मध्यपूर्व में बढ़ते तनाव के बीच कीमती धातुओं में नरमी, सोना-चांदी शुरुआती कारोबार में फिसले, निवेशकों की नजर वैश्विक घटनाक्रम पर

नई दिल्ली । मध्यपूर्व में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक बाजारों में जारी अनिश्चितता के बीच शुक्रवार को घरेलू सर्राफा बाजार की शुरुआत नरमी के साथ हुई। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) पर सोने और चांदी दोनों की कीमतों में शुरुआती कारोबार के दौरान गिरावट दर्ज की गई। हालांकि दोनों धातुओं में गिरावट की तीव्रता अलग-अलग रही, लेकिन शुरुआती रुझान निवेशकों के सतर्क रुख को दर्शाते रहे। एमसीएक्स पर सोने का अगस्त 2026 वायदा अनुबंध पिछले कारोबारी सत्र के मुकाबले कमजोर स्तर पर खुला। शुरुआती कारोबार में इसकी कीमत लगातार दबाव में रही और कुछ ही समय में गिरावट बढ़कर लगभग आधा प्रतिशत के करीब पहुंच गई। कारोबार के दौरान सोने का भाव प्रति 10 ग्राम लगभग 1.44 लाख रुपये के स्तर के आसपास पहुंच गया। इससे स्पष्ट हुआ कि वैश्विक तनाव के बावजूद निवेशकों की खरीदारी सीमित रही और बाजार में मुनाफावसूली का असर दिखाई दिया। चांदी के वायदा कारोबार में भी नरमी देखने को मिली। हालांकि इसकी गिरावट सोने की तुलना में अपेक्षाकृत कम रही। सितंबर डिलीवरी वाले अनुबंध में शुरुआती कारोबार के दौरान मामूली कमजोरी दर्ज की गई और कीमतें पिछले बंद स्तर से नीचे कारोबार करती रहीं। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि चांदी की कीमतों पर औद्योगिक मांग और अंतरराष्ट्रीय रुझानों का भी महत्वपूर्ण प्रभाव रहता है, जिसके कारण इसमें उतार-चढ़ाव की प्रकृति सोने से कुछ अलग दिखाई देती है। अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी दोनों कीमती धातुओं का प्रदर्शन मिश्रित रहा। वैश्विक कमोडिटी बाजार में सोने की कीमतों में हल्की कमजोरी दर्ज की गई, जबकि चांदी सीमित बढ़त के साथ कारोबार करती दिखाई दी। इससे यह संकेत मिला कि निवेशक फिलहाल वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों, अमेरिकी मौद्रिक नीति और भू-राजनीतिक घटनाक्रम का आकलन करते हुए सतर्क रणनीति अपना रहे हैं। मध्यपूर्व में हाल के दिनों में बढ़े सैन्य तनाव ने वैश्विक वित्तीय बाजारों की चिंता बढ़ाई है। विभिन्न अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों के अनुसार, क्षेत्र में सैन्य गतिविधियों के तेज होने और जवाबी कार्रवाइयों के बाद निवेशकों की नजर लगातार घटनाक्रम पर बनी हुई है। ऐसे समय में सामान्यतः सुरक्षित निवेश माने जाने वाले सोने की मांग बढ़ने की संभावना रहती है, लेकिन बाजार में मुनाफावसूली, डॉलर की चाल और निवेशकों की रणनीति जैसे अन्य कारक भी कीमतों को प्रभावित करते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि कीमती धातुओं की कीमतें केवल भू-राजनीतिक घटनाओं से ही तय नहीं होतीं, बल्कि वैश्विक ब्याज दरों, डॉलर इंडेक्स, केंद्रीय बैंकों की नीतियों और निवेशकों की जोखिम लेने की क्षमता जैसे कई आर्थिक कारकों का भी उन पर सीधा प्रभाव पड़ता है। इसलिए किसी एक घटना के आधार पर कीमतों की दिशा तय करना उचित नहीं माना जाता। आने वाले कारोबारी सत्रों में निवेशकों की नजर मध्यपूर्व की स्थिति, वैश्विक आर्थिक संकेतकों और अंतरराष्ट्रीय कमोडिटी बाजार के रुख पर बनी रहेगी। यदि क्षेत्रीय तनाव और बढ़ता है या वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों में कोई बड़ा बदलाव आता है, तो इसका असर सोने और चांदी की कीमतों पर भी दिखाई दे सकता है। फिलहाल बाजार में सतर्कता का माहौल बना हुआ है और निवेशक प्रत्येक नए घटनाक्रम का इंतजार कर रहे हैं, जिससे आगे की कीमतों की दिशा स्पष्ट हो सके।
नाना पटवारी ने मानी पुरानी ड्रग्स की लत, बोले- रिहैब के बाद छोड़ा नशा; कांग्रेस ने पुलिस कार्रवाई को बताया राजनीतिक प्रतिशोध

