बीपीसीएल का बड़ा रणनीतिक निवेश, 85 करोड़ रुपये में खरीदी 40% हिस्सेदारी, इंफ्रास्ट्रक्चर कारोबार को मिलेगी नई रफ्तार

नई दिल्ली। सार्वजनिक क्षेत्र की प्रमुख तेल एवं ऊर्जा कंपनी भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (बीपीसीएल) ने अपने कारोबार के विस्तार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए टिकी टार एंड शेल इंडिया प्राइवेट लिमिटेड (टीटीएसआईपीएल) में 40 प्रतिशत हिस्सेदारी खरीदने का फैसला किया है। इस रणनीतिक निवेश के तहत कंपनी करीब 85 करोड़ रुपये का निवेश करेगी। इस अधिग्रहण का उद्देश्य वैल्यू-एडेड बिटुमिन कारोबार में बीपीसीएल की हिस्सेदारी बढ़ाना और देश में तेजी से बढ़ रहे इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर की संभावनाओं का लाभ उठाना है। कंपनी के अनुसार यह निवेश सामान्य नियामकीय और व्यावसायिक शर्तों के पूरा होने के बाद निर्धारित समयसीमा के भीतर पूरा होने की उम्मीद है। इस सौदे के जरिए बीपीसीएल को टीटीएसआईपीएल के उत्पाद पोर्टफोलियो, तकनीकी विशेषज्ञता और बाजार नेटवर्क का लाभ मिलेगा। इससे कंपनी विशेष प्रकार के बिटुमिन उत्पादों की बढ़ती मांग को बेहतर तरीके से पूरा कर सकेगी। देशभर में सड़क, एक्सप्रेसवे, एयरपोर्ट और अन्य आधारभूत ढांचा परियोजनाओं में लगातार निवेश बढ़ रहा है। ऐसे में वैल्यू-एडेड बिटुमिन की मांग भी तेजी से बढ़ने की संभावना है। बीपीसीएल का मानना है कि यह निवेश उसे इस क्षेत्र में अपनी प्रतिस्पर्धात्मक स्थिति मजबूत करने के साथ भविष्य के विकास अवसरों का लाभ उठाने में मदद करेगा। टीटीएसआईपीएल विशेष बिटुमिन उत्पादों के निर्माण और आपूर्ति से जुड़ी कंपनी है। कंपनी की अधिकृत शेयर पूंजी 37 करोड़ रुपये है, जबकि इसकी चुकता पूंजी लगभग 36 करोड़ रुपये बताई गई है। बीपीसीएल का मानना है कि इस साझेदारी से दोनों कंपनियों की विशेषज्ञता का बेहतर उपयोग होगा और नए उत्पादों तथा बाजार विस्तार के अवसर भी बढ़ेंगे। वित्तीय प्रदर्शन के मोर्चे पर भी बीपीसीएल ने हालिया तिमाही में मजबूत परिणाम दर्ज किए हैं। कंपनी ने वित्त वर्ष 2025-26 की चौथी तिमाही में 3,191 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ अर्जित किया। इस अवधि में कंपनी की कुल आय लगभग 1.18 लाख करोड़ रुपये रही, जबकि ईबीआईटीडीए 10,061 करोड़ रुपये दर्ज किया गया। यह प्रदर्शन कंपनी की मजबूत परिचालन क्षमता और स्थिर व्यावसायिक गतिविधियों को दर्शाता है। ईंधन बिक्री के आंकड़ों में भी सकारात्मक रुझान देखने को मिला है। मई 2026 के दौरान दिल्ली में पेट्रोल की बिक्री में पिछले वर्ष की तुलना में वृद्धि दर्ज की गई। इसी अवधि में डीजल की मांग भी बढ़ी, जिससे स्पष्ट होता है कि परिवहन और औद्योगिक गतिविधियों में निरंतर सुधार हो रहा है। यह वृद्धि कंपनी के खुदरा कारोबार के लिए भी सकारात्मक संकेत मानी जा रही है। शेयर बाजार में हालांकि कारोबारी सत्र के दौरान बीपीसीएल के शेयरों में हल्की गिरावट दर्ज की गई, लेकिन लंबे समय की बात करें तो कंपनी का प्रदर्शन निवेशकों के लिए सकारात्मक रहा है। पिछले पांच वर्षों में कंपनी के शेयरों ने उल्लेखनीय बढ़त दर्ज की है। विशेषज्ञों का मानना है कि इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में बढ़ते निवेश और वैल्यू-एडेड उत्पादों पर फोकस से बीपीसीएल को भविष्य में नए कारोबारी अवसर मिल सकते हैं, जिससे कंपनी की दीर्घकालिक विकास रणनीति को मजबूती मिलेगी।
भारत की हार पर अंजुम चोपड़ा का बड़ा बयान गलत रणनीति बनी बाहर होने की वजह हरमनप्रीत को बताया सबसे बेहतर कप्तान

