शादी बरकरार लेकिन साथ रहना जरूरी नहीं ,पति पत्नी के अधिकारों पर क्या कहता है कानून

नई दिल्ली। भारतीय समाज में विवाह को केवल एक सामाजिक अनुबंध नहीं बल्कि एक पवित्र और आजीवन संबंध माना जाता है। हालांकि बदलते समय के साथ वैवाहिक रिश्तों में तनाव और विवाद के मामले भी बढ़े हैं। कई बार परिस्थितियां ऐसी बन जाती हैं जब पति और पत्नी एक साथ रहना नहीं चाहते लेकिन तलाक भी नहीं लेते। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि क्या कोई पत्नी बिना तलाक लिए अपने पति से अलग रह सकती है और इस स्थिति में उसके अधिकार क्या होते हैं। भारतीय कानून के अनुसार विवाह और साथ रहना दो अलग विषय हैं। किसी पति या पत्नी का अलग रहना अपने आप में विवाह समाप्त होने का प्रमाण नहीं माना जाता। हिंदू विवाह अधिनियम 1955 के तहत विवाह तब तक वैध माना जाता है जब तक किसी सक्षम न्यायालय द्वारा तलाक की डिक्री जारी नहीं की जाती। इसका अर्थ यह है कि पत्नी बिना तलाक लिए भी कुछ परिस्थितियों में पति से अलग रह सकती है और उसका वैवाहिक दर्जा बना रहता है। कानून उन महिलाओं को विशेष संरक्षण देता है जो घरेलू हिंसा शारीरिक या मानसिक प्रताड़ना आर्थिक शोषण या किसी प्रकार के असुरक्षित माहौल का सामना कर रही हों। यदि पत्नी की सुरक्षा सम्मान या स्वास्थ्य को खतरा हो तो वह पति से अलग रहने का फैसला कर सकती है। अदालतें ऐसे मामलों को गंभीरता से देखती हैं और महिलाओं को आवश्यक कानूनी सहायता उपलब्ध कराती हैं। कई बार पति द्वारा परित्याग या लगातार उत्पीड़न की स्थिति भी अलग रहने का आधार बनती है। यदि पति दूसरी शादी करने की कोशिश करता है या वैवाहिक जिम्मेदारियों का निर्वहन नहीं करता तब भी पत्नी कानूनी राहत मांग सकती है। हालांकि प्रत्येक मामले में अदालत तथ्यों और परिस्थितियों के आधार पर निर्णय लेती है। अलग रहने के बावजूद पत्नी के कई महत्वपूर्ण अधिकार बने रहते हैं। सबसे प्रमुख अधिकार भरण पोषण का है। यदि पत्नी स्वयं अपना गुजारा करने में सक्षम नहीं है तो वह पति से गुजारा भत्ता प्राप्त करने की हकदार हो सकती है। इसके अलावा पति की संपत्ति और उत्तराधिकार से जुड़े अधिकार भी सामान्य रूप से बने रहते हैं क्योंकि विवाह कानूनी रूप से समाप्त नहीं हुआ होता। ऐसी स्थिति में न्यायिक पृथक्करण का विकल्प भी उपलब्ध है। इसमें पति पत्नी अदालत की अनुमति से अलग रह सकते हैं लेकिन विवाह कायम रहता है। यदि भविष्य में सुलह की संभावना समाप्त हो जाए तो यही स्थिति बाद में तलाक का आधार भी बन सकती है। दूसरी ओर कानून पति के अधिकारों की भी रक्षा करता है। यदि पत्नी बिना किसी उचित कारण के पति से अलग रह रही है तो पति अदालत में वैवाहिक अधिकारों की बहाली के लिए याचिका दाखिल कर सकता है। अदालत तथ्यों की जांच के बाद उचित आदेश दे सकती है। महत्वपूर्ण बात यह है कि बिना तलाक के पति या पत्नी में से कोई भी दूसरी शादी नहीं कर सकता। ऐसा करना कानूनन अपराध माना जाता है और इसके लिए सजा का प्रावधान है। स्पष्ट है कि भारतीय कानून विवाह संस्था को महत्व देने के साथ साथ पति और पत्नी दोनों के अधिकारों की रक्षा भी करता है। इसलिए बिना तलाक लिए अलग रहना कई परिस्थितियों में पूरी तरह वैध हो सकता है लेकिन इसके लिए कानूनी आधार और उचित कारण होना आवश्यक है।
