Chambalkichugli.com

Gwalior rape case: पहले दोस्ती, फिर दुष्कर्म; ग्वालियर में शादीशुदा युवक ने युवती को फसाया

gwalior rape case

Gwalior rape case: ग्वालियर। गोला का मंदिर थाना क्षेत्र में एक शर्मसार कर देने वाला मामला सामने आया है। जहां एक युवक ने शादी का झांसा देकर युवती से दुष्कर्म किया। आरोप है कि युवक ने खुद को अविवाहित बताकर युवती से प्रेम संबंध बनाए और करीब एक साल तक शादी का वादा कर उसका फायदा उठाया। इसके बाद जब युवती गर्भवती हुई और शादी का दबाव बनाया तो पता चला कि आरोपी पहले से शादीशुदा है और दो बच्चों का पिता है। पुलिस ने आरोपी के खिलाफ केस दर्ज कर उसकी तलाश शुरू कर दी है। Rainy Season Health Care: बारिश में रोज पिएं अदरक की चाय शरीर रहेगा गर्म पाचन होगा बेहतर और बीमारियां रहेंगी दूर जिम से शरू हुआ अफेयर पुलिस का कहना है, कि युवती थाटीपुर की रहने वाली है जिसकी उम्र 24 साल है। युवती का आरोप है कि मार्च 2025 में वह थाटीपुर स्थित एक जिम में वर्कआउट करने जाती थी। वहीं उसकी मुलाकात आशीष गुर्जर से हुई। बातचीत के दौरान दोनों में दोस्ती हुई और बाद में प्रेम संबंध बन गए। पीड़िता का आरोप है कि आशीष ने खुद को अविवाहित बताया और शादी का वादा किया। इसी भरोसे पर उसने रिश्ता स्वीकार किया। Health Alert: अगर बार बार सूज रहे हैं पैर तो हो जाएं सतर्क शरीर दे रहा है गंभीर बीमारी का संकेत शादी का झांसा देकर बनाये संबंध पीड़िता का कहना है कि आरोपी उसे अलग- अलग जगह लेजा कर संबंध बनता था। उसका आरोप है कि कभी कार में ले जाता था, तो कभी अपने दोस्त के फ्लैट पर ले जाकर उसके साथ गलत काम करता था। साथ ही हर बार उसे शादी का झांसा देता था। प्रेगनेंट हुई तो खुला आरोपी का राज युवती ने शिकायत में बताया कि अप्रेल 2026 में जब वह प्रेगनेंट हुई, तब उसने शादी करने की बात कही। लेकिन आरोपी सीधे तौर पर मुकर गया और गर्भपात कराने का दबाव बनाने लगा। जब युवती ने आरोपी के बड़े भाई से बात की तो उसे पता चला कि आशीष पहले से शादीशुदा है और उसके दो बच्चे हैं। पीड़िता का आरोप है कि शिकायत की बात सामने आने पर आरोपी और उसके परिवार ने उसे बदनाम किया और पुलिस में जाने पर जान से मारने की धमकी दी। Skin Care Tips: महंगे ब्यूटी प्रोडक्ट छोड़िए दही से करें प्राकृतिक स्किन केयर हर मौसम में मिलेगा ग्लोइंग और हेल्दी चेहरा पुलिस ने दर्ज किया केस फिलहाल पुलिस ने युवती की शिकायत पर आरोपी आशीष गुर्जर के खिलाफ दुष्कर्म और धमकी देने की धाराओं में मामला दर्ज कर लिया है। मामले को लेकर आरोपी की तलाश जारी है।

