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वैभव सूर्यवंशी विवाद में घिरे: श्रीलंकाई खिलाड़ियों से भिड़ंत के बाद कार्रवाई का खतरा, डेब्यू पर भी नजरें

नई दिल्ली । भारतीय क्रिकेट के उभरते सितारे Vaibhav Suryavanshi एक बार फिर सुर्खियों में हैं, लेकिन इस बार वजह उनका प्रदर्शन नहीं बल्कि मैदान पर हुआ विवाद है। दांबुला में खेले गए इंडिया-ए और श्रीलंका-ए के मुकाबले में सुपर ओवर की हार के बाद युवा बल्लेबाज का गुस्सा कैमरों में कैद हो गया। मैच खत्म होने के बाद श्रीलंकाई खिलाड़ियों के साथ उनकी तीखी बहस और कथित धक्का-मुक्की ने खेल जगत में चर्चा छेड़ दी है। यह घटना ऐसे समय सामने आई है जब 15 वर्षीय बल्लेबाज को भारतीय क्रिकेट का भविष्य माना जा रहा है और जल्द ही अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में पदार्पण की संभावनाएं भी जताई जा रही हैं। सुपर ओवर की हार के बाद बढ़ा तनावमुकाबला बेहद रोमांचक रहा और विजेता का फैसला सुपर ओवर में हुआ। श्रीलंका-ए ने पहले बल्लेबाजी करते हुए चुनौतीपूर्ण स्कोर खड़ा किया, जिसके जवाब में इंडिया-ए लक्ष्य हासिल नहीं कर सकी। हार के बाद मैदान पर दोनों टीमों के खिलाड़ियों के बीच माहौल तनावपूर्ण हो गया। रिपोर्ट्स के अनुसार, श्रीलंका-ए के एक खिलाड़ी की टिप्पणी के बाद वैभव सूर्यवंशी नाराज हो गए। टीवी फुटेज में उन्हें काफी आक्रामक अंदाज में देखा गया। कुछ समय के लिए दोनों पक्षों के खिलाड़ी आमने-सामने आ गए, जिसके बाद अनुभवी विकेटकीपर Niroshan Dickwella ने बीच-बचाव कर मामला शांत कराया। अंपायर के फैसले पर भी जताई थी नाराजगीमैच के दौरान भी तनाव देखने को मिला था। सुपर ओवर में एक गेंद को नो-बॉल दिए जाने पर इंडिया-ए खेमे ने आपत्ति जताई थी। कप्तान Tilak Varma अंपायर के फैसले से असहमत नजर आए थे। उसी दौरान वैभव भी अंपायर से चर्चा करते दिखाई दिए। स्थिति को संभालने के लिए टीम प्रबंधन को हस्तक्षेप करना पड़ा और कोच ने युवा बल्लेबाज को वहां से हटाया। क्या मिल सकती है सजा?अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि इस घटना पर क्या कार्रवाई होगी। फिलहाल मैच रेफरी की ओर से कोई आधिकारिक फैसला सामने नहीं आया है। यदि समीक्षा में यह पाया जाता है कि खिलाड़ी ने अनुचित शारीरिक संपर्क किया या खेल भावना के विपरीत व्यवहार किया, तो चेतावनी, जुर्माना या अन्य अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सकती है। हालांकि यह मुकाबला आधिकारिक अंतरराष्ट्रीय मैच नहीं था, इसलिए सीधे तौर पर आईसीसी की कड़ी अनुशासनात्मक प्रक्रिया लागू होने की संभावना कम मानी जा रही है। इसके बावजूद मैच अधिकारियों और संबंधित क्रिकेट बोर्ड के पास कार्रवाई का अधिकार रहता है। शानदार प्रदर्शन के बीच लगा विवाद का दापिछले कुछ महीनों में Vaibhav Suryavanshi ने अपनी बल्लेबाजी से क्रिकेट जगत का ध्यान खींचा है। कम उम्र में लगातार प्रभावशाली प्रदर्शन करते हुए उन्होंने भविष्य के बड़े सितारे के रूप में पहचान बनाई है। लेकिन खेल विशेषज्ञों का मानना है कि बड़े स्तर पर सफलता केवल प्रतिभा से नहीं मिलती, बल्कि संयम, अनुशासन और दबाव में खुद को नियंत्रित रखने की क्षमता भी उतनी ही जरूरी होती है। ऐसे में यह घटना युवा खिलाड़ी के लिए एक महत्वपूर्ण सीख साबित हो सकती है। अब सबकी नजर रेफरी के फैसले परक्रिकेट प्रेमियों और चयनकर्ताओं की निगाहें अब मैच रेफरी की रिपोर्ट पर टिकी हैं। यह देखना दिलचस्प होगा कि घटना को कितनी गंभीरता से लिया जाता है और क्या इसका असर वैभव के संभावित अंतरराष्ट्रीय डेब्यू पर पड़ता है या नहीं। फिलहाल इतना तय है कि मैदान पर हुआ यह विवाद युवा बल्लेबाज के करियर की सबसे चर्चित घटनाओं में शामिल हो गया है।

