दिव्यांगों की आवाज बने राहुल शाह, कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन; शिक्षा, रोजगार और सुविधाओं की उठाई मांग

नई दिल्ली ।सिंगरौली जिले के मूकबधिर एवं अन्य दिव्यांगजनों ने अपनी समस्याओं और लंबे समय से लंबित मांगों को लेकर कलेक्ट्रेट पहुंचकर नवागत कलेक्टर गौरव बैनल से मुलाकात की। दिव्यांगजनों के प्रतिनिधिमंडल ने कलेक्टर को एक विस्तृत ज्ञापन सौंपते हुए शिक्षा, रोजगार, कौशल विकास और विशेष सुविधाओं से जुड़ी कई महत्वपूर्ण मांगें रखीं। प्रतिनिधिमंडल ने प्रशासन से आग्रह किया कि दिव्यांगजनों को आत्मनिर्भर बनाने और समाज में सम्मानजनक स्थान दिलाने के लिए प्रभावी एवं जमीनी स्तर पर कदम उठाए जाएं। बैठक के दौरान दिव्यांग समुदाय का नेतृत्व कर रहे राहुल शाह ने कलेक्टर को अपनी जिम्मेदारियों और कार्यों से अवगत कराया। उन्होंने अपने दस्तावेज और प्रमाण पत्र प्रस्तुत करते हुए बताया कि उन्हें दिव्यांग व्यक्तियों से जुड़े मामलों में सहयोग और मार्गदर्शन के लिए सुप्रीम कोर्ट द्वारा अधिकृत किया गया है। राहुल शाह ने कहा कि उनका उद्देश्य देशभर के मूकबधिर और दिव्यांग व्यक्तियों के अधिकारों की रक्षा करना तथा उनकी समस्याओं को संबंधित संस्थाओं और न्यायिक मंचों तक पहुंचाना है। इसी उद्देश्य के तहत वे सिंगरौली के मूकबधिर समुदाय की आवाज बनकर कलेक्ट्रेट पहुंचे हैं। प्रतिनिधिमंडल की सबसे प्रमुख मांग जिले में बंद पड़े मूकबधिर बच्चों के विशेष विद्यालय को दोबारा शुरू करने की रही। राहुल शाह ने बताया कि पूर्व में संचालित यह विद्यालय कई कारणों से बंद हो गया था, जिससे जिले के दिव्यांग बच्चों की शिक्षा प्रभावित हो रही है। उन्होंने कहा कि विद्यालय के पुनः संचालन से सैकड़ों बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और बेहतर भविष्य का अवसर मिल सकेगा। इसके अलावा दिव्यांगजनों ने जिले में संचालित औद्योगिक कंपनियों के कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी फंड के माध्यम से कौशल विकास और स्वरोजगार प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू करने की मांग भी रखी। उनका कहना था कि ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम दिव्यांग युवाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। बैठक में मौजूद अन्य दिव्यांगजनों ने रोजगार के अवसर बढ़ाने, विशेष प्रशिक्षण केंद्र स्थापित करने, बेरा टेस्ट की सुलभ सुविधा उपलब्ध कराने, साइन लैंग्वेज विशेषज्ञों की नियुक्ति करने तथा सरकारी योजनाओं का लाभ बिना किसी बाधा के सीधे दिव्यांगजनों तक पहुंचाने की मांग की। साथ ही खेलकूद और सांस्कृतिक गतिविधियों के लिए मंच उपलब्ध कराने का भी आग्रह किया गया ताकि दिव्यांग प्रतिभाओं को आगे बढ़ने का अवसर मिल सके। कलेक्टर गौरव बैनल ने प्रतिनिधिमंडल की सभी मांगों और सुझावों को गंभीरता से सुना तथा संबंधित अधिकारियों को इन पर आवश्यक परीक्षण और कार्रवाई के निर्देश दिए। उन्होंने दिव्यांगजनों की समस्याओं के समाधान के लिए सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाने का भरोसा दिलाया। कलेक्टर की ओर से मिले आश्वासन के बाद प्रतिनिधिमंडल ने उम्मीद जताई कि जिला प्रशासन जल्द ही विशेष विद्यालय के पुनः संचालन, रोजगार सृजन और अन्य सुविधाओं की दिशा में ठोस कदम उठाएगा। इससे जिले के दिव्यांगजनों को शिक्षा, रोजगार और सामाजिक भागीदारी के नए अवसर प्राप्त हो सकेंगे।
MP में UCC को जबरदस्त समर्थन: 93% लोगों ने कहा हां, मुस्लिम महिलाओं ने भी दिखाई सहमति

नई दिल्ली ।मध्य प्रदेश में समान नागरिक संहिता यानी यूसीसी को लेकर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर बहस तेज हो गई है। राज्य सरकार द्वारा आम जनता से सुझाव आमंत्रित किए गए थे और अब सामने आए आंकड़ों ने इस मुद्दे को नई दिशा दे दी है। सरकार के अनुसार प्रदेश भर से 9.5 लाख से अधिक सुझाव प्राप्त हुए जिनमें से करीब 8.9 लाख लोगों ने यूसीसी के समर्थन में अपनी राय दी। यह कुल सुझावों का लगभग 93 प्रतिशत है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक महिलाओं का समर्थन पुरुषों की तुलना में अधिक रहा। लगभग 4 लाख महिलाओं में से 3.8 लाख यानी 95 प्रतिशत ने यूसीसी के पक्ष में राय दी। वहीं 5.5 लाख पुरुषों में से 5.1 लाख यानी 92 प्रतिशत ने इसका समर्थन किया। हिंदू समुदाय में समर्थन का प्रतिशत और भी अधिक रहा जहां पुरुषों में 95 प्रतिशत तथा महिलाओं में 97 प्रतिशत लोगों ने यूसीसी के पक्ष में अपनी राय रखी। सबसे अधिक चर्चा मुस्लिम समुदाय से मिले