शरद पवार की शिंदे से मुलाकात ने बढ़ाई सियासी हलचल, महाराष्ट्र की राजनीति में नए समीकरणों की चर्चा तेज

मुंबई। महाराष्ट्र विधानसभा परिसर में मंगलवार को हुई एक मुलाकात ने राजनीतिक गलियारों में नई चर्चाओं को जन्म दे दिया। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) के प्रमुख शरद पवार ने उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे से विधान भवन में मुलाकात की। औपचारिक तौर पर इसे शिष्टाचार भेंट माना जा रहा है, लेकिन इसके समय और परिस्थितियों को देखते हुए इसे राजनीतिक नजरिए से भी अहम माना जा रहा है। शरद पवार महाराष्ट्र-कर्नाटक सीमा विवाद के मुद्दे पर महाराष्ट्र एकीकरण समिति की बैठक में शामिल होने के लिए विधान भवन पहुंचे थे। बैठक के बाद वे सीधे उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के कार्यालय पहुंचे। इस दौरान उनके साथ पार्टी के वरिष्ठ नेता जयंत पाटील, जितेंद्र आव्हाड और शशिकांत शिंदे भी मौजूद थे। उस समय एकनाथ शिंदे कैबिनेट बैठक में व्यस्त थे, लेकिन पवार के पहुंचने की जानकारी मिलते ही उन्होंने बैठक बीच में रोककर उनका स्वागत किया। दोनों नेताओं के बीच करीब 15 मिनट तक बातचीत हुई। राजनीतिक हलकों में इसे शिंदे की ओर से शरद पवार के प्रति सम्मान और संवाद की पहल के रूप में देखा जा रहा है। मुलाकात के बाद शिंदे दोबारा कैबिनेट बैठक में लौट गए, जबकि शरद पवार कुछ देर तक उनके कार्यालय में रुककर अपने विधायकों के साथ चर्चा करते रहे। हाल के दिनों में शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के छह सांसद एकनाथ शिंदे गुट में शामिल हुए थे। इसके बाद यह अटकलें भी लगाई जा रही थीं कि शिंदे की नजर अब शरद पवार गुट के जनप्रतिनिधियों पर भी हो सकती है। ऐसे माहौल में पवार का स्वयं शिंदे के कार्यालय पहुंचना कई राजनीतिक संदेशों से जोड़कर देखा जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस मुलाकात से शरद पवार ने अपने विधायकों और नेताओं को यह संकेत देने की कोशिश की कि पार्टी नेतृत्व हर राजनीतिक गतिविधि पर नजर बनाए हुए है। इससे संभावित टूट-फूट की अटकलों के बीच पार्टी कार्यकर्ताओं और जनप्रतिनिधियों का मनोबल बनाए रखने का प्रयास भी माना जा रहा है। इस मुलाकात को मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के लिए भी एक अप्रत्यक्ष राजनीतिक संदेश के तौर पर देखा जा रहा है। फडणवीस के बजाय सीधे उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे से मुलाकात कर पवार ने यह संकेत दिया कि वे सत्ता पक्ष के सभी प्रमुख नेताओं के साथ संवाद बनाए रखने की क्षमता रखते हैं। राजनीतिक मामलों में बातचीत के रास्ते खुले रखने की रणनीति शरद पवार की पहचान मानी जाती है। हालांकि, इस 15 मिनट की बातचीत में किन मुद्दों पर चर्चा हुई, इसका खुलासा अब तक किसी भी पक्ष ने नहीं किया है। ऐसे में राजनीतिक विश्लेषक इस मुलाकात को आगामी राजनीतिक समीकरणों और रणनीतियों से जोड़कर देख रहे हैं। आने वाले दिनों में ही इस मुलाकात के वास्तविक राजनीतिक मायने स्पष्ट हो सकेंगे।
राजस्थान: सरकारी नौकरी के लिए आयुषी ने रची साजिश, भाई को जमीन का दिया लालच, बोलीं- बस..मां को मरवा दे

जयपुर । राजस्थान में जयपुर के एयरपोर्ट कॉलोनी में ढाई साल पहले कोर्ट में एलडीसी विजय वशिष्ठ उर्फ विजय शर्मा ने घर बनाया था जिसमें पत्नी निरज शर्मा, बेटी आयुषी शर्मा और मानसिक रूप से कमज़ोर बेटे के साथ रहता था. एक साल पहले विजय शर्मा की मौत हो जाती है. तब बेटी आयुषी शर्मा ने 12 th पास किया था. जब पिता की जगह अनुकंपा पर नौकरी करने की बारी आई तो बेटी ने कहा कि मुझे नौकरी दे दो. मां तैयार भी हो गई. लेकिन निरज शर्मा का भाई और आयुषी का मामा भी अपने जीजा जी के साथ लोअर कोर्ट में एलडीसी था उसने बहन को कहा कि तुम भी पढ़ी लिखी हो. तुम्हारी जिंदगी पड़ी है और 16 साल का बेटा मानसिक दिव्यांग है उसकी देख भाल कौन करेगा. बेटी को पढ़ा लिखा कर लायक बना देंगे. मां ने दिव्यांग बेटे के खातिर पति की जगह नौकरी कर ली. चचेरे भाई के साथ रहने लगी आयुषीइससे नाराज होकर 24 साल की बेटी आयुषी पिता के कल्याण कॉलोनी स्थित पुराने घर में जाकर रहने लगी और अपने ताऊ मोहन स्वरूप शर्मा के बेटे बलराम के साथ एलएलबी में एडमिशन ले लिया. दोनों चचेरे भाई बहन साथ रहने लगे. उसी दौरान आयुषी ने कहा कि मुझे अपनी मां को मारना है. अगर तुम मेरी मदद करोगे तो आगरा रोड की पांच करोड़ की पांच बीघा जमीन और भरतपुर के पांच करोड़ की चार बीघा जमीन तुझे दे दूंगी. मुझे मां के मरने के बाद नौकरी मिल जाएगी और जयपुर का दोनों घर मेरे पास हैं. डील तय होने के बाद दोनों ने निरज शर्मा के जेठ और बलराम के पिता मोहन को यह बात बताई. मां को घर से बाहर लाने के लिए टोटकेआयुषी ने प्लान बनाया कि मां को गाड़ी से कुचलकर मार