कच्चे तेल में नरमी से शेयर बाजार को मिला नया दम, सेंसेक्स-निफ्टी में जोरदार उछाल, आईटी और रियल्टी शेयरों में बढ़ी चमक

नई दिल्ली । अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आई नरमी और सकारात्मक वैश्विक संकेतों के बीच भारतीय शेयर बाजार ने गुरुवार को मजबूत शुरुआत दर्ज की। शुरुआती कारोबार में निवेशकों का भरोसा बढ़ने से प्रमुख सूचकांक तेजी के साथ कारोबार करते दिखाई दिए। बाजार में आईटी, रियल्टी और बैंकिंग क्षेत्रों में खरीदारी का रुझान प्रमुख रूप से देखने को मिला, जिससे निवेशकों का उत्साह बढ़ा और कारोबारी माहौल सकारात्मक बना रहा। कारोबार की शुरुआत में सेंसेक्स ने उल्लेखनीय बढ़त हासिल करते हुए ऊंचे स्तर पर कारोबार किया, जबकि निफ्टी भी मजबूती के साथ आगे बढ़ा। शुरुआती घंटों में बाजार की चाल से यह संकेत मिला कि निवेशक घरेलू और वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों को लेकर पहले की तुलना में अधिक आश्वस्त दिखाई दे रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि ऊर्जा बाजार में स्थिरता और तेल कीमतों में गिरावट से भारतीय अर्थव्यवस्था को राहत मिलने की उम्मीद बढ़ी है, जिसका सकारात्मक असर इक्विटी बाजार पर दिखाई दे रहा है। बाजार में सबसे अधिक मजबूती सूचना प्रौद्योगिकी और रियल्टी क्षेत्र के शेयरों में देखने को मिली। आईटी कंपनियों के शेयरों में खरीदारी बढ़ने से इस क्षेत्र का सूचकांक तेजी से ऊपर गया। वहीं रियल एस्टेट क्षेत्र में भी निवेशकों की सक्रियता बढ़ी, जिससे संबंधित कंपनियों के शेयरों में अच्छी बढ़त दर्ज की गई। इसके अलावा बैंकिंग, वित्तीय सेवाएं, ऑटोमोबाइल और ऊर्जा क्षेत्र से जुड़ी कंपनियों में भी सकारात्मक रुझान दिखाई दिया। लार्जकैप शेयरों के साथ-साथ मिडकैप और स्मॉलकैप कंपनियों में भी निवेशकों की दिलचस्पी बनी रही। व्यापक बाजार में खरीदारी के संकेत इस बात को दर्शाते हैं कि तेजी केवल कुछ चुनिंदा शेयरों तक सीमित नहीं रही, बल्कि विभिन्न क्षेत्रों में निवेशकों का विश्वास मजबूत हुआ है। बाजार विश्लेषकों के अनुसार, व्यापक भागीदारी किसी भी तेजी को अधिक टिकाऊ बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। वैश्विक बाजारों से मिले संकेत भी भारतीय शेयर बाजार के पक्ष में रहे। एशियाई बाजारों में अधिकांश प्रमुख सूचकांक हरे निशान में कारोबार करते दिखाई दिए। इससे निवेशकों की धारणा को समर्थन मिला। हालांकि कुछ बाजारों में मिश्रित रुख देखने को मिला, फिर भी क्षेत्रीय स्तर पर जोखिम लेने की प्रवृत्ति में सुधार का असर भारतीय बाजार पर भी दिखाई दिया। विशेषज्ञों का मानना है कि कच्चे तेल की कीमतों का 73 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंचना भारत जैसी आयात-निर्भर अर्थव्यवस्था के लिए सकारात्मक संकेत है। तेल कीमतों में कमी से आयात बिल पर दबाव घट सकता है, जिससे चालू खाता घाटा नियंत्रित रखने में मदद मिलेगी। साथ ही परिवहन और उत्पादन लागत पर पड़ने वाला दबाव कम होने से महंगाई को नियंत्रित रखने में भी सहायता मिल सकती है। अर्थशास्त्रियों का कहना है कि यदि तेल की कीमतें लंबे समय तक नियंत्रित रहती हैं तो इसका लाभ आर्थिक विकास दर पर भी दिखाई दे सकता है। कम लागत वाले आर्थिक माहौल में उद्योगों की लाभप्रदता बढ़ सकती है और निवेश गतिविधियों को भी गति मिल सकती है। यही वजह है कि बाजार ने तेल कीमतों में आई गिरावट को सकारात्मक संकेत के रूप में लिया है। फिलहाल निवेशकों की नजर वैश्विक आर्थिक घटनाक्रम, कच्चे तेल की दिशा और आगामी आर्थिक आंकड़ों पर बनी हुई है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियां अनुकूल बनी रहती हैं और घरेलू आर्थिक संकेतक मजबूत रहते हैं, तो भारतीय शेयर बाजार में सकारात्मक रुख आगे भी जारी रह सकता है। गुरुवार की शुरुआती तेजी ने यह संकेत जरूर दिया है कि निवेशकों का भरोसा फिलहाल मजबूत बना हुआ है और बाजार नई ऊंचाइयों की ओर बढ़ने का प्रयास कर रहा है।
AI बनाम जुगाड़: चीन में गुड़िया का सिर बन गया Tesla के ऑटोपायलट का सबसे बड़ा दुश्मन

