Chambalkichugli.com

राजनाथ सिंह के खिलाफ विशेषाधिकार नोटिस की मांग, कांग्रेस-सरकार आमने-सामने..

नई दिल्ली । ऑपरेशन सिंदूर को लेकर संसद में दिए गए बयान पर सियासी विवाद और तेज हो गया है। कांग्रेस ने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के खिलाफ विशेषाधिकार हनन की कार्यवाही शुरू करने की मांग करते हुए लोकसभा अध्यक्ष को नोटिस सौंपा है। विपक्ष का आरोप है कि ऑपरेशन के दौरान हुए सैन्य नुकसान को लेकर सदन में दी गई जानकारी वास्तविक तथ्यों से मेल नहीं खाती, जबकि सरकार ने इन आरोपों को पूरी तरह भ्रामक और संदर्भ से हटाकर पेश किया गया बताया है। कांग्रेस सांसद के.सी. वेणुगोपाल ने लोकसभा अध्यक्ष को भेजे पत्र में आरोप लगाया है कि रक्षा मंत्री ने ऑपरेशन सिंदूर पर चर्चा के दौरान ऐसा बयान दिया, जिससे यह संदेश गया कि अभियान में कोई भारतीय सैनिक शहीद नहीं हुआ। उनका कहना है कि बाद में आधिकारिक जानकारी में छह सैन्यकर्मियों के शहीद होने की पुष्टि हुई, जिससे संसद में दिए गए बयान पर सवाल खड़े होते हैं। कांग्रेस का कहना है कि यदि सदन के समक्ष तथ्यों से अलग जानकारी प्रस्तुत की गई है तो यह संसदीय परंपराओं और विशेषाधिकारों का गंभीर मामला है। पार्टी ने इसे संसद को गुमराह करने का मामला बताते हुए नियमों के तहत विशेषाधिकार हनन की कार्यवाही शुरू करने की मांग की है। विपक्ष का तर्क है कि राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे संवेदनशील विषयों पर संसद को सटीक और पूर्ण जानकारी दी जानी चाहिए। इस पूरे विवाद के केंद्र में ऑपरेशन सिंदूर के दौरान हुए सैन्य नुकसान को लेकर अलग-अलग व्याख्याएं हैं। कांग्रेस का दावा है कि बाद में सार्वजनिक हुई आधिकारिक जानकारी में पांच सेना के जवानों और एक वायुसेना कर्मी के शहीद होने की पुष्टि हुई। विपक्ष का कहना है कि यदि यह तथ्य पहले से उपलब्ध थे, तो संसद में उनका उल्लेख न होना गंभीर प्रश्न खड़े करता है। दूसरी ओर, रक्षा मंत्रालय ने कांग्रेस के आरोपों को सिरे से खारिज किया है। मंत्रालय का कहना है कि रक्षा मंत्री के भाषण के एक हिस्से को संदर्भ से अलग करके प्रस्तुत किया जा रहा है। सरकार के अनुसार, मंत्री का बयान उन दावों के जवाब में था जिनमें अभियान के दौरान भारतीय वायुसेना के पायलटों के मारे जाने की बात कही जा रही थी। मंत्रालय का कहना है कि पूरे भाषण को देखने पर स्पष्ट हो जाता है कि उनके वक्तव्य का आशय अलग था और उसे गलत तरीके से प्रस्तुत किया गया। यह विवाद ऐसे समय सामने आया है जब हाल ही में राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पर ऑपरेशन सिंदूर के दौरान शहीद हुए छह सैन्यकर्मियों के नाम शामिल किए गए। इसके बाद अभियान के दौरान हुए सैन्य बलिदान को लेकर राजनीतिक बहस और तेज हो गई है। विपक्ष इसे अपने आरोपों के समर्थन में प्रस्तुत कर रहा है, जबकि सरकार का कहना है कि शहीदों के सम्मान और अभियान से जुड़े तथ्यों को राजनीतिक विवाद का विषय नहीं बनाया जाना चाहिए। संसदीय मामलों के जानकारों के अनुसार, विशेषाधिकार हनन का नोटिस स्वीकार करना या नहीं करना पूरी तरह लोकसभा अध्यक्ष के अधिकार क्षेत्र में आता है। यदि प्रथम दृष्टया मामला बनता है तो आगे की संसदीय प्रक्रिया शुरू हो सकती है। फिलहाल इस मुद्दे पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बयानबाजी जारी है। ऑपरेशन सिंदूर को लेकर शुरू हुआ यह विवाद अब केवल सैन्य अभियान तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि संसद में दिए गए बयानों की विश्वसनीयता, संसदीय जवाबदेही और राजनीतिक पारदर्शिता पर भी चर्चा का विषय बन गया है। आने वाले दिनों में लोकसभा अध्यक्ष के निर्णय और सरकार की आगे की प्रतिक्रिया पर सभी की नजरें टिकी रहेंगी।

सनसनीखेज हत्याकांड के बाद लोहगढ़ फोर्ट में उमड़ी पर्यटकों की अनियंत्रित भीड़, ऐतिहासिक स्थलों के बदलते स्वरूप पर उठे गंभीर सवाल

