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मध्यपूर्व में बढ़ते तनाव के बीच कीमती धातुओं में नरमी, सोना-चांदी शुरुआती कारोबार में फिसले, निवेशकों की नजर वैश्विक घटनाक्रम पर

नई दिल्ली । मध्यपूर्व में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक बाजारों में जारी अनिश्चितता के बीच शुक्रवार को घरेलू सर्राफा बाजार की शुरुआत नरमी के साथ हुई। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) पर सोने और चांदी दोनों की कीमतों में शुरुआती कारोबार के दौरान गिरावट दर्ज की गई। हालांकि दोनों धातुओं में गिरावट की तीव्रता अलग-अलग रही, लेकिन शुरुआती रुझान निवेशकों के सतर्क रुख को दर्शाते रहे।

एमसीएक्स पर सोने का अगस्त 2026 वायदा अनुबंध पिछले कारोबारी सत्र के मुकाबले कमजोर स्तर पर खुला। शुरुआती कारोबार में इसकी कीमत लगातार दबाव में रही और कुछ ही समय में गिरावट बढ़कर लगभग आधा प्रतिशत के करीब पहुंच गई। कारोबार के दौरान सोने का भाव प्रति 10 ग्राम लगभग 1.44 लाख रुपये के स्तर के आसपास पहुंच गया। इससे स्पष्ट हुआ कि वैश्विक तनाव के बावजूद निवेशकों की खरीदारी सीमित रही और बाजार में मुनाफावसूली का असर दिखाई दिया।

चांदी के वायदा कारोबार में भी नरमी देखने को मिली। हालांकि इसकी गिरावट सोने की तुलना में अपेक्षाकृत कम रही। सितंबर डिलीवरी वाले अनुबंध में शुरुआती कारोबार के दौरान मामूली कमजोरी दर्ज की गई और कीमतें पिछले बंद स्तर से नीचे कारोबार करती रहीं। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि चांदी की कीमतों पर औद्योगिक मांग और अंतरराष्ट्रीय रुझानों का भी महत्वपूर्ण प्रभाव रहता है, जिसके कारण इसमें उतार-चढ़ाव की प्रकृति सोने से कुछ अलग दिखाई देती है।

अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी दोनों कीमती धातुओं का प्रदर्शन मिश्रित रहा। वैश्विक कमोडिटी बाजार में सोने की कीमतों में हल्की कमजोरी दर्ज की गई, जबकि चांदी सीमित बढ़त के साथ कारोबार करती दिखाई दी। इससे यह संकेत मिला कि निवेशक फिलहाल वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों, अमेरिकी मौद्रिक नीति और भू-राजनीतिक घटनाक्रम का आकलन करते हुए सतर्क रणनीति अपना रहे हैं।

मध्यपूर्व में हाल के दिनों में बढ़े सैन्य तनाव ने वैश्विक वित्तीय बाजारों की चिंता बढ़ाई है। विभिन्न अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों के अनुसार, क्षेत्र में सैन्य गतिविधियों के तेज होने और जवाबी कार्रवाइयों के बाद निवेशकों की नजर लगातार घटनाक्रम पर बनी हुई है। ऐसे समय में सामान्यतः सुरक्षित निवेश माने जाने वाले सोने की मांग बढ़ने की संभावना रहती है, लेकिन बाजार में मुनाफावसूली, डॉलर की चाल और निवेशकों की रणनीति जैसे अन्य कारक भी कीमतों को प्रभावित करते हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि कीमती धातुओं की कीमतें केवल भू-राजनीतिक घटनाओं से ही तय नहीं होतीं, बल्कि वैश्विक ब्याज दरों, डॉलर इंडेक्स, केंद्रीय बैंकों की नीतियों और निवेशकों की जोखिम लेने की क्षमता जैसे कई आर्थिक कारकों का भी उन पर सीधा प्रभाव पड़ता है। इसलिए किसी एक घटना के आधार पर कीमतों की दिशा तय करना उचित नहीं माना जाता।

आने वाले कारोबारी सत्रों में निवेशकों की नजर मध्यपूर्व की स्थिति, वैश्विक आर्थिक संकेतकों और अंतरराष्ट्रीय कमोडिटी बाजार के रुख पर बनी रहेगी। यदि क्षेत्रीय तनाव और बढ़ता है या वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों में कोई बड़ा बदलाव आता है, तो इसका असर सोने और चांदी की कीमतों पर भी दिखाई दे सकता है। फिलहाल बाजार में सतर्कता का माहौल बना हुआ है और निवेशक प्रत्येक नए घटनाक्रम का इंतजार कर रहे हैं, जिससे आगे की कीमतों की दिशा स्पष्ट हो सके।

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