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हैदराबाद कोर्ट का बड़ा आदेश, अल्लू अर्जुन को संध्या थिएटर केस में करना होगा पेश

नई दिल्ली । साउथ सिनेमा के सुपरस्टार अल्लू अर्जुन एक बार फिर कानूनी मुश्किलों को लेकर सुर्खियों में आ गए हैं। हैदराबाद की नामपल्ली कोर्ट ने उन्हें संध्या थिएटर भगदड़ मामले में समन जारी करते हुए 22 जून को व्यक्तिगत रूप से अदालत में पेश होने का आदेश दिया है। यह मामला फिल्म पुष्पा 2 की स्क्रीनिंग के दौरान हुए एक दर्दनाक हादसे से जुड़ा है जिसमें एक महिला की मौत हो गई थी और उनका बेटा गंभीर रूप से घायल हो गया था। जानकारी के अनुसार चिक्कड़पल्ली पुलिस द्वारा दाखिल चार्जशीट में अल्लू अर्जुन को आरोपी नंबर 11 बनाया गया है। इस मामले में कुल 19 लोगों को आरोपी बनाया गया है जबकि संध्या थिएटर के प्रबंधन से जुड़े 10 लोगों को मुख्य रूप से जिम्मेदार बताया गया है। अदालत ने सभी आरोपियों को समन जारी किया है और मामले की अगली सुनवाई में उपस्थिति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। यह घटना 4 दिसंबर 2024 की है जब हैदराबाद के संध्या थिएटर में पुष्पा 2 के स्पेशल शो के दौरान भारी भीड़ जमा हो गई थी। इसी दौरान भगदड़ जैसी स्थिति बन गई जिसमें रेवती नाम की महिला की मौत हो गई जबकि उनका बेटा श्रीतेज गंभीर रूप से घायल हो गया। यह हादसा उस वक्त चर्चा में आया था और सुरक्षा व्यवस्था पर कई सवाल खड़े हुए थे। इस मामले में अल्लू अर्जुन की लीगल टीम ने बयान जारी करते हुए कहा है कि अदालत ने उन्हें सुनवाई के लिए व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने का निर्देश दिया है और वे आगे की कानूनी प्रक्रिया का पालन कर रहे हैं। टीम ने कहा कि वे इस मामले में आवश्यक जानकारी समय पर साझा करेंगे। घटना के बाद अल्लू अर्जुन के परिवार ने पीड़ित परिवार से मुलाकात भी की थी। उनके पिता अल्लू अरविंद और पत्नी स्नेहा रेड्डी ने अस्पताल जाकर घायल श्रीतेज का हाल जाना था और परिवार को हर संभव मदद का भरोसा दिया था। इसके साथ ही उन्होंने श्रीतेज की बहन की शिक्षा का पूरा खर्च उठाने की भी बात कही थी। मौजूदा समय में घायल श्रीतेज का इलाज और पुनर्वास जारी है। रिपोर्ट्स के मुताबिक कई महीनों तक आईसीयू में रहने के बाद उन्हें अस्पताल से छुट्टी दी गई लेकिन अभी भी उनका न्यूरोलॉजिकल इलाज और थेरेपी चल रही है। परिवार के अनुसार उनकी हालत में बहुत धीरे सुधार हो रहा है और वह अभी भी पूरी तरह से सामान्य नहीं हो पाए हैं। इस पूरे मामले ने फिल्म इंडस्ट्री में भी सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन को लेकर एक बार फिर गंभीर बहस छेड़ दी है। अब सभी की नजरें 22 जून को होने वाली अदालत की सुनवाई पर टिकी हैं जहां आगे की कानूनी दिशा तय हो सकती है।

अक्षय–फराह की मस्ती भरी बातचीत, सेट के पुराने राज और हेलिकॉप्टर वाले किस्से का खुलासा