E20 विवाद के बीच नितिन गडकरी का जवाब, बताई एथनॉल कारोबार में अपनी हिस्सेदारी

नई दिल्ली। E20 पेट्रोल को लेकर चल रही बहस के बीच केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा है कि एथनॉल उत्पादन में उनकी हिस्सेदारी बेहद मामूली है और इससे उन्हें कोई बड़ा आर्थिक लाभ नहीं मिल रहा है। उन्होंने एक इंटरव्यू में बताया कि एथनॉल प्रोडक्शन में उनकी हिस्सेदारी केवल 0.07 प्रतिशत है। गडकरी ने कहा, “एथनॉल पॉलिसी से मुझे कोई फायदा नहीं मिल रहा है। इतनी छोटी हिस्सेदारी के आधार पर किसी बड़े आर्थिक लाभ की बात करना सही नहीं है।” उन्होंने यह भी कहा कि यह आरोप पूरी तरह निराधार है कि एथनॉल नीति उनके निजी हितों को ध्यान में रखकर बनाई गई है। किसानों को फायदा पहुंचाने का दावाकेंद्रीय मंत्री ने कहा कि वह केवल एथनॉल ही नहीं, बल्कि वैकल्पिक ईंधन के इस्तेमाल के समर्थक रहे हैं। उन्होंने कहा कि एथनॉल के बढ़ते उपयोग से किसानों को आर्थिक लाभ मिल सकता है। गडकरी ने स्पष्ट किया कि एथनॉल नीति किसी एक व्यक्ति का फैसला नहीं था। उन्होंने कहा कि यह निर्णय पेट्रोलियम मंत्रालय, केंद्रीय मंत्रिमंडल और वैज्ञानिक शोध की प्रक्रिया के बाद लिया गया है। परिवार की कंपनियों पर भी दी सफाईगडकरी ने उन आरोपों पर भी प्रतिक्रिया दी, जिनमें कहा जा रहा था कि उनके परिवार से जुड़ी कंपनियां एथनॉल उत्पादन में शामिल हैं और इसी वजह से वह E20 पेट्रोल को बढ़ावा दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि उनके परिवार के सदस्यों की चीनी मिलें जरूर हैं, लेकिन उनकी कंपनियां एथनॉल उत्पादन पर निर्भर नहीं हैं। मक्के से एथनॉल उत्पादन से किसानों को लाभ का दावागडकरी ने कहा कि देश में एथनॉल की उपलब्धता बढ़ी है और मक्के से एथनॉल बनाने के फैसले का फायदा किसानों को मिला है। उन्होंने दावा किया कि इस कदम से उत्तर प्रदेश और बिहार के किसानों को करीब 45,000 करोड़ रुपये की अतिरिक्त आय हुई है। उन्होंने बताया कि मक्के से एथनॉल उत्पादन का फैसला लेने से पहले मक्के की बाजार कीमत करीब 1,200 रुपये प्रति क्विंटल थी, जबकि न्यूनतम समर्थन मूल्य 1,800 रुपये प्रति क्विंटल था। इसके बाद मक्के की कीमत बढ़कर करीब 2,800 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गई। E20 पेट्रोल पर दिया था चैलेंजइससे पहले गडकरी ने E20 पेट्रोल को लेकर उठ रहे सवालों पर कहा था कि इसके कारण किसी वाहन में खराबी आने का कोई मामला सामने नहीं आया है। उन्होंने चुनौती देते हुए कहा था कि अगर किसी कार में E20 पेट्रोल से समस्या आई है तो उसका उदाहरण बताया जाए। उन्होंने आरोप लगाया कि अधिक एथनॉल मिश्रित पेट्रोल को लेकर गलत जानकारी फैलाई जा रही है और इसके पीछे एक अभियान चलाया जा रहा है। ISMA ने भी दावों को बताया गलतभारतीय चीनी एवं जैव ऊर्जा विनिर्माता संघ (ISMA) ने भी E20 पेट्रोल को लेकर किए जा रहे कुछ दावों को गलत और भ्रामक बताया है। संगठन ने कहा कि E20 से गाड़ियों को नुकसान, बीमा अमान्य होने या ईंधन में सीधे गन्ने का रस मिलाने जैसे दावे तथ्यों पर आधारित नहीं हैं। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के अनुसार, भारत का एथनॉल मिश्रण कार्यक्रम वैज्ञानिक परीक्षणों, निगरानी और विभिन्न हितधारकों के साथ विचार-विमर्श के बाद तैयार किया गया है। इसमें पेट्रोलियम कंपनियों, वाहन निर्माताओं और ईंधन जांच एजेंसियों की भूमिका शामिल है।

Health Alert: अगर बार बार सूज रहे हैं पैर तो हो जाएं सतर्क शरीर दे रहा है गंभीर बीमारी का संकेत

नई दिल्ली । पैरों में सूजन आना एक ऐसी समस्या है जिसे अधिकतर लोग थकान लंबे समय तक खड़े रहने या अधिक चलने का परिणाम मानकर नजरअंदाज कर देते हैं। हालांकि यदि यह परेशानी बार बार हो रही है या कई दिनों तक बनी रहती है तो इसे हल्के में लेना खतरनाक साबित हो सकता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार पैरों में लगातार रहने वाली सूजन शरीर के अंदर चल रही किसी गंभीर बीमारी का शुरुआती संकेत भी हो सकती है। इसलिए केवल घरेलू उपायों पर निर्भर रहने के बजाय समय रहते डॉक्टर से जांच कराना बेहद जरूरी है। पैरों में सूजन तब होती है जब शरीर के ऊतकों में जरूरत से ज्यादा तरल पदार्थ जमा होने लगता है। इसे चिकित्सकीय भाषा में एडिमा कहा जाता है। कई बार यह समस्या लंबे समय तक बैठे रहने यात्रा करने या अधिक नमक खाने के कारण भी हो सकती है लेकिन यदि सूजन रोजाना होने लगे दर्द के साथ हो या केवल एक पैर में दिखाई दे तो यह चिंता का विषय बन सकता है। विशेषज्ञ बताते हैं कि हृदय की कार्यक्षमता कमजोर होने पर शरीर में रक्त का संचार प्रभावित होता है जिससे पैरों और टखनों में सूजन दिखाई देने लगती है। इसी तरह किडनी की कार्यप्रणाली प्रभावित होने पर शरीर अतिरिक्त पानी और नमक को बाहर नहीं निकाल पाता जिससे सूजन बढ़ सकती है। लीवर से जुड़ी गंभीर बीमारियों में भी शरीर में तरल पदार्थ जमा होने लगता है और पैरों में सूजन दिखाई देने लगती है। इसके अलावा नसों की कमजोरी वैरिकोज वेन्स लिम्फ संबंधी समस्याएं थायरॉयड की गड़बड़ी मोटापा मधुमेह और कुछ दवाओं के दुष्प्रभाव भी पैरों में सूजन का कारण बन सकते हैं। गर्भावस्था के दौरान भी कई महिलाओं में पैरों में सूजन देखी जाती है लेकिन यदि इसके साथ सिरदर्द धुंधला दिखना या रक्तचाप बढ़ा हुआ हो तो तुरंत चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी होता है। अगर सूजन के साथ सांस लेने में तकलीफ सीने में दर्द तेज बुखार त्वचा का रंग बदलना या अचानक वजन बढ़ने जैसी समस्याएं भी महसूस हों तो इसे बिल्कुल नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। ऐसे लक्षण किसी गंभीर स्वास्थ्य समस्या की ओर इशारा कर सकते हैं और तत्काल चिकित्सा सहायता की आवश्यकता हो सकती है। पैरों की सूजन से बचाव के लिए नियमित व्यायाम करना पर्याप्त पानी पीना संतुलित आहार लेना और नमक का सीमित सेवन करना लाभदायक माना जाता है। लंबे समय तक एक ही स्थिति में बैठने या खड़े रहने से बचें और बीच बीच में पैरों को हिलाते रहें। आराम करते समय पैरों को हल्का ऊंचा रखकर लेटना भी सूजन कम करने में मदद कर सकता है। यदि डॉक्टर ने किसी विशेष बीमारी का इलाज बताया है तो दवाओं का नियमित सेवन और समय समय पर जांच कराना भी जरूरी है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि शरीर अक्सर छोटी छोटी समस्याओं के जरिए बड़ी बीमारियों का संकेत देता है। इसलिए यदि पैरों की सूजन बार बार हो रही है या लंबे समय तक बनी रहती है तो स्वयं इलाज करने के बजाय डॉक्टर से परामर्श लेकर आवश्यक जांच कराना सबसे सुरक्षित कदम है। समय पर पहचान और सही उपचार गंभीर जटिलताओं से बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

