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भारतीय सेनाओं को मिलेगी नई ताकत, रक्षा खरीद परिषद ने 52 हजार करोड़ रुपये के अत्याधुनिक हथियारों और रक्षा प्रणालियों को दी मंजूरी

नई दिल्ली । भारतीय सशस्त्र बलों के आधुनिकीकरण की दिशा में केंद्र सरकार ने एक महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए लगभग 52 हजार करोड़ रुपये की लागत से अत्याधुनिक हथियारों और रक्षा प्रणालियों की खरीद को मंजूरी दे दी है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में हुई रक्षा खरीद परिषद की बैठक में यह फैसला लिया गया। इस निर्णय का उद्देश्य थल सेना, नौसेना और वायुसेना की युद्ध क्षमता, निगरानी व्यवस्था और सुरक्षा तंत्र को आधुनिक तकनीक से और अधिक सशक्त बनाना है। रक्षा मंत्रालय के अनुसार बदलते वैश्विक सुरक्षा परिदृश्य और आधुनिक युद्ध की चुनौतियों को देखते हुए सेनाओं को नवीनतम रक्षा प्रणालियों से लैस करना आवश्यक माना गया है। इसी उद्देश्य से कई उन्नत हथियार प्रणालियों और रक्षा उपकरणों की खरीद को स्वीकृति दी गई है, जिससे भविष्य की सुरक्षा आवश्यकताओं के अनुरूप सैन्य तैयारियों को मजबूती मिलेगी। स्वीकृत प्रस्तावों में एंटी-यूएवी इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सिस्टम ‘आकाश तरंग’ प्रमुख है। यह प्रणाली दुश्मन के ड्रोन की पहचान, निगरानी और उन्हें निष्क्रिय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। वर्तमान समय में ड्रोन आधारित खतरों में लगातार वृद्धि को देखते हुए इस तरह की प्रणाली को भारतीय सुरक्षा ढांचे के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। रक्षा खरीद परिषद ने मैन-पोर्टेबल एंटी टैंक गाइडेड मिसाइल की खरीद को भी मंजूरी दी है। यह हल्की और अत्यधिक प्रभावी मिसाइल प्रणाली युद्धक्षेत्र में टैंकों और बख्तरबंद वाहनों के विरुद्ध सैनिकों की क्षमता को मजबूत करेगी। इसके अलावा मध्यम दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल प्रणाली तथा वेरी शॉर्ट रेंज एयर डिफेंस सिस्टम को भी स्वीकृति मिली है। इन प्रणालियों से हवाई खतरों के विरुद्ध बहुस्तरीय सुरक्षा व्यवस्था और अधिक प्रभावी होगी। बैठक में टैंकों के लिए एक्टिव प्रोटेक्शन सिस्टम की खरीद को भी मंजूरी दी गई। यह तकनीक युद्ध के दौरान टैंकों पर होने वाले मिसाइल या रॉकेट हमलों का समय रहते पता लगाकर उन्हें निष्क्रिय करने में सक्षम होगी। इससे बख्तरबंद वाहनों की सुरक्षा और युद्धक्षेत्र में उनकी संचालन क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होने की उम्मीद है। रक्षा खरीद परिषद ने जेट आधारित कामिकाजे ड्रोन प्रणाली के अधिग्रहण को भी स्वीकृति दी है। यह आधुनिक ड्रोन तकनीक लक्ष्य की पहचान कर सटीक हमला करने में सक्षम मानी जाती है। भविष्य के युद्धों में ड्रोन आधारित हथियारों की बढ़ती भूमिका को देखते हुए इस प्रणाली को भारतीय सेनाओं की रणनीतिक क्षमता बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इन आधुनिक हथियारों और रक्षा प्रणालियों के शामिल होने से तीनों सेनाओं की परिचालन क्षमता में व्यापक सुधार होगा। सीमा सुरक्षा, हवाई रक्षा, निगरानी, टैंक सुरक्षा और सटीक हमले जैसी क्षमताओं को नई तकनीक का मजबूत समर्थन मिलेगा। साथ ही आधुनिक युद्ध की बदलती आवश्यकताओं के अनुरूप भारतीय सेना की तैयारी भी और बेहतर होगी। रक्षा क्षेत्र में यह निर्णय भारत की दीर्घकालिक सैन्य आधुनिकीकरण नीति का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है। नई रक्षा प्रणालियों के शामिल होने से न केवल देश की सुरक्षा क्षमता मजबूत होगी, बल्कि भविष्य की चुनौतियों से निपटने के लिए भारतीय सशस्त्र बल अधिक सक्षम और तकनीकी रूप से सुदृढ़ बन सकेंगे।

हेमा मालिनी संग सीन देने में हुई झिझक! नसीरुद्दीन शाह के इनकार के बाद मेकर्स ने निकाला अनोखा रास्ता