नई दिल्ली । बॉलीवुड के खिलाड़ी अक्षय कुमार और फिल्ममेकर फराह खान जब भी साथ नजर आते हैं माहौल हल्का-फुल्का और हंसी-मजाक से भर जाता है। हाल ही में दोनों एक बार फिर नेटफ्लिक्स इंडिया के एक इंटरव्यू में साथ नजर आए जहां उन्होंने अपनी फिल्मों और पुराने शूटिंग अनुभवों को याद करते हुए कई मजेदार किस्से साझा किए। बातचीत के दौरान दोनों के बीच हंसी-मजाक और हल्की-फुल्की नोकझोंक देखने को मिली जिसने फैंस का खूब मनोरंजन किया। इंटरव्यू में अक्षय कुमार ने फराह खान के शुरुआती दिनों को याद करते हुए कहा कि वह डांस कॉम्पटीशन में हिस्सा लेती थीं और धीरे-धीरे इंडस्ट्री की सबसे सफल कोरियोग्राफर और फिल्ममेकर बन गईं। इस दौरान दोनों ने एक-दूसरे की टांग खींचते हुए पुराने दिनों के किस्से भी साझा किए। अक्षय ने मजाकिया अंदाज में कहा कि वह फराह को लंबे समय से जानते हैं और उन्होंने उनके संघर्ष के दिनों को भी देखा है। वहीं फराह ने तुरंत उनकी बात काटते हुए अपनी कमाई और शुरुआती दिनों की जानकारी को लेकर हंसी-मजाक किया। बातचीत के दौरान दोनों ने एक-दूसरे की पर्सनल लाइफ को लेकर भी चुटकी ली जिससे माहौल और भी मजेदार हो गया। इसी बातचीत के दौरान अक्षय कुमार ने फिल्म ओम शांति ओम के एक कैमियो सीन का जिक्र किया जिसे फराह खान ने निर्देशित किया था। अक्षय ने उस सीन को याद करते हुए हंसते हुए कहा कि शूटिंग के दौरान कुछ ऐसे एंगल और विजुअल्स शामिल किए गए थे जिन्हें लेकर वह सहज नहीं थे। मजाकिया अंदाज में उन्होंने फराह को “वल्गर” भी कह दिया जिस पर सेट पर मौजूद सभी लोग हंस पड़े। फराह खान ने भी तुरंत जवाब देते हुए इस पूरे किस्से को मजाक में लिया और अपनी स्टाइल में अक्षय की टांग खींची। उन्होंने शूटिंग के दौरान हुई बातचीत और सीनिंग से जुड़े कई मजेदार अनुभव साझा किए जिससे यह साफ हो गया कि दोनों के बीच गहरी दोस्ती और सहजता है। इसी दौरान फिल्म तीस मार खान के शूटिंग दिनों का भी जिक्र हुआ। फराह ने बताया कि शूटिंग लोकेशन दूर होने के बावजूद अक्षय कुमार हर दिन समय पर पहुंचते थे और कई बार वह विशेष व्यवस्था के तहत हेलिकॉप्टर से भी ट्रैवल करते थे। इस खुलासे पर वहां मौजूद अभिनेता राजपाल यादव भी हैरान रह गए। फराह ने मजाक में यह भी कहा कि उन्होंने पहली बार किसी अभिनेता को शूटिंग के लिए हेलिकॉप्टर को टैक्सी की तरह इस्तेमाल करते देखा। हालांकि उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि अक्षय हमेशा अपने काम के प्रति बेहद अनुशासित रहते थे और समय पर सेट पर पहुंचते थे। अक्षय कुमार ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उस फिल्म के वे खुद भी प्रोड्यूसर थे इसलिए शूटिंग से जुड़ी व्यवस्थाओं में उनकी भूमिका भी थी। फराह ने हंसते हुए कहा कि फिल्म से सबसे ज्यादा फायदा भी उन्हीं को हुआ। पूरा इंटरव्यू इस बात का उदाहरण बन गया कि कैसे बॉलीवुड सितारे अपने पुराने अनुभवों को हल्के-फुल्के अंदाज में साझा कर सकते हैं और दर्शकों को मनोरंजन के साथ-साथ उनके पीछे की कहानियों से भी जोड़ सकते हैं।

ट्रंप ने पीएम मोदी को बताया ‘महान और सख्त नेता’, भारत की आर्थिक तरक्की की भी की तारीफ

नई दिल्ली । अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सार्वजनिक रूप से सराहना की है। उन्होंने पीएम मोदी को महान नेता और बहुत सख्त इंसान बताते हुए उनकी नेतृत्व शैली और राजनीतिक क्षमता की प्रशंसा की। यह बयान उन्होंने अमेरिकी मीडिया प्लेटफॉर्म एक्सियोस को दिए एक इंटरव्यू के दौरान दिया, जिसमें वैश्विक नेतृत्व, कूटनीति और अंतरराष्ट्रीय राजनीति पर विस्तार से चर्चा हुई। इंटरव्यू के दौरान ट्रंप ने कहा कि दुनिया के चुनिंदा नेताओं में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ऐसे नेता हैं जिनकी वे सबसे अधिक इज्जत करते हैं। उन्होंने कहा कि मोदी का लंबे समय से सत्ता में बने रहना और भारत जैसे विशाल लोकतंत्र का नेतृत्व करना उनकी मजबूत राजनीतिक पकड़ को दर्शाता है। ट्रंप ने यह भी कहा कि भारत जैसे देश में स्थिर नेतृत्व बनाए रखना आसान नहीं है, लेकिन पीएम मोदी ने यह काम सफलतापूर्वक किया है। ट्रंप ने आगे कहा कि पीएम मोदी बाहर से शांत स्वभाव के दिखाई देते हैं, लेकिन वास्तव में वह बेहद दृढ़ और सख्त निर्णय लेने वाले नेता हैं। उनके अनुसार, यही संयोजन उन्हें एक प्रभावशाली वैश्विक नेता बनाता है। उन्होंने यह भी कहा कि नेतृत्व के उच्च स्तर पर पहुंचने के लिए बुद्धिमत्ता और कठोर निर्णय क्षमता दोनों जरूरी हैं, और मोदी में यह दोनों गुण मौजूद हैं। पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति ने भारत की आर्थिक प्रगति का भी उल्लेख किया और कहा कि हाल के वर्षों में भारत ने कई क्षेत्रों में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की है। उन्होंने पीएम मोदी की नीतियों को इस विकास का एक महत्वपूर्ण कारण बताया। ट्रंप ने यह भी कहा कि मोदी अक्सर शांति और कूटनीति को प्राथमिकता देते हैं, जो उनके नेतृत्व को और अधिक प्रभावी बनाता है। इंटरव्यू में ट्रंप ने वैश्विक नेताओं की भूमिका पर चर्चा करते हुए चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की भी तारीफ की और दोनों नेताओं को मजबूत नेतृत्व का उदाहरण बताया। हालांकि, उन्होंने विशेष रूप से पीएम मोदी को ऐसे नेताओं में शामिल किया जिनकी अंतरराष्ट्रीय मंच पर सबसे अधिक पहचान और सम्मान है। गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मई 2014 से भारत के प्रधानमंत्री हैं और लंबे समय से देश की राजनीति में प्रमुख भूमिका निभा रहे हैं। उनके कार्यकाल के दौरान भारत ने आर्थिक, रणनीतिक और कूटनीतिक क्षेत्रों में कई महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल की हैं। भारत की वैश्विक पहचान मजबूत हुई है और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उसकी भूमिका लगातार बढ़ी है। भारत और अमेरिका के संबंधों में भी पिछले वर्षों में उल्लेखनीय प्रगति देखी गई है। दोनों देशों के बीच रक्षा, ऊर्जा, तकनीक और व्यापार जैसे क्षेत्रों में सहयोग लगातार बढ़ा है। हाउडी मोदी और नमस्ते ट्रंप जैसे बड़े कार्यक्रमों ने दोनों नेताओं के बीच व्यक्तिगत और कूटनीतिक संबंधों को भी विशेष पहचान दी थी। ट्रंप की यह ताजा टिप्पणी एक बार फिर भारत-अमेरिका संबंधों और वैश्विक राजनीति में पीएम मोदी की भूमिका को चर्चा के केंद्र में ले आई है।