देंगे और हादसे का रूप दे देंगे. इसके बाद निरज शर्मा के जेठ मोहन शर्मा ने भरतपुर में हेमंत शर्मा से संपर्क साधा. एक महीने पहले हेमंत ने थार गाड़ी से निरज को घर के बाहर कुचलने की कोशिश की मगर निरज बच गई. मगर उसे शक हो गया था. उसने यह बात अपने भाई को बताई और घर से निकलना बंद कर दिया. उसके बाद मां को घर से निकालने के लिए आयुषी ने नए नए टोना टोटके के तरीके अपनाना शुरू किया. निंबू – मिर्चा और लाल रंग फेंकना शुरू कर दिया. निरज समझ गई थी खतरा है तो उसने पूरे घर में जाली लगाकर बाहर चार सीसीटीवी कैमरे लगा दिए थे. सुपारी किलर को दिए 7 लाखआयुषी को मां को मारने की जल्दी थी उसने फिर से अपने ताऊ को कहा प्लान बनाओ. ताउ मोहन शर्मा ने भरतपुर के रूपावास के हेमंत शर्मा से संपर्क किया. हेमंत ने उनको प्लान दिया और उसके बदले 7 लाख रूपए मांगे. फिर हेमंत ने हरियाणा नंबर का स्कॉर्पियो भरतपुर से 35 हजार में किराए पर ली और निरजा को कुचलने के लिए आकाश शर्मा और अरविंद शर्मा को हायर किया. निरज के रैकी के लिए रोहित और मोहित को हायर किया गया. मामा से रोते हुए बोली- मां मर गई है4 जुलाई को जब निरज अपने बेटे को लेकर फिजियोथैरेपिस्ट के यहां गई थी तो बेटी ने उसे जरूरी काम से घर आने के लिए कहा. निरज जब घर लौट रही थी तो 60 फीट पर रोड पर मोटरसाइकिल पर बैठे मोहित और रोहित ने इंतज़ार कर रहे स्कॉर्पियो में बैठे आकाश को इशारा किया. आकाश ने गाड़ी को सौ से ज्यादा की स्पीड से किनारे चल रही निरजा को टक्कर मारी जिससे वो 100 मीटर उछल कर गिरी और मौत हो गई. मां के मरने के बाद बेटी ने मामा को रोते हुए फोन किया कि मां का एक्सीडेंट हो गया और वो मर गई. ताउ तुरंत घर पहुंचा और शव को लेकर गांव रूपावास चले गए. मगर मामा को भांजी के हाव भाव को देखकर शक हुआ तो पुलिस से केवल इतना ही कहा कि एक्सीडेंट की जांच कर लो. पुलिस ने जब सीसीटीवी को खंगालना शुरू किया तो देखा निरज शर्मा तो सड़क पर बिल्कुल हीं किनारे चल रही थी और 60 फीट की चौड़ी सड़क पूरी खाली थी. पुलिस को शक गहराया तो आसपास के दूसरे सीसीटीवी खँगालना शुरू किया तो देख कि कुछ दूरी पर स्कॉर्पियो काफी पहले से खड़ी थी. दो लड़के दो सड़कों पर खड़े थे. …रुके भी नहीं पास में मौजूद लड़के?हादसे के बाद दोनों लड़के निरजा के शव को देखे बिना सीधे निकल जाते हैं और आगे जाकर एक मोटरसाइकिल सवार के साथ बैठकर निकल जाते है. पुलिस सीसीटीवी तलाशती आगे बढ़ी तो क्षतिग्रस्त स्कॉर्पियो मिला. जब स्कॉर्पियो के मालिक को पकड़ा तो उसने हेमंत शर्मा को किराये पर देना बताया. फिर हेमंत शर्मा को पकड़ा तो उसने आयुषी के ताउ मोहन शर्मा का नाम बताया. इस बीच चचेरा भाई बलराम भाग गया. पुलिस जब गांव रूपावास पहुंची तो कानून के छात्र आयुषी ने पुलिस को धमकाना शुरू कर दिया. फिर पुलिस ने भरतपुर के सेवर थाने के पुलिसकर्मियों और गांव वालों की मदद से आयुषी को उसके ताई के साथ थाने तक ये कहकर लाए कि बयान लेकर छोड़ देंगे. फिर ताई को घर भेजकर सीधे जयपुर लेकर आए जहाँ आरोपियों के सामने देख आयुषी ने सब क़ुबूल कर लिया.आयुषी को अपने किए पर कोई पछतावा नहीं है . पुलिस को उल्टे सीधे जवाब देती है. आजतक के कैमरे पर हमने उससे बहुत पूछना चाहा लेकिन बेहद शातिर आयुषी ने कुछ नहीं बोला.
खून की कमी से बचने के लिए बदलें खानपान की आदतें, आयरन युक्त सुपरफूड्स और विटामिन C से मिल सकता है बेहतर पोषण

नई दिल्ली । शरीर में हीमोग्लोबिन का स्तर सामान्य बनाए रखना अच्छे स्वास्थ्य के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। हीमोग्लोबिन रक्त का वह प्रमुख घटक है जो शरीर के विभिन्न अंगों तक ऑक्सीजन पहुंचाने का कार्य करता है। जब इसका स्तर कम होने लगता है तो व्यक्ति को लगातार थकान, कमजोरी, चक्कर आना, सांस फूलना और दैनिक कार्यों में ऊर्जा की कमी जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। महिलाओं, बच्चों और गर्भवती महिलाओं में यह समस्या अपेक्षाकृत अधिक देखने को मिलती है। ऐसे में संतुलित और पोषणयुक्त आहार अपनाना स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। विशेषज्ञों के अनुसार, केवल आयरन ही नहीं बल्कि फोलेट, विटामिन बी12 और विटामिन सी भी शरीर में हीमोग्लोबिन के निर्माण और आयरन के बेहतर अवशोषण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इसलिए भोजन में ऐसे खाद्य पदार्थों को शामिल करना चाहिए जो इन सभी आवश्यक पोषक तत्वों से भरपूर हों। यदि लंबे समय तक हीमोग्लोबिन का स्तर कम बना रहे तो चिकित्सकीय जांच और उचित उपचार भी आवश्यक होता है। पालक को आयरन, फोलेट और विटामिन ए का अच्छा स्रोत माना जाता है। नियमित रूप से पालक की सब्जी, सूप या अन्य रूपों में इसका सेवन शरीर को आवश्यक पोषक तत्व उपलब्ध कराने में मदद कर सकता है। इसके साथ विटामिन सी युक्त खाद्य पदार्थ लेने से आयरन के अवशोषण में भी सहायता मिल सकती है। इसी तरह चुकंदर में आयरन, फोलेट और अन्य पोषक तत्व पाए जाते हैं। हालांकि केवल चुकंदर के सेवन से ही हीमोग्लोबिन बढ़ने का दावा वैज्ञानिक रूप से पर्याप्त नहीं माना जाता, इसलिए संतुलित आहार सबसे महत्वपूर्ण है। अनार भी पोषण से भरपूर फलों में शामिल है। इसमें आयरन के साथ विटामिन सी और एंटीऑक्सीडेंट पाए जाते हैं, जो शरीर को आवश्यक पोषण देने में सहायक हो सकते हैं। वहीं गुड़ और भुना चना पारंपरिक रूप से लोकप्रिय संयोजन हैं। गुड़ में सीमित मात्रा में आयरन होता है जबकि भुना चना प्रोटीन और अन्य पोषक तत्वों का अच्छा स्रोत माना जाता है। हालांकि मधुमेह के मरीजों को गुड़ का सेवन चिकित्सकीय सलाह के अनुसार ही करना चाहिए। दालें, राजमा, लोबिया और चना जैसे खाद्य पदार्थ आयरन तथा प्रोटीन से भरपूर होते हैं। इन्हें नियमित भोजन का हिस्सा बनाने से शरीर को आवश्यक पोषण मिल सकता है। अंकुरित अनाज और दालें भी स्वास्थ्य के लिए लाभकारी मानी जाती हैं। इसके अलावा खजूर और किशमिश जैसे सूखे मेवों में आयरन सहित कई महत्वपूर्ण खनिज पाए जाते हैं, जो सीमित मात्रा में सेवन करने पर ऊर्जा और पोषण प्रदान कर सकते हैं। आयरन युक्त भोजन के साथ संतरा, मौसमी, आंवला, नींबू और अमरूद जैसे विटामिन सी से भरपूर फलों का सेवन भी लाभकारी माना जाता है क्योंकि ये शरीर में आयरन के अवशोषण को बेहतर बनाने में मदद करते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि केवल किसी एक खाद्य पदार्थ पर निर्भर रहने के बजाय संतुलित आहार, पर्याप्त पानी, नियमित स्वास्थ्य जांच और स्वस्थ जीवनशैली अपनाना आवश्यक है। यदि लगातार कमजोरी, चक्कर आना या हीमोग्लोबिन कम रहने की शिकायत बनी रहे तो स्वयं दवा लेने के बजाय चिकित्सक से परामर्श लेकर उचित जांच और उपचार कराना सबसे सुरक्षित और प्रभावी उपाय माना जाता है।
Skin Care Tips: महंगे ब्यूटी प्रोडक्ट छोड़िए दही से करें प्राकृतिक स्किन केयर हर मौसम में मिलेगा ग्लोइंग और हेल्दी चेहरा

नई दिल्ली । दही भारतीय रसोई का ऐसा खाद्य पदार्थ है जो स्वाद और सेहत दोनों के लिए बेहद फायदेमंद माना जाता है लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि यह त्वचा की देखभाल के लिए भी किसी प्राकृतिक ब्यूटी ट्रीटमेंट से कम नहीं है। दही में मौजूद लैक्टिक एसिड प्रोटीन कैल्शियम विटामिन बी और प्राकृतिक प्रोबायोटिक्स त्वचा को पोषण देने के साथ उसे साफ मुलायम और चमकदार बनाने में मदद करते हैं। नियमित और सही तरीके से दही का उपयोग करने से त्वचा की कई सामान्य समस्याओं से राहत मिल सकती है और महंगे ब्यूटी प्रोडक्ट्स पर निर्भरता भी कम हो सकती है। दही का सबसे बड़ा फायदा यह है कि यह त्वचा को गहराई से मॉइस्चराइज करता है। जिन लोगों की त्वचा रूखी और बेजान रहती है उनके लिए दही एक बेहतरीन प्राकृतिक मॉइस्चराइजर का काम करता है। चेहरे पर दही की पतली परत लगाकर लगभग पंद्रह से बीस मिनट तक छोड़ने के बाद सादे पानी से धोने पर त्वचा पहले से अधिक मुलायम और ताजगी भरी महसूस होती है। गर्मी और धूप के कारण होने वाली टैनिंग को कम करने में भी दही काफी असरदार माना जाता है। इसमें मौजूद लैक्टिक एसिड त्वचा की मृत कोशिकाओं को हटाने में मदद करता है जिससे चेहरा साफ और चमकदार दिखाई देता है। यदि दही में थोड़ा सा बेसन या चावल का आटा मिलाकर फेस पैक बनाया जाए तो त्वचा की गहराई से सफाई होती है और प्राकृतिक निखार बढ़ता है। मुंहासों और ऑयली स्किन से परेशान लोगों के लिए भी दही लाभकारी हो सकता है। दही में मौजूद अच्छे बैक्टीरिया त्वचा का संतुलन बनाए रखने में मदद करते हैं जबकि इसका हल्का एक्सफोलिएटिंग प्रभाव रोमछिद्रों की सफाई करने में सहायक होता है। हालांकि जिन लोगों की त्वचा बहुत अधिक संवेदनशील है उन्हें पहले त्वचा के एक छोटे हिस्से पर इसका परीक्षण कर लेना चाहिए। अगर चेहरे पर हल्के दाग धब्बे या पिगमेंटेशन की समस्या है तो दही में थोड़ा सा शहद या हल्दी मिलाकर लगाया जा सकता है। यह मिश्रण त्वचा को पोषण देने के साथ रंगत को निखारने में मदद कर सकता है। नियमित उपयोग से त्वचा अधिक स्वस्थ और समान रंग की दिखाई देने लगती है। आंखों के नीचे की थकान कम करने के लिए भी ठंडे दही का हल्का प्रयोग किया जा सकता है जिससे त्वचा को ठंडक और ताजगी मिलती है। विशेषज्ञों का मानना है कि प्राकृतिक उपाय तभी प्रभावी होते हैं जब उनका नियमित और संतुलित उपयोग किया जाए। दही का इस्तेमाल सप्ताह में दो से तीन बार करना पर्याप्त माना जाता है। चेहरे पर लगाने से पहले त्वचा को अच्छी तरह साफ कर लें और उपयोग के बाद हल्के गुनगुने या सामान्य पानी से चेहरा धो लें। यदि किसी प्रकार की एलर्जी जलन या त्वचा संबंधी गंभीर समस्या हो तो त्वचा विशेषज्ञ की सलाह लेना बेहतर रहता है। स्वस्थ और चमकदार त्वचा केवल बाहरी देखभाल से नहीं बल्कि संतुलित आहार पर्याप्त पानी नियमित नींद और स्वस्थ जीवनशैली से भी जुड़ी होती है। दही को अपने भोजन और स्किन केयर रूटीन दोनों में शामिल करके त्वचा को प्राकृतिक रूप से स्वस्थ और दमकता हुआ बनाए रखा जा सकता है।
