Chambalkichugli.com

ऋषिकेश-इंदौर स्लीपर बस में भीषण आग, 7 यात्रियों की दर्दनाक मौत; मध्य प्रदेश के 5 लोग जिंदा जले, 13 की हालत गंभीर, 4 अब भी लापता

मध्य प्रदेश:  राजस्थान के दौसा जिले के पास ऋषिकेश से इंदौर आ रही एक निजी स्लीपर बस में लगी भीषण आग ने कई परिवारों की खुशियां छीन लीं। इस दर्दनाक हादसे में अब तक सात यात्रियों की मौत की पुष्टि हुई है। मृतकों में मध्य प्रदेश के पांच यात्री शामिल हैं, जो बस के भीतर ही आग की चपेट में आने से बाहर नहीं निकल सके। इसके अलावा दो अन्य यात्रियों ने गंभीर चोटों के कारण दम तोड़ दिया। हादसे में दो दर्जन से अधिक लोग घायल हुए हैं, जिनमें 13 की स्थिति बेहद गंभीर बनी हुई है। वहीं चार यात्रियों का अब तक कोई पता नहीं चल सका है, जिससे परिजनों की चिंता लगातार बढ़ती जा रही है। बताया जा रहा है कि बस उत्तराखंड के ऋषिकेश से यात्रियों को लेकर इंदौर के लिए रवाना हुई थी। देर रात जब बस राजस्थान के दौसा क्षेत्र से गुजर रही थी, तभी उसमें अचानक आग लग गई। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार आग तेजी से पूरी बस में फैल गई और कुछ ही मिनटों में वाहन आग की लपटों से घिर गया। अचानक हुई इस घटना से यात्रियों में अफरा-तफरी मच गई और कई लोगों ने जान बचाने के लिए खिड़कियों के शीशे तोड़कर बाहर छलांग लगा दी। हालांकि कई यात्री समय रहते बाहर नहीं निकल सके और आग की चपेट में आ गए। घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस, दमकल विभाग और राहत एवं बचाव दल मौके पर पहुंचे। आग पर काबू पाने के बाद बस में फंसे यात्रियों को बाहर निकाला गया और घायलों को तत्काल अस्पताल पहुंचाया गया। चिकित्सकों के अनुसार अस्पताल पहुंचने से पहले ही सात यात्रियों की मृत्यु हो चुकी थी। मृतकों में पांच शव इतने अधिक झुलस चुके थे कि उनकी पहचान सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक प्रक्रिया अपनाई जा रही है। अस्पताल में भर्ती घायलों में कई की हालत गंभीर बनी हुई है। इनमें महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग भी शामिल हैं। चिकित्सकीय टीम लगातार उनका उपचार कर रही है और गंभीर रूप से घायल यात्रियों की स्थिति पर विशेष निगरानी रखी जा रही है। प्रशासन ने जरूरत पड़ने पर बेहतर उपचार के लिए उन्हें उच्च चिकित्सा केंद्रों में स्थानांतरित करने की भी तैयारी की है। हादसे के बाद मध्य प्रदेश के इंदौर, बड़वाह, डबरा और अन्य क्षेत्रों के परिवारों में शोक और चिंता का माहौल है। कई परिजन अपने रिश्तेदारों की जानकारी लेने और उनकी पहचान के लिए राजस्थान रवाना हो चुके हैं। प्रशासन लगातार घायलों और मृतकों की पहचान संबंधी जानकारी परिजनों तक पहुंचाने का प्रयास कर रहा है ताकि राहत कार्य में किसी प्रकार की देरी न हो। इस बीच चार यात्रियों के लापता होने की सूचना ने राहत एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है। पुलिस और प्रशासन बस के आसपास के क्षेत्र में उनकी तलाश कर रहे हैं। साथ ही अस्पतालों और अन्य संभावित स्थानों पर भी जानकारी जुटाई जा रही है ताकि सभी यात्रियों का पता लगाया जा सके। घटना के कारणों का अभी स्पष्ट रूप से पता नहीं चल सका है। पुलिस और संबंधित एजेंसियों ने आग लगने की वजह की जांच शुरू कर दी है। तकनीकी विशेषज्ञ बस की स्थिति, इंजन, विद्युत प्रणाली और अन्य संभावित कारणों की जांच कर रहे हैं। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि हादसा तकनीकी खराबी, शॉर्ट सर्किट या किसी अन्य कारण से हुआ। प्रशासन ने पूरे मामले की विस्तृत जांच कराने के साथ घायलों को हर संभव चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया है।

संपत्ति कुर्की के आदेश पड़ते ही बदले हालात, छह महीने से फरार GST अधीक्षक मुकेश बर्मन ने किया आत्मसमर्पण, CBI अब करेगी गहन पूछताछ

