टी20 सीरीज में आयरलैंड के हाथों 0-2 से पिटी भारतीय टीम, निराशाजनक प्रदर्शन के बाद हेड कोच गौतम गंभीर और कप्तान श्रेयस अय्यर निशाने पर

नई दिल्ली। भारतीय क्रिकेट टीम को विदेशी सरजमीं पर एक बड़ा झटका लगा है, जहां आयरलैंड के खिलाफ खेली गई दो मैचों की टी20 अंतरराष्ट्रीय सीरीज में उसे 0-2 से क्लीन स्वीप का सामना करना पड़ा है। इस चौंकाने वाली और निराशाजनक हार के बाद वैश्विक क्रिकेट जगत में भारतीय टीम के प्रदर्शन की भारी आलोचना हो रही है। इसी कड़ी में आइसलैंड क्रिकेट ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) पर एक बेहद तंजिया पोस्ट साझा की है, जिसने भारतीय क्रिकेट प्रशंसकों और प्रबंधन की चोट पर नमक छिड़कने का काम किया है। आइसलैंड क्रिकेट ने सीधे तौर पर भारतीय टीम के मुख्य कोच गौतम गंभीर की कोचिंग क्षमताओं पर निशाना साधा है। सोशल मीडिया पर तेजी से प्रसारित हो रहे इस बयान में आइसलैंड क्रिकेट ने व्यंग्यात्मक लहजे में लिखा कि उनकी अपनी कोचिंग टीम में गौतम गंभीर को नियुक्त करने की कोई योजना नहीं है। पोस्ट में आगे लिखा गया कि गंभीर में निश्चित रूप से एक अलग तरह की प्रतिभा है, क्योंकि स्टार खिलाड़ियों से सजी भारतीय टीम को लेकर आयरलैंड जैसी अपेक्षाकृत कमजोर टीम के खिलाफ इस तरह के परिणाम देना वाकई एक असाधारण और विशिष्ट काबिलियत को दर्शाता है। इस तीखे कटाक्ष के बाद क्रिकेट गलियारों में भारतीय टीम के रणनीतिक स्तर और कोचिंग स्टाफ की जवाबदेही को लेकर बहस तेज हो गई है। श्रृंखला के घटनाक्रम की बात करें तो बेलफास्ट में खेले गए पहले मुकाबले में भारत को 34 रनों की करारी शिकस्त झेलनी पड़ी थी। इसके बाद रविवार को खेले गए दूसरे और अंतिम मैच में, जो कि बारिश से प्रभावित रहा, आयरलैंड ने सूझबूझ का परिचय देते हुए भारतीय टीम को रोमांचक मोड़ पर महज एक रन से पराजित कर दिया। हालांकि पूरी सीरीज के दौरान भारतीय गेंदबाजों ने अपेक्षाकृत अनुशासित और सराहनीय प्रदर्शन किया, लेकिन बल्लेबाजों के निराशाजनक रवैये ने टीम की लुटिया डुबो दी। दोनों ही मुकाबलों में भारतीय बल्लेबाजी क्रम पूरी तरह ताश के पत्तों की तरह बिखरता नजर आया। इस सीरीज में टीम इंडिया की अगुवाई कर रहे कार्यवाहक कप्तान श्रेयस अय्यर और हाल ही में समाप्त हुए टी20 विश्व कप 2026 में ‘प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट’ रहे विकेटकीपर बल्लेबाज संजू सैमसन जैसे स्थापित खिलाड़ी उम्मीदों पर खरे नहीं उतर सके। पूरे दौरे पर इन प्रमुख बल्लेबाजों का बल्ला पूरी तरह खामोश रहा, जिसका खामियाजा टीम को भुगतना पड़ा। इस हार के साथ ही श्रेयस अय्यर भारत के ऐसे दूसरे कप्तान बन गए हैं, जिन्हें अपनी कप्तानी के शुरुआती दोनों टी20 अंतरराष्ट्रीय मैचों में पराजय का स्वाद चखना पड़ा है। इस लचर प्रदर्शन के बाद चयनकर्ताओं और टीम संयोजन पर भी सवाल उठने लगे हैं। इस करारी हार के झटके से उबरने के लिए भारतीय टीम के पास बेहद कम समय है, क्योंकि उसके सामने अगली बड़ी चुनौती इंग्लैंड की है। भारतीय दल इसी सप्ताह पांच मैचों की टी20 अंतरराष्ट्रीय श्रृंखला के लिए इंग्लैंड का दौरा करने वाला है। इस दौरे का पहला मुकाबला 1 जुलाई को चेस्टर-ले-स्ट्रीट के रिवरसाइड ग्राउंड पर खेला जाएगा। इसके बाद आगामी मैच क्रमशः 4, 7, 9 और 11 जुलाई को ओल्ड ट्रैफर्ड, नॉटिंघम, ब्रिस्टल और साउथेम्प्टन में आयोजित होने हैं। कप्तान श्रेयस अय्यर और मुख्य कोच गौतम गंभीर के लिए इंग्लैंड का यह दौरा अपनी रणनीतियों को सुधारने और साख बचाने के लिहाज से अत्यंत महत्वपूर्ण होने जा रहा है।
शादी से पहले मंसूर अली खान पटौदी संग लिव-इन में रहती थीं शर्मिला टैगोर, अंतरधार्मिक विवाह के कारण माता-पिता को टेलीग्राम पर मिलती थीं धमकियां

नई दिल्ली। भारतीय सिनेमा की दिग्गज अभिनेत्री शर्मिला टैगोर और भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान नवाब मंसूर अली खान पटौदी का रिश्ता हमेशा से ही चर्चा का विषय रहा है। हाल ही में एक साक्षात्कार में अभिनेत्री ने अपने इस ऐतिहासिक रिश्ते से जुड़े कई अनसुने और चौंकाने वाले पहलुओं को साझा किया है। शर्मिला टैगोर ने बताया कि वर्ष 1968 में विवाह बंधन में बंधने से पहले वे और मंसूर अली खान एक साथ लिव-इन रिलेशनशिप में रहते थे। उस दौर के रूढ़िवादी सामाजिक ताने-बाने को देखते हुए एक शीर्ष अभिनेत्री और स्टार क्रिकेटर का शादी से पहले साथ रहना बेहद असाधारण और साहसिक कदम माना जाता था। इस अंतरधार्मिक और अंतर्जातीय रिश्ते को लेकर तत्कालीन समाज और