योग दिवस पर शिवपुरी में उमड़ा जनसैलाब, मंत्री ने जनचौपाल में सुनीं समस्याएं

मध्यप्रदेश । शिवपुरी जिले में रविवार को International Yoga Day 2026 बड़े उत्साह और व्यापक जनभागीदारी के साथ मनाया गया। इस वर्ष की थीम “स्वस्थ आयु के लिए योग” के अनुरूप जिलेभर में विभिन्न स्थानों पर सामूहिक योग कार्यक्रम आयोजित किए गए, जिनमें हजारों लोगों ने भाग लेकर योग को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाने का संकल्प लिया। जिला मुख्यालय स्थित तात्या टोपे खेल परिसर (पोलो ग्राउंड) में मुख्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जहां पूर्व विधायक प्रहलाद भारती, एडीएम दिनेश चंद्र शुक्ला सहित कई जनप्रतिनिधि, प्रशासनिक अधिकारी, कर्मचारी, विद्यार्थी और बड़ी संख्या में आम नागरिक मौजूद रहे। योग प्रशिक्षकों के मार्गदर्शन में प्रतिभागियों ने विभिन्न योगासन, प्राणायाम और ध्यान की क्रियाओं का अभ्यास किया। कार्यक्रम के दौरान सभी प्रतिभागियों ने यह संदेश दिया कि योग केवल शारीरिक व्यायाम नहीं, बल्कि मानसिक संतुलन और स्वस्थ जीवन की दिशा में एक महत्वपूर्ण साधन है। उपस्थित लोगों ने नियमित योग को जीवन का हिस्सा बनाने का संकल्प लिया। इसी क्रम में खोड़ स्थित धार महादेव मंदिर प्रांगण में भी भव्य योग कार्यक्रम आयोजित किया गया, जहां प्रदेश के ऊर्जा मंत्री एवं जिले के प्रभारी मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। उनके साथ विधायक देवेंद्र जैन और भाजपा जिला अध्यक्ष जसवंत जाटव ने भी योगाभ्यास किया। इस कार्यक्रम की विशेष बात यह रही कि योग के बाद प्रभारी मंत्री ने जन चौपाल लगाकर स्थानीय नागरिकों की समस्याएं सुनीं। उन्होंने लोगों से सीधे संवाद कर उनकी शिकायतों और सुझावों को गंभीरता से लिया, जिससे कार्यक्रम केवल योग तक सीमित न रहकर जनसंपर्क का माध्यम भी बन गया। ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने इस अवसर पर कहा कि योग केवल एक व्यायाम नहीं है, बल्कि यह शरीर और मन दोनों को संतुलित रखने की एक प्रभावी जीवन पद्धति है। उन्होंने कहा कि नियमित योग से व्यक्ति न केवल शारीरिक रूप से स्वस्थ रहता है, बल्कि मानसिक रूप से भी अधिक मजबूत बनता है। उन्होंने सभी नागरिकों से अपील की कि वे योग को अपनी दैनिक दिनचर्या में शामिल करें, ताकि एक स्वस्थ और सशक्त समाज का निर्माण हो सके। कुल मिलाकर, शिवपुरी में आयोजित यह योग कार्यक्रम न केवल स्वास्थ्य जागरूकता का प्रतीक बना, बल्कि इसमें जनभागीदारी और प्रशासनिक संवाद का भी सुंदर संगम देखने को मिला।
भारतीय नौसेना की ताकत में इजाफा, INS दूनागिरी और INS अग्रय से बढ़ी मारक क्षमता

नई दिल्ली । भारतीय नौसेना की ताकत को एक नई दिशा देने के लिए दो अत्याधुनिक युद्धपोतों को औपचारिक रूप से बेड़े में शामिल किया गया है। इनमें स्टेल्थ गाइडेड मिसाइल फ्रिगेट INS Dunagiri और एंटी-सबमरीन वॉरफेयर शैलो वॉटर क्राफ्ट INS Agray शामिल हैं। इन दोनों प्लेटफॉर्म्स के शामिल होने से भारतीय नौसेना की सतह, वायु और जल के भीतर युद्ध क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। आधुनिक युद्ध की बदलती प्रकृति को देखते हुए भारतीय नौसेना लगातार स्वदेशी तकनीक पर आधारित युद्धपोतों को शामिल कर रही है। आज के दौर में छोटे और सस्ते ड्रोन भी बड़े सैन्य प्लेटफॉर्म्स को चुनौती दे सकते हैं, ऐसे में उन्नत स्टेल्थ तकनीक और मल्टी-डोमेन ऑपरेशन की क्षमता बेहद महत्वपूर्ण हो गई है। INS Dunagiri प्रोजेक्ट 17ए के तहत विकसित एक अत्याधुनिक स्टेल्थ फ्रिगेट है, जो दुश्मन के रडार से बचकर लंबी दूरी तक सटीक हमला करने में सक्षम है। इसमें ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल, बराक-8 एयर डिफेंस सिस्टम, आधुनिक सोनार, मल्टी-फंक्शन रडार और कॉम्बैट मैनेजमेंट सिस्टम जैसी अत्याधुनिक तकनीकें शामिल हैं। यह युद्धपोत सतह, हवा और पानी के