मई में बीएफएसआई फंड्स ने निवेशकों को दिया सबसे बेहतर रिटर्न, फिर भी लार्ज-कैप योजनाओं में बरकरार रहा एसआईपी निवेशकों का मजबूत भरोसा

नई दिल्ली । भारतीय म्यूचुअल फंड उद्योग में मई महीने के दौरान निवेशकों के व्यवहार और विभिन्न फंड श्रेणियों के प्रदर्शन ने एक दिलचस्प तस्वीर पेश की है। जहां कुछ विशेष थीमैटिक और माइक्रो-कैप फंड्स ने निवेशकों को आकर्षक रिटर्न दिया, वहीं निवेश का सबसे बड़ा प्रवाह अपेक्षाकृत सुरक्षित और स्थिर माने जाने वाले लार्ज-कैप फंड्स की ओर जारी रहा। इससे स्पष्ट संकेत मिलता है कि निवेशक बेहतर रिटर्न की तलाश के साथ-साथ जोखिम प्रबंधन को भी प्राथमिकता दे रहे हैं। मई के दौरान बैंकिंग, वित्तीय सेवाएं और बीमा क्षेत्र पर आधारित बीएफएसआई थीमैटिक फंड्स ने शानदार प्रदर्शन किया। इस श्रेणी ने लगभग 5.5 प्रतिशत का रिटर्न दिया, जिससे यह महीने की सबसे चर्चित निवेश श्रेणियों में शामिल रही। इन फंड्स में बड़ी संख्या में प्रमुख बैंकिंग और वित्तीय कंपनियों के शेयर शामिल होने के कारण निवेशकों को सकारात्मक रिटर्न प्राप्त हुआ। बेहतर प्रदर्शन के चलते इस श्रेणी में उल्लेखनीय निवेश भी दर्ज किया गया। इसी अवधि में माइक्रो-कैप फंड्स ने लगभग 5.7 प्रतिशत का रिटर्न देकर सभी प्रमुख श्रेणियों में शीर्ष स्थान हासिल किया। हालांकि रिटर्न के मामले में यह सबसे आगे रहे, लेकिन निवेशकों की ओर से इन फंड्स में अपेक्षाकृत सीमित निवेश देखने को मिला। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि माइक्रो-कैप कंपनियों में जोखिम अधिक होने के कारण अधिकांश निवेशक अभी भी सावधानी बरत रहे हैं। स्मॉल-कैप और मिड-कैप फंड्स ने भी सकारात्मक प्रदर्शन किया। स्मॉल-कैप योजनाओं ने निवेशकों को संतोषजनक रिटर्न दिया और इनमें अच्छा निवेश प्रवाह बना रहा। वहीं मिड-कैप फंड्स में भी मजबूत निवेश देखा गया, हालांकि रिटर्न अपेक्षाकृत सीमित रहा। यह दर्शाता है कि निवेशक मध्यम और दीर्घकालिक विकास की संभावनाओं को देखते हुए इन श्रेणियों में अपनी हिस्सेदारी बनाए हुए हैं। दिलचस्प तथ्य यह रहा कि मई में सबसे कम रिटर्न देने वाली प्रमुख श्रेणी लार्ज-कैप फंड्स रही, लेकिन निवेश के मामले में यही वर्ग सबसे आगे रहा। इन फंड्स में हजारों करोड़ रुपये का निवेश दर्ज किया गया, जो अन्य कई श्रेणियों की तुलना में कहीं अधिक था। बाजार विशेषज्ञों के अनुसार इसका मुख्य कारण व्यवस्थित निवेश योजना यानी एसआईपी के माध्यम से होने वाला नियमित निवेश है, जो बड़ी और स्थापित कंपनियों पर आधारित योजनाओं में लगातार प्रवाहित होता रहता है। फ्लेक्सी-कैप फंड्स ने भी निवेशकों का भरोसा बनाए रखा। विभिन्न बाजार पूंजीकरण वाली कंपनियों में निवेश की स्वतंत्रता के कारण ये योजनाएं निवेशकों को विविधीकरण का लाभ देती हैं। इसी वजह से इन फंड्स में भी उल्लेखनीय निवेश दर्ज किया गया और इनका प्रदर्शन स्थिर बना रहा। मई के दौरान एसआईपी निवेश ने एक नया रिकॉर्ड स्थापित किया। देशभर के करोड़ों निवेशकों ने नियमित निवेश के माध्यम से बाजार में अपनी भागीदारी बनाए रखी। सक्रिय एसआईपी खातों की संख्या लगातार बढ़ रही है, जो यह संकेत देती है कि भारतीय निवेशक अब दीर्घकालिक संपत्ति निर्माण के लिए व्यवस्थित निवेश को प्राथमिकता दे रहे हैं। भारतीय म्यूचुअल फंड उद्योग का कुल प्रबंधनाधीन संपत्ति आधार भी मजबूत स्तर पर बना हुआ है। बाजार में विदेशी निवेशकों की बिकवाली के बावजूद घरेलू संस्थागत निवेशकों ने बड़ी मात्रा में खरीदारी कर बाजार को स्थिरता प्रदान की। इससे यह भी स्पष्ट हुआ कि घरेलू निवेशकों की भागीदारी अब भारतीय शेयर बाजार की मजबूती का महत्वपूर्ण आधार बन चुकी है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले महीनों में निवेशकों का ध्यान प्रदर्शन और स्थिरता दोनों पर केंद्रित रहेगा। ऐसे में लार्ज-कैप, फ्लेक्सी-कैप और मजबूत सेक्टोरल फंड्स निवेशकों की पसंद बने रह सकते हैं, जबकि उच्च जोखिम लेने वाले निवेशक माइक्रो और स्मॉल-कैप अवसरों पर भी नजर बनाए रखेंगे।