नई दिल्ली । महिला टी20 विश्व कप 2026 में भारतीय टीम का सफर ग्रुप चरण में ही समाप्त हो गया। ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ मिली हार ने करोड़ों भारतीय क्रिकेट प्रेमियों की उम्मीदों को झटका दिया। टीम के बाहर होने के बाद भारत की पूर्व कप्तान अंजुम चोपड़ा ने भारतीय टीम की रणनीति बल्लेबाजी क्रम और टीम संयोजन पर कई गंभीर सवाल उठाए हैं। हालांकि उन्होंने कप्तान हरमनप्रीत कौर का बचाव करते हुए उन्हें मौजूदा समय में भारतीय टीम के लिए सबसे उपयुक्त कप्तान बताया है। अंजुम चोपड़ा का मानना है कि ऑस्ट्रेलिया जैसी मजबूत टीम के खिलाफ 170 रन का लक्ष्य पर्याप्त नहीं था। उनके अनुसार यह स्कोर सामान्य परिस्थितियों में अच्छा माना जा सकता है लेकिन विश्व कप जैसे बड़े मुकाबले में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ इससे अधिक आक्रामक बल्लेबाजी की जरूरत थी। उन्होंने कहा कि यदि भारतीय टीम को मुकाबला जीतना था तो कम से कम 180 से 190 रन तक पहुंचने की कोशिश करनी चाहिए थी ताकि गेंदबाजों के पास लक्ष्य बचाने के लिए पर्याप्त अवसर मौजूद रहें। उन्होंने यह भी कहा कि केवल एक या दो शुरुआती विकेट लेकर ऑस्ट्रेलिया जैसी टीम को दबाव में नहीं लाया जा सकता। ऐसी मजबूत टीमों के खिलाफ गेंदबाजों को अतिरिक्त रन का सहारा चाहिए होता है। भारतीय बल्लेबाजों ने अच्छी शुरुआत के बावजूद अंतिम ओवरों में अपेक्षित तेजी नहीं दिखाई जिसका असर कुल स्कोर पर साफ दिखाई दिया। अंजुम चोपड़ा ने टीम प्रबंधन के बल्लेबाजी क्रम पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि विस्फोटक बल्लेबाज ऋचा घोष को पहले बल्लेबाजी के लिए भेजा जाना चाहिए था। यदि वह 17वें ओवर तक क्रीज पर आ जातीं तो टीम को अंतिम ओवरों में तेज रन बनाने का फायदा मिल सकता था। उनके अनुसार ऋचा को एक ओवर देर से भेजने के कारण भारत को वह फिनिशिंग नहीं मिल सकी जिसकी टीम को जरूरत थी। उन्होंने बल्लेबाजी क्रम में लगातार बदलाव को भी हार की बड़ी वजह बताया। अंजुम ने सवाल उठाया कि यदि यास्तिका भाटिया को नंबर तीन बल्लेबाज माना गया था तो इस अहम मुकाबले में उन्हें उसी स्थान पर क्यों नहीं उतारा गया। इसी तरह इंग्लैंड सीरीज में नंबर तीन पर खेलने वाली जेमिमा रोड्रिग्स की भूमिका भी विश्व कप में बदल दी गई। उनका मानना है कि लगातार बदलाव से खिलाड़ी अपनी भूमिका को लेकर पूरी तरह सहज नहीं हो पाते और इसका असर प्रदर्शन पर दिखाई देता है। पूर्व कप्तान ने सुझाव दिया कि हरमनप्रीत कौर को नंबर तीन पर बल्लेबाजी करनी चाहिए जबकि ऋचा घोष को नंबर चार पर स्थायी भूमिका दी जानी चाहिए। उनके अनुसार भारतीय टीम की सबसे बड़ी ताकत बल्लेबाजी है जबकि गेंदबाजी अभी भी उतनी मजबूत नहीं मानी जाती। इसलिए टीम को अपनी बल्लेबाजी क्षमता का पूरा फायदा उठाना चाहिए और बड़े लक्ष्य खड़े करने की मानसिकता विकसित करनी होगी। अंजुम चोपड़ा ने पांचवें गेंदबाज की कमी को भी भारत की लगातार बनी हुई समस्या बताया। उनके अनुसार यह कमजोरी पूरे टूर्नामेंट में दिखाई दी और ऑस्ट्रेलिया जैसी मजबूत टीम ने इसका पूरा फायदा उठाया। हालांकि उन्होंने कप्तान हरमनप्रीत कौर का खुलकर समर्थन किया। अंजुम ने कहा कि मौजूदा समय में भारतीय महिला टीम के पास हरमनप्रीत से बेहतर कप्तानी का विकल्प नहीं है। उन्होंने माना कि टीम को बल्लेबाजी से लेकर गेंदबाजी और रणनीति तक कई क्षेत्रों में सुधार की जरूरत है लेकिन नेतृत्व के मामले में हरमनप्रीत अभी भी सबसे भरोसेमंद विकल्प हैं। पूर्व कप्तान ने कहा कि भारतीय टीम को अब अगले टूर्नामेंट की तैयारी तुरंत शुरू करनी चाहिए और ऐसे बल्लेबाजों की पहचान करनी चाहिए जो निडर होकर बड़े शॉट खेल सकें। उनका मानना है कि आधुनिक टी20 क्रिकेट में केवल सम्मानजनक स्कोर नहीं बल्कि मैच जिताने वाले बड़े लक्ष्य बनाने की सोच ही सफलता की कुंजी है।
रूस में ईंधन संकट गहराया, रिफाइनरियों पर हमलों के बाद पेट्रोल-डीजल सप्लाई प्रभावित, पुतिन ने मानी चुनौतियां

नई दिल्ली: रूस और यूक्रेन के बीच जारी संघर्ष का प्रभाव अब युद्धक्षेत्र से निकलकर आम नागरिकों के दैनिक जीवन तक पहुंचने लगा है। रूस के कई हिस्सों में पेट्रोल और डीजल की आपूर्ति प्रभावित होने की खबरें सामने आ रही हैं। ईंधन संकट को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया है कि देश वर्तमान में कठिन परिस्थितियों का सामना कर रहा है। यह बयान ऐसे समय आया है जब रूस की तेल रिफाइनरियों और ऊर्जा अवसंरचना पर लगातार हमले होने की रिपोर्टें सामने आ रही हैं। रूस विश्व के प्रमुख तेल उत्पादक और निर्यातक देशों में शामिल है। देश की अर्थव्यवस्था का एक बड़ा हिस्सा ऊर्जा क्षेत्र पर निर्भर करता है। हालांकि हाल के महीनों में ऊर्जा सुविधाओं पर बढ़ते हमलों ने उत्पादन और आपूर्ति श्रृंखला पर दबाव बढ़ा दिया है। कई क्षेत्रों से पेट्रोल पंपों पर लंबी कतारों और ईंधन की सीमित उपलब्धता की जानकारी मिल रही है, जिससे आम नागरिकों और व्यापारिक गतिविधियों पर असर पड़ रहा है। रूसी नेतृत्व का कहना है कि सरकार हालात को नियंत्रित करने और आवश्यक आपूर्ति बनाए रखने के लिए लगातार कदम उठा रही है। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि कृषि क्षेत्र और आवश्यक सेवाओं के लिए ईंधन की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित की जाए। फसल सीजन को देखते हुए ग्रामीण क्षेत्रों में डीजल की मांग बढ़ी हुई है, इसलिए सरकार इस क्षेत्र को प्राथमिकता देने की रणनीति पर काम कर रही है। ऊर्जा क्षेत्र के विशेषज्ञों का मानना है कि तेल रिफाइनरियों पर हमलों से केवल उत्पादन ही प्रभावित नहीं होता, बल्कि वितरण व्यवस्था भी बाधित होती है। कच्चे तेल को सीधे उपयोग में नहीं लाया जा सकता। इसे रिफाइनरियों में प्रसंस्कृत कर पेट्रोल, डीजल और अन्य उत्पादों में बदला जाता है। यदि रिफाइनिंग क्षमता प्रभावित होती है तो घरेलू बाजार में तैयार ईंधन की उपलब्धता कम हो सकती है, भले ही देश के पास पर्याप्त मात्रा में कच्चा तेल मौजूद हो। रूस सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों ने भी संकेत दिए हैं कि घरेलू जरूरतों को प्राथमिकता देने के लिए ऊर्जा निर्यात नीति की समीक्षा की जा सकती है। आवश्यकता पड़ने पर कुछ ईंधन उत्पादों के निर्यात पर अस्थायी प्रतिबंध लगाने जैसे विकल्पों पर भी विचार किया जा रहा है। इसका उद्देश्य घरेलू बाजार में आपूर्ति बनाए रखना और कीमतों को नियंत्रित करना है। युद्ध के दौरान ऊर्जा अवसंरचना को निशाना बनाए जाने से रूस की आर्थिक चुनौतियां भी बढ़ी हैं। तेल और गैस निर्यात से होने वाली आय रूस के लिए महत्वपूर्ण राजस्व स्रोत मानी जाती है। यदि उत्पादन और निर्यात दोनों प्रभावित होते हैं, तो इसका असर सरकारी राजस्व और व्यापक आर्थिक गतिविधियों पर भी पड़ सकता है। यही कारण है कि ऊर्जा सुरक्षा वर्तमान समय में रूस की प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल हो गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में रूस को घरेलू आपूर्ति, निर्यात प्रतिबद्धताओं और ऊर्जा अवसंरचना की सुरक्षा के बीच संतुलन बनाना होगा। युद्ध के लंबे खिंचने और ऊर्जा परिसंपत्तियों पर बढ़ते दबाव के कारण स्थिति चुनौतीपूर्ण बनी हुई है। फिलहाल सरकार आपूर्ति सामान्य बनाए रखने के लिए विभिन्न स्तरों पर प्रयास कर रही है, लेकिन ऊर्जा क्षेत्र की मौजूदा परिस्थितियां रूस के लिए एक बड़ी परीक्षा के रूप में देखी जा रही हैं।
CM MOHAN YADAV NIMACH VISIT: CM मोहन यादव ने नीमच को दी 1,554 करोड़ की सौगात, 38 औद्योगिक परियोजनाओं का शुभारंभ

CM MOHAN YADAV NIMACH VISIT: नीमच। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सोमवार को नीमच जिले को करीब 1,553.98 करोड़ रुपये की औद्योगिक परियोजनाओं की बड़ी सौगात दी। उन्होंने 38 औद्योगिक परियोजनाओं का लोकार्पण और भूमिपूजन किया। इन परियोजनाओं से जिले में 3,201 से अधिक प्रत्यक्ष रोजगार के अवसर सृजित होंगे। सरकार का मानना है कि इससे नीमच प्रदेश के प्रमुख औद्योगिक केंद्रों में तेजी से अपनी पहचान बनाएगा। CM MOHAN YADAV NEWS: CM मोहन यादव ने राज्यपाल से की मुलाकात, UCC को लेकर भी हुई चर्चा 30 नई परियोजनाओं का भूमिपूजन मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम के दौरान 30 नई औद्योगिक परियोजनाओं का भूमिपूजन और 8 पूर्ण हो चुकी परियोजनाओं का लोकार्पण किया। इनमें 15 परियोजनाएं मध्यप्रदेश औद्योगिक विकास निगम (एमपीआईडीसी) तथा 23 परियोजनाएं सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई) विभाग से संबंधित हैं। धनुका बायोटेक की परियोजना सबसे बड़ी इन परियोजनाओं में सबसे बड़ा निवेश धनुका बायोटेक की सोलर टेम्पर्ड ग्लास निर्माण इकाई में किया जा रहा है। इस परियोजना पर 1,247.71 करोड़ रुपये का निवेश होगा, जिससे 1,690 लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार मिलने की संभावना है। इसके अलावा बाबजी इंडस्ट्रियल की पॉलिएस्टर स्टेपल फाइबर निर्माण इकाई (81.30 करोड़ रुपये), विश्वेश्वरा डेनिम प्राइवेट लिमिटेड की अपैरल एवं टेक्सटाइल