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क्या चीन बढ़ा रहा है सीमा पर कब्जा स्थानीय आरोपों के बाद जांच के आदेश सेना ने दावों को किया खारिज

नई दिल्ली। अरुणाचल प्रदेश के अपर सुबनसिरी जिले में चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी की कथित घुसपैठ और पैतृक जमीन पर कब्जे के आरोपों ने नया विवाद खड़ा कर दिया है। सीमावर्ती क्षेत्र में सक्रिय एक स्थानीय संगठन की शिकायत के बाद राज्य सरकार ने पूरे मामले की जांच कराने का फैसला किया है। हालांकि भारतीय सेना ने इन सभी दावों को सिरे से खारिज करते हुए उन्हें गलत और निराधार बताया है। ताकसिंग इलाके की नाह वेलफेयर सोसाइटी ने जिला प्रशासन को भेजे पत्र में आरोप लगाया है कि चीन पिछले कई वर्षों से भारतीय सीमा के भीतर अपनी गतिविधियां बढ़ा रहा है। संगठन के अनुसार स्थानीय लोगों की पैतृक जमीन पर कथित रूप से सैन्य शिविर बनाए गए हैं और वहां सड़क तथा पुल जैसी आधारभूत संरचनाएं भी तैयार की गई हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि जिन इलाकों में पहले वे शिकार करने जाते थे और जहां उनके मवेशी चरते थे अब वे क्षेत्र चीन के नियंत्रण में बताए जा रहे हैं। संगठन का दावा है कि पिछले 10 से 15 वर्षों के दौरान सीमा पर चीन की गतिविधियों में तेजी आई है और स्थानीय समुदाय धीरे धीरे अपनी पारंपरिक जमीन खो रहा है। संगठन ने इसे गंभीर सुरक्षा और आजीविका का मुद्दा बताते हुए सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। इन आरोपों के बाद अरुणाचल प्रदेश के गृह मंत्री मामा नटुंग ने कहा कि सरकार मामले को गंभीरता से ले रही है। उन्होंने बताया कि पहले जिला प्रशासन से विस्तृत रिपोर्ट मांगी गई है। यह रिपोर्ट स्थानीय प्रशासन जनप्रतिनिधियों पंचायतों और क्षेत्र के लोगों से मिली जानकारी के आधार पर तैयार की जाएगी। यदि जांच में अतिक्रमण के दावे सही पाए जाते हैं तो सरकार विशेष जांच समिति गठित कर आगे की कार्रवाई करेगी। दूसरी ओर भारतीय सेना ने स्पष्ट किया है कि अरुणाचल प्रदेश में हालिया चीनी घुसपैठ और सैन्य शिविर स्थापित किए जाने संबंधी मीडिया रिपोर्ट तथ्यहीन हैं। सेना ने कहा कि ऐसे दावों का कोई प्रमाण नहीं है और इन्हें गलत तथा आधारहीन माना जाना चाहिए। गौरतलब है कि पिछले महीने भारत और चीन के बीच बीजिंग में सीमा मामलों पर परामर्श और समन्वय तंत्र की 35वीं बैठक हुई थी। दोनों देशों ने सीमावर्ती क्षेत्रों की स्थिति की समीक्षा करते हुए शांति और स्थिरता बनाए रखने की दिशा में हुई प्रगति पर संतोष जताया था। ऐसे समय में अरुणाचल से सामने आए इन दावों ने सीमा सुरक्षा को लेकर नई चर्चा छेड़ दी है। फिलहाल राज्य सरकार जांच रिपोर्ट का इंतजार कर रही है जबकि भारतीय सेना का कहना है कि घुसपैठ के दावों की पुष्टि नहीं होती।

अमेरिका में स्वास्थ्य बीमा नियमों पर सियासी संग्राम ट्रंप प्रशासन के खिलाफ 25 राज्यों का मुकदमा