स्विट्जरलैंड बैठक टली, ईरान–अमेरिका के बीच नई बातचीत की तैयारी तेज

नई दिल्ली । मध्य-पूर्व की राजनीति में एक बार फिर बड़ी कूटनीतिक हलचल देखने को मिल रही है जहां ईरान और अमेरिका के बीच प्रस्तावित वार्ता फिलहाल टल गई है। स्विट्जरलैंड में होने वाली दोनों देशों के प्रतिनिधिमंडलों की बैठक को स्थगित कर दिया गया है हालांकि ईरानी विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि बातचीत की प्रक्रिया अभी रुकी नहीं है और जल्द ही नई बैठक की योजना पर काम चल रहा है। ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बाघेई के अनुसार अगले चरण की बातचीत को लेकर मध्यस्थों के माध्यम से लगातार परामर्श जारी है। उन्होंने कहा कि दोनों पक्षों के बीच बातचीत के लिए नई तारीखों को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया चल रही है और परिस्थितियों के अनुकूल होते ही इसकी आधिकारिक घोषणा की जाएगी। रिपोर्ट्स के मुताबिक ईरान का कहना है कि प्रस्तावित समझौते की आगे की प्रक्रिया कुछ महत्वपूर्ण शर्तों पर निर्भर करती है। इनमें क्षेत्रीय संघर्षों का अंत सैन्य गतिविधियों में कमी और आर्थिक प्रतिबंधों से राहत जैसे मुद्दे शामिल बताए गए हैं। इसके अलावा ईरान की ओर से यह भी कहा गया है कि तेल निर्यात और फ्रीज की गई संपत्तियों से जुड़े मामलों पर भी चर्चा आवश्यक है। बयान में यह भी संकेत दिया गया है कि हालिया बातचीत का उद्देश्य किसी अंतिम समझौते पर हस्ताक्षर करना था लेकिन कुछ प्रक्रियात्मक बदलावों और हालिया राजनीतिक घटनाक्रम के चलते बैठक को फिलहाल आगे बढ़ाना पड़ा। ईरानी पक्ष का दावा है कि हाल के दिनों में क्षेत्रीय स्तर पर कुछ अहम समझौतों और दस्तावेजों पर हस्ताक्षर हुए हैं जिसके बाद मौजूदा बैठक की आवश्यकता पर दोबारा विचार किया गया है। हालांकि कूटनीतिक चैनल सक्रिय बने हुए हैं और बातचीत की संभावनाएं अभी भी पूरी तरह खुली हैं। इस बीच क्षेत्रीय तनाव भी चर्चा में बना हुआ है जहां ईरान और पश्चिमी देशों के बीच पिछले कुछ समय से स्थिति संवेदनशील बनी हुई है। ऐसे में इस नई वार्ता को लेकर अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजरें टिकी हुई हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह बातचीत आगे बढ़ती है तो यह न सिर्फ ईरान–अमेरिका संबंधों के लिए बल्कि पूरे मध्य-पूर्व क्षेत्र की स्थिरता के लिए भी महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।

राजेश खन्ना–अंजू ब्रेकअप की अनसुनी दास्तान, सीक्रेट पार्टी बनी रिश्ते के टूटने की वजह