सुझावों को लेकर हो रही है। आंकड़ों के अनुसार मुस्लिम समुदाय के 29 हजार पुरुषों में से लगभग 38 प्रतिशत ने यूसीसी का समर्थन किया जबकि 15 हजार मुस्लिम महिलाओं में से 71 प्रतिशत महिलाओं ने इसके पक्ष में राय दी। इन आंकड़ों को सरकार सामाजिक बदलाव और महिलाओं के अधिकारों के प्रति बढ़ती जागरूकता का संकेत मान रही है। सरकार को करीब दो हजार संस्थागत सुझाव भी प्राप्त हुए हैं जिनका परीक्षण और विश्लेषण किया जा रहा है। प्राप्त सभी सुझावों को 30 जून तक अंतिम मसौदे में शामिल करने की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। यूसीसी पर जनमत जुटाने के लिए राज्य सरकार ने 3.5 करोड़ से अधिक एसएमएस भी भेजे थे। बताया जा रहा है कि 5 जुलाई तक उच्च स्तरीय समिति अपनी अंतिम रिपोर्ट सरकार को सौंप सकती है जिसके बाद जुलाई में होने वाले विधानसभा सत्र में यूसीसी विधेयक पेश किया जा सकता है। भाजपा विधायक रामेश्वर शर्मा ने यूसीसी को महिलाओं और बच्चों के अधिकारों की सुरक्षा से जुड़ा कानून बताते हुए कहा कि यह समाज में समानता स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम होगा। उन्होंने दावा किया कि मुस्लिम महिलाओं का समर्थन इस बदलाव की सबसे बड़ी ताकत है और इससे उन्हें अपने अधिकारों के साथ सम्मानजनक जीवन जीने का अवसर मिलेगा। हालांकि विपक्ष और कुछ सामाजिक संगठनों ने इन आंकड़ों पर सवाल उठाए हैं। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री सज्जन सिंह वर्मा ने सरकार के दावों को भ्रामक बताते हुए कहा कि इतने महत्वपूर्ण विषय पर सभी राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों को साथ लेकर व्यापक चर्चा होनी चाहिए थी। वहीं हाजी मोहम्मद हारून ने भी सरकार के समर्थन संबंधी दावों पर सवाल उठाते हुए कहा कि यूसीसी जैसे संवेदनशील विषय पर सभी समुदायों की सहमति आवश्यक है। अब सबकी निगाहें जुलाई विधानसभा सत्र पर टिकी हैं जहां मध्य प्रदेश सरकार यूसीसी विधेयक पेश कर सकती है। यदि ऐसा होता है तो उत्तराखंड के बाद मध्य प्रदेश समान नागरिक संहिता लागू करने की दिशा में बड़ा कदम उठाने वाला देश का प्रमुख राज्य बन सकता है।
कोलकाता में निर्माणाधीन गोदाम की छत भरभराकर गिरी, 5 मजदूरों की मौत; 50 से अधिक लोगों के मलबे में फंसे होने की आशंका

नई दिल्ली । पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता के तारातला क्षेत्र में बुधवार को एक बड़ा औद्योगिक हादसा सामने आया, जब निर्माणाधीन गोदाम की छत अचानक ढह गई। इस दुर्घटना में कम से कम पांच लोगों की मौत हो गई, जबकि बड़ी संख्या में मजदूरों के मलबे में दबे होने की आशंका जताई जा रही है। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार हादसे के समय निर्माण कार्य जारी था और कई श्रमिक गोदाम के भीतर काम कर रहे थे। घटना के बाद पूरे इलाके में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। हादसा तारातला स्थित ट्रांसपोर्ट डिपो रोड पर ब्रेस ब्रिज के समीप हुआ। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार दोपहर के समय अचानक तेज आवाज के साथ निर्माणाधीन ढांचे का एक बड़ा हिस्सा धराशायी हो गया। छत गिरते ही वहां मौजूद मजदूरों को संभलने का मौका नहीं मिला और कई लोग मलबे के नीचे दब गए। हादसे की सूचना मिलते ही स्थानीय प्रशासन, पुलिस और आपातकालीन सेवाओं की टीमें तत्काल मौके पर पहुंच गईं। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि दुर्घटना के बाद राहत और बचाव अभियान युद्धस्तर पर शुरू किया गया। शुरुआती चरण में कई लोगों को मलबे से बाहर निकालने में सफलता मिली, जबकि बड़ी संख्या में श्रमिकों के अभी भी फंसे होने की आशंका बनी हुई है। प्रशासन का कहना है कि मलबे के नीचे दबे लोगों की सही संख्या का पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए सेना को भी राहत कार्य में शामिल किया गया है। सेना के जवानों ने स्थानीय प्रशासन और अन्य एजेंसियों के साथ मिलकर बचाव अभियान की कमान संभाली है। इसके अलावा राष्ट्रीय आपदा मोचन बल, अग्निशमन विभाग, नागरिक सुरक्षा इकाइयों और पुलिस की विशेष टीमें लगातार मलबा हटाने के काम में जुटी हुई हैं। भारी लोहे के ढांचे और बीम हटाने के लिए क्रेन तथा अन्य मशीनों का उपयोग किया जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि राहत कार्य चुनौतीपूर्ण बना हुआ है क्योंकि ढहे हुए हिस्से में बड़ी मात्रा में लोहे और निर्माण सामग्री का मलबा फैला हुआ है। ऐसे में फंसे हुए लोगों तक सुरक्षित तरीके से पहुंचने के लिए सावधानी बरती