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शिवपुरी में डीएपी खाद की बड़ी खेप जब्त: 79 बोरी अवैध परिवहन करते पकड़े गए दो आरोपी, FIR दर्ज

मध्‍यप्रदेश । शिवपुरी जिले में कृषि विभाग, राजस्व विभाग और पुलिस की संयुक्त टीम ने डीएपी खाद के अवैध परिवहन के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए 79 बोरी खाद जब्त की है। कार्रवाई के दौरान दो व्यक्तियों को बिना वैध दस्तावेजों के खाद का परिवहन करते हुए पकड़ा गया। मामले में कृषि विभाग की शिकायत पर कोतवाली थाना पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। जानकारी के अनुसार, जिले में उर्वरकों की कालाबाजारी और अवैध परिवहन पर रोक लगाने के लिए प्रशासन लगातार निगरानी अभियान चला रहा है। इसी क्रम में तहसीलदार सिद्धार्थ शर्मा के निर्देश पर कृषि, राजस्व और पुलिस विभाग की संयुक्त टीम ने फतेहपुर रोड स्थित गीता पब्लिक स्कूल के समीप विशेष जांच अभियान चलाया। रात करीब 9:15 बजे टीम ने संदिग्ध वाहनों की जांच शुरू की। जांच के दौरान ग्राम बलेरा निवासी राजेश यादव के मैसी ट्रैक्टर को रोका गया। तलाशी लेने पर ट्रैक्टर में आईपीएल कंपनी की डीएपी खाद की 47 बोरियां मिलीं। इसके बाद टीम ने भोगरीपुरा निवासी अभिषेक रावत के महिंद्रा पिकअप वाहन की जांच की, जिसमें 32 बोरियां डीएपी खाद बरामद हुईं। दोनों वाहनों से कुल 79 बोरी खाद जब्त की गई। अधिकारियों ने मौके पर दोनों आरोपियों से खाद खरीदने और परिवहन करने से संबंधित बिल, रसीद, ई-टोकन अथवा अन्य वैध दस्तावेज प्रस्तुत करने को कहा। हालांकि, दोनों ही व्यक्ति कोई दस्तावेज नहीं दिखा सके। पूछताछ में उन्होंने दावा किया कि खाद किसी किसान से खरीदी गई है, लेकिन इस संबंध में भी कोई प्रमाण प्रस्तुत नहीं कर पाए। प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार, इतनी बड़ी मात्रा में उर्वरक का बिना दस्तावेज परिवहन गंभीर अनियमितता की श्रेणी में आता है। कृषि विभाग की टीम ने मौके पर पंचनामा तैयार किया और खाद के नमूने भी लिए। इसके बाद पूरी खेप को पुलिस के सुपुर्द कर दिया गया। कृषि विभाग का कहना है कि बिना वैध दस्तावेजों के उर्वरक का भंडारण, परिवहन अथवा बिक्री करना उर्वरक (नियंत्रण) आदेश, 1985 के प्रावधानों का उल्लंघन है। साथ ही यह आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 के तहत दंडनीय अपराध भी माना जाता है। ऐसे मामलों में दोषी पाए जाने पर कठोर कानूनी कार्रवाई का प्रावधान है। वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी द्वारा दी गई शिकायत के आधार पर कोतवाली थाना पुलिस ने राजेश यादव और अभिषेक रावत के खिलाफ उर्वरक (नियंत्रण) आदेश, 1985 तथा आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 की धारा 3/7 के तहत मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि खाद कहां से लाई गई थी और इसे किस उद्देश्य से ले जाया जा रहा था। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि किसानों के लिए निर्धारित उर्वरकों की कालाबाजारी और अवैध परिवहन को किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा तथा भविष्य में भी ऐसे अभियान जारी रहेंगे।

अहमदाबाद विमान हादसे पर नया मोड़: पायलट की गलती नहीं, 4 सेकेंड में आई विद्युत विफलता बनी वजह? पायलट संगठन का बड़ा दावा