भीतर मौजूद सभी प्रकार के खतरों का प्रभावी ढंग से सामना करने में सक्षम है। इस युद्धपोत की सबसे बड़ी विशेषता इसका कम रडार क्रॉस-सेक्शन है, जिससे इसे दुश्मन के लिए ट्रैक करना बेहद कठिन हो जाता है। इसके सेंसर और हथियार प्रणालियां रियल टाइम डेटा के आधार पर तेजी से निर्णय लेने में सक्षम हैं, जिससे प्रतिक्रिया समय काफी कम हो जाता है। दूसरी ओर, INS Agray विशेष रूप से समुद्र की सतह के नीचे छिपे खतरों, यानी पनडुब्बियों का पता लगाने और उन्हें नष्ट करने के लिए डिजाइन किया गया है। इसे “गांडीव” जैसे प्रतीकात्मक नाम से जोड़कर इसकी सटीक मारक क्षमता को दर्शाया गया है। यह जहाज स्वदेशी सोनार सिस्टम, हल्के टॉरपीडो, एंटी-सबमरीन रॉकेट लॉन्चर और एडवांस डिकॉय सिस्टम से लैस है। यह छोटा आकार होने के बावजूद बेहद घातक प्लेटफॉर्म माना जा रहा है, जो तटीय क्षेत्रों में दुश्मन की पनडुब्बियों पर सटीक निगरानी और हमला करने में सक्षम है। इसकी गति लगभग 25 नॉट तक है और यह हजारों किलोमीटर तक ऑपरेशन कर सकता है। दोनों युद्धपोतों में लगभग 75 प्रतिशत तक स्वदेशी उपकरणों का उपयोग किया गया है, जो भारत की आत्मनिर्भर रक्षा तकनीक की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। इन प्लेटफॉर्म्स का डिजाइन नौसेना के वॉरशिप डिजाइन ब्यूरो द्वारा तैयार किया गया है। कुल मिलाकर, INS Dunagiri और INS Agray का शामिल होना भारतीय नौसेना की समुद्री शक्ति को नई ऊंचाई देता है और भारत की रणनीतिक रक्षा क्षमता को और अधिक मजबूत बनाता है।
योग का वैश्विक उत्सव, जापान में बारिश के बीच भी जुटे 2100 प्रतिभागी

नई दिल्ली । 12वें अंतरराष्ट्रीय योग दिवस 2026 के अवसर पर पूरी दुनिया में योग का उत्साह देखने को मिला, जहां सीमाओं और मौसम की बाधाएं भी इस वैश्विक आयोजन के जोश को कम नहीं कर सकीं। इस वर्ष की थीम “स्वस्थ वृद्धावस्था के लिए योग” रही, जिसके तहत सभी आयु वर्ग के लोगों को स्वस्थ और सक्रिय जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित किया गया। दुनिया के विभिन्न देशों में भारतीय मिशनों और स्थानीय संगठनों के सहयोग से बड़े पैमाने पर योग कार्यक्रम आयोजित किए गए। यूएई की राजधानी दुबई में भारतीय महावाणिज्य दूतावास द्वारा विशेष योग सत्र का आयोजन किया गया, जिसमें दुबई पुलिस के अधिकारी, योग साधक, विद्यार्थी और स्थानीय नागरिक बड़ी संख्या में शामिल हुए। इस कार्यक्रम में पुलिस बैंड की प्रस्तुति ने आयोजन को और अधिक आकर्षक बना दिया। स्लोवाकिया की राजधानी ब्रातिस्लावा में भी योग दिवस का भव्य आयोजन हुआ, जहां स्थानीय लोगों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। भारतीय राजदूत अपूर्वा श्रीवास्तव ने इस अवसर पर लोगों को योग को अपनी दैनिक जीवनशैली में शामिल करने और इसे परिवार व समाज तक पहुंचाने का संदेश दिया। सबसे उल्लेखनीय आयोजन जापान के त्सुकिजी होंगन-जी मंदिर में देखने को मिला, जहां भारी बारिश के बावजूद 2100 से अधिक योग प्रेमियों ने योगाभ्यास किया। “बारिश हो या धूप, योग नहीं रुकेगा” के संदेश के साथ प्रतिभागियों ने पूरे उत्साह से कार्यक्रम में हिस्सा लिया। वातावरण में सकारात्मक ऊर्जा और एकजुटता का अद्भुत दृश्य देखने को मिला। इस वर्ष अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर दुनिया भर में लगभग 2500 स्थानों पर 210 से अधिक भारतीय मिशनों द्वारा योग कार्यक्रम आयोजित किए गए। भारत में मुख्य समारोह कोलकाता के रेड रोड पर हुआ, जहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी भाग लिया। प्रधानमंत्री ने इस अवसर पर कहा कि योग आज केवल भारत की परंपरा नहीं, बल्कि पूरी मानवता को जोड़ने का माध्यम बन चुका है। उन्होंने कहा कि योग ने सीमाओं, भाषाओं और संस्कृतियों से ऊपर उठकर विश्व को एक सूत्र में बांधने का कार्य किया है, और आज पूरी दुनिया इसकी शक्ति को स्वीकार कर रही है। नई दिल्ली । 