एमपी में मानसूनी गतिविधियां जारी, आज ग्वालियर-चंबल समेत कई जिलों में भारी बारिश की चेतावनी

भोपाल। मध्य प्रदेश में मानसून पूरी तरह सक्रिय है और प्रदेशभर में लगातार बारिश का दौर जारी है। कहीं तेज तो कहीं रुक-रुककर हो रही वर्षा के कारण कई जिलों में जनजीवन प्रभावित हुआ है। बुधवार को 20 से अधिक जिलों में अच्छी बारिश दर्ज की गई, जिससे कई सड़कें और संपर्क मार्ग बाधित हो गए। मौसम विभाग ने गुरुवार के लिए भिंड जिले में अति भारी बारिश का रेड अलर्ट जारी किया है। वहीं मुरैना, ग्वालियर, दतिया, शिवपुरी, निवाड़ी, टीकमगढ़, राजगढ़, आगर-मालवा और रतलाम में भारी बारिश को लेकर ऑरेंज अलर्ट घोषित किया गया है। इसके अलावा नीमच, उज्जैन, शाजापुर, श्योपुर, गुना, अशोकनगर, विदिशा, सागर, दमोह, छतरपुर और पन्ना जिलों में भी भारी वर्षा होने की संभावना जताई गई है। मौसम विभाग के अनुसार अगले 24 घंटे में प्रदेश के उत्तरी हिस्से में तेज बारिश का असर सबसे अधिक देखने को मिल सकता है। भोपाल-इंदौर समेत कई जिलों में बारिश के आसारगुरुवार को भोपाल, रायसेन, सीहोर, राजगढ़, इंदौर, झाबुआ, आलीराजपुर, धार, बुरहानपुर, बड़वानी, खंडवा, खरगोन, देवास, नर्मदापुरम, बैतूल, हरदा, जबलपुर, कटनी, नरसिंहपुर, छिंदवाड़ा, पांढुर्णा, सिवनी, बालाघाट, मंडला, डिंडौरी, रीवा, सतना, सीधी, सिंगरौली, मऊगंज, मैहर, शहडोल, उमरिया और अनूपपुर में भी बारिश होने का अनुमान है। कई जिलों में उफान पर रहे नदी-नालेबुधवार को लगातार हुई बारिश के चलते प्रदेश के कई हिस्सों में नदी-नाले उफान पर रहे। सेंधवा के ग्रामीण इलाकों में जलभराव और तेज बहाव के कारण जनजीवन प्रभावित हुआ। मौसम विभाग के अनुसार दमोह में पौने दो इंच, नर्मदापुरम में 1.1 इंच तथा खजुराहो और टीकमगढ़ में पौन इंच बारिश दर्ज की गई। जबलपुर, खरगोन और बैतूल में करीब आधा इंच वर्षा रिकॉर्ड हुई। इसके अलावा दतिया, धार, ग्वालियर, खंडवा, रतलाम, श्योपुर, उज्जैन, छिंदवाड़ा, मंडला, नरसिंहपुर, नौगांव, सागर, सतना, सिवनी, बालाघाट, मंदसौर, शाजापुर, पन्ना, बड़वानी, देवास और सीहोर में भी अच्छी बारिश हुई। तापमान में आई गिरावटलगातार बारिश के कारण प्रदेशभर में अधिकतम तापमान में कमी दर्ज की गई। पांच प्रमुख शहरों में इंदौर का अधिकतम तापमान 28 डिग्री सेल्सियस, जबलपुर 28.5 डिग्री, उज्जैन 29.2 डिग्री, ग्वालियर 29.7 डिग्री और भोपाल 30.4 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। प्रदेश में सबसे अधिक तापमान सीधी में 33.6 डिग्री सेल्सियस और सबसे कम छिंदवाड़ा में 25.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज हुआ। सामान्य से 10 प्रतिशत अधिक हुई बारिशइस बार जून महीने में प्रदेश में आंधी और बारिश का दौर जारी रहने के बावजूद सामान्य से लगभग 30 प्रतिशत कम वर्षा दर्ज की गई थी। हालांकि जुलाई के शुरुआती आठ दिनों में हुई तेज बारिश ने यह कमी पूरी कर दी है। अब तक मध्य प्रदेश में कुल 223.7 मिमी (करीब 9 इंच) बारिश दर्ज की जा चुकी है, जो सामान्य 202.5 मिमी (8.1 इंच) वर्षा से 10 प्रतिशत अधिक है। प्रदेश के पूर्वी हिस्से में अब भी सामान्य से 10 प्रतिशत कम बारिश हुई है, जबकि पश्चिमी क्षेत्र में औसत से 30 प्रतिशत अधिक वर्षा रिकॉर्ड की गई है।
Aaj Ka Rashifal 9 July 2026: कुंभ राशि वालों की बढ़ेगी आय और मजबूत होगा बजट, जानें सभी 12 राशियों का भविष्यफल

नई दिल्ली । 9 जुलाई 2026 का दैनिक राशिफल। जानिए मेष से मीन तक सभी 12 राशियों के लिए करियर, कारोबार, धन, परिवार, स्वास्थ्य और प्रेम जीवन के लिहाज से कैसा रहेगा गुरुवार का दिन। मेषआज आत्मविश्वास में बढ़ोतरी होगी। कार्यक्षेत्र में नई जिम्मेदारियां मिल सकती हैं। आर्थिक मामलों में सोच समझकर निर्णय लें। परिवार का सहयोग मिलेगा। स्वास्थ्य सामान्य रहेगा। वृषभनौकरी और व्यापार में नए अवसर मिल सकते हैं। पुराने रुके हुए काम पूरे होने के संकेत हैं। खर्चों पर नियंत्रण रखें। जीवनसाथी के साथ संबंध मधुर रहेंगे। मिथुनआज दिन व्यस्त रहेगा लेकिन मेहनत का पूरा लाभ मिलेगा। विद्यार्थियों के लिए समय अनुकूल है। किसी अनुभवी व्यक्ति की सलाह आपके लिए फायदेमंद साबित होगी। कर्कपारिवारिक मामलों में धैर्य बनाए रखें। भावनाओं में बहकर कोई बड़ा फैसला न लें। कार्यक्षेत्र में सहयोगियों का साथ मिलेगा। सेहत को लेकर लापरवाही न करें। सिंहभाग्य का साथ मिलेगा। नौकरी में पद और प्रतिष्ठा बढ़ने के योग हैं। व्यापार में लाभ की स्थिति बनेगी। किसी शुभ समाचार से परिवार में खुशी का माहौल रहेगा। कन्याआज आर्थिक मामलों में