मनी प्लांट के साथ लगाएं ये 5 चमत्कारी पौधे, वास्तु के अनुसार खुल सकते हैं धन के द्वार

नई दिल्ली ।घर में लगे पौधे केवल सजावट का हिस्सा नहीं होते, बल्कि वास्तु शास्त्र और फेंग शुई में इन्हें सकारात्मक ऊर्जा और समृद्धि का स्रोत भी माना गया है। मान्यता है कि कुछ विशेष पौधों को सही दिशा में रखने से घर में सुख, शांति और आर्थिक उन्नति के योग मजबूत होते हैं। यदि आप मनी प्लांट के साथ कुछ और शुभ पौधे लगाना चाहते हैं, तो ये विकल्प आपके लिए लाभदायक माने जाते हैं। सबसे पहले बात करें लकी बैम्बू की। फेंग शुई में इसे सौभाग्य और सफलता का प्रतीक माना जाता है। इसे घर के उत्तर-पूर्व या पूर्व दिशा में रखना शुभ माना जाता है। कहा जाता है कि तीन डंठल खुशियों और छह डंठल समृद्धि का प्रतीक होते हैं। जेड प्लांट भी धन आकर्षित करने वाले पौधों में शामिल किया जाता है। इसकी गोल और हरी पत्तियां आर्थिक उन्नति का प्रतीक मानी जाती हैं। वास्तु के अनुसार इसे घर के दक्षिण-पूर्व यानी आग्नेय कोण में रखने से सकारात्मक परिणाम मिल सकते हैं। मनी ट्री को नए अवसरों और आर्थिक प्रगति का प्रतीक माना जाता है। यह पौधा भी दक्षिण-पूर्व दिशा में रखने पर शुभ फल देने वाला माना जाता है। इसकी देखभाल अपेक्षाकृत आसान होती है और यह घर की सुंदरता भी बढ़ाता है। तुलसी का पौधा भारतीय संस्कृति में विशेष महत्व रखता है। इसे धार्मिक और वास्तु दोनों दृष्टियों से शुभ माना गया है। तुलसी को घर के उत्तर या उत्तर-पूर्व दिशा में लगाने की सलाह दी जाती है। मान्यता है कि इससे घर में सकारात्मक ऊर्जा, सुख और शांति बनी रहती है। चमेली यानी जैस्मीन का पौधा अपनी मनमोहक सुगंध के लिए जाना जाता है। वास्तु मान्यताओं के अनुसार इसे दक्षिण दिशा में या घर के प्रवेश द्वार और खिड़की के आसपास लगाना शुभ माना जाता है। यह रिश्तों में मधुरता और सकारात्मकता बढ़ाने का प्रतीक माना जाता है। इसके अलावा गुलाब और शैमरोक प्लांट भी शुभ पौधों की श्रेणी में रखे जाते हैं। गुलाब को दक्षिण-पश्चिम या दक्षिण-पूर्व दिशा में लगाना अच्छा माना जाता है, जबकि शैमरोक प्लांट को पूर्व दिशा में रखना सौभाग्य से जोड़ा जाता है।
टेक्नोलॉजी से फाइनेंस तक भारतीयों का जलवा, दुनिया की दिग्गज कंपनियों में बढ़ रही नेतृत्वकारी भूमिका; वैश्विक स्तर पर प्रतिभा का बढ़ा सम्मान

नई दिल्ली । वैश्विक कॉरपोरेट जगत में भारतीय मूल के पेशेवरों का बढ़ता प्रभाव एक बार फिर चर्चा के केंद्र में है। दुनिया की अग्रणी तकनीकी, वित्तीय और बहुराष्ट्रीय कंपनियों में भारतीय प्रतिभाएं लगातार शीर्ष नेतृत्व की जिम्मेदारियां संभाल रही हैं। हाल के वर्षों में कई भारतीय मूल के अधिकारियों ने वैश्विक संस्थानों में महत्वपूर्ण पद हासिल किए हैं, जिससे यह स्पष्ट संकेत मिलता है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारतीय पेशेवरों की क्षमता, नेतृत्व कौशल और रणनीतिक सोच को व्यापक मान्यता मिल रही है। फिनटेक क्षेत्र में अपनी अलग पहचान स्थापित करने वाले कुणाल शाह को वैश्विक तकनीकी नेतृत्व से जुड़ी नई जिम्मेदारी मिलने के बाद इस विषय पर चर्चा और तेज हो गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह केवल किसी एक व्यक्ति की उपलब्धि नहीं है, बल्कि उस व्यापक बदलाव का हिस्सा है जिसमें भारतीय मूल के पेशेवर वैश्विक निर्णय प्रक्रिया के महत्वपूर्ण केंद्रों तक पहुंच रहे हैं। डिजिटल अर्थव्यवस्था, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, डेटा प्रबंधन और क्लाउड तकनीक जैसे क्षेत्रों में भारतीय विशेषज्ञों की बढ़ती भूमिका अब वैश्विक कंपनियों की रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुकी है। पिछले एक दशक के दौरान दुनिया की कई प्रमुख कंपनियों ने भारतीय मूल के अधिकारियों को शीर्ष प्रबंधन की जिम्मेदारियां सौंपी हैं। इससे यह धारणा और मजबूत हुई है कि भारतीय पेशेवर जटिल कारोबारी चुनौतियों का समाधान निकालने, बड़े संगठनों का संचालन करने और तेजी से बदलते तकनीकी माहौल के अनुरूप रणनीति तैयार करने में सक्षम हैं। तकनीकी क्षेत्र में मिली इन सफलताओं ने भारत की वैश्विक पहचान को भी मजबूत किया है। विशेषज्ञों के अनुसार भारतीय नेतृत्व की सबसे बड़ी ताकत उसकी बहुआयामी कार्यशैली और वैश्विक दृष्टिकोण है। भारतीय पेशेवर अक्सर विविध सांस्कृतिक और व्यावसायिक परिवेश में काम करने का अनुभव रखते हैं, जिससे वे अंतरराष्ट्रीय कंपनियों की जरूरतों को बेहतर तरीके से समझ पाते हैं। यही कारण है कि उन्हें केवल तकनीकी विशेषज्ञ के रूप में नहीं, बल्कि रणनीतिक नेतृत्वकर्ता के रूप में भी देखा जा रहा है। तकनीक के