नई दिल्ली। अमेरिका में सरकारी स्वास्थ्य बीमा योजना मेडिकेड के नए नियमों को लेकर कानूनी और राजनीतिक विवाद गहरा गया है। 25 राज्यों और वॉशिंगटन डीसी ने ट्रंप प्रशासन के खिलाफ अदालत में मुकदमा दायर किया है। इन राज्यों का आरोप है कि नए कार्य संबंधी नियम जरूरतमंद लोगों के लिए स्वास्थ्य बीमा हासिल करना कठिन बना देंगे और कई पात्र नागरिक भी योजना के लाभ से वंचित हो सकते हैं। विवाद की शुरुआत अमेरिकी स्वास्थ्य विभाग के अंतर्गत काम करने वाली सेंटर्स फॉर मेडिकेयर एंड मेडिकेड सर्विसेज की ओर से जारी अंतरिम नियमों के बाद हुई। राज्यों का कहना है कि प्रशासन ने पिछले वर्ष बने कानून की सीमा से आगे बढ़कर नए प्रावधान लागू किए हैं और कानून की ऐसी व्याख्या की है जिससे लाभार्थियों पर अतिरिक्त शर्तें लागू हो रही हैं। नए नियमों के अनुसार एक जनवरी से 19 से 64 वर्ष की आयु के वे लोग जो मेडिकेड विस्तार योजना के तहत आते हैं उन्हें हर महीने कम से कम 80 घंटे काम करना होगा या सामुदायिक सेवा करनी होगी अथवा आधे समय तक पढ़ाई करना अनिवार्य होगा। हालांकि गंभीर रूप से बीमार लोगों नशा मुक्ति कार्यक्रम में शामिल व्यक्तियों और कुछ अन्य श्रेणियों को छूट देने का प्रावधान रखा गया है। सबसे बड़ा विवाद गंभीर स्वास्थ्य स्थिति की नई परिभाषा को लेकर है। पहले कानून में विकलांगता गंभीर बीमारी या नशे की लत से जूझ रहे लोगों को छूट देने की व्यवस्था थी लेकिन नए नियमों में कहा गया है कि बीमारी इतनी गंभीर होनी चाहिए जिससे व्यक्ति की काम करने पढ़ाई करने या सामुदायिक सेवा करने की क्षमता काफी हद तक प्रभावित हो। तभी उसे छूट मिल सकेगी। मुकदमा दायर करने वाले राज्यों का कहना है कि इस नई शर्त के कारण कैंसर मरीज दिव्यांग मानसिक रोगी और अन्य गंभीर बीमारियों से जूझ रहे लोगों को अपनी पात्रता साबित करने के लिए अतिरिक्त दस्तावेज और लंबी कागजी प्रक्रिया से गुजरना पड़ेगा। इससे कई ऐसे लोग भी स्वास्थ्य बीमा से वंचित हो सकते हैं जो वास्तव में इसके हकदार हैं। राज्यों ने यह भी आरोप लगाया है कि लंबे समय तक चर्चा के बाद अचानक नियम बदल दिए गए जिससे प्रशासनिक स्तर पर नई व्यवस्था लागू करना मुश्किल हो गया है। साथ ही यह भी स्पष्ट नहीं किया गया कि गंभीर बीमारी का प्रमाण किस प्रक्रिया के तहत स्वीकार किया जाएगा। दूसरी ओर ट्रंप प्रशासन का कहना है कि इन नियमों का उद्देश्य सरकारी योजनाओं के दुरुपयोग को रोकना और यह सुनिश्चित करना है कि लाभ वास्तव में पात्र और जरूरतमंद लोगों तक पहुंचे। हालांकि मुकदमा दायर होने के बाद स्वास्थ्य विभाग और सेंटर्स फॉर मेडिकेयर एंड मेडिकेड सर्विसेज की ओर से इस मामले पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी गई है। न्यूयॉर्क की अटॉर्नी जनरल लेटिशिया जेम्स ने नए नियमों पर चिंता जताते हुए कहा कि कैंसर दिव्यांगता मानसिक बीमारी या नशे की लत से उबर रहे लोगों को इलाज पाने के लिए अनावश्यक कागजी कार्रवाई में नहीं उलझाया जाना चाहिए। उनके अनुसार इन बदलावों से हजारों जरूरतमंद लोगों की स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच प्रभावित हो सकती है।

युद्धविराम के बीच फिर दहला गाजा इस्राइली हवाई हमलों में दो मासूम समेत आठ की मौत कई घायल

नई दिल्ली। गाजा पट्टी में युद्धविराम लागू होने के बावजूद हिंसा थमने का नाम नहीं ले रही है। सोमवार को इस्राइल ने दक्षिणी और मध्य गाजा के कई इलाकों में हवाई हमले किए जिनमें दो बच्चों समेत कम से कम आठ लोगों की मौत हो गई जबकि 20 से अधिक लोग घायल हो गए। स्थानीय स्वास्थ्य अधिकारियों और राहत एजेंसियों के अनुसार घायलों का विभिन्न अस्पतालों में इलाज जारी है। सबसे बड़ा हमला दक्षिणी गाजा के खान यूनिस स्थित अल मवासी इलाके में हुआ जहां विस्थापित लोगों के तंबू को निशाना बनाया गया। इस हमले में 23 वर्षीय महिला और उसकी एक साल की बेटी की मौत हो गई। अस्पताल प्रशासन के मुताबिक हमले से पहले इलाके में चेतावनी जारी की गई थी। इसी क्षेत्र के करारा कस्बे में हुए एक अन्य हवाई हमले में 31 वर्षीय व्यक्ति की जान चली गई जिसकी कुछ महीने पहले ही शादी हुई थी और उसकी पत्नी गर्भवती है। खान यूनिस के तटीय क्षेत्र में विस्थापित लोगों के तंबुओं पर हुए एक अन्य हमले में दो लोगों की मौत हो गई जबकि 13 अन्य घायल हो गए। घायलों को फलस्तीनी रेड क्रिसेंट द्वारा संचालित फील्ड अस्पताल में भर्ती कराया गया है जहां उनका उपचार चल रहा है। मध्य गाजा के दीर अल बलाह में ड्रोन हमले में तीन फलस्तीनियों की मौत हुई। मृतकों में आठ वर्षीय एक बच्चा उसका दादा और एक अन्य व्यक्ति शामिल हैं। अस्पताल अधिकारियों के अनुसार बच्चा अपनी घायल मां से मिलने आया था और हमले में उसकी मां भी घायल हो गई। इस्राइली सेना ने कहा कि यह हमला एक उग्रवादी को निशाना बनाकर किया गया था लेकिन उसने न तो उस व्यक्ति की पहचान बताई और न ही उसके मारे जाने की पुष्टि की। युद्धविराम लागू होने के बाद बड़े स्तर पर लड़ाई भले कम हुई हो लेकिन गाजा में लगभग रोजाना हवाई हमले जारी हैं। गाजा के स्वास्थ्य मंत्रालय का दावा है कि युद्धविराम लागू होने के बाद से अब तक 1045 फलस्तीनियों की मौत हो चुकी है जिनमें 360 से अधिक महिलाएं और बच्चे शामिल हैं। वहीं इस्राइल का कहना है कि उसकी सैन्य कार्रवाई केवल उन उग्रवादियों के खिलाफ है जो उसके सैनिकों पर हमले की तैयारी कर रहे थे। इस्राइली सेना के अनुसार युद्धविराम के बाद उग्रवादी हमलों में उसके पांच सैनिक भी मारे गए हैं। गाजा के स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक अक्टूबर 2023 में शुरू हुए युद्ध के बाद अब तक 73 हजार से अधिक फलस्तीनियों की मौत हो चुकी है। दूसरी ओर इस्राइल का कहना है कि सात अक्टूबर 2023 को हमास के हमले में करीब 1200 लोगों की जान गई थी और 251 लोगों को बंधक बनाया गया था। उधर वेस्ट बैंक में भी तनाव बना हुआ है। रामल्लाह के पास इस्राइली सेना की छापेमारी के दौरान 15 वर्षीय एक फलस्तीनी किशोर के सिर में गोली लगने से मौत हो गई। संयुक्त राष्ट्र के मानवीय मामलों के समन्वय कार्यालय के अनुसार इस वर्ष वेस्ट बैंक में इस्राइली सैनिकों और बसने वालों की कार्रवाई में कम से कम 59 फलस्तीनियों की जान जा चुकी है।