नई दिल्ली । महाराष्ट्र के पुणे के निकट स्थित ऐतिहासिक लोहगढ़ किला इन दिनों अपनी गौरवशाली सैन्य विरासत और छत्रपति शिवाजी महाराज व पेशवाओं के शौर्य इतिहास के बजाय एक बेहद विचलित करने वाली वजह से देश भर में चर्चा का विषय बन गया है। हाल ही में इस किले में घटित हुए केतन अग्रवाल हत्याकांड के बाद से यहाँ आने वाले पर्यटकों की संख्या में अप्रत्याशित बढ़ोतरी दर्ज की गई है। चौंकाने वाली बात यह है कि किले में पहुँचने वाले इन नए पर्यटकों की रुचि इस ऐतिहासिक स्थल की वास्तुकला या इसके समृद्ध सांस्कृतिक अतीत को जानने में नहीं है, बल्कि वे उस विशिष्ट स्थान और गहरी खाई को देखने के लिए उत्सुक हैं जहाँ कथित तौर पर सिया गोयल ने अपने मंगेतर को धक्का देकर मौत के घाट उतार दिया था। स्थानीय स्तर पर और सोशल मीडिया पर इस त्रासदीपूर्ण स्थान को ‘सिया पॉइंट’ के रूप में प्रचारित किया जा रहा है, जिसने समाज के एक बड़े वर्ग को चिंता में डाल दिया है। इस घटना के बाद से लोहगढ़ किले में सप्ताहांत पर पर्यटकों की इतनी भारी भीड़ जमा हो रही है कि किले के संकरे रास्तों पर कई बार घंटों तक जाम की स्थिति बन जाती है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो और तस्वीरों से स्पष्ट है कि लोग उस खौफनाक मर्डर स्पॉट पर जाकर तस्वीरें खिंचवाने, सेल्फी लेने और रील बनाने की होड़ में लगे हैं। किसी अपराध स्थल या त्रासदी की जगह को एक पर्यटन स्थल के रूप में देखने की इस बढ़ती प्रवृत्ति को समाजशास्त्री और विशेषज्ञ ‘डार्क टूरिज्म’ (Dark Tourism) का नाम दे रहे हैं। जब लोग किसी ऐसी जगह की यात्रा करते हैं जिसका इतिहास या वर्तमान मृत्यु, विनाश, मानवीय त्रासदी या किसी जघन्य अपराध से जुड़ा हो, तो उसे इस श्रेणी में रखा जाता है। भारत में इस तरह का यह कोई पहला मामला नहीं है; इससे पहले मेघालय के चेरापूंजी में भी एक ऐसी ही पारिवारिक हत्या के बाद उस पहाड़ी को ‘सोनम पॉइंट’ कहा जाने लगा था और दिल्ली का कुख्यात बुराड़ी घर भी इसी तरह की उत्सुकता का केंद्र बना था। विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक स्तर पर डार्क टूरिज्म का एक ऐतिहासिक और गंभीर स्वरूप रहा है, जैसे पोलैंड का ऑशविट्ज़ प्रताड़ना शिविर या जलियांवाला बाग, जहाँ लोग इतिहास की त्रासदियों से सीख लेने, शोक संवेदना प्रकट करने और शहीदों को श्रद्धांजलि देने जाते हैं। इसके विपरीत, वर्तमान समय में सोशल मीडिया के प्रभाव के कारण जो नया डार्क टूरिज्म उभर रहा है, वह बेहद सतही और केवल सनसनीखेज मामलों से प्रेरित है। लोग केवल अपनी जिज्ञासा शांत करने और इंटरनेट पर डिजिटल सामग्री (रील्स और मीम्स) के माध्यम से व्यूज और लाइक्स बटोरने के लिए इन संवेदनशील और दर्दनाक स्थानों का रुख कर रहे हैं। किसी की असामयिक और क्रूर मौत को मनोरंजन या सोशल मीडिया कंटेंट का जरिया बना लेना एक बेहद खतरनाक सामाजिक बदलाव की ओर इशारा करता है। इस पूरे प्रकरण ने पुरातत्व विभाग, स्थानीय प्रशासन और इतिहासकारों के सामने भी एक नई चुनौती खड़ी कर दी है। सदियों पुराना लोहगढ़ किला, जो कभी मराठा साम्राज्य की सामरिक शक्ति का प्रतीक था और जहाँ लोग इतिहास की वीर गाथाओं को महसूस करने आते थे, उसकी पहचान को एक आपराधिक घटना के नाम पर री-ब्रांड करने की कोशिश की जा रही है। बुद्धिजीवियों का कहना है कि किसी ऐतिहासिक धरोहर के महत्व को इस तरह कमतर करना और उसे एक नकारात्मक छवि के साथ जोड़ना हमारी आने वाली पीढ़ियों के दृष्टिकोण को प्रभावित कर सकता है। प्रशासन के लिए भी इस प्रकार की अनियंत्रित और संवेदनहीन भीड़ को संभालना एक बड़ी कानून-व्यवस्था और सुरक्षा की समस्या बनता जा रहा है। लोहगढ़ किले की इस बदलती तस्वीर ने अंततः सामूहिक सामाजिक चेतना पर एक बड़ा सवालिया निशान लगा दिया है। चंद लाइक्स और कमेंट्स की चाहत में इंसानी संवेदनाओं और किसी परिवार के गहरे दुख का मजाक उड़ाने का यह चलन यह सोचने पर मजबूर करता है कि एक समाज के रूप में हम कितने असंवेदनशील होते जा रहे हैं। वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए यह आवश्यक हो गया है कि न केवल प्रशासन ऐसे संवेदनशील स्थलों पर रील बनाने और अनुचित फोटोग्राफी पर कड़े प्रतिबंध लगाए, बल्कि नागरिक समाज भी यह आत्मनिरीक्षण करे कि मनोरंजन और उत्सुकता की सीमा कहाँ समाप्त होनी चाहिए। किसी भी ऐतिहासिक स्थल की गरिमा को अक्षुण्ण रखना और मानवीय त्रासदियों के प्रति सम्मानजनक मौन बनाए रखना ही एक परिपक्व समाज की पहचान है।

ग्रहों के सेनापति और राजा बदलेंगे अपनी चाल, जगन्नाथ रथयात्रा और गुरु पूर्णिमा सहित जुलाई में सजेंगे महापर्व