नई दिल्ली । अहमदाबाद में हुए भीषण विमान हादसे को लेकर एक बार फिर बहस तेज हो गई है। दुर्घटना के कारणों पर चल रही जांच के बीच पायलटों के एक प्रमुख संगठन ने आधिकारिक अंतरिम निष्कर्षों पर सवाल उठाते हुए नई तकनीकी जानकारी सामने रखी है। संगठन का दावा है कि उपलब्ध सिम्युलेटर परीक्षण और तकनीकी विश्लेषण इस संभावना की ओर संकेत करते हैं कि दुर्घटना की मुख्य वजह किसी पायलट की जानबूझकर की गई कार्रवाई नहीं, बल्कि विमान में उत्पन्न हुई गंभीर विद्युत प्रणाली की विफलता हो सकती है। विमान दुर्घटना के बाद जारी अंतरिम जांच निष्कर्षों में यह संकेत दिया गया था कि इंजन को मिलने वाली ईंधन आपूर्ति बंद होने के कारण विमान की शक्ति प्रणाली प्रभावित हुई और कुछ ही सेकेंड के भीतर स्थिति नियंत्रण से बाहर हो गई। हालांकि अब पायलट संगठन ने इस निष्कर्ष को चुनौती देते हुए कहा है कि उनके द्वारा कराए गए विस्तृत सिम्युलेटर परीक्षण आधिकारिक घटनाक्रम से मेल नहीं खाते। संगठन के अनुसार, दुर्घटना से पहले विमान के वजन, मौसम की स्थिति और अन्य परिचालन परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए सिम्युलेटर पर कई परीक्षण किए गए। इन परीक्षणों में यह पाया गया कि यदि ईंधन आपूर्ति को मैन्युअल रूप से बंद किया जाए तो बैकअप पावर सिस्टम को सक्रिय होने में आधिकारिक दावे की तुलना में काफी अधिक समय लगता है। संगठन का कहना है कि यह अंतर जांच की दिशा और निष्कर्षों पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है। तकनीकी विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी विमान में विद्युत प्रणाली की व्यापक विफलता अनेक अन्य प्रणालियों को भी प्रभावित कर सकती है। यदि उड़ान के महत्वपूर्ण चरण में अचानक बिजली आपूर्ति बाधित हो जाए तो इंजन नियंत्रण, संचार प्रणाली और अन्य सुरक्षा तंत्रों पर इसका असर पड़ सकता है। पायलट संगठन इसी संभावना की ओर संकेत करते हुए कह रहा है कि दुर्घटना की जड़ में कोई बड़ी तकनीकी खराबी हो सकती है, जिसकी गहन जांच आवश्यक है। दुर्घटना से जुड़े कुछ विवरणों का हवाला देते हुए संगठन ने यह भी दावा किया कि विमान में उड़ान के अंतिम क्षणों से पहले विद्युत असामान्यताओं के संकेत देखे गए थे। उनके अनुसार, उपलब्ध जानकारी इस बात की ओर इशारा करती है कि विमान में अचानक और व्यापक स्तर पर तकनीकी गड़बड़ी उत्पन्न हुई हो सकती है। यही कारण है कि संगठन ने जांच एजेंसियों से सभी तकनीकी पहलुओं की दोबारा निष्पक्ष समीक्षा करने की मांग की है। विमानन क्षेत्र के जानकारों का कहना है कि किसी भी बड़ी दुर्घटना की जांच में जल्दबाजी से निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होता। आधुनिक विमानों में हजारों तकनीकी पैरामीटर रिकॉर्ड होते हैं और अंतिम निष्कर्ष तक पहुंचने के लिए उड़ान डेटा, कॉकपिट रिकॉर्डिंग, रखरखाव इतिहास और तकनीकी परीक्षणों का व्यापक अध्ययन किया जाता है। इसलिए किसी भी वैकल्पिक तकनीकी संभावना को पूरी तरह खारिज करने से पहले उसका परीक्षण आवश्यक माना जाता है। इस बीच पायलट संगठन ने संबंधित तकनीकी आंकड़े और परीक्षण परिणाम विमान निर्माता तथा विमानन अधिकारियों को सौंपने का दावा किया है। साथ ही संगठन ने मांग की है कि दुर्घटना की अंतिम रिपोर्ट जारी करने से पहले सभी उपलब्ध साक्ष्यों और विशेषज्ञों की राय का स्वतंत्र मूल्यांकन कराया जाए। उनका कहना है कि पारदर्शी जांच न केवल दुर्घटना के वास्तविक कारणों को सामने लाने के लिए आवश्यक है, बल्कि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए भी महत्वपूर्ण होगी। अहमदाबाद विमान हादसे ने देश के नागरिक उड्डयन क्षेत्र को गहराई से प्रभावित किया था। अब जांच के इस नए मोड़ ने तकनीकी विशेषज्ञों, विमानन समुदाय और आम लोगों के बीच दुर्घटना के वास्तविक कारणों को लेकर नई चर्चा को जन्म दे दिया है। अंतिम निष्कर्ष आने तक इस मामले पर सभी की निगाहें बनी रहेंगी।

स्टेशन मास्टर बनेंगे हाईटेक, निर्णय क्षमता से लेकर यात्री सेवाओं तक होगा बड़ा बदलाव; अश्विनी वैष्णव ने दिए व्यापक सुधारों के संकेत