अलावा भारतीय प्रतिभाओं ने बैंकिंग, वित्तीय सेवाओं, स्वास्थ्य क्षेत्र, साइबर सुरक्षा, सेमीकंडक्टर उद्योग, उपभोक्ता उत्पाद और वैश्विक परामर्श सेवाओं में भी उल्लेखनीय सफलता हासिल की है। आज दुनिया की कई प्रतिष्ठित कंपनियों के बोर्डरूम में भारतीय मूल के अधिकारी महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए दिखाई देते हैं। यह बदलाव दर्शाता है कि भारतीय प्रतिभा का प्रभाव अब किसी एक क्षेत्र तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह वैश्विक अर्थव्यवस्था के विभिन्न क्षेत्रों में फैल चुका है। भारतीय शिक्षा व्यवस्था और तकनीकी संस्थानों की भूमिका भी इस सफलता के पीछे महत्वपूर्ण मानी जाती है। देश के प्रमुख इंजीनियरिंग और प्रबंधन संस्थानों से निकलने वाले छात्र अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर रहे हैं। उच्च शिक्षा, अनुसंधान और नवाचार के क्षेत्र में भारतीय युवाओं की बढ़ती भागीदारी उन्हें वैश्विक प्रतिस्पर्धा में मजबूत स्थिति प्रदान कर रही है। यही कारण है कि विश्व की बड़ी कंपनियां भारतीय प्रतिभाओं को नेतृत्व के लिए उपयुक्त मान रही हैं। विदेशों में उच्च शिक्षा प्राप्त करने वाले भारतीय छात्रों की बढ़ती संख्या भी इस प्रवृत्ति को गति दे रही है। कई भारतीय छात्र वैश्विक विश्वविद्यालयों से शिक्षा प्राप्त करने के बाद अंतरराष्ट्रीय कंपनियों, अनुसंधान संस्थानों और तकनीकी संगठनों में महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभा रहे हैं। समय के साथ इनमें से कई पेशेवर शीर्ष नेतृत्व तक पहुंचकर वैश्विक कारोबारी नीतियों को प्रभावित कर रहे हैं। विश्लेषकों का मानना है कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता, डिजिटल संचार, साइबर सुरक्षा, उन्नत कंप्यूटिंग और डेटा विज्ञान जैसे क्षेत्रों में आने वाले वर्षों में भारतीय मूल के पेशेवरों की भूमिका और अधिक मजबूत होगी। वैश्विक कंपनियों में उनकी बढ़ती भागीदारी केवल व्यक्तिगत उपलब्धियों का प्रतीक नहीं है, बल्कि यह भारत की तकनीकी दक्षता, शिक्षा प्रणाली और विश्व स्तर पर स्वीकार की जा रही प्रतिभा का भी प्रमाण है। बदलते वैश्विक आर्थिक परिदृश्य में भारतीय नेतृत्व की यह उपस्थिति भविष्य में और अधिक प्रभावशाली रूप में सामने आने की संभावना रखती है।
निर्जला एकादशी पर तुलसी जी को अर्पित करें ये वस्तुएं, घर में आएगी सुख-समृद्धि और धन की बरसात

नई दिल्ली ।हिंदू धर्म में निर्जला एकादशी को सभी एकादशियों में सबसे श्रेष्ठ और पुण्यदायी माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन श्रद्धा और नियमपूर्वक व्रत रखने से वर्षभर की सभी एकादशियों के बराबर पुण्य फल प्राप्त होता है। वर्ष 2026 में निर्जला एकादशी का व्रत 25 जून गुरुवार को रखा जाएगा। चूंकि गुरुवार भगवान विष्णु का प्रिय दिन माना जाता है, इसलिए इस बार इस व्रत का महत्व और अधिक बढ़ गया है। ज्योतिष और धर्मशास्त्रों में तुलसी माता को भगवान विष्णु की प्रिय और माता लक्ष्मी का स्वरूप माना गया है। कहा जाता है कि जिस घर में तुलसी की नियमित पूजा होती है, वहां सुख, शांति, समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का वास बना रहता है। निर्जला एकादशी के दिन तुलसी माता की विशेष पूजा करने से भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी दोनों की कृपा प्राप्त होती है। तुलसी माता को अर्पित करें ये शुभ वस्तुएं अक्षत और हल्दीनिर्जला एकादशी के दिन तुलसी माता को हल्दी मिले हुए पीले अक्षत अर्पित करना अत्यंत शुभ माना जाता है। पीला रंग भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी दोनों को प्रिय है। यह उपाय आर्थिक उन्नति और सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है। लाल या पीली चुनरीतुलसी माता को नई लाल या पीली चुनरी अर्पित करने का विशेष महत्व है। यह सम्मान, श्रद्धा और सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है। मान्यता है कि इससे घर में सुख-समृद्धि का वास होता है। सुहाग की सामग्रीचूड़ियां, बिंदी, सिंदूर, कुमकुम और अन्य सुहाग सामग्री तुलसी माता को अर्पित करने से वैवाहिक जीवन में सुख, सौहार्द और परिवार में खुशहाली बनी रहती है। यह उपाय विशेष रूप से महिलाओं के लिए शुभ माना गया है। कलावा बांधेंतुलसी के तने पर सात बार कलावा या मौली बांधकर परिवार की सुख-शांति और समृद्धि की कामना करें। धार्मिक मान्यता है कि इससे घर की नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और शुभ फल प्राप्त होते हैं। घी का दीपक और परिक्रमाशाम के समय तुलसी माता के समक्ष गाय के शुद्ध घी का दीपक जलाएं और कम से कम तीन या सात बार परिक्रमा करें। यह उपाय भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की कृपा प्राप्त करने का सरल और प्रभावी माध्यम माना जाता है। भूलकर भी न करें यह गलतीनिर्जला एकादशी के दिन तुलसी माता को जल अर्पित नहीं किया जाता। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन तुलसी माता स्वयं भगवान विष्णु के लिए निर्जला व्रत रखती हैं। इसलिए इस दिन तुलसी के पौधे में जल चढ़ाना और पत्तियां तोड़ना वर्जित माना गया है। इस नियम का पालन करना बेहद आवश्यक माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार निर्जला एकादशी पर तुलसी माता की विधि-विधान से पूजा करने और इन उपायों को अपनाने से घर में धन, वैभव और खुशहाली का आगमन होता है। साथ ही भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी का विशेष आशीर्वाद भी प्राप्त होता है।
सिनेमाई मर्यादा और सेट अनुशासन पर गंभीर सवाल: जब इंटीमेट सीन्स के दौरान नियंत्रण खो बैठे थे दिवंगत अभिनेता विनोद खन्ना

नई दिल्ली । भारतीय सिनेमा के इतिहास में कलाकारों की कला और उनके किरदारों की हमेशा प्रशंसा की जाती है, लेकिन कई बार सेट पर घटित कुछ अप्रत्याशित और असहज करने वाली घटनाएं वर्षों बाद भी गंभीर चर्चाओं का विषय बन जाती हैं। सत्तर और अस्सी के दशक के शीर्ष अभिनेताओं में शुमार दिवंगत सुपरस्टार विनोद खन्ना से जुड़े कुछ पुराने विवाद इस समय गलियारों में चर्चा का केंद्र बने हुए हैं। एक वरिष्ठ मनोरंजन पत्रकार द्वारा हाल ही में दिए गए साक्षात्कार के अनुसार, फिल्मों में रोमांटिक और संवेदनशील दृश्यों को फिल्माते समय विनोद खन्ना अक्सर अपने अभिनय में इस कदर डूब जाते थे कि वे पूरी तरह से अपना नियंत्रण खो बैठते थे। इसका खामियाजा उनके साथ काम करने वाली समकालीन और नवोदित अभिनेत्रियों को शारीरिक और मानसिक पीड़ा के रूप में भुगतना पड़ा था। यह पहली बड़ी घटना फिल्म ‘प्रेम धरम’ के निर्माण के दौरान सामने आई थी, जिसका निर्देशन जाने-माने फिल्म निर्माता महेश भट्ट कर रहे थे। इस फिल्म के एक मुख्य दृश्य में विनोद खन्ना और अभिनेत्री डिंपल कपाड़िया के बीच एक बेहद संवेदनशील और इंटीमेट दृश्य को फिल्माया जा रहा था। जैसे ही कैमरे ने काम करना शुरू किया, अभिनेता दृश्य के प्रभाव में इस कदर खो गए कि उन्हें आसपास के माहौल का बिल्कुल भी ध्यान नहीं रहा। दृश्य की समाप्ति पर जब निर्देशक महेश भट्ट ने लाउडस्पीकर के माध्यम से बार-बार ‘कट’ बोला, तब भी विनोद खन्ना नहीं रुके। डिंपल कपाड़िया उस समय फिल्म उद्योग में बहुत नई थीं और वे निर्देशक के निर्देश और अभिनेता के इस व्यवहार के बीच पूरी तरह असमंजस में फंस गईं। आखिरकार, स्थिति को नियंत्रण से बाहर होते देख निर्देशक और सेट पर मौजूद चार-पांच क्रू सदस्यों को खुद आगे आकर दोनों को अलग करना पड़ा था। इसके बाद, साल 1988 में रिलीज हुई फिल्म ‘दयावान’ के सेट पर एक और अधिक गंभीर वाकया हुआ, जिसने फिल्म जगत को स्तब्ध कर दिया था। इस फिल्म में विनोद खन्ना के साथ मुख्य भूमिका में अभिनेत्री माधुरी दीक्षित थीं, जो उस समय उम्र और अनुभव में अभिनेता से काफी छोटी थीं। फिल्म के एक गीत के दौरान दोनों के बीच एक बेहद नजदीकी किसिंग सीन फिल्माया जाना तय हुआ था। इस दौरान अभिनेता ने एक बार फिर अपना आपा खो दिया और निर्देशक द्वारा दृश्य समाप्त करने की घोषणा के बाद भी वे नहीं रुके। यह स्थिति तब और अधिक दर्दनाक हो गई जब उत्तेजना के प्रवाह में आकर विनोद खन्ना ने सह-अभिनेत्री के होठों को दांतों से काट लिया। घाव इतना गहरा था कि माधुरी दीक्षित के होठों से तत्काल खून बहने लगा, जिसे देखकर सेट पर उपस्थित सभी लोग सन्न रह गए। इसके बाद ही अभिनेता होश में आए और पीछे हटे। इस पूरे वाकये ने युवा अभिनेत्री को गहरे मानसिक आघात में डाल दिया था। अपमान और दर्द से भरी माधुरी दीक्षित तुरंत सेट छोड़कर अपनी वैनिटी वैन में चली गईं और फूट-फूटकर रोने लगीं। इस कटु अनुभव का उनके मन पर इतना गहरा असर हुआ कि उन्होंने भविष्य में कभी भी फिल्मों में इस तरह के अत्यधिक इंटीमेट दृश्यों को न करने की शपथ ले ली थी। सिनेमाई सेटों पर सुरक्षा और गरिमा के लिहाज से यह ऐतिहासिक संदर्भ आज भी प्रासंगिक माना जाता है।
25 जून को निर्जला एकादशी का महासंयोग, मेष से कुंभ तक इन राशियों पर बरसेगी भगवान विष्णु की कृपा