Samsung यूजर्स के लिए बड़ा अलर्ट: सरकार ने दी चेतावनी, करोड़ों डिवाइस पर हैकिंग का खतरा

नई दिल्ली। अगर आप Samsung स्मार्टफोन या टैबलेट का इस्तेमाल कर रहे हैं, तो यह खबर आपके लिए महत्वपूर्ण है। करोड़ों Samsung यूजर्स पर साइबर हमले का खतरा मंडरा रहा है। खुद सरकार की साइबर सुरक्षा एजेंसी CERT-In ने इस संबंध में गंभीर सुरक्षा चेतावनी जारी की है। रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय कंप्यूटर इमरजेंसी रिस्पांस टीम (CERT-In) ने Samsung के Knox सिक्योरिटी फ्रेमवर्क में एक हाई-सीवियरिटी सुरक्षा खामी को लेकर अलर्ट जारी किया है। Samsung Knox, गैलेक्सी डिवाइस में मौजूद एक इनबिल्ट सिक्योरिटी सिस्टम है, जो डिवाइस, ऐप्स और यूजर्स के संवेदनशील डेटा को सुरक्षा प्रदान करता है।किन डिवाइस पर खतरा ज्यादाएडवाइजरी के मुताबिक यह सुरक्षा खामी उन Samsung डिवाइस को प्रभावित कर सकती है जो Android 13, Android 14, Android 15 और Android 16 पर चल रहे हैं और जिनमें जनवरी 2026 के सिक्योरिटी मेंटेनेंस रिलीज (SMR Jan-2026 Release 1) से पहले का सॉफ्टवेयर इंस्टॉल है। यह खामी Samsung Knox के PROCA ड्राइवर में मौजूद एक बग के कारण बताई गई है।क्या हो सकता है खतराCERT-In की रिपोर्ट में बताया गया है कि इस खामी का फायदा उठाकर हैकर्स डिवाइस में मैलिशियस कोड रन कर सकते हैं, सुरक्षा सिस्टम को बायपास कर सकते हैं और अनधिकृत रूप से फोन तक पहुंच हासिल कर सकते हैं। गंभीर स्थिति में डिवाइस का पूरा नियंत्रण भी हमलावरों के हाथ में जा सकता है। सरकारी एजेंसी ने इस जोखिम को “हाई सीवियरिटी” कैटेगरी में रखा है और कहा है कि इससे डेटा चोरी और सिस्टम से छेड़छाड़ जैसी समस्याएं हो सकती हैं। हालांकि, इस खामी का फायदा उठाने के लिए डिवाइस तक लोकल एक्सेस की आवश्यकता होती है, फिर भी यूजर्स को सावधानी बरतने और तुरंत अपडेट करने की सलाह दी गई है। कितने यूजर्स प्रभावित हैं, जानकारी नहींरिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि Samsung की ओर से अभी तक यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि भारत या वैश्विक स्तर पर कितने डिवाइस इस समस्या से प्रभावित हो सकते हैं। यूजर्स के लिए जरूरी सलाहसुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, इस तरह के साइबर जोखिम से बचने का सबसे आसान तरीका डिवाइस को अपडेट रखना है। यूजर्स अपने फोन में जाकरSettings → Software Update → Download and Install के जरिए लेटेस्ट अपडेट चेक और इंस्टॉल कर सकते हैं। समय पर अपडेट करने से संभावित साइबर हमलों और डेटा चोरी के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
PoK में संकट गहराया, भोजन, दवा और ईंधन की भारी कमी, विरोध दबाने के आरोपों के बीच हालात तनावपूर्ण

