वैश्विक अनिश्चितता और आईटी सेक्टर पर दबाव का असर, सप्ताह के आखिरी कारोबारी दिन शेयर बाजार में बड़ी गिरावट

नई दिल्ली । सप्ताह के अंतिम कारोबारी दिन भारतीय शेयर बाजार दबाव में नजर आया और प्रमुख सूचकांकों ने उल्लेखनीय गिरावट के साथ कारोबार समाप्त किया। वैश्विक आर्थिक संकेतों, अमेरिका और ईरान के बीच प्रस्तावित शांति वार्ता के रद्द होने तथा आईटी सेक्टर में बढ़ी बिकवाली ने निवेशकों की धारणा को प्रभावित किया। दिनभर बाजार में उतार-चढ़ाव बना रहा, लेकिन अंतिम घंटों में बिकवाली का दबाव और बढ़ गया, जिसके चलते सेंसेक्स और निफ्टी दोनों लाल निशान में बंद हुए। कारोबार समाप्त होने पर सेंसेक्स 600 अंकों से अधिक टूटकर 76 हजार के स्तर के आसपास बंद हुआ, जबकि निफ्टी भी 24 हजार के महत्वपूर्ण स्तर के करीब फिसल गया। बाजार विशेषज्ञों के अनुसार हाल के सप्ताहों में आई तेजी के बाद निवेशकों ने मुनाफावसूली को प्राथमिकता दी, जिससे कई बड़े शेयरों में दबाव देखने को मिला। वैश्विक स्तर पर बढ़ती अनिश्चितताओं ने भी निवेशकों को सतर्क रुख अपनाने के लिए मजबूर किया। बाजार की गिरावट में सबसे बड़ा योगदान आईटी सेक्टर का रहा। वैश्विक टेक्नोलॉजी कंपनियों की ओर से मिले कमजोर संकेतों और भविष्य के कारोबार को लेकर सतर्क अनुमान ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी। इसके परिणामस्वरूप भारतीय आईटी कंपनियों के शेयरों में व्यापक बिकवाली दर्ज की गई। सेक्टर की प्रमुख कंपनियों में तेज गिरावट देखने को मिली, जिससे आईटी सूचकांक दिन के सबसे कमजोर प्रदर्शन करने वाले क्षेत्रों में शामिल रहा। जानकारों का मानना है कि डिजिटल सेवाओं और तकनीकी निवेश से जुड़ी वैश्विक मांग को लेकर अनिश्चितता बढ़ने से निवेशक फिलहाल जोखिम लेने से बच रहे हैं। यही कारण है कि बड़े संस्थागत निवेशकों ने तकनीकी शेयरों में अपनी हिस्सेदारी घटाने का फैसला किया। इसका सीधा असर बाजार के समग्र प्रदर्शन पर पड़ा। हालांकि, बाजार में हर तरफ निराशा का माहौल नहीं था। हेल्थकेयर, फार्मा, रक्षा, ऊर्जा और धातु क्षेत्रों से जुड़े कुछ शेयरों में मजबूती देखने को मिली। इन सेक्टरों ने निवेशकों को सीमित राहत प्रदान की और बाजार में गिरावट को कुछ हद तक नियंत्रित करने में मदद की। सुरक्षित निवेश विकल्पों की तलाश में कई निवेशकों ने इन क्षेत्रों की ओर रुख किया। दिलचस्प बात यह रही कि बड़े शेयरों की तुलना में मिडकैप और स्मॉलकैप कंपनियों ने अपेक्षाकृत बेहतर प्रदर्शन किया। दोनों श्रेणियों के सूचकांक बढ़त के साथ बंद हुए, जिससे यह संकेत मिला कि घरेलू निवेशकों का भरोसा अभी भी चुनिंदा कंपनियों और विकास आधारित क्षेत्रों में बना हुआ है। बाजार विश्लेषकों का मानना है कि मजबूत घरेलू आर्थिक संकेतक और निवेश गतिविधियां इन वर्गों को समर्थन प्रदान कर रही हैं। अमेरिका और ईरान के बीच संभावित शांति वार्ता रद्द होने की खबर ने वैश्विक वित्तीय बाजारों में भी सतर्कता बढ़ा दी। निवेशकों को आशंका है कि भू-राजनीतिक तनाव बढ़ने पर ऊर्जा कीमतों और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला पर असर पड़ सकता है। यही कारण है कि अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों का प्रभाव भारतीय बाजार पर भी स्पष्ट रूप से दिखाई दिया। विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले दिनों में निवेशकों की नजर वैश्विक राजनीतिक घटनाक्रम, मानसून की प्रगति, कॉर्पोरेट नतीजों और विदेशी निवेशकों की गतिविधियों पर बनी रहेगी। जब तक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्थिति स्पष्ट नहीं होती, तब तक बाजार में उतार-चढ़ाव और सतर्क कारोबार का माहौल जारी रह सकता है।
चातुर्मास 2026 बदलते समय में आंतरिक शांति और अनुशासन का मार्ग