नई दिल्ली ।निर्जला एकादशी हिंदू धर्म में वर्ष की सबसे महत्वपूर्ण एकादशियों में से एक मानी जाती है। मान्यता है कि इस दिन विधि-विधान से भगवान विष्णु की पूजा और व्रत करने से सभी एकादशियों के समान पुण्य फल प्राप्त होता है। वर्ष 2026 में निर्जला एकादशी 25 जून गुरुवार को पड़ रही है, जिससे इसका धार्मिक महत्व और अधिक बढ़ गया है। गुरुवार स्वयं भगवान विष्णु और देवगुरु बृहस्पति का दिन माना जाता है। ऐसे में इस बार का व्रत श्रद्धालुओं के लिए विशेष फलदायी माना जा रहा है। ज्योतिषीय दृष्टि से भी यह दिन अत्यंत शुभ माना जा रहा है। द्रिक पंचांग के अनुसार निर्जला एकादशी पर एक साथ कई शुभ योगों का निर्माण हो रहा है। सुबह 5 बजकर 25 मिनट से शाम 4 बजकर 29 मिनट तक रवि योग रहेगा, जिसे सभी प्रकार के शुभ कार्यों के लिए अत्यंत मंगलकारी माना जाता है। इसके अलावा सुबह 10 बजकर 53 मिनट से सिद्ध योग प्रारंभ होगा, जो देर रात तक प्रभावी रहेगा। सिद्ध योग को सफलता, उन्नति और मनोकामना पूर्ति का कारक माना जाता है। वहीं सिद्ध योग से पहले शिव योग का निर्माण भी होगा, जो जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और शुभ परिणाम लेकर आता है। इन विशेष योगों का प्रभाव सभी राशियों पर पड़ेगा, लेकिन चार राशियों के लिए यह समय विशेष रूप से लाभकारी माना जा रहा है। मेष राशिमेष राशि के जातकों के लिए निर्जला एकादशी नई उम्मीदें लेकर आ सकती है। लंबे समय से अटके हुए कार्यों में गति आएगी और आर्थिक मामलों में राहत मिलने की संभावना है। घर, भूमि या संपत्ति से जुड़े मामलों में सकारात्मक परिणाम मिल सकते हैं। स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां धीरे-धीरे कम होने के संकेत हैं। निवेश और भविष्य की योजनाओं में भी सफलता मिलने के योग बन रहे हैं।कर्क राशिकर्क राशि वालों के लिए यह समय पारिवारिक सुख और शांति लेकर आ सकता है। परिवार के सदस्यों के बीच चल रही गलतफहमियां दूर होंगी और रिश्तों में मधुरता बढ़ेगी। लंबे समय से रुका हुआ धन वापस मिलने की संभावना है। घरेलू वातावरण सकारात्मक रहेगा और परिवार के साथ यादगार समय बिताने का अवसर मिलेगा। तुला राशितुला राशि के जातकों के लिए यह शुभ संयोग करियर और आर्थिक क्षेत्र में सफलता दिलाने वाला साबित हो सकता है। कार्यस्थल पर आपकी मेहनत का फल मिलेगा और वरिष्ठ अधिकारियों का सहयोग प्राप्त होगा। आर्थिक स्थिति मजबूत होगी तथा किसी कीमती वस्तु की खरीदारी का योग बन सकता है। स्वास्थ्य के लिहाज से भी यह समय राहत देने वाला रहेगा, विशेषकर आंखों से जुड़ी समस्याओं में सुधार देखने को मिल सकता है। कुंभ राशिकुंभ राशि वालों के लिए व्यापार और व्यवसाय में लाभ के संकेत हैं। रुके हुए कार्य पूरे होंगे और आय के नए स्रोत खुल सकते हैं। मानसिक तनाव में कमी आएगी और आत्मविश्वास बढ़ेगा। स्वास्थ्य पहले की तुलना में बेहतर रहेगा, हालांकि खान-पान और दिनचर्या को लेकर सतर्क रहने की सलाह दी जाती है। व्यापारिक निर्णयों में सफलता मिलने की संभावना है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार निर्जला एकादशी पर भगवान विष्णु की पूजा, दान-पुण्य और व्रत करने से विशेष पुण्य फल प्राप्त होता है। इस बार बन रहे शुभ योगों के कारण यह पर्व आध्यात्मिक और ज्योतिषीय दोनों दृष्टियों से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
नीति आयोग समर्थित राष्ट्रीय इनोवेशन चैलेंज में युवा स्टार्टअप्स का दमदार प्रदर्शन, सस्टेनेबिलिटी आधारित छह नवाचारों को मिली बड़ी पहचान और वित्तीय सहायता

नई दिल्ली । देश में नवाचार और उद्यमिता को नई दिशा देने के उद्देश्य से आयोजित राष्ट्रीय स्तर की एक प्रमुख प्रतियोगिता में युवाओं द्वारा संचालित छह स्टार्टअप्स को विजेता घोषित किया गया है। सस्टेनेबिलिटी, संसाधन संरक्षण और सामाजिक प्रभाव पर आधारित इन स्टार्टअप्स ने अपने अभिनव समाधानों के दम पर राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाई है। चयनित उद्यमों को वित्तीय सहायता के साथ-साथ प्रशिक्षण, मेंटरशिप और उद्योग जगत से जुड़ने के अवसर भी उपलब्ध कराए जाएंगे, जिससे उनके विचारों को बड़े स्तर पर विकसित करने में मदद मिलेगी। यह प्रतियोगिता देश में उभरते उद्यमियों को प्रोत्साहित करने और सतत विकास से जुड़े समाधान विकसित करने के उद्देश्य से आयोजित की गई थी। इसमें सर्कुलर इकोनॉमी, टिकाऊ वस्त्र एवं फैशन, पर्यावरण-अनुकूल खाद्य प्रणालियां तथा जल संरक्षण जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों को केंद्र में रखा गया। इन विषयों पर आधारित नवाचारों ने न केवल तकनीकी क्षमता दिखाई बल्कि सामाजिक और पर्यावरणीय चुनौतियों के समाधान की दिशा में भी महत्वपूर्ण संभावनाएं प्रस्तुत कीं। प्रतियोगिता को राष्ट्रीय स्तर पर व्यापक प्रतिस्पर्धा मिली। देश के 28 राज्यों से 350 से अधिक आवेदन प्राप्त हुए, जिनमें से 50 संभावनाशील स्टार्टअप्स