नई दिल्ली । भारतीय रेलवे में परिचालन दक्षता बढ़ाने और यात्रियों को बेहतर सेवाएं उपलब्ध कराने की दिशा में स्टेशन मास्टरों की भूमिका को और अधिक मजबूत बनाने की तैयारी शुरू हो गई है। रेलवे प्रशासन अब पारंपरिक प्रशिक्षण प्रणाली से आगे बढ़ते हुए आधुनिक तकनीकों के माध्यम से स्टेशन मास्टरों के कौशल विकास पर विशेष ध्यान केंद्रित कर रहा है। इसी क्रम में आयोजित एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में स्टेशन मास्टरों की कार्यक्षमता, प्रशिक्षण व्यवस्था और प्रशासनिक अधिकारों से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की गई। बैठक के दौरान रेलवे संचालन की बदलती जरूरतों और बढ़ती तकनीकी जटिलताओं को ध्यान में रखते हुए प्रशिक्षण प्रणाली को अधिक आधुनिक और व्यवहारिक बनाने पर जोर दिया गया। इसके लिए वर्चुअल रियलिटी, उन्नत सिमुलेटर और डिजिटल प्रशिक्षण मॉड्यूल जैसे आधुनिक साधनों को प्रशिक्षण प्रक्रिया में शामिल करने के प्रस्तावों पर विचार किया गया। माना जा रहा है कि इन तकनीकों के माध्यम से स्टेशन मास्टरों को वास्तविक परिस्थितियों जैसे अनुभव प्रदान किए जा सकेंगे, जिससे वे आपातकालीन स्थितियों और जटिल परिचालन चुनौतियों का अधिक प्रभावी ढंग से सामना कर सकेंगे। रेलवे नेटवर्क लगातार विस्तार कर रहा है और यात्री संख्या के साथ-साथ माल परिवहन गतिविधियों में भी वृद्धि हो रही है। ऐसे में स्टेशन मास्टरों की जिम्मेदारियां पहले की तुलना में कहीं अधिक व्यापक और चुनौतीपूर्ण हो गई हैं। इसी आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए प्रशिक्षण को केवल सैद्धांतिक स्तर तक सीमित रखने के बजाय व्यावहारिक और तकनीक आधारित बनाने की दिशा में पहल की जा रही है। समीक्षा बैठक में स्टेशन संचालन को डिजिटल बनाने से जुड़े कई महत्वपूर्ण विषयों पर भी चर्चा हुई। मोबाइल एप आधारित पेपरलेस वर्किंग सिस्टम और इंटीग्रेटेड स्टेशन मैनेजमेंट सिस्टम को लागू करने की संभावनाओं पर विचार किया गया। इन व्यवस्थाओं का उद्देश्य विभिन्न विभागों के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करना, कार्य प्रक्रियाओं को तेज बनाना तथा यात्रियों से जुड़ी शिकायतों और समस्याओं का समयबद्ध समाधान सुनिश्चित करना है। बैठक में स्टेशन मास्टरों को अधिक प्रशासनिक और परिचालन अधिकार प्रदान करने से संबंधित प्रस्तावों की भी समीक्षा की गई। रेलवे का मानना है कि स्थानीय स्तर पर त्वरित निर्णय लेने की क्षमता बढ़ने से यात्रियों को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी और छोटी-बड़ी समस्याओं का समाधान बिना अनावश्यक देरी के किया जा सकेगा। इसके अलावा स्टेशन की आधारभूत संरचना, कर्मचारी सुविधाओं, रेलवे कॉलोनियों और अन्य संबंधित व्यवस्थाओं की निगरानी भी अधिक प्रभावी ढंग से हो सकेगी। रेल मंत्रालय ने स्टेशन मास्टरों के कैरियर विकास और पदोन्नति के अवसरों को लेकर भी गंभीरता दिखाई है। चर्चा के दौरान इस बात पर बल दिया गया कि योग्य और अनुभवी अधिकारियों को प्रबंधन के उच्च पदों तक पहुंचने के पर्याप्त अवसर मिलने चाहिए। इससे कर्मचारियों में प्रेरणा बढ़ेगी और संगठनात्मक कार्य संस्कृति को भी मजबूती मिलेगी। उच्च यातायात वाले रेलखंडों और बहु-लाइन स्टेशनों पर अतिरिक्त स्टेशन मास्टरों की आवश्यकता का भी आकलन किया गया। बढ़ते रेल संचालन को देखते हुए कई स्थानों पर कार्यभार में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। ऐसे क्षेत्रों में अतिरिक्त मानव संसाधन उपलब्ध कराने तथा रिक्त पदों को शीघ्र भरने की आवश्यकता पर विशेष जोर दिया गया। इसके साथ ही स्टेशन मास्टरों के वित्तीय अधिकारों में वृद्धि, सुरक्षा उपकरणों के उन्नयन और कार्यस्थल को अधिक सुविधाजनक बनाने जैसे विषयों पर भी विचार-विमर्श हुआ। रेलवे प्रशासन का मानना है कि आधुनिक प्रशिक्षण, बेहतर तकनीकी संसाधन, बढ़े हुए अधिकार और उन्नत कार्य वातावरण स्टेशन मास्टरों को अधिक सक्षम बनाएंगे। इससे न केवल रेलवे संचालन की गुणवत्ता में सुधार होगा, बल्कि यात्रियों को भी अधिक सुरक्षित, सुगम और संतोषजनक सेवाएं प्राप्त होंगी। आने वाले समय में यह पहल भारतीय रेलवे के आधुनिकीकरण अभियान का एक महत्वपूर्ण आधार बन सकती है।

उत्कर्ष आत्महत्या केस में नया मोड़: पत्नी रिया समेत पांच लोगों पर FIR, जमानत के लिए फर्जी दस्तावेज पेश करने का आरोप