नई दिल्ली । अंग्रेजी कैलेंडर के सातवें महीने जुलाई की शुरुआत के साथ ही भारतीय जनमानस में आध्यात्मिक और धार्मिक उत्सवों का एक नया दौर शुरू होने जा रहा है। इस वर्ष एक विशेष ज्योतिषीय और खगोलीय संयोग बन रहा है, जिसके तहत हिंदू पंचांग का पवित्र आषाढ़ मास लगभग पूरे जुलाई महीने में व्याप्त रहेगा। आषाढ़ महीने का प्रारंभ 30 जून से हो चुका है, जो आगामी 29 जुलाई तक अनवरत चलेगा। सनातन धर्म में आषाढ़ मास को विशेष तप, साधना और आत्मशुद्धि का समय माना गया है। यही कारण है कि इस पूरे महीने में देश भर में कई ऐतिहासिक और महत्वपूर्ण व्रत-त्योहार पूरी श्रद्धा के साथ मनाए जाएंगे, जिससे चारों ओर एक उत्सवमयी और आध्यात्मिक माहौल देखने को मिलेगा। मध्य प्रदेश । धार्मिक दृष्टि से इस महीने की सबसे बड़ी और महत्वपूर्ण घटना ‘चातुर्मास’ का प्रारंभ होना है। आगामी 25 जुलाई को देवशयनी एकादशी के पावन अवसर पर भगवान विष्णु चार महीनों के लिए योग निद्रा में चले जाएंगे, जिसके साथ ही चातुर्मास की शुरुआत हो जाएगी। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इन चार महीनों की अवधि में विवाह, मुंडन, यज्ञोपवीत और गृह प्रवेश जैसे सभी प्रकार के मांगलिक और शुभ कार्यों पर पूरी तरह से रोक लग जाती है और लोग अपना ध्यान केवल ईश्वर भक्ति और सात्विक जीवन पर केंद्रित करते हैं। इसके अलावा, महीने के पूर्वार्ध में 3 जुलाई को कृष्णपिंगल संकष्टी चतुर्थी, 10 जुलाई को योगिनी एकादशी और 12 जुलाई को मासिक शिवरात्रि का व्रत श्रद्धापूर्वक रखा जाएगा, जिसे लेकर श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह है। इस पवित्र महीने में तीर्थ स्थलों और प्रमुख मंदिरों में भारी भीड़ जुटने की संभावना है, क्योंकि 15 जुलाई से जहां आषाढ़ गुप्त नवरात्रि का शुभारंभ हो रहा है, वहीं ठीक अगले दिन यानी 16 जुलाई को ओडिशा के पुरी में भगवान जगन्नाथ की विश्व प्रसिद्ध भव्य रथयात्रा निकाली जाएगी। इस रथयात्रा को देखने और भगवान का आशीर्वाद लेने के लिए देश-विदेश से लाखों की संख्या में श्रद्धालु पुरी पहुंचते हैं। महीने के अंतिम चरण में 28 जुलाई को कोकिला व्रत रखा जाएगा और अगले दिन 29 जुलाई को आषाढ़ पूर्णिमा के अवसर पर गुरु पूर्णिमा का महापर्व मनाया जाएगा। इस दिन सनातन परंपरा के अनुसार शिष्य अपने गुरुओं का पूजन कर उनके प्रति कृतज्ञता प्रकट करते हैं, जिससे इस महीने का धार्मिक समापन बेहद गरिमापूर्ण ढंग से होगा। धार्मिक व्रतों के साथ-साथ ज्योतिषीय गणनाओं के आधार पर भी जुलाई का यह महीना देश-दुनिया और सभी 12 राशियों के लिए बेहद संवेदनशील और महत्वपूर्ण बदलावों वाला साबित होने जा रहा है। इस दौरान सौरमंडल के कई बड़े और प्रभावशाली ग्रह अपनी चाल, राशि और नक्षत्रों में परिवर्तन करेंगे। सबसे पहले 4 जुलाई को सुख-सुविधाओं के कारक शुक्र ग्रह सिंह राशि में प्रवेश करेंगे, जहां पहले से मौजूद केतु के साथ उनकी युति बनेगी। इसके तुरंत बाद 7 जुलाई को बुद्धि और वाणी के देवता बुध ग्रह अपनी वक्री अवस्था में ही मिथुन राशि में गोचर कर जाएंगे, जो व्यापार और संचार व्यवस्था को प्रभावित कर सकता है। ग्रहों के इस बड़े फेरबदल में एक महत्वपूर्ण खगोलीय घटना 14 जुलाई को होगी, जब ज्ञान और सुख-सौभाग्य के प्रदाता गुरु ग्रह (बृहस्पति) अस्त हो जाएंगे और अगस्त के मध्य तक इसी स्थिति में रहेंगे। गुरु के अस्त होने से धार्मिक अनुष्ठानों की पद्धतियों में कुछ समय के लिए बदलाव आता है। इसके पश्चात 16 जुलाई को ग्रहों के राजा सूर्य देव कर्क राशि में प्रवेश करेंगे, जिसे ‘कर्क संक्रांति’ के नाम से जाना जाता है। महीने के अंत में एक और बड़ा ज्योतिषीय बदलाव 27 जुलाई को देखने को मिलेगा, जब न्याय के देवता शनि देव कुंभ राशि में वक्री यानी उल्टी चाल चलना शुरू कर देंगे। शनि की यह वक्री चाल साल के अंत तक जारी रहेगी, जिसका गहरा राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक प्रभाव देश के विभिन्न हिस्सों में स्पष्ट रूप से दिखाई दे सकता है।

भारत बनाम इंग्लैंड टी20 सीरीज का आगाज आज श्रेयस अय्यर की टीम के सामने जीत की चुनौती जानें पूरी लाइव स्ट्रीमिंग डिटेल