कट्टरपंथियों में भारी आक्रोश था। अभिनेत्री ने खुलासा किया कि उनके इस फैसले के कारण उनके माता-पिता को लगातार धमकी भरे टेलीग्राम भेजे जाते थे, जिनमें जान से मारने और गोलियां चलाने की बातें लिखी होती थीं। इस वजह से उनके पूरे परिवार में लंबे समय तक डर और भारी मानसिक तनाव का माहौल बना रहा। इसके साथ ही फिल्म जगत और खेल जगत के कई करीबी मित्रों तथा शुभचिंतकों ने भी इस शादी को लेकर दोनों को गंभीर चेतावनी दी थी। मशहूर फिल्म निर्देशक यश चोपड़ा, जो शर्मिला टैगोर के बेहद करीबी मित्र थे, उन्होंने भी शादी से पहले अभिनेत्री को सचेत किया था। यश चोपड़ा का मानना था कि नवाबों की जीवनशैली और प्रतिबद्धता पर पूरी तरह भरोसा नहीं किया जा सकता, इसलिए यह रिश्ता आगे चलकर असफल हो सकता है। समाज और मीडिया का भी दोनों परिवारों पर अत्यधिक दबाव था और कई लोगों ने तो शादी होने से पहले ही इस रिश्ते के विफल होने की घोषणा कर दी थी। इन तमाम सामाजिक बाधाओं और विपरीत परिस्थितियों के बावजूद दोनों अपने फैसले पर अडिग रहे। लगातार मिल रही धमकियों और सुरक्षा चिंताओं को देखते हुए शादी के आयोजन स्थल को लेकर भी भारी अनिश्चितता बनी हुई थी। शुरुआत में यह तय किया गया था कि सुरक्षा के लिहाज से सबसे सुरक्षित जगह फोर्ट विलियम में विवाह संपन्न कराया जाएगा। हालांकि, अंतिम समय में अतिथियों की सूची और प्रशासनिक अनुमतियों को लेकर कुछ तकनीकी दिक्कतें आ गईं, जिसके कारण मिली हुई अनुमति रद्द कर दी गई। सुरक्षा खतरों के बीच आखिरी मौके पर विवाह का वेन्यू बदलना पड़ा और अंततः एक विदेशी राजदूत के आवास पर बेहद सुरक्षित माहौल में इस विवाह की रस्में पूरी की गईं। तमाम विरोधों, धमकियों और सामाजिक दबावों को दरकिनार कर हुआ यह विवाह आगे चलकर भारतीय फिल्म और खेल जगत के सबसे सफल वैवाहिक रिश्तों में से एक साबित हुआ। इस विवाह से उनके तीन बच्चे सैफ अली खान, सोहा अली खान और सबा अली खान हुए। आज शर्मिला टैगोर अपने नाती-पोतों के साथ एक सुखी और संतुष्ट जीवन व्यतीत कर रही हैं। उनका यह हालिया बयान दर्शाता है कि दशकों पहले भी अपनी मर्जी से जीवन जीने और जीवनसाथी चुनने के लिए फिल्मी सितारों को किस कदर सामाजिक और प्रशासनिक चुनौतियों का सामना करना पड़ता था।
बॉलीवुड फिल्म निर्देशक रोहित शेट्टी से 20 करोड़ रुपये की फिरौती की मांग, फोन पर जान से मारने की धमकी मिलने के बाद मुंबई पुलिस जांच में जुटी

नई दिल्ली। भारतीय फिल्म जगत के जाने-माने निर्देशक रोहित शेट्टी को एक बार फिर असामाजिक तत्वों द्वारा निशाना बनाया गया है। शनिवार को उनके मुंबई स्थित कार्यालय में एक अज्ञात व्यक्ति का फोन आया, जिसने बेहद आक्रामक लहजे में बात की। फोन करने वाले शख्स ने निर्देशक से सीधे तौर पर 20 करोड़ रुपये की मोटी रकम की मांग की है। धमकी देने वाले अपराधी ने साफ तौर पर कहा कि यदि समय रहते इस फिरौती की रकम का भुगतान नहीं किया गया, तो निर्देशक को अपनी जान से हाथ धोना पड़ सकता है। इस अचानक आई धमकी भरी कॉल के बाद फिल्म जगत और प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मच गया है। धमकी मिलने के तुरंत बाद रोहित शेट्टी की प्रबंधकीय टीम ने बिना कोई समय गंवाए सक्रियता दिखाई। टीम द्वारा इस पूरी घटना की लिखित जानकारी और शिकायत मुंबई पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों को दी गई। मामले की संवेदनशीलता और वीआईपी सुरक्षा को देखते हुए पुलिस प्रशासन ने इसे अत्यंत गंभीरता से लिया है। पुलिस ने रंगदारी और जान से मारने की धमकी देने की धाराओं के तहत मामला दर्ज कर अपनी तफ्तीश तेज कर दी है। तकनीकी विशेषज्ञों की मदद से उस फोन नंबर को ट्रेस करने का प्रयास किया जा रहा है, जिससे यह कॉल की गई थी। सुरक्षा एजेंसियां इस मामले में कॉल डेटा रिकॉर्ड खंगालने के साथ-साथ वॉयस एनालिसिस तकनीक का भी सहारा ले रही हैं। संदिग्ध की आवाज और उसके बात करने के तरीके का मिलान पुराने धमकी भरे मामलों से किया जा रहा है। हालांकि, अभी तक किसी भी आपराधिक संगठन ने आधिकारिक रूप से इस कृत्य की जिम्मेदारी नहीं ली है, लेकिन प्राथमिक संशयों के आधार पर जांच की सुई एक कुख्यात लॉरेंस बिश्नोई गैंग की तरफ घूमती नजर आ रही है। पुलिस अधिकारी सभी पहलुओं को ध्यान में रखकर हर संभावित कूटनीति पर काम कर रहे हैं। यह पहला मौका नहीं है जब रोहित शेट्टी को इस तरह की परिस्थितियों का सामना करना पड़ा हो। इससे पहले इसी वर्ष फरवरी महीने में दो अज्ञात हमलावरों ने उनके मुंबई स्थित आवास के बाहर अंधाधुंध हवाई फायरिंग की थी। उस