नई दिल्ली। हिंदी सिनेमा में कई बार ऐसे किस्से सामने आते हैं जो फिल्मों से ज्यादा उनकी शूटिंग के दौरान घटी घटनाओं की वजह से चर्चा में रहते हैं। कलाकार अक्सर अपने किरदार की जरूरत के अनुसार चुनौतीपूर्ण दृश्य निभाते हैं लेकिन कुछ मौके ऐसे भी आए जब कलाकारों ने व्यक्तिगत असहजता के कारण कुछ दृश्यों को करने से परहेज किया। ऐसा ही एक दिलचस्प किस्सा साल 1988 में रिलीज हुई फिल्म रिहाई से जुड़ा है जिसमें हेमा मालिनी और नसीरुद्दीन शाह अहम भूमिकाओं में नजर आए थे। बताया जाता है कि फिल्म की कहानी के अनुसार नसीरुद्दीन शाह और हेमा मालिनी के बीच एक रोमांटिक दृश्य फिल्माया जाना था। जब अभिनेता को इस दृश्य के बारे में जानकारी मिली तो उन्होंने इसे करने में असहजता जताई। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार नसीरुद्दीन शाह का मानना था कि हेमा मालिनी जैसी वरिष्ठ और प्रतिष्ठित अभिनेत्री के साथ इस तरह का दृश्य करना उनके लिए सहज नहीं था। उन्होंने निर्देशक से अपनी झिझक भी साझा की। कहा जाता है कि फिल्म की निर्देशक अरुणा राजे और स्वयं हेमा मालिनी ने उन्हें समझाने का प्रयास किया ताकि दृश्य कहानी की जरूरत के अनुसार पूरा किया जा सके। हालांकि अभिनेता अपने फैसले पर कायम रहे। इसके बाद फिल्म की टीम ने वैकल्पिक तरीका अपनाते हुए संबंधित दृश्य को बॉडी डबल की मदद से फिल्माने का निर्णय लिया। इस तरह फिल्म की शूटिंग पूरी की गई और कहानी के प्रवाह को भी बनाए रखा गया। फिल्म रिहाई अपने समय की अलग विषयवस्तु वाली फिल्मों में गिनी जाती है। इसमें ग्रामीण समाज महिलाओं के अकेलेपन सामाजिक बदलाव और रिश्तों की जटिलताओं को संवेदनशील तरीके से प्रस्तुत किया गया था। फिल्म में हेमा मालिनी के अलावा विनोद खन्ना नसीरुद्दीन शाह और नीना गुप्ता जैसे कलाकारों ने महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाईं। समीक्षकों ने इसकी कहानी और अभिनय की सराहना की थी। रिपोर्टों के मुताबिक इस फिल्म के लिए शुरुआत में अभिनेत्री स्मिता पाटिल पर भी विचार किया गया था। बाद में यह भूमिका हेमा मालिनी को मिली और उन्होंने मजबूत कहानी तथा महिला निर्देशक के साथ काम करने की इच्छा के चलते फिल्म स्वीकार की। एक इंटरव्यू में हेमा मालिनी ने भी बताया था कि अरुणा राजे के निर्देशन में काम करना उनके लिए एक विशेष अनुभव था और यही वजह थी कि उन्होंने यह फिल्म करने का फैसला लिया। आज भी रिहाई केवल अपनी कहानी के लिए ही नहीं बल्कि शूटिंग से जुड़े इन दिलचस्प किस्सों के कारण भी याद की जाती है। यह घटना इस बात का उदाहरण मानी जाती है कि कलाकारों की व्यक्तिगत सहजता और पेशेवर जरूरतों के बीच संतुलन बनाने के लिए फिल्म निर्माण के दौरान कई बार अलग-अलग समाधान तलाशने पड़ते हैं।

UCC की दिशा में महाराष्ट्र सरकार का बड़ा कदम, हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अगुवाई में बनेगी समिति

नई दिल्ली । महाराष्ट्र में यूनिफॉर्म सिविल कोड (यूसीसी) लागू करने की दिशा में राज्य सरकार ने महत्वपूर्ण पहल शुरू कर दी है। सरकार कानून का प्रारूप तैयार करने के लिए दो सप्ताह के भीतर एक विशेषज्ञ समिति गठित करने की तैयारी में है। प्रस्तावित समिति की अध्यक्षता हाईकोर्ट के एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश करेंगे और उसका मुख्य दायित्व यूसीसी से संबंधित कानूनी मसौदा तैयार करना होगा। हालांकि समिति के गठन, सदस्यों और कार्यक्षेत्र को अंतिम रूप दिया जाना अभी बाकी है। सरकारी स्तर पर चल रही तैयारियों के अनुसार समिति विभिन्न कानूनी, सामाजिक और प्रशासनिक पहलुओं का अध्ययन करेगी। इसके बाद राज्य में लागू किए जाने वाले संभावित कानून का विस्तृत प्रारूप तैयार किया जाएगा। सरकार का उद्देश्य ऐसा मसौदा तैयार करना है, जो संवैधानिक प्रावधानों और मौजूदा कानूनी व्यवस्था के अनुरूप हो तथा सभी आवश्यक पहलुओं को समाहित कर सके। राज्य सरकार की ओर से पहले ही संकेत दिए जा चुके हैं कि महाराष्ट्र में यूनिफॉर्म सिविल कोड लागू करने का निर्णय नीति स्तर पर लिया जा चुका है। इसी क्रम में विधानसभा में भी सरकार ने स्पष्ट किया था कि इस दिशा में आवश्यक कानूनी प्रक्रिया शुरू की जाएगी। प्रस्तावित समिति का गठन उसी प्रक्रिया का पहला औपचारिक चरण माना जा रहा है। यूनिफॉर्म सिविल कोड का उद्देश्य विवाह, तलाक, गोद लेने, उत्तराधिकार और संपत्ति के बंटवारे जैसे व्यक्तिगत नागरिक मामलों में सभी नागरिकों के लिए समान कानूनी व्यवस्था लागू करना है। वर्तमान में इन विषयों पर विभिन्न समुदायों के लिए अलग-अलग व्यक्तिगत कानून लागू हैं। यूसीसी का विचार इन सभी मामलों में एक समान नागरिक कानून लागू करने की अवधारणा पर आधारित है। सरकार का मानना है कि समान नागरिक संहिता से कानूनी व्यवस्था में एकरूपता आएगी और नागरिक अधिकारों के क्रियान्वयन में समानता सुनिश्चित करने में सहायता मिलेगी। साथ ही लैंगिक समानता, न्यायसंगत अधिकारों और समान अवसरों को भी इससे मजबूती मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। हालांकि इस विषय पर लंबे समय से विभिन्न सामाजिक, राजनीतिक और कानूनी स्तरों पर अलग-अलग मत भी सामने आते रहे हैं। विशेषज्ञ समिति के गठन के बाद उसके सुझावों और सिफारिशों के आधार पर कानून का प्रारूप तैयार किया जाएगा। इसके पश्चात सरकार आगे की विधायी प्रक्रिया अपनाएगी। यदि मसौदे को मंजूरी मिलती है तो इसे राज्य की विधानमंडलीय प्रक्रिया के तहत आगे बढ़ाया जाएगा। महाराष्ट्र सरकार की इस पहल को राज्य में समान नागरिक संहिता लागू करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक कदम माना जा रहा है। अब सभी की नजर प्रस्तावित समिति के गठन, उसके कार्यक्षेत्र और भविष्य में तैयार होने वाले विधेयक के स्वरूप पर रहेगी, क्योंकि यही दस्तावेज राज्य में यूसीसी लागू करने की प्रक्रिया की आधारशिला साबित होगा।