यूनिट (66 करोड़ रुपये) और बिग सी रिन्यूएबल एनर्जी का बायो-सीएनजी प्लांट (61 करोड़ रुपये) जैसी परियोजनाओं की भी शुरुआत हुई। कप्तान श्रेयस अय्यर के नाम दर्ज हुआ बेहद शर्मनाक रिकॉर्ड, आयरलैंड के हाथों क्लीन स्वीप के बाद कप्तानी और बल्लेबाजी पर उठे गंभीर सवाल निवेश और रोजगार को मिलेगी नई रफ्तार सरकारी आंकड़ों के अनुसार, एमपीआईडीसी की 15 परियोजनाओं में 1,502.31 करोड़ रुपये का निवेश होगा, जिससे 2,753 लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार मिलेगा। वहीं एमएसएमई विभाग की 23 परियोजनाओं में 51.67 करोड़ रुपये का निवेश किया जाएगा, जिससे 448 नए रोजगार सृजित होंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार उद्योग, निवेश और रोजगार को बढ़ावा देने के लिए लगातार काम कर रही है। इन नई परियोजनाओं से स्थानीय युवाओं को रोजगार मिलेगा, औद्योगिक गतिविधियां बढ़ेंगी और नीमच जिले की अर्थव्यवस्था को नई मजबूती मिलेगी।
राम मंदिर दान गबन मामले में सुप्रीम कोर्ट ने तत्काल सुनवाई से किया इनकार, बोला- नियमित प्रक्रिया से होगी सुनवाई, जल्दबाजी की कोई जरूरत नहीं

नई दिल्ली । अयोध्या स्थित राम मंदिर में दान राशि के कथित गबन और वित्तीय अनियमितताओं से जुड़े मामले में दायर जनहित याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने तत्काल सुनवाई से इनकार कर दिया है। शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया कि इस मामले को नियमित न्यायिक प्रक्रिया के तहत ही सुना जाएगा और तत्काल सुनवाई की आवश्यकता नहीं है। सुनवाई के दौरान अदालत की टिप्पणी, “क्या बाद में सुनवाई होने से कोई आसमान टूट जाएगा”, सबसे अधिक चर्चा में रही। अदालत ने कहा कि न्यायिक प्रक्रिया निर्धारित नियमों के अनुसार ही आगे बढ़ेगी और किसी भी मामले में केवल आग्रह के आधार पर तत्काल सुनवाई नहीं की जा सकती। सोमवार को यह याचिका जस्टिस एम.एम. सुंदरेश और जस्टिस शील नागू की अवकाशकालीन पीठ के समक्ष प्रस्तुत की गई। याचिकाकर्ताओं ने अदालत से अनुरोध किया कि राम मंदिर में दान राशि के कथित दुरुपयोग की गंभीरता को देखते हुए मामले की तत्काल सुनवाई की जाए और इसकी जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) की निगरानी में कराई जाए। हालांकि पीठ ने इस मांग को स्वीकार नहीं किया और कहा कि अदालत के नियमित कामकाज शुरू होने के बाद इस मामले पर सुनवाई करना पर्याप्त होगा। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि याचिका को जुलाई के दूसरे सप्ताह, 12 से 17 जुलाई के बीच सूचीबद्ध किया जाएगा। जनहित याचिका दो अधिवक्ताओं की ओर से दायर की गई है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि राम मंदिर के लिए श्रद्धालुओं से प्राप्त दान राशि के प्रबंधन में वित्तीय अनियमितताएं हुई हैं। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि उत्तर प्रदेश पुलिस की जांच पर उन्हें पूरा भरोसा नहीं है क्योंकि महत्वपूर्ण साक्ष्यों के संरक्षण और निष्पक्ष जांच को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। इसी आधार पर उन्होंने मामले की स्वतंत्र जांच सीबीआई से कराने की मांग की है ताकि पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष पड़ताल हो सके। इस बीच पुलिस की जांच लगातार जारी है। अब तक इस मामले में आठ लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। जांच के दौरान दान राशि की गिनती और प्रबंधन से जुड़े कर्मचारियों से पूछताछ की गई है। पुलिस ने श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय का बयान भी दर्ज किया है। आवश्यकता पड़ने पर ट्रस्ट के अन्य वरिष्ठ पदाधिकारियों, जिनमें ट्रस्टी अनिल मिश्रा भी शामिल हैं, से पूछताछ की जा सकती है। चंपत राय के ट्रस्ट से इस्तीफा देने के बाद इस पूरे मामले को लेकर चर्चाएं और तेज हुई हैं, हालांकि जांच एजेंसियां उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई कर रही हैं। राम मंदिर दान विवाद उस समय सामने आया जब मंदिर के दान पात्र से नकदी चोरी होने की शिकायत दर्ज कराई गई। शिकायत के बाद पुलिस ने मंदिर परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज की जांच की, जिसमें कुछ संदिग्ध गतिविधियां सामने आईं। इसके बाद श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की ओर से प्राथमिकी दर्ज कराई गई। पुलिस ने दान राशि की गणना से जुड़े कुछ कर्मचारियों को हिरासत में लेकर पूछताछ की और बाद में उनकी गिरफ्तारी भी की। जांच एजेंसियां अब वित्तीय रिकॉर्ड, सीसीटीवी फुटेज और अन्य साक्ष्यों का मिलान कर पूरे मामले की तह तक पहुंचने का प्रयास कर रही हैं। सुप्रीम कोर्ट के ताजा रुख से यह स्पष्ट हो गया है कि अदालत ने मामले की गंभीरता को नकारा नहीं है, बल्कि केवल तत्काल सुनवाई की मांग को अस्वीकार किया है। अब इस जनहित याचिका पर नियमित सूची के अनुसार जुलाई के दूसरे सप्ताह में सुनवाई होने की संभावना है। उस दौरान अदालत यह तय करेगी कि उपलब्ध तथ्यों, जांच की स्थिति और याचिका में उठाए गए मुद्दों के आधार पर आगे किस प्रकार की न्यायिक कार्रवाई की जानी चाहिए।
अब घुटना प्रत्यारोपण नहीं रहा मुश्किल आधुनिक रोबोटिक तकनीक से कम दर्द और तेजी से रिकवरी का दावा

इंदौर । घुटनों के दर्द से परेशान मरीजों के लिए राहत देने वाली खबर इंदौर से सामने आई है। शहर में आयोजित मॉडर्न आर्थ्रोप्लास्टी कोर्स मेक 2026 के दौरान देशभर के जॉइंट रिप्लेसमेंट विशेषज्ञों ने बताया कि यदि मरीज शुरुआती चरण में ही विशेषज्ञ डॉक्टर से उपचार शुरू करा लें तो बड़ी सर्जरी से बचा जा सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार लगभग 40 से 60 प्रतिशत मामलों में पूरे घुटने को बदलने की आवश्यकता नहीं पड़ती बल्कि केवल प्रभावित हिस्से का पार्शियल नी रिप्लेसमेंट कर मरीज को सामान्य और सक्रिय जीवन वापस दिया जा सकता है। एसोसिएशन ऑफ ऑर्थोपेडिक सर्जन्स ऑफ इंदौर के तत्वावधान में आयोजित इस राष्ट्रीय सम्मेलन में नागपुर दिल्ली भोपाल और इंदौर सहित कई शहरों के विशेषज्ञों ने भाग लिया। कार्यक्रम के दौरान आधुनिक तकनीकों पर विस्तार से चर्चा की गई और तीन लाइव सर्जरी का प्रदर्शन भी किया गया ताकि चिकित्सकों को नई तकनीकों की व्यावहारिक जानकारी मिल सके। कोर्स चेयरमैन और रोबोटिक जॉइंट रिप्लेसमेंट सर्जन डॉ विनय तंतुवाय ने बताया कि अधिकांश मरीज तब अस्पताल पहुंचते हैं जब घुटनों का दर्द काफी बढ़ चुका होता है। ऐसे में कई बार पूरा घुटना बदलना मजबूरी बन जाता है। यदि शुरुआती अवस्था में इलाज शुरू हो जाए तो केवल खराब हिस्से को बदलकर मरीज को राहत दी जा सकती है। इस प्रक्रिया के बाद मरीज पालथी मारकर बैठने और उकड़ू बैठने जैसी सामान्य गतिविधियां भी आसानी से कर सकता है। उन्होंने बताया कि सही तरीके से किया गया पार्शियल नी रिप्लेसमेंट 20 से 25 वर्षों तक प्रभावी रह सकता है। नागपुर के रोबोटिक जॉइंट रिप्लेसमेंट विशेषज्ञ डॉ उन्मेष महाजन ने बताया कि रोबोटिक तकनीक ने घुटना प्रत्यारोपण की सटीकता को नई ऊंचाई दी है। रोबोट की मदद से इम्प्लांट को बिल्कुल सही स्थान पर लगाया जाता है जिससे आसपास के लिगामेंट और ऊतकों को कम नुकसान पहुंचता है। इसका सबसे बड़ा फायदा यह होता है कि मरीज को कम दर्द होता है और वह पहले की तुलना में तेजी से स्वस्थ होकर सामान्य जीवन में लौट सकता है। आधुनिक इम्प्लांट अब 25 से 30 वर्ष या उससे भी अधिक समय तक बेहतर परिणाम दे सकते हैं। दिल्ली के विशेषज्ञ डॉ निखिल वलसंकर ने बताया कि अब ऑपरेशन से पहले मरीज का सीटी स्कैन कर उसका थ्री डी मॉडल तैयार किया जाता है। इससे सर्जरी की पूरी योजना पहले ही बन जाती है और इम्प्लांट को सटीक स्थान पर लगाया जा सकता है। यही कारण है कि वर्तमान समय में घुटना प्रत्यारोपण सर्जरी की सफलता दर 97 से 98 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है। विशेषज्ञों ने यह भी बताया कि बदलती जीवनशैली बढ़ता मोटापा और शारीरिक गतिविधियों में कमी के कारण अब कम उम्र के लोगों में भी घुटनों की समस्या तेजी से बढ़ रही है। सामान्य तौर पर 60 से 70 वर्ष की आयु में घुटना प्रत्यारोपण की जरूरत पड़ती है लेकिन गंभीर स्थिति होने पर 45 वर्ष की आयु के बाद भी यह सर्जरी की जा सकती है। डॉ निखिल वलसंकर ने कहा कि शुरुआती चरण में ओजोन थेरेपी और पीआरपी जैसी वैकल्पिक उपचार पद्धतियों का उपयोग किया जा सकता है लेकिन इनके परिणामों को लेकर अभी पर्याप्त वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध नहीं हैं। इसलिए किसी भी प्रकार का उपचार शुरू करने से पहले विशेषज्ञ डॉक्टर की सलाह लेना बेहद जरूरी है। जीआरएमसी के डीन डॉ आरकेएस धाकड़ ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित योजना रोबोटिक तकनीक और आधुनिक चिकित्सा उपकरणों ने घुटना प्रत्यारोपण को पहले से अधिक सुरक्षित सटीक और कम दर्द वाला बना दिया है। नई तकनीकों की मदद से मरीजों को तेजी से राहत मिल रही है और उनके जीवन की गुणवत्ता में भी उल्लेखनीय सुधार देखने को मिल रहा है।