का चयन एक विशेष क्षमता विकास कार्यक्रम के लिए किया गया। तीन महीने तक चलने वाले इस कार्यक्रम में प्रतिभागियों को व्यवसाय विकास, बाजार रणनीति, प्रभाव मूल्यांकन और निवेशकों से संवाद जैसे विषयों पर प्रशिक्षण दिया गया। इस दौरान विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों और उद्योग जगत से जुड़े अनुभवी पेशेवरों ने मार्गदर्शन प्रदान किया। कार्यक्रम के तहत सभी चयनित स्टार्टअप्स को अपने विचार और व्यवसाय मॉडल विशेषज्ञों की जूरी के समक्ष प्रस्तुत करने का अवसर मिला। मूल्यांकन प्रक्रिया के बाद शीर्ष 20 स्टार्टअप्स को एक विशेष इमर्शन बूटकैंप के लिए चुना गया, जहां उन्हें उद्यमिता से जुड़े व्यावहारिक अनुभवों और उद्योग की वास्तविक चुनौतियों को समझने का अवसर मिला। इस दौरान निवेशकों, नीति निर्माताओं, तकनीकी विशेषज्ञों और सफल उद्यमियों के साथ संवाद ने प्रतिभागियों को अपने मॉडल को और अधिक मजबूत बनाने में सहायता प्रदान की। अंतिम चरण में तीन स्टार्टअप्स को विजेता घोषित करते हुए उन्हें 3.5 लाख रुपये की सीड ग्रांट प्रदान की गई, जबकि तीन अन्य स्टार्टअप्स को उपविजेता के रूप में 2.2 लाख रुपये की वित्तीय सहायता दी गई। इसके अतिरिक्त सभी विजेता टीमों को क्षमता विकास कार्यक्रमों और राष्ट्रीय नवाचार नेटवर्क से जोड़ने की व्यवस्था भी की गई है ताकि वे अपने समाधानों को व्यापक स्तर पर लागू कर सकें। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत में प्रतिभा और नवाचार की कमी नहीं है, लेकिन संसाधनों और अवसरों का समान वितरण अभी भी एक बड़ी चुनौती बना हुआ है। बड़े शहरों में निवेश और मार्गदर्शन अपेक्षाकृत अधिक उपलब्ध है, जबकि छोटे शहरों, दूरस्थ क्षेत्रों और पूर्वोत्तर राज्यों के उद्यमियों तक ऐसे अवसर सीमित रूप से पहुंच पाते हैं। इसी अंतर को कम करने के लिए इस प्रकार की पहलें महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। कार्यक्रम से जुड़े अधिकारियों ने बताया कि चयनित स्टार्टअप्स में महिला उद्यमियों की भागीदारी भी उल्लेखनीय रही। कुल चयनित उद्यमों में 40 प्रतिशत से अधिक महिलाओं द्वारा संचालित हैं, जो देश के नवाचार परिदृश्य में बढ़ती महिला भागीदारी और नेतृत्व क्षमता को दर्शाता है। विशेषज्ञों के अनुसार, युवा नेतृत्व, तकनीकी नवाचार और सामाजिक उत्तरदायित्व का यह संगम भारत को सतत विकास के लक्ष्यों की दिशा में आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण योगदान दे सकता है।
सरकारी बीमा दिग्गज एलआईसी का बड़ा तोहफा: 10 रुपए प्रति शेयर लाभांश के लिए आज ही खरीदने होंगे शेयर

नई दिल्ली । भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) के शेयरधारकों के लिए बुधवार का दिन बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। देश की सबसे बड़ी सरकारी बीमा कंपनी ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए 10 रुपए प्रति इक्विटी शेयर के अंतिम डिविडेंड की घोषणा की है और इसके लिए 25 जून को रिकॉर्ड डेट निर्धारित की गई है। ऐसे में जो निवेशक इस लाभांश का फायदा उठाना चाहते हैं, उनके लिए 24 जून तक शेयर खरीदना जरूरी है। भारतीय शेयर बाजार में लागू टी+1 सेटलमेंट व्यवस्था के अनुसार किसी भी निवेशक का नाम रिकॉर्ड डेट तक कंपनी के शेयरधारकों की सूची में होना चाहिए। इसके लिए निवेशकों को रिकॉर्ड डेट से एक कारोबारी दिन पहले तक शेयर खरीदने होते हैं ताकि तय तारीख तक शेयर उनके डीमैट खाते में दिखाई दें। इसी कारण 24 जून को एलआईसी के शेयर खरीदने वाले निवेशक डिविडेंड के पात्र माने जाएंगे। कंपनी ने अपने शेयरधारकों को प्रति इक्विटी शेयर 10 रुपए के अंतिम लाभांश का प्रस्ताव दिया है। यह भुगतान उन निवेशकों को मिलेगा जिनके नाम रिकॉर्ड डेट पर कंपनी के रिकॉर्ड में दर्ज होंगे। डिविडेंड को निवेशकों के लिए अतिरिक्त आय का एक महत्वपूर्ण स्रोत माना जाता है, क्योंकि कंपनियां अपने मुनाफे का एक हिस्सा शेयरधारकों के साथ साझा करती हैं। एलआईसी ने हाल के महीनों में मजबूत वित्तीय प्रदर्शन दर्ज किया है, जिसका असर कंपनी के निवेशकों के विश्वास पर भी दिखाई दिया है। वित्त वर्ष 2025-26 की चौथी तिमाही में कंपनी का समेकित शुद्ध लाभ 23.2 प्रतिशत बढ़कर 23,420 करोड़ रुपए तक पहुंच गया। पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही में यह आंकड़ा 19,013 करोड़ रुपए था। इस प्रदर्शन के साथ एलआईसी वित्तीय क्षेत्र की सबसे अधिक मुनाफा कमाने वाली कंपनियों में शामिल रही। जनवरी से मार्च 2026 की अवधि में कंपनी की शुद्ध प्रीमियम आय में भी उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई। यह बढ़कर लगभग 1.7 लाख करोड़ रुपए तक पहुंच गई, जबकि एक वर्ष पहले समान अवधि में यह करीब 1.5 लाख करोड़ रुपए थी। प्रीमियम आय में यह वृद्धि कंपनी के व्यवसाय विस्तार और बाजार में उसकी मजबूत स्थिति को दर्शाती है। एलआईसी ने केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रमों के बीच सबसे अधिक तिमाही लाभ अर्जित करने वाली कंपनी का स्थान भी बनाए रखा है। मजबूत आय, लाभ में वृद्धि और स्थिर कारोबारी प्रदर्शन के कारण कंपनी निवेशकों के बीच लगातार आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। कंपनी की परिसंपत्तियों के आकार में भी बढ़ोतरी देखने को मिली है। 