मध्‍यप्रदेश । शिवपुरी के बहुचर्चित उत्कर्ष शिवहरे आत्महत्या मामले में एक नया और महत्वपूर्ण मोड़ सामने आया है। आत्महत्या के लिए उकसाने के मामले की जांच के बीच अब पुलिस ने उत्कर्ष की पत्नी रिया शिवहरे समेत पांच लोगों के खिलाफ कथित फर्जी दस्तावेज तैयार कर न्यायालय में पेश करने के आरोप में नया प्रकरण दर्ज किया है। पुलिस का दावा है कि आरोपियों ने जमानत प्राप्त करने के उद्देश्य से न्यायालय को गुमराह करने की कोशिश की और इसके लिए कूटरचित दस्तावेजों का इस्तेमाल किया गया। जानकारी के अनुसार, उत्कर्ष शिवहरे ने अपनी शादी के लगभग एक वर्ष बाद 19 अप्रैल 2026 को आत्महत्या कर ली थी। इस घटना ने पूरे क्षेत्र में काफी चर्चा बटोरी थी। मामले की जांच के बाद फिजिकल थाना पुलिस ने उत्कर्ष की पत्नी रिया शिवहरे, उनके पिता जितेंद्र शिवहरे, भाई ध्रुव शिवहरे और अन्य के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने का मामला दर्ज किया था। यह प्रकरण अभी न्यायालय में विचाराधीन है। इसी दौरान आरोपियों की ओर से जमानत के लिए न्यायालय में एक आवेदन प्रस्तुत किया गया। आवेदन के साथ एक दस्तावेज भी संलग्न किया गया था, जिसमें दावा किया गया था कि घटना वाले दिन यानी 19 अप्रैल को सुबह 10:15 बजे रिया शिवहरे ने भोपाल के गौतम नगर थाने में ससुराल पक्ष द्वारा प्रताड़ित किए जाने की शिकायत दर्ज कराई थी। इस कथित शिकायत का उल्लेख जमानत आवेदन में भी प्रमुखता से किया गया था। मामले की सुनवाई के दौरान प्रस्तुत किए गए इस दस्तावेज की सत्यता को लेकर सवाल उठे, जिसके बाद इसकी जांच शुरू की गई। कोतवाली पुलिस ने भोपाल के गौतम नगर थाना पुलिस से संपर्क कर संबंधित रिकॉर्ड और जानकारी जुटाई। जांच में कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। पुलिस के अनुसार, जिस समय शिकायत दर्ज कराने का दावा किया गया था, उस समय रिया शिवहरे के थाने पहुंचने के कोई स्पष्ट साक्ष्य नहीं मिले। सीसीटीवी फुटेज की जांच में भी उनकी उपस्थिति की पुष्टि नहीं हो सकी। इसके अलावा पुलिस रिकॉर्ड और संबंधित अधिकारियों से प्राप्त जानकारी में भी कई तरह की विसंगतियां सामने आईं। प्रारंभिक जांच में यह आशंका व्यक्त की गई कि जमानत प्रक्रिया को प्रभावित करने के लिए कथित रूप से दस्तावेज तैयार किए गए और उन्हें न्यायालय में प्रस्तुत किया गया। जांच के आधार पर कोतवाली पुलिस ने गीता शिवहरे, रिया शिवहरे, जितेंद्र शिवहरे, ध्रुव शिवहरे और रियम शिवहरे के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की विभिन्न धाराओं के तहत नया मामला दर्ज किया है। पुलिस का कहना है कि पूरे घटनाक्रम की गहनता से जांच की जा रही है और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इस नए मामले के दर्ज होने के बाद उत्कर्ष शिवहरे आत्महत्या प्रकरण और अधिक संवेदनशील हो गया है। अब यह मामला केवल आत्महत्या के लिए उकसाने तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि न्यायालय में कथित रूप से फर्जी दस्तावेज पेश कर जमानत हासिल करने के आरोप भी इसमें जुड़ गए हैं। आने वाले दिनों में जांच के निष्कर्ष इस चर्चित मामले की दिशा तय कर सकते हैं।

शिवपुरी में तेज आंधी-बारिश का कहर: चार मकानों की टीन शेड उड़ीं, जान बचाने घरों से बाहर भागे लोग

मध्‍यप्रदेश । मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले में शुक्रवार को मौसम ने अचानक करवट ली और तेज आंधी के साथ हुई बारिश ने ग्रामीणों की मुश्किलें बढ़ा दीं। बदरवास थाना क्षेत्र के चितारा गांव में तेज हवाओं और बारिश के चलते चार मकानों की टीन शेड उड़ गईं। घटना के समय घरों में मौजूद लोगों को अपनी जान बचाने के लिए तुरंत बाहर निकलना पड़ा। राहत की बात यह रही कि इस हादसे में किसी प्रकार की जनहानि नहीं हुई, लेकिन प्रभावित परिवारों को भारी आर्थिक नुकसान झेलना पड़ा है। ग्रामीणों के अनुसार, दोपहर के समय अचानक मौसम बिगड़ गया। तेज हवाओं के साथ बारिश शुरू हुई और देखते ही देखते कई मकानों की टीन शेड हवा में उड़ गईं। चितारा गांव निवासी भरत जाटव के घर में उस समय उनका दिव्यांग भाई छोटू जाटव, पत्नी मायावती, मां श्रीयाबाई और चार बच्चे मौजूद थे। अचानक छत की टीन शेड उड़ने लगी तो परिवार में अफरा-तफरी मच गई। सभी लोग घबराकर घर से बाहर निकल आए और सुरक्षित स्थान पर शरण ली। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि तेज हवा की रफ्तार इतनी अधिक थी कि लोगों को कुछ समझने का मौका तक नहीं मिला। कुछ ही मिनटों में कई मकानों को नुकसान पहुंच गया। भरत जाटव के अलावा विजय जाटव, लखन जाटव और इमरत जाटव के मकानों की टीन शेड भी तेज आंधी में उड़ गईं। बारिश के कारण घरों में रखा घरेलू सामान, कपड़े और अनाज भी भीगकर खराब हो गया। इस प्राकृतिक आपदा का असर केवल मकानों तक ही सीमित नहीं रहा। विजय जाटव की मोटरसाइकिल पर टीन शेड का हिस्सा गिर गया, जिससे वाहन को भी नुकसान पहुंचा। ग्रामीणों का कहना है कि अचानक हुए इस नुकसान ने प्रभावित परिवारों की चिंताएं बढ़ा दी हैं, क्योंकि कई लोगों के लिए यह मकान और उसमें रखा सामान ही उनकी जीवनभर की पूंजी है। गांव के लोगों ने बताया कि आंधी और बारिश का असर इतना ज्यादा था कि कुछ समय के लिए पूरे इलाके में दहशत का माहौल बन गया। लोग अपने घरों से निकलकर खुले स्थानों की ओर भागने लगे। बच्चों और बुजुर्गों में डर का माहौल देखा गया। हालांकि मौसम सामान्य होने के बाद ग्रामीणों ने राहत की सांस ली। घटना के बाद प्रभावित परिवारों ने प्रशासन से नुकसान का सर्वे कराने और आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि जिन परिवारों की टीन शेड उड़ गई हैं, उन्हें तत्काल राहत की आवश्यकता है ताकि वे अपने घरों की मरम्मत कर सकें और सामान्य जीवन फिर से शुरू कर सकें।

होयसल राजवंश कालीन 1000 वर्ष पुराने मंदिर का रहस्य विज्ञान के लिए भी पहेली, दीपावली पर कपाट खुलने के बाद उमड़ती है लाखों श्रद्धालुओं की भारी भीड़