यशवंत क्लब चुनाव में जीतू जैन की जीत, हैप्पी वायसी पैनल का चार प्रमुख पदों पर कब्जा

इंदौर । इंदौर के प्रतिष्ठित यशवंत क्लब के द्विवार्षिक चुनाव में इस बार हैप्पी वायसी पैनल का दबदबा देखने को मिला। क्लब के अध्यक्ष पद पर हैप्पी वायसी पैनल के जितेंद्र (जीतू) जैन ने ग्लोरियस वायसी पैनल के परमजीत सिंह (पम्मी) छाबड़ा को 65 वोटों के अंतर से हराकर जीत दर्ज की। चुनाव परिणाम सामने आते ही क्लब परिसर में समर्थकों ने ढोल-नगाड़ों के साथ जश्न मनाया और विजयी प्रत्याशियों का भव्य स्वागत किया। अध्यक्ष पद के लिए मुकाबला बेहद रोमांचक रहा। शुरुआती राउंड में जीतू जैन ने बढ़त बना ली थी, लेकिन तीसरे और चौथे चरण की मतगणना में पम्मी छाबड़ा ने अंतर काफी कम कर मुकाबले को दिलचस्प बना दिया। हालांकि अंतिम राउंड की गिनती के बाद जीतू जैन को 1363 वोट मिले, जबकि पम्मी छाबड़ा 1298 वोट हासिल कर सके। इस तरह जीतू जैन ने 65 मतों के अंतर से अध्यक्ष पद अपने नाम किया। यशवंत क्लब के कुल 5124 सदस्यों में से 2687 सदस्यों ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया। मतगणना के दौरान 26 मत निरस्त घोषित किए गए। मतदान प्रतिशत और करीबी मुकाबले ने चुनाव को बेहद रोचक बना दिया। सचिव पद पर भी हैप्पी वायसी पैनल को सफलता मिली। त्रिकोणीय मुकाबले में विजय कुमार कस्तूरी ने 982 वोट प्राप्त कर जीत हासिल की। उन्होंने ग्लोरियस वायसी पैनल के अतुल शेठ को 929 वोटों और निर्दलीय प्रत्याशी कुलविंदर सिंह गिल को 751 वोटों पर रोक दिया। सहसचिव पद पर तेजवीर जुनेजा ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 1622 वोट हासिल किए और अपने प्रतिद्वंद्वी पंकज कुकरेजा को 577 वोटों के बड़े अंतर से पराजित किया। वहीं कोषाध्यक्ष पद पर रूपल पारेख ने 1828 वोट प्राप्त कर सतीश मंगलानी को 986 वोटों के भारी अंतर से हराया। कार्यकारिणी सदस्य पदों पर भी हैप्पी वायसी पैनल का दबदबा कायम रहा। गुनीत सिंह चड्डा, राजेश तलवार, वैभव दुआ, भारती बारोडिया और विकास थम्मन ने जीत दर्ज कर नई कार्यकारिणी में अपनी जगह बनाई। चुनाव परिणामों से स्पष्ट हो गया कि क्लब के अधिकांश सदस्यों ने इस बार हैप्पी वायसी पैनल पर भरोसा जताया है। परिणाम घोषित होने के बाद क्लब परिसर में उत्सव जैसा माहौल बन गया। विजयी उम्मीदवारों और उनके समर्थकों ने ढोल-नगाड़ों की थाप पर नृत्य किया, एक-दूसरे को मिठाई खिलाई और देर रात तक जीत का जश्न मनाया। निवर्तमान अध्यक्ष टोनी सचदेवा ने कहा कि सदस्यों ने उनकी टीम पर विश्वास जताया है और नई कार्यकारिणी क्लब के विकास के लिए तैयार किए गए मास्टर प्लान को आगे बढ़ाएगी। वहीं निवर्तमान सचिव संजय गोरानी ने भरोसा दिलाया कि नई टीम पूरी प्रतिबद्धता के साथ क्लब को नई ऊंचाइयों तक ले जाने के लिए कार्य करेगी।
CM MOHAN YADAV NEWS: CM मोहन यादव ने राज्यपाल से की मुलाकात, UCC को लेकर भी हुई चर्चा

CM MOHAN YADAV NEWS: भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सोमवार को राजभवन पहुंचकर राज्यपाल मंगुभाई पटेल से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने प्रदेश सरकार की विभिन्न योजनाओं, विकास कार्यों और आगामी कार्यक्रमों की विस्तृत जानकारी राज्यपाल को दी। UCC लागू करने कि तैयारी बैठक में मुख्यमंत्री ने प्रदेश में समान नागरिक संहिता (UCC) लागू करने की तैयारियों पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने बताया कि UCC के संबंध में प्रदेशभर से 9 लाख से अधिक सुझाव प्राप्त हुए हैं। साथ ही, UCC को लेकर आगे की कार्ययोजना से भी राज्यपाल को अवगत कराया गया। टी20 सीरीज में आयरलैंड के हाथों 0-2 से