वर एवं निरंजनी अखाड़े के महामंडलेश्वर डॉ. सुमनानंद गिरि महाराज को एक बार फिर जान से मारने की धमकी मिलने का मामला सामने आया है। धमकी एक पत्र के माध्यम से दी गई है, जिसमें उनके खिलाफ गंभीर और आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल करते हुए उन्हें नुकसान पहुंचाने की चेतावनी दी गई है। पत्र मिलने के बाद धार्मिक और सामाजिक क्षेत्र में चिंता का माहौल है, वहीं पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है। जानकारी के अनुसार यह पत्र सोमवार को गंगाघाट स्थित मौन तीर्थ पीठ पहुंचा था। मंगलवार को जब आश्रम में लिफाफा खोला गया तो उसके भीतर हाथ से लिखा हुआ एक पत्र मिला। पत्र में महामंडलेश्वर के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणियां की गई थीं और उन्हें जान से मारने की धमकी दी गई थी। पत्र में यह भी दावा किया गया कि उन्हें किसी भी कीमत पर नहीं छोड़ा जाएगा। पत्र में कुछ राजनीतिक नेताओं के नामों का उल्लेख करते हुए यह भी लिखा गया कि कोई उन्हें बचा नहीं पाएगा। बताया जा रहा है कि यह पत्र उत्तर प्रदेश के महू क्षेत्र से भेजा गया है। पत्र में धार्मिक भावनाओं से जुड़े आरोप लगाते हुए धमकी भरे शब्द लिखे गए हैं। मामले को गंभीरता से लेते हुए महामंडलेश्वर डॉ. सुमनानंद गिरि महाराज ने तत्काल इसकी सूचना पुलिस प्रशासन को दी और सुरक्षा की मांग भी उठाई। महामंडलेश्वर ने बताया कि यह पहला अवसर नहीं है जब उन्हें इस प्रकार की धमकी मिली हो। उन्होंने कहा कि सनातन धर्म और धार्मिक जागरण के लिए किए जा रहे कार्यों के कारण उन्हें लगातार निशाना बनाया जा रहा है। उनका दावा है कि इससे पहले भी उन पर उज्जैन और बड़ौदा में हमले हो चुके हैं। बावजूद इसके अब तक उन्हें पर्याप्त सुरक्षा उपलब्ध नहीं कराई गई है। गौरतलब है कि वर्ष 2023 और 2025 में भी उन्हें इसी प्रकार के धमकी भरे पत्र प्राप्त हुए थे। वर्ष 2025 में प्रयागराज से भेजे गए एक पत्र में भी उन्हें गंभीर परिणाम भुगतने की चेतावनी दी गई थी। वहीं 2023 में अखाड़ा परिषद की बैठक के दौरान भी एक अज्ञात व्यक्ति द्वारा धमकी भरा पत्र भेजा गया था। लगातार मिल रही धमकियों ने सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है। डॉ. सुमनानंद गिरि महाराज का आश्रम पिछले कुछ वर्षों में कई धार्मिक अनुष्ठानों और धर्म परिवर्तन से जुड़े मामलों के कारण चर्चा में रहा है। आश्रम में विभिन्न समुदायों से जुड़े कुछ लोगों द्वारा सनातन धर्म अपनाने और वैदिक रीति-रिवाजों से विवाह करने की घटनाएं भी सामने आ चुकी हैं। इन्हीं गतिविधियों को लेकर समय-समय पर विवाद और विरोध भी देखने को मिला है। फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है। पत्र किसने भेजा, उसका उद्देश्य क्या था और इसके पीछे कोई संगठित साजिश है या नहीं, इसकी पड़ताल की जा रही है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि पत्र की लिखावट, डाक संबंधी जानकारी और अन्य तकनीकी पहलुओं की जांच की जाएगी। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा भी की जा सकती है। इस घटना के बाद धार्मिक संगठनों और संत समाज में भी चिंता व्यक्त की जा रही है। सभी की नजरें अब पुलिस जांच पर टिकी हैं और उम्मीद की जा रही है कि जल्द ही धमकी भेजने वाले व्यक्ति की पहचान कर आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
भाई का आरोप- काम की कमी और मानसिक अपमान झेल रही थीं अभिनेत्री, सुशांत सिंह राजपूत से जुड़ा आखिरी पोस्ट