नई दिल्ली । चातुर्मास हर वर्ष आने वाला वह विशेष काल माना जाता है जो आध्यात्मिक जीवन के साथ साथ मानसिक स्थिरता और आत्म अनुशासन को मजबूत करने का अवसर देता है। वर्ष 2026 में चातुर्मास 25 जुलाई से शुरू होकर 20 नवंबर तक रहेगा। यह समय केवल धार्मिक परंपराओं तक सीमित नहीं है बल्कि आधुनिक जीवन की भागदौड़ में ठहराव लाने और स्वयं के भीतर झांकने का एक महत्वपूर्ण माध्यम भी है। सनातन परंपरा के अनुसार आषाढ़ शुक्ल एकादशी से लेकर कार्तिक शुक्ल एकादशी तक का समय चातुर्मास कहलाता है। मान्यता है कि इस अवधि में भगवान विष्णु योग निद्रा में चले जाते हैं और साधु संत यात्राओं को सीमित कर एक स्थान पर साधना करते हैं। प्रकृति के दृष्टिकोण से यह समय वर्षा ऋतु का होता है जब वातावरण में आर्द्रता बढ़ जाती है और जीवन की गति कुछ धीमी हो जाती है। ऐसे में शरीर और मन दोनों को अधिक विश्राम और संतुलन की आवश्यकता होती है। वर्तमान समय में जीवन अत्यधिक तेज और तनावपूर्ण हो गया है। तकनीक की बढ़ती निर्भरता और आर्थिक दबाव ने मनुष्य को मानसिक रूप से अस्थिर बना दिया है। ऐसे में चातुर्मास एक ऐसा अवसर प्रदान करता है जिसमें व्यक्ति अपने जीवन की दिशा और उद्देश्य पर पुनर्विचार कर सकता है। यह समय आत्म चिंतन का है जिसमें व्यक्ति स्वयं से यह प्रश्न कर सकता है कि वह जो कर रहा है क्या उससे उसे वास्तविक संतोष प्राप्त हो रहा है। इस अवधि में सरल और सात्विक जीवन शैली अपनाने पर विशेष बल दिया जाता है। सुबह की शुरुआत शांत मन से करना और मोबाइल फोन से दूरी बनाए रखना मानसिक शांति को बढ़ाता है। ध्यान और प्रार्थना को दैनिक जीवन का हिस्सा बनाना चाहिए। कम से कम दस से पंद्रह मिनट का ध्यान मन को स्थिर करने में सहायक होता है। भोजन में सादगी रखना अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है। हल्का और सात्विक भोजन शरीर को स्वस्थ रखता है और मानसिक ऊर्जा को संतुलित करता है। इस दौरान गुरुवार और एकादशी जैसे विशेष दिनों पर उपवास रखने की परंपरा भी मन को संयमित करने का माध्यम बनती है। घर में शाम के समय दीपक जलाना और तुलसी को जल अर्पित करना सकारात्मक वातावरण का निर्माण करता है। पीपल के वृक्ष के नीचे दीपक जलाने की परंपरा प्रकृति से जुड़ाव को दर्शाती है। इस काल में संयम और अनुशासन का पालन विशेष रूप से आवश्यक माना गया है। कम बोलना अनावश्यक खर्च से बचना और क्रोध पर नियंत्रण रखना जीवन में संतुलन लाने में मदद करता है। चातुर्मास का सबसे बड़ा लाभ यह है कि यह व्यक्ति को मानसिक रूप से स्थिर बनाता है और जीवन में अनुशासन स्थापित करता है। इससे न केवल स्वास्थ्य में सुधार होता है बल्कि पारिवारिक और सामाजिक संबंध भी अधिक मधुर बनते हैं। मन की नकारात्मकता धीरे धीरे कम होने लगती है और व्यक्ति सकारात्मक सोच की ओर अग्रसर होता है। यह चार महीने का काल वास्तव में आत्म सुधार और आत्म विकास का अवसर है जिसमें व्यक्ति अपने भीतर छिपी शक्ति को पहचान सकता है और जीवन को एक नई दिशा दे सकता है।
शनिवार जन्मे बच्चों के लिए , चुनें शनि देव प्रेरित शक्तिशाली और अर्थपूर्ण नाम

नई दिल्ली । भारतीय संस्कृति में नामकरण को बहुत महत्वपूर्ण संस्कार माना गया है और इसे व्यक्ति के जीवन पर गहरा प्रभाव डालने वाला माना जाता है ऐसा विश्वास है कि सही नाम बच्चे के व्यक्तित्व को निखार सकता है और उसके जीवन में शुभ परिणाम ला सकता है शनिवार को जन्मे बच्चों के लिए विशेष रूप से शनि देव से जुड़े नामों को शुभ माना जाता है क्योंकि शनिवार का दिन न्याय के देवता शनि देव को समर्पित होता है शनि देव को कर्म फल दाता कहा जाता है और माना जाता है कि वे व्यक्ति को उसके कर्मों के अनुसार फल देते हैं इसलिए ऐसे नाम जो शनि देव की ऊर्जा और उनके गुणों से जुड़े हों उन्हें विशेष रूप से शुभ माना जाता है जिन बच्चों का जन्म शनिवार को होता है उनके स्वभाव में मेहनत अनुशासन और धैर्य जैसे गुण देखने को मिलते हैं ऐसे बच्चे धीरे धीरे लेकिन स्थिरता के साथ जीवन में आगे बढ़ते हैं और सफलता प्राप्त करते हैं शनिवार जन्मे बच्चे अक्सर आत्मनिर्भर होते हैं और अपने निर्णय स्वयं लेने की क्षमता रखते हैं वे कठिन परिस्थितियों में भी हार नहीं मानते और लगातार प्रयास करते रहते हैं उनके जीवन में शुरुआती समय में संघर्ष देखने को मिल सकता है लेकिन समय के साथ उनका भाग्य मजबूत होता जाता है और वे ऊंचे मुकाम तक पहुंचते हैं ऐसे बच्चों के लिए शनि देव से प्रेरित नाम रखना उनके जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और स्थिरता का प्रतीक माना जाता है छायापुत्र नाम शनि देव के माता छाया से संबंध को दर्शाता है और यह नाम दिव्यता का प्रतीक है शर्व नाम कल्याणकारी स्वरूप को दर्शाता है और यह नाम जीवन में शुभता