मध्य प्रदेश: के जबलपुर में सामने आए चर्चित सेंट्रल जीएसटी रिश्वतकांड में छह महीने से फरार चल रहे जीएसटी अधीक्षक मुकेश बर्मन ने आखिरकार अदालत में आत्मसमर्पण कर दिया। लंबे समय से गिरफ्तारी से बच रहे आरोपी के खिलाफ संपत्ति कुर्की की प्रक्रिया शुरू होने के बाद घटनाक्रम तेजी से बदला और उसने न्यायालय का रुख किया। अदालत ने उसे 2 जुलाई तक CBI रिमांड पर भेजते हुए जांच एजेंसी को पूछताछ की अनुमति दे दी है। माना जा रहा है कि रिमांड के दौरान मामले से जुड़े कई महत्वपूर्ण तथ्यों का खुलासा हो सकता है। यह मामला पिछले वर्ष दिसंबर में सामने आया था, जब केंद्रीय जांच एजेंसी ने जबलपुर स्थित सेंट्रल जीएसटी डिविजन कार्यालय में छापेमारी कर कथित रिश्वतखोरी के नेटवर्क का खुलासा किया था। ट्रैप कार्रवाई के दौरान विभाग के एक सहायक आयुक्त और एक निरीक्षक को चार लाख रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया गया था। इसी कार्रवाई के दौरान जीएसटी अधीक्षक मुकेश बर्मन फरार हो गया था और तब से उसकी तलाश लगातार जारी थी। जांच एजेंसी ने आरोपी की गिरफ्तारी के लिए विभिन्न संभावित ठिकानों पर कई बार दबिश दी, लेकिन वह लगातार जांच से बचता रहा। इसके बाद कानूनी प्रक्रिया के तहत उसकी संपत्ति कुर्क करने की कार्रवाई शुरू की गई। इसी बीच आरोपी ने अदालत में आत्मसमर्पण कर दिया। इस घटनाक्रम को जांच की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि अब एजेंसी सीधे आरोपी से पूछताछ कर पूरे प्रकरण की कड़ियां जोड़ने का प्रयास करेगी। पूरे मामले की शुरुआत एक होटल व्यवसायी की शिकायत से हुई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि कर संबंधी मामले में बड़ी राशि की रिकवरी दर्शाने के बाद उसे राहत देने के नाम पर दस लाख रुपये की रिश्वत की मांग की गई। शिकायत मिलने के बाद जांच एजेंसी ने योजनाबद्ध तरीके से ट्रैप कार्रवाई की, जिसमें चार लाख रुपये की रिश्वत स्वीकार किए जाने के दौरान अधिकारियों को गिरफ्तार कर लिया गया। इसके बाद मामले ने व्यापक चर्चा बटोरी और विभागीय कार्यप्रणाली पर भी कई सवाल खड़े हुए। अब मुकेश बर्मन के आत्मसमर्पण के बाद जांच का दायरा और व्यापक होने की संभावना है। जांच एजेंसी यह पता लगाने का प्रयास करेगी कि कथित रिश्वत मांगने और वसूली के इस पूरे प्रकरण में किन-किन अधिकारियों या कर्मचारियों की भूमिका रही। साथ ही यह भी जांच की जाएगी कि क्या यह मामला किसी संगठित भ्रष्टाचार तंत्र का हिस्सा था या फिर सीमित स्तर पर संचालित किया जा रहा था। जांच के दौरान आरोपी से विभागीय प्रक्रियाओं, कथित रिश्वत मांगने के तरीके, वित्तीय लेनदेन और अन्य संभावित सहयोगियों के बारे में विस्तार से पूछताछ की जाएगी। यदि पूछताछ में नए तथ्य सामने आते हैं तो मामले में अन्य लोगों की भूमिका भी जांच के दायरे में आ सकती है। फिलहाल अदालत द्वारा दिए गए रिमांड के दौरान CBI पूरे घटनाक्रम की परतें खोलने और उपलब्ध साक्ष्यों को मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ेगी। मामले की आगामी सुनवाई और जांच के निष्कर्षों पर अब सभी की नजर बनी हुई है।

इंस्टाग्राम पर नाबालिग छात्राओं को जाल में फंसाने का आरोप, अश्लील चैट और वीडियो भेजकर बनाता था दबाव, POCSO के तहत मामला दर्ज

मध्य प्रदेश: के इंदौर में सोशल मीडिया के दुरुपयोग का एक गंभीर मामला सामने आया है। इंस्टाग्राम के माध्यम से दो नाबालिग छात्राओं से कथित रूप से दोस्ती कर उन्हें अश्लील संदेश और वीडियो भेजने तथा मिलने के लिए दबाव बनाने के आरोप में एक 25 वर्षीय युवक के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। पुलिस ने आरोपी के विरुद्ध POCSO एक्ट सहित विभिन्न प्रासंगिक धाराओं में प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। प्रारंभिक जांच के अनुसार आरोपी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम के जरिए दोनों छात्राओं से संपर्क स्थापित किया। पहले सामान्य बातचीत के माध्यम से विश्वास जीतने का प्रयास किया गया और बाद में कथित रूप से आपत्तिजनक चैट, अश्लील वीडियो और अनुचित संदेश भेजे जाने लगे। आरोप है कि इसके बाद आरोपी ने छात्राओं पर व्यक्तिगत रूप से मिलने और शारीरिक संबंध बनाने का दबाव भी बनाया। मामले का खुलासा तब हुआ जब छात्राओं के परिजनों ने उनके सोशल मीडिया अकाउंट की चैट देखी। बातचीत की सामग्री संदिग्ध लगने पर परिजनों ने तत्काल पुलिस से संपर्क किया। शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने पूरे मामले की गंभीरता को देखते हुए संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया और आरोपी के डिजिटल रिकॉर्ड की जांच शुरू कर दी। पुलिस के अनुसार आरोपी पिछले कुछ वर्षों से इंदौर में रह रहा था और पढ़ाई के सिलसिले में अलग-अलग स्थानों पर किराये के मकानों में रह चुका है। जांच के दौरान उसके मोबाइल फोन की प्राथमिक पड़ताल में अन्य युवतियों से जुड़ी वीडियो चैट और तस्वीरें भी मिलने की जानकारी सामने आई है। अब पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि कहीं इसी तरह की गतिविधियों का दायरा अन्य लोगों तक भी तो नहीं फैला हुआ था। जांच एजेंसियां आरोपी के मोबाइल फोन, सोशल मीडिया अकाउंट और डिजिटल संचार के अन्य माध्यमों की फॉरेंसिक जांच कराने की तैयारी कर रही हैं। पुलिस यह भी पता लगा रही है कि आरोपी ने कितने लोगों से संपर्क किया था और क्या उसने किसी अन्य नाबालिग को भी इसी प्रकार निशाना बनाने की कोशिश की थी। जांच के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इस घटना ने एक बार फिर बच्चों और किशोरों की ऑनलाइन सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है। विशेषज्ञों का कहना है कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर अनजान लोगों से संपर्क करते समय विशेष सावधानी बरतना आवश्यक है। नाबालिगों को डिजिटल सुरक्षा के बारे में जागरूक करना और अभिभावकों द्वारा उनकी ऑनलाइन गतिविधियों पर संतुलित निगरानी रखना समय की महत्वपूर्ण आवश्यकता बन गई है। साइबर अपराध के मामलों में लगातार बढ़ोतरी के बीच पुलिस भी लोगों से सतर्क रहने की अपील कर रही है। किसी भी संदिग्ध प्रोफाइल, आपत्तिजनक संदेश, ब्लैकमेल या दबाव बनाने जैसी स्थिति सामने आने पर तत्काल पुलिस या साइबर हेल्पलाइन से संपर्क करने की सलाह दी जा रही है। समय रहते शिकायत दर्ज कराने से ऐसे मामलों में त्वरित कार्रवाई संभव हो सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म का सुरक्षित उपयोग सुनिश्चित करने के लिए केवल कानूनी कार्रवाई ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि परिवार, विद्यालय और समाज को भी मिलकर बच्चों को ऑनलाइन जोखिमों के प्रति जागरूक करना होगा। तकनीक का जिम्मेदारी के साथ उपयोग और समय पर सतर्कता ही इस प्रकार के साइबर अपराधों को रोकने में सबसे प्रभावी उपाय साबित हो सकती है।