नई दिल्ली । भारतीय सिनेमा के पहले सुपरस्टार कहे जाने वाले राजेश खन्ना की निजी जिंदगी हमेशा से ही चर्चा और गॉसिप का हिस्सा रही है। उनकी और अभिनेत्री अंजू महेंद्रू की सात साल लंबी रिलेशनशिप एक वक्त पर फिल्मी दुनिया की सबसे चर्चित प्रेम कहानियों में से एक मानी जाती थी लेकिन यह रिश्ता जितनी तेजी से जुड़ा उतनी ही नाटकीय परिस्थितियों में टूट भी गया। कई किताबों और रिपोर्ट्स में इस बात का जिक्र मिलता है कि उनके रिश्ते में दरार की सबसे बड़ी वजह एक सीक्रेट पार्टी बनी थी जो खंडाला में आयोजित की गई थी। कहा जाता है कि राजेश खन्ना ने यह पार्टी अपने बेहद करीबी दोस्तों के लिए रखी थी जिसमें अभिनेत्री डिंपल कपाड़िया और उनके परिवार के कुछ सदस्य भी शामिल थे। खास बात यह थी कि इस पार्टी के बारे में अंजू महेंद्रू को कोई जानकारी नहीं दी गई थी। जानकारी के मुताबिक यह आयोजन बेहद निजी रखा गया था और राजेश खन्ना ने अपने स्टाफ तक को सख्त हिदायत दी थी कि इसकी भनक बाहर न जाए। लेकिन किसी तरह अंजू महेंद्रू को इस पार्टी के बारे में पता चल गया और वह सीधे खंडाला पहुंच गईं। बताया जाता है कि जब वह वहां पहुंचीं तब तक पार्टी को तुरंत एक दूसरे होटल में शिफ्ट कर दिया गया था ताकि स्थिति को संभाला जा सके। इस पूरे घटनाक्रम ने दोनों के रिश्ते में गहरी खाई पैदा कर दी। अंजू महेंद्रू बेहद आहत होकर वापस लौट गईं और इसके बाद उनके और राजेश खन्ना के बीच दूरी बढ़ती चली गई। कहा जाता है कि इसी दौरान राजेश खन्ना का झुकाव डिंपल कपाड़िया की ओर बढ़ने लगा था जिससे रिश्ते की स्थिति और भी जटिल हो गई। घटनाओं के बाद यह भी बताया जाता है कि अंजू महेंद्रू और राजेश खन्ना के बीच बातचीत पूरी तरह खत्म होने की कगार पर पहुंच गई थी। अंजू की नाराजगी इतनी गहरी थी कि उन्होंने काका के प्रति कठोर रुख अपनाया और संपर्क तोड़ने का फैसला कर लिया। वहीं दूसरी ओर राजेश खन्ना ने भी इस रिश्ते से आगे बढ़ने का मन बना लिया था। इसी दौर में राजेश खन्ना ने डिंपल कपाड़िया से शादी का फैसला किया जिसने पूरे फिल्म इंडस्ट्री को चौंका दिया। उनकी शादी साल 1973 में हुई और इसके बाद वह एक नई पारिवारिक जिंदगी में प्रवेश कर गए। हालांकि यह रिश्ता भी लंबे समय तक स्थिर नहीं रह सका और 1982 में दोनों अलग हो गए। इस पूरी कहानी को आज भी बॉलीवुड के सबसे चर्चित और भावनात्मक किस्सों में से एक माना जाता है जहां एक सीक्रेट पार्टी ने एक लंबी प्रेम कहानी का अंत कर दिया और भारतीय सिनेमा के इतिहास में एक नई कहानी की शुरुआत कर दी।

अमेरिका-ईरान समझौते की उम्मीद से शेयर बाजार में लौटी मजबूती, लगातार दूसरे सप्ताह निफ्टी और सेंसेक्स ने दिखाई दमदार बढ़त