सतर्कता जरूरी है। निवेश करने से पहले अच्छी तरह विचार करें। कार्यस्थल पर आपकी मेहनत की सराहना होगी। यात्रा के योग बन सकते हैं। तुलासाझेदारी के कार्यों में सफलता मिल सकती है। दांपत्य जीवन सुखद रहेगा। नए लोगों से मुलाकात भविष्य में लाभदायक साबित होगी। स्वास्थ्य अच्छा रहेगा। वृश्चिकआज धैर्य और संयम से काम लेना होगा। अनावश्यक विवादों से बचें। नौकरी में नई जिम्मेदारियां मिल सकती हैं। परिवार के साथ समय बिताने का अवसर मिलेगा। धनुकरियर में आगे बढ़ने के नए रास्ते खुल सकते हैं। आर्थिक स्थिति पहले से बेहतर होगी। विद्यार्थियों को सफलता मिलने के संकेत हैं। धार्मिक कार्यों में रुचि बढ़ेगी। मकरआज संपत्ति और निवेश से जुड़े मामलों में लाभ मिल सकता है। कार्यक्षेत्र में वरिष्ठ अधिकारियों का सहयोग मिलेगा। परिवार में सुख शांति बनी रहेगी। कुंभआज का दिन आर्थिक दृष्टि से बेहद शुभ रहने वाला है। आय के नए स्रोत बनने की संभावना है और आपका बजट पहले की तुलना में अधिक मजबूत होगा। नौकरी और व्यापार में लाभ मिलेगा। लंबे समय से रुका हुआ धन वापस मिलने के योग हैं। परिवार में खुशियां रहेंगी और भविष्य की योजनाओं पर काम आगे बढ़ेगा। मीनआज सोच समझकर फैसले लेने की आवश्यकता है। किसी पुराने मित्र से मुलाकात हो सकती है। कार्यक्षेत्र में सफलता मिलेगी। स्वास्थ्य और खानपान का विशेष ध्यान रखें। शाम का समय परिवार के साथ आनंदपूर्वक बीतेगा। आज का शुभ रंग: आसमानीआज का शुभ अंक: 7
पूजा घर में भूलकर भी न रखें ये चीजें, ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार सुख-समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा पर पड़ सकता है असर

नई दिल्ली । भारतीय परंपरा में घर का मंदिर केवल पूजा-अर्चना का स्थान नहीं माना जाता, बल्कि इसे आस्था, आध्यात्मिकता और सकारात्मक वातावरण का केंद्र भी समझा जाता है। ज्योतिष और वास्तु शास्त्र की पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार पूजा स्थल की स्वच्छता, व्यवस्था और पवित्रता का विशेष महत्व होता है। माना जाता है कि यदि मंदिर में अनावश्यक या अशुभ मानी जाने वाली वस्तुएं जमा हो जाएं तो उसका प्रभाव घर के वातावरण पर पड़ सकता है। हालांकि इन मान्यताओं का वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध नहीं है और इन्हें धार्मिक एवं सांस्कृतिक विश्वासों के रूप में ही देखा जाता है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार भगवान को अर्पित किए गए फूल और मालाएं श्रद्धा का प्रतीक होती हैं, लेकिन जब वे पूरी तरह सूख जाएं या मुरझा जाएं तो उन्हें लंबे समय तक मंदिर में रखना उचित नहीं माना जाता। ऐसी वस्तुओं को समय-समय पर हटाकर ताजे फूल अर्पित करने की परंपरा कई परिवारों में आज भी निभाई जाती है। इससे पूजा स्थल स्वच्छ और व्यवस्थित बना रहता है। पूजा घर में कैंची, चाकू, सुई, पिन या अन्य नुकीली वस्तुएं रखने से भी बचने की सलाह दी जाती है। पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार इन वस्तुओं को पूजा स्थल की सात्विकता के अनुकूल नहीं माना जाता। इसलिए सुविधा के लिए भी इन्हें मंदिर में रखने के बजाय अलग स्थान पर रखना बेहतर समझा जाता है। शंख को भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी से जुड़ा पवित्र प्रतीक माना जाता है। कुछ ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार सामान्य पूजा के लिए एक शंख पर्याप्त माना जाता है। बिना किसी विशेष धार्मिक परंपरा या अनुष्ठान के एक से अधिक शंख रखने की सलाह नहीं दी जाती। हालांकि विभिन्न संप्रदायों और धार्मिक परंपराओं में इस विषय पर अलग-अलग मान्यताएं भी देखने को मिलती हैं। दीपक या अगरबत्ती जलाने के बाद बची हुई जली माचिस की तीलियां, राख या अन्य अवशेषों को भी पूजा स्थल में छोड़ना उचित नहीं माना जाता। नियमित सफाई करने और इन वस्तुओं को तुरंत हटाने की परंपरा का उद्देश्य मंदिर की स्वच्छता बनाए रखना माना जाता है। स्वच्छ वातावरण न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है, बल्कि सामान्य स्वास्थ्य और साफ-सफाई के लिए भी लाभकारी होता है। इसी प्रकार खंडित मूर्तियों या फटी हुई धार्मिक तस्वीरों को भी पूजा घर में रखने से बचने की सलाह दी जाती है। यदि किसी कारणवश मूर्ति खंडित हो जाए तो अनेक धार्मिक परंपराओं में उसका सम्मानपूर्वक विसर्जन या उचित धार्मिक विधि से स्थानांतरण करने की बात कही जाती है। इसे आस्था और श्रद्धा के सम्मान से जोड़कर देखा जाता है। विशेषज्ञों का कहना है कि पूजा स्थल को प्रतिदिन साफ रखना, नियमित रूप से दीप प्रज्वलित करना, ताजे फूल अर्पित करना और अनावश्यक वस्तुओं को हटाना अच्छी धार्मिक परंपरा मानी जाती है। साथ ही यह भी समझना आवश्यक है कि जीवन में आर्थिक प्रगति, मानसिक शांति और पारिवारिक सुख केवल वास्तु या ज्योतिषीय मान्यताओं पर निर्भर नहीं होते। मेहनत, अनुशासित जीवनशैली, सही निर्णय और सकारात्मक सोच भी सफलता तथा समृद्धि के महत्वपूर्ण आधार माने जाते हैं।