इस्लामाबाद। पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में जारी सरकार-विरोधी प्रदर्शनों के बीच हालात गंभीर हो गए हैं। स्थानीय रिपोर्टों के अनुसार, इस्लामाबाद पर आरोप है कि उसने विरोध प्रदर्शनों को नियंत्रित करने के लिए क्षेत्र में भोजन, राशन, दवाओं और ईंधन की आपूर्ति पर रोक जैसी स्थिति पैदा कर दी है, जिससे कई इलाकों में मानवीय संकट गहरा गया है। रिपोर्टों के मुताबिक मुजफ्फरनगर, पुंछ, रावलाकोट, बाग और नीलम घाटी जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में खाद्यान्न और आवश्यक वस्तुओं की भारी कमी देखी जा रही है। स्थानीय लोगों, ट्रक ड्राइवरों और विपक्षी नेताओं का कहना है कि आवश्यक सामान ले जाने वाले वाहनों को सीमा चौकियों पर रोका जा रहा है, जिससे स्थिति और बिगड़ गई है। जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) के नेतृत्व में चल रहे शटडाउन और विरोध प्रदर्शनों के कारण पहले से ही आपूर्ति व्यवस्था प्रभावित थी, लेकिन अब इसे और गंभीर बताया जा रहा है। हालांकि, पाकिस्तानी अधिकारियों ने किसी भी प्रकार की नाकेबंदी से इनकार किया है, जबकि BBC उर्दू और डॉन जैसी मीडिया रिपोर्टों में हालात को चिंताजनक बताया गया है।सीमा चौकियों पर वाहनों की आवाजाही प्रभावित स्थानीय रिपोर्टों के अनुसार, पीओके में खाद्यान्न और दवाओं की कमी के बाद लोग खैबर पख्तूनख्वा, रावलपिंडी और इस्लामाबाद से सामान लाने को मजबूर हैं, लेकिन उन्हें सीमा चौकियों पर रोका जा रहा है। आजाद पट्टन और फगवारी क्षेत्रों में तैनात पुलिस द्वारा व्यावसायिक और निजी वाहनों की जांच की जा रही है, जिससे कई वाहन लंबे समय से रुके हुए हैं और खराब होने वाला सामान नष्ट हो रहा है। स्थानीय लोगों की परेशानियां बढ़ीं स्थानीय नागरिकों के अनुसार स्थिति बेहद कठिन हो गई है। एक निवासी नवीद ने बताया कि उन्हें रावलपिंडी से लाया गया भोजन और दवाएं ले जाने से रोका गया और कथित तौर पर सामान फेंकने के बाद ही आगे बढ़ने की अनुमति देने की बात कही गई। नीलम घाटी के निवासी अलिफ दीन के अनुसार, शटडाउन और आपूर्ति बाधित होने के कारण पिछले कई दिनों से राशन उपलब्ध नहीं है। सरकारी डिपो पर भुगतान के बावजूद लोगों को आटा नहीं मिल पा रहा है और खुले बाजार में कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं।दवा और ईंधन की गंभीर कमी मुजफ्फरनगर के 64 वर्षीय मोहम्मद मकीन ने बताया कि क्षेत्र में दवाओं की भारी कमी है और सभी बड़े मेडिकल स्टोर पिछले दो सप्ताह से बंद पड़े हैं। वहीं पुंछ और मुजफ्फरनगर में पेट्रोल पंप बंद होने से लोग ब्लैक मार्केट से महंगा ईंधन खरीदने को मजबूर हैं। आरोप और राजनीतिक बयानबाजी पाकिस्तानी अधिकारियों ने नाकेबंदी के आरोपों से इनकार किया है, जबकि मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया है कि सरकार बिना सीधे बल प्रयोग के प्रदर्शन समाप्त करने के लिए आपूर्ति लाइन बाधित करने की रणनीति अपना रही है। पीओके में जारी विरोध का मुख्य कारण जम्मू-कश्मीर शरणार्थियों के लिए आरक्षित 12 विधानसभा सीटें बताई जा रही हैं। स्थानीय समूहों का आरोप है कि इन सीटों के माध्यम से चुनावी प्रक्रिया प्रभावित की जाती है। इसी मुद्दे पर जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी के नेतृत्व में आंदोलन जारी है, जिसके दौरान इंटरनेट सेवाएं भी बाधित की गई हैं। रिपोर्टों के अनुसार, झड़पों में अब तक कम से