12वें अंतरराष्ट्रीय योग दिवस 2026 के अवसर पर पूरी दुनिया में योग का उत्साह देखने को मिला, जहां सीमाओं और मौसम की बाधाएं भी इस वैश्विक आयोजन के जोश को कम नहीं कर सकीं। इस वर्ष की थीम “स्वस्थ वृद्धावस्था के लिए योग” रही, जिसके तहत सभी आयु वर्ग के लोगों को स्वस्थ और सक्रिय जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित किया गया। दुनिया के विभिन्न देशों में भारतीय मिशनों और स्थानीय संगठनों के सहयोग से बड़े पैमाने पर योग कार्यक्रम आयोजित किए गए। यूएई की राजधानी दुबई में भारतीय महावाणिज्य दूतावास द्वारा विशेष योग सत्र का आयोजन किया गया, जिसमें दुबई पुलिस के अधिकारी, योग साधक, विद्यार्थी और स्थानीय नागरिक बड़ी संख्या में शामिल हुए। इस कार्यक्रम में पुलिस बैंड की प्रस्तुति ने आयोजन को और अधिक आकर्षक बना दिया। स्लोवाकिया की राजधानी ब्रातिस्लावा में भी योग दिवस का भव्य आयोजन हुआ, जहां स्थानीय लोगों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। भारतीय राजदूत अपूर्वा श्रीवास्तव ने इस अवसर पर लोगों को योग को अपनी दैनिक जीवनशैली में शामिल करने और इसे परिवार व समाज तक पहुंचाने का संदेश दिया। सबसे उल्लेखनीय आयोजन जापान के त्सुकिजी होंगन-जी मंदिर में देखने को मिला, जहां भारी बारिश के बावजूद 2100 से अधिक योग प्रेमियों ने योगाभ्यास किया। “बारिश हो या धूप, योग नहीं रुकेगा” के संदेश के साथ प्रतिभागियों ने पूरे उत्साह से कार्यक्रम में हिस्सा लिया। वातावरण में सकारात्मक ऊर्जा और एकजुटता का अद्भुत दृश्य देखने को मिला। इस वर्ष अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर दुनिया भर में लगभग 2500 स्थानों पर 210 से अधिक भारतीय मिशनों द्वारा योग कार्यक्रम आयोजित किए गए। भारत में मुख्य समारोह कोलकाता के रेड रोड पर हुआ, जहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी भाग लिया। प्रधानमंत्री ने इस अवसर पर कहा कि योग आज केवल भारत की परंपरा नहीं, बल्कि पूरी मानवता को जोड़ने का माध्यम बन चुका है। उन्होंने कहा कि योग ने सीमाओं, भाषाओं और संस्कृतियों से ऊपर उठकर विश्व को एक सूत्र में बांधने का कार्य किया है, और आज पूरी दुनिया इसकी शक्ति को स्वीकार कर रही है।12वें अंतरराष्ट्रीय योग दिवस 2026 के अवसर पर पूरी दुनिया में योग का उत्साह देखने को मिला, जहां सीमाओं और मौसम की बाधाएं भी इस वैश्विक आयोजन के जोश को कम नहीं कर सकीं। इस वर्ष की थीम “स्वस्थ वृद्धावस्था के लिए योग” रही, जिसके तहत सभी आयु वर्ग के लोगों को स्वस्थ और सक्रिय जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित किया गया। दुनिया के विभिन्न देशों में भारतीय मिशनों और स्थानीय संगठनों के सहयोग से बड़े पैमाने पर योग कार्यक्रम आयोजित किए गए। यूएई की राजधानी दुबई में भारतीय महावाणिज्य दूतावास द्वारा विशेष योग सत्र का आयोजन किया गया, जिसमें दुबई पुलिस के अधिकारी, योग साधक, विद्यार्थी और स्थानीय नागरिक बड़ी संख्या में शामिल हुए। इस कार्यक्रम में पुलिस बैंड की प्रस्तुति ने आयोजन को और अधिक आकर्षक बना दिया। स्लोवाकिया की राजधानी ब्रातिस्लावा में भी योग दिवस का भव्य आयोजन हुआ, जहां स्थानीय लोगों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। भारतीय राजदूत अपूर्वा श्रीवास्तव ने इस अवसर पर लोगों को योग को अपनी दैनिक जीवनशैली में शामिल करने और इसे परिवार व समाज तक पहुंचाने का संदेश दिया। सबसे उल्लेखनीय आयोजन जापान के त्सुकिजी होंगन-जी मंदिर में देखने को मिला, जहां भारी बारिश के बावजूद 2100 से अधिक योग प्रेमियों ने योगाभ्यास किया। “बारिश हो या धूप, योग नहीं रुकेगा” के संदेश के साथ प्रतिभागियों ने पूरे उत्साह से कार्यक्रम में हिस्सा लिया। वातावरण में सकारात्मक ऊर्जा और एकजुटता का अद्भुत दृश्य देखने को मिला। इस वर्ष अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर दुनिया भर में लगभग 2500 स्थानों पर 210 से अधिक भारतीय मिशनों द्वारा योग कार्यक्रम आयोजित किए गए। भारत में मुख्य समारोह कोलकाता के रेड रोड पर हुआ, जहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी भाग लिया। प्रधानमंत्री ने इस अवसर पर कहा कि योग आज केवल भारत की परंपरा नहीं, बल्कि पूरी मानवता को जोड़ने का माध्यम बन चुका है। उन्होंने कहा कि योग ने सीमाओं, भाषाओं और संस्कृतियों से ऊपर उठकर विश्व को एक सूत्र में बांधने का कार्य किया है, और आज पूरी दुनिया इसकी शक्ति