नई दिल्ली । भारत के प्राचीन और ऐतिहासिक देवस्थलों में छिपे रहस्य अक्सर आधुनिक विज्ञान और पुरातत्वविदों को हैरत में डाल देते हैं। ऐसा ही एक अविश्वसनीय और बेहद रहस्यमयी मामला दक्षिण भारत के कर्नाटक राज्य से सामने आया है, जहां हासन शहर में स्थित करीब 1000 साल पुराना ‘हसनंबा मंदिर’ अपने अनोखे चमत्कारों के लिए पूरी दुनिया में कौतूहल का विषय बना हुआ है। यह मंदिर आम धार्मिक स्थलों की तरह प्रतिदिन श्रद्धालुओं के लिए नहीं खुलता है, बल्कि इसकी सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसे वर्ष में केवल एक बार, दीपावली के पावन त्योहार के दौरान मात्र 10 से 12 दिनों के लिए ही खोला जाता है। शेष पूरे वर्ष इस मंदिर के भारी कपाट पूरी तरह से बंद और सील रहते हैं। इस प्राचीन मंदिर का इतिहास बेहद गौरवशाली है और इसका सीधा संबंध ऐतिहासिक होयसल राजवंश से जुड़ता है। मशहूर ऐतिहासिक दस्तावेजों के साथ-साथ मैसूर गजेटियर जैसी प्रामाणिक सरकारी किताबों में इस मंदिर के महात्म्य और राजाओं की अगाध श्रद्धा का विस्तृत विवरण मिलता है। होयसल शासकों के काल में निर्मित इस मंदिर की अद्भुत वास्तुकला और स्थापत्य शैली को देखकर आज भी पुरातत्व विभाग के विशेषज्ञ दांतों तले उंगली दबा लेते हैं। प्रामाणिक ऐतिहासिक कड़ियों और सरकारी गजेटियर में दर्ज होने के कारण इस मंदिर की साख और इसका ऐतिहासिक महत्व शोधकर्ताओं के बीच और अधिक बढ़ जाता है। मंदिर से जुड़ा सबसे बड़ा वैज्ञानिक सस्पेंस इसके गर्भगृह के भीतर घटित होने वाली वह घटना है, जो भौतिक विज्ञान के नियमों को सीधी चुनौती देती नजर आती है। दीपावली के उत्सव की समाप्ति के बाद जब इस मंदिर को आगामी एक वर्ष के लिए बंद किया जाता है, तब मुख्य पुजारी द्वारा गर्भगृह के भीतर एक विशेष अनुष्ठान संपन्न किया जाता है। मंदिर को अंतिम रूप से बंद करने से ठीक पहले माता हसनंबा की दिव्य मूर्ति के समक्ष घी का एक दीया प्रज्वलित करके रख दिया जाता है। इसके साथ ही देवी मां को ताजे पके हुए चावलों का नैवेद्य अर्पित किया जाता है और कुछ बेहद सुंदर ताजे फूल भी चरणों में चढ़ाए जाते हैं। इन सभी सामग्रियों को गर्भगृह के भीतर यथास्थान सजाकर मंदिर के मुख्य विशाल द्वारों को बंद कर दिया जाता है और प्रशासन व पुजारियों की मौजूदगी में उन्हें पूरी तरह सील कर दिया जाता है। इसके बाद ठीक एक साल बाद जब अगले वर्ष दीपावली के तय समय पर इस मंदिर को दोबारा खोला जाता है, तो भीतर का नजारा पुजारियों और वहां मौजूद अधिकारियों को स्तब्ध कर देता है। जब सील तोड़कर गर्भगृह का भारी दरवाजा खोला जाता है, तो वह दीया बिना किसी अतिरिक्त ईंधन या मानवीय सहायता के ठीक उसी प्रकार जलता हुआ प्राप्त होता है, जैसा उसे एक वर्ष पूर्व छोड़ कर जाया गया था। इस पूरी प्रक्रिया में सबसे ज्यादा चौंकाने वाली बात यह है कि मां को चढ़ाया गया पके हुए चावल का प्रसाद भीषण गर्मी और मौसम के बदलावों के बाद भी एक साल तक बिल्कुल ताजा बना रहता है। इस भोजन में से न तो किसी प्रकार की दुर्गंध आती है और न ही यह दूषित होता है। यही नहीं, माता के चरणों में अर्पित किए गए फूल भी एक वर्ष तक बिना पानी और हवा के वैसे ही खिले, महकते और ताजे दिखाई देते हैं। स्थानीय समाज और देश भर से आने वाले श्रद्धालु इसे हसनंबा देवी का साक्षात दिव्य चमत्कार मानते हैं। यही कारण है कि वर्ष के उन चुनिंदा 10-12 दिनों में इस अलौकिक दृश्य और माता के दर्शन के लिए देश-विदेश से लाखों श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ता है।

वर्ल्ड कप के बीच मेसी के पिता गंभीर रूप से बीमार, निधन की अफवाहों पर परिवार ने जारी किया कड़क बयान