जा रही है। कई घायलों को नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया है, जहां उनका उपचार जारी है। स्थानीय लोगों ने भी शुरुआती घंटों में बचाव कार्य में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। हादसे के तुरंत बाद आसपास मौजूद लोगों ने मलबे में दबे श्रमिकों को निकालने का प्रयास किया और राहत एजेंसियों के पहुंचने तक प्राथमिक सहायता उपलब्ध कराई। घटना के बाद इलाके में लोगों की भारी भीड़ जमा हो गई, जिसे नियंत्रित करने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया। प्रशासन ने दुर्घटना के कारणों की जांच के आदेश दे दिए हैं। प्रारंभिक स्तर पर यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि निर्माणाधीन संरचना की छत अचानक क्यों गिरी और क्या निर्माण कार्य के दौरान सुरक्षा मानकों का पूरी तरह पालन किया जा रहा था। तकनीकी विशेषज्ञों की टीम भी घटनास्थल का निरीक्षण कर रही है। फिलहाल बचाव अभियान सबसे बड़ी प्राथमिकता बना हुआ है। अधिकारियों का मानना है कि मलबे के नीचे अब भी कई लोग फंसे हो सकते हैं, इसलिए राहत कार्य देर रात तक जारी रह सकता है। इस हादसे ने निर्माण स्थलों पर सुरक्षा मानकों और निगरानी व्यवस्था को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रशासन ने आश्वासन दिया है कि दुर्घटना के सभी पहलुओं की विस्तृत जांच कर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
अदाणी ग्रुप का बड़ा दांव: वित्त वर्ष 26 में 1.5 लाख करोड़ से अधिक का निवेश, निजी क्षेत्र के नए निवेश में 30% से ज्यादा हिस्सेदारी

नई दिल्ली । भारत के बुनियादी ढांचा क्षेत्र में निजी निवेश को नई गति देते हुए अदाणी ग्रुप ने वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान हार्ड इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं में 1.5 लाख करोड़ रुपए से अधिक का निवेश किया है। समूह के चेयरमैन गौतम अदाणी ने वार्षिक आम बैठक में यह जानकारी देते हुए कहा कि यह केवल वित्तीय उपलब्धि नहीं, बल्कि भारत के भविष्य और राष्ट्र निर्माण के प्रति समूह की दीर्घकालिक प्रतिबद्धता का प्रतीक है। उन्होंने बताया कि यह राशि वित्त वर्ष 26 में निजी क्षेत्र द्वारा किए गए कुल नए निवेश का 30 प्रतिशत से अधिक हिस्सा दर्शाती है। वार्षिक आम बैठक में शेयरधारकों को संबोधित करते हुए गौतम अदाणी ने कहा कि किसी भी कॉर्पोरेट समूह के इतिहास में कुछ वर्ष ऐसे होते हैं जो केवल उपलब्धियों के आंकड़ों तक सीमित नहीं रहते, बल्कि संगठन की क्षमता, दृष्टि और चुनौतियों से मुकाबला करने के संकल्प को परिभाषित करते हैं। उनके अनुसार वित्त वर्ष 2025-26 अदाणी ग्रुप के लिए ऐसा ही एक महत्वपूर्ण वर्ष साबित हुआ है। उन्होंने कहा कि वैश्विक स्तर पर यह समय कई तरह की अनिश्चितताओं और चुनौतियों से भरा रहा। ऊर्जा सुरक्षा से जुड़े मुद्दे दुनिया भर में राष्ट्रीय रणनीतियों के केंद्र में लौटे, जबकि तकनीक और नवाचार किसी भी देश की आर्थिक और रणनीतिक ताकत के महत्वपूर्ण आधार बनकर उभरे। ऐसे माहौल में भी समूह ने भारत की विकास यात्रा में अपनी भूमिका को और मजबूत करने का निर्णय लिया। गौतम अदाणी ने कहा कि समूह का मानना है कि भारत की विकास आवश्यकताओं को टालकर नहीं देखा जा सकता। इसी सोच के तहत ऊर्जा, परिवहन, लॉजिस्टिक्स, बंदरगाह, हवाई अड्डे और अन्य रणनीतिक इंफ्रास्ट्रक्चर क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर निवेश जारी रखा गया। उनका कहना था कि आने वाले वर्षों में भारत की आर्थिक वृद्धि को मजबूत आधार देने के लिए आधुनिक और विश्वस्तरीय बुनियादी ढांचे का निर्माण अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि यह प्रगति आसान परिस्थितियों में हासिल नहीं हुई। समूह को विभिन्न स्तरों पर लगातार जांच-पड़ताल और आलोचनाओं का सामना करना पड़ा, लेकिन इसके बावजूद निवेश और विस्तार की योजनाओं को रोका नहीं गया। उनके अनुसार किसी भी संगठन की पहचान बाहरी शोर या आलोचनाओं से नहीं, बल्कि चुनौतियों के प्रति उसकी प्रतिक्रिया और दीर्घकालिक दृष्टिकोण से तय होती है। बैठक के दौरान गौतम अदाणी ने इस वर्ष की शुरुआत में सफलतापूर्वक संपन्न हुए 25,000 करोड़ रुपए के राइट्स इश्यू का भी उल्लेख किया। उन्होंने इसे केवल पूंजी जुटाने का माध्यम नहीं, बल्कि निवेशकों और शेयरधारकों के विश्वास की परीक्षा बताया। उनके अनुसार यह भारतीय कॉर्पोरेट इतिहास के सबसे बड़े राइट्स इश्यू में से एक था और इसमें निवेशकों की सक्रिय भागीदारी ने समूह की विश्वसनीयता को और मजबूत किया। उन्होंने