Balaram Krishi Mahotsav: किसानों से सीधे संवाद करेगी सरकार, सभी जिलों में होंगे कृषि महोत्सव; CM मोहन यादव ने दिए निर्देश

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Balaram Krishi Mahotsav: भोपाल। किसान कल्याण क्षैत्र में मध्यप्रदेश सरकार लगातार कार्य कर रही है। इसी कड़ी में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि कृषि कल्याण राज्य सरकार की सबसे बड़ी प्राथमिकताओं में शामिल है। खेती की लागत कम करने और किसानों की आय बढ़ाने के लिए सभी योजनाओं का मिशन मोड में क्रियान्वयन किया जाए। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि राजधानी से लेकर गांवों तक किसानों से सीधे संवाद के लिए विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जाएं। मुख्यमंत्री मंत्रालय में ‘कृषक कल्याण वर्ष 2026’ के तहत अब तक हुए कार्यों की समीक्षा कर रहे थे। बैठक में किसान कल्याण एवं कृषि विकास मंत्री एदल सिंह कंसाना, मुख्य सचिव अनुराग जैन और अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।   मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने आज मंत्रालय में ‘कृषक कल्याण वर्ष’ के अंतर्गत संचालित कार्यक्रमों की समीक्षा कर आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। बैठक में कृषि मंत्री श्री ऐदल सिंह कंषाना व विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे।@DrMohanYadav51 @minmpkrishi @Aidalsinghkbjp #कृषक_कल्याण_वर्ष_2026… pic.twitter.com/Hvlfl0sbjS — Chief Minister, MP (@CMMadhyaPradesh) July 3, 2026   डेयरी और जैविक खेती पर रहेगा फोकस मुख्यमंत्री ने कहा कि किसानों की आय बढ़ाने में दुग्ध उत्पादन अहम भूमिका निभा सकता है। इसके लिए उन्नत नस्ल की गाय उपलब्ध कराने में निजी संस्थाओं का भी सहयोग लिया जाए। साथ ही कम पानी वाली फसलों, प्राकृतिक और जैविक खेती तथा फसल चक्र अपनाने के लिए किसानों को जागरूक करने के निर्देश दिए। चुनावी प्रक्रिया पर विपक्ष का बड़ा हमला, 23 दलों ने CJI सूर्यकांत को लिखा पत्र, निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने के लिए न्यायिक हस्तक्षेप की मांग सहकारी समितियों का होगा डिजिटलाइजेशन मुख्यमंत्री ने कहा कि किसानों को बेहतर और आसान सेवाएं देने के लिए सहकारी समितियों की प्रक्रियाओं का डिजिटलाइजेशन किया जाए। इसी महीने ऑनलाइन किसान क्रेडिट कार्ड पोर्टल और ई-पासबुक सुविधा भी शुरू की जाएगी। सभी जिलों में होंगे कृषि महोत्सव सरकार ने प्रदेश के सभी जिलों में बलराम कृषि महोत्सव आयोजित करने का फैसला किया है। इसके अलावा सभी संभागीय मुख्यालयों पर फूड फेस्टिवल आयोजित होंगे। उज्जैन में उत्कृष्ट किसानों और पशुपालकों को सम्मानित करने के लिए राज्य स्तरीय कार्यक्रम भी आयोजित किया जाएगा। उज्जैन का काल भैरव मंदिर क्यों है दुनिया भर में प्रसिद्ध, जानिए शराब के भोग और अनोखी मान्यता का रहस्य अलग-अलग जिलों में होंगे विशेष आयोजन सरकार की योजना के तहत खरगौन में किसान सम्मेलन और कपास-मिर्च महोत्सव, बुरहानपुर में केला महोत्सव, इंदौर में सब्जी महोत्सव और एक्वाकल्चर मार्केटिंग सिम्पोजियम, जबलपुर में मत्स्य पालन और कुक्कुट पालन सम्मेलन, नीमच में आधुनिक उद्यानिकी कार्यशाला, भोपाल में पराली प्रबंधन कार्यशाला और नरसिंहपुर में गन्ना महोत्सव का आयोजन किया जाएगा।