वर्ल्ड कप में मिली मायूसी ओलंपिक से आई बड़ी खुशखबरी भारतीय महिला टीम ने LA28 के लिए किया क्वालिफाई

नई दिल्ली। आईसीसी महिला टी20 वर्ल्ड कप 2026 में भारतीय महिला क्रिकेट टीम का अभियान उम्मीदों के मुताबिक नहीं रहा और टीम ग्रुप चरण से ही बाहर हो गई। हालांकि इस निराशा के बीच हरमनप्रीत कौर की अगुवाई वाली टीम के लिए बड़ी खुशखबरी सामने आई है। भारत ने लॉस एंजेलिस ओलंपिक 2028 के लिए क्वालिफाई कर लिया है और अब पहली बार ओलंपिक क्रिकेट में पदक जीतने का सपना साकार करने का मौका मिलेगा। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद ने क्रिकेट की 128 साल बाद ओलंपिक में वापसी के लिए क्वालिफिकेशन प्रक्रिया का एलान कर दिया है। इसी के साथ महिला क्रिकेट की पहली चार क्वालिफाई करने वाली टीमों के नाम भी तय हो गए हैं जिनमें भारत भी शामिल है। भारत को एशिया का एकमात्र सीधा कोटा मिला क्योंकि टी20 वर्ल्ड कप में हिस्सा लेने वाली एशियाई टीमों में उसका प्रदर्शन सबसे बेहतर रहा। आईसीसी के नए नियमों के अनुसार अफ्रीका एशिया यूरोप और ओशिनिया से एक एक टीम को सीधे ओलंपिक का टिकट दिया गया है। इसी आधार पर भारत एशिया से ऑस्ट्रेलिया ओशिनिया से दक्षिण अफ्रीका अफ्रीका से और ग्रेट ब्रिटेन यूरोप से लॉस एंजेलिस ओलंपिक 2028 के लिए क्वालिफाई करने वाली पहली चार टीमें बन गई हैं। छह टीमों वाले महिला क्रिकेट टूर्नामेंट में पांचवां स्थान मेजबान अमेरिका को मिल सकता है। इसके लिए अमेरिका को इस साल के अंत तक आईसीसी महिला टी20 रैंकिंग में शीर्ष 15 में जगह बनानी होगी। यदि ऐसा नहीं होता है तो यह स्थान आईसीसी रैंकिंग में सबसे ऊंची रैंकिंग वाली गैर क्वालिफाई टीम को मिलेगा। वहीं छठी और अंतिम टीम का फैसला 2027 में होने वाले आईसीसी ओलंपिक क्वालिफायर से होगा जिसमें आठ टीमें हिस्सा लेंगी। आईसीसी ने वेस्टइंडीज को लेकर भी स्थिति स्पष्ट कर दी है। चूंकि ओलंपिक में अलग अलग देशों का प्रतिनिधित्व होता है इसलिए यदि वेस्टइंडीज पात्र होता है तो कैरेबियाई देशों के बीच अलग क्वालिफाइंग प्रतियोगिता आयोजित की जाएगी। पुरुष क्रिकेट स्पर्धा के लिए भी छह टीमें हिस्सा लेंगी। इनमें से चार महाद्वीपों की शीर्ष रैंकिंग वाली टीमें सीधे क्वालिफाई करेंगी जबकि मेजबान अमेरिका के लिए भी विशेष प्रावधान रखा गया है। यदि अमेरिका निर्धारित अवधि में शीर्ष 15 रैंकिंग में जगह नहीं बना पाता है तो उसका स्थान किसी अन्य पात्र टीम को दिया जाएगा। आईसीसी चेयरमैन जय शाह ने क्रिकेट की ओलंपिक में वापसी को ऐतिहासिक अवसर बताया है। उनके अनुसार यह फैसला दुनिया भर में क्रिकेट के विस्तार और नए देशों तक इस खेल को पहुंचाने में अहम भूमिका निभाएगा। वहीं आईसीसी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी संजोग गुप्ता का कहना है कि नया क्वालिफिकेशन मॉडल प्रतिस्पर्धा और वैश्विक प्रतिनिधित्व के बीच बेहतर संतुलन स्थापित करता है। गौरतलब है कि क्रिकेट आखिरी बार 1900 के पेरिस ओलंपिक का हिस्सा था। अब 128 साल बाद लॉस एंजेलिस ओलंपिक 2028 में क्रिकेट की वापसी होगी। महिला और पुरुष दोनों वर्गों में छह छह टीमें हिस्सा लेंगी और पहली बार क्रिकेट में ओलंपिक पदक के लिए मुकाबला होगा।