नई दिल्ली । भारत और इंग्लैंड के बीच पांच मैचों की टी20 सीरीज का रोमांच बुधवार से शुरू होने जा रहा है। दोनों टीमों के बीच पहला मुकाबला इंग्लैंड के चेस्टर ली स्ट्रीट स्थित रिवरसाइड ग्राउंड में खेला जाएगा। भारतीय टीम हाल ही में आयरलैंड के खिलाफ टी20 सीरीज गंवाने के बाद मैदान पर उतर रही है ऐसे में कप्तान श्रेयस अय्यर की अगुआई में टीम इंडिया की कोशिश जीत के साथ नई शुरुआत करने की होगी। वहीं मेजबान इंग्लैंड अपने घरेलू हालात का पूरा फायदा उठाकर सीरीज में बढ़त हासिल करना चाहेगा। इस मुकाबले से पहले सबसे ज्यादा चर्चा युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी को लेकर हो रही है। 15 वर्षीय प्रतिभाशाली खिलाड़ी के अंतरराष्ट्रीय टी20 डेब्यू का इंतजार लगातार बढ़ता जा रहा है लेकिन टीम प्रबंधन के संकेत बताते हैं कि पहले मुकाबले में उन्हें मौका मिलना आसान नहीं होगा। आयरलैंड दौरे पर भी उन्हें अंतिम एकादश में जगह नहीं मिली थी जबकि सूर्यांश शेडगे और प्रिंस यादव को डेब्यू का अवसर दिया गया था। ऐसे में एक बार फिर यह सवाल बना हुआ है कि क्या वैभव को इंतजार करना पड़ेगा या टीम कोई बड़ा फैसला लेगी। भारतीय बल्लेबाजी पिछले कुछ समय से कठिन और तेज पिचों पर संघर्ष करती नजर आई है। इंग्लैंड की परिस्थितियां भी आयरलैंड जैसी मानी जा रही हैं जहां गेंदबाजों को अतिरिक्त उछाल और स्विंग मिलती है। ऐसे में भारतीय बल्लेबाजों को अपनी रणनीति में बदलाव करना होगा। इंग्लैंड के पास जोफ्रा आर्चर जोश टंग साकिब महमूद और सोनी बेकर जैसे तेज गेंदबाज हैं जबकि स्पिन विभाग में आदिल रशीद और रेहान अहमद जैसे अनुभवी खिलाड़ी मौजूद हैं जो किसी भी बल्लेबाजी क्रम को परेशानी में डाल सकते हैं। रिवरसाइड ग्राउंड की पिच भी गेंदबाजों के लिए मददगार मानी जाती है। यहां खेले गए टी20 अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों में औसत स्कोर करीब 138 रन रहा है जबकि सर्वोच्च स्कोर 195 रन का है। ऐसे आंकड़े बताते हैं कि बल्लेबाजों को शुरुआत से ही संभलकर खेलना होगा और छोटी गलतियां भी भारी पड़ सकती हैं। श्रेयस अय्यर के लिए यह सीरीज काफी अहम मानी जा रही है क्योंकि लगातार दूसरी टी20 सीरीज हारने से टीम पर दबाव बढ़ सकता है। दूसरी ओर इंग्लैंड अपनी मजबूत गेंदबाजी और घरेलू परिस्थितियों के दम पर सीरीज का विजयी आगाज करना चाहेगा। ऐसे में पहले मुकाबले में दोनों टीमों के बीच कड़ा संघर्ष देखने की पूरी उम्मीद है। भारत और इंग्लैंड के बीच पहला टी20 मुकाबला भारतीय समयानुसार रात 10 बजे शुरू होगा जबकि टॉस रात 9 बजकर 30 मिनट पर होगा। मुकाबले का सीधा प्रसारण सोनी स्पोर्ट्स नेटवर्क के चैनलों पर किया जाएगा जबकि लाइव स्ट्रीमिंग सोनीलिव एप पर उपलब्ध रहेगी। क्रिकेट प्रशंसकों को एक रोमांचक मुकाबले की उम्मीद है जहां दोनों टीमें जीत के साथ सीरीज की शुरुआत करने के इरादे से मैदान में उतरेंगी।

'ग्लैमर के पीछे छिपी रही मेरी प्रतिभा', ज़ीनत अमान ने पुरानी कार्यशैली पर उठाए गंभीर सवाल