धार्मिक स्थल आवंटन पर नॉर्थस्टोव में विवाद, हिंदू संगठन का आवेदन खारिज, चर्च और मुस्लिम संस्थाओं को मिली जमीन

नई दिल्ली । ब्रिटेन के कैम्ब्रिजशायर स्थित नए विकसित शहर नॉर्थस्टोव में धार्मिक स्थल के लिए भूमि आवंटन को लेकर विवाद सामने आया है। स्थानीय काउंसिल द्वारा आरक्षित भूखंड चर्च नेटवर्क और एक मुस्लिम संगठन को 999 वर्ष की लीज पर दिए जाने के बाद हिंदू समुदाय ने फैसले पर निराशा व्यक्त की है। स्थानीय हिंदू संगठन का कहना है कि क्षेत्र में मंदिर नहीं होने के कारण लंबे समय से एक स्थायी पूजा स्थल की आवश्यकता महसूस की जा रही थी। मामला उस समय चर्चा में आया जब हिंदू समाज नॉर्थस्टोव नामक संगठन ने धार्मिक एवं सामुदायिक केंद्र स्थापित करने के उद्देश्य से भूमि आवंटन के लिए आवेदन किया था। संगठन के प्रस्ताव में मंदिर के साथ एक इंटरफेथ सेंटर और वेलनेस सेंटर विकसित करने की योजना भी शामिल थी। हालांकि काउंसिल ने आवेदन को तकनीकी कारणों का हवाला देते हुए स्वीकार नहीं किया और भूमि दूसरे आवेदकों को आवंटित कर दी। काउंसिल के निर्णय के बाद नॉर्थस्टोव और आसपास रहने वाले हिंदू परिवारों में निराशा देखी जा रही है। स्थानीय समुदाय का कहना है कि क्षेत्र में हिंदू आबादी लगातार बढ़ रही है, लेकिन अब तक उनके लिए कोई स्थायी मंदिर उपलब्ध नहीं है। धार्मिक आयोजनों और पूजा-पाठ के लिए उन्हें दूसरे शहरों की यात्रा करनी पड़ती है, जिससे नियमित धार्मिक गतिविधियां प्रभावित होती हैं। हिंदू समुदाय का दावा है कि यदि प्रस्ताव को मंजूरी मिलती तो यह केवल पूजा स्थल तक सीमित नहीं रहता, बल्कि विभिन्न समुदायों के बीच संवाद और सामाजिक सहभागिता को बढ़ावा देने वाला केंद्र भी बन सकता था। उनका कहना है कि इस परियोजना का उद्देश्य स्थानीय स्तर पर सांस्कृतिक गतिविधियों, आध्यात्मिक कार्यक्रमों और सामुदायिक सहयोग को मजबूत करना था। दूसरी ओर चर्च और मुस्लिम समुदाय के प्रतिनिधियों ने भूमि आवंटन का स्वागत किया है। मुस्लिम संगठन के प्रतिनिधियों का कहना है कि नॉर्थस्टोव में रहने वाले मुस्लिम परिवारों के लिए नियमित नमाज और धार्मिक शिक्षा के उद्देश्य से स्थायी स्थान की आवश्यकता लंबे समय से महसूस की जा रही थी। उनका मानना है कि नए परिसर से समुदाय की धार्मिक और सामाजिक जरूरतों को पूरा करने में सहायता मिलेगी। इस पूरे घटनाक्रम ने धार्मिक समानता और सार्वजनिक संसाधनों के आवंटन को लेकर नई चर्चा शुरू कर दी है। स्थानीय स्तर पर कई लोगों का कहना है कि तेजी से विकसित हो रहे शहरों में सभी प्रमुख समुदायों की धार्मिक आवश्यकताओं को संतुलित ढंग से ध्यान में रखा जाना चाहिए ताकि किसी भी वर्ग में उपेक्षा की भावना न पैदा हो। फिलहाल काउंसिल की ओर से यही कहा गया है कि आवेदन निर्धारित प्रक्रिया और तकनीकी मानकों के आधार पर परखे गए थे तथा उसी के अनुरूप निर्णय लिया गया। वहीं हिंदू समुदाय के प्रतिनिधि आगे की संभावित कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रिया पर विचार कर रहे हैं। आने वाले समय में यह मामला स्थानीय प्रशासन, सामुदायिक संगठनों और विभिन्न धार्मिक समूहों के बीच चर्चा का महत्वपूर्ण विषय बना रह सकता है।

जब एक ही गाने ने बना दिया रिकॉर्ड! 20 मिनट के इस देशभक्ति ट्रैक की कहानी जानकर रह जाएंगे हैरान