जीत के साथ विदाई का सपना टूटा बेन स्टोक्स का आखिरी मैच हारा इंग्लैंड न्यूजीलैंड ने सीरीज पर किया कब्जा

नई दिल्ली। इंग्लैंड के महान ऑलराउंडर बेन स्टोक्स का अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट करियर यादगार जीत के बजाय निराशाजनक हार के साथ समाप्त हुआ। नॉटिंघम के ट्रेंट ब्रिज मैदान पर खेले गए तीसरे और निर्णायक टेस्ट मैच में न्यूजीलैंड ने इंग्लैंड को 160 रन से हराकर तीन मैचों की टेस्ट सीरीज 2-1 से अपने नाम कर ली। इस जीत के साथ न्यूजीलैंड ने एक बार फिर इंग्लैंड की धरती पर शानदार प्रदर्शन करते हुए टेस्ट सीरीज जीतने का कारनामा दोहराया। मैच में इंग्लैंड के सामने 373 रन का कठिन लक्ष्य था। पांचवें दिन टीम ने 103 रन पर चार विकेट से आगे खेलना शुरू किया लेकिन न्यूजीलैंड के गेंदबाजों ने लगातार दबाव बनाए रखा। इंग्लिश बल्लेबाज बड़ी साझेदारी नहीं कर सके और पूरी टीम 212 रन पर सिमट गई। लंच के कुछ देर बाद ही मुकाबला समाप्त हो गया और न्यूजीलैंड ने 160 रन की बड़ी जीत दर्ज कर ली। यह मुकाबला बेन स्टोक्स के अंतरराष्ट्रीय करियर का आखिरी मैच था। चौथे दिन उन्होंने संन्यास की घोषणा की थी और इंग्लैंड के प्रशंसकों को उम्मीद थी कि टीम अपने कप्तान को जीत के साथ विदाई देगी। हालांकि ऐसा नहीं हो सका। दूसरी पारी में स्टोक्स ने ओपनिंग करते हुए 30 रन बनाए लेकिन वह टीम को जीत तक नहीं पहुंचा सके। 35 वर्षीय बेन स्टोक्स ने लगभग 15 वर्षों तक इंग्लैंड का प्रतिनिधित्व किया और पिछले चार वर्षों से टेस्ट टीम की कप्तानी संभाली। अपने करियर के दौरान उन्होंने कई ऐतिहासिक पारियां खेलीं और कठिन मौकों पर टीम को जीत दिलाई लेकिन उनका आखिरी मुकाबला हार के साथ समाप्त हुआ। यह हार इंग्लैंड के लिए कई मायनों में चिंता बढ़ाने वाली है। साल 2012 के बाद पहली बार टीम अपने घरेलू मैदान पर तीन या उससे अधिक मैचों की टेस्ट सीरीज हार गई। इतना ही नहीं इंग्लैंड ने अपने पिछले नौ टेस्ट मैचों में सातवीं हार झेली है। लगातार खराब प्रदर्शन के बाद टीम प्रबंधन और कोचिंग स्टाफ पर भी सवाल उठने लगे हैं। दूसरी ओर टॉम लैथम की कप्तानी में न्यूजीलैंड ने शानदार खेल का प्रदर्शन किया। बल्लेबाजों ने पहली पारी में मजबूत स्कोर खड़ा किया जबकि गेंदबाजों ने दूसरी पारी में इंग्लैंड के बल्लेबाजी क्रम को पूरी तरह बिखेर दिया। इस जीत के साथ न्यूजीलैंड ने सीरीज अपने नाम करते हुए बेन स्टोक्स की विदाई को फीका कर दिया।

VIRAL HELICOPTER WEDDING: सीधे आसमान से निचे उतरी दुल्हन, हेलीकॉप्टर से हुई दुल्हन की शानदार विदाई; VIRAL VIDEO