मध्यप्रदेश । मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी के भाई नाना पटवारी को पुलिस हिरासत में लिए जाने के बाद प्रदेश की राजनीति गरमा गई है। शुक्रवार को इंदौर में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में नाना पटवारी ने पहली बार सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया कि वे करीब तीन साल पहले तक ड्रग्स का सेवन करते थे, लेकिन रिहैब सेंटर में इलाज के बाद उन्होंने नशा पूरी तरह छोड़ दिया। उन्होंने कहा कि आज उनका ड्रग तस्करी से कोई संबंध नहीं है और उनकी सबसे बड़ी गलती सिर्फ इतनी है कि वे कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी के भाई हैं। प्रेस कॉन्फ्रेंस में नाना पटवारी ने दावा किया कि ड्रग्स मामले में गिरफ्तार आरोपियों से उनका कोई लेन-देन या संबंध नहीं है। उन्होंने बताया कि वे अपनी कार की सर्विसिंग कराने गए थे, तभी पुलिस उन्हें अपने साथ ले गई। उनके अनुसार थाने में उनसे केवल सामान्य पूछताछ की गई, लेकिन हिरासत में लेने का स्पष्ट कारण नहीं बताया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि पूरे दिन उन्हें अलग-अलग स्थानों पर घुमाया गया और देर रात बिना किसी कार्रवाई के छोड़ दिया गया। नाना पटवारी ने कहा कि उनकी कार संजय कौशल उर्फ रॉनी के सर्विस सेंटर पर सर्विस होती है और वहीं काम करने वाले कुछ लोगों के बारे में पुलिस ने उनसे पूछताछ की। उन्होंने स्पष्ट किया कि जिस स्कॉर्पियो वाहन की चर्चा हो रही है, वह उनकी नहीं बल्कि संजय कौशल की है और उसमें मिले किसी भी सामान से उनका कोई संबंध नहीं है। इस पूरे मामले को कांग्रेस ने राजनीतिक प्रतिशोध करार दिया है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार सत्ता का दुरुपयोग कर विपक्षी नेताओं और उनके परिवारों को निशाना बना रही है। उनका कहना है कि नाना पटवारी का ड्रग तस्करी प्रकरण से कोई लेना-देना नहीं है और उन्हें केवल राजनीतिक दबाव बनाने के उद्देश्य से हिरासत में लिया गया। दूसरी ओर इंदौर पुलिस का कहना है कि कार्रवाई पूरी तरह जांच के आधार पर की गई। डीसीपी नरेंद्र सिंह रावत के मुताबिक राजेंद्र नगर क्षेत्र से ब्राउन शुगर के साथ गिरफ्तार दो आरोपियों इरफान खान उर्फ गोलू चंदेरी और संजय कौशल उर्फ रॉनी ने पूछताछ के दौरान नाना पटवारी और मानव गंगवानी का नाम लिया था। इसी आधार पर दोनों को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया गया। पुलिस ने बताया कि फिलहाल कॉल डिटेल रिकॉर्ड और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की जांच की जा रही है और जांच में जिसकी भूमिका सामने आएगी, उसके खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी। नाना पटवारी पहले भी कई मामलों को लेकर चर्चा में रहे हैं। उनके खिलाफ हत्या के प्रयास सहित लगभग दस आपराधिक मामले दर्ज होने की जानकारी सामने आ चुकी है। वर्ष 2023 में विधानसभा चुनाव के दौरान भी उन्हें एक पुराने मामले में गिरफ्तार किया गया था। वहीं वर्ष 2025 में जमीन विवाद और 2018 में महिला से कथित अभद्रता के मामले में भी उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज हुई थी। उनका नाम खुशी कूलवाल आत्महत्या मामले की जांच के दौरान भी सामने आया था, हालांकि उस मामले में उनके खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई थी। फिलहाल यह मामला राजनीतिक और कानूनी दोनों स्तरों पर चर्चा का विषय बना हुआ है। कांग्रेस इसे राजनीतिक बदले की कार्रवाई बता रही है, जबकि पुलिस का कहना है कि जांच तथ्यों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे बढ़ाई जा रही है।
रियल्टी सेक्टर में Oberoi Realty की मजबूत उड़ान, तकनीकी संकेतों से बढ़ा भरोसा; जानकारों ने ₹2,000 से ऊपर का लक्ष्य बताया

नई दिल्ली । शेयर बाजार में जारी उतार-चढ़ाव के बीच रियल एस्टेट क्षेत्र की प्रमुख कंपनी Oberoi Realty के शेयर निवेशकों के आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। कंपनी के शेयरों में लगातार खरीदारी देखने को मिल रही है, जिसके चलते स्टॉक ने हाल ही में अपना नया 52-वीक हाई दर्ज किया है। बाजार खुलने के बाद भी शेयर मजबूती के साथ कारोबार करता दिखाई दिया और निवेशकों का भरोसा इस काउंटर पर बना रहा। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा तकनीकी संकेत आगे भी तेजी की संभावना की ओर इशारा कर रहे हैं। शुरुआती कारोबार के दौरान कंपनी का शेयर लगभग 1.60 प्रतिशत की बढ़त के साथ करीब ₹1,904 के स्तर पर कारोबार करता देखा गया। हाल के दिनों में स्टॉक ने जिस तरह लगातार ऊंचे स्तर बनाए हैं, उससे यह संकेत मिल रहा है कि निवेशकों की दिलचस्पी इस शेयर में लगातार बढ़ रही है। मजबूत खरीदारी और सकारात्मक बाजार धारणा ने शेयर की चाल को और मजबूती दी है। तकनीकी विश्लेषकों के अनुसार Oberoi Realty के साप्ताहिक चार्ट पर Inverse Head & Shoulders पैटर्न विकसित होता दिखाई दे रहा है। यह पैटर्न आमतौर पर तेजी का संकेत माना जाता है और इसके बनने के बाद स्टॉक में आगे भी अच्छी बढ़त देखने की संभावना रहती है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि शेयर इस संरचना की पुष्टि करता है तो आने वाले समय में इसमें नई तेजी का दौर शुरू हो सकता है। बाजार जानकारों का मानना है कि शॉर्ट-टर्म ट्रेडर्स के लिए यह स्टॉक अवसर प्रदान कर सकता है। उनका कहना है कि यदि मौजूदा तेजी बरकरार रहती है और शेयर महत्वपूर्ण स्तरों के ऊपर टिकने में सफल रहता है तो निकट अवधि में इसका भाव ₹2,000 के स्तर को पार कर सकता है। हालांकि किसी भी निवेश निर्णय से पहले जोखिम प्रबंधन और उचित स्टॉप-लॉस का पालन करना आवश्यक माना गया है। विशेषज्ञों के अनुसार किसी भी शेयर में केवल तकनीकी संकेतों के आधार पर निवेश करना पर्याप्त नहीं होता। निवेशकों को कंपनी के मूलभूत प्रदर्शन, रियल एस्टेट सेक्टर की स्थिति, आर्थिक माहौल और बाजार की समग्र दिशा पर भी ध्यान देना चाहिए। यदि व्यापक बाजार में सकारात्मक माहौल बना रहता है तो ऐसे मजबूत शेयरों में निवेशकों की रुचि और बढ़ सकती है। रियल एस्टेट सेक्टर में पिछले कुछ समय से बेहतर गतिविधियां देखने को मिली हैं, जिसका लाभ कई सूचीबद्ध कंपनियों के शेयरों को मिला है। Oberoi Realty भी इसी सकारात्मक माहौल का फायदा उठाने वाली प्रमुख कंपनियों में शामिल है। कंपनी के शेयरों में लगातार बनी हुई मजबूती यह संकेत देती है कि बाजार प्रतिभागी इसके भविष्य को लेकर आशावादी नजर आ रहे हैं। हालांकि शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव स्वाभाविक प्रक्रिया है, इसलिए निवेशकों को किसी भी प्रकार का निर्णय सोच-समझकर और अपने वित्तीय लक्ष्यों के अनुरूप ही लेना चाहिए। आने वाले कारोबारी सत्रों में निवेशकों की निगाह इस बात पर रहेगी कि क्या Oberoi Realty का शेयर ₹2,000 के महत्वपूर्ण स्तर को पार कर नई ऊंचाई हासिल करने में सफल होता है या नहीं।
खेती छोड़ बना ड्रग तस्कर, मंदसौर से ब्राउन शुगर लाकर इंदौर में करता था सप्लाई, 11 लाख का माल जब्त

मध्यप्रदेश । मध्य प्रदेश में नशे के कारोबार पर शिकंजा कसने के अभियान के तहत इंदौर पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। खजराना थाना पुलिस ने शुक्रवार को कार्रवाई करते हुए 110 ग्राम ब्राउन शुगर के साथ एक युवक को गिरफ्तार किया है। बरामद मादक पदार्थ की अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत करीब 11 लाख रुपए आंकी गई है। शुरुआती पूछताछ में आरोपी ने खुलासा किया है कि वह मंदसौर से सस्ते दामों पर ब्राउन शुगर खरीदकर इंदौर में ऊंचे दामों पर बेचता था। पुलिस अब इस पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने में जुटी है और यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि इस अवैध कारोबार के पीछे कौन-कौन लोग शामिल हैं। पुलिस के अनुसार मुखबिर से सूचना मिली थी कि बायपास स्थित वाघेला गार्डन के पास एक युवक बड़ी मात्रा में ब्राउन शुगर लेकर ग्राहकों की तलाश में घूम रहा है। सूचना मिलते ही खजराना थाना पुलिस ने तत्काल घेराबंदी की और संदिग्ध युवक को पकड़ लिया। तलाशी के दौरान उसके कब्जे से 110 ग्राम ब्राउन शुगर और एक मोबाइल फोन बरामद किया गया। इसके बाद आरोपी को गिरफ्तार कर एनडीपीएस एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया। गिरफ्तार आरोपी की पहचान 28 वर्षीय रामकिशन उर्फ रामनिवास गिरी निवासी ग्राम काटिया थाना सुवासरा जिला मंदसौर के रूप में हुई है। वह आठवीं तक पढ़ा है और खेती का काम करता था। पूछताछ में उसने बताया कि वह स्वयं भी नशे का आदी है। इसी लत और जल्दी पैसा कमाने की चाहत ने उसे नशे के कारोबार में धकेल दिया। आरोपी ने स्वीकार किया कि वह मंदसौर के कोटड़ी क्षेत्र से ब्राउन शुगर खरीदकर इंदौर लाता था और यहां अधिक कीमत पर बेचकर मोटा मुनाफा कमाता था। थाना प्रभारी मनोज सिंह सेंधव ने बताया कि आरोपी को पुलिस रिमांड पर लेकर गहन पूछताछ की जा रही है। जांच का मुख्य उद्देश्य ब्राउन शुगर की सप्लाई चेन का पता लगाना और उन लोगों की पहचान करना है जो इस अवैध कारोबार से जुड़े हुए हैं। पुलिस आरोपी के मोबाइल फोन की भी जांच कर रही है ताकि उसके संपर्क में रहने वाले सप्लायरों और ग्राहकों तक पहुंचा जा सके। इंदौर पुलिस का कहना है कि शहर में नशे के कारोबार के खिलाफ अभियान लगातार जारी रहेगा और किसी भी स्तर पर मादक पदार्थों की तस्करी करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। पुलिस ने आम नागरिकों से भी अपील की है कि यदि उन्हें अपने आसपास नशे की खरीद-फरोख्त या संदिग्ध गतिविधियों की जानकारी मिले तो तुरंत पुलिस को सूचना दें। जनसहयोग और सख्त कार्रवाई के जरिए ही युवाओं को नशे की गिरफ्त से बचाया जा सकता है और समाज को इस गंभीर खतरे से सुरक्षित रखा जा सकता है।