योग दिवस पर नीति आयोग का संदेश, फिट इंडिया और हेल्दी एजिंग को बढ़ावा

नई दिल्ली । अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर देश की प्रमुख नीति निर्माण संस्था NITI Aayog ने 12वें अंतरराष्ट्रीय योग दिवस का आयोजन बड़े उत्साह के साथ किया। इस वर्ष का मुख्य विषय “स्वस्थ वृद्धावस्था के लिए योग” रखा गया, जिसका उद्देश्य योग के माध्यम से लोगों को शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक रूप से स्वस्थ जीवन जीने के लिए प्रेरित करना था। कार्यक्रम के दौरान योग, ध्यान और प्राणायाम की विभिन्न विधियों का अभ्यास किया गया, जिसमें आयोग के वरिष्ठ अधिकारियों और कर्मचारियों ने सक्रिय भागीदारी की। इस आयोजन में यह संदेश प्रमुखता से सामने आया कि योग केवल एक व्यायाम नहीं, बल्कि जीवनशैली का हिस्सा है जो संपूर्ण स्वास्थ्य और दीर्घायु को बढ़ावा देता है। नीति आयोग ने अपने संदेश में कहा कि यह थीम इस बात को स्वीकार करती है कि योग आज के समय में वेलनेस और हेल्दी लाइफस्टाइल का एक महत्वपूर्ण आधार बन चुका है। बढ़ती उम्र के साथ शरीर और मन दोनों को स्वस्थ बनाए रखने में योग की भूमिका अत्यंत प्रभावी मानी जा रही है। कार्यक्रम में आयोग के उपाध्यक्ष अशोक कुमार लाहिड़ी ने भी ध्यान और योगाभ्यास में भाग लिया। उनके साथ आयोग के अन्य सदस्य जैसे राजीव गौबा, प्रो. के.वी. राजू, डॉ. एम. श्रीनिवास और डॉ. जोरम अनिया भी उपस्थित रहे। सभी ने मिलकर योग के महत्व को रेखांकित किया और इसे दैनिक जीवन में अपनाने की आवश्यकता पर जोर दिया। इस अवसर पर यह भी बताया गया कि योग न केवल शरीर की ताकत और लचीलापन बढ़ाता है, बल्कि मानसिक तनाव को भी कम करता है और जीवन की गुणवत्ता को बेहतर बनाता है। विशेष रूप से वृद्धावस्था में योग को अपनाने से व्यक्ति अधिक सक्रिय, संतुलित और स्वस्थ जीवन जी सकता है। इसी दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कोलकाता में आयोजित राष्ट्रीय योग दिवस कार्यक्रम का नेतृत्व किया। उन्होंने देशभर के लोगों की उत्साहपूर्ण भागीदारी की सराहना की और योग को जीवन का हिस्सा बनाने की अपील की। उन्होंने कहा कि योग स्वस्थ मन, स्वस्थ शरीर और दीर्घकालिक स्वास्थ्य के लिए एक प्रभावी माध्यम है। प्रधानमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि नियमित योग अभ्यास से व्यक्ति उम्र बढ़ने के बावजूद अपनी शारीरिक और मानसिक क्षमता को बनाए रख सकता है। उन्होंने इसे आधुनिक जीवनशैली में संतुलन लाने का एक महत्वपूर्ण साधन बताया। कुल मिलाकर इस वर्ष का योग दिवस कार्यक्रम न केवल एक औपचारिक आयोजन रहा, बल्कि यह एक व्यापक संदेश भी लेकर आया कि योग को अपनाकर समाज को अधिक स्वस्थ, सक्रिय और संतुलित बनाया जा सकता है।
री-NEET UG 2026: किसी के लिए दूसरा मौका, किसी के लिए टूटते सपनों का दर्द