फ्रांस की अर्थव्यवस्था पर संकट, बढ़ा कर्ज का दबाव, विशेषज्ञों की चेतावनी- समय रहते कदम नहीं उठाए तो…

नई दिल्ली। दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल फ्रांस पर बढ़ता सार्वजनिक कर्ज चिंता का विषय बनता जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि सरकार ने समय रहते प्रभावी वित्तीय सुधार नहीं किए, तो आने वाले वर्षों में देश की अर्थव्यवस्था गंभीर दबाव में आ सकती है। बढ़ती उधारी लागत और राजनीतिक अनिश्चितता को लेकर निवेशकों और अर्थशास्त्रियों ने भी चिंता जताई है। फ्रांस का सार्वजनिक कर्ज फिलहाल करीब 3.5 ट्रिलियन यूरो तक पहुंच चुका है और विशेषज्ञों का मानना है कि अगले साल होने वाले राष्ट्रपति चुनाव से पहले राजनीतिक परिस्थितियों के कारण राजकोषीय सुधारों की संभावना कमजोर पड़ सकती है। ऐसे में कर्ज का बोझ और बढ़ने का जोखिम बना हुआ है। ‘स्नोबॉल इफेक्ट’ से बढ़ सकती है मुश्किलअर्थशास्त्रियों ने फ्रांस के सामने ‘स्नोबॉल इफेक्ट’ का खतरा बताया है। इसका मतलब ऐसी स्थिति से है, जब सरकारी बॉन्ड पर चुकाई जाने वाली ब्याज दर आर्थिक विकास की गति से अधिक हो जाती है। इससे सरकार का कर्ज लगातार बढ़ता जाता है और अर्थव्यवस्था के आकार की तुलना में उसका बोझ तेजी से बढ़ने लगता है। यदि सरकार लगातार प्राथमिक बजट अधिशेष (प्राइमरी सरप्लस) हासिल नहीं कर पाती, तो इस स्थिति से बाहर निकलना बेहद मुश्किल हो सकता है। 2050 तक GDP के 203% तक पहुंच सकता है कर्जविशेषज्ञों के अनुसार, यदि मौजूदा हालात में कोई बड़ा सुधार नहीं हुआ तो फ्रांस का सार्वजनिक कर्ज वर्ष 2050 तक उसकी सकल घरेलू उत्पाद (GDP) के 203 प्रतिशत तक पहुंच सकता है। यह चेतावनी आर्थिक सहयोग एवं विकास संगठन (OECD) के महासचिव मैथियास कोरमैन के हालिया बयान के आधार पर दी गई है। अनुमान है कि वर्ष 2029 तक केवल ब्याज भुगतान का खर्च ही लगभग 100 अरब यूरो तक पहुंच सकता है। निवेशकों और रेटिंग एजेंसियों की बढ़ी चिंताक्रेडिट रेटिंग एजेंसी मूडीज की सीनियर वाइस प्रेसिडेंट सारा कार्लसन ने भी कहा है कि सार्वजनिक कर्ज पर बढ़ता ब्याज भुगतान फ्रांस के लिए सबसे बड़ी आर्थिक चुनौतियों में से एक बन सकता है। वहीं निवेश बैंक मॉर्गन स्टेनली ने वित्तीय जोखिमों का हवाला देते हुए अपने ग्राहकों को फ्रांसीसी सरकारी कर्ज में निवेश कम करने की सलाह दी है। कोविड के बाद भी कम नहीं हुआ कर्जआधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, इस वर्ष की पहली तिमाही में फ्रांस का सार्वजनिक कर्ज 3.5 ट्रिलियन यूरो (करीब 4 ट्रिलियन डॉलर) से अधिक हो गया, जो देश की GDP का 117.5 प्रतिशत है। फ्रांस की ऑडिट संस्था कोर्ट डेस कॉम्प्टेस के मुताबिक यह स्तर कोविड-19 महामारी के दौरान बने रिकॉर्ड के करीब पहुंच चुका है। संस्था का कहना है कि यूरोजोन में फ्रांस ऐसा प्रमुख देश है, जिसने महामारी के बाद अपने कर्ज के बोझ को उल्लेखनीय रूप से कम नहीं किया। ब्याज भुगतान बना सबसे बड़ा खर्चवर्ष 2025 में फ्रांस ने अपने कर्ज पर ब्याज चुकाने के लिए करीब 66 अरब यूरो खर्च किए, जो शिक्षा और रक्षा जैसे प्रमुख क्षेत्रों के बजट से भी अधिक माना जा रहा है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि 2029 तक यह राशि बढ़कर 100 अरब यूरो तक पहुंच सकती है। अर्थशास्त्रियों का मानना है कि तेज आर्थिक विकास या लगातार प्राथमिक बजट अधिशेष के जरिए इस संकट से बाहर निकला जा सकता है, लेकिन फिलहाल ऐसे संकेत नहीं दिखाई दे रहे हैं। कोर्ट डेस कॉम्प्टेस की वरिष्ठ अधिकारी कैरिन कैम्बी ने चेतावनी दी है कि यदि समय रहते सुधार नहीं किए गए तो फ्रांस कर्ज के ब्याज के बढ़ते बोझ तले दब सकता है और इस स्थिति से बाहर निकलने में कई वर्ष लग सकते हैं। चुनाव से पहले बना बड़ा राजनीतिक मुद्दाबढ़ता सार्वजनिक कर्ज अगले वर्ष होने वाले राष्ट्रपति चुनाव से पहले फ्रांस की राजनीति का भी अहम मुद्दा बन गया है। प्रमुख सेंट्रिस्ट नेता एडुआर्ड फिलिप और गैब्रियल अट्टल ने इसे अपने चुनावी एजेंडे का प्रमुख हिस्सा बनाया है। वहीं सांसद केविन मौविएक्स का कहना है कि कर्ज का बढ़ता स्तर गंभीर चेतावनी है और यदि सुधार में देर की गई तो इसके परिणाम और अधिक गंभीर हो सकते हैं।