कहा कि कुछ वर्गों द्वारा संदेह और सवाल उठाए जाने के बावजूद शेयरधारकों ने समूह पर भरोसा जताया और विकास परियोजनाओं में निरंतर निवेश के लिए समर्थन दिया। यह समर्थन न केवल व्यावसायिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि भारत के दीर्घकालिक इंफ्रास्ट्रक्चर विकास में निजी क्षेत्र की भूमिका को भी मजबूत करता है। अदाणी ग्रुप का मानना है कि आने वाले वर्षों में देश में ऊर्जा, परिवहन और औद्योगिक बुनियादी ढांचे की मांग तेजी से बढ़ेगी। ऐसे में बड़े निवेशों के माध्यम से आर्थिक गतिविधियों को गति देने, रोजगार के अवसर सृजित करने और भारत की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता को मजबूत बनाने की दिशा में समूह अपनी भूमिका को और विस्तार देगा। वित्त वर्ष 26 में किया गया यह निवेश इसी दीर्घकालिक रणनीति और विकास दृष्टि का महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है।
भारतीय नौसेना में अफसर बनने का सुनहरा अवसर, पायलट समेत 275 पदों पर भर्ती, 25 जून से शुरू होंगे आवेदन

नई दिल्ली । भारतीय नौसेना में अधिकारी बनने का सपना देखने वाले युवाओं के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर सामने आया है। नौसेना ने शॉर्ट सर्विस कमीशन (एसएससी) के तहत विभिन्न शाखाओं में कुल 275 पदों पर भर्ती के लिए अधिसूचना जारी की है। यह भर्ती इंडियन नेवल एकेडमी, एझिमाला में जून 2027 से शुरू होने वाले कोर्स के लिए की जा रही है। इसके तहत योग्य अविवाहित पुरुष और महिला उम्मीदवारों से आवेदन आमंत्रित किए गए हैं। भर्ती अभियान का उद्देश्य नौसेना की विभिन्न तकनीकी और गैर-तकनीकी शाखाओं में योग्य अधिकारियों की नियुक्ति करना है। नौसेना द्वारा जारी रिक्तियों में एक्जीक्यूटिव ब्रांच, पायलट, नेवल एयर ऑपरेशन्स ऑफिसर, एयर ट्रैफिक कंट्रोलर, लॉजिस्टिक्स, नेवल आर्मामेंट इंस्पेक्टोरेट कैडर, एजुकेशन, इंजीनियरिंग, इलेक्ट्रिकल और नेवल कंस्ट्रक्टर जैसी महत्वपूर्ण शाखाएं शामिल हैं। सबसे अधिक पद एक्जीक्यूटिव ब्रांच के लिए निर्धारित किए गए हैं, जबकि पायलट, एयर ऑपरेशन्स और तकनीकी शाखाओं में भी बड़ी संख्या में रिक्तियां उपलब्ध हैं। इससे इंजीनियरिंग, विज्ञान, प्रबंधन और तकनीकी शिक्षा प्राप्त युवाओं को नौसेना में शामिल होने का अवसर मिलेगा। भर्ती प्रक्रिया के लिए ऑनलाइन आवेदन 25 जून से शुरू होंगे। इच्छुक अभ्यर्थी निर्धारित पात्रता मानदंडों को पूरा करने के बाद ऑनलाइन माध्यम से आवेदन कर सकेंगे। आवेदन जमा करने की अंतिम तिथि 27 जुलाई निर्धारित की गई है। उम्मीदवारों को सलाह दी गई है कि वे अंतिम तिथि का इंतजार किए बिना समय रहते आवेदन प्रक्रिया पूरी कर लें ताकि तकनीकी समस्याओं से बचा जा सके। शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो विभिन्न पदों के लिए अलग-अलग योग्यता निर्धारित की गई है। अभ्यर्थियों के पास संबंधित विषयों में प्रथम श्रेणी के साथ बीई, बीटेक, एमई, एमटेक, एमएससी, एमए, एमबीए, बीकॉम, बीएससी, एमसीए या अन्य निर्धारित डिग्रियां होना आवश्यक है। कुछ पदों के लिए फाइनेंस, लॉजिस्टिक्स, सप्लाई चेन मैनेजमेंट और मटीरियल मैनेजमेंट जैसे विषयों में विशेषज्ञता या स्नातकोत्तर डिप्लोमा भी अनिवार्य रखा गया है। पात्रता से संबंधित विस्तृत जानकारी उम्मीदवारों को आधिकारिक अधिसूचना में उपलब्ध कराई गई है। चयन प्रक्रिया कई चरणों में पूरी होगी। सबसे पहले उम्मीदवारों के आवेदन और शैक्षणिक योग्यता के आधार पर शॉर्टलिस्टिंग की जाएगी। इसके बाद चयनित अभ्यर्थियों को सर्विस सेलेक्शन बोर्ड (एसएसबी) इंटरव्यू के लिए बुलाया जाएगा। एसएसबी प्रक्रिया में सफल होने वाले उम्मीदवारों को मेडिकल परीक्षण से गुजरना होगा। अंतिम मेरिट सूची प्रदर्शन और पात्रता के आधार पर तैयार की जाएगी। चयनित उम्मीदवारों को प्रशिक्षण के लिए इंडियन नेवल एकेडमी भेजा जाएगा। नौसेना में चयनित अधिकारियों को आकर्षक वेतन और भत्तों का लाभ मिलेगा। प्रशिक्षण और नियुक्ति के बाद सब-लेफ्टिनेंट के पद पर शुरुआती ग्रॉस सैलरी लगभग 1.20 लाख रुपये प्रतिमाह तक हो सकती है। इसके अलावा पायलट, नेवल एयर ऑपरेशन्स ऑफिसर और सबमरीन से जुड़े पदों पर नियुक्त अधिकारियों को विशेष भत्ते भी प्रदान किए जाएंगे। प्रशिक्षण पूरा होने के बाद पात्र अधिकारियों को अतिरिक्त अलाउंस के रूप में 31,250 रुपये तक का लाभ मिल सकेगा। रक्षा क्षेत्र में करियर बनाने के इच्छुक युवाओं के लिए यह भर्ती अभियान एक बड़ा अवसर माना जा रहा है। नौसेना में सेवा न केवल प्रतिष्ठा और सम्मान प्रदान करती है, बल्कि आधुनिक तकनीक, नेतृत्व क्षमता और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी जिम्मेदारियों के साथ एक मजबूत करियर भी उपलब्ध कराती है। ऐसे में पात्र अभ्यर्थियों के लिए यह भर्ती अभियान भविष्य को नई दिशा देने वाला महत्वपूर्ण अवसर साबित हो सकता है।