नई दिल्ली।टेस्ला की सेल्फ ड्राइविंग तकनीक को दुनिया की सबसे उन्नत ऑटोमोबाइल तकनीकों में गिना जाता है। कंपनी का ड्राइवर मॉनिटरिंग सिस्टम और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित सुरक्षा तंत्र इस बात पर लगातार नजर रखता है कि वाहन चला रहा व्यक्ति सड़क पर ध्यान दे रहा है या नहीं। लेकिन चीन में कुछ ड्राइवरों ने इस हाईटेक सिस्टम को चकमा देने का ऐसा तरीका खोज निकाला है जिसने तकनीकी विशेषज्ञों और सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है। रिपोर्ट्स के अनुसार चीन में कई टेस्ला चालक अपनी कार के अंदर रियर व्यू मिरर के पास प्लास्टिक की गुड़िया का सिर फिट कर रहे हैं। यह गुड़िया का सिर टेस्ला के इन-कैबिन कैमरे के सामने इस तरह लगाया जाता है कि कार का एआई सिस्टम उसे एक वास्तविक और सतर्क ड्राइवर समझ लेता है। इसके बाद वाहन का ड्राइवर मॉनिटरिंग सिस्टम यह मान लेता है कि चालक पूरी तरह सक्रिय है और सड़क पर नजर बनाए हुए है। दरअसल टेस्ला के ऑटोपायलट और फुल सेल्फ ड्राइविंग फीचर्स पूरी तरह स्वायत्त नहीं हैं। इनका उपयोग करते समय चालक का सतर्क रहना और जरूरत पड़ने पर तुरंत वाहन का नियंत्रण संभालना अनिवार्य होता है। इसी उद्देश्य से कंपनी ने ड्राइवर मॉनिटरिंग सिस्टम विकसित किया है जो चालक की आंखों की गतिविधियों और सिर की दिशा पर नजर रखता है। यदि सिस्टम को लगता है कि चालक ध्यान नहीं दे रहा है तो वह चेतावनी जारी करता है और जरूरत पड़ने पर ऑटोपायलट फीचर को सीमित भी कर सकता है। चीन में ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर ऐसी गुड़िया के सिर तेजी से बिक रहे हैं जिनकी कीमत लगभग 10 से 50 डॉलर के बीच बताई जा रही है। सोशल मीडिया पर कई वीडियो भी वायरल हो रहे हैं जिनमें लोग प्रसिद्ध हस्तियों की आकृति वाले प्लास्टिक सिर का इस्तेमाल कर टेस्ला के एआई सिस्टम को भ्रमित करते दिखाई दे रहे हैं। इस जुगाड़ के जरिए कुछ चालक लंबे सफर के दौरान ड्राइविंग पर कम ध्यान देते हुए ऑटोपायलट के भरोसे यात्रा करते नजर आ रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह प्रवृत्ति बेहद खतरनाक साबित हो सकती है। टेस्ला की तकनीक भले ही अत्याधुनिक हो लेकिन यह अभी भी मानव निगरानी पर निर्भर करती है। सड़क पर अचानक आने वाली किसी अप्रत्याशित स्थिति में वाहन हमेशा सही निर्णय लेने में सक्षम नहीं हो सकता। ऐसे समय चालक का सक्रिय और सतर्क होना बेहद जरूरी होता है। यदि ड्राइवर का ध्यान भटका हुआ हो तो दुर्घटना का जोखिम कई गुना बढ़ सकता है। फिलहाल टेस्ला ने इस मामले पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है। हालांकि तकनीकी विशेषज्ञों का मानना है कि कंपनी भविष्य में ओवर द एयर यानी ओटीए अपडेट के माध्यम से अपने एआई सिस्टम को और अधिक उन्नत बना सकती है ताकि ऐसे जुगाड़ों को रोका जा सके। यह घटना केवल टेस्ला के लिए ही नहीं बल्कि पूरी ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री के लिए एक बड़ी चुनौती बनकर सामने आई है क्योंकि इससे यह सवाल उठता है कि इंसानी चालाकी के सामने एआई आधारित सुरक्षा प्रणालियां कितनी प्रभावी हैं। यह मामला एक बार फिर साबित करता है कि तकनीक कितनी भी उन्नत क्यों न हो उसकी सफलता अंततः जिम्मेदार उपयोगकर्ताओं पर ही निर्भर करती है। यदि सुरक्षा नियमों की अनदेखी की जाएगी तो अत्याधुनिक तकनीक भी दुर्घटनाओं को पूरी तरह नहीं रोक पाएगी।
IIT रुड़की की अहम खोज, गौमूत्र डिस्टिलेट में मिले ऐसे यौगिक जिन्होंने लैब में चिकनगुनिया वायरस की सक्रियता को किया कमजोर

नई दिल्ली । मच्छरों से फैलने वाली बीमारियों के बढ़ते खतरे के बीच भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान रुड़की के वैज्ञानिकों ने एक ऐसा शोध प्रस्तुत किया है, जो भविष्य में एंटीवायरल दवाओं के विकास के लिए नई संभावनाएं खोल सकता है। संस्थान के शोधकर्ताओं ने गौमूत्र डिस्टिलेट में मौजूद कुछ जैव-सक्रिय यौगिकों की पहचान की है, जिन्होंने प्रयोगशाला स्तर पर चिकनगुनिया वायरस के खिलाफ प्रभावी परिणाम प्रदर्शित किए हैं। वैज्ञानिकों का मानना है कि यह अध्ययन वायरसजनित रोगों पर अनुसंधान की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है। शोध के दौरान वैज्ञानिकों ने चिकनगुनिया वायरस से संक्रमित कोशिकाओं पर गौमूत्र डिस्टिलेट के प्रभाव का परीक्षण किया। नियंत्रित प्रयोगशाला परिस्थितियों में किए गए परीक्षणों से संकेत मिला कि डिस्टिलेट में मौजूद कुछ यौगिक वायरस की सक्रियता को कम करने में सक्षम हैं। अध्ययन के अनुसार संक्रमित कोशिकाओं में इन तत्वों के उपयोग के बाद वायरस की मात्रा में उल्लेखनीय कमी देखी गई, जिससे शोधकर्ताओं का ध्यान इस दिशा में और अधिक केंद्रित हुआ। वैज्ञानिकों ने अध्ययन के दौरान कई महत्वपूर्ण जैव-सक्रिय तत्वों की पहचान की। इनमें बेंजोइक एसिड, हिप्यूरिक एसिड और ओलेइक एसिड जैसे यौगिक शामिल हैं। शोधकर्ताओं का मानना है कि ये तत्व वायरस के जीवन चक्र से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण प्रोटीन और एंजाइमों को प्रभावित कर सकते हैं। इससे वायरस की प्रतिकृति बनाने की प्रक्रिया धीमी पड़ सकती है और उसके फैलाव की क्षमता कमजोर हो सकती है। अध्ययन में यह भी पाया गया कि जब गौमूत्र डिस्टिलेट को कुछ अन्य प्राकृतिक यौगिकों के साथ मिलाकर परीक्षण किया गया, तब परिणाम और अधिक प्रभावशाली दिखाई दिए। वैज्ञानिकों के अनुसार यह संकेत देता है कि विभिन्न प्राकृतिक तत्वों का संयोजन भविष्य में नई एंटीवायरल दवाओं के विकास में उपयोगी भूमिका निभा सकता है। इससे कम लागत वाले और वैकल्पिक उपचार विकल्पों की दिशा में भी अनुसंधान को गति मिल सकती है। हालांकि शोधकर्ताओं ने इस उपलब्धि को लेकर सावधानी बरतने की आवश्यकता पर भी जोर दिया है। उनका स्पष्ट कहना है कि वर्तमान निष्कर्ष केवल प्रयोगशाला स्तर तक सीमित हैं और इन्हें सीधे मानव उपचार से जोड़ना वैज्ञानिक रूप से उचित नहीं होगा। किसी भी संभावित औषधि को चिकित्सा उपयोग के लिए स्वीकृति मिलने से पहले विस्तृत प्री-क्लिनिकल और क्लिनिकल परीक्षणों से गुजरना आवश्यक होता है। विशेषज्ञों ने आम लोगों को यह सलाह भी दी है कि इस अध्ययन के आधार पर किसी प्रकार का स्व-उपचार या सीधे गौमूत्र का सेवन करने जैसे कदम नहीं उठाने चाहिए। प्रयोगशाला में प्राप्त सकारात्मक परिणामों और मानव शरीर में वास्तविक प्रभाव के बीच कई वैज्ञानिक चरण होते हैं, जिनका मूल्यांकन आवश्यक है। सुरक्षा, प्रभावशीलता और संभावित दुष्प्रभावों की पुष्टि के बिना किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं माना जाता। स्वास्थ्य और जैव-प्रौद्योगिकी क्षेत्र के जानकारों का मानना है कि यह शोध पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक विज्ञान के समन्वय का एक उल्लेखनीय उदाहरण है। यदि भविष्य के परीक्षणों में भी ऐसे ही सकारात्मक परिणाम प्राप्त होते हैं, तो इससे चिकनगुनिया समेत अन्य वायरल संक्रमणों के उपचार के लिए नए रास्ते खुल सकते हैं। साथ ही यह प्राकृतिक स्रोतों से दवा विकास के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण योगदान दे सकता है। भारत में हर वर्ष मानसून और उसके बाद के मौसम में चिकनगुनिया के मामलों में वृद्धि देखी जाती है। ऐसे में वायरस के खिलाफ प्रभावी उपचार की खोज सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती है। फिलहाल वैज्ञानिक समुदाय इस अध्ययन को प्रारंभिक स्तर की एक उत्साहजनक उपलब्धि मान रहा है, जबकि अंतिम निष्कर्षों और व्यावहारिक उपयोग के लिए आगे के व्यापक परीक्षणों का इंतजार किया जा रहा है।
सेंसिटिव टूथपेस्ट पर विशेषज्ञों की चेतावनी, दांतों को राहत देने वाला तत्व कुछ मरीजों के लिए बन सकता है खतरा

नई दिल्ली । दांतों की संवेदनशीलता से राहत दिलाने वाले विशेष टूथपेस्ट का उपयोग पिछले कुछ वर्षों में तेजी से बढ़ा है। ठंडी या गर्म चीजें खाने-पीने पर दांतों में होने वाली झनझनाहट से परेशान लोग ऐसे उत्पादों का सहारा लेते हैं, जो तत्काल राहत देने का दावा करते हैं। हालांकि अब स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि इन टूथपेस्ट में मौजूद कुछ तत्व विशेष परिस्थितियों में हृदय और किडनी के मरीजों के लिए चिंता का कारण बन सकते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, कई सेंसिटिव टूथपेस्ट में पोटैशियम नाइट्रेट नामक तत्व का उपयोग किया जाता है। यह दांतों की नसों की गतिविधि को शांत करके संवेदनशीलता से होने वाले दर्द को कम करने में मदद करता है। यही कारण है कि ऐसे टूथपेस्ट दांतों में होने वाली झनझनाहट और असहजता को नियंत्रित करने में प्रभावी माने जाते हैं। हालांकि कुछ विशेष स्वास्थ्य स्थितियों वाले लोगों के लिए इसके उपयोग को लेकर अतिरिक्त सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। हृदय रोग विशेषज्ञों का कहना है कि पोटैशियम शरीर में कई महत्वपूर्ण कार्यों के लिए आवश्यक तत्व है। यह विशेष रूप से हृदय की धड़कन को नियंत्रित करने वाले विद्युत संकेतों के संतुलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यदि शरीर में पोटैशियम का स्तर अत्यधिक बढ़ जाता है तो हृदय की सामान्य कार्यप्रणाली प्रभावित हो सकती है। ऐसी स्थिति में धड़कनों की अनियमितता सहित कई गंभीर समस्याएं उत्पन्न होने का खतरा बढ़ सकता है। विशेषज्ञ यह भी स्पष्ट करते हैं कि केवल सेंसिटिव टूथपेस्ट के उपयोग से अधिकांश स्वस्थ लोगों में कोई गंभीर स्वास्थ्य समस्या होने की संभावना बहुत कम होती है। चिंता मुख्य रूप से उन लोगों के लिए है जो पहले से हृदय संबंधी बीमारियों से