Rainy Season Health Care: बारिश में रोज पिएं अदरक की चाय शरीर रहेगा गर्म पाचन होगा बेहतर और बीमारियां रहेंगी दूर

नई दिल्ली । बरसात का मौसम अपने साथ ठंडी हवाएं हरियाली और सुहाना माहौल लेकर आता है लेकिन यही मौसम सर्दी खांसी वायरल संक्रमण गले की खराश और पाचन संबंधी समस्याओं का खतरा भी बढ़ा देता है। ऐसे समय में अगर खानपान का सही ध्यान रखा जाए तो कई मौसमी बीमारियों से बचा जा सकता है। भारतीय घरों में बरसों से अदरक की चाय को बारिश के मौसम का सबसे भरोसेमंद घरेलू पेय माना जाता है। इसकी गर्म तासीर और औषधीय गुण शरीर को भीतर से मजबूत बनाने में मदद करते हैं और यही कारण है कि मानसून में इसकी मांग काफी बढ़ जाती है। अदरक में प्राकृतिक रूप से ऐसे तत्व पाए जाते हैं जो शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत बनाने में मदद करते हैं। नियमित और संतुलित मात्रा में अदरक वाली चाय पीने से मौसमी संक्रमण का खतरा कम हो सकता है। बारिश के दिनों में वातावरण में नमी बढ़ने से बैक्टीरिया और वायरस तेजी से फैलते हैं ऐसे में अदरक का सेवन शरीर को संक्रमण से लड़ने में सहायक माना जाता है। बरसात के दौरान सर्दी जुकाम और गले में खराश की समस्या सबसे आम होती है। अदरक की गर्माहट गले को आराम देती है और बलगम को बाहर निकालने में मदद करती है। अगर चाय में तुलसी या काली मिर्च भी मिला दी जाए तो इसका असर और अधिक प्रभावी हो सकता है। यही वजह है कि कई लोग हल्की सर्दी महसूस होते ही सबसे पहले अदरक की चाय का सहारा लेते हैं। बारिश के मौसम में पाचन तंत्र भी अक्सर कमजोर पड़ जाता है। बाहर का भोजन या दूषित पानी पेट खराब होने की वजह बन सकता है। अदरक पाचन क्रिया को बेहतर बनाने में मदद करता है और गैस अपच तथा पेट फूलने जैसी समस्याओं से राहत दिला सकता है। भोजन के बाद एक कप हल्की अदरक वाली चाय शरीर को आराम देने के साथ पाचन प्रक्रिया को भी बेहतर बना सकती है। अदरक की चाय शरीर में रक्त संचार को बेहतर बनाने और ठंड महसूस होने की स्थिति में शरीर को गर्म रखने में भी सहायक मानी जाती है। बारिश में भीगने के बाद एक कप गर्म अदरक की चाय शरीर को तुरंत सुकून देती है और थकान कम करने में मदद करती है। इसके अलावा इसमें मौजूद प्राकृतिक एंटीऑक्सीडेंट शरीर को फ्री रेडिकल्स से बचाने में भी भूमिका निभाते हैं। हालांकि अदरक की चाय का सेवन सीमित मात्रा में ही करना चाहिए। अत्यधिक सेवन से कुछ लोगों को एसिडिटी या पेट में जलन की शिकायत हो सकती है। जिन लोगों को ब्लड प्रेशर ब्लड थिनर दवाओं या किसी गंभीर बीमारी की समस्या है उन्हें नियमित रूप से अधिक मात्रा में अदरक लेने से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लेनी चाहिए। गर्भवती महिलाओं को भी चिकित्सकीय सलाह के अनुसार ही इसका सेवन करना चाहिए। बरसात के मौसम में केवल अदरक की चाय पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं है। संतुलित भोजन स्वच्छ पानी पर्याप्त नींद और साफ सफाई का ध्यान रखना भी उतना ही जरूरी है। यदि अदरक की चाय को स्वस्थ जीवनशैली के साथ शामिल किया जाए तो यह मानसून के दौरान शरीर को ऊर्जा देने रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत करने और मौसमी बीमारियों से बचाव में उपयोगी साबित हो सकती है।:

पांढुर्णा में तीन दिन तक 350 फीट ऊंचे मोबाइल टावर पर बैठा रहा युवक, SDRF और पुलिस ने सुरक्षित उतारा

पांढुर्णा। मध्य प्रदेश के पांढुर्णा जिले में पिछले तीन दिनों से चल रहा हाई-वोल्टेज रेस्क्यू ऑपरेशन बुधवार शाम सफलतापूर्वक समाप्त हो गया। करीब 350 फीट ऊंचे मोबाइल टावर पर चढ़े एक युवक को पुलिस और SDRF की टीम ने लगभग 51 घंटे की मशक्कत के बाद सुरक्षित नीचे उतार लिया। इस दौरान प्रशासन, पुलिस और बचाव दल लगातार मौके पर तैनात रहे। जानकारी के अनुसार, सोमवार शाम एक युवक हाथ में शराब की बोतल लेकर अचानक मोबाइल टावर पर चढ़ने लगा। स्थानीय लोगों ने उसे रोकने और नीचे आने के लिए आवाज लगाई, लेकिन उसने किसी की बात नहीं सुनी और टावर के सबसे ऊपरी व संकरे हिस्से पर जाकर बैठ गया। घटना की सूचना मिलते ही पांढुर्णा थाना पुलिस मौके पर पहुंच गई। थाना प्रभारी अमित दाणी ने बताया कि युवक अत्यधिक शराब के नशे में था। पुलिस ने लाउडस्पीकर के माध्यम से कई बार उसे नीचे उतरने की अपील की, लेकिन उसने किसी भी प्रयास का जवाब नहीं दिया। सुरक्षा के लिए किए गए विशेष इंतजामसंभावित हादसे को देखते हुए प्रशासन ने टावर के चारों ओर सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए। यदि युवक नीचे गिर जाए तो उसकी जान बचाई जा सके, इसके लिए टावर के नीचे गद्दे बिछाए गए और सुरक्षा जाल (नेट) लगाया गया। स्थानीय स्तर पर प्रयास सफल नहीं होने पर तत्काल SDRF की टीम को बुलाया गया। चुनौतीपूर्ण रहा रेस्क्यू ऑपरेशनटावर की ऊंचाई और युवक की अस्थिर स्थिति के कारण बचाव अभियान बेहद चुनौतीपूर्ण रहा। रात के समय अंधेरा और तेज ऊंचाई के बीच युवक लगातार खतरनाक हरकतें करता रहा, जिससे उसके गिरने का खतरा बना हुआ था। पुलिस और SDRF की टीम ने लगातार धैर्य के साथ बातचीत कर उसे शांत रखने की कोशिश की और पूरी रणनीति के साथ रेस्क्यू ऑपरेशन जारी रखा। बुधवार शाम सुरक्षित उतारा गया युवककरीब 51 घंटे तक चले अभियान के बाद बुधवार शाम लगभग 7 बजे SDRF और पुलिस की टीम ने तकनीकी कौशल और सतर्कता के साथ युवक को सुरक्षित अपने कब्जे में लिया और नीचे उतार लिया। उसके सुरक्षित जमीन पर पहुंचते ही मौके पर मौजूद प्रशासनिक अधिकारियों, पुलिसकर्मियों और बड़ी संख्या में एकत्र लोगों ने राहत की सांस ली। फिलहाल युवक की चिकित्सकीय जांच कराई जा रही है। पुलिस उसके पूरी तरह होश में आने का इंतजार कर रही है, ताकि उसकी पहचान और मोबाइल टावर पर चढ़ने के पीछे की वजह का पता लगाया जा सके।

आज बाजार में दिख सकता है उतार चढ़ाव विदेशी संकेतों के बीच समझदारी से निवेश करने की सलाह