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VIRAL HELICOPTER WEDDING: भिंड। लहार में इन दिनों एक शादी काफी चर्चा में हैं, लेकिन शादी समारोह के वजह से नहीं बल्कि दुल्हन की विदाई की वजह से। चूँकि यहां के स्थानीय निवासी डॉ. मनीष चंदेल अपनी दुल्हन को ग्वालियर से हेलीकॉप्टर में विदा कराकर सीधे लहार लेकर पहुंचे। बताया जा रहा है कि लहार के इतिहास में यह पहला मौका है, जब किसी दूल्हे ने अपनी दुल्हन को हेलीकॉप्टर से घर लाकर शादी की विदाई को यादगार बना दिया। MP को मिली दो सोलर प्रोजेक्ट की सौगात…, नीमच में मिलेगी दुनिया की सबसे सस्ती ₹2.14 में बिजली हेलीकाप्टर देखने लगा लोगों का जमावड़ा पूरा मामला भिंड के लहार का बताया जा रहा है। इस विदाई को देखने के लिए के लिए उमड़ पड़ी। इस दौरान लोग हेलीकॉप्टर के साथ दूल्हा और दुल्हन के साथ सेल्फी लेते दिखाई दिए। लोगों का कहना है कि हमने कभी भी अपने क्षेत्र में इस तरह की हेलीकॉप्टर वाली विदाई नहीं देखी। दूल्हे डॉ. मनीष चंदेल ने बताया कि उनका सपना था कि उनकी शादी की विदाई शाही अंदाज में हो। इसी वजह से उन्होंने हेलीकॉप्टर से दुल्हन को घर लाने का फैसला किया। इसके लिए उन्होंने अच्छा-खासा खर्च भी किया, लेकिन उनका कहना है कि जिंदगी के इस खास दिन को हमेशा के लिए यादगार बनाना उनकी पहली दिली ख्वाहिश थी। 100 साल में तीसरा सबसे सूखा रहा जून…. अल नीनो के असर से देश में बारिश में 42% की कमी फूल-मालाओं और बैंड-बाजे से हुआ स्वागत हेलीकॉप्टर के उतरते ही परिजनों और रिश्तेदारों ने नवदंपति का फूल-मालाओं, बैंड-बाजे और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ जोरदार स्वागत किया। पूरे इलाके में उत्सव जैसा माहौल बन गया। आसमान से दुल्हन के आने का यह अनोखा नजारा देख लोग बहुत ज्यादा खुश नजर आए। MP Monsoon: एमपी में फिर एक्टिव हुआ मानसून, 40 से ज्यादा शहरों में बारिश का यलो अलर्ट! पूरे इलाके में बनी चर्चा इस अनोखी शादी और हेलीकॉप्टर से हुई विदाई की चर्चा अब पूरे चंबल अंचल में हो रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि उन्होंने पहली बार अपने क्षेत्र में इस तरह की शाही विदाई देखी है। यही वजह है कि यह शादी अब सोशल मीडिया पर भी लोगों का ध्यान खींच रही है।

नकली दवाओं पर सरकार का सबसे बड़ा वार अब फैक्ट्री से मरीज तक हर दवा की होगी लाइव ट्रैकिंग