नई दिल्ली । अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल जगत के सबसे बड़े मंच फीफा वर्ल्ड कप के रोमांच के बीच अर्जेंटीना के महान कप्तान और दिग्गज स्ट्राइकर लियोनेल मेसी के परिवार पर दुखों का बड़ा पहाड़ टूट पड़ा है। टूर्नामेंट के व्यस्त और उच्च दबाव वाले शेड्यूल के दौरान मेसी के परिवार ने उनके पिता जॉर्ज मेसी की गंभीर स्वास्थ्य स्थिति को लेकर एक महत्वपूर्ण आधिकारिक बयान जारी किया है। परिवार ने पुष्टि की है कि 68 वर्षीय जॉर्ज मेसी इस समय एक बेहद गंभीर और चुनौतीपूर्ण बीमारी का सामना कर रहे हैं, जिसके चलते उन्हें कड़े मेडिकल ऑब्जर्वेशन में रखा गया है। इस संवेदनशील खबर के सामने आने के बाद खेल प्रेमियों और मेसी के प्रशंसकों में गहरी चिंता की लहर दौड़ गई है। मेसी परिवार की ओर से जारी किए गए इस आधिकारिक पत्र में बताया गया है कि जॉर्ज मेसी इस समय एक बड़ी स्वास्थ्य संबंधी चुनौती से पूरी बहादुरी से लड़ रहे हैं। विशेषज्ञ डॉक्टरों के एक विशेष दल की सीधी निगरानी में उनका सघन उपचार किया जा रहा है। राहत की बात यह है कि चिकित्सीय प्रक्रिया के बीच उनकी सेहत में धीरे-धीरे सकारात्मक सुधार भी दर्ज किया जा रहा है। हालांकि, गोपनीयता बनाए रखने के उद्देश्य से परिवार ने वर्तमान में इस गंभीर बीमारी के सटीक स्वरूप या उसके नाम को लेकर किसी भी प्रकार की विस्तृत तकनीकी जानकारी को सार्वजनिक रूप से साझा नहीं करने का फैसला किया है। यह आधिकारिक वक्तव्य अर्जेंटीना और अंतरराष्ट्रीय मीडिया में जॉर्ज मेसी के अचानक निधन की भ्रामक और अनियंत्रित अफवाहें तेजी से फैलने के तुरंत बाद सामने आया है। सोशल मीडिया और कुछ अनधिकृत पोर्टल्स पर प्रसारित की जा रही इन झूठी खबरों ने विश्व कप में देश का प्रतिनिधित्व कर रहे कप्तान और उनके परिजनों को गहरी मानसिक पीड़ा पहुंचाई। स्थिति को बिगड़ते देख मेसी परिवार को स्वयं आगे आकर इन भ्रामक अटकलों का खंडन करना पड़ा। परिवार ने वैश्विक मीडिया और आम जनता से पुरजोर अपील करते हुए कहा है कि इस बेहद संवेदनशील समय में सभी को अपनी सामाजिक जिम्मेदारी, परम संयम और बुनियादी इंसानियत का परिचय देना चाहिए। जारी बयान में इस बात पर विशेष जोर दिया गया है कि किसी भी व्यक्ति के नाजुक स्वास्थ्य और उसके परिवार की आंतरिक मानसिक शांति को गैर-जिम्मेदाराना रिपोर्टिंग या सस्पेंस का जरिया नहीं बनाया जाना चाहिए। परिवार ने स्पष्ट चेतावनी भरे लहजे में कहा है कि जॉर्ज मेसी के स्वास्थ्य से जुड़ी कोई भी वास्तविक और प्रामाणिक प्रगति केवल और केवल परिवार द्वारा जारी किए जाने वाले आधिकारिक बुलेटिन के माध्यम से ही साझा की जाएगी। इसलिए बाहरी स्रोतों या अपुष्ट दावों पर किसी को भी विश्वास नहीं करना चाहिए। इससे पहले चालू वर्ल्ड कप के अपने शुरुआती मुकाबले में अर्जेंटीना की टीम ने अल्जीरिया पर 3-0 की एकतरफा और शानदार जीत दर्ज की थी। उस ऐतिहासिक मैच की समाप्ति के बाद स्वयं कप्तान लियोनेल मेसी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में इस बात को स्वीकार किया था कि वह अपनी निजी जिंदगी में एक बेहद कठिन और दर्दनाक दौर से गुजर रहे हैं। उस समय उन्होंने अपनी इस गहरी व्यक्तिगत परेशानी के मुख्य कारण का खुलासा तो नहीं किया था, लेकिन अब इस आधिकारिक बयान के आने के बाद यह पूरी तरह साफ हो चुका है कि मेसी मैदान पर अपनी राष्ट्रीय टीम की कप्तानी करने के साथ-साथ बैकग्राउंड में अपने पिता की नाजुक सेहत को लेकर कितने गहरे मानसिक तनाव और चिंता से घिरे हुए हैं।

महिला टी20 विश्व कप 2026: हेली मैथ्यूज और एलेने की घातक गेंदबाजी, वेस्टइंडीज ने स्कॉटलैंड को 7 रन से हराया