अभाविप : एक प्रासंगिक छात्र आंदोलन

– चेतस सुखाड़ियाभारत का छात्र आंदोलन केवल छात्रसंघ चुनावों या शैक्षणिक मांगों तक सीमित नहीं रहा है। स्वतंत्रता संग्राम से लेकर लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा, सामाजिक परिवर्तन और राष्ट्रनिर्माण तक विद्यार्थियों ने समय-समय पर अपनी सक्रिय भूमिका निभाई है। ऐसे में यह प्रश्न स्वाभाविक है कि बदलते समय, शिक्षा के उभरते नए आयाम, तकनीकी क्रांति और वैश्विक प्रतिस्पर्धा के दौर में छात्र संगठनों की प्रासंगिकता क्या है? यदि कोई छात्र संगठन समय के साथ स्वयं को समाज और राष्ट्र की आवश्यकताओं के अनुरूप ढालते हुए विद्यार्थियों के हितों और राष्ट्रीय दायित्वों के बीच संतुलन स्थापित करता है, तो उसकी प्रासंगिकता स्वतः सिद्ध होती है। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) इसी दृष्टि से भारत का एक प्रासंगिक छात्र आंदोलन है। जिसने स्वयं को कालसुसंगत बनाते हुए संपूर्ण विद्यार्थी समाज को अपने साथ जोड़ने कार्य किया है। 9 जुलाई 1949 को स्थापित अभाविप ने अपने आरंभ से ही छात्रशक्ति को राष्ट्रशक्ति के रूप में देखने का दृष्टिकोण प्रस्तुत किया। परिषद का मानना है कि विद्यार्थी केवल भविष्य का नागरिक नहीं, बल्कि वर्तमान का जागरूक और उत्तरदायी नागरिक भी है। इसलिए छात्र जीवन केवल डिग्री प्राप्त करने का काल नहीं, बल्कि व्यक्तित्व निर्माण, सामाजिक चेतना और राष्ट्रीय उत्तरदायित्व के विकास का महत्वपूर्ण चरण है। यही विचार परिषद के मूल मंत्र “ज्ञान, शील और एकता” में भी प्रतिबिंबित होता है। विद्यार्थी परिषद की प्रासंगिकता का सबसे बड़ा आधार यह है कि उसने छात्रहित और राष्ट्रहित को परस्पर विरोधी नहीं, बल्कि पूरक माना है। गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, पारदर्शी परीक्षा प्रणाली, समयबद्ध परिणाम, छात्रवृत्ति, छात्रावास, पुस्तकालय, अनुसंधान, कौशल विकास और रोजगारोन्मुख शिक्षा, नवाचार, स्टार्टअप जैसे विषयों पर परिषद लगातार सक्रिय रही है। देश के विभिन्न विश्वविद्यालयों में विद्यार्थियों की समस्याओं को लोकतांत्रिक माध्यमों से उठाने और उनके समाधान के लिए संवाद तथा आवश्यक होने पर आंदोलन—दोनों मार्गों का उपयोग परिषद की कार्यशैली का हिस्सा रहे हैं। किन्तु अभाविप केवल मांगों और आंदोलनों तक सीमित संगठन नहीं है। इसकी सबसे बड़ी विशेषता इसका रचनात्मक दृष्टिकोण है। परिषद का विश्वास है कि छात्र समाज का केवल आलोचक नहीं, बल्कि परिवर्तन का सक्रिय सहभागी होना चाहिए। इसी सोच के साथ संगठन ने शिक्षा परिसरों से बाहर समाज जीवन के अनेक क्षेत्रों में भी अपनी सक्रिय उपस्थिति दर्ज कराई है। परिषद के विविध आयाम, गतिविधि उसकी इसी व्यापक सोच को अभिव्यक्त करते हैं। स्टूडेंट्स फॉर डेवलपमेंट (SFD) के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण, जल संरक्षण, जैव विविधता, सतत विकास और पर्यावरणीय जागरूकता पर कार्य किया जाता है। स्टूडेंट्स फॉर सेवा (SFS) समाज के वंचित वर्गों तक शिक्षा, स्वास्थ्य और सेवा गतिविधियों को पहुँचाकर विद्यार्थियों में सामाजिक उत्तरदायित्व का भाव विकसित करता है। खेलो भारत अभियान युवाओं में खेल संस्कृति, अनुशासन और स्वस्थ जीवनशैली को प्रोत्साहित करता है, जबकि राष्ट्रीय कला मंच भारतीय कला, साहित्य, संगीत, रंगमंच और लोक परंपराओं को नई पीढ़ी से जोड़ने का कार्य करता है। वही एग्रीविजन, मीडिविजन, फार्मविजन, जिज्ञास, थिंक इंडिया, इंडिजीनियस जैसे विभिन्न आयामों से यह स्पष्ट है कि विद्यार्थी परिषद विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास को महत्व देती है। महिला सशक्तिकरण भी परिषद के कार्य का महत्वपूर्ण पक्ष है। छात्राओं की सुरक्षा, नेतृत्व विकास, शिक्षा में समान अवसर और आत्मविश्वास बढ़ाने के उद्देश्य से परिषद ने अनेक अभियान चलाए हैं। मिशन साहसी जैसे कार्यक्रमों के माध्यम से छात्राओं को आत्मरक्षा का प्रशिक्षण देकर उन्हें आत्मनिर्भर और आत्मविश्वासी बनाने का प्रयास किया गया। आज परिषद के संगठनात्मक ढाँचे में बड़ी संख्या में छात्राएँ नेतृत्वकारी भूमिका निभा रही हैं, जो इसकी समावेशी कार्यसंस्कृति का परिचायक है। वर्तमान समय में शिक्षा जगत नई चुनौतियों का सामना कर रहा है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता, डिजिटल तकनीक, वैश्विक प्रतिस्पर्धा, मानसिक स्वास्थ्य, रोजगार, स्टार्टअप संस्कृति और अनुसंधान जैसे विषय विद्यार्थियों के भविष्य को प्रभावित कर रहे हैं। ऐसे समय में केवल परीक्षा और डिग्री तक सीमित छात्र गतिविधि पर्याप्त नहीं हो सकती। आवश्यकता है बहुआयामी छात्र गतिविधि की है