बिना बजट और बिना क्रू के रची गई कालजयी दास्तां: जब गांव के बच्चों की सादगी ने 'विलेज रॉकस्टार्स' को दिलाया नेशनल अवॉर्ड

नई दिल्ली । भारतीय सिनेमा जगत में अमूमन करोड़ों रुपये के भारी-भरकम बजट, चमचमाती लाइट्स, नामचीन सितारों और सैकड़ों लोगों के क्रू को ही सफलता की गारंटी माना जाता है। लेकिन असम के एक सुदूर गांव से निकलकर आई एक छोटी सी फिल्म ने फिल्म निर्माण के इन तमाम स्थापित पैमानों और ढर्रों को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया। हम बात कर रहे हैं फिल्म ‘विलेज रॉकस्टार्स’ की, जिसे भारतीय सिनेमा की एक ऐसी जादुई और ऐतिहासिक कृति माना जाता है, जिसने लगभग शून्य या कहें ना के बराबर संसाधनों के इस्तेमाल से बनकर सीधे देश का सर्वोच्च सिनेमाई सम्मान यानी नेशनल अवॉर्ड अपने नाम कर लिया था। इस फिल्म के निर्माण की कहानी किसी सिनेमाई पटकथा से कम दिलचस्प नहीं है। फिल्म की निर्देशक रीमा दास ने इस पूरी परियोजना को बिना किसी बड़े प्रोड्यूसर या बैनर के सहयोग के अकेले ही शुरू किया था। उनके पास फिल्म बनाने के लिए भारी-भरकम बजट नहीं था, इतना कम फंड था कि जितने में शायद कोई शॉर्ट फिल्म बनाना भी मुमकिन नहीं होता। ऐसे में उन्होंने अपनी सूझबूझ का परिचय देते हुए एक साधारण सा डीएसएलआर (DSLR) कैमरा उठाया और सीधे अपने पैतृक गांव की तरफ रुख कर लिया। इस छोटे और साधारण कैमरे का सबसे बड़ा फायदा यह हुआ कि गांव के सीधे-साधे लोग कैमरे को देखकर बिल्कुल भी असहज नहीं हुए और उनके भीतर का स्वाभाविक अभिनय खुलकर सामने आ सका। फिल्म की मेकिंग के दौरान संसाधनों की कमी को रीमा दास ने अपनी सबसे बड़ी ताकत बना लिया। फिल्म के पास न तो कोई लाइटिंग टीम थी और न ही लाइटमैन का कोई क्रू था। इस खर्च से बचने के लिए उन्होंने पूरी फिल्म की शूटिंग सुबह और शाम के समय मिलने वाली कुदरती और प्राकृतिक रोशनी में की। फिल्म में जब भी और जहां भी किसी अतिरिक्त तकनीकी मदद की जरूरत पड़ती, तो गांव के स्थानीय लोग खुद-ब-खुद आगे आकर हाथ बंटा देते थे। रीमा ने न केवल फिल्म का निर्देशन किया, बल्कि सिनेमैटोग्राफी, एडिटिंग, स्क्रीनप्ले और यहां तक कि कॉस्ट्यूम डिजाइनिंग का जिम्मा भी खुद अपने कंधों पर उठाया। फिल्म के लिए प्रोफेशनल एक्टर्स को हायर करना और उनके बजट का इंतजाम करना सबसे बड़ी चुनौती थी। इसका समाधान निकालने के लिए रीमा दास ने गांव के ही बच्चों को धीरे-धीरे अभिनय की बुनियादी ट्रेनिंग दी और उन्हें ही अपनी फिल्म के मुख्य किरदारों में कास्ट कर लिया। इन बच्चों के लिए यह पूरी तरह से सिनेमाई डेब्यू था, लेकिन स्क्रीन पर उनकी मासूमियत और सादगी ने ऐसा जादू बिखेरा कि बड़े-बड़े मंझे हुए कलाकार भी उनके सामने फीके नजर आने लगे। जब यह आसान और सादगी से भरी फिल्म बड़े पर्दे पर रिलीज हुई, तो इसने न केवल समीक्षकों को हैरान किया बल्कि नेशनल अवॉर्ड जीतकर इतिहास रच दिया। इस अभूतपूर्व सफलता के बाद, साल 2024 में इस फिल्म का सीक्वल भी तैयार किया गया। दिलचस्प बात यह है कि इस दूसरे भाग के निर्माण में भी रीमा दास को उसी गांव के लोगों और बच्चों का पूरा सहयोग मिला, जिन्होंने पहली बार में फिल्म को फर्श से अर्श पर पहुंचाया था। भारतीय सिनेमा में न्यूनतम संसाधनों के साथ अधिकतम प्रभाव छोड़ने का यह अपनी तरह का इकलौता उदाहरण है। सादगी और कड़े संघर्ष से उपजी कला की यह अद्भुत मिसाल वर्तमान में ओटीटी प्लेटफॉर्म नेटफ्लिक्स पर दर्शकों के लिए उपलब्ध है, जो स्वतंत्र सिनेमा के क्षेत्र में एक कड़े मार्गदर्शक की भूमिका निभाती है।

Bride Viral Video: शादी के घंटे बाद छत से कूदकर भागी दुल्हन, दूल्हा बोला- मुझे नहीं रहना इसके साथ… ड्रम में पैक कर देगी!