भारत फीफा वर्ल्ड कप कब खेलेगा? 1950 का अधूरा सपना आज भी करोड़ों दिलों में जिंदा

नई दिल्ली । जब भी फीफा वर्ल्ड कप का आगाज होता है, भारत में फुटबॉल प्रेमियों का उत्साह चरम पर पहुंच जाता है। करोड़ों भारतीय रातभर जागकर मैच देखते हैं, अपनी पसंदीदा टीमों का समर्थन करते हैं और सोशल मीडिया पर फुटबॉल की चर्चा में डूब जाते हैं। लेकिन हर बार एक सवाल दिलों को कचोटता है आखिर भारत खुद फीफा वर्ल्ड कप कब खेलेगा?  दुनिया की सबसे बड़ी आबादी वाले देशों में शामिल भारत आज भी फुटबॉल के सबसे बड़े मंच से दूर है। वर्तमान में भारत फीफा रैंकिंग में काफी पीछे है और एशियाई फुटबॉल में भी उसकी स्थिति मजबूत नहीं मानी जाती। हालात ऐसे हैं कि टीम अगले एएफसी एशियन कप के लिए भी क्वालिफाई नहीं कर सकी, जिसने भारतीय फुटबॉल की चुनौतियों को एक बार फिर उजागर कर दिया। 1950: जब भारत वर्ल्ड कप खेलने के सबसे करीब थबहुत कम लोग जानते हैं कि भारत एक बार फीफा वर्ल्ड कप में खेलने के बेहद करीब पहुंच चुका था। 1950 में ब्राजील में आयोजित विश्व कप के लिए भारत को बिना क्वालिफाइंग मैच खेले ही जगह मिल गई थी। एशियाई ग्रुप की अन्य टीमें हट गई थीं, जिसके कारण भारत को सीधी एंट्री मिली। भारत को मजबूत टीमों के साथ ग्रुप में रखा गया था, लेकिन टीम टूर्नामेंट में हिस्सा नहीं ले सकी। वर्षों तक यह माना जाता रहा कि खिलाड़ियों को नंगे पैर खेलने की अनुमति नहीं मिलने के कारण भारत ने नाम वापस लिया था। हालांकि वास्तविक कारण आर्थिक कठिनाइयां, यात्रा खर्च और उस समय फुटबॉल प्रशासन की प्राथमिकताएं थीं। उस दौर में राष्ट्रीय स्तर पर ओलंपिक को विश्व कप से अधिक महत्व दिया जाता था। स्वर्णिम दौर के बाद क्यों आई गिरावटभारतीय फुटबॉल का इतिहास गौरवशाली भी रहा है। 1962 के एशियाई खेलों में भारत ने दक्षिण कोरिया को हराकर स्वर्ण पदक जीता था। उस दौर में भारतीय टीम एशिया की ताकतवर टीमों में गिनी जाती थी। बाद में 1970 एशियाई खेलों में भी भारत ने कांस्य पदक हासिल किया। लेकिन इसके बाद भारतीय फुटबॉल धीरे-धीरे पिछड़ता चला गया। जबकि जापान, दक्षिण कोरिया, ईरान और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों ने अपने फुटबॉल ढांचे को लगातार मजबूत किया और विश्व फुटबॉल में पहचान बनाई। क्या सिर्फ क्रिकेट जिम्मेदार है?अक्सर कहा जाता है कि भारत में क्रिकेट की लोकप्रियता फुटबॉल के विकास में बाधा बनी। इसमें कुछ सच्चाई जरूर है, क्योंकि अधिकांश निवेश, मीडिया कवरेज और प्रायोजक क्रिकेट की ओर केंद्रित रहते हैं। लेकिन पूरी तस्वीर इससे कहीं बड़ी है। जापान और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में भी कई खेल लोकप्रिय हैं, फिर भी उन्होंने मजबूत फुटबॉल संरचना विकसित की। भारत की सबसे बड़ी समस्या जमीनी स्तर पर मजबूत व्यवस्था का अभाव, कोचों की कमी, कमजोर स्काउटिंग सिस्टम और प्रशासनिक अस्थिरता रही है। उम्मीद अभी बाकी है2026 से फीफा वर्ल्ड कप में टीमों की संख्या 32 से बढ़ाकर 48 कर दी गई है। इससे एशियाई देशों के लिए क्वालिफिकेशन के अवसर बढ़े हैं। हालांकि सिर्फ अतिरिक्त स्लॉट मिलने से भारत विश्व कप नहीं पहुंच जाएगा। भारत को स्कूल स्तर पर फुटबॉल को बढ़ावा देना होगा, आधुनिक अकादमियों का विस्तार करना होगा, हजारों प्रशिक्षित कोच तैयार करने होंगे और लंबी अवधि की स्पष्ट योजना पर काम करना होगा। यदि सही दिशा में लगातार निवेश और प्रयास किए जाएं तो आने वाले वर्षों में भारत विश्व कप के सपने को साकार कर सकता है।

TMC सांसदों का NCPI में विलय: राजनीतिक मास्टरस्ट्रोक या कानूनी जोखिम?