लाने वाला माना जाता है महेश नाम महान ईश्वर का प्रतीक है जो शक्ति और आत्मविश्वास को दर्शाता है नीलवर्ण नाम शनि देव के नीले स्वरूप से जुड़ा है और यह गंभीरता और गहराई को दर्शाता है निश्चल नाम स्थिरता और अडिग स्वभाव का प्रतीक है जो जीवन में संतुलन लाता है विधिरूप नाम न्याय और सत्य के मार्ग को दर्शाता है वशी नाम आत्म नियंत्रण और संयम का प्रतीक है वरद नाम वरदान देने वाले स्वरूप को दर्शाता है और इसे अत्यंत शुभ माना जाता है अभयहस्त नाम निर्भयता का प्रतीक है और यह बच्चे को आत्मविश्वास से भरता है भानुपुत्र नाम सूर्य देव से संबंध को दर्शाता है और यह ऊर्जा और तेज का प्रतीक है भव्य नाम महानता और आकर्षण का प्रतीक है पावन नाम पवित्रता और शुद्धता को दर्शाता है धनद नाम समृद्धि और धन का प्रतीक है शुभप्रद नाम जीवन में शुभ फल देने वाला माना जाता है ऐसे नाम न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण होते हैं बल्कि यह बच्चे के व्यक्तित्व को भी सकारात्मक दिशा देते हैं माता पिता यदि अपने बच्चे के लिए ऐसा नाम चुनते हैं तो यह माना जाता है कि उनके जीवन में स्थिरता सफलता और सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है शनि देव की कृपा से ऐसे बच्चे अपने जीवन में धीरे धीरे लेकिन निश्चित रूप से ऊंचाइयों को प्राप्त करते हैं और समाज में अपनी अलग पहचान बनाते हैं
वास्तु शास्त्र के अनुसार घर में लगाएं ये लकी पौधे, दूर होगी नकारात्मकता और आएगी समृद्धि

नई दिल्ली । वास्तु शास्त्र में प्रकृति और ऊर्जा के संतुलन को अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है और पौधों को घर में सकारात्मक ऊर्जा का प्रमुख स्रोत बताया गया है ऐसा माना जाता है कि यदि सही पौधों का चयन कर उन्हें उचित दिशा में रखा जाए तो घर का वातावरण न केवल शुद्ध होता है बल्कि सुख समृद्धि और मानसिक शांति भी बढ़ती है पौधे वातावरण से नकारात्मक ऊर्जा को सोखकर सकारात्मकता का संचार करते हैं जिससे परिवार के सदस्यों के जीवन में संतुलन और खुशहाली बनी रहती है वास्तु के अनुसार हर दिशा का अपना एक विशेष महत्व होता है उत्तर और पूर्व दिशा को सबसे अधिक शुभ माना जाता है क्योंकि इन दिशाओं से सूर्य की सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह होता है इन दिशाओं में लगाए गए पौधे घर में प्रगति और आर्थिक समृद्धि को बढ़ाते हैं वहीं दक्षिण और पश्चिम दिशा में विशेष सावधानी बरतनी चाहिए क्योंकि यहां ऊर्जा का संतुलन अलग होता है हालांकि कुछ पौधे जैसे कैक्टस इन दिशाओं में नकारात्मक ऊर्जा को नियंत्रित करने में सहायक माने जाते हैं ईशान कोण यानी उत्तर पूर्व दिशा को सबसे पवित्र माना गया है और यहां तुलसी का पौधा लगाना अत्यंत शुभ होता है तुलसी न केवल वातावरण को शुद्ध करती है बल्कि घर में आध्यात्मिक ऊर्जा और मानसिक शांति भी प्रदान करती है यह पौधा स्वास्थ्य और सकारात्मकता का प्रतीक माना जाता है मनी प्लांट को धन और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है इसे घर के दक्षिण पूर्व यानी आग्नेय कोण में रखने से आर्थिक स्थिति मजबूत होती है और आय के नए स्रोत बनने की संभावना बढ़ती है एरेका पाम एक ऐसा पौधा है जो हवा को शुद्ध करता है और घर के वातावरण को ताजगी प्रदान करता है इसे पूर्व या दक्षिण पूर्व दिशा में रखना शुभ माना जाता है बैम्बू यानी बांस का पौधा भी वास्तु में बहुत शुभ माना जाता है यह सौभाग्य और अच्छे भाग्य का प्रतीक है इसे घर के अंदर पूर्व दिशा में रखने से सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बढ़ता है जेड प्लांट को धन और सफलता आकर्षित करने वाला पौधा माना जाता है इसे घर के प्रवेश द्वार के पास या पूर्व दिशा में रखना अत्यंत लाभकारी माना जाता है स्नेक प्लांट न केवल हवा को शुद्ध करता है बल्कि नकारात्मक ऊर्जा को भी दूर करता है इसे दक्षिण पूर्व दिशा में रखना अच्छा माना जाता है वास्तु शास्त्र में कुछ पौधों को घर में लगाने से मना किया गया है जैसे बोनसाई पौधा जिसे विकास में रुकावट का प्रतीक माना जाता है और इसे घर में नहीं रखना चाहिए इसी प्रकार कांटेदार पौधे जैसे कैक्टस घर में तनाव और नकारात्मकता बढ़ा सकते हैं इन्हें घर के अंदर लगाने से बचना चाहिए इमली और बेर के पेड़ भी घर के आंगन में शुभ नहीं माने जाते वहीं बबूल कपास और रेशम के पेड़ को आर्थिक और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से जोड़ा जाता है इसलिए इन्हें घर में लगाने से परहेज करना चाहिए यदि इन वास्तु नियमों का पालन करते हुए पौधों का चयन और उनकी सही दिशा का ध्यान रखा जाए तो घर में सुख शांति समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बढ़ता है और जीवन में स्थिरता और खुशहाली बनी रहती है
शुजालपुर-पचोर मार्ग पर भीषण सड़क हादसा: स्कॉर्पियो-बाइक की टक्कर में चार गंभीर घायल, एंबुलेंस न मिलने से बढ़ी परेशानी

मध्यप्रदेश । शुजालपुर-पचोर मार्ग पर शुक्रवार को एक दर्दनाक सड़क हादसे ने लोगों को झकझोर दिया। तलेन क्षेत्र में स्कॉर्पियो और बाइक की आमने-सामने हुई जोरदार भिड़ंत में एक ही परिवार के तीन सदस्यों सहित चार लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। दुर्घटना इतनी भीषण थी कि टक्कर के बाद बाइक सवार सड़क पर गिर पड़े और उन्हें गंभीर चोटें आईं। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और घायलों को तत्काल शुजालपुर सिविल अस्पताल पहुंचाया गया। पुलिस के अनुसार हादसे में बाइक सवार हनीफ खान (50), आयशा बी (40) और मुमताज बी (45) गंभीर रूप से घायल हुए हैं। वहीं स्कॉर्पियो चालक गोकुल लोधा को भी चोटें आई हैं। दुर्घटना के बाद घटनास्थल पर लोगों की भीड़ जमा हो गई और राहत कार्य शुरू किया गया। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक टक्कर इतनी जोरदार थी कि बाइक पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई। घायलों में एक महिला का हाथ बुरी तरह जख्मी हो गया, जबकि एक पुरुष का पैर कई जगह से टूट गया। अस्पताल में डॉक्टरों ने प्राथमिक उपचार के बाद सभी घायलों की गंभीर स्थिति को देखते हुए उन्हें बेहतर इलाज के लिए बड़े अस्पताल में रेफर कर दिया। हालांकि, हादसे के बाद एक और बड़ी समस्या सामने आई। गंभीर रूप से घायल मरीजों को दूसरे अस्पताल पहुंचाने के लिए एंबुलेंस की आवश्यकता थी, लेकिन शुजालपुर सिविल अस्पताल से यह सुविधा उपलब्ध नहीं हो सकी। परिजन घंटों तक वाहन की व्यवस्था करने के लिए भटकते रहे। स्थिति इतनी गंभीर थी कि कई ऑटो चालकों ने भी मरीजों को ले जाने से इनकार कर दिया। आखिरकार परिजनों ने निजी साधनों की व्यवस्था कर घायलों को अन्य अस्पतालों तक पहुंचाया। स्थानीय लोगों का कहना है कि शुजालपुर सिविल अस्पताल की दोनों एंबुलेंस लंबे समय से खराब पड़ी हैं। ऐसे में गंभीर मरीजों को रेफर किए जाने पर तत्काल परिवहन सुविधा नहीं मिल पाती, जिससे मरीजों और उनके परिजनों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। लोगों ने स्वास्थ्य विभाग से एंबुलेंस व्यवस्था को जल्द दुरुस्त करने की मांग की है। पुलिस अधिकारी के.एल. यादव ने बताया कि सभी घायलों का उपचार कराया गया है। दुर्घटना का मामला दर्ज कर लिया गया है और हादसे के कारणों की जांच की जा रही है। पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि दुर्घटना तेज रफ्तार, लापरवाही या अन्य किसी कारण से हुई।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु का प्रेरक जीवन सफर: आदिवासी गांव से देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद तक पहुंचने की अद्भुत कहानी

नई दिल्ली । देश की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु 20 जून को अपना 68वां जन्मदिन मनाने जा रही हैं। उनका जीवन संघर्ष, आत्मविश्वास, धैर्य और निरंतर आगे बढ़ने की प्रेरणा का प्रतीक माना जाता है। ओडिशा के एक छोटे से आदिवासी गांव से निकलकर देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद तक पहुंचने का उनका सफर भारतीय लोकतंत्र की शक्ति और अवसरों की व्यापकता को दर्शाता है। आज वह न केवल आदिवासी समाज बल्कि पूरे देश के लिए प्रेरणास्रोत के रूप में देखी जाती हैं। द्रौपदी मुर्मु का जन्म 20 जून 1958 को ओडिशा के मयूरभंज जिले के उपरबेड़ा गांव में एक संथाल आदिवासी परिवार में हुआ था। सीमित संसाधनों और ग्रामीण परिवेश में पली-बढ़ीं मुर्मु ने शुरुआती शिक्षा गांव में ही प्राप्त की। उच्च शिक्षा हासिल करने के लिए उन्होंने अनेक सामाजिक और आर्थिक चुनौतियों का सामना किया। वह