जो शिक्षा सुधार, नवाचार, सामाजिक संवेदनशीलता, पर्यावरण संरक्षण और राष्ट्रीय विकास जैसे व्यापक विषयों पर भी सक्रिय भूमिका निभाए। विद्यार्थी परिषद ने इन विषयों पर निरंतर संवाद और जनजागरण का प्रयास किया है। भारत वर्ष 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने का लक्ष्य लेकर आगे बढ़ रहा है। इस लक्ष्य की प्राप्ति में युवा शक्ति की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण होगी। विश्वविद्यालय और महाविद्यालय केवल रोजगार के लिए डिग्री देने वाले संस्थान न बनकर चरित्र, नेतृत्व, अनुसंधान और सामाजिक उत्तरदायित्व के केंद्र बनें—यह समय की आवश्यकता है। छात्र संगठन यदि इस दिशा में सकारात्मक भूमिका निभाते हैं, तो वे लोकतंत्र और समाज दोनों को मजबूत करते हैं। किसी भी छात्र आंदोलन की प्रासंगिकता इस बात से भी निर्धारित होती है कि वह समय की चुनौतियों को कितना समझता है और उनके समाधान में कितना योगदान देता है। सात दशक से अधिक की यात्रा में विद्यार्थी परिषद ने अनेक उतार-चढ़ाव देखे हैं, परंतु उसने स्वयं को केवल एक चुनावी छात्र संगठन तक सीमित नहीं रखा। शिक्षा, सेवा, संगठन, संस्कार, सामाजिक समरसता, पर्यावरण संरक्षण, सांस्कृतिक चेतना और राष्ट्रनिर्माण जैसे विविध क्षेत्रों में सक्रिय रहकर उसने छात्र आंदोलन की व्यापक परिभाषा प्रस्तुत की है। आज जब भारतीय शिक्षा व्यवस्था परिवर्तन के दौर से गुजर रही है और युवा शक्ति विकसित भारत के संकल्प की धुरी बनने जा रही है, तब ऐसे छात्र आंदोलनों की आवश्यकता और जिम्मेदारी ओर बढ़ जाती है जो विद्यार्थियों में केवल अधिकारों की चेतना ही नहीं, बल्कि कर्तव्य, नेतृत्व, चरित्र और राष्ट्रभाव का भी विकास करें। यही कारण है कि अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद आज भी एक प्रासंगिक, सक्रिय और रचनात्मक छात्र आंदोलन के रूप में अपनी पहचान बनाए हुए है। (लेखक मध्यक्षेत्र संगठन मंत्री – अभाविप हैं)
रीढ़ को मजबूत और मन को शांत रखने का आसान मंत्र है सरल धनुरासन जानिए सही तरीका और जबरदस्त फायदे

नई दिल्ली । आज की भागदौड़ भरी जीवनशैली में लंबे समय तक कुर्सी पर बैठकर काम करना मोबाइल और लैपटॉप का लगातार उपयोग तथा शारीरिक गतिविधियों की कमी लोगों को कम उम्र में ही पीठ दर्द गर्दन की अकड़न और रीढ़ से जुड़ी समस्याओं की ओर धकेल रही है। ऐसे समय में योग केवल व्यायाम नहीं बल्कि स्वस्थ जीवन जीने का प्रभावी माध्यम बनकर सामने आया है। योग विशेषज्ञों के अनुसार सरल धनुरासन ऐसा योगासन है जो पूरे शरीर को सक्रिय करने के साथ रीढ़ की हड्डी को मजबूत और लचीला बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यही कारण है कि आयुष मंत्रालय भी लोगों को नियमित रूप से इस योगासन का अभ्यास करने के लिए प्रेरित कर रहा है। सरल धनुरासन शरीर को धनुष के आकार में लाने वाला आसन है। यह पीठ कंधों कमर और पैरों की मांसपेशियों पर सकारात्मक प्रभाव डालता है। नियमित अभ्यास से शरीर की जकड़न धीरे धीरे कम होने लगती है और रीढ़ में लचीलापन बढ़ता है। यह आसन केवल शारीरिक मजबूती ही नहीं देता बल्कि मानसिक तनाव को कम करने और मन को शांत रखने में भी सहायक माना जाता है। दिनभर की थकान और तनाव के बाद इसका अभ्यास शरीर में नई ऊर्जा का संचार करता है। योग विशेषज्ञ बताते हैं कि सरल धनुरासन करने के लिए सबसे पहले समतल स्थान पर योगा मैट बिछाकर पेट के बल लेट जाएं। इसके बाद दोनों पैरों को घुटनों से मोड़ें और हाथों से टखनों को पकड़ लें। अब गहरी सांस लेते हुए धीरे धीरे सिर छाती और घुटनों को ऊपर उठाएं। पैरों को पीछे की ओर खींचते हुए शरीर को धनुष जैसी आकृति में लाएं। इस स्थिति में कुछ सेकंड तक सामान्य सांस लेते हुए बने रहें। इसके बाद धीरे धीरे सांस छोड़ते हुए सामान्य अवस्था में लौट आएं और शरीर को आराम दें। शुरुआत में इस आसन को कम समय तक करें और धीरे धीरे अभ्यास की अवधि बढ़ाएं। इस योगासन के नियमित अभ्यास से रीढ़ की हड्डी मजबूत होती है शरीर का लचीलापन बढ़ता है पीठ और कंधों की मांसपेशियां मजबूत बनती हैं तथा रक्त संचार बेहतर होता है। यह पाचन तंत्र को सक्रिय करने में भी मदद करता है और शरीर में ऊर्जा का स्तर बढ़ाता है। मानसिक रूप से भी यह आसन तनाव चिंता और थकान को कम करने में उपयोगी माना जाता है जिससे व्यक्ति अधिक शांत और सकारात्मक महसूस करता है। हालांकि किसी भी योगासन की तरह सरल धनुरासन करते समय सावधानी रखना भी जरूरी है। यदि किसी व्यक्ति को गंभीर कमर दर्द रीढ़ की गंभीर समस्या हर्निया उच्च रक्तचाप हाल ही में हुई सर्जरी या गर्भावस्था जैसी स्थिति हो तो बिना विशेषज्ञ की सलाह के इसका अभ्यास नहीं करना चाहिए। अभ्यास के दौरान शरीर पर अनावश्यक दबाव डालने या झटके से ऊपर उठने की कोशिश नहीं करनी चाहिए क्योंकि इससे चोट लगने का खतरा बढ़ सकता है। योग विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सरल धनुरासन को नियमित दिनचर्या का हिस्सा बनाया जाए और संतुलित खानपान तथा स्वस्थ जीवनशैली अपनाई जाए तो यह शरीर और मन दोनों के लिए बेहद लाभकारी साबित हो सकता है। रोजाना कुछ मिनट का यह अभ्यास न केवल रीढ़ को मजबूत बनाता है बल्कि व्यक्ति को तनावमुक्त ऊर्जावान और अधिक सक्रिय जीवन जीने में भी मदद करता है।