नई दिल्ली । पश्चिम बंगाल की सियासत में ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली All India Trinamool Congress को बड़ा झटका देते हुए उसके 20 बागी सांसदों ने खुद को Nationalist Citizens Party of India में विलय करने का दावा किया है। लोकसभा अध्यक्ष को पत्र सौंपने और संसद में अलग बैठने की मांग के साथ इस घटनाक्रम ने राष्ट्रीय राजनीति में हलचल बढ़ा दी है। हालांकि राजनीतिक तौर पर यह कदम बागी सांसदों के लिए सुरक्षित दिखाई देता है, लेकिन संवैधानिक विशेषज्ञ इसे इतना आसान नहीं मान रहे हैं। दल-बदल विरोधी कानून के तहत किसी सांसद या विधायक को अपनी पार्टी छोड़कर दूसरी पार्टी में शामिल होने पर सदस्यता गंवानी पड़ सकती है। इसी खतरे से बचने के लिए बागी सांसदों ने ‘विलय’ का रास्ता चुना है। उनके पास कुल 28 में से 20 सांसदों का समर्थन है, जो दो-तिहाई की कानूनी शर्त पूरी करता है। लेकिन असली विवाद यहीं से शुरू होता है। क्या केवल सांसदों का समूह किसी दूसरी पार्टी में विलय कर सकता है?संविधान विशेषज्ञों और संसद के पूर्व महासचिव पीडीटी आचार्य का कहना है कि दल-बदल कानून के तहत केवल सांसदों या विधायकों का समूह किसी दूसरी पार्टी में शामिल हो जाए, तो उसे विलय नहीं माना जा सकता। कानून के अनुसार मूल राजनीतिक दल का भी दूसरी पार्टी में विलय होना जरूरी है। उनका तर्क है कि दसवीं अनुसूची के पैरा-4 में स्पष्ट रूप से राजनीतिक दल के विलय की बात कही गई है, न कि केवल संसदीय दल के। ऐसे में सांसदों का यह कदम कानूनी चुनौती का सामना कर सकता है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले क्यों बन सकते हैं परेशानी?इस पूरे मामले में कई महत्वपूर्ण न्यायिक फैसलों का उल्लेख किया जा रहा है। वर्ष 2023 में हुए Shiv Sena Political Crisis से जुड़े फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया था कि ‘मूल राजनीतिक दल’ और ‘विधायक या सांसद दल’ अलग-अलग इकाइयाँ हैं। अदालत ने कहा था कि किसी पार्टी के निर्वाचित प्रतिनिधि खुद को संगठन का मालिक नहीं मान सकते। पार्टी के आधिकारिक फैसलों का अधिकार मूल संगठन और उसके नेतृत्व के पास ही रहता है। यही सिद्धांत अब TMC के पक्ष को मजबूत करता दिखाई दे रहा है। ममता खेमे की कानूनी तैयारी शुरूTMC नेतृत्व ने बागी सांसदों के कदम को चुनौती देने की तैयारी शुरू कर दी है। पार्टी की ओर से लोकसभा अध्यक्ष को पत्र लिखकर किसी अलग गुट को मान्यता नहीं देने की मांग की गई है। साथ ही, पश्चिम बंगाल में बागी विधायकों को मिली मान्यता के खिलाफ अदालत का दरवाजा भी खटखटाया गया है। पार्टी का कहना है कि संगठन स्तर पर किसी प्रकार का विलय नहीं हुआ है, इसलिए सांसदों का दावा संवैधानिक रूप से टिकाऊ नहीं है। NCPI को अचानक मिला राष्ट्रीय महत्वत्रिपुरा में पंजीकृत लेकिन गैर-मान्यता प्राप्त Nationalist Citizens Party of India अब अचानक राष्ट्रीय चर्चा के केंद्र में आ गई है। 2023 में गठित यह छोटी पार्टी अब बागी सांसदों के कारण संसद में उल्लेखनीय उपस्थिति का दावा कर रही है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम कानूनी सुरक्षा हासिल करने की रणनीति हो सकती है, लेकिन अंतिम फैसला अदालतों और लोकसभा अध्यक्ष की व्याख्या पर निर्भर करेगा। आगे क्या होगा?अब सबकी निगाहें लोकसभा अध्यक्ष और न्यायपालिका पर टिकी हैं। यदि बागी सांसदों का ‘विलय’ कानूनी रूप से मान्य माना जाता है तो यह दल-बदल कानून की नई व्याख्या का रास्ता खोल सकता है। लेकिन यदि अदालतों ने इसे केवल ‘दल-बदल’ माना, तो सांसदों की सदस्यता पर संकट गहरा सकता है। फिलहाल यह मामला भारतीय राजनीति में दल-बदल कानून की प्रभावशीलता, उसकी खामियों और भविष्य में संभावित संशोधनों को लेकर नई बहस छेड़ चुका है।

मंगलवार पूजा विधि: बजरंगबली की कृपा पाने के लिए ऐसे करें पूजा, दूर होंगे संकट और मिलेगा सुख-समृद्धि का आशीर्वाद

नई दिल्ली ; धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सप्ताह का मंगलवार भगवान हनुमान की उपासना के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा और नियमपूर्वक बजरंगबली की पूजा-अर्चना करने से व्यक्ति के जीवन से भय, संकट, रोग और नकारात्मक शक्तियों का प्रभाव कम होता है। हिंदू धर्म में हनुमान जी को शक्ति, साहस, भक्ति और समर्पण का प्रतीक माना गया है। इसलिए मंगलवार को उनकी विशेष पूजा का महत्व और भी बढ़ जाता है। धार्मिक मान्यता है कि मंगलवार की सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करने के बाद स्वच्छ वस्त्र धारण करने चाहिए। इसके बाद घर के पूजा स्थल या हनुमान मंदिर में जाकर पूजा की शुरुआत करनी चाहिए। पूजा के दौरान हनुमान जी को सिंदूर, चमेली का तेल, लाल फूल, गुड़ और चने का भोग अर्पित करना शुभ माना जाता है। मान्यता है कि हनुमान जी को सिंदूर अत्यंत प्रिय है, इसलिए सिंदूर अर्पित करने से विशेष कृपा प्राप्त होती है। पूजा के समय दीपक और धूप जलाकर हनुमान चालीसा का पाठ करना अत्यंत फलदायी माना गया है। कई श्रद्धालु इस दिन सुंदरकांड, बजरंग बाण और हनुमान अष्टक का पाठ भी करते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इन स्तोत्रों और पाठों के नियमित जाप से जीवन में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं और मानसिक शांति प्राप्त होती है। मंगलवार के दिन व्रत रखने की भी परंपरा है। मान्यता है कि श्रद्धा और संयम के साथ रखा गया मंगलवार का व्रत व्यक्ति की मनोकामनाएं पूर्ण करने में सहायक होता है। कुछ लोग इस दिन केवल एक समय भोजन करते हैं, जबकि कई श्रद्धालु फलाहार ग्रहण कर दिनभर भगवान हनुमान का स्मरण करते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार व्रत के साथ पूजा करने से उसका पुण्यफल और अधिक बढ़ जाता है। मंगलवार को दान-पुण्य का भी विशेष महत्व बताया गया है। लाल मसूर की दाल, गुड़, तांबे के पात्र, लाल वस्त्र या जरूरतमंदों को भोजन कराने को शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन किए गए दान से मंगल दोषों के प्रभाव में कमी आती है और व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। इसके अलावा हनुमान मंदिर में जाकर दर्शन करना और बंदरों को फल, गुड़ या चना खिलाना भी शुभ माना जाता है। मान्यता है कि ऐसा करने से बजरंगबली प्रसन्न होते हैं और अपने भक्तों पर कृपा बरसाते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मंगलवार को श्रद्धा, भक्ति और नियमपूर्वक की गई पूजा व्यक्ति के जीवन में आत्मबल, साहस और सकारात्मकता का संचार करती है। यही कारण है कि देशभर में लाखों श्रद्धालु इस दिन हनुमान जी की विशेष आराधना कर सुख-समृद्धि और मंगलमय जीवन की कामना करते हैं।