पीड़ित हैं या ऐसी दवाएं ले रहे हैं जो शरीर में पोटैशियम के स्तर को प्रभावित कर सकती हैं। ऐसे मरीजों में अतिरिक्त पोटैशियम का प्रभाव अपेक्षाकृत अधिक महत्वपूर्ण हो सकता है। विशेषज्ञों ने कुछ श्रेणियों के मरीजों को विशेष सतर्कता बरतने की सलाह दी है। इनमें उच्च रक्तचाप या हार्ट फेलियर के उपचार के लिए कुछ विशेष दवाएं लेने वाले लोग शामिल हैं। इसके अलावा पोटैशियम संतुलन को प्रभावित करने वाली दवाओं का सेवन करने वाले मरीजों को भी अपने चिकित्सक की सलाह के बिना किसी नए उत्पाद का नियमित उपयोग शुरू नहीं करना चाहिए। किडनी रोगियों के लिए भी यह विषय महत्वपूर्ण माना जा रहा है। किडनी शरीर में पोटैशियम के स्तर को नियंत्रित रखने में प्रमुख भूमिका निभाती है। जब किडनी की कार्यक्षमता प्रभावित होती है, तब शरीर में अतिरिक्त पोटैशियम जमा होने की आशंका बढ़ जाती है। यही कारण है कि क्रोनिक किडनी डिजीज से जूझ रहे मरीजों को ऐसे उत्पादों के उपयोग के दौरान चिकित्सकीय सलाह लेना उचित माना जाता है। विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी स्वास्थ्य संबंधी जोखिम का मूल्यांकन व्यक्ति की समग्र स्वास्थ्य स्थिति के आधार पर किया जाना चाहिए। केवल किसी एक उत्पाद को पूरी तरह खतरनाक मान लेना उचित नहीं है। सेंसिटिव टूथपेस्ट आज भी दांतों की संवेदनशीलता से राहत देने के लिए व्यापक रूप से उपयोग किए जाते हैं और अधिकांश लोगों के लिए सुरक्षित माने जाते हैं। फिर भी यदि कोई व्यक्ति हृदय या किडनी संबंधी बीमारी से पीड़ित है, तो उसे अपने डॉक्टर या दंत चिकित्सक से परामर्श लेकर ही ऐसे उत्पादों का चयन करना चाहिए। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि जागरूकता और चिकित्सकीय सलाह के साथ किसी भी उत्पाद का सुरक्षित उपयोग संभव है। इसलिए दांतों की समस्या से राहत पाने के साथ-साथ अपनी संपूर्ण स्वास्थ्य स्थिति को ध्यान में रखना भी उतना ही आवश्यक है।
अब कहीं भी देखें बड़ी स्क्रीन पर फिल्में! प्रोजेक्टर और पावरफुल फीचर्स वाला स्मार्टफोन लॉन्च

नई दिल्ली। स्मार्टफोन की दुनिया में लगातार नए प्रयोग देखने को मिल रहे हैं और अब एक ऐसा फोन सामने आया है जो जेब में मिनी सिनेमाघर लेकर चलता है। चीनी रग्ड स्मार्टफोन निर्माता 8849 ने अपना नया फ्लैगशिप स्मार्टफोन Tank 5 लॉन्च कर दिया है। इस फोन की सबसे बड़ी खासियत इसका इनबिल्ट 2K DLP लेजर प्रोजेक्टर है जो इसे सामान्य स्मार्टफोन्स से बिल्कुल अलग बनाता है। Tank 5 को खासतौर पर एडवेंचर पसंद करने वाले यूजर्स और आउटडोर गतिविधियों के लिए डिजाइन किया गया है। यह फोन केवल एक स्मार्टफोन नहीं बल्कि मनोरंजन और उपयोगिता का पावरहाउस साबित हो सकता है। इसके जरिए यूजर्स कहीं भी बड़ी स्क्रीन जैसा अनुभव ले सकते हैं। कंपनी ने इसमें लेजर बेस्ड ऑटो फोकस और ऑटोमैटिक कीस्टोन करेक्शन जैसी सुविधाएं दी हैं जिससे प्रोजेक्शन की गुणवत्ता बेहतर हो जाती है। यह 220 लुमेन ब्राइटनेस और 2048 x 1080 पिक्सल रिजॉल्यूशन प्रदान करता है। फोन की एक और खासियत यह है कि इसमें 4 मीटर तक मापने वाला लेजर रेंजफाइंडर भी दिया गया है जो इसे एक उपयोगी टूल में बदल देता है। आउटडोर कैंपिंग और प्रोफेशनल उपयोग के दौरान यह फीचर काफी मददगार साबित हो सकता है। डिस्प्ले की बात करें तो Tank 5 में 6.73 इंच का बड़ा AMOLED पंच होल डिस्प्ले मिलता है। यह 3200 x 1440 पिक्सल रिजॉल्यूशन 120Hz रिफ्रेश रेट और 3000 निट्स पीक ब्राइटनेस के साथ आता है। हाई ब्राइटनेस की वजह से तेज धूप में भी स्क्रीन को आसानी से देखा जा सकता है। फोटोग्राफी के लिए फोन में 50 मेगापिक्सल का मुख्य कैमरा 50 मेगापिक्सल का नाइट विजन कैमरा और 50 मेगापिक्सल का टेलीफोटो कैमरा दिया गया है। वहीं सेल्फी और वीडियो कॉलिंग के लिए 32 मेगापिक्सल का फ्रंट कैमरा मिलता है। नाइट विजन कैमरा कम रोशनी में शानदार तस्वीरें लेने में सक्षम है। परफॉर्मेंस के मामले में भी यह स्मार्टफोन किसी फ्लैगशिप डिवाइस से कम नहीं है। इसमें MediaTek Dimensity 9400e प्रोसेसर दिया गया है। फोन में 18GB RAM और 512GB इंटरनल स्टोरेज का सपोर्ट मिलता है जिसे माइक्रो एसडी कार्ड के जरिए 2TB तक बढ़ाया जा सकता है। यह स्मार्टफोन Android 16 ऑपरेटिंग सिस्टम पर चलता है और कंपनी ने पांच साल तक सिक्योरिटी अपडेट देने का वादा किया है। बैटरी इसकी सबसे बड़ी ताकतों में से एक है। Tank 5 में 17600mAh की विशाल बैटरी दी गई है जो लंबे समय तक उपयोग सुनिश्चित करती है। यह 120W फास्ट चार्जिंग और 25W रिवर्स चार्जिंग को सपोर्ट करता है जिससे अन्य डिवाइसेज को भी चार्ज किया जा सकता है। फोन में IP68 और IP69K वॉटर रेजिस्टेंस रेटिंग WiFi 7 NFC Bluetooth 5.4 eSIM सपोर्ट 3.5mm हेडफोन जैक और 1200 ल्यूमेन की कैंपिंग लाइट जैसे कई एडवांस फीचर्स भी दिए गए हैं। कीमत की बात करें तो 8849 Tank 5 की वैश्विक बाजार में कीमत 899.99 डॉलर यानी लगभग 85 हजार रुपये रखी गई है। फिलहाल इसे केवल ब्लैक कलर विकल्प में लॉन्च किया गया है और यह भारत में उपलब्ध नहीं है।