नई दिल्ली । हिंदी सिनेमा की सदाबहार और दिग्गज अभिनेत्री ज़ीनत अमान ने अपने दशकों पुराने फिल्मी सफर और समकालीन कार्यसंस्कृति को लेकर एक बड़ा बयान दिया है। उन्होंने अतीत के अनुभवों को साझा करते हुए मनोरंजन जगत में अभिनेत्रियों के प्रति बनी संकीर्ण मानसिकता पर गहरी चिंता व्यक्त की है। ज़ीनत अमान के अनुसार, लंबे समय तक फिल्म उद्योग में उन्हें केवल एक ‘ग्लैमरस आइकन’ के रूप में ही देखा और प्रस्तुत किया गया, जिसके कारण उनकी वास्तविक अभिनय क्षमता, रचनात्मक सोच और बौद्धिक क्षमता को वह स्थान और सम्मान नहीं मिल सका, जिसकी वे हकदार थीं। पर्दे की चमकीली दुनिया ने उनके वास्तविक और गंभीर व्यक्तित्व को दर्शकों के सामने आने ही नहीं दिया। अपने दौर की सबसे चर्चित अभिनेत्रियां होने के बावजूद ज़ीनत अमान को इस बात का मलाल है कि समाज और फिल्मकारों ने उनके किरदारों के आधार पर ही उनकी एक अपरिवर्तनीय छवि गढ़ दी थी। उन्होंने बताया कि जब लोग उनसे व्यक्तिगत जीवन में मिलते थे, तो उनके संतुलित और वैचारिक स्वभाव को देखकर चकित रह जाते थे, क्योंकि वह उनकी फिल्मी छवि से बिल्कुल उलट था। उनका मानना है कि व्यावसायिक सफलता की अंधी दौड़ में तत्कालीन फिल्मकारों ने उनके लुक्स और स्क्रीन प्रेजेंस का तो भरपूर लाभ उठाया, लेकिन एक कलाकार के रूप में उनकी गहराई को समझने या उसे पर्दे पर उभारने का प्रयास बहुत कम किया गया। उस दौर की कार्यशैली पर सीधा प्रहार करते हुए दिग्गज अभिनेत्री ने कहा कि तब फिल्म निर्माण की पूरी प्रक्रिया पुरुष प्रधान मानसिकता से संचालित होती थी। सेट पर और स्क्रिप्टिंग के स्तर पर महिलाओं की राय या उनके रचनात्मक सुझावों को कोई खास तवज्जो नहीं दी जाती थी। अभिनेत्रियों से केवल यह अपेक्षा की जाती थी कि वे अपनी आकर्षक उपस्थिति, नृत्य और गानों के माध्यम से फिल्म के व्यावसायिक पक्ष को मजबूत करें। किसी दृश्य की प्रासंगिकता या किरदार के मनोवैज्ञानिक विकास में उनकी भागीदारी को हमेशा सीमित रखा जाता था, जो एक रचनात्मक कलाकार के रूप में उनके लिए काफी निराशाजनक था। पोशाक और प्रस्तुतीकरण के मुद्दों पर खुलकर बात करते हुए ज़ीनत अमान ने साझा किया कि व्यावसायिक आवश्यकताओं के नाम पर अक्सर उन पर अधिक बोल्ड और आकर्षक परिधान पहनने का दबाव बनाया जाता था। जबकि व्यक्तिगत स्तर पर वे बेहद सादगीपूर्ण और संतुलित जीवनशैली पसंद करती थीं। उस दौर में किसी भी महिला कलाकार की योग्यता का पैमाना उसकी अभिनय क्षमता से ज्यादा उसकी बाहरी सुंदरता और स्क्रीन अपील को माना जाता था, जिसने कई बेहतरीन प्रतिभाओं को एक खास दायरे में समेट कर रख दिया। हालांकि, उन्होंने वर्तमान सिनेमाई परिदृश्य में आ रहे बदलावों की सराहना भी की है। उनका मानना है कि आज की अभिनेत्रियों के पास बेहतर अवसर हैं, कहानियां अधिक सशक्त हैं और निर्णय लेने की प्रक्रिया में भी महिलाओं की भागीदारी बढ़ी है। इसके बावजूद, वे इस बात से पूरी तरह इनकार नहीं करतीं कि आज भी महिलाओं को उनकी बाहरी बनावट और शारीरिक सुंदरता के तराजू पर तौलने की प्रवृत्ति मनोरंजन उद्योग में आंशिक रूप से जीवित है, जिसे पूरी तरह बदलने के लिए अभी और समय और वैचारिक परिपक्वता की आवश्यकता है। ज़ीनत अमान ने अपने इस विचार के जरिए फिल्म जगत और दर्शकों दोनों के सामने एक गंभीर विमर्श प्रस्तुत किया है। उनका स्पष्ट मानना है कि किसी भी कलाकार की वास्तविक पहचान और उसका मूल्यांकन उसके काम, अनुभव, समर्पण और रचनात्मक योगदान के आधार पर होना चाहिए, न कि केवल इस बात पर कि वह पर्दे पर कितना ग्लैमरस दिखता है। ग्लैमर केवल इस पेशे का एक छोटा सा हिस्सा है, न कि किसी कलाकार के संपूर्ण अस्तित्व की परिभाषा। अपने समय में आधुनिकता, अदम्य आत्मविश्वास और लीक से हटकर किरदार निभाने के लिए जानी जाने वाली ज़ीनत अमान का यह आत्मनिरीक्षण नई पीढ़ी के कलाकारों के लिए भी एक मार्गदर्शक की तरह है। उनका यह बयान केवल एक व्यक्तिगत शिकायत नहीं है, बल्कि यह उस व्यापक व्यवस्था पर एक गंभीर टिप्पणी है जो कलाकारों को केवल एक स्टीरियोटाइप या ढांचे में बंद कर देखना पसंद करती है। उन्होंने उम्मीद जताई है कि भविष्य का सिनेमा कलाकारों की बौद्धिक और रचनात्मक क्षमता को अधिक महत्व देगा।

MORENA MURDER UPDATE: आज चेहरा दिखाकर नाची है कल नग्न होकर नाचेगी…मुरैना ट्रिपल मर्डर करने वाले आरोपी का ऑडियो वायरल