नई दिल्ली। हिंदी सिनेमा में गीत केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं बल्कि फिल्मों की आत्मा माने जाते हैं। कई बार किसी फिल्म की कहानी भले ही दर्शकों के दिलों में खास जगह न बना पाए लेकिन उसके गाने वर्षों तक लोगों की जुबान पर बने रहते हैं। बॉलीवुड के इतिहास में ऐसे कई गीत हैं जिन्होंने लोकप्रियता के नए रिकॉर्ड बनाए लेकिन एक गीत ऐसा भी है जिसने अपनी असाधारण लंबाई के कारण अलग पहचान हासिल की। यह गीत फिल्म अब तुम्हारे हवाले वतन साथियों का टाइटल ट्रैक है जिसे हिंदी फिल्मों के सबसे लंबे गीतों में गिना जाता है। साल 2004 में रिलीज हुई इस फिल्म का शीर्षक गीत लगभग 20 मिनट की अवधि का है। फिल्म में इसे एक साथ नहीं बल्कि तीन अलग-अलग हिस्सों में प्रस्तुत किया गया है ताकि कहानी का प्रवाह बना रहे और भावनात्मक प्रभाव भी कायम रहे। इस गीत में देशभक्ति वीरता बलिदान और सैनिकों के सम्मान की भावना को बेहद प्रभावशाली ढंग से दिखाया गया है। यही वजह है कि यह गीत आज भी देशभक्ति गीतों की सूची में खास स्थान रखता है। इस गीत का संगीत मशहूर संगीतकार अनु मलिक ने तैयार किया था। भव्य ऑर्केस्ट्रा दमदार बोल और भावनात्मक प्रस्तुति ने इसे सामान्य फिल्मी गीतों से अलग पहचान दिलाई। गीत के हर हिस्से में सैनिकों के त्याग परिवारों की भावनाएं और राष्ट्र के प्रति समर्पण को प्रमुखता से उभारा गया है। यही कारण है कि यह केवल मनोरंजन का साधन नहीं बल्कि देशभक्ति का संदेश देने वाला एक सशक्त संगीतात्मक प्रस्तुतीकरण बन गया। फिल्म अब तुम्हारे हवाले वतन साथियों का निर्देशन अनिल शर्मा ने किया था। इसमें अमिताभ बच्चन अक्षय कुमार बॉबी देओल दिव्या खोसला कुमार संदली सिन्हा और नगमा जैसे कलाकार प्रमुख भूमिकाओं में नजर आए थे। कहानी भारतीय सेना की तीन पीढ़ियों के संघर्ष बलिदान और आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई पर आधारित थी। फिल्म को समीक्षकों से सराहना मिली लेकिन बॉक्स ऑफिस पर यह उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन नहीं कर सकी। हालांकि फिल्म व्यावसायिक रूप से सफल नहीं रही लेकिन इसका शीर्षक गीत समय के साथ अपनी अलग पहचान बनाने में सफल रहा। देशभक्ति के अवसरों पर आज भी यह गीत कई मंचों और कार्यक्रमों में सुनाई देता है। इसकी लंबाई के बावजूद दर्शकों की भावनाओं को अंत तक बांधे रखने की क्षमता इसे विशेष बनाती है। भारतीय सिनेमा में इतने लंबे गीत बहुत कम देखने को मिलते हैं। यही वजह है कि अब तुम्हारे हवाले वतन साथियों का टाइटल ट्रैक आज भी बॉलीवुड के सबसे लंबे और यादगार देशभक्ति गीतों में शामिल माना जाता है। यह गीत केवल एक संगीत रचना नहीं बल्कि देश के वीर जवानों के साहस समर्पण और बलिदान को श्रद्धांजलि देने वाला भावनात्मक दस्तावेज बन चुका है।

चुनावी प्रक्रिया पर विपक्ष का बड़ा हमला, 23 दलों ने CJI सूर्यकांत को लिखा पत्र, निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने के लिए न्यायिक हस्तक्षेप की मांग

नई दिल्ली । देश की चुनावी प्रक्रिया और लोकतांत्रिक संस्थाओं की निष्पक्षता को लेकर राजनीतिक बहस एक बार फिर तेज हो गई है। इंडिया गठबंधन से जुड़े 23 राजनीतिक दलों ने भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत को संयुक्त पत्र भेजकर चुनावी व्यवस्था से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर चिंता व्यक्त की है। विपक्षी दलों ने पत्र में न्यायपालिका से हस्तक्षेप की अपील करते हुए कहा है कि स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव लोकतंत्र की मूल आधारशिला हैं और इनकी विश्वसनीयता बनाए रखना सभी संवैधानिक संस्थाओं की साझा जिम्मेदारी है। संयुक्त पत्र में विपक्षी दलों ने आरोप लगाया है कि वर्तमान परिस्थितियों में चुनावी प्रक्रिया को लेकर व्यापक स्तर पर संदेह और अविश्वास का वातावरण बन रहा है। उनका कहना है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था की मजबूती के लिए आवश्यक है कि चुनाव पूरी तरह निष्पक्ष, पारदर्शी और सभी राजनीतिक दलों के लिए समान अवसर सुनिश्चित करने वाले हों। इसी उद्देश्य से उन्होंने सर्वोच्च न्यायालय से संवैधानिक दायरे में आवश्यक हस्तक्षेप करने का अनुरोध किया है। पत्र में चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर भी कई सवाल उठाए गए हैं। विपक्षी दलों का आरोप है कि चुनावी प्रक्रिया के दौरान आयोग का रवैया पूरी तरह निष्पक्ष दिखाई नहीं देता। उनका कहना है कि आचार संहिता के उल्लंघन से जुड़े मामलों में समान मानकों का पालन नहीं किया गया और कई अवसरों पर सत्ताधारी दल के नेताओं के खिलाफ अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई। विपक्ष ने यह भी आरोप लगाया कि कई मामलों में विपक्षी दलों के प्रति आयोग का दृष्टिकोण अपेक्षाकृत कठोर रहा। पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि लोकतांत्रिक संस्थाओं पर जनता का विश्वास बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है। विपक्षी दलों का कहना है कि जब किसी भी संवैधानिक व्यवस्था पर सवाल उठते हैं तो न्यायपालिका नागरिकों और राजनीतिक दलों के लिए अंतिम संवैधानिक मंच के रूप में सामने आती है। इसलिए उन्होंने न्यायपालिका से चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कदम उठाने का अनुरोध किया है। इससे पहले भी चुनावी प्रक्रिया से जुड़े कुछ मुद्दों को लेकर न्यायिक हस्तक्षेप की मांग सामने आ चुकी है। हाल के दिनों में विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया तथा अन्य चुनाव संबंधी विषयों को लेकर भी सर्वोच्च न्यायालय का ध्यान आकर्षित करने के प्रयास किए गए थे। अब विपक्षी दलों के संयुक्त पत्र ने इस पूरे मुद्दे को एक बार फिर राष्ट्रीय राजनीतिक विमर्श के केंद्र में ला दिया है। विपक्षी दलों का कहना है कि उनका उद्देश्य किसी संवैधानिक संस्था की गरिमा को चुनौती देना नहीं है, बल्कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में जनता का विश्वास बनाए रखना है। पत्र में इस बात पर भी जोर दिया गया है कि मजबूत लोकतंत्र के लिए सभी संवैधानिक संस्थाओं का स्वतंत्र, निष्पक्ष और जवाबदेह तरीके से कार्य करना आवश्यक है। उनका मानना है कि चुनावी प्रक्रिया की विश्वसनीयता लोकतंत्र की स्थिरता और जनविश्वास से सीधे जुड़ी हुई है। फिलहाल इस संयुक्त पत्र पर सर्वोच्च न्यायालय की ओर से कोई औपचारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। वहीं चुनाव आयोग और केंद्र सरकार की ओर से भी इस पत्र में लगाए गए आरोपों पर कोई आधिकारिक टिप्पणी जारी नहीं की गई है। ऐसे में आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर न्यायिक और राजनीतिक स्तर पर होने वाली गतिविधियों पर सभी की नजर बनी रहेगी।