नई दिल्ली । वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक तनाव में कमी की उम्मीद और कच्चे तेल की कीमतों में नरमी ने भारतीय शेयर बाजार को सप्ताहभर सकारात्मक दिशा प्रदान की। निवेशकों के बीच बढ़े भरोसे का असर यह रहा कि प्रमुख सूचकांक निफ्टी और सेंसेक्स लगातार दूसरे सप्ताह बढ़त दर्ज करने में सफल रहे। हालांकि सप्ताह के अंतिम कारोबारी दिन बाजार में मुनाफावसूली देखने को मिली, लेकिन पूरे सप्ताह का प्रदर्शन निवेशकों के लिए उत्साहजनक रहा। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ती कूटनीतिक गतिविधियों ने वैश्विक निवेशकों की चिंताओं को कुछ हद तक कम किया। इससे ऊर्जा आपूर्ति को लेकर बनी अनिश्चितता में राहत मिली और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में सकारात्मक माहौल बना। इसी का लाभ भारतीय बाजार को भी मिला, जहां निवेशकों ने चुनिंदा क्षेत्रों में जमकर खरीदारी की। सप्ताह के दौरान निफ्टी और सेंसेक्स दोनों ने मजबूत प्रदर्शन किया। हालांकि अंतिम कारोबारी सत्र में आईटी शेयरों में बिकवाली और निवेशकों द्वारा मुनाफा वसूली के कारण बाजार पर दबाव देखने को मिला। इसके बावजूद पूरे सप्ताह का रुख सकारात्मक बना रहा और प्रमुख सूचकांक उल्लेखनीय बढ़त के साथ बंद हुए। इससे यह संकेत मिला कि निवेशकों का भरोसा अभी भी बाजार में कायम है। कच्चे तेल की कीमतों में आई नरमी ने भी बाजार को महत्वपूर्ण समर्थन दिया। वैश्विक स्तर पर ऊर्जा कीमतों में गिरावट का सीधा असर उन अर्थव्यवस्थाओं पर पड़ता है जो बड़े पैमाने पर तेल आयात करती हैं। भारत के लिए यह स्थिति महंगाई नियंत्रण, व्यापार संतुलन और आर्थिक स्थिरता के लिहाज से सकारात्मक मानी जाती है। इसी कारण निवेशकों ने कई क्षेत्रों में सक्रियता दिखाई। सप्ताह के दौरान भारतीय मुद्रा में भी मजबूती दर्ज की गई। डॉलर के मुकाबले रुपये की स्थिति बेहतर होने से विदेशी निवेशकों के दृष्टिकोण में सुधार देखा गया। वित्तीय बाजारों में मुद्रा की स्थिरता को निवेश के लिए अनुकूल संकेत माना जाता है और इसका असर शेयर बाजार की धारणा पर भी दिखाई दिया। क्षेत्रवार प्रदर्शन की बात करें तो उपभोक्ता टिकाऊ वस्तु, रियल एस्टेट, फार्मा और रक्षा क्षेत्र के शेयरों ने अच्छा प्रदर्शन किया। विशेष रूप से रक्षा क्षेत्र में निवेशकों की दिलचस्पी बनी रही और इस क्षेत्र ने सप्ताह के दौरान उल्लेखनीय बढ़त दर्ज की। मजबूत ऑर्डर बुक, दीर्घकालिक विकास संभावनाएं और सरकारी नीतिगत समर्थन इसके प्रमुख कारण माने जा रहे हैं। इसके विपरीत सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र दबाव में रहा। वैश्विक स्तर पर तकनीकी सेवाओं की मांग को लेकर जारी चिंताओं और कमजोर कारोबारी अनुमानों के कारण आईटी कंपनियों के शेयरों में गिरावट देखने को मिली। इससे संबंधित सूचकांक सप्ताह के सबसे कमजोर प्रदर्शन करने वाले क्षेत्रों में शामिल रहा। मौद्रिक नीति के मोर्चे पर भी निवेशकों की नजरें बनी हुई हैं। प्रमुख वैश्विक केंद्रीय बैंकों द्वारा अपनाए जा रहे सतर्क रुख के कारण ब्याज दरों को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। वहीं भारत में भी नीति निर्माताओं का दृष्टिकोण फिलहाल संतुलित और सावधानीपूर्ण माना जा रहा है। आने वाले दिनों में निवेशकों की नजर मानसून की प्रगति, कृषि क्षेत्र की गतिविधियों, महंगाई के आंकड़ों और वैश्विक आर्थिक संकेतकों पर रहेगी। विशेष रूप से खरीफ फसलों की बुआई और ग्रामीण मांग से जुड़े संकेत बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं। विश्लेषकों का मानना है कि यदि वैश्विक तनाव में और कमी आती है तथा कच्चे तेल की कीमतें नियंत्रित बनी रहती हैं, तो भारतीय शेयर बाजार में सकारात्मक माहौल आगे भी जारी रह सकता है। हालांकि घरेलू और अंतरराष्ट्रीय आर्थिक आंकड़ों पर निवेशकों की सतर्क निगाह बनी रहेगी।

कीमती धातुओं में जोरदार गिरावट: सोना हुआ 2,800 रुपये सस्ता, चांदी में 10 हजार रुपये से ज्यादा की कमी ने बढ़ाई खरीदारी की उम्मीद