कम 58 लोगों की मौत का दावा किया गया है। पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) की पीओके इकाई ने सोशल मीडिया पर इस कार्रवाई की आलोचना करते हुए इसे गंभीर दमन बताया है। बड़ा आंदोलन जारी रिपोर्टों के अनुसार, रावलाकोट के ईदगाह मैदान में चल रहे धरने में पिछले दो हफ्तों में 70,000 से अधिक लोग शामिल हुए हैं। जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी ने चेतावनी दी है कि यदि मांगें पूरी नहीं की गईं तो मुजफ्फरनगर तक 1,00,000 लोगों का बड़ा मार्च निकाला जा सकता है।
AI से बढ़ेगा जॉब संकट, 99% कंपनियों के प्रमुखों ने जताई छंटनी की आशंका, युवा कर्मचारियों पर खतरा

नई दिल्ली। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) अब केवल काम को आसान बनाने वाली तकनीक नहीं रह गई है, बल्कि यह रोजगार बाजार की तस्वीर भी तेजी से बदल रही है। एक नई वैश्विक रिपोर्ट के अनुसार, अगले दो वर्षों में AI के बढ़ते उपयोग के कारण नौकरी कटौती का खतरा बढ़ सकता है, जिसका सबसे अधिक असर करियर की शुरुआत कर रहे युवा कर्मचारियों पर पड़ने की आशंका है। ग्लोबल HR और कंसल्टिंग फर्म मर्सर (Mercer) की ताजा *ग्लोबल टैलेंट ट्रेंड्स रिपोर्ट* में सामने आया है कि 99 प्रतिशत से अधिक बिजनेस एग्जीक्यूटिव्स का मानना है कि AI के कारण आने वाले दो वर्षों में किसी न किसी स्तर पर कर्मचारियों की छंटनी हो सकती है। इस रिपोर्ट के लिए दुनिया भर के करीब 12 हजार एग्जीक्यूटिव्स, HR लीडर्स और कर्मचारियों से राय ली गई। एंट्री-लेवल कर्मचारियों पर सबसे ज्यादा असररिपोर्ट के मुताबिक AI का सबसे बड़ा प्रभाव उन कर्मचारियों पर पड़ सकता है जो अपने करियर की शुरुआत कर रहे हैं। जिन कार्यों के जरिए नए कर्मचारी अनुभव और कौशल हासिल करते थे, उनमें से कई जिम्मेदारियां अब AI आसानी से संभाल सकता है। यही वजह है कि कंपनियां जूनियर स्तर की भर्तियों को लेकर अपनी रणनीति बदल रही हैं। पिछले एक वर्ष में उन कंपनियों की संख्या 17 प्रतिशत से बढ़कर 43 प्रतिशत हो गई है, जिन्होंने जूनियर पदों में कटौती की है। विशेषज्ञों के अनुसार 22 से 27 वर्ष आयु वर्ग के युवा प्रोफेशनल्स इस बदलाव से सबसे अधिक प्रभावित हो सकते हैं। AI अपनाने की दौड़, लेकिन तैयारी अधूरीरिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि कंपनियां तेजी से AI को अपने कामकाज में शामिल कर रही हैं, लेकिन अधिकांश संस्थान इसके लिए पूरी तरह तैयार नहीं हैं। सर्वे के अनुसार केवल एक-तिहाई कंपनियों को ही विश्वास है कि वे मानव कर्मचारियों और AI के बीच प्रभावी समन्वय स्थापित कर पाएंगी। इससे संकेत मिलता है कि कई संगठन पहले AI लागू कर रहे हैं और बाद में कर्मचारियों की भूमिका तय कर रहे हैं।क्या छंटनी से कंपनियों को मिलेगा फायदा?विशेषज्ञों का कहना है कि कर्मचारियों की संख्या घटाने से हमेशा बेहतर परिणाम नहीं मिलते। एक अन्य अध्ययन में पाया गया कि बड़े पैमाने पर छंटनी करने वाली कंपनियों को जरूरी नहीं कि अधिक मुनाफा या बेहतर उत्पादकता हासिल हुई हो। कई मामलों में AI का सबसे प्रभावी उपयोग तब देखा गया, जब इसे कर्मचारियों की जगह लेने के बजाय उनकी कार्यक्षमता बढ़ाने के लिए इस्तेमाल किया गया।