Q1 नतीजों से पहले इन 9 शेयरों पर बढ़ा भरोसा, Ratnamani Metals और L&T समेत कई दिग्गज कंपनियों की रेटिंग में सुधार से निवेशकों की बढ़ीं उम्मीदें

नई दिल्ली । पहली तिमाही के वित्तीय नतीजों का दौर शुरू होने के साथ ही शेयर बाजार की नजर अब कंपनियों के प्रदर्शन पर केंद्रित हो गई है। वैश्विक स्तर पर अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव तथा कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव जैसी चुनौतियों के बावजूद घरेलू निवेशकों का ध्यान उन कंपनियों पर है जिनसे बेहतर आय और मजबूत भविष्य की उम्मीद की जा रही है। ऐसे माहौल में कई प्रमुख कंपनियों के शेयरों को लेकर विश्लेषकों का भरोसा पहले की तुलना में अधिक मजबूत हुआ है, जिससे निवेशकों की दिलचस्पी भी बढ़ती दिखाई दे रही है। हालिया मूल्यांकन के अनुसार नौ बड़ी और मिडकैप कंपनियों की औसत रेटिंग पिछले एक महीने में बेहतर हुई है। इनमें Ratnamani Metals, Larsen & Toubro, Atul Ltd, Jio Financial Services, Maruti Suzuki, Bharti Airtel और अन्य प्रमुख कंपनियां शामिल हैं। रेटिंग में सुधार इस बात का संकेत माना जाता है कि बाजार विशेषज्ञ इन कंपनियों की कारोबारी स्थिति, आय क्षमता और आने वाले समय में विकास की संभावनाओं को पहले से अधिक मजबूत मान रहे हैं। विश्लेषकों का मानना है कि पहली तिमाही के नतीजे इस बार बाजार की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। जिन कंपनियों की आय अनुमान से बेहतर रहेगी या जो आने वाली तिमाहियों के लिए सकारात्मक मार्गदर्शन देंगी, उनके शेयरों में बेहतर प्रदर्शन देखने को मिल सकता है। यही कारण है कि निवेशक केवल बाजार की दैनिक चाल पर ध्यान देने के बजाय मजबूत बुनियादी स्थिति वाली कंपनियों की पहचान करने पर अधिक जोर दे रहे हैं। इंफ्रास्ट्रक्चर, मेटल, ऑटोमोबाइल, दूरसंचार और वित्तीय सेवाओं से जुड़ी कंपनियों में सकारात्मक रुझान दिखाई देना इस बात का संकेत है कि विभिन्न क्षेत्रों में कारोबार धीरे-धीरे मजबूत हो रहा है। बड़े प्रोजेक्ट, बढ़ती मांग, पूंजीगत निवेश और बेहतर परिचालन क्षमता जैसी बातें इन कंपनियों के पक्ष में काम कर रही हैं। इसी वजह से कई ब्रोकरेज और रिसर्च संस्थानों ने इनके प्रति अपना दृष्टिकोण पहले की तुलना में अधिक सकारात्मक किया है। बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि केवल रेटिंग में सुधार के आधार पर निवेश का निर्णय लेना उचित नहीं होगा। निवेशकों को कंपनी की वित्तीय स्थिति, आय में वृद्धि, नकदी प्रवाह, कर्ज का स्तर, प्रबंधन की रणनीति और उद्योग की संभावनाओं का भी सावधानी से आकलन करना चाहिए। हालांकि किसी शेयर की रेटिंग में लगातार सुधार यह संकेत जरूर देता है कि उसके मूलभूत कारकों में सकारात्मक बदलाव देखने को मिल रहे हैं। आने वाले दिनों में विभिन्न क्षेत्रों की बड़ी कंपनियां अपने तिमाही नतीजे घोषित करेंगी। इन परिणामों से यह स्पष्ट होगा कि कंपनियां बदलते वैश्विक और घरेलू आर्थिक माहौल में किस तरह प्रदर्शन कर रही हैं। यदि उम्मीद के अनुरूप या उससे बेहतर नतीजे सामने आते हैं तो बाजार में निवेशकों का विश्वास और मजबूत हो सकता है। ऐसे समय में मजबूत फंडामेंटल, स्थिर कारोबार और बेहतर विकास क्षमता वाली कंपनियां निवेशकों की पहली पसंद बन सकती हैं, जबकि कमजोर प्रदर्शन करने वाली कंपनियों पर दबाव भी बढ़ सकता है। कुल मिलाकर पहली तिमाही के नतीजे आने वाले सप्ताहों में शेयर बाजार की दिशा और निवेशकों की रणनीति तय करने में अहम भूमिका निभाने वाले हैं।
भोपाल में निवेश के नाम पर 33 लाख की ठगी शेयर ट्रेडिंग और रियल एस्टेट का झांसा देकर दो लोगों को बनाया शिकार