अगस्त में शुक्र का कन्या राशि में होने जा रहा बड़ा गोचर, ग्रहों के इस महा-परिवर्तन से 7 भाग्यशाली राशियों की आर्थिक स्थिति और बैंक बैलेंस में आएगा भारी उछाल

नई दिल्ली । भारतीय ज्योतिष शास्त्र में ग्रहों के राशि परिवर्तन को मानव जीवन और देश-दुनिया पर व्यापक प्रभाव डालने वाली एक अत्यंत महत्वपूर्ण घटना माना गया है। इसी सिलसिले में आगामी 1 अगस्त 2026 को सुख, समृद्धि, वैभव और ऐश्वर्य के कारक माने जाने वाले शुक्र देव अपनी राशि बदलने जा रहे हैं। शुक्र देव का प्रवेश कन्या राशि में होने जा रहा है, जहां वे आगामी 8 जून तक विराजमान रहेंगे। ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार, शुक्र का यह गोचर मुख्य रूप से 7 राशियों के जीवन में सकारात्मक बदलाव, करियर में उन्नति और वित्तीय स्थिति में भारी सुधार लेकर आने वाला है। ग्रहों के इस बड़े फेरबदल से सबसे अधिक लाभान्वित होने वाली राशियों में मेष राशि के जातक शामिल हैं। शुक्र के प्रभाव से इस राशि के लोगों के लिए आर्थिक उन्नति के नए मार्ग प्रशस्त होंगे और लंबे समय से अटके हुए प्रशासनिक या व्यावसायिक कार्य गति पकड़ेंगे। इसके साथ ही कार्यक्षेत्र में नई जिम्मेदारियां और पद प्रतिष्ठा मिलने के भी प्रबल योग बन रहे हैं। वहीं, वृषभ राशि के जातकों के लिए, जिनके स्वयं के राशि स्वामी शुक्र हैं, यह गोचर आत्मविश्वास में अभूतपूर्व वृद्धि करने वाला साबित होगा। पारिवारिक जीवन में सुख-शांति का माहौल रहेगा और पूर्व में किए गए निवेशों से इस दौरान बड़ा वित्तीय लाभ मिलने की संभावना है। मिथुन राशि के जातकों के लिए भी आगामी समय पूरी तरह से अनुकूल दिखाई दे रहा है। समाज और कार्यस्थल पर उनके मान-सम्मान में वृद्धि होगी और वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा उनके काम की सराहना की जाएगी। धन संचय के मामले में कर्क राशि के लोगों के लिए यह गोचर भाग्यशाली सिद्ध हो सकता है। उनके लिए धन प्राप्ति के नए और स्थायी योग बन रहे हैं, जिससे व्यापारिक दृष्टिकोण से जुड़े जातकों को अपने कारोबार का विस्तार करने में बड़ी मदद मिलेगी। सिंह राशि के जातकों के जीवन में यह ग्रह परिवर्तन भौतिक सुख-सुविधाओं और विलासिता की वस्तुओं में बढ़ोतरी लेकर आएगा। पुराने समय से चले आ रहे विवादों और मानसिक तनावों से मुक्ति मिलने के कारण इस राशि के लोगों का मन प्रसन्न रहेगा। इसके अतिरिक्त, वृश्चिक राशि के लोगों की सामाजिक प्रतिष्ठा में इजाफा होगा। इस अवधि में उन्हें अपने मित्रों और परिवार के सदस्यों का भरपूर सहयोग मिलेगा, जिसकी मदद से वे अपने बिगड़े हुए कार्यों को दोबारा पटरी पर लाने में सफल रहेंगे। धनु राशि के नौकरीपेशा और करियर निर्माण में लगे युवाओं के लिए यह गोचर बड़ी सफलता की सौगात लेकर आ रहा है। इस राशि के जातकों को अपनी नौकरी में पदोन्नति यानी प्रमोशन और वेतन वृद्धि के बेहतरीन अवसर प्राप्त हो सकते हैं। ज्योतिषविदों का कहना है कि यद्यपि यह गोचर इन सभी 7 राशियों के लिए वित्तीय और व्यावसायिक मोर्चे पर बेहद शुभ फल लेकर आ रहा है, लेकिन इस सकारात्मक ऊर्जा को और अधिक मजबूत करने के लिए जातकों को शुक्रवार के दिन विशेष रूप से मां लक्ष्मी की आराधना करनी चाहिए। इसके साथ ही अपने दैनिक कार्यों में ईमानदारी, पारदर्शिता और धैर्य बनाए रखना ही अंतिम सफलता का मुख्य आधार बनेगा।