नई दिल्ली । महिला टी20 विश्व कप 2026 में वेस्टइंडीज ने अपना शानदार अभियान जारी रखते हुए स्कॉटलैंड को रोमांचक मुकाबले में 7 रन से हराकर महत्वपूर्ण जीत दर्ज की। इंग्लैंड के लीड्स स्थित हेडिंग्ले क्रिकेट स्टेडियम में खेले गए टूर्नामेंट के 12वें मुकाबले में कैरेबियाई टीम ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 20 ओवर में 153 रन बनाए, जिसके जवाब में स्कॉटलैंड की पूरी टीम 146 रन पर सिमट गई। 154 रनों के लक्ष्य का पीछा करने उतरी स्कॉटलैंड की शुरुआत बेहद सकारात्मक रही। डार्सी कार्टर और कैथरीन फ्रेजर ने पहले विकेट के लिए 51 रनों की मजबूत साझेदारी कर टीम को बेहतरीन शुरुआत दिलाई। दोनों बल्लेबाजों ने वेस्टइंडीज के गेंदबाजों पर दबाव बनाते हुए रन गति को बनाए रखा। हालांकि, कप्तान हेली मैथ्यूज ने कैथरीन फ्रेजर को 20 रन के निजी स्कोर पर आउट कर इस साझेदारी को तोड़ा और मैच का रुख बदल दिया। इसके बाद स्कॉटलैंड की बल्लेबाजी लड़खड़ा गई। कप्तान कैथरीन ब्राइस बिना खाता खोले पवेलियन लौट गईं, जबकि सारा ब्राइस केवल 4 रन और मेगन मैककोल 1 रन बनाकर आउट हो गईं। एक समय मजबूत स्थिति में दिख रही स्कॉटिश टीम लगातार विकेट गंवाने लगी। दूसरे छोर पर डार्सी कार्टर ने संघर्ष जारी रखा और 62 गेंदों में 59 रनों की शानदार पारी खेली। उन्होंने अपनी पारी में 8 आकर्षक चौके लगाए और टीम को जीत के करीब ले जाने की कोशिश की। अंतिम ओवरों में ऐल्सा लिस्टर ने भी 25 गेंदों में 33 रनों की तेजतर्रार पारी खेलकर मुकाबले को रोमांचक बना दिया, लेकिन वह टीम को जीत नहीं दिला सकीं। स्कॉटलैंड की हार का सबसे बड़ा कारण अंतिम ओवरों में बल्लेबाजी का बिखर जाना रहा। 18 ओवर के बाद टीम 5 विकेट पर 132 रन बनाकर मजबूत स्थिति में थी और जीत की प्रबल दावेदार लग रही थी, लेकिन इसके बाद उसने सिर्फ 14 रन जोड़कर अपने शेष पांच विकेट गंवा दिए। वेस्टइंडीज की अनुशासित गेंदबाजी ने मैच को पूरी तरह पलट दिया। गेंदबाजी में कप्तान हेली मैथ्यूज ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 19 रन देकर 3 विकेट झटके। वहीं आलिया एलेने ने बेहद किफायती गेंदबाजी करते हुए केवल 11 रन खर्च कर 3 महत्वपूर्ण विकेट अपने नाम किए। दोनों गेंदबाजों की घातक स्पेल ने स्कॉटलैंड के बल्लेबाजी क्रम को ध्वस्त कर दिया। इससे पहले वेस्टइंडीज की बल्लेबाजी की शुरुआत भी अच्छी नहीं रही थी। कियाना जोसेफ 13 रन और कप्तान हेली मैथ्यूज 14 रन बनाकर आउट हो गईं। डिएंड्रा डॉटिन ने 14 और जाहजारा क्लैक्सटन ने 16 रन बनाए। मध्यक्रम में शेमेन कैम्पबेल ने 36 रनों की महत्वपूर्ण पारी खेलकर टीम को संभाला। हालांकि मैच का सबसे बड़ा आकर्षण अनुभवी बल्लेबाज स्टेफनी टेलर की विस्फोटक बल्लेबाजी रही। टेलर ने महज 19 गेंदों में नाबाद 47 रन ठोककर टीम को मजबूत स्कोर तक पहुंचाया। उनकी पारी में 4 चौके और 3 शानदार छक्के शामिल रहे। टेलर की तेजतर्रार बल्लेबाजी और गेंदबाजों के दमदार प्रदर्शन ने वेस्टइंडीज को टूर्नामेंट की एक और महत्वपूर्ण जीत दिला दी।

फीफा विश्व कप 2026: स्विट्जरलैंड की दमदार जीत, बोस्निया-हर्जेगोविना को 4-1 से हराया

नई दिल्ली । फीफा विश्व कप 2026 में स्विट्जरलैंड ने अपने अभियान को मजबूती देते हुए ग्रुप बी के अहम मुकाबले में बोस्निया-हर्जेगोविना को 4-1 से हराकर नॉकआउट चरण की ओर मजबूत कदम बढ़ा दिए हैं। लॉस एंजिलिस स्टेडियम में खेले गए इस मुकाबले में पहले हाफ तक दोनों टीमों के बीच कड़ी टक्कर देखने को मिली, लेकिन दूसरे हाफ में स्विट्जरलैंड ने अपने आक्रामक खेल से मैच का पूरा रुख बदल दिया। मुकाबले की शुरुआत से ही दोनों टीमों ने संतुलित खेल दिखाया। स्विट्जरलैंड ने गेंद पर अधिक नियंत्रण रखते हुए लगातार हमले किए, लेकिन बोस्निया-हर्जेगोविना के डिफेंडरों ने मजबूती से मोर्चा संभाला। पहले 45 मिनट में दोनों टीमों को कुछ अच्छे मौके मिले, मगर कोई भी खिलाड़ी गोल करने में सफल नहीं हो सका। परिणामस्वरूप पहला हाफ बिना किसी गोल के समाप्त हुआ। दूसरे हाफ में स्विट्जरलैंड ने अपनी रणनीति में बदलाव किया और लगातार दबाव बनाना शुरू किया। इसका फायदा टीम को 74वें मिनट में मिला, जब युवा स्टार जोहान मंजाम्बी ने शानदार गोल दागकर स्विट्जरलैंड को 1-0 की बढ़त दिला दी। इस गोल के बाद मैच का पूरा नियंत्रण स्विस टीम के हाथों में आ गया। बोस्निया-हर्जेगोविना के लिए स्थिति तब और कठिन हो गई जब 80वें मिनट में डिफेंडर तारिक मुहरेमोविच को गंभीर फाउल के कारण सीधा रेड कार्ड दिखा दिया गया। एक खिलाड़ी कम होने के बाद टीम का संतुलन पूरी तरह बिगड़ गया और स्विट्जरलैंड ने इसका भरपूर फायदा उठाया। 84वें मिनट में रूबेन वर्गस ने शानदार फिनिशिंग का प्रदर्शन करते हुए स्विट्जरलैंड के लिए दूसरा गोल किया और स्कोर 2-0 कर दिया। इसके बाद बोस्निया-हर्जेगोविना की वापसी की उम्मीदें लगभग खत्म हो गईं। मैच के अंतिम क्षणों में जोहान मंजाम्बी ने अपना दूसरा गोल दागते हुए स्विट्जरलैंड की बढ़त को 3-0 तक पहुंचा दिया। मंजाम्बी का यह प्रदर्शन टीम की जीत का सबसे बड़ा आधार साबित हुआ। हालांकि स्टॉपेज टाइम में बोस्निया-हर्जेगोविना के एरमि माहमिक ने एक गोल कर अपनी टीम की ओर से सांत्वना दिलाने की कोशिश की, लेकिन इसके तुरंत बाद स्विट्जरलैंड के कप्तान ग्रेनिट झाका ने शानदार गोल दागकर मुकाबले को 4-1 पर समाप्त कर दिया। झाका के गोल ने स्विट्जरलैंड की शानदार जीत पर अंतिम मुहर लगा दी। इस जीत के साथ स्विट्जरलैंड ने ग्रुप बी में अपनी स्थिति मजबूत कर ली है। पहले मुकाबले में ड्रॉ खेलने वाली स्विस टीम अब नॉकआउट चरण में पहुंचने की प्रबल दावेदार बन गई है। दूसरी ओर, बोस्निया-हर्जेगोविना के लिए अब आगे का सफर कठिन हो गया है और उसे अगले मुकाबले में हर हाल में जीत दर्ज करनी होगी, तभी उसकी अगले दौर में पहुंचने की उम्मीदें जीवित रह सकेंगी।