MP Crime News

MORENA MURDER UPDATE: मुरैना। मध्य प्रदेश के मुरैना जिले में पत्नी और दो मासूम बेटों की हत्या के मामले में नए खुलासे हुए हैं। जांच में सामने आया है कि वारदात से पहले आरोपी बलराम सिंह कुशवाह ने अपनी पत्नी के डांस वीडियो को लेकर रिश्तेदारों को कई धमकी भरे ऑडियो भेजे थे। इन्हीं ऑडियो में उसने कहा था। ऑडियो 1 – आज चेहरा दिखाकर नाची, कल नग्न होकर नाचेगी। ऑडियो 2 – तू देख, इसके वीडियो…थूथरो खोलके (चेहरा खोल के) नाच रही है। कल फिर नग्न होकर नाचेगी। मैंने तुझे भेज दिया है, फिर मत कहना कि इसका जिम्मेदार कौन होगा। बताया जा रहा है कि पत्नी के डांस वीडियो को लेकर उसके मन में गहरा शक और गुस्सा बैठ गया था, जो आखिरकार पूरे परिवार के लिए जानलेवा साबित हुआ। MP: राजा रघुवंशी हत्याकांड…. सोनम की जमानत रद्द कराने के लिए SC जाएगा परिवार रिश्तेदारों को किए 22 से ज्यादा कॉल रविता के फूफा श्रीकृष्ण कुशवाह ने बताया कि 17 जून को बलराम ने उन्हें पत्नी का डांस वीडियो और कई ऑडियो मैसेज भेजे थे। इसके बाद उसने 22 से ज्यादा बार फोन भी किया। उन्होंने सोचा कि बाद में समझाकर मामला शांत करा देंगे, लेकिन उन्हें अंदाजा नहीं था कि कुछ ही दिनों में इतनी बड़ी वारदात हो जाएगी। 3 मिनट 30 सेकेंड के वीडियो से शुरू हुआ विवाद गांव के नरसिंह मंदिर में आयोजित भागवत कथा के दौरान महिलाओं के आग्रह पर रविता ने भजन संध्या में डांस किया था। किसी ने करीब साढ़े तीन मिनट का वीडियो बनाकर बलराम को भेज दिया। वीडियो देखने के बाद बलराम गुस्से में घर पहुंचा, पत्नी का मोबाइल छीन लिया और उसके साथ मारपीट की। अगले दिन भी विवाद हुआ, जिसके बाद रविता अपने पिता के साथ मायके चली गई। बाद में बलराम माफी मांगकर उसे और दोनों बच्चों को वापस घर ले आया। घर लौटने के तीन दिन बाद कर दी हत्या परिजनों के मुताबिक, 23 जून को बलराम ने भरोसा दिलाया कि वह अब पत्नी को परेशान नहीं करेगा। इसके बाद रविता दोनों बच्चों के साथ ससुराल लौट आई। लेकिन घर लौटने के तीसरे ही दिन, 26 जून की रात बलराम ने पत्नी और दोनों बेटों की कुल्हाड़ी से हत्या कर दी। हत्या के बाद वह शिकारपुर रेलवे फाटक पहुंचा और ट्रेन के सामने कूदकर आत्महत्या कर ली। US: ट्रंप की तेल कंपनियों को सख्त चेतावनी, बोले- ‘पेट्रोल के दाम कम करो वरना…’ मां ने देखा दिल दहला देने वाला मंजर बलराम की मां रामकली ने बताया कि सुबह जब बहू ने दरवाजा नहीं खोला तो उन्होंने आवाज लगाई। कोई जवाब नहीं मिलने पर अंदर झांका तो दोनों पोते और बहू खून से लथपथ पड़े थे। पड़ोसियों की मदद से दरवाजा खोला गया और पुलिस को सूचना दी गई। पिता बोले- पहले ही दे चुका था धमकी रविता के पिता मलखान कुशवाह ने बताया कि वीडियो देखने के बाद बलराम ने कई बार कहा था कि बेटी को अपने साथ ले जाओ, नहीं तो वह उसे मार देगा। बाद में वह रिश्तेदारों के साथ आया, माफी मांगी और भरोसा दिलाया कि अब सब ठीक रहेगा। परिवार ने उस पर विश्वास किया, लेकिन कुछ ही दिनों बाद उसने अपनी धमकी को सच कर दिया। MP MLA Court Strict: हर जगह दिख रहे, पुलिस को नहीं मिल रहे? जीतू पटवारी पर कोर्ट सख्त, गिरफ्तारी वारंट जारी फोरेंसिक जांच में क्या मिला? पुलिस और फोरेंसिक जांच में सामने आया कि दोनों मासूम बच्चों के गले पर दो-दो वार किए गए, जबकि रविता पर कुल्हाड़ी से चार वार किए गए। हत्या के बाद बलराम ने रेलवे ट्रैक पर जाकर आत्महत्या कर ली। पुलिस के अनुसार, शुरुआती जांच में पत्नी के डांस वीडियो को लेकर पैदा हुआ शक और घरेलू विवाद इस पूरे हत्याकांड की मुख्य वजह माना जा रहा है। हालांकि मामले के सभी पहलुओं की जांच अभी जारी है।

अजय देवगन की आगामी फिल्म 'चौहान' के टीज़र पर बढ़ा राजनीतिक और सामाजिक विवाद, श्रीनगर के सांसद और क्षत्रिय संगठन ने जताई कड़ी आपत्ति

नई दिल्ली । बॉलीवुड अभिनेता अजय देवगन की आगामी एक्शन फिल्म ‘चौहान’ अपने आधिकारिक घोषणा वीडियो के रिलीज होते ही बड़े विवादों के केंद्र में आ गई है। फिल्म के शुरुआती टीज़र में अजय देवगन को एक सैन्य अधिकारी के रूप में दिखाया गया है, जो कश्मीर में कानून-व्यवस्था और पत्थरबाजी की घटनाओं से निपटता नजर आ रहा है। इस वीडियो में दिखाए गए कुछ दृश्यों और संवादों ने राजनीतिक गलियारों के साथ-साथ सामाजिक संगठनों में भी एक नई बहस को जन्म दे दिया है। विशेष रूप से कश्मीर की संवेदनशीलता और राजपूत समुदाय की ऐतिहासिक विरासत को लेकर फिल्म के निर्माताओं पर सवाल उठाए जा रहे हैं। मुख्यधारा के सिनेमा में संवेदनशील मुद्दों के प्रस्तुतीकरण को लेकर यह विवाद अब गहराता जा रहा है। फिल्म के टीज़र में कश्मीरी युवाओं द्वारा की जाने वाली पत्थरबाजी और उसके जवाब में सुरक्षा बलों की कार्रवाई को जिस अंदाज में प्रस्तुत किया गया है, उसने स्थानीय जनप्रतिनिधियों को नाराज कर दिया है। श्रीनगर के सांसद आगा सैयद रुहुल्लाह मेहदी ने इस पर कड़ी आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि फिल्म में दिखाए गए पैलेट गन और सैन्य बल के दृश्य कश्मीर के लोगों के पुराने जख्मों और दर्दनाक अतीत को हरा करने वाले हैं। उन्होंने मुख्यधारा के सिनेमा की आलोचना करते हुए कहा कि कश्मीर के दर्द और वहां की त्रासदी का इस्तेमाल केवल व्यावसायिक और मनोरंजन के उद्देश्यों के लिए एक एक्शन बैकग्राउंड के रूप में नहीं किया जाना चाहिए, बल्कि इसके लिए संवेदनशीलता और गरिमा की आवश्यकता है। इस फिल्म को लेकर विवाद केवल कश्मीर की छवि तक ही सीमित नहीं है, बल्कि सामाजिक स्तर पर भी इसका कड़ा विरोध शुरू हो गया है। ‘क्षत्रिय परिषद’ नामक एक प्रमुख संगठन ने फिल्म के शीर्षक और उसमें क्षत्रिय पहचान के इस्तेमाल पर आधिकारिक तौर पर आपत्ति दर्ज कराई है। संगठन का आरोप है कि फिल्म निर्माता नीरज यादव और अभिनेता अजय देवगन राजनीतिक व वैचारिक हितों के लिए चौहान वंश के ऐतिहासिक गौरव का अनुचित उपयोग कर रहे हैं। क्षत्रिय परिषद ने अपने बयान में स्पष्ट किया है कि राजपूत इतिहास संपूर्ण देश की धरोहर है और इसे किसी सांप्रदायिक विमर्श, चुनावी लाभ या व्यावसायिक फिल्म का हथियार नहीं बनाया जाना चाहिए। यह विवाद इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि इसने अजय देवगन की ही पूर्व में आई फिल्म ‘सिंघम अगेन’ की यादें ताजा कर दी हैं, जिसमें कश्मीर की एक बिलकुल अलग और सकारात्मक तस्वीर पेश की थी। उस फिल्म में कश्मीर के युवाओं को विकास, शांति और देश के साथ चलते हुए दिखाया गया था, जिसकी दर्शकों और समीक्षकों ने काफी सराहना की थी। वहीं, दूसरी ओर ‘चौहान’ में फिर से उसी पुरानी और नकारात्मक छवि को उभारा गया है, जिसे लेकर कश्मीरी समाज लंबे समय से असहज रहा है। एक ही अभिनेता द्वारा कश्मीर की दो विपरीत छवियों को पर्दे पर उतारने के इस विरोधाभास ने भी विश्लेषकों का ध्यान खींचा है। वर्तमान में फिल्म ‘चौहान’ का केवल शुरुआती प्रचार वीडियो ही सामने आया है और इसकी पूरी शूटिंग तथा निर्माण कार्य होना अभी बाकी है। ऐसे में फिल्म उद्योग के जानकारों का मानना है कि निर्माताओं को व्यावसायिक सफलता और सामाजिक संवेदनशीलता के बीच एक बारीक संतुलन बनाने की आवश्यकता होगी। राष्ट्रवाद और वीरता के नाम पर बनने वाली फिल्मों में ऐतिहासिक तथ्यों और क्षेत्रीय भावनाओं का सम्मान करना बेहद जरूरी माना जाता है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि इस बढ़ते देशव्यापी विवाद के बाद फिल्म के निर्माता-निर्देशक अपनी कहानी और दृश्यों की प्रस्तुतीकरण शैली में किसी प्रकार का बदलाव करते हैं या नहीं।