अपने गांव से उच्च शिक्षा प्राप्त करने वाली पहली छात्राओं में शामिल रहीं। उन्होंने भुवनेश्वर के प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थान से राजनीति विज्ञान और अर्थशास्त्र में स्नातक की पढ़ाई पूरी की। शिक्षा पूरी करने के बाद उन्होंने सार्वजनिक जीवन की ओर कदम बढ़ाया। उनका राजनीतिक सफर स्थानीय निकाय स्तर से शुरू हुआ। वर्ष 1997 में उन्होंने नगर पंचायत पार्षद के रूप में राजनीति में प्रवेश किया। इसके बाद उन्होंने लगातार जनसेवा के माध्यम से अपनी पहचान मजबूत की। ओडिशा विधानसभा में विधायक के रूप में चुने जाने के बाद उन्होंने राज्य सरकार में विभिन्न विभागों की जिम्मेदारी संभाली और प्रशासनिक क्षमता का परिचय दिया। राजनीतिक उपलब्धियों के साथ-साथ उनका निजी जीवन अत्यंत कठिन परिस्थितियों से गुजरा। कुछ वर्षों के भीतर उन्होंने अपने दोनों बेटों, मां, भाई और पति को खो दिया। लगातार मिले इन व्यक्तिगत आघातों ने उनके जीवन को गहराई से प्रभावित किया। इन परिस्थितियों में सामान्य व्यक्ति टूट सकता था, लेकिन उन्होंने आध्यात्म और आत्मबल के सहारे खुद को संभाला। कठिन समय में उन्होंने मानसिक मजबूती बनाए रखी और समाज सेवा के अपने संकल्प को कमजोर नहीं होने दिया। उनकी सार्वजनिक जीवन में सक्रियता और संगठनात्मक क्षमता ने उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई। भाजपा संगठन में विभिन्न जिम्मेदारियां निभाने के बाद उन्हें वर्ष 2015 में झारखंड का राज्यपाल नियुक्त किया गया। इस पद पर पहुंचने वाली वह देश की पहली आदिवासी महिला बनीं। राज्यपाल के रूप में उनके कार्यकाल को संवैधानिक मर्यादा, संतुलित प्रशासन और जनसरोकारों के प्रति संवेदनशील दृष्टिकोण के लिए याद किया जाता है। इसके बाद वर्ष 2022 में उन्होंने भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में नया अध्याय लिखा, जब उन्हें देश का राष्ट्रपति चुना गया। वह भारत की पहली आदिवासी महिला राष्ट्रपति और देश की सबसे युवा राष्ट्रपतियों में से एक बनीं। उनके निर्वाचन को सामाजिक समावेशन, लोकतांत्रिक प्रतिनिधित्व और वंचित वर्गों की बढ़ती भागीदारी का महत्वपूर्ण प्रतीक माना गया। राष्ट्रपति के रूप में द्रौपदी मुर्मु लगातार भारतीय संस्कृति, आदिवासी विरासत, शिक्षा, महिला सशक्तिकरण और सामाजिक समरसता को बढ़ावा देने पर जोर देती रही हैं। उन्होंने राष्ट्रपति भवन को आम जनता, विशेषकर युवाओं और दिव्यांगजनों के लिए अधिक सुलभ बनाने की दिशा में भी कई पहल की हैं। उनका जीवन इस बात का उदाहरण है कि कठिन से कठिन परिस्थितियां भी दृढ़ इच्छाशक्ति, सकारात्मक सोच और निरंतर प्रयास के सामने टिक नहीं सकतीं। यही कारण है कि आज द्रौपदी मुर्मु करोड़ों भारतीयों के लिए संघर्ष से सफलता तक की जीवंत प्रेरणा बन चुकी हैं।
राष्ट्रीय कार्यसमिति में शामिल होने के महज 7 दिन बाद ज्योतिप्रिय मलिक का इस्तीफा, TMC के भीतर बढ़ीं राजनीतिक अटकलें

नई दिल्ली । पश्चिम बंगाल की राजनीति में उस समय नई हलचल पैदा हो गई जब तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री ज्योतिप्रिय मलिक ने पार्टी के सभी संगठनात्मक पदों से इस्तीफा देने का फैसला कर लिया। यह निर्णय इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि उन्हें हाल ही में पार्टी की राष्ट्रीय कार्यसमिति में शामिल किया गया था। राष्ट्रीय स्तर की जिम्मेदारी मिलने के कुछ ही दिनों बाद संगठनात्मक पदों से दूरी बनाने के उनके फैसले ने राजनीतिक गलियारों में कई तरह की चर्चाओं को जन्म दे दिया है। ज्योतिप्रिय मलिक ने अपने इस्तीफे के पीछे स्वास्थ्य संबंधी कारणों को मुख्य वजह बताया है। उन्होंने कहा कि लंबे समय से स्वास्थ्य समस्याओं का सामना कर रहे हैं और चिकित्सकों ने उन्हें सक्रिय राजनीतिक और संगठनात्मक गतिविधियों से दूरी बनाए रखने की सलाह दी है। उनका कहना है कि मौजूदा परिस्थितियों में पार्टी संगठन की जिम्मेदारियों का प्रभावी ढंग से निर्वहन करना उनके लिए संभव नहीं रह गया है। मलिक ने बताया कि वे लंबे समय से मधुमेह की बीमारी से जूझ रहे हैं। स्वास्थ्य संबंधी जटिलताओं के कारण उनकी किडनी भी प्रभावित हुई है, जिसके चलते नियमित चिकित्सा निगरानी और उपचार की आवश्यकता बनी हुई है। इसी कारण उन्होंने संगठनात्मक जिम्मेदारियों से मुक्त होने का निर्णय लिया ताकि स्वास्थ्य पर अधिक ध्यान दिया जा सके। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उनका पार्टी से वैचारिक संबंध और निष्ठा पहले की तरह बनी रहेगी। पश्चिम बंगाल की राजनीति में ज्योतिप्रिय मलिक का लंबा राजनीतिक अनुभव रहा है। उन्होंने विभिन्न विधानसभा क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व करते हुए राज्य की राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। संगठन और सरकार दोनों स्तरों पर सक्रिय रहने वाले नेताओं में उनकी पहचान रही है। लंबे समय तक विधायक रहने के साथ-साथ उन्होंने राज्य सरकार में महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारियां भी संभाली थीं। पिछले कुछ वर्षों में उनका नाम उस समय व्यापक चर्चा में आया था जब राशन वितरण से जुड़े कथित घोटाले की जांच के दौरान उन्हें गिरफ्तार किया गया था। गिरफ्तारी के बाद उन्होंने लंबा समय हिरासत और न्यायिक प्रक्रिया के बीच बिताया। बाद में उन्हें जमानत मिली और वे सक्रिय राजनीति में लौटे। हालांकि जमानत मिलने के बाद उन्हें सरकार में कोई नई प्रशासनिक जिम्मेदारी नहीं सौंपी गई थी। हाल ही में हुए विधानसभा चुनाव में उन्हें राजनीतिक झटका भी लगा, जब उन्हें अपने निर्वाचन क्षेत्र में हार का सामना करना पड़ा। इसके बावजूद पार्टी नेतृत्व ने उन पर भरोसा जताते हुए राष्ट्रीय कार्यसमिति में स्थान दिया था। यही कारण है कि कार्यसमिति में शामिल होने के कुछ दिनों के भीतर उनका इस्तीफा राजनीतिक विश्लेषकों के लिए चर्चा का विषय बन गया है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि मलिक का इस्तीफा फिलहाल स्वास्थ्य कारणों से जुड़ा निर्णय बताया जा रहा है, लेकिन इसका संगठनात्मक और राजनीतिक प्रभाव भी देखने को मिल सकता है। तृणमूल कांग्रेस के लिए यह एक ऐसे नेता का संगठनात्मक स्तर पर पीछे हटना है, जिसने लंबे समय तक पार्टी के विस्तार और चुनावी अभियानों में सक्रिय भूमिका निभाई है। फिलहाल पार्टी की ओर से इस इस्तीफे को व्यक्तिगत और स्वास्थ्य संबंधी निर्णय के रूप में देखा जा रहा है। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि ज्योतिप्रिय मलिक संगठनात्मक राजनीति से कितनी दूरी बनाए रखते हैं और भविष्य में उनकी राजनीतिक भूमिका किस दिशा में आगे बढ़ती है। पश्चिम बंगाल की राजनीति में उनके इस कदम पर सभी की नजर बनी हुई है।
आज का राशिफल 20 जून 2026: मकर राशि वालों को मिलेगी बड़ी सफलता, जानें सभी 12 राशियों का भविष्यफल

नई दिल्ली। 20 जून 2026, शनिवार का दिन ग्रह-नक्षत्रों की स्थिति के अनुसार कई राशियों के लिए नई संभावनाएं और अवसर लेकर आया है। कुछ जातकों को कार्यक्षेत्र में सफलता मिलेगी तो कुछ को आर्थिक मामलों में सतर्क रहने की जरूरत होगी। आइए जानते हैं सभी 12 राशियों का दैनिक राशिफल। मेष राशआज का दिन उत्साह और ऊर्जा से भरपूर रहेगा। कार्यक्षेत्र में नई जिम्मेदारियां मिल सकती हैं। परिवार के साथ समय बिताने का अवसर मिलेगा। आर्थिक स्थिति सामान्य रहेगी। वृषभ राशिधन संबंधी मामलों में लाभ के संकेत हैं। लंबे समय से अटके कार्य पूरे हो सकते हैं। किसी पुराने मित्र से मुलाकात मन को प्रसन्न करेगी। स्वास्थ्य पर ध्यान दें। मिथुन राशिनौकरी और व्यापार में सकारात्मक परिणाम मिल सकते हैं। किसी महत्वपूर्ण निर्णय में जल्दबाजी से बचें। परिवार का सहयोग मिलेगा और आत्मविश्वास बढ़ेगा। कर्क राशिआज भावनात्मक संतुलन बनाए रखने की जरूरत है। कार्यक्षेत्र में चुनौतियां आ सकती हैं, लेकिन धैर्य से समाधान मिलेगा। खर्चों पर नियंत्रण रखें। सिंह राशिकरियर में प्रगति के संकेत हैं। वरिष्ठ अधिकारियों का सहयोग मिलेगा। निवेश संबंधी मामलों में लाभ हो सकता है। सामाजिक प्रतिष्ठा बढ़ेगी। कन्या राशिआज का दिन मेहनत का फल दिलाने वाला रहेगा। नई योजनाओं पर काम शुरू कर सकते हैं। विद्यार्थियों के लिए समय अनुकूल है। स्वास्थ्य अच्छा रहेगा। तुला राशिपरिवार और रिश्तों में मधुरता बनी रहेगी। आर्थिक मामलों में सोच-समझकर निर्णय लें। यात्रा के योग बन सकते हैं। मन में सकारात्मकता बनी रहेगी। वृश्चिक राशिव्यापार में लाभ मिलने की संभावना है। कार्यक्षेत्र में आपकी मेहनत की सराहना