समय हुई पुलिसिया कार्रवाई में लॉरेंस बिश्नोई गिरोह का हाथ होने की बात पुख्ता हुई थी, जिसके बाद पुलिस ने त्वरित एक्शन लेते हुए करीब 15 आरोपियों को सलाखों के पीछे भेजा था। पुरानी कड़ियों को जोड़ते हुए सुरक्षा बल इस नए घटनाक्रम को उसी नेटवर्क से जोड़कर देख रहे हैं। सिनेमा उद्योग के दिग्गजों को इस तरह निशाना बनाए जाने की घटनाएं लगातार बढ़ती जा रही हैं। रोहित शेट्टी से पहले बॉलीवुड अभिनेता रणवीर सिंह और सलमान खान को भी इसी तरह के गिरोहों द्वारा लगातार धमकियां दी जा चुकी हैं। सलमान खान के आवास पर हुए हमले और लगातार मिल रहे इनपुट के बाद सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। फिल्म उद्योग से जुड़े लोगों की सुरक्षा को चाक-चौबंद करने के लिए गृह विभाग भी स्थिति पर नजर बनाए हुए है। मुंबई पुलिस का कहना है कि वे जल्द ही इस मामले के मुख्य आरोपी तक पहुंच जाएंगे और सुरक्षा व्यवस्था में किसी भी प्रकार की कोताही नहीं बरती जाएगी।
GWALIOR CYBER CRIME: 1.58 करोड़ के डिजिटल अरेस्ट फ्रॉड में बड़ा खुलासा, नासिक से लोहा कारोबारी गिरफ्तार

GWALIOR CYBER CRIME: मध्यप्रदेश। ग्वालियर में साइबर ठगी के मामले आये दिन बढ़ते ही जा रहे हैं। ऐसा ही एक मामला हालही में सामने आया है जहां 69 वर्षीय रिटायर्ड लैब टेक्नीशियन से 1.58 करोड़ रुपये की डिजिटल अरेस्ट साइबर ठगी की गई। मामले में क्राइम ब्रांच को पहली बड़ी सफलता मिली है। पुलिस ने महाराष्ट्र के नासिक से लोहा कारोबारी बिट्ठल फलसे को गिरफ्तार किया है। जांच में सामने आया कि ठगी की रकम में से 19.50 लाख रुपये आरोपी के बैंक खाते में ट्रांसफर किए गए थे। पुलिस उसे ट्रांजिट रिमांड पर ग्वालियर ला रही है, जहां उससे पूछताछ के बाद पूरे नेटवर्क का खुलासा हो पायेगा। इराक दौरे पर अराघची ने राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री से की अहम वार्ता, ईरान-अमेरिका एमओयू, क्षेत्रीय सुरक्षा और होर्मुज तनाव पर हुई व्यापक चर्चा 33 दिन तक किया डिजिटल अरेस्ट नेहरू पेट्रोल पंप के पास रहने वाली 69 वर्षीय मीनाक्षी नाखरे ने 23 जून को क्राइम ब्रांच में शिकायत दर्ज कराई कि 10 मई को उन्हें एक कॉल आया, जिसमें कॉलर ने खुद को दिल्ली टेलीकॉम विभाग का अधिकारी बताया। उसने दावा किया कि उनके नाम से एक दूसरा मोबाइल नंबर चल रहा है, जिसका इस्तेमाल मनी लॉन्ड्रिंग और अन्य गैरकानूनी गतिविधियों में किया जा रहा है। इसके बाद ठगों ने खुद को आईपीएस और सीबीआई अधिकारी बताकर उन्हें गिरफ्तारी का डर दिखाया और 33 दिनों तक डिजिटल अरेस्ट कर कर रखा। इस दौरान डर और दबाव बनाकर उनसे अलग-अलग बैंक खातों में कुल 1.58 करोड़ रुपये ट्रांसफर करा लिए। जुलाई में OTT पर एंटरटेनमेंट का धमाका नेटफ्लिक्स से जियोहॉटस्टार तक रिलीज होंगी ये बड़ी फिल्में और सीरीज नासिक से लोहा कारोबारी गिरफ्तार जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि ठगी की रकम का एक हिस्सा महाराष्ट्र के नासिक स्थित इकोब्राइट ग्रीन कंक्रीट इंफ्रा प्राइवेट लिमिटेड के आईसीआईसीआई बैंक खाते में भेजा गया था। जांच के बाद पुलिस ने कंपनी के संचालक और लोहा कारोबारी बिट्ठल फलसे को गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि कारोबार में नुकसान होने के कारण वह इंटरनेट पर पर्सनल लोन की तलाश कर रहा था। इसी दौरान उसकी मुलाकात एक म्यूल अकाउंट एजेंट से हुई, जिसने उसके बैंक खाते का इस्तेमाल कराया और बदले में 10 प्रतिशत कमीशन दिया। हालांकि, आरोपी का कहना है कि उसे इस रकम के साइबर ठगी से जुड़े होने की जानकारी नहीं थी। पुलिस इस दावे की भी जांच कर रही है। महज 3 साल 9 महीने की जुड़वां बहनों ने रचा इतिहास दुनिया की सबसे कम उम्र की फीमेल ड्रमर बनकर लंदन में जीता सम्मान मामले की जांच में क्राइम ब्रांच क्राइम ब्रांच का मानना है कि यह एक संगठित साइबर ठगी गिरोह का मामला है। जिन अन्य खातों में रकम भेजी गई थी, उनके खाताधारकों और म्यूल अकाउंट नेटवर्क की भी जांच की जा रही है। पुलिस को उम्मीद है कि जल्द ही इस मामले में अन्य आरोपियों की भी गिरफ्तारी हो सकती है।
असम-अरुणाचल में बारिश बनी आफत, बाढ़ से 22 हजार से अधिक लोग प्रभावित, 60 साल पुराना रेलवे पुल ढहने से रेल सेवा ठप