पशुपालन से बदल रही ग्रामीण भारत की तस्वीर महिलाओं के हाथों में आई आर्थिक मजबूती और रोजगार की नई राह

ग्रामीण भारत की अर्थव्यवस्था तेजी से बदल रही है और इस बदलाव के केंद्र में पशुपालन एक मजबूत आधार बनकर उभर रहा है। कभी केवल खेती का सहायक व्यवसाय माना जाने वाला पशुपालन आज लाखों परिवारों की नियमित आय का प्रमुख स्रोत बन चुका है। खासकर महिलाओं के लिए यह केवल रोजगार का माध्यम नहीं बल्कि आत्मनिर्भरता सम्मान और आर्थिक नेतृत्व का नया रास्ता साबित हो रहा है। राजस्थान जैसे राज्य इस बदलाव की सबसे सशक्त मिसाल बनकर सामने आए हैं जहां सीमित कृषि संसाधनों के बावजूद पशुपालन ने गांवों की आर्थिक तस्वीर बदल दी है। राजस्थान की पहचान लंबे समय तक रेगिस्तान ऊंट और पर्यटन तक सीमित रही लेकिन अब यह राज्य पशुपालन और डेयरी उत्पादन में भी देश के अग्रणी राज्यों में शामिल हो चुका है। कम वर्षा और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के बीच यहां के ग्रामीण परिवारों ने पशुपालन को अपनी आजीविका का मजबूत आधार बनाया है। खेती से होने वाली अनिश्चित आय के बीच पशुपालन ने उन्हें नियमित आमदनी पोषण और रोजगार का भरोसेमंद विकल्प दिया है। उदयपुर जिले की गिरवा तहसील के सपाटिया गांव की तस्वीर इस बदलाव को साफ दिखाती है। लगभग हर परिवार किसी न किसी रूप में पशुपालन से जुड़ा हुआ है। गांव के लोगों का कहना है कि पशुपालन केवल व्यवसाय नहीं बल्कि उनकी जीवनशैली का हिस्सा बन चुका है। दूध उत्पादन डेयरी संचालन और पशुओं की देखभाल से पूरे गांव की आर्थिक गतिविधियां संचालित होती हैं जिससे परिवारों की आय लगातार बढ़ रही है। इस बदलाव की सबसे प्रेरक तस्वीर गांव की महिलाओं में दिखाई देती है। महिलाएं केवल पशुओं की देखभाल तक सीमित नहीं हैं बल्कि दूध उत्पादन चारा प्रबंधन डेयरी संचालन और आय बढ़ाने जैसे महत्वपूर्ण कार्यों में भी सक्रिय भूमिका निभा रही हैं। कई परिवारों में बेटियां कॉलेज की पढ़ाई के साथ पशुपालन की जिम्मेदारी भी निभा रही हैं। इससे न केवल परिवार की आय बढ़ रही है बल्कि महिलाओं का आत्मविश्वास और निर्णय लेने की क्षमता भी मजबूत हो रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि जब किसी परिवार की महिला आर्थिक रूप से सशक्त होती है तो उसका सकारात्मक प्रभाव पूरे परिवार पर दिखाई देता है। बच्चों की शिक्षा बेहतर होती है स्वास्थ्य और पोषण में सुधार आता है और परिवार की आर्थिक स्थिति अधिक स्थिर बनती है। यही कारण है कि पशुपालन को महिला सशक्तिकरण का प्रभावी माध्यम भी माना जा रहा है। राष्ट्रीय स्तर पर भी पशुपालन भारतीय अर्थव्यवस्था का मजबूत स्तंभ बन चुका है। भारत विश्व का सबसे बड़ा दुग्ध उत्पादक देश है और पशुधन क्षेत्र का योगदान कृषि अर्थव्यवस्था में लगातार बढ़ रहा है। राजस्थान देश के सबसे बड़े पशुधन वाले राज्यों में शामिल है। दूध उत्पादन के साथ साथ भेड़ बकरी ऊंट और ऊन उत्पादन में भी राज्य की महत्वपूर्ण भूमिका है जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को लगातार मजबूती मिल रही है। पशुपालन का एक बड़ा लाभ यह भी है कि इससे गांवों से शहरों की ओर होने वाला पलायन कम होता है। जब ग्रामीण परिवारों को अपने गांव में ही स्थायी आय का स्रोत मिल जाता है तो रोजगार की तलाश में शहरों की ओर जाने की आवश्यकता कम हो जाती है। इससे स्थानीय अर्थव्यवस्था मजबूत होती है और गांवों में रोजगार के नए अवसर विकसित होते हैं। सरकार भी राष्ट्रीय गोकुल मिशन राष्ट्रीय पशुधन मिशन पशुधन बीमा योजना और आधुनिक डेयरी विकास कार्यक्रमों के माध्यम से इस क्षेत्र को बढ़ावा दे रही है। हालांकि गुणवत्तापूर्ण चारे की उपलब्धता पशु चिकित्सा सेवाओं तक आसान पहुंच बाजार में उचित मूल्य और सरकारी योजनाओं की जानकारी जैसी चुनौतियां अभी भी मौजूद हैं। यदि इन समस्याओं का प्रभावी समाधान किया जाए तो पशुपालन ग्रामीण विकास का सबसे मजबूत इंजन बन सकता है। आज पशुपालन केवल दूध उत्पादन तक सीमित नहीं है बल्कि यह आत्मनिर्भर भारत के सपने को साकार करने का प्रभावी माध्यम बन चुका है। यह महिलाओं को आर्थिक नेतृत्व देता है युवाओं को गांव में रोजगार उपलब्ध कराता है और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई मजबूती प्रदान करता है। आने वाले समय में आधुनिक तकनीक बेहतर बाजार और सरकारी सहयोग के साथ पशुपालन देश के ग्रामीण विकास की सबसे बड़ी ताकत बन सकता है।