युवा के पत्र का पीएम मोदी ने दिया जवाब, राष्ट्रहित और ऊर्जा संरक्षण पर विचारों की सराहना; आशुतोष यादव ने जताया गौरव और आभार

नई दिल्ली । लोकतांत्रिक व्यवस्था में आम नागरिक और देश के सर्वोच्च नेतृत्व के बीच संवाद का एक प्रेरक उदाहरण उस समय सामने आया जब कानपुर के प्रतियोगी छात्र आशुतोष यादव को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से व्यक्तिगत पत्र प्राप्त हुआ। प्रधानमंत्री ने अपने पत्र में आशुतोष द्वारा व्यक्त किए गए विचारों और राष्ट्रहित से जुड़े उनके दृष्टिकोण की सराहना करते हुए उन्हें देश के जागरूक युवाओं का प्रतिनिधि बताया। पत्र मिलने के बाद आशुतोष ने इसे अपने जीवन का गौरवपूर्ण क्षण बताते हुए प्रधानमंत्री के प्रति आभार व्यक्त किया है। प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में कहा कि देशवासियों से मिलने वाले आत्मीय और सकारात्मक विचार उन्हें राष्ट्रहित में लगातार कार्य करने की नई ऊर्जा प्रदान करते हैं। उन्होंने आशुतोष और उनके परिवार द्वारा व्यक्त भावनाओं की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे संदेश लोकतांत्रिक व्यवस्था को और अधिक मजबूत बनाते हैं। प्रधानमंत्री ने ऊर्जा संरक्षण के विषय को विशेष रूप से रेखांकित करते हुए कहा कि वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों में ऊर्जा सुरक्षा और संसाधनों के विवेकपूर्ण उपयोग का महत्व लगातार बढ़ रहा है। पत्र में प्रधानमंत्री ने यह भी उल्लेख किया कि देशभर में ऊर्जा संरक्षण को लेकर लोगों के बीच जागरूकता बढ़ रही है और विभिन्न स्तरों पर सकारात्मक प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों को बढ़ावा देने, ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत बनाने और ऊर्जा बचत को जनभागीदारी से जुड़े अभियान का रूप देने के लिए निरंतर काम कर रही है। प्रधानमंत्री ने आशुतोष और उनके परिवार द्वारा आवश्यक संसाधनों के जिम्मेदार उपयोग के संकल्प को सराहनीय बताया। प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में युवाओं की भूमिका को भी विशेष महत्व दिया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय और वैश्विक विषयों के प्रति जागरूकता, सकारात्मक सोच और समस्याओं के समाधान के प्रति सक्रिय दृष्टिकोण देश के विकास में महत्वपूर्ण योगदान देता है। उनके अनुसार आत्मनिर्भर और सशक्त भारत के निर्माण में युवाओं की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है और यही वर्ग भविष्य की दिशा तय करेगा। प्रधानमंत्री का पत्र मिलने के बाद आशुतोष यादव ने खुशी व्यक्त करते हुए कहा कि यह उनके लिए बेहद सम्मानजनक और प्रेरणादायक क्षण है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की सबसे बड़ी विशेषता यही है कि एक सामान्य नागरिक भी अपनी बात देश के प्रधानमंत्री तक पहुंचा सकता है और उसे गंभीरता से सुना जाता है। उन्होंने प्रधानमंत्री का धन्यवाद करते हुए कहा कि उनके पत्र का उत्तर मिलना स्वयं में एक बड़ी उपलब्धि है। आशुतोष ने बताया कि उन्होंने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर कुछ महत्वपूर्ण विषयों पर अपनी चिंता और सुझाव साझा किए थे। उनका मानना है कि देश के नागरिकों को राष्ट्रीय मुद्दों पर अपनी राय रखने और रचनात्मक सुझाव देने चाहिए, क्योंकि इससे लोकतांत्रिक व्यवस्था और अधिक मजबूत होती है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री द्वारा उनके विचारों को महत्व दिया जाना युवाओं के लिए भी एक सकारात्मक संदेश है। आशुतोष ने पिछले कुछ वर्षों में देश में हुए विकास कार्यों का उल्लेख करते हुए कहा कि डिजिटल तकनीक के विस्तार ने आम नागरिकों के जीवन में बड़ा बदलाव लाया है। उन्होंने डिजिटल भुगतान व्यवस्था, सड़क और एक्सप्रेसवे नेटवर्क के विस्तार तथा आधारभूत ढांचे के विकास को महत्वपूर्ण उपलब्धियां बताया। उनके अनुसार तकनीक और आधुनिक सुविधाओं के विस्तार ने देश की आर्थिक और सामाजिक प्रगति को नई गति प्रदान की है। उन्होंने कहा कि किसी भी राष्ट्रीय अभियान या सरकारी योजना की सफलता में जनभागीदारी सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। जब नागरिक स्वयं किसी उद्देश्य से जुड़ते हैं, तब उसके परिणाम अधिक प्रभावी होते हैं। आशुतोष का मानना है कि युवाओं में नई सोच, ऊर्जा और नेतृत्व क्षमता होती है, जो देश को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। प्रधानमंत्री द्वारा युवाओं पर व्यक्त किया गया विश्वास देश के करोड़ों युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत है।