नई दिल्ली । नई दिल्ली में आयोजित री-नीट यूजी 2026 परीक्षा ने एक बार फिर देशभर के लाखों छात्रों और अभिभावकों की भावनाओं को झकझोर दिया। पेपर लीक विवाद के बाद दोबारा कराई गई इस परीक्षा को लेकर अलग-अलग राज्यों से छात्रों की प्रतिक्रियाएं सामने आईं, जिनमें उम्मीद, निराशा और राहत—तीनों भावनाएं साफ दिखाई दीं। कर्नाटक के मंगलुरु में परीक्षा देने पहुंचे एक छात्र ने बताया कि जब परीक्षा दोबारा कराने का फैसला लिया गया, तो वह खुश था क्योंकि पहली बार में उसका प्रदर्शन अच्छा नहीं रहा था। उसके अनुसार यह दूसरा मौका उसके लिए एक नई शुरुआत जैसा है और उसने इस बार पूरी तैयारी के साथ परीक्षा दी है। वहीं बेंगलुरु के एक अन्य अभ्यर्थी ने बताया कि परीक्षा रद्द होने की खबर ने उसे गहरा झटका दिया था। उसने लगभग दो साल की मेहनत इस परीक्षा के लिए लगाई थी और अचानक आए फैसले से वह मानसिक रूप से प्रभावित हुआ। हालांकि समय के साथ उसने खुद को संभाला और दोबारा पूरी मेहनत के साथ तैयारी शुरू की। इसी शहर के एक अन्य छात्र ने इस पूरे घटनाक्रम पर संतुलित प्रतिक्रिया दी। उसने कहा कि पेपर लीक जैसी घटनाओं के कारण परीक्षा को दोबारा कराना जरूरी था, ताकि सभी छात्रों के साथ न्याय हो सके। हालांकि उसने यह भी माना कि इससे उन छात्रों को नुकसान हुआ, जिन्होंने ईमानदारी से तैयारी की थी और पहले प्रयास में अच्छा प्रदर्शन किया था। केरल के तिरुवनंतपुरम से एक छात्र ने इस स्थिति पर नाराजगी जताते हुए कहा कि एक व्यक्ति या कुछ लोगों की गलती का खामियाजा हजारों छात्रों को भुगतना पड़ता है। उसके अनुसार ऐसी घटनाएं परीक्षा प्रणाली की निष्पक्षता पर सवाल खड़े करती हैं। वहीं एक अन्य छात्र ने परीक्षा में अतिरिक्त 15 मिनट दिए जाने के फैसले का स्वागत किया। उसके अनुसार यह छोटा सा बदलाव भी छात्रों के लिए काफी मददगार साबित हुआ और उन्हें उत्तर लिखने में थोड़ी राहत मिली। अभिभावकों की प्रतिक्रिया भी इस पूरे माहौल को दर्शाती है। चेन्नई के एक अभिभावक राजकुमार ने बताया कि उनके बेटे ने पहली परीक्षा में अच्छा प्रदर्शन किया था, लेकिन बाद में परीक्षा रद्द हो गई, जिससे उसे मानसिक तनाव से गुजरना पड़ा। हालांकि उनका बेटा पूरे समय सकारात्मक बना रहा और दोबारा तैयारी में जुटा रहा। इसी तरह चेन्नई की ही एक अन्य अभिभावक अम्मू शिबू ने बताया कि लंबे इंतजार के बाद बच्चों ने दोबारा परीक्षा दी। उन्होंने परीक्षा केंद्रों की व्यवस्थाओं को संतोषजनक बताया और कहा कि इस बार प्रक्रिया काफी सुचारू और व्यवस्थित रही, जिससे छात्रों और अभिभावकों दोनों को राहत मिली। कुल मिलाकर यह परीक्षा सिर्फ एक शैक्षणिक प्रक्रिया नहीं रही, बल्कि यह छात्रों की धैर्य, मानसिक मजबूती और सिस्टम में भरोसे की परीक्षा भी बन गई।
वैभव–तिलक की तूफानी पारियां, भारत ए ने फाइनल में 377 रन ठोककर मचाया धमाल

नई दिल्ली । दांबुला के रंगिरी इंटरनेशनल स्टेडियम में खेले जा रहे ट्राई सीरीज फाइनल में भारत ए ने बल्लेबाजी का ऐसा प्रदर्शन किया, जिसने श्रीलंका ए के गेंदबाजों को पूरी तरह बैकफुट पर धकेल दिया। पहले बल्लेबाजी करते हुए भारतीय टीम ने 50 ओवर में 9 विकेट पर 377 रनों का विशाल स्कोर खड़ा किया। इस पारी की सबसे बड़ी खासियत रही युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी की विस्फोटक शुरुआत, जिन्होंने एक बार फिर अपनी आक्रामक बल्लेबाजी से मैच का रुख पूरी तरह बदल दिया। वैभव और प्रियांश आर्या ने पहले विकेट के लिए सिर्फ 8.5 ओवर में 132 रनों की तूफानी साझेदारी की। इस साझेदारी ने श्रीलंका ए के गेंदबाजों को शुरुआती झटका दे दिया। Vaibhav Suryavanshi ने मात्र 29 गेंदों में 94 रनों की पारी खेली। उनकी बल्लेबाजी इतनी आक्रामक रही कि उन्होंने 324 के स्ट्राइक रेट से खेलते हुए 10 चौके और 8 छक्के लगाए। खास बात यह रही कि उन्होंने सिर्फ 11 गेंदों में अर्धशतक लगाकर लिस्ट ए क्रिकेट में नया इतिहास रच दिया। दूसरे छोर से कप्तान Tilak Varma ने जिम्मेदारी भरी पारी खेली और टीम को स्थिरता प्रदान की। उन्होंने 90 गेंदों पर 67 रन बनाए और तीसरे विकेट के लिए ऋतुराज गायकवाड़ के साथ 84 रनों की साझेदारी की। इस साझेदारी ने भारत ए को शुरुआती झटकों के बाद मजबूत स्थिति में पहुंचाया। ऋतुराज गायकवाड़ ने 51 गेंदों में 40 रन बनाए, लेकिन बड़ी पारी खेलने से चूक गए। वहीं कुमार कुशाग्र ने 36 रनों का योगदान दिया। मध्यक्रम में भले ही