स्किन केयर में बेसन का कमाल: महंगे प्रोडक्ट्स को दे सकता है टक्कर, चेहरे पर लाएगा प्राकृतिक निखार

नई दिल्ली ; आज के समय में हर कोई स्वस्थ, चमकदार और बेदाग त्वचा पाना चाहता है। इसके लिए लोग महंगे ब्यूटी प्रोडक्ट्स और कॉस्मेटिक ट्रीटमेंट्स पर हजारों रुपये खर्च करते हैं। हालांकि, भारतीय परंपरा में कई ऐसे घरेलू उपाय मौजूद हैं जो कम खर्च में त्वचा की देखभाल करने में मदद कर सकते हैं। इन्हीं में से एक है बेसन। वर्षों से बेसन का उपयोग घरेलू उबटन और फेस पैक के रूप में किया जाता रहा है। माना जाता है कि यह त्वचा की गहराई से सफाई करने और प्राकृतिक निखार बनाए रखने में सहायक हो सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार बेसन त्वचा पर जमा अतिरिक्त तेल, धूल और गंदगी को हटाने में मदद करता है। नियमित रूप से बेसन का उपयोग करने से त्वचा साफ और ताजगी भरी महसूस हो सकती है। यही कारण है कि कई लोग फेस वॉश की जगह बेसन का इस्तेमाल करना पसंद करते हैं। हालांकि, हर व्यक्ति की त्वचा अलग होती है, इसलिए किसी भी घरेलू उपाय को अपनाने से पहले अपनी त्वचा की प्रकृति को समझना जरूरी है। त्वचा पर निखार लाने के लिए बेसन और दही का फेस पैक काफी लोकप्रिय माना जाता है। दही में मौजूद पोषक तत्व त्वचा को नमी प्रदान करने में मदद करते हैं, जबकि बेसन त्वचा की सफाई का काम करता है। इसी तरह बेसन में हल्दी मिलाकर बनाया गया उबटन भी पारंपरिक रूप से इस्तेमाल किया जाता है। धार्मिक और सांस्कृतिक अवसरों पर दूल्हा-दुल्हन को हल्दी-बेसन का उबटन लगाने की परंपरा भी लंबे समय से चली आ रही है। ऑयली स्किन वाले लोगों के लिए बेसन और गुलाब जल का मिश्रण उपयोगी माना जाता है। यह त्वचा को ताजगी देने और अतिरिक्त तेल को नियंत्रित करने में मदद कर सकता है। वहीं, शुष्क त्वचा वाले लोग बेसन में दूध या शहद मिलाकर फेस पैक तैयार कर सकते हैं। इससे त्वचा को पोषण और नमी मिलने में सहायता मिल सकती है। बेसन का उपयोग हल्के एक्सफोलिएटर के रूप में भी किया जाता है। यह त्वचा की मृत कोशिकाओं को हटाने में मदद कर सकता है, जिससे त्वचा अधिक साफ और चमकदार दिखाई देती है। हालांकि, बहुत अधिक रगड़ने से त्वचा को नुकसान भी पहुंच सकता है, इसलिए इसका उपयोग सावधानी से करना चाहिए। त्वचा विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी घरेलू नुस्खे को अपनाने से पहले पैच टेस्ट करना जरूरी है। यदि त्वचा पर जलन, खुजली या एलर्जी जैसी समस्या महसूस हो तो उसका उपयोग तुरंत बंद कर देना चाहिए। साथ ही, गंभीर त्वचा संबंधी समस्याओं के लिए विशेषज्ञ की सलाह लेना बेहतर रहता है। सही खानपान, पर्याप्त पानी, अच्छी नींद और नियमित स्किन केयर रूटीन के साथ बेसन जैसे पारंपरिक उपाय त्वचा की देखभाल में सहायक भूमिका निभा सकते हैं। यही वजह है कि आज भी बेसन भारतीय घरेलू सौंदर्य उपचारों का महत्वपूर्ण हिस्सा बना हुआ है।

CM Mohan Yadav News: जगदीशपुर में जल्द होगी डेस्टिनेशन कैबिनेट, CM मोहन यादव ने दिए तैयारियों के निर्देश