बिहार सरकार ने वापस लिया सुरक्षा में कटौती का फैसला, लालू प्रसाद यादव और राबड़ी देवी की 'Z' श्रेणी की सुरक्षा समेत बुलेटप्रूफ गाड़ियां दोबारा बहाल

नई दिल्ली । बिहार की सियासत में पिछले कुछ दिनों से सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चल रहा हाई-प्रोफाइल विवाद अब एक नए मोड़ पर पहुंच गया है। राज्य सरकार ने एक बड़ा प्रशासनिक और राजनीतिक निर्णय लेते हुए राष्ट्रीय जनता दल के अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव और पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी की सुरक्षा व्यवस्था को दोबारा चाक-चौबंद करने का आदेश जारी किया है। सरकार के नए फैसले के मुताबिक, दोनों वरिष्ठ नेताओं की ‘Z’ श्रेणी की सुरक्षा को तत्काल प्रभाव से बहाल कर दिया गया है। इसके साथ ही दोनों नेताओं को राज्य सरकार की ओर से पुनः बुलेटप्रूफ गाड़ियां भी उपलब्ध करा दी गई हैं, जिससे इस मुद्दे पर जारी गतिरोध के फिलहाल थमने के आसार हैं। इस पूरे प्रशासनिक विवाद की शुरुआत कुछ समय पहले हुई थी, जब बिहार सरकार के गृह विभाग ने वीआईपी नेताओं की सुरक्षा व्यवस्था की उच्च स्तरीय समीक्षा की थी। इस समीक्षा बैठक के बाद सरकार ने लालू प्रसाद यादव और राबड़ी देवी को मिली ‘Z+’ श्रेणी की सुरक्षा को हटाने का निर्णय लिया था। सरकार के इस कदम के बाद बिहार की राजनीति में अचानक उबाल आ गया था और विपक्षी खेमे ने इस फैसले को लेकर सत्तापक्ष के खिलाफ मोर्चा खोल दिया था। राष्ट्रीय जनता दल ने इस प्रशासनिक कटौती को पूरी तरह से राजनीतिक प्रतिशोध से प्रेरित बताया था। सुरक्षा में की गई इस कटौती के विरोध में लालू प्रसाद यादव और राबड़ी देवी ने एक कड़ा और प्रतीकात्मक कदम उठाते हुए अपनी बची हुई शेष सरकारी सुरक्षा को भी प्रशासन को वापस लौटा दिया था। दोनों पूर्व मुख्यमंत्रियों द्वारा सरकारी सुरक्षा सरेंडर किए जाने की घटना ने राज्य के राजनीतिक गलियारों में भारी हलचल पैदा कर दी थी। राष्ट्रीय जनता दल ने सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया था कि सत्तापक्ष जानबूझकर विपक्षी नेताओं को निशाना बना रहा है और उनके जीवन को खतरे में डालने का प्रयास किया जा रहा है। यह विवाद उस समय और अधिक गहरा गया जब बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव भी इस विरोध प्रदर्शन में शामिल हो गए। तेजस्वी यादव ने सरकार के इस फैसले को विपक्ष के साथ किया जाने वाला खुला भेदभाव करार दिया था और एकजुटता दिखाते हुए अपनी स्वयं की सरकारी सुरक्षा भी प्रशासन को वापस सौंप दी थी। एक साथ तीन शीर्ष नेताओं द्वारा सुरक्षा लौटाए जाने के बाद सरकार चौतरफा दबाव में आ गई थी और इस मुद्दे पर प्रशासनिक स्तर पर नए सिरे से विचार करना अनिवार्य हो गया था। विपक्ष के इस कड़े और आक्रामक रुख को देखते हुए आखिरकार बिहार सरकार को बैकफुट पर आना पड़ा और अपने पुराने फैसले की समीक्षा करनी पड़ी। सरकार के नए आदेश के तहत अब लालू प्रसाद यादव और राबड़ी देवी को न सिर्फ ‘Z’ श्रेणी की कड़े घेरे वाली सुरक्षा वापस मिल गई है, बल्कि सुरक्षा प्रोटोकॉल के तहत आवश्यक बुलेटप्रूफ वाहन भी उनके काफिले में दोबारा शामिल कर दिए गए हैं। इस निर्णय के बाद राजद कैंप में इसे विपक्ष की नैतिक जीत के रूप में देखा जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि राज्य में आगामी राजनीतिक समीकरणों और कानून व्यवस्था की संवेदनशीलता को देखते हुए सरकार ने इस विवाद को और अधिक लंबा न खींचना ही उचित समझा। हालांकि सुरक्षा बहाली के इस नए फैसले के बाद फिलहाल दोनों पक्षों के बीच जारी बयानबाजी और टकराव पर विराम लगने की उम्मीद जताई जा रही है, लेकिन इस घटनाक्रम ने बिहार की राजनीति में सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच की कड़वाहट को एक बार फिर सार्वजनिक रूप से उजागर कर दिया है।