कुछ बल्लेबाज बड़े स्कोर नहीं कर सके, लेकिन रन गति लगातार तेज बनी रही। अंत के ओवरों में अनुकूल रॉय ने तेजी से रन जोड़ते हुए मात्र 15 गेंदों में 39 रनों की आतिशी पारी खेली। उनकी इस पारी में एक चौका और चार छक्के शामिल रहे, जिसने भारत ए को 370 के पार पहुंचा दिया। इसके अलावा यश ठाकुर नाबाद 2 रन पर रहे। श्रीलंका ए की ओर से गेंदबाजी में कुगाथास मथुलन, वानूजा साहन और रविंदु फर्नांडो ने दो-दो विकेट हासिल किए, लेकिन वे भारतीय बल्लेबाजों की आक्रामकता को रोक नहीं सके। कुल मिलाकर यह पारी भारत ए की बल्लेबाजी गहराई और युवा प्रतिभा का शानदार उदाहरण रही। खासकर वैभव सूर्यवंशी की विस्फोटक शुरुआत ने इस मुकाबले को एकतरफा मोड़ दे दिया।
भारत की स्क्वॉड घोषित, बुमराह की वापसी से तेज गेंदबाजी मजबूत, अय्यर बने उपकप्तान

नई दिल्ली । भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) ने इंग्लैंड के खिलाफ होने वाली तीन मैचों की बहुप्रतीक्षित वनडे सीरीज के लिए भारतीय टीम का ऐलान कर दिया है। इस चयन ने कई बड़े बदलाव और नई रणनीति की ओर संकेत दिया है। टीम की कमान युवा कप्तान शुभमन गिल को सौंपी गई है, जबकि श्रेयस अय्यर को उपकप्तान बनाया गया है। टीम चयन में सबसे बड़ी खबर जसप्रीत बुमराह की वापसी रही, जो लंबे समय बाद वनडे टीम में लौटे हैं। उनकी मौजूदगी से भारतीय तेज गेंदबाजी आक्रमण को मजबूती मिलेगी। वहीं अनुभवी बल्लेबाज विराट कोहली को टीम में शामिल किया गया है, लेकिन उनकी उपलब्धता फिटनेस टेस्ट पर निर्भर करेगी, जिससे टीम प्रबंधन उनकी स्थिति पर नजर बनाए हुए है। ओपनिंग जोड़ी के रूप में रोहित शर्मा और शुभमन गिल को बरकरार रखा गया है, जो भारतीय बल्लेबाजी क्रम की रीढ़ मानी जा रही है। मध्यक्रम में श्रेयस अय्यर, केएल राहुल और ईशान किशन को शामिल किया गया है। राहुल और किशन को विकेटकीपर की जिम्मेदारी भी दी गई है, जबकि ऋषभ पंत को इस बार टीम से बाहर रखा गया है। ऑलराउंडर विभाग में वॉशिंगटन सुंदर, अक्षर पटेल और नीतीश कुमार रेड्डी को टीम में जगह मिली है। इन खिलाड़ियों से टीम को बल्लेबाजी और गेंदबाजी दोनों में संतुलन मिलने की उम्मीद है। तेज गेंदबाजी आक्रमण की कमान जसप्रीत बुमराह के हाथों में होगी। उनके साथ प्रसिद्ध कृष्णा, अर्शदीप सिंह, हर्षित राणा और गुरनूर बरार जैसे युवा गेंदबाजों को भी मौका दिया गया है। स्पिन विभाग में कुलदीप यादव को प्रमुख भूमिका दी गई है। टीम चयन में कुछ बड़े फैसले भी देखने को मिले हैं। अफगानिस्तान के खिलाफ हालिया सीरीज में शतक लगाने वाले यशस्वी जायसवाल को टीम से बाहर कर दिया गया है, जो कई फैंस के लिए चौंकाने वाला फैसला माना जा रहा है। वहीं तेज गेंदबाज वरुण चक्रवर्ती चोट के कारण टी20 सीरीज से बाहर हैं, लेकिन इंग्लैंड के खिलाफ टी20 सीरीज में उनकी वापसी की उम्मीद जताई जा रही है। सीरीज का पहला वनडे 14 जुलाई को एजबेस्टन में खेला जाएगा। दूसरा मुकाबला 16 जुलाई को होगा, जबकि तीसरा और अंतिम वनडे 19 जुलाई को ऐतिहासिक लॉर्ड्स मैदान पर खेला जाएगा। यह सीरीज दोनों टीमों के लिए आगामी बड़े टूर्नामेंटों की तैयारी के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। नई कप्तानी, अनुभवी खिलाड़ियों की वापसी और युवा खिलाड़ियों के मिश्रण के साथ यह टीम काफी संतुलित नजर आ रही है। चयनकर्ताओं का यह फैसला स्पष्ट करता है कि टीम इंडिया अब भविष्य और अनुभव दोनों को साथ लेकर आगे बढ़ने की रणनीति पर काम कर रही है।
जापान का दमदार प्रदर्शन, ट्यूनीशिया को हराकर नॉकआउट की ओर मजबूत कदम