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CM Mohan Yadav News: भोपाल। मध्य प्रदेश सरकार की अगली डेस्टिनेशन कैबिनेट अब भोपाल के पास स्थित ऐतिहासिक नगरी जगदीशपुर में आयोजित करने की तैयारियां शुरू हो गयी हैं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने हाल ही में जगदीशपुर के पुराने किले और उसके इतिहास की जानकारी लेते हुए अधिकारियों को यहां कैबिनेट बैठक की तैयारियां करने के निर्देश दिए हैं। राख’ में भोपाल के प्रसन्न सोनी का दमदार अभिनय, जटिल किरदार ने खींचा ध्यान जगदीशपुर का ऐतिहासिक महत्व देशभर तक पहुंचे मुख्यमंत्री का मानना है कि जगदीशपुर का ऐतिहासिक महत्व देशभर तक पहुंचना चाहिए। इसी उद्देश्य से यहां कैबिनेट बैठक आयोजित करने की योजना बनाई जा रही है, ताकि इस क्षेत्र की विरासत को नई पहचान मिल सके। प्रिंस यादव मौत विवाद: कोचिंग जगत से उठकर राजनीति तक पहुंचा मामला, जांच पर टिकी निगाहें मुख्य सचिव सहित अधिकारी रहे मौजूद संस्कृति विभाग की बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि जगदीशपुर के इतिहास, संस्कृति और पर्यटन संभावनाओं को प्रमुखता से सामने लाने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं। उन्होंने बैठक से जुड़ी सभी तैयारियां समय पर पूरी करने के निर्देश भी दिए। इस दौरान मुख्य सचिव सहित संस्कृति विभाग के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। GWALIOR RAPE-BLACKMAIL CASE: नौकरी का झांसा देकर किया दुष्कर्म, महिला ने थाने में खाया जहर पहले भी कई ऐतहासिक जगहों पर हुई बैठक गौरतलब है कि प्रदेश सरकार पहले भी ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व वाले स्थानों पर कैबिनेट बैठकें आयोजित करती रही है। इंदौर के राजवाड़ा, खरगोन के महेश्वर, दमोह के संग्रामपुर और खजुराहो में डेस्टिनेशन कैबिनेट आयोजित की जा चुकी है। अब इस सूची में जगदीशपुर का नाम भी जुड़ने जा रहा है। बता दें कि कुछ वर्ष पहले इस्लाम नगर का नाम बदलकर जगदीशपुर किया गया था। ऐसे में यहां होने वाली कैबिनेट बैठक को क्षेत्र की ऐतिहासिक पहचान को मजबूत करने और पर्यटन को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

वास्तविक जीवन में मदिरा को हाथ न लगाने वाले हास्य अभिनेता की अनसुनी दास्तान, मंदिर जाते समय हुए सड़क हादसे में थम गई थीं सांसें