नई दिल्ली। देश में नकली और घटिया दवाओं की समस्या लंबे समय से मरीजों और स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई है। कई बार मरीज महंगी दवा खरीदने के बाद भी सही इलाज से वंचित रह जाते हैं क्योंकि बाजार में असली दवा की जगह नकली या मिलावटी दवा पहुंच जाती है। इसी खतरे को कम करने के लिए केंद्र सरकार ने दवा निगरानी व्यवस्था में बड़ा बदलाव किया है। अब कई महत्वपूर्ण दवाओं और टीकों पर क्यूआर कोड या बारकोड लगाना अनिवार्य होगा ताकि फैक्ट्री से लेकर मरीज तक हर दवा की पूरी यात्रा डिजिटल रूप से दर्ज हो सके। सरकार ने औषधि नियम 1945 में संशोधन करते हुए इस नई व्यवस्था का दायरा पहले से काफी बड़ा कर दिया है। पहले केवल देश के शीर्ष 300 दवा ब्रांड इस नियम के दायरे में आते थे लेकिन अब सभी वैक्सीन एंटीबायोटिक एंटीवायरल कैंसर रोधी दवाएं और एनडीपीएस कानून के तहत आने वाली मादक दवाओं को भी इस डिजिटल ट्रैकिंग सिस्टम से जोड़ा जाएगा। इसका उद्देश्य दवा की पूरी सप्लाई चेन को पारदर्शी बनाना और मरीजों को सुरक्षित दवा उपलब्ध कराना है। नए नियम के तहत दवा बनाने वाली कंपनियों को हर दवा की पैकेजिंग पर क्यूआर कोड या बारकोड देना अनिवार्य होगा। यदि प्राथमिक पैक पर पर्याप्त जगह नहीं होगी तो यह कोड अंदर या बाहरी पैकेजिंग पर लगाया जा सकेगा। उपभोक्ता अपने मोबाइल से इस कोड को स्कैन करके दवा का ब्रांड नाम जेनेरिक नाम निर्माता का नाम बैच नंबर निर्माण तिथि एक्सपायरी डेट लाइसेंस नंबर और यूनिक पहचान संख्या जैसी महत्वपूर्ण जानकारी तुरंत देख सकेंगे। इससे ग्राहक खुद भी दवा की असलियत की जांच कर सकेंगे। पूरी व्यवस्था ट्रैक एंड ट्रेस तकनीक पर आधारित होगी। दवा बनने के बाद वह किस वितरक के पास गई किस थोक व्यापारी के जरिए मेडिकल स्टोर तक पहुंची और आखिर किस स्थान पर बेची गई इसकी पूरी जानकारी डिजिटल प्लेटफॉर्म पर दर्ज रहेगी। यदि सप्लाई चेन के किसी भी स्तर पर दवा से छेड़छाड़ होती है या नकली दवा बाजार में उतारने की कोशिश की जाती है तो सिस्टम तुरंत उसकी पहचान कर सकेगा। इससे जांच एजेंसियों को गड़बड़ी का स्रोत खोजने में काफी आसानी होगी। नई व्यवस्था का सबसे बड़ा लाभ नकली दवाओं के कारोबार पर सख्त रोक के रूप में सामने आएगा। कई मामलों में महंगी दवाओं की खाली शीशियों या डिब्बों में सस्ती दवा भरकर दोबारा बाजार में बेच दी जाती थी। अब प्रत्येक पैक का अलग यूनिक कोड होगा जिसे दोबारा इस्तेमाल नहीं किया जा सकेगा। यदि कोई पहले इस्तेमाल किए गए कोड को फिर से सक्रिय करने की कोशिश करेगा तो सिस्टम तुरंत अलर्ट जारी करेगा और संदिग्ध दवा की पहचान हो जाएगी। यह प्रणाली दवा रिकॉल प्रक्रिया को भी तेज बनाएगी। यदि किसी बैच में गुणवत्ता संबंधी कमी या मिलावट सामने आती है तो अधिकारी तुरंत पता लगा सकेंगे कि वह बैच किन राज्यों किन अस्पतालों या किन मेडिकल स्टोर तक पहुंचा है। इससे खराब दवाओं को मरीजों तक पहुंचने से पहले ही वापस मंगाया जा सकेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम एंटीबायोटिक प्रतिरोध जैसी गंभीर समस्या से लड़ने में भी मदद करेगा क्योंकि नकली दवाओं के कारण कई बार मरीजों को पूरी और प्रभावी खुराक नहीं मिल पाती। वहीं नशीली दवाओं की डिजिटल निगरानी से इनके अवैध कारोबार और दुरुपयोग पर भी नियंत्रण मजबूत होगा। यदि सरकार उद्योग और सप्लाई चेन से जुड़े सभी पक्षों के सहयोग से इस व्यवस्था को प्रभावी ढंग से लागू करने में सफल रहती है तो आने वाले समय में भारत की दवा व्यवस्था पहले से कहीं अधिक सुरक्षित पारदर्शी और भरोसेमंद बन सकती है।

100 साल में तीसरा सबसे सूखा रहा जून…. अल नीनो के असर से देश में बारिश में 42% की कमी

नई दिल्ली। भारत (India) में इस साल जून (June) का महीना पिछले 100 सालों में तीसरा सबसे सूखा जून (Third-driest June) साबित होने जा रहा है। महीने के खत्म होने में सिर्फ एक दिन बचा है और देशभर में बारिश में 42% की भारी कमी दर्ज की गई है। यह आंकड़ा इस बात का सीधा संकेत है कि भारत में मॉनसून (Monsoon) को कमजोर करने में ‘अल नीनो’ (‘El Niño’) का प्रभाव शुरू हो चुका है। आंकड़ों में समझें सूखे की स्थितिदेशभर में अब तक जून महीने में औसतन 92.2 मिमी बारिश दर्ज की गई है, जबकि सामान्य बारिश का आंकड़ा 157.7 मिमी होना चाहिए। अगर महीने के आखिरी दिन यानी मंगलवार को अच्छी बारिश हो भी जाती है, तो भी जून में कुल बारिश 100 मिमी के आसपास ही रहने का अनुमान है। पिछले 100 वर्षों (1927-2026) के इतिहास में, जून में इससे कम बारिश केवल दो बार हुई है- साल 2009 में (87.5 मिमी) और 2014 में (92.1 मिमी)। ये दोनों ही वर्ष पिछले दो दशकों के भीतर के हैं। 4 जून को केरल में मॉनसून की कमजोर दस्तक के बाद से अब तक यह जोर नहीं पकड़ सका है। पूरे जून के दौरान देशभर में केवल एक ही दिन ऐसा रहा, जब रोजाना होने वाली बारिश का आंकड़ा सामान्य से अधिक दर्ज किया गया हो। मध्य भारत में सबसे ज्यादा बुरा हालदेश के सभी चार प्रमुख क्षेत्रों में बारिश की इतनी बड़ी कमी दर्ज होना एक दुर्लभ घटना है, जो अल नीनो के प्रभाव की ओर इशारा कर रही है। मध्य भारत के हालात सबसे ज्यादा खराब हैं और बारिश में 54% की कमी दर्ज की गई है। पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत में सामान्य से 41% कम बारिश हुई है। उत्तर-पश्चिम भारत क्षेत्र में बारिश में 30% की कमी रही। दक्षिण भारत में 28% कम बारिश रिकॉर्ड की गई है। अल नीनो का बढ़ता असर और जुलाई से उम्मीदेंअल नीनो मध्य और पूर्वी प्रशांत महासागर में सतह के पानी के गर्म होने की एक प्रक्रिया है, जिसका असर दुनिया भर के मौसम और विशेषकर भारतीय मॉनसून पर पड़ता है। अमेरिकी एजेंसी ‘इंटरनेशनल रिसर्च इंस्टीट्यूट फॉर क्लाइमेट एंड सोसाइटी’ ने पिछले हफ्ते अपने एक अपडेट में बताया था कि भूमध्यरेखीय प्रशांत क्षेत्र में तेजी से बढ़ रहे तापमान के बीच अल नीनो ‘मध्यम ताकत’ तक पहुंचने के करीब है। अगले कुछ महीनों में इसके और मजबूत होने का अनुमान है, जिससे भारतीय मानसून पर असर पड़ने की आशंका बढ़ गई है। हालांकि, इन सबके बीच एक राहत भरी खबर भी है। मौसम विभाग (IMD) के अनुमानों के मुताबिक, जुलाई के पहले हफ्ते में देश के ज्यादातर हिस्सों में अच्छी और व्यापक बारिश होने की उम्मीद है। इसका सबसे ज्यादा फायदा मध्य भारत को मिल सकता है, जहां अब तक बारिश की सबसे ज्यादा कमी रही है।