MP: उज्जैन में शिप्रा रामघाट पर महाआरती के दौरान भिड़े पुजारी-वेंडर…. जमकर चले लात-घूसे

उज्जैन। मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के उज्जैन (Ujjain) में शिप्रा के रामघाट (Ramghat) पर एक शर्मनाक घटना सामने आई है। सोशल मीडिया पर इसका वीडियो वायरल (Video Viral) हुआ। यहां शाम को महाआरती (Maha Aarti) के बीच अचानक मंत्रोच्चार की जगह अपशब्द और लात-घूंसे चलने लगे। फूल-प्रसाद बेचने वाले वेंडरों और घाट के पुजारियों के बीच विवाद हुआ। घटना 28 जून की शाम की है, जिसने घाटों की सुरक्षा और वहां चल रही अवैध दुकानदारी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मामले में थाना महाकाल पुलिस ने दोनों पक्षों की शिकायत पर क्रॉस कायमी की है। मारपीट में दोनों ओर से 4 लोगों को गंभीर चोटें आई हैं। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक शाम को जब शिप्रा घाट पर आरती शुरू हुई, तो फूल-प्रसाद विक्रेता हमेशा की तरह आरती के बीच में ही श्रद्धालुओं को सामान बेचने की जिद करने लगे। इससे आरती की मर्यादा भंग हो रही थी। महिलाओं ने मारपीट शुरू कीविकास पिता शशिकांत शर्मा 38 साल निवासी बिलोटीपुरा के पक्ष से गणेश पिता शशिकांत शर्मा को चोट आई। पुलिस ने रिपोर्ट पर ममता परमार, क्षिप्रा मराठा के खिलाफ केस दर्ज किया। फरियादी ने पुलिस को बताया रामघाट पर भाई के साथ पंडिताई करता हूं। 28 जून की शाम की आरती के दौरान उक्त महिलाएं फूल-प्रसाद बेच रही थी, जिन्हें मना किया तो उत्तेजित होकर अपशब्द कहते हुए मारपीट पर उतारू हो गई। मेरे हाथ व आंख में चोट आई, भाई बीचबचाव को आया तो उससे भी मारपीट की।