एयरफोर्स जॉइन करने का मौका: MTS पदों के लिए आवेदन 27 जून से, जानें योग्यता और प्रक्रिया

नई दिल्ली ।भारतीय वायुसेना में सेवा देने का सपना देख रहे युवाओं के लिए शानदार अवसर सामने आया है। भारतीय वायु सेना ने मल्टी टास्किंग स्टाफ (एमटीएस) के पदों पर भर्ती के लिए आधिकारिक अधिसूचना जारी कर दी है। इस भर्ती अभियान के तहत कुल 6 रिक्त पदों को भरा जाएगा। इनमें 3 पद अनारक्षित वर्ग के लिए, 2 पद अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) और 1 पद आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) के उम्मीदवारों के लिए निर्धारित किया गया है। इस भर्ती के लिए आवेदन प्रक्रिया 27 जून 2026 से शुरू होगी। इच्छुक और पात्र उम्मीदवारों को ऑफलाइन माध्यम से आवेदन करना होगा। आवेदन जमा करने की अंतिम तिथि विज्ञापन प्रकाशित होने की तारीख से 30 दिन निर्धारित की गई है। ऐसे में अभ्यर्थियों को सलाह दी गई है कि वे समय रहते आवेदन प्रक्रिया पूरी कर लें ताकि अंतिम समय की किसी परेशानी से बचा जा सके। शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो उम्मीदवार का किसी मान्यता प्राप्त बोर्ड या विश्वविद्यालय से मैट्रिक यानी 10वीं पास होना अनिवार्य है। इसके अलावा जिन उम्मीदवारों के पास वॉचमैन, लस्कर, गेस्टेटनर ऑपरेटर या माली के रूप में किसी संस्था में कम से कम एक वर्ष का कार्य अनुभव होगा, उन्हें चयन प्रक्रिया में प्राथमिकता दी जा सकती है। आयु सीमा के अनुसार आवेदन करने वाले उम्मीदवारों की न्यूनतम उम्र 18 वर्ष और अधिकतम उम्र 25 वर्ष निर्धारित की गई है। आयु की गणना आवेदन की अंतिम तिथि के आधार पर की जाएगी। आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों को केंद्र सरकार के नियमों के अनुसार अधिकतम आयु सीमा में छूट का लाभ मिलेगा। चयन प्रक्रिया कई चरणों में पूरी की जाएगी। सबसे पहले प्राप्त आवेदन पत्रों की जांच की जाएगी। इसके बाद पात्र उम्मीदवारों को लिखित परीक्षा के लिए बुलाया जाएगा। लिखित परीक्षा में सफल अभ्यर्थियों के दस्तावेजों का सत्यापन किया जाएगा और अंत में अंतिम मेरिट सूची जारी की जाएगी। चयनित उम्मीदवारों को सातवें वेतन आयोग के अनुसार पे मैट्रिक्स लेवल-1 का वेतनमान प्रदान किया जाएगा, साथ ही अन्य सरकारी सुविधाओं का लाभ भी मिलेगा। आवेदन करने के लिए उम्मीदवारों को भारतीय वायुसेना की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर संबंधित भर्ती का नोटिफिकेशन डाउनलोड करना होगा। नोटिफिकेशन में दिए गए आवेदन पत्र का प्रिंट निकालकर उसमें मांगी गई सभी जानकारी सावधानीपूर्वक भरनी होगी। इसके बाद आवश्यक दस्तावेजों की प्रतियां आवेदन पत्र के साथ संलग्न करनी होंगी। पूरी तरह भरे हुए आवेदन पत्र को एक लिफाफे में रखकर निर्धारित पते पर डाक के माध्यम से भेजना होगा। आवेदन भेजने का पता है – कमांडेंट, आईएएम, आईएएफ विमानपुरा पीओ, बैंगलोर-560017। सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे 10वीं पास युवाओं के लिए यह भर्ती एक बेहतरीन अवसर है। कम शैक्षणिक योग्यता के साथ प्रतिष्ठित भारतीय वायुसेना में नौकरी पाने का यह सुनहरा मौका है, इसलिए योग्य उम्मीदवार समय सीमा के भीतर आवेदन करना न भूलें।
म्यूल हंट 1.0 बना साइबर ठगों का काल, गुजरात पुलिस ने करोड़ों की ठगी का नेटवर्क तोड़ा

नई दिल्ली । साइबर अपराध के बढ़ते खतरे के बीच गुजरात पुलिस ने एक ऐसा अभियान चलाया है जिसने ऑनलाइन ठगी के बड़े नेटवर्क की जड़ें हिला दी हैं। मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के मार्गदर्शन और उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी के नेतृत्व में संचालित ऑपरेशन म्यूल हंट 1.0 ने साइबर अपराधियों के खिलाफ सर्जिकल स्ट्राइक करते हुए हजारों करोड़ रुपये की धोखाधड़ी का पर्दाफाश किया है। इस अभियान को राज्य में साइबर अपराध के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी और प्रभावी कार्रवाई माना जा रहा है। डिजिटल युग में साइबर ठग नए-नए तरीकों से लोगों की मेहनत की कमाई पर हाथ साफ कर रहे हैं। फर्जी कॉल्स, ऑनलाइन निवेश के झांसे, बैंकिंग फ्रॉड और डिजिटल अरेस्ट जैसे हथकंडों के जरिए अपराधी लोगों को निशाना बना रहे हैं। ऐसे