Marriage News

 Bride Viral Video: मध्यप्रदेश। ग्वालियर में एक नई-नवेली दुल्हन ने कुछ ऐसा किया कि दूल्हे ने साथ रहने से इंकार कर दिया। शादी के कुछ ही घंटे बाद दुल्हन चाट से कूदकर भाग गयी। आरोप है कि वह नकदी और जेवर लेकर फरार हो गई जिसका वीडियो CCTV कैमरे में भी रिकॉर्ड हो गया। 23 फीट ऊंची छत से कूदकर निकली बाहर जितेंद्र और नम्रता की शादी 29 जून को हुई थी, जिसके बाद दुल्हन घर आयी और एक दिन बाद 30 जून को सुबह करीब 4 बजे दो मंजिला मकान की छत पर पहुंची और वहां से करीब 23 फीट नीचे पड़ोसी की छत पर छलांग लगा दी। इसके बाद वह दूसरे मकान की छत पर पहुंची और लोहे की ग्रिल पकड़कर नीचे सड़क पर उतर गई। कुछ ही मिनटों में वहां से चली गई। ग्रहों के सेनापति और राजा बदलेंगे अपनी चाल, जगन्नाथ रथयात्रा और गुरु पूर्णिमा सहित जुलाई में सजेंगे महापर्व सुबह उठे दूल्हे को नहीं मिली दुल्हन सुबह जब दूल्हे जितेंद्र की नींद खुली तो दुल्हन घर में नहीं थी। काफी तलाश के बाद भी उसका कोई पता नहीं चला। बाद में गांव के CCTV फुटेज खंगाले गए, जिसमें दुल्हन तेजी से जाती हुई दिखाई दी। दूल्हे के परिवार का आरोप है कि घर से कुछ जेवर भी गायब मिले हैं। थाने में हुआ समझौते का प्रयास घटना के बाद दूल्हा अपने परिजनों के साथ विश्वविद्यालय थाने पहुंचा। पुलिस ने दुल्हन के पिता और भाई को बुलाया। इसके बाद दुल्हन भी थाने पहुंची। परिजनों के समझाने पर उसने पति के साथ रहने की इच्छा जताई, लेकिन दूल्हे ने साफ इनकार कर दिया। राजनाथ सिंह के खिलाफ विशेषाधिकार नोटिस की मांग, कांग्रेस-सरकार आमने-सामने.. दूल्हे ने क्यों किया मना? दूल्हे जितेंद्र का कहना है कि शादी के कुछ घंटों बाद ही दुल्हन के इस तरह घर छोड़ने पर उनकी बदनामी हुई। दूल्हे जितेंद्र- वह मेरे साथ रहना चाहती है, लेकिन अब मैं उसके नहीं रहना चाहता। दूल्हे जितेंद्र- आज कल बहुत केस चल रहें है नील ड्रम वाले। इसलिए मैंने यह फैसला लिया है। पुलिस से मांगी सुरक्षा दूल्हे ने विश्वविद्यालय थाना पुलिस को लिखित आवेदन देकर अपनी और अपने परिवार की सुरक्षा की मांग की है। फिलहाल पुलिस दोनों पक्षों के बयान दर्ज कर मामले की जांच कर रही है। अभी तक किसी भी आरोप की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

सीमित बजट और 75 शिफ्ट का सटीक गणित: 'वेलकम टू द जंगल' की रिकवरी रणनीति ने बदला बॉलीवुड का पुराना ढर्रा, मुनाफे में निर्देशक अहमद खान की मल्टीस्टारर फिल्म