31 मार्च 2026 तक प्रबंधनाधीन परिसंपत्तियां 57 लाख करोड़ रुपए से अधिक के स्तर पर पहुंच गईं। यह पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 5 प्रतिशत की वृद्धि को दर्शाता है। एसेट्स अंडर मैनेजमेंट में लगातार वृद्धि कंपनी की वित्तीय मजबूती और निवेशकों के भरोसे को प्रतिबिंबित करती है। डिविडेंड आय से जुड़े कर नियमों को लेकर भी निवेशकों को सतर्क रहने की आवश्यकता है। वर्तमान नियमों के अनुसार यदि किसी निवासी व्यक्ति को एक वित्त वर्ष में 5,000 रुपए से अधिक का कुल डिविडेंड प्राप्त होता है, तो उस पर 10 प्रतिशत की दर से स्रोत पर कर कटौती लागू होती है। इसलिए निवेशकों को अपने कर दायित्वों का भी ध्यान रखना चाहिए। मजबूत वित्तीय परिणाम, बढ़ता लाभ, विशाल परिसंपत्ति आधार और आकर्षक डिविडेंड घोषणा के चलते एलआईसी के शेयर एक बार फिर निवेशकों की चर्चा के केंद्र में हैं। रिकॉर्ड डेट से पहले डिविडेंड पात्रता हासिल करने की होड़ के बीच बाजार की नजरें अब कंपनी के आगामी प्रदर्शन और निवेशकों की प्रतिक्रिया पर टिकी हुई हैं।
गिरावट के बाद शेयर बाजार की शानदार वापसी, आईटी और बैंकिंग शेयरों ने भरी रफ्तार; निवेशकों की बढ़ी उम्मीदें

नई दिल्ली । पिछले कारोबारी सत्र की कमजोरी को पीछे छोड़ते हुए भारतीय शेयर बाजार ने बुधवार को शानदार वापसी दर्ज की। दिनभर खरीदारी का मजबूत रुख देखने को मिला, जिसके चलते प्रमुख सूचकांक बढ़त के साथ बंद हुए। निवेशकों की सकारात्मक भागीदारी और प्रमुख क्षेत्रों में खरीदारी के कारण बाजार ने एक बार फिर मजबूती का संकेत दिया। सेंसेक्स में करीब 800 अंकों की तेजी दर्ज हुई, जबकि निफ्टी 24,000 के महत्वपूर्ण स्तर को पार करने में सफल रहा। कारोबार समाप्त होने पर बीएसई सेंसेक्स 790.54 अंकों की बढ़त के साथ 76,991.22 के स्तर पर बंद हुआ। वहीं एनएसई निफ्टी 50 सूचकांक 197.55 अंक चढ़कर 24,021.65 पर पहुंच गया। बाजार की शुरुआत भी सकारात्मक रही और दिनभर निवेशकों का रुझान खरीदारी की ओर बना रहा। कारोबार के दौरान सेंसेक्स ने 77,190.37 का उच्चतम स्तर छुआ, जबकि निफ्टी 24,090.05 तक पहुंच गया। बाजार में तेजी केवल बड़ी कंपनियों तक सीमित नहीं रही। व्यापक बाजार में भी निवेशकों ने सक्रियता दिखाई। मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी खरीदारी देखने को मिली, जिससे यह संकेत मिला कि निवेशकों का भरोसा विभिन्न वर्गों के शेयरों में बना हुआ है। विश्लेषकों का मानना है कि व्यापक स्तर पर निवेशकों की भागीदारी बाजार की मजबूती का सकारात्मक संकेत मानी जाती है। सेक्टोरल प्रदर्शन की बात करें तो सूचना प्रौद्योगिकी और रियल्टी क्षेत्र के शेयरों ने सबसे बेहतर प्रदर्शन किया। इन दोनों क्षेत्रों के सूचकांकों में दो प्रतिशत से अधिक की बढ़त दर्ज की गई। बैंकिंग और निजी बैंकिंग शेयरों में भी मजबूत खरीदारी देखने को मिली, जिसने बाजार को ऊपर ले जाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। दूसरी ओर ऑटोमोबाइल और धातु क्षेत्र के कुछ शेयरों में दबाव दिखाई दिया, जिसके कारण इन सेक्टरों का प्रदर्शन अपेक्षाकृत कमजोर रहा। दिनभर के कारोबार में कई प्रमुख कंपनियों के शेयर निवेशकों के आकर्षण का केंद्र बने रहे। एविएशन, वित्तीय सेवाओं और तकनीकी क्षेत्र से जुड़ी कंपनियों में मजबूत तेजी देखने को मिली। इसके विपरीत ऊर्जा और धातु क्षेत्र की कुछ बड़ी कंपनियों के शेयरों में मुनाफावसूली का असर दिखाई दिया। हालांकि इन चुनिंदा शेयरों की कमजोरी बाजार की समग्र तेजी को प्रभावित नहीं कर सकी। बाजार विशेषज्ञों के अनुसार हालिया गिरावट के बाद निवेशकों द्वारा की गई खरीदारी ने बाजार को नई ऊर्जा प्रदान की है। तकनीकी चार्ट पर निफ्टी ने मजबूत तेजी का संकेत देने वाला पैटर्न बनाया है, जिससे निकट भविष्य में बाजार की दिशा को लेकर सकारात्मक संकेत मिल रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि प्रमुख सूचकांक का महत्वपूर्ण तकनीकी