नई दिल्ली । भारतीय शेयर बाजार में आज नौ जुलाई को कारोबार की शुरुआत सतर्क माहौल के बीच हल्की मजबूती के साथ होने की संभावना जताई जा रही है। वैश्विक बाजारों से मिले मिश्रित संकेतों और विदेशी निवेशकों की गतिविधियों के कारण निवेशक पूरे दिन सोच समझकर कदम उठा सकते हैं। शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स और निफ्टी सीमित बढ़त के साथ खुल सकते हैं लेकिन दिनभर बाजार में उतार चढ़ाव देखने को मिल सकता है। ऐसे में विशेषज्ञ निवेशकों को जल्दबाजी से बचने और मजबूत कंपनियों में ही निवेश की सलाह दे रहे हैं। बीते कारोबारी सत्र में घरेलू बाजार ने स्थिर प्रदर्शन किया था जबकि विदेशी बाजारों में अलग अलग रुख देखने को मिला। अमेरिकी बाजारों में सीमित बढ़त दर्ज की गई जबकि एशियाई बाजारों में मिला जुला कारोबार देखने को मिला। इसका असर भारतीय बाजार की शुरुआत पर भी दिखाई दे सकता है। निवेशकों की नजर आज वैश्विक आर्थिक संकेतों कच्चे तेल की कीमतों डॉलर की चाल और विदेशी संस्थागत निवेशकों की खरीद बिक्री पर बनी रहेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि आईटी बैंकिंग एफएमसीजी और ऑटो सेक्टर के शेयर आज बाजार की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। यदि इन क्षेत्रों में खरीदारी का माहौल बना रहता है तो प्रमुख सूचकांक मजबूती के साथ कारोबार कर सकते हैं। दूसरी ओर मुनाफावसूली बढ़ने पर बाजार में दबाव भी देखने को मिल सकता है। इसलिए हर तेजी को लंबी अवधि का संकेत मानना फिलहाल उचित नहीं होगा। विदेशी संस्थागत निवेशकों और घरेलू संस्थागत निवेशकों की गतिविधियां भी बाजार की चाल तय करने में अहम रहेंगी। यदि विदेशी निवेशकों की ओर से खरीदारी जारी रहती है तो बाजार को मजबूती मिल सकती है। वहीं वैश्विक स्तर पर किसी भी नकारात्मक खबर या आर्थिक अनिश्चितता का असर भारतीय बाजार पर तुरंत दिखाई दे सकता है। इसलिए निवेशकों को हर बड़ी खबर पर नजर बनाए रखने की जरूरत होगी। विश्लेषकों का कहना है कि छोटे और मझोले शेयरों में भी अच्छी गतिविधि देखने को मिल सकती है लेकिन इनमें जोखिम अपेक्षाकृत अधिक रहता है। ऐसे शेयरों में निवेश केवल पर्याप्त जानकारी और रणनीति के साथ ही करना बेहतर माना जा रहा है। बाजार विशेषज्ञों का सुझाव है कि अल्पकालिक उतार चढ़ाव से घबराने के बजाय निवेशक अपने वित्तीय लक्ष्य और जोखिम क्षमता के अनुसार निर्णय लें। दीर्घकालिक निवेश करने वालों के लिए मौजूदा बाजार अभी भी कई अच्छे अवसर उपलब्ध करा सकता है। मजबूत वित्तीय स्थिति वाली कंपनियों के शेयरों में चरणबद्ध निवेश भविष्य में बेहतर रिटर्न दे सकता है। वहीं इंट्रा डे ट्रेडिंग करने वाले निवेशकों को बाजार खुलने के बाद शुरुआती रुझान को ध्यान से समझकर ही कोई बड़ा फैसला लेना चाहिए। कुल मिलाकर आज भारतीय शेयर बाजार में हल्की सकारात्मक शुरुआत की उम्मीद है लेकिन पूरे कारोबारी सत्र के दौरान उतार चढ़ाव बना रह सकता है। ऐसे माहौल में धैर्य संतुलित रणनीति और सोच समझकर किया गया निवेश ही बेहतर परिणाम देने की संभावना रखता है। विशेषज्ञों का मानना है कि अफवाहों के बजाय आधिकारिक आंकड़ों और विश्वसनीय बाजार संकेतों के आधार पर लिया गया निर्णय निवेशकों के लिए अधिक लाभदायक साबित होगा।

कर्ज से परेशान लोगों के लिए मंगलवार का विशेष उपाय, ज्योतिष में बताए गए सरल धार्मिक उपायों से आर्थिक बाधाएं कम होने की मान्यता

नई दिल्ली । बढ़ती महंगाई, ऋण, ईएमआई और आर्थिक जिम्मेदारियों के कारण बड़ी संख्या में लोग वित्तीय दबाव का सामना कर रहे हैं। कई बार लगातार आय होने और मेहनत करने के बावजूद कर्ज का बोझ कम नहीं हो पाता, जिससे मानसिक तनाव भी बढ़ने लगता है। ज्योतिष शास्त्र में ऐसी परिस्थितियों के लिए कुछ धार्मिक उपायों का उल्लेख मिलता है, जिन्हें आस्था और नियमितता के साथ करने से सकारात्मक परिणाम मिलने की मान्यता है। हालांकि इन उपायों के साथ विवेकपूर्ण वित्तीय योजना, आय-व्यय का संतुलन और निरंतर प्रयास को भी समान रूप से महत्वपूर्ण माना गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मंगलवार का दिन भगवान हनुमान और मंगल ग्रह को समर्पित माना जाता है। ज्योतिष में मंगल ग्रह को साहस, भूमि, ऊर्जा और ऋण का कारक माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि यदि किसी व्यक्ति की कुंडली में मंगल कमजोर या प्रतिकूल स्थिति में हो तो उसे आर्थिक कठिनाइयों, बढ़ते कर्ज या धन संबंधी बाधाओं का सामना करना पड़ सकता है। इसी कारण मंगलवार को मंगल ग्रह और भगवान हनुमान की आराधना विशेष फलदायी मानी जाती है। ज्योतिषीय परंपराओं के अनुसार मंगलवार की सुबह स्नान के बाद भगवान हनुमान की पूजा कर ऋणमोचक मंगल स्तोत्र का श्रद्धापूर्वक पाठ करना शुभ माना जाता है। मान्यता है कि नियमित रूप से इसका पाठ करने से मानसिक दृढ़ता बढ़ती है और आर्थिक चुनौतियों से बाहर निकलने के लिए नए अवसर बनने लगते हैं। इसके साथ ही श्रद्धालु हनुमान मंदिर में सिंदूर और चमेली के तेल का चोला अर्पित करते हैं तथा मीठा पान चढ़ाने की भी परंपरा निभाते हैं। शाम के समय गाय के घी या चमेली के तेल का दीपक जलाकर सुंदरकांड का पाठ करने की भी मान्यता है। यदि समय की कमी हो तो हनुमान चालीसा का श्रद्धापूर्वक पाठ किया जा सकता है। धार्मिक विश्वास के अनुसार इससे मनोबल मजबूत होता है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। ज्योतिषीय मान्यताओं में मंगलवार के दिन नया कर्ज लेने से बचने की सलाह भी दी जाती है। वहीं कुछ परंपराओं में यह माना जाता है कि यदि पुराने ऋण की पहली किस्त मंगलवार को चुकाई जाए तो ऋण समाप्त करने की दिशा में शुभ शुरुआत मानी जाती है। हालांकि इसका कोई वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध नहीं है और इसे धार्मिक विश्वास के रूप में ही देखा जाता है। दान-पुण्य को भी आर्थिक और आध्यात्मिक संतुलन से जोड़ा गया है। मंगलवार के दिन गुड़ और चने का दान या जरूरतमंद लोगों की सहायता करना शुभ माना जाता है। इसके अतिरिक्त भगवान श्रीगणेश, माता लक्ष्मी और भगवान कुबेर की नियमित पूजा तथा श्रीसूक्त या कनकधारा स्तोत्र का पाठ भी समृद्धि की कामना से किया जाता है। कुछ ज्योतिषाचार्य मंगलवार को लाल चंदन की माला से विशेष मंत्र का जप करने की भी सलाह देते हैं। धार्मिक मान्यता है कि इससे आत्मविश्वास बढ़ता है और व्यक्ति कठिन परिस्थितियों का सामना अधिक धैर्य के साथ कर पाता है। हालांकि यह समझना आवश्यक है कि धार्मिक और ज्योतिषीय उपाय आस्था का विषय हैं और इनके परिणामों का वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध नहीं है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कोई व्यक्ति कर्ज की समस्या से जूझ रहा है तो धार्मिक आस्था के साथ-साथ खर्चों पर नियंत्रण, नियमित बचत, समय पर ऋण भुगतान और सही वित्तीय योजना अपनाना सबसे प्रभावी उपाय है। आस्था मानसिक संबल दे सकती है, जबकि आर्थिक अनुशासन ही दीर्घकालिक वित्तीय स्थिरता का वास्तविक आधार बनता है।