पिटी भारतीय टीम, निराशाजनक प्रदर्शन के बाद हेड कोच गौतम गंभीर और कप्तान श्रेयस अय्यर निशाने पर ‘जल गंगा संवर्धन अभियान’ पर हुई चर्चा मुख्यमंत्री ने ‘जल गंगा संवर्धन अभियान’ की प्रगति की जानकारी देते हुए जल संरक्षण और जल स्रोतों को पुनर्जीवित करने के लिए भी जनकरी दी। इसके अलावा आगामी गुरु पूर्णिमा पखवाड़ा के दौरान आयोजित किए जाने वाले शैक्षणिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों की रूपरेखा भी साझा की। बैठक के दौरान प्रदेश की चार कृषि उपजों को मिले जीआई (GI) टैग से किसानों को मिलने वाले लाभों पर भी चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने बताया कि इससे प्रदेश के कृषि उत्पादों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिलेगी और किसानों की आय बढ़ाने में मदद मिलेगी। GWALIOR CYBER CRIME: 1.58 करोड़ के डिजिटल अरेस्ट फ्रॉड में बड़ा खुलासा, नासिक से लोहा कारोबारी गिरफ्तार कईं परियोनाओं पर हुई बैठक मुख्यमंत्री ने राज्यपाल को प्रदेश में सौर ऊर्जा परियोजनाओं के विस्तार, एमएसएमई और स्टार्ट-अप को प्रोत्साहन, औद्योगिक निवेश बढ़ाने तथा रोजगार सृजन के लिए किए जा रहे प्रयासों की भी जानकारी दी। इसके साथ ही मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रदेश सरकार की प्रमुख जनकल्याणकारी योजनाओं और विकास कार्यों की प्रगति रिपोर्ट भी राज्यपाल के समक्ष प्रस्तुत की। बैठक में प्रदेश के समग्र विकास और भविष्य की योजनाओं पर भी सकारात्मक चर्चा हुई।
यूपी चुनाव 2027 से पहले कांग्रेस का बड़ा दावा, सपा से बराबर सीटों की हिस्सेदारी की मांग, विपक्षी एकता पर भी दिया जोर

नई दिल्ली: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारियों के बीच विपक्षी राजनीति में सीट बंटवारे को लेकर नई बहस शुरू हो गई है। कांग्रेस के नव नियुक्त प्रदेश प्रभारी राजेंद्र गौतम ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि यदि राज्य में विपक्षी दलों के बीच गठबंधन होता है, तो कांग्रेस बराबरी की भागीदारी की अपेक्षा करेगी। उन्होंने कहा कि कांग्रेस एक राष्ट्रीय पार्टी है और उत्तर प्रदेश में उसे सम्मानजनक तथा समान हिस्सेदारी मिलनी चाहिए। राजेंद्र गौतम ने कहा कि कांग्रेस का देश के राजनीतिक इतिहास में महत्वपूर्ण योगदान रहा है और राष्ट्रीय स्तर पर पार्टी की मजबूत पहचान है। उनके अनुसार भारतीय जनता पार्टी का प्रभावी मुकाबला केवल एक मजबूत राष्ट्रीय दल ही कर सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि क्षेत्रीय दलों की अपनी भूमिका है, लेकिन राष्ट्रीय स्तर पर कांग्रेस की स्थिति अलग है। इसी आधार पर उन्होंने संभावित गठबंधन में बराबरी की भागीदारी की बात कही। उन्होंने विपक्षी दलों के बीच व्यापक एकजुटता की भी वकालत की। उनका कहना था कि संविधान और लोकतांत्रिक मूल्यों में विश्वास रखने वाली सभी राजनीतिक शक्तियों को एक मंच पर आने की आवश्यकता है। इसी संदर्भ में उन्होंने बहुजन समाज पार्टी सहित उन सभी दलों के साथ सहयोग की संभावना जताई जो भाजपा के खिलाफ साझा रणनीति बनाने के पक्षधर हैं। कांग्रेस नेता ने कहा कि पार्टी आगामी विधानसभा चुनाव के लिए राज्यभर में अपने संगठन को मजबूत करने पर विशेष ध्यान देगी। उन्होंने घोषणा की कि जुलाई से प्रदेशव्यापी दौरा शुरू किया जाएगा, जिसके दौरान कार्यकर्ताओं से संवाद स्थापित करने के साथ संगठन विस्तार पर भी काम किया जाएगा। उनका कहना था कि जमीनी स्तर पर पार्टी को मजबूत बनाना प्राथमिकता होगी, ताकि चुनावी तैयारी प्रभावी ढंग से की जा सके। राजेंद्र गौतम ने राज्य सरकार पर भी कई राजनीतिक आरोप लगाए। उन्होंने कानून-व्यवस्था, प्रशासनिक कार्यशैली और विभिन्न सरकारी निर्णयों को लेकर सवाल उठाते हुए कहा कि प्रदेश की जनता बदलाव चाहती है। उन्होंने दावा किया कि आने वाले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस पूरी मजबूती के साथ मैदान में उतरेगी और जनता के मुद्दों को प्रमुखता से उठाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि यदि विपक्षी गठबंधन का स्वरूप तय होता है, तो सभी सहयोगी दलों से चर्चा के बाद साझा घोषणापत्र तैयार किया जाएगा। उनके अनुसार गठबंधन की राजनीति में सभी दलों की राय और प्राथमिकताओं को शामिल किया जाएगा, ताकि जनता के सामने एक साझा और स्पष्ट एजेंडा रखा जा सके। उत्तर प्रदेश की राजनीति में कांग्रेस के इस रुख को आगामी चुनावी रणनीति का महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है। सीट बंटवारे को लेकर दिए गए इस बयान के बाद विपक्षी दलों के बीच आगे होने वाली बातचीत पर राजनीतिक हलकों की नजरें टिक गई हैं। आने वाले महीनों में गठबंधन की संभावनाएं, सीटों का फार्मूला और साझा चुनावी रणनीति प्रदेश की राजनीति का प्रमुख विषय बनने की संभावना है।