वैभव सूर्यवंशी के लिए इंग्लैंड दौरे पर विशेष व्यवस्था, भारतीय ड्रेसिंग रूम में कपड़े बदलने की नहीं होगी अनुमति

नई दिल्ली । भारतीय क्रिकेट के उभरते सितारे वैभव सूर्यवंशी आगामी इंग्लैंड दौरे पर पहली बार सीनियर टीम का हिस्सा बनने जा रहे हैं। महज 15 वर्ष की उम्र में राष्ट्रीय टीम में चयनित होने के कारण वह लगातार चर्चा में हैं। हालांकि इस दौरे से पहले उनके लिए एक विशेष व्यवस्था किए जाने की जानकारी सामने आई है। इंग्लैंड में होने वाली टी-20 श्रृंखला के दौरान वैभव भारतीय टीम के साथ रहेंगे, लेकिन उन्हें टीम के अन्य खिलाड़ियों के साथ चेंजिंग रूम साझा करने की अनुमति नहीं होगी। यह निर्णय किसी अनुशासनात्मक कारण से नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में लागू सुरक्षा नियमों के तहत लिया गया है। चूंकि वैभव अभी 16 वर्ष से कम आयु के हैं, इसलिए उन पर अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद की सेफगार्डिंग पॉलिसी लागू होगी। इसी नीति के तहत उनके लिए प्रत्येक मैच स्थल पर अलग चेंजिंग रूम और विशेष सुविधाओं की व्यवस्था की जाएगी। हालांकि युवा बल्लेबाज टीम की रणनीतिक बैठकों, अभ्यास सत्रों और ड्रेसिंग रूम की अन्य गतिविधियों का हिस्सा बने रहेंगे। उन्हें टीम के माहौल में पूरी तरह शामिल रखा जाएगा, लेकिन कपड़े बदलने और निजी सुविधाओं के उपयोग के लिए अलग व्यवस्था उपलब्ध कराई जाएगी। इस कदम का उद्देश्य नाबालिग खिलाड़ियों की सुरक्षा और गोपनीयता सुनिश्चित करना है। सेफगार्डिंग पॉलिसी अंतरराष्ट्रीय खेलों में कम उम्र के खिलाड़ियों के संरक्षण के लिए बनाई गई है। इसके तहत शारीरिक, मानसिक और सामाजिक सुरक्षा को प्राथमिकता दी जाती है। यह नीति सुनिश्चित करती है कि युवा खिलाड़ी किसी भी प्रकार के दबाव, असहजता या संभावित दुर्व्यवहार से सुरक्षित रहें और उन्हें स्वस्थ खेल वातावरण उपलब्ध कराया जाए। वैभव सूर्यवंशी के मामले में भी यही नियम लागू किए जा रहे हैं। क्रिकेट प्रशासन का मानना है कि इतनी कम उम्र में सीनियर स्तर पर पहुंचने वाले खिलाड़ियों को विशेष देखभाल और सहयोग की आवश्यकता होती है। यही कारण है कि उनके माता-पिता को भी इस विदेशी दौरे के दौरान साथ रहने की अनुमति दी गई है। इससे युवा खिलाड़ी को नए माहौल में मानसिक और भावनात्मक समर्थन मिलेगा। भारतीय क्रिकेट बोर्ड के अधिकारियों का मानना है कि वैभव को अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के माहौल में धीरे-धीरे ढालना जरूरी है। ऐसे में परिवार की मौजूदगी उनके आत्मविश्वास और प्रदर्शन दोनों के लिए लाभदायक साबित हो सकती है। बोर्ड यह सुनिश्चित करना चाहता है कि क्रिकेट के सबसे बड़े मंच पर कदम रखते समय युवा खिलाड़ी पर अनावश्यक दबाव न बने। वैभव सूर्यवंशी के लिए यह दौरा बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। उन्हें पहली बार भारतीय टी-20 टीम में शामिल किया गया है और इस दौरे पर उन्हें आयरलैंड तथा इंग्लैंड के खिलाफ कुल सात अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों का हिस्सा बनने का अवसर मिल सकता है। पहले भारत आयरलैंड के खिलाफ दो टी-20 मैच खेलेगा, जिसके बाद इंग्लैंड के विरुद्ध पांच मैचों की श्रृंखला खेली जाएगी। क्रिकेट जगत की नजरें अब इस युवा प्रतिभा पर टिकी हैं। कम उम्र में राष्ट्रीय टीम तक पहुंचने वाले वैभव से बड़ी उम्मीदें की जा रही हैं। इंग्लैंड दौरे पर लागू विशेष सुरक्षा व्यवस्थाएं यह भी दर्शाती हैं कि आधुनिक खेल प्रशासन युवा खिलाड़ियों के विकास के साथ-साथ उनकी सुरक्षा और मानसिक स्वास्थ्य को भी समान महत्व दे रहा है। ऐसे में यह दौरा वैभव सूर्यवंशी के क्रिकेट करियर का एक महत्वपूर्ण और यादगार अध्याय साबित हो सकता है।
फीफा वर्ल्ड कप 2026 में रोनाल्डो का बड़ा रिकॉर्ड, पुर्तगाल के लिए सबसे ज्यादा विश्व कप गोल करने का कीर्तिमान भी बनाया