में गुजरात पुलिस ने तकनीक और डेटा इंटेलिजेंस का सहारा लेते हुए साइबर अपराधियों के पूरे नेटवर्क को निशाने पर लिया। ऑपरेशन म्यूल हंट 1.0 के तहत गुजरात पुलिस ने इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर, नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल, समन्वय पोर्टल और 1930 हेल्पलाइन से प्राप्त आंकड़ों का गहन विश्लेषण किया। इस डेटा के आधार पर ऐसे म्यूल अकाउंट्स और उनसे जुड़े लोगों की पहचान की गई जो साइबर अपराध से अर्जित धन को निकालने और आगे पहुंचाने का काम कर रहे थे। अभियान के दौरान राज्यभर में 565 एफआईआर दर्ज की गईं और 638 साइबर अपराधियों को गिरफ्तार किया गया। इसके अलावा 913 म्यूल अकाउंट्स पर कार्रवाई की गई तथा कुल 4,052 साइबर अपराधों की पहचान की गई जिनमें 491 मामले गुजरात से जुड़े पाए गए। सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि इस अभियान में 2,289 करोड़ रुपये के साइबर फ्रॉड का खुलासा हुआ। गुजरात पुलिस ने इस अभियान को और प्रभावी बनाने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक और इंडियन डिजिटल पेमेंट इंटेलिजेंस कॉर्पोरेशन के साथ मिलकर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित रिस्क स्कोरिंग सिस्टम का भी उपयोग किया। इस तकनीक की मदद से संदिग्ध खातों की पहचान पहले से अधिक सटीक तरीके से की जा रही है ताकि साइबर अपराधियों तक तेजी से पहुंचा जा सके। साइबर सेंटर ऑफ एक्सीलेंस गांधीनगर के एसपी राजदीप सिंह झाला ने बताया कि पुलिस ने ऐसे खातों को चिह्नित किया जो सीधे साइबर ठगी की रकम प्राप्त करते थे और बाद में एटीएम या चेक के माध्यम से पैसे निकालते थे। विस्तृत डेटाबेस तैयार कर इन खातों और उनसे जुड़े नेटवर्क पर एक साथ कार्रवाई की गई जिससे साइबर अपराध के बड़े गिरोहों का खुलासा हुआ। साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि आम लोगों की सतर्कता भी इस लड़ाई में बेहद महत्वपूर्ण है। किसी भी संदिग्ध कॉल, मैसेज या ऑनलाइन ऑफर पर भरोसा करने से पहले उसकी पुष्टि करनी चाहिए। यदि कोई संदिग्ध गतिविधि दिखाई दे तो तुरंत राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत दर्ज करानी चाहिए। विशेषज्ञों ने यह भी स्पष्ट किया कि डिजिटल अरेस्ट जैसी कोई कानूनी प्रक्रिया नहीं होती और ऐसे नाम पर आने वाले कॉल पूरी तरह फर्जी होते हैं। ऑपरेशन म्यूल हंट 1.0 की सफलता के बाद गुजरात सरकार ने साइबर अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई को और तेज करते हुए 2 जून 2026 से ऑपरेशन म्यूल हंट 2.0 भी शुरू कर दिया है। इसका उद्देश्य साइबर ठगी के नेटवर्क को पूरी तरह ध्वस्त करना और डिजिटल दुनिया को आम नागरिकों के लिए अधिक सुरक्षित बनाना है।
इंजीनियरों के लिए सुनहरा मौका! EPI में 70 हजार रुपये तक की नौकरी, आवेदन प्रक्रिया शुरू

नई दिल्ली ।इंजीनियरिंग क्षेत्र में करियर बनाने की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए शानदार अवसर सामने आया है। सार्वजनिक क्षेत्र की प्रतिष्ठित कंपनी इंजीनियरिंग प्रोजेक्ट्स (इंडिया) लिमिटेड (EPI) ने विभिन्न तकनीकी और प्रबंधकीय पदों पर भर्ती के लिए आवेदन प्रक्रिया शुरू कर दी है। कंपनी ने निश्चित अवधि के अनुबंध के आधार पर कुल 14 रिक्तियों को भरने के लिए योग्य और अनुभवी उम्मीदवारों से आवेदन आमंत्रित किए हैं। इच्छुक अभ्यर्थी 3 जुलाई 2026 तक ऑनलाइन माध्यम से आवेदन कर सकते हैं। जारी अधिसूचना के अनुसार असिस्टेंट मैनेजर (सिविल) के 9 पद असिस्टेंट मैनेजर (इलेक्ट्रिकल) का 1 पद असिस्टेंट मैनेजर (मैकेनिकल) के 2 पद और सीनियर मैनेजर (सिविल) के 2 पदों पर नियुक्तियां की जाएंगी। आवेदन प्रक्रिया 24 जून 2026 की सुबह 9:30 बजे से शुरू हो चुकी है और उम्मीदवार 3 जुलाई 2026 की शाम 5:30 बजे तक अपना आवेदन जमा कर सकते हैं। इन पदों पर आवेदन करने के लिए उम्मीदवारों के पास किसी मान्यता प्राप्त संस्थान या विश्वविद्यालय से संबंधित विषय में बीई बीटेक एएमआईई या समकक्ष डिग्री होना अनिवार्य है। साथ ही न्यूनतम 55 प्रतिशत अंक प्राप्त होना भी जरूरी है। उम्मीदवारों के पास संबंधित क्षेत्र में कम से कम दो वर्ष का पोस्ट क्वालिफिकेशन कार्य अनुभव होना चाहिए। आयु सीमा की बात करें तो पदों के अनुसार अधिकतम आयु 32 वर्ष से 42 वर्ष के बीच निर्धारित की गई है। आयु की गणना आवेदन की अंतिम तिथि के आधार पर की जाएगी। आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों को सरकारी नियमों के अनुसार आयु सीमा में छूट का लाभ मिलेगा। चयन प्रक्रिया