फीफा विश्व कप 2026: कनाडा ने कतर को 6-0 से रौंदा, जोनाथन डेविड की हैट्रिक से रचा इतिहास

नई दिल्ली । फीफा विश्व कप 2026 में सह-मेजबान कनाडा ने अपने घरेलू मैदान पर ऐतिहासिक प्रदर्शन करते हुए कतर को 6-0 से करारी शिकस्त दी। वैंकूवर के बीसी प्लेस स्टेडियम में खेले गए इस मुकाबले में कनाडाई खिलाड़ियों ने शुरुआत से ही दबदबा बनाए रखा और कतर को मैच में वापसी का कोई मौका नहीं दिया। इस शानदार जीत के साथ कनाडा ने फीफा विश्व कप इतिहास में अपनी पहली जीत दर्ज कर एक नया अध्याय लिख दिया। कनाडा की जीत के सबसे बड़े नायक स्टार स्ट्राइकर जोनाथन डेविड रहे, जिन्होंने हैट्रिक लगाकर दर्शकों का दिल जीत लिया। मैच के शुरुआती मिनटों से ही कनाडा आक्रामक तेवर में नजर आया। 16वें मिनट में साइल लारिन ने शानदार गोल दागकर टीम को 1-0 की बढ़त दिलाई। इसके बाद 29वें मिनट में जोनाथन डेविड ने बेहतरीन फिनिशिंग का प्रदर्शन करते हुए दूसरा गोल किया और कनाडा की बढ़त दोगुनी कर दी। पहले हाफ में कतर की टीम पूरी तरह दबाव में दिखाई दी। कनाडा लगातार हमले करता रहा और हाफ टाइम से ठीक पहले जोनाथन डेविड ने अपना दूसरा गोल दागकर स्कोर 3-0 कर दिया। इस गोल ने कतर की उम्मीदों को बड़ा झटका दिया और मैच लगभग एकतरफा हो गया। दूसरे हाफ में कनाडा को एक बड़ा झटका तब लगा जब मिडफील्डर इस्माइल कोन चोटिल होकर मैदान से बाहर हो गए। कतर के खिलाड़ी असिम मदीबो के टैकल के बाद कोन गंभीर दर्द में नजर आए और उन्हें स्ट्रेचर पर मैदान से बाहर ले जाना पड़ा। वीडियो असिस्टेंट रेफरी (वीएआर) की समीक्षा के बाद मदीबो का येलो कार्ड रेड कार्ड में बदल दिया गया, जिससे कतर को शेष मैच 10 खिलाड़ियों के साथ खेलना पड़ा। एक खिलाड़ी कम होने का असर कतर के खेल पर साफ दिखाई दिया। इस्माइल कोन की जगह मैदान में आए नाथन सलीबा ने 64वें मिनट में शानदार गोल कर स्कोर 4-0 कर दिया। इसके बाद कनाडा के हमले और तेज हो गए। सब्स्टीट्यूट खिलाड़ी जैकब शैफेलबर्ग के शॉट को रोकने के प्रयास में कतर के डिफेंडर मोहम्मद मनाई ने गेंद अपने ही गोल में पहुंचा दी, जिससे कनाडा की बढ़त 5-0 हो गई। मैच के स्टॉपेज टाइम में जोनाथन डेविड ने एक और शानदार गोल कर अपनी हैट्रिक पूरी की और कनाडा की जीत को 6-0 के विशाल अंतर तक पहुंचा दिया। पूरे मुकाबले में कतर की टीम कनाडा के मजबूत डिफेंस को भेदने में पूरी तरह असफल रही। इस जीत के साथ कनाडा के चार अंक हो गए हैं और टीम ग्रुप बी में शीर्ष स्थान की दौड़ में मजबूती से बनी हुई है। अब कनाडा को अगले मुकाबले में स्विट्जरलैंड के खिलाफ सिर्फ एक ड्रॉ की जरूरत होगी, जिससे वह नॉकआउट चरण में अपनी जगह लगभग पक्की कर सके।