नई दिल्ली। पूर्वोत्तर भारत में लगातार हो रही भारी बारिश ने असम और अरुणाचल प्रदेश में हालात बेहद गंभीर कर दिए हैं। कई जिलों में आई बाढ़ और भूस्खलन से जनजीवन पूरी तरह प्रभावित हो गया है। असम में हजारों लोग अपने घर छोड़ने को मजबूर हुए हैं, जबकि अरुणाचल प्रदेश में बादल फटने के बाद कई क्षेत्रों में बाढ़ और भूस्खलन की स्थिति बनी हुई है। प्रशासन लगातार राहत और बचाव कार्य में जुटा है तथा मौसम विभाग ने अगले कुछ दिनों तक भारी बारिश जारी रहने की चेतावनी दी है। असम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के अनुसार राज्य के धेमाजी, नलबाड़ी, डिब्रूगढ़, चिरांग, लखीमपुर और कोकराझार समेत कई जिले बाढ़ की चपेट में हैं। अब तक 22 हजार से अधिक लोग इस आपदा से प्रभावित हो चुके हैं। सबसे अधिक असर धेमाजी जिले में देखा गया है, जहां बड़ी संख्या में लोगों के घरों में पानी घुस गया है। बाढ़ का पानी दर्जनों गांवों तक पहुंच चुका है और हजारों हेक्टेयर कृषि भूमि जलमग्न हो गई है, जिससे किसानों की फसलों को भारी नुकसान पहुंचा है। लगातार बारिश के कारण ब्रह्मपुत्र नदी और उसकी सहायक नदियों का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है। नदी किनारे बसे गांवों में खतरा बढ़ने के बाद प्रशासन लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचा रहा है। राहत शिविरों में प्रभावित परिवारों के लिए भोजन, पेयजल और अन्य आवश्यक सुविधाओं की व्यवस्था की गई है। इस प्राकृतिक आपदा का असर पशुधन पर भी पड़ा है और हजारों मवेशी बाढ़ से प्रभावित हुए हैं। इसी बीच धेमाजी जिले में लगभग छह दशक पुराना रेलवे पुल क्षतिग्रस्त होकर आंशिक रूप से ढह गया। बताया गया कि लगातार बारिश और नदी किनारे तेज कटाव के कारण पुल का एक पिलर कमजोर हो गया, जिससे उसका एक हिस्सा टूट गया। राहत की बात यह रही कि घटना के समय पुल से कोई ट्रेन नहीं गुजर रही थी, इसलिए किसी प्रकार की जनहानि नहीं हुई। पुल को नुकसान पहुंचने के बाद संबंधित रेलवे खंड पर ट्रेन सेवाएं एहतियातन रोक दी गई हैं और तकनीकी टीमें मरम्मत कार्य में जुट गई हैं। अरुणाचल प्रदेश में भी हालात चिंताजनक बने हुए हैं। हाल ही में बादल फटने की घटनाओं के बाद कई इलाकों में बाढ़ और भूस्खलन से भारी नुकसान हुआ है। अब तक कई लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि कुछ लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं। बचाव दल प्रभावित क्षेत्रों में लगातार खोज अभियान चला रहे हैं। लेकू नदी का जलस्तर भी खतरे के निशान से ऊपर पहुंच गया है, जिससे सीमावर्ती गांवों में बाढ़ का खतरा और बढ़ गया है। मौसम विभाग ने 1 जुलाई तक असम और अरुणाचल प्रदेश के कई हिस्सों में भारी बारिश, तेज आंधी और बिजली गिरने की संभावना जताई है। इसे देखते हुए प्रशासन ने लोगों को नदी किनारे, भूस्खलन संभावित क्षेत्रों और जलभराव वाले इलाकों से दूर रहने की सलाह दी है। संवेदनशील स्थानों पर निगरानी बढ़ा दी गई है और आपदा प्रबंधन दलों को हाई अलर्ट पर रखा गया है। बाढ़ की गंभीर स्थिति को देखते हुए केंद्र सरकार भी लगातार हालात पर नजर बनाए हुए है। केंद्रीय गृह मंत्री ने राज्य सरकार से स्थिति की जानकारी लेकर हरसंभव सहायता का भरोसा दिया है। राज्य सरकार, आपदा प्रबंधन एजेंसियां और स्थानीय प्रशासन मिलकर राहत एवं पुनर्वास कार्य को तेज गति से आगे बढ़ा रहे हैं। अधिकारियों का कहना है कि मौसम सामान्य होने तक सतर्कता बनाए रखना बेहद जरूरी है, क्योंकि अगले कुछ दिन पूर्वोत्तर के लिए चुनौतीपूर्ण साबित हो सकते हैं।
अमरनाथ यात्रा की तैयारियां अंतिम चरण में, पहली पूजा के साथ सुरक्षा व्यवस्था हुई मजबूत, 4 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने कराया पंजीकरण

नई दिल्ली। अमरनाथ यात्रा 2026 की शुरुआत से पहले सोमवार को बाबा बर्फानी की पहली पूजा विधि-विधान के साथ संपन्न हुई। इस अवसर पर जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल एवं श्री अमरनाथजी श्राइन बोर्ड के अध्यक्ष मनोज सिन्हा ने पूजा-अर्चना कर यात्रा के सफल और सुरक्षित संचालन की कामना की। इस वर्ष पवित्र यात्रा 3 जुलाई से शुरू होकर 28 अगस्त यानी रक्षाबंधन तक चलेगी। कुल 57 दिनों तक चलने वाली इस धार्मिक यात्रा के लिए प्रशासन ने लगभग सभी तैयारियां पूरी कर ली हैं। इस बार श्रद्धालु पारंपरिक पहलगाम मार्ग और बालटाल मार्ग दोनों से बाबा बर्फानी के दर्शन के लिए रवाना होंगे। प्रशासन के अनुसार 15 अप्रैल से अब तक चार लाख से अधिक श्रद्धालु यात्रा के लिए अपना पंजीकरण करा चुके हैं। यात्रा का पहला जत्था 2 जुलाई को जम्मू स्थित भगवती नगर बेस कैंप से कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच रवाना किया जाएगा। यात्रा को सुरक्षित और व्यवस्थित बनाने के लिए प्रशासन ने स्वास्थ्य