दो चरणों में पूरी की जाएगी। सबसे पहले उम्मीदवारों के आवेदन पत्रों की स्क्रीनिंग और शॉर्टलिस्टिंग की जाएगी। इसमें शैक्षणिक योग्यता प्राप्त अंकों का प्रतिशत और कार्य अनुभव जैसे मानकों को ध्यान में रखा जाएगा। इसके बाद चयनित उम्मीदवारों को इंटरव्यू के लिए बुलाया जाएगा। सफल उम्मीदवारों को पद के अनुसार 40 हजार रुपये से 70 हजार रुपये प्रतिमाह तक वेतन मिलेगा। इसके अलावा कंपनी की ओर से अन्य भत्ते और सुविधाएं भी प्रदान की जाएंगी। इंटरव्यू का आयोजन मुंबई स्थित पश्चिमी क्षेत्रीय कार्यालय में किया जाएगा। इंटरव्यू की तिथि समय और विस्तृत जानकारी जल्द जारी की जाएगी। उम्मीदवारों को सलाह दी गई है कि इंटरव्यू में शामिल होते समय सभी आवश्यक दस्तावेजों की मूल प्रतियां और उनकी फोटोकॉपी अपने साथ अवश्य लेकर जाएं ताकि सत्यापन प्रक्रिया आसानी से पूरी की जा सके। इंजीनियरिंग क्षेत्र के अनुभवी और योग्य अभ्यर्थियों के लिए यह एक बेहतरीन अवसर माना जा रहा है।
सड़क सुरक्षा पर फिर उठे सवाल, इंदौर में अलग-अलग दुर्घटनाओं में दो लोगों की जान गई; पुलिस CCTV फुटेज के सहारे जांच में जुटी

मध्य प्रदेश: की आर्थिक राजधानी इंदौर में मंगलवार को हुए दो अलग-अलग सड़क हादसों ने एक बार फिर यातायात सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। शहर के अलग-अलग इलाकों में हुए इन हादसों में एक महिला और एक युवक की मौत हो गई, जबकि एक अन्य युवक गंभीर रूप से घायल हो गया। दोनों मामलों में वाहन चालक घटनास्थल से फरार हो गए, जिसके बाद पुलिस ने जांच शुरू कर उनकी तलाश तेज कर दी है। पहला हादसा शहर के व्यस्त लवकुश चौराहे के समीप हुआ, जहां सड़क पार कर रही एक महिला को तेज रफ्तार आयशर वाहन ने टक्कर मार दी। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार टक्कर इतनी भीषण थी कि महिला वाहन के नीचे आ गई और उसके ऊपर से पहिए गुजर गए। दुर्घटना के कारण महिला की मौके पर ही मौत हो गई। घटना के बाद आसपास के लोगों में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। पुलिस जांच में मृतक महिला की पहचान खरगोन निवासी रीना के रूप में हुई है। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार वह सड़क पार कर रही थीं, तभी तेज गति से आ रहे वाहन ने उन्हें अपनी चपेट में ले लिया। हादसे के बाद वाहन चालक मौके से फरार हो गया। सूचना मिलने पर पुलिस तुरंत घटनास्थल पर पहुंची और आवश्यक कार्रवाई शुरू की। शव को पोस्टमॉर्टम के लिए अस्पताल भेजा गया, जबकि दुर्घटना में शामिल वाहन को जब्त कर लिया गया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि वाहन के दस्तावेजों और अन्य तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर चालक की पहचान की जा रही है। जल्द ही उसे गिरफ्तार करने की कार्रवाई की जाएगी। घटना के बाद स्थानीय लोगों ने भी सड़क पर बढ़ती लापरवाही और तेज रफ्तार वाहनों पर नियंत्रण की आवश्यकता जताई है। इसी दिन शहर के आजाद नगर क्षेत्र में तीन इमली के पास दूसरा गंभीर हादसा सामने आया। यहां स्कूटी से घर लौट रहे दो युवकों को अज्ञात वाहन ने टक्कर मार दी। टक्कर इतनी जोरदार थी कि दोनों युवक सड़क पर गिर गए और गंभीर रूप से घायल हो गए। आसपास मौजूद लोगों ने तत्काल पुलिस और एंबुलेंस को सूचना दी। दुर्घटना में जीत नामक युवक की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि उसका साथी संजू गंभीर रूप से घायल हो गया। घायल युवक को उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उसका इलाज जारी है। पुलिस के अनुसार दोनों युवक पालदा क्षेत्र स्थित एक फैक्ट्री में कार्यरत थे और ड्यूटी समाप्त होने के बाद स्कूटी से अपने घर लौट रहे थे। जांच के दौरान पता चला कि दुर्घटना को अंजाम देने वाला वाहन घटनास्थल से भाग निकला। पुलिस ने आसपास के क्षेत्रों में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज जुटाना शुरू कर दिया है। फुटेज के आधार पर वाहन और चालक की पहचान करने का प्रयास किया जा रहा है। अधिकारियों का मानना है कि तकनीकी साक्ष्यों की मदद से जल्द ही आरोपी तक पहुंचा जा सकेगा। लगातार सामने आ रहे सड़क हादसे शहर में यातायात नियमों के पालन और सड़क सुरक्षा उपायों की प्रभावशीलता को लेकर चिंता बढ़ा रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि तेज रफ्तार, लापरवाही से वाहन चलाना और नियमों की अनदेखी ऐसे हादसों की प्रमुख वजह बन रही है। फिलहाल दोनों मामलों में पुलिस की जांच जारी है और फरार चालकों की तलाश के लिए विभिन्न स्तरों पर कार्रवाई की जा रही है।