जम्मू-कश्मीर का 'धदकई' गांव बना भारत का 'साइलेंट विलेज', जेनेटिक म्यूटेशन के कारण सन्नाटे के साए में जीने को मजबूर हैं ग्रामीण

नई दिल्ली। भारतीय केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर के डोडा जिले की सुदूर और बर्फीली पहाड़ियों के बीच बसा ‘धदकई’ गांव इन दिनों अपनी एक बेहद अनोखी और संवेदनशील भौगोलिक एवं चिकित्सीय स्थिति के कारण वैश्विक स्तर पर चर्चा का विषय बना हुआ है। इस गांव को देश में ‘द साइलेंट विलेज ऑफ इंडिया’ यानी भारत का शांत गांव कहा जाता है। प्राकृतिक रूप से बेहद खूबसूरत दिखने वाले इस गांव की असल हकीकत यह है कि यहां की एक बहुत बड़ी आबादी जन्मजात रूप से न तो सुन सकती है और न ही बोल सकती है। इस छोटे से पर्वतीय क्षेत्र में पसरी यह खामोशी कोई प्राकृतिक सन्नाटा नहीं, बल्कि एक गंभीर अनुवांशिक बीमारी का नतीजा है। भौगोलिक दृष्टि से यह गांव जम्मू से लगभग 260 किलोमीटर दूर दुर्गम पहाड़ी इलाके में स्थित है, जहां मुख्य रूप से अनुसूचित जनजाति (एसटी) वर्ग से ताल्लुक रखने वाले गुज्जर मुस्लिम समुदाय के लोग निवास करते हैं। करीब 2,000 की कुल आबादी वाले इस गांव में वर्तमान में 90 से अधिक लोग पूरी तरह से मूक-बधिर हैं। गांव की सामाजिक संरचना के आंकड़ों पर गौर करें तो यहां के कुल 105 परिवारों में से 55 से अधिक परिवार ऐसे हैं, जिनके घर में कम से कम एक या उससे अधिक सदस्य इस शारीरिक अक्षमता के साथ जीने को मजबूर हैं। कई घरों में स्थिति इतनी गंभीर है कि सात में से छह बच्चे मूक-बधिर पैदा हुए हैं। इस अनोखी चुनौती से निपटने के लिए ग्रामीणों ने आपस में संवाद का एक अनूठा तरीका खोज निकाला है। धदकई गांव के लोगों ने अपनी एक स्थानीय सांकेतिक भाषा (लोकल साइन लैंग्वेज) विकसित कर ली है। खास बात यह है कि गांव के जो लोग सामान्य रूप से सुन और बोल सकते हैं, वे भी इस इशारों की भाषा में पूरी तरह पारंगत हैं। इसके चलते पूरा गांव बिना किसी बाहरी रुकावट या हिचकिचाहट के आपस में रोजमर्रा की बातें बेहद आसानी से साझा कर लेता है। स्थानीय रिकॉर्ड्स के अनुसार, गांव में मूक-बधिर बच्चे के जन्म का पहला आधिकारिक मामला वर्ष 1901 में दर्ज किया गया था, जो समय के साथ लगातार बढ़ता चला गया। लंबे समय तक स्थानीय समाज इस स्थिति को दैवीय अभिशाप या वहां की मिट्टी-पानी का दोष मानता रहा, लेकिन हालिया वर्षों में जब वैज्ञानिकों और डॉक्टरों की विभिन्न टीमों ने इस पर व्यापक शोध किया, तो एक चौंकाने वाली चिकित्सीय वजह सामने आई। मेडिकल साइंस की भाषा में इसे ‘जेनेटिक क्लस्टर’ या ‘फाउंडर्स इफेक्ट’ कहा जाता है। अनुसंधान में पाया गया कि गुज्जर समुदाय के लोग सदियों से अपनी ही जनजाति और बेहद करीबी रिश्तेदारों के भीतर शादियां करते आ रहे हैं। इस सीमित जेनेटिक पूल (डीएनए संरचना) के कारण मानव शरीर के ‘ओटीओएफ’ (ओटोफर्लिन) नामक जीन में गंभीर विकृति आ गई है, जो कान से दिमाग तक आवाज के सिग्नल भेजने में असमर्थ हो जाता है। चिकित्सीय विशेषज्ञों का स्पष्ट कहना है कि इस अनुवांशिक चक्रव्यूह को तोड़ने का एकमात्र व्यावहारिक उपाय यह है कि गांव की युवा पीढ़ी अपने रिश्तेदारों या अंतर्जातीय कम्युनिटी से बाहर शादियां करना शुरू करे। इसके अलावा, वैज्ञानिकों ने शादी से पहले जेनेटिक रिस्क की जांच के लिए ‘कलर-कोडेड कार्ड्स’ बनाने की वकालत की है। वर्तमान में भारतीय सेना और विभिन्न गैर-सरकारी सामाजिक संस्थाओं द्वारा इस शांत वादी में उम्मीद की नई किरण जगाने के प्रयास किए जा रहे हैं, जिसके तहत यहां के युवाओं को ‘इंडियन साइन लैंग्वेज’ सिखाकर समाज की मुख्यधारा से जोड़ने की मुहिम तेज कर दी गई है।