MP को मिली दो सोलर प्रोजेक्ट की सौगात…, नीमच में मिलेगी दुनिया की सबसे सस्ती ₹2.14 में बिजली

नीमच/शाजापुर। केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी (Union Minister Pralhad Joshi) ने मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) में कुल 950 मेगावाट क्षमता वाली दो सोलर पावर परियोजनाओं (Two Solar Power Projects) का उद्घाटन किया. उन्होंने कहा कि नीमच सोलर पार्क का टैरिफ 2.14 रुपये प्रति यूनिट है, जो शायद दुनिया में किसी ‘वैनिला सोलर’ प्रोजेक्ट के लिए सबसे कम है। एनर्जी सेक्टर में ‘वैनिला सोलर’ शब्द का इस्तेमाल आमतौर पर उन सोलर पावर प्रोजेक्ट्स के लिए किया जाता है जो सिर्फ सोलर पैनल से बिजली बनाते हैं और जिनमें बैटरी स्टोरेज जैसी अतिरिक्त सुविधाएं नहीं होती हैं। जोशी ने एक भव्य समारोह में रिन्यूएबल एनर्जी प्रोजेक्ट्स नीमच में 500 मेगावाट का सोलर पार्क और शाजापुर में 450 मेगावाट का सोलर पार्क का उद्घाटन किया. इस मौके पर राज्य के मुख्यमंत्री मोहन यादव भी मौजूद थे। नीमच सोलर पार्क में बनने वाली बिजली का टैरिफ 2.14 रुपये, 2.149 रुपये और 2.15 रुपये प्रति यूनिट है. यह पार्क तीन यूनिट में फैला है और कुल 2500 एकड़ जमीन पर बना है. उन्होंने कहा कि यह प्रोजेक्ट भारतीय रेलवे और राज्य ग्रिड को साफ-सुथरी बिजली सप्लाई करेगा। उद्घाटन समारोह में बोलते हुए नए और रिन्यूएबल एनर्जी मंत्री जोशी ने कहा, “नीमच सोलर पार्क में बहुत अच्छा काम हुआ है. जहां तक मुझे पता है, 2.14 रुपये प्रति यूनिट का टैरिफ शायद वैनिला सोलर प्रोजेक्ट से बनने वाली बिजली के लिए सबसे कम है – न सिर्फ देश में, बल्कि पूरी दुनिया में.” उन्होंने रिन्यूएबल एनर्जी के क्षेत्र में राज्य सरकार की कोशिशों की तारीफ़ की और कहा कि मध्य प्रदेश एक ‘ग्रीन एनर्जी पावरहाउस’ बन रहा है। जोशी ने कहा कि राज्य की कुल 38 गीगावाट बिजली उत्पादन क्षमता में से लगभग 12 गीगावाट क्षमता रिन्यूएबल एनर्जी स्रोतों पर आधारित है. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उम्मीदों के अनुसार, राज्य की कुल बिजली उत्पादन क्षमता में रिन्यूएबल एनर्जी की हिस्सेदारी कम से कम 50 प्रतिशत होनी चाहिए. केंद्र सरकार की स्टडीज़ के अनुसार, राज्य में लगभग 55 गीगावाट विंड एनर्जी पैदा करने की क्षमता है। उन्होंने कहा कि अभी राज्य में 3.7 गीगावाट विंड एनर्जी क्षमता लगी हुई है और 1.3 गीगावाट क्षमता वाले प्रोजेक्ट्स पर काम चल रहा है. जोशी ने कहा, “अगर अगले दो सालों के लिए लक्ष्य तय करके राज्य में पवन ऊर्जा उत्पादन को कम से कम 10 गीगावाट तक बढ़ाया जाता है, तो बिजली की लागत काफी कम हो जाएगी. इससे राज्य के किसानों और उद्योगों को फायदा होगा और नए औद्योगिक निवेश को बढ़ावा मिलेगा.” केंद्रीय मंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि राज्य की हर सरकारी इमारत में सोलर पावर प्रोजेक्ट होना चाहिए. इस कार्यक्रम में जोशी और मुख्यमंत्री यादव ने लगभग 1554 करोड़ रुपये के प्रस्तावित निवेश वाले 38 औद्योगिक प्रोजेक्ट्स का शिलान्यास और उद्घाटन भी किया. अधिकारियों ने बताया कि इन प्रोजेक्ट्स से 3200 से ज्यादा लोगों को सीधे रोजगार मिलेगा।