नई दिल्ली । टेलीविजन मनोरंजन उद्योग से आई एक बेहद दुखद और झकझोर देने वाली खबर ने पूरी इंडस्ट्री सहित प्रशंसकों को गहरे सदमे में डाल दिया है। कई लोकप्रिय धारावाहिकों में अपनी अदाकारी का जलवा बिखेर चुकीं बाईस वर्षीय उभरती हुई अभिनेत्री संचिता उगले के अचानक निधन से एक बार फिर चकाचौंध भरी इस दुनिया के पीछे छिपे मानसिक तनाव और दबाव की कड़वी सच्चाई सामने आ गई है। शुरुआती पुलिस जांच में इस घटना को कथित तौर पर आत्महत्या का मामला माना जा रहा है, जिसकी बारीकी से तफ्तीश की जा रही है। अभिनेत्री के असमय चले जाने के बाद उनके परिजनों और करीबी सहयोगियों की तरफ से आ रहे बयानों ने इस मामले में दुख और आक्रोश को और बढ़ा दिया है। संचिता की सह-कलाकार और बेहद करीबी दोस्त मेघा शर्मा ने मीडिया से बातचीत में खुलासा किया कि अभिनेत्री पिछले कुछ महीनों से गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं और मानसिक अवसाद के दौर से गुजर रही थीं। जनवरी महीने से ही उनका नियमित इलाज चल रहा था और वे अपनी कुछ निजी उलझनों को लेकर लगातार मानसिक रूप से परेशान चल रही थीं। करीबी सूत्रों के मुताबिक, संचिता अक्सर जिंदगी से हार मानने और हताशा से भरी बातें किया करती थीं, जिसके बाद उनके दोस्तों और परिजनों ने हमेशा उन्हें ढांढस बंधाया और सकारात्मक रहने के लिए प्रेरित किया। हालांकि, बीते कुछ दिनों से उनका फोन लगातार बंद आ रहा था, जिसने उनके करीबियों की चिंता बढ़ा दी थी। अपनी मौत से करीब दस दिन पहले वे एक ऑडिशन के सिलसिले में अपनी दोस्त के साथ गई थीं, जहां वे अपने भविष्य और अभिनय करियर को लेकर काफी आश्वस्त और सकारात्मक नजर आ रही थीं। दूसरी तरफ, इस संवेदनशील मामले में पुलिसिया कार्रवाई के बीच संचिता के भाई अविनाश उगले ने मनोरंजन जगत की कार्यशैली पर बेहद गंभीर और तीखे आरोप लगाए हैं। उनके भाई का कहना है कि ग्लैमर की इस दुनिया में लगातार मिलने वाला मानसिक दबाव, काम की अत्यधिक कमी और कार्यस्थल पर वरिष्ठों द्वारा कथित तौर पर किया जाने वाला अपमान उनकी बहन की मानसिक स्थिति बिगड़ने की मुख्य वजह बना। वह लंबे समय से इस बेइज्जती और उपेक्षा को चुपचाप सहन कर रही थीं, जिससे उनका आत्मविश्वास पूरी तरह टूट चुका था। मृतक अभिनेत्री के भाई ने इस पूरे घटनाक्रम का संबंध दिवंगत बॉलीवुड अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की त्रासदी से भी जोड़ा है। उन्होंने बताया कि संचिता का आखिरी सोशल मीडिया पोस्ट भी सुशांत सिंह राजपूत को ही समर्पित था, जिससे यह साफ झलकता है कि वे किस कदर अंदरूनी तौर पर अकेलेपन और मानसिक तनाव से जूझ रही थीं। गौरतलब है कि चौदह जून की शाम को संचिता अपने आवास पर अचेत अवस्था में पाई गई थीं, जिसके बाद अस्पताल ले जाने पर डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया था। टेलीविजन शोज के अलावा हाल ही में एक बड़ी फिल्म का हिस्सा रहीं संचिता उगले के इस कदम ने फिल्म सिटी के भीतर कलाकारों की मानसिक सुरक्षा पर एक बार फिर बहस छेड़ दी है। पुलिस प्रशासन ने इस मामले में अप्राकृतिक मृत्यु का मुकदमा दर्ज कर शव को अंत्यपरीक्षण के लिए भेज दिया है। जांच अधिकारियों का कहना है कि पोस्टमार्टम की विस्तृत रिपोर्ट आने और अभिनेत्री के कॉल डिटेल्स व सोशल मीडिया अकाउंट्स की गहन पड़ताल के बाद ही मौत के वास्तविक कारणों का पूरी तरह खुलासा हो सकेगा।