सेवाओं पर विशेष ध्यान दिया है। बालटाल और चंदनवाड़ी में बेस अस्पताल शुरू कर दिए गए हैं, जबकि दोनों यात्रा मार्गों पर चिकित्सा सुविधाएं और आपातकालीन सहायता केंद्र भी स्थापित किए जा रहे हैं। श्रद्धालुओं को किसी भी स्वास्थ्य संबंधी परेशानी का तुरंत उपचार मिल सके, इसके लिए डॉक्टरों और मेडिकल टीमों की तैनाती भी की गई है। प्रशासन का कहना है कि यात्रा मार्गों पर बुनियादी ढांचे, सुरक्षा और अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं का अधिकांश कार्य पूरा हो चुका है। हालांकि महागणेश टॉप के पास जमी बर्फ को हटाने का कार्य अंतिम चरण में है। अधिकारियों के मुताबिक अगले दो से तीन दिनों में यह काम भी पूरा कर लिया जाएगा, जिससे श्रद्धालुओं की आवाजाही पूरी तरह सुगम हो सकेगी। यात्रा के मद्देनजर सुरक्षा व्यवस्था को भी अभूतपूर्व स्तर पर मजबूत किया गया है। जम्मू-श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग पर रोड ओपनिंग पार्टी लगातार गश्त कर रही है। इसके साथ ही इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर को सक्रिय कर पूरे यात्रा मार्ग की निगरानी की जा रही है। पुलिस, अर्धसैनिक बलों और प्रशासनिक एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय सुनिश्चित करने के लिए कई स्तरों पर मॉक ड्रिल और सुरक्षा अभ्यास भी आयोजित किए गए हैं। यात्रा मार्ग और बेस कैंपों पर आने वाले श्रद्धालुओं तथा साधु-संतों की नियमित जांच भी की जा रही है। अमरनाथ यात्रा के लिए दो प्रमुख मार्ग निर्धारित किए गए हैं। पारंपरिक पहलगाम मार्ग लगभग 41 किलोमीटर लंबा है, जहां से पवित्र गुफा तक पहुंचने में सामान्यतः तीन से चार दिन का समय लगता है। यह मार्ग अपेक्षाकृत आसान माना जाता है और ऊंचाई धीरे-धीरे बढ़ने के कारण श्रद्धालुओं को अनुकूल वातावरण मिलता है। वहीं बालटाल मार्ग करीब सात किलोमीटर लंबा है, लेकिन इसकी चढ़ाई अधिक खड़ी और कठिन होने के कारण यह अपेक्षाकृत चुनौतीपूर्ण माना जाता है। यात्रा शुरू होने से पहले जम्मू-श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग पर ट्रायल काफिले का सफल ड्राई रन भी किया गया। इस दौरान सुरक्षा व्यवस्था, यातायात प्रबंधन, आपातकालीन प्रतिक्रिया और विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय का परीक्षण किया गया। ट्रायल काफिला तय समय के भीतर रामबन पहुंचा, जिससे प्रशासन ने यात्रा की तैयारियों पर संतोष जताया। अधिकारियों का कहना है कि श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुविधा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए यात्रा को शांतिपूर्ण और व्यवस्थित तरीके से संपन्न कराने के लिए सभी आवश्यक इंतजाम किए गए हैं।
सऊदी अरब-फ्रांस के बीच उच्चस्तरीय संवाद, ईरान-अमेरिका समझौते, होर्मुज संकट और क्षेत्रीय स्थिरता पर हुई विस्तृत चर्चा

नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में लगातार बदलते भू-राजनीतिक हालात के बीच सऊदी अरब और फ्रांस ने क्षेत्रीय शांति तथा सुरक्षा को लेकर अपने समन्वय को और मजबूत करने के संकेत दिए हैं। इसी क्रम में सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस एवं प्रधानमंत्री मोहम्मद बिन सलमान और फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के बीच टेलीफोन पर महत्वपूर्ण बातचीत हुई, जिसमें क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों के साथ-साथ दोनों देशों के साझा हितों से जुड़े कई अहम मुद्दों पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया। सऊदी प्रेस एजेंसी के अनुसार, बातचीत के दौरान दोनों नेताओं ने अमेरिका और ईरान के बीच हुए हालिया ज्ञापन समझौते से जुड़े ताजा घटनाक्रम की समीक्षा की। इसके साथ ही पश्चिम एशिया में स्थायी शांति, सुरक्षा और स्थिरता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से जारी कूटनीतिक प्रयासों पर भी विस्तार से चर्चा की गई। दोनों नेताओं ने इस बात पर सहमति जताई कि तनाव कम करने के लिए संवाद और सहयोग की प्रक्रिया को लगातार आगे बढ़ाना आवश्यक है। वार्ता में समुद्री मार्गों की सुरक्षा भी प्रमुख विषय रही। दोनों पक्षों ने अंतरराष्ट्रीय नौवहन की निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि समुद्री व्यापार को किसी भी प्रकार के तनाव या टकराव से प्रभावित नहीं होने देना चाहिए। उन्होंने क्षेत्रीय विवादों के समाधान के लिए सैन्य विकल्पों के बजाय कूटनीतिक प्रयासों को प्राथमिकता देने की आवश्यकता दोहराई। बातचीत