भोपाल । राजधानी भोपाल में ऑनलाइन निवेश और रियल एस्टेट कारोबार के नाम पर धोखाधड़ी के मामले लगातार बढ़ते जा रहे हैं। एक बार फिर साइबर ठगों और निवेश के नाम पर भरोसा जीतने वाले आरोपियों ने दो अलग-अलग लोगों को अपना निशाना बनाकर कुल 33 लाख रुपए की ठगी कर ली। एक मामले में शेयर ट्रेडिंग में भारी मुनाफे का लालच देकर रिटायर्ड बैंक कर्मचारी से 23 लाख रुपए ऐंठ लिए गए जबकि दूसरे मामले में रियल एस्टेट कारोबार में निवेश का भरोसा दिलाकर फिजियोथेरेपिस्ट से 10 लाख रुपए हड़प लिए गए। दोनों मामलों में पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पहला मामला मिसरोद थाना क्षेत्र का है जहां सलैया निवासी 48 वर्षीय रोहित वर्मा साइबर ठगी का शिकार बने। निजी बैंक से सेवानिवृत्त रोहित वर्मा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम पर शेयर ट्रेडिंग से जुड़ा एक विज्ञापन देखा। विज्ञापन के माध्यम से उन्होंने एक ट्रेडिंग ऐप डाउनलोड किया जिसके बाद उनसे संपर्क कर निवेश पर मोटे मुनाफे का दावा किया गया। शुरुआती बातचीत और भरोसा दिलाने के बाद आरोपियों ने उन्हें अलग-अलग चरणों में करीब 23 लाख रुपए निवेश करने के लिए तैयार कर लिया। जब निवेश की रकम बढ़ती गई तो रोहित वर्मा को भरोसा हो गया कि उन्हें अच्छा लाभ मिलेगा। लेकिन जब उन्होंने अपने निवेश की राशि और मुनाफा वापस मांगना शुरू किया तो आरोपियों ने संपर्क पूरी तरह बंद कर दिया। इसके बाद उन्हें ठगी का एहसास हुआ और उन्होंने पुलिस से शिकायत की। पुलिस अब इस मामले में उपयोग किए गए बैंक खातों मोबाइल नंबरों और डिजिटल लेनदेन की जांच कर आरोपियों तक पहुंचने का प्रयास कर रही है। दूसरा मामला निशातपुरा थाना क्षेत्र का है जहां पेशे से फिजियोथेरेपिस्ट नीरज तिवारी को रियल एस्टेट कारोबार में निवेश का झांसा देकर 10 लाख रुपए की धोखाधड़ी की गई। शिकायत के अनुसार उन्होंने अपने रिश्तेदार संजय तिवारी के कहने पर रियल एस्टेट कारोबार में निवेश के लिए 10 लाख रुपए दिए थे। शुरुआत में आरोपी ने कारोबार में अच्छा लाभ मिलने का भरोसा दिलाया लेकिन समय बीतने के बाद भी रकम वापस नहीं की। बताया गया कि पिछले वर्ष आरोपी ने केवल 2 लाख रुपए लौटाए और शेष राशि जल्द देने का आश्वासन देता रहा। लंबे समय तक टालमटोल के बाद जब पूरी रकम वापस नहीं मिली तो पीड़ित ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। जांच के बाद पुलिस ने आरोपी के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज कर लिया है और आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि ऑनलाइन निवेश और अधिक मुनाफे का लालच देने वाले विज्ञापनों से लोगों को सतर्क रहने की जरूरत है। किसी भी अनजान ऐप या व्यक्ति के कहने पर बड़ी रकम निवेश करने से पहले उसकी पूरी जानकारी और वैधता की जांच करना जरूरी है। वहीं रिश्तेदारी या जान-पहचान के आधार पर भी बिना लिखित दस्तावेज और कानूनी सुरक्षा के बड़ी रकम निवेश करना आर्थिक नुकसान का कारण बन सकता है। पुलिस ने लोगों से अपील की है कि किसी भी संदिग्ध निवेश प्रस्ताव या साइबर धोखाधड़ी की जानकारी तुरंत पुलिस और साइबर हेल्पलाइन को दें ताकि समय रहते कार्रवाई की जा सके।
रिलायंस की हिस्सेदारी वाली HFCL को विदेश से ₹496 करोड़ का बड़ा ऑर्डर, डेटा सेंटर कनेक्टिविटी कारोबार में मिली नई रफ्तार, निवेशकों का भरोसा और मजबूत

नई दिल्ली । रिलायंस इंडस्ट्रीज की हिस्सेदारी वाली टेक्नोलॉजी कंपनी एचएफसीएल को अंतरराष्ट्रीय बाजार से करीब 496 करोड़ रुपये का बड़ा एक्सपोर्ट ऑर्डर मिलने के बाद कंपनी एक बार फिर निवेशकों और उद्योग जगत के केंद्र में आ गई है। इस नए अनुबंध के साथ कंपनी के डेटा सेंटर कनेक्टिविटी कारोबार को महत्वपूर्ण मजबूती मिलने की उम्मीद है। बाजार में इस घोषणा का सकारात्मक असर देखने को मिला और कारोबार के दौरान कंपनी के शेयरों में उल्लेखनीय तेजी दर्ज की गई। निवेशकों ने इस ऑर्डर को कंपनी की वैश्विक क्षमता और भविष्य की विकास संभावनाओं का मजबूत संकेत माना। कंपनी की विदेशी सहायक इकाई को मिले इस अनुबंध के तहत डेटा सेंटर के लिए ऑप्टिकल फाइबर केबल आधारित कनेक्टिविटी सॉल्यूशन की आपूर्ति की जाएगी। आधुनिक डेटा सेंटरों में तेज, सुरक्षित और भरोसेमंद डेटा ट्रांसमिशन की मांग लगातार बढ़ रही है। ऐसे में ऑप्टिकल फाइबर नेटवर्क डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर का अहम हिस्सा बन चुका है। इस ऑर्डर से एचएफसीएल की तकनीकी विशेषज्ञता और उच्च गुणवत्ता वाले नेटवर्क समाधान की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ती स्वीकार्यता भी सामने आई है। कंपनी का कहना है कि यह अनुबंध उसके वैश्विक ग्राहकों के विश्वास को दर्शाता है। एचएफसीएल ने वर्षों के दौरान अपनी विनिर्माण क्षमता, अनुसंधान और तकनीकी नवाचार के आधार पर दूरसंचार और नेटवर्किंग क्षेत्र में मजबूत पहचान बनाई है। कंपनी का लक्ष्य निर्धारित समय सीमा के भीतर इस परियोजना को पूरा करना है और इसके दिसंबर 2026 तक पूरा