नई दिल्ली । देशभर के सर्राफा और बुलियन बाजार में इस सप्ताह कीमती धातुओं की कीमतों में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई, जिससे सोना और चांदी खरीदने की योजना बना रहे उपभोक्ताओं को राहत मिली है। सप्ताह भर के कारोबार के दौरान सोने और चांदी दोनों में लगातार कमजोरी देखने को मिली, जिसके परिणामस्वरूप सोना हजारों रुपये सस्ता हुआ जबकि चांदी में भी बड़ी गिरावट दर्ज की गई। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय आर्थिक परिस्थितियों और वैश्विक निवेशकों की बदलती रणनीतियों का सीधा प्रभाव इन धातुओं की कीमतों पर दिखाई दे रहा है। ताजा आंकड़ों के अनुसार 24 कैरेट सोने की कीमत में सप्ताह भर के दौरान करीब 2,800 रुपये प्रति 10 ग्राम की गिरावट दर्ज की गई। इसी तरह 22 कैरेट और 18 कैरेट सोने के भाव में भी उल्लेखनीय कमी देखने को मिली। लगातार गिरते दामों ने उन उपभोक्ताओं को राहत दी है जो शादी-विवाह, निवेश या आभूषण खरीदारी के लिए उचित अवसर का इंतजार कर रहे थे। बाजार में सोने की कीमतों ने सप्ताह के दौरान कई उतार-चढ़ाव भी देखे। शुरुआती दिनों में जहां भाव अपेक्षाकृत ऊंचे स्तर पर बने रहे, वहीं सप्ताह के अंत तक लगातार बिकवाली के दबाव ने कीमतों को नीचे ला दिया। कारोबारियों के अनुसार निवेशकों ने सुरक्षित निवेश के तौर पर सोने में अपनी कुछ हिस्सेदारी कम की, जिससे बाजार में कमजोरी बढ़ी। सोने के साथ-साथ चांदी की कीमतों में भी बड़ी गिरावट दर्ज की गई। सप्ताह भर में चांदी के दाम में 10,000 रुपये से अधिक की कमी देखने को मिली। औद्योगिक मांग और निवेश गतिविधियों से प्रभावित होने वाली चांदी में आई यह गिरावट बाजार के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है। जानकारों का कहना है कि चांदी के भाव में उतार-चढ़ाव अक्सर सोने की तुलना में अधिक होता है और मौजूदा गिरावट उसी प्रवृत्ति को दर्शाती है। अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी कीमती धातुओं पर दबाव बना हुआ है। वैश्विक स्तर पर सोना और चांदी दोनों कमजोर रुख के साथ कारोबार कर रहे हैं। आर्थिक नीतियों, ब्याज दरों और डॉलर की मजबूती ने निवेशकों के रुझान को प्रभावित किया है। जब डॉलर मजबूत होता है तो आमतौर पर सोना और चांदी जैसी धातुओं की मांग पर दबाव पड़ता है, क्योंकि अन्य मुद्राओं में इनकी खरीद अपेक्षाकृत महंगी हो जाती है। विशेषज्ञों का कहना है कि वैश्विक केंद्रीय बैंक की मौद्रिक नीति से जुड़े संकेत भी कीमती धातुओं की कीमतों को प्रभावित कर रहे हैं। ब्याज दरों में संभावित बढ़ोतरी या लंबे समय तक उच्च स्तर पर बने रहने की संभावना से निवेशकों का झुकाव अन्य वित्तीय साधनों की ओर बढ़ सकता है। यही कारण है कि हाल के दिनों में बुलियन बाजार में बिकवाली का दबाव बढ़ा है। हालांकि बाजार विश्लेषकों का यह भी मानना है कि लंबी अवधि के निवेशकों के लिए गिरावट के दौर को अवसर के रूप में देखा जा सकता है। सोना और चांदी परंपरागत रूप से सुरक्षित निवेश माने जाते हैं और आर्थिक अनिश्चितता के समय इनकी मांग फिर बढ़ सकती है। ऐसे में मौजूदा स्तरों पर खरीदारी को लेकर निवेशकों की रुचि भी बढ़ने की संभावना है। सर्राफा कारोबारियों के अनुसार आने वाले दिनों में अंतरराष्ट्रीय आर्थिक घटनाक्रम, डॉलर की चाल और ब्याज दरों से जुड़े संकेतों पर बाजार की नजर बनी रहेगी। यदि वैश्विक परिस्थितियों में कोई बड़ा बदलाव नहीं होता है तो कीमती धातुओं की कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है। फिलहाल, कीमतों में आई इस बड़ी गिरावट ने खरीदारों को राहत और निवेशकों को नए अवसर तलाशने का मौका जरूर दिया है।

आमिर खान प्रोडक्शन की नई डॉक्यूमेंट्री में दिखेगी राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की संघर्ष भरी कहानी

नई दिल्ली । भारतीय सिनेमा और ओटीटी की दुनिया में सामाजिक और वास्तविक जीवन पर आधारित कहानियों के लिए पहचाने जाने वाले आमिर खान प्रोडक्शन ने एक और महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट की शुरुआत कर दी है। इस बार प्रोडक्शन हाउस ने भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के जीवन पर आधारित डॉक्यूमेंट्री बनाने का ऐलान किया है। यह प्रोजेक्ट न केवल उनकी व्यक्तिगत यात्रा को सामने लाएगा बल्कि उनके संघर्ष और उपलब्धियों को भी विस्तार से दर्शाएगा। सूत्रों के अनुसार इस डॉक्यूमेंट्री की शूटिंग पहले ही शुरू हो चुकी है। टीम ने ओडिशा के उस छोटे से गांव में भी शूटिंग की है जहां से राष्ट्रपति मुर्मू का जीवन प्रारंभ हुआ था। इस डॉक्यूमेंट्री में स्थानीय कलाकारों को भी शामिल किया गया है ताकि कहानी को अधिक वास्तविक और जमीनी रूप दिया जा सके। फिल्म का निर्देशन स्वाति चक्रवर्ती कर रही हैं जिन्होंने पहले भी आमिर खान के साथ रूबरू रोशनी जैसी चर्चित डॉक्यूमेंट्री पर काम किया था। इस बार भी उन्होंने एक ऐसी कहानी को चुना है जो प्रेरणा और सामाजिक बदलाव का संदेश देती है। डॉक्यूमेंट्री में द्रौपदी मुर्मू के बचपन से लेकर उनके राजनीतिक और सामाजिक जीवन तक की पूरी यात्रा को दिखाया जाएगा। इसमें यह भी बताया जाएगा कि किस तरह उन्होंने एक आदिवासी पृष्ठभूमि से निकलकर देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद तक पहुंचने का ऐतिहासिक सफर तय किया। यह कहानी उनके संघर्ष उनके समर्पण और समाज के लिए किए गए कार्यों को गहराई से उजागर करेगी। इसके साथ ही डॉक्यूमेंट्री में उनके निजी जीवन से जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं को भी शामिल किया जाएगा। उनके जीवन के कठिन दौर और चुनौतियों को भी ईमानदारी के साथ प्रस्तुत किया जाएगा ताकि दर्शक उनकी वास्तविक यात्रा को समझ सकें। एक विशेष हिस्सा उस ऐतिहासिक क्षण पर केंद्रित होगा जब उन्हें देश के राष्ट्रपति पद के लिए चुना गया था। यह पल भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में देखा जाता है और डॉक्यूमेंट्री में इसे विस्तार से दिखाया जाएगा। आमिर खान प्रोडक्शन पहले भी कई ऐसी कहानियां लेकर आया है जो समाज में सकारात्मक प्रभाव छोड़ती हैं। इस प्रोडक्शन की पहचान ही ऐसी फिल्मों और डॉक्यूमेंट्री से है जो वास्तविक घटनाओं पर आधारित होती हैं और दर्शकों को सोचने पर मजबूर करती हैं। इसके अलावा प्रोडक्शन हाउस एक और बड़े प्रोजेक्ट पर भी काम कर रहा है जो 1947 के ऐतिहासिक विभाजन पर आधारित फिल्म है। इस फिल्म में कई बड़े कलाकार नजर आएंगे और यह एक भव्य ऐतिहासिक ड्रामा होगा। कुल मिलाकर द्रौपदी मुर्मू पर बन रही यह डॉक्यूमेंट्री न केवल उनके जीवन को उजागर करेगी बल्कि देश की नई पीढ़ी को यह संदेश भी देगी कि संघर्ष और आत्मविश्वास के बल पर किसी भी ऊंचाई तक पहुंचा जा सकता है।