होगी। किसी पुराने विवाद का समाधान निकल सकता है। धनु राशिआज का दिन मिश्रित परिणाम देने वाला रहेगा। किसी महत्वपूर्ण कार्य में देरी हो सकती है। धैर्य और संयम से काम लें। परिवार का सहयोग मिलेगा। मकर राशिमकर राशि के जातकों के लिए दिन बेहद शुभ रहने वाला है। लंबे समय से रुका हुआ कोई बड़ा काम पूरा हो सकता है। करियर और व्यवसाय में सफलता के संकेत हैं। आर्थिक लाभ मिलने की भी संभावना है। आत्मविश्वास बढ़ेगा और सम्मान में वृद्धि होगी। कुंभ राशिनई योजनाओं पर काम करने के लिए अच्छा समय है। नौकरीपेशा लोगों को लाभ मिल सकता है। मित्रों और सहयोगियों का सहयोग मिलेगा। स्वास्थ्य सामान्य रहेगा। मीन राशिरचनात्मक कार्यों में सफलता मिलेगी। परिवार के साथ सुखद समय व्यतीत होगा। आर्थिक मामलों में संतुलन बनाए रखें। किसी शुभ समाचार की प्राप्ति हो सकती है।
विधान परिषद चुनाव में NDA को झटका, कांग्रेस की रणनीति सफल; BJP ने बनाई जांच कमेटी, प्रदेश नेतृत्व दिल्ली तलब

नई दिल्ली । कर्नाटक विधान परिषद चुनाव के नतीजों ने राज्य की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है। चुनाव के दौरान कथित क्रॉस वोटिंग की घटनाओं ने भारतीय जनता पार्टी के भीतर गंभीर चिंताएं बढ़ा दी हैं। पार्टी नेतृत्व ने इस मामले को संगठनात्मक अनुशासन और राजनीतिक विश्वसनीयता से जुड़ा मुद्दा मानते हुए तत्काल जांच के आदेश दिए हैं। चुनाव परिणाम सामने आने के बाद भाजपा ने स्पष्ट संकेत दिया है कि पार्टी लाइन से हटकर मतदान करने वाले नेताओं और विधायकों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जा सकती है। कर्नाटक विधान परिषद चुनाव में कांग्रेस ने उल्लेखनीय प्रदर्शन करते हुए अपने सभी उम्मीदवारों को जीत दिलाने में सफलता हासिल की। वहीं भारतीय जनता पार्टी और उसके सहयोगी दल जनता दल (सेक्युलर) को अपेक्षित परिणाम नहीं मिल सके। चुनावी गणित के आधार पर जिस प्रकार के परिणामों की संभावना जताई जा रही थी, उससे अलग तस्वीर सामने आने के बाद राजनीतिक गलियारों में क्रॉस वोटिंग की चर्चा तेज हो गई। चुनाव परिणामों के विश्लेषण के दौरान यह बात सामने आई कि कुछ विधायकों ने पार्टी के आधिकारिक उम्मीदवारों के बजाय अन्य दलों के उम्मीदवारों को समर्थन दिया हो सकता है। इसी आशंका को ध्यान में रखते हुए भाजपा नेतृत्व ने पूरे मामले की आंतरिक जांच कराने का निर्णय लिया है। पार्टी का मानना है कि यदि संगठन के भीतर अनुशासनहीनता या राजनीतिक विश्वासघात की कोई घटना हुई है, तो उसकी पूरी सच्चाई सामने आना आवश्यक है। भाजपा द्वारा गठित तीन सदस्यीय समिति को पूरे घटनाक्रम की विस्तार से समीक्षा करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। समिति चुनावी मतदान के पैटर्न, विधायकों की भूमिका और संभावित क्रॉस वोटिंग से जुड़े सभी तथ्यों का अध्ययन करेगी। जांच टीम को निर्धारित समय सीमा के भीतर अपनी रिपोर्ट पार्टी नेतृत्व को सौंपने के निर्देश दिए गए हैं ताकि आवश्यक कार्रवाई पर निर्णय लिया जा सके। इस घटनाक्रम के बाद भाजपा के राष्ट्रीय नेतृत्व ने भी सक्रियता बढ़ा दी है। पार्टी के शीर्ष नेताओं ने राज्य इकाई से विस्तृत जानकारी मांगी है। इसी क्रम में प्रदेश नेतृत्व और वरिष्ठ पदाधिकारियों को राष्ट्रीय राजधानी बुलाया गया है, जहां चुनावी परिणामों और संगठनात्मक स्थिति पर व्यापक चर्चा की जाएगी। माना जा रहा है कि बैठक में भविष्य की रणनीति और अनुशासनात्मक कदमों पर भी विचार किया जाएगा। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि क्रॉस वोटिंग जैसी घटनाएं केवल चुनावी हार-जीत तक सीमित नहीं रहतीं, बल्कि संगठन की आंतरिक एकजुटता और नेतृत्व की पकड़ को भी प्रभावित करती हैं। ऐसे मामलों में राजनीतिक दल आमतौर पर कड़ा रुख अपनाते हैं ताकि भविष्य में इस प्रकार की परिस्थितियों को रोका जा सके। भाजपा भी इसी दिशा में सक्रिय दिखाई दे रही है। प्रदेश भाजपा नेतृत्व ने स्पष्ट किया है कि पार्टी अनुशासन सर्वोपरि है और किसी भी स्तर पर अनुशासनहीनता को स्वीकार नहीं किया जाएगा। पार्टी नेताओं का कहना है कि जांच रिपोर्ट आने के बाद यदि किसी विधायक या पदाधिकारी की भूमिका संदिग्ध पाई जाती है, तो उसके खिलाफ संगठनात्मक नियमों के अनुसार कार्रवाई की जाएगी। कर्नाटक विधान परिषद चुनाव के बाद शुरू हुआ यह विवाद अब केवल चुनावी परिणामों तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि राज्य की राजनीति और भाजपा संगठन के लिए एक महत्वपूर्ण परीक्षा बन गया है। आने वाले दिनों में जांच समिति की रिपोर्ट और पार्टी नेतृत्व के फैसलों पर राजनीतिक हलकों की नजर बनी रहेगी।