होने की उम्मीद जताई गई है। समय पर डिलीवरी और गुणवत्ता बनाए रखना कंपनी की प्राथमिकता रहेगी। एचएफसीएल दूरसंचार, ऑप्टिकल फाइबर, नेटवर्किंग और रक्षा क्षेत्र में सक्रिय प्रमुख भारतीय कंपनियों में शामिल है। कंपनी ऑप्टिकल फाइबर केबल, टेलीकॉम उपकरण, वायरलेस संचार समाधान और रक्षा संबंधी तकनीकी उत्पादों का डिजाइन, विकास और निर्माण करती है। भारत में डिजिटल कनेक्टिविटी के विस्तार, 5जी नेटवर्क और डेटा सेंटर इंफ्रास्ट्रक्चर की बढ़ती मांग ने कंपनी के कारोबार को नई गति प्रदान की है। यही कारण है कि अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी इसके उत्पादों की मांग लगातार बढ़ रही है। रिलायंस इंडस्ट्रीज अपनी निवेश इकाइयों के माध्यम से एचएफसीएल में हिस्सेदारी रखती है। दोनों कंपनियों के बीच लंबे समय से कारोबारी संबंध रहे हैं और दूरसंचार नेटवर्क तथा ऑप्टिकल फाइबर परियोजनाओं में एचएफसीएल महत्वपूर्ण भूमिका निभाती रही है। डिजिटल सेवाओं और हाई-स्पीड नेटवर्क की बढ़ती जरूरतों के बीच इस तरह के अनुबंध भविष्य में भी कंपनी के लिए नए अवसर पैदा कर सकते हैं। शेयर बाजार में भी इस घोषणा का सकारात्मक असर देखने को मिला। कारोबार के दौरान कंपनी के शेयरों में अच्छी तेजी दर्ज की गई और निवेशकों का रुझान मजबूत बना रहा। हाल के महीनों में एचएफसीएल के शेयरों ने उल्लेखनीय प्रदर्शन किया है। पिछले एक महीने से लेकर एक वर्ष और तीन वर्षों की अवधि तक कंपनी ने निवेशकों को आकर्षक रिटर्न दिया है। बेहतर ऑर्डर बुक, मजबूत तकनीकी क्षमता और वैश्विक विस्तार की रणनीति को बाजार सकारात्मक संकेत के रूप में देख रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि दुनिया भर में डेटा सेंटर, क्लाउड कंप्यूटिंग, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और हाई-स्पीड डिजिटल नेटवर्क की मांग लगातार बढ़ रही है। ऐसे माहौल में ऑप्टिकल फाइबर आधारित कनेक्टिविटी समाधान उपलब्ध कराने वाली कंपनियों के लिए नए अवसर तैयार हो रहे हैं। एचएफसीएल को मिला यह बड़ा अंतरराष्ट्रीय ऑर्डर न केवल कंपनी के कारोबार को नई मजबूती देगा, बल्कि भारत की तकनीकी विनिर्माण क्षमता और वैश्विक प्रतिस्पर्धा में उसकी बढ़ती हिस्सेदारी का भी महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है।
आईटी शेयरों की दमदार खरीदारी से बाजार में लौटी रौनक, सेंसेक्स 700 अंक से ज्यादा उछला, निफ्टी ने फिर पार किया 24,200 का अहम स्तर

नई दिल्ली । भारतीय शेयर बाजार में शुक्रवार को लगातार दूसरे कारोबारी सत्र में मजबूती का माहौल देखने को मिला। शुरुआती कारोबार में निवेशकों की मजबूत खरीदारी के चलते सेंसेक्स 700 अंक से अधिक उछल गया, जबकि निफ्टी ने 24,200 के स्तर को फिर से पार कर लिया। बाजार में यह तेजी केवल चुनिंदा शेयरों तक सीमित नहीं रही, बल्कि आईटी, मेटल, ऑयल एंड गैस, ऑटो और वित्तीय क्षेत्र के कई प्रमुख शेयरों में भी अच्छी खरीदारी दर्ज की गई। इससे निवेशकों का भरोसा एक बार फिर मजबूत होता दिखाई दिया। बाजार की इस तेजी में सबसे बड़ा योगदान आईटी सेक्टर का रहा। प्रमुख आईटी कंपनियों के बेहतर कारोबारी संकेतों और सकारात्मक तिमाही प्रदर्शन की उम्मीदों ने निवेशकों का विश्वास बढ़ाया। इसका असर यह रहा कि आईटी क्षेत्र के बड़े शेयरों में शुरुआती कारोबार से ही मजबूत खरीदारी देखने को मिली। इस तेजी का प्रभाव निफ्टी आईटी इंडेक्स पर भी स्पष्ट दिखाई दिया, जिसमें उल्लेखनीय बढ़त दर्ज की गई। इससे पूरे बाजार का निवेशक मनोबल मजबूत हुआ और अन्य क्षेत्रों में भी खरीदारी का रुख बना रहा। आईटी क्षेत्र की मजबूती के साथ-साथ मेटल और ऑयल एंड गैस सेक्टर के शेयरों ने भी बाजार को सहारा दिया। धातु कंपनियों में बढ़ती खरीदारी और ऊर्जा क्षेत्र की प्रमुख कंपनियों में निवेशकों की सक्रियता ने बाजार की व्यापक मजबूती को और बल दिया। बड़े औद्योगिक समूहों के शेयरों में भी अच्छी तेजी दर्ज की गई, जिससे प्रमुख सूचकांकों को अतिरिक्त समर्थन मिला। ऑटोमोबाइल कंपनियों के शेयरों में भी सकारात्मक कारोबार देखने को मिला और कई दिग्गज कंपनियों के शेयर हरे निशान में कारोबार करते रहे। वित्तीय क्षेत्र की कुछ प्रमुख गैर-बैंकिंग कंपनियों में भी निवेशकों की रुचि बनी रही। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कॉरपोरेट नतीजे उम्मीद के अनुरूप आते हैं और वैश्विक बाजारों से सकारात्मक संकेत मिलते रहते हैं तो घरेलू शेयर बाजार में यह मजबूती आगे भी जारी रह सकती है। लगातार दूसरे दिन आई तेजी ने यह संकेत दिया है कि हाल की गिरावट के बाद निवेशक फिर से गुणवत्ता वाले शेयरों में निवेश करने के लिए सक्रिय हो रहे हैं। तकनीकी विश्लेषण के अनुसार निफ्टी के लिए 24,100 का स्तर फिलहाल महत्वपूर्ण सपोर्ट के रूप में उभरकर सामने आया है। जब तक सूचकांक इस स्तर के ऊपर बना रहता है, तब तक बाजार में सकारात्मक रुझान जारी रहने की संभावना बनी रह सकती है। यदि खरीदारी का यह सिलसिला आगे भी कायम रहता है तो निफ्टी आने वाले कारोबारी सत्रों में नए ऊंचे स्तरों की ओर बढ़ सकता है। हालांकि बाजार विशेषज्ञ निवेशकों को वैश्विक आर्थिक घटनाक्रम, तिमाही नतीजों और अन्य प्रमुख आर्थिक संकेतकों पर भी लगातार नजर बनाए रखने की सलाह दे रहे हैं। कारोबार के शुरुआती घंटों में दिखी व्यापक खरीदारी ने यह संकेत दिया कि निवेशकों का भरोसा धीरे-धीरे मजबूत हो रहा है। विभिन्न क्षेत्रों में संतुलित तेजी और बड़े शेयरों में निवेशकों की सक्रिय भागीदारी से बाजार का समग्र वातावरण सकारात्मक बना रहा। आने वाले दिनों में कंपनियों के तिमाही परिणाम और वैश्विक बाजारों से मिलने वाले संकेत यह तय करेंगे कि घरेलू शेयर बाजार अपनी इस तेजी को कितनी मजबूती के साथ आगे बढ़ा पाता है।
मास्टर प्लान को लेकर दिशा बैठक में गरमाई राजनीति विधायक और जनपद अध्यक्ष में तीखी बहस सांसद बोले जल्द हो लागू

भोपाल । भोपाल के बहुप्रतीक्षित मास्टर प्लान को लेकर जिला विकास समन्वय एवं निगरानी समिति दिशा की बैठक शुक्रवार को राजनीतिक टकराव का अखाड़ा बन गई। मास्टर प्लान के लंबे समय से लागू नहीं होने के मुद्दे पर कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद और आतिफ अकील ने बैठक में तीखा विरोध दर्ज कराया। उन्होंने सवाल उठाया कि जब राजधानी के विकास का सबसे अहम दस्तावेज ही लागू नहीं हो पा रहा है तो विकास समीक्षा बैठकों का क्या औचित्य रह जाता है। इसी मुद्दे पर चर्चा के दौरान फंदा जनपद पंचायत अध्यक्ष प्रमोद सिंह राजपूत के हस्तक्षेप से माहौल और अधिक गरमा गया और बैठक में तीखी नोकझोंक शुरू हो गई। विवाद के दौरान कांग्रेस विधायकों ने आपत्ति जताते हुए कहा कि उनकी बात सांसद से हो रही थी ऐसे में बीच में हस्तक्षेप करने का अधिकार किसे है। दोनों पक्षों के बीच बहस इतनी बढ़ गई कि कुछ समय तक बैठक का माहौल पूरी तरह तनावपूर्ण बना रहा। कांग्रेस विधायकों ने आरोप लगाया कि उनकी बातों को गंभीरता से नहीं सुना जा रहा है और नाराज होकर बैठक से बाहर निकल गए। बैठक की अध्यक्षता कर रहे सांसद आलोक शर्मा ने दोनों नेताओं को रोकने और समझाने का प्रयास किया लेकिन वे वापस नहीं लौटे। बैठक के बाद सांसद आलोक शर्मा ने भी स्वीकार किया कि भोपाल के सुनियोजित विकास के लिए मास्टर प्लान का जल्द लागू होना बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि इस संबंध में मुख्यमंत्री से जल्द मुलाकात कर मास्टर प्लान को शीघ्र लागू कराने का आग्रह किया जाएगा। उनका मानना है कि राजधानी के भविष्य के विकास और बुनियादी ढांचे को व्यवस्थित बनाने के लिए मास्टर प्लान सबसे महत्वपूर्ण दस्तावेज है। बैठक के दौरान केवल मास्टर प्लान ही नहीं बल्कि स्मार्ट सिटी परियोजना भी जनप्रतिनिधियों के निशाने पर रही। भाजपा विधायक भगवानदास सबनानी ने परियोजना की कार्यप्रणाली पर कड़ी नाराजगी जताते हुए कहा कि स्मार्ट सिटी के नाम पर बड़े निर्माण तो हुए लेकिन नागरिक सुविधाओं की अनदेखी की गई। उन्होंने आरोप लगाया कि कई इमारतों में मूलभूत सुविधाओं का अभाव है और दशहरा मैदान जैसी महत्वपूर्ण जगहों का भी नुकसान हुआ है। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि स्मार्ट सिटी के बड़े व्यावसायिक प्लॉट छोटे किए जाएं ताकि उनकी बिक्री आसान हो और परियोजना की आय बढ़ सके। महापौर मालती राय ने भी स्मार्ट सिटी की व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि स्ट्रीट लाइट जैसी सामान्य समस्याओं का समाधान भी समय पर नहीं हो पाता जिससे आम नागरिकों को परेशानी झेलनी पड़ती है। इस पर कलेक्टर एवं स्मार्ट सिटी बोर्ड के अध्यक्ष प्रियंक मिश्रा ने भरोसा दिलाया कि अलग बैठक कर सभी समस्याओं की समीक्षा की जाएगी और समाधान सुनिश्चित किया जाएगा। सांसद आलोक शर्मा ने कहा कि स्मार्ट सिटी परियोजना में विभिन्न विभागों के बीच समन्वय की कमी दिखाई देती है। उन्होंने पूरे प्रोजेक्ट के लिए एक नोडल एजेंसी बनाने का सुझाव दिया ताकि सभी विभाग मिलकर बेहतर तरीके से काम