नई दिल्ली । फुटबॉल की दुनिया में रिकॉर्डों के पर्याय बन चुके क्रिस्टियानो रोनाल्डो ने एक बार फिर ऐसा कारनामा कर दिखाया है, जिसने उन्हें खेल इतिहास के सबसे महान खिलाड़ियों की सूची में और मजबूती से स्थापित कर दिया है। फीफा वर्ल्ड कप 2026 में उज़्बेकिस्तान के खिलाफ मुकाबले में गोल दागते ही पुर्तगाल के कप्तान ने एक ऐसा विश्व रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया, जिसे अब तक कोई भी फुटबॉलर हासिल नहीं कर पाया था। मैच के शुरुआती मिनटों में ही रोनाल्डो ने अपनी मौजूदगी का प्रभाव दिखाया। मुकाबले के छठे मिनट में किए गए गोल ने न केवल पुर्तगाल को शानदार शुरुआत दिलाई, बल्कि उनके व्यक्तिगत करियर में भी एक ऐतिहासिक अध्याय जोड़ दिया। इस गोल के साथ रोनाल्डो छह अलग-अलग फीफा वर्ल्ड कप टूर्नामेंट में गोल करने वाले दुनिया के पहले खिलाड़ी बन गए। यह उपलब्धि उनके लंबे, निरंतर और असाधारण अंतरराष्ट्रीय करियर की गवाही देती है। विश्व फुटबॉल में लंबे समय से सक्रिय रोनाल्डो ने अलग-अलग पीढ़ियों के खिलाड़ियों के साथ खेलते हुए लगातार अपना प्रभाव बनाए रखा है। छह विश्व कप में गोल करने का रिकॉर्ड केवल प्रतिभा का नहीं, बल्कि फिटनेस, अनुशासन, समर्पण और निरंतरता का भी प्रतीक माना जा रहा है। यही कारण है कि यह उपलब्धि फुटबॉल इतिहास की सबसे विशेष उपलब्धियों में शामिल हो गई है। उज़्बेकिस्तान के खिलाफ मुकाबले में किया गया यह गोल रोनाल्डो के लिए एक और मायने में भी खास साबित हुआ। इसके साथ ही वह फीफा वर्ल्ड कप इतिहास में पुर्तगाल की ओर से सबसे अधिक गोल करने वाले खिलाड़ी बन गए। उन्होंने इस मामले में देश के महान फुटबॉलर युसेबियो का रिकॉर्ड पीछे छोड़ दिया। युसेबियो के नाम विश्व कप में नौ गोल दर्ज थे, जबकि रोनाल्डो ने अपने खाते में दसवां गोल जोड़कर नया राष्ट्रीय रिकॉर्ड कायम कर दिया। मुकाबले में गोल करने के बाद रोनाल्डो ने अपने चिर-परिचित अंदाज में जश्न मनाया। उनके चेहरे पर दिखाई दे रही खुशी इस उपलब्धि के महत्व को स्पष्ट कर रही थी। विश्व कप के पहले मैच में गोल करने से चूकने के बाद उन पर प्रदर्शन को लेकर चर्चा हो रही थी, लेकिन उज़्बेकिस्तान के खिलाफ शुरुआती मिनटों में ही गोल कर उन्होंने सभी सवालों का जवाब दे दिया। फुटबॉल विशेषज्ञों का मानना है कि यह रिकॉर्ड आने वाले वर्षों तक कायम रह सकता है, क्योंकि लगातार छह विश्व कप खेलना और उनमें से प्रत्येक में गोल करना बेहद कठिन उपलब्धि है। अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल में इतने लंबे समय तक शीर्ष स्तर पर बने रहना अपने आप में असाधारण माना जाता है। पुर्तगाल के लिए यह उपलब्धि इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि टीम अपने अनुभवी कप्तान के नेतृत्व में विश्व कप अभियान को आगे बढ़ा रही है। रोनाल्डो का अनुभव और गोल करने की क्षमता टीम के लिए बड़ी ताकत बनी हुई है। उनके इस रिकॉर्ड ने न केवल पुर्तगाल के प्रशंसकों को उत्साहित किया है, बल्कि दुनिया भर के फुटबॉल प्रेमियों को भी एक ऐतिहासिक क्षण का साक्षी बना दिया है। फुटबॉल इतिहास में कई महान खिलाड़ी आए और गए, लेकिन क्रिस्टियानो रोनाल्डो ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि रिकॉर्ड बनाना और उन्हें लगातार बेहतर करना उनकी पहचान बन चुका है। छह विश्व कप में गोल करने की यह उपलब्धि उनके करियर के सबसे यादगार अध्यायों में हमेशा दर्ज रहेगी।
पद्म भूषण सम्मान के बाद सामने आया अलका याग्निक का भावुक वीडियो, व्हीलचेयर पर दिखीं गायिका; फैंस ने की जल्द स्वस्थ होने की कामना

नई दिल्ली । भारतीय संगीत जगत की दिग्गज पार्श्व गायिका अलका याग्निक को हाल ही में देश के तीसरे सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्म भूषण से सम्मानित किया गया। इस सम्मान के बाद राष्ट्रपति भवन से उनका एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसने उनके लाखों प्रशंसकों को भावुक कर दिया है। वीडियो में अलका याग्निक व्हीलचेयर पर बैठी दिखाई दे रही हैं और उन्हें सहारा देकर आगे ले जाया जा रहा है। उनकी कमजोर शारीरिक स्थिति को देखकर प्रशंसकों ने चिंता व्यक्त की है और उनके शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की है। पद्म भूषण सम्मान भारतीय संगीत में उनके लंबे और उत्कृष्ट योगदान की राष्ट्रीय स्तर पर पहचान है। दशकों तक अपनी मधुर आवाज से श्रोताओं के दिलों पर राज करने वाली अलका याग्निक ने हिंदी फिल्म संगीत को अनेक यादगार गीत दिए हैं। ऐसे में सम्मान समारोह के बाद सामने आए वीडियो ने लोगों का ध्यान उनके स्वास्थ्य की ओर भी आकर्षित कर दिया है। सोशल मीडिया पर वीडियो सामने आते ही प्रशंसकों की प्रतिक्रियाओं की बाढ़ आ गई। अनेक लोगों ने उनके अच्छे स्वास्थ्य