फीफा वर्ल्ड कप में केप वर्डे के ऐतिहासिक संघर्ष के आगे पस्त होने से बची अर्जेंटीना, एक्स्ट्रा टाइम के रोमांचक मुकाबले में लियोनेल मेसी के रिकॉर्ड गोल से नॉकआउट में बनाई जगह

नई दिल्ली । फीफा वर्ल्ड कप में मौजूदा चैंपियन अर्जेंटीना और पहली बार इस वैश्विक मंच पर खेल रही केप वर्डे की टीम के बीच मियामी गार्डन्स में खेला गया मुकाबला फुटबॉल इतिहास के सबसे रोमांचक मैचों में शुमार हो गया है। इस बेहद चुनौतीपूर्ण मुकाबले में अर्जेंटीना ने अंततः केप वर्डे को 3-2 से पराजित कर राउंड ऑफ-16 में अपनी जगह पक्की कर ली है। पश्चिमी अफ्रीका के तट पर स्थित एक बेहद छोटे से द्वीपीय देश केप वर्डे ने विश्व विजेता टीम को आखिरी पलों तक कड़ी टक्कर दी, जिससे चैंपियन टीम टूर्नामेंट से बाहर होते-होते बची। मैच का फैसला निर्धारित 90 मिनटों में नहीं हो सका और मुकाबला एक्स्ट्रा टाइम में खींचा गया। अर्जेंटीना की जीत का निर्णायक मोड़ एक्स्ट्रा टाइम के 111वें मिनट में आया, जब क्रिस्टियन रोमेरो के एक दमदार हेडर को रोकने के प्रयास में गेंद केप वर्डे के डिफेंडर डाइनी बोर्जेस से टकराकर सीधे नेट में चली गई। बोर्जेस का यह ओन गोल अर्जेंटीना के लिए जीवनदान साबित हुआ, जिसने टीम को 3-2 की निर्णायक बढ़त दिला दी, जो मैच के अंतिम समय तक बरकरार रही। इससे पहले, मुकाबले की शुरुआत में अर्जेंटीना के स्टार खिलाड़ी और कप्तान लियोनेल मेसी ने मैच के 29वें मिनट में लिसांद्रो मार्टिनेज के एक बेहतरीन लॉन्ग पास को नियंत्रित करते हुए गोलकीपर वोजिन्हा के ऊपर से शानदार शॉट लगाकर टीम को 1-0 की शुरुआती बढ़त दिलाई थी। इसके बाद एक्स्ट्रा टाइम के 103वें मिनट में लिसांद्रो मार्टिनेज ने खुद गोल दागकर टीम का स्कोर 2-1 कर दिया था। हालांकि, केप वर्डे की जुझारू टीम ने मैच में दो बार शानदार वापसी की। सिडनी लोपेस कैब्राल और डेरॉय डुआर्टे ने अर्जेंटीना की रक्षापंक्ति को भेदते हुए दो बार बराबरी के गोल दागे, जिसने स्टेडियम में मौजूद अर्जेंटीना के प्रशंसकों को हैरान कर दिया था। हार का सामना करने के बावजूद केप वर्डे की टीम ने अपने पहले ही वर्ल्ड कप अभियान से दुनिया भर के फुटबॉल प्रेमियों का दिल जीत लिया है। इस छोटे से देश ने ग्रुप चरण में स्पेन, उरुग्वे और सऊदी अरब जैसी दिग्गज टीमों के खिलाफ ड्रॉ खेलकर नॉकआउट चरण का टिकट कटाया था। अर्जेंटीना के खिलाफ मुकाबले में भी केप वर्डे के 40 वर्षीय अनुभवी गोलकीपर वोजिन्हा ने अद्भुत खेल का प्रदर्शन किया। उन्होंने मैच के दौरान मेसी के पांच तीखे प्रहारों सहित कुल 10 शानदार गोल होने से रोके, जिसने अर्जेंटीना को लंबे समय तक बैकफुट पर रखा। इस मैच में किए गए गोल के साथ ही कप्तान लियोनेल मेसी ने अपने नाम कई बड़े कीर्तिमान भी दर्ज कर लिए हैं। यह मेसी के अंतरराष्ट्रीय करियर का 20वां वर्ल्ड कप गोल था, जिसके साथ ही वह मौजूदा टूर्नामेंट में सर्वाधिक गोल करने वाले खिलाड़ियों की सूची में फ्रांस के किलियन एम्बाप्पे से आगे निकल गए हैं। मेसी का वर्ल्ड कप के लगातार आठ मैचों में स्कोर करने का रिकॉर्ड भी अब और मजबूत हो गया है, जिसमें वे अब तक कुल 12 गोल कर चुके हैं। इस ऐतिहासिक जीत के बाद अब राउंड ऑफ-16 में अर्जेंटीना का सामना मिस्र की टीम से आगामी मंगलवार को अटलांटा में होगा।