स्तरों के ऊपर बने रहना निवेशकों के विश्वास को मजबूत करता है। तकनीकी विश्लेषण के आधार पर निफ्टी ने एक बार फिर अपने महत्वपूर्ण औसत स्तर के ऊपर जगह बनाई है। साथ ही बाजार की गति को मापने वाले प्रमुख संकेतकों में भी सुधार दर्ज किया गया है। इससे यह संकेत मिलता है कि हालिया करेक्शन के बाद बाजार में खरीदारी की वापसी हो रही है और निवेशकों का रुझान फिर से सकारात्मक बना है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले कारोबारी सत्रों में निफ्टी के लिए 24,140 से 24,170 के बीच का क्षेत्र महत्वपूर्ण प्रतिरोध साबित हो सकता है। यदि सूचकांक इस दायरे को पार कर स्थिरता बनाए रखने में सफल रहता है तो आगे और तेजी की संभावना बन सकती है। वहीं नीचे की ओर 23,900 से 23,870 का स्तर महत्वपूर्ण समर्थन माना जा रहा है। जब तक निफ्टी इस दायरे के ऊपर बना रहेगा, तब तक बाजार की समग्र धारणा सकारात्मक रहने की संभावना व्यक्त की जा रही है।
नई दिल्ली में व्यापार वार्ता को मिली रफ्तार, भारत-अमेरिका ने संतुलित और पारस्परिक लाभ वाले समझौते की दिशा में बढ़ाए कदम

नई दिल्ली । भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित द्विपक्षीय व्यापार समझौते को लेकर बातचीत निर्णायक चरण में पहुंचती दिखाई दे रही है। दोनों देशों के वरिष्ठ प्रतिनिधियों के बीच नई दिल्ली में हुई उच्चस्तरीय बैठकों में व्यापारिक संबंधों को और मजबूत बनाने, निवेश बढ़ाने तथा आर्थिक सहयोग के नए अवसरों पर व्यापक चर्चा की गई। आगामी टैरिफ समयसीमा से पहले वार्ता में तेजी आने को दोनों देशों के आर्थिक रिश्तों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल और अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जैमीसन ग्रीर के बीच हुई बैठकों में व्यापार समझौते के विभिन्न पहलुओं की समीक्षा की गई। दोनों पक्षों ने व्यापार वार्ता में हुई प्रगति का आकलन करते हुए उन क्षेत्रों की पहचान की, जहां आपसी सहयोग को और मजबूत बनाया जा सकता है। चर्चा का मुख्य उद्देश्य ऐसा समझौता तैयार करना है, जिससे दोनों देशों को समान रूप से लाभ मिल सके और आर्थिक गतिविधियों को नई गति प्राप्त हो। बैठकों के बाद गोयल ने कहा कि दोनों देशों के बीच आर्थिक साझेदारी लगातार मजबूत हो रही है और व्यापार वार्ता सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ रही है। उन्होंने बताया कि विभिन्न मुद्दों पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया तथा व्यापारिक सहयोग को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने के लिए संभावनाओं पर चर्चा हुई। उन्होंने वार्ता प्रक्रिया में अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल और दोनों देशों की टीमों द्वारा किए जा रहे प्रयासों की भी सराहना की। भारत और अमेरिका लंबे समय से ऐसे व्यापार समझौते पर काम कर रहे हैं जो दोनों देशों के उद्योगों, निर्यातकों और निवेशकों के लिए नए अवसर पैदा कर सके। वर्तमान दौर की बातचीत में बाजार पहुंच, व्यापारिक बाधाओं को कम करने, निवेश को प्रोत्साहित करने और आर्थिक सहयोग बढ़ाने जैसे विषयों पर विशेष ध्यान दिया गया। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह समझौता अंतिम रूप लेता है तो दोनों देशों के व्यापारिक संबंधों को नई मजबूती मिलेगी। इस दौरान अमेरिकी प्रतिनिधियों और भारतीय अधिकारियों के बीच कई दौर की चर्चाएं हुईं, जिनमें आर्थिक साझेदारी के भविष्य को लेकर व्यापक सहमति बनाने का प्रयास किया गया। दोनों देशों ने यह संकेत दिया है कि वार्ता को आगे बढ़ाने के लिए राजनीतिक और आर्थिक स्तर पर पर्याप्त इच्छाशक्ति मौजूद है। यही कारण है कि समझौते को लेकर उम्मीदें पहले की तुलना में अधिक मजबूत दिखाई दे रही हैं। भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक संबंध पिछले कुछ वर्षों में लगातार विस्तार कर रहे हैं। दोनों देश वैश्विक अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं और तकनीक, विनिर्माण, ऊर्जा, कृषि तथा सेवा क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने की दिशा में लगातार काम कर रहे हैं। प्रस्तावित समझौते को इसी व्यापक आर्थिक सहयोग का अगला महत्वपूर्ण चरण माना जा रहा है। अमेरिकी पक्ष ने भी इस वार्ता को दोनों देशों के लिए लाभकारी बताते हुए कहा है कि मजबूत व्यापार समझौता न केवल आर्थिक अवसरों का विस्तार करेगा, बल्कि रणनीतिक साझेदारी को भी नई मजबूती प्रदान करेगा। अधिकारियों का मानना है कि समझौते के जरिए निवेश प्रवाह बढ़ेगा, रोजगार के अवसर सृजित होंगे और दोनों अर्थव्यवस्थाओं के बीच आपसी निर्भरता और विश्वास में वृद्धि होगी। आगामी टैरिफ समयसीमा को देखते हुए दोनों देशों के बीच बातचीत का महत्व और बढ़ गया है। ऐसे में नई दिल्ली में हुई हालिया बैठकों को व्यापार समझौते की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। अब नजर इस बात पर रहेगी कि आने वाले दिनों में दोनों पक्ष लंबित मुद्दों पर कितनी जल्दी सहमति बनाकर समझौते को अंतिम रूप दे पाते हैं।