टमाटर-प्याज-आलू की कीमतों में भारी इजाफा…. बिगड़ा रसोई का बजट

नई दिल्ली। अगर आपको पिछले कुछ दिनों से सब्जी मंडी (Vegetable Market) में टमाटर, प्याज और आलू पहले से महंगे नजर आ रहे हैं, तो यह सिर्फ आपका भ्रम नहीं है। देशभर में इन तीनों जरूरी सब्जियों की कीमतों (Vegetable prices) में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। इससे एक बार फिर खाने-पीने की चीजों की महंगाई यानी फूड इंफ्लेशन (Food inflation) बढ़ने की आशंका पैदा हो गई है। उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय के ताजा आंकड़ों के अनुसार, पिछले एक महीने में टमाटर की औसत खुदरा कीमत में करीब 18 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, प्याज लगभग 11 प्रतिशत और आलू करीब 1.3 प्रतिशत महंगा हुआ है। ये तीनों सब्जियां भारतीय रसोई का अहम हिस्सा हैं और उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) में इनका संयुक्त योगदान करीब 1.75 प्रतिशत है। इसलिए इनके दाम बढ़ने का सीधा असर महंगाई के आंकड़ों पर भी पड़ सकता है। अगर पिछले साल की तुलना करें तो टमाटर की कीमत करीब 25 प्रतिशत अधिक हो चुकी है, जबकि प्याज लगभग 3.3 प्रतिशत महंगा है। हालांकि, आलू अभी भी पिछले साल के मुकाबले करीब 17 प्रतिशत सस्ता है, लेकिन हाल के दिनों में इसकी कीमतों में भी तेजी देखने को मिली है। 50% तक बढ़ीं टमाटर की कीमतेंएक रिपोर्ट के मुताबिक, सबसे ज्यादा असर टमाटर पर देखने को मिला है। उत्तर प्रदेश, बिहार और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में टमाटर की कीमतें 50 प्रतिशत तक बढ़ गई हैं। वहीं राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में टमाटर लगभग दोगुना महंगा हो गया है। इसकी सबसे बड़ी वजह भीषण गर्मी को माना जा रहा है। अत्यधिक तापमान के कारण टमाटर की फसल प्रभावित हुई, जिससे उत्पादन कम हो गया। इसके अलावा गर्म मौसम में लंबी दूरी तक टमाटर की ढुलाई भी मुश्किल हो गई, क्योंकि फल जल्दी पककर खराब होने लगे। दिल्ली की आजादपुर मंडी के व्यापारियों के अनुसार, राजस्थान और हरियाणा से आने वाली टमाटर की आवक में काफी कमी आई है। इसका सीधा असर राजधानी समेत उत्तर भारत के कई शहरों में कीमतों पर पड़ा है। प्याज की कीमतों में भी तेजीप्याज की कीमतों में भी तेजी देखने को मिल रही है। कई राज्यों में प्याज 10 से 20 प्रतिशत तक महंगा हो गया है। विशेषज्ञों का कहना है कि बेमौसम बारिश के कारण प्याज की गुणवत्ता और भंडारण क्षमता प्रभावित हुई, जिससे बाजार में अच्छी गुणवत्ता वाला प्याज कम पहुंच रहा है। एक्सपर्ट बताते हैं कि मानसून के दौरान टमाटर और प्याज की कीमतों में उतार-चढ़ाव सामान्य बात है। लेकिन इस बार एल-नीनो के प्रभाव, भीषण गर्मी और मानसून में देरी ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है। अगर आने वाले दिनों में बारिश सामान्य नहीं रही या आपूर्ति में और कमी आई, तो कीमतें और बढ़ सकती हैं। महंगाई के बढ़ते दबाव के बीच आम लोगों की रसोई का बजट फिर बिगड़ सकता है। खासकर मध्यम वर्ग और गरीब परिवारों पर इसका सबसे ज्यादा असर पड़ने की आशंका है। अगर टमाटर, प्याज और आलू की कीमतें लंबे समय तक ऊंची बनी रहती हैं, तो आने वाले महीनों में फूड इंफ्लेशन के आंकड़ों में भी तेजी देखने को मिल सकती है। फिलहाल, उपभोक्ताओं की नजर इस बात पर है कि मानसून की रफ्तार और सरकारी कदम इन बढ़ती कीमतों पर कितना असर डाल पाते हैं।