नई दिल्ली । बॉलीवुड की बहुप्रतीक्षित मल्टीस्टारर हॉरर कॉमेडी फिल्म ‘वेलकम टू द जंगल’ इन दिनों बॉक्स ऑफिस पर अपनी सफलता के झंडे गाड़ रही है। इसी बीच फिल्म के निर्देशक अहमद खान ने इसके निर्माण, बजट नियंत्रण और कुशल प्रबंधन को लेकर कई महत्वपूर्ण जानकारियां साझा की हैं। आम तौर पर बड़े सितारों से सजी फिल्मों का बजट आसमान छू जाता है, लेकिन अहमद खान ने एक सटीक रणनीति के तहत इस फिल्म को बेहद नियंत्रित बजट में पूरा कर फिल्म उद्योग के सामने एक नया उदाहरण पेश किया है। फिल्म ने न केवल अपनी लागत वसूल कर ली है, बल्कि अब टिकट खिड़की पर होने वाली हर कमाई सीधे तौर पर इसके मुनाफे में जुड़ रही है। निर्देशक अहमद खान के अनुसार, इस फिल्म में तीस से भी अधिक स्थापित और दिग्गज कलाकारों की फौज शामिल थी, जिसके बावजूद उन्होंने फिल्म की कुल निर्माण लागत को 115 से 125 करोड़ रुपये के दायरे में ही सीमित रखा। इस बजट में कलाकारों की फीस, एक्शन सीक्वेंस, भव्य गानों की शूटिंग और यहां तक कि ब्याज की रकम भी शामिल है। फिल्म निर्माण की इस लागत को थिएटर्स में रिलीज होने से पहले ही डिजिटल प्लेटफॉर्म्स, सैटेलाइट राइट्स, म्यूजिक और ओवरसीज राइट्स के जरिए पूरी तरह सुरक्षित और रिकवर कर लिया गया था। यही वजह है कि फिल्म अब बॉक्स ऑफिस पर जो भी कलेक्शन कर रही है, वह फिल्म के निर्माताओं के लिए शुद्ध लाभ साबित हो रहा है। अहमद खान ने फिल्म की शूटिंग के दौरान समय प्रबंधन और अनुशासन पर विशेष जोर दिया। उन्होंने बताया कि इस विशालकाय स्टारकास्ट के साथ फिल्म की पूरी शूटिंग महज 75 शिफ्टों में संपन्न कर ली गई थी। प्रत्येक शिफ्ट की अवधि आठ घंटे निर्धारित थी, जिससे न केवल समय की बचत हुई बल्कि फिजूलखर्ची पर भी पूरी तरह लगाम लगी रही। शुरुआत में यह फिल्म साल 2024 के क्रिसमस के मौके पर रिलीज होने वाली थी, लेकिन इसके जटिल वीएफएक्स कार्य और बड़े पैमाने पर फैले शूटिंग शेड्यूल को दुरुस्त करने के लिए इसकी रिलीज को आगे बढ़ा दिया गया था। इसके बाद फिल्म को 26 जून 2026 को सिनेमाघरों में उतारा गया, जिसे दर्शकों का भरपूर प्यार मिल रहा है। बॉक्स ऑफिस पर फिल्म के प्रदर्शन की बात करें तो अक्षय कुमार अभिनीत इस फिल्म ने भारतीय बाजार में अब तक कुल 94.54 करोड़ रुपये का ग्रॉस कलेक्शन दर्ज कर लिया है। वहीं, वैश्विक स्तर पर भी फिल्म का प्रदर्शन बेहद शानदार रहा है, जहां इसने शुरुआती चार दिनों के भीतर ही 100 करोड़ रुपये की कमाई का आंकड़ा पार कर लिया है। ट्रेड एनालिस्ट्स का अनुमान है कि मौजूदा रुझानों को देखते हुए यह फिल्म अपने पहले वीकेंड के समाप्त होने तक 200 करोड़ रुपये के प्रतिष्ठित क्लब में आसानी से शामिल हो जाएगी। ‘वेलकम’ फ्रेंचाइजी की इस तीसरी किस्त में नाना पाटेकर और अनिल कपूर जैसे सदाबहार कलाकारों की कमी को लेकर भी अहमद खान और अक्षय कुमार ने स्थिति स्पष्ट की। अक्षय कुमार ने एक बातचीत में कहा कि वे दोनों ही इस फ्रेंचाइजी के अभिन्न अंग और परिवार के सदस्य की तरह हैं। इस बार कहानी की मांग और परिस्थितियों के चलते वे फिल्म का हिस्सा नहीं बन सके, लेकिन यदि भविष्य में इस फ्रेंचाइजी का चौथा भाग बनाया जाता है, तो उसमें नाना पाटेकर और अनिल कपूर की वापसी निश्चित रूप से होगी। फिलहाल सुनील शेट्टी, परेश रावल, जैकी श्रॉफ, रवीना टंडन, अरशद वारसी और राजपाल यादव जैसे कलाकारों से सजी यह फिल्म दर्शकों का मनोरंजन करने में पूरी तरह सफल साबित हो रही है।

राजनाथ सिंह के खिलाफ विशेषाधिकार नोटिस की मांग, कांग्रेस-सरकार आमने-सामने..

नई दिल्ली । ऑपरेशन सिंदूर को लेकर संसद में दिए गए बयान पर सियासी विवाद और तेज हो गया है। कांग्रेस ने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के खिलाफ विशेषाधिकार हनन की कार्यवाही शुरू करने की मांग करते हुए लोकसभा अध्यक्ष को नोटिस सौंपा है। विपक्ष का आरोप है कि ऑपरेशन के दौरान हुए सैन्य नुकसान को लेकर सदन में दी गई जानकारी वास्तविक तथ्यों से मेल नहीं खाती, जबकि सरकार ने इन आरोपों को पूरी तरह भ्रामक और संदर्भ से हटाकर पेश किया गया बताया है। कांग्रेस सांसद के.सी. वेणुगोपाल ने लोकसभा अध्यक्ष को भेजे पत्र में आरोप लगाया है कि रक्षा मंत्री ने ऑपरेशन सिंदूर पर चर्चा के दौरान ऐसा बयान दिया, जिससे यह संदेश गया कि अभियान में कोई भारतीय सैनिक शहीद नहीं हुआ। उनका कहना है कि बाद में आधिकारिक जानकारी में छह सैन्यकर्मियों के शहीद होने की पुष्टि हुई, जिससे संसद में दिए गए बयान पर सवाल खड़े होते हैं। कांग्रेस का कहना है कि यदि सदन के समक्ष तथ्यों से अलग जानकारी प्रस्तुत की गई है तो यह संसदीय परंपराओं और विशेषाधिकारों का गंभीर मामला है। पार्टी ने इसे संसद को गुमराह करने का मामला बताते हुए नियमों के तहत विशेषाधिकार हनन की कार्यवाही शुरू करने की मांग की है। विपक्ष का तर्क है कि राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे संवेदनशील विषयों पर संसद को सटीक और पूर्ण जानकारी दी जानी चाहिए। इस पूरे विवाद के केंद्र में ऑपरेशन सिंदूर के दौरान हुए सैन्य नुकसान को लेकर अलग-अलग व्याख्याएं हैं। कांग्रेस का दावा है कि बाद में सार्वजनिक हुई आधिकारिक जानकारी में पांच सेना के जवानों और एक वायुसेना कर्मी के शहीद होने की पुष्टि हुई। विपक्ष का कहना है कि यदि यह तथ्य पहले से उपलब्ध थे, तो संसद में उनका उल्लेख न होना गंभीर प्रश्न खड़े करता है। दूसरी ओर, रक्षा मंत्रालय ने कांग्रेस के आरोपों को सिरे से खारिज किया है। मंत्रालय का कहना है कि रक्षा मंत्री के भाषण के एक हिस्से को संदर्भ से अलग करके प्रस्तुत किया जा रहा है। सरकार के अनुसार, मंत्री का बयान उन दावों के जवाब में था जिनमें अभियान के दौरान भारतीय वायुसेना के पायलटों के मारे जाने की बात कही जा रही थी। मंत्रालय का कहना है कि पूरे भाषण को देखने पर स्पष्ट हो जाता है कि उनके वक्तव्य का आशय अलग था और उसे गलत तरीके से प्रस्तुत किया गया। यह विवाद ऐसे समय सामने आया है जब हाल ही में राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पर ऑपरेशन सिंदूर के दौरान शहीद हुए छह सैन्यकर्मियों के नाम शामिल किए गए। इसके बाद अभियान के दौरान हुए सैन्य बलिदान को लेकर राजनीतिक बहस और तेज हो गई है। विपक्ष इसे अपने आरोपों के समर्थन में प्रस्तुत कर रहा है, जबकि सरकार का कहना है कि शहीदों के सम्मान और अभियान से जुड़े तथ्यों को राजनीतिक विवाद का विषय नहीं बनाया जाना चाहिए। संसदीय मामलों के जानकारों के अनुसार, विशेषाधिकार हनन का नोटिस स्वीकार करना या नहीं करना पूरी तरह लोकसभा अध्यक्ष के अधिकार क्षेत्र में आता है। यदि प्रथम दृष्टया मामला बनता है तो आगे की संसदीय प्रक्रिया शुरू हो सकती है। फिलहाल इस मुद्दे पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बयानबाजी जारी है। ऑपरेशन सिंदूर को लेकर शुरू हुआ यह विवाद अब केवल सैन्य अभियान तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि संसद में दिए गए बयानों की विश्वसनीयता, संसदीय जवाबदेही और राजनीतिक पारदर्शिता पर भी चर्चा का विषय बन गया है। आने वाले दिनों में लोकसभा अध्यक्ष के निर्णय और सरकार की आगे की प्रतिक्रिया पर सभी की नजरें टिकी रहेंगी।