कर सकें। इस दौरान कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद ने भी भाजपा विधायक भगवानदास सबनानी द्वारा उठाए गए मुद्दों का समर्थन करते हुए कहा कि यदि वरिष्ठ जनप्रतिनिधि समस्याओं की ओर ध्यान दिला रहे हैं तो अधिकारियों को उन्हें गंभीरता से लेकर जल्द समाधान करना चाहिए। बैठक में एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव भोजपाल वेटलैंड प्राधिकरण के गठन को लेकर भी पारित किया गया। प्रस्ताव के अनुसार संभागायुक्त को प्राधिकरण का अध्यक्ष बनाया जाए जबकि भोपाल और सीहोर के कलेक्टर जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी तथा जनप्रतिनिधियों को इसमें शामिल किया जाए। इस प्रस्ताव को मुख्यमंत्री के पास भेजने का निर्णय लिया गया। साथ ही भोपाल को आधिकारिक रूप से वेटलैंड सिटी घोषित करने की मांग भी बैठक में प्रमुखता से उठाई गई।
120 साल पुरानी Eveready के सामने नई चुनौती, बैटरी कारोबार पर बढ़ा लागत और नियमों का दबाव; ₹200 करोड़ के Alkaline प्लांट से भविष्य की रणनीति मजबूत

नई दिल्ली । देश की सबसे पुरानी और प्रमुख ड्राई-सेल बैटरी कंपनियों में शामिल Eveready अपने पारंपरिक कारोबार के लिए एक नए दौर की चुनौतियों का सामना कर रही है। करीब 120 वर्षों के इतिहास वाली यह कंपनी आज भी भारतीय ड्राई-सेल बैटरी बाजार में लगभग 52 प्रतिशत हिस्सेदारी रखती है और हर वर्ष 1.3 अरब से अधिक बैटरियों की बिक्री करती है। इसके बावजूद बदलते बाजार, बढ़ती लागत और नए नियामकीय प्रावधानों ने कंपनी के पारंपरिक बैटरी कारोबार पर दबाव बढ़ा दिया है। ऐसे माहौल में कंपनी ने भविष्य की मांग को ध्यान में रखते हुए अल्कलाइन बैटरी उत्पादन पर विशेष जोर देना शुरू किया है। हाल के वर्षों में वैश्विक स्तर पर जिंक की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी हुई है। ड्राई-सेल बैटरियों के निर्माण में जिंक एक प्रमुख कच्चा माल है, इसलिए इसकी लागत बढ़ने का सीधा असर उत्पादन खर्च पर पड़ रहा है। इसके साथ ही रुपये में कमजोरी के कारण आयातित कच्चे माल की कीमत भी बढ़ गई है। इससे कंपनियों के लिए लागत को नियंत्रित करना पहले की तुलना में अधिक चुनौतीपूर्ण हो गया है। ऐसे समय में मुनाफे को बनाए रखना बैटरी उद्योग के लिए बड़ी परीक्षा बन गया है। उद्योग के सामने दूसरी महत्वपूर्ण चुनौती सरकार के नए बैटरी वेस्ट मैनेजमेंट नियम हैं। इन नियमों के तहत कंपनियों को केवल बैटरी बेचने तक सीमित नहीं रहना होगा, बल्कि इस्तेमाल हो चुकी बैटरियों को वापस एकत्रित कर उनके सुरक्षित रीसाइक्लिंग की व्यवस्था भी सुनिश्चित करनी होगी। इससे कंपनियों पर अतिरिक्त परिचालन और अनुपालन लागत बढ़ने की संभावना है। पर्यावरण संरक्षण के लिहाज से यह कदम महत्वपूर्ण माना जा रहा है, लेकिन उद्योग के लिए यह एक नई जिम्मेदारी भी लेकर आया है। इसी बदलते परिदृश्य को देखते हुए Eveready ने लगभग 200 करोड़ रुपये के निवेश से देश का पहला आधुनिक अल्कलाइन बैटरी उत्पादन संयंत्र स्थापित किया है। कंपनी का मानना है कि आने वाले वर्षों में अल्कलाइन बैटरियों की मांग तेजी से बढ़ेगी, क्योंकि ये सामान्य जिंक-कार्बन बैटरियों की तुलना में अधिक समय तक चलती हैं और बेहतर प्रदर्शन देती हैं। आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों, स्मार्ट गैजेट्स और उच्च ऊर्जा खपत वाले उत्पादों में अल्कलाइन बैटरियों की उपयोगिता लगातार बढ़ रही है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि भारतीय उपभोक्ताओं की पसंद भी धीरे-धीरे बदल रही है। अब ग्राहक अधिक टिकाऊ और बेहतर प्रदर्शन देने वाले उत्पादों को प्राथमिकता दे रहे हैं। ऐसे में केवल पारंपरिक ड्राई-सेल बैटरियों पर निर्भर रहना किसी भी कंपनी के लिए दीर्घकालिक रणनीति नहीं माना जा सकता। इसी कारण कंपनियां नए उत्पादों, उन्नत तकनीक और बेहतर गुणवत्ता वाली बैटरियों के विकास पर निवेश बढ़ा रही हैं। Eveready का उद्देश्य केवल मौजूदा बाजार हिस्सेदारी बनाए रखना नहीं, बल्कि तेजी से बदलते बैटरी उद्योग में अपनी प्रतिस्पर्धात्मक स्थिति को और मजबूत करना भी है। कंपनी का मानना है कि नवाचार, आधुनिक उत्पादन क्षमता और पर्यावरणीय नियमों के अनुरूप कारोबार का विस्तार भविष्य में उसकी विकास रणनीति का आधार बनेगा। यदि अल्कलाइन बैटरियों की मांग अनुमान के अनुरूप बढ़ती है, तो यह निवेश कंपनी को नए अवसरों का लाभ उठाने के साथ-साथ बदलते बाजार में दीर्घकालिक मजबूती भी प्रदान कर सकता है।