के दौरान दोनों नेताओं ने सऊदी अरब और फ्रांस के द्विपक्षीय संबंधों की भी समीक्षा की। आर्थिक, रणनीतिक और राजनीतिक सहयोग को आगे बढ़ाने के साथ-साथ विभिन्न अंतरराष्ट्रीय मंचों पर समन्वय बढ़ाने पर भी सहमति व्यक्त की गई। इसके अलावा साझा वैश्विक चुनौतियों और क्षेत्रीय मुद्दों पर विचारों का आदान-प्रदान करते हुए भविष्य में सहयोग को और मजबूत बनाने की प्रतिबद्धता दोहराई गई। गौरतलब है कि अमेरिका और ईरान के बीच 17 जून को हस्ताक्षरित ज्ञापन समझौते का उद्देश्य लंबे समय से चले आ रहे तनाव को कम करना और संवाद के माध्यम से समाधान की दिशा में आगे बढ़ना था। हालांकि समझौते के बावजूद दोनों देशों के बीच समय-समय पर तनावपूर्ण घटनाएं सामने आती रही हैं, जिससे क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चिंता बनी हुई है। हालिया घटनाक्रमों के बीच अमेरिका और ईरान के प्रतिनिधियों के बीच आगे की बातचीत को भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, दोनों देशों ने फिलहाल आपसी हमलों को रोकने और होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़े विवादों के समाधान के लिए कतर की राजधानी दोहा में वार्ता करने पर सहमति जताई है। पहले यह बैठक स्विट्जरलैंड में प्रस्तावित थी, लेकिन क्षेत्र में बढ़े तनाव को देखते हुए इसका स्थान बदल दिया गया। सूत्रों के अनुसार, दोनों पक्ष तकनीकी स्तर की वार्ताओं को जारी रखते हुए समुद्री मार्गों पर जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने की दिशा में काम कर रहे हैं। विशेष रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति का एक अत्यंत महत्वपूर्ण मार्ग माना जाता है, इसलिए यहां किसी भी प्रकार का तनाव अंतरराष्ट्रीय व्यापार और ऊर्जा बाजार पर व्यापक प्रभाव डाल सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि सऊदी अरब और फ्रांस के शीर्ष नेतृत्व के बीच हुआ यह संवाद ऐसे समय में सामने आया है, जब पश्चिम एशिया में स्थिरता बनाए रखने के लिए प्रमुख देशों के बीच निरंतर कूटनीतिक संपर्क और सहयोग की आवश्यकता पहले से कहीं अधिक महसूस की जा रही है। ऐसे प्रयास क्षेत्रीय तनाव कम करने और दीर्घकालिक शांति स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
इराक दौरे पर अराघची ने राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री से की अहम वार्ता, ईरान-अमेरिका एमओयू, क्षेत्रीय सुरक्षा और होर्मुज तनाव पर हुई व्यापक चर्चा

नई दिल्ली । पश्चिम एशिया में लगातार बदलते भू-राजनीतिक हालात के बीच ईरान और इराक के बीच उच्चस्तरीय कूटनीतिक संपर्क एक बार फिर चर्चा में है। ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने बगदाद में इराक के राष्ट्रपति निजार अमेदी और प्रधानमंत्री अली अल-जैदी से अलग-अलग मुलाकात कर क्षेत्रीय सुरक्षा, ईरान-अमेरिका के बीच हालिया समझौता ज्ञापन (एमओयू) और मौजूदा तनावपूर्ण परिस्थितियों पर व्यापक विचार-विमर्श किया। बैठकों में दोनों देशों ने संवाद को ही स्थायी समाधान का सबसे प्रभावी माध्यम बताते हुए क्षेत्रीय स्थिरता को प्राथमिकता देने पर सहमति व्यक्त की। इराक के राष्ट्रपति कार्यालय की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, राष्ट्रपति अमेदी ने क्षेत्र में स्थायी शांति और सुरक्षा स्थापित करने के लिए निरंतर बातचीत और आपसी विश्वास को आवश्यक बताया। उन्होंने कहा कि लंबित विवादों का समाधान सैन्य टकराव के बजाय कूटनीतिक प्रयासों के माध्यम से ही संभव है। उनका मानना है कि संवाद आधारित पहल से पूरे क्षेत्र में स्थिर और सकारात्मक वातावरण तैयार किया जा सकता है। प्रधानमंत्री अली अल-जैदी के साथ हुई बैठक में भी यही दृष्टिकोण सामने आया। उन्होंने कहा कि इराक किसी भी प्रकार के संघर्ष को समाप्त करने और क्षेत्रीय स्थिरता को मजबूत करने वाली सभी पहलों का समर्थन करता है। उनके अनुसार युद्ध और टकराव की स्थिति समाप्त होने से क्षेत्र के देशों के लिए आर्थिक विकास, निवेश और जनकल्याण के नए अवसर उपलब्ध होंगे। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इराक शांति और सहयोग पर आधारित क्षेत्रीय व्यवस्था का पक्षधर है। ईरान के विदेश मंत्री अराघची ने संकट की परिस्थितियों में इराक की संतुलित भूमिका की सराहना की। उन्होंने कहा कि तेहरान अपने पड़ोसी देशों के साथ भरोसे और सहयोग पर आधारित संबंधों को और मजबूत बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने दोनों देशों के बीच राजनीतिक, आर्थिक और रणनीतिक सहयोग को आगे बढ़ाने की आवश्यकता पर भी बल दिया तथा कहा कि साझा चुनौतियों से निपटने के लिए लगातार समन्वय बनाए रखना समय की मांग है। यह कूटनीतिक पहल ऐसे समय हुई है जब हाल के दिनों में अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य तनाव तेज हो गया था। अमेरिका ने ईरानी ठिकानों पर कार्रवाई करते हुए आरोप लगाया कि होर्मुज स्ट्रेट में वाणिज्यिक जहाजों की सुरक्षा को लगातार चुनौती दी जा रही है। इसके जवाब में ईरान ने क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया। इन घटनाओं ने पूरे पश्चिम एशिया में सुरक्षा संबंधी चिंताओं को और बढ़ा दिया। हालांकि ताजा घटनाक्रम में दोनों देशों के बीच तनाव कम करने की दिशा में भी सकारात्मक संकेत मिले हैं। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिका और ईरान ने आपसी सैन्य कार्रवाई को फिलहाल रोकने और होर्मुज स्ट्रेट से जुड़े विवादों पर बातचीत के लिए कतर की राजधानी दोहा में बैठक करने पर सहमति जताई है। इस वार्ता का उद्देश्य समुद्री मार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और आगे किसी भी प्रकार के टकराव से बचने के उपाय तलाशना है। जानकारी के अनुसार, प्रारंभिक योजना के तहत यह वार्ता स्विट्जरलैंड में प्रस्तावित थी, जहां मुख्य एजेंडा ईरान के परमाणु कार्यक्रम से जुड़े मुद्दे थे। लेकिन होर्मुज स्ट्रेट में बढ़ते तनाव को देखते हुए बैठक का स्थान बदलकर दोहा कर दिया गया। विशेषज्ञों का मानना है कि यह बदलाव क्षेत्रीय सुरक्षा और समुद्री व्यापार की निरंतरता को प्राथमिकता देने की दिशा में उठाया गया महत्वपूर्ण कदम है। ऐसे समय में इराक और ईरान के बीच हुई यह उच्चस्तरीय बातचीत पूरे क्षेत्र में संवाद आधारित समाधान को आगे बढ़ाने की एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक पहल के रूप में देखी जा रही है।
भारत-सेशेल्स रिश्तों को नई मजबूती, रक्षा, डिजिटल पेमेंट, स्वास्थ्य, अंतरिक्ष और ब्लू इकोनॉमी समेत 19 क्षेत्रों में बढ़ा सहयोग

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का तीन दिवसीय सेशेल्स दौरा भारत और हिंद महासागर क्षेत्र में रणनीतिक सहयोग के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस यात्रा के दौरान भारत और सेशेल्स के बीच कुल 19 महत्वपूर्ण समझौतों और सहयोगी पहलों पर सहमति बनी, जिनका उद्देश्य रक्षा, समुद्री सुरक्षा, डिजिटल अर्थव्यवस्था, स्वास्थ्य, कृषि, अंतरिक्ष, ऊर्जा और जलवायु परिवर्तन जैसे क्षेत्रों में साझेदारी को नई दिशा देना है। इन समझौतों को दोनों देशों के बीच दीर्घकालिक सहयोग का मजबूत आधार माना जा रहा है। दौरे के दौरान भारत ने सेशेल्स को एक फास्ट पेट्रोल वेसल, कई यूटिलिटी वाहन, लेजर रेडियल क्लास बोट्स और छह एम्बुलेंस भेंट कीं। इन पहलों का उद्देश्य समुद्री सुरक्षा को मजबूत करना, मानवीय सहयोग बढ़ाना और हिंद महासागर क्षेत्र में दोनों देशों के बीच रक्षा साझेदारी को और प्रभावी बनाना है। साथ ही सेशेल्स कोस्ट गार्ड के जहाज की मरम्मत और डोर्नियर विमान के आधुनिकीकरण जैसे प्रोजेक्ट भी सहयोग के प्रमुख केंद्र रहे। आर्थिक और तकनीकी सहयोग को नई गति देने के लिए भारत और सेशेल्स के बीच यूपीआई आधारित डिजिटल भुगतान प्रणाली लागू करने पर सहमति बनी। इस दिशा में दोनों देशों के संबंधित वित्तीय संस्थानों के बीच समझौते किए गए, जिससे डिजिटल लेनदेन को बढ़ावा मिलेगा और भारत की डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर प्रणाली का अंतरराष्ट्रीय विस्तार भी मजबूत होगा। इसके साथ ही आर्थिक सहयोग और वित्तीय समावेशन को नई मजबूती मिलने की उम्मीद जताई गई है। स्वास्थ्य क्षेत्र में भी दोनों देशों ने महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। जन औषधि योजना के तहत सस्ती और गुणवत्तापूर्ण भारतीय दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए सहयोग बढ़ाने पर सहमति बनी। इसके अलावा नए राष्ट्रीय अस्पताल की शुरुआती तैयारियों और स्वास्थ्य सेवाओं के विकास से जुड़े समझौतों पर भी सहमति बनी, जिससे सेशेल्स की स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत करने में भारत की भूमिका और प्रभाव बढ़ेगा। कृषि, शिक्षा और कौशल विकास के क्षेत्र में भी दोनों देशों ने सहयोग का दायरा विस्तारित किया है। कृषि अनुसंधान, प्रशिक्षण और तकनीकी शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए संयुक्त कार्ययोजना तैयार की गई है। वहीं प्रोफेशनल और टेक्निकल एजुकेशन सेंटर की स्थापना तथा विदेश सेवा