सनसनीखेज हत्याकांड के बाद लोहगढ़ फोर्ट में उमड़ी पर्यटकों की अनियंत्रित भीड़, ऐतिहासिक स्थलों के बदलते स्वरूप पर उठे गंभीर सवाल

नई दिल्ली । महाराष्ट्र के पुणे के निकट स्थित ऐतिहासिक लोहगढ़ किला इन दिनों अपनी गौरवशाली सैन्य विरासत और छत्रपति शिवाजी महाराज व पेशवाओं के शौर्य इतिहास के बजाय एक बेहद विचलित करने वाली वजह से देश भर में चर्चा का विषय बन गया है। हाल ही में इस किले में घटित हुए केतन अग्रवाल हत्याकांड के बाद से यहाँ आने वाले पर्यटकों की संख्या में अप्रत्याशित बढ़ोतरी दर्ज की गई है। चौंकाने वाली बात यह है कि किले में पहुँचने वाले इन नए पर्यटकों की रुचि इस ऐतिहासिक स्थल की वास्तुकला या इसके समृद्ध सांस्कृतिक अतीत को जानने में नहीं है, बल्कि वे उस विशिष्ट स्थान और गहरी खाई को देखने के लिए उत्सुक हैं जहाँ कथित तौर पर सिया गोयल ने अपने मंगेतर को धक्का देकर मौत के घाट उतार दिया था। स्थानीय स्तर पर और सोशल मीडिया पर इस त्रासदीपूर्ण स्थान को ‘सिया पॉइंट’ के रूप में प्रचारित किया जा रहा है, जिसने समाज के एक बड़े वर्ग को चिंता में डाल दिया है। इस घटना के बाद से लोहगढ़ किले में सप्ताहांत पर पर्यटकों की इतनी भारी भीड़ जमा हो रही है कि किले के संकरे रास्तों पर कई बार घंटों तक जाम की स्थिति बन जाती है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो और तस्वीरों से स्पष्ट है कि लोग उस खौफनाक मर्डर स्पॉट पर जाकर तस्वीरें खिंचवाने, सेल्फी लेने और रील बनाने की होड़ में लगे हैं। किसी अपराध स्थल या त्रासदी की जगह को एक पर्यटन स्थल के रूप में देखने की इस बढ़ती प्रवृत्ति को समाजशास्त्री और विशेषज्ञ ‘डार्क टूरिज्म’ (Dark Tourism) का नाम दे रहे हैं। जब लोग किसी ऐसी जगह की यात्रा करते हैं जिसका इतिहास या वर्तमान मृत्यु, विनाश, मानवीय त्रासदी या किसी जघन्य अपराध से जुड़ा हो, तो उसे इस श्रेणी में रखा जाता है। भारत में इस तरह का यह कोई पहला मामला नहीं है; इससे पहले मेघालय के चेरापूंजी में भी एक ऐसी ही पारिवारिक हत्या के बाद उस पहाड़ी को ‘सोनम पॉइंट’ कहा जाने लगा था और दिल्ली का कुख्यात बुराड़ी घर भी इसी तरह की उत्सुकता का केंद्र बना था। विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक स्तर पर डार्क टूरिज्म का एक ऐतिहासिक और गंभीर स्वरूप रहा है, जैसे पोलैंड का ऑशविट्ज़ प्रताड़ना शिविर या जलियांवाला बाग, जहाँ लोग इतिहास की त्रासदियों से सीख लेने, शोक संवेदना प्रकट करने और शहीदों को श्रद्धांजलि देने जाते हैं। इसके विपरीत, वर्तमान समय में सोशल मीडिया के प्रभाव के कारण जो नया डार्क टूरिज्म उभर रहा है, वह बेहद सतही और केवल सनसनीखेज मामलों से प्रेरित है। लोग केवल अपनी जिज्ञासा शांत करने और इंटरनेट पर डिजिटल सामग्री (रील्स और मीम्स) के माध्यम से व्यूज और लाइक्स बटोरने के लिए इन संवेदनशील और दर्दनाक स्थानों का रुख कर रहे हैं। किसी की असामयिक और क्रूर मौत को मनोरंजन या सोशल मीडिया कंटेंट का जरिया बना लेना एक बेहद खतरनाक सामाजिक बदलाव की ओर इशारा करता है। इस पूरे प्रकरण ने पुरातत्व विभाग, स्थानीय प्रशासन और इतिहासकारों के सामने भी एक नई चुनौती खड़ी कर दी है। सदियों पुराना लोहगढ़ किला, जो कभी मराठा साम्राज्य की सामरिक शक्ति का प्रतीक था और जहाँ लोग इतिहास की वीर गाथाओं को महसूस करने आते थे, उसकी पहचान को एक आपराधिक घटना के नाम पर री-ब्रांड करने की कोशिश की जा रही है। बुद्धिजीवियों का कहना है कि किसी ऐतिहासिक धरोहर के महत्व को इस तरह कमतर करना और उसे एक नकारात्मक छवि के साथ जोड़ना हमारी आने वाली पीढ़ियों के दृष्टिकोण को प्रभावित कर सकता है। प्रशासन के लिए भी इस प्रकार की अनियंत्रित और संवेदनहीन भीड़ को संभालना एक बड़ी कानून-व्यवस्था और सुरक्षा की समस्या बनता जा रहा है। लोहगढ़ किले की इस बदलती तस्वीर ने अंततः सामूहिक सामाजिक चेतना पर एक बड़ा सवालिया निशान लगा दिया है। चंद लाइक्स और कमेंट्स की चाहत में इंसानी संवेदनाओं और किसी परिवार के गहरे दुख का मजाक उड़ाने का यह चलन यह सोचने पर मजबूर करता है कि एक समाज के रूप में हम कितने असंवेदनशील होते जा रहे हैं। वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए यह आवश्यक हो गया है कि न केवल प्रशासन ऐसे संवेदनशील स्थलों पर रील बनाने और अनुचित फोटोग्राफी पर कड़े प्रतिबंध लगाए, बल्कि नागरिक समाज भी यह आत्मनिरीक्षण करे कि मनोरंजन और उत्सुकता की सीमा कहाँ समाप्त होनी चाहिए। किसी भी ऐतिहासिक स्थल की गरिमा को अक्षुण्ण रखना और मानवीय त्रासदियों के प्रति सम्मानजनक मौन बनाए रखना ही एक परिपक्व समाज की पहचान है।