और मजबूत मनोबल की कामना करते हुए संदेश साझा किए। प्रशंसकों का कहना है कि अलका याग्निक की आवाज भारतीय संगीत की अमूल्य धरोहर है और वे उन्हें जल्द स्वस्थ होकर फिर सक्रिय रूप में देखना चाहते हैं। अलका याग्निक पिछले कुछ समय से एक दुर्लभ स्वास्थ्य समस्या का सामना कर रही हैं। वर्ष 2024 में उन्होंने सार्वजनिक रूप से बताया था कि उन्हें सेंसोरिन्यूरल हियरिंग लॉस नामक बीमारी हो गई है। यह ऐसी स्थिति है जो व्यक्ति की सुनने की क्षमता को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकती है। उन्होंने बताया था कि एक वायरल संक्रमण के बाद अचानक उन्हें सुनने में परेशानी होने लगी थी, जिसके बाद चिकित्सकीय जांच में इस बीमारी का पता चला। गायिका ने उस समय अपने अनुभव को साझा करते हुए कहा था कि एक यात्रा के दौरान उन्हें अचानक महसूस हुआ कि उनकी सुनने की क्षमता प्रभावित हो रही है। यह उनके लिए बेहद अप्रत्याशित और चुनौतीपूर्ण स्थिति थी। इसके बाद उन्होंने उपचार और स्वास्थ्य सुधार पर ध्यान केंद्रित किया। इस बीमारी का प्रभाव उनके पेशेवर जीवन पर भी पड़ा और उन्हें अपने संगीत संबंधी कार्यों में सीमित सक्रियता रखनी पड़ी। संगीत उद्योग में अलका याग्निक का योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। उन्होंने कई पीढ़ियों के श्रोताओं को अपनी आवाज से प्रभावित किया है और हजारों गीतों को अपनी गायकी से यादगार बनाया है। उनकी आवाज रोमांटिक, भावनात्मक और मधुर गीतों की पहचान बन चुकी है। यही कारण है कि उन्हें मिला पद्म भूषण सम्मान न केवल उनके व्यक्तिगत करियर की उपलब्धि है, बल्कि भारतीय संगीत जगत के लिए भी गर्व का विषय माना जा रहा है। हालांकि स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों के कारण उनकी सार्वजनिक उपस्थिति पहले की तुलना में कम हुई है, लेकिन उनके प्रशंसकों का स्नेह और समर्थन लगातार बना हुआ है। पद्म भूषण सम्मान के साथ सामने आए इस वीडियो ने एक बार फिर यह दिखाया कि देशभर में उनके प्रति लोगों के मन में कितना सम्मान और लगाव है। अलका याग्निक के प्रशंसकों को उम्मीद है कि वह जल्द बेहतर स्वास्थ्य के साथ सामान्य जीवन में लौटेंगी। वहीं संगीत प्रेमियों का मानना है कि भारतीय संगीत में उनके योगदान को आने वाले वर्षों तक उसी सम्मान और आदर के साथ याद किया जाता रहेगा, जिसके लिए उन्हें यह प्रतिष्ठित राष्ट्रीय सम्मान प्रदान किया गया है।
तेज बुखार के बावजूद कैमरे के सामने बरकरार रही ऊर्जा, अक्षरा सिंह ने बताया अक्षय कुमार की मेहनत का किस्सा

नई दिल्ली । बॉलीवुड अभिनेता अक्षय कुमार अपनी आगामी फिल्म ‘वेलकम टू द जंगल’ को लेकर लगातार चर्चा में बने हुए हैं। फिल्म में शामिल भोजपुरी गीत ‘घिस घिस घिस’ रिलीज से पहले ही सुर्खियां बटोर रहा है। इस बीच भोजपुरी अभिनेत्री अक्षरा सिंह ने इस गाने की शूटिंग से जुड़ा एक ऐसा अनुभव साझा किया है, जिसने अक्षय कुमार के काम के प्रति समर्पण और पेशेवर रवैये को फिर से चर्चा के केंद्र में ला दिया है। अक्षरा सिंह के अनुसार, गाने की शूटिंग के दौरान अक्षय कुमार तेज बुखार से जूझ रहे थे। उनका तापमान 103 से 104 डिग्री तक पहुंच गया था, लेकिन इसके बावजूद उन्होंने शूटिंग नहीं रोकी और पूरे उत्साह के साथ अपना डांस सीक्वेंस पूरा किया। अभिनेत्री ने बताया कि शूटिंग के दौरान वह लगातार अक्षय कुमार को देख रही थीं और इस बात से प्रभावित थीं कि गंभीर शारीरिक अस्वस्थता के बावजूद वह अपने काम को लेकर पूरी तरह केंद्रित और प्रतिबद्ध बने रहे। उन्होंने कहा कि इस अनुभव ने उन्हें यह समझने का अवसर दिया कि अक्षय कुमार अपने पेशे और कला से कितना गहरा लगाव रखते हैं। उनके अनुसार, अभिनेता हर दृश्य और हर प्रदर्शन को पूरी जिम्मेदारी के साथ निभाते हैं, चाहे परिस्थितियां कितनी भी चुनौतीपूर्ण क्यों न हों। यही समर्पण उन्हें उद्योग के सबसे अनुशासित और मेहनती कलाकारों में शामिल करता है। अक्षरा सिंह के लिए यह प्रोजेक्ट भी बेहद खास रहा। उन्होंने बताया कि फिल्म के इस विशेष गीत का हिस्सा बनने का अवसर उन्हें अचानक मिला। शुरुआत में जब उन्हें फिल्म के लिए संपर्क किया गया तो वह थोड़ी असमंजस में थीं, लेकिन बाद में जब कोरियोग्राफर गणेश आचार्य ने स्वयं उनसे बात की और गाने की जानकारी दी, तो उनका उत्साह कई गुना बढ़ गया। अभिनेत्री ने बताया कि जैसे ही उन्हें पता चला कि इस गीत में अक्षय कुमार भी शामिल हैं और इसकी कोरियोग्राफी गणेश आचार्य कर रहे हैं, वह काफी उत्साहित हो गईं। उनके लिए यह अवसर एक बड़े सपने के साकार होने जैसा था। उन्होंने