नई दिल्ली । फीफा वर्ल्ड कप 2026 के ग्रुप-एफ मुकाबले में जापान ने ऐसा प्रदर्शन किया जिसने पूरे फुटबॉल जगत को चौंका दिया। मॉन्टेरी में खेले गए इस एकतरफा मुकाबले में जापानी टीम ने ट्यूनीशिया को 4-0 से हराकर न सिर्फ बड़ी जीत दर्ज की, बल्कि कई ऐतिहासिक रिकॉर्ड भी अपने नाम किए। मैच की शुरुआत से ही जापान ने आक्रामक रुख अपनाया और विपक्षी टीम पर दबाव बनाना शुरू कर दिया। इसका नतीजा जल्द ही देखने को मिला, जब अयासे उएदा ने शानदार हेडर लगाकर टीम को 1-0 की बढ़त दिलाई। उनकी यह छलांग और सटीक फिनिशिंग ट्यूनीशिया के डिफेंडरों के लिए पूरी तरह अप्रत्याशित थी। इसके बाद जापान ने अपनी पकड़ और मजबूत कर ली। चौथे मिनट में कीटो नाकामुरा ने पेनल्टी बॉक्स में तेजी दिखाते हुए गेंद को दाइची कामदा तक पहुंचाया, जिन्होंने बिना देर किए उसे गोल में बदल दिया। यह गोल फीफा वर्ल्ड कप इतिहास में किसी जापानी खिलाड़ी द्वारा किया गया सबसे तेज गोल बन गया। पहले हाफ में जापान का दबदबा पूरी तरह से कायम रहा। 31वें मिनट में एक बार फिर अयासे उएदा ने शानदार मूव बनाते हुए अपना दूसरा गोल दागा और टीम को 2-0 से मजबूत स्थिति में पहुंचा दिया। ट्यूनीशिया की टीम इस दबाव से उबर ही नहीं सकी और लगातार डिफेंस में उलझी रही। दूसरे हाफ में भी जापान ने अपने खेल की गति कम नहीं की। 69वें मिनट में जुन्या इतो ने बेहतरीन स्लाइडिंग फिनिश के जरिए तीसरा गोल दागा, जिससे ट्यूनीशिया की वापसी की उम्मीदें पूरी तरह खत्म हो गईं। इसके बाद 83वें मिनट में अयासे उएदा ने अपना दूसरा और मैच का चौथा गोल कर जापान की जीत पर मुहर लगा दी। इस मैच में उएदा का प्रदर्शन सबसे ज्यादा प्रभावशाली रहा। उन्होंने दो गोल दागकर इतिहास रच दिया और फीफा वर्ल्ड कप के एक ही मैच में दो गोल करने वाले पहले जापानी खिलाड़ी बन गए। उनकी आक्रामकता और सटीक फिनिशिंग ने जापान की जीत को आसान बना दिया। इस जीत के साथ Japan ने न केवल नॉकआउट स्टेज में अपनी जगह लगभग पक्की कर ली है, बल्कि यह भी साबित कर दिया है कि एशियाई टीमें अब विश्व फुटबॉल में किसी से कम नहीं हैं। खास बात यह रही कि जापान ने एएफसी इतिहास का एक नया रिकॉर्ड भी बना दिया, क्योंकि किसी भी एशियाई टीम ने वर्ल्ड कप में एक मैच में चार गोल पहले कभी नहीं किए थे। दूसरी ओर, इस हार के साथ Tunisia का टूर्नामेंट सफर समाप्त हो गया है। टीम पूरे मैच में संघर्ष करती नजर आई, लेकिन जापान की गति और रणनीति के सामने वह पूरी तरह बेबस दिखी। यह मुकाबला वर्ल्ड कप इतिहास में जापान की सबसे बड़ी जीतों में से एक बन गया है और आने वाले मैचों के लिए टीम के आत्मविश्वास को और मजबूत कर गया है।
तबाही का दूसरा नाम वैभव सूर्यवंशी, 15 साल की उम्र में ही तोड़े कई बड़े रिकॉर्ड्स

नई दिल्ली । भारतीय क्रिकेट में एक नया नाम तेजी से सुर्खियों में है—वैभव सूर्यवंशी। महज 15 साल की उम्र में इस युवा बल्लेबाज ने अपनी विस्फोटक बल्लेबाजी से पूरी दुनिया को चौंका दिया है। उनकी बल्लेबाजी शैली इतनी आक्रामक और प्रभावशाली है कि उन्हें “तबाही का दूसरा नाम” कहा जाने लगा है। हाल ही में श्रीलंका ए के खिलाफ ट्राई सीरीज फाइनल में वैभव ने सिर्फ 11 गेंदों में अर्धशतक लगाकर लिस्ट ए क्रिकेट का सबसे बड़ा रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया। इससे पहले यह रिकॉर्ड 12 गेंदों में था, जिसे उन्होंने आसानी से पीछे छोड़ दिया। इस पारी ने एक बार फिर साबित कर दिया कि वैभव भविष्य के नहीं, बल्कि वर्तमान के भी स्टार हैं। वैभव का सबसे बड़ा कारनामा केवल यही नहीं है। उन्होंने बेहद कम उम्र में लिस्ट ए क्रिकेट में शतक लगाने का भी रिकॉर्ड बनाया है। मात्र 14 साल 272 दिन की उम्र में शतक जड़कर उन्होंने यह उपलब्धि हासिल की थी। उस मैच में उन्होंने 190 रनों की विशाल पारी खेलकर विपक्षी टीम को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया था। इसके अलावा, वैभव सूर्यवंशी विश्व क्रिकेट में सबसे तेज 150 रन बनाने वाले बल्लेबाज भी हैं। उन्होंने विजय हजारे ट्रॉफी में सिर्फ 59 गेंदों में यह उपलब्धि हासिल की थी, जिसने एबी डिविलियर्स जैसे दिग्गज का रिकॉर्ड तोड़ दिया था। लिस्ट ए क्रिकेट में भारत की ओर से तीसरा सबसे तेज शतक लगाने का रिकॉर्ड भी उनके नाम है। उन्होंने