नई दिल्ली। भारतीय सिनेमा के इतिहास में कई ऐसे विलक्षण कलाकार हुए हैं, जिनकी ऑन-स्क्रीन छवि और वास्तविक जीवन के आचरण में जमीन-आसमान का अंतर था। इस फेहरिस्त में सबसे लोकप्रिय नामों में से एक नाम दिवंगत अभिनेता केष्टो मुखर्जी का है। केष्टो मुखर्जी ने रुपहले पर्दे पर हमेशा एक ऐसे शराबी के किरदारों को जीवंत किया, जिसे देखकर दर्शक अपनी हंसी नहीं रोक पाते थे। आम जनता उन्हें असल जिंदगी में भी शराबी समझने की भूल कर बैठती थी, जबकि हकीकत यह थी कि उन्होंने अपने पूरे जीवन में कभी शराब को हाथ तक नहीं लगाया था। उनका पूरा सफरनामा कला के प्रति अटूट निष्ठा, कड़े संघर्षों और अप्रत्याशित मोड़ों की एक अनूठी दास्तान है। पश्चिम बंगाल के कोलकाता में जन्मे केष्टो मुखर्जी को बचपन से ही अभिनय का गहरा शौक था, जिसके कारण उन्होंने बेहद कम उम्र में ही नुक्कड़ नाटकों और स्थानीय रंगमंच से अपने अभिनय सफर की शुरुआत कर दी थी। रंगमंच पर उनकी शानदार प्रतिभा को देखकर उस दौर के महान बंगाली फिल्मकार ऋत्विक घटक बेहद प्रभावित हुए और उन्होंने केष्टो को अपनी प्रतिष्ठित बांग्ला फिल्म ‘नागरिक’ में एक महत्वपूर्ण भूमिका की पेशकश की। नियति का खेल देखिए कि यह फिल्म साल 1952 में ही बनकर पूरी तरह तैयार हो चुकी थी, लेकिन किन्हीं कारणों से इसे रिलीज होने में पूरे 25 साल का लंबा समय लग गया। जब यह फिल्म 1977 में सिनेमाघरों में पहुंची, तब तक ऋत्विक घटक इस दुनिया को अलविदा कह चुके थे। अपने गुरु के जाने के गम में केष्टो मुखर्जी इतने भावुक हो गए थे कि उन्होंने इस फिल्म को जीवनभर कभी नहीं देखा। कोलकाता के सिनेमाई हलकों में कई बंगाली फिल्मों का हिस्सा रहने के बावजूद केष्टो मुखर्जी को वह पहचान और आर्थिक संबल नहीं मिल पा रहा था, जिसके वह हकदार थे। न तो उनके परिवार का गुजारा ठीक से हो पा रहा था और न ही उनके भीतर के कलाकार की भूख शांत हो रही थी। आखिरकार, अपनी आंखों में एक बड़ा मुकाम हासिल करने का सपना संजोकर उन्होंने देश की आर्थिक राजधानी और मायानगरी बॉम्बे का रुख किया। मुंबई आने के बाद शुरुआती दिन बेहद तंगहाली और संघर्ष में बीते। उन्होंने हार न मानते हुए लगातार प्रयास किए और किसी तरह मशहूर निर्देशक ऋषिकेश मुखर्जी से संपर्क स्थापित किया। ऋषिकेश मुखर्जी ने उनकी प्रतिभा का सम्मान करते हुए अपनी फिल्म ‘मुसाफिर’ में उन्हें एक स्ट्रीट डांसर का बहुत छोटा सा रोल दिया, जिससे उनके हिंदी सिनेमा के सफर का आधिकारिक तौर पर आगाज हुआ। बॉम्बे में खुद को स्थापित करने की इसी जद्दोजहद के दौरान केष्टो मुखर्जी से जुड़ा एक बेहद दिलचस्प और ऐतिहासिक वाकया सामने आया, जब वह काम की तलाश में महान फिल्ममेकर बिमल रॉय के सेट पर पहुंचे थे। बिमल रॉय उस समय अपनी फिल्म की शूटिंग में बेहद व्यस्त थे और केष्टो बिना थके घंटों एक कोने में खड़े होकर उनकी फुर्सत का इंतजार करते रहे। काफी देर बाद जब बिमल रॉय की नजर उन पर पड़ी, तो उन्होंने दोटूक शब्दों में कहा कि फिलहाल उनके पास देने के लिए कोई काम नहीं है और वह बाद में आएं। इसके बावजूद केष्टो वहां से नहीं गए। कुछ समय बाद बिमल रॉय ने जब दोबारा उन्हें वहीं खड़ा देखा, तो वह थोड़े असहज और चिढ़ गए। उन्होंने केष्टो से पूछा कि क्या तुम भौंक सकते हो, मुझे अपनी फिल्म के एक दृश्य के लिए कुत्ते की प्रामाणिक आवाज की जरूरत है, क्या तुम यह कर पाओगे। यह एक ऐसा सवाल था जो किसी भी स्वाभिमानी अभिनेता को निराश और आहत कर सकता था, लेकिन केष्टो मुखर्जी ने इसे एक बड़ी चुनौती और अवसर के रूप में स्वीकार किया। वह कुछ पल के लिए बिल्कुल शांत हुए और फिर पूरे समर्पण के साथ सेट पर ही जोर-जोर से कुत्ते की आवाज निकालने लगे। उनकी इस अप्रत्याशित और सजीव प्रस्तुति ने बिमल रॉय समेत पूरे सेट पर मौजूद लोगों को हैरान कर दिया। बिमल रॉय के पास कहने के लिए कोई शब्द नहीं बचे थे और उन्होंने केष्टो की प्रतिभा का लोहा मानते हुए तुरंत उन्हें अपनी फिल्म के लिए अनुबंधित कर लिया। इस घटना के बाद केष्टो मुखर्जी के लिए बॉलीवुड के दरवाजे पूरी तरह खुल गए और उन्होंने अपने पूरे करियर में 90 से अधिक फिल्मों में अपनी विशिष्ट अदाकारी का लोहा मनवाया। सफलता के शिखर पर पहुंचने और दर्शकों को दशकों तक हंसाने वाले इस महान कलाकार का अंत बेहद दुखद रहा। मात्र 56 वर्ष की आयु में नियति ने उन्हें हमसे छीन लिया। एक दिन जब वह मुंबई के पास स्थित एक प्रसिद्ध गणपति मंदिर में दर्शन करने के लिए अपनी कार से जा रहे थे, तभी पीछे से आ रहे एक अनियंत्रित तेज रफ्तार ट्रक ने उनकी कार को जोरदार टक्कर मार दी। इस भीषण सड़क हादसे में केष्टो मुखर्जी गंभीर रूप से घायल हो गए। उन्हें तत्काल नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां डॉक्टरों की तमाम कोशिशों के बावजूद दुर्घटना के अगले ही दिन दिल का दौरा पड़ने के कारण इस महान हास्य अभिनेता का असमय निधन हो गया।