ग्रहों के सेनापति और राजा बदलेंगे अपनी चाल, जगन्नाथ रथयात्रा और गुरु पूर्णिमा सहित जुलाई में सजेंगे महापर्व

नई दिल्ली । अंग्रेजी कैलेंडर के सातवें महीने जुलाई की शुरुआत के साथ ही भारतीय जनमानस में आध्यात्मिक और धार्मिक उत्सवों का एक नया दौर शुरू होने जा रहा है। इस वर्ष एक विशेष ज्योतिषीय और खगोलीय संयोग बन रहा है, जिसके तहत हिंदू पंचांग का पवित्र आषाढ़ मास लगभग पूरे जुलाई महीने में व्याप्त रहेगा। आषाढ़ महीने का प्रारंभ 30 जून से हो चुका है, जो आगामी 29 जुलाई तक अनवरत चलेगा। सनातन धर्म में आषाढ़ मास को विशेष तप, साधना और आत्मशुद्धि का समय माना गया है। यही कारण है कि इस पूरे महीने में देश भर में कई ऐतिहासिक और महत्वपूर्ण व्रत-त्योहार पूरी श्रद्धा के साथ मनाए जाएंगे, जिससे चारों ओर एक उत्सवमयी और आध्यात्मिक माहौल देखने को मिलेगा। मध्य प्रदेश । धार्मिक दृष्टि से इस महीने की सबसे बड़ी और महत्वपूर्ण घटना ‘चातुर्मास’ का प्रारंभ होना है। आगामी 25 जुलाई को देवशयनी एकादशी के पावन अवसर पर भगवान विष्णु चार महीनों के लिए योग निद्रा में चले जाएंगे, जिसके साथ ही चातुर्मास की शुरुआत हो जाएगी। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इन चार महीनों की अवधि में विवाह, मुंडन, यज्ञोपवीत और गृह प्रवेश जैसे सभी प्रकार के मांगलिक और शुभ कार्यों पर पूरी तरह से रोक लग जाती है और लोग अपना ध्यान केवल ईश्वर भक्ति और सात्विक जीवन पर केंद्रित करते हैं। इसके अलावा, महीने के पूर्वार्ध में 3 जुलाई को कृष्णपिंगल संकष्टी चतुर्थी, 10 जुलाई को योगिनी एकादशी और 12 जुलाई को मासिक शिवरात्रि का व्रत श्रद्धापूर्वक रखा जाएगा, जिसे लेकर श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह है। इस पवित्र महीने में तीर्थ स्थलों और प्रमुख मंदिरों में भारी भीड़ जुटने की संभावना है, क्योंकि 15 जुलाई से जहां आषाढ़ गुप्त नवरात्रि का शुभारंभ हो रहा है, वहीं ठीक अगले दिन यानी 16 जुलाई को ओडिशा के पुरी में भगवान जगन्नाथ की विश्व प्रसिद्ध भव्य रथयात्रा निकाली जाएगी। इस रथयात्रा को देखने और भगवान का आशीर्वाद लेने के लिए देश-विदेश से लाखों की संख्या में श्रद्धालु पुरी पहुंचते हैं। महीने के अंतिम चरण में 28 जुलाई को कोकिला व्रत रखा जाएगा और अगले दिन 29 जुलाई को आषाढ़ पूर्णिमा के अवसर पर गुरु पूर्णिमा का महापर्व मनाया जाएगा। इस दिन सनातन परंपरा के अनुसार शिष्य अपने गुरुओं का पूजन कर उनके प्रति कृतज्ञता प्रकट करते हैं, जिससे इस महीने का धार्मिक समापन बेहद गरिमापूर्ण ढंग से होगा। धार्मिक व्रतों के साथ-साथ ज्योतिषीय गणनाओं के आधार पर भी जुलाई का यह महीना देश-दुनिया और सभी 12 राशियों के लिए बेहद संवेदनशील और महत्वपूर्ण बदलावों वाला साबित होने जा रहा है। इस दौरान सौरमंडल के कई बड़े और प्रभावशाली ग्रह अपनी चाल, राशि और नक्षत्रों में परिवर्तन करेंगे। सबसे पहले 4 जुलाई को सुख-सुविधाओं के कारक शुक्र ग्रह सिंह राशि में प्रवेश करेंगे, जहां पहले से मौजूद केतु के साथ उनकी युति बनेगी। इसके तुरंत बाद 7 जुलाई को बुद्धि और वाणी के देवता बुध ग्रह अपनी वक्री अवस्था में ही मिथुन राशि में गोचर कर जाएंगे, जो व्यापार और संचार व्यवस्था को प्रभावित कर सकता है। ग्रहों के इस बड़े फेरबदल में एक महत्वपूर्ण खगोलीय घटना 14 जुलाई को होगी, जब ज्ञान और सुख-सौभाग्य के प्रदाता गुरु ग्रह (बृहस्पति) अस्त हो जाएंगे और अगस्त के मध्य तक इसी स्थिति में रहेंगे। गुरु के अस्त होने से धार्मिक अनुष्ठानों की पद्धतियों में कुछ समय के लिए बदलाव आता है। इसके पश्चात 16 जुलाई को ग्रहों के राजा सूर्य देव कर्क राशि में प्रवेश करेंगे, जिसे ‘कर्क संक्रांति’ के नाम से जाना जाता है। महीने के अंत में एक और बड़ा ज्योतिषीय बदलाव 27 जुलाई को देखने को मिलेगा, जब न्याय के देवता शनि देव कुंभ राशि में वक्री यानी उल्टी चाल चलना शुरू कर देंगे। शनि की यह वक्री चाल साल के अंत तक जारी रहेगी, जिसका गहरा राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक प्रभाव देश के विभिन्न हिस्सों में स्पष्ट रूप से दिखाई दे सकता है।