लॉरेंस बिश्नोई गैंग के नाम पर 2 करोड़ की फिरौती, दिल्ली से सिवनी तक पहुंची जांच, मोबाइल नंबर से खुला एमपी कनेक्शन

नई दिल्ली । लॉरेंस बिश्नोई गैंग के नाम पर दिल्ली के एक व्यापारी से 2 करोड़ रुपये की फिरौती मांगने के मामले ने नया मोड़ ले लिया है। तकनीकी जांच के दौरान इस मामले का कनेक्शन मध्य प्रदेश के सिवनी जिले से जुड़ने के बाद दिल्ली पुलिस की विशेष टीम जांच के लिए सिवनी पहुंची। फिलहाल पुलिस साइबर एंगल से मामले की गहन पड़ताल कर रही है और कॉल से जुड़े डिजिटल साक्ष्यों का विश्लेषण किया जा रहा है। जानकारी के अनुसार दिल्ली के एक कारोबारी को व्हाट्सएप कॉल के जरिए धमकी दी गई थी। कॉल करने वाले व्यक्ति ने स्वयं को लॉरेंस बिश्नोई गैंग से जुड़ा बताते हुए 2 करोड़ रुपये की फिरौती की मांग की। व्यापारी को गंभीर परिणाम भुगतने की चेतावनी भी दी गई थी। घटना के बाद व्यापारी ने पुलिस से शिकायत की, जिसके बाद मामले की जांच शुरू की गई। जांच के दौरान पुलिस ने कॉल में इस्तेमाल किए गए मोबाइल नंबर की तकनीकी ट्रैकिंग की। प्रारंभिक जांच में पता चला कि संबंधित नंबर मध्य प्रदेश के सिवनी जिले के एक युवक के नाम पर पंजीकृत है। इसी जानकारी के आधार पर दिल्ली पुलिस की टीम स्थानीय पुलिस के सहयोग से सिवनी पहुंची और संबंधित युवक से पूछताछ की। पुलिस सूत्रों के मुताबिक युवक का नाम सुनील सतनामी बताया जा रहा है। हालांकि अब तक की जांच में उसके सीधे तौर पर फिरौती मांगने या किसी संगठित आपराधिक गतिविधि में शामिल होने के प्रमाण नहीं मिले हैं। पुलिस ने युवक का मोबाइल फोन जब्त कर लिया है और उसके डिजिटल डेटा की जांच की जा रही है। जांच एजेंसियों का मानना है कि संभव है किसी तीसरे व्यक्ति ने अनाधिकृत तरीके से युवक के मोबाइल नंबर का उपयोग किया हो या फिर सिम कार्ड का दुरुपयोग किया गया हो। इसी संभावना को ध्यान में रखते हुए साइबर विशेषज्ञ कॉल डिटेल रिकॉर्ड, इंटरनेट प्रोटोकॉल लॉग, व्हाट्सएप गतिविधियों और अन्य डिजिटल साक्ष्यों की जांच कर रहे हैं। पुलिस यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि कॉल वास्तव में किस लोकेशन से की गई थी और क्या इसके पीछे कोई संगठित गिरोह सक्रिय है। हाल के वर्षों में कुख्यात गैंगों के नाम का इस्तेमाल कर व्यापारियों, डॉक्टरों और उद्योगपतियों से फिरौती मांगने के कई मामले सामने आए हैं, जिनमें कई बार अपराधियों ने फर्जी पहचान और इंटरनेट आधारित कॉलिंग प्लेटफॉर्म का सहारा लिया है। मध्य प्रदेश और दिल्ली पुलिस के बीच समन्वय बनाकर जांच आगे बढ़ाई जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए हर तकनीकी पहलू की जांच की जा रही है और जल्दबाजी में किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंचा जाएगा। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि यदि जरूरत पड़ी तो जांच का दायरा अन्य राज्यों तक भी बढ़ाया जा सकता है। फिलहाल मुख्य फोकस यह पता लगाने पर है कि धमकी भरी व्हाट्सएप कॉल किसने की, मोबाइल नंबर का उपयोग कैसे हुआ और क्या इसके पीछे कोई संगठित आपराधिक नेटवर्क सक्रिय है। मामले की जांच जारी है और पुलिस का कहना है कि डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर जल्द महत्वपूर्ण जानकारी सामने आ सकती है।