मात्र 36 गेंदों में शतक पूरा कर यह कारनामा किया था। हालांकि भारत में उनसे तेज शतक ईशान किशन और अनमोलप्रीत ने लगाए हैं, लेकिन वैभव की उम्र को देखते हुए यह उपलब्धि बेहद खास मानी जाती है। यूथ क्रिकेट में भी वैभव का प्रदर्शन असाधारण रहा है। अंडर-19 टेस्ट में उन्होंने सिर्फ 58 गेंदों में शतक लगाकर इतिहास रचा था। यह अंडर-19 क्रिकेट इतिहास का दूसरा सबसे तेज शतक है और भारत की ओर से सबसे तेज भी माना जाता है। उनका करियर सिर्फ बल्लेबाजी तक सीमित नहीं है, बल्कि उन्होंने बेहद कम उम्र में रणजी ट्रॉफी में डेब्यू भी किया है। मात्र 12 साल 284 दिन की उम्र में उन्होंने प्रथम श्रेणी क्रिकेट में कदम रखकर खुद को भविष्य का सुपरस्टार साबित किया। आईपीएल में भी वैभव ने अपनी छाप छोड़ी है। उन्होंने राजस्थान रॉयल्स की ओर से खेलते हुए गुजरात टाइटंस के खिलाफ शानदार शतक लगाया था और मात्र 38 गेंदों में 101 रन बनाकर इतिहास रच दिया था। इसी सीजन में उन्होंने 72 छक्के लगाकर क्रिस गेल का रिकॉर्ड भी तोड़ दिया। इन सभी रिकॉर्ड्स को देखकर यह साफ है कि वैभव सूर्यवंशी भारतीय क्रिकेट के भविष्य नहीं, बल्कि वर्तमान की भी सबसे बड़ी खोज बन चुके हैं। उनकी आक्रामक बल्लेबाजी और रिकॉर्ड तोड़ने की क्षमता उन्हें एक अलग ही श्रेणी में खड़ा करती है।
सूर्यवंशी का ‘वैभव’ चमका, 11 गेंदों में अर्धशतक ठोककर 20 साल पुराना रिकॉर्ड ध्वस्त

नई दिल्ली । दांबुला के रंगिरी अंतरराष्ट्रीय स्टेडियम में खेले जा रहे ट्राई सीरीज फाइनल में भारतीय युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी ने ऐसी विस्फोटक पारी खेली जिसने क्रिकेट जगत को हैरान कर दिया। भारत ए और श्रीलंका ए के बीच खेले गए इस मुकाबले में वैभव ने सिर्फ 29 गेंदों पर 94 रनों की तूफानी पारी खेलते हुए कई बड़े रिकॉर्ड अपने नाम कर लिए। मैच की शुरुआत से ही वैभव का आक्रामक अंदाज देखने को मिला। उन्होंने क्रीज पर आते ही गेंदबाजों पर दबाव बना दिया और शुरुआत से ही बड़े शॉट लगाने शुरू कर दिए। उनकी बल्लेबाजी इतनी तेज थी कि श्रीलंका ए के गेंदबाजों के पास कोई जवाब नहीं बचा। सबसे खास बात यह रही कि वैभव सूर्यवंशी ने अपना अर्धशतक सिर्फ 11 गेंदों में पूरा कर दिया, जो लिस्ट ए क्रिकेट इतिहास में अब तक का सबसे तेज अर्धशतक है। इससे पहले यह रिकॉर्ड 2005-06 में कौशल्या वीररत्ने के नाम था, जिन्होंने 12 गेंदों में अर्धशतक बनाया था। वहीं भारत के लिए यह रिकॉर्ड पहले सरफराज खान के नाम था, जिन्होंने 15 गेंदों में फिफ्टी लगाई थी, लेकिन वैभव ने दोनों रिकॉर्ड्स को पीछे छोड़ दिया। अपनी 29 गेंदों की पारी में वैभव ने 10 चौके और 8 छक्के लगाए और उनका स्ट्राइक रेट 324 का रहा, जो उनकी विस्फोटक क्षमता को दर्शाता है। हालांकि वह शतक से चूक गए, लेकिन उनकी पारी ने मैच का पूरा रुख भारत ए की ओर मोड़ दिया। वैभव ने प्रियांश आर्य के साथ मिलकर पहले विकेट के लिए सिर्फ 8.5 ओवर में 132 रनों की साझेदारी की, जिसने टीम को मजबूत स्थिति में पहुंचा दिया। भारत ए ने सिर्फ 6.3 ओवर में ही 100 रन का आंकड़ा पार कर लिया था, जो उनकी आक्रामक बल्लेबाजी का प्रमाण है। पारी के दूसरे ही ओवर में वैभव ने श्रीलंकाई गेंदबाज शिराज को निशाना बनाते हुए तीन छक्के और दो चौके जड़कर 26 रन बटोरे। इस ओवर ने मैच का पूरा माहौल बदल दिया और विपक्षी टीम दबाव में आ गई। महज 15 साल की उम्र में इस तरह का प्रदर्शन करना वैभव सूर्यवंशी की प्रतिभा और आत्मविश्वास को दर्शाता है। उन्होंने लिस्ट ए क्रिकेट में अपना डेब्यू 2024 में किया था और तब से लगातार अपने प्रदर्शन से प्रभावित कर रहे हैं। बिहार के लिए खेलते हुए भी उन्होंने 190 रनों की बड़ी पारी खेली थी, जो उनकी क्षमता को साबित करती है। फाइनल मुकाबले में उनकी यह पारी भारतीय क्रिकेट के भविष्य के लिए एक मजबूत संकेत है कि आने वाले समय में वह बड़े मंच पर भी अपनी छाप छोड़ सकते हैं।