कहा कि इतने बड़े कलाकारों और अनुभवी टीम के साथ काम करना उनके करियर के यादगार अनुभवों में शामिल हो गया है। ‘घिस घिस घिस’ गीत को लेकर दर्शकों के बीच भी उत्सुकता बनी हुई है, क्योंकि इसके जरिए अक्षय कुमार पहली बार भोजपुरी संगीत शैली से जुड़े किसी बड़े प्रोजेक्ट का हिस्सा बने हैं। हिंदी सिनेमा के लोकप्रिय अभिनेता और भोजपुरी मनोरंजन जगत की चर्चित अभिनेत्री को एक साथ देखने की संभावना ने इस गीत को विशेष बना दिया है। फिल्म ‘वेलकम टू द जंगल’ पहले से ही अपने बड़े स्टारकास्ट और मनोरंजक कहानी के कारण चर्चा में है। ऐसे में शूटिंग के दौरान सामने आए इस अनुभव ने दर्शकों के बीच फिल्म और उसके गीतों को लेकर उत्सुकता को और बढ़ा दिया है। अक्षय कुमार की कार्यशैली और अनुशासन की चर्चा लंबे समय से होती रही है, और अक्षरा सिंह के इस खुलासे ने एक बार फिर यह साबित किया है कि अभिनेता अपने काम को सर्वोच्च प्राथमिकता देने में विश्वास रखते हैं।
पद्मश्री से सम्मानित हुए दिवंगत सतीश शाह, राष्ट्रपति भवन में गूंजा उनके योगदान का सम्मान; रुपाली गांगुली और देवेन भोजानी हुए भावुक

नई दिल्ली । भारतीय सिनेमा और टेलीविजन जगत के प्रतिष्ठित अभिनेता सतीश शाह को मरणोपरांत पद्मश्री सम्मान प्रदान किए जाने के बाद मनोरंजन जगत में भावनात्मक माहौल देखने को मिला। चार दशक से अधिक समय तक अपने अभिनय, हास्य शैली और विविध किरदारों से दर्शकों का दिल जीतने वाले सतीश शाह को देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मानों में से एक पद्मश्री से सम्मानित किया गया। यह सम्मान उनके भारतीय मनोरंजन उद्योग में लंबे और उल्लेखनीय योगदान के लिए दिया गया। राष्ट्रपति भवन में आयोजित सम्मान समारोह में सतीश शाह की ओर से यह पुरस्कार उनके परिवार के सदस्य ने स्वीकार किया। समारोह के दौरान अभिनेता को याद करते हुए उनके सहयोगियों और प्रशंसकों ने उनके कार्यों को भारतीय मनोरंजन जगत की अमूल्य धरोहर बताया। सतीश शाह के निधन के बाद मिला यह सम्मान उनके दशकों लंबे रचनात्मक सफर की राष्ट्रीय स्तर पर स्वीकृति माना जा रहा है। सतीश शाह के साथ लंबे समय तक काम कर चुके अभिनेता और निर्देशक देवेन भोजानी ने इस अवसर पर एक भावुक संदेश साझा किया। उन्होंने कहा कि यह सम्मान पूरी तरह से सतीश शाह के व्यक्तित्व और योगदान के अनुरूप है, लेकिन सभी को इस बात का अफसोस रहेगा कि वह स्वयं इस सम्मान को ग्रहण करने के लिए उपस्थित नहीं थे। उन्होंने अभिनेता को याद करते हुए कहा कि उनकी प्रतिभा, विनम्रता और कार्य के प्रति समर्पण आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बना रहेगा। अभिनेत्री रुपाली गांगुली ने भी सतीश शाह को याद करते हुए भावनात्मक प्रतिक्रिया व्यक्त की। उन्होंने कहा कि यह सम्मान उन्हें बहुत पहले मिल जाना चाहिए था और काश वह स्वयं इस ऐतिहासिक क्षण का हिस्सा बन पाते। रुपाली ने उनके साथ बिताए गए पेशेवर और व्यक्तिगत अनुभवों को याद करते हुए उन्हें भारतीय मनोरंजन जगत का एक असाधारण कलाकार बताया। सतीश शाह का अभिनय करियर कई दशकों तक फैला रहा। उन्होंने फिल्मों और टेलीविजन दोनों माध्यमों में अपनी अलग पहचान बनाई। अपने सहज अभिनय, सटीक कॉमिक टाइमिंग और बहुआयामी किरदारों के कारण वह दर्शकों के बीच बेहद लोकप्रिय रहे। उन्होंने गंभीर, सामाजिक और हास्य प्रधान भूमिकाओं में समान दक्षता दिखाई और अपने अभिनय से हर वर्ग के दर्शकों को प्रभावित किया। फिल्मों में उनकी उपस्थिति जितनी प्रभावशाली रही, उतना ही बड़ा योगदान उन्होंने टेलीविजन जगत में भी दिया। कई लोकप्रिय धारावाहिकों और कॉमेडी कार्यक्रमों में निभाए गए उनके किरदार आज भी दर्शकों के बीच याद किए जाते हैं। विशेष रूप से पारिवारिक और हास्य आधारित कार्यक्रमों में उनकी भूमिका ने उन्हें घर-घर में पहचान दिलाई। मनोरंजन उद्योग के अनेक कलाकारों का मानना है कि सतीश शाह उन चुनिंदा अभिनेताओं में शामिल थे जिन्होंने अभिनय को केवल पेशा नहीं बल्कि कला के रूप में जिया। उनके संवाद, अभिव्यक्ति और किरदारों की प्रस्तुति ने भारतीय दर्शकों पर गहरी छाप छोड़ी। पद्मश्री सम्मान उनके इसी दीर्घकालिक योगदान और सांस्कृतिक प्रभाव की औपचारिक पहचान है। मरणोपरांत मिला यह सम्मान न केवल सतीश शाह के परिवार के लिए गर्व का विषय है, बल्कि उन लाखों दर्शकों के लिए भी विशेष महत्व रखता है जिन्होंने वर्षों तक उनके अभिनय का आनंद लिया। भारतीय मनोरंजन जगत में उनका योगदान हमेशा याद किया जाएगा और उनका नाम देश के प्रतिष्ठित कलाकारों की सूची में सम्मान के साथ लिया जाता रहेगा।