राख’ में भोपाल के प्रसन्न सोनी का दमदार अभिनय, जटिल किरदार ने खींचा ध्यान

नई दिल्ली अमेजन प्राइम वीडियो की नई क्राइम-थ्रिलर वेब सीरीज ‘राख’ लगातार चर्चा में बनी हुई है। वर्ष 1978 की पृष्ठभूमि पर आधारित इस सीरीज में एक पुराने अपराध और उससे जुड़े रहस्यों की परतें धीरे-धीरे खोली जाती हैं। इस सीरीज में बॉलीवुड अभिनेता अली फज़ल मुख्य भूमिका में नजर आते हैं, जबकि सोनाली बेंद्रे, आमिर बशीर और राकेश बेदी जैसे अनुभवी कलाकार भी अहम किरदार निभा रहे हैं। इसी मजबूत स्टारकास्ट के बीच भोपाल के युवा रंगकर्मी प्रसन्न सोनी ने भी अपनी अलग पहचान बनाई है। ‘धनीराम’ का चुनौतीपूर्ण किरदार और गहरी मनोस्थितिप्रसन्न सोनी ने इस सीरीज में ‘धनीराम’ का किरदार निभाया है, जो कई परतों वाला और मनोवैज्ञानिक रूप से बेहद जटिल है। यह किरदार अपनी वास्तविक पहचान छिपाकर समाज के सामने सामान्य जीवन जीता है और भीतर ही भीतर संघर्षों से जूझता रहता है।  धनीराम समलैंगिक है, लेकिन सामाजिक दबावों के चलते वह अपनी सच्चाई छिपाकर पत्नी के साथ एक पारंपरिक वैवाहिक जीवन भी जीता है। इस दोहरे जीवन को पर्दे पर उतारना प्रसन्न के लिए एक बड़ी अभिनय चुनौती थी। सबसे दिलचस्प पहलू यह रहा कि इस सीरीज में धनीराम की पत्नी का किरदार प्रसन्न की वास्तविक जीवन पत्नी भारती ने निभाया है। भारती, राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय (NSD) से प्रशिक्षित अभिनेत्री हैं और पहले भी फिल्मों व रंगमंच पर अपनी उपस्थिति दर्ज करा चुकी हैं। अली फज़ल के साथ काम और अभिनय का अनुभवप्रसन्न सोनी ने बताया कि इस प्रोजेक्ट में उन्हें अली फज़ल जैसे बड़े कलाकार के साथ स्क्रीन साझा करने का मौका मिला, जो उनके लिए सीखने का एक महत्वपूर्ण अनुभव रहा। उन्होंने कहा कि ‘धनीराम’ जैसे किरदार को निभाने के लिए भावनात्मक गहराई और मानसिक स्तर पर तैयारी बेहद जरूरी थी। राष्ट्रीय सम्मान की ओर बढ़ता सफरहाल ही में प्रसन्न सोनी को वर्ष 2024 के लिए प्रतिष्ठित उस्ताद बिस्मिल्लाह खां युवा पुरस्कार के लिए चुना गया है। यह सम्मान संगीत नाटक अकादमी द्वारा देशभर के युवा कलाकारों को उनकी उत्कृष्ट उपलब्धियों के लिए दिया जाता है। इसके अलावा भोपाल के तबला वादक रामेंद्र सिंह सोलंकी को भी इस पुरस्कार के लिए चयनित किया गया है, जिससे मध्यप्रदेश की सांस्कृतिक पहचान और मजबूत हुई है। रंगमंच से वेब सीरीज तक का सफरप्रसन्न सोनी लंबे समय से रंगमंच से जुड़े हुए हैं। उन्होंने अभिनय, लेखन और निर्देशन के क्षेत्र में लगातार काम करते हुए सामाजिक विषयों और मानवीय संवेदनाओं को मंच पर जीवंत किया है। उनकी यही निरंतर साधना उन्हें राष्ट्रीय पहचान तक लेकर आई है। ‘राख’ में मिला यह किरदार उनके करियर के लिए एक महत्वपूर्ण पड़ाव साबित हो रहा है, जो उन्हें आने वाले समय में और बड़े प्रोजेक्ट्स की ओर ले जा सकता है।

प्रिंस यादव मौत विवाद: कोचिंग जगत से उठकर राजनीति तक पहुंचा मामला, जांच पर टिकी निगाहें

नई दिल्ली । पटना के चर्चित कोचिंग सेक्टर में शुरू हुआ विवाद अब एक बड़े और संवेदनशील मामले में बदल गया है। ज्ञान बिंदु जीएस अकादमी के संचालक रौशन आनंद के छोटे भाई प्रिंस यादव की नेपाल के एक होटल में संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत ने पूरे प्रकरण को नया मोड़ दे दिया है। घटना के बाद अंतिम संस्कार में भारी भीड़ उमड़ी, जहां माहौल गम और गुस्से से भरा नजर आया। रौशन आनंद ने मीडिया से बातचीत में गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि उनके भाई की मौत सामान्य नहीं है और इसके पीछे साजिश हो सकती है। उन्होंने सीधे तौर पर कुछ लोगों पर निशाना साधते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की। “मैं सनातनी हिंदू हूं, न्याय पर भरोसा है” – रौशन आनंदअंतिम संस्कार से पहले और बाद में रौशन आनंद ने भावुक लेकिन आक्रामक बयान दिए। उन्होंने कहा कि वह “सनातनी हिंदू” हैं और न्याय व्यवस्था पर पूरा भरोसा रखते हैं। साथ ही उन्होंने दावा किया कि वह जांच एजेंसियों के साथ पूरा सहयोग करेंगे, लेकिन सच्चाई सामने लाकर रहेंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोग उनके खिलाफ साजिश रच रहे हैं और पुलिस जांच को प्रभावित किया जा रहा है। हालांकि उन्होंने किसी भी आरोप के समर्थन में सार्वजनिक रूप से कोई ठोस सबूत पेश नहीं किया है। Faisal Khan पर गंभीर आरोइस पूरे विवाद में रौशन आनंद ने कोचिंग शिक्षक फैजल खान, जिन्हें आमतौर पर खान सर के नाम से जाना जाता है, पर भी गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि उनके अनुसार इस पूरे घटनाक्रम में षड्यंत्र की भूमिका हो सकती है। हालांकि Faisal Khan ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। उन्होंने कहा है कि उनका इस घटना से कोई संबंध नहीं है और वे स्वयं निष्पक्ष जांच के पक्ष में हैं। Tejashwi Yadav ने उठाई CBI जांच की मांइस मामले ने राजनीतिक रंग भी ले लिया है। बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष Tejashwi Yadav ने पूरे प्रकरण की CBI जांच की मांग की है। उन्होंने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर कहा कि मामला बेहद गंभीर है और इसकी निष्पक्ष जांच किसी स्वतंत्र एजेंसी से होनी चाहिए। उनका कहना है कि पहले कोचिंग संस्थानों के बीच विवाद, फिर हिंसा और अब एक युवक की संदिग्ध मौत ये सभी घटनाएं मिलकर मामले को और गंभीर बनाती हैं। नेपाल पुलिस की जांच जारी, कई सवाल अनसुलझेप्रिंस यादव की मौत नेपाल के होटल में हुई थी, जहां अभी तक मौत के कारणों पर कोई आधिकारिक निष्कर्ष नहीं निकला है। नेपाल पुलिस सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल डाटा और होटल रिकॉर्ड की जांच कर रही है। अब तक किसी भी एजेंसी ने किसी व्यक्ति को सीधे तौर पर जिम्मेदार नहीं ठहराया है। जांच में यह पता लगाया जा रहा है कि यह मामला दुर्घटना, आत्महत्या या किसी साजिश का परिणाम है। सबसे बड़े सवाल अभी भी बाकीपूरा मामला कई सवालों के बीच अटका हुआ है प्रिंस यादव की मौत कैसे हुई, वह किन लोगों के संपर्क में थे, और होटल में आखिरी समय में क्या हुआ? जब तक जांच रिपोर्ट सामने नहीं आती, तब तक सभी आरोप और दावे केवल जांच के दायरे में ही माने जाएंगे।