शिवपुरी में मानसून की देरी से बढ़ी किसानों की चिंता: 10 दिन पिछड़ी टमाटर रोपाई, खराब हो सकती है तैयार पौध

मध्यप्रदेश । शिवपुरी जिले में मानसून की देरी किसानों के लिए चिंता का बड़ा कारण बनती जा रही है। समय पर बारिश नहीं होने से खरीफ सीजन की तैयारियां प्रभावित हो रही हैं और खेतों में बुवाई तथा रोपाई का काम ठप पड़ा हुआ है। प्रदेश के प्रमुख टमाटर उत्पादक क्षेत्रों में शामिल शिवपुरी में इस बार टमाटर की रोपाई सामान्य समय से 10 दिन से अधिक पीछे चल रही है। किसानों ने खेत और पौध दोनों तैयार कर लिए हैं, लेकिन पर्याप्त बारिश नहीं होने के कारण खेती का काम आगे नहीं बढ़ पा रहा है। जिले के कई गांवों में किसानों ने मौसम के पूर्वानुमान को देखते हुए पहले ही टमाटर की पौध तैयार कर ली थी। अधिकांश किसानों ने पौध को खेतों तक भी पहुंचा दिया है, लेकिन मिट्टी में नमी की कमी के कारण रोपाई शुरू नहीं हो पा रही है। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि सूखी जमीन में रोपाई करने से पौध के खराब होने का खतरा रहता है, इसलिए किसान जोखिम लेने से बच रहे हैं। सामान्य परिस्थितियों में जून के मध्य तक टमाटर की रोपाई का काम शुरू हो जाता है, लेकिन इस बार मानसून की देरी ने पूरे कृषि चक्र को प्रभावित कर दिया है। किसान लगातार आसमान की ओर निगाहें टिकाए हुए हैं और अच्छी बारिश का इंतजार कर रहे हैं। किसानों का कहना है कि यदि अगले 10 दिनों के भीतर पर्याप्त बारिश नहीं हुई तो तैयार पौध जरूरत से अधिक बड़ी हो जाएगी। ऐसी स्थिति में पौध की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है और खेत में लगाने के बाद उसकी वृद्धि तथा उत्पादन क्षमता पर भी नकारात्मक असर पड़ सकता है। इससे टमाटर की पैदावार घटने की आशंका बढ़ जाएगी। किसान अशोक कुशवाह का कहना है कि यदि बारिश में और देरी हुई तो वर्तमान पौध अनुपयोगी हो सकती है। ऐसी स्थिति में किसानों को नई पौध खरीदकर दोबारा रोपाई करनी पड़ेगी। इससे खेती की लागत में काफी वृद्धि होगी और आर्थिक नुकसान भी उठाना पड़ सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार किसानों ने बीज, पौध तैयार करने, खेत की तैयारी, मजदूरी और सिंचाई पर पहले ही खर्च कर दिया है। यदि तैयार पौध खराब होती है तो दोबारा निवेश करना पड़ेगा, जिससे किसानों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ बढ़ेगा। शिवपुरी जिले की कृषि अर्थव्यवस्था में टमाटर उत्पादन की महत्वपूर्ण भूमिका है। यहां उत्पादित टमाटर मध्य प्रदेश के अलावा देश के कई अन्य राज्यों में भी भेजे जाते हैं। ऐसे में रोपाई में देरी का सीधा असर किसानों की आय और बाजार आपूर्ति पर पड़ सकता है। केवल टमाटर ही नहीं, बल्कि सोयाबीन, मक्का और अन्य खरीफ फसलों की बुवाई भी बारिश की कमी से प्रभावित हो रही है। किसानों का कहना है कि यदि अगले कुछ दिनों में मानसून सक्रिय हो जाता है तो खेती का काम पटरी पर लौट सकता है, लेकिन 10 से 15 दिन की अतिरिक्त देरी उत्पादन को प्रभावित कर सकती है। मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार इस वर्ष मध्य प्रदेश में मानसून की रफ्तार सामान्य से धीमी रही है। जहां आमतौर पर 15 से 16 जून तक प्रदेश में मानसून सक्रिय हो जाता है, वहीं इस बार इसकी प्रगति धीमी बनी हुई है। मौसम विशेषज्ञों का अनुमान है कि 25 जून के आसपास मानसून प्रदेश में सक्रिय हो सकता है। मौसम केंद्र भोपाल के अनुसार 1 जून से अब तक प्रदेश में सामान्य से 39 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है। इसका असर विशेष रूप से कृषि क्षेत्र में दिखाई देने लगा है। ऐसे में शिवपुरी सहित पूरे क्षेत्र के किसानों की उम्मीदें अब आगामी बारिश पर टिकी हुई हैं। यदि जल्द अच्छी वर्षा होती है तो खेती की रफ्तार फिर से बढ़ सकती है, अन्यथा किसानों को उत्पादन और आय दोनों स्तरों पर नुकसान का सामना करना पड़ सकता है।