से जुड़े प्रशिक्षण कार्यक्रमों के जरिए संस्थागत सहयोग को भी नई मजबूती मिलेगी। इन पहलों का उद्देश्य स्थानीय क्षमता निर्माण के साथ दीर्घकालिक विकास साझेदारी को मजबूत करना है। ऊर्जा, जलवायु परिवर्तन और ब्लू इकोनॉमी जैसे भविष्य के क्षेत्रों में भी दोनों देशों ने मिलकर काम करने की प्रतिबद्धता दोहराई। ग्रीन हाइड्रोजन, आपदा-रोधी बुनियादी ढांचे, समुद्री संसाधनों के सतत उपयोग और पर्यावरण संरक्षण जैसे विषयों पर साझा प्रयासों पर जोर दिया गया। इसके साथ ही सेशेल्स ने आपदा-रोधी अवसंरचना से जुड़े वैश्विक गठबंधन की सदस्यता भी ग्रहण की, जिससे जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निपटने में सहयोग और मजबूत होगा। दौरे के दौरान अंतरिक्ष सहयोग, प्रत्यर्पण संधि, नाविकों के प्रशिक्षण, खाद्य सुरक्षा, विकास परियोजनाओं के लिए वित्तीय सहायता तथा बुनियादी ढांचे के विकास जैसे कई महत्वपूर्ण समझौते भी किए गए। भारत ने सेशेल्स को चावल और सीमेंट की आपूर्ति के साथ विकास परियोजनाओं के लिए वित्तीय सहयोग भी उपलब्ध कराया। इन पहलों से स्पष्ट है कि दोनों देश केवल कूटनीतिक संबंधों तक सीमित नहीं रहना चाहते, बल्कि व्यापक आर्थिक, रणनीतिक और विकासात्मक साझेदारी को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। प्रधानमंत्री की इस यात्रा ने हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की भूमिका को और मजबूत करने के साथ भारत-सेशेल्स संबंधों को नई ऊंचाई देने का मार्ग भी प्रशस्त किया।
उर्दू कक्षा को लेकर बढ़ा विवाद, शिक्षक से कथित मारपीट के बाद सख्त कार्रवाई की उठी मांग

नई दिल्ली: तेलंगाना के निजामाबाद जिले में एक स्कूल में उर्दू की कक्षा के दौरान हुए विवाद ने प्रदेश की राजनीति को भी गर्मा दिया है। आरोप है कि कुछ लोग स्कूल परिसर में जबरन घुस गए और पढ़ाई कर रहे शिक्षक के साथ अभद्र व्यवहार करते हुए मारपीट की। घटना के बाद पुलिस ने बिना अनुमति स्कूल में प्रवेश करने, डराने-धमकाने और मारपीट समेत विभिन्न आरोपों में 20 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। इस मामले को लेकर राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों की प्रतिक्रियाएं लगातार सामने आ रही हैं। बताया जा रहा है कि यह घटना अरमूर स्थित भारत चंद्र स्कूल की है, जहां एक शिक्षक छात्रों को उर्दू पढ़ा रहे थे। इसी दौरान कुछ लोगों ने स्कूल पहुंचकर इस बात पर आपत्ति जताई कि गैर-मुस्लिम छात्रों को उर्दू भाषा सिखाई जा रही है। देखते ही देखते विवाद बढ़ गया और शिक्षक के साथ कथित रूप से दुर्व्यवहार किया गया। इस दौरान मौजूद लोगों ने घटना का वीडियो बना लिया, जो बाद में सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया। वायरल वीडियो में एक व्यक्ति शिक्षक को पुलिसकर्मियों की मौजूदगी में थप्पड़ मारता दिखाई दे रहा है। वीडियो सामने आने के बाद शिक्षा जगत और विभिन्न सामाजिक संगठनों में नाराजगी देखने को मिली। कई लोगों ने इसे कानून-व्यवस्था और शिक्षकों की सुरक्षा से जुड़ा गंभीर मामला बताते हुए दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। घटना के विरोध में कई शिक्षक और अल्पसंख्यक संगठनों ने निजामाबाद बंद का आह्वान किया। उनका कहना है कि ड्यूटी के दौरान किसी शिक्षक के साथ इस तरह का व्यवहार पूरी शिक्षा व्यवस्था के लिए चिंताजनक है। संगठनों ने प्रशासन से स्कूल स्टाफ की सुरक्षा सुनिश्चित करने और दोषियों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई करने की मांग की है, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो। इस मामले ने राजनीतिक रूप भी ले लिया है। कांग्रेस नेता डॉ. शमा मोहम्मद ने राज्य सरकार से पूरे प्रकरण में निष्पक्ष जांच कराने और आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की मांग की है। उनका कहना है कि किसी भी शिक्षक के साथ कानून हाथ में लेकर हिंसक व्यवहार स्वीकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने शिक्षा संस्थानों में सुरक्षित माहौल बनाए रखने पर भी जोर दिया। दूसरी ओर, विरोध कर रहे लोगों का आरोप है कि छात्रों को उर्दू भाषा के साथ धार्मिक सामग्री और गीत भी पढ़ाए जा रहे थे, जिस पर उन्होंने आपत्ति दर्ज कराई। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है और वायरल वीडियो सहित सभी उपलब्ध साक्ष्यों की जांच के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद तथ्यों के अनुरूप आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।