भारत बनाम इंग्लैंड टी20 सीरीज का आगाज आज श्रेयस अय्यर की टीम के सामने जीत की चुनौती जानें पूरी लाइव स्ट्रीमिंग डिटेल

नई दिल्ली । भारत और इंग्लैंड के बीच पांच मैचों की टी20 सीरीज का रोमांच बुधवार से शुरू होने जा रहा है। दोनों टीमों के बीच पहला मुकाबला इंग्लैंड के चेस्टर ली स्ट्रीट स्थित रिवरसाइड ग्राउंड में खेला जाएगा। भारतीय टीम हाल ही में आयरलैंड के खिलाफ टी20 सीरीज गंवाने के बाद मैदान पर उतर रही है ऐसे में कप्तान श्रेयस अय्यर की अगुआई में टीम इंडिया की कोशिश जीत के साथ नई शुरुआत करने की होगी। वहीं मेजबान इंग्लैंड अपने घरेलू हालात का पूरा फायदा उठाकर सीरीज में बढ़त हासिल करना चाहेगा। इस मुकाबले से पहले सबसे ज्यादा चर्चा युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी को लेकर हो रही है। 15 वर्षीय प्रतिभाशाली खिलाड़ी के अंतरराष्ट्रीय टी20 डेब्यू का इंतजार लगातार बढ़ता जा रहा है लेकिन टीम प्रबंधन के संकेत बताते हैं कि पहले मुकाबले में उन्हें मौका मिलना आसान नहीं होगा। आयरलैंड दौरे पर भी उन्हें अंतिम एकादश में जगह नहीं मिली थी जबकि सूर्यांश शेडगे और प्रिंस यादव को डेब्यू का अवसर दिया गया था। ऐसे में एक बार फिर यह सवाल बना हुआ है कि क्या वैभव को इंतजार करना पड़ेगा या टीम कोई बड़ा फैसला लेगी। भारतीय बल्लेबाजी पिछले कुछ समय से कठिन और तेज पिचों पर संघर्ष करती नजर आई है। इंग्लैंड की परिस्थितियां भी आयरलैंड जैसी मानी जा रही हैं जहां गेंदबाजों को अतिरिक्त उछाल और स्विंग मिलती है। ऐसे में भारतीय बल्लेबाजों को अपनी रणनीति में बदलाव करना होगा। इंग्लैंड के पास जोफ्रा आर्चर जोश टंग साकिब महमूद और सोनी बेकर जैसे तेज गेंदबाज हैं जबकि स्पिन विभाग में आदिल रशीद और रेहान अहमद जैसे अनुभवी खिलाड़ी मौजूद हैं जो किसी भी बल्लेबाजी क्रम को परेशानी में डाल सकते हैं। रिवरसाइड ग्राउंड की पिच भी गेंदबाजों के लिए मददगार मानी जाती है। यहां खेले गए टी20 अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों में औसत स्कोर करीब 138 रन रहा है जबकि सर्वोच्च स्कोर 195 रन का है। ऐसे आंकड़े बताते हैं कि बल्लेबाजों को शुरुआत से ही संभलकर खेलना होगा और छोटी गलतियां भी भारी पड़ सकती हैं। श्रेयस अय्यर के लिए यह सीरीज काफी अहम मानी जा रही है क्योंकि लगातार दूसरी टी20 सीरीज हारने से टीम पर दबाव बढ़ सकता है। दूसरी ओर इंग्लैंड अपनी मजबूत गेंदबाजी और घरेलू परिस्थितियों के दम पर सीरीज का विजयी आगाज करना चाहेगा। ऐसे में पहले मुकाबले में दोनों टीमों के बीच कड़ा संघर्ष देखने की पूरी उम्मीद है। भारत और इंग्लैंड के बीच पहला टी20 मुकाबला भारतीय समयानुसार रात 10 बजे शुरू होगा जबकि टॉस रात 9 बजकर 30 मिनट पर होगा। मुकाबले का सीधा प्रसारण सोनी स्पोर्ट्स नेटवर्क के चैनलों पर किया जाएगा जबकि लाइव स्ट्रीमिंग सोनीलिव एप पर उपलब्ध रहेगी। क्रिकेट प्रशंसकों को एक रोमांचक मुकाबले की उम्मीद है जहां दोनों टीमें जीत के साथ सीरीज की शुरुआत करने के इरादे से मैदान में उतरेंगी।