GWALIOR RAPE-BLACKMAIL CASE: नौकरी का झांसा देकर किया दुष्कर्म, महिला ने थाने में खाया जहर

Gwalior women raped

GWALIOR RAPE-BLACKMAIL CASE: ग्वालियर। शहर के मुरार थाना क्षेत्र से युवती के साथ दुश्कर्म का शर्मनाक मामला सामने आया है। आरोपी ने महिला की मजबूरी का फायदा उठाते हुए पहले नौकरी लगवाने का लालच दिया और फिर शादी का झांसा देकर उसका लगातार शारीरिक शोषण किया। पीड़िता का आरोप है कि उसकी सुनवाई नहीं हुई जिसकी वजह से उसने सोमवार को मुरार थाने में जहर खाने का प्रयास किया, लेकिन पुलिस ने समय रहते उसे बचाकर अस्पताल पहुंचाया है। पीड़िता की लिखित शिकायत पर मुरार थाना पुलिस ने आरोपी युवक के खिलाफ दुष्कर्म सहित विभिन्न गंभीर धाराओं मामला दर्ज कर लिया है। Shujalpur Road Accident: शुजालपुर-आष्टा हाईवे पर सड़क की दरार में फंसकर बाइक गिरी, पति-पत्नी घायल; ट्रैक्टर ने बचाया बड़ा हादसा बच्ची को पढ़ाने के लिए आई थी ग्वालियर पुलिस का कहना है कि 26 वर्षिय पीड़िता मूल रूप से भिंड की रहने वाली है, जिसकी शादी वर्ष 2016 में हुई थी। शादी के बाद उसकी दो छोटी बच्चियां हैं। करीब 4 साल पहले पीड़िता अपनी बड़ी बेटी की पढ़ाई के लिए ग्वालियर में किराये का मकान लेकर रहने आई थी। मोहल्ले में ही आरोपी गजेंद्र केवट की एक ऑनलाइन (कियोस्क सेंटर) दुकान थी। पीड़िता अक्सर अपने बैंक खाते से पैसे निकालने के लिए गजेंद्र की दुकान पर जाती थी, जिसके चलते दोनों के बीच जान-पहचान हो गई और मोबाइल नंबरों का आदान-प्रदान होने के बाद बातचीत शुरू हो गई। Vidisha Wall Collapse: विदिशा में कच्चे मकान की दीवार गिरने से 12 वर्षीय बच्चे की मौत, आंधी-बारिश से हादसा मजबूरी का फायदा उठाकर बनाए संबंध बातचीत के दौरान आरोपी गजेंद्र केवट को पता चला कि महिला अपने पति से अलग होकर बच्चों की पढ़ाई के लिए ग्वालियर में अकेली रह रही है। आरोपी ने उसकी आर्थिक मजबूरी का फायदा उठाते हुए नौकरी दिलाने का झांसा दिया। मई 2024 में वह महिला के किराए के कमरे पर पहुंचा और कथित तौर पर उसके साथ जबरन संबंध बनाए। इसके बाद आरोपी नौकरी और शादी का लालच देकर लगातार महिला का शारीरिक शोषण करता रहा। महिला के विरोध करने पर आरोपी ने उसे अपने जाल में फंसाए रखने के लिए कहा कि तुम अपने पति से कानूनी तौर पर तलाक ले लो, तो मैं तुमसे कोर्ट मैरिज कर लूंगा। पीड़िता का आरोप है कि आरोपी 23 मई 2026 तक उसे झांसे में रखकर संबंध बनाता रहा, लेकिन अब शादी से मुकर गया है। CONGRESS SMART METER PROTEST: ग्वालियर में स्मार्ट मीटर के खिलाफ सड़कों पर उतरी कांग्रेस, बोले-शिकायतें दूर करो, फिर लगाओ स्मार्ट मीटर सुनवाई न होने पर महीला ने खाया जहर सोमवार को महिला मुरार थाना पहुंची और सुनवाई न होने का आरोप लगाते हुए जहर खाने का प्रयास करने लगी। जिसके बाद वहां मौजूद पुलिस कर्मियों ने तत्काल उसे रोक लिया और मेडिकल के लिए हॉस्पिटल ले गए। पुलिस ने महिला के लौटने पर आरोपी के खिलाफ नौकरी व शादी का झांसा देकर दुष्कर्म करने का मामला दर्ज किया। पुलिस का कहना है कि महिला इससे पहले भी शिकायत दर्ज कराने थाने पहुंची थी। पूरी रिपोर्ट तैयार होने के बाद मामला दर्ज कराने की प्रक्रिया शुरू हुई, लेकिन वह आरोपी से समझौता कर वापस लौट गई।