मुस्लिम पर्सनल लॉ के तहत नाबालिग की शादी की दलील इलाहाबाद HC ने की रद्द, कहा- कानून सबसे ऊपर

नई दिल्ली। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने नाबालिगों के विवाह से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में स्पष्ट किया है कि मुस्लिम पर्सनल लॉ की व्यवस्थाएं बाल विवाह निषेध अधिनियम (PCMA) और पॉक्सो (POCSO) अधिनियम जैसे केंद्रीय कानूनों से ऊपर नहीं हो सकतीं। अदालत ने कहा कि देश में विवाह की न्यूनतम आयु से संबंधित कानून सभी नागरिकों पर समान रूप से लागू होते हैं, चाहे उनका धर्म कोई भी हो। जस्टिस जे.जे. मुनीर और जस्टिस अचल सचदेव की खंडपीठ ने कहा कि मुस्लिम पर्सनल लॉ में भले ही यौवन (प्यूबर्टी) को विवाह योग्य आयु माना गया हो, लेकिन यह प्रावधान बाल विवाह निषेध अधिनियम और पॉक्सो कानून के प्रभाव को समाप्त नहीं कर सकता। अदालत ने यह भी कहा कि पॉक्सो अधिनियम बच्चों के साथ यौन संबंधों को अपराध की श्रेणी में रखता है और किसी भी व्यक्तिगत कानून के आधार पर इससे छूट नहीं दी जा सकती। बुलंदशहर की घटना से जुड़ा मामलायह टिप्पणी अदालत ने रूबी और अन्य 18 लोगों की उस याचिका को खारिज करते हुए की, जिसमें उन्होंने अपने खिलाफ दर्ज एफआईआर रद्द करने की मांग की थी। मामला उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर का है, जहां 16 वर्षीय मुस्लिम किशोरी का बाल विवाह रुकवाने पहुंची पुलिस और चाइल्डलाइन की रेस्क्यू टीम पर हमला करने तथा सरकारी कार्य में बाधा डालने का आरोप याचिकाकर्ताओं पर है। याचिकाकर्ताओं ने अदालत में दलील दी थी कि शरिया कानून के अनुसार लड़की के यौवन प्राप्त करने के बाद, जिसे सामान्यतः 15 वर्ष माना जाता है, उसका विवाह कराया जा सकता है। उनका कहना था कि बाल विवाह निषेध अधिनियम, 2006 उनके व्यक्तिगत कानून पर लागू नहीं होता। हाईकोर्ट ने दलील को किया खारिजअदालत ने इस तर्क को स्वीकार करने से इनकार करते हुए कहा कि यदि 18 वर्ष से कम आयु के व्यक्ति के विवाह को वैध माना जाए, तो वैवाहिक संबंधों के चलते पॉक्सो अधिनियम का सीधा उल्लंघन होगा। इसलिए किसी भी व्यक्तिगत कानून के आधार पर बाल विवाह को वैध नहीं ठहराया जा सकता। खंडपीठ ने माना कि इस विषय पर विभिन्न उच्च न्यायालयों के अलग-अलग दृष्टिकोण रहे हैं, लेकिन उसने केरल हाईकोर्ट के उस मत से सहमति जताई, जिसमें कहा गया है कि कोई भी पर्सनल लॉ बाल विवाह पर लगे कानूनी प्रतिबंध को समाप्त नहीं कर सकता। सुप्रीम कोर्ट के आदेश का भी किया उल्लेखहाईकोर्ट ने अपने फैसले में सुप्रीम कोर्ट के वर्ष 2025 के एक आदेश का भी उल्लेख किया। अदालत ने कहा कि बाल विवाह निषेध (संशोधन) विधेयक, 2021 संसद में लंबित रहने के दौरान इस विषय पर कुछ कानूनी प्रश्न उठे थे। हालांकि, 17वीं लोकसभा के भंग होने के साथ ही यह विधेयक स्वतः समाप्त हो गया और इस मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट का अंतिम निर्णय अभी आना बाकी है। एफआईआर रद्द करने से किया इनकारअदालत ने प्रथम दृष्टया माना कि मामले में नाबालिग के परिजनों और अन्य लोगों द्वारा कानून का उल्लंघन किया गया है। साथ ही पुलिस और चाइल्डलाइन की टीम की त्वरित कार्रवाई की सराहना करते हुए कहा कि सरकारी अधिकारियों के कार्य में बाधा डालने, उनके साथ अभद्रता और हमला करने के आरोपों की विस्तृत जांच आवश्यक है। इसी आधार पर हाईकोर्ट ने 1 जुलाई को दिए अपने आदेश में एफआईआर रद्द करने से इनकार करते हुए सभी याचिकाएं खारिज कर दीं।