AI के कारण बढ़ रही नौकरी कटौतीरिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2026 में AI का असर रोजगार बाजार पर स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। अकेले अप्रैल 2026 में अमेरिका में करीब 21,500 नौकरियों की कटौती के पीछे AI एक प्रमुख कारण रहा, जो उस महीने हुई कुल छंटनी का लगभग 26 प्रतिशत हिस्सा था। वहीं, वर्ष 2026 में अब तक AI से जुड़ी 49 हजार से अधिक नौकरियां समाप्त हो चुकी हैं। यह आंकड़ा वर्ष 2025 के कुल स्तर के लगभग बराबर पहुंच चुका है। Meta, Oracle, Salesforce और Block जैसी प्रमुख टेक कंपनियां भी AI आधारित ऑटोमेशन और री-स्ट्रक्चरिंग के तहत कर्मचारियों की संख्या में कमी कर चुकी हैं। भविष्य में किन स्किल्स की होगी मांग?विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में उन पेशेवरों की मांग बढ़ेगी जो AI के साथ मिलकर काम करने की क्षमता रखते हैं। इसलिए AI से प्रतिस्पर्धा करने के बजाय उसे प्रभावी ढंग से उपयोग करना सीखना अधिक महत्वपूर्ण होगा। फिलहाल इतना स्पष्ट है कि AI अब केवल तकनीकी बदलाव का विषय नहीं रह गया है, बल्कि यह भर्ती, रोजगार, करियर और कार्य संस्कृति को प्रभावित करने वाली एक बड़ी शक्ति बन चुका है। अगले दो वर्ष यह तय करेंगे कि AI कर्मचारियों के लिए चुनौती बनता है या नए अवसरों का रास्ता खोलता है।
निर्जला एकादशी से चमकेगी इन 4 राशियों की किस्मत, श्रीहरि विष्णु की कृपा से बनेंगे सफलता और धन लाभ के योग

नई दिल्ली। ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष की निर्जला एकादशी का व्रत आज श्रद्धा और आस्था के साथ रखा जा रहा है। हिंदू धर्म में इसे सबसे महत्वपूर्ण और पुण्यदायी एकादशियों में से एक माना जाता है। भगवान विष्णु को समर्पित इस व्रत को लेकर मान्यता है कि श्रद्धापूर्वक उपवास और पूजा-अर्चना करने से वर्षभर की सभी एकादशियों के समान पुण्य फल प्राप्त होता है। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, निर्जला एकादशी के प्रभाव से कुछ राशियों के जीवन में शुभ परिवर्तन देखने को मिल सकते हैं। इन राशियों पर भगवान विष्णु की विशेष कृपा रहने के कारण करियर, धन और पारिवारिक जीवन में सकारात्मक परिणाम मिलने के संकेत हैं।वृषभ राशिवृषभ राशि के जातकों के लिए यह समय लाभदायक साबित हो सकता है। लंबे समय से रुके कार्य पूरे होने की संभावना है और मेहनत का उचित फल मिल सकता है। आर्थिक स्थिति मजबूत होने के संकेत हैं। साथ ही भगवान विष्णु की कृपा से जीवन में संतुलन और स्थिरता बनी रह सकती है। कर्क राशिनिर्जला एकादशी के बाद कर्क राशि के लोगों को कई मामलों में राहत मिल सकती है। मानसिक तनाव कम होने के साथ पारिवारिक माहौल भी सुखद रह सकता है। कार्यक्षेत्र में बेहतर परिणाम मिलने की संभावना है। नियमित रूप से भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना करने से शुभ फलों में वृद्धि हो सकती है। सिंह राशिसिंह राशि के जातकों के लिए यह अवधि उपलब्धियों से भरी रह सकती है। करियर में आगे बढ़ने के अवसर मिल सकते हैं और सामाजिक प्रतिष्ठा में भी वृद्धि होने के योग