जुलाई में भी धीमी रहेगी मानसून की रफ्तार…. सामान्य से कम बारिश का अनुमान

नई दिल्ली। देश में इस बार जुलाई (July 2026) के महीने में मानसून (Monsoon) की रफ्तार धीमी रहने के आसार हैं। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी-IMD) ने मंगलवार को अपना मासिक पूर्वानुमान (Monthly Forecast) जारी करते हुए बताया कि जुलाई में देश भर में मासिक औसत वर्षा सामान्य से कम रहने की आशंका है। आईएमडी के अनुसार, जुलाई में दीर्घकालिक औसत (एलपीए – 1971-2020) की तुलना में केवल 94 फीसदी बारिश होने की संभावना है। देश में जुलाई महीने का एलपीए लगभग 280.4 मिमी होता है। एलपीए से तात्पर्य किसी निश्चित अवधि (जैसे एक महीने या एक सीजन) के दौरान किसी विशेष क्षेत्र में दर्ज की गई वर्षा से है, जिसे एक लंबी अवधि (आमतौर पर 30 से 50 वर्ष) में औसत निकाला जाता है। पूरे देश में एक जैसे हालात रहने की उम्मीद नहीं है। आईएमडी के महानिदेशक डॉ. मृत्युंजय महापात्र ने बताया कि देश के अधिकांश हिस्सों में भले ही सूखा या कम बारिश देखने को मिले, लेकिन कुछ क्षेत्रों में राहत की उम्मीद है। उत्तर-पश्चिम और पूर्वोत्तर भारत के कुछ हिस्से, पूर्व-मध्य भारत और पूर्वी प्रायद्वीपीय क्षेत्र में बारिश सामान्य या सामान्य से अधिक होने की उम्मीद है। जून में 1901 के बाद पांचवीं सबसे कम बारिशआईएमडी के अनुसार, जून का महीना देश के लिए काफी सूखा रहा। पूरे भारत में जून के दौरान करीब 40 फीसदी बारिश की कमी दर्ज की गई। मध्य भारत सबसे ज्यादा प्रभावित रहा और यहा सबसे अधिक 50.4 फीसदी कम बारिश हुई। इस साल जून में केवल 99.5 मिमी बारिश हुई, जो 1901 के बाद से अब तक की पांचवीं सबसे कम जून की बारिश है। कम बारिश के पीछे कई मुख्य कारणमानसून सीजन के दौरान सामान्य से कम वर्षा के पीछे कई मुख्य कारक रहे। मैडेन-जूलियन ऑसिलेशन का प्रतिकूल चरण…यह हवा, बादल और दबाव की एक गतिशील प्रणाली है और भूमध्य रेखा के चक्कर लगाते समय बारिश लाती है। कम दबाव वाले क्षेत्रों का न बनना…जून में कम दबाव का क्षेत्र नहीं बना। चूंकि हवाएं उच्च दबाव से कम दबाव वाले क्षेत्रों की ओर चलती हैं, इसलिए ये प्रणालियां चुंबक की तरह काम करती हैं, जो नमी से भरी हवाओं को खींचती हैं, जिससे बारिश होती है।

Pakistan: लाहौर में ट्यूशन सेंटर में पढ़ रहे थे बच्चे, अचानक भरभराकर गिरी छत …. 14 की मौत. 20 घायल

लाहौर। पाकिस्तान (Pakistan) के लाहौर (Lahore) शहर में मंगलवार को दर्दनाक हादसा हुआ है। घनी आबादी वाले काहना नौ क्षेत्र के बस्ती ईदगाह इलाके (Basti Eidgah area) में एक निजी ट्यूशन सेंटर (Tuition Center) की छत अचानक ढह गई, जिसमें 14 स्कूली बच्चों की मौत हो गई और कम से कम 20 अन्य बच्चे घायल हो गए। हादसे के समय सात से तेरह वर्ष की आयु के बच्चे कक्षाओं में बैठे हुए थे, जो मलबे के नीचे दब गए। पुलिस और बचाव टीमों के अनुसार, यह ट्यूशन सेंटर एक निर्माणाधीन इमारत के अंदर संचालित हो रहा था। बताया गया कि इमारत का एक हिस्सा अभी बन रहा था और मजदूर काम में व्यस्त थे, तभी छत का बड़ा हिस्सा अचानक गिर पड़ा। मलबे में दबे बच्चों को निकालने के लिए स्थानीय पुलिस, एधी फाउंडेशन की टीम और रेस्क्यू 1122 के कर्मी पिछले कई घंटों से अथक प्रयास कर रहे हैं। लाहौर के उप महानिरीक्षक (ऑपरेशंस) फैसल कामरान ने घटनास्थल पर पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि अब तक मलबे से 14 बच्चों के शव बरामद किए जा चुके हैं। 20 घायल बच्चों और एक महिला शिक्षिका को विभिन्न अस्पतालों में भर्ती कराया गया है। हमने तुरंत ठेकेदार को गिरफ्तार कर लिया है। जांच चल रही है कि इमारत की सुरक्षा मानकों का पालन किया गया था या नहीं। उन्होंने आगे बताया कि इमारत पूरी तरह से निर्माणाधीन अवस्था में थी और उसमें ट्यूशन सेंटर चलाने की अनुमति भी संदिग्ध है। पुलिस ने पूरे इलाके को घेर लिया है और मलबा हटाने के लिए भारी मशीनरी का इस्तेमाल किया जा रहा है। क्या बोला एधी फाउंडेशन?एधी फाउंडेशन ने एक आधिकारिक बयान में बताया कि काहना नौ क्षेत्र के आवासीय भवन में स्थित अकादमी की छत अचानक गिर गई। फाउंडेशन की टीम तुरंत मौके पर पहुंची और बचाव कार्य में सहयोग कर रही है। बयान में कहा गया है कि मृतकों के शवों को लाहौर जनरल अस्पताल के मुर्दाघर में भेज दिया गया है। कुछ बच्चे अभी भी मलबे के नीचे फंसे हो सकते हैं, इसलिए मृतकों की संख्या बढ़ने की आशंका है। एधी फाउंडेशन ने यह भी बताया कि सभी घायलों को अस्पताल पहुंचाया गया है और उनकी हालत स्थिर बताई जा रही है। वहीं, लाहौर जिला शिक्षा प्राधिकरण के मुख्य कार्यकारी अधिकारी तारिक महमूद ने बताया कि यह निजी ट्यूशन सेंटर स्थानीय एक महिला निवासी द्वारा चलाया जा रहा था। उन्होंने कहा कि शिक्षा विभाग इस मामले की भी जांच करेगा कि ऐसे संवेदनशील इलाके में अनधिकृत तरीके से ट्यूशन सेंटर चलाने की अनुमति किसने दी क्या बोलीं सीएममरियम नवाज?पंजाब की मुख्यमंत्री मरियम नवाज ने इस हादसे पर गहरा दुख व्यक्त किया है। उन्होंने पुलिस और जिला प्रशासन को सख्त निर्देश दिए हैं कि इमारत ढहने के लिए जिम्मेदार ठेकेदार, मालिक और संबंधित अधिकारियों की तुरंत पहचान की जाए तथा उनके खिलाफ आपराधिक मुकदमा दर्ज कर कार्रवाई शुरू की जाए। सीएम ने कहा कि लापरवाही बरतने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।