भारत बनेगा अमेजन के सबसे बड़े ग्रोथ इंजन का केंद्र, ‘अमेजन नाउ’ की रिकॉर्ड रफ्तार से उत्साहित सीईओ एंडी जेसी ने जताया बड़ा भरोसा

नई दिल्ली । भारत वैश्विक ई-कॉमर्स उद्योग के लिए तेजी से एक प्रमुख केंद्र के रूप में उभर रहा है और दुनिया की अग्रणी ई-कॉमर्स कंपनियों में शामिल अमेजन भी भारतीय बाजार को अपनी भविष्य की विकास रणनीति का महत्वपूर्ण आधार मान रही है। कंपनी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी एंडी जेसी ने भारत को अमेजन के सबसे तेजी से बढ़ते कारोबारों में से एक बताया है। उन्होंने कहा कि देश में शुरू की गई ‘अमेजन नाउ’ सेवा ने बेहद कम समय में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की है और यह वर्तमान में कंपनी की सबसे तेज गति से बढ़ने वाली ई-कॉमर्स बिजनेस यूनिट बन चुकी है। मुंबई में स्थित एक माइक्रो-फुलफिलमेंट सेंटर के दौरे के दौरान एंडी जेसी ने भारतीय बाजार की संभावनाओं पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि भारतीय उपभोक्ताओं के बीच तेज डिलीवरी सेवाओं की मांग लगातार बढ़ रही है और ग्राहक अब कुछ ही मिनटों में सामान प्राप्त करने की सुविधा को प्राथमिकता दे रहे हैं। इसी बदलती उपभोक्ता प्रवृत्ति को ध्यान में रखते हुए कंपनी ने क्विक कॉमर्स सेगमेंट में अपने निवेश और विस्तार को गति दी है। माइक्रो-फुलफिलमेंट सेंटर आधुनिक लॉजिस्टिक मॉडल का हिस्सा हैं, जिन्हें विशेष रूप से तेज डिलीवरी सुनिश्चित करने के लिए विकसित किया गया है। इन केंद्रों में दैनिक जरूरतों से जुड़े उत्पाद जैसे किराना सामान, व्यक्तिगत उपयोग की वस्तुएं, बच्चों के उत्पाद और घरेलू सामग्री व्यवस्थित रूप से रखी जाती हैं, ताकि ऑर्डर मिलते ही उन्हें तेजी से पैक कर ग्राहकों तक पहुंचाया जा सके। कंपनी का दावा है कि इस मॉडल के जरिए ग्राहकों को बहुत कम समय में डिलीवरी उपलब्ध कराई जा रही है। एंडी जेसी के अनुसार ‘अमेजन नाउ’ सेवा को उपयोग करने वाले ग्राहकों, विशेष रूप से प्राइम सदस्यों, के खरीदारी व्यवहार में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। उन्होंने बताया कि जो ग्राहक इस सेवा का उपयोग करना शुरू करते हैं, उनकी खरीदारी की आवृत्ति पहले की तुलना में कई गुना बढ़ जाती है। इससे न केवल ग्राहक जुड़ाव मजबूत हुआ है, बल्कि प्लेटफॉर्म पर ऑर्डर की संख्या में भी लगातार वृद्धि दर्ज की जा रही है। कंपनी के आंकड़ों के अनुसार भारत में इस सेवा की शुरुआत के बाद से प्रत्येक तिमाही में ऑर्डर की संख्या लगभग दोगुनी हो रही है। यह वृद्धि दर्शाती है कि तेज डिलीवरी आधारित सेवाओं को लेकर भारतीय उपभोक्ताओं का रुझान तेजी से बढ़ रहा है। इसी मांग को देखते हुए अमेजन अब अपने नेटवर्क का व्यापक विस्तार करने की तैयारी कर रही है। कंपनी ने आने वाले समय में ‘अमेजन नाउ’ को 300 से अधिक शहरों तक पहुंचाने का लक्ष्य निर्धारित किया है। इसके साथ ही भारत में मिनटों में डिलीवरी करने वाले सबसे बड़े नेटवर्क के निर्माण की दिशा में भी काम किया जा रहा है। अमेजन का मानना है कि भारत जैसे विशाल और विविधतापूर्ण बाजार में क्विक कॉमर्स की संभावनाएं अभी शुरुआती चरण में हैं और आने वाले वर्षों में इसमें कई गुना वृद्धि देखने को मिल सकती है। एंडी जेसी ने यह भी कहा कि भारत में विकसित किए जा रहे परिचालन मॉडल और नवाचार कंपनी के लिए वैश्विक स्तर पर भी उपयोगी साबित हो रहे हैं। भारत में मिले अनुभवों का उपयोग अमेरिका सहित अन्य अंतरराष्ट्रीय बाजारों में समान सेवाओं के विस्तार के लिए किया जा रहा है। उनके अनुसार भारतीय टीमों ने जिस तरह तेज डिलीवरी और ग्राहक सुविधा को लेकर नए समाधान विकसित किए हैं, वह वैश्विक स्तर पर अमेजन की रणनीति को मजबूती प्रदान कर रहे हैं। उन्होंने भारतीय बाजार के प्रति भरोसा जताते हुए कहा कि यहां विकास की संभावनाएं अभी केवल शुरुआत हैं। तेजी से बढ़ती डिजिटल अर्थव्यवस्था, इंटरनेट उपयोगकर्ताओं की बढ़ती संख्या और बदलती उपभोक्ता आदतें भारत को ई-कॉमर्स और क्विक कॉमर्स क्षेत्र का सबसे महत्वपूर्ण बाजार बनाने की दिशा में आगे बढ़ा रही हैं। अमेजन आने वाले वर्षों में इसी क्षमता का लाभ उठाते हुए अपने कारोबार का विस्तार करने की रणनीति पर काम कर रही है।