हैं। आत्मविश्वास और परिश्रम के बल पर महत्वपूर्ण सफलता हासिल की जा सकती है। तुला राशितुला राशि वालों के लिए आर्थिक स्थिति में सुधार के संकेत दिखाई दे रहे हैं। नौकरी और व्यवसाय से जुड़े नए अवसर मिल सकते हैं। लंबे समय से चली आ रही परेशानियां धीरे-धीरे कम होने की संभावना है। धार्मिक गतिविधियों में भागीदारी और भगवान विष्णु की भक्ति इनके लिए विशेष लाभकारी साबित हो सकती है। धार्मिक मान्यताज्योतिष और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, निर्जला एकादशी का दिन भगवान विष्णु की आराधना के लिए विशेष महत्व रखता है। श्रद्धा और नियमपूर्वक किए गए व्रत, दान और पूजा से शुभ फल प्राप्त होने की मान्यता है।
मध्य प्रदेश में मानसून ने दी दस्तक, आज 46 जिलों में आंधी-बारिश की चेतावनी

भोपाल। मध्य प्रदेश के दक्षिण-पूर्वी क्षेत्र के 15 जिलों में मानसून की आधिकारिक एंट्री हो चुकी है। मौसम विभाग के मुताबिक अगले 2 से 3 दिनों में मानसून प्रदेश के शेष हिस्सों को भी कवर कर लेगा। हालांकि ग्वालियर-चंबल संभाग में मानसून सबसे आखिर में पहुंचने की संभावना जताई गई है। मौसम विभाग ने गुरुवार को प्रदेश के 46 जिलों में तेज आंधी और बारिश का अलर्ट जारी किया है। वहीं सीधी जिले में लू चलने की आशंका है। इसके अलावा नीमच, मंदसौर, ग्वालियर, श्योपुर, मुरैना, भिंड, रीवा और सिंगरौली में उमस और गर्मी का असर बना रह सकता है। विभाग के अनुसार भोपाल, रायसेन, सीहोर, राजगढ़, विदिशा, इंदौर, झाबुआ, आलीराजपुर, धार, बुरहानपुर, बड़वानी, खंडवा, खरगोन, उज्जैन, रतलाम, आगर-मालवा, शाजापुर, देवास, नर्मदापुरम, बैतूल, हरदा, दतिया, शिवपुरी, गुना, अशोकनगर, जबलपुर, कटनी, नरसिंहपुर, छिंदवाड़ा, पांढुर्णा, सिवनी, बालाघाट, मंडला, डिंडौरी, सतना, सीधी, मऊगंज, मैहर, शहडोल, उमरिया, अनूपपुर, सागर, पन्ना, दमोह, छतरपुर, टीकमगढ़ और निवाड़ी में 40 से 60 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से आंधी के साथ बारिश होने का अनुमान है। इन जिलों में पहुंच चुका है मानसून आलीराजपुर, इंदौर, हरदा, धार, बैतूल, खंडवा, बुरहानपुर, छिंदवाड़ा, पांढुर्णा, खरगोन, सिवनी, बालाघाट, मंडला, बड़वानी और डिंडौरी जिलों में मानसून के आगमन की घोषणा की जा चुकी है। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि अगले दो से चार दिनों के भीतर मानसून पूरे प्रदेश में सक्रिय हो जाएगा। इस बार सामान्य से कम बारिश के संकेत मौसम केंद्र (आईएमडी) के पूर्वानुमान के अनुसार इस वर्ष भोपाल, इंदौर, जबलपुर सहित प्रदेश के 47 जिलों में सामान्य से कम वर्षा होने की संभावना है। प्रदेश में औसत 37.3 इंच बारिश के मुकाबले 30 से 32 इंच तक वर्षा दर्ज होने का अनुमान लगाया गया है। मानसून की देरी से बारिश में 50 प्रतिशत की कमी मानसून के विलंब से पहुंचने के कारण 24 जून तक प्रदेश में सूखे जैसे हालात बने रहे। एक जून से अब तक जहां औसतन 84.8 मिमी (3.6 इंच) बारिश होनी चाहिए थी, वहीं केवल 42 मिमी (1.6 इंच) वर्षा दर्ज की गई है, जो सामान्य से करीब 50 प्रतिशत कम है। इंदौर, उज्जैन और ग्वालियर समेत प्रदेश के 48 जिलों में सामान्य से कम बारिश रिकॉर्ड की गई है।