गुरुवार पूजा विधि से मिलेगा भगवान विष्णु और देवगुरु बृहस्पति का आशीर्वाद सुख समृद्धि और तरक्की के खुलेंगे नए द्वार

नई दिल्ली । हिंदू धर्म में सप्ताह का प्रत्येक दिन किसी न किसी देवी देवता को समर्पित माना गया है। गुरुवार का विशेष महत्व भगवान विष्णु और देवगुरु बृहस्पति की आराधना के लिए माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन श्रद्धा और नियमपूर्वक पूजा करने से जीवन में आर्थिक उन्नति वैवाहिक सुख संतान का कल्याण और ज्ञान की प्राप्ति होती है। जिन लोगों की कुंडली में बृहस्पति कमजोर होता है या विवाह शिक्षा और करियर में लगातार बाधाएं आती हैं उनके लिए गुरुवार का व्रत और पूजा विशेष फलदायी मानी जाती है। गुरुवार की शुरुआत प्रातःकाल जल्दी उठकर स्नान करने से करें। स्नान के बाद साफ और संभव हो तो पीले रंग के वस्त्र धारण करें क्योंकि पीला रंग देवगुरु बृहस्पति का प्रिय माना जाता है। इसके बाद घर के मंदिर की साफ सफाई करें और भगवान विष्णु की प्रतिमा या चित्र के सामने दीपक जलाएं। पूजा में पीले फूल हल्दी चंदन केले चने की दाल पीले फल और बेसन या बूंदी के लड्डू का भोग अर्पित करना शुभ माना जाता है। पूजा के दौरान भगवान विष्णु का ध्यान करते हुए विष्णु सहस्रनाम विष्णु चालीसा या श्री हरि के मंत्रों का श्रद्धापूर्वक जाप करें। देवगुरु बृहस्पति की कृपा प्राप्त करने के लिए बृहस्पति मंत्र का जप भी किया जा सकता है। पूजा के अंत में आरती करें और परिवार के सभी सदस्यों को प्रसाद वितरित करें। यदि संभव हो तो इस दिन केले के वृक्ष की पूजा भी करें और उसके पास दीपक जलाकर जल अर्पित करें। धार्मिक मान्यताओं में इसे अत्यंत शुभ माना गया है। गुरुवार के व्रत में सात्विक भोजन करने का विशेष महत्व बताया गया है। कई श्रद्धालु दिनभर उपवास रखकर केवल एक समय भोजन ग्रहण करते हैं। इस दिन पीले रंग के भोजन जैसे चने की दाल बेसन से बने व्यंजन केसर युक्त खीर या केला खाना शुभ माना जाता है। मान्यता है कि गुरुवार के दिन तामसिक भोजन और नकारात्मक विचारों से दूर रहना चाहिए ताकि पूजा का पूर्ण फल प्राप्त हो सके। धार्मिक परंपराओं के अनुसार इस दिन जरूरतमंद लोगों को पीले वस्त्र हल्दी चने की दाल केला या पीले रंग की मिठाई का दान करना भी शुभ माना जाता है। दान और सेवा के कार्यों से भगवान विष्णु और देवगुरु बृहस्पति दोनों प्रसन्न होते हैं और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। गुरुवार के दिन कुछ बातों का विशेष ध्यान रखने की भी सलाह दी जाती है। कई धार्मिक मान्यताओं में इस दिन बाल और नाखून नहीं कटवाने तथा अनावश्यक क्रोध और कटु वचन से बचने की बात कही गई है। परिवार में प्रेम और सौहार्द बनाए रखना भी इस दिन की पूजा का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। यदि श्रद्धा विश्वास और नियम के साथ प्रत्येक गुरुवार भगवान विष्णु और देवगुरु बृहस्पति की पूजा की जाए तो धार्मिक मान्यताओं के अनुसार जीवन में सुख समृद्धि सम्मान ज्ञान और सफलता के नए अवसर प्राप्त होते हैं। पूजा का सबसे महत्वपूर्ण आधार सच्ची आस्था सकारात्मक सोच और अच्छे कर्म हैं क्योंकि यही जीवन में स्थायी खुशहाली और शांति का मार्ग प्रशस्त करते हैं।